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उदयपुर की हवा हुई जहरीली! 6 साल में सबसे खराब AQI, लोगों के लिए बढ़ा खतरा

 उदयपुर उदयपुर शहर की आबोहवा छह साल में इस अगस्त जितनी जहरीली कभी नहीं रही। एयर क्वालिटी इंडेक्स के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2021 से 2025 तक शहर की हवा ज्यादातर दिन मॉडरेट यानी सामान्य श्रेणी में दर्ज हुई थी। पिछले साल अगस्त में पूरे 31 दिन सामान्य रहे, 2023 और 2024 में भी 90 फीसदी से ज्यादा दिन मॉडरेट में गुजरे। पर, बीते अगस्त ने रुझान पूरी तरह तोड़ दिया। यही नहीं सितंबर के पहले सप्ताह में भी हवा गुणवत्ता खराब बनी हुई है। आमतौर पर दिवाली के आसपास प्रदूषण का जो स्तर होता है, वह इन दिनों है। इस साल के अगस्त के 31 दिनों में से 23 दिन खराब और सात दिन सीधे हानिकारक श्रेणी में रहे हैं। यानी हर तीसरा दिन ऐसा रहा, जब सांस लेना सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हुआ। इसके उलट, अच्छी श्रेणी का एक भी दिन बीते अगस्त में दर्ज नहीं हुआ, जबकि 2024 में तीन और 2022 में एक दिन इस श्रेणी में मिला था। 2021 में भी 25 दिन खराब श्रेणी में रहे थे, लेकिन उस साल एक भी दिन हानिकारक स्तर तक नहीं पहुंचा था। जबकि इस साल सात दिन इस निशान को पार कर गए। इसलिए मनाया जाता है इंटरनेशनल डे संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2019 में यह दिवस घोषित किया था, जो पहली बार 7 सितंबर 2020 को मनाया गया। इसका उद्देश्य वायु प्रदूषण के प्रति जागरुकता बढ़ाना और साफ हवा के लिए प्रेरित करना है। ऐसी हवा, जिसमें प्रदूषण का स्तर इतना कम हो कि इंसान स्वस्थ हवा में सांस ले सके। इस बात पर जोर दिया जाता है कि साफ दिखाई देने वाला आसमान हमेशा साफ हवा की गारंटी नहीं है। सबसे भारी रहे ये दिन बीते अगस्त में 28 तारीख को सबसे ज्यादा (168 एक्यूआई) दर्ज हुआ, जो महीने का सबसे प्रदूषित दिन रहा। इसके अलावा 20 से 24 अगस्त के बीच लगातार 5 दिन शहर हानिकारक श्रेणी में झेलता रहा। पिछले पांच सालों में ऐसा कोई लगातार दौर सामने नहीं आया है। ऐसे समझें AQI कितना खराब और कितना अच्छा     0-50 तक अच्छा     51-100 तक सामान्य     101-150 तक खराब     151-200 हानिकारक     201-300 तक बेहद खराब     301 से ऊपर खतरनाक वर्षवार अगस्त में एक्यूआई (दिनों की संख्या) वर्ष        अच्छा    सामान्य    खराब    हानिकारक 2021    00            05           25         01 2022    01              23         07         00 2023    00              30           01       00 2024    03              28           01        00 2025    00             31           00          00 2026    00            01           23           07 नोट: बेहतर खराब और खतरनाक श्रेणी के दिनों को शामिल नहीं किया गया है। इनका कहना है… इस साल बरसात नहीं होना सबसे बड़ा कारण है, जिससे प्रदूषक तत्व वातावरण में देर तक टिके हुए हैं। साथ ही पूर्व में हुई बरसात के बाद सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से उड़ने वाली धूल भी वजह रहती है। शहर में बड़े निर्माण कार्य भी चल रहे हैं। -विनय कट्टा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल

बेटियां जितना पढ़ेंगी, उतना ही सशक्त होगी परिवार, समाज और प्रदेश – लखन लाल देवांगन

रायपुर शासकीय मिनीमाता कन्या महाविद्यालय, कोरबा में आयोजित दीक्षारम्भ समारोह में कैबिनेट मंत्री  लखन लाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत नवप्रवेशित छात्राओं का स्वागत किया और अतिथियों द्वारा महाविद्यालय की लगभग 1,500 छात्राओं को सीएसआर (CSR) मद के माध्यम से एजुकेशन किट प्रदान की गई। कार्यक्रम में महापौर  संजू देवी राजपूत अति विशिष्ट अतिथि तथा कलेक्टर  कुणाल दुदावत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।  अन्य शासकीय कॉलेजों में भी बनेंगे विशाल डोम  शिक्षा के क्षेत्र में अधोसंरचनात्मक विकास पर जोर देते हुए मंत्री  देवांगन ने कहा कि मिनीमाता कन्या महाविद्यालय में डीएमएफ (DMF) मद से विशाल डोम का निर्माण कराया जाएगा। विकास मॉडल के केंद्र में GYAN मंत्री  देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के विकसित भारत और मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। प्रदेश का विकास मॉडल GYAN (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) पर केंद्रित है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात (GER) वर्ष 2021-22 के 19.6 प्रतिशत से बढ़कर वर्तमान में 27.5 प्रतिशत हो गया है। मेहनत से सफलता के शिखर तक पहुँचें बेटियाँ- महापौर महापौर  संजू देवी राजपूत ने छात्राओं को देश का भविष्य और विकसित भारत की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए निरंतर मेहनत और संघर्ष के साथ सफलता के शिखर तक पहुँचने का आह्वान किया। शिक्षा डीएमएफ की सर्वाेच्च प्राथमिकता- कलेक्टर कलेक्टर कोरबा  कुणाल दुदावत ने स्पष्ट किया कि जिले में डीएमएफ मद के कार्यों में शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जिले के छात्र-छात्राओं को देश के किसी भी शासकीय महाविद्यालय में उच्च अध्ययन के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। इस अवसर पर स्थानीय पार्षद, महाविद्यालय की प्राचार्य  पपिया चतुर्वेदी, प्राध्यापकगण एवं जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

