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2nm चिप का कमाल: अश्विनी वैष्णव की यह कामयाबी भारत को सेमीकंडक्टर महाशक्ति बना पाएगी?

नई दिल्ली द‍िग्‍गज कंपनी क्‍वॉलकॉम ने अपने भारतीय केंद्रों में 2nm च‍िप के ड‍िजाइन को व‍िकसि‍त क‍िया है। केंद्रीय मंत्री अश्‍व‍िनी वैष्‍णव ने इस कामयाबी को देखा। यह उपलब्‍ध‍ि भारत को सेमीकंडक्‍टर के क्षेत्र में बहुत आगे ले जा सकती है। 2nm बेहद एडवांस्‍ड च‍िप है, ज‍िस एआई से लेकर गैजेट्स तक में इस्‍तेमाल क‍िया जाएगा। केंद्रीय मंत्री अश्‍विनी वैष्‍णव की दो उंगलियों के बीच आपको एक छोटी सी चीज दिख रही होगी। यह 2nm (नैनोमीटर) चिप है। इस चिप को बड़ी अमेरिकी कंपनी क्‍वॉलकॉम ने अपने बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद स्थित इंजीनियरिंग केंद्रों में विकसित किया है, जो भारत के लिए एक बड़ी कामयाबी है। शनिवार को कंपनी ने इस चिप के डिजाइन के सफल टेप-आउट (डिजाइन के अंति‍म चरण) का ऐलान क‍िया। क्‍या 2nm चिप भारत की तकदीर को बदल सकती है? इसका जवाब है हां, क्‍योंकि यह सबसे एडवांस्‍ड चिप है जिसे आर्टिफ‍िशियल इंटेलिजेंस से लेकर हमारे गैजेट्स तक में इस्‍तेमाल करने की तैयारी है। क्‍यों खास है 2nm (नैनोमीटर) चिप? 2nm (नैनोमीटर) चिप को नेक्‍स्‍ट-जेनरेशन सेमीकंडक्‍टर टेक्‍नोलॉजी कहा जाता है। इसकी ट्रांजिस्‍टर डे‍ंसिटी बहुत अधिक है। इस चिप का बड़े पैमाने पर उत्‍पादन इस साल शुरू होने की उम्‍मीद है। दावा है कि इस चिप का इस्‍तेमाल शुरू होने के बाद किसी भी गैजेट या अन्‍य इस्‍तेमाल वाली चीज में ऊर्जा की खपत 45 फीसदी कम हो जाएगी। दावा है कि यह मौजूदा 3nm और 5nm चिपसेट से बेहतर परफॉर्मेंस देगी। इस चिप को आर्टिफ‍िशियल इंटेलिजेंस सर्वरों, स्‍मार्टफोन्‍स, IoT यानी इंटरनेट ऑफ थिंग्‍स में इस्‍तेमाल किया जा सकता है। स्‍मार्टफोन्‍स की बात करें तो सबसे पहले यह चिप प्रीमियम स्‍मार्टफोन्‍स में देखने को मिल सकती है। इनमें iphone 18 सीरीज और Google की अपकमिंग पिक्‍सल स्‍मार्टफोन सीरीज का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। Samsung S26 सीरीज में भी आ सकती है चिप कहा जाता है कि 2nm चिप तकनीक को सैमसंग की अपकमिंग गैलेक्‍सी एस26 सीरीज के स्‍मार्टफोन्‍स में लाया जा सकता है। ऐसी अफवाहें हैं कि Exynos 2600 प्रोसेसर में 2एनएम प्रोसेस का इस्‍तेमाल किया गया है। इसके अलावा, एआई सर्वरों, डेटा सेंटरों और उन एआई ऐप्‍ल‍िकेशंस के लिए भी यह चिप कारगर होने वाली है, जो बहुत ज्‍यादा बिजली इस्‍तेमाल करते हैं। क्‍या सिर्फ क्‍वाॅलकॉम ये चिप बना रही या अन्‍य कंपनियां भी? 2nm (नैनोमीटर) चिप पर काम करने वाली क्‍वॉलकॉम अकेली नहीं है। TSMC (N2 process), सैमसंग, इंटेल, आईबीएम जैसी कंपनियां इसे तैयार कर रही हैं। भारत के लिए यह उपलब्‍ध‍ि अहम क्‍यों? क्‍वॉलकॉम का बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद स्थित इंजीनियरिंग केंद्रों में 2nm चिप को विकस‍ित करना भारत के लिए बड़ी उपलब्‍ध‍ि है। कंपनी ने खुद कहा है कि अमेरिका के बाहर यह उसका सबसे बड़ा इंजीनियर‍िंग टैलंट पूल है। केंद्रीय मंत्री अश्‍विनी वैष्‍णव के अनुसार, इस तरह की उपलब्‍ध‍ियां यह बताती हैं कि भारत का डिजाइन इकोसिस्‍टम कितना आगे निकल गया है। दुनिया में सेमीकंडक्‍टर को लेकर जो मुकाबला चल रहा है, उसमें हमारी तैयारी भी काफी मजबूत है। खबर में जिस टेप-आउट का जिक्र हमने शुरू में किया था, उसका मतलब होता है चिप डिजाइनिंग की फाइनल स्‍टेज। कैसे बदल सकती है भारत की तकदीर? भारत मैन्‍युफैक्‍चरिंग का दुनिया में बड़ा हब बनता जा रहा है। इस कामयाबी के बाद वह प्रोडक्‍ट डिजाइनिंग का भी बड़ा केंद्र बनकर उभर सकता है। टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में सेमीकंडक्‍टर का क्षेत्र आने वाले समय में काफी अहम होने वाला है। अगर भारत सेमीकंडक्‍टर के विकास में आगे निकलता है तो वह अमेरिका और चीन के समकक्ष खड़ा होकर दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकता है। इससे भारतीय टैलंट की साख और मजबूत होगी।

