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झरिया से आगे निकला खतरा: कतरास और निरसा में भी विकराल होती भू-धंसान की समस्या, दशकों पुराने खनन की विरासत ने बढ़ाई धनबाद की मुश्किलें

धनबाद धनबाद कोयलांचल में भू-धंसान अब छिटपुट घटनाओं की कहानी नहीं रह गयी है. बंद खदानों, भूमिगत खाली जगहों, कमजोर पिलरों, पुराने गोफ और भूमिगत आग की दशकों पुरानी विरासत का असर अब आबादी के बीच दिखाई दे रहा है. 13 सितंबर को बंद रामकनाली प्रोजेक्ट में अवैध खनन के दौरान खदान धंसने से तीन लोगों की मौत हुई. इससे पहले आठ सितंबर को सिजुआ की तीनपटिया बस्ती में जमीन धंसने से एक बच्चे की मौत हो गयी और कई लोग मलबे में दबकर घायल हुए. जुलाई-अगस्त में छाताबाद में मकानों के आसपास जमीन धंसने की घटनाएं सामने आयीं. केंदुआडीह में गैस रिसाव ने भी खतरे का संकेत दिया. आबादी के बीच बढ़ता भू-धंसान का खतरा इन घटनाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर धनबाद में अगली बार जमीन कहां धंसेगी और खतरे वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को बचाने की तैयारी कितनी है. 100 वर्ग किमी से अधिक इलाका संवेदनशील होने का अनुमानधनबाद कोयलांचल में 100 वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र को किसी न किसी स्तर पर भू-धंसान की संवेदनशीलता से जोड़कर देखा जा रहा है. क्षेत्रवार अनुमान के अनुसार धनबाद शहर से सटे इलाकों में करीब 10 वर्ग किमी, झरिया में 25 वर्ग किमी, कतरास में 40 वर्ग किमी और निरसा में करीब 40 वर्ग किमी क्षेत्र संवेदनशील माना जा रहा है.हालांकि ये क्षेत्रवार अनुमान हैं. इन्हें सरकारी रूप से चिह्नित प्रभावित क्षेत्र का अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता.धनबाद नगर निगम का क्षेत्रफल करीब 355.77 वर्ग किमी बताया जाता है. शहर से सटे हिस्से, झरिया और कतरास के उपलब्ध अनुमानों को जोड़ने पर करीब 75 वर्ग किमी क्षेत्र भू-धंसान की संवेदनशीलता से जुड़ता है. यह नगर निगम के कुल क्षेत्रफल का करीब 21 फीसदी बैठता है. वहीं निरसा का अनुमानित संवेदनशील क्षेत्र अलग है. 2.3 से 2.75 लाख लोग संभावित खतरे की जद में सबसे बड़ी चिंता यह है कि संवेदनशील जमीन के ऊपर सिर्फ खाली क्षेत्र नहीं हैं. यहां घर, सड़क, स्कूल, बाजार और पूरी बस्तियां बसी हुई हैं. अनुमानों के मुताबिक धनबाद शहर से सटे संवेदनशील इलाकों में 10 से 15 हजार, झरिया में 50 से 60 हजार, कतरास में 70 हजार से एक लाख और निरसा में करीब एक लाख की आबादी संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में रह रही है. खनन क्षेत्र में जमीन की बदली तस्वीर क्षेत्रवार अनुमानों को जोड़ने पर करीब 2.3 से 2.75 लाख लोगों के संभावित रूप से भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों में रहने का अनुमान सामने आता है. यह आंकड़ा भी अनुमान आधारित है, इसलिए इसे प्रभावित आबादी का अंतिम सरकारी आंकड़ा नहीं माना जा सकता. खतरा सिर्फ झरिया तक सीमित नहींधनबाद में भू-धंसान की चर्चा अक्सर झरिया और भूमिगत आग से जोड़कर की जाती है, लेकिन हाल की घटनाओं ने तस्वीर बदल दी है. कतरास और निरसा में भी संवेदनशील क्षेत्र का दायरा बड़ा बताया जा रहा है.टंडाबाड़ी, छाताबाद और सिजुआ की हालिया घटनाओं ने दिखाया है कि खतरा आबादी के बीच अचानक सामने आ सकता है. ऐसे में सिर्फ पुराने चिन्हित इलाकों पर नजर रखना पर्याप्त नहीं होगा. दशकों पुराने खनन की विरासत धनबाद की जमीन के नीचे खनन का इतिहास काफी पुराना है. राष्ट्रीयकरण से पहले हुए अवैज्ञानिक खनन, भूमिगत खाली जगहों और पुराने खनन क्षेत्रों में समय के साथ होने वाले बदलाव का असर आज भी जमीन की स्थिरता पर पड़ रहा है. भूमिगत खनन के बाद छोड़ी गयी खाली जगहें और कमजोर पिलर समय के साथ प्रभावित हो सकते हैं. कई इलाकों में पुराने गोफ और भूमिगत आग इस जोखिम को और बढ़ाते हैं. वहीं कमजोर हिस्सों में अवैध और अनियंत्रित कोयला खनन जमीन की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है. 2023 से लगातार सामने आ रही भू-धंसान की घटनाएं भू-धंसान की घटनाएं पिछले कुछ वर्षों में लगातार सामने आती रही हैं. जनवरी 2023 में गड़ेरिया, ईस्ट बसुरिया में जमीन धंसने से दहशत फैल गयी थी. सितंबर में गोंदूडीह कोलियरी में तीन महिलाएं गोफ में समा गयी थीं. इसी वर्ष कापासारा में अवैध खनन के दौरान खदान धंसने से दो लोगों की मौत हुई. मकानों के आसपास दिखते खतरे के निशान 2024 में लकड़का नंबर-9 और बांसजोड़ा में जमीन धंसने की घटनाएं सामने आयीं. 2025 में जोगता, केशलपुर और बांसजोड़ा में जमीन में दरार और धंसान ने चिंता बढ़ायी. सितंबर 2025 में रामकनाली में ओबी डंप धंसने से सर्विस वैन खाई में गिर गयी थी, जिसमें सात लोगों की मौत हुई. इसके बाद 31 मार्च 2026 को टंडाबाड़ी में मकान के नीचे जमीन धंसने से तीन लोगों की जान चली गयी. उसी इलाके में बाद में भी दरार और धंसान की घटनाएं सामने आयीं. जुलाई-अगस्त में छाताबाद में कई मकान प्रभावित हुए. आठ सितंबर को सिजुआ की तीनपटिया बस्ती में भू-धंसान में एक बच्चे की मौत हो गयी. 13 सितंबर को रामकनाली में बंद प्रोजेक्ट में अवैध खनन के दौरान खदान धंसने से तीन लोगों की मौत ने एक बार फिर खतरे की गंभीरता सामने ला दी. मार्च के बाद 17 घटनाएं, 11 अकेले कतरास में उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस साल मार्च के बाद धनबाद में भू-धंसान की 17 घटनाएं सामने आ चुकी हैं. इनमें 11 घटनाएं अकेले कतरास कोयलांचल में बतायी जा रही हैं. टंडाबाड़ी, छाताबाद और सिजुआ की घटनाओं ने साफ कर दिया है कि भू-धंसान का खतरा अब सिर्फ पुराने चर्चित क्षेत्रों तक सीमित नहीं है. आबादी वाले नये इलाकों में भी जमीन की स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं. खतरे के बीच कई परिवार खुद कर रहे पलायन भू-धंसान और आग से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर बसाना स्थायी समाधान माना जाता है. बेलगड़िया और करमाटांड़ में झरिया पुनर्वास योजना के तहत परिवारों को बसाने की प्रक्रिया चल रही है. दूसरी ओर खतरे के बीच झरिया के कई परिवार खुद भी सुरक्षित इलाकों की ओर जा रहे हैं. गोविंदपुर तथा धनबाद से सटे वनस्थली कॉलोनी, कोलाकुसमा और सीएमपीएफ को-ऑपरेटिव कॉलोनी जैसे गैर-कोयला बीयरिंग क्षेत्रों में लोग जमीन और मकान लेकर बस रहे हैं. भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र में जमीन और मकानों की फोटो इससे संवेदनशील क्षेत्रों में आबादी का दबाव कम हो सकता है, लेकिन बिना समुचित योजना नयी बस्तियों के विस्तार से सड़क, पानी, सीवरेज और शहरी नियोजन की चुनौती बढ़ सकती है. … Read more

