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सलामत रहें फोन के कंटैक्ट्स

आपके सामने भी कभी इस तरह की स्थिति आई होगी कि आपको अपने जानने वालों से कहना पड़ा हो, मेरा फोन खो गया है… या फिर चोरी हो गया है, आपके पास फलां व्यक्ति का नंबर है क्या… या फिर सोशल साइट्स पर भी इस तरह के पोस्ट देखे जा सकते हैं कि मेरा कंटैक्ट खो गया है आप अपना नंबर शेयर कीजिए…। ऐसे में कई बार लगता है कि अगर कंटैक्ट्स का बैकअप होता, तो इस तरह की समस्या से दो-चार नहीं होना पड़ता। अपने स्मार्टफोन के कंटैक्टस का आप इन तरीकों से बैकअप ले सकते हैं… एंड्रायड फोन सुपर बैकअप: अगर आपके पास एंड्रायड फोन है, तो कंटैक्ट्स बैकअप के लिए सुपर बैकअप एप्लीकेशन का उपयोग कर सकते हैं। इसे यूज करना काफी आसान है। यह कंटैक्ट्स के साथ एसएमएस बैकअप की भी सुविधा देता है। कंटैक्ट्स फोन के इंटरनल स्टोरेज में बैकअप बनता रहता है। आप इसे गूगल ड्राइव में सेव करने के लिए ऑटोमैटिकक अपडेट के ऑप्शन को चुन सकते हैं। अगर आप गूगल कंटैक्ट अपडेट के ऑप्शन को चुनते हैं तो नियमित तौर पर बैकअप बनता रहेगा। हालांकि एप का फ्री वर्जन एड सर्पोटेड है, लेकिन अगर आप एड नहीं चाहते हैं, तो सुपर बैकअप प्रो को परचेज कर सकते हैं। आइओएस माइ कंटैक्ट्स बैकअप प्रो: यह एप्लिकेशन आइओएस डिवाइस यूजर्स के लिए है। इसमें बैकअप व री-स्टोरेशन की आसान सुविधाएं हैं। साथ ही, यह आपके कंटैक्ट्स बैकअप को इमेल एड्रेस पर भी भेजने की सुविधा देता है। फिर आप चाहें, तो उसे ड्रॉपबॉक्स पर भी सेव कर सकते हैं। यहां आप कंटैक्ट्स को वाइ-फाइ के जरिए ब्राउजर पर मैनेज करने के अलावा, रेग्युलर बैकअप और रिमूव का रिमाइंडर भी सेट कर सकते हैं। इस एप्लिकेशन को एपल के एप स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। विंडोज फोन कंटैक्ट्स व मैसेज बैकअप: इस एप्लिकेशन के जरिए विंडोज 8.1 यूजर्स अपने कंटैक्ट्स बैकअप के साथ एसएमएस और एसएमएस का बैकअप एसडी कार्ड में ले सकते हैं। हालांकि विंडोज फोन में क्लाउड-बेस्ड बैकअप फंक्शैनलिटी इन-बिल्ट होता है, लेकिन लोकल बैकअप से फायदा यह है कि आप फोन को तेजी से रिस्टोर कर सते हैं। अगर फोन में कंटैक्ट्स और मैसेज का बड़ा डाटाबेस है और नये फोन में बैकअप लेना चाहतें हैं, तो इस एप्लिकेशन के जरिए क्लाउड स्टोरेज की तुलना में ज्यादा तेजी से फोन में कंटैक्ट बैकअप और मैसेज को रिस्टोर किया जा सकता है। हालांकि इस एप्लिकेशन के लिए आपको माइक्रोएसडी कार्ड की जरूरत पड़ेगी। यह आपके एसडी कार्ड में बैकअप रिस्टोर का फोल्डर बना देगा। यहां कंटैक्ट्स वीसीएफ फॉर्मेट में स्टोर होता है और मैसेज एक्सएमएल फॉर्मेट में। ब्लैकबेरी फ्री कंटैक्ट बैकअप:- ब्लैकबेरी 10 यूजर के लिए फ्री कंटैक्ट बैबअप यूजफूल एप्लिकेशन है। आप सिंगल टैप के जरिए कंटैक्ट का बैकअप ले सकते हैं। इस एप्लिकेशन की खासियत है कि आप चाहें तो पूरे फोन का बैकअप ले सकते हैं। इसके अलावा यह डुप्लिकेट कंटैक्ट्स को मर्ज करने का ऑप्शन भी देता है। आप बैकअप को मेल के जरिए भी भेज सकते हैं। पुराने ब्लैकबेरी फोन यूजर फ्री बैकअप कंटैक्ट एप बाइ अमैरा सॉफ्ट ट्राइ कर सकते हैं। कंटैक्ट्स होंगे ऑटोमैटिक अपडेट 6 डिग्री:- ऑटोमैटिक कंटैक्ट बैकअप के लिए इस एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर आप अपने फोनबुक में कोइ नया कंटैक्ट अपडेट करते हैं, तो यह खुद ही उसे अपडेर कर देगा। इसके अलावा, अगर आपके फ्रेंड्स अलाउ करें, तो यह फ्रेंड्स के फोन में भी कंटैक्ट को सर्च करने का ऑप्शन देता है। आप इस एप की मदद से डुप्लिकेट कंटैक्अ को रिमूव करने के अलावा दूसरे डिवाइस में भी रिस्टोर कर सकते हैं। यह एप आइओएस के साथ एंड्रायड डिवाइस को भी सपोर्ट करता है। एडाप्पट:- यह एप्लिकेशन भी आपके एड्रेस बुक को हमेशा अपटूडेट रखेगा। जब भी कोई फ्रेंड या फिर फैमिली मेंबर कंटैक्ट को अपडेट करता है, तो यह खुद ही एड्रेस बुक को अपडेट कर देगा। यह यूजर को आइडेंटीफाइ करने के लिए इमेल आइडी का इस्तेमाल करता है। एप्लिकेशन डाउनलोड करने के बाद कुछ स्टेप के जरिए आप लोगों को इनवाइट भी कर सकते हैं। इसे डिवाइस के साथ भी आसानी से सिंक किया जा सकता है।  

