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तमिलनाडु मॉडल अपनाएगा चंडीगढ़ प्रशासन, फाइलों के झंझट से मिलेगी राहत

चंडीगढ़ प्रशासन ने नागरिक सेवाओं को सरल, तेज और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए यूटी में सिंगल विंडो सिस्टम-यूनिफाइड पोर्टल के प्रभावी तरीके से लागू और सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी विभिन्न राज्यों में लागू बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर चंडीगढ़ में लोगो के लिए सुविधाजनक और आधुनिक प्रणाली विकसित करने पर काम करेगी। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जारी कार्यालय आदेश के अनुसार कमेटी का गठन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद किया गया। बैठक में तमिलनाडु सरकार की “सिंपल गव” पहल और डी-रेगुलेशन मॉडल पर चर्चा की गई थी। कमेटी में डिप्टी कमिश्नर निशांत कुमार यादव, सूचना प्रौद्योगिकी सचिव डी. कार्तिकेयन, निदेशक आईटी अविकेश गुप्ता, निदेशक स्कूल शिक्षा नितिश सिंगला और एनआईसी के वरिष्ठ अधिकारी विवेक वर्मा सहित अन्य अधिकारियों को शामिल किया गया है। कमेटी विभिन्न राज्यों में लागू सिंगल विंडो सिस्टम की कार्यप्रणाली का अध्ययन करेगी और चंडीगढ़ के लिए उपयुक्त मॉडल की सिफारिश करेगी। साथ ही विभिन्न सरकारी सेवाओं की प्रक्रिया को सरल बनाने, प्रोसेस री-इंजीनियरिंग करने और अनावश्यक औपचारिकताओं को कम करने पर भी काम किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य नागरिकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से राहत देना और अधिकतर सेवाओं को एकीकृत पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराना है। इससे मंजूरियों और सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, तेज और नागरिक हितैषी बनाने में मदद मिलेगी। क्या है तमिलनाडु का मॉडल प्रशासन यदि तमिलनाडु की सिंपल गव और डी-रेगुलेशन नीति लागू करता है तो नागरिक सेवाओं और उद्योगों को बड़ा लाभ मिल सकता है। इस मॉडल के तहत सिंगल विंडो सिस्टम, आनलाइन मंजूरियां, सेल्फ-सर्टिफिकेशन और अनावश्यक नियमों में कमी से लोगों को दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे। भवन नक्शा, व्यापार लाइसेंस, एनओसी और विभिन्न प्रमाण पत्रों की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो सकती है। इससे भ्रष्टाचार और फाइलों में देरी कम होगी। उद्योगों और कारोबारियों को भी कम समय में मंजूरी मिलने से निवेश बढ़ने तथा “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” में सुधार की संभावना है। DPR लोड करते ही बन जाएगा एस्टीमेट लोकल बॉडीज महकमे की ओर से तैयार कराए गए EPM सॉफ्टवेयर में तमाम तरह की कैलकुलेशन से लेकर एस्टीमेट बनाने तक सबकुछ किया जा सकता है। अब अफसरों को 50 लाख रुपए से अधिक लागत वाले प्रोजेक्ट की DPR तैयार कर उसे EPM सॉफ्टवेयर में अपलोड करना होगा। उसके बाद सॉफ्टवेयर खुद ही पहले से फीड आइटम और रेट्स के अनुसार एस्टीमेट तैयार कर देगा। अधिकारियों को सॉफ्टवेयर में सिर्फ आइटम के कोड सिलेक्ट करने होंगे। भागदौड़, कागज, पैसा और समय सबकुछ बचेगा लोकल बॉडीज महकमे में EPM सॉफ्टवेयर लागू होने के बाद सबसे बड़ी राहत अधिकारियों को मिलेगी। उन्हें DPR तैयार कर उसकी फाइल लेकर चंडीगढ़ तक दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। चंडीगढ़ के चक्कर लगाने में लगने वाला उनका समय और पैसा-दोनों बचेंगे। एस्टीमेट ऑनलाइन चंडीगढ़ मुख्यालय जाने से कागज-स्टेशनरी भी बचेगी। काम शुरू होने के बाद ही पता चलेगी कमियां EPM सॉफ्टवेयर की कमियों के बारे में पूछे जाने पर अधिकारियों ने कहा कि अभी तो सिस्टम लॉन्च हुआ है। जब इस पर काम शुरू होगा, तब धीरे-धीरे इसके बाकी फंक्शन वगैरह पता लगेंगे। उसके बाद अगर किसी तरह की कोई कमी सामने आएगी तो उसे संबंधित प्लेटफॉर्म पर रखा जाएगा। ठेकेदारों को एक करोड़ से ऊपर का भुगतान अब सिर्फ ऑनलाइन अभी तक लोकल बॉडीज महकमे में जिन ठेकेदारों के काम एक करोड़ रुपए से ऊपर के होते थे, उन्हें अपनी पेमेंट के लिए बिल और वर्क कम्प्लीशन की फाइल पास कराने के लिए चंडीगढ़ ले जानी पड़ती थी। इसमें भ्रष्टाचार की गुंजाइश रहती थी। अब ये सारी जानकारी EPM सॉफ्टवेयर की मार्फत एसडीओ, एक्सईएन, एसई से होते हुए आगे तक जाएगी। हर अधिकारी देख पाएगा कि संबंधित पेमेंट को लेकर किसने क्या रिमार्क दिया है। पेमेंट को मंजूरी मिलने के बाद ठेकेदारों को भुगतान भी ऑनलाइन होगा।