जाजमऊ पुल मरम्मत के चलते तीन माह तक बदले रूट से चलेंगी लखनऊ-कानपुर बसें

लखनऊ राजधानी से कानपुर का बस से सफर महंगा हो सकता है। वजह जाजमऊ पुल की मरम्मत के चलते तीन माह तक परिवहन निगम की बसों का रूट बदला रहेगा नए रूट के मुताबिक आलमबाग से रवाना होने वाली रोडवेज बसें उन्नाव के आगे गदन खेड़ा, उन्नाव शहर से लालगंज, फतेहपुर होकर कानपुर पहुंचेंगी। नए रूट से बसों की दूरी 50 किलोमीटर बढ़ने की संभावना है। रोडवेज प्रशासन बदले रूट का सर्वे कराएगा। इसमें जितने किलोमीटर ज्यादा बस संचालन होगा, उसी आधार पर बस का किराया बढ़ेगा। 50 किलोमीटर की दूरी अधिक होती है तो 60 रुपये किराया ज्यादा पड़ सकता है। फिलहाल अभी किराया ज्यों का त्यों है। कानपुर के जाजमऊ गंगा पुल की मरम्मत कार्य 13 सितंबर से 13 दिसंबर तक भारी वाहनों के साथ रोडवेज बसों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। रोडवेज बसें बदले रूट से आवागमन करेंगी, इससे बसों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। बदले रूट से दूरी करीब 140 किमी होगी लखनऊ से कानपुर जाने वाली बसें गदन खेड़ा चौराहा से रायबरेली रोड से बक्सर पुल के रास्ते फतेहपुर होकर कानपुर की ओर जा सकेंगी। क्षेत्रीय प्रबंधक विमल राजन ने बताया, आलमबाग से कानपुर जाने वाली बसों के रूट तीन माह तक बदले रहेंगे। इस दौरान बसों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। डायवर्जन रूट पर जल्द सर्वे कराकर बसों के किराये पर असर पड़ेगा। लखनऊ और कानपुर बस डिपो की 80 से ज्यादा साधारण और ई बसों का संचालन हो रहा है। इन बसों से रोजाना 15 से 20 हजार यात्री सफर करते हैं। गंगा पुल की मरम्मत का कार्य तीन माह तक चलेगा। इस दौरान यात्रियों को लंबी दूरी तय करके जेब हल्की करनी पड़ेगी। वर्तमान में लखनऊ से कानपुर की दूरी 90 किलोमीटर है। बदले रूट पर दूरी करीब 140 किमी. होगी।

