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‘जीजा, अब क्या करना है…’ चैट से खुला राज, हनीट्रैप गैंग से जुड़ा पुलिसवाला पकड़ा गया

इंदौर मध्य प्रदेश में इंदौर के चर्चित हनीट्रैप 2026 मामले में अब जांच और भी गहरी होती जा रही है। इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने गुरुवार को इंटेलिजेंस शाखा में तैनात हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक विनोद शर्मा पर हनीट्रैप नेटवर्क की साजिश में शामिल होने और आरोपियों को रणनीतिक सलाह देने के गंभीर आरोप हैं। सूत्रों के अनुसार, आरोपी महिलाएं उसे ‘जीजा’ कहकर बुलाती थीं और कथित तौर पर आपत्तिजनक वीडियो, फोटो और चैट शेयर कर आगे की ब्लैकमेलिंग रणनीति पर सलाह लेती थीं। पुलिस अब उसके मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की फोरेंसिक जांच करवा रही है। SIT ने संभाली जांच, पांच मोबाइल जब्त डीसीपी (क्राइम) राजेश त्रिपाठी के अनुसार पूरे मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है। अब तक पांच मोबाइल फोन जब्त किए जा चुके हैं, जिनकी साइबर और फोरेंसिक एक्सपर्ट द्वारा जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क किन-किन नेताओं, कारोबारियों और अफसरों तक पहुंचा था। साथ ही रेशु चौधरी से जुड़े जमीन खरीदी-बिक्री के एक अहम कॉन्ट्रैक्ट को भी जब्त करने की कोशिश की जा रही है। विदेश में पढ़ी रेशु ने बढ़ाईं राजनीतिक नजदीकियां जांच में सामने आया है कि मकरोनिया (सागर) निवासी रेशु चौधरी विदेश में पढ़ाई कर चुकी है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान वह दिल्ली में बड़े नेताओं के संपर्क में आई और बाद में इन्हीं संपर्कों का इस्तेमाल कर मध्य प्रदेश के प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाई।बताया जा रहा है कि उसने राजनीति और हाईप्रोफाइल नेटवर्किंग के जरिये खुद को स्थापित करने की कोशिश की और धीरे-धीरे प्रॉपर्टी कारोबार से भी जुड़ गई। तीन साल में खड़ा हुआ हाईप्रोफाइल नेटवर्क पुलिस के अनुसार इस पूरे गिरोह की कथित मास्टरमाइंड अलका दीक्षित है। श्वेता जैन के साथ आने के बाद नेटवर्क तेजी से फैलता चला गया। UPSC-MPPSC प्रोफाइल से बनाई हाईप्रोफाइल पहचान रेशु सोशल मीडिया प्रोफाइल में खुद को कभी UPSC प्री क्वालिफाइड, तो कभी MPPSC प्री-2016 पास बताती थी। कुछ जगह उसने रेवेन्यू सर्विस में चयनित होने तक का दावा किया था। वर्ष 2016 में उसने “ब्रह्मपुत्र IAS एकेडमी” नाम से कोचिंग संस्थान भी शुरू किया था, जो बाद में बंद हो गया। राजनीति में एंट्री की तैयारी, लेकिन सपना अधूरा सूत्रों के मुताबिक, भोपाल के एक बड़े भाजपा नेता के संपर्क में आने के बाद रेशु ने नरयावली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी थी। उसने क्षेत्र में बड़े-बड़े होर्डिंग लगवाकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराई थी। हालांकि 2018 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रदीप लारिया को प्रत्याशी बना दिया और रेशु की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं अधूरी रह गईं। अब SIT पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस हाईप्रोफाइल हनीट्रैप मामले में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

जानलेवा आवारा कुत्तों के खिलाफ पंजाब में बड़ा एक्शन, सुप्रीम कोर्ट आदेश पर अमल शुरू

