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पंजाब शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए शेड्यूल जारी: शिक्षा विभाग ने दी 26 अप्रैल की हरी झंडी

चंडीगढ़. पंजाब राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। शिक्षा विभाग ने पंजाब शिक्षक पात्रता परीक्षा (P-TET) के आयोजन के लिए 26 अप्रैल की तारीख तय की है। लंबे समय से इस परीक्षा का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अब अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने का समय आ गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा का आयोजन राज्य भर के विभिन्न केंद्रों पर पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाएगा। प्रवेश पत्र और परीक्षा केंद्र का विवरण परीक्षा के सफल संचालन के लिए विभाग द्वारा सभी जरूरी प्रबंध पूरे कर लिए गए हैं। उम्मीदवार आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपने रोल नंबर और परीक्षा केंद्र की स्थिति देख सकते हैं। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि अभ्यर्थी परीक्षा शुरू होने से कम से कम एक घंटा पहले निर्धारित केंद्र पर पहुँचें। प्रवेश पत्र के बिना किसी भी स्थिति में परीक्षा हॉल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही, पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड या अन्य वैध दस्तावेज ले जाना अनिवार्य है। परीक्षा के दौरान सुरक्षा और पारदर्शिता शिक्षा विभाग ने नकल रहित परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी रहेगी और जैमर की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। परीक्षा केंद्रों के आसपास धारा 144 लागू करने और बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि में संलिप्त पाए जाने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है। भविष्य के शिक्षकों के लिए बड़ी उम्मीद P-TET परीक्षा पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक अहम कदम है। इस परीक्षा को पास करने वाले अभ्यर्थी राज्य के विभिन्न सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के लिए पात्र हो जाएंगे। पिछले कुछ समय से रुकी हुई भर्ती प्रक्रियाओं के बाद, इस परीक्षा के आयोजन से युवाओं में रोजगार की नई उम्मीद जगी है। शिक्षा विशेषज्ञों ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे अंतिम समय में पुनरावृत्ति पर ध्यान दें और परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन का विशेष ख्याल रखें।  

MP सरकार का बड़ा कदम: किसानों के लिए आई खुशखबरी, तुरंत जानिए नया फैसला

भोपाल  मध्यप्रदेश के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने गेहूं उपार्जन के लिए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख 6 दिन बढ़ाकर अब 30 अप्रैल 2026 कर दी है। पहले यह अवधि 24 अप्रैल तक निर्धारित थी। सरकार के इस फैसले से उन किसानों को राहत मिलेगी, जो अब तक अपनी उपज बेचने के लिए स्लॉट बुक नहीं करा पाए थे। इसके साथ ही सरकार ने स्लॉट बुकिंग की क्षमता भी बढ़ा दी है। अब किसान एक बार में 1000 क्विंटल की जगह 1500 क्विंटल तक गेहूं विक्रय के लिए स्लॉट बुक कर सकेंगे। इससे बड़े किसानों और अधिक उत्पादन करने वालों को सीधा फायदा मिलेगा। प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी का कार्य तेजी से जारी है। अब तक 1 लाख 30 हजार 655 किसानों से 57 लाख 13 हजार 640 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है। इसके बदले किसानों के बैंक खातों में 355 करोड़ 3 लाख रुपए की राशि भी ट्रांसफर की जा चुकी है। वहीं, 4 लाख 22 हजार 848 किसानों ने 1 करोड़ 82 लाख 96 हजार 810 क्विंटल गेहूं विक्रय के लिए स्लॉट बुक करा लिया है। किसानों की सुविधा के लिए प्रदेशभर में 3171 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं, जहां छायादार बैठने की व्यवस्था, पेयजल, बारदाना, तौल कांटे, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट और गुणवत्ता जांच उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार वर्ष 2026-27 में किसानों से 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस सहित कुल 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीद रही है। उपार्जन के लिए जूट बारदानों के साथ पीपी और एचडीपी बैग की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। इस वर्ष रिकॉर्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया है, जो पिछले साल की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। पिछले वर्ष लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था, जबकि इस बार सरकार ने 78 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का लक्ष्य रखा है। सरकार का कहना है कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए खरीदी केंद्रों पर सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं, ताकि समर्थन मूल्य का लाभ समय पर हर पात्र किसान तक पहुंच सके।

