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भू-जल संरक्षण के लिए रायपुर प्रशासन की नई पहल, वर्षा जल सहेजकर बढ़ाया जाएगा जल स्तर

रायपुर : वर्षा जल सहेजकर भू -जल स्तर बढ़ाने प्रशासन की अभिनव पहल मोर गांव,मोर पानी अभियान अंतर्गत 87 हजार से अधिक जल संचयन संरचनाएं निर्मित,राष्ट्रीय स्तर पर जिला तीसरे पायदान पर रायपुर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित करने और गिरते भू-जल स्तर को बचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई मुहिम अब धरातल पर बड़े सकारात्मक परिणाम दिखा रही है। बलौदाबाजार प्रशासन की दूरदर्शी सोच और जन-भागीदारी के समन्वय से जिले ने जल संचयन एवं संवर्धन के क्षेत्र में देश भर में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।     बलौदाबाजार जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए संचालित मोर गांव, मोर पानी अभियान 2.0 एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। इस महत्वाकांक्षी अभियान के अंतर्गत अब तक जिले के 722 गांव,517 ग्राम पंचायत, 9 नगरीय क्षेत्र में 87137 जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इनमें सोख्ता गड्ढे, चेक डैम, तालाबों का गहरीकरण और रूफ-टॉप हार्वेस्टिंग जैसे कार्य शामिल हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से बारिश के पानी को बहकर व्यर्थ जाने से रोककर सीधे जमीन के भीतर उतारा जा रहा है। प्रमुख जल संचयन संरचना निर्माण कार्य     कैच द रैन-जल शक्ति अभियान 2.0 जल शक्ति अभियान के तहत जिले में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन के कुल 87173 कार्यों का  जेएसए-सीटीआर पोर्टल में प्रविष्टि किया गया है। रैन वाटर हार्वेस्टिंग, सोक पीट 61831 कार्य,डबरी, कुंआ, तालाब, रिचार्ज पिट, डब्ल्यूएटी,एससीटी 7803 कार्य,जल संसाधन विभाग द्वारा एनीकट, स्टॉप डेम, डायवर्सन, जलाशय, नहर 21 कार्य,वन विभाग(कैम्पा) द्वारा एलबीसीडी, एससीटी, गाबिन, चेक डेम 15259 कार्य,कृषि विभाग द्वारा बोरवेल रिचार्ज,सोक पिट,ट्रेंच 1153 कार्य,अर्बन फंड द्वारा रैन वाटर हार्वेस्टिंग 1034 कार्य,सीएसआर मद द्वारा तालाब गहरीकरण, आरडब्ल्यूएच, ट्रेंच, चेक डेम 72 कार्य, अमृत सरोवर एवं नवीन तलब 51 शामिल है। राष्ट्रीय स्तर पर  उपलब्धि जल प्रबंधन के क्षेत्र में किए गए  विभिन्न संरचना निर्माण में राष्ट्रीय स्टर पर जिला वर्तमान में जिला तीसरे स्थान पर है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासन की कार्यकुशलता को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्र के किसानों आम नागरिक एवं गांव में गठित जल संचय वाहनी क़ी  सक्रिय सहयोग का भी परिणाम है। इसके साथ ही जल संचय को जन आंदोलन का स्वरुप देकर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। भू-जल स्तर में सुधार और कृषि को लाभ व्यापक स्तर पर बनी इन संरचनाओं के कारण क्षेत्र के भू-जल स्तर  में उल्लेखनीय सुधार होग़ा। इसका सीधा लाभ रबी और खरीफ दोनों फसलों के दौरान किसानों को मिलेगा। सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता बढ़ने से कृषि उत्पादकता में वृद्धि की उम्मीद है। प्रशासन का संकल्प जिला प्रशासन द्वारा जल संरक्षण की यह प्रक्रिया सतत रूप से जारी रहेगी। आगामी मानसून से पहले 1 लाख से अधिक संरचनाओं को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि जिले के प्रत्येक गांव को जल के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