नौकरियां जाएंगी या इंसान ही खत्म? AI के खिलाफ सड़कों पर उतरे अमेरिकी

जिन आर्टिफ‍िशियल इंटेल‍िजेंस तकनीकों (AI) को जल्‍द से जल्‍द अपनाने के लिए पूरी दुनिया बेताब है। कंपनियां नए-नए मॉडल लॉन्‍च कर रही हैं। उन्‍हीं तकनीकों के खिलाफ दुन‍िया के सबसे शक्‍त‍िशाली देश की जनता सड़कों पर है। वह ओपनएआई से लेकर एंथ्रोपिक तक के दफ्तरों के बाहर जुटकर अपनी आवाज उठा रही है। डर है कि एआई की अनैत‍िक रेस इंसानी वजूद काे खत्‍म कर सकती है। कई और भी चिंताएं हैं, जिन्‍हें लेकर अमेरिका के सैन फ्रांस‍िस्‍को में भारी विरोध-प्रदर्शन देखे गए हैं। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि कंपनियां एआई के जोखिमों को कम करने के लिए जरूरी कदम उठाएं। Stop The AI Race मुह‍िम अमेरिका का सैन फ्रांसिस्‍को टेक्‍नॉलजी का बड़ा गढ़ है। हाल ही में वहां एआई के खिलाफ कुछ ग्रुप्‍स ने बड़ा विरोध-प्रदर्शन किया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारी एआई के जोखिमों को कम करने के लिए फ्रंट‍ियर एआई के विकास को रोकने की मांग कर रहे हैं। Stop the AI Race मुह‍िम के तहत 200 से ज्‍यादा प्रदर्शनकारियों ने अपना मार्च न‍िकाला जो दिग्‍गज कंपनी एंथ्रोपिक के मुख्‍यालय से शुरू होकर ओपनएआई के मुख्‍यालय पर खत्‍म हुआ। क्‍या होता है फ्रं‍ट‍ियर AI एआई के विकास में प्रमुख कंपनियां अब फ्रं‍ट‍ियर एआई को डेवलप करने में जुट गई है। यह सामान्‍य से बहुत अधिक एडवांस है और कहा जाता है कि इंसान से भी बेहतर सोच सकता है। फ्रं‍टि‍यर एआई कोडिंग से लेकर कव‍िताएं लिख सकता है। वह इंसान की भावनाओं को समझकर जवाब दे सकता है। इसे ऐसे तैयार किया जा रहा है कि जरूरत पड़ने पर उन कामों को भी कर पाए, जिसके लिए उसे ट्रेनिंग ही नहीं दी गई है। AI के विरोध में क्‍या हैं लोगों की मांगें     प्रदर्शनकार‍ियों ने फ्रं‍टि‍यर एआई के विकास काे रोकने की मांग की है।     प्रमुख एआई कंपनियों के सीईओ से इस बारे में उनकी प्रतिबद्धता मांगी है।     मांग है कि हरेक एआई लैब को इसके लिए सहमत होना होगा।     लोगों का आरोप है कि एआई लैब्‍स आने सुरक्षा वादों से मुकर रही हैं। किस बात की चिंता लोगों को चिंता है कि इस तरह विकास की गत‍ि को तेज करके इंसान के विलुप्‍त होने का खतरा बढ़ रहा है। याद रहे कि एंथ्रोपिक पिछले महीने अपने उस कमिटमेंट से पीछे हट गई थी जिसमें उसने एआई के खतरनाक होने पर इसके विकास को रोकने की बात कही थी। इस पूरे मामले पर बड़ी कंपनियों ने चुप्‍पी साधी हुई है। वह कोई भी बयान देने से बच रही हैं।

