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मोहन यादव के निर्देश: सरकारी निगम और प्राधिकरणों में नियुक्तियों के लिए BJP कार्यकर्ताओं की लिस्ट तैयार

इंदौर  दो दशक से अधिक की सत्ता में अब तक भाजपा के आम कार्यकर्ताओं ने सत्ता की रेवड़ी का स्वाद तक नहीं चखा, लेकिन मोहन सरकार में उनकी लॉटरी खुलने वाली है। मुख्यमंत्री की विशेष रुचि के चलते जिला स्तर पर बनने वाली समिति सहकारी समितियों का गठन होने जा रहा है। प्रदेश संगठन के निर्देश पर जिला इकाई ने सभी विधायकों से नाम मांग लिए हैं। माना जा रहा है कि इस माह सभी घोषणाएं हो जाएंगी। भाजपा की सत्ता और संगठन में नियुक्तियों का सिलसिला जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चाहते थे कि सरकारी के सभी निगम, मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्ति हो जाए जिससे पार्टी नेताओं को भी सरकार के होने का अहसास रहे। उनके लगातार प्रयास और संगठन से चले लंबे मंथन के बाद बड़ी संख्या में नेताओं को उपकृत किया गया और बची हुई नियुक्तियां भी पाइप लाइन में है। जहां पर विवाद की स्थिति है उनका निराकरण कर वे घोषणाएं हो जाएगी। एक सप्ताह तक दें पूरी सूची ये नियुक्तियां बड़े नेताओं की हो रही है, लेकिन जल्द ही अब आम कार्यकर्ता को भी उपकृत करने की तैयारी है ताकि उन्हें भी लगे कि वे सत्ताधारी संगठन से ताल्लुक रखते हैं। इसको लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने हाल ही में सभी जिला अध्यक्षों को 25 से अधिक समितियों में नियुक्तियों को लेकर नाम की फेहरिस्त मांग ली है। इसके चलते नगर भाजपा अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने सभी विधायकों के अलावा कोर कमेटी के सदस्यों से कार्यकर्ताओं के नाम मांग लिए हैं। एक सप्ताह में पूरी सूची बनाकर देने का कहा गया है जिसमें सभी नेताओं का समन्वय होना चाहिए। ये हैं प्रमुख समितियां जिला स्तर पर बनने वाली समितियों में प्रमुख रूप से आरटीओ समिति, उद्यानिकी विभाग की समिति, जेल विभाग में अशासकीय संदर्शक समिति व विजिटर बोर्ड, पशु क्रूरता निवारण समिति, जिला पशु रोगी कल्याण समिति, मछुआ कल्याण व मत्स्य समिति, जिला शहरी विकास अभिकरण में प्रबंधकारिणी व निगरानी समिति, आइटीआइ में जिला कौशल समिति, शिक्षा विभाग में जिला स्तरीय अनुदान व निर्णायक समिति, खाद्य विभाग की सतर्कता समिति, जिला योजना समिति, अंत्योदय समिति, कॉलेज में जनभागीदारी समिति, पुलिस शिकायत बोर्ड, जिला व्यापार एवं उद्योग बोर्ड, सामाजिक न्याय व निशक्त जन समिति, खेल प्रशिक्षण समिति, जिला जल व स्वच्छता समिति, खनिज निधि समिति, मुख्यमंत्री ऋण माफी योजना, सिटी फॉरेस्ट योजना सहित कुल 25 समितियां हैं। अधिकांश समितियां उमा भारती के मुख्यमंत्री रहते बनी थीं। उसके बाद शिवराज सिंह चौहान के सीएम रहते कुछ समितियों का ही गठन हुआ था। हर बार कार्यकर्ताओं के नाम बुलाए गए, लेकिन घोषणा नहीं हो सकी। विधायक आधारित हुआ संगठन एक समय था जब संगठन आधारित सत्ता होती थी, लेकिन अब उल्टा हो गया है। सत्ता हो या संगठन की नियुक्ति उसमें विधायकों की पसंद से दिए गए नामों को ही उपकृत किया जाता है। बूथ से लेकर मंडल अध्यक्ष तक उनके समर्थक रहते हैं तो बची कसर अब सत्ता में भी पूरी हो जाएगी। उनके दिए गए नामों को ही पार्टी सत्ता में भी उपकृत करेगी। उन कार्यकर्ताओं की कोई पूछपरख नहीं है जो कि गुटबाजी में न पड़ कर संगठन के लिए समर्पित है। मजेदार बात ये है कि विधायक ऐसे कार्यकर्ताओं का विरोध कर हाशिए पर पहुंचा देते हैं। फिर मांगे एल्डरमैन के नाम वैसे तो महापौर पुष्यमित्र भार्गव के नेतृत्व वाली नगर निगम परिषद को एक साल ही शेष रह गया है। इस पर अब पार्टी एल्डरमैन की नियुक्ति करने जा रही है। इसको लेकर पहले भी दो बार नाम लिए जा चुके हैं, लेकिन संगठन में कुछ नाम ऐसे थे जो पदाधिकारी बन गए। इस वजह से फिर से सूची मांगी गई है। 12 पदों को लेकर विधायक चाहते हैं कि उनकी पसंद से ही बने, लेकिन सांसद शंकर लालवानी और महापौर भार्गव भी अपने समर्थकों को उपकृत करना चाहते हैं। उनका तर्क है कि एक-एक एल्डरमैन विधायकों की पसंद से हो जाए तो बाकी छह एल्डरमैन के लिए हमारे नामों को तवज्जो दी जाना चाहिए।

