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अब बाघा में हर गतिविधि होगी कैमरे में कैद, कई जगह लगाए गए निगरानी कैमरे

बाघा पुराना. शहर बाघापुराना में सुरक्षा प्रबंधों को और मजबूत करने के लिए अलग-अलग एंट्री प्वाइंटों तथा मुख्य सड़कों पर सी.सी.टी.वी. कैमरे लगने से न सिर्फ अपराधों पर लगाम लगेगी बल्कि पुलिस प्रशासन को भी कानून व्यवस्था कायम रखने में बड़ी मदद मिलेगी। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि कैमरे लगने से आपराधिक इरादे रखने वालों में डर का माहौल बनेगा। एंट्री प्वाइंट पर लगाए गए कैमरे गाड़ियों की आवाजाही पर नजर रखेंगे, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भी नजर रखी जाएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सी.सी.टी.वी. कैमरे की मदद से सड़क हादसों के समय की फुटेज से पूरी घटना की सही जानकारी मिलती है, जिससे जिम्मेदारी तय करना आसान होता है और पीडि़तों को न्याय दिलाने में मदद मिलती है। कुल मिलाकर बाघापुराना शहर में सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाना एक सकारात्मक और आगे की सोच वाला कदम माना जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार ये कैमरे एम.पी. सर्बजीत सिंह खालसा के विवेकाधीन कोटे से लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर पुलिस सी.सी.टी.वी. फुटेज का सही इस्तेमाल करे तो चोरी, डकैती और दूसरी गैर-कानूनी गतिविधियों पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।

