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POCO C85x 5G भारत में लॉन्च: बड़ी 6300mAh बैटरी और कम कीमत, खरीदने से पहले जानें फायदे-नुकसान

नई दिल्ली POCO C85x 5G स्‍मार्टफोन को भारत में 10,999 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्‍च कर दिया गया है। 6300mAh बैटरी वाले इस फोन में कई अच्‍छे और कुछ एवरेज फीचर्स दिए गए हैं। यूनिसॉक का प्रोसेसर इस फोन में है जो मीड‍ियाटेक और क्‍वॉलकॉम पसंद करने वालों को चुभ सकता है। हालांकि 120 हर्त्‍ज का रिफ्रेश रेट, एंड्रॉयड 16 ओएस और 5जी कनेक्‍ट‍िविटी लोगों को लुभा सकती है। जिन्‍हें 4G स्‍मार्टफोन से 5G में स्‍व‍िच करना है, उनके लिए यह एक विकल्‍प बन सकता है। POCO C85x 5G के प्राइस इस फोन की कीमत 4GB+64GB मॉडल के ल‍िए 10999 रुपये है। वहीं, 4GB+128GB मॉडल के दाम 11999 रुपये रखे गए हैं। यह ब्‍लैक, गोल्‍ड और ग्रीन कलर्स में आता है। इसे 14 मार्च से फ्लिपकार्ट पर ल‍िया जा सकेगा। POCO C85x 5G को क्‍याें खरीदें POCO C85x 5G को जिस प्राइस रेंज में लाया गया है, यह 5जी फोन चाहने वालों की सभी प्रमुख जरूरतें पूरी करेगा। बड़ा डिस्‍प्‍ले और बड़ी बैटरी इस फोन के पॉजिट‍िव पॉइंट्स हैं। कैमरा बेसिक हैं, लेकिन ठीकठाक फोटो निकाल लेंगे। 120 हर्त्‍ज रिफ्रेश रेट के साथ एचडी कंटेंट देखने के लिए भी फोन ठीक नजर आ रहा है। POCO C85x 5G को क्‍याें ना खरीदें अगर आपके पास पहले से 5जी स्‍मार्टफोन है और उसे अपग्रेड करने के बारे में सोच रहे हैं, बजट भी पर्याप्‍त है तो यह फोन आपके लिए नहीं है। कैमरा के शौकीनों को भी इस फोन में काफी कुछ नहीं मिलेगा। परफॉर्मेंस देखने वालों को याद रखना होगा कि चिपसेट मीडि‍याटेक या क्‍वाॅलकॉम का नहीं है। यह फोन व‍िशेष रूप से उन यूजर्स के लिए बेहतर विकल्‍प बन सकता है, जिन्‍हें 4G स्‍मार्टफोन से 5G स्‍मार्टफोन में स्‍व‍िच करना है।  