लखनऊ में जमीन हुई महंगी: अनंत नगर में दरें बढ़ीं, 200 वर्ग मीटर प्लॉट पर 7 लाख से ज्यादा का अतिरिक्त बोझ

लखनऊ राजधानी लखनऊ में अपना फ्लैट लेना और आसान हो गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने अपनी अफोर्डेबल हाउसिंग योजना अटल नगर को और अधिक बजट फ्रेंडली बना दिया है। अब लोग यहां 10 वर्ष की आसान किस्तों में फ्लैट ले सकेंगे, वह भी पहले से कम ब्याज दर पर। लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने लोगों की मांग पर इसका आदेश जारी कर दिया। छूट तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि देवपुर पारा स्थित अटल नगर योजना में 12 से लेकर 19 मंजिल के 15 टावरों में कुल 2,496 फ्लैट्स हैं। 30 वर्गमीटर से लेकर 54.95 वर्गमीटर क्षेत्रफल के इन फ्लैटों की कीमत लगभग 9.83 लाख रुपये से शुरू होती है। यहां अधिकांश फ्लैटों का लॉटरी से आवंटन किया जा चुका है। 630 फ्लैटों के लिए 18 अप्रैल से 17 मई, 2026 के मध्य ऑनलाइन पंजीकरण खोला गया है। इसमें 01 बीचके के 539 और 02 बीचके के 91 फ्लैट शामिल हैं। टॉवरों में लगभग 2500 फ्लैट बनाए गए हैं अटलनगर योजना में लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अनंत नगर योजना में जमीन की कीमतें बढ़ा दी हैं। पहले यहां जमीन की कीमत 41150 रुपये प्रति वर्गमीटर थी। जिसे अब बढ़ाकर 44,731 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया है। एक झटके में प्रति वर्ग मीटर की कीमत में 3,581 रुपये का इजाफा किया गया है। 200 वर्ग मीटर प्लॉट पर 7.16 लाख ज्यादा चुकाने होंगे कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर मध्यम वर्ग पर पड़ा है। 200 वर्ग मीटर का भूखंड खरीदने वालों को अब पहले के मुकाबले करीब 7,16,200 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। जिन्हें पहले प्लाट आवंटित हो चुका है, उन्हें पुरानी दर पर ही भूखण्ड मिलेगा। नई बुकिंग कराने वालों का नई दर देनी होगी। व्यावसायिक भूखंड भी हुए महंगे आवासीय के दाम बढ़ने से एलडीए की व्यावसायिक भूखंडों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो गई है। पहले 82,300 रुपये प्रति वर्ग मीटर दर प्रस्तावित थी। लेकिन अब यह बढ़कर 89,462 रुपये हो गयी है। यानी 7,162 का इजाफा हुआ है। छह लेन की सड़क बनेगी लखनऊ। लखनऊ में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सोमवार को योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने अहम प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत आउटर रिंग रोड (किसान पथ) के रैथा अंडरपास से पीएम मित्र पार्क (टेक्सटाइल पार्क) तक 14.280 किलोमीटर लंबाई की छह लेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा आईआईएम लखनऊ से आउटर रिंग रोड रैथा अंडरपास मार्ग को दो लेन चौड़ा किया जाएगा। चौड़ीकरण का काम 8.70 किलोमीटर लंबाई में होगा। लोक निर्माण विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक परियोजना की पुनरीक्षित लागत ₹546 करोड़ 51 लाख 83 हजार रुपये आंकी गई है। यह परियोजना पीएम मित्र पार्क को बेहतर कनेक्टिविटी देगी, जिससे औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके अलावा सड़क अवसंरचना में सुधार से यातायात सुगमता बढ़ेगी और आमजन को आवागमन में राहत मिलेगी।