चंडीगढ़  पंजाब में आज जानलेवा लावारिस कुत्तों के खात्मे के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर इस संबंध में जानकारी दी थी कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार एक बड़ा अभियान शुरू करेगी। इसका उद्देश्य उन जानलेवा लावारिस कुत्तों को खत्म करना है, जो बच्चों और राहगीरों के जीवन के लिए खतरा पैदा करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने आदेश में कहा था कि रेबीज से संक्रमित, लाइलाज बीमारी से ग्रस्त या अत्यधिक आक्रामक व खतरनाक कुत्तों को कानून के तहत मृत्यु दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा था कि संविधान के तहत गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार में कुत्ते के हमलों के डर या खतरे के बिना स्वतंत्र रूप से घूमने का हक भी शामिल है। प्रदेश में पिछले कुछ समय से लावारिस कुत्तों के काटने के मामले में वृद्धि होती जा रही है। सरकार ने जनवरी में लुधियाना में राज्य की पहली डॉग सैंक्चुअरी का उद्घाटन भी किया था जिसका उद्देश्य डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण करना है। इसकी क्षमता लगभग 500 कुत्तों की है और इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है और प्रदेश के अन्य शहरों में भी इसी तर्ज पर डॉग सैंक्चुअरी स्थापित करने का फैसला लिया गया है। प्रदेश में लावारिस कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2025 में कुत्तों के काटने के ढाई लाख से अधिक मामले सामने आए जबकि वर्ष 2024 में डॉग बाइट के 2.13 लाख मामले रिपोर्ट किए गए थे।  सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कई संगठनों में मायूसी पेटा (PETA) इंडिया के मुताबिक देश में आवारा कुत्तों की अनुमानित संख्या 6.2 करोड़ है। इनकी संख्या बढ़ने की मुख्य वजह एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) रूल्स का सही पालन न होना है। इन नियमों के तहत कुत्तों की नसबंदी और रेबीज टीकाकरण होना चाहिए। पेटा ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की एसओपी पर ऐतराज जताया है। संगठन का कहना है कि इस एसओपी में हर कुत्ते के लिए सिर्फ 20 वर्गफुट जगह तय है। इतने छोटे स्थान में इन्हें नीचलन रखना क्रूरता है। इससे बीमारियां फैल सकती हैं। इतने बड़े स्तर पर कुत्तों को बंद रखने के लिए न पर्याप्त जगह है और न ही बजट और न ही प्रशासनिक व्यवस्था है। एक दैनिक अखबार में प्रकाशित कुत्तों के आंकड़ों पर आयोग ने कहा था कि 3.34 लाख डॉग बाइट के मामले चौंकाने वाले हैं। लावारिस कुत्ते सार्वजनिक सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता बन गए हैं। बता दें कि पंजाब में 2025 में डॉग बाइट के 3.34 लाख मामले रिपोर्ट हुए थे जबकि 2026 में अब तक 50 हजार से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। जस्टिस संत प्रकाश और जस्टिस गुरबीर सिंह जता चुके चिंता पंजाब -चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग के चेयरपर्सन जस्टिस संत प्रकाश और सदस्य जस्टिस गुरबीर सिंह पर आधारित आयोग ने जालंधर, लुधियाना, पटियाला और संगरूर के नगर निगम कमिश्नरों सहित निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग पंजाब को नोटिस जारी कर कुत्तों के काटने के मामलों की रिपोर्ट पेश करने को कहा था। आयोग ने कहा था कि 2025 के 3.34 लाख मामलों में ही अगर पीड़ितों को मुआवजा दिया जाता है तो सूबा सरकार पर 2 हजार करोड़ रुपए से अधिक का वित्तीय बोझ पड़ेगा। अकेले संगरूर जिले में ही नगर कौंसिल को 10 करोड़ रुपए का खर्च उठाना पड़ सकता है। 5 साल में तीन गुना बढ़े कुत्तों के काटने के केस हेल्थ विभाग पंजाब के आंकड़ों के अनुसार पिछले 5 सालों में पंजाब में कुत्तों के काटने के मामले तीन गुना बढ़े हैं। साल 2020 में जहां 1 लाख 10 हजार 472 मामले दर्ज थे, वहीं यह बढ़कर 2021 में 1 लाख 26 हजार 842 हो गए। इसी तरह साल 2022 में 1 लाख 65 हजार 133 मामले रिकॉर्ड हुए और 2023 में भी यह आंकड़े 1 लाख 65 हजार 133 ही दर्ज किए गए। इसके बाद 2024 में यह मामले बढ़कर 2 लाख 13 हजार 521 हुए और 2025 में रिकॉर्ड तोड़ 3 लाख 34 हजार 736 तक पहुंच गए। 2026 की बात करें तो अब तक पंजाब में 5 महीने में 50 हजार से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। SOP में हर कुत्ते के लिए सिर्फ 20 वर्गफुट जगह तय है ह्यूमन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया के एमडी आलोकवर्मा सेनगुप्ता ने कहा कि इंसानों और आवारा कुत्तों के बीच बढ़ते संघर्ष की असली वजह कुत्तों की मौजूदगी नहीं, बल्कि सालों से नसबंदी और रेबीज टीकाकरण कार्यक्रम का सही ढंग से लागू न होना है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि कानून और नियम पहले से मौजूद हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने उन्हें प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया। संगठन ने अदालत के उस निर्देश का स्वागत किया, जिसमें उसने कहा है कि देश के हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह काम करने वाला एबीसी सेंटर बनाया जाए। जबरन कार्रवाई से बढ़ सकती है आवारा कुत्तों की समस्या: संगठन संगठन ने कहा कि राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे कदम न उठाएं जो कानून और वैधानिक प्रक्रिया से बाहर हो। इनमें कुत्तों को जबरन हटाने, बड़ी संख्या में पकड़कर बंद करने, मारना या हटाने की नीति अपनाने जैसे कदम शामिल हैं। उनका कहना है कि इससे समस्या कम नहीं होगी, बल्कि दोबारा आबादी बढ़ेगी और संघर्ष बढ़ सकता है। संगठनों ने क्या दिए सुझाव कुत्तों के लिए तय समय में बड़े स्तर पर वैज्ञानिक तरीके से नसबंदी अभियान चले, रेबीज टीकाकरण हो, अवैध ब्रीडर और पालतू पशु दुकानों पर कार्रवाई हो, विदेशी नस्ल के डॉग्स के अवैध प्रजनन पर रोक लगे, कुत्तों को खाना खिलाने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित हो, डॉग्स को गोद लेने को बढ़ावा दिया जाए और स्थानीय निकायो की जिम्मेदारी तय की जाए। कब-कब क्या हुआ? 28 जुलाई 2025 : SC ने टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार के में प्रकाशित समाचार 'आवारा कुत्तों से त्रस्त शहर, बच्चे भुगत रहे कीमत' (City hounded by strays and kids pay price) पर स्वतः संज्ञान (suo moto cognisance) लिया था। 11 अगस्त 2025 : कोर्ट ने दिल्ली और एमसीडी की अथॉरिटी को निर्देश जारी किया कि वे … Read more