PSEB का बड़ा विजन: ‘क्रिएटर्स, नॉट कंज्यूमर्स’ मंत्र के साथ संपन्न हुआ दो दिवसीय नेशनल AI सम्मेलन

चंडीगढ़.  पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) ने चंडीगढ़ स्थित सीआईआई उत्तरी क्षेत्र मुख्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन का सफल आयोजन किया। इस कार्यक्रम का समापन गूगल और इंटेल द्वारा आयोजित व्यावहारिक कार्यशालाओं के साथ हुआ, जिसने पंजाब की शिक्षा प्रणाली में एआई को गहराई से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाया। इस सम्मेलन ने नीति निर्माताओं, शिक्षकों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर कक्षाओं में एआई के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग का मार्ग प्रशस्त किया। छात्रों के लिए 'निर्माता' बनने का विजन PSEB के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह ने एआई के नैतिक उपयोग पर विशेष बल देते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग सीखने की गुणवत्ता बढ़ाने और छात्रों की समस्या समाधान कौशल को विकसित करने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे तकनीक के केवल उपभोक्ता बनकर न रहें, बल्कि इसके निर्माता बनें। डिजिटल युग में एआई उपकरणों को सही मित्र की तरह चुनने की सलाह देते हुए उन्होंने स्पष्ट कानूनी और नैतिक ढांचे के भीतर सीखने की प्रक्रियाओं को मजबूत करने का आह्वान किया। गूगल और इंटेल की विशेष कार्यशालाएं सम्मेलन के दौरान गूगल के सत्रों ने शिक्षा में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका और जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया। इसके साथ ही, इंटेल द्वारा 'कार्यस्थल पर एआई' विषय पर आयोजित कार्यशाला में 112 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस सत्र में डेटा गोपनीयता और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सरकारी ढांचे के भीतर एआई उपकरणों को प्रभावी ढंग से तैनात करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। नेतृत्व और अकादमिक अखंडता पर चर्चा स्कूल प्रमुखों के लिए आईकेजी पीटीयू द्वारा आयोजित 'स्कूल लीडर्स के लिए एआई' कार्यशाला में एआई उपकरणों को संस्थागत प्रबंधन में शामिल करने के तरीकों पर चर्चा की गई। इसमें एआई-जनित सामग्री की पहचान करने और एआई-सक्षम वातावरण में अकादमिक अखंडता बनाए रखने की चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया। नीव एआई (Neeev AI) द्वारा संचालित छात्र-केंद्रित कार्यशाला ने युवाओं को एआई अनुप्रयोगों के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया और उन्हें भविष्य के करियर विकल्पों के लिए प्रेरित किया। भविष्य की डिजिटल चुनौतियों की तैयारी चेयरमैन ने उल्लेख किया कि इस सम्मेलन के माध्यम से छात्रों को एआई तकनीक के निर्माण की जटिल प्रक्रियाओं और इसके पीछे आवश्यक कौशल सेट के बारे में गहराई से बताया गया। पंजाब के छात्रों ने इस उभरती तकनीक के प्रति जबरदस्त जिज्ञासा और अनुकूलन क्षमता दिखाई है। यह पहल न केवल छात्रों के तकनीकी ज्ञान को बढ़ाएगी, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ-साथ एक सुरक्षित और नवाचार-आधारित डिजिटल भविष्य का निर्माण करने में भी सक्षम बनाएगी।

उज्जैन के इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव, सिंहस्थ के लिए 2,451 करोड़ से पीने के पानी से सीवरेज तक सब होगा चकाचक