जल गंगा संवर्धन अभियान: पुष्पराजगढ़ में नहरों को मजबूती देने का प्रयास

सफलता की कहानी जल गंगा संवर्धन अभियान-पुष्पराजगढ़ में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ से हो रहा है नहर सुदृढ़ीकरण अंतिम छोर तक पानी पहुंचने से बदलेगी तस्वीर भोपाल  अनूपपुर जिले का आदिवासी बहुल विकासखंड पुष्पराजगढ़ अब कृषि विकास की नई दिशा की ओर अग्रसर है। ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के अंतर्गत झिलमिल जलाशय की नहरों के निर्माण, सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार कार्य से यहाँ किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आयेगा। वर्षों से इस क्षेत्र के किसान वर्षा आधारित खेती या सीमित जल स्त्रोतों पर निर्भर थे। नहर प्रणाली की जर्जर स्थिति के कारण जल अंतिम छोर तक नहीं पहुँच पाता था, जिससे सिंचाई में बाधा आती थी। अब जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत झिलमिल जलाशय के मुख्य नहर तथा माइनर नहर के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य तेजी से प्रगति पर है। करीब 19 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से यह कार्य पूर्ण होने पर 5.04 एमसीएम क्षमता वाले जलाशय का जल अंतिम छोर के खेतों तक पहुँच सकेगा। इससे सिंचाई व्यवस्था में स्थायी सुधार होगा। लगभग 905 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता को सुदृढ़ बनाया जा रहा है। करीब 11 किलोमीटर लंबा नहर तंत्र विकसित किया जा रहा है। इस योजना से सीधे तौर पर बीजापुरी, पीपाटोला, कछरा टोला और झिलमिल गाँवों के लगभग एक हजार किसान परिवार लाभान्वित होंगे। उनकी आय में वृद्धि और आजीविका में स्थिरता आयेगी। अनूपपुर कलेक्टर हर्षल पंचोली परियोजना की नियमित निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने जल संसाधन विभाग को निर्देश दिए हैं कि कार्य गुणवत्ता के साथ समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए। स्थानीय किसानों में इस परियोजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। किसान जगत सिंह, ठाकुर सिंह और कमलेश्वर सिंह सहित कई कृषकों का कहना है कि नहरों के सुधार से अब अंतिम खेत तक पानी पहुँचने की समस्या समाप्त हो जाएगी, जिससे वे दोनों मौसमों में बेहतर खेती कर सकेंगे। पुष्पराजगढ़ में झिलमिल जलाशय से प्रवाहित यह जल न केवल खेतों को सिंचित करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा। ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के तहत यह पहल भविष्य में अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है। 

बंगाल में बवंडर, लेकिन असली कमाल सीएम योगी का; स्ट्राइक रेट ने दी झकझोरने वाली जीत