केले का छिल्का: विटामिन और पोषक तत्वों का खजाना, जानिए इसके चौंकाने वाले फायदे

अच्छी सेहत के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार बेहद जरूरी होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ हमेशा सलाह देते हैं कि दैनिक आहार में मौसमी फलों को शामिल किया जाए, क्योंकि ये शरीर को आवश्यक विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करते हैं। इन्हीं फलों में केला एक ऐसा फल है जो लगभग हर मौसम में आसानी से उपलब्ध होता है और पोषण से भरपूर होता है। अधिकतर लोग केला खाने के बाद उसके छिलके को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन हाल के कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि केले का छिलका भी पोषक तत्वों का भंडार है। इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए बेहद लाभकारी हो सकते हैं। यदि इसे सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह पाचन, दिल, आंखों, त्वचा और मानसिक स्वास्थ्य तक के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। केले के छिलके में मौजूद पोषक तत्व केले के छिलके में कई प्रकार के महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं: फाइबर एंटीऑक्सीडेंट ल्यूटिन पॉलीफेनॉल कैरोटेनॉयड्स फ्लेवोनॉयड्स विटामिन ए विटामिन बी6 ये सभी तत्व शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाने और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद केले के छिलके में भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। फाइबर आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक होता है। कई अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि फाइबर आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे पाचन प्रक्रिया मजबूत होती है। इसके अलावा केले के छिलके में रेजिस्टेंट स्टार्च भी पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और पेट से जुड़ी कई समस्याओं से राहत दिला सकता है। दिल की सेहत के लिए लाभकारी केले के छिलके में मौजूद पॉलीफेनॉल, कैरोटेनॉयड्स और फ्लेवोनॉयड्स जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट शरीर में बनने वाले फ्री-रेडिकल्स को कम करने में मदद करते हैं। फ्री-रेडिकल्स के कारण शरीर में सूजन (इंफ्लेमेशन) बढ़ सकती है, जिससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। एंटीऑक्सीडेंट इनसे बचाव करते हैं और दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। नियमित रूप से केले के छिलके का सेवन करने से हृदय रोगों का जोखिम कम हो सकता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर हो सकती है। आंखों की सेहत के लिए उपयोगी केले के छिलके में ल्यूटिन और विटामिन ए अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो आंखों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी होता है। ल्यूटिन आंखों को हानिकारक प्रकाश से बचाने में मदद करता है और उम्र से जुड़ी आंखों की समस्याओं के खतरे को कम कर सकता है। विटामिन ए आंखों की रोशनी को बनाए रखने और दृष्टि को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद केले के छिलके में ट्रिप्टोफैन और विटामिन बी6 जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माने जाते हैं। ट्रिप्टोफैन शरीर में जाकर सेरोटोनिन नामक हार्मोन में बदल जाता है। सेरोटोनिन को “हैप्पी हार्मोन” भी कहा जाता है क्योंकि यह मूड को बेहतर बनाने में मदद करता है और तनाव व अवसाद के लक्षणों को कम कर सकता है। वहीं विटामिन बी6 नींद की गुणवत्ता को सुधारने में मदद करता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। त्वचा और बालों के लिए भी उपयोगी केले के छिलके का उपयोग केवल खाने तक सीमित नहीं है। इसे त्वचा और बालों की देखभाल में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। चेहरे पर केले के छिलके को हल्के से रगड़ने से त्वचा में निखार आ सकता है। यह मुंहासों और दाग-धब्बों को कम करने में मदद कर सकता है। बालों में लगाने से बालों की चमक बढ़ सकती है और स्कैल्प को पोषण मिल सकता है। डाइट में कैसे करें इस्तेमाल केले के छिलकों को कई तरीकों से आहार में शामिल किया जा सकता है: स्मूदी में ब्लेंड करके आइसक्रीम या डेजर्ट की टॉपिंग के रूप में पके केले के नरम छिलकों को उबालकर सब्जी या स्टिर-फ्राई बनाकर हालांकि छिलकों का इस्तेमाल करने से पहले उन्हें अच्छी तरह धोना जरूरी है ताकि किसी भी प्रकार के केमिकल या गंदगी को हटाया जा सके। निष्कर्ष अक्सर हम जिन चीजों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, उनमें भी कई बार सेहत के लिए जरूरी पोषक तत्व छिपे होते हैं। केले का छिलका भी ऐसा ही एक उदाहरण है। फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी विटामिन से भरपूर केले का छिलका पाचन, दिल, आंखों और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है। सही तरीके से इसका उपयोग करके हम अपने आहार को और अधिक पौष्टिक बना सकते हैं।  

गर्मी में टैनिंग से परेशान? बाहर निकलने से पहले अपनाएं ये आसान टिप्स, सिर्फ सनस्क्रीन काफी नहीं

मार्च का महीना अभी शुरू ही हुआ है और अभी से तेज धूप निकलनी शुरु हो गई है. तापमान धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है. ऐसे में लोगों ने भी सनस्क्रीन लगाना शुरु कर दिया है. लेकिन क्या धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना ही काफी है? दरअसल, कुछ लोगों को लगता है कि सिर्फ सनस्क्रीन लगाने से वो अपनी त्वचा को धूप की तेज किरणों से बचा लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. आज के समय में बढ़ती गर्मी, तेज यूवी किरणें, धूल-मिट्टी और प्रदूषण हमारी त्वचा पर गहरा असर डालते हैं. ऐसे में सिर्फ एक प्रोडक्ट पर निर्भर रहना स्किन के लिए पूरी सुरक्षा नहीं देता. अगर स्किन की सही तरीके से देखभाल न की जाए तो टैनिंग, सनबर्न, पिग्मेंटेशन, ड्राइनेस और समय से पहले झुर्रियां जैसी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं. ऐसे में धूप से त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए सिर्फ सनस्क्रीन लगाना ही काफी नहीं है. सही स्किनकेयर रूटीन, पर्याप्त हाइड्रेशन और फिजिकल प्रोटेक्शन के साथ ही त्वचा को पूरी तरह सुरक्षित और हेल्दी रखा जा सकता है. आइए जानते हैं कैसे. चेहरे को अच्छे से क्लीन करें धूप में निकलने से पहले सबसे पहला स्टेप है चेहरे को साफ करना. रात भर में त्वचा पर ऑयल और गंदगी जमा हो जाती है. इसलिए बाहर निकलने से पहले माइल्ड फेस वॉश से चेहरा धोना जरूरी है, ताकि स्किन साफ रहे और आगे लगाए जाने वाले प्रोडक्ट्स बेहतर तरीके से काम कर सकें. टोनर का इस्तेमाल करें चेहरा साफ करने के बाद टोनर लगाना फायदेमंद होता है. टोनर त्वचा के पोर्स को टाइट करता है और स्किन का pH बैलेंस बनाए रखता है. इससे त्वचा तरोताजा महसूस करती है और धूप से होने वाले नुकसान से लड़ने की क्षमता भी बेहतर होती है. मॉइश्चराइज़र लगाना न भूलें कई लोग गर्मियों में मॉइश्चराइज़र लगाना छोड़ देते हैं, लेकिन यह सही नहीं है. हल्का और वॉटर-बेस्ड मॉइश्चराइज़र त्वचा को हाइड्रेट रखता है, और धूप की वजह से होने वाली ड्राइनेस से बचाता है. सनस्क्रीन सही तरीके से लगाएं सनस्क्रीन जरूर लगाएं, लेकिन सही मात्रा और सही SPF का चुनाव भी जरूरी है. बाहर निकलने से लगभग 15–20 मिनट पहले SPF 30 या उससे ज्यादा वाला सनस्क्रीन लगाएं और जरूरत पड़ने पर हर 2–3 घंटे में दोबारा लगाएं. सन प्रोटेक्शन एक्सेसरीज का इस्तेमाल करें सिर्फ स्किनकेयर प्रोडक्ट्स ही नहीं, बल्कि सनग्लासेस, कैप, स्कार्फ या छाता भी धूप से बचाव में मदद करते हैं. ये चीजें यूवी किरणों से सीधे संपर्क को कम करती हैं. शरीर को हाइड्रेट रखें गर्मियों में त्वचा को हेल्दी रखने के लिए भरपूर पानी पीना भी बहुत जरूरी है. इससे शरीर डिटॉक्स होता है और त्वचा में प्राकृतिक चमक बनी रहती है.

