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रांची एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय सेवाओं की तैयारी तेज, केंद्र के फैसले का इंतजार

रांची  झारखंड के लोगों का वर्षों पुराना सपना अब धीरे-धीरे हकीकत की ओर बढ़ता दिख रहा है। बिरसा मुंडा एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का आकलन कर अपनी रिपोर्ट नागरिक उड्डयन मंत्रालय को भेज दी है। रिपोर्ट में एयरपोर्ट पर उपलब्ध संसाधनों, सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिए जरूरी व्यवस्थाओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। अब अंतिम फैसला केंद्र सरकार के स्तर पर लिया जाना है। अगर सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी हुईं तो आने वाले वर्षों में रांची देश के चुनिंदा ऐसे शहरों में शामिल हो सकता है, जहां से घरेलू उड़ानों के साथ अंतरराष्ट्रीय सेवाएं भी उपलब्ध होंगी। रांची एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने की सबसे बड़ी वजह इसकी लगातार बढ़ती यात्री संख्या और झारखंड से विदेश जाने वाले यात्रियों की बढ़ती मांग मानी जा रही है। वर्तमान में बड़ी संख्या में यात्री दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और हैदराबाद के रास्ते दुबई, सिंगापुर, बैंकाक, कतर, मलेशिया और अन्य देशों के लिए उड़ान भरते हैं। यदि रांची से सीधी अंतरराष्ट्रीय सेवा शुरू होती है, तो यात्रियों का समय और खर्च दोनों कम होंगे। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को व्यावसायिक रूप से सफल बनाने के लिए एयरलाइंस कंपनियों की रुचि, पर्याप्त यात्री संख्या, द्विपक्षीय उड़ान अनुमति और राज्य सरकार का सहयोग भी उतना ही जरूरी होगा। अंतरराष्ट्रीय सुविधा बहाल करने के लिए स्थान चिन्हित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कस्टम, इमिग्रेशन और क्वारंटीन (सीआईक्यू) व्यवस्था है। एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार इन सुविधाओं के लिए आवश्यक स्थान चिह्नित किया जा चुका है। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलते ही संबंधित विभागों की तैनाती की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद विदेश जाने वाले यात्रियों की पासपोर्ट जांच, कस्टम क्लीयरेंस और अन्य औपचारिकताएं रांची एयरपोर्ट पर ही पूरी हो सकेंगी। एयरपोर्ट प्रबंधन ने अंतराष्ट्रीय सेवा बहाल करने के लिए कई एयरलाइंस कंपनियों से भी संपर्क किया है। शुरुआत खाड़ी देशों के लिए सीधी उड़ानों से हो सकती है, क्योंकि झारखंड से बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए वहां जाते हैं। एयरपोर्ट को मिल चुका है आईएसओ प्रमाण पत्र बिरसा मुंडा एयरपोर्ट का नया टर्मिनल भवन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। लगभग 19 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में फैले इस टर्मिनल में एक समय में करीब 500 यात्रियों को संभालने की क्षमता है। आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, पर्याप्त चेक-इन काउंटर, विस्तृत आगमन-प्रस्थान क्षेत्र और भविष्य के विस्तार की भी व्यवस्था की गई है। रांची एयरपोर्ट पहले ही आईएसओ प्रमाणन प्राप्त कर चुका है। सुरक्षा के लिहाज से आधुनिक एक्स-रे बैगेज स्कैनर, सीसीटीवी निगरानी, फायर सेफ्टी सिस्टम तथा एयर ट्रैफिक कंट्रोल की अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। एयरपोर्ट पर रनवे और एप्रन की क्षमता भी वर्तमान परिचालन के अनुरूप मजबूत मानी जा रही है। विदेशी पर्यटकों की संख्या में बढोतरी झारखंड में विदेशी पर्यटकां की संख्या में बढोत्तरी हुई है। राज्य गठन के साथ सिर्फ 172 विदेशी पर्यटक सलाना आते थे। अब दो लाख से अधिक विदेशी पर्यटक सलाना आते है। गत वर्ष 3.31 लाख पर्यटक प्रदेश में आए, जिसमें से 1.76 विदेशी पर्यटक की संख्या रही। प्रदेश से विदेश जाने वालों की संख्या बढ़ी क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय की ओर से वर्ष 2013 से दिसंबर 2025 तक करीब 10.98 लाख पासपोर्ट बनाया गया। कोरोना काल के बाद से पासपोर्ट बनवाने वालो की संख्या लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2022 में 1 लाख 900, वर्ष 2023 में एक लाख नौ हजार, वर्ष 2024 में एक लाख 12 हजार और वर्ष 2025 में एक लाख 13 हजार पासपोर्ट जारी हुए। पासपोर्ट बनाने के बाद लोग बड़ी संख्या में विदेश जहा रहे हैं। क्यों जरूरी है रांची से अंतरराष्ट्रीय उड़ान -दिल्ली या कोलकाता होकर विदेश जाने की मजबूरी खत्म होगी। -यात्रा का समय 4 से 8 घंटे तक कम हो सकता है। -झारखंड के प्रवासी श्रमिकों और कारोबारियों को सीधा लाभ मिलेगा। -मेडिकल, शिक्षा और पर्यटन के लिए विदेश जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिलेगी। राज्य में निवेश और उद्योग को भी नई गति मिलने की संभावना बढ़ेगी। अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू होने से पहले क्या है जरूरी -केंद्र सरकार से अंतरराष्ट्रीय दर्जे की अंतिम मंजूरी। -कस्टम, इमिग्रेशन और क्वारंटीन (सीआईक्यू) की स्थापना। -एयरलाइंस कंपनियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय रूट पर परिचालन की घोषणा। -संबंधित देशों के साथ स्लॉट और उड़ान अनुमति। -पर्याप्त यात्री मांग और व्यावसायिक व्यवहार्यता सुनिश्चित होना।     बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू करने के लिए की मंत्रालय व एयरलांस कंपनियां को भी पत्र लिखा गया है। रांची एयरपोर्ट कस्टम, इमिग्रेशन और अन्य सुविधाओं के लिए एयरपोर्ट में जगह उपलब्ध है। एयरपोर्ट अंतराष्ट्रीय उडान के लिए तैयार है। पूर्व में वर्ष 2008-09 में रांची से जेद्दा के लिए सीधी उड़ानें संचालित होती थी।     -विनोद कुमार, बिरसा मुंडा एयरपोर्ट निदेशक  