iPhone का सबसे सस्ता मॉडल लॉन्च को तैयार, इन 4 बड़े बदलावों के साथ जानें कब और कितनी होगी कीमत

नई दिल्ली ऐपल लवर्स के लिए खुशखबरी है कि इस महीने ऐपल अपना iPhone 17 लॉन्च कर सकती है। पिछले साल फरवरी 2025 में ही ऐपल ने iPhone SE को बंद कर iPhone 16e पेश किया था। रिपोर्ट्स की मानें, तो ऐपल 19 फरवरी को नया iPhone 17e लॉन्च कर सकती है। यह मॉडल ऐपल की लेटेस्ट सीरीज का सबसे सस्ता iPhone होगा। ऐसी खबरें हैं कि इस iPhone में पिछली बार के मुकाबले 4 बड़े अपग्रेड्स देखने को मिल सकते हैं। क्या बदलेगा iPhone 17e में? iPhone 17e के लुक्स में ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। यह दिखने में काफी हद तक iPhone 16e की तरह होगा। हालांकि इस बार ऐपल iPhone 17e में नॉच की जगह डायनामिक आइलैंड दे सकता है। हालांकि खबरें ऐसी भी आ रही हैं कि शायद ऐपल डायनामिक आइलैंड इसके अगले मॉडल में लेकर आए। ऐसे में देखना होगा कि ऐपल डायनामिक आइलैंड के साथ क्या फैसला लेता है। iPhone 17e में A19 चिपसेट दिया जाएगा, जो कि इसके पिछले मॉडल के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज और एफीशिएंट बनाएगा। इसके अलावा iPhone 17e में N1 चिप भी होगी, जो Wi-Fi 7 और ब्लूटूथ 6 जैसे एडवांस फीचर्स को सपोर्ट देगी। iPhone 17e की कनेक्टिविटी में भी होंगे सुधार iPhone 17e में ऐपल अपना नया C1X मॉडम दे सकता है। ऐपल का दावा है कि यह दूसरी पीढ़ी का मॉडम पहले के मुकाबले दोगुना तेज है और अब तक का सबसे ज्यादा पावर-एफिशिएंट मॉडम है। इसका मतलब है कि आपको सुपरफास्ट 5G स्पीड के साथ बेहतर बैटरी लाइफ भी मिलेगी। इस फोन में बाकी मॉडल्स की तरह MagSafe सपोर्ट मिल सकता है। बता दें कि ऐपल ने iPhone 16e में सिर्फ 7.5W की स्लो वायरलेस चार्जिंग ही दी थी। वहीं iPhone 17e में 20W-25W की मैग्नेटिक वायरलेस चार्जिंग मिलने की उम्मीद है। ऐसे में यूजर्स सस्ते iPhone के साथ भी मैग्नेटिक वॉलेट या बैटरी पैक जैसी एक्सेसरीज का इस्तेमाल कर पाएंगे। क्या रहेगी कीमत और कितने मिलेंगे कैमरे? iPhone 17e के कैमरा की बात करें, तो इसमें पीछे की तरफ सिंगल 48-मेगापिक्सल का कैमरा मिलने की उम्मीद है।वहीं कीमत को लेकर ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि iPhone 16e की तरह ही iPhone 17e की शुरुआत 599 डॉलर से हो सकती है। iPad 12 भी हो सकता है पेश रिपोर्ट्स की मानें, तो ऐपल iPad 12 पर भी काम कर रहा है। उम्मीद है कि iPhone 17e के साथ ऐपल इसे भी लॉन्च कर दे। इसका डिजाइन iPad 11 जैसा ही होगा। हालांकि चिप A18 और रैम 8 GB तक बढ़ सकती है। इसके अलावा इसमें ऐपल इंटेलिजेंस का सपोर्ट भी मिलेगा। आईपैड की कीमतों को लेकर फिलहाल कोई जानकारी नहीं है।