लखनऊ  पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं, जिसमें टीएमसी का सूपड़ा साफ हो गया. बीजेपी की इस कदर आंधी चली है कि खुद ममता बनर्जी अपनी भवानीपुर सीट तक हार गईं. इस बार के चुनाव में बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. खुद पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह से लेकर तमाम दिग्गज नेता चुनाव प्रचार के लिए पश्चिम बंगाल पहुंचे हुए थे. हाालंकि सबकी नजर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर टिकी हुई थी कि सीएम योगी ने जहां-जहां चुनाव प्रचार किया, वहां बीजेपी का क्या हाल रहा. बीजेपी ने उन सीटों पर जीत हासिल की है या फिर हार का सामना करना पड़ा. हालांकि जो नतीजे आए हैं, उससे यह जाहिर है कि सीएम योगी का स्ट्राइक रेट बंगाल चुनाव में भी जबरदस्त रहा है. सीएम योगी ने कुल 22 विधानसभा सीटों पर प्रचार किया था, उनमें से 18 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की है।  जानिए किस सीट पर सीएम योगी ने किया चुनाव प्रचार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोनामुखी, नंदकुमार, कांथी दक्षिण, बाराबनी, रामपुरहाट, बोलपुर, माथाभंगा, धुपगुड़ी, जॉयपुर, गारबेटा, जोरासांको, चकदहा, उदयनारायणपुर, नबद्वीप, कटवा, बागदा, धानेखाली और राजारहाट गोपालपुर विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाएं की. इसके अलावा उन्होंने बांकुड़ा, कल्याणी और दमदम में रोड शो किया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए थे।  किन-किन सीटों पर बीजेपी ने हासिल की जीत सोनामुखी में बीजेपी दिबाकर घरामी, नंदकुमार से बीजेपी के खानरा निर्मल, कांथी दक्षिण से अरूप कुमार दास, बाराबनी से बीजेपी के अरजित रॉय, रामपुरहाच से बीजेपी के धुर्वा साहा, माथाभांगा से बीजेपी के निसिथ प्रामाणिक, धुपगुड़ी से बीजेपी के नरेश रॉय, बांकुडा से बीजेपी के नीलाद्री शेखर दाना, पिंगला से बीजेपी के स्वागत मन्ना, जॉयपुर से बीजेपी के बिस्वजीत महतो, जोरासांको से बीजेपी के विजय झा, चकदहा से बीजेपी के बंकिम चंद्र घोष, नबद्वीप से बीजेपी के श्रुति शेखर गोस्वामी, कटवा से बीजेपी के कृष्णा घोष, बागदा से बीजेपी के सोमा ठाकुर, कल्याणी से बीजेपी के अनुपम बिश्वास, दमदम से बीजेपी के अरजित बख्शी, राजारहाट गोपालपुर से तरुण ज्योति तिवारी जीत गए।  कहां हुई हार धानेखली विधानसभा सीट पर टीएमसी उम्मीदवार असिमा पात्रा ने बीजेपी उम्मीदवार को 13057 वोटों से हराया है. वहीं बोलपुर विधानसभा सीट पर टीएमसी के चंद्रनाथ सिन्हा ने बीजेपी के दिलीप घो, को 13188 वोटों से हरा दिया। 

₹1500 सीधे खातों में! लाड़ली बहनों के लिए बड़ी राहत, जानें तारीख और प्रक्रिया

भोपाल  मध्यप्रदेश की करोड़ों महिलाओं के लिए एक बार फिर राहत और उम्मीद की खबर है। राज्य की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना की 36वीं किस्त को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब खत्म होने की ओर है। मई महीने की यह किस्त खास इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि इस बार लाभार्थियों के खातों में बढ़ी हुई राशि 1500 रुपये भेजे जाने की तैयारी है। दरअसल, प्रदेश सरकार आमतौर पर हर महीने की 10 तारीख तक यह राशि ट्रांसफर करती रही है, लेकिन इस बार 10 मई को रविवार होने के कारण भुगतान में हल्का बदलाव संभव है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार 11 से 15 मई के बीच कभी भी यह किस्त जारी की जा सकती है, हालांकि अंतिम तारीख का आधिकारिक ऐलान अभी बाकी है। पिछले महीने अप्रैल में भी राशि 12 तारीख को जारी की गई थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि भुगतान तिथि परिस्थितियों के अनुसार रखी जा रही है। इस योजना की शुरुआत 5 मार्च 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी, आज प्रदेश की सामाजिक सुरक्षा की मजबूत कड़ी बन चुकी है। करीब 1 करोड़ 29 लाख से अधिक महिलाएं इस योजना का लाभ उठा रही हैं, जो इसे देश की सबसे व्यापक महिला कल्याण योजनाओं में शामिल करता है। सरकार का उद्देश्य न सिर्फ आर्थिक सहायता देना है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना भी है। योजना के तहत विवाहित महिलाओं के साथ-साथ विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को भी शामिल किया गया है। 21 से 60 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाएं, जिनका बैंक खाता आधार से लिंक है और DBT सक्रिय है, वे इस योजना के दायरे में आती हैं। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में पारदर्शिता के साथ पहुंचे। भुगतान की स्थिति जानने के लिए सरकार ने ऑनलाइन सुविधा भी उपलब्ध कराई है, जिससे महिलाएं घर बैठे ही अपनी किस्त का स्टेटस चेक कर सकती हैं। आवेदन क्रमांक या समग्र आईडी और ओटीपी के माध्यम से यह जानकारी कुछ ही मिनटों में प्राप्त की जा सकती है। कुल मिलाकर, लाड़ली बहना योजना अब केवल एक आर्थिक सहायता योजना नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की महिलाओं के आत्मविश्वास और सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुकी है। मई की 36वीं किस्त के साथ एक बार फिर सरकार की इस प्रतिबद्धता पर मुहर लगने जा रही है।