गोबर, गोमूत्र पर आईआईटी कानपुर की खोज से बनेगी 15 गुना ज्यादा असरदार खाद

गोमाता के जरिए खेती में ‘जीन क्रांति’ की तैयारी गोबर, गोमूत्र पर आईआईटी कानपुर की खोज से बनेगी 15 गुना ज्यादा असरदार खाद योगी सरकार गो संरक्षण और खेती में करने जा रही बड़ा वैज्ञानिक प्रयोग एंजाइम टेक्नोलॉजी से 10 गुना तेजी से तैयार होगी ऑर्गेनिक खाद, 5 गुना बढ़ेगा न्यूट्रिशन देश में पहली बार यूपी वाले करेंगे खेती में इस जेनेटिक इंजीनियरिंग का प्रयोग लखनऊ गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, वैज्ञानिक खेती और रोजगार से जोड़ने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश एक और बड़ा प्रयोग करने जा रहा है। पहली बार देश में खेती किसानी में गोबर, गोमूत्र और माइक्रोबियल रिसर्च आधारित जेनेटिक इंजीनियरिंग तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। आईआईटी कानपुर के शोधार्थियों की खोज ने खेती में गो आधारित जीन क्रांति की नई जमीन तैयार कर दी है। इस तकनीक के जरिए तैयार होने वाली ऑर्गेनिक खाद पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में 15 गुना अधिक प्रभावशाली होगी। इतना ही नहीं, इसकी न्यूट्रिशन क्षमता लगभग 5 गुना अधिक होगी, जबकि इसे तैयार करने में लगने वाला समय भी 10 गुना तक कम हो जाएगा। योगी सरकार इसे खेती, गो संरक्षण और ग्रामीण रोजगार के नए मॉडल के रूप में देख रही है। आईआईटी कानपुर के शोधार्थियों की बड़ी खोज यह तकनीक आईआईटी कानपुर के पीएचडी शोधार्थी अक्षय श्रीवास्तव ने विकसित की है। उन्होंने जेनेटिक इंजीनियरिंग, एंजाइम एक्सट्रैक्शन, माइक्रोबियल आइसोलेशन और बायोपॉलिमर डेवलपमेंट को गोबर एवं गो मूत्र आधारित प्राकृतिक संसाधनों के साथ जोड़कर हाई क्वालिटी ऑर्गेनिक और नेचुरल फर्टिलाइजर तैयार किया है। शोधकर्ताओं ने फसल-विशिष्ट माइक्रोबियल कॉन्सन्ट्रेट तैयार किया है, जिसके जरिए केवल 1 किलोग्राम माइक्रोबियल कॉन्सन्ट्रेट से करीब 2000 किलोग्राम जैविक उर्वरक विकसित किया जा सकता है। यह तकनीक खेती की लागत घटाने के साथ मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाएगी। 15 गुना कम मात्रा ही रहेगी पर्याप्त, लागत भी घटेगी शुरुआत में 50 किलोग्राम वाले ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बैग तैयार करने की योजना है। खेतों में इसकी जरूरत लगभग 350 से 400 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है, जो पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में बेहद कम है। इससे किसानों की परिवहन, श्रम और उपयोग लागत में बड़ी कमी आएगी। तकनीक से तैयार इस उर्वरक की लागत भी कम आएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस उत्पाद को इंडियन काउन्सिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च द्वारा 40 से अधिक गुणवत्ता एवं पोषण मानकों पर परीक्षण और प्रमाणित भी किया जा चुका है। गोबर और गो मूत्र से बनेगा साइंटिफिक फर्टिलाइजर यह उर्वरक मुख्य रूप से गोबर, गोमूत्र, कृषि अपशिष्ट और प्राकृतिक जैविक स्रोतों से तैयार किया जा रहा है। माइक्रोबियल प्रोसेसिंग और एंजाइम एक्सट्रैक्शन तकनीक की मदद से इसमें पोषक तत्वों की क्षमता कई गुना बढ़ाई गई है। अब गोबर आधारित बायोगैस उत्पादन के लिए भी विशेष माइक्रोबियल तकनीकों पर काम किया जा रहा है। बायोगैस निर्माण के बाद बचने वाली स्लरी और वेस्ट बायोमास से केवल 3 से 4 दिनों के भीतर हाई क्वालिटी कस्टमाइज्ड ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर तैयार किए जा रहे हैं। गोशालाएं बनेंगी वेस्ट टू वेल्थ मॉडल योगी सरकार इस तकनीक को आत्म निर्भर गोशाला के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। इसके तहत गोशालाएं केवल पशु संरक्षण केंद्र नहीं रहेंगी, बल्कि जैविक खाद उत्पादन, बायोगैस निर्माण और अतिरिक्त आय का केंद्र बनेंगी। प्रदेश में महिला स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों और स्थानीय किसानों के सहयोग से इस मॉडल को लागू किया जा रहा है। विभिन्न जिलों में गोबर संग्रहण एवं माइक्रोबियल प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जा रही हैं, जहां गोबर, गोमूत्र और कृषि अपशिष्ट को वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए उच्च गुणवत्ता वाले उर्वरक में बदला जाएगा। महिला रोजगार और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल इस परियोजना में महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण, उत्पादन और वितरण से जोड़ा जा रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए नए रोजगार और उद्यमिता के अवसर तैयार होंगे। इससे गांवों में आत्मनिर्भरता आधारित आर्थिक मॉडल मजबूत होगा। यह पहल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने, मिट्टी की उर्वरता सुधारने, कृषि अपशिष्ट प्रबंधन और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। सीएम योगी की प्राथमिकता बना गो संरक्षण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पहले से ही गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने की दिशा में विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। अब आईआईटी कानपुर की इस वैज्ञानिक खोज के जरिए प्रदेश में गो आधारित खेती, जैविक उर्वरक और ग्रामीण रोजगार का एक नया मॉडल तैयार होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि यदि यह मॉडल बड़े स्तर पर सफल हुआ तो उत्तर प्रदेश देश में गो आधारित वैज्ञानिक खेती और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है।

राजगढ़ में हैरान करने वाला मामला: नाबालिग को लेकर चली ‘झगड़ा प्रथा’, पुलिस थाने के बाहर तय हुई 20 लाख की डील

