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फर्जी दस्तावेजों से बनाई गई कंपनी, जमीन और बिजली बिल का हुआ दुरुपयोग

 नई दिल्ली जीएसटी फर्जीवाड़े का एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक कारोबारी की जानकारी के बिना उसके पते, बिजली बिल और कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर फर्जी फर्म खड़ी कर दी गई। इसके बाद उसी फर्म के जरिए करोड़ों रुपये की बोगस बिलिंग कर जीएसटी लाभ हासिल करने का खेल खेला गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने शिकायतकर्ता के बयान पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता रवि कुमार ने आरोप लगाया है कि सोनिया विहार स्थित उनकी संपत्ति के पते का दुरुपयोग कर एक नाम से जीएसटी फर्म रजिस्टर कराई गई। उन्हें जानकारी तब मिली, जब जीएसटी विभाग ने पूछताछ के लिए बुलाया। वहां अधिकारियों ने एक रेंट अग्रीमेंट दिखाया, जिसके आधार पर फर्म का रजिस्ट्रेशन कराया गया था। कभी रेंट एग्रीमेंट पर साइन नहीं किया रवि कुमार का कहना है कि उन्होंने कभी अपनी संपत्ति किसी कपिल नामक व्यक्ति को किराये पर नहीं दी। न ही किसी रेंट एग्रीमेंट पर साइन किए। शिकायतकर्ता के मुताबिक, दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षर फर्जी हैं और जालसाजी कर तैयार किए गए शुरुआती जांच में सामने आया कि फर्म के जरिए करीब 34.28 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग की गई हैं। जांच में यह भी सामने आया कि फर्म के जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए उनके घर का बिजली बिल इस्तेमाल किया गया। रवि का दावा है कि उन्होंने कभी किसी को अपना बिजली बिल उपलब्ध नहीं कराया। यह भी आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संबंधित फर्म के नाम से बैंक खाता भी खुलवाया गया। इसी खाते से कथित तौर पर फर्जी कारोबारी लेन-देन किए गए और टैक्स लाभ लेने की कोशिश की गई। बोगस बिलिंग का आरोप शिकायतकर्ता का कहना है कि उनकी पहचान और संपत्ति का इस्तेमाल किया गया, जबकि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी। शुरुआती जाच में सामने आया कि फर्म के जरिए करीब 34.28 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग की गई। आरोप है कि इसके माध्यम से करीब 6.17 करोड रुपये का अनुचित जीएसटी लाभ लेने का अनुचित प्रयास किया गया। जाच के दौरान धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, आपराधिक विश्वासघात और साजिश सही पाए गए। EOW ने 21 मई को केस दर्ज किया। पुलिस अब कथित मास्टरमाइंड कपिल, और पूरे नेटवर्क की जाच कर रही है।  

चंडीगढ़िया मोहल्ले में पुलिस की छापेमारी, 5.71 लाख रुपये बरामद

सिरसा  सीआईए ऐलनाबाद पुलिस टीम ने शहर के चंडीगढ़िया मोहल्ला क्षेत्र में एक मकान पर दबिश देकर बड़े स्तर पर चल रहे जुए के अड्डे का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मौके से मकान मालिक सहित 25 लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 5 लाख 71 हजार 105 रुपये की नकद राशि तथा ताश के पत्ते बरामद किए हैं। पुलिस प्रवक्ता एएसआई राजपाल ने बताया कि सीआईए ऐलनाबाद की पुलिस टीम बीती रात गश्त के दौरान आइटीआइ चौक क्षेत्र में मौजूद थी। इसी दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि चंडीगढ़िया मोहल्ला निवासी दीपक उर्फ काका अपने घर में कई लोगों को इकट्ठा कर बड़े स्तर पर जुआ खिलवा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बताए गए मकान पर दबिश दी। पुलिस को देखकर मौके पर मौजूद लोग भागने का प्रयास करने लगे, लेकिन पुलिस टीम ने घेराबंदी कर सभी को मौके पर ही काबू कर लिया। तलाशी लेने पर आरोपितों के कब्जे से 5 लाख 71 हजार 105 रुपये की नकदी और ताश के पत्ते बरामद किए गए। गिरफ्तार किए गए आरोपितों की पहचान हिसार निवासी महेंद्र, ललित कुमार, बलजिंद्र, चंद्रगोपाल, सुनील, अनिल, शसन, मुकेश, सुरेंद्र, राकेश, राजेश, कालांवाली निवासी गुरदित्ता तथा सिरसा निवासी पवन कुमार, मनोज कुमार, अमन, प्रिंस, सज्जन कुमार, दीपक, योगेश और सौरभ चावला सहित अन्य के रूप में हुई है। पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ थाना शहर सिरसा में जुआ अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।