उज्जैन  बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन को वैश्विक स्तर के धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए सरकार ने मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना और घाटों का विस्तार करना है। इसके लिए ₹2,698 करोड़ की भारी-भरकम राशि आवंटित की गई है, जो नदी के जीर्णोद्धार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर खर्च होगी। गंदे पानी से मिलेगी मुक्ति शिप्रा में मिलने वाले कान्ह नदी के प्रदूषित पानी को रोकने के लिए ₹919 करोड़ का क्लोज्ड-डक्ट डायवर्जन प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसके तहत 30 किलोमीटर लंबी नहर और टनल प्रणाली बनाई जाएगी। इसके अलावा, ₹614 करोड़ के सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी प्रोजेक्ट के जरिए 51 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी का भंडारण और विनियमन किया जाएगा, जिससे नदी में जल स्तर बना रहे। 2.5 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए बन रहे हैं नए घाट आगामी सिंहस्थ और प्रमुख स्नान पर्वों को देखते हुए घाटों का अभूतपूर्व विस्तार किया जा रहा है। ₹778 करोड़ की लागत से 29.21 किलोमीटर नए घाट विकसित किए जाएंगे। वहीं, पुराने 9 किलोमीटर के घाटों को अपग्रेड किया जा रहा है ताकि भीड़ के दिनों में एक साथ 2.5 करोड़ श्रद्धालु सुरक्षित रूप से स्नान कर सकें। मेडिकल कॉलेज और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का तोहफा केवल नदी ही नहीं, बल्कि शहर के ढांचे को भी आधुनिक बनाया जा रहा है: स्वास्थ्य: ₹592 करोड़ की लागत से 500 बेड का मेडिकल कॉलेज बनेगा। पर्यटन और व्यापार: ₹284 करोड़ से यूनिटी मॉल और पर्यटन सर्किट, उज्जैन-ओंकारेश्वर-महेश्वर-मांडू का विकास। शहरी सुविधाएं: ₹2,451 करोड़ पेयजल, सीवरेज और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए। इसमें 250 MLD का ट्रीटमेंट प्लांट और 700 किमी लंबा पाइपलाइन नेटवर्क शामिल है।

रायपुर:महतारी वंदन योजना से पहाड़ी कोरवा परिवारों की तकदीर बदल रही है

रायपुर : महतारी वंदन योजना से संवर रही पहाड़ी कोरवा परिवारों की तकदीर बकरी पालन बना आजीविका का सशक्त माध्यम, मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार रायपुर प्रदेश सरकार की फ्लैगशिप ’महतारी वंदन योजना’ प्रदेश की महिलाओं के लिए न केवल आर्थिक संबल, बल्कि स्वावलंबन का नया आधार बन रही है। विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय की श्रीमती करियो के जीवन में आई खुशहाली लेकर आई है। अम्बिकापुर विकासखण्ड के ग्राम रामनगर की रहने वाली श्रीमती करियो ने योजना से प्राप्त सहायता राशि का सदुपयोग कर न केवल अपना भविष्य संवारा है, बल्कि अपने पूरे परिवार की स्थिति को बेहतर बनाया है। योजना की राशि को बनाया आत्मनिर्भरता माध्यम श्रीमती करियो बताती हैं कि पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। दैनिक खर्चों के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ता था। महतारी वंदन योजना के लागू होने के बाद, जब उनके खाते में राशि आनी शुरू हुई, तो उन्होंने इसे घरेलू खर्चों में लगाने के बजाय निवेश का रास्ता चुना। उन्होंने इस राशि को सहेज कर बकरियां खरीदीं और पशुपालन शुरू किया। बकरी पालन से मिली आर्थिक मजबूती अपनी सफलता साझा करते हुए श्रीमती करियो ने बताया कि मैंने योजना के पैसों से बकरियां खरीदीं और साल भर उनकी देखभाल की। अब मेरे पास छह बकरियां हैं। बकरियां समय-समय पर बच्चे देती हैं, जिससे उनकी संख्या बढ़ती जा रही है। अब मुझे इनसे निरंतर लाभ मिल रहा है और मैंने अपना गुजारा इन्हीं के माध्यम से सुरक्षित कर लिया है। परिवार की खुशहाली और बेहतर खान-पान आर्थिक स्थिति सुधरने से श्रीमती करियो अब अपने पति और नाती-पोतों की बेहतर देखभाल कर पा रही हैं। वे कहती हैं कि पहले और अब के जीवन में बड़ बड़ा बदलाव आ गया है। अब घर में अच्छा खान-पान है और बच्चों का भविष्य सुरक्षित हुआ है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, यह सब सरकार की मदद से संभव हो पाया है, वरना हमारे लिए यह सब सोच पाना भी कठिन था। योजना के लिए जताया आभार अपनी और अपने परिवार की बदलती तस्वीर देख श्रीमती करियो ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना ने उन्हें समाज में सम्मान से जीने का अवसर दिया है। उनके अनुसार, यह योजना ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