 राजगढ़ डिजिटल इंडिया के इस दौर में अगर आपको लगता है कि बाल विवाह और 'झगड़ा प्रथा' जैसी कुप्रथाएं सिर्फ इतिहास के पन्नों या दूर-दराज के जंगलों तक सीमित रह गई हैं, तो राजगढ़ जिले के खिलचीपुर से आई यह तस्वीर आपकी आंखें खोल देगी। यहाँ कानून के रखवालों की नाक के ठीक नीचे, थाने के सामने स्थित गायत्री मंदिर परिसर में घंटों तक एक ऐसी पंचायत चली, जिसका पूरा फोकस सिर्फ और सिर्फ एक 16 साल की नाबालिग लड़की का सौदा करने और 'झगड़ा' की रकम तय करने पर था। सबसे शर्मनाक बात यह कि थाने के 'जिम्मेदारों' को इसकी भनक तक नहीं लगी (या उन्होंने देखना जरूरी नहीं समझा)। फ्लैशबैक: 6 साल की उम्र में तय हो गया था 'भविष्य' मामले की जड़ें 10 साल पुरानी हैं। खिलचीपुर थाना क्षेत्र के ग्राम रघुनाथपुरा की रहने वाली इस मासूम की शादी महज 6 साल की उम्र में छीपीपुरा गांव के एक लड़के से कर दी गई थी। बचपन का वो बाल विवाह आज इस लड़की के लिए जी का जंजाल बन चुका है। एक 'फोटो' और शुरू हो गया 20 लाख का बवंडर कुछ दिन पहले लड़की के मायके में एक शादी समारोह था, जहाँ उसने अपने एक रिश्तेदार के साथ एक सामान्य फोटो खिंचवाई। यह फोटो किसी तरह लड़की के ससुराल पक्ष तक पहुंच गई और इसे 'नाक का सवाल' बना लिया गया। ससुराल पक्ष की जिद: "लड़की को तुरंत हमारे घर (ससुराल) भेजो।" मायके पक्ष की दलील: "लड़की अभी 16 साल की नाबालिग है, 18 साल पूरे होने से पहले विदाई नहीं करेंगे।" बस, इसी बात पर विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्ष शिकायत करने थाने पहुंचे। लेकिन थाने के भीतर जाने के बजाय, थाने के ठीक सामने ही पंचों ने अपनी 'अदालत' (पंचायत) लगा दी। नाबालिग के अधिकारों पर 'झगड़ा प्रथा' भारी घंटों चली इस पंचायत में न तो किसी को इस बात की चिंता थी कि बाल विवाह कानूनन अपराध है, और न ही किसी को उस 16 साल की बच्ची के भविष्य और अधिकारों की परवाह थी। पूरा फोकस इस बात पर था कि 'झगड़ा' (सहमति या अलगाव के बदले दी जाने वाली सामाजिक रकम) कैसे तय हो। लड़की के भाई ने आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष के लोग उसकी बहन को जबरन ले जाने पर अड़े हैं और ऐसा न करने के बदले 20 लाख रुपये की मोटी रकम मांग रहे हैं। अंजाम: पंचायत बेनतीजा, अब आगजनी की धमकी! जब घंटों की सिरपच्ची के बाद भी बात नहीं बनी और पंचायत बेनतीजा समाप्त हो गई, तो लड़के पक्ष के लोग कथित तौर पर कानून हाथ में लेने और आगजनी करने की धमकी देते हुए वहां से चले गए। बड़ा सवाल: थाने के ठीक सामने समाज को दीमक की तरह चाट रही कुप्रथाओं का यह तमाशा होता रहा, धमकी भरे अल्टीमेटम दिए गए, लेकिन पुलिसिया सिस्टम मूकदर्शक बना रहा। अब देखना यह है कि क्या राजगढ़ प्रशासन इस होनहार नाबालिग को इंसाफ दिला पाता है या कुप्रथाओं के आगे कानून ऐसे ही नतमस्तक रहेगा?  