सौर ऊर्जा क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने वाले वेंडरों को मिलेगा सम्मान

सौर संयंत्र स्थापना में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वेंडर होंगे सम्मानित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य किया जा रहा है। सरकार "पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली" योजना अंतर्गत घरों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का कार्य प्रतिबद्धतापूर्वक कर रही है। प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम अमनबीर सिंह बैंस ने बताया है कि निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सौर संयंत्र स्थापना में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वेंडरों को सम्मानित किया जाएगा। एमडी बैंस ने कहा कि जो वेंडर अपना कार्य ठीक प्रकार से नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी। एमडी बैंस ने विगत दिनों भोपाल मुख्यालय में प्रगति की समीक्षा कर सभी वेंडर्स कार्य में आने वाली दिक्कतों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बताया कि कार्य क्षेत्र में आने वाली सभी समस्याओं का समय रहते समाधान किया जाएगा जिससे कि सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को समय सीमा में हासिल किया जा सके। लगभग सवा लाख संयंत्र किये स्थापित एमडी बैंस ने बताया कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में एक लाख 21 हजार 392 घरों पर सौर संयंत्र स्थापित कर दिए गए हैं। सोलर सिस्टम स्थापित करने के लिए 847.13 करोड रुपए का अनुदान केंद्र सरकार द्वारा दिया गया है। उन्होंने बताया कि अभी तक एक लाख 92 हजार 647 आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं, आवेदन पत्रों पर त्वरित कार्यवाही कर संयंत्र स्थापित करने की कार्रवाई द्रुत गति से जारी है।  

रायपुर: छिंद के बीजों से तैयार हर्बल कॉफी, बस्तर की वैश्विक पहचान बनी

रायपुर : बस्तर की नई वैश्विक पहचान: जंगलों में फेंके जाने वाले छिंद के बीजों से तैयार हुई अनोखी हर्बल कॉफी युवा उद्यमी विशाल हालदार का कमाल कचरे से कंचन बनाने के नवाचार को मुख्यमंत्री ने भी सराहा रायपुर, छिंद, खजूर, पाम के बीज, के वेस्ट बीजों से अब स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट हर्बल कॉफी बनाई जा रही है। यह नवाचार न केवल बेकार बीजों का सदुपयोग करता है, बल्कि एक स्वास्थ्यवर्धक कैफीन.मुक्त पेय भी प्रदान करता है। यह कॉफी कैफीन मुक्त है, जो इसे अनिद्रा, हाई ब्लड प्रेशर और एसिडिटी के मरीजों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनाती है। यह नवाचार न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। बस्तर का नैसर्गिक सौंदर्य अब केवल अपनी हरियाली के लिए ही नहीं, बल्कि एक सुगंधित क्रांति के लिए भी जाना जाएगा। दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी युवा नवाचारी विशाल हालदार ने अपनी जड़ों से जुड़कर एक ऐसा प्रयोग किया है, जिसने बेकार समझे जाने वाले संसाधनों को बहुमूल्य बना दिया है। विशाल ने छिंद (खजूर की स्थानीय प्रजाति) के बीजों से कैफीन मुक्त हर्बल कॉफी तैयार कर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। नवाचार कचरे से कंचन तक का सफर बीकॉम और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की पढ़ाई करने वाले विशाल ने करीब दो साल के गहन शोध के बाद इस हर्बल कॉफी को विकसित किया है। बस्तर के जंगलों में प्रचुरता से मिलने वाले छिंद के बीज, जो अब तक व्यर्थ फेंक दिए जाते थे। यह कॉफी पूरी तरह कैफीन मुक्त है, जिससे स्वास्थ्य पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता। इसमें प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो इसे साधारण कॉफी से अधिक स्वास्थ्यवर्धक बनाते हैं। मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित, इनोवेशन महाकुंभ में रहे अव्वल विशाल के इस अभिनव प्रयोग को शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, जगदलपुर में आयोजित इनोवेशन महाकुंभ में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विशाल को इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया। प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी सहित प्रबुद्ध वर्ग ने भी इस कॉफी के स्वाद और सुगंध की जमकर सराहना की है। स्थानीय रोजगार और उद्यमिता का नया मॉडल         विशाल हालदार का लक्ष्य केवल उत्पाद बेचना नहीं, बल्कि बस्तर के युवाओं को स्वावलंबी बनाना है। दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के सहयोग से वे स्थानीय युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट से गांवों और जंगलों से छिंद के बीज इकट्ठा करने वाले ग्रामीणों को आय का एक नया जरिया मिलेगा। स्थानीय संसाधनों का सदुपयोग कर बस्तर के नाम को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना। यदि दृष्टि स्पष्ट हो तो स्थानीय वेस्ट को भी वैश्विक स्तर के बेस्ट उत्पाद में बदला जा सकता है। यह हर्बल कॉफी आने वाले समय में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक दुनिया के लिए बस्तर का अनूठा उपहार साबित होगी। भविष्य की योजना खजूर के बीजों में एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे फेनोलिक यौगिक और ओलिक एसिड भरपूर मात्रा में होते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य और पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद हैं। वर्तमान में यह प्रोजेक्ट टेस्टिंग और विकास के अंतिम चरणों में है। जल्द ही इसकी आधिकारिक लॉन्चिंग की जाएगी, जिसके बाद बस्तर की यह हर्बल कॉफी बाजारों में अपनी खुशबू बिखेरने के लिए तैयार होगी।