13 राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी होंगे IAS, सूची जारी; गैर-राप्रसे अधिकारियों के लिए निराशा

भोपाल  मध्य प्रदेश में बहुत जल्द राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) अधिकारियों को एक बड़ी सौगात मिल सकती है। दरअसल मध्य प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पदोन्नत करने के लिए प्रक्रिया तेज हो गई है और आने वाले समय में इन अधिकारियो को ये तोहफा मिल सकता है। 13 राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को IAS पद पर पदोन्नति मिलने के आसार दरअसल मध्य प्रदेश में जल्द ही 13 राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को आईएएस पद पर पदोन्नति मिल सकती है लेकिन इस बार भी गैर-राप्रसे अधिकारियों को मायूसी ही मिलेगी। दरअसल गैर-राप्रसे अधिकारियों को इस बार भी मौका नहीं मिलने की खबर है। जिससे  इस  मामले का काफी चर्चा हो रही है । राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति देने के लिए जल्द ही विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक आयोजित होगी, जिसमें 13 पदों पर चयन किया जाएगा लेकिन इसमें Non-SAS अधिकारियों को पदोन्नति का मौका नहीं मिलेगा। राप्रसे संघ (SAS)  के विरोध के चलते Non-SAS अधिकारियों प्रक्रिया से बाहर दरअसल राप्रसे संघ के विरोध के चलते यह प्रक्रिया केवल SAS अधिकारियों तक ही सीमित हो गई है। जानकारी के अनुसार, 13 पदों के लिए कुल 39 अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाएगा।  इसी आधार पर सूची को तैयार करके आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा गया है। इन 39 नामों में से 13 नामों पर लगेगी मुहर IAS अवार्ड के लिए होने वाली DPC में जिन 39 नामों पर विचान मंथन होगा वो इस तरह से हैं.. इच्छित गढ़पाले, जयेंद्र कुमार विजयावत, डॉ. अभय सिंह खरारी, रजनीश कसेरा, एकता जायसवाल, हृदयेश कुमार श्रीवास्तव, लता शरणागत, महीप किशोर तेजस्वी, मिलिंद कुमार नागदेवे, राज कुमार खत्री, कृष्ण कुमार रावत, प्रियंका गोयल, अभिषेक दुबे, नरोत्तम प्रसाद भार्गव, निधि सिंह राजपूत, निमिषा जायसवाल, संदीप कुमार सोनी, रिंकिश कुमार वैश्य, माया अवस्थी, भूपेंद्र कुमार गोयल, मनोज मालवीय, कमल चंद्र नगर, मिनिषा पांडेय, इला तिवारी, सपना एम. लोवंशी, नीता राठौर, शैलेंद्र सिंह सोलंकी, रानी पासी, रंजना देवड़ा, माधवी नागेंद्र, वर्षा सोलंकी,विवेक कुमार रघुवंशी, प्रदीप जैन, अखिलेश कुमार जैन, विशाल चौहान, मेहताब सिंह गुर्जर, अतेंद्र सिंह गुर्जर सुरभि तिवारी और वंदना मेहरा है।  लिहाजा GAD  ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है और अब नजरें DPC बैठक पर टिकी हैं। इसमें ही 39 नामों में से 13 अधिकारियों को IAS बनने का अवसर मिलेगा। इस बार भी गैर-राप्रसे अधिकारियों को दिल छोटा करके रहना पड़ेगा।