रांची में उद्योग बैठक, झारखंड और कर्नाटक ने व्यापारिक साझेदारी पर किया मंथन

रांची झारखंड और कर्नाटक के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में शुक्रवार को रांची स्थित चेम्बर भवन में अहम बैठक आयोजित की गई। फेडरेशन ऑफ झारखंड चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज और बेल्लारी डिस्ट्रिक्ट चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, कर्नाटक के प्रतिनिधियों के बीच हुई इस संयुक्त बैठक में उद्योग, निवेश, पर्यटन और औद्योगिक विकास की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में झारखंड सरकार के उद्योग विभाग ने राज्य के आर्थिक विकास का विजन सामने रखा और निवेशकों को राज्य में उपलब्ध संभावनाओं से अवगत कराया। ‘झारखंड एक औद्योगिक पावरहाउस’ उद्योग सचिव अरवा राजकमल ने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों और औद्योगिक क्षमता से समृद्ध राज्य है। यहां विशाल खनिज भंडार मौजूद हैं और राज्य लंबे समय से औद्योगिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का विजन खनन से लेकर हाई-एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस तक संपूर्ण वैल्यू चेन विकसित करने का है। उन्होंने यह भी कहा कि महिला उद्यमिता को बढ़ावा देकर कृषि और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है। इन क्षेत्रों में निवेश की अपार संभावनाएं बैठक में बताया गया कि झारखंड में इको टूरिज्म, टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, क्रिटिकल मिनरल्स, फूड प्रोसेसिंग और सुपर फूड्स जैसे क्षेत्रों में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। उद्योग सचिव ने कहा कि बेल्लारी खनन, आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अग्रणी है, ऐसे में दोनों राज्यों के बीच सहयोग से उद्योग जगत को बड़ा लाभ मिल सकता है। निवेशकों को हरसंभव मदद का भरोसा उद्योग निदेशक विशाल सागर ने प्रतिनिधियों को झारखंड में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि राज्य सरकार रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उद्योग विभाग निवेशकों को हर स्तर पर सहयोग देने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि झारखंड ने पहली बार दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) में भाग लिया था, जहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य ने वैश्विक निवेशकों के सामने अपनी संभावनाएं रखीं। झारखंड की नई औद्योगिक नीति पर नजर झारखंड चेम्बर के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि राज्य तेजी से औद्योगिक विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य की टेक्सटाइल नीति काफी आकर्षक है और जल्द ही नई औद्योगिक नीति भी आने वाली है, जो निवेशकों के लिए बड़ा अवसर साबित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर है और यहां कुशल मानव संसाधनों की कोई कमी नहीं है। कर्नाटक ने भी दिया निवेश का न्योता बेल्लारी डिस्ट्रिक्ट चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष अव्वारु मंजूनाथ ने झारखंड के उद्यमियों को कर्नाटक में निवेश के लिए आमंत्रित किया। साथ ही उन्होंने बेंगलुरु में आयोजित होने वाले MSME कॉन्क्लेव में शामिल होने का न्योता भी दिया। बैठक के दौरान दोनों राज्यों के व्यापारियों और उद्योगपतियों ने अपने-अपने व्यवसायों का परिचय दिया और संभावित औद्योगिक साझेदारी पर विचार साझा किए। औद्योगिक सहयोग को मिलेगा नया आयाम बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने माना कि झारखंड और कर्नाटक के बीच यह संवाद भविष्य में व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करेगा। उद्योग, निवेश और रोजगार के नए अवसरों के साथ दोनों राज्यों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई गई।  

