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Apple का बड़ा फैसला: iPhone SE, MacBook Air M3 सहित लगभग 25 गैजेट्स की बिक्री बंद

नई दिल्ली टेक दिग्‍गज ऐपल ने इस साल अपनी प्रोडक्‍ट लिस्‍ट को काफी छोटा कर दिया। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी ने 25 से ज्‍यादा डिवाइस और एक्‍सेसरीज को बंद कर दिया, जिसमें 7 आईफोन मॉडल, macbook air m3 समेत कई मैकबुक शामिल हैं। हालांकि इसका मतलब यह कतई नहीं कि इन प्रोडक्‍ट्स को अब खरीदा नहीं जा सकता। दरअसल, ऐपल हमेशा से नए मॉडल आने पर पुराने मॉडल को बंद यानी डिस्‍कंन्‍टीन्‍यू कर देती है। इस साल बंद किए गए सबसे अहम मॉडलों में शामिल रहा आईफोन SE। फरवरी में कंपनी ने तीसरी जेनरेशन के आईफोन एसई को बंद कर दिया। कौन से गैजेट्स पर चली कैंची, आइए जानते हैं। Iphone SE की जगह आया iphone 16e ऐपल ने Iphone SE काे बंद करने के बाद iphone 16e को पेश किया। यह ऐपल का सबसे कॉम्‍पैक्‍ट और सस्‍ता आईफोन है। बहरहाल, अब ऐपल ऑफ‍िशियली ऐसा कोई आईफोन नहीं बेचती जिसमें होम बटन, टच आईडी, एलसीडी स्‍क्रीन, 6 इंच से छोटा डिस्‍प्‍ले या लाइटनिंग पोर्ट हो। उनके जगह ऐपल की तमाम आईफोन लाइनअप में अब फेस आईडी, ओएलईडी डिस्‍प्‍ले और यूएसबी-सी टाइप चार्जिंग है। Iphone Plus मॉडल की विदाई इस साल आई आईफोन 17 सीरीज में कोई प्‍लस मॉडल शामिल नहीं था। इसके अलावा, कंपनी ने आधिकारिक तौर पर आईफोन 14 प्‍लस और आईफोन 15 प्‍लस को बंद कर दिया है। जल्‍द आईफोन 16 प्‍लस की विदाई भी हो सकती, जो यह संकेत है कि कंपनी प्‍लस मॉडल के बजाए अब स्‍ल‍िम स्‍मार्टफोन पर फोकस कर रही है। इस साल प्‍लस मॉडल की जगह आईफोन एयर को लाया गया है। यह फोन चर्चाओं में तो खूब रहा, लेकिन सेल में इसे मामूली परफॉर्म किया। ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले वक्‍त में आईफोन सीरीज के प्‍लस मॉडल नहीं लॉन्‍च होंगे। इस साल कितने आईफोन बंद हुए?     आईफोन 16 प्रो     आईफोन 16 प्रो मैक्स     आईफोन 15     आईफोन 15 प्लस     आईफोन 14     आईफोन 14 प्लस     आईफोन SE (थर्ड जेनरेशन)। 2025 में कितनी मैकबुक्‍स बंद     M2 मैक्स और M2 अल्ट्रा वाला मैक स्टूडियो     M4 चिप वाला 14-इंच मैकबुक प्रो     macbook air m3 13 इंच और 15 इंच     macbook air m2 13 इंच ऐपल वॉच के ऑप्‍शन भी हुए कम इस साल ऐपल ने कई वॉच मॉडल को आध‍िकारिक तौर पर अपने स्‍टोर से हटा दिया। इनमें ऐपल वॉच अल्ट्रा 2, ऐपल वॉच सीरीज 10 और ऐपल वॉच SE 2 शामिल है। M4 चिप वाले आईपैड प्रो, M2 चिप वाले आईपैड एयर और 10वीं जनरेशन के आईपैड को बंद कर दिया। ध्‍यान रहे कि इन गैजेट्स को ऐपल स्‍टोर से हटाया गया है। थर्ड पार्टी स्‍टोर जैसे- एमेजॉन, फ्लिपकार्ट से इन्‍हें खरीदा जा सकता है। अगर ये वहां आपको डिस्‍काउंटेड प्राइस में मिलते हैं तो आप इन्‍हें खरीद सकते हैं।

हर महीने बिना बताए कट रहा पैसा! कहीं AutoPay तो एक्टिव नहीं? GPay, PhonePe, Paytm पर ऐसे करें कैंसिल

