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फोन को टैबलेट में बदलने का आसान तरीका, बस ऑन करनी है ये छुपी हुई सेटिंग

नई दिल्ली लोग एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स को उसके कस्टमाइज होने की काबिलियत के चलते पसंद करते हैं। एक एंड्रॉयड ओएस में ऐसे कई छिपे हुए फीचर्स मिल जाते हैं, जिनके बारे में एक आम यूजर को दूर-दूर तक कोई अंदाजा नहीं होता। इनमें से एक खास फीचर है फोन को टैबलेट में बदल देने का फीचर। दरअसरल अगर आप अपने फोन की एक सीक्रेट सेटिंग को ऑन कर दें, तो आपके फोन टैबलेट की तरह दिखने और इस्तेमाल किए जाने लायक बन जाता है। दरअसल हम बात कर रहे हैं फोन के यूआई और सॉफ्टवेयर की जिसे आप एक टैबलेट के यूआई या सॉफ्टवेयर जैसा बना सकते हैं। इसके लिए हर एंड्रॉयड स्मार्टफोन में एक छिपी हुई सेटिंग दी जाती है। इस सेटिंग तक पहुंचने के लिए आपको कुछ स्टेप्स को फॉलो करना पड़ता है। इसके बाद आप भी अपने फोन को टैबलेट की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। चलिए इस खास फीचर के बारे में डिटेल में जानते हैं। आसान है फोन में टैबलेट मोड ऑन करना अगर आप अपने फोन में टैबलेट मोड को ऑन करना चाहते हैं, तो ऐसा करना बहुत आसान है। इसके लिए सबसे पहले आपको अपने फोन में छिपी हुई डेवलपर्स सेटिंग्स को ऑन करना होगा। डेवलपर्स सेटिंग्स को ऑन करने के लिए अपने फोन की सेटिंग में जाकर आपको About Phone में Build Number या 7 से 10 बार टैप करना होगा। इसके बाद आपके फोन में डेवलपर्स सेटिंग्स ऑन हो जाएंगी। डेवलपर्स सेटिंग्स में आपको Minimum width या Smallest width नाम का ऑप्शन मिलेगा। यह सेटिंग आमतौर पर 360 के आसपास सेट होती है। इस नंबर को बढ़ाकर आप डिस्प्ले का साइज बढ़ा या घटा सकते हैं। ऐसे में अगर आप इसे काफी बढ़ा दें, तो आपके फोन का UI टैबलेट के UI जैसा दिखने लगता है। चलिए अब समझते हैं इस सेटिंग को ऑन करने का फायदा क्या है? ऐप्स चलाने में आएगा मजा फोन में टैबलेट स्टाइल UI चलाने का सबसे बड़ा फायदा ऐप्स में देखने को मिलता है। इससे फोन की सेटिंग्स भी टैब की तरह बाईं और दाईं ओर दो हिस्सों में दिखने लगती है। इसके अलावा अगर आप फाइल मैनेजर ऐप में जाएं, तो फोल्डर और प्रीव्यू साइड-बाय-साइड नजर आते हैं। इसी तरह मैसेजिंग ऐप भी फोन में टैबलेट के लुक्स के साथ खुलती है, जिसमें चैट लिस्ट और बातचीत एक साथ खुली रहती है। इसके इस सेटिंग को ऑन करके वेब ब्राउज करने में भी काफी सहूलियत होती है। इसमें क्रोम ब्राउजर में आपको डेस्कटॉप जैसा इंटरफेस देखने को मिलता है। कहने का मतलब है कि आजकल के बड़े स्क्रीन वाले स्मार्टफोन्स की स्क्रीन का आप और फायदा उठाना चाहें, तो इस सेटिंग को ऑन करके अपने UI को थोड़ा बड़ा और खुला-खुला बना सकते हैं। ट्यूनिंग से बेहतर हो सकता है एक्सपीरियंस इस मोड को ऑन करने के बाद अपने फोन के हिसाब से आपको थोड़ी ट्यूनिंग जरूर करनी पड़ेगी। दरअसल हर स्मार्टफोन की स्क्रीन का साइज अलग होता है, ऐसे में आप Minimum width या Smallest width नाम के ऑप्शन पर नंबर्स को बढ़ा-घटा कर देख सकते हैं कि आपके फोन की स्क्रीन के साइज के लिहाज से क्या बेहतर है। सही साइज मिल जाए, तो फॉन्ट के साइज को थोड़ा घटा-बढ़ा कर आप फोन में टैबलेट के UI को इस्तेमाल के लायक बना सकते हैं। इसके अलावा आप क्विक सेटिंग्स पैनल को री-अरेंज करके और विजेट्स का साइज बदल कर इसे अपने अनुसार ज्यादा बेहतर बना सकते हैं। इन छोटे-छोटे बदलावों से टैबलेट-स्टाइल UI ज्यादा संतुलित और आरामदायक लगता है, खासकर अगर आप इसे रोज इस्तेमाल करने वाले हों। इस मोड की कमियों को जान लें हर फोन की तरह इस सेटिंग में भी कुछ कमियां देखने को मिल सकती हैं। दरअसल क्योंकि हर ऐप टैबलेट के हिसाब से ऑप्टिमाइज नहीं होता इसलिए कई ऐप्स इस मोड में आपको छोटे दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा अगर आपके पास बड़े स्क्रीन साइज का फोन है, तो इस मोड को इस्तेमाल करने में आपको मजा आएगा। हालांकि अगर आप कॉम्पैक्ट फोन इस्तेमाल करते हैं, तो इस मोड को इस्तेमाल करने में शायद आपको मजा न आए।