ई-चालान सिस्टम हुआ और स्मार्ट, 1500 नई हैंडहेल्ड मशीनें तैनात

नई दिल्ली  दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने अपने चालान और यातायात प्रबंधन सिस्टम में एक बड़ा तकनीकी बदलाव शुरू किया है, जिसका उद्देश्य यातायात नियमें के उल्लंघन को अधिक पारदर्शी, नागरिक अनुकूल, प्रभावी और डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है। लोग मौके पर ही भर सकेंगे चालान इस पहल के तहत अब यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले लोग मौके पर ही UPI, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड जैसी विभिन्न डिजिटल भुगतान सुविधाओं से अपने चालान का भुगतान कर सकेंगे। इसके लिए फील्ड में तैनात ट्रैफिक पुलिस अधिकारी हैंडहेल्ड डिवाइस का उपयोग करेंगे। मामले में क्या बोले ट्रैफिक के अडिशनल पुलिस कमिश्नर ई चालान मशीनों से फिलहाल चालान के साथ-साथ पुराने चालानों का भी डिजिटल भुगतान सड़क पर तैनात ट्रैफिक कर्मियों की सहायता से किया जा सकेगा। इससे यात्रियों को होने वाली असुविधा तो कम होगी ही साथ ही कैश रहित लेनदेन को भी बढ़ावा मिलेगा। अडिशनल पुलिस कमिश्नर (ट्रैफिक) विजयंता गोयल आर्या ने बताया कि चालान का भुगतान डिजिटल रूप में करने की व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए दिल्लीभर में फील्ड अधिकारियों को लगभग 1,500 नई ई-चालान मशीनें बांटी की जा रही है। कई आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं खास मशीन ट्रैफिक पुलिस मुख्यालय टोडापुर में कुछ ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को ये मशीनों बांटकर इस मुहिम की शुरूआत की गई है। इन हैंडहेल्ड डिवाइस के माध्यम से तेज चालान जेनरेशन, तुरंत भुगतान प्रक्रिया, गाड़ी और उल्लंघनकर्ता की फोटो कैप्चर करने, गाड़ी को टो किए जाने की सूचना गाड़ी मालिक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजने और बेहतर डेटा और रेकॉर्ड प्रबंधन जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। भारत बिल पेमेंट सिस्टम से जुड़ चुकी ई चालान प्रणाली जनसुविधा को और बेहतर बनाने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ई-चालान प्रणाली को अब भारत बिल पेमेंट सिस्टम (BBPS) से भी जोड़ दिया गया है। इससे कोई भी व्यक्ति किसी भी UPI मोबाइल ऐप्लीकेशन से वर्तमान और पुराने दोनों प्रकार के कंपाउंडेबल चालानों का सुरक्षित, सरल और सहज भुगतान कर सकेंगे। ऑनलाइन ट्रेनिंग दी गई नई मशीनों और डिजिटल भुगतान के बारे में बताने के लिए सभी फील्ड अधिकारियों, जिनमे सर्किल ट्रैफिक इंस्पेक्टर भी शामिल है, उनको ऑनलाइन ट्रेनिंग दी गई। इसमें ई-चालान प्रणाली के संचालन, डिजिटल भुगतान प्रक्रिया और शिकायत निवारण संबंधी प्रोटोकॉल की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस आधुनिक तकनीक और स्मार्ट प्रवर्तन समाधानो के माध्यम से यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने, चालान भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने, नागरिको को सुविधा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है