सीएम ने किया आम महोत्सव-2026 की स्मारिका का विमोचन

मुख्यमंत्री ने किया उत्कृष्ट किसानों का सम्मान सीएम ने किया आम महोत्सव-2026 की स्मारिका का विमोचन वाहन को हरी झंडी दिखाकर सीएम योगी ने रवाना किया यूपी का आम  लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को आम महोत्सव में उत्कृष्ट किसानों का सम्मान किया। सबसे पहले उन्होंने वाहन को हरी झंडी दिखाकर यूपी के आम को रवाना किया। मुख्य आयोजन में उन्होंने आम महोत्सव-2026 की स्मारिका का भी विमोचन किया। सीएम ने फीता काटकर महोत्सव का शुभारंभ किया।  मुख्यमंत्री के हाथों इनका हुआ सम्मान… 1- बसंत कुमार- ग्राम-रंडौल, सहारनपुर 2- आशा सिंह- ग्राम- महोतेपुर, सीतापुर  3- अचल कुमार मिश्र- ग्राम मेड़ईपुरवा, लखीमपुर खीरी 4- शैलेंद्र कुमार- ग्राम भानपुर, उन्नाव  5- गोपाल माहेश्वरी- ग्राम माधौपुरी, कासगंज 6- नर्वदेश्वर सिंह- ग्राम छबैला, गोरखपुर  7- अमरपाल सिंह- ग्राम अकबरपुर सादात, मेरठ 8- हर्षवर्धन त्यागी- ग्राम भदस्याना, हापुड़ 9- सूर्यमणि यादव- ग्राम-विशुनपुर, हापुड़  10- मो. रेयान सिद्दीकी- अमरोहा 11- मेसर्स अवध नर्सरी- मलिहाबाद, लखनऊ 12- एससी शुक्ल- गोमती नगर, लखनऊ  13- उपेंद्र कुमार सिंह- नवीपनाह, मलिहाबाद लखनऊ