आंवले का जादू: सेहत के लिए क्यों है यह जरूरी

आंवले का सेवन सेहत के लिए बहुत जरूरी है। इसके नियमित सेवन से न केवल स्वास्थ्य सही रहता है, बल्कि सुंदरता भी बढ़ती है… आवला को यदि गुणों की खान कहा जाए तो गलत न होगा। सर्दी के मौसम में मिलने वाला आंवला बहुत सारे गुणों से भरपूर होता है। इसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह पूरे शरीर के लिए फायदेमंद होता है। वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सतीश चंद्र शुक्ला का कहना है कि अगर जाड़े के मौसम में प्रतिदिन आंवले का सेवन किया जाए तो शरीर पूरी तरह स्वस्थ रहेगा। -आंवला बहुत सारे रोगों से राहत दिलाता है। इसमें कई सारे विटामिन्स और मिनरल्स जैसे विटामिन ए, बी-6, थियामिन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन, कैरोटीन, कॉपर, पोटैशियम, मैंग्नीज आदि पाए जाते हैं। इसमें कई शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। -आंवले को कई प्रकार से खाया जा सकता है। आप चाहें तो इसे कच्चे रूप में खा सकते हैं। इसका जूस भी निकाला जा सकता है। इसकी चटनी बनाने के साथ ही इसका हलुआ भी बनाया जा सकता है। आंवले के लच्छों को मीठा या नमकीन बनाकर खाया जा सकता है। इसका मुरब्बा तो हर मौसम में खाया जाता है। आंवला के रस को शहद या एलोवेरा में मिलाकर लिया जा सकता है। -आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स की मौजूदगी के कारण आंवला बालों की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके सेवन से न केवल बालों की ग्रोथ अच्छी होती, बल्कि उनमें चमक भी आती है और बालों का गिरना भी कम हो जाता है। इसके रस को बालों की जड़ों में लगाने से भी लाभ मिलता है। -विटामिन ए और कैरोटीन से भरपूर होने के कारण आंवला आंखों की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके सेवन से न केवल आंखों की रोशनी सही रहती है, बल्कि वे कई सारी समस्याओं से भी बची रहती हैं। -आंवले में मौजूद कैल्शियम दांतों, नाखूनों, त्वचा और हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इससे त्वचा में निखार भी आता है। इसमें मिलने वाला प्रोटीन शरीर को पूरी तरह स्वस्थ रखता है। -डाइबिटीज वाले लोग भी आंवले का सेवन कर सकते हैं। इसमें मिलने वाला क्रोमियम ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित रखता है। हां, यह ध्यान रखें कि बगैर शक्कर वाले आंवले का ही सेवन करें। -आंवले में पानी भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। इसलिए इसके सेवन करने पर पेशाब के साथ शरीर के हानिकारक तत्व जैसे अतिरिक्त पानी, नमक और यूरिक एसिड बाहर हो जाते हैं। यही कारण है कि यह किडनी को स्वस्थ रखने में भी सहायक है। -इसमें फाइबर भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। फाइबर हमारे पाचन तंत्र अर्थात पेट के लिए भी बहुत फायदेमंद है। इसके सेवन से कब्ज की शिकायत दूर होती है। साथ ही डायरिया होने का भी खतरा नहीं रहता है। -आंवले में मिलने वाले पोषक तत्व जैसे आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स हृदय को दुरुस्त रखने में बहुत सहायक हैं। आंवले के नियमित सेवन से हृदय में रक्तसंचार सही रूप से होता है। यह कोलेस्ट्राल के स्तर को भी सही रखता है। -पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण आंवला एंटी एजिंग का भी काम करता है। साथ ही विभिन्न प्रकार के संक्रमण से बचाव करता है। यह हमारे इम्यून सिस्टम को सही रखता है। सर्दी-जुकाम से बचाव करने के साथ ही यह एनीमिया होने से भी बचाता है। एक्ने और पिंपल्स से भी बचाव करने में भी यह सहायक है।  