दिल्ली एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन में चूक से हड़कंप, 3 इटैलियन यात्री बिना जांच देश से निकले; गृह मंत्रालय ने बुलाई बैठक

 नई दिल्ली दिल्ली एयरपोर्ट पर इंटरनेशनल पैसेंजर्स की आवाजाही से जुड़ी एक गंभीर चूक सामने आई है, जिसने सुरक्षा और इमिग्रेशन व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामला तीन विदेशी यात्रियों से जुड़ा है, जो दिल्ली पहुंचने के बाद तय प्रक्रिया पूरी किए बिना ही अपनी अगली इंटरनेशनल फ्लाइट तक पहुंच गए. अब इस मामले में मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन ने एअर इंडिया से जवाब तलब किया है. एयरलाइन को बताना होगा कि आखिर यह चूक कैसे हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।  यह मामला 4 सितंबर का है. तीन इटैलियन पैसेंजर एअर इंडिया की फ्लाइट से अमृतसर से दिल्ली पहुंचे थे. इसके बाद उन्हें लुफ्थांसा की दिल्ली से म्यूनिख जाने वाली फ्लाइट पकड़नी थी. नियम के मुताबिक दिल्ली पहुंचने के बाद इन यात्रियों को अराइवल इमिग्रेशन एरिया में जाकर निर्धारित इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी थी. लेकिन सूत्रों के मुताबिक ऐसा नहीं हुआ. यात्रियों को इंटरनेशनल ट्रांसफर एरिया की ओर ले जाया गया और वहीं से वे लुफ्थांसा की फ्लाइट में सवार हो गए।  एअर इंडिया को शो कॉज नोटिस मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने एअर इंडिया के सीईओ तेवोल्डे गेब्रेमारियम (Tewolde Gebremariam) को शो कॉज नोटिस जारी किया है. एयरलाइन से 9 बिंदुओं पर लिखित जवाब मांगा गया है. मिनिस्ट्री ने एअर इंडिया को जवाब देने के लिए 7 दिन का समय दिया है. एयरलाइन को 19 सितंबर तक यह बताना होगा कि उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए. सिविल एविएशन​ मिनिस्ट्री ने अपने नोटिस में यात्रियों को संभालने और उन्हें एस्कॉर्ट करने वाले एअर इंडिया और SATS के कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।  सबसे अहम सवाल यह है कि तीनों यात्रियों को इंटरनेशनल-टू-इंटरनेशनल ट्रांसफर रूट से क्यों ले जाया गया, जबकि उन्हें दिल्ली के अराइवल इमिग्रेशन एरिया से होकर निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी थी. यानी जांच का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर केंद्रित है कि यात्रियों को किस प्रक्रिया के तहत और किसकी निगरानी में ट्रांसफर एरिया तक पहुंचाया गया. मिनिस्ट्री ने लुफ्थांसा की दिल्ली-म्यूनिख फ्लाइट का ऑनवर्ड बोर्डिंग पास अमृतसर में जारी किए जाने पर भी सवाल उठाया है. नोटिस के मुताबिक हब-एंड-स्पोक मॉडल के तहत स्पोक एयरपोर्ट पर इस तरह का बोर्डिंग पास जारी करने की अनुमति नहीं होती. मिनिस्ट्री ने एअर इंडिया के नोडल अधिकारी और पूरे सुपरवाइजरी मैकेनिज्म से भी जवाब मांगा है. एअर इंडिया ने फिलहाल इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।  क्या है हब-एंड-स्पोक सिस्टम? एअर इंडिया कुछ रूट्स पर हब-एंड-स्पोक मॉडल के तहत काम करती है. अमृतसर से जुड़ी कुछ उड़ानें भी इस व्यवस्था का हिस्सा हैं. आसान भाषा में समझें तो इस व्यवस्था में विदेश जाने वाले यात्री स्पोक एयरपोर्ट पर ही इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. इसके बाद हब एयरपोर्ट पहुंचने पर उन्हें मुख्य रूप से सिक्योरिटी चेक के बाद अपनी इंटरनेशनल फ्लाइट पकड़नी होती है. लेकिन इस मामले में अमृतसर-दिल्ली और दिल्ली-म्यूनिख की उड़ानें इस व्यवस्था के तहत नहीं थीं. इसलिए यात्रियों को दिल्ली में अराइवल इमिग्रेशन की निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना जरूरी था।  गृह मंत्रालय ने भी बुलाई बैठक मामले को लेकर गृह मंत्रालय ने भी मंगलवार को अधिकारियों और संबंधित पक्षों की बैठक बुलाई है. गृह मंत्रालय ने इसे सुरक्षा और इमिग्रेशन से जुड़ी गंभीर चूक बताया है. केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में पी बालाजी (एअर इंडिया में ग्रुप हेड- गवर्नेंस, रेगुलेटरी, कंप्लायंस और कॉर्पोरेट अफेयर्स) समेत इंटेलिजेंस ब्यूरो और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के कमिश्नर और दिल्ली एयरपोर्ट के सीईओ के भी बैठक में शामिल होने की उम्मीद है. गृह मंत्रालय ने संबंधित मिनिस्ट्री से हब-एंड-स्पोक नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों पर एक प्रेजेंटेशन भी मांगी है। 