नई दिल्ली डिजिटल पेमेंट के दौर में PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे UPI ऐप्स ने लोगों के लिए AutoPay (ऑटो डेबिट) की सुविधा को आसान बना दिया है। इन तीनों ऐप्स में ऑटो पे का फीचर मिलता है। मोबाइल रिचार्ज, OTT सब्सक्रिप्शन, बिजली-पानी के बिल, EMI या म्यूचुअल फंड SIP जैसी सर्विसेज के लिए अपने आप पैसे कट जाते हैं। इससे यूजर्स का समय बचाता है और पेमेंट मिस होने की टेंशन भी नहीं रहती है। हालांकि, कभी-कभी यह सुविधा परेशानी का कारण भी बन जाता है। यह आपसे पूछे बिना उस सर्विस के लिए भी पेमेंट कर देता, जो आपको नहीं चाहिए होती है। कई बार तो पता भी नहीं चलता है कि आपने किस-किस सर्विस के लिए ऑटो पे सेट किया है। पैसे कट जाने पर आपको पता चलता है कि आपने उस सर्विस के लिए भी ऑटो पे सेट किया था। हालांकि, इस परेशानी को दूर करने के लिए PhonePe, Google Pay, Paytm तीनों ऐप में ऑटो पे को कैंसिल करने का ऑप्शन मिलता है। साथ ही, आप ये भी देख सकते हैं कि आपने किस-किस सर्विस के लिए ऑटो पे सेट किया है। आइये, तीनों ऐप से ऑटो पे कैंसिल करने का तरीका जानते हैं। दो तरह से रोक सकते हैं ऑटो पे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऑटो पेमेंट को रोकने के दो तरीके हैं। आप किसी सर्विस या फिर सब्सक्रिप्शन के लिए ऑटो पे को केंसिल कर सकते हैं या फिर इसे पॉस यानी कुछ समय के लिए रोक सकते हैं। पॉस करने से एक तय समय के लिए ऑटो पेमेंट बंद हो जाएगा। वहीं, केंसिल करने से वह हमेशा के लिए रद्द हो जाएगा, लेकिन आप उसे बाद में कभी भी रीएक्टिवेट यानी चालू कर सकते हैं। Paytm से ऑटो पे बंद करना है बहुत आसान     अगर आप पेटीएम के जरिए सेटअप किए गए ऑटो पे को कैंसिल करना चाहते हैं तो ऐप ओपन करने के बाद प्रोफाइल पर जाएं।     अब स्क्रॉल डाउन करके नीचे आएं और UPI सेटिंग पर क्लिक करें।     फिर आपको ऑटोमेटिक पेमेंट या फिर पेमेंट मैनेजमेंट के ऑप्शन पर क्लिक करना है।     अब उस पेमेंट को सिलेक्ट करें, जिसे कैंसिल करना चाहते हैं।     इसके बाद Cancel Automatic Payment पर क्लिक करें और कन्फर्म कर दें। ​ GPay के लिए फॉलो करें ये स्टेप्स     गूगल पे के लिए आपको ऐप ओपन करते ही राइट साइड में You टैब दिखेगा। इस पर क्लिक कर दें।     फिर नीचे आएं और AutoPay के ऑप्शन पर क्लिक करें।     अब आपको तीन सेक्शन लाइव, पेंडिंग और कम्पलीट यानी पूरा मिलेंगे। इनमें से आपको लाइव सेक्शन में जाना है।     इसके बाद कैंसिल ऑटो पे पर क्लिक करें और यूपीआई पिन डालें। PhonePe से कैसे कैंसिल करें ऑटो पे     अगर आप फोनपे के जरिए ऑटो पे को कैंसिल करना चाहते हैं तो आपको इसके लिए सबसे पहले अपने डिवाइस में ऐप ओपन करना होगा।     उसके बाद लेफ्ट साइड में सबसे ऊपर आ रहे प्रोफाइल आइकन पर क्लिक करें।     फिर स्क्रॉल डाउन करके नीचे आएं और मैनेज पेमेंट पर क्लिक कर दें।     इसके बाद आपको नीचे मोर ऑप्शन्स सेक्शन के तहत AutoPay का ऑप्शन मिलेगा। इस पर क्लिक करें।     यहां पर Ongoing टैब में आपको सभी सर्विसेस के लिए चालू ऑटो पे की लिस्ट दिख जाएगा।     आपको जिस सर्विस के लिए ऑटो पे कैंसिल करना है, उस पर क्लिक करके आगे की प्रोसेस पूरी कर लें।     ध्यान रखें ऑटो पे डिलीट या फिर कैंसिल करने के लिए आपको यूपीआई पिन डालना होगा।