शिफू एप के साथ सब कुछ याद रखें

कई बार आप परिवार, मित्रों और सहयोगियों को बर्थडे, एनिवर्सरी या अन्य महत्वपूर्ण दिनों पर शुभकामना देना भूल जाते हैं और बाद में सॉरी के साथ विश करना पड़ता है। अब शिफू एप के जरिए आपको इस परेशानी का हल मिल जाएगा। यह एक इंटेलीजेंट टास्क मैनेजर और रिमाइंडर एप है, जो आपके फोन के तमाम डाटा को परख कर आपको अच्छे सुझाव देगा। लॉग इन करने के लिए आप फेसबुक अकाउंट का प्रयोग कर सकते हैं, जिससे शिफू अपने आप सारे जन्मदिन याद कर लेता है और आपको शुभकामनाएं देने का रिमाइंडर दे देता है। शिफू में आप चार तरह के रिमाइंडर या टास्क सेट कर सकते हैं। सबसे पहला है इंटरनेट कनेक्शन पर आधारित टास्क, आप किसी भी नेटवर्क पर शिफू का रिमाइंडर प्रोग्राम सेट कर सकते हैं। दूसरा टास्क है लोकेशन बेस्ड, जिसमें यह आपको किसी जगह पहुंचने पर वहां से जुड़ा टास्क याद दिला देता है। तीसरा टास्क है किसी व्यक्ति को कॉल करते समय एप आपको उससे खास बात करने के लिए रिमाइंडर देता है। चैथे में यह एप आपके फ्री टाइम और लोकेशन के आधार पर इंटेलीजेंट सजेशन भी देता है, जिससे आप अपना समय ज्यादा अच्छी तरह बिता सकें।  

बिना फ्रिज के भोजन को लंबे समय तक ताजा रखने के आसान तरीके

अगर आप अपने घर से दूर रहते हैं जहां आप के पास फ्रिज की व्यवस्था नहीं है, तो उस दौरान फल और सब्जियों को सुरक्षित रखना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। यही नहीं अगर रात का बचा हुआ भोजन सुबह तक चलाना हो तो भी बड़ी कठिनाई आती है। बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जो बिजली का खर्चा बचाने के लिये भी फ्रिज का इस्तमाल नहीं करते। मगर दूध या मीट आदि अगर ठंडे स्थान पर ना रखा जाए तो वह जल्दी खराब हो जाता है। हांलाकि ऐसा नहीं है कि अगर आपके पास फ्रिज नहीं है तो कोई खाद्य पदार्थ सुरक्षित नहीं रह सकता। आप अपने खाने को बड़ी ही आराम से सुरक्षित रख सकते हैं, हमारे ये टिप्स पढ़ कर। हम आपको ऐसे आसान से उपाय बताएंगे जिनकी मदद से आप रसोई में बचे हुए भोजन या फिर साग-सब्जियों को बिल्कुल सुरक्षित रा सकते हैं। आइये जानते हैं वह उपाय… पानी का भरा कटोरा सब्जियों को अगर सुरक्षित रखना हो तो उसे ठंडे पानी के कटोरे में रखें। इससे पानी में रखी हुई सब्जी जल्दी खराब नहीं होगी। लेकिन कोशिश करें कि इन्हें कुछ ही दिनों में खा कर खतम कर दें नहीं तो यह लंबे समय नहीं चलेंगी। ठंडी हवा में अगर रात में खाना बच जाए तो उसे कटोरे में रख कर किसी खुली हुई खिड़की के सामने रख दें, जिससे ठंडी हवा के बहाव से वह खराब ना हो। यदि आपके घर पर कूलर या एसी की व्यवस्था तो भी यह काम आसानी से किया जा सकता है। बर्फ का कटोरा भोजन को किसी बर्फ से भरे कटोरे में रख कर लंबे समय तक आराम से चलाया जा सकता है। बस आपको कहीं से बर्फ का इंतजाम अपने आप करना होगा। वैसे मार्केट में आइस क्यूब्स कम दामों में उपलब्ध हो जाती हैं। ऐसा नहीं है कि आप बर्फ में केवल सब्जियां और फलों को ही सुरक्षित रख सकती हैं बल्कि कई और भी खाद्य पदार्थ भी सुरक्षित रखे जा सकते हैं। सुखा कर कुछ खाद्य पदार्थ को आप सूरज की धूप में सुखा कर भी कई दिनों तक चला सकती हैं।  