पटना: कम पूंजी वाले उद्योगों के लिए नई नीति से वित्तीय मदद का रास्ता साफ

पटना बिहार में कम पूंजी से उद्योग लगाने वालों के लिए खुशखबरी है। राज्य में सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के दिन बहुरने वाले हैं। इन्हें प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार नई एमएसएमई नीति ला रही है। नई नीति आने के बाद कम पूंजी वाली छोटी इकाइयों को वित्तीय मदद मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। तकनीकी मदद मिलने से इन इकाइयों के उत्पाद निर्यात हो सकेंगे। इससे राज्य में रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। राज्य में करीब आठ लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम औद्योगिक इकाइयां हैं। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत भी हर वर्ष नौ हजार से अधिक लघु उद्यमी तैयार किए जा रहे हैं। राज्य में कृषि आधारित, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र, वस्त्र, हस्तकरघा, डेयरी आदि क्षेत्र की इकाइयां ज्यादा हैं। इनमें वस्त्र एवं चर्म उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए नीति बनी हुई है। अन्य इकाइयों के प्रोत्साहन के लिए कोई खास नीति नहीं है। इस कारण इन्हें सरकार से वित्तीय मदद लेने में पापड़ बेलने पड़ते हैं। पूंजी के अभाव में कई इकाइयां प्रतिस्पर्धी बाजार का सामना नहीं कर पाती हैं। तकनीकी रूप से उन्नत नहीं होने के चलते इनके उत्पाद निर्यात के मानक पर खरा नहीं उतर पाते हैं। इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए उद्योग विभाग ने एमएसएमई नीति बनाने का निर्णय लिया है। इस पर काम शुरू कर दिया गया है। उद्योग विभाग का मकसद केंद्र सरकार की नीति के लिए दिए जा रहे प्रोत्साहन का भी लाभ उठाना है। केंद्रीय नीति के तहत पूंजीगत अनुदान और रियायती दरों पर लोन दिये जा रहे हैं। इसके बाद दिल्ली, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों ने अपनी एमएसएमई नीति बना ली है। इसके चलते इन राज्यों की एमएसएमई इकाइयों को केंद्रीय सहायता और बैंक लोन आसानी से मिल जाता है। इन इकाइयों को मिलेगी मदद ● खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां (आटा, बेसन, सत्तू, मसाला मिल, बेकरी) ● पशु आहाद, मुर्गी दाना आदि कृषि आधारित उत्पाद, हस्तशिल्प क्षेत्र ● वस्त्र क्षेत्र (कपड़े और रेडिमेड परिधान), हस्तकरघा (पावरलूम) क्षेत्र ● चप्पल-जूते निर्माण, खिलौने, फर्नीचर के अलावा सेवा क्षेत्र की इकाइयां विशेषताएं ● असंगठित रोजगार कर रहे हस्तकरघा, सेवा क्षेत्र लोगों को फायदा ● उत्पादों को वैश्वि बाजार लायक तैयार करने के लिए सहायता मिलेगी ● केंद्रीय नीति के तहत पूंजीगत अनुदान और रियायती दरों पर लोन दिये जा रह हैं ● पूंजीगत अनुदान, तकनीकी मदद मिलेगी ● ऊर्जा और अन्य राजस्व शुल्क में राहत ● उत्पाद को बाजार, निर्यात की सुविधा ● वैश्विक बाजार तक उत्पाद पहुंच सकेगा ● एकीकृत क्लस्टर में इकाइयों को जगह

