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JPSC-JSSC आंदोलन पर पुलिस का शिकंजा, नेताओं समेत 214 से ज्यादा लोगों पर केस

रांची रांची में 21 अगस्त को पुलिस और छात्रों की झड़प के बाद JPSC-JSSC आंदोलन के नेताओं समेत 14 नामजद और 200 से अधिक अज्ञात लोगों पर शनिवार 22 अगस्त को FIR दर्ज की गई है। इससे छात्र आंदोलन फिर से शुरू होने की आशंका है। झारखंड की राजधानी रांची में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच पुलिस ने आंदोलन के नेताओं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। 21 अगस्त को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के मामले में रांची पुलिस ने कम से कम तीन FIR दर्ज की हैं। इन मामलों में 14 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 200 से अधिक अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर सरकारी काम में बाधा डालने, प्रशासन के तय रूट का पालन नहीं करने और पुलिस से भिड़ने के आरोप हैं। JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के प्रमुख नेता नामजद रांची के कोतवाली थाने में दर्ज मामलों में JPSC-JSSC Reforms Manch के नेताओं कुणाल प्रताप सिंह, पीयूष कुमार और रविंद्र पासवान के नाम शामिल हैं। रांची सिटी एसपी पारस राणा के अनुसार, शुक्रवार की झड़प के संबंध में तीन FIR दर्ज की गई हैं। इनमें 14 नामजद आरोपियों के अलावा 200 से ज्यादा अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। यह मंच झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और नियुक्तियों से जुड़े विवाद को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहा है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, तीन में से एक FIR पुलिस की ओर से दर्ज की गई है। इसमें सरकारी काम में बाधा डालने और प्रशासन की ओर से निर्धारित रूट का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए हैं। बाकी दो FIR व्यक्तिगत शिकायतों के आधार पर दर्ज हुई हैं। पुलिस अब प्रदर्शन के दौरान बनाए गए वीडियो फुटेज की भी जांच कर रही है ताकि हिंसा या कथित उपद्रव में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके। नेताओं के पुतले जलाने को लेकर विवाद 21 अगस्त को प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाने का कार्यक्रम आयोजित किया था। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी जिला प्रशासन की ओर से निर्धारित मार्ग का पालन नहीं कर रहे थे, जिसके कारण विवाद बढ़ा। कोतवाली थाना प्रभारी सानोज चौधरी ने भी झड़प की वजह प्रदर्शनकारियों द्वारा निर्धारित रूट का पालन नहीं करना बताया। वहीं, JPSC-JSSC Reforms Manch के नेता कुणाल सिंह ने पुलिस के आरोप से अलग दावा किया है। उनका आरोप है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकर्ताओं ने हिंसा शुरू की। इस मामले में दोनों पक्षों के दावों में स्पष्ट अंतर है और FIR में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। सिर्फ रांची नहीं, चार जिलों में टकराव छात्रों की ओर से आयोजित मुख्यमंत्री और राहुल गांधी के पुतला दहन अभियान को राज्य के कई हिस्सों में विरोध का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, रांची के अलावा हजारीबाग, गिरिडीह और गढ़वा में भी प्रदर्शन के दौरान टकराव हुआ। हजारीबाग में पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा। यानी 21 अगस्त का विवाद केवल रांची तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य के कई जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन और विरोध आमने-सामने आ गए। JPSC-JSSC विवाद क्या है? झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले कई सप्ताह से छात्र आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारी 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग कर रहे हैं। इससे पहले प्रदर्शनकारी CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग भी उठा चुके हैं। छात्र 29 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना दे रहे थे। इस आंदोलन को लेकर सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के दौर भी हुए हैं। 8 अगस्त को सरकार और JPSC-JSSC Reforms Manch के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन छात्र नेताओं ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया था। सरकार ने छात्रों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और जल्द निर्णय लेने का आश्वासन दिया था। हाईकोर्ट के फैसलों के बाद विवाद और बढ़ा इस पूरे विवाद में झारखंड हाईकोर्ट के हालिया आदेश भी महत्वपूर्ण हैं। हाईकोर्ट ने 21 अगस्त को JSSC-CGL के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी। इससे एक दिन पहले अदालत ने 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षाओं से संबंधित नियुक्तियां रद्द करने की अधिसूचनाओं पर भी रोक लगाई थी। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश पर भी रोक लगाई गई। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य सरकार ने लंबे छात्र आंदोलन के बाद भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर कदम उठाए थे, लेकिन हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आंदोलनकारी संगठनों ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। JPSC-JSSC Reforms Manch ने सरकार पर अदालत के सामने कमजोर पक्ष रखने और इसे “कानूनी ड्रामा” बनाने का आरोप लगाया है। हालांकि यह आंदोलनकारियों का आरोप है, सरकार की ओर से इस रिपोर्ट में उस आरोप पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। आंदोलन पर बढ़ता पुलिस दबाव रांची में ताजा FIR ऐसे समय दर्ज हुई हैं जब JPSC-JSSC भर्ती विवाद को लेकर आंदोलन लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव का विषय बना हुआ है। इससे पहले भी विधानसभा मार्च के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था तथा पुलिस ने बल प्रयोग किया था। 11 अगस्त को ABVP के प्रदर्शन के दौरान भी पुलिस से झड़प हुई थी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। अब 21 अगस्त की घटना में 14 नामजद और 200 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने से आंदोलन के अगले चरण को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस कार्रवाई के बीच छात्र संगठन भर