कचहरी चौक में सजा भव्य गणेश दरबार, 100 फीट के पंडाल में गणेश संग बालाजी और जगन्नाथ के दर्शन

जांजगीर चांपा  गणेश चतुर्थी के दिन घर घर बप्पा का आगमन हो गया है. पंडालों में भी गणेश जी विराजमान हो गए हैं. छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा में कचहरी चौक पर भव्य गणेश पंडाल बनाया गया है. 100 फीट के इस गणेश पंडाल में सोमवार को 20 फीट के गणपति बप्पा विराजमान हुए. गणेश जी की स्थापना विधि विधान से की गई।  क्यों खास है कचहरी चौक का गणेश पंडाल जिला मुख्यालय के कचहरी चौक पर इस बार तिरुपति बालाजी मंदिर के तर्ज पर पंडाल बनाया गया है. पंडाल 100 फीट ऊंचा और 80 फीट चौड़ा है. इस पंडाल को कोलकाता से आए कारीगरों ने दिनरात की मेहनत से बनाया है. पंडाल को खूबसूरत झालरों से सजाया गया है।     समिति पिछले 18 साल से गणेश उत्सव मना रही है. तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर पंडाल बनाया गया है -अवि सिंह, सदस्य, गणेश उत्सव समिति  मां पार्वती और पिता शंकर के साथ 20 फीट के गणपति कचहरी चौक के राजा के रूप में भगवान गणेश की लगभग 20 फीट की प्रतिमा स्थापित की गई है. भगवान गणेश के साथ मां पार्वती और भगवान शंकर भी है. इसके अलावा तिरुपति बालाजी, भगवान जगन्नाथ के दर्शन भी श्रद्धालुओं को मिलेंगे. भटगांव के कलाकारों ने सभी प्रतिमाओं को तैयार किया है. कलाकारों ने सभी मूर्तियां मिट्टी से बनाई है. साथ ही जल प्रदूषण करने वाले कैमिकल रंगों का भी उपयोग नहीं किया है।      कचहरी चौक के गणेश को देखने को लेकर लोगों में काफी उत्साह है. लोग बढ़चढ़ कर भगवान गणपति के दर्शन करने पहुंच रहे हैं. समिति के कार्यकर्ताओं में भी काफी उत्साह है-भूपेंद्र नेमी, सदस्य, गणेश उत्सव समिति  गणेश पंडाल में कोलकाता का लाइट एंड साउंड शो जांजगीर चांपा गणेश उत्सव समिति हर साल कुछ नया कर लोगों को आकर्षक झांकी दिखाने का प्रयास करती है. इस बार आकर्षक पंडाल के साथ ही कोलकाता का लाइट एंड साउंड शो विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा, जो आज से शुरू होगा। 

हर जरूरतमंद परिवार को मिलेगा सम्मानजनक आवास, सरकार की प्राथमिकता: मंत्री राजेश अग्रवाल

हर जरूरतमंद परिवार को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता: मंत्री राजेश अग्रवाल लखनपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों से मिले पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल 17 सितंबर को आशीर्वाद का दीया प्रज्ज्वलित कर ‘सेवा संकल्प अभियान‘ में सहभागी बनने का किया आह्वान रायपुर,   सरगुजा दौरे के दौरान नगर पंचायत लखनपुर पहुंचे पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों से मुलाकात कर उनसे आत्मीय संवाद किया। उन्होंने हितग्राहियों से आवास निर्माण की स्थिति, योजना से मिले लाभ तथा आवास से जुड़ी आवश्यकताओं और समस्याओं की जानकारी ली। इस दौरान मंत्री अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार गरीब तथा जरूरतमंद परिवारों को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना इसी संकल्प का महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसके माध्यम से अनेक परिवारों को अपने पक्के घर का सपना साकार करने का अवसर मिला है। मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना केवल मकान निर्माण की योजना नहीं है, बल्कि यह गरीब परिवारों के सम्मान, स्वाभिमान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को पक्की छत उपलब्ध कराने का जो संकल्प लिया है, उससे देश के लाखों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। पक्का मकान मिलने से परिवारों को न केवल सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिला है, बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति नई उम्मीद भी मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि पात्र हितग्राहियों तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पहुंचे। प्रधानमंत्री आवास योजना ने समाज के अंतिम छोर पर खड़े परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि किसी भी जरूरतमंद परिवार को आवास जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित न रहना पड़े।  हितग्राहियों से चर्चा के दौरान मंत्री अग्रवाल ने उनकी व्यक्तिगत समस्याओं और आवास निर्माण से संबंधित आवश्यकताओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उसका लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी हितग्राहियों की समस्याओं के निराकरण तथा योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य करने की अपेक्षा की। ‘सेवा संकल्प अभियान‘ से जुड़कर जनभागीदारी को मजबूत करने का आह्वान मंत्री राजेश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों से सेवा संकल्प अभियान में सक्रिय सहभागिता की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश सेवा, जनकल्याण और जनभागीदारी के भाव को निरंतर मजबूती मिल रही है। सेवा संकल्प अभियान इसी भावना को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने हितग्राहियों से आग्रह किया कि 17 सितंबर की संध्या 7 बजे अपने-अपने घरों में आशीर्वाद का दीया प्रज्ज्वलित करें और सेवा, समर्पण तथा जनभागीदारी के इस संकल्प से जुड़ें। उन्होंने कहा कि घरों में प्रज्ज्वलित होने वाला आशीर्वाद का दीया समाज में सेवा और सकारात्मकता का संदेश भी देगा। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान‘ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सेवा और सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का अवसर है। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री आवास योजना ने जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सुरक्षा और खुशहाली का प्रकाश फैलाया है, उसी तरह ‘आशीर्वाद का दीया‘ सेवा, विश्वास और संकल्प की भावना को घर-घर तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों सहित नागरिकों से अपील की कि वे 17 सितंबर को अपने घरों में आशीर्वाद का दीया प्रज्ज्वलित कर सेवा संकल्प अभियान में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें और अधिक से अधिक लोगों को इस जनभागीदारी से जोड़ें। इस दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों ने मंत्री अग्रवाल से अपने अनुभव साझा किए और योजना से मिले लाभ के संबंध में जानकारी दी। हितग्राहियों ने बताया कि पक्का आवास मिलने से उनके परिवारों के जीवन में सुरक्षा, स्थायित्व और बेहतर भविष्य की उम्मीद बढ़ी है। मंत्री अग्रवाल ने हितग्राहियों की बातों को सुना और शासन की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से संबंधित सुझावों पर भी चर्चा की। मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गरीब कल्याण और जनसेवा को केंद्र में रखकर अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना ने गरीब परिवारों को पक्की छत देकर उनके जीवन में सम्मान और आत्मविश्वास बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर समाज की मजबूत नींव तभी तैयार होगी, जब प्रत्येक परिवार के पास सुरक्षित आवास, सम्मानजनक जीवन और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध हों। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जनभागीदारी को मजबूत करते हुए सेवा और सामाजिक सरोकारों की इस भावना को और व्यापक बनाया जा सकता है।