आधी रात जारी हुआ आदेश, कुचामन तहसीलदार का ट्रांसफर

जयपुर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के कुचामन दौरे के दौरान हुए बवाल का असर अब प्रशासनिक अधिकारियों पर दिखना शुरू हो गया है. मदन राठौड़ को काले झंडे दिखाने और विरोध प्रदर्शन करने वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के कार्यकर्ताओं की जमानत याचिका मंजूर करने वाले कुचामन सिटी के तहसीलदार कैलाश ईनाणियां का राज्य सरकार ने आधी रात को तबादला कर दिया है. इसे राजनीतिक हलकों में एक बड़ी 'पनिश्ड पोस्टिंग' के रूप में देखा जा रहा है. देर रात 1 बजे आया ट्रांसफर ऑर्डर जानकारी के मुताबिक, राज्य सरकार ने शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे एक प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए कुचामन सिटी के तहसीलदार कैलाश ईनाणियां का तबादला सीधे बांसवाड़ा जिले के गांगड़ तलाई में कर दिया. सरकार का रुख इस मामले में कितना सख्त था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आदेश आते ही डीडवाना जिला कलेक्टर अवधेश मीना ने तहसीलदार को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया. कलेक्टर ने उन्हें तुरंत नए पद पर जॉइन करने के निर्देश दिए हैं और कुचामन तहसीलदार का अतिरिक्त कार्यभार नावां तहसीलदार को सौंप दिया है. जमानत देने का भुगतना पड़ा 'खामियाजा'? भले ही प्रशासनिक स्तर पर इसे एक नियमित प्रक्रिया बताया जा रहा हो, लेकिन डीडवाना-कुचामन के राजनीतिक गलियारों में चर्चा गर्म है कि तहसीलदार को आरएलपी कार्यकर्ताओं को राहत देने का खामियाजा भुगतना पड़ा है. दरअसल, मदन राठौड़ के घेराव के मामले में पुलिस ने जिन आरएलपी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था, उनकी जमानत याचिका तहसीलदार कैलाश ईनाणियां की कोर्ट में पेश हुई थी. तहसीलदार ने कानूनी प्रक्रिया के तहत उनकी जमानत मंजूर कर ली थी. माना जा रहा है कि सत्ता पक्ष इस फैसले से नाराज था, जिसके बाद यह आधी रात वाला एक्शन हुआ. RLP नेता रामनिवास पोषक फिर गिरफ्तार इस पूरे घटनाक्रम के बीच कुचामन में राजनीतिक पारा और चढ़ गया है. शुक्रवार की देर रात पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए आरएलपी के कद्दावर नेता रामनिवास पोषक सहित कुछ अन्य कार्यकर्ताओं को एक दूसरे मामले में पुनः गिरफ्तार कर लिया है. कार्यकर्ताओं की रिहाई के बाद इस दोबारा हुई गिरफ्तारी से हनुमान बेनीवाल की पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है.