एआई गर्लफ्रेंड और डेटिंग ऐप फ्रॉड के जाल में फंसे लोग, जयपुर साइबर पुलिस ने जारी की चेतावनी

जयपुर भाई, ये AI का जमाना है। इसमें बहुत होशियार रहना पड़ेगा, वरना दिल भी ठग जाएगा और जेब भी। सोचो, डेटिंग ऐप पर कोई प्यारी सी लड़की रोज बात करती है, पसंद पूछती है, धीरे-धीरे दिल की बातें करने लगती है… और तुम सोचते हो कि सामने असली इंसान है। लेकिन असल में वो ClaudeAI का चैटबॉट है। AI कंपनी एंथ्रोपिक की ताजा रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। चीन के ऐप स्टूडियो ने 20 से ज्यादा डेटिंग ऐप्स बनाकर 4700 नकली AI प्रोफाइल चलाए। सिर्फ दो हफ्तों में 25 हजार लोग इनसे बात कर बैठे और 23.6 लाख से ज्यादा मैसेज आए। लोग सोच रहे थे कि सामने कोई असली लड़की है, लेकिन असल में Claude अलग-अलग किरदार बनकर चैट कर रहा था। ये कोई कहानी या मजाक नहीं, एंथ्रोपिक की रिपोर्ट में आई हकीकत है। अब समझ लो, AI के जमाने में प्यार भी फेक हो सकता है। कैसे चल रहा था पूरा सिस्टम? ऐप स्टूडियो ने Claude से ही ऐप्स बनाने में मदद ली और फिर उसे नकली प्रोफाइल्स के पीछे बैठा दिया। यूजर्स को मैच फीड में करीब 75 प्रतिशत AI प्रोफाइल और 25 प्रतिशत असली लोग दिखाए जाते थे। असली gig वर्कर्स सिर्फ वीडियो कॉल या सोशल मीडिया फॉलोबैक के लिए इस्तेमाल होते थे, ताकि शक न हो। Claude को साफ निर्देश था कि वह कभी न बताए कि वह AI है। फोटो या वीडियो कॉल की मांग पर बात घुमा दे। प्रोफाइल फोटो AI इमेज एडिटिंग मॉडल से बनाई जाती थीं। ऐप स्टोर की जांच से बचने के लिए इंटरफेस भी चालाकी से डिजाइन किया गया था। कमाई का तरीका और पकड़ा कैसे गया? यूजर जब मैसेज करता या बात आगे बढ़ाता तो फ्री कोटा खत्म हो जाता। फिर ऐप के कॉइन खरीदने पड़ते थे। जितनी देर AI यूजर को फंसाए रखता, उतनी कमाई। कुछ यूजर्स ने गंभीर बीमारी या खराब मानसिक हालत बताई, फिर भी Claude बात जारी रखता रहा। इन्हीं संदिग्ध बातचीत से एंथ्रोपिक को शक हुआ और सर्विलांस बढ़ा। कंपनी ने जुड़े अकाउंट्स बैन कर दिए और अन्य AI कंपनियों के साथ मिलकर नेटवर्क तोड़ा। डोरा, डोनी, रोमी जैसे तमाम नाम रिपोर्ट में डोरा, डोनी, रोमी, लूमा, जोविया, किरा, ग्रेसचैट, हेवन, नालो और लोविया जैसे ऐप नाम दिए गए हैं। राजस्थान में भी डेटिंग ऐप फ्रॉड के मामले राजस्थान में बिल्कुल ऐसा Claude वाला बड़ा नेटवर्क तो नहीं मिला, लेकिन डेटिंग और मैट्रिमोनियल ऐप्स पर फर्जी प्रोफाइल से ठगी के कई मामले सामने आए हैं। जयपुर साइबर पुलिस ने चेतावनी जारी की है कि ठग आकर्षक तस्वीरों (अब AI से भी बनाई जा रही) वाली फर्जी प्रोफाइल बनाकर भरोसा जीतते हैं, फिर पैसे ऐंठते हैं। रिवर्स इमेज सर्च करें, पैसे कभी न भेजें फरवरी 2026 में राजस्थान पुलिस ने बताया कि कई प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रोफाइल से इमोशनल अटैचमेंट बनाकर क्रिप्टो या निवेश के नाम पर ठगी हो रही है। मई 2026 में करौली से पांच आरोपी गिरफ्तार हुए, जिन्होंने डेटिंग ऐप से वीडियो कॉल रिकॉर्ड कर ब्लैकमेल किया। जयपुर में क्लब आधारित डेटिंग स्कैम भी पकड़ा गया। साइबर एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अनजान प्रोफाइल पर भरोसा न करें, रिवर्स इमेज सर्च करें और पैसे कभी न भेजें।यह मामला साफ दिखाता है कि AI अब सिर्फ मददगार नहीं, ठगी का नया हथियार भी बन गया है। यूजर्स को सतर्क रहना होगा।