तैयार हो चुके 70 सांदीपनि विद्यालयों का 15 जुलाई तक करायें लोकार्पण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय में लोकार्पण के लिए तैयार हो चुके प्रदेश के सभी सांदीपनि विद्यालयों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन विद्यालयों का लोकार्पण औपचारिक कार्यक्रम न होकर शिक्षा, संस्कृति और जनभागीदारी का सामाजिक उत्सव बने। उन्होंने कहा कि वर्तमान में संचालित 'स्कूल चलें अभियान' के दौरान आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों में बच्चों, उनके अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय नागरिकों की व्यापक सहभागिता सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण आनंद के उत्सव के रूप में मनाया जाए। यह नए भवनों के उद्घाटन के साथ हमारे नौनिहालों के उज्ज्वल भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए अध्याय का शुभारंभ है। उन्होंने निर्देश दिए कि कार्यक्रमों को यादगार बनाने के लिए बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम, विभिन्न प्रतियोगिताएँ तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की जाएँ। साथ ही सभी बच्चों को स्वल्पाहार एवं मिष्ठान्न वितरित किया जाए, जिससे यह अवसर उनके लिए अविस्मरणीय बन सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरु सांदीपनि के प्रेरणादायी जीवन पर आधारित एक लघु पुस्तिका (पॉकेट बुक) प्रकाशित कर विद्यार्थियों में वितरित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुरु सांदीपनि तत्समय सामाजिक समरसता के सबसे बड़े पैरोकार थे। उन्होंने जाति, वर्ग, रंग का भेद न करके अमीर-गरीब से लेकर राज परिवार के बच्चों सहित गरीबों और किसानों के बच्चों को शिक्षा-दीक्षा दी। सभी को समान रूप से दीक्षित किया। उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व के बारे में हम सबके विशेषकर विद्यार्थियों को जानना जरूरी है। इससे विद्यार्थियों को प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य संबंधों और नैतिक मूल्यों के बारे में जानकारी और प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण पहले ही हो चुका है, वहाँ प्रवेशोत्सव उत्साहपूर्वक आयोजित किया जाए, जिससे अधिक से अधिक बच्चों का विद्यालयों से जुड़ाव बढ़े। उन्होंने अधिकारियों से सभी तैयारियाँ समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक सांदीपनि विद्यालय प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण, संस्कारयुक्त और आधुनिक शिक्षा का आदर्श केंद्र बने। बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह तथा स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने वर्चुअली सहभागिता की। बैठक में स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. संजय गोयल ने बताया कि वर्तमान में 70 सांदीपनि विद्यालय भवनों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसमें स्कूल शिक्षा विभाग के 46 एवं जनजातीय कार्य विभाग के 24 (कुल 70) सांदीपनि विद्यालय लोकार्पण के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिलों के प्रभारी मंत्री एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में इनका लोकार्पण कराया जाये। उन्होंने कहा कि आने वाली गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) के दिन हर जिले के एक सांदीपनि विद्यालय में प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाया जाये। इसमें विज्ञान प्रदर्शनी आयोजन, गुरुजनों का सम्मान, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा किए गए नवाचारों की जानकारी प्रदाय, विद्यार्थियों द्वारा डिजिटल एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रदर्शन सहित स्कूल के मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान जैसे आयोजन किये जायें। बैठक में मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य  गुलशन बामरा सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

