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ट्विशा मामले में जांच तेज, गिरिबाला सिंह की नियुक्ति भी जांच के घेरे में

भोपाल  देशभर में सुर्खियां बने मॉडल ट्विशा शर्मा डेथ केस में जांच लगातार तेज होती जा रही है। मुख्य आरोपी समर्थ सिंह अब भी फरार है, जबकि उसकी अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हो सकती है। दूसरी ओर, ट्विशा की सास गिरीबाला सिंह को जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। पुलिस ने जहां पति व मुख्य फरार आरोपी समर्थ की गिरफ्तारी पर इनाम बढ़ाकर 30 हजार कर दिया है, वहीं उसकी सास गिरिबाला सिंह को पद से हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश जारी प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने ट्विशा की सास गिरीबाला सिंह को भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश जारी किया है। विभागीय स्तर पर उनकी नियुक्ति की जांच की भी बात कही गई है। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई प्रशासनिक समीक्षा के बाद की गई है।     समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर कल हाईकोर्ट में सुनवाई     घटना के 9 दिन बाद भी मुख्य आरोपी पति फरार     आरोपी की तलाश में 6 पुलिस टीमें और SIT गठित     समर्थ सिंह पर इनाम 10 हजार से बढ़ाकर 30 हजार किया गया     पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में चोट के कई निशान मिलने का दावा     गिरीबाला सिंह को उपभोक्ता आयोग से हटाने की कार्रवाई शुरू     मामले की CBI जांच की मांग को लेकर अलग याचिका की तैयारी आरोपी पति ने हाईकोर्ट में लगाई याचिका दूसरी ओर मॉडल ट्विशा की मौत में मुख्य आरोपी बनाए गए अधिवक्ता समर्थ सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। संभवत: शुक्रवार को इस पर सुनवाई हो सकती है। इसके पूर्व भोपाल जिला अदालत उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुकी है। बता दें कि इसकी मामले में समर्थ की मां को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है। परिजनों के वकील ने आरोप लगाया है कि इस पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और वे जमानत रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट जा रहे हैं।

