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रामनगरी में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा, वाल्मीकि आश्रम सहित प्रमुख स्थलों का विकास

अयोध्या  रामनगरी अयोध्या और आसपास के जिलों में धार्मिक पर्यटन को एक नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। रामायणकालीन विरासत को संरक्षित करते हुए सरकार अब ऐसे व्यापक धार्मिक पर्यटन सर्किट पर काम कर रही है, जिसमें 41 पौराणिक तीर्थ स्थलों को एक साथ जोड़ा जाएगा। इस योजना का उद्देश्य न केवल श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को अधिक सुविधाजनक और अनुभवात्मक बनाना है, बल्कि लंबे समय से उपेक्षित प्राचीन स्थलों को पुनर्जीवित कर उन्हें पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाना भी है। यह सर्किट अयोध्या के साथ गोंडा, बस्ती और अंबेडकरनगर के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को आपस में जोड़ते हुए एक संगठित आध्यात्मिक मार्ग तैयार करेगा। रामायणकालीन विरासत को मिलेगा नया स्वरूप 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर स्थित इन 41 पौराणिक स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की दिशा में काम शुरू हो गया है। सरकार की मंशा है कि श्रद्धालु केवल राम मंदिर तक सीमित न रहकर पूरे रामायणकालीन भूगोल का अनुभव करें और उन स्थलों से भी जुड़ें जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित विकास से वंचित रहे हैं। 41 तीर्थ स्थलों का होगा व्यापक विकास और सौंदर्यीकरण परियोजना के तहत इन सभी स्थलों पर आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। कुंडों और पवित्र स्थलों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा, साथ ही श्रद्धालुओं के लिए शेड, पेयजल व्यवस्था, चेंजिंग रूम, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और सड़क संपर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसका उद्देश्य तीर्थ यात्रा को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और सुव्यवस्थित बनाना है। रामायण से जुड़े प्रमुख स्थलों को किया गया शामिल इस धार्मिक पर्यटन सर्किट में वाल्मीकि आश्रम, अंगी ऋषि आश्रम, विभीषण कुंड, सुग्रीव कुंड, राम कुंड, सीता कुंड, भरत कुंड, नंदीग्राम, तमसा नदी, श्रवण क्षेत्र और पाराशर आश्रम जैसे प्रमुख स्थल शामिल किए गए हैं। ये सभी स्थान रामायण काल की कथाओं और परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं और इनका ऐतिहासिक महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार यह परियोजना केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, छोटे व्यापारों को प्रोत्साहन मिलेगा और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। होटल, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। श्रद्धालुओं के लिए समग्र आध्यात्मिक अनुभव की तैयारी सरकार का लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं को एक ही यात्रा में संपूर्ण रामायणकालीन विरासत का अनुभव मिल सके। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान मिलेगी।  

पलक तिवारी ने गोल्डन टेंपल में माथा टेका, सिर ढककर गुरबाणी सुनी, अनुभव किया साझा

अमृतसर  अभिनेत्री पलक तिवारी इन दिनों आगामी वेब सीरीज 'लुक्खे' को लेकर चर्चा में बनी हुई हैं। पलक तिवारी ने अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में माथा टेका और आशीर्वाद लिया। इसकी कुछ तस्वीरें उन्होंने  इंस्टाग्राम पर पोस्ट की। पोस्ट की गई तस्वीरों में वे बेहद सादगी में नजर आ रही हैं। उन्होंने नीला और गुलाबी रंग का एक सुंदर पारंपरिक सूट पहना हुआ है। उन्होंने अपने सिर पर दुपट्टा रखा हुआ है। तस्वीरों में उन्हें स्वर्ण मंदिर के पवित्र सरोवर के किनारे हाथ जोड़कर खड़े और परिसर की सुंदरता को निहारते हुए देखा जा सकता है। अपनी पोस्ट के जरिए पलक ने बताया कि यह स्वर्ण मंदिर में उनका पहला आगमन है। अभिनेत्री ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए लिखा, "स्वर्ण मंदिर में यह मेरा पहली बार जाना था। यह अनुभव सच में वैसा ही था, जैसा मैंने सोचा था। अत्यंत शांतिपूर्ण और जादुई।" फिल्मों के बाद अब अभिनेत्री पलक तिवारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर धमाल मचाने के लिए तैयार हैं। उनकी आगामी वेब सीरीज 'लुक्खे' को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह है। इस फिल्म के जरिए जहां, पलक ओटीटी डेब्यू कर रही हैं, तो मशहूर रैपर किंग अभिनय की दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं। सीरीज में पलक 'सनोबर' नामक किरदार निभा रही हैं, जो इमोशनल, प्यार और आंतरिक संघर्ष से भरा हुआ है। यह सीरीज पंजाब की पृष्ठभूमि में रैप संगीत, क्राइम और प्रतिशोध की कहानी है। सीरीज की कहानी लकी (लक्ष्यवीर) नाम के एक एथलीट के इर्द-गिर्द घूमती है, जो ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश करने के लिए पंजाब की अंडरग्राउंड रैप दुनिया में प्रवेश करता है। यह सीरीज रैपर्स के बीच के टकराव, प्यार, भाईचारे और बदले की कहानी है। सीरीज में रैपर किंग के खास गानों और संगीत का अहम रोल है, जो मुंबई में एक लाइव कॉन्सर्ट में रिलीज किया गया था। सीरीज में किंग (एमसी बदनाम), राशि खन्ना, पलक तिवारी (सनोबर), लक्ष्यवीर सिंह सरन (लकी), और शिवंकित परिहार अहम भूमिका में नजर आएंगे। परिक्रमा में बैठकर गुरबाणी कीर्तन सुना जानकारी के अनुसार, पलक तिवारी ने गोल्डन टेंपल पहुंचकर करीब आधे घंटे तक परिक्रमा में बैठकर गुरबाणी कीर्तन सुना और आध्यात्मिक वातावरण को महसूस किया। अपनी पोस्ट के कैप्शन में पलक ने लिखा कि यह उनका गोल्डन टेंपल का पहला दौरा था, लेकिन जैसा उन्होंने सोचा था, वैसा ही अनुभव उन्हें जहां आकर महसूस हुआ। सलमान खान की फिल्म से किया था डेब्यू पलक तिवारी ने साल 2023 में सलमान खान स्टारर 'किसी का भाई किसी की जान' सेडेब्यू किया था। फिल्म में पूजा हेगड़े, वेंकटेश, भूमिका चावला, जगपति बाबू, विजेंदर सिंह, राघव जुयाल, जस्सी गिल, सिद्धार्थ निगम, शहनाज गिल, पलक तिवारी, विनाली भटनागर और सतीश कौशिक भी नजर आए थे।