AI की दुनिया में भारत सबसे आगे, जानें टॉप पर पहुंचने के कारण

नई दिल्ली भारत ने 'वर्ल्ड एआई एडवांटेज' स्कोर में 53 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया है। यह स्कोर दुनिया के औसत 34 अंकों से काफी ज्यादा है। यह स्कोर दिखाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से काम करने वाले लोगों को कितना समय बच रहा है। यह जानकारी ईवाई कंपनी की 2025 वर्क रीइमेजिंड सर्वे से आई है। इस सर्वे में पता चला है कि भारत में एआई का असली फायदा काम की जगह पर साफ दिख रहा है। हाल ही स्टैनफोर्ड की ओर से जारी हुए AI इंडेक्स में भारत ने तीसरी रैंक हासिल की थी। AI से काम आसान और अच्छा होता है रिपोर्ट बताती है कि भारत जेनरेटिव एआई को अपनाने में सबसे तेज देशों में शामिल है। यहां के कई कर्मचारी कहते हैं कि इस तकनीक से उनका काम ज्यादा अच्छा और जल्दी हो जाता है। करीब 62 प्रतिशत भारतीय कर्मचारी काम पर नियमित रूप से इस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। बॉस और कर्मचारी दोनों मानते हैं कि एआई से फैसले लेना आसान होता है और काम की क्वालिटी भी अच्छी है। टैलेंट हेल्थ स्कोर रहा सबसे अच्छा भारत का टैलेंट हेल्थ स्कोर 82 अंक है, जो सर्वे में शामिल सभी देशों में सबसे ज्यादा है। यह स्कोर देखता है कि कर्मचारी अपनी कंपनी के कल्चर, मिलने वाले इनाम और सीखने के मौकों के बारे में कैसा महसूस करते हैं। दुनिया का औसत स्कोर सिर्फ 65 है। भारत में ज्यादातर कर्मचारी कहते हैं कि उनके मैनेजर उन्हें भरोसा देते हैं और ज्यादा अधिकार देते हैं। इससे वे खुद को मजबूत महसूस करते हैं। तेजी से अपनाया गया है AI ईवाई इंडिया के पार्टनर अनुराग मलिक ने कहा कि भारत ने AI अपनाने में बड़ी प्रगति की है। कंपनियां अब सोच-समझकर प्रोडक्शन, कर्मचारियों की स्किल्स और उनके अनुभव को बैलेंस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि असली फायदा तब मिलता है जब कंपनियां तकनीक का इस्तेमाल कर्मचारियों की सेहत और काम करने की ताकत बढ़ाने के लिए करती हैं। कंपनियां एआई सिखाने के काम पर ध्यान दे रही हैं रिपोर्ट के अनुसार, रिवॉर्ड टैलेंट हेल्थ स्कोर में करीब 32 प्रतिशत हिस्सा देते हैं। भारत में कर्मचारी बोनस (40 प्रतिशत), फ्लेक्सिबल वर्क के समय (33 प्रतिशत), रहन-सहन के हिसाब से वेतन (32 प्रतिशत) और हेल्थ बेनेफिट्स (31 प्रतिशत) को सबसे जरूरी मानते हैं। लेकिन कंपनियां बोनस के साथ-साथ एआई स्किल्स सिखाने पर भी बराबर ध्यान दे रही हैं (34 प्रतिशत)। इससे कर्मचारी ज्यादा खुश रहते हैं।