जैविक खेती के लिये अध्ययन दल भेजे दंतेवाड़ा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनजातीय क्षेत्रों में जैविक खेती को दें प्रोत्साहन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जैविक खेती के लिये अध्ययन दल भेजे दंतेवाड़ा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय छात्रावासों में शैक्षणिक एवं आवासीय प्रबंधन करें बेहतर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव विशेष पिछड़ी जातियों के समग्र विकास के लिये करें सतत कार्य मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में की जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में जैविक खेती को प्रोत्साहन दिया जाये। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में भी जनजातीय कृषकों द्वारा जैविक खेती की जा रही है। इसका अध्ययन करने के लिए मध्यप्रदेश से दल भेजा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा बैठक में यह बात कही। बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. विजय शाह, मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित विद्यालयों, आश्रम और छात्रावासों में शिक्षा और रहन सहन की गुणवत्ता बेहतर करें। जनजातीय क्षेत्रों में परंपरागत सामाजिक मूल्यों के संरक्षण और समग्र विकास के लिए समाज सेवी संगठनों का भी सहयोग लें। जनजातीय क्षेत्र में शासन के विभिन्न विभाग मिलकर कार्य करें। कन्वर्जेंस से जन सुविधाओं का विकास सुनिश्चित किया जाये। जनजातीय समाज में पशुपालन को बढ़ावा दें और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में इनका सहयोग ले। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की विशेष पिछड़ी जनजातियों बैगा, भारिया और सहारिया के समग्र विकास के लिए सतत् कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिये आवश्यक कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया है कि हाई स्कूल एवं हायर सेकंडरी परीक्षा परिणाम 2026 में सर्वश्रेष्ठ 10 ज़िलों में से 7 जनजातीय जिले शामिल हैं। दिसम्बर 2023 से अब तक जनजातीय वर्ग के कक्षा 9 एवं 10 के कुल 3 लाख 65 हज़ार विद्यार्थियों को 137 करोड़ 52 लाख रुपये की छात्रवृत्ति का भुगतान किया गया है। इसी अवधि में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 4 लाख 28 हज़ार विद्यार्थियों को 673 करोड़ 64 लाख रुपये की राशि भुगतान की गई है। विभाग द्वारा 2671 छात्रावास और आश्रम शालाओं का संचालन किया जा रहा है। मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिला मुखिया के बैंक खाते में प्रतिमाह 15 सौ रुपये की राशि शासन की आहार अनुदान योजना में प्रदान की जा रही है। दिसम्बर 2023 से अभी तक में 2 लाख 37 हजार 550 महिलाओं को कुल 432 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं।  

