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पोस्टमार्टम रिपोर्ट,प्रतीक यादव के शरीर पर कोई बाहरी चोट नहीं पाई गई

लखनऊ उत्तर प्रदेश के प्रभावी राजनीतिक परिवार मुलायम सिंह यादव फैमिली के छोटे बेटे प्रतीक यादव की मौत ने लोगों को दुखी कर दिया है। फिटनेस और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े प्रतीक यादव के निधन के बाद कई प्रकार के दावे किए जा रहे हैं। प्रतीक के दोस्तों का दावा है कि उनके शरीर पर चोट के निशान थे। बॉडी नीली पड़ गई थी। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर कोई चोट के निशान न होने की बात कही गई है। डॉक्टरों की टीम के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्रतीक यादव की शरीर पर किसी तरह का बाहरी चोट का कोई निशान नहीं मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, मौत की असली वजह अब भी साफ नहीं हो सकी है। इस कारण डॉक्टरों ने आगे की जांच के लिए बिसरा सुरक्षित रखा है। उनके हार्ट को भी सुरक्षित रखा गया है। इसकी जरूरत पड़ने पर दोबारा जांच की जा सकेगी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या? केजीएमयू के तीन डॉक्टरों के पैनल ने प्रतीक यादव की बॉडी का पोस्टमार्टम किया। डॉ. मौसमी सिंह ने पोस्टमार्टम करने वाली डॉक्टरों की टीम का नेतृत्व किया। इसमें फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. अनूप कुमार रायपुरिया और डॉ. फातिमा हर्षा भी शामिल रहे। पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई है। बाहरी चोट को लेकर कई प्रकार की बातें पहले से हो रही थी। सूत्रों का दावा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्रतीक यादव के शरीर पर चोट या संघर्ष के निशान नहीं मिलने की बात सामने आ रही हैं। उनकी छाती का भी एक्सरे कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद किसी साजिश जैसी बात पर फिलहाल विराम लगता दिख रहा है। प्रतीक की मौत का कारण क्या? प्रतीक यादव की मौत को लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। इसमें प्रतीक यादव की मौत की असली वजह पल्मोनरी एम्बोलिज्म (Pulmonary Embolism) बताई गई है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार, पल्मोनरी एम्बोलिज्म ऐसी स्थिति है, जहां शरीर में खून का थक्का यानी ब्लड क्लॉट बन जाता है। अक्सर पैरों की नसों में इस प्रकार की समस्या आती है। यह थक्का नसों से बहकर सीधे फेफड़ों की धमनियों में जाकर फंस जाता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि पल्मोनरी एम्बोलिज्म से फेफड़ों तक ऑक्सीजन और खून का पहुंचना अचानक रुक जाता है। प्रतीक यादव के मामले में क्लॉट इतना बड़ा था कि इसने अचानक सांसें रोक दीं। इसने दिल पर बहुत ज्यादा दबाव डाल दिया, जिससे महज कुछ ही मिनटों में उनकी मौत हो गई। हार्ट रखा गया सुरक्षित प्रतीक यादव का वेट काफी बढ़ गया था। इसको देखते हुए डॉक्टरों ने उनके हार्ट को सुरक्षित रख लिया है। प्राथमिक जांच में हार्ट अटैक से मौत का मामला सामने आने के बाद इसकी आगे दोबारा जांच की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में सुरक्षित रखे गए हार्ट से जांच कराई जाएगी। वहीं, बिसरा को जांच के लिए भेजा जाएगा। इससे साफ होगा कि प्रतीक यादव के शरीर में किसी प्रकार के विषैले तत्व या अन्य कारण तो मौजूद नहीं थे। सस्पेक्टेड पॉइजनिंग से इनकार सिविल अस्पताल प्रशासन की ओर से सस्पेंक्टेड पॉइजिंग से इनकार किया गया है। अस्पताल प्रशासन ने साफ किया कि हमारी तरफ से इस प्रकार की बात कभी भी नहीं कही गई है। अस्पताल के निदेशक जीपी गुप्ता ने कहा कि बुधवार सुबह करीब 5:30 बजे प्रतीक यादव के ड्राइवर अस्पताल आए थे। यहां से डॉक्टर को तुरंत चलने को कहा गया। मेडिकल टीम मौके पर पहुंची। उस समय प्रतीक यादव के शरीर में कोई प्रतिक्रिया नहीं थी। निदेशक का कहना है कि बाद में उन्हें अस्पताल लाया गया। यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि परिजन पहले प्रतीक यादव के शव को घर ले जाना चाहते थे। बाद में उन्होंने खुद शव के पोस्टमार्टम कराने की इच्छा जताई। पुलिस को मामले की सूचना दी गई। पंचनामा कर शव को केजीएमयू भेजा गया।  