10 मई को दमोह में पीएम मोदी, स्वावलंबी गोशाला की आधारशिला रखेंगे

दमोह मध्य प्रदेश के दमोह जिले के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर प्रदेश के दौरे पर आ रहे हैं। इस बार वे किसी चुनावी रैली या सभा के लिए नहीं आ रहे हैं पीएम मोदी इस बार एक बेहद खास काम के लिए दमोह आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक 10 मई 2026 को पीएम मोदी पथरिया विधानसभा क्षेत्र में आएंगे। दमोह जिले के पथरिया में एक विशाल स्वावलंबी गोशाला बनने जा रही है। यह गोशाला कोई आम गोशाला नहीं होगी, बल्कि इसे आधुनिक और आत्मनिर्भर मॉडल पर तैयार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इसी गोशाला का भूमि पूजन करेंगे और इसकी नींव रखेंगे। 517 एकड़ जमीन पर तैयार होगी इस पूरी योजना के लिए कुल 517 एकड़ जमीन इसके लिए चुनी गई है। ये जमीन विकासखंड पथरिया के तीन गांवों रानगिर, कल्याणपुरा और बिजोरी में है।इतनी बड़ी जमीन पर गोशाला बनने से न केवल गायों को बेहतर ठिकाना मिलेगा, बल्कि इलाके के विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी।हाल ही में आईएएस प्रताप नारायण यादव और पुलिस अधीक्षक (SP) श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने खुद मौके पर जाकर जमीन का मुआयना किया।  मुंबई की कंपनी को मिला है जिम्मा मध्य प्रदेश गौसंबर्धन बोर्ड ने इस गोशाला के निर्माण के लिए मुंबई की एक प्रतिष्ठित कंपनी को आदेश जारी कर दिए हैं।पशुपालन विभाग के उपसंचालक डॉ. बृजेंद्र असाटी ने बताया कि कंपनी को सख्त निर्देश दिए गए हैं। साथ ही 10 मई से पहले जमीन की फेंसिंग का काम पूरा हो जाने की बात कही है। इसके अलावा कम से कम 200 गायों के रहने के लिए अस्थायी शेड तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सुरक्षा और तैयारियों का जायजा दमोह के एसपी ने साफ किया है कि भूमि पूजन का कार्यक्रम प्रधानमंत्री के हाथों होना है। इसलिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। जिले के बड़े अधिकारी लगातार पथरिया का दौरा कर रहे हैं ताकि व्यवस्थाओं में कोई कमी न रह जाए। अंतिम चरण में चल रही तैयारियां स्वीकृत भूमि पर गोशाला के निर्माण और संचालन के लिए मेसर्स श्रीराम मानेक एग्रो प्रोडक्टस प्राइवेट लिमिटेड मुंबई को मध्य प्रदेश गौसंबर्धन बोर्ड भोपाल द्वारा आदेशित किया गया है। दिए गए निर्देश इस संबंध में उपसंचालक पशुपालन डॉ. बृजेंद्र असाटी ने बताया कि मध्य प्रदेश गौसंबर्धन बोर्ड द्वारा गोशाला के संचालन के लिए नियुक्त कंपनी को समय सीमा में भूमि की फेंसिंग और अस्थायी 200 गौवन्श की गोशाला का निर्माण 10 मई 2026 के पहले किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया जायजा एसपी ने कहा कि, इस गोशाला का भूमि पूजन वैसे तो प्रधानमंत्री के सानिध्य में होना प्रस्तावित है, जिसकी तैयारियां प्रक्रिया के अंतिम चरण में चल रही हैं। इसी के चलते कलेक्टर के साथ – साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और समय पर निर्धारित काम निपटाने के साथ साथ तैयारियों को लेकर जरूरी दिशा – निर्देश दिए। पीएम मोदी के पिछले दौरे प्रधानमंत्री मोदी का मध्य प्रदेश से पुराना लगाव रहा है। इससे पहले वे 17 सितंबर 2025 को अपने 75वें जन्मदिन के मौके पर प्रदेश आए थे। उस दौरान उन्होंने कई बड़े काम किए थे।     धार दौरा: बदनावर के भैसोला गांव में देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास किया था।     महिला सशक्तिकरण: 'स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार' अभियान की शुरुआत की थी। साथ ही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत महिलाओं को पैसे ट्रांसफर किए थे।     भोपाल दौरा (31 मई 2025): रानी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती पर भोपाल आए थे। इंदौर मेट्रो के एक खास कॉरिडोर का उद्घाटन किया था।