मध्यप्रदेश बना वन्य जीव संरक्षण का ग्लोबल रोल मॉडल, CM डॉ. यादव का बड़ा दावा

मध्यप्रदेश वैश्विक वन्य जीव संरक्षण का बना रोल मॉडल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव वनस्पति और वन्यजीवों की विविधता हमारी पूंजी, इसे संजोकर रखना हमारा कर्तव्य जल, जंगल और जमीन की उर्वरता बचाने में प्रदेश है देश में नम्बर वन केन्द्र सरकार ने दिया मध्यप्रदेश को चीता स्टेट बनने का अवसर जंगल और राष्ट्रीय उद्यानों के निकट ही बनाए जा रहे हैं वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केंद्रीय वन मंत्री यादव ने एबीएस एंड-टू-एंड वेब पोर्टल का किया शुभारंभ प्रकृति के संरक्षण को केवल नीति नहीं, बल्कि संस्कृति बनाएंगे : केन्द्रीय मंत्री यादव प्रचार साहित्य, नेशनल रिपोर्ट्स का विमोचन कर 5 रुपए का डाक टिकट भी किया लाँच आईआईएफएम में नव स्थापित डेटा ड्रिवन लैब का हुआ लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस पर आईआईएफएम में राज्यस्तरीय कार्यक्रम एवं चीता संरक्षण पर मीडिया वर्कशाप में की सहभागिता भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जैव-विविधता में हमारा प्रदेश, देश में एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में विकसित किया जा रहा है। हमारे पास 'टाइगर स्टेट', 'लेपर्ड स्टेट', 'चीता स्टेट', 'वल्चर स्टेट', 'घड़ियाल स्टेट', 'वुल्फ स्टेट' का टाइटल है। सालों पहले देश की धरती से चीते लुप्त हो चुके थे। हम देश की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के रूप में पहचाने जाने वाले चीतों को प्रदेश की धरती में वापस ले आये हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को चीता स्टेट बनने का गौरव देने के लिए केन्द्र सरकार का आभार जताते हुए कहा कि चीतों ने पालपुर कूनो और गांधी सागर अभयारण्य को अपना घर मान लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में अब कुल 53 चीते हैं। मध्यप्रदेश वैश्विक वन्यजीव संरक्षण का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक रोल मॉडल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस के अवसर पर भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम एवं चीता संरक्षण पर मीडिया वर्कशाप को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा मध्यप्रदेश 'मोगली लैंड' और 'सफेद शेरों की धरती' के नाम से भी जाना जाता है। लगभग 100 साल के बाद मध्यप्रदेश की धरती पर जंगली भैंसे का पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना की गई है। दुर्लभ प्रजाति के 33 कछुए और 53 घड़ियाल कूनो नदी में छोड़े गए हैं। हलाली डेम क्षेत्र में 5 लुप्तप्राय गिद्धों को उनके नैसर्गिंक वातावरण में मुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में 5 हजार से अधिक वनस्पतियां, करीब 500 पक्षियों की प्रजातियां और 180 से अधिक मछलियों की प्रजातियां मौजूद हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तो मध्यप्रदेश के जंगलों में 100 से ज्यादा हाथी भी विचरण कर रहे हैं। कार्यक्रम में केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव, मंत्रालय के केन्द्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार भी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केन्द्रीय वन मंत्री यादव ने एबीएस एंड-टू-एंड वेब पोर्टल का शुभारंभ किया। यह पोर्टल जैव-विविधता संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन एवं वन्य जीव संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता एवं जन-जागरुकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर चीता संरक्षण पर केंद्रित ब्रोशर, भारत की बायोडायवर्सिटी रिपोर्ट-2026 एवं अन्य प्रचार साहित्य का विमोचन कर अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस की स्मृति में डाक विभाग का 'माय स्टैम्प' (5 रुपए का डाक टिकट) भी लाँच किया गया। अतिथियों द्वारा आईआईएफएम में नवस्थापित डेटा संचालित प्रयोगशाला (डेटा ड्रिवन लैब) का लोकार्पण भी किया गया। साथ ही इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस (आईबीसीए) की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म, प्रदेश की जैव-विविधता विरासत स्थलों पर केंद्रित लघु फिल्म, मप्र राज्य जैव-विविधता बोर्ड द्वारा संरक्षित तपोवन भूमि स्थलों पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केंद्रीय वन मंत्री यादव ने प्रदेश के वन विभाग के मैदानी अमले के लिए न्यू बाइक्स एवं रेस्क्यू व्हीकल को हरी झंडी दिखाकर लोकार्पित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आईआईएफएम परिसर में विभिन्न राज्यों के जैव-विविधता बोर्ड द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी के विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आकर्षक स्वागत नृत्य करने वाले जनजातीय कलाकारों में प्रत्येक को इनाम स्वरूप 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस 2026 मध्यप्रदेश में मनाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज का दिन हमें जैव-विविधता के क्षेत्र में काम करने के लिए चिंतन और कार्य करने की प्रेरणा देता है। 'प्रोजेक्ट चीता' विश्व में वन्यजीवों के पुनर्स्थापन का एक चमत्कारिक उदाहरण है। श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों का पुनर्स्थापन कार्य सफलतापूर्वक संपन्न करना एक चुनौती पूर्ण कार्य था। प्रदेश के वन विभाग ने एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए मध्यप्रदेश की धरती पर चीतों का नया घर तैयार किया है। हमारा वन अमला हाथियों के प्रबंधन के लिए बुलेटिन निकालने जैसे नवाचार भी कर रहा है। चंबल और कूनो नेशनल पार्क में घड़ियालों के संरक्षण का कार्य भी तेजी से हो रहा है। मां नर्मदा का वाहन मगर है, इनके संरक्षण और पुनर्वास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। राज्य सरकार ने प्रदेश की धरती पर 100 साल बाद 8 जंगली भैंसों की वापसी कराई है। इससे हमारे कान्हा नेशनल पार्क की जैव-विविधता समृद्ध हुई है। असम सरकार के सहयोग से हमें जंगली भैंसे मिले हैं। दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों का भी संरक्षण किया गया है। भोपाल से छोड़े गए गिद्ध ने उज्बेकिस्तान तक का सफर तय कर लिया है। जल संरक्षण के लिये चलाया जा रहा महाअभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण की दिशा में भी तेजी से कार्य कर रही है। प्रदेश में गुड़ी पड़वा से लेकर गंगा दशहरा तक 3 महीने का जल संरक्षण महाभियान चल रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रदेश में बड़े पैमाने पर कार्य हो रहा है। राज्य में अब तक 3000 करोड़ रुपये की लागत से 56 हजार जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और निर्माण, 827 बावड़ी, 1200 से अधिक तालाब, 212 नदियों में साफ-सफाई के कार्य किए गए हैं। इस महाभियान में प्रदेश के 18 लाख लोगों ने अपनी भागीदारी की है। जल और जंगल के संरक्षण तथा जमीन उर्वरता बचाए रखने में मध्यप्रदेश देश में नंबर वन है। प्रदेश में 2 लाख … Read more