मानक से ज्यादा फीस लेना पड़ा भारी, निजी स्कूलों पर 5 लाख जुर्माने की चेतावनी

लखनऊ यूपी के लखनऊ में ज्यादा फीस लेने वाले आठ निजी स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही 5 लाख रुपये तक जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी गई है। डीएम विशाख जी की अध्यक्षता में गुरुवार जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक हुई। जिसमें बच्चों से तय मानक से ज्यादा फीस लेने वाले स्कूलों को नोटिस जारी कर पांच लाख रुपये जुर्माने की चेतावनी दी गई। इनको एक जून तक जवाब देने का मौका दिया गया है। समिति को 20 विद्यालयों के खिलाफ बढ़ी फीस लेने की 28 शिकायतें मिली थीं। जांच में आठ शिकायतें सही पाई गईं। इनमें से दो स्कूलों ने कमेटी की जांच में ज्यादा फीस लेने की बात स्वीकार की। कार्रवाई के डर से इन स्कूलों ने बढ़ी फीस अगले महीने में समायोजित करने का आश्वासन दिया है। उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम- 2018 एवं संशोधन अधिनियम 2020 के अनुपालन में गुरुवार को डीएम की अध्यक्षता में समीक्षा की गई। बैठक में समिति ने जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस पर डीएम ने निर्देश दिए कि अधिक फीस लेने वाले विद्यालयों को नोटिस जारी कर पूछा जाए कि उनके खिलाफ अर्थदंड क्यों न लगाया जाए। इन स्कूलों को मिला नोटिस डीआईओएस राकेश कुमार ने बताया कि नोटिस पाने वाले विद्यालयों में एलन हाउस पब्लिक स्कूल, सीलवती आइडियल पब्लिक स्कूल, रामनगर, आश्रम एकेडमी, कृष्णानगर, हुकुम सिंह मेमोरियल इंटर कॉलेज, इंदिरानगर, सेंट डोमिनिक इंटर कॉलेज, सेठ एमआर जयपुरिया गोयल कैम्पस, अयोध्या रोड, ब्राइट वे इंटर कॉलेज, जानकीपुरम और केजे मॉडर्न पब्लिक स्कूल शामिल हैं।

Cyber Fraud Alert: गृह विभाग के नाम पर जारी हुआ फर्जी IPS ट्रांसफर आदेश, आरोपी गिरफ्तार

 पटना बिहार के तीन जिलों के एसपी के तबादले का फर्जी अधिसूचना जारी किए जाने का एक मामला सामने आया है। यह करतूत साइबर फ्रॉड गिरोह की बताई जा रही है। सीतामढ़ी, सारण और बेगूसराय जिला का एसपी के तबादले का फर्जी अधिसूचना का पता चलने पर गृह विभाग ने इसकी शिकायत पटना साइबर पुलिस में की। मामले में एक आरोपी की गिरफ्तारी की गयी है जो बिहार पुलिस में पहले से तैनात है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है ताकि गिरोह में शामिल अन्य गुर्गो की पहचान करके ठोस कार्रवाई की जा सके। साइबर पुलिस ने इस मामले में गुरुवार को केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपितों की गिरफ्तारी भी कर ली गई है। लेकिन अधिकारी फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं। साइबर पुलिस इस मामले का शुक्रवार को खुलासा कर सकती है। दरअसल, पिछले दिनों एक शख्स ने सीतामढ़ी, सारण और बेगूसराय जिले के एसपी के तबादले का फर्जी अधिसूचना जारी कर दिया था। गृह मंत्रालय के नाम से जारी फर्जी पत्र सोशल मीडिया पर वायरल था। इसकी जानकारी होने पर गृह विभाग ने मामले को तुरंत संज्ञान में लिया। बाद में गृह मंत्रालय की और से इसकी शिकायत पटना साइबर थाना में की गई। गृह मंत्रालय ने साइबर पुलिस से मामले की जांच कर फर्जी अधिसूचना बनाने और उसे वायरल करने वाले की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। बताया जाता है कि जिस शख्स ने फर्जी अधिसूचना जारी किया था वह पुलिस विभाग में तैनात है। गिरफ्तारी के बाद आरोपित से पूछताछ में यह पता चल सकेगा कि ऐसा करने के पीछे उसकी मंशा क्या थी। माना जा रहा है कि उसका साइबर फ्रॉड गिरोह से ताल्लुक है। इस मामले में डीएसपी व साइबर थाना प्रभारी नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि साइबर पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। जल्द ही पूरे रैकेट का उद्भेदन कर लिया जाएगा। दरअसल, इस मामले का खुलासा गृह विभाग के दिवंगत पुलिस वालों के परिजनों को बीमा चेक वितरण कार्यक्रम के दौरान हुआ। विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि बीती रात तीन आईपीएस के तबादले की अधिसूचना सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए एक शातिर को गिरफ्तार कर लिया है जो कहीं पुलिस कार्यालय में काम कर रहा था। उन्होंने दावा किया कि क्राइम होने पर पुलिस काफी कम समय में कांड का उद्भेदन और बदमाशों की गिरफ्तारी कर रही है।