फूल भी करते हैं दवा का काम, इन रोगों में ये हैं रामबाण

फूलों की खूशबू और उनकी सुंदरता तो हम सभी का मन मोह लेती है, लेकिन क्या आप जानते है कि हम फूलों को भी खा सकते हैं। खाने में फूलों का उपयोग भले ही हम सीधे न कर पाएं, लेकिन सही पर फूलों का इस्तेमाल हम कई चीजें में करते हैं, फिर चाहे वह खाना हो या सलाद। हजारो सालों से हम फूलों कि सुंदरता को देखते और महक का आनंद लेते आए हैं। उनके इन्हीं रंगों में उनकी बहुत सारी खूबियां छिपी हुई हैं। अभी तक अधिकांश लोग यही जानते थे कि फूलों का उपयोग सिर्फ इत्र बनाने में होता है,तो आइए जाने कुछ ऐसे ही फूलों को जो हमारे भोजन को स्वादिष्ट बनाते हैं। लैवेंडर फूल-इन खुशबूदार फूलों का इस्तेमाल आइस्क्रीम और दही में किया जाता है। इसका इस्तेमाल एंटीसेप्टिक और बालों की रूसी को रोकने में भी होता है। गुलदाउदी-कैमोमाइल की तरह ही गुलदाउदी का चाय में इस्तेमाल होता है। गुलदाउदी में एंटी ऑक्सीडेंट और मिनरल्स के अलावा एंटी इन्फ्लेमेटरी, एंटी-कार्सनोजेनिक गुण भी पाए जाते हैं। बबूने का फूल (कैमोमाइल)-यह फूल आपको शान्त रखने में मदद करता है, इसीलिए इसका इस्तेमाल चाय में किया जाते है। इसमें एंटीइनफ्लेमेटरी, एंटी-कार्सनोजेनिक और घाव भरने के गुण पाए जाते हैं। गुडहल के फूल-इन फूलों का इस्तेमाल सलाद को गार्निश करने के लिए होता है, इसके अलावा चाय में भी गुड़हल के फूलों का इस्तेमाल होता है। इनमें भरपूर मात्रा में एंटी-आक्सीडेंट पाए जाते हैं जो लो-ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करते हैं। एप्पल और ऑरेंज के फूल-ये दोनों फूल सबसे ज्यादा खाए जाते हैं, इन्हें खाने से कई रोग दूर होते हैं। इसके बारे में कुछ ही लोग जानते हैं, लेकिन इनका उपयोग कम मात्रा में करना चाहिए।  

यूजर्स की हुई मौज! WhatsApp में जल्द दिखेगा नया फीचर, जानिए पूरी डिटेल

नई दिल्ली व्हाट्सप्प अपने प्लेटफॉर्म में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है, जिससे चैटिंग का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी एक ऐसे नए सिस्टम पर काम कर रही है, जिसमें यूजर्स को एक-दूसरे से जुड़ने के लिए अपना मोबाइल नंबर साझा करने की जरूरत नहीं होगी। यह फीचर 2026 तक वैश्विक स्तर पर लॉन्च किया जा सकता है। नए अपडेट के तहत हर यूजर को एक यूनिक यूजरनेम दिया जाएगा, ठीक उसी तरह जैसे Instagram या X (Twitter) पर होता है। इसके बाद किसी से बात करने के लिए फोन नंबर सेव करने की आवश्यकता नहीं होगी। यूजर्स केवल यूजरनेम के जरिए किसी को खोजकर सीधे मैसेज भेज सकेंगे। यह बदलाव आम यूजर्स के साथ-साथ बिजनेस अकाउंट्स के लिए भी काफी उपयोगी साबित हो सकता है। फोन नंबर की भूमिका अभी भी बनी रहेगी हालांकि इस नए सिस्टम के आने के बाद भी फोन नंबर पूरी तरह खत्म नहीं होंगे। उन्हें अकाउंट की सुरक्षा और वेरिफिकेशन के लिए बैकएंड में इस्तेमाल किया जाता रहेगा। यानी नंबर जरूरी तो रहेंगे, लेकिन उन्हें सार्वजनिक रूप से शेयर करना अनिवार्य नहीं होगा। नया फीचर कैसे करेगा काम जब यह फीचर लागू होगा, तब यूजर्स अपने WhatsApp अकाउंट के लिए एक यूनिक यूजरनेम सेट कर सकेंगे। इसके बाद कोई भी व्यक्ति उस यूजरनेम को सर्च करके उनसे संपर्क कर पाएगा, बिना उनका मोबाइल नंबर देखे। यूजर्स को यह विकल्प भी मिलेगा कि वे इस नए फीचर का उपयोग करें या पुराने तरीके से चैटिंग जारी रखें। प्राइवेसी और सुविधा में सुधार इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यूजर्स की प्राइवेसी को होगा। कई लोग अपना फोन नंबर शेयर करने में असहज महसूस करते हैं, ऐसे में यह फीचर उनके लिए काफी मददगार होगा। इससे अनजान लोगों के साथ नंबर साझा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और बातचीत ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी। बिजनेस यूजर्स के लिए फायदेमंद यह फीचर खासतौर पर कंपनियों और बिजनेस अकाउंट्स के लिए भी उपयोगी होगा। वे अपने यूजरनेम के जरिए ग्राहकों से आसानी से जुड़ सकेंगे। इससे कस्टमर सपोर्ट और कम्युनिकेशन पहले से ज्यादा सरल और प्रभावी हो जाएगा। चैटिंग करने का बदल जाएगा तरीका अगर यह फीचर लागू होता है, तो WhatsApp का उपयोग करने का तरीका काफी बदल जाएगा। यूजर्स को ज्यादा नियंत्रण, बेहतर प्राइवेसी और आसान कनेक्टिविटी मिलेगी। यह बदलाव मैसेजिंग के अनुभव को और भी आधुनिक और सुरक्षित बना सकता है।