बाढ़ का पानी निकलने के बाद सामने आई तबाही की तस्वीर, सैकड़ों एकड़ धान की फसल नष्ट

पालीगंज पुनपुन नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे घटने लगा है। इससे बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों ने राहत की सांस ली है। दहिया पंचायत के रूपापुर, बाला बिगहा, हेल्हा तथा कटका पैगम्बरपुर पंचायत के कौरी गांव से बाढ़ का पानी निकल गया है और सूख गया है। लेकिन पानी उतरने के बाद बर्बादी की जो तस्वीर सामने आई है, उसने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। करीब सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह पुनपुन नदी के उफान पर आने से पालीगंज प्रखंड के नदी किनारे बसे करीब एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था। दहिया और कटका पैगम्बरपुर पंचायत के निचले इलाके सबसे अधिक प्रभावित हुए थे। तीन से चार दिनों तक खेतों में चार से पांच फीट तक पानी भरा रहा। जिससे खेतों में रोपा गया धान पूरी तरह डूब गया और सड़ गया। खेतों में सिर्फ सड़ी हुई फसल और मिट्टी की मोटी परत अब जब पानी सूखा है तो खेतों में सिर्फ सड़ी हुई फसल और मिट्टी की मोटी परत दिख रही है। किसान हाथ पर हाथ धरे खेत के किनारे खड़े हैं। किसानों का कहना है कि इस साल उन्होंने कर्ज लेकर महंगे दर पर धान की रोपनी कराई, पटवन किया और यूरिया, डीएपी खाद डाला। उम्मीद थी कि फसल अच्छी होगी तो कर्ज चुकाकर कुछ बचत होगी। लेकिन बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया। रूपापुर के किसान सुरेश प्रसाद ने बताया कि पांच बीघा में धान लगाया था, सब खत्म हो गया। बाला बिगहा के किसान राजू कुमार ने कहा कि केसीसी से लोन लेकर खेती की थी, अब बैंक का कर्ज कैसे चुकाएंगे। दोबारा रोपनी का समय भी निकल चुका है, इसलिए इस साल खेत खाली रहने की आशंका है। प्रभावित गांवों का दौरा कर पीड़ित किसानों से मुलाकात वहीं किसानों की समस्या को देखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी चन्दन कुमार ने प्रभावित गांवों का दौरा कर पीड़ित किसानों से मुलाकात की थी। उन्होंने किसानों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। एसडीएम ने कृषि विभाग को निर्देश दिया है कि बाढ़ से क्षतिग्रस्त फसलों का जल्द से जल्द सर्वे कर आंकलन रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि प्रभावित किसानों को फसल क्षति मुआवजा और सरकारी सहायता का लाभ मिल सके। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार दहिया और पैगम्बरपुर इलाके में सैकड़ों एकड़ से अधिक धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट तैयार कर जिला कृषि पदाधिकारी को भेजी जाएगी।

बिहार के 15 जिलों में बाढ़ का कहर जारी, सरकार ने डीबीटी के जरिए 579 करोड़ रुपये की सहायता राशि की जारी

 पटना  बिहार में बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए मंगलवार का दिन राहत लेकर आया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ पीड़ित 8 लाख 27 हजार 472 परिवारों को 7-7 हजार रुपये दिए। डीबीटी के माध्यम से अनुग्रह सहायता राशि खाते में भेजी गई। इसके लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने जिलों से अंचलाध‍िकार‍ियों की रिपोर्ट के आधार पर लाभुक परिवारों की विवरणी जुटाई है। मौजूदा आंकड़े के अनुसार, इन परिवारों को कुल 579.23 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। मंगलवार सुबह तक लाभुकों की संख्या बढ़ सकती है। सुबह 11:30 बजे यह राश‍ि भेजी गई। सीएम सम्राट ने राश‍ि हस्‍तांतरण करते हुए कहा क‍ि कोई छूट गया हो तो एक सप्‍ताह के अंदर सबको जोड़ने का प्रयास कर‍िए। हर हालत में उनका नाम जोड़‍िये। कोई भी पीड़‍ित छूटना नहीं चाह‍िए। मौके पर दोनों उपमुख्‍यमंत्री व‍िजय कुमार चौधरी, ब‍िजेंद्र प्रसाद यादव, मुख्‍य सच‍िव प्रत्‍यय अमृत समेत तमाम वरीय अधिकारी उपस्‍थ‍ित थे।   15 जिलों के 49.46 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित इस वर्ष गंगा, गंडक, कोसी, पुनपुन समेत विभिन्न नदियों में आई बाढ़ से राज्य के 15 जिलों के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतें प्रभावित हुई हैं। करीब 49.46 लाख आबादी बाढ़ की चपेट में आई है। प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल शामिल हैं। 1260 सामुदायिक रसोई में मिल रहा भोजन बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य भी जारी है। राज्य के विभिन्न जिलों में अब 1260 सामुदायिक रसोई संचालित हो रही हैं। इनके माध्यम से अब तक करीब 1 करोड़ 19 लाख 33 हजार लोगों को सुबह-शाम भोजन कराया जा चुका है। वहीं, बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए अब 13 राहत शिविर संचालित हैं। इनमें 11,060 लोगों के लिए आवासन, भोजन और चिकित्सा जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हाल में सामुदायिक रसोई की संख्या 1257 से बढ़ाकर 1260 की गई है, जबकि राहत शिविरों की संख्या 15 से घटकर 13 हुई है। पशुओं की सुरक्षा के लिए अब तक 13,121 क्विंटल पशुचारा वितरित किया जा चुका है। कई नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर केंद्रीय जल आयोग और मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर घट रहा है। हालांकि बलतारा और कुरसेला में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, पटना के दीघा घाट, गांधीघाट और हाथीदह, भागलपुर के कहलगांव, मुंगेर, श्रीपालपुर में पुनपुन, बेनीबाद में बागमती तथा दरौली में घाघरा अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।  