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से उपभोक्ताओं को मिली बड़ी राहत

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत सुशासन तिहार 2026 के समाधान शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हितग्राहियों से किया सीधा संवाद रायपुर सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत बलौदबाजार जिले के करहीबाजार में आयोजित समाधान शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों से संवाद कर योजनाओं से मिल रहे लाभों की जानकारी ली। शिविर में मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 के तहत अनेक उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत प्रदान की गई। हितग्राहियों ने बताया कि योजना से उन्हें आर्थिक राहत मिली है और लंबित बिजली बिल की चिंता काफी हद तक कम हुई है। बालोदबाजार जिले के ग्राम बिटकुली निवासी आशाराम को 11 हजार 625 रुपये, बाबूलाल को 14 हजार 922 रुपये, जगदीश को 9 हजार 832 रुपये, श्रीमती बुधयारिन को 8 हजार 467 रुपये तथा चोवाराम को 13 हजार 325 रुपये की छूट प्राप्त हुई। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान बताया कि पहले बढ़े हुए बिजली बिल के कारण आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता था, लेकिन मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से उन्हें बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि अब वे बिना किसी अतिरिक्त बोझ के नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य आम जनता को राहत पहुंचाना और उनकी समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान करना है। उन्होंने कहा कि सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक सहायता पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी सहायता साबित हो रही है।

मंत्री टंक राम वर्मा का सख्त निर्देश, कॉलेज स्टाफ समय पर पहुंचे महाविद्यालय

शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ अनिवार्य रूप से निर्धारित समय पर महाविद्यालय में उपस्थित रहें-मंत्री टंक राम वर्मा ​उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा का औचक निरीक्षण  व्यवस्था सुधारने के कड़े निर्देश, छात्रों के लिए बनेगा ‘हेल्प डेस्क’ ​रायपुर       राज्य में उच्च शिक्षा के स्तर को सुधारने और आगामी शिक्षा सत्र से पहले व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने के लिए सरकार पूरी तरह मुस्तैद है। इसी कड़ी में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने मोपका निपनिया महाविद्यालय का औचक निरीक्षण किया। मंत्री  के इस कदम से जहां लापरवाह कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है, वहीं छात्र हित में सरकार की संवेदनशीलता एक बार फिर खुलकर सामने आई है। ​लापरवाही पर बरती जाएगी 'जीरो टॉलरेंस' की नीति     ​निरीक्षण के दौरान महाविद्यालय की प्राचार्य अनुपस्थित पाई गईं। साथ ही, स्टाफ की उपस्थिति में भी भारी कमी देखने को मिली; वहां केवल 03 सहायक प्राध्यापक और कार्यालयीन स्टाफ के महज 02 कर्मचारी ही उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त, मौके पर महाविद्यालय के वित्तीय लेखा-जोखा (एकाउंट्स) की जानकारी भी उपलब्ध नहीं हो सकी, जिस पर  मंत्री वर्मा ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ​सरकार का साफ संदेश है  शासकीय संस्थाओं में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक शिथिलता या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ​साफ-सफाई और अनुशासन पर कड़े निर्देश     ​महाविद्यालय परिसर में स्वच्छता का अभाव दिखने पर मंत्री टंक राम वर्मा ने अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़े शब्दों में फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ अनिवार्य रूप से निर्धारित समय पर महाविद्यालय में उपस्थित रहें। इसके साथ ही छात्र-छात्राओं को एक स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण मिले, इसके लिए साफ-सफाई की व्यवस्था तुरंत दुरुस्त की जाए। ​नए सत्र से पहले छात्र-सुविधाएं होंगी सर्वोपरि: बनेगा ‘हेल्प डेस्क’   ​ नवीन शिक्षा सत्र जल्द ही प्रारंभ होने वाला है, इसलिए सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि नए प्रवेश लेने वाले और पुराने छात्रों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। कॉलेज में आने वाले छात्र-छात्राओं की समस्याओं के त्वरित निराकरण और मार्गदर्शन के लिए तत्काल एक 'हेल्प डेस्क' (Help Desk) स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। ​इसके साथ ही, उन्होंने आगामी सत्र के मद्देनजर कॉलेज में पेयजल, बैठक व्यवस्था और अन्य सभी आवश्यक छात्र-सुविधाओं को समय सीमा के भीतर पूर्ण करने की कड़ी हिदायत दी है। ​जनता और छात्रों के प्रति सजग सरकार    ​उच्च शिक्षा मंत्री का यह औचक निरीक्षण  केवल कागजी दावों पर नहीं, बल्कि धरातल पर उतरकर काम करने में विश्वास रखती है। सरकार का संकल्प है कि प्रदेश के सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों के महाविद्यालयों में भी शहरी क्षेत्रों की तरह उच्च स्तरीय सुविधाएं और कड़ा प्रशासनिक अनुशासन सुनिश्चित किया जाए, ताकि छत्तीसगढ़ के युवाओं का भविष्य उज्ज्वल हो सके।