हेल्दी रहने के लिए डाइट में शामिल करें फाइबर, जानें इसके फायदे

कभी वर्क कभी फोटो शूट तो कभी मार्केटिंग कॉल पर आउटडोर जाना इनके काम में शुमार है। होटल की ब्रैंडिंग के लिए लोगों से मिलना और होटल में ही खाना इनके रुटीन में शामिल होता है। जी हां, होटल्स मार्क कॉम मैनेजर का प्रोफेशन ही कुछ ऐसा है कि इन्हें अपने लिए भी समय नहीं मिलता। ऐसे में यह अपनी सेहत और खानपान का खयाल कैसे रखते हैं, डीडी ने की पड़ताल। साथ ही इनकी लाइफस्टाइल को दुरुस्त करने के लिए डाइटीशियन से जानें कुछ खास टिप्स। दिनचर्या: मेरे दिन की शुरुआत सुबह 7 बजे होती है। मुझे घर से होटल के लिए लगभग 8.30 बजे निकल जाना होता है। 7.30 से 8 के बीच मैं ब्रेकफस्ट करती हूं। सुबह का इतना बिजी शेड्यूल होता है कि कोई एक्सरसाइज या वर्कआउट तक नहीं कर पाती। मैं पिछले एक साल से इस जॉब में हूं। व्यस्तता के कारण वॉक नहीं कर पाती। सुबह भागमभाग रहती है। ब्रेकफस्ट: मैं सुबह 7.45 बजे ब्रेकफस्ट करती हूं जिसमें आमतौर पर एक ग्लास दूध या चाय, कॉर्नफ्लेक्स, फ्रूट्स, ब्रेड बटर या फिर ऑमलेट होते हैं। इससे ज्यादा समय नहीं होता। मैं नॉनवेजटेरियन हूं। मैं होटल पहुंचने के बाद 9.30 तक ग्रीन टी लेती हूं। मन हुआ तो साथ में बिस्किट भी ले लेती हूं। 12.30 बजे तक कोई फल खाती हूं या ज्यादा भूख हो तो लंच जल्दी कर लेती हूं। मैं 2-3 घंटे के अंतर पर थोड़ा-थोड़ा कुछ न कुछ खाती रहती हूं। लंच: आमतौर पर मैं लंच 1 बजे तक कर लेती हूं। होटल में ही खाती हूं, जिसमें दाल, चपाती, सब्जी और दही या सैलेड होते हैं। स्नैक्स: शाम 4-5 बजे कभी कोल्ड कॉफी-बिस्किट या जूस या फिर सैंडविच लेती हूं। कोल्ड कॉफी पंद्रह दिन में एक बार लेती हूं। फिर घर पहुंचकर 7.00-7.30 बजे तक मेयोनीज चिकेन या हैम सैंडविच लेती हूं या फिर 1 ग्लास दूध लेती हूं। मैं सप्ताह में 2-3 दिन रात में या शाम को दूध लेती हूं। डिनर: रात 10 बजे तक डिनर में दाल, रोटी, सब्जी और थोड़ा चावल लेती हूं। जब बाहर जाती हूं तो सिर्फ सैलेड, फ्रूट्स या सूप ही प्रेफर करती हूं। रात 12 बजे तक सो जाती हूं।  