मोहनजीत सिंह पर हमले के विरोध में पंजाब-चंडीगढ़ का मिनिस्टीरियल स्टाफ हड़ताल पर, कल भूख हड़ताल

मोहाली  पंजाब सरकार और सरकारी कर्मचारियों के बीच चल रही तनातना दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। साझा मुलाजिम मंच ने साफ कर दिया कि जब तक सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी वो अपना संघर्ष नहीं छोड़ेंगे। साझा मुलाजिम मंच के अध्यक्ष सुखचैन सिंह खैहरा ने कहा कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मंगलवार को पंजाब भर में मिनिस्टीरियल स्टाफ सामूहिक छुट्‌टी लेकर हड़ताल पर रहेगा। वहीं चडीगढ़ व मोहाली के कर्मचारी अपने-अपने दफ्तरों के बाहर भूख हड़ताल पर बैठेंगे। सुखचैन सिंह खैहरा का कहना है कि साझा मुलाजिम मंच ने मुलाजिमों के खिलाफ जारी किए गए पत्र को सात सितंबर तक वापस करने का अल्टीमेटम दिया था लेकिन सरकार ने वो लेटर वापस नहीं किया। जिसके बाद मुलाजिमों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत विरोध शुरू करने का फैसला कर दिया है। उन्होंने बताया कि क्लेरिकल स्टाफ सामूहिक छुट्‌टी पर रहेगा। उन्होंने कहा कि संगरूर में मोहनजीत सिंह पर हुए हमले के विरोध में कर्मचारी अपने-अपने दफ्तरों के बाहर बैठकर भूख हड़ताल करेंगे। इस मामले में रविवार को भी यूनियन की बैठक हुई। बैठक में यूनियन ने क्या फैसला किया, जानिए…     08 सितंबर को पूर्ण काम बंद और भूख हड़ताल: चंडीगढ़ के समस्त निदेशालयों, मोहाली के सरकारी कार्यालयों, पंजाब सिविल सचिवालय और एफ.सी.आर. कार्यालयों में आठ सितंबर को पूरी तरह काम बंद रखकर मोहनजीत सिंह (गांव शेरों) के हक में एक दिवसीय भूख हड़ताल की जाएगी।     काली पट्टी और काले कपड़ों में विरोध: विरोध प्रदर्शन के दौरान सभी कर्मचारी काले कपड़े पहनकर या काले बिल्ले लगाकर सरकार की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण एवं अनुशासित ढंग से अपना रोष प्रकट करेंगे।     रिटायर्ड साथियों की विशेष निगरानी टीम गठित: हड़ताल को सफल बनाने के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारियों की एक विशेष टीम बनाई गई है। यह टीम आठ सितंबर को विभिन्न दफ्तरों का दौरा कर स्थिति की समीक्षा करेगी। टीम यह देखेगी कि कोई कर्मचारी दफ्तरों में काम तो नहीं कर रहे।     अधिकतम भागीदारी की जिम्मेदारी: सभी कर्मचारी संगठनों को अपने-अपने विभागों से अधिक से अधिक कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और इस एक्शन को पूरी तरह सफल बनाने का जिम्मा सौंपा गया है।     सभी एकजुट हैं: प्रधान सुखचैन सिंह खैहरा का कहना है कि अपनी मांगों को लेकर सभी यूनियन एक जुट हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने डीए को लेकर सरकार ने जो बयान दिया उसे भी अभी तक लागू नहीं किया। उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री सिर्फ हवा में बात कर रहे हैं। मान भत्ता वर्कर्स साझा मोर्चा की मोहाली में रैली मुलाजिम नेता जरमनजीत सिंह ने बताया कि मान भत्ता वर्कर्स साझा मोर्चा द्वारा आशा कार्यकर्ताओं, फैसिलीटेटरों, मिड-डे मील वर्करों और सफाई कर्मचारियों की जायज मांगों की पूर्ति के लिए 8 सितंबर को मोहाली में रैली की जा रही है। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटिक मुलाजिम फेडरेशन उनकी रैली को पूरा समर्थन देगा और पंजाब सरकार से इन कर्मचारियों को तुरंत न्यूनतम वेतन के दायरे में लाने की मांग करेगा।

