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गोरखपुर में लगातार दूसरे दिन जनता दर्शन में सीएम योगी ने सुनीं करीब 150 लोगों की समस्याएं

सुनिश्चित होगा हर व्यक्ति की समस्या का समाधान : मुख्यमंत्री गोरखपुर में लगातार दूसरे दिन जनता दर्शन में सीएम योगी ने सुनीं करीब 150 लोगों की समस्याएं मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश, तत्परता और संवेदनशीलता से कराएं समस्याओं का निराकरण गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान लगातार दूसरे दिन, बुधवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न जिलों से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान के प्रति आश्वस्त किया। उन्होंने समस्या/शिकायत लेकर आए लोगों से कहा कि चिंता मत करिए, सरकार हर व्यक्ति की समस्या का समाधान प्रतिबद्धता से कराएगी। इस अवसर पर सीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे पूरी तत्परता और संवेदनशीलता से यह सुनिश्चित करें कि बिना भेदभाव सबको न्याय मिले। हर पात्र को जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले, जरूरतमंदों के समुचित इलाज की व्यवस्था हो, जमीन कब्जाने वाले भू माफिया व दबंगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।  गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 150 लोगों की समस्याएं सुनीं। सबके प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित और संतुष्टिपरक निस्तारण का निर्देश देने के साथ लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर पीड़ित की समस्या का समाधान सुनिश्चित कराएगी। मुख्यमंत्री ने राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में शीघ्रता से निस्तारण के निर्देश दिए। बुधवार को भी जनता दर्शन में कुछ लोग गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्च स्तरीय इलाज का इस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए। इस्टीमेट मिलते ही सरकार विवेकाधीन कोष से धन उपलब्ध कराएगी।  गुरु पूजा करने के बाद सीएम योगी ने की गोसेवा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब भी गोरखनाथ मंदिर प्रवास पर होते हैं तो प्रातःकाल गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने के बाद अपने पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की समाधि स्थल पर जाकर शीश झुकाना, आशीर्वाद लेना उनकी दिनचर्या में शामिल होता है। पर, इस बुधवार उनके लिए गुरु की विशेष पूजा का अवसर था। बुधवार (आश्विन कृष्ण चतुर्थी) को ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी विशेष पूजा अर्चना की। मंदिर प्रवास के दौरान पारंपरिक दिनचर्या के अनुसार मुख्यमंत्री गोसेवा करने गोशाला में भी पहुंचे। यहां उन्होंने गायों और गोवंश को स्नेहिल भाव से गुड़ खिलाया। गोशाला में मुख्यमंत्री के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से आए संतजन भी उपस्थित रहे।

किसानों के लिए बड़ी खबर, छत्तीसगढ़ को मिले ₹181.99 करोड़; कृषि योजनाओं को मिलेगी रफ्तार

 रायपुर  कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने प्रदेश को 181.99 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। इसमें राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 91.20 करोड़ और कृषि उन्नति योजना के तहत 90.79 करोड़ रुपये शामिल हैं। कृषि मंत्रियों का सम्मेलन और केंद्रीय मंत्री से मुलाकात नई दिल्ली में 28 और 29 सितंबर को रबी अभियान 2026 के तहत देशभर के कृषि मंत्रियों का सम्मेलन हुआ। इसी दौरान कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। केंद्रीय मंत्री ने उन्हें दोनों योजनाओं के तहत दूसरी किस्त की राशि जारी किए जाने की जानकारी दी। रबी फसल और अभियानों पर विशेष ध्यान  राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के दौरान रबी सीजन की तैयारियों और केंद्र सरकार की कृषि योजनाओं को छत्तीसगढ़ में प्रभावी ढंग से लागू करने को लेकर विस्तृत मंथन किया गया। बैठक में किसानों तक सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने और कुल कृषि उत्पादन में वृद्धि दर्ज करने पर विशेष जोर दिया गया।  182 करोड़ रुपये के इस नए आवंटन से प्रदेश में चल रहे विकसित संकल्प अभियान और खेत बचाओ अभियान को मजबूती मिलेगी। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों तक योजनाओं का पारदर्शी लाभ पहुंचाना है।  दलहन और तिलहन का रकबा बढ़ाने की योजना सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के भीतर दलहन और तिलहन फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाने की विशेष रणनीति पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इसके साथ ही राज्य में कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों को बेहतर कृषि व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। स्वीकृत की गई राशि मिलने से प्रदेश की विभिन्न कृषि योजनाओं तथा अभियानों की रफ्तार बढ़ेगी। इससे रबी सीजन के दौरान किसानों को सहायता मिलेगी और खेती से जुड़े अभियानों को जमीनी स्तर पर गति प्राप्त होगी। किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने पर जोर केंद्रीय मंत्री चौहान ने एक पत्र देते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है। दोनों योजनाओं के तहत मिली राशि से प्रदेश में कृषि से जुड़े कामों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। कृषि विकास और योजनाओं के अधिकतम लाभ के लिए राशि का उपयोग कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने राशि जारी करने के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य के मिलकर काम करने से प्रदेश के कृषि क्षेत्र को नई गति मिल रही है। राशि का उपयोग कृषि विकास से जुड़े कामों को आगे बढ़ाने और किसानों को योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने में किया जाएगा।  