UP-MP के बीच यात्रा आसान: भोपाल से कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर से केवल 7 घंटे में पहुंचेगे

भोपाल भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले फेस में भोपाल से विदिशा के बीच इस साल के आखिर तक लॉजिस्टिक और इंडस्ट्रियल अधोसंरचना का काम नजर आने लगेगा। नेशनल हाईवे के निर्माणाधीन इस 42 किमी. के हिस्से के पास एमपीआइडीसी ने इंटीग्रेटेड मैन्यूफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक क्लस्टर के तौर पर विकसित करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स होंगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण रोड पर काम कर रहा है, जबकि एमपीआइडीसी लॉजिस्टिक हब डेवलपमेंट से जुड़ी गतिविधियां तय करेगा। लॉजिस्टिक हब के तौर पर इसके विकसित होने से भोपाल व विदिशा के बीच छोटे उद्योगों और वेयरहाउसिंग का बड़ा जाल बिछने की उम्मीद है, जिससे प्रदेश में रोजगार बढ़ेगा। राजधानी के विकास का रास्ता भी बदलेगा टाउन प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ के अनुसार अभी शहर का पूरा विकास दक्षिण दिशा यानी नर्मदापुरम रोड व इंदौर रोड की ओर है। इस कॉरिडोर के बनने से ये रायसेन रोड, विदिशा रोड की ओर होगा। विदिशा रोड खुद इकोनॉमिक कॉरिडोर में बदलेगा तो यहां नए प्रोजेक्ट्स नए विकास की स्थितियां बनेंगी। नर्मदापुरम रोड से इसे जोडऩे पहले से ही बायपास है। इंदौर रोड की ओर भी प्रस्तावित पश्चिमी बायपास से जुड़ेगा। मंत्री नितिन गडकरी ने मध्य प्रदेश को 6800 करोड़ का तोहफा दिया है। नितिन गडकरी ने 6800 करोड़ के राजमार्गों को तोहफा मध्य प्रदेश को दिया है। इसमें 18 नेशनल हाईवे का निर्माण किया जाएगा। जिसकी कुल लंबाई 550 किमी की होगी। सोमवार को नितिन गडकरी ने इस परियोजना का उद्घाटन किया। इस परियोजना के साथ भोपाल से कानपुर के बीच भोपाल कानपुर इकोनॉमी कोरिडोर का ऐलान किया गया। भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर भोपाल-विदिशा-सागर-कानपुर इकोनॉमी कोरिडोर का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए भोपाल से विदेशा होकर सागर तक और सागर से महोबा जिले तक कवरई होकर कानपुर तक 11300 करोड़ की लागत से इस इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण होगा। इस हाईवे को निर्माण से भोपाल के कानपुर की दूरी 15 घंटे के घटकर 7 घंटे रह जाएगी। इस कॉरिडोर के बनने से भोपाल से कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी की कनेक्लिविटी अच्छी हो जाएगी। वहीं बुंदेलखंड से भोपाल और कानपुर आने-जाने में भी समय बचेगा। सिर्फ 7 घंटे में भोपाल से कानपुर इसके अलावा केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश के ओरछा में 6800 करोड़ रुपये की लागत से 550 किलोमीटर की कुल लंबाई वाली 18 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इस मौके पर गडकरी ने कहा कि स्थानीय लोगों की बेतवा में पुल बनाने की दो दशक पुरानी मांग पूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि 665 मीटर लंबे इस पुल को 25 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। उन्होंने कहा कि 2-लेन के पेव्ड शोल्डर ब्रिज और फुटपाथ के निर्माण से ओरछा, झांसी, टीकमगढ़ की कनेक्टिविटी में सुधार होगा। मंत्री ने कहा कि पवई, ओरछा, हरपालपुर, कैथी पड़रिया कला, पटना तमौली, जस्सो, नागौद और सागर लिंक रोड बाईपास के निर्माण से शहर में यातायात का दबाव कम होगा। सागर ग्रीनफील्ड लिंक रोड से भोपाल से कानपुर की दूरी 21 किमी कम हो जाएगी, मोहरी से सताई घाट और चौका से एमपी/यूपी तक की दूरी भी कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सीमा तक 4 लेन चौड़ा करने से यात्रा के समय में भारी कमी आएगी। उन्होंने कहा कि सागर सिटी, छतरपुर सिटी और गढ़ाकोटा में फ्लाईओवर बनने से ट्रैफिक जाम की समस्या का समाधान हो जाएगा। गडकरी ने कहा कि मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों ओरछा, खजुराहो, पन्ना, चित्रकूट, टीकमगढ़, सांची तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भोपाल-कानपुर आर्थिक कॉरिडोर के निर्माण से सीमेंट और खनिजों का परिवहन आसान होगा और लॉजिस्टिक लागत कम होगी। मंत्री ने कहा कि इस कॉरिडोर के बनने से भोपाल से कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी की कनेक्टिविटी अच्छी होगी, टीकमगढ़ से ओरछा तक पक्की शोल्डर वाली 2 लेन सड़क बनने से यातायात सुरक्षित होगा। इस कार्यक्रम में गडकरी ने 2000 करोड़ रुपये की लागत से बमीठा से सतना तक 105 किलोमीटर लंबी 4 लेन की ग्रीनफील्ड सड़क बनाने की भी घोषणा की। इस सड़क के बनने से टीकमगढ़, पन्ना, छतरपुर, खजुराहो, बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महाकाल मंदिर में तैयार हो रहा हीट प्रूफ पाथ-वे

 उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हीट प्रूफ पाथवे का निर्माण कराया गया है। इस पर चलने से श्रद्धालुओं के पैर नहीं जलेंगे।प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया मंदिर समिति अध्यक्ष कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के निर्देश पर ग्रीष्म ऋतु में भक्तों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इसी क्रम में मंदिर परिसर एवं श्री महाकाल महालोक में दर्शन पथ पर (लगभग 13 हजार स्क्वेयर फीट में ) हीट प्रूफ पाथ-वे (सोलर रिफ्लेक्टिव पेंट) का निर्माण कार्य किया जा रहा है। यह हीट प्रूफ पाथ-वे नीलकंठ से पंचमुखी हनुमान, मानसरोवर से होते हुए शंख द्वार एवं बड़ा गणेश मंदिर तक बनाया जा रहा है। इस हीट प्रूफ पाथ-वे के निर्माण से तपती धूप में भी श्रद्धालुओं के पैर नहीं जलेंगे तथा वे बिना किसी असुविधा के सहजता से दर्शन पथ पर आवागमन कर सकेंगे। दर्शन हेतु प्रवेश एवं निर्गम मार्ग पर यह व्यवस्था विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगी, जिससे श्रद्धालु गर्मी के बावजूद सुरक्षित एवं आरामदायक तरीके से भगवान श्री महाकालेश्वर जी के दर्शन कर सकेंगे। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर समिति ने लिया फैसला बाबा महाकाल के दर्शन करने रोजाना 1 लाख से ज्यादा श्रदालु आते हैं. इन्हीं के साथ वीवीआईपी, राजनेता, अभिनेता, व क्रिकेटर भी बाबा महाकाल के दरबार में माथा टेकने पहुंचते हैं. उज्जैन व आसपास क्षेत्र में गर्मी भी अपना तेवर दिखा रही है. जिससे महाकाल मंदिर में आने वाले श्रदालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसा में श्रद्धालुओं की सुविधान का ध्यान में रखते हुए महाकाल प्रबंधन समिति ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।  महाकाल मंदिर में बनाया जा रहा हीट प्रूफ पाथ-वे जिसमें महाकाल लोक में शेड लगाने व हीट प्रूफ पाथ-वे बनाया जा रहा है. प्रंबधन समिति ने ठंडे पानी, मेटिंग व कूलर की व्यवस्था तो पहल ही कर रखी है. साथ ही गर्मी से बचने के लिए स्प्रिंगर भी लगाए गए हैं. सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने बताया कि "श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर व अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह, प्रशासक व अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक द्वारा दिए गए निर्देश पर विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।  