वेट लॉस इंजेक्शन पर 70% की छूट, जानें क्यों गिर रहे हैं दाम

नई दिल्ली भारत में वेगोवी, मौनजारो और ओजेम्पिक जैसी दवाएं वेट लॉस के लिए इस्तेमाल की जा रही थीं. डायबिटीज मैनेज करने वाली इन दवाओं की मासिक कीमत आम आदमी की पहुंच से काफी दूर होती थी लेकिन अब 21 मार्च से ये दवाएं सस्ती हो रही हैं. दरअसल, दुनिया की मशहूर वेट लॉस ड्रग 'सेमाग्लूटाइड' (Semaglutide) का पेटेंट 20 मार्च को खत्म हो रहा है. इसका सीधा मतलब यह है कि अब तक जिस दवा पर चुनिंदा विदेशी कंपनियों का कब्जा था, पेटेंट खत्म होने के बाद अब अब भारत की दिग्गज फार्मा कंपनियां उनके जेनेरिक वर्जन बाजार में उतार सकेंगी. शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक कीमतें करीब 70 फीसदी तक गिर सकती हैं।   5 हजार से कम होंगी कीमतें भारत में अभी इन वेट लॉस इंजेक्शंस का मासिक खर्च 9,000 रुपये से लेकर 28,000 रुपये तक होता है. लेकिन 21 मार्च से शुरू हो रहे 'पेटेंट क्लिफ' (पेटेंट खत्म होना) के बाद ये कीमतें 30 या 50 नहीं, बल्कि सीधे 70 फीसदी तक कम हो सकती हैं।  एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले कुछ समय में यह खर्च घटकर महज 3,000 से 4,000 रुपये प्रति महीना रह जाएगा. जेनेरिक दवाएं इसलिए सस्ती होती हैं क्योंकि कंपनियों को रिसर्च पर अरबों डॉलर खर्च नहीं करने पड़ते, वे सीधे उसी फार्मूले पर दवा तैयार करती हैं जिसकी प्रभावशीलता पहले ही साबित हो चुकी है।  54 से ज्यादा कंपनियां बाजार में उतारेंगी दवा सेमाग्लूटाइड वही साल्ट है जो दुनिया भर में 'ओजेंपिक' और 'वेगोवी' जैसे ब्रांड्स के नाम से मशहूर है. अब तक इसके पेटेंट की वजह से मोनोपॉली बनी हुई थी लेकिन अब भारत की करीब 54 कंपनियां अपनी जेनेरिक वर्जन लाने के लिए तैयार हैं।  रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत की बड़ी दवा कंपनियां जैसे Sun Pharma, Dr Reddy’s, Lupin, Ajanta, Zydus Lifesciences, Natco आदि जेनेरिक सेमाग्लूटाइड इंजेक्शन के लिए रेगुलेटरी तैयारियां काफी आगे बढ़ा चुकी हैं।  इंडस्ट्री अनुमान कहता है कि इतने अधिक ब्रांड मार्केट में आने से न केवल कीमतों पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि डोज, पेन डिवाइस और सर्विस मॉडल के स्तर पर भी कंपनियों के बीच कॉम्पिटिशन दिख सकता है।  शॉर्टकट ना समझें  इंडियन एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और ओबेसिटी एक्सपर्ट ये इंजेक्शन लॉन्च होने के बाद से ही चेतावनी दे रहे हैं कि GLP-1 ड्रग्स को सोशल मीडिया ट्रेंड या जल्दी वजन घटाने का शॉर्टकट मानना खतरनाक हो सकता है. दिल्ली और मुंबई के ओबेसिटी एक्सपर्ट और डॉक्टर्स ने इंटरव्यू में साफ कहा है कि ये इंजेक्शन सिर्फ उन मरीजों के लिए हैं जो क्लिनिकली मोटापे से ग्रस्त हैं यानी BMI, कॉमॉर्बिडिटीज और मेडिकल हिस्ट्री के हिसाब से डॉक्यूमेंटेड मोटापे से जूझ रहे हैं न कि उन लोगों के लिए जिनका उद्देश्य सिर्फ कुछ किलो वजन घटाना है।  भले ही ये इंजेक्शन सस्ते और आसानी से उपलब्ध होने जा रहे हैं लेकिन डॉक्टर्स ने कड़ी चेतावनी भी दी है. यह कोई शॉर्टकट नहीं है जिसे कोई भी अपनी मर्जी से लगा ले. सेमाग्लूटाइड एक पावरफुल मेटाबॉलिक दवा है जो शरीर के हार्मोन्स, ब्लड शुगर और पाचन तंत्र पर सीधा असर डालती है. इसे केवल क्रॉनिक ओबेसिटी (अत्यधिक मोटापा) या गंभीर डायबिटीज के मरीजों को ही इस्तेमाल करना चाहिए।  डॉक्टर्स ने दी ये चेतावनी डायबिटीज के क्षेत्र में जाने-माने नाम डॉ. वी. मोहन ने 'पेटेंट क्लिफ' के बारे में इंटरव्यू के दौरान कहा, 'अब तक इसकी कीमत एक बड़ी बाधा थी, लेकिन मार्च 2026 के बाद जब 40 से ज्यादा कंपनियां बाजार में उतरेंगी, तो यह आम आदमी की पहुंच में होगा. लेकिन इनसे 'स्टोमक पैरालिसिस' जैसे दुर्लभ साइड-इफेक्ट्स भी हो सकते हैं जिससे सावधान रहने की जरूरत है।  पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. अंबरीश मिथल ने आजतक हेल्थ समिट में कहा था, 'सेमाग्लूटाइड' जैसे GLP-1 ड्रग्स केवल शुगर कंट्रोल नहीं करते, बल्कि शरीर का 15 से 18% वजन कम करने में मदद कर सकते हैं लेकिन यह कोई 'मैजिक पिल' नहीं है. इसे बिना डॉक्टर की सलाह के लेना खतरनाक हो सकता है. साथ ही, इसके साथ प्रोटीन डाइट और एक्सरसाइज भी जरूरी है।  एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और महाराष्ट्र टास्क फोर्स के मेंबर डॉ. शशांक जोशी ने इन दवाओं के बारे में कहा था, 'ये दवाएं केवल वजन नहीं घटातीं बल्कि लिवर और पैंक्रियाज में जमा चर्बी को भी कम करती हैं, जिससे डायबिटीज को 'रिमिसन' (खत्म होने की स्थिति) में ले जाना संभव हो सकता है लेकिन बिना एक्सपर्ट की सलाह के बिना इनका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।  बिना डॉक्टरी सलाह के न लें दवा हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन दवाओं को शुरू करने से पहले शरीर के कई टेस्ट जरूरी हैं. इसे केवल एंडोक्रिनोलॉजिस्ट या इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट की देखरेख में ही लिया जाना चाहिए. साथ ही, यह ध्यान रखना जरूरी है कि केवल सेमाग्लूटाइड का पेटेंट खत्म हुआ है. अन्य एडवांस ड्रग्स जैसे 'टिर्जेपेटाइड' (मौनजारो) के दाम फिलहाल कम नहीं होंगे क्योंकि उनका पेटेंट अभी प्रभावी है। 