एवरेस्ट के बाद एल्ब्रुस और किलिमंजारो पर लहराया तिरंगा, डॉ. आशा का सेवन समिट्स मिशन की ओर कदम

रेवाड़ी  भारत की गौरवशाली बेटी 48 वर्षीय डॉ. आशा रेवाड़ी के पुलिस लाइन में रहती हैं l डॉ. आशा के पति अजय सिंह रेवाड़ी में हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। आशा के दो बच्चे हैं एक बेटी (डॉक्टर)और एक बेटा (इंजीनियर) ने एक बार फिर देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करते हुए एक उल्लेखनीय पर्वतारोहण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने 21 अगस्त 2026 को यूरोप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस का सफल आरोहण किया और इसके बाद अपने अभियान को लगातार जारी रखते हुए 29 अगस्त 2026 को अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी माउंट किलिमंजारो को सफलतापूर्वक फतह किया। दोनों चोटियों को प्रभावी अभियान अवधि के केवल छह दिनों में फतह किया गया, जबकि दोनों समिट डेट के बीच कैलेंडर के अनुसार आठ दिन का अंतर है, जिसमें यात्रा एवं ट्रांजिट समय शामिल है। यह उपलब्धि उनकी असाधारण सहनशक्ति, दृढ़ संकल्प, शारीरिक फिटनेस, मानसिक मजबूती और अनुशासन का प्रमाण है। माउंट एल्ब्रुस यूरोप की सर्वोच्च चोटी पर की फतेह 21 अगस्त 2026 को सुबह 09:07 बजे, डॉ. आशा ने 5,642 मीटर (18,510 फीट) ऊंची माउंट एल्ब्रुस की चोटी पर सफलतापूर्वक पहुंचकर यूरोप की सर्वोच्च चोटी को फतह किया। वह अपने साथ भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर शिखर तक पहुंचीं। इसके साथ ही उन्होंने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और “महिला सशक्तिकरण” के संदेश एवं लोगो भी शिखर तक पहुंचाए। उनका यह आरोहण केवल पर्वतारोहण की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय भावना और महिलाओं की शिक्षा, सशक्तिकरण एवं प्रगति का संदेश दुनिया की ऊंची चोटियों तक पहुंचाने का प्रतीक भी बना। माउंट किलिमंजारो को भी किया फतेह माउंट एल्ब्रुस की सफल चढ़ाई के बाद डॉ. आशा ने अपने महत्वाकांक्षी अभियान को जारी रखा और तंजानिया स्थित माउंट किलिमंजारो की ओर प्रस्थान किया। 29 अगस्त 2026 को सुबह 05:31 बजे, उन्होंने 5,895 मीटर (19,341 फीट) ऊंची उहुरू पीक पर सफलतापूर्वक पहुंचकर अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी को फतह किया। इस प्रकार डॉ. आशा ने यूरोप और अफ्रीका की सर्वोच्च चोटियों को लगातार एक ही अभियान-यात्रा में सफलतापूर्वक फतह किया। जिसमें अंतरराष्ट्रीय यात्रा और अभियान संबंधी व्यवस्थाएं शामिल थीं, जबकि प्रभावी अभियान अवधि छह दिन रही।माउंट एल्ब्रुस और माउंट किलिमंजारो की लगातार सफल चढ़ाई उनकी असाधारण सहनशक्ति, दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन, शारीरिक क्षमता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है। माउंट एवरेस्ट से यूरोप और अफ्रीका की चोटियों तक डॉ. आशा ने वर्ष 2017 में 39 वर्ष की आयु में अपने पहले ही प्रयास में चीन/तिब्बत की ओर से माउंट एवरेस्ट का सफल आरोहण किया था। उन्होंने भारत और विश्व की पहली नर्सिंग ऑफिसर के रूप में माउंट एवरेस्ट फतह करने की पहचान का दावा किया है और उनकी इस उपलब्धि से जुड़े रिकॉर्ड दावे भी किए गए हैं। एक सरकारी नर्सिंग ऑफिसर के रूप में मरीजों की सेवा करने से लेकर माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने और उसके बाद माउंट एल्ब्रुस तथा माउंट किलिमंजारो को फतह करने तक की उनकी यात्रा जनसेवा, साहस, अनुशासन और पर्वतारोहण उत्कृष्टता का अद्भुत उदाहरण है। 27 वर्षों की सरकारी सेवा डॉ. आशा पिछले 27 वर्षों से राजस्थान सरकार में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के साथ-साथ उन्होंने पर्वतारोहण और साहसिक अभियानों के अपने जुनून को भी निरंतर आगे बढ़ाया। उनकी यात्रा यह शक्तिशाली संदेश देती है कि अनुशासन, समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ अपने सपनों को भी पूरा किया जा सकता है। सेवन समिट्स मिशन 2026–27 की ओर माउंट एवरेस्ट, माउंट एल्ब्रुस और माउंट किलिमंजारो को सफलतापूर्वक फतह करने के बाद डॉ. आशा अब अपने महत्वाकांक्षी “सेवन समिट्स मिशन 2026–27” की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।उनका अंतिम लक्ष्य सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर सफलतापूर्वक पहुंचना और एक भारतीय महिला पर्वतारोही एवं स्वास्थ्य सेवा कर्मी के रूप में एक प्रेरणादायक अंतरराष्ट्रीय उदाहरण स्थापित करना है। एयर पिस्टल शूटिंग में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन पर्वतारोहण के साथ-साथ डॉ. आशा एक उत्कृष्ट एयर पिस्टल शूटर भी हैं। वह 10 मीटर, 25 मीटर और 50 मीटर की स्पर्धाओं में भाग लेती हैं।वर्ष 2025 में उन्होंने मास्टर्स महिला वर्ग में 4 स्वर्ण और 3 कांस्य पदक जीते। यह उपलब्धि उनकी फिटनेस, एकाग्रता, सटीकता, अनुशासन और प्रतिस्पर्धात्मक उत्कृष्टता को दर्शाती है। शिखर से भी आगे — एक प्रेरणादायक संदेश डॉ. आशा की यात्रा राजस्थान के एक छोटे से गांव से शुरू होकर दुनिया की सर्वोच्च चोटियों तक पहुंची है। यह केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारत की महिलाओं और युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है कि साहस, दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर प्रयास से बड़े से बड़ा सपना भी साकार किया जा सकता है। भारतीय तिरंगा, महिला सशक्तिकरण तथा “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का संदेश पर्वतों की चोटियों तक पहुंचाकर डॉ. आशा ने पर्वतारोहण को समाज में जागरूकता और प्रेरणा का माध्यम बनाया है।    