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना, 7500 गो आश्रय स्थलों पर तैयार होगी जैविक खाद

लखनऊ योगी सरकार प्रदेश के गोपालकों, स्वयं सहायता समूहों और किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। सरकार अब प्रदेश के लगभग 7500 गो आश्रय स्थलों पर गोबर से बड़े पैमाने पर जैविक खाद तैयार कराएगी, जिसे किसानों को सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसे गोसंरक्षण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में योगी सरकार का बड़ा और दूरगामी कदम माना जा रहा है। इस योजना के तहत तैयार होने वाली जैविक खाद को 50 किलो के पैकेट में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि हर किसान तक इसे आसानी से पहुंचाया जा सके। कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और एजेंसियों के माध्यम से इसकी टेस्टिंग व खरीद की जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्र में युवाओं, पशुपालकों और स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। गोबर से खाद तैयार करने के लिए बाकायदा ट्रेनिंग देकर प्रशिक्षक तैयार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब गोसंरक्षण, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नए मॉडल के तौर पर उभरा है। योगी सरकार का लक्ष्य गोसंरक्षण को किसानों की आय, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण रोजगार से सीधे जोड़ना है। इसी उद्देश्य के तहत इस योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। गोबर के जरिए बढ़ेगी गांवों की आमदनी उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार ने गोसंरक्षण को ग्रामीण समृद्धि के मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। पहली बार प्रदेश में गाय के गोबर को आर्थिक संसाधन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और पशुपालन से जुड़ी आय में बड़ा इजाफा होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर आधारित जैविक खाद निर्माण, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। खासकर युवाओं और पशुपालकों को इससे सीधा लाभ मिलेगा। किसानों को मिलेगा डीएपी-यूरिया के साथ जैविक विकल्प योगी सरकार की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब प्राकृतिक खेती और ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इससे किसानों को डीएपी और यूरिया के साथ जैविक खाद का विकल्प भी मिलेगा और खेती अधिक टिकाऊ बनेगी। योगी सरकार ने गोसंरक्षण अभियान के लिए लगभग 2000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जबकि वृहद गोसंरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए अलग से 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था अलग से की गई है। गोसंरक्षण में शीर्ष राज्य बनकर उभरा उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में गो-तस्करी की घटनाएं आम थीं, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अवैध बूचड़खानों पर सख्त कार्रवाई कर उन्हें पूरी तरह बंद कराया गया। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश गोसंरक्षण के लिए सबसे ज्यादा काम करने वाला राज्य बनकर उभरा है। पारदर्शिता बढ़ी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती योगी सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में प्रत्येक जिले में कम से कम एक बड़ा आत्मनिर्भर गोसंरक्षण केंद्र स्थापित किया जाए, जहां गोवंश संरक्षण के साथ जैविक उत्पाद निर्माण और प्रशिक्षण की सुविधाएं भी उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के अंतर्गत अब तक लगभग सवा लाख पशुपालकों को 1.80 लाख से ज्यादा गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। गोवंश के भरण-पोषण के लिए सरकार 50 रुपये प्रतिदिन प्रति गोवंश की दर से डीबीटी के माध्यम से सीधे पशुपालकों के बैंक खातों में राशि भेज रही है। इस व्यवस्था से भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगा है और पारदर्शिता बढ़ी है। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। गोबर और गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती मॉडल को बढ़ावा प्रदेश के लगभग 7500 गो आश्रय स्थलों में इस समय 12.5 लाख गोवंश संरक्षित हैं। योगी सरकार अब इन गोशालाओं को गोबर की खाद के प्रोडक्शन सेंटर के रूप में विकसित करने जा रही है। गोबर और गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती मॉडल को बढ़ावा देकर किसानों की खेती की लागत कम करने और आय बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है। एक गाय से रोज लगभग 5 लीटर गोमूत्र और 10 किलोग्राम गोबर प्राप्त होता है। यही संसाधन जैविक खाद, प्राकृतिक कीटनाशक और अन्य गो आधारित उत्पादों के निर्माण में उपयोग किए जाएंगे।