मुस्लिम महिलाओं की परेशानियों पर OP चौधरी का बड़ा बयान, बोले- UCC से परंपराओं को नहीं पहुंचेगा नुकसान

रायपुर  छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को 2029 तक भाजपा शासित राज्यों में लागू करने के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान का समर्थन किया है। उन्होंने यूसीसी को संविधान के अनुच्छेद 44 में वर्णित नीति निर्देशक तत्वों का हिस्सा बताते हुए इसे भाजपा के घोषित एजेंडे का हिस्सा बताया। इसके साथ ही उन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन में विपक्षी दलों के कुछ मुख्यमंत्रियों के शामिल नहीं होने पर भी सवाल उठाए। भारत-चीन संबंधों और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी सेना पीएलए की तैनाती में कमी की खबरों पर भी चौधरी ने केंद्र की कूटनीति की सराहना की। अमित शाह के बयान का किया समर्थन अमित शाह के 2029 तक भाजपा शासित प्रदेशों में समान नागरिक संहिता लागू करने के बयान पर ओपी चौधरी ने कहा कि शाह अपने संकल्पों को दृढ़ता से लागू करने के लिए जाने जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने यूसीसी को अपने घोषित एजेंडे और चुनावी घोषणापत्र में शामिल किया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के लिए समान नागरिक संहिता की दिशा में प्रयास करने की बात कही गई है। यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत कानूनों में समानता की दिशा में आगे बढ़ना है। विपक्ष भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यूसीसी नहीं होने के कारण मुस्लिम समाज की महिलाओं को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने संपत्ति में अधिकार, तीन तलाक और बहुविवाह जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी वर्ग की महिलाओं को समान अधिकार मिलना जरूरी है। यूसीसी को लेकर आदिवासी समाज की परंपराओं और संस्कृति पर उठने वाली आशंकाओं को खारिज करते हुए ओपी चौधरी ने कहा कि विपक्षी ताकतों की ओर से इस संबंध में भ्रम और अफवाह फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। आदिवासी परंपरा को कोई नुकसान नहीं उन्होंने दावा किया कि समान नागरिक संहिता से आदिवासी समाज की परंपराओं और संस्कृति को कोई नुकसान नहीं होगा। आदिवासी समुदाय को इस मुद्दे पर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। भाजपा यूसीसी को एक प्रगतिशील और समान अधिकारों वाले समाज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानती है। इसके माध्यम से महिलाओं को अधिक समान और उचित अधिकार देने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

गुरुग्राम हिट-एंड-रन मामले में आरोपी कल्याण बैंसला गिरफ्तार, महिला राइडर को मारी थी टक्कर