ट्विशा शर्मा का फिर होगा पोस्टमॉर्टम, पति समर्थ सिंह करेगा सरेंडर

भोपाल /जबलपुर जबलपुर स्थित हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा का दोबारा पोस्टमॉर्टम करने की मंजूरी दे दी है. ट्विशा के परिजनों ने शव का दोबारा पीएम कराने के लिए अर्जी दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पुलिस को यह आदेश दिया है।  शादी के पांच महीने बाद हुई ट्विशा की मौत गौरतलब है कि मॉडल ट्विशा शर्मा की मुलाकात अपने पति समर्थ सिंह से एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी. समर्थ पेशे से क्रिमिनल लॉयर है. दिसंबर 2025 में दोनों की धूमधाम से शादी हुई थी, लेकिन शादी के महज 5 महीने बाद ही 12 मई 2026 को ट्विशा की संदिग्ध मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि ट्विशा की सास और पति ने मिलकर उसकी हत्या की है. वह दोबारा शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग कर रहे हैं. इस वजह से वह एम्स से शव भी नहीं ले रहे हैं।   आरोपी समर्थ सिंह के वकील ने अग्रिम जमानत याचिका वापस लेने का फैसला लिया. इस दौरान उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनका मुवक्किल निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार है. इसके साथ ही कोर्ट का पूरा ध्यान अब दूसरे पोस्टमार्टम की याचिका पर केंद्रित हो गया है, क्योंकि न्यायाधीश ने समय की गंभीरता को देखते हुए कहा कि दूसरे पोस्टमार्टम की मांग पर सबसे पहले सुनवाई की जानी चाहिए।  कोर्ट में दूसरे पोस्टमार्टम की मांग को लेकर तीखी बहस देखने को मिली. याचिकाकर्ता की तरफ से जहां दूसरे पोस्टमार्टम की जरूरत पर जोर दिया गया, तो  वहीं दूसरी तरफ दूसरे पक्ष के वकील ने इसका कड़ा विरोध किया।  उन्होंने तर्क दिया कि AIIMS द्वारा किया गया पहला पोस्टमार्टम पर्याप्त है और दोबारा पोस्टमार्टम की मांग करना चिकित्सा बिरादरी का अपमान है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह मांग जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाने और डॉक्टरों की क्षमता पर अविश्वास जताने जैसा है. हालांकि, बहस के बाद कोर्ट ने सेकंड पोस्टमार्टम पर सहमति जता दी है।  कोर्ट में क्या दलील दी गई? ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह की तरफ से पेश होते हुए उनके वकील ने दूसरी बार पोस्टमॉर्टम कराने की मांग का विरोध किया. उन्होंने दलील दी कि AIIMS के डॉक्टरों द्वारा पोस्टमॉर्टम पहले ही किया जा चुका है और इसलिए एक और जांच की क्या ज़रूरत है, इस पर सवाल उठाया।  सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उन डॉक्टरों की ईमानदारी का बचाव किया जिन्होंने पोस्टमॉर्टम किया था, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अगर पीड़ित परिवार को लगता है कि किसी बात को नज़रअंदाज़ किया गया है, तो दूसरी राय ली जा सकती है. उन्होंने कहा, "डॉक्टरों की निष्पक्षता बेमिसाल है, लेकिन अगर पीड़ित परिवार को लगता है कि कुछ छूट गया है, तो दूसरी राय ली जा सकती है।  अंतिम संस्कार में किसी भी तरह की देरी का विरोध करते हुए, गिरिबाला सिंह के वकील ने यह भी दलील दी कि शव को सड़ने के लिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए. वकील ने कहा, "वह हमारे परिवार की बहू थी. उसका अंतिम संस्कार करना हमारा फ़र्ज़ है। 