उत्तम नगर दिल्ली में बुलडोजर एक्शन फिर से शुरू, ट्राइब्यूनल ने राहत की अर्जी खारिज की

नई दिल्ली  उत्तम नगर की उसी पुनर्वासित कालोनी में  सुबह एक बार फिर निगम ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई शुरू की, जहां कुछ दिन पहले तरुण नाम के युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस बार निगम पूरी कानूनी तैयारी के साथ पहुंचा था। जैसे ही निगम के लिए गठित अपीलीय ट्रिब्यूनल ने डिमालिशन पर रोक हटाई, वैसे ही निगम ने उन विवादित इमारतों को गिराना शुरू कर दिया जो कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर बनाई गई थीं। के अनुसार तरुण की हत्या के कुछ दिन बाद ही जब निगम ने इस मामले में आरोपितों में से एक के घर के अवैध हिस्से पर हथौड़ा चलाया था, तब इस मामले में 13 पक्षकारों ने निगम की कार्रवाई के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट ने उन्हें 15 दिन की राहत देते हुए ट्रिब्यूनल में अपील करने का निर्देश दिया था। 28 अप्रैल को याचिकाकर्ता ट्रिब्यूनल पहुंचे। 29 अप्रैल हुई सुनवाई में निगम ने दलील दी कि ये निर्माण न केवल अवैध हैं, बल्कि सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं। सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलें खारिज करते हुए स्टे हटा दिया। इसके अगले ही दिन निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी। निगम पश्चिमी जोन के अधिकारी ने बताया कि बृहस्पतिवार को पूरे दिन चली कार्रवाई के दौरान दो संपत्तियों पर निगम ने हथौड़ा चलाया। इनमें एक संपत्ति वह थी जिसपर तीन प्लाटों को जोड़कर इमारत खड़ी की गई थी। वहीं दूसरी संपत्ति ऐसी थी, जिसपर दो प्लाट को जोड़कर घर बनाया गया था। सुबह जब निगम की टीमें कार्रवाई करने पहुंचीं, तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे। इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस तैनात थी। इस इलाके में कई आवासीय इकाइयों को आपस में जोड़कर बड़ी इमारतें बना ली गई थीं. एक मामले में तीन घरों को मिलाकर एक ढांचा बनाया गया, जबकि दूसरे मामले में दो इकाइयों को जोड़ा गया था. इस मामले में आरोपी के परिवार ने पहले 13 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था. अदालत ने उन्हें 15 दिनों की अंतरिम राहत दी थी।  कोर्ट ने परिवार को एमसीडी ट्रिब्यूनल में अपील करने का निर्देश दिया था. याचिकाकर्ताओं ने 28 अप्रैल को ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया. 29 अप्रैल को सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने ठोस आधार की कमी की बात कही. इसके बाद स्टे ऑर्डर हटा लिया गया. अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 जून, 2026 को होगी।  क्या था पूरा मामला? बता दें कि 4 मार्च को दिल्ली के उत्तम नगर स्थित जेजे कॉलोनी, हस्तसाल में होली के दौरान तरुण के परिवार की एक बच्ची ने पानी का गुब्बारा फेंका था. गुब्बारे का पानी पड़ोसी महिला पर गिर गया. इसी बात पर दो पड़ोसियों के बीच खूनी संघर्ष हो गया, जिसमें 26 साल के तरुण की मौत हो गई थी. अब उसी मामले के आरोपियों के अवैध निर्माण पर प्रशासन का डंडा चला है। 