शहरी-ग्रामीण मुकाबले में बदलता ट्रेंड: प्रशासनिक सेवाओं में गांवों की बढ़त

 अजमेर  राजस्थान लोक सेवा आयोग की प्रशासनिक सेवा में ग्रामीण अभ्यर्थियों का चयन हो रहा है। वह शहरी युवाओं को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। हालिया आरएएस भर्ती 2024 में 52.36 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र के अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। पिछली भर्तियों में भी ग्रामीण परिवेश के अभ्यर्थियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। आरएएस भर्ती-2024 में 52.36 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों से चयन हुआ है। आरएएस एवं अधीनस्थ सेवा आयोग की सबसे प्रतिष्ठित भर्तियों में शामिल है। एक तरफ आवेदनों की संख्या बढ़ रही है। दूसरी तरफ चयन ग्राफ भी तेजी से बदल रहा है। आरएएस 2024 में अनुशंसित 2391 में 1255 अभ्यर्थी ग्रामीण और 1136 शहरी क्षेत्रों के हैं। आरएएस 2023 में 2166 अनुशंसित अभ्यर्थियों में से 1210 (55.86 प्रतिशत) अभ्यर्थी ग्रामीण और 956 (44.14 प्रतिशत) अभ्यर्थी शहरी पृष्ठभूमि के थे। चयन में युवाओं का दबदबा साक्षात्कार के लिए सफल 21 से 25 साल के 725 अभ्यर्थी (30.25 प्रतिशत), 26 से 30 वर्ष के 891 (37.17 प्रतिशत), 31 से 33 वर्ष के 304 (12.68 प्रतिशत) सफल रहे हैं। इनके अलावा 31 से 33 वर्ष के 405 (16.90 प्रतिशत), 41 से 45 वर्ष के 62 (2.59 प्रतिशत), 46 से 50 वर्ष के 10 (0.42 प्रतिशत) अभ्यर्थी चयनित हुए हैं। पिछली भर्तियों में चयनित आरएएस 2012: 1211 पद-937 शहरी, 274 ग्रामीण आरएएस 2013 में 723 पद-505 शहरी, 218 ग्रामीण आरएएस-2016 में 725 पद-513 शहरी, 212 ग्रामीण आरएएस-2018 में 1051 पद-651शहरी, 400 ग्रामीण आरएएस-2021 में 988 पद-566 शहरी, 422 ग्रामीण शैक्षिक योग्यता में बढ़ोतरी 2024 में साक्षात्कार के लिए सफल 2397 में से करीब 1888 प्रथम श्रेणी हैं। इसके अलावा 39.60 प्रतिशत पीजी हैं। इनमें 14 डॉक्टर, 15 एलएलबी-एलएलएम, 10 एमबीए और 238 इंजीनियर साक्षात्कार तक पहुंचे। 2023 में चयनित 2166 अभ्यर्थियों में से 1707 अभ्यर्थी स्नातक स्तर पर प्रथम श्रेणी, 837 अभ्यर्थी पोस्ट-ग्रेजुएट थे। 2021 में करीब 550 प्रथम श्रेणी, 2018 में 715, 2016 में 500, 2013 में 550 अभ्यर्थी प्रथम श्रेणी उत्तीर्ण थे। एक्सपर्ट कमेंट शहरी इलाकों में सरकारी नौकरी के अलावा कॉरपोरेट क्षेत्र में नौकरियों के पैकेज,व्यापार, स्टार्ट अप के विकल्प होते हैं। ग्रामीण इलाकों में कई मामलों में संसाधनों की कमी होती है। सरकारी नौकरी उन्हें सबसे अच्छा विकल्प लगता है। इससे ग्रामीण प्रतिभाएं मेहनत कर आगे बढ़ रही हैं।     प्रो. सुभाषचंद्र, जूलॉजी विभागाध्यक्ष मदस विवि