कोलकाता लॉ कॉलेज में इस्तीफे पर नया मोड़, वाइस प्रिंसिपल मोहम्मदी तरन्नुम ने मारी पलटी

नई दिल्ली लॉ कॉलेज की वाइस-प्रिंसिपल मोहम्मदी तरन्नुम अटेंडेंस से जुड़े विवाद के बाद सुर्खियों में आ गईं. मामले को लेकर कॉलेज में छात्रों का विरोध प्रदर्शन हुआ और उनके इस्तीफे की मांग भी जोर पकड़ने लगी. इस दौरान ABVP के कार्यकर्ताओं ने उनके ऑफिस को गंगाजल से शुद्ध किया है. लेकिन यह घटना तब और पेचीदा हो गई जब मोहम्मदी तरन्नुम ने अपने इस्तीफे को लेकर बयान दिया. उन्होंने अपने इस्तीफे का फैसले को बदल दिया था. बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वह कॉलेज में अपनी सेवाएं जारी रखेंगी. राज्य के शिक्षा मंत्री ने भी साफ कर दिया है कि उन्हें मोहम्मदी तरन्नुम का इस्तीफा नहीं मिला है।  कौन हैं मोहम्मदी तरन्नुम?  सुरेंद्रनाथ लॉ कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल डॉ. मोहम्मदी तरन्नुम इन दिनों कॉलेज में हुए विवाद को लेकर चर्चा में हैं. लेकिन उनकी शैक्षणिक योग्यता भी लोगों के बीच सुर्खियों में रहता है. उन्होंने कानून की उच्च शिक्षा हासिल की है. सुरेंद्रनाथ लॉ कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध उनके प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने LL.B., LL.M. और Ph.D. (Law) की पढ़ाई की है।  छात्रों का बढ़ा विवाद  इसके बाद कॉलेज परिसर में छात्रों प्रदर्शन तेज हो गया. उनपर आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे कुछ छात्रों ने वाइस-प्रिंसिपल को घंटों उनके कार्यालय में ही रहने के लिए मजबूर किया. इस दौरान कॉलेज में बिजली और पानी की सेवाएं प्रभावित होने की भी बात सामने आई. आरोप यह भी है कि छात्रों ने उन पर इस्तीफे के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया, जिसके बाद उनके इस्तीफे की खबर सामने आई।  कमरे का शुद्धिकरण  घंटों चले घेराव के बाद जब वाइस-प्रिंसिपल के इस्तीफे की खबर सामने आई, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्रों ने इसे अपनी बड़ी जीत के तौर पर पेश किया. इसके बाद छात्रों ने वाइस-प्रिंसिपल के कार्यालय में गंगाजल से शुद्ध किया।  मैंने इस्तीफा नहीं दिया… हालांकि, पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब कॉलेज से निकलते वक्त वाइस-प्रिंसिपल मोहम्मदी तरन्नुम ने इस्तीफे को लेकर अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से पद नहीं छोड़ा है बल्कि उनपर दबाव बनाया गया है. अब इस मामले में उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने भी बयान दिया है. उन्होंने कहा कि उन्हें तरन्नुम का इस्तीफा नहीं मिला है। 