2026 में iPhone 18 नहीं? रिपोर्ट ने फैंस को किया निराश

नई दिल्ली Apple iPhone 18 का इंतजार करने वालों के लिए एक बुरी खबर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईफोन 18 अगले साल यानी 2026 में नहीं बल्कि 2027 में लॉन्च किया जाएगा। खबरों के मुताबिक, ऐपल आईफोन 18 का ट्रायल प्रोडक्शन अगले साल यानी 2026 की शुरुआत में शुरू होगा। इस कारण कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि नेक्स्ट जनरेशन आईफोन सीरीज का बेस मॉडल प्रो मॉडल्स के साथ नहीं बल्कि उनके बाद 2027 में लॉन्च किया जाएगा। आइये, पूरा मामला जानते हैं। दो चरणों में लॉन्च हो सकती है आईफोन 18 सीरीज इस बार ऐपल अपनी आईफोन सीरीज की लॉन्चिंग प्रोसेस में बदलाव कर सकती है। हर बार से अलग इस बार अगली आईफोन सीरीज यानी आईफोन 18 सीरीज दो चरणों में लॉन्च की जाने की उम्मीद है। आईफोन 18 प्रो मॉडल सितंबर, 2026 में लॉन्च हो सकते हैं। इसके साथ ही कंपनी अपना पहला फोल्डेबल फोन भी पेश कर सकती है। वहीं, सीरीज का बेस मॉडल आईफोन 18, 2027 की शुरुआत में आ सकता है। लेटेस्ट लीक से पता चला है कि आईफोन 18 का ट्रायल प्रोडक्शन अभी शुरू नहीं हुआ है। इसकी शुरुआत 2026 में होगी। वीबो पर टिप्सटर फिक्स्ड फोकस डिजिटल के अनुसार, आईफोन 18 का ट्रायल प्रोडक्शन चीनी नव वर्ष के बाद ही शुरू होने की उम्मीद है। बता दें कि चीन में चीनी नव वर्ष की छुट्टी आमतौर पर फरवरी के अंत में खत्म होती है। इसके बाद फैक्ट्रियां सामान्य रूप से काम करना शुरू कर देती हैं और बड़े पैमाने पर नए प्रोजेक्ट लेती हैं। इस खबर ने उन अफवाहों को और भी मजबूत कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा है कि आईफोन 18 अगले साल नहीं बल्कि 2027 में लॉन्च होगा। हालांकि, अभी ऐपल ने इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी है। यह भी कहा जा रहा है कि इसके साथ कंपनी आईफोन 18e और अगली पीढ़ी के आईफोन एयर लॉन्च होगा। 2026 में लॉन्च होंगे ये आईफोन एक और टिप्सटर का दावा है कि आईफोन 18 प्रो मॉडल के लिए प्रोडक्शन लाइनें पहले ही स्थापित हो चुकी हैं। इससे पता चलता है कि प्रो हार्डवेयर का डिजाइन पहले ही फाइनल हो चुका है। हालांकि, पोस्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि आईफोन 18 प्रो और 18 प्रो मैक्स में उम्मीद से कम हार्डवेयर बदलाव होंगे। यही कारण है आईफोन 18 प्रो मॉडल पहले यानी हर साल की तरह 2026 सितंबर में आने की उम्मीद है और आईफोन 18 को 2027 में पेश किया जा सकता है।