भीषण गर्मी पर योगी सरकार अलर्ट, अस्पताल-बिजली-पानी व्यवस्था की होगी लगातार निगरानी

लखनऊ यूपी में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को देखते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी कहा है कि जनसामान्य को हीट स्ट्रोक, निर्जलीकरण और गर्मी से होने वाली अन्य समस्याओं से बचाने के लिए सभी विभाग समन्वय बनाकर कार्य करें। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग और राहत एजेंसियां अलर्ट मोड में रहें तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। साथ ही बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखने को लेकर लोगों से खास अपील की। मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों को अस्पतालों, पेयजल व्यवस्था और बिजली आपूर्ति की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि गर्मी के इस दौर में आमजन को सबसे अधिक परेशानी बिजली कटौती और पानी की कमी से होती है, इसलिए इन दोनों व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखना प्राथमिकता होनी चाहिए। सभी जिलाधिकारी अपने-अपने जनपदों में नियमित समीक्षा करें और जहां भी समस्या हो, उसका तत्काल समाधान सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने सरकारी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि अस्पतालों में आवश्यक दवाएं, बेड, आईवी फ्लूइड और डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। साथ ही एंबुलेंस सेवाओं को भी सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे आपात स्थिति में मरीजों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके। दोपहर में बच्चों को अनावश्यक बाहर न निकलने दें सीएम योगी ने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखा जाए, क्योंकि ये वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि दोपहर के समय बच्चों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने दें और उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाते रहें। उन्होंने बुजुर्गों को भी तेज धूप से बचाने और उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने लोगों से ढीले सूती कपड़े पहनने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हल्के रंग के सूती वस्त्र शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं और गर्मी से राहत देते हैं। इसके साथ ही अधिक से अधिक पानी पीने, ओआरएस और नींबू पानी जैसे पेय पदार्थों का सेवन करने तथा धूप में निकलते समय सिर को ढकने जैसे उपाय अवश्य अपनाए जाएं। कार्यस्थलों पर पेयजल व छाया सुनिश्चित की जाए सीएम योगी ने आग लगने की घटनाओं को लेकर भी लोगों और अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। खेतों, बाजारों, गोदामों और रिहायशी इलाकों में अग्नि सुरक्षा उपायों को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाए। ऐसी कोई भी लापरवाही न की जाए, जिससे आग लगने का अंदेशा हो। उन्होंने फायर विभाग को भी पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने श्रमिकों और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निर्माण कार्यों और खुले स्थानों पर काम करने वाले श्रमिकों को लू, थकावट और निर्जलीकरण से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। श्रमिकों से लगातार काम न कराएं कार्यस्थलों पर पेयजल, छाया व प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अत्यधिक गर्मी के समय श्रमिकों से लगातार काम न कराया जाए और उन्हें समय-समय पर आराम दिया जाए। सीएम योगी ने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखें। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से भी आमजन के बीच जागरूकता फैलाने को कहा है, ताकि लोग गर्मी व लू से बचाव के उपायों को अपनाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनता की सुरक्षा व सुविधा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी स्थिति में लोगों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।