पंजाब में फ़्लोर टेस्ट की तैयारियां: अमन अरोड़ा पेश करेंगे प्रस्ताव, 6 BJP सांसदों के शामिल होने से टूट का खतरा

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा का आज 11 बजे विशेष सत्र बुलाया गया है। सरकार की ओर से न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके साथ ही AAP के 6 राज्यसभा सांसदों के BJP में शामिल होने के बाद सरकार पर भी खतरा मंडरा रहा है, ऐसे में सरकार आज फ्लोर टेस्ट करवा सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, AAP ने अपने सभी विधायकों को विधानसभा में हाजिर रहने के लिए व्हिप भी जारी कर दी है। यही नहीं पार्टी ने सभी विधायकों को तय समय से एक घंटा पहले विधानसभा में बुला लिया था। दरअसल, पार्टी में टूट की सुगबुगाहट के बीच दो दिन पहले सभी सांसदों व विधायकों को जालंधर में बुलाया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उस बैठक में 65 ही विधायक पहुंचे जबकि बाकी नदारद रहे। वहीं तीनों लोकसभा सांसद भी बैठक में नहीं पहुंचे। AAP के पास अभी 117 में से कुल 94 विधायक हैं, जबकि बहुमत के लिए 59 विधायक जरूरी होते हैं। भगवंत मानने खुद दी थी जानकारी सीएम भगवंत मान ने ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में जानकारी देते हुए बताया था कि पंजाब कैबिनेट द्वारा लिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले में यह तय किया गया है कि 1 मई को ‘मजदूर दिवस’ के अवसर पर विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया जाएगा। यह एक दिवसीय सत्र उन मेहनती मजदूरों और कारीगरों को समर्पित होगा, जो देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में अहम योगदान देते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने विधानसभा सत्र के समय पर सवाल उठाया है। क्या बोले सुखजिंदर सिंह रंधावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने विधानसभा सत्र के समय पर आपत्ति जताते हुए कहा किइसे मजदूर दिवस के दिन बुलाया गया है। उन्होंने इसे सरकार की जल्दबाज़ी और संभावित विश्वास प्रस्ताव की तैयारी से जोड़ते हुए कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने दावा किया है कि AAP सरकार पहले ही अपना बहुमत खो चुकी है। उनका आरोप है कि जालंधर में हुई एक अहम बैठक में कई विधायक अनुपस्थित रहे और जो पहुंचे वो कथित तौर पर प्रशासनिक दबाव में थे। बीजेपी ने बताया फिजूलखर्ची बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने बुधवार को 1 मई को होने वाले पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र को फिजूलखर्ची और सरकारी खजाने पर बोझ बताया। उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार विधानसभा जैसी संवैधानिक संस्था का दुरुपयोग न केवल अपनी कमजोर होती पार्टी और अस्थिर विधायकों को संभालने के लिए कर रही है, बल्कि पंजाब में अपनी नाकामियों, अक्षमता, टूटे वादों, माफिया राज, गुंडागर्दी और जबरन वसूली के जाल से उपजे बढ़ते जन आक्रोश से ध्यान भटकाने के लिए भी कर रही है। चुघ ने कहा कि इस तरह का सत्र बुलाने से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान को जनता को बताना होगा कि उनके तथाकथित ‘परिवर्तन’ ने चार वर्षों में क्या हासिल किया है। भ्रष्टाचार, अराजकता और आंतरिक कलह ने उनकी अपनी पार्टी को गहरे अविश्वास में धकेल दिया है। वड़िंग का दावा- 50 विधायक पार्टी छोड़ेंगे राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद लगातार कयास लगाए जा रहे हैं कि 30 से 35 विधायक राघव चड्‌ढा व संदीप पाठक के संपर्क में हैं। कांग्रेस प्रधान राजा वड़िंग भी AAP के 50 विधायकों के पार्टी छोड़ने का दावा कर चुके हैं। अकाली दल के नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया भी आप में टूट की बार-बार बात कर रहे हैं।