गुरुग्राम  गुरुग्राम के हिट एंड रन मामले में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। महिला बाइक राइडर सिया चौहान को टक्कर मारने वाले आरोपी कल्याण बैंसला को गुरुग्राम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि, इस हादसे का वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला देशभर में चर्चा में है। वहीं गुरुग्राम पुलिस ने खुद संज्ञान लेते हुए थाना सेक्टर-56 में एफआईआर दर्ज की थी। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में हत्या के प्रयास की धारा एफआईआर में जोड़ दी गई है। सिया ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए थे सवाल बता दें कि इससे पहले गुरुग्राम की महिला बाइक राइडर सिया ने पुलिस के एक्शन पर सवाल उठाए थे। हादसे को लेकर पीड़िता सिया ने बताया कि, उन्हें घुटनों में चोट लगी है। हादसे के समय उन्होंने राइडिंग शूज और राइडिंग ग्लव्स पहन रखे थे, जिसकी वजह से उन्हें चोट कम लगी। उनके मुताबिक, अगर उन्होंने ये सुरक्षा उपकरण नहीं पहने होते तो उनके हाथ पर लगी चोट इतनी गंभीर हो सकती थी कि कंधे की हड्डी भी टूट सकती थी। वीडियो फुटेज से मिली सुराग  गुरुग्राम पुलिस ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए थाना सेक्टर-56 में अभियोग दर्ज किया था। शुरुआत में लापरवाही से वाहन चलाने से संबंधित बीएनएस की धारा 281 और 125 के तहत केस दर्ज किया गया था। घटना से जुड़े वीडियो फुटेज के गहन विश्लेषण के बाद पुलिस के सामने कार चालक द्वारा सिया की बाइक की तरफ जानबूझकर कार मोड़ने का तथ्य आया। इसके आधार पर मामले में बीएनएस की धारा 109 यानी हत्या के प्रयास की धारा जोड़ी गई। घटना के बाद फरार था आरोपी 13 सितंबर को गोल्फ कोर्स रोड पर हुई घटना के बाद कल्याण बैंसला फरार हो गया था। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए बड़े स्तर पर तलाश शुरू की थी और तीन विशेष टीमों का भी गठन किया गया था। अब राजस्थान के दौसा से गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी से घटना को लेकर पूछताछ करेगी और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राइडर सिया को मारी टक्कर सिया अपनी Aprilia RS 457 बाइक से अन्य राइडरों के साथ जा रही थीं। घटना के बाद इसका वीडियो इंस्टाग्राम पर प्रसारित हुआ था। बाद में सिया ने भी वीडियो जारी कर कार चालक पर जानबूझकर टक्कर मारने का आरोप लगाया था। सिया के अनुसार, कार चालक ने पहले उन्हें रुकने का इशारा किया था। जब वह नहीं रुकीं तो चालक ने कार उनकी बाइक की तरफ मोड़ दी और टक्कर मार दी। हत्या के प्रयास की धारा जुड़ी पुलिस के अनुसार, मामले में जोड़ी गई बीएनएस की धारा 109 में 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। वीडियो फुटेज के विश्लेषण के आधार पर यह धारा जोड़ी गई है। कल्याण बैंसला की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब घटना के पूरे क्रम और वीडियो फुटेज से सामने आए तथ्यों की जांच आगे बढ़ाएगी। वहीं सिया ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा था कि, आरोपी न्यूज रिपोर्टर्स को बयान दे रहा है और अपनी बात रख रहा है। उन्होंने सवाल किया कि पुलिस उसे गिरफ्तार करने में इतनी देर क्यों कर रही है। सिया ने कहा कि उन्होंने अपनी पोस्ट के कैप्शन में गाड़ी का नंबर भी बताया था। इसके बावजूद पुलिस अब तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। रविवार की है घटना दरअसल, यह घटना गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड की है, जिसका वीडियो इंस्टाग्राम पर वायरल हुआ था। महिला बाइकर सिया चौहान, अपनी बाइक चला रही थी। तभी एक कार उसका पीछा करने लगी। जब महिला नहीं रुकी तो आरोपी ने बाइकर को टक्कर मार दी। महिला का कैमरा चालू था, ऐसे में यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई थी।