WhatsApp यूजर्स के लिए अलर्ट: GhostPairing से खतरा, सरकार ने दी सुरक्षा टिप्स

 नई दिल्ली WhatsApp यूजर्स के लिए एक सरकारी एजेंसी ने जरूरी वॉर्निंग जारी की है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाली एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पोंस टीम (CERT-In) ने एक नए खतरे के बारे में  बताया है और उससे सावधान रहने को कहा है.  ये हाई रिस्क GhostPairing को लेकर है, जिसमें हैकर्स का ग्रुप बड़ी ही चालाकी के साथ WhatsApp अकाउंट को टेकओवर कर सकता है. वॉर्निंग में बताया है कि हैकर WhatsApp के डिवाइस-लिंकिंग फीचर का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. बिना किसी ऑथेंटिकेशन के पेयरिंग कोड के जरिए अकाउंट को हाइजैक कर सकते हैं. यह इतना ज्यादा खतरनाक है कि हैकर्स रियल टाइम चैटिंग को पढ़ सकते हैं और सीक्रेट्स को लीक कर सकते हैं.   साइबर ठग ऐसे हाइजैक करते हैं WhatsApp  WhatsApp हैकिंग की शुरुआत एक सिंपल से मैसेज से होती है. जब विक्टिम को किसी जान-पहचान वाले कॉन्टैक्ट की तरफ से एक सिंपल सा मैसेज भेजा जाता है कि Hi, check this photo. मैसेज में एक लिंक होता है, जिसके अंदर फेसबुक जैसा प्रीव्यू नजर आता है.  CERT-In का पोस्ट  जब विक्टिम उस प्रीव्यू को देखने की कोशिश करते हैं तो प्रोसेस के दौरान वह फोन नंबर की डिमांड करता है और वेरिफिकेशन करने को कहते हैं. वॉर्निंग में बताया है कि साइबर अटैकर्स इस तरह से विक्टिम के WhatsApp अकाउंट को हाइजैक कर लेते हैं.  WhatsApp यूजर्स ना करें ये गलती  कोई भी परिचित शख्स ऐसा मैसेज भेजता है और उस मैसेज में मोबाइल नंबर एंटर करने को कहता है तो सतर्क होने की जरूरत है. ऐसे किसी भी लिंक पर मोबाइल नंबर को वेरिफाई ना करें, जिसमें आपका WhatsApp हैक हो सकता है.  WhatsApp की सेटिंग्स में है खास ऑप्शन WhatsApp की सेटिंग्स के अंदर लिंक्ड डिवाइस नाम का फीचर है, जिसको चेक करके जान सकते हैं कि WhatsApp अकाउंट कहां-कहां लॉगइन है. अनजान जगह लॉगइन होने पर उसे तुरंत लॉगआउट भी कर सकते हैं. यह सर्विस एंड्रॉयड और iOS दोनों में है.

दूध नहीं, ये 7 फूड्स हैं हड्डियों के लिए कैल्शियम के पावरहाउस, जानें क्या हैं वो

 सर्दियां शुरू होते ही जोड़ों में दर्द की दिक्कत शुरू हो जाती है. अब यह समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं रह गई है, बल्कि जवान लोग भी इस परेशानी से पीड़ित हो रहे हैं, जिसकी सबसे बड़ी वजह कैल्शियम की कमी है. बॉडी बनाने के लिए लोग प्रोटीन तो जमकर ले रहे हैं, लेकिन इसके चलते वो कैल्शियम को अनदेखा कर देते हैं.  विटामिन डी भी लोग अब सही से नहीं लेते हैं, जिसकी वजह से कम उम्र में ही हड्डियां कमजोर होने लगी हैं. कई लोग दूध और पनीर खाना पसंद नहीं करते हैं और उनको लगता है कि सबसे ज्यादा कैल्शियम इन दोनों से ही मिलता है, जबकि ऐसे भी फूड्स हैं, जो जिनमें इनसे कई गुना अधिक कैल्शियम मौजूद होता है.आइए आपको इस आर्टिकल में ऐसे ही टॉप 7 चीजों के बारे में बताते हैं, जिन्हें आप इस ठंड अपनी डाइट में शामिल करके कैल्शियम की कमी को दूर कर सकते हैं.  बादाम  ड्राईफ्रूट में काजू और अखरोट के अलावा बादाम भी लोगों को खाना पसंद होता है, लेकिन वो नहीं जानते हैं कि बादाम खाने से उनके शरीर में कैल्शियम की कमी भी दूर होती है. बादाम दिमाग के साथ-साथ हड्डियों के लिए भी बेहतरीन है, 100 ग्राम बादाम में लगभग 260 mg कैल्शियम पाया जाता है. सर्दियों में 5–7 बादाम रोज भिगोकर खाना बेहद फायदेमंद है.  तिल  तिल को सर्दियों का सुपरफूड माना जाता है और तिल में 6 गुना ज्यादा मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है. 100 ग्राम तिल में करीब 975 mg कैल्शियम होता है. आप तिल को लड्डू, चटनी, गजक या सलाद में मिला सकते हैं, सर्दियों में नियमित सेवन से हड्डियां मजबूत होती हैं. दिखने में भले ही तिल के दाने छोटे होते हैं, मगर कैल्शियम का इन्हें पावरहाउस कहा जाता है, अगर आप रोज थोड़ी मात्रा में ही तिल खाते हैं तो आपकी हड्डियों की कमजोरी की समस्या नहीं होगी.  रागी  तिल के अलावा रागी कैल्शियम का शानदार नेचुरल सोर्स माना जाता है,  सौ ग्राम रागी तीन गिलास दूध जितना फायदा करती है, क्योंकि महज 100 ग्राम रागी से शरीर को 350 mg कैल्शियम मिलता है. यह बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों सभी के लिए फायदेमंद होत है और इसे रोटी, डोसा, खीर या दलिया के रूप में खाया जा सकता है.  सोया और सोया प्रोडक्ट्स पनीर और दूध के बिना भी कैल्शियम की पूर्ति हो सकती है, बस आपको अपनी डाइट में सोयाबीन, टोफू और सोया दूध शामिल करने होंगे. यह सभी कैल्शियम का बढ़िया ऑप्शन है, 100 ग्राम टोफू में करीब 350 mg कैल्शियम होता है. यह खासकर उन लोगों के लिए बेहतर है जो दूध नहीं पीना चाहते या लैक्टोज इंटॉलरेंट हैं.  अंजीर सूखे अंजीर में कैल्शियम की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिससे हड्डियां मजबूत रहती हैं.  रोजाना 4–5 सूखे अंजीर खाने से शरीर की कैल्शियम की जरूरत आसानी से पूरी हो जाती है.  यह कब्ज की समस्या को भी कम करता है और खून बढ़ाने में मदद करता है, इसके अलावा नियमित सेवन से स्वास्थ्य लाभ मिलता है. राजमा और चना  कई लोग जानते ही नहीं कि राजमा और चना भी कैल्शियम का अच्छा सोर्स है. 1 कप उबले हुए चने में 80–100 mg कैल्शियम मिलता है. साथ ही ये प्रोटीन, फाइबर और आयरन भी देते हैं, सर्दियों में चना-राजमा की गर्मागर्म डिश हड्डियों के लिए वरदान से कम नहीं है. हरी पत्तेदार सब्जियां  सर्दियों की हरी सब्जियां कैल्शियम से भरपूर होती हैं, पालक, मेथी और बथुआ में कैल्शियम और विटामिन K होता है. जो हड्डियों को मजबूती देता है. इनका नियमित सेवन जोड़ो के दर्द को भी कम करता है. 