मध्यम और निम्न आय वर्ग को राहत, 8 लाख रुपये से शुरू होंगे फ्लैट

लखनऊ  राजधानी लखनऊ में किफायती आवास की बढ़ती मांग को देखते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण ने मध्यम और अल्प आय वर्ग के लिए बड़ी योजना तैयार की है। इसके तहत शहर के पांच प्रमुख स्थानों पर एलआईजी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 3000 से अधिक फ्लैट बनाए जाएंगे। अधिकारियों ने इन सभी स्थानों का निरीक्षण कर जमीन को अंतिम रूप दे दिया है। अब परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इन मकानों की शुरुआती कीमत 8 लाख रुपये होगी। 30 लाख रुपये की कीमत तक के फ्लैट बनाए जाएंगे। इससे मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। आवासीय संकट से मिलेगी राहत: शहर में लगातार बढ़ती आबादी और महंगे रियल एस्टेट के कारण मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में एलडीए की यह आवासीय योजना लोगों की पहुंच में होगी। खास बात यह है कि परियोजना को ऐसी लोकेशन पर विकसित किया जा रहा है जहां बुनियादी सुविधाएं पहले से मौजूद हैं या आसानी से विकसित की जा सकती हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण की इस योजना का उद्देश्य ऐसे लोगों को राहत देना है जो सीमित आय के चलते महंगे फ्लैट खरीदने में सक्षम नहीं हैं। इन पांच स्थानों पर बनेंगे आवास 1-अनंत नगर योजना, मोहन रोड में मध्यम वर्ग के लिए आवासीय फ्लैट बनाए जाएंगे। स्थल चयन पूरा हो चुका है और निर्माण के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। 2-सीतापुर रोड शिया डिग्री कॉलेज के सामने खाली पड़ी जमीन पर भी मध्यम वर्ग के लिए फ्लैट बनाने की मंजूरी मिली। 3-वसंत कुंज योजना, सेक्टर-एच यहां भी मध्यम आय वर्ग के लिए बहुमंजिला फ्लैट बनेंगे। 4-शारदा नगर विस्तार में एलआईजी और ईडब्ल्यूएस दोनों श्रेणियों के लिए मकान बनाए जाएंगे, जिससे कमजोर वर्ग के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। 5-ऐशबाग में मदरसे के पीछे की जमीन पर भी मध्यम वर्ग के लिए एलआईजी फ्लैट बनेंगे। एलडीए इसे पहली ही मंजूरी दे चुका है। तीन योजनाओं में उपकेंद्र शहर के विस्तार के साथ एलडीए ने बिजली ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण अपनी तीन प्रमुख योजनाओं आईटी सिटी, वरुण विहार और नैमिष नगर में बड़े बिजली उपकेंद्र (सब स्टेशन) बनाने जा रहा है। इनमें सबसे बड़ा उपकेंद्र आईटी सिटी में स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए 53 एकड़ जमीन चिन्हित की जा चुकी है। ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ने जमीन को दी मंजूरी: एलडीए के प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड की मंडलीय भूमि चयन समिति ने 3 अप्रैल 2026 को आईटी सिटी क्षेत्र का निरीक्षण किया। जांच के बाद जमीन को उपयुक्त माना। अब एलडीए जल्द ही यह भूमि कॉरपोरेशन को हस्तांतरित करेगा, ताकि निर्माण शुरू हो सके। नैमिष नगर व वरुण विहार भी योजना में: नैमिष नगर में भी 9 अप्रैल 2026 को स्थलीय निरीक्षण किया गया, जहां चयन समिति ने जमीन को उपयुक्त पाया। यहां भी जल्द जमीन ट्रांसफर की जाएगी। तीसरा उपकेंद्र आगरा रोड स्थित वरुण विहार योजना में प्रस्तावित है, जो बिजली आपूर्ति को मजबूत करेगा। बिजली व्यवस्था में आएगा बड़ा सुधार एलडीए के अनुसार, इन मेगा उपकेंद्रों के बनने से क्षेत्र में बिजली की उपलब्धता व गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा। बढ़ती आबादी और औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इन्हें अगले 50 वर्ष के लोड को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जिससे शहर और ग्रामीण क्षेत्र दोनों को समान रूप से लाभ मिल सके। पहली बार इन योजना के प्रभावित गांवों को भी फायदा इस बार की योजना में खास बदलाव है। पहले एलडीए की कॉलोनियों में 24 घंटे बिजली मिलती थी, जबकि आसपास के गांवों को अलग लाइन से सीमित सप्लाई मिलती थी। पर अब बनने वाले उपकेंद्रों से न सिर्फ प्राधिकरण की कॉलोनियों बल्कि उन गांवों को भी सीधे बिजली मिलेगी, जिनकी जमीन अधिग्रहित कर योजनाएं विकसित की जा रही हैं। उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार प्रस्तावित स्थलों का निरीक्षण किया गया है। कुछ जगहों पर जमीन को अंतिम रूप दे दिया गया है। अब डीपीआर तैयार होने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जल्द ही निर्माण शुरू होगा। एलडीए हजारों परिवारों का सस्ते व अपने घर का सपना साकार करेगा।