स्मार्टफोन का डार्क मोड एक मिथक? ये 3 कारण जानकर आप भी कर देंगे इस्तेमाल बंद

नई दिल्ली आजकल ज्यादातर स्मार्टफोन में डार्क मोड का ऑप्शन होता है। कई लोग सोचते हैं कि यह बैटरी बचाता है और आंखों के लिए अच्छा है। दरअसल, इसको इस्तेमाल करते हुए ऐसा लगता है जैसे आंखों पर रोशनी कम पड़ रही है, जिससे आंखें सही रहती हैं। इसके अलावा, ऐसा भी लगता है कि यह कम ब्राइटनेस का इस्तेमाल करता है, इसलिए लोग सोचते हैं कि इससे बैटरी कम खर्च होती है। लेकिन ये सिर्फ मिथक हो सकते हैं। चलिए जान लेते हैं वो 3 कारण, जिन्‍हें पढ़ने के बाद आप मोबाइल में डार्क मोड इस्तेमाल करना छोड़ देंगे। क्या सचमुच बचाता है बैटरी की पावर? मेक यूज ऑफ की एक रिपोर्ट (Ref.) बताती है कि लोग सोचते हैं कि OLED स्क्रीन वाले फोन में डार्क मोड बैटरी बचाता है, क्योंकि काले पिक्सल बंद हो जाते हैं। यह तब सच है अगर प‍िक्‍सल पूरी तरह ब्‍लैक हों। ज्यादातर डार्क मोड में गहरा ग्रे इस्तेमाल होता है। ग्रे पिक्सल भी बिजली खाते हैं। इसलिए बैटरी में ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। OLED ड‍िस्‍प्‍ले में डार्क मोड को बैटरी सेवर बताया जाता है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। टेक्स्ट पढ़ने में होती है दिक्कत डार्क मोड में सफेद या हल्के रंग का टेक्स्ट काले बैकग्राउंड पर होता है। इससे पढ़ना मुश्किल हो जाता है। सदियों से किताबें काले अक्षरों वाले सफेद पन्नों पर छपी हैं क्योंकि इससे पढ़ना आसान होता है। डार्क मोड में कंट्रास्ट कम होता है और उससे टेक्‍स्‍ट पढ़ने में द‍िक्‍कत होती है। सैमसंग फोन्‍स में तो डार्क मोड और भी खराब लगता है क्योंकि वहां डार्क मोड काला, गहरा ग्रे और गहरा हरा रंग मिलाकर इस्तेमाल होता है। अजीब लगते हैं ऐप्स के इंटरफेस कई ऐप्स के स्क्रीनशॉट देखें तो लाइट मोड ज्यादा साफ और सुंदर लगता है। डार्क मोड में हाइलाइट किए गए हिस्से का रंग गहरा होता है और बैकग्राउंड पर अजीब लगता है। जैसे प्ले स्टोर में नीला रंग सफेद पर अच्छा दिखता है, लेकिन काले पर नहीं। जीमेल में काला टेक्स्ट सफेद पर आसानी से दिखता है, लेकिन डार्क मोड में हल्का सफेद टेक्स्ट, डार्क मोड पर अजीब लगता है। कई ऐप्स में डार्क मोड को बाद में जोड़ा गया है, इसलिए वह अच्छे से डिजाइन नहीं हुए हैं। इससे कुल मिलाकर आंखों के लिए अच्छा अनुभव नहीं मिलता। ये फीचर उतना भी अच्छा नहीं? डार्क मोड कभी बहुत लोकप्रिय हुआ था, लेकिन अब लोगों को एहसास होने लगा है क‍ि यह उतना अच्छा नहीं है। डार्क मोड में कंट्रास्ट कम होता है। ज्यादातर ऐप्स इसमें अच्छे नहीं द‍िखते। इसके अलावा, ग्रे स्क्रीन देने पर बैटरी की बचत भी नहीं होती है। लिहाजा, आप चाहें तो इस फीचर को ऑफ भी कर सकते हैं।

अब बचने का कोई रास्ता नहीं! WhatsApp पर ब्लॉक होते ही हर प्लेटफॉर्म से होंगे बाहर