‘एक पौधा मां के नाम’ से प्रेरित राजस्थान: 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य फिर दोहराया गया

जोधपुर  राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा शुक्रवार दोपहर जोधपुर दौरे (Sanjay Sharma Jodhpur Visit) पर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने सर्किट हाउस परिसर में पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया. मीडिया से बातचीत करते हुए वन मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा 'एक पौधा मां के नाम' अभियान का आह्वान पूरे देश के लिए प्रेरणादायक रहा है. इसी प्रेरणा से मुख्यमंत्री ने राजस्थान में 50 करोड़ पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लिया है. 'इस साल भी लगाए जाएंगे 10 करोड़ पौधे' उन्होंने बताया कि पिछले साल राज्य सरकार ने 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन वन विभाग, अन्य सरकारी विभागों, सामाजिक संगठनों और एनजीओ के सहयोग से 11 करोड़ 55 लाख पौधों का रोपण किया गया. इस साल भी 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है और पूरा विश्वास है कि सरकार आमजन के सहयोग से इस लक्ष्य को भी पार करेगी. प्रदेश में विकसित होंगे चंदन के जंगल वन मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से राजस्थान के 4 जिलों में 'चंदन वन' विकसित किए जाएंगे. इन स्थानों पर 11-11 हजार चंदन के पौधों का रोपण कर उनका संरक्षण किया जाएगा. विलुप्ति की कगार से बाहर आया गोडावण इस दौरान वन मंत्री ने राजस्थान के राजकीय पक्षी गोडावण के संरक्षण को लेकर भी विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि गोडावण विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुका था, लेकिन अब सरकार, वन विभाग, वैज्ञानिकों, एनजीओ और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयासों से इसकी संख्या बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि विश्व में पाए जाने वाले लगभग 150 गोडावण में से करीब 120 राजस्थान में पाए जाते हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में भी गोडावण संरक्षण का उल्लेख किया था, जिससे संरक्षण कार्यों को नई ऊर्जा मिली. 21 मई को मनाया गया पहला 'राज्य गोडावण दिवस' मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बजट 2025 में 21 मई को पूरे राजस्थान में 'राज्य गोडावण दिवस' मनाने की घोषणा की थी, जिसके तहत जैसलमेर में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया. उन्होंने आंकड़ों की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में राजस्थान में 130 गोडावण प्राकृतिक आवास में जीवन यापन कर रहे हैं, जबकि सम और रामदेवरा स्थित ब्रीडिंग सेंटरों में 87 गोडावणों का संरक्षण किया जा रहा है. आने वाले समय में इन ब्रीडिंग सेंटरों में गोडावणों की संख्या 100 के पार पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.