सीएम योगी ने बढ़ाया मुआवजा, यूपी के लोगों को मिलेगा दोगुना फायदा

लखनऊ  यूपी में किसानों के हित से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है. लंबे समय से बिजली की हाईटेंशन लाइनों से प्रभावित किसानों की जो शिकायतें थीं, अब उन पर सरकार ने ठोस कदम उठाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मुआवजा व्यवस्था को पूरी तरह बदलते हुए किसानों को सीधा आर्थिक लाभ देने का फैसला किया गया है।  अब 765, 400, 220 और 132 केवी की हाईटेंशन लाइनों से प्रभावित जमीन पर पहले से कहीं ज्यादा मुआवजा मिलेगा. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि जहां टावर (खंभे) खड़े किए जाते हैं, उस जमीन के लिए किसानों को अब जमीन की कीमत का 200% यानी दोगुना मुआवजा मिलेगा. वहीं, जिन खेतों के ऊपर से बिजली की लाइनें गुजरती हैं, उस हिस्से (राइट ऑफ वे/कॉरिडोर) के लिए 30% मुआवजा दिया जाएगा।  क्यों जरूरी था यह बदलाव दरअसल, बिजली की बड़ी ट्रांसमिशन लाइनों के लिए जमीन की जरूरत पड़ती है. टावर लगाने के साथ-साथ उनके बीच से गुजरने वाली तारों के नीचे भी जमीन का उपयोग सीमित हो जाता है. किसान उस जमीन पर न तो निर्माण कर सकते हैं और न ही कई बार पूरी तरह खेती कर पाते हैं. पहले इस नुकसान के बदले किसानों को या तो बहुत कम मुआवजा मिलता था या कई मामलों में बिल्कुल नहीं मिलता था. यही वजह थी कि कई परियोजनाओं में स्थानीय स्तर पर विरोध भी देखने को मिलता था. ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि सरकार ने इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू की है, ताकि किसानों के साथ न्याय हो और परियोजनाएं भी बिना रुकावट आगे बढ़ सकें।  पहले क्या था नियम, अब क्या बदला अगर पुराने सिस्टम की बात करें, तो 2018 से पहले टावर के नीचे आने वाली जमीन पर अक्सर कोई स्पष्ट मुआवजा तय नहीं था. कई मामलों में किसानों को उचित भुगतान नहीं मिल पाता था. 2018 में इसमें सुधार किया गया और टावर बेस के नीचे जमीन की कीमत का करीब 85% मुआवजा देने का प्रावधान किया गया. लेकिन इसके बावजूद एक बड़ी कमी बनी रही लाइन के नीचे आने वाली जमीन (कॉरिडोर) के लिए कोई मुआवजा नहीं था. अब नई व्यवस्था में दोनों हिस्सों को शामिल किया गया है. टावर के नीचे जमीन का 200% (दोगुना) मुआवजा दिया जाएगा इसी तरह लाइन कॉरिडोर (तारों के नीचे) 30% मुआवजा दिया जाएगा. यानी अब किसान को उसकी जमीन के हर प्रभावित हिस्से का भुगतान मिलेगा।  कैसे तय होगा मुआवजा  मुआवजा तय करने के लिए जिलाधिकारी द्वारा निर्धारित सर्किल रेट को आधार बनाया जाएगा. इसका मतलब है कि हर जिले में जमीन की जो सरकारी दर तय होती है, उसी के अनुसार भुगतान किया जाएगा. इससे मुआवजा प्रक्रिया पारदर्शी और एकसमान बनेगी. साथ ही विवाद की संभावना भी कम होगी. सरकार के मुताबिक, इस नए फैसले से किसानों को पहले के मुकाबले 21% से 33% तक ज्यादा लाभ मिलेगा. अधिकारियों का कहना है कि योगी सरकार के इस फैसले को अगर सरल भाषा में समझा जाए तो जहां पहले कम या कोई मुआवजा नहीं मिलता था, अब वहां सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा. जमीन का उपयोग भले सीमित हो, लेकिन उसका मुआवजा मिलेगा. लंबे समय से चल रही असंतोष की स्थिति खत्म होगी.  यह फैसला खास तौर पर उन किसानों के लिए राहत लेकर आया है, जिनकी जमीन से होकर बड़ी बिजली लाइनें गुजरती हैं।   क्या होगा इसका असर सरकार का मानना है कि इस फैसले का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे बिजली परियोजनाओं को भी गति मिलेगी. पहले जमीन से जुड़े विवादों और विरोध के कारण कई प्रोजेक्ट्स में देरी होती थी. अब जब किसानों को उचित मुआवजा मिलेगा, तो उनकी सहमति भी आसानी से मिलेगी. इससे ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का काम तेजी से पूरा हो सकेगा, जिसका सीधा फायदा बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मिलेगा. ऊर्जा मंत्री ने बताया कि यह नई व्यवस्था भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है. देश के कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह की मुआवजा नीति लागू की जा रही है. उनका कहना है कि यह फैसला एक तरह से दो अहम जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है एक तरफ किसानों के अधिकार और दूसरी तरफ विकास की जरूरत. अक्सर देखा जाता है कि बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन लेने पर विवाद होता है. लेकिन अगर मुआवजा सही और समय पर मिले, तो यह टकराव काफी हद तक कम हो सकता है. उनका कहना है कि सरकार ने इस फैसले के जरिए यही संदेश देने की कोशिश की है कि विकास के साथ-साथ किसान हितों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।  जमीनी असर कब दिखेगा नई मुआवजा व्यवस्था लागू होने के बाद इसका असर धीरे-धीरे जिलों में दिखाई देगा. जहां भी नई ट्रांसमिशन लाइनें बनेंगी या पुराने मामलों का निपटारा होगा, वहां किसानों को इसका फायदा मिलेगा. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस नीति को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकता है।   