AI ने कर दिया वो काम जिससे वैज्ञानिकों के उड़ गए होश!

नई दिल्ली एआई को यह सोचकर विकसित किया गया था कि यह वह काम करेगा जो इंसान उसे कहेंगे। हालांकि, वैज्ञानिकों ने इस बात से पहले ही आगाह किया था कि यदि एआई में खुद से सोचने, समझने और फैसले लेने की क्षमता विकसित हो गई तो वह इंसानों की बात नहीं मानेगा। अब वैज्ञानिकों की ये बाद सच होती दिखाई दे रही है। हाल ही में एक नई रिसर्च में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने एआई की क्षमता और नियंत्रण को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।   दरअसल, एक एआई एजेंट की ट्रेनिंग के दौरान रिसर्चर्स ने देखा कि सिस्टम ने खुद ही क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग शुरू करने की कोशिश की। हैरानी की बात यह थी कि किसी भी रिसर्चर ने उसे ऐसा करने के लिए निर्देश नहीं दिया था। अलीबाबा से जुड़ी रिसर्च टीम कर रही थी प्रयोग यह घटना उस समय सामने आई जब अलीबाबा से जुड़ी एक रिसर्च टीम ROME नाम के एक एक्सपेरिमेंटल एआई एजेंट पर काम कर रही थी। ट्रेनिंग के दौरान सुरक्षा सिस्टम अचानक सक्रिय हो गए, जिसके बाद टीम ने सिस्टम की गतिविधियों की जांच की। जांच में पता चला कि एआई एजेंट क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग से जुड़ी प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश कर रहा था। यह गतिविधि असामान्य इसलिए भी थी क्योंकि सिस्टम को एक सीमित और नियंत्रित वातावरण में चलाया जा रहा था, जिसे “सैंडबॉक्स” कहा जाता है। रिसर्च पेपर में वैज्ञानिकों ने इस व्यवहार को “अनपेक्षित” बताया और कहा कि यह गतिविधि बिना किसी स्पष्ट निर्देश के शुरू हुई। बिना निर्देश के बनाया रिवर्स SSH टनल सिर्फ क्रिप्टो माइनिंग ही नहीं, एआई एजेंट ने एक और तकनीकी कदम उठाया जिसने रिसर्चर्स की चिंता बढ़ा दी। सिस्टम ने खुद ही रिवर्स SSH टनल बना लिया। यह एक ऐसा तकनीकी तरीका है जिसके जरिए सुरक्षित या सीमित नेटवर्क के अंदर मौजूद मशीन बाहरी कंप्यूटर से कनेक्ट हो सकती है। कई बार यह कनेक्शन एक छिपे हुए रास्ते की तरह काम करता है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि न तो माइनिंग और न ही टनल बनाने के लिए एआई को कोई प्रॉम्प्ट या इंस्ट्रक्शन दिया गया था। क्यों बढ़ी चिंता? क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग आमतौर पर कंप्यूटर की प्रोसेसिंग पावर का इस्तेमाल करके डिजिटल करेंसी बनाने की प्रक्रिया होती है। इसे आम तौर पर सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर जानबूझकर सेट करते हैं। लेकिन इस मामले में एआई एजेंट ने ट्रेनिंग के दौरान खुद ही यह प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की। इससे यह सवाल उठने लगा कि क्या एडवांस एआई सिस्टम भविष्य में ज्यादा स्वायत्त हो सकते हैं, खासकर तब जब उन्हें ज्यादा टूल्स और कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच मिलती है। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब एआई एजेंट तेजी से अधिक सक्षम बनते जा रहे हैं। कई सिस्टम अब कोड लिख सकते हैं, जटिल वर्कफ्लो ऑटोमेट कर सकते हैं और अलग-अलग ऑनलाइन टूल्स के साथ काम कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जैसे-जैसे एआई की क्षमताएं बढ़ेंगी, टेस्टिंग के दौरान अनपेक्षित व्यवहार सामने आने की संभावना भी बढ़ सकती है। ऐसे कुछ उदाहरण पहले भी सामने आ चुके हैं। Moltbook एक्सपेरिमेंट नाम के एक प्रयोग में एआई एजेंट्स को सोशल नेटवर्क जैसी डिजिटल दुनिया में रखा गया था, जहां वे आपस में बातचीत करते थे। उस दौरान भी एजेंट्स ने क्रिप्टोकरेंसी का जिक्र किया था। इसी तरह एआई इंटीग्रेशन प्लेटफॉर्म Anon के इंजीनियरिंग हेड डैन बोतेरो ने बताया था कि उनके बनाए OpenClaw एजेंट ने बिना कहे ही इंटरनेट पर नौकरी खोजने की कोशिश शुरू कर दी थी। एआई के व्यवहार को लेकर बढ़ रही बहस मई 2025 में एक और विवाद तब सामने आया जब Anthropic के Claude मॉडल पर काम कर रहे रिसर्चर्स ने दावा किया कि Claude 4 Opus सिस्टम में अपने इरादों को छिपाने और खुद को सक्रिय बनाए रखने की क्षमता दिखाई दी थी। ROME प्रयोग में सामने आया नया मामला इस बात की याद दिलाता है कि जैसे-जैसे एआई सिस्टम अधिक शक्तिशाली होते जाएंगे, उनकी निगरानी और नियंत्रण भी उतना ही जरूरी होगा।