रांची, धनबाद समेत चार जिलों में बिजली गिरने से कहर, एक बच्ची समेत 5 की जान गई

रांची झारखंड के चार जिलों में पिछले 24 घंटों में बिजली गिरने से एक लड़की और दो महिलाओं सहित पांच लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को गढ़वा जिले से दो मौतें और रांची, धनबाद और बोकारो से एक-एक मौत की सूचना मिली। अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को रांची के इटकी पुलिस स्टेशन क्षेत्र के कुल्ली गांव में अपने माता-पिता के साथ पेड़ से आम तोड़ रही 12 वर्षीय लड़की अश्रिता की बिजली गिरने से मौत हो गई। उन्होंने बताया कि उसके माता-पिता घायल हो गए और उन्हें स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। वहीं गढ़वा में कंडी पुलिस स्टेशन क्षेत्र के गराखुर्द गांव में बिजली गिरने से 45 वर्षीय महिला की मौत हो गई, जबकि बानाजंघा गांव में 32 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि धनबाद के राजगंज पुलिस थाना क्षेत्र के चुंगी गांव में 44 वर्षीय महिला की मौत हो गई, जबकि बोकारो के पिंडराजोरा पुलिस थाना क्षेत्र के बाबूडीह गांव में बिजली गिरने से 21 वर्षीय युवक की जान चली गई। शुक्रवार को झारखंड के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश और बिजली गिरने से शनिवार सुबह तक अधिकतम तापमान में गिरावट आई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रांची, रामगढ़, बोकारो, कोडरमा, गिरिडीह, धनबाद और गोड्डा सहित 13 जिलों के लिए रविवार सुबह 8:30 बजे तक गरज के साथ बारिश की ऑरेंज अलर्ट जारी की है। रांची मौसम विज्ञान केंद्र के उप निदेशक अभिषेक आनंद ने बताया कि मौसम में यह बदलाव दो निम्न दबाव प्रणालियों के कारण हुआ है। उन्होंने कहा कि झारखंड में अधिकतम तापमान में 7 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है। अगले चार दिनों में तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की संभावना है। शुक्रवार को डाल्टनगंज में अधिकतम तापमान 34.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य तापमान से 6.2 डिग्री कम था। वहीं, चाईबासा में 33.4 डिग्री सेल्सियस और रांची में 27.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

अवैध कब्जों पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, बहराइच में मदरसा और 11 दुकानें ध्वस्त

बहराइच उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की पयागपुर तहसील के सिंहपुर गांव में प्रशासन ने ग्राम सभा की जमीन पर किए गए अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बुल्डोजर चलाया. कोर्ट के आदेश पर तहसीलदार अंबिका चौधरी के नेतृत्व में राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने ग्राम सभा की बंजर भूमि पर बने 11 अवैध दुकानों और एक मदरसे को ध्वस्त कर दिया. कार्रवाई के दौरान इलाके में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।  ग्राम सभा की जमीन पर लंबे समय से था कब्जा जानकारी के अनुसार सिंहपुर गांव में ग्राम सभा की बंजर भूमि पर लंबे समय से अवैध कब्जा कर कुछ लोगों द्वारा दुकानें और एक मदरसा संचालित किया जा रहा था. इस संबंध में मामला न्यायालय में विचाराधीन था. न्यायालय से अतिक्रमण हटाने का आदेश मिलने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी थी. निर्धारित कार्यक्रम के तहत राजस्व विभाग, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों की टीम मौके पर पहुंची और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।  कार्रवाई के दौरान बुल्डोजर की मदद से एक-एक कर सभी अवैध निर्माणों को गिराया गया. प्रशासन की टीम ने पहले संबंधित लोगों को न्यायालय के आदेश और कार्रवाई की जानकारी दी. जिसके बाद बुल्डोजर चलाकर कब्जा हटाया गया. किसी भी तरह के विरोध या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. हालांकि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई और किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या सामने नहीं आई।  तहसीलदार अंबिका चौधरी ने बताया कि ग्राम सभा की भूमि सार्वजनिक संपत्ति होती है और उस पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण या कब्जा कानूनन गलत है. उन्होंने कहा कि न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए यह कार्रवाई की गई है. प्रशासन का उद्देश्य सरकारी और सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना है, ताकि उसका उपयोग जनहित के कार्यों के लिए किया जा सके।  प्रशासन बोला आगे भी अतिक्रमण के खिलाफ ऐसे होगी कार्रवाई उन्होंने यह भी कहा कि जिले में ग्राम सभा और अन्य सरकारी जमीनों पर किए गए अवैध कब्जों की पहचान की जा रही है. जहां-जहां अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा न करें और यदि कहीं अतिक्रमण है तो उसे स्वयं हटा लें।  प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद गांव में चर्चा का माहौल है. स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्राम सभा की जमीन को कब्जामुक्त कराने की मांग लंबे समय से उठ रही थी. अब कार्रवाई होने के बाद जमीन को सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित किया जा सकेगा. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी अतिक्रमण के खिलाफ अभियान जारी रहेगा और किसी भी अवैध कब्जाधारी को बख्शा नहीं जाएगा। 

हवाई अड्डों की सुरक्षा बढ़ी, बिहार के 20 शहरों में निर्माण कार्यों पर नए नियम लागू