बिहार में फिल्म इंडस्ट्री को बढ़ाव,शूटिंग के लिए बन रहे नए हब

पटना  प्रदेश केवल अपनी ऐतिहासिक विरासत, संस्कृति और लोक कलाओं के लिए नहीं बल्कि फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उभर रहा है। सरकार ने फिल्म शूटिंग को बढ़ावा देने, युवाओं को फिल्म एवं मीडिया की पढ़ाई के अवसर उपलब्ध कराने तथा छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। फिल्म शूटिंग को लेकर राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहर, धार्मिक स्थल और ग्रामीण परिवेश अब फिल्मकारों को आकर्षित कर रहे हैं। कैमूर, जहानबाद, बोधगया, राजगीर, नालंदा, राजधानी पटना, वाल्मीकि नगर और मिथिला क्षेत्र जैसे स्थान फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग के लिए पसंदीदा स्थल बनते जा रहा है। बिहार राज्य फिल्म वित्त निगम लि. के अनुसार अब तक 52 फिल्मों की शूटिंग के लिए अनुमति मिली है। इसमें 48 फिल्मों की शूटिंग पूरी हो चुकी है। इसमें चार नई फिल्म गिल्टी माइंड, हथुआ राज, बिहारी फेमस 22 फूड और गुरुद्वारा शामिल है। गिल्टी माइंड फीचर फिल्म है। जो विकास प्रोडक्शन के बैनर तले बन रही है। जबकि, शेष तीन वृत्तचित्र है। फिल्म निर्माताओं के लिए शूटिंग की अनुमति को आसान बनाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है। आरंभ के दिनों में फिल्म शूटिंग के लिए अलग-अलग विभागों में आवेदन करने की जरूरत पड़ती थी। सिंगल विंडो सिस्टम के तहत कोई भी कलाकार या वेंडर बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम की वेबसाइट https://film.bihar.gov.in/ पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। वहीं, कला संस्कृति विभाग के अंतर्गत बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम की ओर से विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दे रही है। योजना के तहत अब तक 30 विद्यार्थियों को लगभग 19 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है। फिल्म वित्त निगम लि. के परामर्शी अरविंद रंजन दास ने बताया कि फिल्म प्रोत्साहन नीति के तहत प्रदेश में स्वस्थ सिनेमा संस्कृति का विकास हो रहा है। फिल्म निर्माता सागर श्रीवास्तव ने कहा कि बिहार में फिल्म शूटिंग के लिए कई रमणीय स्थल है जो निर्माताओं को पसंद आ रही है। फिल्म निर्माण को लेकर राज्य में बेहतर माहौल बना है। इससे राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