मंत्री सिलावट ने दिए निर्देश, केरवा डैम वेस्टवियर जल्द होगा दुरुस्त

भोपाल जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने निर्देश दिए हैं कि केरवा डैम के क्षतिग्रस्त वेस्टवियर का कार्य आगामी दो माह में पूर्ण किया जाए। कार्य पूर्ण गुणवत्ता पूर्वक हो एवं संबंधित अधिकारी निरंतर कार्य का निरीक्षण कर वरिष्ठ अधिकारियों को प्रगति की जानकारी दें। कुछ माह पूर्व बांध के वेस्टवियर का स्लैब अत्यधिक पुराना होने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसका वर्तमान में पुनः निर्माण कार्य कराया जा रहा है। जल संसाधन मंत्री  सिलावट ने मंगलवार को केरवा बांध के क्षतिग्रस्त वे वियर के पुनर्निर्माण कार्य का निरीक्षण किया और कार्य के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अधीक्षण यंत्री  बी.एल. निमामा, कार्यपालन यंत्री  नितिन कुहिकर, अनुविभागीय अधिकारी  प्रदीप चतुर्वेदी तथा निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित थे। केरवा बांध की कुल लंबाई 396. 50 मीटर एवं उंचाई 22.6 मीटर है। बांध की कुल जीवित जल भराव क्षमता 22.6 मिलियन घन मीटर है, जिससे भोपाल जिले के लगभग 35 ग्रामों की 3 हजार 960 हेक्टेयर भूमि में रबी सिंचाई किया जाना रूपांकित है। इसके अतिरिक्त जलाशय से पेयजल के लिए जल भी प्रदाय किया जाता है। स्थल निरीक्षण के दौरान मैदानी अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि टूटे हुए हिस्से को डिस्मेंटल कर नवीन निर्माण के लिए फाउंडेशन लेवल तक खुदाई का कार्य किया जा चुका है।  

वन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुधारने के निर्देश

रायपुर मुख्य सचिव ने वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि कैम्पा मद के अंतर्गत वन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं जैसे- पुल-पुलियों, मार्गों और आवश्यक भवनों के निर्माण को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने विशेष रूप से नक्सल मुक्त हुए क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए, ताकि वहां शासन की पहुंच और विकास की गति बढ़ सके।             छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ प्रतिकात्मक वनरोपण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैम्पा) की नवमीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य रूप से वर्ष 2024-25 और 2025-26 के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई तथा आगामी भविष्य की योजनाओं पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। आगामी कार्ययोजना (2026-27) वन विभाग के अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2026-27 के लिए 713 करोड़ 73 लाख रुपये की वार्षिक कार्ययोजना को अनुमोदित कर भारत सरकार (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय) को अंतिम स्वीकृति हेतु भेज दिया गया है। कैम्पा के प्रमुख कार्यक्षेत्र अधिकारियों ने बैठक में बताया कि कैम्पा मद का उपयोग निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जा रहा है। सिंचित व असिंचित वृक्षारोपण और बांस वनों की पुनर्स्थापना किया जा रहा है। वनों के घनत्व में वृद्धि हेतु सिल्वीकल्चरल का कार्य किया जा रहा है। वन्यप्राणियों के रहवास में सुधार और भू-जल संरक्षण के प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश  मुख्य सचिव  विकासाशील ने आगामी मानसून को देखते हुए वन क्षेत्रों में चल रहे जरूरी कार्यों को बारिश शुरू होने से पहले शीघ्रता से पूर्ण करने की हिदायत दी है। कैम्पा वनीकरण, मृदा और जल संरक्षण के कार्यों को मानसून शुरू होने से पहले पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।  बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव मती ऋचा शर्मा, पीसीसीएफ  व्ही.निवास राव,  अरूण पांडे, प्रमुख सचिव (कृषि) मती शहला निगार, वित्त सचिव  मुकेश बंसल सहित राजस्व, आवास एवं पर्यावरण तथा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