फर्जी पासपोर्ट मामले में सात राज्यों तक पहुंची MP STF की जांच, ग्वालियर-भोपाल के संदिग्ध रडार पर

ग्वालियर जाली दस्तावेजों के सहारे भारतीय पासपोर्ट हासिल करने वाले बांग्लादेशी नागरिकों और इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह के मददगारों के खिलाफ मध्य प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने सात राज्यों में डेरा डाल दिया है। इस फर्जीवाड़े का केंद्र बने ग्वालियर और भोपाल के कई संदिग्धों को चिह्नित कर लिया गया है, जिनकी गिरफ्तारी के लिए ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही है। यह जाली दस्तावेज बनाने वाले चेहरे हैं, जिनके जरिये बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बने। एसटीएफ ने भेजी टीमें एसटीएफ अधिकारियों ने महाराष्ट्र, दिल्ली, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, असम और पश्चिम बंगाल में अपनी टीमें भेजी हैं। प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बने पासपोर्ट का इस्तेमाल कर बांग्लादेशी नागरिक इन राज्यों के विभिन्न शहरों में अपनी पहचान छिपाकर रह रहे हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार, जाली आधार कार्ड, मतदाता परिचय पत्र और अन्य स्थानीय प्रमाण पत्र तैयार करने वाले गिरोह में भोपाल के कुछ शातिर जालसाज शामिल हैं। एसटीएफ ने भोपाल के इस नेटवर्क के कुछ संदिग्धों की पहचान कर ली है। गिरोह के सदस्य मोटी रकम लेकर अवैध रूप से भारत में घुसे बांग्लादेशियों के फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार करवाते थे, जिसके आधार पर पासपोर्ट जारी हो जाते थे। जल्द होगा बड़ा राजफाश एसटीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न राज्यों में भेजी गई टीमों से महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। संदिग्धों की धरपकड़ के साथ ही पासपोर्ट बनवाने की पूरी प्रक्रिया में शामिल बिचौलियों को बेनकाब किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि आने वाले कुछ दिनों में इस पूरे मामले का एक बड़ा खुलासा किया जाएगा।  

बड़ा तालाब-कलियासोत के आसपास अतिक्रमण का मामला, 5 दिन के सर्वे में मिले फार्म हाउस-रेस्टोरेंट; NGT में सुनवाई आज