खनन माफियाओं पर कसा शिकंजा, पूर्व सरपंच सहित आठ आरोपियों पर करोड़ों की पेनल्टी

पांढुर्ना  पांढर्णा में अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए छह प्रकरणों में कुल 5 करोड़ 44 लाख 27 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। इस कार्रवाई में एक पूर्व सरपंच, तत्कालीन सचिव, ठेकेदार सहित आठ लोगों को जिम्मेदार ठहराया गया है।  कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ के निर्देश पर खनिज विभाग और राजस्व अधिकारियों द्वारा की गई जांच में अवैध रेत, मिट्टी और मुरम उत्खनन के मामलों का खुलासा हुआ, जिसके बाद मध्यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण का निवारण) नियम-2022 के तहत कार्रवाई की गई। प्रशासन की इस कार्रवाई से जिले में अवैध खनन से जुड़े लोगों में हड़कंप की स्थिति है। लंबे समय से विभिन्न क्षेत्रों में अवैध उत्खनन की शिकायतें मिल रही थीं, जिनकी जांच के बाद संबंधित व्यक्तियों पर करोड़ों रुपए का आर्थिक दंड लगाया गया है। रंगारी में सबसे बड़ा घोटाला, 5.26 करोड़ का अर्थदंड सबसे बड़ा मामला सौंसर तहसील के ग्राम रंगारी में सामने आया। जांच के दौरान पाया गया कि स्वीकृत खदान लीज क्षेत्र की सीमा से बाहर जाकर करीब 3510 घनमीटर रेत का अवैध उत्खनन किया गया था। यह उत्खनन नियमों और स्वीकृत शर्तों के विपरीत पाया गया। मामले में तत्कालीन सरपंच प्रतिभा आनंदराव ठाकरे, तत्कालीन ग्राम सचिव तथा संबंधित ठेकेदार की भूमिका सामने आने पर तीनों को संयुक्त रूप से जिम्मेदार मानते हुए 5 करोड़ 26 लाख 50 हजार रुपए का अर्थदंड अधिरोपित किया गया। यह जिले में अवैध खनन से जुड़े मामलों में हाल के वर्षों की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई मानी जा रही है। जांच में सामने आई राजस्व हानि अधिकारियों के अनुसार लीज क्षेत्र से बाहर खनिज निकालने के कारण शासन को भारी राजस्व हानि हुई। साथ ही नदी और आसपास के पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए थे, जिसके बाद अंतिम आदेश पारित किया गया। निजी भूमि पर भी नहीं मिली राहत प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अवैध उत्खनन चाहे शासकीय भूमि पर हो या निजी भूमि पर, नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में जिले के विभिन्न गांवों में निजी भूमि से मिट्टी, मुरम और रेत निकासी के मामलों में भी दंडात्मक कार्रवाई की गई। घोतकी निवासी तीरथ पेमचंद काहार पर सावंगा स्थित भूमि में अवैध उत्खनन पाए जाने पर 2 लाख 73 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। वहीं रामाकोना निवासी अशोक भाउराव उपासे पर सुरिया बुरिया क्षेत्र में अवैध खनन के मामले में 4 लाख 8 हजार रुपये का जुर्माना किया गया। इसी प्रकार बोरगांव निवासी विजय देवीलाल प्रजाति पर खैरीतायगांव क्षेत्र में अवैध उत्खनन के लिए 2 लाख 73 हजार रुपये, जबकि काजलवानी में भूमि स्वामी असलमबी हबीबउल्ला और भट्टा संचालक नासिर हबीबउल्ला पर संयुक्त रूप से 4 लाख 35 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। काजलवानी क्षेत्र में ही भूमि स्वामी अजीजउल्ला हबीबउल्ला पर 2 लाख 73 हजार रुपये व रामाकोना निवासी विजय बलवंत वानखेड़े पर 4 लाख 35 हजार रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया गया है। एक माह की मोहलत, फिर होगी राजस्व वसूली प्रशासन ने सभी आरोपितों को निर्धारित अर्थदंड की राशि जमा करने के लिए एक माह का समय दिया है। आदेश में कहा गया है कि तय अवधि में राशि जमा नहीं करने की स्थिति में उसे भू-राजस्व बकाया मानकर वसूला जाएगा। इसके लिए राजस्व वसूली की वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जिलेभर में बढ़ेगी निगरानी सूत्रों के अनुसार, प्रशासन अब जिले के अन्य खनन क्षेत्रों और संवेदनशील इलाकों की भी समीक्षा कर रहा है। अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर नजर रखने के लिए राजस्व, खनिज और पुलिस विभाग के संयुक्त दलों को सक्रिय किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि सख्त कार्रवाई से अवैध खनन पर अंकुश लगेगा और शासन को होने वाले राजस्व नुकसान को रोका जा सकेगा। जिले में हुई इस बड़ी कार्रवाई को प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा माना जा रहा है। करोड़ों रुपए के अर्थदंड ने साफ संकेत दे दिया है कि प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ अब कठोर कदम उठाए जाएंगे।   

मकान में चल रहा था जुए का खेल, पुलिस रेड में 25 लोग दबोचे गए

सिरसा. सीआईए ऐलनाबाद पुलिस टीम ने शहर के चंडीगढ़िया मोहल्ला क्षेत्र में एक मकान पर दबिश देकर बड़े स्तर पर चल रहे जुए के अड्डे का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मौके से मकान मालिक सहित 25 लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 5 लाख 71 हजार 105 रुपये की नकद राशि तथा ताश के पत्ते बरामद किए हैं। पुलिस प्रवक्ता एएसआई राजपाल ने बताया कि सीआईए ऐलनाबाद की पुलिस टीम बीती रात गश्त के दौरान आइटीआइ चौक क्षेत्र में मौजूद थी। इसी दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि चंडीगढ़िया मोहल्ला निवासी दीपक उर्फ काका अपने घर में कई लोगों को इकट्ठा कर बड़े स्तर पर जुआ खिलवा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बताए गए मकान पर दबिश दी। पुलिस को देखकर मौके पर मौजूद लोग भागने का प्रयास करने लगे, लेकिन पुलिस टीम ने घेराबंदी कर सभी को मौके पर ही काबू कर लिया। तलाशी लेने पर आरोपितों के कब्जे से 5 लाख 71 हजार 105 रुपये की नकदी और ताश के पत्ते बरामद किए गए। गिरफ्तार किए गए आरोपितों की पहचान हिसार निवासी महेंद्र, ललित कुमार, बलजिंद्र, चंद्रगोपाल, सुनील, अनिल, शसन, मुकेश, सुरेंद्र, राकेश, राजेश, कालांवाली निवासी गुरदित्ता तथा सिरसा निवासी पवन कुमार, मनोज कुमार, अमन, प्रिंस, सज्जन कुमार, दीपक, योगेश और सौरभ चावला सहित अन्य के रूप में हुई है। पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ थाना शहर सिरसा में जुआ अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।