हर घर तक पहुंचा जीवनदायी जल: चिन्ताटोकामेटा में जल जीवन मिशन ने बदली तस्वीर

रायपुर  भैरमगढ़ विकासखंड के दूरस्थ ग्राम चिन्ताटोकामेटा में जल जीवन मिशन ने ग्रामीणों के जीवन में ऐतिहासिक परिवर्तन ला दिया है। अब गांव के हर घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल की नियमित आपूर्ति हो रही है, जिससे वर्षों पुरानी पानी की समस्या का समाधान हो गया है। पहले गांव के लोग एकमात्र हैंडपंप और नदी पर निर्भर थे। पानी भरने के लिए महिलाओं और बच्चों को लंबी कतारों में घंटों इंतजार करना पड़ता था। कई बार दूर नदी से पानी लाना पड़ता था, जिससे समय और श्रम दोनों की बड़ी समस्या बनी रहती थी। जल जीवन मिशन के अंतर्गत गांव के 12 परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। अब प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुँचने से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। 19 मार्च 2026 को आयोजित जल उत्सव कार्यक्रम के दौरान ग्रामसभा के माध्यम से “हर घर जल” प्रमाणन भी किया गया। इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों एवं ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों को जल संरक्षण, जलकर तथा जल आपूर्ति प्रणाली के संचालन-संरक्षण की जानकारी दी। ग्रामीणों ने बताया कि पहले पानी की व्यवस्था करना रोज़ की बड़ी चुनौती थी, लेकिन अब घर पर ही पर्याप्त मात्रा में साफ पानी मिलने से जीवन काफी आसान हो गया है। जल जीवन मिशन की यह सफलता केवल पेयजल उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण सहभागिता, जागरूकता और विकास की नई मिसाल बनकर उभरी है।

HC ने पंजाब सरकार से मांगा जवाब: हरभजन सिंह को जरूरत से ज्यादा सुरक्षा देने पर उठे सवाल