झारखंड से सिर्फ रांची का चयन, अब स्वच्छता व्यवस्था सुधारने की बढ़ी चुनौती

 रांची राजधानी रांची को केंद्र की ‘प्रगति’ पहल के तहत चुने गए देश के 50 शहरों में शामिल किया गया है। झारखंड से सिर्फ रांची का चयन हुआ है। सूची में रांची के साथ रांची नगर निगम को संबंधित नगरीय निकाय के रूप में शामिल किया गया है। रांची को इस सूची में शामिल किए जाने के बाद शहर की स्वच्छता व्यवस्था को और बेहतर करने की चुनौती बढ़ गई है। इसमें सिर्फ सड़कों की सफाई और घर-घर से कचरा उठाना ही नहीं, बल्कि कचरे का संग्रहण, अलग-अलग करना, प्रसंस्करण और अंतिम निस्तारण तक पूरी व्यवस्था को दुरुस्त करना शामिल है। देश के 50 शहरों में रांची प्रगति की सूची में देश के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 50 शहर शामिल हैं। इनमें पटना, गया, रायपुर, अहमदाबाद, सूरत, गुरुग्राम, इंदौर, भोपाल, मुंबई, पुणे, चेन्नई, हैदराबाद, लखनऊ, वाराणसी, जयपुर और कोलकाता जैसे शहर शामिल हैं। झारखंड से रांची अकेला शहर है। क्या है प्रगति? प्रगति का पूरा नाम ‘सक्रिय शासन और समयबद्ध क्रियान्वयन’ है। यह केंद्र सरकार की ऐसी व्यवस्था है, जिसके माध्यम से महत्वपूर्ण योजनाओं और परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी की जाती है। इसमें केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय के साथ लंबित मामलों को दूर करने और योजनाओं को समय पर पूरा कराने पर जोर दिया जाता है। रांची के सामने अब क्या चुनौती रांची में कचरा उठाव, कचरे का पृथक्करण, नालियों की सफाई, जल निकासी और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करना होगा। खासकर कचरे के पूरे चक्र को व्यवस्थित करना बड़ी चुनौती होगी। यानी प्रगति की सूची में रांची का शामिल होना सिर्फ उपलब्धि नहीं, बल्कि शहर की स्वच्छता व्यवस्था को जमीन पर बेहतर साबित करने की नई जिम्मेदारी भी है।