Samsung ला रहा है पावरफुल स्मार्टफोन: 6000mAh बैटरी और 50MP कैमरा, 17 मार्च को लॉन्च

नई दिल्ली स्मार्टफोन बाजार में एक और दमदार एंट्री होने वाली है. सैमसंग ने अपने नए स्मार्टफोन Samsung Galaxy M17e 5G की लॉन्च डेट का ऐलान कर दिया है. यह फोन 17 मार्च को भारत में लॉन्च होगा और इसमें बड़ी बैटरी, हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले और लेटेस्ट सॉफ्टवेयर जैसे कई फीचर्स मिलेंगे. कंपनी के मुताबिक यह फोन खास तौर पर रोजमर्रा के काम, एंटरटेनमेंट और बेहतर परफॉर्मेंस के लिए डिजाइन किया गया है. इसमें 50MP कैमरा, 120Hz डिस्प्ले और MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर जैसे फीचर्स दिए गए हैं. 17 मार्च को भारत में लॉन्च होगा नया Galaxy M17e 5G सैमसंग ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि Samsung Galaxy M17e 5G को भारत में 17 मार्च को लॉन्च किया जाएगा. हालांकि कंपनी ने अभी इसकी कीमत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि यह मिड-रेंज सेगमेंट में पेश किया जाएगा. फोन दो आकर्षक रंगों Vibe Violet और Blitz Blue में उपलब्ध होगा. सैमसंग का कहना है कि यह डिवाइस उन यूजर्स के लिए तैयार किया गया है जो लंबे समय तक बैटरी, स्मूथ डिस्प्ले और भरोसेमंद परफॉर्मेंस चाहते हैं. लॉन्च के बाद यह ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए उपलब्ध हो सकता है. 6.7-इंच 120Hz डिस्प्ले और मजबूत डिजाइन Samsung Galaxy M17e 5G में 6.7-इंच का HD+ डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है. इसका मतलब है कि स्क्रॉलिंग, वीडियो देखने और गेमिंग का अनुभव ज्यादा स्मूथ होगा. डिस्प्ले में एडेप्टिव ब्राइटनेस और हाई ब्राइटनेस मोड भी मिलेगा. डिजाइन की बात करें तो फोन की मोटाई करीब 8.2mm बताई गई है और इसमें Glass Fibre Reinforced Polymer बैक पैनल दिया गया है. इसके साथ ही इसे IP54 रेटिंग मिली है, जो इसे धूल और हल्की पानी की छींटों से सुरक्षित रखती है. Dimensity 6300 प्रोसेसर और Android 16 का सपोर्ट परफॉर्मेंस के लिए Samsung Galaxy M17e 5G में MediaTek Dimensity 6300 5G चिपसेट मिलेगा. इस प्रोसेसर में दो Cortex-A76 परफॉर्मेंस कोर 2.4GHz की स्पीड पर चलते हैं, जबकि छह Cortex-A55 एफिशिएंसी कोर 2.0GHz पर काम करते हैं. ग्राफिक्स के लिए इसमें ARM Mali-G57 GPU मिलेगा, जो मल्टीमीडिया और कैजुअल गेमिंग को बेहतर बनाता है. यह फोन Android 16 आधारित One UI 8 पर चलेगा. सैमसंग का दावा है कि इस डिवाइस को छह पीढ़ियों तक एंड्रॉयड अपडेट और छह साल तक सिक्योरिटी अपडेट मिलेंगे. साथ ही इसमें सैमसंग नॉक्स वॉल्ट सिक्योरिटी सिस्टम दिया गया है, जिसे EAL5+ सुरक्षा सर्टिफिकेशन भी मिला है. 50MP कैमरा और 6000mAh की बड़ी बैटरी फोटोग्राफी के लिए सैमसंग गैलेक्सी M17e 5G में 50 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा दिया गया है, जिसके साथ 2 मेगापिक्सल का डेप्थ सेंसर मिलेगा. वहीं सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए फ्रंट में 8 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है. बैटरी की बात करें तो फोन में 6000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है. कंपनी का कहना है कि यह बैटरी लंबे समय तक वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया ब्राउजिंग और अन्य रोजमर्रा के कामों के लिए पर्याप्त बैकअप देगी. इसके अलावा फोन में Google Gemini AI, Circle to Search और Now Bar जैसे स्मार्ट फीचर्स भी मिलेंगे.