ASUS ने पेश किए नए लैपटॉप्स, AI फीचर्स और लंबी बैटरी लाइफ के साथ शानदार परफॉर्मेंस

नई दिल्ली ASUS ने अपने लेटेस्ट लैपटॉप की प्रीबुकिंग शुरू कर दी है. ये लैपटॉप्स कंपनी की Zenbook और Vivobook सीरीज का हिस्सा हैं, जो AMD Ryzen AI प्रोसेसर के साथ आते हैं. कंपनी के पोर्टफोलियो में कई लैपटॉप शामिल हैं, जिन्हें आप प्रीबुक कर सकते हैं. जल्द ही इनकी सेल भी शुरू होगी.  इन लैपटॉप्स की कीमत और फीचर्स का खुलास कंपनी ने कर दिया है. ब्रांड का कहना है कि इन प्रोडक्ट्स को AI असिस्ट प्रोडक्टिविटी, मल्टीटास्किंग, क्रिएटिव वर्कलोड और रोजमर्रा की कम्प्यूटिंग जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. आइए जानते हैं इनकी खास बातें.  क्या हैं फीचर्स? ASUS Zenbook S16 में AMD Ryzen AI 9 465 प्रोसेसर दिया गया है. ये लैपटॉप Copilot+ PC कैपेबिलिटी और ASUS AI ऐप्लिकेशन्स के साथ आता है. इसका वजन 1.5 किलोग्राम है और ये लैपटॉप ऑल-मेटल चैसी के साथ आता है. इसमें 16-inch का OLED डिस्प्ले मिलेगा, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है. कंपनी की मानें तो डिवाइस 23 घंटे की बैटरी लाइफ के साथ आता है.  Zenbook 14 को कंपनी ने AMD Ryzen AI 5 430 प्रोसेसर के साथ लॉन्च किया है. इसमें 14-inch का FHD+ OLED टच स्क्रीन डिस्प्ले मिलता है. ब्रांड का कहना है कि ये लैपटॉप सिंगल चार्ज में 25 घंटे तक की बैटरी लाइफ ऑफर करता है.  इसके अलावा Vivobook S16 को कंपनी ने इंट्रोड्यूस किया है, जो AMD Ryzen AI 400 प्रोसेसर के साथ आता है. इसमें Copilot+ PC फीचर मिलता है. डिवाइस FHD+ OLED डिस्प्ले के साथ आता है. ये मशीन सिंगल चार्ज में 23 घंटे तक चल सकती है.  इनके अलावा कंपनी ने Vivobook 16, Vivobook 15 और दूसरे मॉडल्स को लॉन्च किया है. सभी में कंपनी ने AMD Ryzen प्रोसेसर दिया है, जो अगल-अगल कैपेबिलिटी के साथ आते हैं. इनमें कंपनी ने SSD स्टोरेज दिया है.  कितनी है कीमत?  इन सभी मॉडल्स को 12 फरवरी से खरीदा जा सकेगा. हालांकि, ASUS Vivobook 16 मार्च में उपलब्ध होगा. Zenbook S16 की कीमत 1,69,990 रुपये है. वहीं Zenbook 14 की कीमत 1,15,990 रुपये है. Vivobook S16 की कीमत 1,04,990 रुपये से शुरू है.  Vivobook 16 को कंपनी ने 87,990 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया है. वहीं Vivobook 15 की कीमत 62,990 रुपये से शुरू होती है. ASUS Vivobook 16 (M1605NAQ) की कीमत 65,990 रुपये से शुरू होती है. प्रीऑर्डर पर 5,599 रुपये का फायदा सिर्फ 1 रुपये में मिलेगा. ये ऑफर जेनबुक मॉडल्स पर है.