JPSC-JSSC आंदोलन पर पुलिस का शिकंजा, नेताओं समेत 214 से ज्यादा लोगों पर केस

रांची रांची में 21 अगस्त को पुलिस और छात्रों की झड़प के बाद JPSC-JSSC आंदोलन के नेताओं समेत 14 नामजद और 200 से अधिक अज्ञात लोगों पर शनिवार 22 अगस्त को FIR दर्ज की गई है। इससे छात्र आंदोलन फिर से शुरू होने की आशंका है। झारखंड की राजधानी रांची में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच पुलिस ने आंदोलन के नेताओं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। 21 अगस्त को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के मामले में रांची पुलिस ने कम से कम तीन FIR दर्ज की हैं। इन मामलों में 14 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 200 से अधिक अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर सरकारी काम में बाधा डालने, प्रशासन के तय रूट का पालन नहीं करने और पुलिस से भिड़ने के आरोप हैं। JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के प्रमुख नेता नामजद रांची के कोतवाली थाने में दर्ज मामलों में JPSC-JSSC Reforms Manch के नेताओं कुणाल प्रताप सिंह, पीयूष कुमार और रविंद्र पासवान के नाम शामिल हैं। रांची सिटी एसपी पारस राणा के अनुसार, शुक्रवार की झड़प के संबंध में तीन FIR दर्ज की गई हैं। इनमें 14 नामजद आरोपियों के अलावा 200 से ज्यादा अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। यह मंच झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और नियुक्तियों से जुड़े विवाद को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहा है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, तीन में से एक FIR पुलिस की ओर से दर्ज की गई है। इसमें सरकारी काम में बाधा डालने और प्रशासन की ओर से निर्धारित रूट का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए हैं। बाकी दो FIR व्यक्तिगत शिकायतों के आधार पर दर्ज हुई हैं। पुलिस अब प्रदर्शन के दौरान बनाए गए वीडियो फुटेज की भी जांच कर रही है ताकि हिंसा या कथित उपद्रव में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके। नेताओं के पुतले जलाने को लेकर विवाद 21 अगस्त को प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाने का कार्यक्रम आयोजित किया था। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी जिला प्रशासन की ओर से निर्धारित मार्ग का पालन नहीं कर रहे थे, जिसके कारण विवाद बढ़ा। कोतवाली थाना प्रभारी सानोज चौधरी ने भी झड़प की वजह प्रदर्शनकारियों द्वारा निर्धारित रूट का पालन नहीं करना बताया। वहीं, JPSC-JSSC Reforms Manch के नेता कुणाल सिंह ने पुलिस के आरोप से अलग दावा किया है। उनका आरोप है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकर्ताओं ने हिंसा शुरू की। इस मामले में दोनों पक्षों के दावों में स्पष्ट अंतर है और FIR में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। सिर्फ रांची नहीं, चार जिलों में टकराव छात्रों की ओर से आयोजित मुख्यमंत्री और राहुल गांधी के पुतला दहन अभियान को राज्य के कई हिस्सों में विरोध का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, रांची के अलावा हजारीबाग, गिरिडीह और गढ़वा में भी प्रदर्शन के दौरान टकराव हुआ। हजारीबाग में पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा। यानी 21 अगस्त का विवाद केवल रांची तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य के कई जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन और विरोध आमने-सामने आ गए। JPSC-JSSC विवाद क्या है? झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले कई सप्ताह से छात्र आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारी 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग कर रहे हैं। इससे पहले प्रदर्शनकारी CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग भी उठा चुके हैं। छात्र 29 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना दे रहे थे। इस आंदोलन को लेकर सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के दौर भी हुए हैं। 8 अगस्त को सरकार और JPSC-JSSC Reforms Manch के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन छात्र नेताओं ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया था। सरकार ने छात्रों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और जल्द निर्णय लेने का आश्वासन दिया था। हाईकोर्ट के फैसलों के बाद विवाद और बढ़ा इस पूरे विवाद में झारखंड हाईकोर्ट के हालिया आदेश भी महत्वपूर्ण हैं। हाईकोर्ट ने 21 अगस्त को JSSC-CGL के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी। इससे एक दिन पहले अदालत ने 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षाओं से संबंधित नियुक्तियां रद्द करने की अधिसूचनाओं पर भी रोक लगाई थी। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश पर भी रोक लगाई गई। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य सरकार ने लंबे छात्र आंदोलन के बाद भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर कदम उठाए थे, लेकिन हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आंदोलनकारी संगठनों ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। JPSC-JSSC Reforms Manch ने सरकार पर अदालत के सामने कमजोर पक्ष रखने और इसे “कानूनी ड्रामा” बनाने का आरोप लगाया है। हालांकि यह आंदोलनकारियों का आरोप है, सरकार की ओर से इस रिपोर्ट में उस आरोप पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। आंदोलन पर बढ़ता पुलिस दबाव रांची में ताजा FIR ऐसे समय दर्ज हुई हैं जब JPSC-JSSC भर्ती विवाद को लेकर आंदोलन लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव का विषय बना हुआ है। इससे पहले भी विधानसभा मार्च के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था तथा पुलिस ने बल प्रयोग किया था। 11 अगस्त को ABVP के प्रदर्शन के दौरान भी पुलिस से झड़प हुई थी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। अब 21 अगस्त की घटना में 14 नामजद और 200 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने से आंदोलन के अगले चरण को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस कार्रवाई के बीच छात्र संगठन भर

एआई गर्लफ्रेंड और डेटिंग ऐप फ्रॉड के जाल में फंसे लोग, जयपुर साइबर पुलिस ने जारी की चेतावनी