चंदेरी में हवाई सेवा की शुरुआत, बॉलीवुड सिटी को मिलेगा नया कनेक्टिविटी तो सीएम की बड़ी सौगात

चंदेरी पर्यटन के नए युग की शुरुआत होने जा रही है। प्रदेश में अंतरराज्यीय पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मप्र टूरिज्म बोर्ड द्वारा निजी संस्था जेट सर्व एविएशन के सहयोग से पीएमश्री पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा का संचालन किया जा रहा है।  चंदेरी में आज से पीएमश्री पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा शुरू हो सकती है। दरअसल यह सेवा पूर्व में 12 फरवरी से शुरू होनी थी, लेकिन कुछ कारणवश यह शुरू नहीं हो सकी। इसके बाद एक बार फिर 19 अप्रेल से इसे शुरू किया जाना प्रस्तावित है। चंदेरी बन चुकी है बॉलीवुड नगरी चंदेरी में आने वाले पर्यटको और यहां होने वाली फिल्मों की शूटिंग के लिए बड़े बडे शहरों से कलाकार आते हैं। साथ ही विदेशा सैलानी भी यहां पहुंचते हैं। ऐसे में अभी तक उनके पास दो ही मार्ग थे,जिसमें ट्रेन का मार्ग ललितपुर जो युपी में आता है वहां से सुगम था। वहीं सड़क मार्ग। ऐसे में पीएमश्री हेलीकॉप्टर सेवा से यहां आने वाले सैलानियों को सुविधा होगी। वहीं ओरछा तक के लिए यह सेवा रहेगी,जिसमें जिलेवासी भी सफर कर सकते हैं। कल से शुरू होगी सेवा मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा निजी संस्थानों के सहयोग से पीएमश्री पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा की शुरुआत 19 अप्रेल से की जा रही है। इसका शुभारंभ आज मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा किया जाना है। रविवार सुबह 9.30 बजे स्टेट हैंगर भोपाल से इसका शुभारंभ किया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा स्टेट हैंगर भोपाल से ओरछा और चंदेरी के लिए हेलीकॉप्टर का फ्लैग ऑफ किया जाना प्रस्तावित है। चंदेरी और ओरछा में शुरू हो जाएगी हेलीकॉप्टर सेवा इससे भोपाल से चंदेरी और ओरछा के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं की शुरुआत हो जाएगी। जिसके संबंध में अपर प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड ने पत्र भी जारी किया है। अब देखना यह है कि यह सेवा शुरू होती है या फिर इसकी तारीख में फिर से आगे बढ़ाई जा सकती है। बढ़ेगा रोजगार, पर्यटन को मिलेगा लाभ मध्य प्रदेश देश के बेस्ट टूरिज्म स्टेट में से एक है। जहां हर साल लाखों टूरिस्ट आते हैं। ऐसे में पीएमश्री योजना के तहत हवाई सेवा शुरू होने का सबसे बड़ा लाभ एमपी टूरिज्म को ही मिलेगा। इस सेवा के शुरू होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि यहां आने वाले टूरिस्ट की संख्या में इजाफा दर्ज किया जा सकता है। इसका सीधा असर यह होगा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। स्थानीय अर्थव्यस्था को बूम मिलेगा और लोगों के जीवन स्तर में सुधार देखने को मिलेगा। बता दें कि चंदेरी मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले में एक छोटे शहर जैसा है। ऐतिहासिक स्थल है और अपनी चंदेरी की साड़ियों के लिए जाना जाता है। दुनिया भर में मशहूर यह शहर अब सिर्फ चंदेरी की साड़ियों के लिए ही नहीं बल्कि यहां होने वाली बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग के लिए भी एक अनोखी पहचान स्थापित कर चुका है। वहीं ओरछा भी अब ऐतिहासिक और राजा राम की नगरी कहलाने वाला ओरछा भी इस दौड़ में आगे बढ़ रहा है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़ा ऐलान: 10वीं-12वीं बोर्ड विद्यार्थियों को मिलेगा द्वितीय अवसर परीक्षा