नई दिल्ली  डिजिटल दुनिया में ठगी करने वालों पर लगाम लगाने के लिए भारत सरकार एक बेहद सख्त कदम उठाने जा रही है। अब तक व्हाट्सऐप (WhatsApp) पर ब्लॉक होने के बाद स्कैमर्स टेलीग्राम या स्नैपचैट जैसे अन्य प्लेटफॉर्म का सहारा लेकर लोगों को निशाना बनाते थे लेकिन जल्द ही यह रास्ता बंद होने वाला है। सरकार एक ऐसा यूनिफाइड ब्लॉकिंग सिस्टम लाने पर विचार कर रही है जिसके तहत एक प्लेटफॉर्म पर बैन हुआ यूजर पूरे डिजिटल इकोसिस्टम से बाहर कर दिया जाएगा। वन प्लेटफॉर्म ब्लॉक, ऑल प्लेटफॉर्म आउट मौजूदा व्यवस्था में व्हाट्सऐप हर महीने लाखों संदिग्ध अकाउंट्स को ब्लॉक करता है लेकिन स्कैमर्स आसानी से अपना प्लेटफॉर्म बदल लेते हैं। सरकार की नई योजना इसे जड़ से खत्म करने की है। व्हाट्सऐप और अन्य मैसेजिंग ऐप्स अब उन मोबाइल नंबरों की लिस्ट सरकार के साथ साझा करेंगे जिन्हें फ्रॉड या नियमों के उल्लंघन के लिए बैन किया गया है। सरकार इन नंबरों को एक सेंट्रल डेटाबेस में डालेगी जिससे टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे अन्य ऐप्स भी उन्हें ऑटोमैटिक तरीके से ब्लॉक कर सकेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य स्कैमर्स को एक ऐप से दूसरे ऐप पर शिफ्ट होने से रोकना है।    सिम बाइंडिंग (Sim Binding): बिना सिम नहीं चलेगा ऐप स्कैमर्स की एक बड़ी चालाकी यह होती है कि वे एक बार ओटीपी (OTP) लेकर अकाउंट बना लेते हैं और फिर सिम कार्ड निकाल फेंकते हैं। इससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। इससे निपटने के लिए सरकार सिम बाइंडिंग को अनिवार्य करने जा रही है। इस नियम के बाद अगर आपके फोन में एक्टिव सिम कार्ड नहीं है तो आप व्हाट्सऐप या अन्य मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इससे किसी भी धोखाधड़ी की स्थिति में अपराधी की लोकेशन और पहचान को तुरंत ट्रैक करना संभव होगा।   क्यों पड़ी इस नियम की जरूरत? व्हाट्सऐप की मासिक कंप्लायंस रिपोर्ट (Compliance Report) बताती है कि हर महीने लाखों अकाउंट्स पर कार्रवाई होती है फिर भी साइबर अपराध कम नहीं हो रहे हैं। केवल एक ऐप पर बैन लगाना काफी नहीं है क्योंकि अपराधी के पास दर्जनों डिजिटल रास्ते खुले होते हैं। सरकार का मानना है कि प्लेटफॉर्म्स के बीच आपसी तालमेल से ही साइबर सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है।  