RCB vs PBKS: कोहली के फॉर्म पर नजर, धर्मशाला में होगी कांटे की टक्कर

धर्मशाला इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के 61वें मुकाबले में पंजाब किंग्स (PBKS) का सामना रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) से होगा। RCB ने अब तक 12 मुकाबले खेले हैं। 8 मैच में उसे जीत और 4 मुकाबलों में हार मिली है। PBKS ने 6 मैच में जीत दर्ज की है और 5 मुकाबलों में उसे हार का सामना करना पड़ा है। प्लेऑफ के नजरिए से यह मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण है। आइए मुकाबले से जुड़ी जरूरी बातों पर नजर डालते हैं। दोनों टीमों के बीच रहती है कांटे की टक्कर IPL के इतिहास में दोनों टीमों के बीच अब तक 37 मुकाबले खेले गए हैं। इस दौरान RCB ने 19 मैच जीते हैं, जबकि PBKS को 18 मुकाबलों में सफलता मिली है। इस सीजन दोनों टीमें पहली बार आमने-सामने होंगी। वहीं, IPL 2025 में दोनों टीमों के बीच कुल 4 मुकाबले खेले गए थे। इनमें से 3 मैच RCB ने अपने नाम किए थे, जबकि एक मुकाबले में PBKS को जीत मिली थी। इस संजोजन के साथ नजर आ सकती है RCB RCB को पिछले मैच में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खिलाफ 6 विकेट से जीत मिली थी। ऐसे में वह अपनी प्लेइंग इलेवन में कोई बड़ा बदलाव नहीं करना चाहेंगे। विराट कोहली ने उस मैच में शतकीय पारी (105*) खेली थी। ऐसे में उनसे एक और बड़ी पारी की उम्मीद होगी। संभावित एकादश: जैकब बेथेल, विराट कोहली, रजत पाटीदार (कप्तान), जितेश शर्मा (विकेटकीपर), टिम डेविड, वेंकटेश अय्यर, क्रुणाल पांड्या, भुवनेश्वर कुमार, राशिख सलाम डार, जैकब डफी और जोश हेजलवुड। इस प्लेइंग इलेवन के साथ नजर आ सकती है PBKS PBKS को अपने पिछले मैच में मुंबई इंडियंस (MI) के खिलाफ 6 विकेट से हार मिली थी। ऐसे में वह ये मुकाबला हर हाल में अपने नाम करना चाहेंगे। कप्तान श्रेयस अय्यर अपना खोया हुआ लय हासिल कर टीम के लिए एक कप्तानी पारी खेलना चाहेंगे। प्रियांश आर्य से भी काफी उम्मीदें होंगी। संभावित एकादश: प्रियांश आर्य, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), कूपर कॉनॉली, श्रेयस अय्यर (कप्तान), सूर्यांश शेडगे, शशांक सिंह, अजमतुल्लाह उमरजई, मार्को यानसन, लॉकी फर्ग्यूसन, अर्शदीप सिंह और युजवेंद्र चहल। ये हो सकते हैं इम्पैक्ट सब्स प्लेयर PBKS: हरप्रीत बरार, जेवियर बार्टलेट, विष्णु विनोद, विजयकुमार वैशाख और मुशीर खान। RCB: देवदत्त पडिक्कल, जॉर्डन कॉक्स, मंगेश यादव, रोमारियो शेफर्ड और स्वप्निल सिंह कैसा होगा धर्मशाला की पिच का मिजाज? धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम की पिच हरियाणा के भिवानी से मंगवाई गई काली मिट्‌टी से तैयार की गई है। इस मिट्‌टी में बालू की मात्रा न के बराबर होती है। इसके चलते पिचों पर गति और उछाल दोनों मिलता है। यहां आमतौर पर शुरुआत में तेज गेंदबाजों को मदद मिलती है, लेकिन समय निकलने के साथ स्पिनर्स भी जलवा दिखा सकते हैं। इसी तरह तेजी और अच्छा उछाल होने से टिकने के बाद बल्लेबाज आसानी से बड़े शॉट्स खेल सकते हैं। ऐसा रहेगा धर्मशाला का मौसम एक्यूवेदर के अनुसार, 17 मई को धर्मशाला का मौसम पूरी तरह साफ नहीं रहेगा। यहां अधिकतम तापमान 21 डिग्री और न्यूनतम तापमान के 15 डिग्री रहने का अनुमान है। बारिश होने की भी संभावना है और पूरे दिन बादल छाए रहेंगे। इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर रहेगी नजरें PBKS के लिए प्रभसिमरन ने पिछले 10 मैचों में 179.5 की स्ट्राइक रेट से 359 रन बनाए हैं। श्रेयस के बल्ले से पिछले 10 मैचों में 328 रन निकले हैं। RCB के लिए कोहली ने पिछले 10 मैच में 163.98 की स्ट्राइक रेट से 387 रन बनाए हैं। गेंदबाजों में अर्शदीप ने पिछले 10 मैच में 9.55 की इकॉनमी से 13 विकेट लिए हैं। RCB से भुवनेश्वर ने पिछले 10 मैचों में 7.26 की इकॉनमी से 18 विकेट चटकाए हैं। कब और कहां देखें मुकाबला? PBKS और RCB के बीच यह मुकाबला धर्मशाला के हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में दोपहर 3:30 बजे से खेला जाएगा। भारत में स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क और जियोहॉटस्टार ऐप पर इस मैच का सीधा प्रसारण देखा जा सकता है।  