पीरियड्स के दौरान दर्द और थकान से परेशान? जानें फिट रहने के आसान तरीके

 पीरियड्स के दौरान दर्द, थकान या चिड़चिड़ापन महसूस होना बहुत आम बात है और हर लड़की या महिला कभी न कभी इससे गुजरती है। पेट के निचले हिस्से में ऐंठन, कमर दर्द, सिर दर्द, उलझन या बिना किसी खास वजह के मूड खराब होना हार्मोनल बदलावों की वजह से होता है। इस समय शरीर थोड़ा कमजोर भी महसूस करता है, इसलिए खुद को समझना और सही देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है। सबसे पहले खाने-पीने पर ध्यान देना चाहिए। पीरियड्स के दिनों में हल्का, पोषण से भरपूर खाना जैसे हरी सब्जियां, फल, दालें और आयरन से भरपूर चीजें शरीर को ताकत देती हैं। खूब पानी पीना भी बहुत जरूरी है, इससे पेट की सूजन और थकान कम होती है। ज्यादा नमक, जंक फूड, चाय-कॉफी और कोल्ड ड्रिंक से दूरी बनाकर रखना बेहतर रहता है क्योंकि ये दर्द और चिड़चिड़ापन बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही आराम और हल्की-फुल्की गतिविधि का संतुलन भी जरूरी है। बहुत ज्यादा बिस्तर पर पड़े रहना भी शरीर को सुस्त बना देता है, इसलिए हल्की वॉक, स्ट्रेचिंग या योग करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और दर्द में राहत मिलती है। हालांकि, भारी एक्सरसाइज या ज्यादा थकाने वाला काम करने से बचना चाहिए। अगर मन करता है तो गुनगुने पानी से नहाना या पेट पर गर्म पानी की थैली रखना भी काफी आराम देता है। नींद पूरी लेना भी जरूरी है, क्योंकि नींद की कमी से मूड स्विंग्स और थकान बढ़ सकती है। पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है। समय-समय पर सैनिटरी पैड या साफ कपड़ा बदलना चाहिए, आमतौर पर हर 6 घंटे में। इस्तेमाल किए गए पैड को ठीक से लपेटकर फेंकें और अंडरगारमेंट्स रोज बदलें। अंडरगारमेंट्स को अच्छे से धोकर धूप में सुखाना चाहिए ताकि कीटाणु न पनपें। इस दौरान गंदे या नम कपड़े पहनने से बचें, क्योंकि इससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। हाथों की साफ-सफाई का भी ध्यान रखें और बार-बार हाथ धोते रहें। मानसिक सेहत का ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी है, जितना शारीरिक सेहत का। पीरियड्स के समय भावनाएं जल्दी आहत हो सकती हैं, गुस्सा या उदासी बिना वजह महसूस हो सकती है। ऐसे में खुद पर ज्यादा सख्त न हों। मनपसंद काम करें, हल्का संगीत सुनें, किताब पढ़ें या किसी अपने से बात करें। अगर दर्द बहुत ज्यादा हो या पीरियड्स बहुत अनियमित हों, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