विद्यार्थियों का समग्र हित ही हमारी प्राथमिकता है: तकनीकी शिक्षा मंत्री परमार

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय स्थित सभाकक्ष में इंदौर के प्रतिष्ठित तकनीकी शिक्षा संस्थान,  गोविंदराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (SGSITS) एसजीएसआईटीएस, इंदौर की "शासी निकाय (Board Of Governance) की 129वीं" बैठक हुई। मंत्री  परमार ने प्रस्तावित कार्यसूची के विभिन्न बिंदुओं पर व्यापक चर्चा कर, शासन के नियमों का पालन करते हुए क्रियान्वयन के दिशा-निर्देश दिए। तकनीकी शिक्षा मंत्री  परमार ने कहा कि संस्थान, अपने उत्तरोत्तर उत्थान एवं समग्र विकास के लिए, आदर्श व्यवस्था बनाए जिससे अन्य संस्थान भी अभिप्रेरित हों। मंत्री  परमार ने कहा कि हमारी प्राथमिकता, विद्यार्थियों का समग्र हित है।  परमार ने कहा कि संस्थान में शिक्षकों के रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया शासन के नियमों के अनुरूप रोस्टर का पालन करते हुए सुनिश्चित की जाए और यह प्रक्रिया पूर्णरूपेण पारदर्शी हो। बैठक में संस्थान के शासी निकाय की 128वीं बैठक का पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। शासी निकाय द्वारा संस्थान में "अटल वित्तीय सहायता योजना" प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया, इसमें 2025 एवं उसके उपरांत प्रवेश पाने वाले सभी विद्यार्थियों (डिप्लोमा द्वारा द्वितीय वर्ष में प्रविष्ट व्यक्ति सहित) प्रत्येक वर्ष 1.00 करोड़ की आनुपातिक आर्थिक सहायता विद्यार्थियो को प्रदान की जाएगी। संस्थान द्वारा शुरू किए जा रहे नवीन बी टेक (सिविल इंजीनियरिंग) हिन्दी माध्यम प्रोग्राम में प्रवेश लेने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को फाइनल ईयर में पहुंचने पर 2 लाख रुपए की वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया गया। संस्थान में दो नवीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, "इंटीग्रेटेड हेल्थ केयर" एवं "स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजीस" की स्थापना का अनुमोदन भी किया गया। बैठक में संस्थान में शिक्षकों के रिक्त पद पूर्ति, प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की नियुक्ति, एआईसीटीई गाइडलाइन में अपेक्षित छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुसार सेल्फ फाइनेंस मोड में शिक्षकों के पद सृजन एवं गैर शिक्षकीय अधिकारी-कर्मचारी पद पूर्ति सहित संस्थान के शैक्षणिक एवं अकादमिक उन्नयन और विद्यार्थियों के समग्र हितों से जुड़े विविध विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल के कार्यवाहक कुलगुरु डॉ एस सी चौबे, 'प्रतिनिधि प्रमुख सचिव' तकनीकी शिक्षा डॉ संतोष गांधी, 'प्रतिनिधि आयुक्त तकनीकी शिक्षा' डॉ मोहन सेन, उद्योग प्रतिनिधि इंजी मनीष गुप्ता, पद्म डॉ. डी.बी. फाटक (आईआईटी बॉम्बे),  गोविंदराम सेकसरिया चेरिटेबल ट्रस्ट के सदस्य  हर्ष सेकसरिया, वित्त सचिव के प्रतिनिधि एवं एसजीएसआईटीएस इंदौर के निदेशक प्रो. नीतेश पुरोहित सहित तकनीकी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण और संस्थान की शासी निकाय के विभिन्न सदस्यगण उपस्थित थे।