भोपाल  भोपाल की लाइफ लाइन बड़ा तालाब और कलियासोत डैम की 'हद' की रिपोर्ट मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (NGT) में पेश की जाएगी। एनजीटी के आदेश पर विशेष टीम ने 5 दिन तक सर्वे किया था।इस दौरान ड्रोन भी उड़ाया। सर्वे में बैरसिया विधायक विष्णु खत्री के फार्म हाउस समेत कई रेस्टोरेंट और कब्जे तालाब-डैम की सीमा में मिले। सुनवाई में एनजीटी कार्रवाई के संबंध में आदेश जारी कर सकता है। बता दें कि 4 सितंबर को भोपाल के भदभदा डैम के गेट खोलने पर सवाल उठे थे। बड़ा तालाब के एफटीएल (फुल टैंक लेवल) पर अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति पता करने के लिए एनजीटी ने पानी 1666.80 फीट पर बनाए रखने और गेट नहीं खोलने को कहा था, लेकिन तालाब में जब 0.10 फीट पानी कम था, तब ही डैम का गेट खोल दिया गया था। अगले दिन से ही सर्वे शुरू किया अगले दिन 5 सितंबर से ही एनजीटी की टीम ने सर्वे शुरू किया था। पहले दिन भदभदा डैम, सैर सपाटा समेत कई जगहों पर टीमें पहुंची। 9 सितंबर तक सर्वे कार्य जारी रहा। सर्वे में क्या-क्या मिला था?     बैरसिया विधायक खत्री के फार्म हाउस तक पहुंचने के लिए तालाब के वेटलैंड क्षेत्र के अंदर सड़क का निर्माण देखने को मिला। यह सड़क तालाब के एफटीएल क्षेत्र में स्थित दो मुनारों के बीच से होकर फार्म हाउस तक जाती हुई पाई गई।     राकेश शर्मा नामक व्यक्ति द्वारा तालाब क्षेत्र के अंदर मकान बनाए जाने की भी जानकारी सर्वे टीम को मिली।     सीआई ऑटोमोबाइल का यार्ड भी एफटीएल क्षेत्र से लगा हुआ पाया गया। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जुड़े एक कर्मचारी द्वारा तालाब के नजदीक कब्जा कर रेस्टोरेंट निर्माण किए जाने की भी जानकारी सर्वे के दौरान सामने आई।     कई स्थानों पर मुनार से पानी की सीमा लगभग 5 से 10 फीट आगे तक पहुंची हुई पाई गई।     कई जगह रिटेनिंग वॉल के ऊपर से पानी बहता हुआ पाया गया। करबला पंप हाउस के सामने, श्रीन नदी के आसपास और अन्य स्थानों पर तालाब में जलकुंभी एवं् पानी में उगने वाली घास का फैलाव भी दिखाई दिया।     खानूगांव क्षेत्र में कई स्थानों पर FTL एवं ग्रीन बेल्ट के मुनारे मौके पर दिखाई नहीं दिए।     हलालपुरा के फिजा फार्म क्षेत्र में पक्का पुल बना हुआ पाया गया और उसके आगे तक पानी फैला हुआ था। वहीं, लैंडमार्क मैरिज गार्डन के पीछे सड़क के आसपास लगभग 6 फीट तक का भराव दिखाई दिया।     वार्ड क्रमांक 26, ग्राम खुदागंज के कई स्थानों पर जलस्तर FTL सीमा से काफी आगे तक पहुंचा हुआ दिखाई दिया। सर्वे के दौरान दर्जनों रेस्टोरेंट और अन्य निर्माण पानी की सीमा से बिल्कुल सटे हुए पाए गए।     कलियासोत तालाब के जलभराव क्षेत्र के अंदर से ही सड़क का निर्माण मिला।     प्रभावशाली लोगों से जुड़े बड़े रेस्टोरेंट और व्यावसायिक निर्माण तालाब की सीमा के भीतर या बेहद करीब पाए गए। कई स्थानों पर प्लॉटिंग के लिए मुनारें गाड़कर पानी के प्राकृतिक बहाव और जलभराव के रास्ते को बाधित करने की बात भी सामने आई है। सुनवाई में केरवा डैम को लेकर फैसले की संभावना टीम को केरवा डैम के आसपास भी सर्वे करना था, लेकिन डैम के FTL पर वर्तमान में पानी उपलब्ध नहीं है। जिसके कारण इस क्षेत्र में ग्राउंड ट्रुथिंग और सर्वे की प्रक्रिया नहीं हुई। टीम सदस्यों के बीच चर्चा और विचार-विमर्श के बाद सभी पक्षों में यह सहमति बनी कि केरवा की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट किए बिना आगे की कार्रवाई में कोई जल्दबाजी न की जाए। मंगलवार को होने वाली सुनवाई के बाद केरवा क्षेत्र में आगे की ग्राउंड ट्रुथिंग और जांच की प्रक्रिया तय की जाएगी। टीम ने यहां किया सर्वे खानूगांन के अंडर कंस्ट्रक्शन क्रूज साइट, आर्मी स्पोर्ट्स एरिया, कोहेफिजा, हलालपुरा के फिजा फार्म, लैंडमार्क मैरिज गार्डन के पीछे, चिरायु अस्पताल क्षेत्र, भौंरी, कोलूखेड़ी, खजूरी सड़क, बैरागढ़ सहित कई क्षेत्रों में मौके पर पहुंचकर ग्राउंड ट्रुथिंग की गई। टीम में ये रहे शामिल ग्राउंड ट्रुथिंग के दौरान सीपीसीबी, एमपीपीसीबी के अधिकारी, पटवारी और याचिकाकर्ता राशिद नूर खान के साथ एनजीटी द्वारा नियुक्त विशेष सदस्य डॉ. सुभाष सी. पांडेय भी मौजूद रहे।

पंजाब में कांग्रेस का बड़ा विरोध प्रदर्शन, सचिन पायलट की मौजूदगी में सरकार को घेरने की तैयारी

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट मंगलवार को पहली बार पंजाब पहुंच रहे हैं और उनके आगमन के साथ ही कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी की है। पंजाब कांग्रेस भवन सेक्टर-15 से वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के आवास की ओर प्रस्तावित मार्च को देखते हुए चंडीगढ़ में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रदर्शन में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। पुलिस ने प्रदर्शन स्थल और मार्च के संभावित मार्ग पर चार से पांच स्तर की सुरक्षा व्यवस्था की है। पंजाब कांग्रेस भवन से करीब एक किलोमीटर पहले ही भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद सुरक्षा व्यवस्था में चंडीगढ़ पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां भी लगाई गई हैं। प्रशासन की ओर से किसी भी स्थिति से निपटने के लिए वाटर कैनन समेत अन्य इंतजाम भी किए गए हैं। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के पहुंचने के कारण सेक्टर-15 और आसपास के इलाकों में यातायात प्रभावित होना शुरू हो गया है। करीब 11:30 बजे सचिन पायलट के पंजाब कांग्रेस भवन पहुंचने की उम्मीद है। उनके साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रताप सिंह बाजवा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के प्रदर्शन में शामिल होने की संभावना है। कांग्रेस गुलजार सिंह मामले में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने, उनकी गिरफ्तारी और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर यह प्रदर्शन कर रही है। पार्टी इसे कानून-व्यवस्था और सरकार के खिलाफ अपने अभियान को तेज करने के तौर पर भी देख रही है। 8 सितंबर को भी हुआ था प्रदर्शन इससे पहले आठ सितंबर को भी कांग्रेस ने चंडीगढ़ में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उस दौरान राजा वड़िंग समेत 150 से अधिक कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। हालांकि, मंगलवार का प्रदर्शन राजनीतिक रूप से ज्यादा अहम माना जा रहा है, क्योंकि नए प्रभारी सचिन पायलट की मौजूदगी में पंजाब कांग्रेस के लगभग सभी बड़े नेताओं के एक मंच पर आने की संभावना है। यह प्रदर्शन आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन भी माना जा रहा है। इससे पार्टी के भीतर नेताओं की सक्रियता, गुटों की ताकत और चुनावी रणनीति की दिशा का संकेत मिलने की उम्मीद है।  