स्कूल निर्माण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, राजस्थान में कनिष्ठ अभियंता निलंबित, अधिकारियों को सख्त निर्देश

जयपुर  स्कूली शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि जांच के दौरान निर्माण कार्य में कोई लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यादव सोमवार को शासन सचिवालय में स्कूली शिक्षा विभाग के विभिन्न निर्माण कार्यों को लेकर वीसी के माध्यम से समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने भवनों की मरम्मत, नए भवनों के निर्माण, अनुपयोगी और जर्जर हो चुके भवनों को नष्ट (डिसमेंटल) करने तथा भूमि आवंटन की प्रक्रियाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। यादव ने कहा कि 'स्कूल नॉर्म्स' के अनुसार सभी विद्यालयों में पर्याप्त और सुलभ शौचालयों का निर्माण सुनिश्चित किया जाए तथा जहां आवश्यकता हो, वहां निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किए जाएं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 2,021.25 करोड़ रुपए के प्रस्तावित कार्यों के विरुद्ध विभिन्न योजनाओं एवं अभिसरण के माध्यम से लगभग 3,037.21 करोड़ रुपए के कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें 1,293 नवीन विद्यालय भवन, 5,348 वृहद मरम्मत कार्य तथा 9,334 नवीन/अतिरिक्त कक्षा-कक्ष शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 290 नवीन विद्यालय भवन, 599 वृहद मरम्मत कार्य तथा 2,099 कक्षा-कक्षों का निर्माण कार्य प्रगतिरत है। उन्होंने इन सभी कार्यों को निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने तथा निर्माण की प्रत्येक स्तर पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। यादव ने कहा कि सभी निर्माण कार्य स्वीकृत निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप ही करवाए जाएं। उन्होंने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कोनी, जिला नागौर में प्रगतिरत निर्माण कार्य में तकनीकी पर्यवेक्षण में प्रथमदृष्टया गंभीर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कनिष्ठ अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता एवं तकनीकी मानकों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। एसीएस यादव ने कहा कि जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारी स्वयं जाकर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों का सघन निरीक्षण करें। वे वहां चल रहे मरम्मत और नए भवन निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन करें और उस संबंध में राज्य स्तर पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूलों से संबंधित किसी भी आवश्यक कार्य—चाहे वह निर्माण कार्य हो या मरम्मत के लिए केवल पत्र लिखने से काम नहीं चलेगा। संबंधित अधिकारी कार्यों को समय पर पूरा करवाएंगे। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने टीम के साथ एकजुट होकर काम करने और किसी भी समस्या को तुरंत राज्य स्तर पर अवगत कराने के निर्देश दिए। कोई भी कार्य अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहना चाहिए। साथ ही एसीएस ने निर्देश दिए कि वर्तमान में प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का दौर जारी है, बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए। विभिन्न विभागीय योजनाओं की हुई विस्तृत समीक्षा बैठक में विभिन्न महत्वपूर्ण विभागीय योजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। इनमें पीएम-जनमन (PM-JANMAN), पीएम श्री (PM Shri) योजना के विभिन्न चरण, समग्र शिक्षा अभियान (SMSA), स्टार्स (STARS) प्रोजेक्ट के तहत वोकेशनल रूम्स व हॉस्टल निर्माण, राज्य बजट घोषणाओं के तहत स्वीकृत कार्य, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA) और डाइट (DIET) को 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' बनाने से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही वर्ष 2026-27 के एक्शन प्लान के क्रियान्वयन की स्थिति पर भी चर्चा की गई। जिला स्तरीय निर्माण प्रकोष्ठों की समस्याओं पर मंथन समीक्षा बैठक में जिला स्तर के निर्माण प्रकोष्ठों (ADPC) के समक्ष आ रही व्यावहारिक चुनौतियों पर भी विस्तार से मंथन हुआ। कार्यालयों में एमआईएस (MIS) सपोर्ट की आवश्यकता, साइट निरीक्षण, भूमि विवाद व नामान्तरण (Land-Related Issues), टेंडर प्रक्रिया एवं संवेदकों के बिल भुगतान में होने वाले विलंब जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। कार्यों में तेजी लाने के लिए टेंडर प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण लैब्स स्थापित करने के सुझावों पर भी विचार किया गया।