खेत की मेड़ पर करें सतावर की खेती, कम लागत में बढ़ेगी किसानों की आय

“खेतों की मेड़ पर पैसों का पेड़” योजना से छत्तीसगढ़ के किसानों को मिला अतिरिक्त आमदनी का नया अवसर रायपुर छत्तीसगढ़ में पारंपरिक कृषि के साथ-साथ किसानों को औषधीय खेती से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की एक अभिनव पहल शुरू की गई है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार, छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा “खेतों की मेड़ पर पैसों का पेड़” नामक नवाचार योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत किसानों को सतावर के पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे अपने खेतों की खाली पड़ी मेड़ और सुरक्षा बाड़ का उपयोग अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में कर सकें। एक पौधा, दोहरे फायदे खेतों की सुरक्षा भी और बंपर कमाई भी सतावर एक कांटेदार लता प्रजाति का औषधीय पौधा है, जो किसानों को दोहरा लाभ पहुंचाता है। सतावर कांटेदार होने के कारण इसे खेत की मेड़ पर लगाने से मवेशियों और आवारा पशुओं से फसलों की चौतरफा सुरक्षा होती है। मेड़ की खाली जगह का कोई उपयोग नहीं होता था, वहां सतावर उगाकर किसान लाखों रुपये की अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। औषधि उद्योगों में भारी मांग और औषधीय गुण सतावर के कंद में अद्भुत औषधीय गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण आयुर्वेदिक और हर्बल दवा उद्योगों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इसका मुख्य उपयोग दवाओं के निर्माण में होता है। शारीरिक कमजोरी दूर करने और ताकत बढ़ाने में, स्तनपान कराने वाली माताओं में दुग्धवर्धन के लिए, शरीर की सूजन, दर्द और मानसिक तनाव को कम करने में किया जाता है।  योजना की मुख्य विशेषताएं और सरकारी सहायता किसानों को बढ़ावा देने के लिए औषधि पादप बोर्ड द्वारा हर स्तर पर मदद दी जा रही है। किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सतावर के पौधे पूरी तरह मुफ्त (निःशुल्क पौधे) दिए जा रहे हैं, इसके लिए उन्हें केवल औषधि पादप बोर्ड से संपर्क करना होगा। पौधरोपण से लेकर फसल की कटाई और कंद तैयार होने तक की पूरी तकनीक का प्रशिक्षण बोर्ड द्वारा दिया जाएगा। किसानों को फसल बेचने के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए बोर्ड ने पहले से ही अनुबंधित क्रेताओं (अनुभवी खरीदारों) की व्यवस्था की है, जो सीधे किसानों से उपज खरीदेंगे। सतावर की फसल लगभग 16 महीने में तैयार हो जाती है। एक बार फसल तैयार होने के बाद यह कई वर्षों तक किसानों के लिए नियमित और सुनिश्चित आय का माध्यम बनी रहती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने इस योजना को किसानों के लिए “दुधारू गाय” के समान लाभकारी बताया है। वहीं बोर्ड के उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला का कहना है कि यह योजना किसानों की सुनिश्चित आय की चिंता को दूर करने में मील का पत्थर साबित होगी। “खेतों की मेड़ पर पैसों का पेड़” योजना न केवल छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में औषधीय पौधों के संरक्षण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि पारंपरिक खेती की लागत के बीच किसानों के लिए मुनाफे का एक नया और सुरक्षित रास्ता खोल रही है।

चंडीगढ़–पंचकूला बैंक घोटाले में बड़ा खुलासा: फर्जी कंपनियों से सरकारी धन की हेराफेरी