दिवाली से पहले हवाई किराए में उछाल, जयपुर से कई रूट पर 3 गुना तक बढ़े दाम

जयपुर त्योहारों पर घर जाना है? जाइए जरूर, बस टिकट बुक करने से पहले जेब को समझा दीजिए कि इस बार सफर थोड़ा 'भावुक' करने वाला है। दिवाली अभी दूर हैं, लेकिन उसकी महंगाई ने जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहले ही दस्तक दे दी है। श्राद्ध, नवरात्र, दशहरा, करवाचौथ, दिवाली और छठ… लगातार त्योहारों ने हवाई यात्रा की मांग बढ़ाई तो एयरलाइंस ने किराए का मीटर भी तेज कर दिया। जयपुर से कई रूट पर सामान्य दिनों की तुलना में किराया डेढ़ से तीन गुना तक बढ़ गया है। यानी त्योहारों की खरीदारी शुरू होने से पहले ही टिकट ने बजट बिगाड़ दिया। ट्रैवल एजेंट्स के अनुसार इस बार त्योहारों का सिलसिला लगातार बना हुआ है। श्राद्ध, नवरात्र, दशहरा, दिवाली और छठ के दौरान देशभर में रह रहे प्रवासी राजस्थानियों का घर आना-जाना बढ़ेगा। पर्यटकों की आवाजाही भी तेज रहेगी। ज्यादातर प्रमुख ट्रेनें पैक, स्पेशल ट्रेनों में भी वेटिंग उधर, त्योहारी सीजन में जयपुर से संचालित होने वाली ज्यादातर प्रमुख ट्रेनें अभी से पैक हो चुकी हैं। कई रूटों पर नो रूम की स्थिति बन गई है। रेलवे की ओर से घोषित स्पेशल ट्रेनों में भी अब लंबी वेटिंग शुरू हो गई है। छह से आठ नवंबर के बीच किराए की पड़ताल में सामने आई तस्वीर जयपुर-मुंबईः जयपुर से मुंबई का हवाई किराया 14 हजार रुपए तक पहुंच गया है। वहीं 5 नवंबर को मुंबई से जयपुर का न्यूनतम किराया 14 हजार और अधिकतम 18 हजार रुपए से अधिक है। सामान्य दिनों में यह किराया 6 से 7 हजार रुपए के बीच रहता है। जयपुर-पुणेः जयपुर से पुणे का किराया 10,559 रुपए से शुरू होकर 12 हजार रुपए तक पहुंच गया है। वहीं पुणे से जयपुर का किराया 20 हजार रुपए तक पहुंच गया। 9 नवंबर को दोपहर 3 बजे रवाना होने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट का किराया 20,230 रुपए दर्ज किया गया। अन्य फ्लाइट्स भी 13 हजार रुपए तक किराया वसूल रही हैं। जयपुर-कोलकाताः 6 नवंबर की बुकिंग पर जयपुर से कोलकाता का न्यूनतम किराया 10 हजार है, जो 17 हजार रुपए तक पहुंच गया है। कोलकाता से जयपुर आने वाले यात्रियों को किराए में कुछ राहत मिल रही है। जयपुर-दिल्लीः 5 नवंबर की बुकिंग पर जयपुर से दिल्ली का अधिकतम हवाई किराया 14 हजार रुपए तक पहुंच गया है, जो सामान्य किराए से करीब चार गुना अधिक है। गत वर्ष की तुलना में महंगा हुआ सफर गत वर्ष की तुलना में इस बार हवाई किराया अधिक महंगा है। पिछले वर्ष इन दिनों जयपुर से मुंबई का सामान्य किराया 5,190 से 5,506 रुपए के बीच था, जबकि वर्तमान में सामान्य किराया 6,744 रुपए तक पहुंच चुका है। जयपुर से कोलकाता, पुणे, अहमदाबाद समेत कई रूटों पर भी किराए में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रमुख वजह एयर ट्रैफिक फ्यूल की बढ़ी हुई दरों को माना जा रहा है।