Heatwave Alert: पटना समेत कई जिलों में स्कूलों पर पाबंदी, डीएम का बड़ा आदेश

पटना बिहार की राजधानी पटना में भीषण गर्मी और हीटवेव को देखते हुए 5वीं तक के स्कूल बंद कर दिए गए हैं। डीएम त्यागाराजन ने कक्षा 6 से 8 का समय भी बदल दिया है। छठी से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं की छुट्टी सुबह 10.30 बजे तक हर हालत में कर दी जाएगी। डीएम ने जिले के सभी निजी एवं सरकारी स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्रों और प्री स्कूलों के लिए यह आदेश जारी किया। यह आदेश शुक्रवार 22 मई से मंगलवार 26 मई तक लागू रहेगा। बिहार के अन्य जिलों में भी स्कूलों में पाबंदी लगाई गई है। डीएम त्यागराजन ने गुरुवार को जारी आदेश में कहा कि दोपहर के समय पड़ रही भीषण गर्मी के कारण बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। इस कारण 5वीं तक की कक्षाओं की शैक्षणिक गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है पटना में 40 डिग्री के ऊपर पहुंचा तापमान पटना में गुरुवार को तापमान 40 डिग्री सेल्यिसय के पार चला गया। दोपहर के समय तपिश और लू की स्थिति देखने को मिली। इस कारण डीएम ने तुरंत आदेश जारी कर स्कूलों पर पाबंदी लगा दी। छोटे बच्चों के स्कूल बंद होने और छठी से आठवीं तक की कक्षाओं का समय बदले जाने से अभिभावकों को राहत मिली है। अभी और बढ़ेगी गर्मी मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार बिहार में अभी गर्मी और बढ़ेगी। अगले 3-4 दिनों तक पटना का मौसम शुष्क रहने के आसार हैं। तीखी धूप और लू चलने से तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। पटना जिला प्रशासन ने भीषण गर्मी को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की अपील की है। लू से बचाव के लिए दोपहर के समय अनावश्यक घर से बाहर ना निकलें। नंगे पैर धूप में ना रहें। छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। भीषण गर्मी में शरीर को हायड्रेट रखने के लिए लगातार पानी, जूस, नारियल पानी, नींबू, तरबूज आदि का सेवन करें। छपरा, सासाराम, कैमूर, गयाजी में भी स्कूल बंद बता दें कि भीषण गर्मी का असर दक्षिण बिहार के जिलों में अत्यधिक पड़ रहा है। इसके चलते अन्य जिलों में भी स्कूलों पर पाबंदी लगाई गई है। छपरा और कैमूर में 5वीं तक के स्कूल पहले ही बंद किए जा चुके हैं। इसी तरह, सासाराम में 5वीं तक के स्कूल 31 मई तक बंद कर दिए गए हैं। गयाजी में भी छोटे बच्चों के स्कूल 25 मई तक बंद हुए हैं।

Heatwave Alert: रांची समेत कई जिलों में तेज गर्मी, 26 मई तक येलो अलर्ट जारी

 रांची झारखंड में भीषण गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है. आसमान से बरस रही आग में राजधानी रांची समेत झारखंड के कई जिले तप रहे हैं. गर्मी से लोग परेशान हैं. गुरुवार को रांची का अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इसमें पिछले 24 घंटे में 0.4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई. वहीं, जमशेदपुर का अधिकतम तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस, बोकारो का 41.1 डिग्री सेल्सियस और चाईबासा का 41.8 डिग्री सेल्सियस रहा. इन जिलों में शुक्रवार को भी तेज गर्मी का असर शुक्रवार को रांची सहित गुमला, सिमडेगा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, रामगढ़, गिरिडीह, बोकारो, धनबाद, सरायकेला, देवघर, जामताड़ा, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ में दोपहर तक तेज धूप रहेगी और तापमान बढ़ेगा. हालांकि, दोपहर बाद तेज हवा के साथ कहीं-कहीं बारिश हो सकती है. अन्य जिलों में स्थिति सामान्य होगी. रांची में 26 मई तक येलो अलर्ट जारी रांची में मौसम का मिजाज अगले कुछ दिनों तक बदलता रहेगा. रांची में 26 मई तक दोपहर बाद बादल छाने और बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है. मेदिनीनगर में पारा 45 डिग्री के पार मेदिनीनगर का अधिकतम तापमान गुरुवार को 45.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया. इससे पहले छह मई 1978 को मेदिनीनगर का अधिकतम तापमान 47.8 डिग्री सेल्सियस और मई 2024 को अधिकतम तापमान 47.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. मौसम विभाग के अनुसार, 22 और 23 मई को गढ़वा, पलामू, चतरा में लू चलने की संभावना है. स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से की अपील झारखंड में लगातार बढ़ते तापमान, भीषण गर्मी और लू (हीट स्ट्रोक) की गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने राज्य की जनता से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है. उन्होंने दिन के वक्त आम जनता से जरूरत पड़ने पर ही घर से निकलने की सलाह दी है. वहीं, राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों, सदर अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. अस्पतालों में गर्मी से बचने के लिए विशेष इंतजाम करने को कहा है. इनमें ORS काउंटर, जरूरी दवाइयां, आइवी फ्लूइड्स, आपातकालीन बेड, कूलिंग सुविधा और चिकित्सकीय टीमों को अलर्ट मोड में रखा गया है. इसके अलावा अस्पतालों में वाटर कूलर, निर्बाध बिजली बहाल रखने सहित इस जैसी आपदा से निबटने की हर संभव उपाय करने को कहा है.