लुधियाना पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्यसभा सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) की सुरक्षा में तैनात 23 पंजाब पुलिस कर्मियों को लेकर पंजाब सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि आधिकारिक मंजूरी केवल आठ पुलिसकर्मियों की होने के बावजूद 15 अतिरिक्त कर्मियों को “अनौपचारिक” रूप से किस आधार पर तैनात किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जगमोहन बंसल ने कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार हरभजन सिंह की सुरक्षा के लिए केवल आठ पुलिसकर्मियों की स्वीकृति दिखाई देती है, जबकि 15 अन्य कर्मियों को कथित तौर पर सार्वजनिक धन के खर्च पर अनौपचारिक रूप से जोड़ा गया। अदालत ने इस मामले को केवल एक व्यक्ति तक सीमित न मानते हुए पंजाब में वीआईपी सुरक्षा संस्कृति की व्यापक जांच शुरू करने के संकेत दिए। कोर्ट ने शुरुआत में मोगा जिले में यह पता लगाने के आदेश दिए कि कितने लोगों को सुरक्षा कवर मिला हुआ है और उनके साथ कितने पुलिसकर्मी आधिकारिक तथा अनौपचारिक रूप से तैनात हैं। हाई कोर्ट ने एडीजीपी (सिक्योरिटी) और एसएसपी मोगा को विस्तृत हलफनामे दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया कि याचिकाकर्ताओं या उनके परिवारों को किसी प्रकार की शारीरिक क्षति न पहुंचे। अदालत ने टिप्पणी की, “ऐसा प्रतीत होता है कि दो आदेशों के तहत आठ पुलिसकर्मियों को सुरक्षा के लिए नियुक्त किया गया था। प्रथम दृष्टया लगता है कि 15 अन्य पुलिसकर्मियों को सरकारी खर्च पर अनौपचारिक रूप से लगाया गया।” मामले की अगली सुनवाई 20 मई को होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब इस मामले में किसी प्रकार का और स्थगन नहीं दिया जाएगा। अपनी याचिका में हरभजन सिंह ने कहा कि उनकी सुरक्षा वापस लेने का आदेश बिना किसी नए खतरे के आकलन और बिना उन्हें सुनवाई का अवसर दिए जारी किया गया था। उन्होंने बताया कि वे 10 अप्रैल 2022 को आम आदमी पार्टी की ओर से राज्यसभा सदस्य चुने गए थे और जालंधर में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। याचिका में उन्होंने कहा कि सुरक्षा हटाने से एक दिन पहले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने घोषणा की थी कि वह और छह अन्य सांसद, जिनमें हरभजन सिंह भी शामिल हैं, पार्टी छोड़ चुके हैं। इसके बाद बिना किसी नए खतरे संबंधी रिपोर्ट के उनकी सुरक्षा वापस ले ली गई। दो सुरक्षा मांगने वालों की अलग-अलग कहानी सुनवाई के दौरान अदालत के सामने सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा अंतर भी सामने आया। एक ओर एक सांसद के पास 23 पुलिसकर्मियों की सुरक्षा थी, जबकि दूसरी ओर कथित गैंग हमले से बचे एक व्यक्ति को केवल दिन के समय एक एएसआई की सुरक्षा दी गई। संबंधित मामले में सरकारी परिवहन और श्रम ठेकेदार तथा जिला परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष ने गैंग से जान का खतरा बताते हुए अपने और परिवार की सुरक्षा की मांग की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अरमान सग्गर ने अदालत को बताया कि 1 नवंबर 2025 को मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उन पर फायरिंग की थी। घटनास्थल से छह खाली कारतूस बरामद हुए थे और अगले दिन सुल्तानपुर लोधी थाने में भारतीय न्याय संहिता और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि बाद में एक व्यक्ति ने खुले तौर पर घटना की जिम्मेदारी ली थी। कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, लेकिन अन्य अब भी फरार हैं। इसके बावजूद याचिकाकर्ता को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलने का आरोप लगाया गया। अदालत को बताया गया कि पहले उन्हें दो एएसआई दिए गए थे, लेकिन एक महीने बाद एक एएसआई हटा लिया गया और अब उनके पास केवल दिन के समय एक एएसआई की सुरक्षा ही बची है।