रिम्स-2 निर्माण को हरी झंडी, कैबिनेट ने 27 प्रस्तावों पर लगाई मुहर

 रांची  झारखंड में अबतक के सबसे बड़े अस्पताल के निर्माण को लेकर गुरुवार को राज्य कैबिनेट की स्वीकृति मिल गई है। रांची में रिम्स-2 के निर्माण को कैबिनेट ने 4189.41 करोड़ रुपये खर्च करने के स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान करते हुए जागृति पीएमयू के गठन पर सहमति दी है। इसके लिए आइआइएम, रांची को सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप में कार्य करने के लिए स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके साथ ही एक्सआइएसएस, रांची को इम्पैक्ट असेसमेंट की जिम्मेदारी दी गई है।  दूसरी ओर, कैबिनेट ने झारखंड में विकसित भारत जी-राम-जी योजना लागू करने के प्रस्ताव पर स्वीकृति प्रदान कर दी। इस योजना में आदिम जनजाति समूह के लिए अतिरिक्त कार्य की भी व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया है। उन्हें 100 दिनों की जगह 150 दिनों का रोजगार मिलेगा। योजना लागू होने से ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन हो जाएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट ने कुल 27 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की है। कैबिनेट ने राज्य में 12 पंचायतों से कम वाले प्रखंड एवं अंचलों में एकल प्रशासनिक अधिकारी को जिम्मा देने का निर्णय लिया है। अंचल-प्रखंडों में बदलेगी व्यवस्था ऐसे 53 अंचलों और 54 प्रखंडों में एकल प्रशासनिक पदाधिकारी रखने का निर्णय लिया गया है। इन 53 अंचलों में अंचल अधिकारी सह बीडीओ पदस्थापित होंगे, जबकि 54 प्रखंडों में बीडीओ सह सीओ की पदस्थापना होगी। इसके अलावे 164 प्रखंडों में बीडीओ और सीओ अलग-अलग पदस्थापित होंगे। प्रदेश में 271 प्रशासनिक सेवा की इकाई है। राज्य में प्रखंड-अंचल में झारखंड प्रशासनिक कोटि के पदाधिकारियों की युक्तिसंगत पदस्थापन होगी। कैबिनेट की बैठक में आठ-नौ जुलाई को नई दिल्ली में नेशनल स्टेट होल्डर कंसल्टेशन 2026 के आयोजन की भी स्वीकृति प्रदान की गई। श्रावणी मेला के लिए बनेंगे अस्थायी ओपी झारखंड में श्रावणी मेला को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। कांवरियों को कोई परेशानी न हो और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए ओपी की स्थापना की जाएगी। इसमें 28 अस्थायी ओपी और 19 यातायात ओपी बनाए जाएंगे। ये ओपी 30 जुलाई से 28 अगस्त तक कार्य करेंगे। नियुक्ति पत्र लेते समय लेनी होगी निष्ठा की शपथ राज्य में नियुक्ति पत्र लेते समय सभी कर्मियों और पदाधिकारियों के लिए निष्ठा और गोपनीयता की शपथ लेना अनिवार्य किया गया है। कैबिनेट ने कार्मिक विभाग के इस प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति प्रदान की थी। चंदनकियारी में पेमिया ऋषिकेश विश्वविद्यालय की होगी स्थापना झारखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2024 के तहत बोकारो के चंदनकियारी में पेमिया ऋषिकेश विश्वविद्यालय की स्थापना होगी। इसे लेकर लेटर आफ इंटेंट देने के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान की।  

ऐप से ई-रिक्शा लॉक होने का दावा कितना सच? साइबर एक्सपर्ट ने बताई हकीकत

नई दिल्ली  एक वायरल वीडियो से ईवी की बैटरी सुरक्षा को सस्ती लिथियम बैटरी वाले ई-रिक्शा में लग सकता है 'रिमोट ब्रेक' लेकर सवाल उठ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें ई-रिक्शा को चलते चलते एक ऐप(BAT/BMS) से लॉक होने की बात कही जा रही है। बैटरियों में नहीं होती ब्लूटूथ की सुविधा साइबर एक्सपर्ट शौर्य कौशिक ने बताया कि वायरल वीडियो में जो दावा किया जा रहा है, वैसा कमजोर बैटरी वाले ई-रिक्शा में हो सकता है। भारत में लिथियम बैटरी वाले कई ई-रिक्शा निर्माता अपनी अलग-अलग बैटरी मैनेजमेंट तकनीक और अलग मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करते है। इन्हें इस ऐप से कनेक्ट नहीं किया जा सकता। लेड एसिड बैटरियों पर चल रहे हैं ई-रिक्शा साथ ही कई ई-रिक्शा पारंपरिक लेड एसिड बैटरियों पर चल रहे हैं। इन बैटरियों में भी ब्लूटूथ की सुविधा नहीं होती। उन्होंने साफ कहा कि यह साइबर सुरक्षा में सेंध या साइबर हमला नहीं है, बल्कि कुछ बैटरी सिस्टम में मौजूद कमजोर सुरक्षा व्यवस्था की समस्या है। 'सभी ई-रिक्शा नहीं हो सकते ऐप से ऑफ' एनबीटी रिपोर्टर ने इस ऐप को डाउनलोड कर हकीकत जानने की कोशिश की। ई-रिक्शा स्टैंड के बाहर जब इस ऐप को ऑन किया तो इस पर कुछ ब्लूटूथ डिवाइस कनेक्ट हुए, लेकिन इन्हें कनेक्ट करने पर भी बैटरी को बंद करने का विकल्प ऐप पर नही दिखा। द्वारका के ई-रिक्शा डीलर सुमित अग्रवाल ने बताया कि यह ऐप बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम के लिए है। यह सिर्फ उन्हीं बैटरियों के साथ काम करता है, जिनमें संबंधित बीएमसी और ब्लूटूथ मॉड्यूल मौजूद होता है। ऐसे ई-रिक्शा को उस ऐप से कट्रोल करना संभव है।