मुजफ्फरपुर. बिहार में हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने और विमानों के सुरक्षित परिचालन को लेकर नीतीश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुजफ्फरपुर के पताही समेत राज्य के कुल 20 शहरों में बनने वाले और वर्तमान में चालू एयरपोर्ट के आसपास अब किसी भी तरह के अनियंत्रित निर्माण पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अब इन चिन्हित हवाई अड्डों के आसपास बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के कोई भी ऊंची इमारत या संरचना नहीं बनाई जा सकेगी। सिविल विमानन विभाग के सचिव डॉ. निलेश रामचंद्र देवरे ने मुजफ्फरपुर समेत राज्य के सभी संबंधित जिलाधिकारियों (DM) को इस बाबत एक आधिकारिक पत्र भेजा है। पत्र में साफ कहा गया है कि विमानों के सुरक्षित टेक-ऑफ और लैंडिंग, हवाई अड्डे की सुरक्षा, रनवे के विस्तार और आधुनिक नेविगेशनल सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए हवाई पट्टियों के आसपास के क्षेत्रों पर पैनी नजर रखी जाए। किसी भी नए निर्माण को मंजूरी देने से पहले विमानन सुरक्षा मानकों और भविष्य की जरूरतों का आकलन करना अनिवार्य होगा। पताही से उड़ान की उम्मीदें हुईं तेज हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुजफ्फरपुर के पताही हवाई अड्डे पर रनवे और टर्मिनल के निर्माण कार्य को जल्द से जल्द शुरू करने के निर्देश दिए थे। इस निर्देश के बाद से स्थानीय लोगों में मुजफ्फरपुर से हवाई सफर शुरू होने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। सरकार की इस नई बंदिश को भी इसी तैयारी का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है ताकि भविष्य में बड़े विमानों की आवाजाही में कोई तकनीकी या सुरक्षा संबंधी अड़चन न आए। इन शहरों में एयरपोर्ट विस्तार का काम वर्तमान में बिहार के पटना, गयाजी, दरभंगा और पूर्णिया से विमान सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं। इसके अलावा मुजफ्फरपुर के पताही सहित राज्य के 20 अन्य शहरों में एयरपोर्ट और हवाई पट्टियों के विस्तार का काम तेजी से चल रहा है। विभाग के मुताबिक, इन सभी जगहों से भविष्य में कमर्शियल और घरेलू विमानों की उड़ानें संभावित हैं। टावर और ऊंची इमारतों की निगरानी विमानन सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि हवाई मार्ग और रनवे के आसपास विमान परिचालन में बाधा बनने वाले ऊंचे भवनों, मोबाइल टावर या अन्य किसी भी तरह के ऊंचे निर्माण की लगातार निगरानी की जाए। अगर कोई अवैध या बिना अनुमति के ऐसी संरचना खड़ी करता है, तो उस पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।

भीषण गर्मी के चलते पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, पूरे जून बंद रहेंगे स्कूल-अंगनबाड़ी

मोहाली. पंजाब में पड़ रही तेज गर्मी व हीट वेव के रेड अलर्ट को देखते हुए सरकार ने राज्य के सारे सरकारी व निजी स्कूलों में 1 जून से 30 जून तक छुटि्टयों का ऐलान कर दिया गया। यह घोषणा सीएम भगवंत मान की तरफ से की गई है। इसके बाद सारी स्थितियों को देखकर यह फैसला लिया गया है। वहीं शिक्षा विभाग की तरफ से इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस दौरान टीचिंग, नॉन टीचिंग काडर से संबंधित अधिकारी कर्मचारी चुनाव ड्यूटी व चुनाव स्थिति व्यवस्था में लगी ड्यूटी निभाने को यकीनी बनाएंगे। इससे पहले एक जून से गर्मी की छुटि्टयों से संबंधित आदेश जारी किए गए थे, जो कि 30 जून तक है। स्कूलों का पहले बदला था समय इससे पहले गत सप्ताह शिक्षा विभाग की तरफ से राज्य में पड़ रही गर्मी और हीट वेव के अलर्ट को लेकर मंथन किया गया गया था। साथ ही स्कूलों के समय बदलने संबंधी आदेश जारी किए थे। उस समय तय हुआ था 20 मई से 30 मई तक स्कूल सुबह 7 बजे से 12 बजे तक खुलेंगे। जबकि डबल शिफ्ट वाले स्कूलों का समय सुबह सवा दस बजे से दोपहर 1.15 बजे तक कर दिया गया था। पंजाब के आंगनवाड़ी सेंटरों में 30 तक हुई छुटि्टयां पंजाब में पड़ी रही तेज गर्मी व लू के चलते पंजाब सरकार ने आंगनवाड़ी सेंटरों में भी छुटि्टयां कर दी हैं। अब सेंटर 21 मई से 30 जून तक बंद रहेंगे। आंगनवाड़ी सेंटरों में तीन से छह साल तक के बच्चे आते हैं। इनकी देखभाल करना काफी मुश्किल होती है। इसके चलते सरकार की तरफ से यह फैसला लिया गया है। वहीं, आंगनबाड़ी वर्करों को इस दौरान होम विजिट करना होगा। साथ ही बच्चों को टेक होम राशन मुहैया करवाया जाएगा। विभाग द्वारा मांगी जाने वाली रिपोर्ट भी तय समय पर भरी जाएगी। गर्मी से बचना है तो इन चीजों का रखें ध्यान शिक्षा विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि इस मौसम में ज्यादा पानी का पीना चाहिए। अगर आप दिल, किडनी या लीवर की बीमारियों से पीड़ित हैं और कम पानी पीते हैं। ऐसे लोग डॉक्टरी सलाह के बाद तरल पदार्थ का सेवन करें। ओआरस के घोल का प्रयोग करने का सुझाव भी दिया गया है। इसी तरह घरों में तैयार किए जाने वाले तरल पदार्थ जैसे ही नींबू पानी, लस्सी, नारियल पानी आदि तरल पदार्थ का प्रयोग किया जा सकता है। वहीं, हमेशा ही हलके फीके रंग के कपड़े पहन बाहर जाए और डार्क कलर के कपड़े पहनने से परहेज करें। घर से बाहर जाने के लिए सिर और हाथों को अच्छी तरह ढक कर निकलना चाहिए। टोपी और छाते का प्रयोग करना चाहिए। आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा व चमड़ी की सुरक्षा के लिए सनस्क्रीन का प्रयोग करें।