साक्षरता से सशक्त हो रहा मध्यप्रदेश, लिख रहा विकास की नई इबारत

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा असाक्षरों को साक्षर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिसका परिणाम है कि विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश में साक्षरता अभियान ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में संचालित विभिन्न साक्षरता कार्यक्रमों से अब तक 1 करोड़ 63 लाख 4 हजार 132 शिक्षार्थी जुड़े हैं। इनमें से 1 करोड़ 38 लाख 90 हजार 550 शिक्षार्थियों ने सफलता हासिल की है। साक्षरता का यह अभियान अब केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों को समझने, शासकीय योजनाओं का लाभ लेने और आत्मनिर्भर बनने के लिए सक्षम बना रहा है। संचालक राज्य शिक्षा केंद्र  हरजिंदर सिंह ने बताया कि वर्ष 2011 की जनगणना में प्रदेश में करीब 1 करोड़ 89 लाख 65 हजार 583 असाक्षर व्यक्ति चिन्हित किए गए थे। निरंतर संचालित साक्षरता कार्यक्रमों के परिणामस्वरूप वर्तमान में यह संख्या घटकर लगभग 50 लाख 75 हजार 33 रह गई है। प्रदेश में साक्षरता को जन-अभियान का स्वरूप देते हुए विभिन्न चरणों में कार्यक्रम संचालित किए गए, जिनसे बड़ी संख्या में वयस्क शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े हैं। ‘उल्लास’ नव भारत साक्षरता कार्यक्रम से साक्षरता अभियान को मिली नई गति वर्तमान में प्रदेश में "उल्लास नव भारत साक्षरता" कार्यक्रम 2022-2027 संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत अब तक 99 लाख 68 हजार 100 शिक्षार्थियों को साक्षरता अभियान से जोड़ा गया है। इनमें से 84 लाख 46 हजार 498 शिक्षार्थियों ने सफलता प्राप्त की है। उल्लास कार्यक्रम के जिला-वार परिणामों में भी कई जिलों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। झाबुआ में 1,96,967, विदिशा में 2,33,642 और नीमच में 1,55,561 शिक्षार्थियों ने सफलता हासिल की है। इसी प्रकार खरगोन में 3,09,948, उज्जैन में 3,75,618, धार में 2,69,673, रीवा में 2,55,188 और खंडवा में 2,51,462 शिक्षार्थियों ने सफलता प्राप्त की है। झाबुआ, नीमच और विदिशा ने हासिल की 100 प्रतिशत उपलब्धि शिक्षार्थियों को साक्षरता कार्यक्रम से जोड़कर झाबुआ, नीमच और विदिशा जिले ने अपने निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 100 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है। बुरहानपुर और खंडवा में 97 प्रतिशत, भिंड और निवाड़ी में 89 प्रतिशत, बालाघाट में 88 प्रतिशत एवं राजगढ़ में 87 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई है। साक्षरता से आगे सशक्तिकरण का लक्ष्य प्रदेश में संचालित विभिन्न साक्षरता कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं, बल्कि शिक्षार्थियों को दैनिक जीवन में पढ़ने, लिखने और गणना करने में सक्षम बनाने के साथ उनके अधिकारों, कर्तव्यों, शासकीय योजनाओं और उपलब्ध अवसरों के प्रति जागरूक करना भी है। साक्षरता के बढ़ते दायरे का असर लोगों के दैनिक जीवन में भी दिखाई दे रहा है। बैंकिंग व्यवस्था को समझने, शासकीय दस्तावेज पढ़ने, विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने में साक्षरता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रदेश में साक्षरता अभियान को सफल बनाने में शिक्षकों, स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों, स्थानीय समुदाय, स्व-सहायता समूहों, प्रशासन और विभिन्न विभागों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। साक्षरता के क्षेत्र में हासिल की गई यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों लोगों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव की तस्वीर भी प्रस्तुत करती है।  