अब 18 से 40 वर्ष तक के युवाओं को मिलेगा लाभ, 10 लाख रुपये तक लोन की तैयारी

लखनऊ  यूपी की योगी सरकार जल्द ही युवाओं को बड़ी सौगात देने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी अभियान योजना की सफलता को देखते हुए जल्द इसका विस्तार होगा। युवा उद्यमियों के लिए अच्छी खबर यह है कि आवेदन पात्रता की आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट दिए जाने की तैयारी है। इसका प्रस्ताव तैयार हो गया है। अब तक 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के 1.68 लाख युवा योजना के तहत पांच लाख रुपये तक बिना बैंक गारंटी के ब्याज मुक्त लोन हासिल कर चुके हैं। अब न्यूनतम आयु सीमा को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष किया जाएगा जबकि अधिकतम आयु सीमा 40 ही रहेगी। इसके साथ ही पांच लाख को डबल कर 10 लाख करने की भी तैयारी है। सीमा युवा उद्यमी योजना के तहत युवा सर्विस व मैनुफैक्चरिंग सेक्टर से लेकर इनोवेटिव बिजनेस में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। योजना के तहत पांच लाख रुपये तक लिए गए लोन को चार वर्ष में चुकाने के बाद दूसरे चरण में साढ़े सात लाख रुपये तक ब्याज मुक्त लोन प्रदान किए जाने की व्यवस्था है। ताकि भविष्य में पहले चरण को पूरा करने के उपरांत युवा उद्यमी अपने कारोबार को और आगे बढ़ाने के लिए बड़ी राशि हासिल कर सकें। इसके चलते राशि को दोगुना किए जाने का भी प्रस्ताव है यानी पांच लाख के स्थान पर युवा 10 लाख रुपये तक और साढ़े सात लाख रुपये के स्थान पर 15 लाख रुपये तक लोन हासिल कर सकेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर युवा उद्यमी योजना की शुरुआत 24 जनवरी 2024 को यूपी दिवस के अवसर पर हुई थी। शुरुआत में इस योजना के तहत डेढ़ लाख युवाओं को विभिन्न बैंकों के माध्यम से बिना गारंटी के ब्याज मुक्त लोन उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। आंकड़ों की नजर में योजना कुल आवेदन – 530487 – परियोजना लागत – 24964.7 करोड़ रुपये बैंक से स्वीकृत आवेदन – 180756 – परियोजना लागत – 6142.97 करोड़ रुपये बैंक द्वारा वितरित – 168516 – परियोजना लागत – 5913.15 करोड़ रुपये महिलाओं की 28 प्रतिशत भागीदारी योजना के तहत अब तक कुल लोन हासिल करने वालों में 28 प्रतिशत महिलाएं और 72 प्रतिशत पुरुष हैं। ओबीसी युवाओं की भागीदारी 50 फीसदी लोन हासिल करने वालों में सर्वाधिक 49.9 लाभार्थी ओबीसी वर्ग के हैं। इनके अलावा 34.3 प्रतिशत सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति के 15.5 और अनुसूचित जनजाति के 0.3 प्रतिशत युवाओं ने लोन लिया है। किस क्षेत्र में कितना लोन सर्विस सेक्टर – 62 प्रतिशत मैनुफैक्चरिंग सेक्टर 38 प्रतिशत