दिल्ली की नई ईवी पॉलिसी में सब्सिडी, रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क से बड़ी राहत

नई दिल्ली मुख्यमंत्रीा रेखा गुप्ता का कहना है कि नई ईवी पॉलिसी 2026 सिर्फ प्रदूषण कम करने की योजना नहीं, बल्कि आम लोगों के पैसे बचाने वाली नीति भी है। सीएम रेखा गुप्ता के मुताबिक, ईवी खरीदारों को इलेक्ट्रिक टू वीलर पर 50 हजार रुपये, ई-ऑटो पर 75 हजार और कमर्शल एन-1 गुड्स कैरियर पर 1.50 लाख रुपये तक की शुरुआती बचत हो सकती है। रेखा गुप्ता का कहना है कि इस नीति का मकसद ईवी की शुरुआती खरीद लागत के साथ-साथ उनके पूरे जीवनकाल में होने वाले खर्च को कम करना है ताकि  अधिक से अधिक लोग ईवी अपनाने के लिए प्रेरित हों। सरकार देती है प्रोत्साहन राशि, आजीवन रोड टैक्स में छूट मुख्यमंत्री ने दावा किया कि नई ईवी पॉलिसी नई गाड़ी खरीदने के लिए प्रोत्साहित करता है, प्रदूषण वाली पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने पर प्रोत्साहन राशि देता है, आजीवन रोड टैक्स में छूट है, रजिस्ट्रेशन शुल्क में माफी और पेट्रोल व डीजल गाड़ियों की तुलना में इसे चलाने में कम खर्च और रखरखाव भी सस्ता है। यही कारण है कि ईवी अब घरों, व्यावसायिक चालकों और छोटे-बड़े व्यवसायों के लिए सबसे समझदारी भरा आर्थिक विकल्प बन रहे हैं। इलेक्ट्रिक दोपहिया पर सब्सिडी     सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि इलेक्ट्रिक दोपहिया पर 30,000 रुपये तक की सब्सिडी, स्क्रैपिंग पर 10,000 रुपये की छूट, गाड़ी के पूरे जीवनकाल के लिए रोड टैक्स में छूट, रजिस्ट्रेशन शुल्क में पूरी माफी मिलेगी।     इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा (एल-5) खरीदने वाले को 50,000 रुपये तक की छूट नया ऑटो खरीदने पर मिलेगी। 25,000 रुपये स्क्रैपिंग के एवज में मिलेगे।     इलेक्ट्रिक ग्रामीण सेवा गाड़ी खरीदने वालो को पुरानी गाड़ियो को स्क्रैप कराने पर 15,000 रुपये, इलेक्ट्रिक एन-1 गुड्स कैरियर को 1 लाख रुपये तक नई गाड़ी खरीदने पर मिलेंगे, इन्हें 50,000 रुपये स्क्रैपिंग पर मिलेगा। पॉलिसी में कई वित्तीय फायदे जोड़े सीएम ने बताया कि खरीद प्रोत्साहन, स्क्रैपिंग प्रोत्साहन, आजीवन रोड टैक्स छूट और एकमुश्त रजिस्ट्रेशन शुल्क माफी का लाभ लेकर गाड़ी की वास्तविक खरीद लागत को काफी कम कर सकते है। इससे ईवी खरीदने के लिए दिल्ली देश के सबसे आकर्षक राज्यों में से एक बन गई है। रोड टैक्स की छूट सबसे अहम     सीएम ने कहा कि इस नीति के तहत रोड टैक्स से मिलने वाली छूट केवल नीति की अवधि तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गाड़ी के पूरे जीवन काल तक लागू रहेगी। साथ ही गाड़ी खरीदते समय रजिस्ट्रेशन शुल्क में भी पूरी छूट मिलेगी।     प्राइवेट इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर प्रोत्साहन का प्रावधान नहीं है। लेकिन पारंपरिक ईंधन वाली कार को स्क्रैप कर इलेक्ट्रिक कार खरीदता है तो एक लाख रुपये तक की राशि मिलेगी।