Google का अलर्ट: 40% स्मार्टफोन में बढ़ा खतरा, अपनी सेफ्टी के लिए ये कदम उठाएं

 नई दिल्ली अमेरिकी कंपनी गूगल ने एक बड़ी वॉर्निंग दी है और बताया है कि करीब आधे एंड्रॉयड स्मार्टफोन यूजर्स पर मैलवेयर और स्पाईवेयर के खतरे में है. ये खतरा पुराने Android OS वर्जन होने की वजह से है.  ये जानकारी फॉर्ब्स ने दी है. रिपोर्ट में बताया है कि इस खतरे की वजह पुराना एंड्रॉयड ओएस वर्जन है. जो एंड्रॉयड 13 या उससे भी पुराने ओएस पर काम करते हैं. पुराने Android OS को अब सिक्योरिटी अपडेट नहीं मिलता है, जिसकी वजह से उनपर सबसे ज्यादा खतरा है. ऐसे स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या दुनियाभर में 1 अरब से ज्यादा है.  Android 16 इतने यूजर्स के फोन में  दुनियाभर में Android 16 अभी सिर्फ 7.5% डिवाइस में ही मौजूद है, जो दिसंबर तक का डेटा है. Android 15 पर 19.3 परसेंट फोन काम करते हैं. Android 14 पर 17.9 परसेंट स्मार्टफोन काम करते हैं और Android 13 पर 13.9 परसेंट स्मार्टफोन काम करते हैं. सिर्फ इतने परसेंट लोग सिक्योरिटी अपडेट के तहत आते हैं रिपोर्ट्स में बताया है कि 58 परसेंट स्मार्टफोन ऐसे हैं, जो सिक्योरिटी सपोर्ट के अंदर आते हैं, जबकि 40 परसेंट स्मार्टफोन के लिए सिक्योरिटी अपडेट अवेलेबल नहीं है.  पुराना स्मार्टफोन चलाने वाले यूजर्स को सलाह  स्मार्टफोन यूजर्स को सलाह दी गई है कि जिनके मोबाइल पुराने OS पर काम करते हैं, उनको लेटेस्ट एंड्रॉयड ओएस के साथ अपडेट कर लेना चाहिए. साथ ही सिक्योरिटी सपोर्ट को रेगुलर अपडेट करते रहना चाहिए. iPhone को मिलते हैं सिक्योरिटी अपडेट  पुराने iPhone को समय रहते अपडेट मिल जाते हैं और कई पुराने एंड्रॉयड स्मार्टफोन में जरूरी सिक्योरिटी अपडेट नहीं मिल पाते हैं. अगर कंपनी की तरफ से सपोर्ट बंद किया जा चुका है तो नया स्मार्टफोन खरीद लेना चाहिए.   कंपनियां 4-5 साल के लिए देती हैं सिक्योरिटी अपडेट  स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरर की तरफ से अपने हैंडसेट के लिए एक फिक्स टाइम तक सिक्योरिटी अपडेट दिया जाता है. आमतौर पर कंपनियां इसे 4 साल या 5 साल के लिए देती हैं. अब Samsung और गूगल पिक्सल हैंडसेट में 7 साल से ज्यादा के लिए सिक्योरिटी अपडेट देने का ऐलान किया है.  सिक्योरिटी अपडेट क्या होता है? स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरर की तरफ से हैंडसेट की सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी अपडेट जारी किए जाते हैं. यह अपडेट बग्स और उन खामियों को दूर करने का काम करता है, जो कई बार गलती से पुराने OS में आ जाती हैं. इन कमजोरियों और बग्स का फायदा उठाकर हैकर्स डिवाइस तक एक्सेस कर सकते हैं और डेटा चोरी कर सकते हैं. कई बार स्मार्टफोन को हैक तक किया जा सकता है.     एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करने वाले स्मार्टफोन की संख्या दुनियाभर में बहुत ज्यादा है. वहीं iPhone के iOS का यूज सिर्फ ऐपल के स्मार्टफोन को ही मिलता है और उनकी संख्या भी बहुत कम है. Android OS के साथ मिलकर सैमसंग, रियलमी, रेडमी, ओप्पो, वनप्लस जैसे स्मार्टफोन तैयार करते हैं और उनको ग्लोबल मार्केट में सेल करते हैं.     

ABCDE नहीं, QWERTY क्यों? कीबोर्ड लेआउट का पूरा इतिहास और साइंस

नई दिल्ली क्या आपको पता है कि कीबोर्ड पर अक्षर एक पंक्ति में क्यों नहीं होते? ज्यादातर लोग कहेंगे कि ऐसा टाइपिंग की स्पीड बढ़ाने के लिए होता है। जबकि असर वजह इससे ठीक उलट है। कीबोर्ड पर अक्षर ABCDE की तरह एक पंक्ति में इसलिए नहीं होते ताकि टाइपिंग की स्पीड को कम किया जा सके। टाइपराइटर की समस्या 1870 के दशक में पहले टाइपराइटर के बटन ABCDE के क्रम में ही थे। उस समय मशीनें मकैनिकल थीं और इस वजह से तेजी से टाइप करने के चलते टाइपराइटर जाम हो जाया करते थे। इस वजह से काम बार-बार रुकता था और देरी भी होती थी। फिर आया QWERTY फॉर्मुला इस समस्या से निपटने के लिए QWERTY फॉर्मुला पेश किया गया। इसे लाने वाले शख्स का नाम क्रिस्टोफर लैथम शोल्स था। इसने कीबोर्ड पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले अक्षरों जैसे E, I, T, A एक-दूसरे से दूर रख दिया। इससे टाइप करने वाले की उंगलियों को ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे टाइपिंग की स्पीड थोड़ी कम हो गई और मशीनें जाम होना बंद हो गईं। कीबोर्ड के इस लेआउट का नाम बाद में QWERTY पड़ा। समय के साथ क्यों नहीं बदला गया? सवाल उठता है कि समय के साथ टेक्नोलॉजी के बेहतर होने पर कीबोर्ड के ले आउट को बदला क्यों नहीं गया। दरअसल ऐसा मसल मेमोरी के चलते किया गया। प्रैक्टिकली कीबोर्ड की टेक्नोलॉजी उन्नत होने के बाद ABCDE वाले फॉर्मेट पर वापिस जाया जा सकता था लेकिन दुनिया भर के लोगों को क्वर्टी (QWERTY) की आदत पड़ चुकी थी। आज भी अगर इसे बदला जाए, तो पूरी दुनिया की टाइपिंग स्पीड जीरो हो जाएगी।

AI बनेगा नया ‘कर्मचारी’! सैम ऑल्टमैन की OpenAI ने पेश किया Frontier, इंसानों का भविष्य क्या?