बच्चों के जीवन को सही दिशा देने वाली समझ देना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य- मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को लिखी पाती शिक्षक वह दीप हैं, जो ज्ञान का प्रकाश फैलाकर आने वाली पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करते हैं- सीएम योगी बच्चों के जीवन को सही दिशा देने वाली समझ देना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य- मुख्यमंत्री तकनीक तेजी से जीवन बदल रही, डिजिटल साक्षरता के साथ एआई साक्षरता भी समय की आवश्यकता- योगी ऑपरेशन कायाकल्प, मिशन प्रेरणा, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना और कौशल विकास कार्यक्रमों पर विशेष जोर प्रदेश के विद्यालयों में ड्रॉपआउट दर को न्यूनतम करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली- मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस और आगामी अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम पाती लिखी है। इसमें मुख्यमंत्री ने कहा कि 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर उन्हें राष्ट्र निर्माण की नींव रखने वाले 81 गुरुजनों को सम्मानित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। शिक्षक वह दीप हैं, जो ज्ञान का प्रकाश फैलाकर आने वाली पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इसी ज्ञान के विस्तार और प्रत्येक व्यक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाएगा। शिक्षा का उद्देश्य संस्कार और जीवन मूल्यों से जोड़ना भी मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के विद्यालय जाने का उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना सीखना नहीं है, बल्कि उन्हें ज्ञान, संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और जीवन को सही दिशा देने वाली समझ प्रदान करना है। प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरुकुल समग्र शिक्षा के केंद्र रहे हैं, जहां ज्ञान के साथ जीवन मूल्यों और दायित्वबोध की शिक्षा दी जाती थी। यही भाव आज की शिक्षा व्यवस्था का भी आधार होना चाहिए। ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह जीवन को सरल बनाने के साथ समाज के लिए भी उपयोगी साबित हो। तकनीक के दौर में डिजिटल और एआई साक्षरता जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि आज तकनीक तेजी से हमारे जीवन को बदल रही है। ऐसे में डिजिटल साक्षरता के साथ एआई साक्षरता भी समय की आवश्यकता है। एआई, डीप-टेक और उभरती प्रौद्योगिकी शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और रोजगार के नए अवसर खोल रहे हैं। हमारी सरकार परंपरागत ज्ञान को आधुनिक विज्ञान, तकनीक, नवाचार और कौशल से जोड़ रही है। लखनऊ में एआई सिटी और कानपुर में ड्रोन एवं यूएवी तकनीक का विकसित होता पारिस्थितिकी तंत्र उत्तर प्रदेश के तकनीकी भविष्य की नई संभावनाओं का आधार बन रहा है। शिक्षा की गुणवत्ता और कौशल विकास पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने ऑपरेशन कायाकल्प, मिशन प्रेरणा, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यालयी सुविधाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया है। इन प्रयासों का परिणाम है कि प्रदेश के विद्यालयों में ड्रॉपआउट दर को न्यूनतम करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है और अधिक से अधिक बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। शिक्षा की यात्रा में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरी यात्रा में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे विद्यार्थियों में संस्कार, जिज्ञासा, अनुशासन, आत्मविश्वास और दायित्वबोध जगाते हैं तथा हमारी गौरवशाली ज्ञान-परंपरा को आधुनिक ज्ञान और नवाचार से जोड़ते हैं।  साक्षरता के संकल्प में समाज की भागीदारी जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि साक्षरता का संकल्प समाज के सहयोग के बिना पूरा नहीं हो सकता। अगर आपके आसपास कोई व्यक्ति अक्षर ज्ञान से वंचित है, तो उसे साक्षर बनाना हम सभी का कर्तव्य है। किसी को पढ़ना-लिखना सिखाने का छोटा-सा प्रयास उसके जीवन में ज्ञान, आत्मविश्वास और अवसरों के नए द्वार खोल सकता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर संकल्प लें कि हर बच्चा विद्यालय पहुंचे, हर विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाए, हर युवा कौशल और नवाचार से जुड़े तथा हर नागरिक साक्षर होने के साथ डिजिटल ज्ञान और एआई के प्रति जागरूक बने।