योगी सरकार का हेल्थ सेक्टर पर सख्त एक्शन, नियम तोड़ने वालों पर गिरी गाज

लखनऊ उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद से ही भ्रष्टाचारियों और लापरवाहों पर लगातार सख्त रुख अपना रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग पर बड़ा एक्शन लिया है। सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत तय मानकों का पालन नहीं करने वाले निजी अस्पतालों पर एक बहुत बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने 200 से अधिक अस्पतालों पर अपना शिकंजा कसा है। इनको ब्लैक लिस्ट किया गया है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने सौ अस्पतालों का भुगतान रोका है और सौ को निलंबित कर दिया है। ब्लैकलिस्ट किए गए इन 200 से अस्पतालों पर गरीबों के इलाज में धांधली का आरोप है। यह सख्त कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सीधे निर्देश पर की गई है, क्योंकि इन अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के तहत निर्धारित प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं किया था। योगी आदित्यनाथ सरकार ने आयुष्मान योजना में पंजीकरण के लिए 35 मानकों का पूरा करना अनिवार्य रखा है। ऐसे में बड़ी संख्या में अस्पतालों की धांधली सामने आई है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के मानकों का उल्लंघन करने वाले दो सौ से अधिक अस्पतालों के खिलाफ बड़ी कारवाई की गई है। सौ अस्पतालों की पैनल से निलंबन कर दिया गया, जबकि इतने ही अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों का भुगतान रोका गया है। नई नियमावली के मुताबिक अस्पतालों के लिए निर्धारित 35 मानकों को पूरा करना अनिवार्य है, जिसमें पंजीकरण प्रमाणपत्र, फायर सेफ्टी एनओसी, इंफ्रास्ट्रक्चर, चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता एवं एचएफआर पंजीकरण सहित अन्य दस्तावेज शामिल हैं। चिकित्सकों की डिग्री अथवा विवरण के अनुचित उपयोग की शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 95 प्रतिशत से अधिक अस्पताल सफलतापूर्वक एचइएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेट हो चुके हैं। कई बार निर्देश जारी होने के बावजूद लगभग 200 निजी अस्पतालों ने मानकों को पूरा नहीं किया। इनमें आगरा, अलीगढ़, प्रयागराज, अमेठी, अमरोहा, आजमगढ़, बागपत, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, बिजनौर, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, फर्रुखाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, हाथरस, जौनपुर, झांसी, कन्नौज, कानपुर नगर, कुशीनगर, ललितपुर, लखनऊ, मथुरा, मऊ, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, प्रतापगढ़, संतकबीरनगर, सुल्तानपुर, वाराणसी, शाहजहांपुर, जालौन, मिर्जापुर, अंबेडकरनगर, रामपुर और सोनभद्र सहित कई जिलों के अस्पताल शामिल हैं। सूचीबद्ध अस्पतालों को एनएबीएच गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त करने के लिए कहा गया है। राज्य और जिला स्तर पर अस्पतालों की नियमित आडिट और मानिटरिंग कराई जा रही है। अस्पतालों में डिजिटल माध्यम से मरीजों के निस्तारण को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए एबीडीएम सक्षम एचएमआईएस प्रणाली लागू होगी। इलेक्ट्रानिक हेल्थ रिकार्ड (ईएचआर) प्रणाली से मरीजों का स्वास्थ्य रिकार्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा। राज्य स्तर से अस्पतालों को पोर्टल संचालन और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि नेशनल हेल्थ अथॉरिटी और स्टेट हेल्थ एजेंसी की ओर से ई-मेल, फोन कॉल, संदेश, प्रचार अभियान और वर्चुअल बैठकों के माध्यम से अस्पतालों को लगातार सहयोग दिया गया। इसके बावजूद कई अस्पताल तय समय सीमा के भीतर जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं कर सके। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 95 प्रतिशत से अधिक अस्पताल सफलतापूर्वक एचईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेट हो चुके हैं, लेकिन करीब 200 अस्पतालों ने प्रक्रिया पूरी नहीं की। ऐसे अस्पतालों को कई बार मौका भी दिया गया था।