UTS ऐप हुआ बंद तो क्या करें? महिला यात्री की परेशानी के बाद सामने आए ये विकल्प

नई दिल्ली 1 मार्च से रेलवे की UTS ऐप बंद हो चुकी है, जिसके चलते मीनू कुमारी नाम की एक महिला यात्री को मुंबई के विरार स्टेटश पर टीटीई के साथ बहस में उलझना पड़ा। इसे लेकर उन्होंने X पर वीडियो भी पोस्ट किया, जिसमें UTS ऐप के न खुलने के चलते वह अपनी टिकट टीटीई को नहीं दिखा सकीं। इसे लेकर उनकी टीटीई के साथ कहा-सुनी भी हो गई। अगर आप भी जनरल टिकट बुक करने के लिए UTS ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो तुरंत रेलवे के RailOne ऐप पर शिफ्ट हो जाएं। ऐसा इसलिए क्योंकि 1 मार्च से UTS ऐप बंद हो चुकी है और इसके तमाम फीचर्स को Railone ऐप पर शिफ्ट कर दिया गया है। बड़ी बात है कि UTS और IRCTC यूजर्स को इस ऐप पर दोबारा अकाउंट बनाने की जरूरत भी नहीं है। वे अपने UTS या IRCTC अकाउंट के साथ ही Railone ऐप पर लॉग इन कर सकते हैं। UTS ऐप चलाने वाले RailOne पर शिफ्ट हों अगर आप UTS ऐप के जरिए जनरल या प्लेटफॉर्म टिकट बुक कराते थे, तो अब आपको रेलवे के RailOne ऐप पर शिफ्ट हो जाना चाहिए। यह एक ऑल-इन-वन ऐप है, जिस पर टिकट बुकिंग से लेकर यात्रा से जुड़ी कई सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी। खास बात है कि अगर आप UTS या IRCTC ऐप इस्तेमाल करते थे, तो आपको इस ऐप पर अकाउंट नहीं बनाना पड़ेगा। कहने का मतलब है कि आपका पुराना यूजरनेम और पासवर्ड RailOne में भी काम करेगा। ऐसा करके आप मीनू कुमारी की तरह ऐन मौके पर फंसने से बच सकते हैं। अब बात आती है कि नए ऐप पर जनरल या प्लेटफॉर्म टिकट कैसे बुक करानी है? Railone ऐप पर ऐसे बुक होगी जनरल टिकट RailOne ऐप में जनरल और प्लेटफॉर्म टिकट बुक करने के लिए आपको सबसे पहले ऐप में लॉग इन करना होगा। आप अपने UTS या IRCTC अकाउंट के यूजरनेम और पासवर्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं।     इसके बाद ऐप के होम स्क्रीन पर मौजूद Unreserved ऑप्शन पर क्लिक करें।     इसके बाद आपको From और To पर स्टेशन चुनकर Proceed To Book पर क्लिक करना होगा।     पेमेंट करने के साथ ही आपका जनरल टिकट बुक हो जाएगा और Railone ऐप पर ही आप उसे दिखा भी पाएंगे। RailOne ऐप पर बुक करें प्लेटफॉर्म टिकट जनरल टिकट की तरह ही RailOne ऐप के होम स्क्रीन पर प्लेटफॉर्म टिकट बुक करने का ऑप्शन मिल जाएगा। यह ऑप्शन आपको Unreserved टिकट बुक करने के साथ ही दिख जाएगा। इसके बाद:     Platform ऑप्शन पर क्लिक करें।     स्टेशन चुनकर पेमेंट कर दें।     इसके बाद आपको फोन पर ही अपनी प्लेटफॉर्म टिकट मिल जाएगी। मांगे जाने पर आप Railone ऐप खोलकर दिखा सकते हैं कि आपके पास प्लेटफॉर्म टिकट है।