कौन है दुनिया की सबसे रहस्यमयी AI कंपनी? ईरान हमलों में मदद पर अमेरिका ने किया सम्मानित

अमेरिका ने ईरान पर टार्गेट हमलों में मदद करने वाली एआई कंपनी Palantir टेक्‍नोलजीज को इनाम दिया है और उसके Maven AI सिस्‍टम को अमेरिकी रक्षा विभाग का प्रोग्राम ऑफ रिकॉर्ड यानी आध‍िकारिक कार्यक्रम बनाने का निर्णय लिया है। Palantir को दुनिया की सबसे ‘रहस्‍यमयी’ एआई कंपनी माना जाता है। यह अपनी प्राइवेसी के लिए जानी जाती है और सरकारों को जासूसी व सैन्‍य अभियानों में मदद करती है। Palantir का Maven AI सिस्‍टम पहले से ही अमेरिकी सेना का प्रमुख एआई ऑपरेटिंग सिस्‍टम बना हुआ है। हाल के हफ्तों में इसने ईरान के ख‍िलाफ हजारों की संख्‍या में टार्गेटेड हमलों में मदद की है। अमेरिकी रक्षा विभाग का फैसला हमारे सहयोगी Gadgets Now की रिपोर्ट के अनुसार, रॉयटर्स द्वारा रिव्‍यू किए गए अमेरिका के डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस स्टीव फेनबर्ग का एक ज्ञापन बताता है कि अमेरिकी रक्षा विभाग ने पलान्टिर के 'मेवन' (Maven) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम को एक 'प्रोग्राम ऑफ रिकॉर्ड' (आधिकारिक कार्यक्रम) बनाने का निर्णय लिया है। इस फैसले से मेवन एआई का अमेरिकी सेना में लंबे समय तक इस्‍तेमाल करना तय हो गया है। 2017 में शुरू हुआ था प्रोजेक्‍ट मेवन प्रोजेक्‍ट मेवन को अमेरिकी सरकार ने ही शुरू किया था। तब गूगल इससे जुड़ी थी। रिपोर्टों के अनुसार, गूगल कर्मचारियों को जब यह पता चला कि प्रोजेक्‍ट मेवन के डेवलपमेंट के बाद इसे लोगों को मारने में इस्‍तेमाल किया जा सकता है तो विरोध शुरू हुए और गूगल प्रोजेक्‍ट से पीछे हट गई। बाद में अन्‍य कंपनियों जैसे- Palantir, एमेजॉन वेब सर्विसेज और एंथ्रोपिक ने इस प्रोजेक्‍ट पर काम किया। एंथ्रोपिक इसी साल मेवन एआई से अलग हो गई है। आज यह इतना डेवलप हो गया है कि इसे ‘युद्ध ऑपरेटिंग सिस्‍टम’ के रूप में देखा जाता है। युद्ध क्षेत्र का ‘गूगल मैप्‍स’ बनने का लक्ष्‍य रिपोर्टों के अनुसार, मेवन एआई को युद्ध क्षेत्र का ‘गूगल मैप्‍स’ बनाने का लक्ष्‍य है। जिस तरह गूगल मैप्‍स किसी रास्‍ते के बारे में बताता है, उसी तरह से मेवन एआई बताता है कि दुश्‍मन का ठ‍िकाना कहां है। जो काम पहले इंसानी विश्‍लेषण से होता था, उसे अब एआई कर रहा है और सेकंडों में टार्गेट को ढूंढ लिया जाता है। जानकारी के अनुसार, मेवन एआई की खूबी है कि यह अलग-अलग जगहों से आने वाले डेटा को जोड़कर एक कॉमन इमेज तैयार करता है जिससे युद्ध का पूरा क्षेत्र एक स्‍क्रीन में देखा जा सकता है। मेवन AI के इस्‍तेमाल पर उठते सवाल? मेवन AI के इस्‍तेमाल ने कई सवाल खड़े किए हैं।     क्‍या एआई तय करेगा कि किसे मारना है? हालांकि इस मामले में आखिर फैसला इंसान ही लेता है।     अगर एआई ने कोई गलती की जैसे- ऐसी जगह को न‍िशाना बनवा दिया जहां बच्‍चे या आम इंसान हों तो उसकी जिम्‍मेदारी कौन लेगा?