10वीं-12वीं बोर्ड के विद्यार्थियों को द्वितीय अवसर परीक्षा का मिलेगा मौका : मुख्यमंत्री डॉ. यादव अनुपस्थित, अनुत्तीर्ण और अंक सुधारने के इच्छुक विद्यार्थी ले सकेंगे लाभ 22 अप्रैल तक किया जा सकेगा आवेदन 7 से 25 मई तक आयोजित होगी परीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व और स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों के परिणामस्वरूप प्रदेश के बच्चों ने माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया है। शासकीय स्तर पर की गई पहल के साथ-साथ यह उपलब्धि विद्यार्थियों और शिक्षकों की कड़ी मेहनत का प्रमाण भी है। इस वर्ष किसी भी छात्र का परीक्षाफल पूरक घोषित नहीं किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अब विद्यार्थियों के लिए द्वितीय परीक्षा आयोजित की जा रही है। जो विद्यार्थी अनुपस्थित रहे, अनुत्तीर्ण हुए या अंक सुधारना चाहते हैं, वे निराश न हों, सरकार उनके साथ खड़ी है। "द्वितीय अवसर परीक्षा" 7 से 25 मई तक आयोजित होगी। राज्य सरकार द्वारा विद्यार्थियों को पिछली बार से अधिक परिश्रम और बेहतर करने के लिए एक मौका और दिया गया है। अनुत्तीर्ण हुए बच्चों के माता-पिता को ऐसे मौके पर अपने बच्चे के साथ खड़े होने और उन्हें हौसला देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि आज की असफलता से निराश होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। जीवन की राह में छोटी-मोटी असफलताएं हमें और अधिक मजबूत बनाने के लिए आती है। गिरकर संभलने वाला ही असली विजेता कहलाता है। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित की जा रही द्वितीय अवसर परीक्षा में ऐसे छात्र जो मंडल की प्रथम परीक्षा में एक या अधिक विषयों में अनुपस्थित/अनुत्तीर्ण रहे हों, सम्मिलित हो सकेंगे। ऐसे परीक्षार्थी जो किसी विषय में उत्तीर्ण हो गए हों, वे भी अंक सुधारने के लिए द्वितीय अवसर परीक्षा में सम्मिलित हो सकते हैं। परीक्षार्थियों का प्रथम एवं द्वितीय अवसर में से जो भी श्रेष्ठ परिणाम होगा, वह अंतिम रूप से मान्य रहेगा। प्रायोगिक विषयों में किसी छात्र को प्रायोगिक और आंतरिक परीक्षा के केवल अनुत्तीर्ण भाग में शामिल होने की पात्रता होगी। द्वितीय अवसर परीक्षा में परीक्षार्थी को विषय परिवर्तन की अनुमति नहीं होगी। द्वितीय अवसर परीक्षा में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन 22 अप्रैल रात 12 बजे तक एम.पी. ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भरे जा सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने वाले देश का पहला राज्य बना है। प्रदेश में प्राइमरी स्तर पर 'ड्रॉप आउट रेट' शून्य (Zero) हो गया है। प्रदेश में 369 सर्वसुविधायुक्त सांदीपनी विद्यालय और 730 पीएम स्कूल, शालेय शिक्षा की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं। शिक्षा के लिए बजट में 36 हज़ार 730 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष से 11% अधिक है। यह निवेश अगली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर 8 लाख 50 हज़ार से अधिक बच्चों की फीस राज्य सरकार भर रही है, ताकि कोई भी बच्चा संसाधनों की कमी के कारण पीछे न रहे।  