फिर बढ़ा संक्रमण का खतरा, साल खत्म होने से पहले डराने लगी यह बीमारी

अमेरिका में छुट्टियों और जश्न के माहौल के बीच कोरोना वायरस (COVID-19) ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। जैसे-जैसे लोग क्रिसमस और नए साल की छुट्टियों के लिए यात्रा कर रहे हैं और ठंडे मौसम के कारण घरों के अंदर समय बिता रहे हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने संक्रमण की एक नई लहर की चेतावनी दी है। Stratus वैरिएंट का बढ़ता प्रभाव इस साल की शुरुआत में अमेरिका में लेट-समर वेव देखी गई थी जिसका कारण XFG वैरिएंट था। इसे वैज्ञानिक भाषा में Stratus भी कहा जाता है। यह वैरिएंट ओमिक्रॉन के अन्य रूपों की तरह ही बहुत संक्रामक है और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर आसानी से फैलता है। CDC (रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र) के ताजा आंकड़ों के अनुसार अमेरिका के 31 राज्यों में कोविड के मामले बढ़ रहे हैं। क्या कहते हैं आंकड़े? संक्रमण के स्तर को मापने के लिए वैज्ञानिक वेस्टवॉटर (गंदे पानी) की जांच करते हैं। इसमें दो अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं: CDC की रिपोर्ट: 13 दिसंबर तक देशभर में वायरस की मात्रा कम स्तर पर थी लेकिन 15 राज्यों में यह मध्यम से उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है। WastewaterSCAN की रिपोर्ट: इसके अनुसार नवंबर से अब तक वायरस की मौजूदगी में 21% की बढ़ोतरी हुई है और राष्ट्रीय स्तर पर इसे हाई माना जा रहा है।  बुजुर्गों के लिए बढ़ता खतरा वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ डॉ. विलियम शैफनर का कहना है कि वर्तमान में फ्लू (Flu) के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं जबकि कोविड की रफ्तार फिलहाल धीमी लेकिन स्थिर है। सबसे ज्यादा चिंता 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों को लेकर है क्योंकि इस आयु वर्ग में अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। विशेषज्ञ इसकी वजह समय के साथ कम होती इम्युनिटी और बूस्टर डोज न लगवाना बता रहे हैं। सबसे प्रभावित इलाके और राज्य फिलहाल अमेरिका के मिडवेस्ट और नॉर्थईस्ट इलाकों में संक्रमण सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। मिशिगन, मिनेसोटा, ओहियो, मैसाचुसेट्स, कनेक्टिकट, एरिजोना, कंसास, केंटकी और न्यू हैम्पशायर जैसे राज्यों में कोविड का स्तर 'हाई' या 'मॉडरेट' दर्ज किया गया है।   बचाव के तरीके छुट्टियों के इस सीजन में खुद को और परिवार को सुरक्षित रखने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ सलाह दी है: वैक्सीनेशन: अपनी बूस्टर डोज समय पर लें। सावधानी: यात्रा के दौरान भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क का प्रयोग करें। स्वच्छता: हाथों को बार-बार धोएं और सर्दी-जुकाम के लक्षण दिखने पर खुद को आइसोलेट करें।

Green Tea पर कानून की चाय! अब ‘चाय’ कहना होगा गलत

नई दिल्ली  FSSAI ने ग्रीनटी को लेकर नई परिभाषा दी है। नए नियमों के मुताबिक अब हर उस पेय पदार्थ को चाय कहना गलत और गैरकानूनी माना जाएगा, जो असली चाय के पौधे से नहीं बना है। आइए जानते हैं कि क्या है FASSI द्वारा दी गई नई परिभाषा क्या है असली चाय की परिभाषा? FSSAI ने स्पष्ट किया है कि केवल वही उत्पाद 'चाय' कहलाने के हकदार हैं, जो Camellia sinensis (कैमेलिया साइनेंसिस) नामक पौधे की पत्तियों या कलियों से तैयार किए गए हों। इसमें ग्रीन टी, कांगड़ा टी और इंस्टेंट टी शामिल हैं, क्योंकि ये इसी पौधे से बनती हैं। इनके अलावा जड़ी-बूटियों, फूलों या अन्य पौधों से तैयार किए गए किसी भी पेय को 'चाय' के नाम से बेचना अब 'मिसब्रांडिंग' (गलत लेबलिंग) माना जाएगा। हर्बल और फ्लावर टी का क्या होगा? बाजार में बिकने वाली हर्बल टी, रूइबोस टी, डिटॉक्स टी और फ्लावर टी वास्तव में 'चाय' नहीं बल्कि 'इन्फ्यूजन' हैं। FSSAI ने निर्माताओं और ई-कॉमर्स कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे इन उत्पादों के पैकेट पर से 'Tea/चाय' शब्द तुरंत हटाएं। अब इन पेयों को 'प्रोप्राइटरी फूड' या उनके वास्तविक अवयवों के नाम से बेचना होगा। भ्रामक विज्ञापनों पर गिरेगी गाज प्राधिकरण ने साफ किया है कि उपभोक्ताओं को भ्रम में रखना कानूनन अपराध है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माताओं और विक्रेताओं पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। राज्य के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को ई-कॉमर्स साइट्स और रिटेल स्टोर्स पर कड़ी निगरानी रखने के आदेश दिए गए हैं।