धान किसानों की बढ़ी परेशानी, पोर्टल पर खेत में धान की जगह दिख रहा गन्ना

कैथल प्रदेश के डेढ लाख किसानों ने पीआर धान की खेती छोड़ दी है। पिछली बार 11.07 लाख किसानों ने 73.48 लाख एकड़ का पंजीकरण मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर कराया था, जबकि इस बार 9,60,874 किसानों ने 57,75,937 एकड़ का पंजीकरण कराया। जो किसान 31 जुलाई तक पंजीकरण नहीं करा पाए, उनके लिए सरकार ने 21 से 29 सितंबर तक पोर्टल फिर खोला था। सात दिनों में सिर्फ 5874 किसानों ने 38 हजार एकड़ का पंजीकरण कराया। अब तहसील और एसडीएम कार्यालय में जांच का काम चल रहा है। काफी किसानों का अब भी डाटा मिसमैच हो रहा है। जिस खेत में धान की फसल खड़ी है, पोर्टल पर उसमें गन्ना लहलहा रहा है। 30 सितंबर तक सत्यापन करना है। यह चुनौती है। भिवानी हिसार में रकबा कब कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पंजीकरण का वेरिफिकेशन चल रहा है, अब अगले दो से तीन दिनों में एरिया का डाटा बढ़ सकता है। धान की सुचारू खरीद के लिए 883 सीसीटी कैमरे लगाए गए हैं, कैमरे मंडियों के गेटों पर लगाए गए हैं। पिछले साल की अपेक्षा भिवानी और हिसार में अब भी सबसे कम पंजीकरण हुआ है। हिसार में 2025 में 6.86 लाख एकड़ का पंजीकरण हुआ था, इस बार अब तक 3074.82 एकड़ का पंजीकरण हुआ है। प्रमुख जिलों का पंजीकरण ब्योरा मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार अंबाला में 37,507 किसानों ने 2,29345.37 एकड़ फसल का पंजीकरण कराया। इसी प्रकार भिवानी में 70,402 किसानों ने 4,06118.30 एकड़, चरखीदादरी में 43,077 किसानों ने 2,05300 एकड़, फतेहबाद में 59301 किसानों ने 4,17,768.92 एकड़, हांसी में 27,345 किसानों ने 1,63,934.39 एकड़, हिसार में 54,900 किसानों ने 3,07,434.82 एकड़, झज्जर में 31,747 किसानों ने 2,01,481.72 एकड़, जींद में 38,659 किसानों ने 3,72,491.25 एकड़, कैथल में 50,825 किसानों ने 3,89,490.61 एकड़। करनाल में 54,002 किसानों ने 4,07,495.11 एकड़, कुरुक्षेत्र में 45,548 किसानों ने 3,01,091.25 एकड़, पानीपत में 19,727 किसानों ने 1,50,290.30 एकड़, रोहतक में 29,853 किसानों ने 1,75,994.75 एकड़, सिरसा में 91,088 किसानों ने 6,71,925.49 एकड़, सोनीपत में 35,315 किसानों ने 2,15,959.85 और यमुनानगर में 46,382 किसानों ने 2,38,738.81 एकड़ पीआर धान का पंजीकरण कराया है। दो लाख एकड़ मिसमैच, गड़बड़ाया हिसाब पिछले दिनों पटवारियों की हड़ताल के कारण किसान के सामने समस्या खड़ी हो गई है। सत्यापन नहीं होने से पोर्टल पर डाटा मिसमैच हो रहा है। जिस खेत में धान की फसल खड़ृी है पोर्टल पर उसमें गन्ने की फसल दिखाई है। इसी मिसमैच के कारण गेटपास नहीं कट पा रहे हैं। बड़ी संख्या में किसान मंडियों में गेट पास कटवाने पहुंच रहे हैं, लेकिन पोर्टल पर उनकी फसल मिसमैच दिखाई दे रही है। अकेले यमुनानगर में ही करीब एक लाख 10 हजार एकड़ से अधिक रकबा मिसमैच है। हड़ताल के कारण आई दिक्कत किसानों की बोई फसल का सही ब्योरा दर्ज करने के लिए हर वर्ष गिरदावरी कराई जाती है। सामान्य तौर पर राजस्व विभाग के पटवारी 10 से 15 सितंबर तक खेतों में जाकर यह कार्य पूरा करते हैं। इस बार निर्धारित अवधि में गिरदावरी नहीं हो सकी। बाद में आनन-फानन में गिरदावरी कराई, लेकिन खामियां रह गईं

महाराष्ट्र के इनपुट पर रायपुर में DGGI की छापेमारी, गोदाम से मिला भारी गुटखा स्टॉक