नई दिल्ली OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन का कहना है कि आने वाले समय में कंपनियों में AI का बहुत ज्यादा इस्तेमाल होगा और ऑफिस में AI टीम्स काम करेंगी। इस काम के लिए OpenAI ने Frontier नाम का एक नया एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म पेश किया है। यह प्लेटफॉर्म कंपनियों के लिए AI कर्मचारी बनाने का काम करेगा। बतौर सैम ऑल्टमैन लोग कंपनियों में AI एजेंट्स की टीम को संभालेंगे। इसका मतलब है कि भविष्य में इंसानी कर्मचारियों की जगह AI एजेंट्स लें लेंगे और उन AI कर्मचारियों को संभालने का काम कुछ लोगों का होगा। X पर एक पोस्ट कर सैम ऑल्टमैन ने कहा है कि भविष्य में वही कंपनियां कामियाब होंगी, जो AI का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करेंगी और जहां लोग इन AI एजेंट्स की टीमों को मैनेज करेंगे। क्या है Frontier और क्या काम करेगा? रिपोर्ट के अनुसार, (REF.) Frontier को खास तौर पर बड़ी एंटरप्राइज कंपनियों के लिए ही बनाया गया है। इसके जरिए वह अपने इंटरनल सिस्टम में काम करने वाले AI एजेट्स को आसानी से मैनेज कर पाएंगी। गौर करने वाली बात है कि AI एजेंट्स इंसानी कर्मचारियों की तरह काम करते हैं। इन्हें इंसानों की तरह ही कंपनी के बारे में समझाया जाता है, इनकी भी ट्रेनिंग होती है और यह भी फीडबैक से सीखते हैं। इसके साथ ही हर एजेंट की पहचान और सुरक्षा सीमाएं होती हैं। कैसे काम करेंगे AI एजेंट्स Open AI का Frontier प्लेटफॉर्म कंपनियों के डेटा वेयरहाउस, CRM सिस्टम और टिकट टूल्स जैसे इंटरनल ऐप्स से कनेक्ट हो जाएगा। इससे कंपनी और उनके कामकाज के तरीके को लेकर AI की समझ और भी बेहतर होती है। इस तहह से AI एजेंट्स फाइलों के साथ काम कर सकेंगे, कोड चला सकेंगे और बिना किसी नए डेटा फॉर्मेट के मौजूदा एंटरप्राइज टूल्स का इस्तेमाल कर सकेंगे। ऑल्टमैन के मुताबिक, (REF.) उनका प्लेटफॉर्म Codex का इस्तेमाल करता है ताकि कंपनिया या थर्ड पार्टी डेवलपर्स सुरक्षित एजेंट बना सकें। OpenAI ने इन्हें बेहतर बनाने के लिए इन-बिल्ट इवैल्यूएशन और ऑप्टिमाइजेशन टूल्स भी दिए हैं। अब आगे क्या? लॉन्च के साथ ही दुनिया के ढेरों कंपनियां Frontier को अपना चुकी हैं। इनमें HP, Oracle, Uber, और Thermo Fisher जैसी कंपनियों के नाम शामिल है। इतना ही नहीं Cisco और T-Mobile जैसी कंपनियों में इसके पायलट प्रोग्राम चल रहे हैं। OpenAI अपने प्लेटफॉर्म को और बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है ताकि उद्योगों के हिसाब से खास समाधान पेश किए जा सकें। फिलहाल यह प्लेटफॉर्म कुछ कंपनियों के लिए उपलब्ध हैं लेकिन जल्द ही इसे सभी के लिए खोल दिया जाएगा।

85% पुरुषों को प्राइवेट पार्ट की सफाई के बारे में नहीं हैं ये महत्वपूर्ण बातें, डॉक्टर से जानें टिप्स