ये टिप्स रखेंगे आपको टेंशन फ्री

यदि आप अपने कार्यस्थल पर टेंशनमुक्त रहना चाहती हैं तो समय पर काम को पूरा करने की आदत डालें। साथ ही स्वयं की थोड़ी सी देखभाल भी करें। ऐसा करके न केवल आप अन्य लोगों के लिए मिसाल बन सकती हैं, बल्कि स्वयं को हमेशा प्रसन्न रख सकती हैं… तनाव आज इंसान के जीवन का हिस्सा बन चुका है और इसका सीधा असर पड़ता है उसके काम पर। तनावग्रस्त होने पर आप नाखुश तो रहती ही हैं साथ ही हताशा भी चेहरे पर साफ नजर आती है। इसका असर यहीं पर खत्म नहीं होता यह काम करने की क्षमता के साथ ही कंपनी के साथ आपके रिश्ते को भी प्रभावित करता है। यदि आप ऐसी समस्या से ग्रसित हैं तो ध्यान दें इन बातों का। तनाव की पहचान सबसे पहले तो इस बात को समझने की कोशिश करें कि आप तनावग्रस्त हैं कि नहीं। फिर उसके लक्षणों की पहचान करने की कोशिश करें। उदाहरण स्वरूप चिड़चिड़ाहट होना, अत्यधिक धूम्रपान या चाय, कॉफी लेना, नींद में अनियमितता आना ये तनाव के लक्षण हैं। यदि इनमें से एक या कई लक्षण नजर आते हैं तो निश्चित रूप से आप तनावग्रस्त हैं। तनाव का कारण शांति से बैठकर इस बात पर गौर करें कि तनाव का मुख्य कारण क्या है? यह आपके काम का तरीका है या काम की अधिकता ने आपको तनावग्रस्त कर दिया है? इस बारे में आराम से सोचें। क्या यह समस्या सिर्फ किसी खास प्रोजेक्ट में हो रही है या डेडलाइन पर काम खत्म न होने की टेंशन है या ऐसी स्थिति में खुद को कमजोर महसूस करना आपकी परेशानी को बढ़ा रहा है। काम का माहौल सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप जिस ऑफिस में काम करती हैं वहां का माहौल कर्मचारियों के अनुकूल है या नहीं? कई बार तनाव का कारण कार्यस्थल में होने वाली परेशानियां ही होती हैं। इसके लिए देखें कि आप जिस संस्थान से जुड़ी हैं वहां पर कर्मचारियों के लिए अच्छी सुविधाएं जैसे सुविधाजनक टाइम, पार्ट-टाइम काम करने की सुविधा, घर में काम करने का विकल्प, आकस्मिक छुट्टी आदि हैं कि नहीं। यदि ऐसा नहीं है तो ऐसे संस्थान को जितनी जल्दी संभव हो छोड़ दें और तनाव से मुक्ति पाएं। कारण, तनाव वाली जगह पर काम करने पर न केवल आपकी कार्यक्षमता प्रभावित होगी, बल्कि आप तनावग्रस्त भी होती जाएंगी। इसका नतीजा यह होगा कि आप हमेशा अस्वस्थ बनी रहेंगी। जाहिर है, अस्वस्थ रहकर कोई भी काम सपलतापूर्वक अंजाम नहीं दिया जा सकता। काम की लिस्ट तनाव से निपटने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि काम को उसकी प्राथमिकता के हिसाब से बांट लिया जाए। इसके लिए दिन में किए जाने वाले कामों की उनकी प्राथमिकता के हिसाब से लिस्ट बना लें। उदाहरणस्वरूप सबसे पहले काम से संबंधित जरूरी मीटिंग अटेंड करना। फिर जरूरी मेल भेजना। फिर अपने काम से संबंधित जरूरी चीजों को क्रमानुसार करते जाना। एक बार जब लिस्ट तैयार हो जाए तो हर काम के लिए समय सीमा तय कर लें। ब्रेक लेती रहें खुद को तनाव से बचाने के लिए काम के दौरान थोड़े-थोड़े अंतराल पर ब्रेक लेती रहें। हर दो घंटे के आसपास अपनी सीट से उठकर थोड़ा टहल लें पानी, चाय या कॉफी पिएं। आप चाहें तो अन्य सहयोगियों से कुछ देर बातचीत भी कर सकती हैं। कुछ जगहों पर आराम करने के लिए कैैंटीन, रेस्ट रूम, रीडिंग रूम या जिम आदि की व्यवस्था भी होती है। अगर आपके कार्यस्थल में ऐसी सुविधाएं हैं तो वहां जाकर दिमाग को हल्का करें। खुद की देखभाल स्वास्थ्य के लिहाज से यह बहुत ही जरूरी है कि आप अपनी पर्याप्त देखभाल करें। शरीर को पोषण पहुंचाने और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्यवर्द्धक चीजों का सेवन करें। यदि आप उन लोगों में से हैं, जो काम के चक्कर में लंच को इग्नोर कर देते हैं तो सबसे पहले इस आदत को सुधारने की जरूरत है। लंच बॉक्स अपने साथ ऑफिस जरूर ले जाएं और रोजाना टाइम पर उसका सेवन करें। अगले दिन काम के दौरान तरोताजा रहने के लिए पर्याप्त नींद जरूर लें। मसल्स टोनिंग और बॉडी स्ट्रेंथनिंग जैसी एक्सरसाइज को भी अपने रुटीन का हिस्सा बनाएं। साथ ही सुबह या शाम के समय कुछ देर अवश्य टहलें। आप मेडिटेशन और योगा भी कर सकती हैं। इससे शरीर में ऊर्जा बनी रहेगी और आपका सारा काम खुशी-खुशी और आसानी से होगा।  