 रायपुर  राजधानी रायपुर में गुटखा कारोबार से जुड़े एक ठिकाने पर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की टीम ने मंगलवार को छापेमारी की। महाराष्ट्र से मिले इनपुट के आधार पर अधिकारियों की टीम तीन गाड़ियों में शदाणी दरबार मार्केट स्थित एक गोदाम पर पहुंची और वहां दस्तावेजों तथा गुटखा स्टॉक की जांच शुरू की। जानकारी के मुताबिक DGGI को सूचना मिली थी कि गोदाम में बड़ी मात्रा में सितार ब्रांड का गुटखा रखा हुआ है। टीम ने मौके पर पहुंचकर तलाशी ली तो 50 से अधिक बोरे गुटखा मिलने की बात सामने आई। अधिकारियों ने मौके पर मिले स्टॉक को जांच के दायरे में लिया है और यह पता लगाया जा रहा है कि गोदाम में रखा माल किस कारोबारी का है। कार्रवाई के दौरान गोदाम मालिक और वहां से जुड़े कुछ अन्य लोगों को भी मौके पर बुलाया गया। अधिकारियों ने उनसे स्टॉक, खरीद-बिक्री और परिवहन से संबंधित जानकारी मांगी। टीम ने मौके पर उपलब्ध दस्तावेजों की जांच शुरू की है। पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई। सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई महाराष्ट्र से मिले इनपुट के बाद की गई। DGGI अधिकारियों को गुटखा की आपूर्ति और स्टॉक से जुड़े कुछ अहम इनपुट मिले थे, जिसके आधार पर रायपुर स्थित गोदाम को चिन्हित किया गया। इसके बाद टीम ने अचानक दबिश दी। कार्रवाई के दौरान बरामद गुटखा किस नेटवर्क से जुड़ा है, इसकी भी जांच की जा रही है। सूत्रों का दावा है कि गोदाम से मिला माल एक बड़े गुटखा कारोबारी से जुड़ा हो सकता है।  हालांकि इस संबंध में DGGI की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर नाम और मालिकाना संबंध की पुष्टि नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी अब सप्लाई चेन, स्टॉक रजिस्टर, बिलिंग और टैक्स भुगतान से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही है। अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि माल वैध बिलिंग के साथ गोदाम तक पहुंचा था या नहीं और संबंधित कारोबार में GST से जुड़े नियमों का पालन किया गया है या नहीं। इस कार्रवाई को करीब नौ दिन पहले दुर्ग जिले में हुई एक अन्य रेड से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कुम्हारी के स्टेशन चौक क्षेत्र में सेंट्रल GST इंटेलिजेंस की टीम ने एक फैक्ट्री में दबिश दी थी। वहां सितार ब्रांड का गुटखा बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी। कार्रवाई के दौरान दो मशीनें और करीब 30 बोरे गुटखा जब्त किए जाने की बात कही गई थी। अब रायपुर में 50 से अधिक बोरे मिलने के बाद एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुट गई हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है  कि रायपुर और दुर्ग में मिले स्टॉक के बीच कोई सीधा कारोबारी संबंध है या नहीं। फिलहाल DGGI की टीम दस्तावेजों और बरामद माल की जांच कर रही है। कार्रवाई पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टैक्स चोरी या अवैध कारोबार से जुड़ा कोई मामला बनता है या नहीं और आगे किसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 3 गाड़ियों में पहुंची थी टीम बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र से मिले इनपुट के बाद DGGI के अधिकारी रायपुर पहुंचे। इसके बाद 3 गाड़ियों में टीम कारोबारी के ठिकाने पर पहुंची और जांच शुरू की। मौके पर गोदाम मालिक और कुछ लोगों को भी बुलाया गया और पूछताछ की गई। पूरी कार्रवाई की DGGI की टीम ने वीडियो रिकार्डिंग भी की है। गुटखा किंग बंटी से जुड़ रहे तार DGGI सूत्रों के अनुसार जिस गोदाम में मंगलवार की दोपहर को दबिश देकर गुटखा जब्त किया गया। वो गुटखा कारोबारी बंटी का बताया जा रहा है। कारोबारी बंटी का दुर्ग में पाटर्नर है, जहां पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। कारोबारी बंटी महाराष्ट्र से ऑपरेट कर रहा है। महाराष्ट्र में कल्याण के पास फैक्ट्री डाली है। वहीं से गुटखा बनवाकर छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मुंबई और उत्तर प्रदेश के कई राज्यों में सप्लाई किया जा रहा है। 9 दिन पहले सेंट्रल GST ने दुर्ग में मारा था छापा 9 दिन पहले दुर्ग जिले में सेंट्रल GST इंटेलिजेंस की टीम ने छापा मारा था। कुम्हारी के स्टेशन चौक इलाके में एक फैक्ट्री के अंदर सितार कंपनी का गुटखा बनाया जा रहा था। इस दौरान गुटखा बनाने में इस्तेमाल होने वाली 2 मशीनें और करीब 30 बोरा गुटखा जब्त किया गया था। इसके बाद रायपुर में कार्रवाई हुई है।

रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर, बिलासपुर की 3 ट्रेनें कैंसिल; 4 राज्यों के यात्री प्रभावित