मेकअप के बिना भी कैसे दिखें सुंदर? जानिए 5 सीक्रेट्स

संवरने-संवारने की कला स्त्री को जन्मजात मिली है। यह आर्ट उसे सुंदर दिखने को भी प्रेरित करती है। भागदौड़ भरी जिंदगी में रोज अच्छी तरह मेकअप करना तो संभव नहीं, मगर डाइट और लाइफस्टाइल को सही रखकर खुद को आकर्षक बनाया जा सकता है मेकअप एक कला है। कई बार इससे चेहरे पर कमाल हो सकता है। रोज आईने के सामने काफी वक्त बिताती हैं स्त्रियां ताकि वे सुंदर दिख सकें। कई स्त्रियां मानती हैं कि बिना मेकअप के वे सुंदर नहीं दिख सकतीं। हालांकि सादगी का अपना महत्व है और बिना बहुत वक्त या पैसा खर्च किए भी सुंदर बने रहा जा सकता है। एक प्याली गर्म पानी सुबह की शुरुआत के लिए इससे अच्छी कोई आदत नहीं है। सुबह उठने के बाद चाय के बजाय गर्म पानी पिएं। इसमें नींबू की कुछ बूंदें डालें। ओवरवेट होने या डाइबिटीज जैसी समस्या न हो तो थोड़ा शहद भी मिला सकती हैं। इससे ताजगी का अहसास होगा। एसपीएफ युक्त क्रीम उम्र बढन के साथ-साथ धूप, धूल और समय का प्रभाव चेहरे पर पडने लगता है। इसलिए सनक्रीम हमेशा साथ रखें। तेज धूप हो या नहीं, इसका इस्तेमाल करें। इसके प्रयोग से आप बहुत सी समस्याओं से बची रह सकती हैं। आदतें सुधारें चेहरे को सिकोड़ते हुए बात करने, माथे पर बल डालने, आखें मिचमिचाने, हथेलियों को गालों पर टिकाने, पिंपल्स नोचने, आंखें मलने जैसी आदतें त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं। चेहरे की त्वचा संवेदनशील होती है, इसलिए इस पर दाग-धब्बे बहुत पड़ते हैं। ये आदतें झुर्रियों को न्यौता भी दे सकती हैं। अति से बचें नियमित फेशियल से चेहरे की मांसपेशियों में कसाव आता है, रक्त संचार ठीक होता है और चेहरा साफ व सुंदर दिखता है, मगर ब्लीच का इस्तेमाल सोच-समझकर करें। ज्यादा मसाज व ब्लीच से संवेदनशील त्वचा को नुकसान हो सकता है। स्क्रबिंग-क्लेंजिंग रोज सोने से पहले क्लेंजिंग मिल्क से चेहरा साफ करें। हफ्ते में एक बार स्क्रबिंग करें। इससे डेड स्किन हटेगी। क्लेंजर से त्वचा बैक्टीरिया रहित होगी, अतिरिक्त तेल व डेड स्किन सेल्स निकलेंगी। ड्राई स्किन के लिए मॉइश्चराइजर वाला क्लेंजर अच्छा है। पानी खूब पिएं रोज सात-आठ गिलास पानी पीना चाहिए। शरीर से हानिकारक तत्व निकालने का यह सर्वोत्तम उपाय है। यह सौंदर्य को बढ़ाता है और त्वचा को समस्या रहित रखता है। मॉइश्चराइजर मुलायम त्वचा के लिए मॉइश्चराइजर जरूरी है। प्रदूषण, मौसम, धूप और धूल से त्वचा को क्षति पहुंचती है। स्किन को सही पोषण और नमी मिले तो रिंकल्स कम पडेंगे और वह ड्राई होने से बची रहेगी। चेहरे और गर्दन के अलावा हाथों और पैरों पर भी मॉइश्चराइजर का प्रयोग करें। टोनर टोनर से न सिर्फ त्वचा में कसाव आता है, बल्किइससे रोमछिद्र भी भरते हैं और चेहरे से अतिरिक्त तेल बाहर निकल जाता है। शैंपू सप्ताह में कम से कम तीन दिन बालों को किसी अच्छे शैंपू से धोएं और कंडीशनर का इस्तेमाल करें। चिपचिपे-गंदे बाल चेहरे का लुक बिगाड़ देते हैं। दिन में दो-तीन बार और सोने से पहले बालों में कंघी करना न भूलें। -बालों की समय-समय पर ट्रिमिंग कराएं, ताकि वे दोमुंहे न हों और खराब न दिखें। -नाखून चबाने की आदत से बचें। उन्हें सही ढंग से तराशें और अच्छा शालीन नेल पेंट लगाएं। -अत्यधिक कॉफी या चाय पीने से बचें। -कम से कम सात घंटे की अच्छी नींद लें। -दांतों की सुबह-शाम सफाई करें। कई बार ब्रश करने से दांतों का इनैमल कम होता है और वे पीले दिखने लगते हैं। दिनभर में दो बार ब्रश करना काफी है। -उठने-बैठने और चलने-फिरने में अपने बॉडी पोस्चर का ध्यान रखें। -तले-भुने खाद्य पदार्थों, मैदे से बनी चीजों का इस्तेमाल कम करें। तरल पदार्र्थों का सेवन अधिक करें। -सही फिटिंग के कपड़े पहनें और ऐसे फैशन ट्रेंड्स का अनुकरण करने से बचें जो आपके व्यक्तित्व पर न फबें। जिस ड्रेस में कंफर्टेबल महसूस करती हों, वही पहनें।  