पुरुषों को दीवाना बना देती है हाई हील

अगर आप भी पुरुषों को अपना दीवाना बनाना चाहती हैं तो हाई हील पहनना शुरु कर दीजिए क्योंकि हाई हील पहनने वाली महिलाओं की मदद के लिए पुरुष अधिक आतुर रहते हैं। एक नए शोध से पता चला है कि महिलाओं की हाई हील महिलाओं के प्रति होने वाले पुरुषों के व्यवहार को कैसे प्रभावित करती है। इस शोध से बात सिद्ध हुई है कि जैसे-जैसे महिलाओं की हील में वृद्धि होती गयी वैसे ही पुरुष भी उनकी सहायता करने के लिए अधिक उत्साहित थे। फ्रांस के रिसर्चर निकोलस गुइगुइन के अनुसार पुरुषों की तरह अन्य महिलायें इससे प्रभावित नही होती। शोध के अनुसार महिलाओं के विभिन्न प्रकार के जूतों की तरह उनके प्रति पुरुषों का व्यवहार भी अलग-अलग होता है। सर्वे के अनुसार फ्लैट जूते की जगह जब महिलाओं ने हाई हील पहनी हुई थी तो पुरुषों ने उनकी बातों का बहुत आसानी से और अच्छी तरह पालन किया। एक अन्य प्रयोग में शोधकर्ता ने पाया कि एक बार में जब एक महिला फ्लैट जूतों की जगह हाई हील पहन कर आ गयी तो पुरुष उससे चैटिंग करने लग गये। इस शोध से यह निष्कर्ष निकला है कि महिलाओं की हाई हील से पुरुष महिलाओं के प्रति आकर्षित होते हैं।  

टैबलेट मार्केट में धमाका! Redmi ला रहा है 12000mAh बैटरी वाला नया Pad 2 Pro

नई दिल्ली नए साल की शुरुआत के साथ ही शाओमी चौंकाने वाली है। शाओमी का सब ब्रैंड ‘रेडमी’ भारत में 6 जनवरी को अपना नया स्‍मार्टफोन Redmi Note 15 लॉन्‍च करने जा रहा है। अब जानकारी आई है कि कंपनी Redmi Pad 2 Pro नाम से नया टैबलेट भी उसी दिन पेश करेगी। इस टैबलेट की सबसे बड़ी खूबी होने वाली है बैटरी। रेडमी पैड 2 को सबसे बड़ी बैटरी वाले टैबलेट के तौर पर लॉन्‍च किया जाएगा। यह 12 हजार एमएएच कैपिसिटी होगी। दुनिया में इतनी बड़ी बैटरी क्षमता वाला टैब अबतक पेश नहीं किया गया है। Redmi Pad 2 Pro की प्रमुख खूबियां Redmi Pad 2 Pro टैबलेट के भारतीय मॉडल के स्‍पेसिफ‍िकेशंस अभी सामने नहीं आए हैं। हालांकि ग्‍लोबल मार्केट में यह टैब पहले से उपलब्‍ध है। वहां मौजूद फीचर्स की बात की जाए तो इसमें 12.1 इंच का 2.1K डिस्‍प्‍ले दिया गया है, जो 120 हर्त्‍ज के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। इसकी 12 हजार एमएएच की बैटरी 27 वॉट की चार्जिंग काे सपोर्ट करती है। भारतीय मॉडल में कितने वॉट की चार्जिंग मिलेगी, अभी कन्‍फर्म नहीं है। ग्‍लोबल वेरिएंट में 7एस जेन4 चिपसेट को इस्‍तेमाल किया गया है। डिस्‍प्‍ले में डॉल्‍बी विजन का सपोर्ट भी है। 4 स्‍पीकर्स का सपोर्ट ऐसा कहा जाता है कि Redmi Pad 2 Pro को क्‍वॉड स्‍पीकर सेटअप के साथ लाया जा सकता है, जिसमें डॉल्‍बी एटमॉस का सपोर्ट होगा। टैब के ग्‍लोबल मॉडल में भी यही सुविधा मिलती है। इससे यह टैबलेट काफी लाउड और क्र‍िस्‍प साउंट जनरेट कर सकता है। कहा जा रहा है कि यह टैबलेट फ्रंट और बैक साइड में 8 मेगापिक्‍सल का कैमरा ऑफर कर सकता है, जिससे ऑनलाइन क्‍लास आद‍ि में इसे इस्‍तेमाल करना सुविधाजनक हो जाएगा। लॉन्‍च हो सकता है सिम मॉडल सूत्रों की मानें तो Redmi Pad 2 Pro को वाईफाई मॉडल के अलावा, सिम सपोर्ट करने वाले मॉडल के साथ भी लाया जा सकता है। यह 5जी कनेक्‍ट‍िविटी को सपोर्ट कर सकता है, जिससे उन यूजर्स के लिए टैबलेट इस्‍तेमाल करना सुविधाजनक हो जाएगा, जिनके यहां ब्रॉडबैंड सर्विस नहीं है। कहा जा रहा है कि टैब में मिलने वाला सिम सपोर्ट सिर्फ इंटरनेट तक ही सीमित नहीं होगा, बल्कि इसे कॉलिंग के लिए भी इस्‍तेमाल किया जा सकेगा।