स्क्रब vs पॉलिश: क्या आप भी कंफ्यूज हैं? यहां समझें दोनों का फर्क

चेहरे के साथ-साथ बॉडी को खास केयर देना चाहते हैं तो बॉडी स्क्रब और बॉडी पॉलिश काफी कारगर हो सकते हैं। एक जैसे तत्वों के साथ दोनों ही प्रोडक्ट्स ड्राई पैचेस, सेल्युलाइट्स को कम करते हैं। बॉडी पॉलिश एक्स्ट्रा केयर देते हुए स्किन को पल्म्प और हाइड्रेट करने का भी काम करता है। बॉडी पॉलिश और बॉडी स्क्रब में काफी कुछ एक जैसा होता है। इन दोनों में ही लगभग एक जैसे तत्वों का इस्तेमाल होता है, फिर भी दोनों अलग-अलग तरह का काम करते हैं। आइए जानते हैं दोनों के बीच का फर्क और इनके फायदे।  ये हैं अंतर     नेचुरल एक्सफोलिएट्स में शुगर और सॉल्ट जैसी सामग्री का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, जबकि बॉडी पॉलिश में इसकी मात्रा कम होती है।     बॉडी पॉलिश में बॉडी स्क्रब की तुलना में मॉइश्चराइज करने वाली चीजें ज्यादा होती हैं जैसे शीया बटर, ग्रीन टी, विटामिन सी। किसे चाहिए बॉडी स्क्रब और किसे बॉडी पॉलिश यह चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी स्किन को किस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत है। अगर आपकी स्किन बेहतर तरीके से मॉइश्चराइज है तो फिर उसे डीप क्लींजिंग की जरूरत है। ऐसे में बॉडी स्क्रब ज्यादा बेहतर ऑप्शन है। वहीं, स्किन बैरियर में रुकावट होने और ड्राई पैचेस की समस्या होने पर बॉडी पॉलिश का विकल्प चुना जाना चाहिए। इस तरह मिलेगा ज्यादा फायदा     बॉडी स्क्रब को पहले एक्सफोलिएट और फिर मॉइश्चराइज करने के लिए बनाया गया है। वैसे तो हर स्किन टाइप के लिए बॉडी स्क्रब सही है लेकिन सेंसिटिव स्किन वालों इसके इस्तेमाल सावधानी बरतना चाहिए।     बॉडी स्क्रब का इस्तेमाल करने के दौरान डार्क पैचेस, सेल्युलाइट, डैड स्किन सेल्स वाले हिस्से पर ज्यादा फोकस करें।     बॉडी स्क्रब को सर्कुलर मोशन में लगाने पर ब्लड फ्लो बढ़ता है और बेहतर सफाई होती है। इसे आप स्ट्रेच मार्क्स, चोट के पुराने दागों पर भी अप्लाय कर सकते हैं।     नहाने के बाद बॉडी ऑयल या मॉइश्चराइजर लगाना ना भूलें, इससे स्किन को आराम मिलेगा। इस तरह लगाएं बॉडी पॅालिश     साफ स्किन पर इसे सीधे अप्लाई करें।     ड्राई हिस्से, स्ट्रेच मार्क्स, जख्मों के निशान, असमान रंगत वाले हिस्से या फिर उन हिस्सों पर लगाएं जहां आप शेविंग करना चाह रही हैं।     बॉडी पॉलिश लगाने के बाद साबुन या बॉडी वॉश का इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि इससे मॉइश्चराइजिंग वाला इफेक्ट भी खत्म हो जाएगा।  