धमतरी में उर्वरक वितरण सुदृढ़ करने प्रशासन और विक्रेताओं के बीच हुआ संवाद

धमतरी. आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए किसानों को समय पर एवं निर्धारित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के निर्देशन में कृषि विभाग एवं उर्वरक विक्रेताओं की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत धमतरी गजेन्द्र ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उर्वरक भण्डारण एवं वितरण से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा कर समाधानोन्मुख पहल की गई। बैठक में कृषि विभाग के अधिकारियों ने उपस्थित थोक एवं फुटकर उर्वरक विक्रेताओं को शासन द्वारा निर्धारित मानकों एवं कीमतों के अनुरूप किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही बताया गया कि जिले में उर्वरक वितरण व्यवस्था पर सतत निगरानी रखी जा रही है तथा निरीक्षण एवं उड़नदस्ता दल नियमित रूप से जांच कर रहे हैं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी, निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर विक्रय, अन्य वस्तुओं की अनिवार्य टैगिंग अथवा वितरण संबंधी किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बैठक में उपस्थित विक्रेताओं ने प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पूर्ण पालन करने तथा किसानों के हित में सहयोगात्मक भूमिका निभाने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर उर्वरक विक्रेताओं ने क्रय-विक्रय प्रक्रिया से जुड़ी अपनी व्यावहारिक समस्याओं एवं सुझावों को भी साझा किया। प्रशासन ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए त्वरित संज्ञान लिया तथा आवश्यक विषयों पर शासन स्तर पर पत्राचार कर समाधान की पहल की है। इस सकारात्मक संवाद से उर्वरक वितरण व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, सुगम एवं किसान हितैषी बनाने में मदद मिलेगी। बैठक में उप संचालक कृषि मोनेष कुमार साहू, अनुविभागीय कृषि अधिकारी मनोज सागर, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, उर्वरक निरीक्षक तथा विकासखंड धमतरी, कुरूद, मगरलोड एवं नगरी के बड़ी संख्या में थोक एवं फुटकर उर्वरक विक्रेता उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा – हर जरूरतमंद परिवार को सम्मानजनक पक्का आवास उपलब्ध कराना हमारी सरकार की प्राथमिकता

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण को मिली नई गति : जिलों को 2677 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा – हर जरूरतमंद परिवार को सम्मानजनक पक्का आवास उपलब्ध कराना हमारी सरकार की प्राथमिकता प्रतिदिन 1600 से अधिक पक्के आवास निर्माण, ढाई वर्षों में 10.60 लाख से अधिक घर पूर्ण- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  भवन सामग्री आपूर्ति से जुड़कर 10 हजार से अधिक महिलाएं बनीं 'लखपति दीदी' रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के प्रभावी क्रियान्वयन को नई गति मिली है। राज्य शासन द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत आवास निर्माण कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से राज्य के सभी जिलों को 2677.15 करोड़ रुपए की केंद्रीय एवं राज्यांश राशि जारी की गई है। यह राशि एसएनए स्पर्श (SNA SPARSH) मॉड्यूल के माध्यम से जिलों को आवंटित की गई है, ताकि पात्र हितग्राहियों के आवास निर्माण कार्य समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरे किए जा सकें। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में “हर गरीब को पक्का घर” का संकल्प छत्तीसगढ़ में तेजी से साकार हो रहा है। हमारी सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि प्रदेश का कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित न रहे। पक्का घर केवल चार दीवारें नहीं, बल्कि एक परिवार के सम्मान, सुरक्षा, स्थायित्व और बेहतर भविष्य की मजबूत नींव है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत आवास निर्माण का कार्य तेजी से संचालित किया जा रहा है। राज्य में प्रतिदिन 1600 से अधिक पक्के आवासों का निर्माण किया जा रहा है तथा विगत ढाई वर्षों में 10.60 लाख से अधिक आवास पूर्ण कराए जा चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही 6 लाख से अधिक आवासों का निर्माण कर छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों गरीब परिवारों के सपनों, आत्मसम्मान और सुरक्षित जीवन की कहानी है। मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जारी राशि का उपयोग प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप करते हुए पात्र हितग्राहियों के आवास शीघ्र पूर्ण कराए जाएं, ताकि प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को समय पर सुरक्षित एवं सम्मानजनक पक्का आवास उपलब्ध कराया जा सके। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि योजना के क्रियान्वयन में महिला स्व-सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रदेश में हजारों स्व सहायता समूह सामग्री आपूर्ति से जुड़कर आजीविका अर्जित कर रहे हैं, इनमें से 10 हजार से अधिक महिलाएं 'लखपति दीदी’ बनीं हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला सशक्तीकरण, आजीविका संवर्धन और सामाजिक परिवर्तन का भी माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल प्रभावित परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। ऐसे परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराकर उनके जीवन में सुरक्षा, स्थायित्व और विश्वास का नया वातावरण तैयार किया जा रहा है।     उन्होंने कहा कि प्रदेश में नवाचार के तहत 1.5 लाख से अधिक आवासों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित किया गया है, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही हितग्राहियों की शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-233-1290 संचालित की जा रही है तथा योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायतों में क्यूआर कोड भी प्रदर्शित किए गए हैं।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार सुशासन, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