जलवायु परिवर्तन से निपटने में MP की बड़ी पहल! पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बनाए नए आयाम

मध्यप्रदेश में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल हुई है : राज्यमंत्री अहिरवार अंतर्राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस पर मध्यप्रदेश में गैर CO2 उत्सर्जन में कमी के मार्ग:एक बहु क्षेत्रीय आंकलन रिपोर्ट का किया विमोचन भोपाल  मध्यप्रदेश में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में कई उल्लेखनीय पहल की है। इंदौर में स्वच्छता, सतत् अपशिष्ट प्रबंधन और कार्बन क्रेडिट जैसी पहलों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व स्थापित किया है। राज्य में लगभग 7.6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य मंत्री वन एवं पर्यावरण दिलीप सिंह अहिरवार ने भोपाल स्वच्छ वायु दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश में गैर CO2 उत्सर्जन में कमी के मार्ग-एक बहु क्षेत्रीय आंकलन रिपेार्ट के कार्यक्रम विमोचन के अवसर पर कहीं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ परिवहन, इलेक्ट्रिक वाहन नीति, नवकरणीय ऊर्जा और हरित शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में भी मध्यप्रदेश लगातार आगे बढ़ रहा है। हमारा राज्य जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना तथा इलेक्ट्रिक वाहन एवं नवकरणीय ऊर्जा से संबंधित नीतियों में हमे एक मजबूत आधार प्रदान करती है। राज्य मंत्री अहिरवार ने कहा कि आज हम सभी मध्यप्रदेश के लिये एक स्वच्छ, स्वस्थ और जलवायु अनुकूल भविष्य पर सामूहिक विचार करने के लिये एकत्रित हुए है। स्वच्छ वायु दिवस को मनाने का उद्देश्य वायु प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर पढ़ने वाले बूरे प्रभावों के प्रति लोगों को सचेत करना है। हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिये राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग को बढ़ावा देना तथा सामूहिक भागीदारी द्वारा आम नागरिकों, औद्योगिक इकाईयों और विभिन्न शासकीय एवं निजी उपक्रमों को प्रदूषण न करने के लिये प्रेरित करना। उन्होंने प्रदेश के नॉन-CO2 उत्सर्जन की महत्वपूर्ण अध्ययन रिपोर्ट को तैयार करने के लिये जलवायु परिवर्तन केन्द्र, एप्कों की वैज्ञानिक टीम, इंस्टीट्यूट फॉर गवर्नेंस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट, टेरी और सभी सहयोगी संस्थाओं और विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया। राज्य मंत्री अहिरवार ने कहा कि स्वच्छ वायु और जलवायु परिवर्तन से निपटने की हमारी रणनीतियां एक दूसरे से जुड़ी हुई है। हम स्थानीय स्तर पर जो कदम उठाते है, उनका प्रभाव पूरे वातावरण पर पड़ता है। स्वच्छ हवा सबकी साझा धरोहर है। उन्होंने कहा कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है हमें ऐसे वैज्ञानिक अध्ययनों की आवश्यकता है जो जिलेवार और क्षेत्रवार सटीक जानकारी उपलब्ध करायें। इससे हम अपनी नीतियों और कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बना सकें। मुझे विश्वास है कि आज प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट नीति निर्माताओं शोधकर्ताओं और विभिन्न विभागों के लिये एक उपयोग मार्गदर्शिका सिद्ध होगी। हम सभी मिलकर इस महत्वपूर्ण रोडमेप को धरातल पर प्रभावी कार्यों में परिवर्तित करने का प्रयास करेंगे और स्वस्थ, हरित तथा जलवायु-लचीले मध्यप्रदेश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। इस अवसर पर कार्यपालन संचालक एप्को हर्षल पंचोली ने कार्यक्रम का परिचय एवं स्वागत उद्बोधन दिया। पूर्व सदस्य सचिव केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड डॉ. बी. सेनगुप्ता, वायु प्रदूषण नियंत्रण पर तकनीकी सत्र, जलवायु परिवर्तन एवं वायु गुणवत्ता, द एनर्जी एण्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट नई दिल्ली ने वायु प्रदूषण एवं जलवायु प्रदूषण पर तकनीकी सत्र और निदेशक विज्ञान कार्यक्रम, गेटवे रिसर्च निमीश सिंह ने ट्रांसबाउंड्री वायु प्रदूषण पर तकनीकी सत्र को संबोधित किया।  