कहां से कहां तक बन रहा पाथ वे इसी क्रम में मंदिर परिसर व महाकाल महालोक में दर्शन पथ पर लगभग 13 हजार स्क्वायर फीट में हीट प्रूफ पाथ-वे सोलर रिफ्लेक्टिव पेंट का निर्माण कार्य किया जा रहा है. यह हीट प्रूफ पाथ-वे नीलकंठ से पंचमुखी हनुमान, मानसरोवर से होते हुए शंख द्वार एवं बड़ा गणेश मंदिर तक किया जा रहा है. इस हीट प्रूफ पाथ-वे के निर्माण से तपती धूप में भी श्रद्धालुओं के पैर नहीं जलेंगे. वे बिना किसी असुविधा के सहजता से दर्शन पथ पर आवागमन कर सकेंगे।  जलकुंभी निकालने व उसके निपटान के लिए उठाया कदम  श्री महाकालेश्वर मंदिर के पीछे स्थित पौराणिक और धार्मिक महत्व के रुद्र सागर को स्वच्छ रखने के लिए उज्जैन नगर निगम ने एक बार फिर कवायद शुरू की है। निगम के स्वास्थ्य विभाग द्वारा रुद्र सागर (बड़ा एवं छोटा) से जलकुंभी निकालने और उसके निपटान के लिए वार्षिक सफाई का टेंडर जारी किया गया है। अनुमानित लागत 14 लाख 55 हजार रुपये तय की है। कहा है कि यह अनुबंध एक वर्ष के लिए होगा। रुद्र सागर उज्जैन के उन पौराणिक सप्त सागरों में शामिल है, जिनका शास्त्रों में विशेष उल्लेख है। इसके केंद्र में सम्राट विक्रमादित्य की अपने नौ रत्नों के साथ विशाल प्रतिमा स्थापित है, जो उज्जैन के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है। सागर की दीवारों पर सम्राट विक्रमादित्य काल के प्रतीक चिन्ह और 32 पुतलियां इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती हैं। प्रशासन का यह नैतिक और प्रशासनिक दायित्व है कि महाकाल मंदिर के इतने करीब स्थित इस जल निकाय को सदैव स्वच्छ रखा जाए। विशेष रूप से 2022 में महाकाल महालोक के निर्माण के बाद यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। नगर निगम द्वारा अब वार्षिक सफाई का टेंडर जारी करना इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस समस्या का स्थाई समाधान ढूंढने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों का मानना है कि केवल टेंडर जारी करने से काम नहीं चलेगा; सफाई की निरंतरता और गुणवत्ता की निगरानी करना भी उतना ही आवश्यक है ताकि करोड़ों की लागत से संवारा गया यह पौराणिक सागर अपनी पहचान न खोए। करोड़ों का बजट, फिर भी उपेक्षा का शिकारहैरानी की बात यह है कि बीते डेढ़ दशकों में रुद्र सागर के सुंदरीकरण और सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। 2022 से पहले यह क्षेत्र घोर उपेक्षा का शिकार था। महालोक के निर्माण के बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन अनुभव यह रहा है कि रुद्र सागर साल में केवल दो से चार महीने ही साफ रह पाता है। शेष समय यह जलकुंभी की मोटी चादर से ढंका रहता है, जो न केवल जलीय पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि आने वाले श्रद्धालुओं के अनुभव को भी खराब करती है।  