चेहरे पर बार-बार मुंहासे? समझ लें शरीर दे रहा है इन गंभीर समस्याओं का अलर्ट

अक्सर लोग एक्ने को सिर्फ त्वचा से जुड़ी समस्या मानते हैं और गंदगी से जोड़कर देखते हैं। इसलिए इस समस्या को दूर करने के लिए फेस वॉश और क्रीम की मदद लेते हैं, लेकिन अगर सही स्किन केयर के बावजूद एक्ने बार-बार लौट रहा है, तो समस्या शरीर के अंदर छिपी हो सकती है। अगर शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी हो या हार्मोनल बैलेंस बिगड़ जाए, तो भी इसका असर हमारी त्वचा पर एक्ने के रूप में नजर आ सकता है। आइए जानें बार-बार एक्ने होने के पीछे कौन-से कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। किन वजहों से हो बार-बार लौट आते हैं एक्ने?     हार्मोनल इंबैलेंस- हार्मोनल इंबैलेंस एक्ने होने का सबसे बड़ा कारण है। शरीर में एंड्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ने से ऑयल ग्लैंड ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं, जिसके कारण पोर्स बंद हो जाते हैं। इसके कारण एक्ने होने की समस्या बढ़ जाती हैष     पीसीओएस- महिलाओं  में पीसीओएस या पीरियड्स के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव अक्सर ठुड्डी और जॉलाइन पर एक्ने का कारण बनते हैं।     डाइट- खाने में ज्यादा मीठे और डेयरी प्रोडक्ट्स भी एक्ने की वजह बन सकते हैं। इन फूड आइटम्स से इंसुलिन स्पाइक होता है, जो एक्ने को बढ़ावा देता है।     तनाव और मानसिक सेहत- जब हम तनाव में होते हैं, तो शरीर कोर्टिसोल हार्मोन रिलीज करता है। इस हार्मोन के कारण त्वचा ज्यादा ऑयल प्रोड्यूस करता है। साथ ही, तनाव के कारण नींद पूरी नहीं होती, जिससे त्वचा को रिपेयर होने का समय नहीं मिलता और एक्ने की समस्या गंभीर हो जाती है। बचाव के लिए क्या करें? एक्ने से छुटकारा पाने के लिए सिर्फ स्किन केयर पर ध्यान देना काफी नहीं है। आपको अपनी लाइफस्टाइल और डाइट में भी कुछ सुधार करने होंगे।     डाइट- अपने खाने में से चीनी, मैदा और ऑयली चीजों की मात्रा कम करें। अगर आपको डेयरी प्रोडक्ट्स से भी एक्ने होता है, तो डॉक्टर से इस बारे में बात करें। साथ ही, डाइट में ताजे फल और हरी सब्जियों को ज्यादा मात्रा में शामिल करें।     हाइड्रेशन- हर दिन कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं ताकि टॉक्सिन्स बाहर निकलें। स्किन को हाइड्रेटेड रखने के लिए भी भरपूर मात्रा में पानी पीना जरूरी है।       नींद- रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद लें ताकि हार्मोन बैलेंस बना रहे और तनाव भी कम हो।     सफाई- दिन में दो बार माइल्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें और तकिए का कवर नियमित बदलें।     डॉक्टर से सलाह- अगर आपको बहुत ज्यादा एक्ने की समस्या है, तो डॉक्टर से सलाह लें। वे पीसीओएस या हार्मोनल इंबैलेंस की जांच कर सकते हैं और एक्ने के लिए आपको मेडिकेटेड क्रीम भी दे सकते हैं।  

हर वक्त उदासी क्यों महसूस करती है आज की जनरेशन? रिसर्च में सामने आई सच्चाई

ऑस्ट्रेलिया की क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया है कि अवसाद के शिकार युवाओं के मस्तिष्क और रक्त कोशिकाएं एक असामान्य पैटर्न में काम करती हैं। शोधकर्ता रोजर वरेला के अनुसार, जब ये युवा आराम की स्थिति में होते हैं, तब उनकी कोशिकाएं बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा पैदा करती हैं। लेकिन, जब तनाव के समय या जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त ऊर्जा की मांग होती है, तो ये कोशिकाएं ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने में बुरी तरह संघर्ष करती हैं। इसी असंतुलन की वजह से अवसाद से ग्रसित युवाओं में लगातार थकान और प्रेरणा की कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कैसे हुआ यह बड़ा शोध? यह दिलचस्प शोध 'जर्नल ट्रांसलेशनल सायकिएट्री' में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने 18 से 25 वर्ष की आयु के 18 ऐसे युवाओं के मस्तिष्क स्कैन और रक्त के नमूनों का गहराई से अध्ययन किया जो अवसाद से पीड़ित थे। इसके बाद, उनके डेटा की तुलना उन स्वस्थ व्यक्तियों से की गई जिन्हें अवसाद नहीं था। शोध की मुख्य लेखिका और एसोसिएट प्रोफेसर सुसान्ना टाय ने बताया कि यह इतिहास में पहली बार है जब वैज्ञानिकों ने अवसादग्रस्त युवाओं के मस्तिष्क और रक्तधारा में सीधे तौर पर थकान से जुड़े अणुओं के पैटर्न को ट्रैक किया है। लंबे समय की समस्याओं का मिलता है संकेत इस शोध से यह भी पता चलता है कि अवसाद की बीमारी के शुरुआती चरण में कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा काम कर रही होती हैं। यही अत्यधिक दबाव आगे लंबे समय तक चलने वाली समस्याओं का मुख्य कारण बन सकता है। लेखिका ने स्पष्ट किया कि 'थकान' प्रमुख अवसाद विकार का एक ऐसा आम लक्षण है जिसका इलाज करना सबसे ज्यादा मुश्किल होता है। भविष्य के लिए एक नई उम्मीद इस अध्ययन ने चिकित्सा जगत में एक नई उम्मीद जगाई है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इन नए निष्कर्षों की मदद से प्रमुख अवसाद विकार का पहले ही पता लगाया जा सकेगा। इसके अलावा, इससे संभावित रूप से अधिक लक्षित और हर मरीज की जरूरत के हिसाब से व्यक्तिगत उपचार तैयार करने के रास्ते खुलेंगे, जिससे लोगों को इस बीमारी से बाहर निकलने में सही मदद मिल सकेगी।  