भोपाल मेट्रोपॉलिटन का विस्तार: 12,098 स्क्वायर किमी में 6 जिलों के 2510 गांव शामिल, नोटिफिकेशन जारी

 भोपाल  भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का दायरा 12,098 वर्ग किलोमीटर का होगा। इसमें छह जिलों के 2510 गांवों को शामिल किया है। भूमि के क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे कम हिस्सा नर्मदापुरम का है तो भोपाल से अधिक सीहोर और राजगढ़ का क्षेत्र रखा गया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन की अधिसूचना जारी होने के साथ ही अब प्रतिनियुक्ति पर अधिकारी और कर्मचारियों को लिया जाएगा। छह जिलों में तहसीलवार गांवों की जारी की गई अधिसूचना में भोपाल जिले में बैरसिया तहसील के 210 गांव, हुजूर तहसील के 257 गांव और कोलार तहसील के 60 गांव शामिल किए गए हैं। इसी तरह सीहोर जिले में आठ तहसील आष्टा, बुधनी, दोराहा, इच्छावर, जावर, श्यामपुर, रेहटी व सीहोर। रायसेन जिले में तीन तहसील गौहरगंज, रायसेन, सुल्तानपुर। राजगढ़ में सात तहसील ब्यावरा, खुजनेर, नरसिंहगढ़, पचोर, राजगढ़, सारंगपुर, सुठालिया। विदिशा में दो तहसील गुलाबगंज और विदिशा। नर्मदापुरम में पांच तहसील दोलारिया, होशंगाबाद गांव, इटारसी, माखन नगर, नर्मदापुरम शामिल की गई है। बता दें कि मध्य प्रदेश मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट 2025 को मई 2025 में कैबिनेट की मंजूरी मिली और अगस्त 2025 में विधानसभा से इसे पारित किया गया। किस जिले में कितनी तहसीलें अब भोपाल में वहीं, रायसेन जिले की बात करें तो इससे 3 तहसीलें जिनमें गौहरगंज, रायसेन, सुल्तानपुर रहेंगी। इसके अलावा, राजगढ़ जिले में 7 तहसीलें, जिनमें ब्यावरा, खुजनेर, नरसिंहगढ़, पचोर, राजगढ़, सारंगपुर, सुठालिया। विदिशा में दो तहसील गुलाबगंज और विदिशा। नर्मदापुरम में 5 तहसील दोलारिया, होशंगाबाद गांव, इटारसी, माखन नगर, नर्मदापुरम को शामिल किया गया है। मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट को 2025 में मिली मंजूरी आपको बता दें कि, मध्य प्रदेश मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट 2025 को मई 2025 में मोहन कैबिनेट की मंजूरी मिली थी और अगस्त 2025 में विधानसभा से इसे पारित किया गया था। क्षेत्रफल के हिसाब से किस जिले से कितना क्षेत्र जिला — क्षेत्र (वर्ग किमी) — प्रतिशत -सीहोर– 3302 — 50.46% -राजगढ़ — 2812– 46.61% -रायसेन– 2422– 28.57% -भोपाल — 2275– 82.25% -विदिशा– 804– 11.01% -नर्मदापुरम — 480 — 7.16% मुंबई से बड़े क्षेत्र में भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का विस्तार भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन देश की आर्थिक मुंबई से भी बड़े इलाके में डेवलप किया जा रहा है, जिसमें राजधानी भोपाल और इसके पड़ोसी जिले रायसेन, सीहोर, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम की कुल 12 हजार वर्गकिमी जमीन पर मेट्रोपॉलिटन रीजन का विस्तार किया जाएगा। अगर क्षेत्रफल की बात करें तो भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का एरिया 12,098 वर्ग किमी में फैला रहेगा तो वहीं मुंबई मेट्रोपॉलिटन सिटी 6,300 वर्गकिमी में फैली रहेगी। मेट्रोपॉलिटन रीजन में ये इलाके रहेंगे मेट्रोपॉलिटन रीजन का भोपाल केंद्र बिंदु रहेगा, यानी राजधानी भोपाल ही सेंटर पॉइंट होगा, जिसमें भोपाल की हुजूर, बैरसिया, कोलार तहसील मेट्रोपॉलिटन रीजन में शामिल हुई है. इसके साथ ही सीहोर जिले की इछावर, आष्टा, सीहोर श्यामपुर, जावर को भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का हिस्सा बनाया गया है. इसके साथ ही विदिशा जिले की ग्यारसपुर, गुलाबगंज और विदिशा तहसील को इस रीजन में जगह मिली है। राजगढ़ की नरसिंहगढ़, जीरापुर, ब्यावरा, पिछोर, खुजनेर तहसील को शामिल किया गया है। जबकि नर्मदापुरम की होशंगाबाद गांव, इटारसी, माखन नगर, नर्मदापुरम को जोड़ा है। इसके अलावा रायसेन जिले की औबेदुल्लागंज और रायसेन तहसील को जगह मिली है।