भजनलाल सरकार ने ट्रांसफर विंडो बढ़ाई, 10 जुलाई तक होंगे तबादले जारी

जयपुर  राजस्थान में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के बड़ी खबर हैं. भजनलाल सरकार ने कर्मचारियों-अधिकारियों के तबादलों की तारीख को आगे बढ़ा दिया है. ट्रांसफर पर लगी रोक में दी गई छूट की अवधि 5 दिन के लिए बढ़ाई गई है. प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग ने शुक्रवार को आदेश जारी कर तबादलों की छूट की अंतिम तिथि 10 जुलाई कर दी है, जो पहले 5 जुलाई थी. यानी ट्रांसफर की लिस्ट 10 जुलाई तक जारी हो सकेगी. थर्ड ग्रेड टीचर्स को राहत नहीं पिछले महीने 19 जून को सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के ट्रांसफर विंडो खोली गई थी. प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग ने बैन हटाते हुए तबादलों की अनुमति 5 जुलाई तक दी. आदेश के तहत, स्थानांतरण पर लगे पूर्ण प्रतिबंध में 5 जुलाई तक छूट दी गई थी. अब इस छूट की अवधि को 5 दिन के लिए बढ़ा दिया गया है.  सरकार के इस फैसले के बाद अब विभिन्न विभागों में लंबित तबादला प्रस्तावों पर अगले कुछ दिनों तक कार्रवाई जारी रह सकेगी. हालांकि, सरकार ने कुछ श्रेणियों को इस छूट से बाहर रखा है. आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी वेतन श्रृंखला के अध्यापकों के तबादलों पर बैन जारी रहेगा. वहीं, चिकित्सकों को भी छूट नहीं दी गई है.वर्षाकाल में संचालित बीमारियों को देखते हुए चिकित्सा विभाग के कार्मिकों के लिए स्थानांतरण पर प्रतिबंध अगले आदेश तक यथावत रहेगा.