बिलासपुर महाराष्ट्र से झारखंड और ओडिशा जाने वाले ट्रेन यात्रियों की परेशानी बढ़ने वाली है। दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में ट्रैक बदलने का काम किया जाएगा। यह काम सीनी-राजखरसावां सेक्शन की अप और डाउन लाइन पर चलेगा। इसके लिए 24 नवंबर से 15 जनवरी तक मेगा ब्लॉक लिया जाएगा। इस काम का असर बिलासपुर से होकर चलने वाली ट्रेनों पर भी पड़ेगा। रेलवे ने इस दौरान 3 ट्रेनों को रद्द और 2 ट्रेनों को बदले रूट से चलाने का फैसला किया है। ब्लॉक का सबसे ज्यादा असर 18109/18110 टाटानगर-नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी एक्सप्रेस पर पड़ेगा। इस ट्रेन के दोनों दिशाओं में 17-17 फेरे रद्द रहेंगे। इसके अलावा नांदेड़-संतरागाछी एक्सप्रेस और पुणे-संतरागाछी हमसफर एक्सप्रेस के भी निर्धारित फेरे रद्द किए गए हैं। वहीं उत्कल एक्सप्रेस और साउथ बिहार एक्सप्रेस को कुछ निर्धारित तारीखों पर बदले रूट से चलाया जाएगा। इससे महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा के बीच ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों को अपनी यात्रा की तारीख और ट्रेन की जानकारी पहले से जांचनी होगी। 14 अक्टूबर तक 18 एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द इधर छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 18 एक्सप्रेस ट्रेनें 14 अक्टूबर 2026 तक पहले ही रद्द है। इसके अलावा उत्कल एक्सप्रेस अलग-अलग तारीखों पर बदले रूट से चलेगी, जबकि 13 अक्टूबर को गीतांजलि एक्सप्रेस 2 घंटे की देरी से रवाना होगी। दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में काम होगा। रद्द होने वाली गाड़ियों में इतवारी-टाटानगर-इतवारी एक्सप्रेस, टाटानगर-बिलासपुर एक्सप्रेस, नांदेड़-सांतरागाछी एक्सप्रेस, हटिया-दुर्ग एक्सप्रेस, हावड़ा-CSMT दुरंतो एक्सप्रेस समेत 18 ट्रेनें शामिल हैं। इन एक्सप्रेस ट्रेनों के कैंसिल होने से झारखंड, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार जाने यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