पारिस्थितिकी बहाली का छत्तीसगढ़ मॉडल: बारनवापारा में काले हिरणों की वापसी

पारिस्थितिकी बहाली का छत्तीसगढ़ मॉडल – बारनवापारा में काले हिरणों की वापसी'                            बलौदाबाजार मन की बात' से राष्ट्रीय क्षितिज तक का सफर- प्रायः सभी प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि प्रकृति कभी भी अपना ऋण नहीं भूलती। यदि मनुष्य पूरी ईमानदारी से उसके संरक्षण की ओर एक कदम बढ़ाता है, तो प्रकृति उसे अपनी भव्यता से कई गुना वापस लौटाती है। छत्तीसगढ़ की पावन धरा, जो सदियों से अपनी नैसर्गिक संपदा और सघन वन क्षेत्रों के लिए विख्यात रही है, आज वन्यजीव संरक्षण के एक नए स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रही है।   छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य (लगभग 245 वर्ग किमी) में काले हिरणों (ब्लैकबक) का सफलतापूर्वक पुनरुद्धार हुआ है, जहाँ इनकी संख्या अब 200 के करीब पहुँच गई है। 1970 के दशक में विलुप्त हो चुके इन हिरणों को 2018 की पुनरुद्धार योजना और 2026 तक के वैज्ञानिक प्रयासों से वापस लाया गया। हाल ही में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” में जब बारनवापारा अभ्यारण्य के काले हिरणों की सफल वापसी का उल्लेख किया, तो यह केवल एक राज्य की उपलब्धि नहीं रही, बल्कि भारत के पर्यावरण मानचित्र पर वन्यजीव संरक्षण का एक नया अध्याय बन गई।      विजन भरा नेतृत्व और प्रतिबद्धता- इस गौरवमयी उपलब्धि के सूत्रधार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हैं। उन्होंने इस सफलता को राज्य की समृद्ध जैव विविधता और पर्यावरण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतिफल बताया है। मुख्यमंत्री साय का मानना है कि प्रधानमंत्री की सराहना केवल एक प्रशंसा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के वन विभाग और वहां के स्थानीय समुदायों के कठिन परिश्रम पर लगी राष्ट्रीय मुहर है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज विकास और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के बीच उस दुर्लभ संतुलन को साध रहा है, जिसकी आज पूरे विश्व को आवश्यकता है।        वैज्ञानिक रणनीति: विलुप्ति से पुनर्वास तक- बारनवापारा अभ्यारण्य में काले हिरणों (Blackbucks) का दिखाई देना एक समय दुर्लभ हो गया था। लेकिन वन मंत्री केदार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के रणनीतिक निर्देशन ने इस असंभव लक्ष्य को वास्तविकता में बदल दिया। फरवरी 2026 का महीना छत्तीसगढ़ के वन इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में 30 काले हिरणों को उनके प्राकृतिक आवास में 'सॉफ्ट रिलीज' पद्धति से मुक्त किया गया। यह प्रक्रिया केवल उन्हें जंगल में छोड़ने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि वे नए वातावरण में बिना किसी तनाव (Stress-free) के रच-बस सकें। ब्लैकबक कंजर्वेशन सेंटर में बेहतर पोषण और वैज्ञानिक देखभाल से इनकी संख्या में वृद्धि हुई।      प्रशासनिक इच्छाशक्ति और मैदानी संघर्ष- इस महाअभियान के पीछे उन जांबाज अधिकारियों और मैदानी अमले की मेहनत है, जिन्होंने दिन-रात एक कर दिया। मुख्य वन संरक्षक (रायपुर) श्रीमती सतोविशा समाजदार और वनमंडलाधिकारी (बलौदाबाजार) धम्मशील गणवीर के नेतृत्व में फील्ड स्टाफ, जीव वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों की एक समर्पित टीम ने एक ढाल की तरह काम किया। वर्तमान में इन हिरणों की सुरक्षा के लिए हाई-टेक निगरानी प्रणाली, जीपीएस ट्रैकिंग और नियमित पेट्रोलिंग का उपयोग किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ वन विभाग की तकनीकी दक्षता का प्रमाण है। रामपुर ग्रासलैंड:- एक सुरक्षित भविष्य का पालना बारनवापारा अभ्यारण्य का यह मॉडल आज देश के अन्य राज्यों के लिए एक 'केस स्टडी' बन सकता है। यहाँ केवल काले हिरण की प्रजाति का पुनर्वास नहीं हुआ, बल्कि उनके लिए एक संपूर्ण आवास तंत्र विकसित किया गया। रामपुर ग्रासलैंड का वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और घास की स्थानीय प्रजातियों का संवर्धन वे मुख्य कारक हैं, जिन्होंने काले हिरणों को वहां फलने-फूलने के लिए प्रेरित किया। इसके अतिरिक्त, स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की एक अनूठी मिसाल पेश की है। काला हिरण (ब्लैकबक) भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक संकटग्रस्त मृग है। नर काले हिरण का रंग गहरा भूरा से काला होता है, उसके लंबे सर्पिलाकार सींग होते हैं और शरीर का निचला भाग सफेद होता है। मादा काले हिरण हल्के भूरे रंग की होती हैं और सामान्यतः उनके सींग नहीं होते। यह प्रजाति खुले घास के मैदानों में पाई जाती है और दिन के समय सक्रिय रहती है। इसका मुख्य आहार घास और छोटे पौधे होते हैं। इनकी ऊंचाई लगभग 74 से 84 सेंटीमीटर होती है। नर का वजन 20 से 57 किलोग्राम के बीच और मादाओं का 20 से 33 किलोग्राम तक होता है। नर काले हिरण की सर्पिलाकार सींगें, जो लगभग 75 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती हैं, इन्हें आसानी से पहचानने योग्य बनाती हैं।                   भविष्य की राह और राष्ट्रीय संदेश- बारनवापारा अभ्यारण्य में गूंजती काले हिरणों की चहल-कदमी और उनकी कुलाचें इस बात का जीवंत साक्ष्य हैं कि यदि इंसान प्रकृति के प्रति अपनी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी समझ ले, तो खोई हुई धरोहर को फिर से लौटाया जा सकता है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक 'लिविंग लैबोरेटरी' (जीवंत प्रयोगशाला) के रूप में कार्य करेगी, जहाँ वे प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना सीख सकेंगी।                मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'मन की बात' ने हमारे नवाचारों को एक वैश्विक मंच प्रदान किया है। छत्तीसगढ़ सरकार पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोड़कर एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर रही है, जहाँ मनुष्य और वन्यजीव दोनों सुरक्षित हों।आज जब हम बारनवापारा अभ्यारण्य की खुली वादियों में कुलाचें भरते काले हिरणों को देखते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकृति स्वयं मुस्कुराते हुए छत्तीसगढ़ के इस सराहनीय प्रयास को अपना आशीर्वाद दे रही है। यह छत्तीसगढ़ के गौरव का वह उत्कर्ष है, जिसकी चमक अब पूरे देश को प्रेरित कर रही है।  धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक अशोक कुमार चन्द्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी

लखनऊ: गंगा एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/घंटा स्पीड लिमिट, टोल दरें तय

लखनऊ गंगा एक्सप्रेसवे पर फिलहाल वाहन बिना टोल का भुगतान किए ही दौड़ेंगे। टोल की दरें तय जरूर कर दी गई हैं पर उसकी वसूली शुरू होने में अभी लगभग दो सप्ताह का वक्त लगेगा। सूत्रों के अनुसार, लगभग 15 दिन बाद टोल की वसूली शुरू हो सकेगी। इससे पूर्व गंगा एक्सप्रेसवे के लिए निर्धारित टोल दरों के प्रस्ताव को कैबिनेट से स्वीकृत कराया जाएगा। इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों के लिए अधिकतम रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अभी गंगा एक्सप्रेसवे पर दो पहिया, तीन पहिया और पंजीकृत ट्रैक्टर के लिए टोल दर 1.28 रुपये प्रति किलोमीटर तय की गई है। ऐसे ही कार, जीप, वैन व हल्के वाहन के लिए 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर, हल्के वाणिज्यिक वाहन, हल्के माल वाहन के लिए 4.05 रुपये प्रति किलोमीटर, मिनी बस, बस व ट्रक के लिए 8.20 रुपये प्रति किलोमीटर, भारी निर्माण मशीनरी, मिट्टी हटाने वाले वाहन के लिए 12.60 रुपये प्रति किलोमीटर तथा उपकरण व बहुएक्सल वाहन, अत्यधिक बड़े वाहन (सात व अधिक एक्सेल वाले) के लिए 16.10 रुपये प्रति किलोमीटर टोल दर तय की गई है। हर मौसम के अनुकूल है डामर की परत लखनऊ।गंगा एक्सप्रेसवे पर 594 किलोमीटर लंबे सफर को आरामदेह व सुरक्षित बनाने के लिए उच्च तकनीक का उपयोग किया गया है। इस एक्सप्रेसवे पर मौसूम अनुकूल डामर परत (डीबीएम) को 100 मिलीमीटर तक की मोटाई दी गई है। यह तकनीक सड़क को भीषण गर्मी और अत्यधिक बारिश के प्रभाव से सुरक्षित रखती है। इसके लिए 3.67.022 मीट्रिक टन डामर का इस्तेमाल किया गया। यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार एक्सप्रेसवे को मजबूती देने के लिए मिट्टी की मजबूती का पैमाना अपनाया गया है। कैलिफोर्निया बेयरिंग रेशियो (सीबीआर) का प्रयोग किया गया है, जिसकी वैल्यू आठ पर रखी गई है, जो एक अत्यंत स्थिर और ठोस आधार का प्रमाण है। एक्सप्रेसवे पर 19 करोड़ घन मीटर मिट्टी, 2,78,380 मिट्रिक टन स्टील, 14.83.313 मीट्रिक टन सीमेंट व 41.88 लाख घनमीटर रेत का भी प्रयोग किया गया है। संरचनात्मक मजबूती के हर पहलू को ध्यान में रखकर कार्य को पूरा कराया गया है। 154.58 लाख घनमीटर मिट्टी सड़क की निचली और ऊपरी परतों को ठोस स्वरूप देने के लिए प्रयोग की गई है। एक्सप्रेसवे के मुख्य कैरिजवे की कुल मोटाई 485 मिलीमीटर से 500 मिलीमीटर तक रखी गई है। यह आधा मीटर मोटी बहु-स्तरीय संरचना सुनिश्चित करती है कि सड़क भारी यातायात का दबाव आसानी से झेल सके। इस एक्सप्रेसवे की क्षमता 79 से 108 मिलियन स्टैंडर्ड एक्सल (एमएसए) तक मापी गई है। अधिकारियों का दावा है कि एक्सप्रेसवे करोड़ों भारी मालवाहक वाहनों के भार को बिना किसी संरचनात्मक क्षति के सहन करने की क्षमता रखता है। 254 लाख मैन-डेज का श्रम और लाखों टन उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री एक्सप्रेसवे को सुरक्षा की दृष्टि से भरोसेमंद बनाती हैं। डिजाइन क्रस्ट तकनीक से रखरखाव की लागत में भी कमी आएगी। यात्रा को आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अत्याधुनिक स्विस सेंसर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