सीएम की घोषणा: 1 लाख रुपये के पुरस्कार वाले टॉपर छात्रों को सरकार दिखाएगी IPL मैच

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने 10वीं और 12वीं के बोर्ड नतीजों में मेरिट में आए छात्रों को आईपीएल 2026 का मैच दिखाने का फैसला किया है। यह छात्र 10 मई को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुर के बीच मुकाबले का लुत्फ उठाएंगे। छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी को इस संबंध में आदेश जारी किया है। साल 2026 में छत्तीसगढ़ बोर्ड में 10वीं में करीब 3 लाख 21 हजार छात्रों ने परीक्षा दी थी, जिसमें 77.15 प्रतिशत छात्र पास हुए। इनमें 42 छात्र मेरिट में आए, जिनमें 26 लड़कियां शामिल हैं। दूसरी ओर, 12वीं की परीक्षा में करीब 2.44 लाख छात्र शामिल हुए, जिनमें 83.04 प्रतिशत सफल रहे थे। 1 लाख तक मिलेगा इनाम मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम जारी होने के बाद सफल हुए सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को राज्य के शिक्षा तंत्र, शिक्षकों और अभिभावकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया था। मुख्यमंत्री साय ने इस सफलता को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया था। सरकार ने टॉपर्स को प्रतिभावान छात्र प्रोत्साहन योजना के तहत एक से डेढ़ लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा भी की है। सभी कलेक्टरों को निर्देश इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किए गए हैं। कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं मेरिट में आने वाले छात्रों को मैच दिखाने लाने के लिए व्यवस्था की जाए। जारी लेटर में कहा गया है कि मेरिट लिस्ट में आने वाले छात्रों के साथ एक शिक्षक को 10 मई तक सुबह 10 बजे रायपुर लाने की व्यवस्था करनी होगी।     मेरिट में आने वाले छात्रों को सरकार का तोहफा     छत्तीसगढ़ बोर्ड में टॉप आने वाले छात्र देखेंगे मैच     10 मई को रायपुर में होगा आईपीएल का मैच     सभी जिला कलेक्टरों को दिए गए निर्देश भूपेश सरकार ने कराई थी हेलीकॉप्टर की सैर इससे पहले भूपेश बघेल की सरकार ने मेरिट आने वाले छात्रों को हेलीकॉप्टर में यात्रा कराई थी। मेरिट आने वाले छात्रों को हर साल सरकार की तरफ से हेलीकॉप्टर की सैर कराई जाती थी।  

लग्जरी वृद्धाश्रम में खाली कमरों की स्थिति, 80,000 रुपए तक का किराया रोक रहा बुजुर्गों को