MP में सुगम परिवहन सेवा का होगा विस्तार, CM यादव ने दिए निर्देश

प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का होगा निरंतर विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव यात्रियों के लिए जिलों में सुविधायुक्त बस स्टैंड और अन्य प्रबंध किए जाएं मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की व्यवस्थाएं बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर्स और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के नागरिकों के हित में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरूआत की गई है। प्रदेश में वर्ष 2005 में राज्य परिवहन निगम बंद किया गया था। राष्ट्रवादी विचारक पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती, 25 सितम्बर से प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों के संचालन की शुरूआत हुई है, जिसका निरंतर विस्तार किया जाएगा। अगले पांच वर्ष में 14 हजार 981 बसों के संचालन का लक्ष्य है। इस सेवा में पूर्व से संचालित फिट बसों का उपयोग भी किया जा रहा है, अत: नागरिकों सहित किसी को भी भ्रमपूर्ण जानकारी पर विश्वास नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंर्तगत नागरिकों की सुविधा के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास के संबंध में जिलों के कलेक्टर्स और पुलिस अधीक्षक को वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा निर्देशित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सेवा संकल्प माह के अंतर्गत प्रारंभ इस सुविधा से स्थानीय प्रशासन द्वारा यात्रियों को व्यवस्थित बस संचालन का लाभ दिलवाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। संबंधित जिलों में प्रशासन के स्तर पर नागरिकों और बस आपरेटर्स को आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाए। सेवा के प्रदेशव्यापी विस्तार के साथ सभी जिलों में प्रशासनिक अमला नागरिकों की सुविधा के लिए सजग भूमिका का निर्वहन करेगा। वर्तमान में जिन रूट्स पर बसों का संचालन किया जा रहा है वहां मैदानी अमले द्वारा सहयोगी रवैया अपनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन स्थानों पर बस डिपो या टर्मिनल बंद स्थिति में हो तो उन्हें स्वच्छता अभियान चलाकर और बैठक एवं अन्य सुविधाओं का विकास कर उपयोगी बनाया जाए। जहां स्टाप या बस स्टैंड खत्म हो चुके हैं वहां भूमि उपलब्ध करवाकर यह सुविधा विकसित की जाए। परमिट के अलावा जो बसें चल रही हैं उनके व्यवस्थित और अनुशासित संचालन को प्राथमिकता दी जाए। निजी बस ऑपरेटरों के फिटनेस, परमिट की शर्तें, ड्राइवर का बस संचालन और व्यवहार के लिए मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधिकारी से नियमित निरीक्षण की व्यवस्था की जाए। क्षेत्रीय कंपनियों के साथ शहरों में आवश्यक अधोसंरचना विकास के लिए स्थानीय प्रशासन सहयोग करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बसों के बाधारहित संचालन के लिए थाना पुलिस और ट्रैफिक पुलिस का सहयोग दिलवाया जाए। इसके साथ ही जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समिति की नियमित बैठकें की जाएं। जिला कलेक्टर टीएल बैठक में क्षेत्रीय कंपनी के ईडी से भी प्रत्येक सप्ताह चर्चा करें।राज्य परिवहन उपक्रम की ओर से सभी जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समितियों के समक्ष रूट प्रस्तुतिकरण और सुझाव प्राप्त करने की काईवाई भी सुनिश्चित की जाए। आम जनता के हित में सभी एजेंसियों के बीच परस्पर आवश्यक संवाद रहे। परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का अधिक से अधिक नागरिकों को लाभ दिलवाने के लिए निजी बस ऑपरेटरों को आवश्यक प्रोत्साहन दिया जा रहा है। यात्रियों से प्राप्त सुझावों पर भी प्रशासन की ओर से जरूरी प्रबंध किए जाएं। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा मध्यप्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी योजना है। परिवहन क्षेत्र में यात्रियों को बेहतर सुविधा मिले इसलिए बस ऑपरेटर्स से प्रशासन का नियमित संवाद हो। विभिन्न तरह की भ्रांतियां को समाप्त किया जाए। जो पूर्व से संचालित फिट बसें हैं, उनका संचालन किया जा रहा है। अनेक आधुनिक तकनीक भी अपनाई गई हैं, जिसमें यात्री एप के माध्यम से यात्रा के संबंध में बेहतर प्लान कर यात्रा कर सकता है। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने प्रजेंटेशन में बताया कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तीन प्रमुख स्तंभ हैं- बस संचालन, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर। वर्तमान में प्रारंभ की गई बसों की संख्या निरंतर बढ़ाई जाएगी। यात्रियों को लाभान्वित करने के साथ निजी ऑपरेटर को उसके कार्य और व्यवसाय का जायज लाभ हो, इसका ध्यान रखा गया है। राज्य परिवहन उपक्रम के लिए भोपाल में कार्यालय की व्यवस्था की गई है। आने वाले तीन माह में भोपाल, इंदौर, उज्जैन और सागर में क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के लिए शत-प्रतिशत कार्यालय भवन उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में भी क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के लिए कार्यालय भवन की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए आवश्यक कुल 1190 में से 400 पदों के लिए नियुक्ति की कार्रवाई भी पूर्ण की जाएगी। विशेषज्ञ पद भी भरे जाएंगे। प्रदेश में गत 10 माह में यात्री संख्या और रूट सर्वे के माध्यम से जो आकलन किया गया और आवश्यक बसों की संख्या का अनुमान लगाया गया उसके अनुसार प्रदेश में सात क्षेत्र में 3636 मार्गो पर 13006 बसों की व्यवस्था की जाना है। चरणबद्ध विस्तार भी किया जाएगा। वर्ष 2031 तक प्रदेश में 14981 बसों के संचालन में सफलता मिलेगी। राज्य स्तरीय आईटीएमएस प्लेटफार्म एक विशेष सुविधा है। चलो मोबिलिटी के अंतर्गत आईटीएमएस का अंतरिम रूप से प्रयोग करते हुए आवश्यक माड्यूल निर्धारित किए गए हैं। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने सुगम बस संचालन के लिए अधोसंरचना विकास के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं की भी जानकारी दी।  