लाल किले हमले के बाद अलर्ट, दिल्ली पुलिस ने हथियारों संग आतंकी मॉड्यूल पकड़ा

नई दिल्ली  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को फिर से दहलाने की साजिश रची जा रही थी। लेकिन समय से पहले एक्शन लेते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तानी आईएसआई-मुंबई अंडरवर्ल्ड नेटवर्क के इशारे पर काम करने वाले 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन्हें दिल्ली में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने का काम सौंपा गया था। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के अनुसार, इनके पास से हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए हैं। पाकिस्तानी आतंकियों के संपर्क में थे सभी आरोपी दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के मुताबिक ये सभी आरोपी पाकिस्तानी आईएसआई हैंडलर के इशारे पर काम कर रहे थे। उन्हें दिल्ली के हॉटस्पॉट इलाकों में हमला करने का काम सौंपा गया था। इतना ही नहीं सुरक्षाकर्मियों पर भी हमला करने की प्लानिंग थी। इनके पास से कई खतरनाक हथियार और विस्फोटक बरामद हुए हैं। लाल किले हमले के बाद यह गिरफ्तारियां अहम मानी जा रही बता दें कि दिल्ली के लाल किले पर हमले के बाद यह गिरफ्तारियां अहम मानी जा रही हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में, पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा ने जमीनी स्तर पर खुफिया जानकारी जुटाने और उभरते खतरों की पहचान करने के लिए राजधानी के प्रत्येक पुलिस स्टेशन में समर्पित आतंकवाद-विरोधी इकाइयों (सीटीयू) के गठन का आदेश दिया था। सीटीयू को दी गई थी ये जिम्मेदोरी इन इकाइयों को संवेदनशील स्थानों की निगरानी करने, कट्टरपंथी व्यक्तियों का पता लगाने, अस्थाई आबादी की पुष्टि करने और आतंकी गतिविधियों से जुड़े संदिग्धों, गैंगस्टरों और हवाला संचालकों पर नजर रखने का काम सौंपा गया है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि यह कदम खुफिया जानकारी के आधार पर उठाया गया है, जिसमें संकेत मिले हैं कि विदेशों से संचालित आतंकी सरगना भारत में अपने गुर्गों की भर्ती, उन्हें कट्टरपंथी बनाने और मार्गदर्शन करने के लिए एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और स्थानीय स्लीपर नेटवर्क का तेजी से उपयोग कर रहे हैं।  

डॉक्टरों पर हमले के बाद बड़ा असर, डेराबस्सी अस्पताल की OPD बंद कर किया प्रदर्शन

डेराबस्सी. डेराबस्सी पुलिस थाने से महज 100 मीटर की दूरी पर सिविल अस्पताल डेराबस्सी के एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. जोत नूर पर 2 अज्ञात व्यक्तियों द्वारा किए गए हमले ने शहर की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के 24 घंटे बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होने पर सिविल अस्पताल के सभी डॉक्टरों और स्टाफ ने OPD सर्विस बंद कर धरना दिया। जानकारी के अनुसार डॉ. जोत नूर शुक्रवार सुबह अपनी कार जंगलात विभाग के दफ्तर के पास पार्क कर सिविल अस्पताल में ड्यूटी के लिए जा रहे थे। इस दौरान 2 अज्ञात व्यक्ति उनके पास आए और पहले उनका पेशा पूछा। जब डॉक्टर ने एनेस्थीसिया डॉक्टर होने की बात की तो दोनों ने कथित तौर पर उनके साथ धक्का-मुक्की की और मारपीट शुरू कर दी। हमले से घबराए डॉ. जोत नूर तुरंत अपनी गाड़ी में बैठ गए जिसके बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद डॉक्टर ने अपने साथी स्टाफ को जानकारी दी और डेराबस्सी पुलिस को लिखित शिकायत दर्ज करवाई। डॉक्टरों का आरोप है कि शिकायत दर्ज करने के 24 घंटे बाद भी हमलावरों की पहचान करके उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है और न ही अस्पताल के डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कोई खास इंतजाम किए गए हैं। प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने कहा कि हेल्थ वर्कर्स पर लगातार हो रहे हमले चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी डॉक्टरों के साथ बदसलूकी और हमले की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न होने से ऐसे लोगों की हिम्मत बढ़ती जा रही है।