मध्य प्रदेश में कमजोर पड़ा मानसून, ज्यादातर इलाकों में मौसम साफ; जबलपुर-दमोह समेत कई जिलों में बौछारें

भोपाल प्रदेश में वेदर सिस्टम कमजोर पड़ने के साथ मानसूनी वर्षा का दौर धीमा पड़ गया है। सोमवार को प्रदेश के अधिकांश इलाकों में मौसम साफ रहा। मौसम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले 24 घंटों के दौरान मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे तक श्योपुर में 21 और शिवपुरी में 18 मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं नर्मदापुरम में 13.1, खरगोन में 10.8, इंदौर में 7.2 और राजगढ़ में 7 मिमी पानी गिरा। राजधानी भोपाल सहित बाकी जिलों में हल्की बूंदाबांदी के बाद धूप खिल गई। यहां पड़ सकती हैं बौछारें मौसम विभाग के मुताबिक मंगलवार को दमोह, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, पन्ना, कटनी सागर, नर्मदापुरम व जबलपुर जैसे जिलों में मामूली बारिश हो सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं, लेकिन विदाई से पहले प्रदेश में वर्षा का एक और दौर देखने को मिलेगा। ये वेदर सिस्टम सक्रिय वर्तमान में राजस्थान-गुजरात सीमा पर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके साथ ही मुख्य मानसून ट्रफ राजगढ़ व दमोह से और अरब सागर से झारखंड तक फैली दूसरी ट्रफ लाइन भी प्रदेश के ऊपर से गुजर रही है। इन सक्रिय वेदर सिस्टम के चलते अगले 48 से 72 घंटों के दौरान भोपाल, सीहोर, राजगढ़, उज्जैन और चंबल-ग्वालियर संभाग सहित राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा और गरज-चमक की स्थिति बनी रहने का अनुमान है। मानसूनी सीजन को अब 15 दिन बाकी बचे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में 88% बारिश ही हुई है। इंदौर, उज्जैन-जबलपुर समेत 37 जिलों में कोटा फुल नहीं हुआ है।भोपाल, ग्वालियर सहित 18 जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो गया। आलीराजपुर में तो कोटे की आधी बारिश भी नहीं हुई, जबकि निवाड़ी में 49% पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश में बारिश का सिस्टम आज से और कमजोर हो गया है। IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के मुताबिक अगले 4 दिन तक प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अनुमान नहीं है। बता दें कि प्रदेश के पश्चिमी हिस्से यानी- भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में पिछले चार दिन से भारी बारिश का दौर चल रहा था। सोमवार को भी कुछ जिलों में तेज बारिश रिकॉर्ड की गई, लेकिन मंगलवार से सिस्टम कमजोर हो जाएगा। इस वजह से 15 से 17 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रहेगा। पूर्वी हिस्से में रिकॉर्ड बारिश, लेकिन पश्चिम पिछड़ा मौसम विभाग के अनुसार, इस बार प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में रिकॉर्ड बारिश हुई। सागर के निवाड़ी में कोटे से 49%, मऊगंज में 44%, सतना में 34%, मैहर में 29% पानी ज्यादा गिर गया। यदि इंच के हिसाब से बात करें तो मऊगंज में सबसे ज्यादा 54.9 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। सतना में 50 इंच से ज्यादा पानी गिरा। दूसरी ओर, इंदौर संभाग के आलीराजपुर में सिर्फ 16 इंच पानी ही गिरा है। आज से और कमजोर होगा सिस्टम मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया, 15 सितंबर से प्रदेश में बारिश की तीव्रता और प्रसार में धीरे-धीरे कमी आने का पूर्वानुमान है। सात दिन के पूर्वानुमान में पश्चिमी मध्य प्रदेश में कभी तेज तो कभी हल्की बारिश होने की संभावना है। अब तक 32.8 इंच बारिश, 23 जिलों में ज्यादा IMD (मौसम केंद्र) की माने तो प्रदेश में अब तक 834.4 मिमी यानी, 32.8 इंच बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 34.9 इंच (886.6 मिमी) की तुलना में 2.1 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 6 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 1% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 11% बारिश कम हुई है।