बड़गाईं-लेम सड़क बदहाल, टेंडर के बाद भी नहीं शुरू हुआ 122 करोड़ का काम

 रांची  बड़गाईं चौक से लेम चौक तक की जर्जर सड़क के दिन बहुरने का इंतजार चार साल बाद भी खत्म नहीं हुआ है। करीब चार किलोमीटर लंबी इस सड़क के चौड़ीकरण, मजबूतीकरण और पुनर्निर्माण के लिए करीब 122 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार है। टेंडर की प्रक्रिया भी हो चुकी है, लेकिन जमीन अधिग्रहण और पुल निर्माण से जुड़े मामले अटकने के कारण सड़क निर्माण अब तक शुरू नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों लोगों को गड्ढों, धूल और जाम के बीच आवाजाही करनी पड़ रही है। बड़गाईं से लेम तक सड़क की हालत खराब बड़गाईं चौक से लेम चौक तक सड़क कई जगह टूट चुकी है। बारिश के दिनों में गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और खराब हो जाती है। दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी होती है। सड़क की खराब स्थिति के कारण वाहनों की रफ्तार भी प्रभावित होती है। महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग होने के बावजूद लंबे समय से इसकी मरम्मत और पुनर्निर्माण का इंतजार किया जा रहा है। 122 करोड़ से होना है सड़क का निर्माण पथ निर्माण विभाग ने इस मार्ग के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के साथ पुनर्निर्माण की योजना तैयार की है। विभागीय दस्तावेज के अनुसार सड़क की लंबाई करीब 3.750 किलोमीटर है। इसमें बड़गाईं से लेम होते हुए आगे बोरेया तक सड़क का विकास प्रस्तावित है। वर्तमान में सड़क की चौड़ाई अलग-अलग हिस्सों में करीब 3.75 से सात मीटर तक है। परियोजना के तहत सड़क को सात मीटर चौड़ा किया जाना है। सड़क के साथ करीब 3750 मीटर पक्की नाली बनाने की भी योजना है। परियोजना में चार नए कलवर्ट और एक नए पुल के निर्माण का भी प्रस्ताव है। दस्तावेज के अनुसार सड़क के लिए करीब 10 से 12 मीटर चौड़ाई में भूमि उपलब्ध कराने की जरूरत है। जमीन नहीं मिली तो कैसे बनेगी सड़क सबसे बड़ी अड़चन भू-अर्जन को लेकर है। सड़क निर्माण के लिए जिन हिस्सों में अतिरिक्त जमीन की जरूरत है, वहां भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण निर्माण एजेंसी काम आगे नहीं बढ़ा पा रही है। इसके अलावा प्रस्तावित पुल से जुड़ा मामला भी अभी लंबित है। ऐसे में टेंडर होने के बावजूद जमीन और पुल निर्माण से जुड़े मामलों का समाधान नहीं होने के कारण सड़क पर काम शुरू नहीं हो सका है। चार साल से लोग कर रहे इंतजार वार्ड की पूर्व पार्षद हुस्ना आरा ने बताया कि सड़क निर्माण की योजना बनने और टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद धरातल पर काम नहीं होने से उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है। हर दिन इस मार्ग से बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। सड़क की स्थिति खराब होने से वाहन चालकों को समय के साथ अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ रहा है। लोगों की मांग है कि भू-अर्जन और पुल निर्माण से जुड़े मामलों का जल्द समाधान कर निर्माण शुरू कराया जाए, ताकि 122 करोड़ की योजना कागज से निकलकर जमीन पर दिखाई दे सके।

2017 के नगर निकाय चुनाव का बकाया 9 साल बाद मंजूर, पटना को मिलेंगे ₹4.85 लाख

पटना  नगरपालिका आम चुनाव हुए नौ साल बीत गए, लेकिन चुनाव के दौरान किए गए काम का भुगतान अब जाकर होगा। वर्ष 2017 में हुए नगरपालिका आम निर्वाचन से जुड़े विभिन्न कार्यों के बकाये भुगतान के लिए पटना जिला प्रशासन को 4.85 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में बकाया भुगतान की मंजूरी दी है। विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, नगर पालिका चुनाव 2017 के दौरान एजेंसियों ने कई तरह के काम किए थे। जिला निर्वाचन अधिकारी ने क‍िया था भुगतान का अनुरोध इन कार्यों से जुड़े कुछ बिल का भुगतान लंबित रह गया था। जिला निर्वाचन पदाधिकारी -सह-जिलाधिकारी, पटना की ओर से बकाया भुगतान के लिए राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद विभाग ने कुल 4.85 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। यह पूरी राशि पटना जिला निर्वाचन पदाधिकारी को आवंटित की जाएगी। इसके लिए सीएफएमएस के माध्यम से राशि उपलब्ध कराई जाएगी। विभाग के स्तर पर इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है।