भारत का दिल है मध्यप्रदेश, हम निवेशकों के दिल में जगह बनाने आए हैं

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दुबई से हमारे सहज और स्वाभाविक संबंध हैं। हम दुबई के भरोसेमंद साथी हैं और संभावनाओं और अवसरों की सौगात लेकर दुबई के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश अतुल्य भारत का दिल है और हम दुबई के सभी निवेशकों के दिल में जगह बनाने आए है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से कहा कि मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियां बेहद पारदर्शी और निवेशक अनुकूल हैं। हमारी नीति, नीयत, नेतृत्व और पूरी सरकार निवेशकों के स्वागत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि निवेशक बिना किसी संकोच के मध्यप्रदेश में निवेश करें। हमारी सरकार आपको कभी भी निराश नहीं होने देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) प्रवास के दूसरे दिन दुबई के वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर में हो रही एआईएम कांग्रेस-2026 के दौरान विशेष रूप से आयोजित 'इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन : मध्यप्रदेश' सत्र को संबोधित कर रहे थे। सत्र में यूएई के फॉरेन ट्रेड मिनिस्टर डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ेयूदी, यूएई में भारत के उच्चायुक्त डॉ. दीपक मित्तल सहित बड़ी संख्या में देश-विदेश के उद्योगपति, इन्वेस्टर्स और इंडस्ट्री पार्टनर उपस्थित थे। सत्र के दौरान मध्यप्रदेश में हो रही औद्योगिक प्रगति, यहां की खूबियों, निवेश अवसरों और अनंत संभावनाओं पर केंद्रित एक ऑडियो-वीडियो फिल्म (एवी) का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुबई वैश्विक निवेश और नवाचार का केंद्र है। मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है कि आज वैश्विक साझेदारी, रणनीतिक और आर्थिक सहयोग, मजबूत और समृद्ध भविष्य का साझा रोडमैप एआईएम कांग्रेस के इस बड़े प्लेटफॉर्म पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश देश-विदेश के सभी निवेशकों को दीर्घकालिक और विश्वस्तरीय साझेदारी के लिए नये अवसर उपलब्ध करा रहा है। भारत के सभी राज्यों में विकास की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के बीच मध्यप्रदेश उन अग्रणी राज्यों में शामिल है, जो अपनी पारदर्शी नीतियों और आकर्षक योजनाओं के आधार पर औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। दुनिया में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए गंतव्यों की तलाश चल रही है। ऐसे समय में मध्यप्रदेश निवेशकों और उद्योग समूहों को सभी सुगम अवसर उपलब्ध करा रहा है। नीति, नीयत और निवेश में मध्यप्रदेश ने निवेशकों का दिल जीता है। मध्यप्रदेश, देश का वह प्रदेश है, जिसने निवेशकों को आगे बढ़ने के लिए अवसर वर्तमान के सभी सेक्टर्स में अवसर उपलब्ध कराए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में प्रचुर प्राकृतिक और कुशल मानव संसाधन हैं। मध्यप्रदेश ने अपनी उद्योग अनुकूल नीतियों, तेजी से विकसित हो रही औद्योगिक अधोसंरचनाओं और दिनों-दिन बढ़ती अर्थव्यवस्था से देश में अपना एक अलग ही स्थान बनाया है। मध्यप्रदेश की कनेक्टिविटी अन्य राज्यों से बेहतर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश भारत का हृदय प्रदेश है, जिसकी कनेक्टिविटी देश के सभी राज्यों से बेहतर है। मध्यप्रदेश 24 घंटे माल परिवहन की सुविधा प्रदान करता है। एक्सपोर्ट और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए राज्य सदैव अनुकूल है। देश में प्रमुख औद्योगिक केंद्र और बाजार तक पहुंच है, दिल्ली-मुम्बई औद्योगिक कॉरिडोर, रेल नेटवर्क, आधुनिक लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर आदि सुविधाओं के कारण मध्यप्रदेश का विशेष स्थान बना है। कृषि, उद्योग, सेवाएं, नई औद्योगिक आधारित अर्थव्यवस्थाओं का केंद्र है। मध्यप्रदेश भारत के अग्रणी कृषि उत्पादक राज्यों में शामिल है। जहां की उत्पादकता, अनुकूलता, फूड प्रोसेसिंग के आधार पर हमें वैश्विक खाद्य श्रृंखला का हिस्सा बनने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल सेक्टर सबसे तेजी से उभरता क्षेत्र है। इस सेक्टर में मध्यप्रदेश अब केवल प्रोडक्शन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कपड़ा उद्योग हमारी समृद्ध औद्योगिक विरासत और आधुनिक औद्योगिक क्षमता का अनूठा संगम बन गया है। चंदेरी, महेश्वरी आदि वस्त्रों के लेकर आधुनिक वस्त्र निर्माण के लिए मध्यप्रदेश में बेहतर अवसर हैं। ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, फॉर्मास्यूटिकल और एडवांस मैन्यूफैक्चरिंग हमारे राज्य को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीथमपुर, मंडीदीप जैसे औद्योगिक केंद्र राष्ट्रीय कंपनियों के पसंदीदा केंद्र बने हुए हैं। पारम्परिक उद्योगों सहित आज मध्यप्रदेश की नई पीढ़ी को भी आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए आगे बढ़कर भविष्य के व्यापार-व्यवसाय करने के लिए तैयार हैं। दूरसंचार निर्माण, डिजिटल मैन्यूफैक्चरिंग, ऑप्टिकल फाइबर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी और भविष्य की तकनीकी जरूरतों के हिसाब से हम मजबूत इकोसिस्टम का निर्माण कर रहे हैं। हम जानते है कि निवेश सिर्फ संसाधन और अवसरों को देखने से ही नहीं आता, इसके लिए भरोसे की भी जरूरत होती है। मध्यप्रदेश निवेशकों का वो भरोसेमंद साथी है, जहां नीतियां सरल और पारदर्शी हैं, पर्याप्त संसाधन हैं और आपके उद्योगों-कारखानों के लिए आधुनिक संरचनाएं भी उपलब्ध हैं। हमारी सरकार निवेशकों के लिए हर संभव कदम उठाने के लिए तैयार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार निवेशकों के लिए हर संभव कदम उठाने के लिए तैयार है। मध्यप्रदेश कृषि, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल्स, फॉर्मास्युटिकल्स, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स, रिन्युएबल एनर्जी, डिजिटल टेक्नोलॉजी और व्यापार की अपार संभावनाओं वाला राज्य है। राज्य को सभी क्षेत्रों में आगे लाकर यहां निवेश बढ़ाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत भविष्य की संभावनाओं वाला देश बन रहा है। प्रधानमंत्री  मोदी के कालखंड में भारत सबसे समृद्ध अर्थव्यवस्था वाला देश बना है, दुबई और अन्य सभी खाड़ी देशों से हमारे अच्छे संबंध हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस संवाद सत्र के आयोजन के लिए यूएई ऑफिशियल्स के प्रयासों की सराहना की। म.प्र. में भरपूर है प्राकृतिक संसाधन और स्किल्ड मैन पॉवर : डॉ. थानी यूएई के फॉरेन ट्रेड मिनिस्टर डॉ. थानी ने कहा कि जुलाई 2025 में यूएई और मध्यप्रदेश के बीच व्यापार और व्यवसाय में सहयोग बढ़ाने पर अहम चर्चा हुई थी। भारत अर्थव्यवस्था की दृष्टि से हमारा एक पुराना और महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है। पिछले साल भारत और यूएई का द्विपक्षीय तेल व्यापार 100 बिलियन डॉलर रहा। दोनों देश मिलकर द्विपक्षीय व्यापार को आगे बढ़ा रहे हैं। इसके साथ निवेश और नागरिकों के बीच संबंधों को प्रगाढ़ बना रहे हैं। मुझे विश्वास है कि मध्यप्रदेश हमारी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा। यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है, जहां प्राकृतिक संसाधनों और स्क्ल्डि मैन पॉवर की कोई कमी नहीं है। यूएई मध्यप्रदेश की क्षमताओं को रेखांकित करता है। पिछले दौरे पर यूएई ने सेंट्रल … Read more