चंडीगढ़/पंचकूला  हरियाणा के बहुचर्चित 590 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पंचकूला की विशेष CBI अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में कुल 15 आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, शेल कंपनियों के संचालक और निजी व्यक्ति शामिल हैं। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले दिनों में इस मामले में अतिरिक्त चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है। टॉप ब्यूरोक्रेसी तक पहुंची जांच की आंच घोटाले की परतें खोलने के लिए CBI ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए हरियाणा की शीर्ष नौकरशाही तक पूछताछ शुरू कर दी है। इसी क्रम में एक वरिष्ठ IAS अधिकारी से भी पूछताछ की गई है, जो लंबे समय तक पंचायत विभाग में आयुक्त एवं सचिव पद पर कार्यरत रहे। CBI यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी खातों से करोड़ों की निकासी के दौरान किन अधिकारियों को जानकारी थी और किस स्तर पर निगरानी में चूक हुई। फर्जी कंपनियों से करोड़ों की हेराफेरी का खेल CBI की चार्जशीट के अनुसार, यह पूरा घोटाला योजनाबद्ध तरीके से बैंकिंग सिस्टम और फर्जी कंपनियों के नेटवर्क के जरिए अंजाम दिया गया। जांच में सामने आया है कि: करीब 6 बैंक अधिकारी 3 सरकारी कर्मचारी 2 शेल कंपनियों के संचालक/साझेदार और अन्य निजी व्यक्ति इस पूरे नेटवर्क में शामिल थे। आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, जालसाजी, सबूत नष्ट करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। कथित मास्टरमाइंड और बैंकिंग नेटवर्क की भूमिका CBI ने इस घोटाले का मास्टरमाइंड आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, चंडीगढ़ (सेक्टर-32) के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि को बताया है, जिसने बाद में AU स्मॉल फाइनेंस बैंक ज्वाइन किया था। आरोप है कि उसने फर्जी कंपनियों के नाम से बैंक खाते खुलवाए,सरकारी धन को इन खातों में डायवर्ट किया,फर्जी चेक और भुगतान निर्देशों के जरिए करोड़ों की हेराफेरी की. एक अन्य पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर अभय पर भी रिभव के साथ मिलकर इस पूरे नेटवर्क को चलाने का आरोप है। पत्नी और परिजनों तक फैला नेटवर्क जांच में यह भी सामने आया है कि धन के लेन-देन का फायदा निजी कंपनियों तक पहुंचा। स्वाति सिंगला, जो अभय की पत्नी हैं और एक कंपनी की मालिक हैं, उनके खाते में कथित रूप से करीब 300 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। उनके भाई अभिषेक सिंगला को भी मनी लॉन्ड्रिंग और फंड ट्रांसफर प्रक्रिया में शामिल बताया गया है। सरकारी सिस्टम पर सवाल घोटाले में सरकारी तंत्र की भूमिका भी जांच के दायरे में है। हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन के वित्त निदेशक अमित दीवान और मार्केटिंग बोर्ड के वित्त नियंत्रक राजेश सांगवान समेत कई अधिकारियों पर रिश्वत लेकर अवैध लेनदेन को नजरअंदाज करने के आरोप हैं। ED की कार्रवाई भी तेज इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी कार्रवाई तेज कर दी है। मास्टरमाइंड रिभव ऋषि को 10 दिन की रिमांड के बाद अदालत में पेश किया गया, जहां ED ने 4 दिन की और हिरासत मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने केवल 1 दिन की अनुमति दी। ED का कहना है कि रिभव ने फर्जी कंपनियों के जरिए सरकारी खातों से धन निकालकर बड़े स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग की। जांच अभी जारी, और खुलासों की उम्मीद CBI और ED दोनों एजेंसियां इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह घोटाला केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं है और आने वाले समय में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

हर पात्र बच्चे के लिए बनेगा इंडिविजुअल केयर प्लान, आयुक्त निवेदिता का बड़ा निर्देश

प्रत्येक पात्र बच्चे के लिए तैयार होगा इंडिविजुअल केयर प्लान : आयुक्त सुश्री निवेदिता मिशन वात्सल्य के राज्य स्तरीय आईसीपी प्रशिक्षण कार्यशाला हुई भोपाल  आयुक्त महिला एवं बाल विकास सुश्री निधि निवेदिता ने कहा कि इंडिविजुअल केयर प्लान (आईसीपी) केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे के जीवन, उसकी आवश्यकताओं और भविष्य की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों एवं संस्थाओं से कहा कि प्रत्येक पात्र बच्चे के लिए आईसीपी तैयार किया जाना अनिवार्य है तथा समय-समय पर उसका मूल्यांकन और अद्यतन भी किया जाना चाहिए, जिससे बच्चों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं प्रभावी बनी रहें। उन्होंने कहा कि बाल देखरेख संस्थाओं में रह रहे बच्चों के साथ समुदाय में संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए भी आईसीपी अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि हर बच्चे की परिस्थितियां, समस्याएं, क्षमताएं और पुनर्वास की जरूरतें अलग-अलग होती हैं। आयुक्त सुश्री निवेदिता महिला बाल विकास संचालनालय में मिशन वात्सल्य योजना के तहत राज्य स्तरीय इंडिविजुअल केयर प्लान विषय पर आधारित कार्यशाला को संबोधित कर रही थी। सुश्री निवेदिता ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण आईसीपी के माध्यम से बच्चों की शिक्षा, शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श, कौशल विकास, पारिवारिक पुनर्मिलन, सामाजिक पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के लिए योजनाबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जा सकती है। इससे बच्चों के सर्वोत्तम हित के सिद्धांत को व्यवहारिक रूप से लागू करने में सहायता मिलती है और बच्चों को संस्थागत देखरेख पर निर्भर रहने के बजाय परिवार एवं समुदाय आधारित देखरेख की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये अधिकारियों, बाल संरक्षण विशेषज्ञों, बाल देखरेख संस्थाओं के अधीक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभागीय अधिकारियों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण में बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप देखरेख और पुनर्वास की योजनाओं को बेहतर ढंग से तैयार करने पर विस्तार से चर्चा की गई।