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कुछ महीने पहले एक पेड वृद्धाश्रम की शुरुआत हुई थी। यह वृद्धाश्रम आधुनिक सुविधाओं से लैस था। उद्घाटन के इतने दिनों बाद भी इस वृद्धाश्रम में रहने वाला कोई नहीं है। सिर्फ दो बुजुर्गों को छोड़कर यह आधुनिक वृद्धाश्रम पूरी तरह से खाली है। ऐसे में इसकी व्यावहारिकता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। 56 बुजुर्ग नागरिकों को रहने की है व्यवस्था इस हाईटेक वृद्धाश्रम में 34 कमरे हैं। इन 34 कमरों में 56 बुजुर्ग नागरिक रह सकते हैं। कमरों के विकल्पों में सिंगल कमरों से लेकर सुइट तक शामिल हैं, जिन्हें बुजुर्गों को अलग-अलग स्तर पर आराम और प्राइवेसी देने के लिए डिजाइन किया गया है। पहले आओ, पहले पाओ की सुविधा वहीं, इस वृद्धाश्रम में बुकिंग पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होती है। उद्घाटन के बाद से, दो कमरों को छोड़कर बाकी सभी कमरे खाली पड़े हैं। कमरे पूरी तरह से तैयार हैं लेकिन इन्हें लेने वाला कोई नहीं है। जनवरी में हुआ था उद्घाटन दरअसल, इसका उद्घाटन इसी साल जनवरी महीने में सीएम मोहन यादव ने किया था। इसके संचालन का जिम्मा एक एनजीओ के पास है। अपनी जरूरत के हिसाब से बुजुर्ग बुकिंग कर सकते हैं। खर्च अधिक होने की वजह से खाली पेड वृद्धाश्रम का कैंपस भोपाल के लिंक रोड पर नंबर 3 पर है। यह 5.25 एकड़ में फैला है। साथ ही इसमें काफी अत्याधुनिक सुविधाएं भी हैं। मगर रिस्पॉन्स कम होने की वजह यह है कि यह किसी बुजुर्ग को रखने का खर्च बहुत ज्यादा है। एक व्यक्ति के लिए हर महीने 45,000 रुपए से ज्यादा का खर्च आता है, जिसे कई लोग अपनी पहुंच से बाहर मानते हैं। 24 करोड़ रुपए की लागत से हुआ था निर्माण यहां रहने वाले लोगों की संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने अब इस बुजुर्गों के आश्रय को अपने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जरिए चलाने का प्रस्ताव रखा है। इसी विभाग ने 24 करोड़ रुपए की लागत से इस विशाल वृद्धाश्रम का निर्माण करवाया था। सरकार इसे न लाभ, न हानि के आधार पर चलाने की योजना बना रही है, जिससे प्रति व्यक्ति रहने का खर्च कम हो जाएगा और ज्यादा से ज्यादा बुजुर्ग नागरिक इसकी ओर आकर्षित होंगे। एक अधिकारी, सामाजिक न्याय विभाग अत्याधुनिक है वृद्धाश्रम इस आश्रय गृह में एसी कमरे, इंटरटेनमेंट और आराम की जगहें, टहलने के लिए पक्का रास्ता, फिजियोथेरेपी सेंटर, लॉन्ड्री, किचन, मेडिकल रूम और रोजमर्रा की जरूरत की सारी चीजें हैं। साथ ही बुजुर्गों की देखभाल करने वाला स्टाफ भी उपलब्ध है। मुनेश्वर कुमार

मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल की वन एवं वन्य जीव संरक्षण प्रयासों की सराहना

भोपाल  मंडला जिले स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व में मलेशियाई वन विभाग का 7 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तीन दिवसीय अध्ययन भ्रमण पर पहुँचा है। मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल ने कान्हा में संचालित संरक्षण प्रयासों की सराहना करते हुए अपने देश में भी ऐसे मॉडल अपनाने में रुचि व्यक्त की। एपीसीसीएफ श्री एल. कृष्णमूर्ति एवं फील्ड डायरेक्टर श्री रवीन्द्र मणि त्रिपाठी ने प्रतिनिधिमंडल को अनाथ शावकों के पुनर्वास, ग्राम पुनर्स्थापन तथा पर्यटन प्रबंधन गतिविधियों का फील्ड भ्रमण कराया। मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल के भ्रमण के पहले दिन खटिया ईको सेंटर में वन्यजीव प्रबंधन, संरक्षण रणनीतियों, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों पर विस्तृत चर्चा सत्र आयोजित किया गया। चर्चा सत्र में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. एच.एस. नेगी, एपीसीसीएफ श्री एल. कृष्णमूर्ति, फील्ड डायरेक्टर श्री रवीन्द्र मणि त्रिपाठी, डिप्टी डायरेक्टर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। विशेषज्ञों द्वारा कान्हा टाइगर रिजर्व की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों एवं सफल संरक्षण मॉडलों पर प्रस्तुतियाँ दी गईं।  