वधेश द्विवेदी को पत्रकारों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए

लखनऊ  यूपी प्रेस क्लब में पत्रकार अवधेश कुमार द्विवेदी को पत्रकारों ने श्रद्धांजलि अर्पित किया l दो दशक से पत्रकारिता क्षेत्र में अपनी पहचान बनाए स्वर्गीय अवधेश कुमार द्विवेदी लंबी बीमारी के बाद 18 अगस्त को निधन हो गया था l  स्वर्गीय द्विवेदी के निधन पर यूपी प्रेस क्लब में आज यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन की लखनऊ इकाई में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की l श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी , यूपी वर्किंग  यूनियन लखनऊ के अध्यक्ष शिवशरण सिंह , यूनियन के प्रदेश महामंत्री देवराज सिंह,  प्रेमकांत तिवारी , संवाददाता समिति के उपाध्यक्ष अविनाश मिश्रा , सचिव भारत सिंह, वरिष्ठ पत्रकार अनवर आलम,  जुबेर अहमद ,शिव विजय सिंह , दिनेश यादव सहित पत्रकारों में श्रद्धा सुमन अर्पित किए श्रद्धांजलि सभा का संचालन मान्यता समिति के कोषाध्यक्ष आलोक त्रिपाठी ने किया l इस अवसर पर सरगी अवधेश द्विवेदी की धर्मपत्नी श्रीमती रेनू सहित छावनी परिषद के उपाध्यक्ष प्रमोद शर्मा,  संजय चतुर्वेदी , राकेश शुक्ला , राजू यादव , प्रेमकांत तिवारी , संजय पांडे , दिलीप पांडे ,सुल्तान शहर यार खान,  डॉक्टर शकीरा हाशमी , पीयूष त्रिपाठी , शिव विजय सिंह,  वाहिद शाहिद बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित थे।

योगी सरकार में बिजली व्यवस्था में बड़ा सुधार, वितरण हानि 20.63% से घटकर 13.04%

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने और बिजली वितरण में होने वाले नुकसान को कम करने के प्रयासों का असर आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020-21 में 20.63 प्रतिशत रही वितरण हानि वर्ष 2025-26 में घटकर 13.04 प्रतिशत रह गई। इसी अवधि में एटीएंडसी हानि भी 31.19 प्रतिशत से घटकर 17.83 प्रतिशत पर आ गई। कृषि फीडरों को छोड़कर प्रदेश में फीडरों की संख्या 18,351 से बढ़कर 21,463 हो गई है। इनमें लाभकारी फीडरों की संख्या 5,772 से बढ़कर 8,104 पहुंच गई। इसमें 2,332 अतिरिक्त फीडर लाभकारी श्रेणी में आए हैं। लाभकारी फीडरों की हिस्सेदारी भी 31 प्रतिशत से बढ़कर 38 प्रतिशत हो गई है। डिस्कॉमवार प्रदर्शन में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम 53 प्रतिशत लाभकारी फीडरों के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। केस्को 39 प्रतिशत, दक्षिणांचल और मध्यांचल 37-37 प्रतिशत तथा पूर्वांचल 22 प्रतिशत पर रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि योगी सरकार के कार्यकाल में बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक कुशल, जवाबदेह और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में लगातार सुधार हुआ है। हाई लॉस क्लस्टर मॉडल से वसूली और नए कनेक्शन में तेजी योगी सरकार के नेतृत्व में बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए लागू हाई लॉस क्लस्टर मॉडल के तहत प्रदेश में 703 क्लस्टर, 1703 फीडर, 42.21 लाख उपभोक्ता और 76,839 वितरण ट्रांसफार्मरों को कवर किया गया। यह कुल उपभोक्ताओं का करीब 11 प्रतिशत है। अभियान के तहत 654 करोड़ 31 लाख रुपये की बकाया वसूली की गई है, जबकि 1,01,548 नए विद्युत संयोजन जारी किए गए हैं। दक्षिणांचल डिस्कॉम में भी सुधार उल्लेखनीय रहा। यहां वितरण हानि 25.64 प्रतिशत से घटकर 14.78 प्रतिशत और एटीएंडसी हानि 31.03 प्रतिशत से घटकर 19.57 प्रतिशत रह गई। थ्रू-रेट 3.65 रुपये प्रति यूनिट से बढ़कर 4.06 रुपये हो गया। दक्षिणांचल में वर्ष 2025-26 में 105 करोड़ रुपये तथा चालू वित्तीय वर्ष में जुलाई तक 155 करोड़ रुपये की वसूली की गई। हाई लॉस फीडरों पर कार्रवाई का असर तालबेहट टाउन-2 ललितपुर में एटीएंडसी हानि 63 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत, मणिकापुर सीरी कासगंज में 87 से 53 प्रतिशत और राल मथुरा में 83.62 से 47.82 प्रतिशत तक आ गई। आगरा, मथुरा, चित्रकूट, राठ और कोसी के टॉप-10 हाई लॉस फीडरों का घाटा 22.53 करोड़ से घटकर 17.89 करोड़ रुपये रह गया, जो करीब 21 प्रतिशत की कमी है। फीडर स्तर पर मॉनिटरिंग से बढ़ा वित्तीय अनुशासन अधिकारियों के अनुसार, यह सुधार योगी सरकार और यूपीपीसीएल अध्यक्ष के मार्गदर्शन और लगातार मॉनिटरिंग का परिणाम है। फीडर स्तर पर दैनिक समीक्षा, डेटा आधारित निगरानी और फील्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने से विद्युत विभाग में वित्तीय अनुशासन मजबूत हुआ है और राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।