लाड़ली बहनों के लिए सरकार का बड़ा ऐलान, मिलेगा यह खास तोहफा, पूरी डिटेल जानें

भोपाल मध्यप्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए मोहन सरकार एक और बड़ी सौगात की तैयारी में है। अब केवल हर महीने आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि महिलाओं को स्थायी रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया जा रहा है। सरकार की नई योजना के तहत इच्छुक लाड़ली बहनों को गाय-भैंस पालन के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी, ताकि वे डेयरी व्यवसाय से जुड़कर अपनी आय बढ़ा सकें। सूत्रों के मुताबिक, योजना की शुरुआत गोवर्धन पूजा से की जा सकती है। इस योजना के तहत सभी महिलाओं के लिए पशुपालन अनिवार्य नहीं होगा, बल्कि खेती-किसानी और पशुपालन में रुचि रखने वाली महिलाएं ही इसका लाभ ले सकेंगी। सरकार पशुधन खरीदने के लिए आर्थिक मदद देगी, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें। फिलहाल प्रदेश की करीब 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों को हर महीने 1500 रुपए की राशि दी जा रही है, जिस पर सरकार को लगभग 1836 करोड़ रुपए का मासिक भार उठाना पड़ रहा है। विपक्ष लगातार इस राशि को अपर्याप्त बताते हुए 3000 रुपए प्रतिमाह देने के वादे की याद दिला रहा है। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि भविष्य में इस राशि को बढ़ाकर 3000 रुपए तक ले जाने की योजना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि सरकार का उद्देश्य केवल नकद सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। इसी सोच के तहत नवंबर 2026 से महिलाओं को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं। महिला आधारित योजनाओं की समीक्षा के लिए सरकार ने मंत्री निर्मला भूरिया की अध्यक्षता में एक समिति भी बनाई है। इस समिति में मंत्री कृष्णा गौर, प्रतिमा बागरी, राधा सिंह और संपतिया उइके को शामिल किया गया है। समिति इस बात पर काम कर रही है कि महिलाओं को मासिक किस्त के बजाय एकमुश्त सहायता देकर स्थायी काम-धंधे से कैसे जोड़ा जाए, ताकि उनकी आमदनी कई गुना बढ़ सके। सरकार योजना का नाम बदलने पर भी विचार कर रही है। संभावना है कि इसे प्रदेश की किसी ऐसी वीरांगना के नाम पर रखा जाए, जिन्होंने समाज और जनकल्याण के लिए साहसिक कार्य किए हों। हाल ही में नर्मदापुरम के सिवनी मालवा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा था कि प्रदेश की 1.25 करोड़ से अधिक लाड़ली बहनों को अब तक 55 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की सहायता दी जा चुकी है। योजना शुरू होने से अब तक प्रति बहन 40,500 रुपए से अधिक राशि सीधे बैंक खातों में पहुंच चुकी है। सीएम ने भरोसा दिलाया कि बहनों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। सरकार आगे भी हरसंभव मदद करेगी और योजना को और मजबूत बनाया जाएगा।