लाड़ली बहना योजना महिलाओं को बना रही आर्थिक रूप से सशक्त

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश सरकार के लिये माताओं और बहनों का सम्मान सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मातृ शक्ति के कल्याण के लिये प्रदेश शासन द्वारा संचालित सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है। आज यहाँ पर रक्षाबंधन, भाईदूज और दीवाली सहित सभी त्यौहार एक साथ मनाने का अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नरसिंहपुर जिले के ग्राम मुंगवानी में आयोजित मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 36वीं किस्त के राशि अन्तरण और हितलाभ वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेश की 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में 1835 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 296 करोड़ रुपये लागत के 40 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिलाओं को आर्थिक संबल देने के साथ ही उन्हें सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अब तक योजना में 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि लाड़ली बहनों के खातों में अंतरित की जा चुकी है। रानी दुर्गावती के पराक्रम के सम्मान में जबलपुर व सिंग्रामपुर में हुईं कैबिनेट बैठकें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान नरसिंह की यह भूमि रानी दुर्गावती के पराक्रम की साक्षी है। रानी दुर्गावती के सम्मान में प्रदेश सरकार द्वारा जबलपुर और सिंग्रामपुर में कैबिनेट बैठक आयोजित की है। वहीं आदिवासी शहीद भभूत सिंह के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के सम्मान में भी विशेष कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है। वर्तमान में प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से 6 पर महिला सांसद हैं, जबकि 27 महिला विधायक एवं 5 महिला मंत्री कार्यरत हैं। कम्प्यूटर एवं सुरक्षा के क्षेत्र में महिलाएं आ रहीं हैं आगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से बेटियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि कम्प्यूटर और सुरक्षा के क्षेत्र में भी महिलाएं आगे आ रही है। पुलिस विभाग में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। उन्होंने बताया कि 4 लाख से अधिक महिलाएँ स्वरोजगार से जुड़ी हैं। रेडीमेड कपड़ा उद्योग एवं कारखानों में कार्य करने वाली महिलाओं को 5000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। साथ ही 34 लाख महिला कृषकों को दुग्ध उत्पादन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि 25 गाय या भैंस का पालन करने वाले पशुपालकों को सरकार द्वारा 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नरसिंहपुर जिला गन्ने की खेती के लिए प्रसिद्ध है और यह शक्कर का कटोरा है। इससे यहां के 20 हजार से अधिक परिवारों को रोजगार मिल रहा है। गाडरवारा की तुअर दाल प्रदेश ही नहीं देश में भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। नरसिंहपुर जिला सोयाबीन और गेहूं के उत्पादन में भी अग्रणी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गेहूं, चना, सरसों, मसूर एवं उड़द की समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित कर रही है। उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जाएगा। मध्यप्रदेश देश का सबसे अधिक गेहूं खरीदी करने वाला राज्य है। किसानों के हित में 23 मई तक खरीदी की जा रही है। आवश्यकता हुई तो आगे भी खरीदी की अवधि बढ़ाई जाएगी। मध्यप्रदेश में हो रहा तेजी से विकासात्मक बदलाव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से देश बदल रहा है और इसके साथ ही मध्यप्रदेश में भी तेजी से बदलाव हो रहा है। सिकलसेल, कुपोषण से लड़ने में प्रदेश सरकार सफल हो रही है। लाड़ली लक्ष्मी योजना से 53 लाख बेटियों की जिंदगी में बदलाव आ रहा है। प्रदेश की 80 लाख बेटियों को शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति दी जा रही है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में 55 हजार रुपये की राशि दी जा रही है। सड़क दुर्घटना में घायलों के उपचार का 1.50 लाख रुपये का खर्च देगी सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री राहत योजना में नरसिंहपुर जिले में बेहतर कार्य हो रहा है। इस योजना में सड़क दुर्घटना में घायलों के उपचार के लिए डेढ़ लाख रुपये तक का सारा खर्च सरकार दे रही है। पहले दुर्घटना के समय घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए लोग डरते थे, लेकिन अब उन्हें डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि मानवीय पहल कर घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्तियों को सरकार द्वारा 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदाय की जा रही है। जल की एक-एक बूंद बचाने की अपील मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान की चर्चा करते हुए कहा कि जल है, तो जीवन है, जल है तो खेती है और जल है तो समृद्धि है। हमारे धार्मिक अनुष्ठानों में भी जल का विशेष महत्व है। प्रदेश के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण का अभियान चलाया जा रहा है। इसमें आमजन को सहभागी बनना चाहिए। उन्होंने नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव विकासखंड के ग्राम मेख में एक मालगुजार द्वारा 21 एकड़ जमीन तालाब निर्माण के लिए दान किए जाने की सराहना करते हुए कहा कि यह अनुकरणीय उदाहरण है। परिवार को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जायेगा। जिले की धरोहरों पर केंद्रित कैलेंडर का विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नरसिंहपुर जिले की ऐतिहासिक धार्मिक एवं पुरातात्विक धरोहरों पर आधारित कलेंडर का विमोचन किया। कैलेंडर में बरमान घाट, मृगनाथ तपोवन आश्रम, दादा दूल्हादेव महाराज, नरसिंह मंदिर, चौगान का किला, बरहेटा की पुरातात्विक धरोहर, गरूण मंदिर, बिनेकी टोला के शैल चित्र, मां राजराजेश्वरी त्रिपुरसुंदरी मंदिर, पीतल नगरी चीचली, गुरू गुफा अमोदा शंकर घाट को शामिल किया गया है। 40 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में 296 करोड़ 34 लाख रुपये की लागत के 40 विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमि-पूजन किया। इसमें 215 करोड़ 65 लाख रुपये की लागत के 17 कार्यों का भूमि-पूजन एवं 80 करोड़ 68 लाख रुपये लागत के 23 कार्यों का लोकार्पण के कार्य शामिल है। मुंगवानी में बनेगा कॉलेज, शेढ़ नदी पर बनेगा पुल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव के ग्राम … Read more