कांवड़ यात्रा के लिए दिल्ली सरकार ने बनाई नई उच्च स्तरीय समिति

नई दिल्ली  मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आगामी कांवड़ यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए उच्च स्तरीय 'कांवड़ समिति' का पुनर्गठन किया है। दिल्ली सरकार के संस्कृति और कानून मंत्री कपिल मिश्रा को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच विधायकों को बतौर सदस्य इसमें शामिल किया गया है। सीएम रेखा गुप्ता ने एक्स पर दी जानकारी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा कि उच्च स्तरीय कांवड़ समिति का पुनर्गठन किया गया है। कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। जबकि अजय माहवार, अनिल शर्मा, करनैल सिंह, संजय गोयल और उमंग बजाज को इस समिति का सदस्य नियुक्त किया गया है। कावड़ शिविरों को दी जाएगी विशेष सहायता मुख्यमंत्री का कहना है कि दिल्ली सरकार इस बार भी शिवभक्तों के लिए सम्मानजनक एवं बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करेगी। इसके लिए कांवड़ शिविरों को विशेष सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल एक पारंपरिक धार्मिक आयोजन मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अटूट सामाजिक समरसता और जनआस्था का एक विराट महोत्सव है। हर शिवभक्त को मिले श्रेष्ठ सुविधाएं उन्होंने कहा कि सावन माह में दिल्ली की सड़कों पर उमड़ने वाला शिवभक्तों का सैलाब देश की सांस्कृतिक एकता को प्रदर्शित करता है। दिल्ली सरकार के लिए कांवड़ व्यवस्थाएं अब सिर्फ कागजी प्रशासनिक कामकाज नहीं रह गई हैं, बल्कि यह पूरी व्यवस्था दिल्ली में सेवा, श्रद्धा और सम्मान का एक अनूठा प्रतीक बन चुकी है। सरकार का मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने वाले हर एक शिवभक्त (कांवड़िए) को अतिथि के रूप में देवतुल्य सम्मान और श्रेष्ठ सुविधाएं मिलें। कपिल मिश्रा संभालेंगे अध्यक्ष की कमान मुख्यमंत्री की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि अध्यक्ष कपिल मिश्रा के नेतृत्व में यह नवगठित समिति जल्द ही दिल्ली के सभी डीएम, दिल्ली पुलिस, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेगी। समिति का मुख्य फोकस रूट मैनेजमेंट, वाटरप्रूफ टेंटों की गुणवत्ता, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता, 24 घंटे निर्बाध बिजली-पानी की आपूर्ति और सुरक्षा चाक-चौबंद रखने पर होगा, ताकि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी यात्रा निर्विघ्न और अभूतपूर्व रूप से संपन्न हो सके। पिछली साल सरकार द्वारा की गईं व्यवस्थाओं का किया जिक्र मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह भी जानकारी दी कि दिल्ली सरकार ने शिवभक्तों की सेवा के लिए पिछले वर्षों की तुलना में अभूतपूर्व और ऐतिहासिक व्यवस्थाएं की थीं। वर्ष 2024 में जहां राजधानी में केवल 170 कांवड़ शिविरों को मंजूरी मिली थी, वहीं वर्ष 2025 में सरकार की ओर से दी गई आसान मंजूरियों के चलते रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई और पूरी दिल्ली में कुल 374 पंजीकृत कांवड़ शिविर लगाए गए। प्रत्येक शिविर को मिलती हैं ये सुविधाएं उन्होंने बताया कि इन शिविरों को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने पुरानी टेंडर प्रथा को खत्म कर सीधे बैंक खातों में (डीबीटी के माध्यम से) 50,000 रुपये से लेकर अधिकतम 11 लाख रुपये तक की पारदर्शी आर्थिक सहायता प्रदान की, जिसका 50 प्रतिशत हिस्सा आयोजन से पहले ही एडवांस के रूप में जारी कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त, समितियों पर वित्तीय बोझ कम करने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार द्वारा प्रत्येक पंजीकृत शिविर को 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली और अस्थाई मीटर के सिक्योरिटी डिपॉजिट में 75 प्रतिशत की छूट भी दी गई थी।