अहमदाबाद जा रहे बच्चों की तस्करी का मामला, उज्जैन-नागदा में 26 नाबालिगों को रेस्क्यू किया गया

उज्जैन उज्जैन रेलवे स्टेशन पर गुरुवार रात बच्चों की तस्करी की सूचना पर बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। अंत्योदय एक्सप्रेस ट्रेन को उज्जैन और फिर नागदा स्टेशन पर रोककर पुलिस, बाल कल्याण समिति (CWC) और अन्य विभागों की टीम ने 26 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। जानकारी के मुताबिक, बाल कल्याण समिति को सूचना मिली थी कि करीब 100 बच्चों को मजदूरी के लिए मुजफ्फरनगर से अहमदाबाद ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही उज्जैन में चार थानों का बल, आरपीएफ, जीआरपी, श्रम विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम को अलर्ट किया गया। गुरुवार रात करीब 11 बजे जैसे ही अंत्योदय एक्सप्रेस उज्जैन स्टेशन पहुंची, टीम ने ट्रेन में सर्चिंग शुरू की। करीब आधे घंटे तक 50 से अधिक बच्चों और उनके साथ मौजूद लोगों से पूछताछ की गई, जिसमें शुरुआती तौर पर 4 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। इसी दौरान ट्रेन आगे बढ़ गई। रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहीं सीएसपी दीपिका शिंदे ने तत्काल नागदा स्टेशन को सूचना देकर ट्रेन रुकवाई। वहां एक घंटे तक चली सर्चिंग के बाद 22 और नाबालिग बच्चों को ट्रेन से उतारा गया। इस तरह कुल 26 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। नागदा से उतारे गए सभी बच्चे नाबालिग बताए जा रहे हैं, जिनमें से दो की उम्र 14 साल से भी कम है। सभी बच्चों को फिलहाल उज्जैन जीआरपी को सौंप दिया गया है। परिजनों से संपर्क कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, वहीं बच्चों को फिलहाल CWC उज्जैन में रखा जाएगा। पुलिस को आशंका है कि बच्चों को मजदूरी के लिए गुजरात ले जाया जा रहा था, हालांकि कुछ बच्चे सोमनाथ और अन्य स्थानों पर घूमने जाने की बात भी कह रहे हैं। मामले की जांच जारी है। श्रम विभाग की सहायक आयुक्त राखी जोशी के अनुसार, सूचना थी कि चार लोग 100 से अधिक नाबालिगों को गुजरात ले जा रहे हैं। फिलहाल यह पता लगाया जा रहा है कि बच्चों को किस उद्देश्य से और किन लोगों द्वारा ले जाया जा रहा था।

पठानकोट में ट्रैफिक एडवाइजरी लागू, खाली ट्रकों को रात 9 बजे तक प्रवेश की अनुमति नहीं

पठानकोट  गर्मी के मौसम में शाम के समय बाजारों में बढ़ती भीड़ और भारी वाहनों की आवाजाही को देखते हुए पठानकोट पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। पुलिस का कहना है कि गर्मी के चलते लोग देर शाम को खरीदारी के लिए बाजारों में पहुंच रहे हैं, जिससे ट्रैफिक का दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में भारी वाहन जिनमें ट्रक, टिप्पर, ट्राला, ट्रैक्टर-ट्राली और कैंटरों के शहर से गुजरने से हादसे बढ़ सकते हैं। इस कारण बड़े वाहनों के लिए शहर में एंट्री का समय निर्धारित किया गया है। पुलिस ने खाली ट्रक, टिप्पर और ट्रैक्टर-ट्रॉली जो वाहन परमानंद और सुंदरचक साइड से कीड़ी मंगियाल व अन्य क्षेत्रों की ओर रेत, बजरी या अन्य खनिज सामग्री लेने जाते हैं, वे रात 9 बजे से पहले शहर की सीमा में प्रवेश नहीं करेंगे। लोड वाहन 10 बजे से शहर में नहीं होंगे एंटर जिला पुलिस की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि जो वाहन क्रशरों से खनिज सामग्री लेकर निकलते हैं, उन्हें रात 10 बजे से पहले शहर से निकलने की अनुमति नहीं होगी। अगर कोई वाहन नियमों के खिलाफ शहर में दिखा तो कार्रवाई की जाएगी। दुर्घटनाओं को रोकना पुलिस का मुख्य उद्देश्य पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों का मुख्य उद्देश्य आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाना है। सभी वाहन चालकों और ट्रांसपोर्टरों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने के लिए कहा गया है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या दुर्घटना से बचा जा सके। नियम ना माने को होगी सख्त कानूनी कार्रवाई पठानकोट पुलिस ने चेतावनी दी है कि आदेशों का उल्लंघन करने वाले चालकों और ट्रांसपोर्टरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, आम लोगों से भी अपील की गई है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें और अपनी यात्रा के दौरान सुरक्षा को प्राथमिकता दें।