WhatsApp के नए फीचर से चैटिंग होगी आसान, ऑटोमेटिक ट्रांसलेशन की टेस्टिंग iOS पर शुरू

मुंबई  WhatsApp पर चैटिंग करना और भी आसान होने जा रहा है, जिसमें यूजर्स आसानी से दूसरी भाषा में बात करने वाले लोगों से चैट कर पाएंगे. इसके लिए ऑटोमेट्रिक ट्रांसलेशन फीचर पर काम हो रहा है. इसकी जानकारी Wabetainfo ने शेयर की है।  वॉट्सऐप के अपकमिंग फीचर को ट्रैक करने वाले पोर्टल Wabetainfo ने बताया है कि ऐपल के ऑपरेटिंग सिस्टम iOS प्लेटफॉर्म के लिए ऑटोमेटिक ट्रांसलेशन फीचर पर टेस्टिंग हो रही है।  ट्रांसलेशन फीचर के तहत यूजर्स  21 भाषाओं में से किसी एक का चुनाव करना होगा. इसके बाद अपनी लैंग्वेज के साथ उनको ट्रांसलेट कर सकेंगे. इसके लिए सिर्फ एक टॉगल को ऑन करना होगा, जिसकी जानकारी एक स्क्रीनशॉट्स शेयर करके भी दी है।  वॉट्सऐप का यह फीचर उन लोगों से चैट करने में मददगार साबित होगा, जो आपकी भाषा को नहीं जानते हैं और दूसरी लैंग्वेज में बातचीत करते हैं. उदाहरण के तौर पर समझें तो एक शख्स हिंदी बोलता, समझता और लिख सकता है, जबकि दूसरा शख्स हिंदी ना तो बोल सकता है, ना पढ़ सकता है और ना ही लिख सकता है. ऐसे में वॉट्सऐप उन यूजर्स के लिए यूजफुल साबित होगा।  रिपोर्ट में बताया है कि ट्रांसलेशन के बावजूद एंड टू एंड एनक्रिप्शन सुविधा को मेंटेन करके रखा जाएगा. वॉट्सऐप बीटा के iOS 26.11.10.70 वर्जन टेस्टिंग के लिए उपलब्ध है।  टेस्टिंग वर्जन से पता चला है WhatsApp ऑटोमेटिक ट्रांसलेशन फीचर पर काम कर रहा है, जो करीब 21 अलग-अलग लैंग्वेज को सपोर्ट करेगा. इसके लिए एक स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किया है।  WAbetainfo ने बताया है कि ट्रांसलेशन फीचर ऐसे काम करेगा।  स्क्रीनशॉट्स में दिखाया गया है कि यूजर्स को किसी एक शख्स का चैट ओपन करना होगा. फिर उसके अंदर दिए गए ट्रांसलेशन को ऑन करना होगा, जिसमें लैंग्वेज को सिलेक्ट भी करना होगा के कौन सी भाषा को किस भाषा में ट्रांसलेट करना है।  पॉपुलैरिटी को बनाए रखने के लिए देते हैं नए-नए फीचर्स  WhatsApp अपनी पॉपुलैरिटी को बनाए रखने के लिए लगातार ऐप में नए-नए फीचर्स को शामिल कर रहा है. साथ ही जो फीचर्स पहले से उनको बेहतर करने की दिशा में काम कर रहा है. इस मैसेजिंग ऐप पर एक सिंपल से यूजर इंटरफेस पर ढेरों फीचर्स मिलते हैं.  WhatsApp का iOS पर ऑटोमेटिक ट्रांसलेशन फीचर कितना कारगर साबित होगा, उसका पता तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा. हालांकि टेस्टिंग के बाद इसको स्टेबल वर्जन में कब जारी किया जाएगा, उसकी कोई टाइम लाइन नहीं दी है.