अंबाला एमसी कॉलोनी में जादू-टोना विवाद के कारण बहनों पर हमला

अंबाला अंधविश्वास और आपसी रंजिश का खतरनाक रूप मंगलवार को अंबाला शहर की एमसी कॉलोनी में देखने को मिला। अशोक विहार स्थित तंबाकू फैक्ट्री के सामने बनी कॉलोनी में पड़ोसियों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि दो सगी बहनों पर ईंटों से हमला कर दिया गया। हमले में दोनों बहनें गंभीर रूप से घायल हो गईं और उनके सिर फट गए। स्थिति यह थी की पूरी गली खून से सन गई थी। दोनों को लहूलुहान हालत में नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायल युवतियों की पहचान कविता (23) और मन्नत (22) के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस चौकी नंबर-1 की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने जांच शुरू कर दी। आरोपितों में पड़ोस में रहने वाले दो दंपती बताए जा रहे हैं। जादू-टोना करते देखा तो शुरू हुआ विवाद घायल कविता ने आरोप लगाया कि पड़ोस में रहने वाला परिवार लंबे समय से उनके घर के आसपास जादू-टोना जैसी गतिविधियां करता था। मंगलवार सुबह भी परिवार के कुछ लोगों को कथित रूप से कमरे में ऐसी हरकत करते हुए देखा गया। जब उनके परिजनों ने इसका विरोध किया और समझाने की कोशिश की तो आरोपित भड़क गए। कविता के अनुसार आरोपितों ने पहले गाली-गलौज की और फिर जान से मारने की धमकी देने लगे। मंगलवार को जब वह किसी काम से बाहर जाने के लिए निकली तो आरोपितों ने ईंटों से हमला कर दिया। ड्यूटी पर था भाई, फोन आया तो उड़े होश घायल बहनों के भाई सेठी कुमार ने बताया कि वह नगर निगम में अस्थायी सफाई कर्मचारी है। मंगलवार को घटना के समय ड्यूटी पर गया हुआ था। शाम करीब साढ़े चार बजे उसे फोन पर सूचना मिली कि पड़ोसियों ने उसकी दोनों बहनों पर हमला कर दिया है। जब वह घर पहुंचा तो दोनों बहनें खून से लथपथ हालत में पड़ी थीं। उसने बताया कि घर पर आए उसकी दीदी और जीजा भी बीचबचाव के दौरान चोटिल हो गए। अस्पताल में उपचार जारी, पुलिस जांच में जुटी घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तुरंत जिला नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। डाक्टरों के अनुसार दोनों बहनों के सिर में गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है।  

अनूपपुर के बिजुरी से ट्रांजिट विजिट पर जबलपुर पहुंचे CM मोहन यादव, रायपुर के लिए हुए रवाना

जबलपुर  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का आज शाम डुमना एयरपोर्ट पहुंचने पर आत्मीय स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री शाम करीब 7.10 बजे अनूपपुर जिले के बिजुरी से हेलीकॉप्टर द्वारा ट्रांजिट विजिट पर डुमना एयरपोर्ट पहुँचे थे। डुमना एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री का स्वागत जिला पंचायत अध्यक्ष आशा गोंटिया, जबलपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष  संदीप जैन एवं उपाध्यक्ष  प्रशांत केशरवानी, नगर निगम अध्यक्ष  रिकुंज विज, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कोषाध्यक्ष  अखिलेश जैन, नगर अध्यक्ष  रत्नेश सोनकर, ग्रामीण जिला अध्यक्ष  राजकुमार पटेल, पूर्व मंत्री  हरेंद्र जीत सिंह बब्बू, पूर्व महापौर  प्रभात साहू,  पंकज दुबे,  सुभाष तिवारी रानू,  सोनू बचवानी,  रंजीत पटेल,  प्रणीत वर्मा,  अंकित द्विवेदी,  कौशल सूरी,  मुरली दुबे आदि ने किया। डुमना एयरपोर्ट पर  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की आगवानी संभागायुक्त धनंजय सिंह, उप पुलिस महानिरीक्षक अतुल सिंह, कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय एवं नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने की। मुख्यमंत्री डॉ यादव डुमना एयरपोर्ट से शाम लगभग 7.50 बजे वायुयान से रायपुर रवाना हुये