पुरानी मतदाता सूची से मैपिंग न होने से मतदाताओं की बढ़ी परेशानी

नई दिल्ली  स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया जारी है। घर-घर पहुंच रहे बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को अब नई समस्या का सामना करना पड़ रहा है। लोग 2002 की मतदाता सूची से अपना मिलान नहीं कर पा रहे हैं। कई लोग ऐसे हैं जो 2002 में ही मतदाता बनने के लिए एजिलिबल हो गए थे, लेकिन उन्होंने अपने वोटर कार्ड नहीं बनवाए। ऐसे लोगों के नाम नहीं मिल रहे हैं। तकनीकी दिक्कतों से माता-पिता से नाम की मैपिंग नहीं करा पा रहे हैं। सूची से मैपिंग कराने में करना पड़ रहा दिक्कतों का सामना पुरानी मतदाता सूची से मैपिंग कराने में लोगों को सर्वाधिक दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग ऐसे हैं जो 2002 में 18 वर्ष के हो गए थे। लेकिन उन्होंने अपना मतदाता पहचान पत्र 2005 या उसके बाद बनवाया। इससे उनका नाम सूची में नहीं मिल रहा है। चुनाव आयोग ने व्यवस्था की है कि जो 2002 की सूची में नहीं है वह अपने माता-पिता या दादा-दादी के नाम के साथ मैपिंग कर सकते हैं। अब समस्या आ रही है कि उनकी मैपिंग माता-पिता के नाम के साथ नहीं हो पा रही है। कुछ ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं जिनमें माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है। दादा-दादी के बारे में भी जानकारी नहीं है। 2002 में वे मतदाता नहीं थे और अब मैपिंग में अपना नाम नहीं दिखा पा रहे हैं। कई मामलो में माता-पिता की मौत हो चुकी पटपड़गंज इलाके में एन्युमरेशन फॉर्म भरवा रहे BLO अरुण कुमार ने बताया कि ऐसे कई मामले सामने आ रहे है, जिनमें 2002 में एलिजिबल होकर भी मतदाता पहचान पत्र नहीं बनवाया, अब उनके नाम नहीं मिल रहे हैं। कई मामलो में माता-पिता की मौत हो चुकी है। उनके नाम की मैपिंग करना चुनौतीभरा साबित हो रहा है। उत्तर भारत पहुंचा मॉनसून, दिल्ली-यूपी-बिहार से लेकर पंजाब-हरियाणा तक कैसी होगी बरसात? हम उनको समझा रहे हैं कि अगर आपका नाम 5 अगस्त को प्रकाशित होने वाले ड्राफ्ट रोल में नहीं आता है, तो उनके पास दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका है। इसके बाद जरूरी 12 दस्तावेज में से कोई भी एक पेश करके वह अपना नाम जुड़वा सकते हैं। लेकिन, लोगों में डर का माहौल है कि उनका नाम कट जाएगा तो वापस नहीं जुड़ेगा। ऐसे में लोगों को समझाने में काफी मुश्किल हो रही है। चुनाव आयोग के मुताबिक 2002 में एलिजिबल होकर भी मतदाता पहचान पत्र नहीं बनवा सके तो माता-पिता से अपनी मैपिंग करा सकते हैं। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। 3 दिनों में बांटे 21 लाख से ज्यादा फॉर्म SIR के तीसरे दिन बीएलओ ने घर-घर जाकर एन्युमरेशन फॉर्म बांटे। गुरुवार की रात 8 बजे तक दिल्ली में कुल 21 लाख 2 हजार 79 चुनावी फॉर्म वांटे जा चुके है, जो कि कुल मतदाताओं का 14.49 प्रतिशत है। हालांकि, बांटे गए फॉर्मों को डिजिटल प्लैटफॉर्म पर दर्ज करने यानी डिजिटाइजेशन की रफ्तार अभी काफी धीमी है। अब तक केवल 63 हजार 620 फॉर्मों का ही डिजिटाइजेशन हो पाया है।

प्रदेश के जिला जेलों में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल को मिल रही गति

रायपुर : कौशल विकास से बंदियों के पुनर्वास को नई दिशा प्रदेश के जिला जेलों में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल को मिल रही गति जिला जेल सूरजपुर में 12 दिवसीय कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वरोजगार, वित्तीय साक्षरता और उद्यमिता विकास से जोड़ा जा रहा है बंदियों को रायपुर राज्य में बंदियों के पुनर्वास, कौशल उन्नयन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में जिला जेल सूरजपुर में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई) द्वारा 12 दिवसीय कौशल विकास एवं स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत 35 बंदियों को अगरबत्ती निर्माण एवं साबुन निर्माण का व्यावहारिक, तकनीकी एवं उद्यमिता आधारित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य बंदियों को रोजगारपरक कौशलों से सशक्त बनाते हुए रिहाई के उपरांत सम्मानजनक आजीविका अर्जित करने के लिए सक्षम बनाना है। कार्यक्रम के माध्यम से बंदियों को उत्पादन आधारित गतिविधियों से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर बनने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सकारात्मक जीवन की नई शुरुआत कर सकें। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को अगरबत्ती एवं साबुन निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है, जिसमें कच्चे माल का चयन, उत्पादन तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण, मशीनों एवं उपकरणों का सुरक्षित उपयोग, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन, लागत निर्धारण तथा लघु उद्योग स्थापना से संबंधित विषय शामिल हैं। इसके साथ ही बैंकिंग सेवाओं, वित्तीय साक्षरता, बचत, ऋण सुविधाओं, सरकारी स्वरोजगार योजनाओं तथा उद्यमिता विकास संबंधी पहलुओं पर भी विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ आत्मविश्वास, अनुशासन, समय प्रबंधन, टीम भावना और स्वावलंबन की भावना विकसित करना है, ताकि वे रिहाई के पश्चात स्वयं का रोजगार स्थापित कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना सकें। जेल प्रशासन के अनुसार कौशल विकास आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों के पुनर्वास की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रहे हैं। ऐसे प्रयास बंदियों को नया जीवन प्रारंभ करने का अवसर प्रदान करते हैं तथा उन्हें समाज में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित करते हैं। आरएसईटीआई के अधिकारियों ने बताया कि संस्थान का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है। इसी उद्देश्य के अनुरूप विभिन्न रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रमों का नियमित संचालन किया जा रहा है, जिनके माध्यम से युवाओं, महिलाओं एवं विशेष वर्गों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।