योगी सरकार का बड़ा कदम, डिजिटल ट्रेनिंग से हाईटेक बन रहे शिक्षक

डिजिटल प्रशिक्षण से शिक्षकों को हाईटेक बना रही योगी सरकार – निष्ठा प्रशिक्षण 2026-27 का पहला चरण शुरू, दीक्षा पोर्टल के माध्यम से होगा ऑनलाइन प्रशिक्षण – प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक के शिक्षकों को नई शिक्षा पद्धति, एफएलएन और डिजिटल सुरक्षा का मिलेगा प्रशिक्षण – तकनीक आधारित शिक्षक प्रशिक्षण मॉडल को जमीनी स्तर तक मजबूत कर रही योगी सरकार लखनऊ योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए लगातार प्रयासरत है। शिक्षकों को नई तकनीक, आधुनिक शिक्षण पद्धति और डिजिटल दक्षता से लैस करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। प्रदेश सरकार ने सत्र 2026-27 के लिए निष्ठा प्रशिक्षण कार्यक्रम का पहला चरण दीक्षा पोर्टल के माध्यम से शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 12 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा। योगी सरकार की यह पहल दर्शाती है कि अब प्रदेश में शिक्षा सुधार केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षकों की क्षमता वृद्धि और डिजिटल दक्षता को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का फोकस अब तकनीक आधारित शिक्षक प्रशिक्षण मॉडल को जमीनी स्तर तक मजबूत करने पर है, ताकि कक्षा शिक्षण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। निष्ठा कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षकों का नामांकन 21 मई 2026 से शुरू हो गया है, जबकि नामांकन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 15 सितंबर 2026 तक संचालित होंगे। शासन स्तर से सभी बीएसए, डायट प्राचार्य, बीईओ, एसआरजी, एआरपी और डायट मेंटर्स को शिक्षकों का शत-प्रतिशत नामांकन और प्रशिक्षण सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। तीन श्रेणियों में होगा प्रशिक्षण निष्ठा प्रशिक्षण कार्यक्रम को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पहली श्रेणी ईसीसीई की है, जिसमें प्री-प्राइमरी से कक्षा 2 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा और बुनियादी सीखने की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। दूसरी श्रेणी एफएलएन की है, जिसके अंतर्गत कक्षा 3 से 5 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को भाषा और गणितीय दक्षता आधारित शिक्षण पद्धति से जोड़ा जाएगा तथा तीसरी श्रेणी में कक्षा 6 से 12 तक के शिक्षकों के लिए एडवांस कोर्स शामिल किए गए हैं। इनमें साइबर हाइजीन, ई-वेस्ट के खतरे, एक्शन रिसर्च और 'कैच द रेन' जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म से मजबूत हो रहा शिक्षक प्रशिक्षण योगी सरकार पहले ही स्मार्ट क्लास, मिशन प्रेरणा, निपुण भारत मिशन और तकनीक आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ा रही है। अब दीक्षा पोर्टल के माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर उसे और अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को नई शिक्षा नीति, गतिविधि आधारित शिक्षण, डिजिटल सुरक्षा और व्यावहारिक शिक्षा मॉडल से जोड़ना है, ताकि बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके। शिक्षा सुधार के साथ शिक्षक दक्षता पर फोकस योगी सरकार की रणनीति साफ है कि जब शिक्षक तकनीक और आधुनिक शिक्षण पद्धति में दक्ष होंगे, तभी परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सीखने की क्षमता और शैक्षिक गुणवत्ता में व्यापक सुधार दिखाई देगा। यही कारण है कि अब प्रदेश में शिक्षक प्रशिक्षण को केवल औपचारिक प्रक्रिया न रखकर डिजिटल और परिणाम आधारित मॉडल में बदला जा रहा है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर पर नई मजबूती मिल सके।