महिलाओं की हाइजीन, वजाइना क्लीनिंग टिप्स पर अक्सर हम बात करते रहते हैं लेकिन पुरुषों के हाइजीन की बात काफी कम होती है। शरीर की सफाई हर किसी को करनी चाहिए फिर चाहे वो पुरुष हो या महिला। अगर प्राइवेट पार्ट की सही से सफाई न की जाए, तो इंफेक्शन फैल जाता है और फिर ये गंभीर समस्या बन जाती है। ज्यादातर पुरुष जल्दबाजी में प्राइवेट पार्ट की सफाई सही से नहीं करते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो संभल जाइये। स्किन स्पेशलिस्ट डॉक्टर विहान सिंह का कहना है कि महिलाओं की तरह ही पुरुषों को भी प्राइवेट पार्ट की सफाई सही से करना काफी जरूरी है। चलिए कुछ हाइजीन टिप्स बताते हैं। प्राइवेट पार्ट साफ करने का सही तरीका डॉक्टर के मुताबिक, यूरिन पास करने के बाद ज्यादातर पुरुष ऐसे ही अंडरवियर पहन लेते हैं लेकिन ज्यादातर केसेस में इंफेक्शन इसी वजह से होता है। यूरिन स्टेन रहने और नमी बनी रहने के कारण फंगल इंफेक्शन फैलता है। कुछ और भी बातें हैं, जो पुरुषों को मालूम होनी चाहिए, चलिए जानते हैं- 1- प्राइवेट पार्ट की सफाई कभी भी साबुन से न करें। हमेशा किसी क्लीनिंग जेल या प्राइवेट पार्ट फ्रेंडली सोप से करें। केमिकल वाले साबुन के पार्टिकल्स स्किन पर जम जाते हैं। 2– सेक्स के बाद पेनिस को पानी से धोते हुए अच्छे से साफ करें। कई पुरुष ऐसा नहीं करते और इंफेक्शन फैलता है। 3– प्राइवेट पार्ट में अगर गीलापन है, तो अंडरवियर न पहनें। गीलेपन से खुजली, रैशेस की समस्या हो सकती है। 4- प्राइवेट पार्ट के प्यूबिक को भी समय-समय पर ट्रिम करें। प्यूबिक बाल बैक्टीरिया और पसीने को फंसा सकते हैं। 5– कभी भी गीले अंडरवियर न पहनें। टाइट और गीले अंडरवियर पहनने से भी प्राइवेट पार्ट में इंफेक्शन फैल सकता है। कैसे करें साफ प्राइवेट पार्ट को साफ करने के लिए गुनगुना पानी इस्तेमाल करें और केमिकल फ्री साबुन का इस्तेमाल करें। नहाते समय पेनिस एरिया के आस-पास की स्किन को अच्छे से क्लीन करें।

हार्ट डिजीज का खतरा: महिलाओं से 10 साल पहले पुरुषों को होती है बीमारी, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

मुंबई  अक्सर हम यह मान लेते हैं कि दिल की बीमारी उम्र बढ़ने के साथ ही होती है. ज्यादातर लोग सोचते हैं कि हार्ट अटैक या दिल से जुड़ी परेशानियां सिर्फ 60–70 साल की उम्र के बाद ही आती हैं. लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. आज की भागदौड़ भरी लाइफ, गलत खानपान, तनाव, कम नींद और फिजिकल एक्टिविटी की कमी ने दिल की बीमारियों को चुपचाप युवाओं तक पहुंचा दिया है सबसे खतरनाक बात यह है कि दिल की बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है.  शुरुआत में न तो तेज दर्द होता है और न ही कोई साफ चेतावनी मिलती है. इसी वजह से लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं और जब तक समझ आता है, तब तक नुकसान काफी बढ़ चुका होता है. अब एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने दिल की बीमारी को लेकर एक और अहम बात सामने रखी है, जो खासतौर पर पुरुषों के लिए चिंता बढ़ाने वाली है.    क्या कहती है नई स्टडी?    अमेरिका में 18 से 30 साल की उम्र के 5,000 से ज्यादा युवाओं पर लंबे समय तक किए गए एक बड़े अध्ययन से पता चला है कि पुरुषों में महिलाओं की तुलना में कोरोनरी हार्ट डिजीज (CHD) लगभग 10 साल पहले विकसित हो जाती है. यह अध्ययन CARDIA (Coronary Artery Risk Development in Young Adults) नाम से जाना जाता है और इसके नतीजे जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (JAHA) में प्रकाशित हुए हैं. शोधकर्ताओं के अनुसार 20 से 29 साल की उम्र तक पुरुष और महिलाओं में दिल की बीमारी का खतरा लगभग समान रहता है, लेकिन 35 साल की उम्र के आसपास पुरुषों में यह खतरा तेजी से बढ़ने लगता है. यह अंतर मध्य आयु तक बना रहता है. हैरानी की बात यह है कि ब्लड प्रेशर, धूम्रपान और कोलेस्ट्रॉल जैसे कारकों को ध्यान में रखने के बाद भी यह अंतर खत्म नहीं होता है.    पुरुषों में दिल की बीमारी पहले क्यों होती है? रीजेन्सी हॉस्पिटल, लखनऊ के वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. हर्षित गुप्ता बताते हैं कि इसके पीछे कई कारण हैं. जैसे पुरुषों में हार्मोनल सुरक्षा महिलाओं की तुलना में कम होती है, महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन कुछ समय तक दिल को सुरक्षा देता है, पुरुषों में कम उम्र से ही धूम्रपान, शराब, तनाव और अनियमित जीवनशैली अधिक देखने को मिलती है, जैविक (Biological) अंतर भी इस जोखिम को बढ़ाते हैं, हालांकि डॉक्टर यह भी स्पष्ट करते हैं कि महिलाओं को मिलने वाली हार्मोनल सुरक्षा स्थायी नहीं होती है. उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में भी दिल की बीमारी का खतरा तेजी से बढ़ता है.  दुनिया में मौत का सबसे बड़ा कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया में होने वाली कुल मौतों में से 32 प्रतिशत मौतें हार्ट डिजीज के कारण होती हैं. साल 2022 में करीब 19.8 मिलियन लोगों की मौत दिल की बीमारियों से हुई. ये आंकड़े साफ बताते हैं कि दिल की बीमारी कोई छोटी समस्या नहीं है.  समाधान क्या है? शोधकर्ताओं का मानना है कि दिल की बीमारी से बचाव की शुरुआत युवावस्था से ही होनी चाहिए.  20–30 साल की उम्र में ही दिल की सेहत की जांच और सही लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है. बैलेंस डाइट, नियमित एक्सरसाइज, तनाव से दूरी, धूम्रपान से बचाव और समय-समय पर हेल्थ चेकअप, यही दिल को लंबे समय तक स्वस्थ रखते हैं. 