अपर्णा यादव के घर पहुंचे मुख्यमंत्री, प्रतीक के निधन पर जताया शोक

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के घर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने उनके पति प्रतीक यादव के निधन पर शोक प्रकट करते हुए पार्थिव शरीर को पुष्पांजलि दी। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के पुत्र एवं अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव का बुधवार सुबह आकस्मिक निधन हो गया था। मुख्यमंत्री ने अपर्णा यादव, उनके बच्चों व अन्य परिजनों को ढांढस भी बंधाया। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति एवं शोकाकुल परिजनों को अथाह दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। सीएम ने शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदनाएं भी जताईं।

मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान बना जीवन रक्षक, माड़वी नन्दे और सुमड़ी को मिली नई जिंदगी

रायपुर सुकमा जिले के के दुर्गम अंचलों में जहाँ भूगोल भी कदम-कदम पर परीक्षा लेता है, वहाँ सुकमा जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कर्तव्यनिष्ठा की एक बेमिसाल इबारत लिखी है। 'मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान' के तहत दूरस्थ पहुँचविहीन ग्राम दुरभा पहुँची टीम ने दो मासूमों 5 वर्षीय माड़वी नन्दे और 4 वर्षीय माड़वी सुमड़ी को नई जिंदगी दी। मलेरिया, गंभीर कुपोषण और शरीर में मात्र 2 से 3 ग्राम हीमोग्लोबिन के साथ कमजोर इन बच्चियों के लिए प्रशासन की यह सक्रियता किसी वरदान से कम साबित नहीं हुई।      कलेक्टर  अमित कुमार के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के 'स्वस्थ बस्तर' के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए स्वास्थ्य कर्मियों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। घने जंगलों, नदी और नालों को पार कर जब टीम दुरभा पहुँची, तो बच्चों की हालत देख उन्हें तत्काल अस्पताल पहुँचाने का निर्णय लिया गया। दुर्गम रास्तों पर मीलों का सफर पैदल तय कर बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहाँ से एम्बुलेंस के माध्यम से लगभग 96 किलोमीटर दूर जिला चिकित्सालय सुकमा पहुँचाया गया। प्रशासन की इस संवेदनशीलता ने साबित कर दिया कि सरकार की नजरें बस्तर के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति पर भी हैं।      जिला अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने युद्ध स्तर पर बच्चों का इलाज शुरू किया। एनीमिया और मलेरिया से जूझ रहे इन बच्चों को न केवल खून चढ़ाया गया, बल्कि मलेरिया का पूरा कोर्स और गहन चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराई गई। पोषण पुनर्वास केंद्र(एनआरसी) में हुए इस निःशुल्क उपचार का परिणाम सुखद रहा। कुछ ही दिनों में बच्चों का हीमोग्लोबिन स्तर 9 ग्राम के पार पहुँच गया और उनके मुरझाए चेहरों पर मुस्कान लौट आई। इस दौरान बच्चों के परिजनों को पोषण, स्वच्छता और बच्चों के मानसिक विकास के लिए विशेष परामर्श भी दिया गया ताकि भविष्य में उन्हें ऐसी चुनौतियों का सामना न करना पड़े।    इलाज के बाद बच्चों को सकुशल उनके गाँव तक वापस पहुँचाया गया। कलेक्टर  अमित कुमार के अनुसार, यह मिशन केवल उपचार तक सीमित नहीं था, बल्कि बच्चों को शासन की अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने हेतु आवश्यक दस्तावेज भी तैयार किए गए। आज दुरभा गाँव में लौट आई इन मासूमों की खिलखिलाहट स्वास्थ्य विभाग के उन सफल प्रयासों की गूँज है, जो दुर्गम पहाड़ों और घने जंगलों को लांघकर जन-जन तक पहुँच रहे हैं।      मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत सुकमा जिले में कुल 2,93,386 लोगों के स्वास्थ्य जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से आज दिनांक तक 1,74,770 लोगों की स्वास्थ्य जांच एवं उपचार किया जा चुका है। अभियान के दौरान लगभग 5,240 मरीजों को मोतियाबिंद, मलेरिया, कुष्ठ, टीबी, खून की कमी, उच्च जोखिम गर्भवती महिला, कुपोषित बच्चे, बीपी एवं शुगर जैसी बीमारियों के लक्षणों के आधार पर चिन्हांकित कर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं जिला अस्पताल में बेहतर उपचार हेतु रेफर किया गया है।

तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता क्रांति की ओर बढ़ा उत्तर प्रदेश, योगी सरकार ने नैक आधारित सुधारों को दी नई रफ्तार

लखनऊ उत्तर प्रदेश में तकनीकी शिक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों और तकनीकी विश्वविद्यालयों को नैक मानकों के अनुरूप तैयार करने के लिए व्यापक सुधार अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य केवल डिग्री आधारित शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीकी संस्थानों को अकादमिक उत्कृष्टता, रिसर्च, नवाचार और रोजगारपरक शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करना है। तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा लागू किए गए “स्टेट क्वालिटी फ्रेमवर्क (एसक्यूएफ)” को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस फ्रेमवर्क के माध्यम से प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए नैक, एनआईआरएफ (नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क) और एनबीए (नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडिएशन) आधारित गुणवत्ता मानकों को व्यवस्थित रूप से लागू किया जा रहा है। इससे तकनीकी संस्थानों की रैंकिंग, शैक्षणिक गुणवत्ता और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में सुधार आने की उम्मीद है। प्रदेश में वर्तमान समय में 14 राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, एचबीटीयू, एमएमएमयूटी और एकेटीयू जैसे प्रमुख तकनीकी विश्वविद्यालयों के साथ-साथ 771 निजी इंजीनियरिंग एवं फार्मेसी संस्थान संचालित हो रहे हैं। इतने बड़े नेटवर्क को एक समान गुणवत्ता ढांचे से जोड़ना योगी सरकार की तकनीकी शिक्षा सुधार नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। सरकार की रणनीति केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्थानों को व्यावहारिक रूप से तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में कॉलेजों के लिए सेल्फ-असेसमेंट प्रोफॉर्मा तैयार किया गया है, ताकि संस्थान स्वयं अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक गुणवत्ता का मूल्यांकन कर सकें। इसके अलावा इंजीनियरिंग कॉलेजों को एसआईआरएफ (स्टेट इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क) प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है, जिससे डेटा आधारित मूल्यांकन और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेशभर में जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने की भी तैयारी की गई है। इन कार्यशालाओं के जरिए संस्थानों को नैक की आवश्यकताओं, दस्तावेजीकरण, रिसर्च आउटपुट, फैकल्टी डेवलपमेंट और छात्र सुविधाओं से जुड़े मानकों की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही कॉलेजों में उपलब्ध डेटा और नैक दिशा-निर्देशों के बीच अंतर का भी मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि कमियों को समय रहते दूर किया जा सके। विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार योगी सरकार का यह प्रयास प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है। लंबे समय तक उत्तर प्रदेश के कई तकनीकी संस्थान केवल सीट भरने तक सीमित माने जाते थे, लेकिन अब सरकार उन्हें गुणवत्ता आधारित शिक्षा मॉडल की ओर ले जाने का प्रयास कर रही है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप तकनीकी संस्थानों में रिसर्च, इनोवेशन, इंडस्ट्री कनेक्ट और स्किल डेवलपमेंट पर बढ़ते फोकस को भी इस पहल से मजबूती मिलने की संभावना है। सरकार का उद्देश्य ऐसे तकनीकी संस्थान विकसित करना है जो केवल डिग्री न दें, बल्कि छात्रों को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार करें। योगी सरकार की यह पहल “एक ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी” के लक्ष्य से भी जुड़ी मानी जा रही है। बेहतर तकनीकी शिक्षा, कुशल मानव संसाधन और उद्योगों के लिए प्रशिक्षित युवाओं की उपलब्धता प्रदेश में निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति दे सकती है। यही वजह है कि तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार को सरकार विकास की दीर्घकालिक रणनीति के केंद्र में रख रही है।