लोकायुक्त का शिकंजा, घूस लेते पटवारी पकड़ा गया

रीवा लोकायुक्त संभाग रीवा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पटवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के निर्देश एवं डीआईजी मनोज सिंह के मार्गदर्शन में की गई। जानकारी के अनुसार, ग्राम खजुआ कला निवासी कमलेश पटेल ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें बताया गया कि सीमांकन कार्य में भूमि की सीमा बरकरार रखने के एवज में हल्का पटवारी मनोज पांडे द्वारा 15 हजार रुपये रिश्वत मांगी जा रही है। सत्यापन के दौरान आरोपी 10 हजार रुपये पहले ही ले चुका था और शेष 5 हजार रुपये की मांग कर रहा था। लोकायुक्त टीम ने शुक्रवार को रीवा के राजीव मार्ग निराला नगर में जाल बिछाकर आरोपी पटवारी को 5 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ ट्रैप कर लिया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई का नेतृत्व डीएसपी प्रवीण सिंह परिहार ने किया। टीम में निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया सहित 12 सदस्यीय दल शामिल रहा।

एक्शन मोड में CEO, दो पंचायत सचिवों को किया सस्पेंड

ग्वालियर मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जिला पंचायत CEO ने बड़ी कार्रवाई की है। एक साथ दो पंचायत सचिवों को निलंबित कर दिया। सरकारी कार्यों में लापरवाही एवं बिना अनुमति लंबे समय तक अनुपस्थित रहने पर यह कार्रवाई की गई है। जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत कल्याणी के सचिव रामलखन गुर्जर ने स्व. सुरेश जाटव का मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के एवज में अवैध राशि मांगने का आरोप लगा है। वहीं, ग्राम पंचायत आरोली के सचिव गौतम सिंह कौरव को लंबे समय से अनुपस्थित रहने की शिकायत पर निलंबित किया गया है। सरपंच ने उनके खिलाफ शिकायत की थी। जिला पंचायत CEO सोजान सिंह रावत ने दोनों मामलों में निलंबन आदेश जारी कर दिए हैं। इस कार्रवाई से दोनों ग्राम पंचायत में हड़कंप की स्थिती बनी है।

तबादलों का दौर जारी: हरियाणा सरकार ने 12 HPS अधिकारियों को किया इधर से उधर

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने पुलिस प्रशासन में बड़ा फेरबदल करते हुए हरियाणा पुलिस सेवा (HPS) के 12 अधिकारियों के तत्काल प्रभाव से तबादले और नई नियुक्तियों के आदेश जारी किए हैं। राज्यपाल की मंजूरी के बाद गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल (IAS) द्वारा इस संबंध में आधिकारिक सूची जारी कर दी गई है। तबादलों की इस लिस्ट में कई महत्वपूर्ण जिलों के डीएसपी (DSP) और एसीपी (ACP) स्तर के अधिकारी शामिल हैं। 15 एचपीएस अधिकारियों का भी ट्रांसफर इससे पहले शुक्रवार को हरियाणा सरकार ने 15 एचपीसएस अधिकारियों का ट्रांसफर किया था। प्रशासनिक कामकाज में कसावट लाने के उद्देश्य से तुरंत प्रभाव से 15 हरियाणा पुलिस सेवा (HPS) अधिकारियों के तबादले और नियुक्ति के आदेश जारी किए। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल द्वारा जारी इन आदेशों में कई महत्वपूर्ण जिलों के डीएसपी (DSP) और एसीपी (ACP) स्तर के अधिकारियों को बदला गया है।