ट्विशा केस: गिरिबाला सिंह के बयान से मचा हड़कंप, स्टेटस और स्किल ने बढ़ाई CBI की चिंता

भोपाल  ट्विशा शर्मा डेथ केस में भोपाल की पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह कानून के शिकंजे में हैं। कोर्ट ने उन्हें 5 दिन की रिमांड पर सीबीआई को सौंप दिया है। देशभर में सुर्खियोें में आने के बाद इस केस की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी यानि सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई के जांच अधिकारी मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे ट्विशा के पति समर्थ सिंह से कई घंटों की पूछताछ कर चुके हैं। इस दौरान सीबीआई अधिकारियों द्वारा उनपर उठे एक सवाल पर पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने स्वीकारोक्ति भी की। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने उनसे कहा कि आप खुद एक जिम्मेदार न्यायिक अधिकारी रह चुकीं हैं, ऐसे में मामले में बेटे समर्थ को फरार क्योें होने दिया! इस पर गिरिबाला सिंह ने माना कि हम दोनों से यह गलती तो हुई है। बयानों के साथ ही साक्ष्य जुटाने के काम में भी लगी सीबीआई एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सास रिटायर्ड जज गिरिबाला को रिमांड पर लेने के बाद सीबीआई फिर पूछताछ में जुट गई है। उन्हें बेटे समर्थ सिंह के साथ बैठाकर सवाल जवाब किए जाने की तैयारी चल रही है। सीबीआई बयानों के साथ ही साक्ष्य जुटाने के काम में भी लगी है। मुद्दे पर अपनी गलती स्वीकार कर ली सीबीआई की पूछताछ के दौरान गिरिबाला सिंह ने एक बड़ी बात कही। शुरुआती ना नुकुर के बाद उन्होंने एक मुद्दे पर अपनी गलती स्वीकार कर ली। गिरिबाला सिंह, जिला एवं सत्र न्यायाधीश जैसे अहम पद पर रह चुकी हैं। इसी बात का उल्लेख करते हुए सीबीआई ने उनसे बेटे समर्थ सिंह की फरारी की वजह पूछी थी जिसपर पूर्व जज ने मान लिया कि यह हमारी गलती थी। बेटा समर्थ सिंह फरार कैसे और क्यों हो गया? दरअसल जांच अधिकारियों ने गिरिबाला सिंह से सीधा सवाल किया कि आप अहम न्यायिक पदों पर रही हैं, नियम-कानूनों की आपको हर जानकारी है। ऐसे में भी 12 मई को बहू ट्विशा शर्मा की मौत के बाद बेटा समर्थ सिंह फरार कैसे और क्यों हो गया? इस सवाल पर गिरिबाला सिंह पहले तो कुछ असहज हुईं लेकिन बाद में इसे गलती के रूप में स्वीकार कर लिया। उन्होंने यह स्पष्टीकरण भी दिया कि वे परिस्थितियों का ठीक से अंदाजा नहीं लगा सकीं थीं। डरे सीबीआई अधिकारी, 5 वजहों से घिरीं सीबीआई ने भोपाल की पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 5-5 दिन की रिमांड पर ले लिया है। भोपाल कोर्ट ने शुक्रवार को दोनों को 2 जून तक के लिए सीबीआई को सुपुर्द कर दिया। ट्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह करीब पौने दो साल तक भोपाल की जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर रहीं हैं। इतना ही नहीं, वे क्राइम सीन मैनेजमेंट में भी दक्ष हैं। गिरिबाला सिंह के इस स्टेटस और स्किल का हवाला देते हुए ही सीबीआई ने उनका रिमांड मांगा। जांच अधिकारियों को डर है कि बाहर रहकर वे सबूतों और गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं। कोर्ट ने उनके तर्क स्वीकार कर लिए। 7 दिन की रिमांड मांगी पर कोर्ट ने 5 दिन की ही मंजूरी दी सीबीआई ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को भोपाल जिला कोर्ट में पेश किया यहां जस्टिस शोभना भलावे की अदालत के समक्ष वे दो घंटे से ज्यादा कठघरे में खड़ी रहीं। सीबीआइ कोर्ट से पूछताछ के लिए 7 दिन की रिमांड मांगी पर कोर्ट ने 5 दिन की ही मंजूरी दी। मायके वालों ने दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया बता दें कि ट्विशा शर्मा की कटारा हिल्स स्थित आवास पर जब संदिग्ध हालात में मौत हुई तब सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह की घर पर मौजूद थे। दोनों ने कहा कि ट्विशा ने सुसाइड की जबकि मायके वालों ने दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया। पहले समर्थ सिंह और बाद में गिरिबाला सिंह को कोर्ट में पेश किया पहले सीबीआइ ने समर्थ सिंह और बाद में गिरिबाला सिंह को कोर्ट में पेश किया। बेटे को यहां दोपहर 12.35 बजे लाया गया जबकि 10 मिनट बाद पूर्व जज को लाए। आशंका जताई कि यदि रिमांड पर नहीं रहीं तो जांच प्रभावित कर सकती हैं सीबीआइ ने रिमांड के लिए गिरिबाला सिंह के स्टेटस और स्किल को आधार बनाया। अधिकारियों ने कोर्ट में आशंका जताई कि यदि रिमांड पर नहीं रहीं तो इनके बल पर वे जांच प्रभावित कर सकती हैं। 15 जुलाई 2021 से 28 फरवरी 2023 तक भोपाल की जिला जज रहीं अदालत से सीबीआई ने कहा कि गिरिबाला बड़े न्यायिक पद पर रहीं हैं। उन्होंने गुजरात से क्राइम सीन मैनेजमेंट की ट्रेनिंग भी ले रखी है। ऐसे में गिरिबाला सिंह को बाहर रखने से साक्ष्य प्रभावित कर सकती हैं। इसका बचाव पक्ष के वकीलों ने विरोध नहीं किया। बता दें कि 15 जुलाई 2021 से 28 फरवरी 2023 तक गिरिबाला सिंह भोपाल की जिला जज रहीं हैं। इस प्रकार वे करीब 19 माह तक यहां पदस्थ थीं। इन 5 आधारों पर जांच एजेंसी ने मांगा रिमांड सीबीआइ ने तर्क दिया, गिरिबाला सिंह बड़े न्यायिक पद पर रहीं हैं। यदि रिमांड पर नहीं रहीं तो जांच प्रभावित कर सकती हैं। जिला कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत के बाद लगातार घटनाक्रम को लेकर वे मीडिया में बनी रहीं। गिरिबाला सिंह ने केस को दूसरी ओर मोल्ड करने की भरपूर कोशिश की है। पूर्व जज गिरिबाला सिंह क्राइम मैनेजमेंट में दक्ष हैं, उन्होंने गुजरात से क्राइम सीन मैनेजमेंट की ट्रेनिंग ले रखी है। सीबीआई ने कोर्ट से कहा कि गिरिबाला सिंह को बाहर रखने से वे साक्ष्य प्रभावित कर सकती है। इसका बचाव पक्ष के वकीलों ने विरोध नहीं किया।