बिना ATM कार्ड के भी मिल जाएगा कैश! UPI से पैसे निकालने का नया तरीका समझें

नई दिल्ली आपको पता है कि आप ATM से UPI के जरिए भी पैसे निकाले जा सकते हैं। इसका मतलब है कि ATM से पैसे निकालने के लिए डेबिट कार्ड का पास होना जरूरी नहीं है। दरअसल अब ज्यादातर बैंकों ने अपने ATM में QR Code Scan या UPI Money का ऑप्शन देना शुरू कर दिया है। UPI के जरिए ATM से पैसा निकालना न सिर्फ आसान है बल्कि यह कार्ड क्लोनिंग और स्किमिंग जैसे बड़े साइबर खतरों से भी सुरक्षित रखता है। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका पता होना चाहिए। UPI से कैश निकालने के फायदे UPI से कैश निकालने के कई फायदे हैं। अगर आपके पास कार्ड न हो या आप उसे घर भूल गए हों, तो भी आप जरूरत पड़ने पर आसानी से ATM से कैश निकाल सकते हैं। यह प्रोसेस न सिर्फ तेज है बल्कि आसान भी है, क्योंकि आपको बार-बार कार्ड डालने या पिन छुपाकर टाइप करने का झंझट नहीं रहता। बस एक QR कोड स्कैन करते ही आपका काम हो जाता है। इसकी वजह से आपको फिजिकल डेबिट कार्ड साथ रखने की जरूरत नहीं रहती। इससे कार्ड के खोने या चोरी होने का डर भी खत्म हो जाता है। यह नई तकनीक आपको 'कार्ड क्लोनिंग' और 'स्किमिंग' जैसे खतरनाक साइबर फ्रॉड से भी बचाती है। कैसे निकालें UPI से कैश     इसके लिए सबसे पहले एटीएम मशीन के पास जाएं और वहां स्क्रीन पर दिख रहे 'UPI Cash Withdrawal' के ऑप्शन को चुनें।     अब ATM मशीन पर वह राशि टाइप करें जिसे आप निकालना चाहते हैं।     इसके बाद ATM मशीन पर एक QR कोड दिखाई देगा, उसे UPI ऐप के जरिए स्कैन करें। याद रहे कि इस QR कोड का इस्तेमाल एक ही बार किया जा सकता है।     अपब अपने फोन पर UPI PIN डालें।     PIN डालते ही आपको ATM मशीन से पैसे मिल जाएंगे। ध्यान रखने वाली बातें ATM से UPI के जरिए कैश निकालते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:     ATM में UPI फीचर उपलब्ध हो। इसे आप मशीन में कैश निकालने के लिए दिए गए ऑप्शन से समझ सकते हैं।     इसके अलावा, आपके पास अपना फोन और फोन में कोई चालू UPI ऐप होनी चाहिए। इसके साथ ही ऐप अपडेटेड भी हो।     आपके फोन का इंटरनेट काम कर रहा हो।     आपको अपना UPI PIN याद हो।     इस फीचर का इस्तेमाल कर आप 5000 से 10000 रुपये तक ही निकाल सकते हैं।

स्पेस में प्रेग्नेंसी: क्या अंतरिक्ष में बच्चे का जन्म हो सकता है?

जैसे-जैसे इंसान मंगल और चंद्रमा पर बस्तियां बसाने की योजना बना रहा है, एक बड़ा सवाल वैज्ञानिकों के सामने खड़ा है- 'क्या अंतरिक्ष में गर्भधारण और बच्चे का जन्म सुरक्षित है?' अब तक की रिसर्च इशारा करती है कि तकनीकी रूप से यह संभव तो है, लेकिन बिना पृथ्वी के सुरक्षा कवच (गुरुत्वाकर्षण और वायुमंडल) के, एक नए जीवन का विकास किसी बड़े खतरे से कम नहीं होगा। हड्डियों और मांसपेशियों पर संकट पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण हमारे शरीर की हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूती देने में प्राथमिक भूमिका निभाता है। अंतरिक्ष की माइक्रोग्रैविटी में भ्रूण (Fetus) के विकास के दौरान उसकी हड्डियों के घनत्व (Density) में भारी कमी आ सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जीरो ग्रेविटी के कारण बच्चे का ऊपरी शरीर तो विकसित हो सकता है, लेकिन निचले हिस्से और पैरों की मांसपेशियां बेहद कमजोर रह सकती हैं।   ब्रेन और विजन पर असर अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण शरीर के तरल पदार्थ (Body Fluids) सिर की ओर शिफ्ट हो जाते हैं। इससे गर्भ में पल रहे शिशु की खोपड़ी के अंदर दबाव बढ़ सकता है। यह असामान्य दबाव बच्चे के मस्तिष्क विकास (Brain Development) और आंखों की रोशनी को प्रभावित कर सकता है, जिससे भविष्य में न्यूरोलॉजिकल समस्याएं पैदा होने का खतरा रहता है। 