Pixel 10a का सस्ता वर्शन आ रहा है! लॉन्च डेट कंफर्म, ये होंगे खास फीचर्स

नई दिल्ली  Pixel 10 सीरीज का सबसे सस्ता हैंडसेट Pixel 10a होगा. अब गूगल ने ऑफिशियली इस स्मार्टफोन के लुक को अनवील कर दिया है. साथ ही लॉन्चिंग डेट भी कंफर्म कर दी है.   Youtube पर गूगल ने एक शॉर्ट टीजर वीडियो पोस्ट किया है, जो 16 सेकेंड का है. इस शॉर्ट वीडियो में कंपनी ने स्मार्टफोन का लुक और लॉन्चिंग डेट की जानकारी शेयर की है. यह हैंडसेट ग्लोबल मार्केट में 18 फरवरी 2018 को लॉन्च होगा. Pixel 10a एंट्री लेवल फोन होगा  Pixel 10a, अपनी सीरीज का एंट्री लेवल का स्मार्टफोन होगा. कंपनी ने बीते साल Pixel 9a को अनवील किया था, जो पिक्सल 9 सीरीज का एंट्री लेवल स्मार्टफोन था. कंपनी हर साल सभी सीरीज के एंट्री लेवल स्मार्टफोन को A नाम के साथ लॉन्च करती है.  Pixel 10a के स्पेसिफिकेशन्स  Pixel 10a के स्पेशिफिकेशन्स का ऑफिशियल ऐलान नहीं किया है, लेकिन इसमें भी Pixel 9a के जैसा 6.3-inch 120Hz Actua डिस्प्ले दिया जाएगा. इसमें 120Hz का रिफ्रेश रेट्स मिलेगा. वीडियो देखकर पता चलता है कि बैक पैनल पर डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया जाएगा, हालांकि अभी सेंसर की जानकारी नहीं है.  Pixel 9a की इतनी थी कीमत  बीते साल Pixel 9a की शुरुआती कीमत 499 अमेरिकी डॉलर और भारत में 49,999 रुपये रखी गई थी. अब 18 फरवरी को लॉन्च होने वाले Pixel 10a की कीमत क्या होगी, वो तो ऑफिशियल लॉन्चिंग के  बाद ही पता चलेगी.  Pixel 10a इन चार कलर में होगा लॉन्च  टिप्स्टर Evan Blass ने बताया है कि Pixel 10a को ग्लोबल मार्केट में चार कलर वेरिएंट में पेश किया जाएगा. यह चार कलर के नाम ऑब्सिडियन, लेवेंडर, बेरी और फॉग है.  नए AI फीचर्स भी मिलेंगे  Pixel 10a की मदद से यूजर्स को सस्ते में गूगल का ईकोसिस्टम यूज करने को मिल जाता है.  इसमें ढेरों न्यू AI फीचर्स का भी एक्सेस मिलेगा. कंपनी लंबे समय से 7 साल तक Android OS वर्जन का अपडेट दे रही है और इस बार भी उम्मीद है कि कंपनी 7 साल तक OS अपडेट देने का ऐलान करेगी.