छत्तीसगढ़ के उसूर ब्लॉक ने बढ़ाया प्रदेश का मान, नीति आयोग रैंकिंग में मिला दूसरा स्थान

वन मंत्री केदार कश्यप ने दी बीजापुरवासियों को बधाई, मुख्यमंत्री साय बोले – यह सुशासन का प्रमाण रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के 'सुशासन' और जन- कल्याणकारी नीतियों का असर अब राज्य के सबसे दूरस्थ अंचलों में दिखने लगा है। इसी कड़ी में बीजापुर जिले से एक गौरवशाली खबर सामने आई है। नीति आयोग द्वारा जारी देश के आकांक्षी ब्लॉकों की 'चैंपियंस ऑफ द क्वार्टर' (अक्टूबर- दिसंबर 2025) की रिपोर्ट में बीजापुर के उसूर ब्लॉक ने सेंट्रल जोन में पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री साय ने दी बधाई, कहा – यह जनता के भरोसे की जीत है   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर उसूर ब्लॉक और बीजापुर जिले के नागरिकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं जिला प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा, "उसूर ब्लॉक का राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त करना हमारे सुशासन और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष प्रमाण है। बस्तर के सुदूर गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है। उसूर ने कठिन परिस्थितियों में जो कर दिखाया है, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा है। यह सफलता जमीनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, मितानिन बहनों, एएनएम और डॉक्टरों के समर्पण का परिणाम है। हमारा लक्ष्य अब देश में प्रथम स्थान हासिल करना है।" मंत्री कश्यप ने जताया हर्ष, बढ़ाया हौसला   वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में उसूर ब्लॉक की यह राष्ट्रीय सफलता बेहद गौरवशाली है। उन्होंने कहा, "यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि हमारी सरकार की नीतियां प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पूरी प्रामाणिकता के साथ पहुंच रही हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों और जिला प्रशासन ने जो समर्पण दिखाया है, वह सराहनीय है। हमारा संकल्प बस्तर के हर गांव तक विकास की रोशनी पहुंचाना है।" मंत्री कश्यप कहा कि कभी बुनियादी सुविधाओं से दूर माना जाने वाला उसूर ब्लॉक आज देश के लिए विकास का मॉडल बन गया है। इस सफलता का श्रेय जमीनी डॉक्टरों, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिन बहनों की दिन-रात की मेहनत को जाता है। विकास की नई इबारत: कड़े मानकों पर खरा उतरा उसूर   नीति आयोग ने स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेतकों के आधार पर मूल्यांकन किया था, जिसमें उसूर ब्लॉक ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया : 1. संचारी रोगों पर नियंत्रण: मलेरिया, डेंगी और अन्य संचारी रोगों की रोकथाम के लिए सुदूर गांवों तक प्रभावी अभियान चलाया गया। 2. सुरक्षित मातृत्व: संस्थागत प्रसव की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई, जिससे शिशु और मातृ मृत्यु दर में भारी कमी आई। 3. सशक्त टीकाकरण कवच: बच्चों और गर्भवती महिलाओं के नियमित टीकाकरण के साथ एचपीवी टीकाकरण को जमीनी स्तर पर सफल बनाया गया। 4. गंभीर बीमारियों की जांच: बीपी, शुगर और कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों की मुफ्त जांच व उपचार की सुविधा गांव-गांव तक पहुंचाई गई। अगला संकल्प: देश में हासिल करना है प्रथम स्थान  कलेक्टर विश्वदीप और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय गौरव पूरे जिले के लिए बड़ी प्रेरणा है। शासन और प्रशासन का अगला लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और निखारते हुए आगामी तिमाहियों में देश में पहला स्थान हासिल करना है, जिसके लिए काम तेज कर दिया गया है।