आधा किलो वजनी आम ने खींचा सबका ध्यान, यूपी मैंगो फेस्टिवल में CM योगी ने की सराहना

 लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ में 'उत्तर प्रदेश मैंगो फेस्टिवल 2026' का उद्घाटन कर राज्य के आम उत्पादकों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की. देश में आम की कुल खेती वाले क्षेत्रफल का मात्र 9 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद उत्तर प्रदेश देश का 26 फीसदी आम पैदा करता है. इस तीन दिवसीय महोत्सव का आयोजन किसानों, वैज्ञानिकों और खरीदारों को एक मंच पर लाने के लिए किया गया है. सरकार द्वारा बनाए गए आधुनिक पैक हाउसों के माध्यम से यूपी के आमों को दुनिया के कई बड़े देशों में एक्सपोर्ट किया जा रहा है।  सीएम योगी ने देखी आमों की विविधता  इस दौरान प्रदर्शनी में रखे करीब आधा किलो वजनी आम को देखकर सीएम योगी मुस्कुरा पड़े. उन्होंने दोनों हाथों में आम लेकर तस्वीर भी खिंचवाई. कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।  मुख्यमंत्री ने बताया कि इस महोत्सव में राज्य भर से आम की लगभग 800 किस्में प्रदर्शित की गई हैं. इसमें मलिहाबाद का दशहरी, वाराणसी और गोरखपुर का लंगड़ा, बागपत व सहारनपुर का रतौल और बस्ती का आम्रपाली शामिल है. आम की यह विविधता उत्तर प्रदेश की असली ताकत है. उन्होंने कहा कि एक एकड़ में आम की खेती से किसान करीब 2.5 लाख रुपये की शुद्ध आय कमा सकता है. अगर इसे वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट से जोड़ा जाए, तो किसानों का मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है।  'काकोरी' ब्रांड नाम से वैश्विक पहचान मलिहाबाद के प्रसिद्ध दशहरी आम को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई (GI) टैग मिला हुआ है, जिससे यह एक ग्लोबल ब्रांड बन चुका है. राज्य सरकार ने मलिहाबाद के आमों को 'काकोरी' ब्रांड नाम के तहत प्रमोट किया है. यह नाम काकोरी ट्रेन एक्शन के शहीदों के बलिदान को सम्मान देने के लिए रखा गया है, जो राष्ट्र के प्रति समर्पण और किसानों की मेहनत की मिठास को एक साथ दर्शाता है।  निर्यात बढ़ाने के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर यूपी के आमों को विदेशों में भेजने के लिए सहारनपुर, लखनऊ, अमरोहा और वाराणसी में चार आधुनिक मैंगो पैक हाउस स्थापित किए गए हैं. इनके जरिए आमों की ग्रेडिंग, छंटनी और पैकेजिंग की जा रही है. यूपी का आम अब ब्रिटेन, यूएई, मलेशिया, सिंगापुर, कुवैत, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, जापान, इटली, कतर और रूस जैसे देशों में निर्यात हो रहा है. इसके अलावा, जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कृषि उत्पादों के निर्यात की सुविधा के लिए एक इंटीग्रेटेड टेस्टिंग एंड ट्रीटमेंट पार्क भी विकसित किया जाएगा।