जयपुर भाई, ये AI का जमाना है। इसमें बहुत होशियार रहना पड़ेगा, वरना दिल भी ठग जाएगा और जेब भी। सोचो, डेटिंग ऐप पर कोई प्यारी सी लड़की रोज बात करती है, पसंद पूछती है, धीरे-धीरे दिल की बातें करने लगती है… और तुम सोचते हो कि सामने असली इंसान है। लेकिन असल में वो ClaudeAI का चैटबॉट है। AI कंपनी एंथ्रोपिक की ताजा रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। चीन के ऐप स्टूडियो ने 20 से ज्यादा डेटिंग ऐप्स बनाकर 4700 नकली AI प्रोफाइल चलाए। सिर्फ दो हफ्तों में 25 हजार लोग इनसे बात कर बैठे और 23.6 लाख से ज्यादा मैसेज आए। लोग सोच रहे थे कि सामने कोई असली लड़की है, लेकिन असल में Claude अलग-अलग किरदार बनकर चैट कर रहा था। ये कोई कहानी या मजाक नहीं, एंथ्रोपिक की रिपोर्ट में आई हकीकत है। अब समझ लो, AI के जमाने में प्यार भी फेक हो सकता है। कैसे चल रहा था पूरा सिस्टम? ऐप स्टूडियो ने Claude से ही ऐप्स बनाने में मदद ली और फिर उसे नकली प्रोफाइल्स के पीछे बैठा दिया। यूजर्स को मैच फीड में करीब 75 प्रतिशत AI प्रोफाइल और 25 प्रतिशत असली लोग दिखाए जाते थे। असली gig वर्कर्स सिर्फ वीडियो कॉल या सोशल मीडिया फॉलोबैक के लिए इस्तेमाल होते थे, ताकि शक न हो। Claude को साफ निर्देश था कि वह कभी न बताए कि वह AI है। फोटो या वीडियो कॉल की मांग पर बात घुमा दे। प्रोफाइल फोटो AI इमेज एडिटिंग मॉडल से बनाई जाती थीं। ऐप स्टोर की जांच से बचने के लिए इंटरफेस भी चालाकी से डिजाइन किया गया था। कमाई का तरीका और पकड़ा कैसे गया? यूजर जब मैसेज करता या बात आगे बढ़ाता तो फ्री कोटा खत्म हो जाता। फिर ऐप के कॉइन खरीदने पड़ते थे। जितनी देर AI यूजर को फंसाए रखता, उतनी कमाई। कुछ यूजर्स ने गंभीर बीमारी या खराब मानसिक हालत बताई, फिर भी Claude बात जारी रखता रहा। इन्हीं संदिग्ध बातचीत से एंथ्रोपिक को शक हुआ और सर्विलांस बढ़ा। कंपनी ने जुड़े अकाउंट्स बैन कर दिए और अन्य AI कंपनियों के साथ मिलकर नेटवर्क तोड़ा। डोरा, डोनी, रोमी जैसे तमाम नाम रिपोर्ट में डोरा, डोनी, रोमी, लूमा, जोविया, किरा, ग्रेसचैट, हेवन, नालो और लोविया जैसे ऐप नाम दिए गए हैं। राजस्थान में भी डेटिंग ऐप फ्रॉड के मामले राजस्थान में बिल्कुल ऐसा Claude वाला बड़ा नेटवर्क तो नहीं मिला, लेकिन डेटिंग और मैट्रिमोनियल ऐप्स पर फर्जी प्रोफाइल से ठगी के कई मामले सामने आए हैं। जयपुर साइबर पुलिस ने चेतावनी जारी की है कि ठग आकर्षक तस्वीरों (अब AI से भी बनाई जा रही) वाली फर्जी प्रोफाइल बनाकर भरोसा जीतते हैं, फिर पैसे ऐंठते हैं। रिवर्स इमेज सर्च करें, पैसे कभी न भेजें फरवरी 2026 में राजस्थान पुलिस ने बताया कि कई प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रोफाइल से इमोशनल अटैचमेंट बनाकर क्रिप्टो या निवेश के नाम पर ठगी हो रही है। मई 2026 में करौली से पांच आरोपी गिरफ्तार हुए, जिन्होंने डेटिंग ऐप से वीडियो कॉल रिकॉर्ड कर ब्लैकमेल किया। जयपुर में क्लब आधारित डेटिंग स्कैम भी पकड़ा गया। साइबर एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अनजान प्रोफाइल पर भरोसा न करें, रिवर्स इमेज सर्च करें और पैसे कभी न भेजें।यह मामला साफ दिखाता है कि AI अब सिर्फ मददगार नहीं, ठगी का नया हथियार भी बन गया है। यूजर्स को सतर्क रहना होगा।

बाढ़ का पानी निकलने के बाद सामने आई तबाही की तस्वीर, सैकड़ों एकड़ धान की फसल नष्ट

पालीगंज पुनपुन नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे घटने लगा है। इससे बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों ने राहत की सांस ली है। दहिया पंचायत के रूपापुर, बाला बिगहा, हेल्हा तथा कटका पैगम्बरपुर पंचायत के कौरी गांव से बाढ़ का पानी निकल गया है और सूख गया है। लेकिन पानी उतरने के बाद बर्बादी की जो तस्वीर सामने आई है, उसने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। करीब सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह पुनपुन नदी के उफान पर आने से पालीगंज प्रखंड के नदी किनारे बसे करीब एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था। दहिया और कटका पैगम्बरपुर पंचायत के निचले इलाके सबसे अधिक प्रभावित हुए थे। तीन से चार दिनों तक खेतों में चार से पांच फीट तक पानी भरा रहा। जिससे खेतों में रोपा गया धान पूरी तरह डूब गया और सड़ गया। खेतों में सिर्फ सड़ी हुई फसल और मिट्टी की मोटी परत अब जब पानी सूखा है तो खेतों में सिर्फ सड़ी हुई फसल और मिट्टी की मोटी परत दिख रही है। किसान हाथ पर हाथ धरे खेत के किनारे खड़े हैं। किसानों का कहना है कि इस साल उन्होंने कर्ज लेकर महंगे दर पर धान की रोपनी कराई, पटवन किया और यूरिया, डीएपी खाद डाला। उम्मीद थी कि फसल अच्छी होगी तो कर्ज चुकाकर कुछ बचत होगी। लेकिन बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया। रूपापुर के किसान सुरेश प्रसाद ने बताया कि पांच बीघा में धान लगाया था, सब खत्म हो गया। बाला बिगहा के किसान राजू कुमार ने कहा कि केसीसी से लोन लेकर खेती की थी, अब बैंक का कर्ज कैसे चुकाएंगे। दोबारा रोपनी का समय भी निकल चुका है, इसलिए इस साल खेत खाली रहने की आशंका है। प्रभावित गांवों का दौरा कर पीड़ित किसानों से मुलाकात वहीं किसानों की समस्या को देखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी चन्दन कुमार ने प्रभावित गांवों का दौरा कर पीड़ित किसानों से मुलाकात की थी। उन्होंने किसानों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। एसडीएम ने कृषि विभाग को निर्देश दिया है कि बाढ़ से क्षतिग्रस्त फसलों का जल्द से जल्द सर्वे कर आंकलन रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि प्रभावित किसानों को फसल क्षति मुआवजा और सरकारी सहायता का लाभ मिल सके। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार दहिया और पैगम्बरपुर इलाके में सैकड़ों एकड़ से अधिक धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट तैयार कर जिला कृषि पदाधिकारी को भेजी जाएगी।