मध्यप्रदेश बनेगा ‘मिल्क कैपिटल’, मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले- प्रयास ला रहे रंग

मध्यप्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने के प्रयास हो रहे फलीभूत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव दुग्ध उत्पादकों को गत वर्ष से 15 प्रतिशत अधिक हुआ भुगतान प्रतिदिन हो रहा 9.67 लाख किलोग्राम दुग्ध संकलन 11 प्रतिशत हुई वृद्धि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पशुपालन और डेयरी विभाग के कार्यों की समीक्षा की भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने के प्रयास फलीभूत होने लगे हैं। समन्वित प्रयासों से मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन बढ़ाते हुए लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार है। प्रदेश में प्रतिदिन 9.67 लाख किलोग्राम औसत दुग्ध  संकलन की उपलब्धि दर्ज हुई है।  यह गत वर्ष से 11 प्रतिशत अधिक है। इस उपलब्धि को निरंतर बढ़ाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में पशुपालन विभाग  की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में बताया गया कि गत छह माह में 11 लाख किलोग्राम से अधिक औसत प्रतिदिन दुग्ध संकलन हुआ है। दुग्ध संघों ने दुग्ध उत्पादक किसानों को गत वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत से अधिक राशि का भुगतान किया है। पशुपालन और डेयरी विकास राज्य मंत्री  (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, मुख्य सचिव अनुराग जैन और वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनू योजना, आचार्य विद्यासागर गौसंवर्धन योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम, मवेशियों के स्वास्थ्य की बेहतर देखरेख,चारा उत्पादन और उपलब्धता,पशु पोषण,स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना, क्षीरधारा ग्राम योजना,ब्रीडर एसोसिएशन,दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान, गोरस ण्ेप, राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के कार्यों और एनडीडीबी द्वारा दिए जा रहे सहयोग की विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त की।   दुग्ध उत्पादन में नम्बर वन बनाना है प्रदेश को मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरे क्रम पर है। हमारा लक्ष्य प्रथम क्रम पर आने का है। इस दिशा में प्रारंभ किए गए प्रयास सफल हो रहे हैं। प्रदेश में 1752 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है।  ग्वालियर डेयरी प्लांट के आधुनिकीकरण, शिवपुरी डेयरी प्लांट को पुनर्जीवन देने, इंदौर में 3 लाख लीटर रोजाना क्षमता वाले मिल्क पाउडर प्लांट की शुरूआत जैसे ठोस कार्य हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि  निश्चित ही इन प्रयासों से प्रदेश को दुग्ध उत्पादन और विक्रय के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में सहयोग मिला है। ये प्रयास जारी रहना चाहिए। बीते वर्ष दुग्ध उत्पादकों को किया 1609 करोड़ रूपये का भुगतान प्रदेश में श्वेत क्रांति लाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मार्गदर्शन में हुए कार्यों से वर्ष 2024-25 में 1398 करोड़ की तुलना में वर्ष 2025-26 में दुग्ध उत्पादकों को 1609 करोड़ रुपए की राशि के भुगतान (गत वर्ष से 15 प्रतिशत अधिक) में सफलता मिली है। दुग्ध उत्पादकों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के लिए अपनाई गई प्रणाली से विभिन्न दुग्ध संघों में खरीद मूल्य में 2.50 से 8.50 प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। किसानों की आय बढ़ने से उनके जीवन में समृद्धि आ रही है। सांची ब्रांड को सुदृढ़ करने में मिली कामयाबी बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में विपणन और ब्रांड सुदृढ़ीकरण के अंतर्गत सांची ब्रांड को लोकप्रिय बनाते हुए विभिन्न उत्पादों की बिक्री बढ़ाने में भी सफलता मिली है। मूल्यसंवर्धित उत्पादों में घी की बिक्री 17प्रतिशत बढ़ी है। पनीर, दही, छाछ और फ्लेवर्ड दूध की बिक्री में भी वृद्धि दर्ज हुई है। बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग के प्रयास भी किए गए। बैठक में प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।