सामाजिक समरसता और जनकल्याण का बना भव्य उत्सव

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर सामाजिक समरसता और जनकल्याण का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 8 मई को प्रदेशभर में आयोजित भव्य सामूहिक विवाह समारोहों में 1385 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे, जहां एक साथ गूंजती शहनाइयों ने पूरे प्रदेश को उत्सवमय बना दिया। यह आयोजन सामाजिक एकता, समानता और मानवीय संवेदनाओं का विराट उत्सव बनकर सामने आया। राजधानी रायपुर से लेकर सुदूर वनांचल तक हर जिले में आयोजित इन समारोहों में हजारों परिवारों की सहभागिता देखने को मिली। पारंपरिक रीति-रिवाजों, सादगी और गरिमा के साथ सम्पन्न हुए इन विवाहों ने यह संदेश दिया कि शासन की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने नवविवाहित जोड़ों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों की वर्षों पुरानी चिंता को दूर किया है।  महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि यह योजना केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि विवाह को गरिमामय, सुव्यवस्थित और सम्मानजनक स्वरूप भी प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि सभी जिलों में प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां की गईं, जिसमें सुसज्जित विवाह स्थल, गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गईं, ताकि हर नवदंपति और उनके परिजनों को एक सुखद अनुभव मिल सके। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3200 विवाह का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें से 347 विवाह पूर्व में संपन्न हो चुके थे, जबकि 8 मई के राज्यव्यापी आयोजन में 1385 विवाह संपन्न हुए। इस प्रकार अब तक कुल 1732 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंध चुके हैं, जो लक्ष्य की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता है। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी समावेशी भावना रही। हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध सहित विशेष पिछड़ी जनजातियों के जोड़े अपने-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह सूत्र में बंधे। यह दृश्य छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक बन गया। योजना के अंतर्गत प्रत्येक नवविवाहित दंपति को 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान के साथ कर सकें। इसके साथ ही विवाह के दौरान आवश्यक सामग्री एवं अन्य व्यवस्थाएं भी शासन द्वारा सुनिश्चित की जाती हैं। उल्लेखनीय है कि 10 फरवरी 2026 को आयोजित वृहद सामूहिक विवाह समारोह में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में 6412 जोड़े विवाह बंधन में बंधे थे, जिसने सामाजिक समरसता के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए छत्तीसगढ़ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ, जो पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। प्रदेशभर में आयोजित यह आयोजन इस बात का सशक्त प्रमाण है कि संवेदनशील नेतृत्व, प्रभावी योजनाएं और जनभागीदारी मिलकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना महिला सम्मान, सामाजिक समानता और सामूहिक उत्तरदायित्व का प्रतीक बनकर छत्तीसगढ़ के विकास की नई गाथा लिख रही है।

बाल अधिकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता : डॉ. शर्मा

भोपाल  मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने शुक्रवार को पदभार ग्रहण किया। उन्होंने आयोग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ बैठक कर बाल अधिकारों के संरक्षण और बच्चों से जुड़े मामलों के त्वरित निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। डॉ. निवेदिता शर्मा ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा, सुरक्षा एवं उनके समग्र विकास के लिए आयोग संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा। उन्होंने बाल संरक्षण से संबंधित शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किए जाने तथा बच्चों के हितों से जुड़े मामलों में समन्वय और सक्रियता के साथ कार्य किए जाने पर जोर दिया। बैठक में आयोग की कार्यप्रणाली, बाल संरक्षण से संबंधित योजनाओं एवं विभिन्न प्रकरणों की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने आयोग की गतिविधियों और कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की।