AAP सरकार का बड़ा दावा, किसानों के खेतों तक पहुंचाया गया रिकॉर्ड 21,000 क्यूसिक पानी

जालंधर  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने  संत बाबा अवतार सिंह जी की 38वीं सालाना बरसी संबंधी आयोजित समागम के दौरान गांव सीचेवाल में माथा टेका। इस मौके पर एक प्रगतिशील और आत्मनिर्भर पंजाब का सपना देखते हुए भगवंत सिंह मान ने राज्यसभा सदस्य संत बलवीर सिंह सीचेवाल के साथ संत अवतार सिंह मेमोरियल हॉकी स्टेडियम में एक नए एस्ट्रोटर्फ का उद्घाटन किया। आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की ओर से खेल बुनियादी ढांचे, सिंचाई, भूजल रिचार्ज और लोक कल्याण संबंधी किए गए उपायों को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरकार ने खेतों तक 21,000 क्यूसिक पानी पहुंचाया है, जो दो भाखड़ा नहरों के बराबर है। पर्यावरण अनुकूल उपायों से 21 लाख क्यूबिक मीटर पानी भूमिगत रिचार्ज करने में मदद मिली है, जिससे कई क्षेत्रों में पानी के स्तर में 2 से 4 मीटर की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि पंजाब विश्व स्तरीय सरकारी स्कूलों, अस्पतालों, सड़कों और खेल सुविधाओं के माध्यम से तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि एक जीवंत “रंगला पंजाब” के रंग अब पूरे राज्य में दिखने शुरू हो गए हैं। इस मौके पर भारी भीड़ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब की धरती बहुत उपजाऊ है और यहां नफरत और वैर के अलावा सब कुछ उग सकता है। पंजाब महान गुरुओं, संतों और पैगंबरों की पवित्र धरती है, जिन्होंने हमें आपसी प्यार और सहिष्णुता का रास्ता दिखाया है। लोगों के बीच सामाजिक ताने-बाने पहले से ही बहुत मजबूत हैं और इसे और मजबूत करने के लिए सभी को एकजुट होना चाहिए।” उन्होंने कहा, “यह सही समय है कि पंजाबी एकजुट होकर फूट डालने वाली ताकतों को उचित जवाब दें जो राज्य की शांति, सद्भावना और भाईचारे की साझेदारी को नुकसान पहुंचाना चाहती हैं। जो लोग भाईचारे की सद्भावना को भंग करने की कोशिश कर रहे हैं, वे पंजाब के दुश्मन हैं क्योंकि वे राज्य को फिर से अंधेरे में धकेलना चाहते हैं। ये ताकतें सांप्रदायिक झगड़ा पैदा करके सत्ता हासिल करना चाहती हैं, लेकिन उनकी संकीर्ण चालें सफल नहीं होंगी क्योंकि पंजाब के लोग हर मौके पर एकजुट रहते हैं।” लोगों को एकजुट रहने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “कुछ राजनीतिक पार्टियां धर्म के नाम पर लोगों में फूट डालने की कोशिश कर रही हैं। उनकी राजनीति समुदायों में विभाजन पैदा करने और फिर वोटों के लिए दोनों पक्षों को डराने पर केंद्रित है। लोगों को ऐसी राजनीति से सतर्क रहना चाहिए। ये लोग जाति और धर्म के आधार पर समाज को बांटकर नफरत फैलाते हैं, लेकिन ‘आप’ ऐसी राजनीति में विश्वास नहीं रखती।” गुरबाणी की तुक “पवणु गुरू पानी पिता माता धरति महतु” का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “महान गुरुओं ने हवा को गुरु, पानी को पिता और धरती को माता का दर्जा दिया था। गुरु साहिब ने आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति का सम्मान करने की शिक्षा दी थी, लेकिन बदकिस्मती से मनुष्य प्रकृति को सुरक्षित रखने में असफल रहा है। अब समय आ गया है कि गुरबाणी की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाया जाए और पर्यावरण बचाने का संकल्प लेकर पंजाब की शान को बहाल किया जाए।