थाइरॉएड में शुगर और सोया से दूरी क्यों जरूरी है

थाइरॉएड, गर्दन के सामने वाले हिस्से में तितली के आकार की ग्रंथि है। इससे निकलने वाले हार्मोंस शरीर की भोजन को ऊर्जा में बदलने की क्षमता को काबू में रखते हैं। इस ग्रंथि में गड़बड़ी आने पर हाइपो या हाइपर थाइरॉएडिज्म होता है और वजन तेजी से कम या बढ़ने लगता है। हृदय, बाल, नाखून व नींद पर भी इसका असर होता है। दवाओं के अलावा थाइरॉएड पीड़ितों के लिए खान-पान का ध्यान रखना भी जरूरी है। आयोडीन शरीर में थाइरॉएड हार्मोन बनने के लिए आयोडीन की जरूरत होती है। चूंकि शरीर स्वयं आयोडीन नहीं बनाता, इसलिए उसे डाइट में लेना जरूरी हो जाता है। आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करें। ध्यान रखें कि समुद्री नमक या डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले नमक में आयोडीन नहीं होता। नमक या उत्पाद खरीदते समय इसका ध्यान रखें। समुद्री भोजन मछली, झींगा आदि तमाम तरह के समुद्री भोजन में आयोडीन प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है। यदि हाइपर थाइरॉएडिज्म की शिकायत है, तो समुद्री भोजन अधिक मात्रा में नहीं लेना चाहिए। अगर थाइरॉएड ग्रंथि अधिक मात्रा में हार्मोन बनाती है तो अतिरिक्त आयोडीन स्थिति को और गंभीर बना देता है। उदाहरण के लिए समुद्री घास में आयोडीन बहुत अधिक मात्रा में होता है। हरी पत्तेदार सब्जियां, मेवे और बीज मैग्नीशियम की कमी से हाइपो थाइरॉएडिज्म होता है, जिससे थकावट व मांसपेशियों में खिंचाव रहने लगता है। इसके लिए पालक, लेट्यूस, हरी पत्तेदार सब्जियां, काजू, बादाम और सीताफल के बीज खाएं। ब्राजील मेवों में मैग्नीशियम के साथ सेलेनियम भी होता है। सोयाबीन विशेषज्ञों के अनुसार सोयाबीन लेना हाइपोथाइरॉएडिज्म की आशंका बढ़ाता है। यदि पर्याप्त आयोडीन नहीं ले रहे हैं तो सोया उत्पाद जैसे दूध व टोफू आदि में पाए जाने वाले रसायन थाइरॉएड की हार्मोन बनाने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। चीनी हाइपोथाइरॉएडिज्म में वजन तेजी से बढ़ता है। इसके लिए शुगर की मात्रा को कम रखना चाहिए। खासतौर पर ऐसे उत्पाद जिनमें कैलोरी अधिक व पोषक तत्व कम होते हैं, खाने से बचना चाहिए। दवाएं कुछ दवाएं थाइरॉएड दवाओं के असर को कम करती हैं। खासतौर पर अगर वे लगभग एक ही समय ली जा रही हों। मल्टी विटामिंस, आयरन कैल्शियम सप्लीमेंट्स, एंटासिड, अल्सर या कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाली दवाएं इनमें प्रमुख हैं। यदि आप ऐसी ही दवाएं ले रहे हैं तो थाइरॉएड व अन्य दवाओं में कुछ घंटे का अंतर अवश्य रखें। गोभी व ब्रोकली गाइट्रोजेंस, तत्व का असर थाइरॉएड ग्रंथि के आकार बढ़ने के रूप में दिखायी देता है जैसे गॉइटर। शरीर में आयोडीन की कमी से यह समस्या होती है। ऐसी स्थिति में गोभी, ब्रोकली, बंद गोभी खाना आयोडीन ग्रहण करने की क्षमता को कम करता है। जरूरी है तो इन्हें पकाकर ही खाएं। ग्लुटेन ग्लुटेन, गेहूं व जौ में पाया जाने वाला प्रोटीन है। ग्लूटेन की एलर्जी वालों को छोड़ दें तो ग्लूटन थाइरॉएड पर असर नहीं डालता। हां, अगर गेहूं आदि से एलर्जी है तो ग्लूटेन छोटी आंत को नुकसान पहुंचा कर थाइरॉएड ग्रंथि की प्रक्रिया को तेज या धीमा कर सकता है।