फास्ट फूड से स्वास्थ्य का खतरा, 16 साल की लड़की की मौत ने उठाए गंभीर सवाल, AIIMS पूर्व डायरेक्टर ने आगाह किया

नई दिल्ली हाल के दिनों में फास्ट फूड के अत्यधिक सेवन से एक छात्रा की मौत की खबर ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है. आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में फास्ट फूड बच्चों और युवाओं की डाइट का एक ज़रूरी हिस्सा बनता जा रहा है, लेकिन इसके गंभीर स्वास्थ्य नतीजों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है. AIIMS के पूर्व डायरेक्टर डॉ. एम मिश्रा ने सेहत को लेकर बड़ा और गंभीर बयान दिया है. फास्ट फूड खाने से 12 साल तक उम्र कम हो सकती है उन्होंने कहा कि फास्ट फूड सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है. इसका असर एकदम नहीं, बल्कि धीरे-धीरे शरीर पर पड़ता है. लंबे समय तक फास्ट फूड खाने से इंसान की उम्र करीब 12 साल तक कम हो सकती है. अगर इसे ज्यादा मात्रा में और लगातार खाया जाए, तो यह धीरे-धीरे मौत की वजह भी बन सकता है. डॉ. मिश्रा ने साफ कहा कि फास्ट फूड का नुकसान समय के साथ सामने आता है, लेकिन प्रदूषित खाना या गंदा पानी शरीर पर तुरंत असर डालता है और गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है. अमरोहा के मामले अमरोहा के मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इस केस में आशंका है कि बच्ची ने प्रदूषित खाना या पानी लिया था, जिससे उसे टायफायड हो गया. शुरुआत में इलाज सही तरीके से नहीं हो पाया. बाद में पेट में अल्सर बना, तेज दर्द हुआ और हालात इतने बिगड़े कि आंत फट गई. इसके बाद शरीर में ज़हर फैल गया, जिससे स्थिति बेहद गंभीर हो गई. डॉ. मिश्रा ने बताया कि AIIMS में बातचीत के दौरान यह जानकारी सामने आई कि जब बच्ची को AIIMS लाया गया, तब उसकी हालत पहले से ही बहुत खराब थी. शुरुआती स्तर पर टायफायड का सही इलाज न हो पाने की वजह से बीमारी जानलेवा बन गई. लक्षण दिखें तो तुरंत इलाज कराएं फिलहाल डॉक्टरों का अनुमान यही है कि प्रदूषित खाना खाने से बच्ची को टायफायड हुआ, जिसने आगे चलकर गंभीर रूप ले लिया. डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि साफ-सफाई का ध्यान रखें, बाहर का गंदा खाना-पानी न लें और किसी भी बीमारी के लक्षण दिखें तो तुरंत सही इलाज कराएं.