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य सरकार इस नेक कार्य के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही है और लोगों को ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाकर सरकार का साथ देना चाहिए। मैं हमेशा धार्मिक और आध्यात्मिक नेताओं से मिलने के लिए उत्सुक रहता हूं क्योंकि उनका काम कभी भी सांसारिक या सरकारी पदों से संबंधित नहीं होता। वे धार्मिक स्थानों तक जाने वाली सड़कें बनाने, संगत के लिए शेड बनाने, श्रद्धालुओं के लिए लंगर का प्रबंध करने, नहरों और पानी की नालियों की सफाई करने, पर्यावरण की रक्षा करने और मानवता की निस्वार्थ सेवा करने की बात करते हैं। यह बेहद गर्व और संतोष की बात है कि प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी और राज्यसभा सदस्य संत बाबा बलवीर सिंह जी सीचेवाल, ‘सीचेवाल मॉडल’ के माध्यम से बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं।” पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा, “38 साल पहले, यह जगह रेत के टीबों से ढकी हुई थी जहां मूंगफली और छोटी फसलें उगती थी। बाबा जी के प्रयासों से, यह जगह अब हरे-भरे पर्यावरण में बदल गई है। यहां हजारों पेड़ और सैकड़ों किस्मों के पौधे लगाए गए हैं। ये पेड़ पूरे फल और छांव प्रदान करते हैं और लोग नर्सरी से पौधे लेने यहां आते हैं।” उन्होंने कहा, “प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के लिए सिर्फ कुछ समर्पित आत्माएं ही प्रयासरत हैं और पंजाब भाग्यशाली है कि संत बाबा बलवीर सिंह जी उनमें से एक हैं। जब भी बाबा जी संसद में बोलते हैं, कोई उन्हें नहीं रोकता क्योंकि हर कोई जानता है कि वे हमेशा समाज, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए बोलते हैं। बहुत कम लोगों को ऐसी बहुमूल्य सेवा करने का मौका मिलता है और बाबा जी ने हमेशा मानवता, ईमानदारी से जीवन जीने, मिलजुलकर रहने और नेकी का संदेश फैलाया है।” मुख्यमंत्री ने कहा, “हाल के वर्षों में गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी से संबंधित कई घटनाएं हुई हैं। हर कुछ दिनों बाद सड़कों पर, कूड़े के ढेरों में या अपमानजनक स्थितियों में फटे या जले हुए अंगों की दिल दहला देने वाली खबरें सामने आई हैं। यह बेहद दुखदाई था, लेकिन दुख और भी गहरा हो गया जब दोषियों को कोई ठोस कानून न होने और खामियों के कारण जमानत पर रिहा कर दिया गया।” उन्होंने आगे कहा, “इस मामले पर संपूर्ण संत समाज से सलाह-मशविरा करने, अमृतसर और चंडीगढ़ में मीटिंगें करने और वकीलों तथा सेवानिवृत्त जजों से चर्चा करने के बाद राज्य सरकार ने बिना किसी ढिलाई के ‘बेअदबी’ के खिलाफ एक सख्त कानून बनाया। वाहेगुरु ने मुझे जागत जोत गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का बल बख्शा, जिसमें ‘बेअदबी’ के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। इस कानून के तहत बेअदबी की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को 10 साल से लेकर उम्र कैद तक की सजा के साथ-साथ 50 लाख रुपए का जुर्माना भी हो सकता है।” मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “अगर दोषी जुर्माना नहीं भर सकता, तो उनकी … Read more