2026 में सरप्राइज देने आ रहा है ऐपल का ये खास डिवाइस, आईफोन नहीं फिर भी सबकी नजर

 नई दिल्ली  नए साल का आगाज होने वाला है। टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में साल 2026 कई बदलाव लेकर आ सकता है। टेक‍ दिग्‍गज ऐपल को लेकर कहा जा रहा है कि नए साल में कंपनी आईफोन या मैकबुक से ज्‍यादा किसी और प्रोडक्‍ट पर ध्‍यान दे रही है। ऐपल सीईओ टिम कुक के लिए कंपनी के टेक डेवलपमेंट की सबसे बड़ी प्राथमिकता ऐपल ग्‍लासेज हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा हो सकता है कि नए साल में कंपनी एक बड़ा लॉन्‍च आयोजित करे। 2026 में हो सकता है बड़ा लॉन्‍च 9to5Mac की रिपोर्ट (ref.) के मुताबिक, ऐसा हो सकता है कि ऐपल साल 2026 में बड़े लॉन्‍च की तैयारी कर रही है और ऐपल ग्‍लासेज उसका हाइलाइट हो सकते हैं। अन्‍य रिपोर्टों की मानें तो कंपनी ‘अनवील्‍ड’ शब्‍द पर अधिक जोर दे रही है जो संकेत हो सकता है कि ऐपल ग्‍लासेज को सिर्फ प्रदर्शित किया जाएगा, लॉन्‍च को टाला जा सकता है। ऐसा हुआ तो कंपनी वियरेबल सेगमेंट में एक और डिवाइस तो ले आएगी, लेकिन उसे लोगों के बीच पहुंचने में वक्‍त लग सकता है। हर दिन पहनने वाले चश्‍मे हालांकि ऐपल ग्‍लास ेज के लॉन्‍च होने की संभावनाएं इसलिए भी बन रही हैं, क्‍योंकि गूगल भी अपने ग्‍लासेज नए साल में ला सकती है और मेटा के मेटा ग्‍लास पहले से ही मार्केट में मौजूद हैं। यह सेगमेंट ऐसा है, जिसमें चीनी स्‍मार्टफोन कंपनियों की मौजूदगी अधिक नहीं है। ऐपल इस सेगमेंट में कदम रखकर अपना दबदबा बना सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, ऐपल का मकसद पूरी तरह से ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) ग्लासेज देना है, जिसे लोग हर दिन पहन सकें। कहा जाता है कि ऐपल ग्‍लास को पहनने के बाद उससे ही कई सारे काम किए जा सकेंगे, ठीक वैसे ही जैसा रे-बैन मेटा स्मार्ट ग्लासेज (Ray-Ban Meta smart glasses) में मुमकिन है। ऐपल ग्‍लासेज के फीचर्स ऐपल ग्‍लासेज को बिना डिस्‍प्‍ले के पेश किया जा सकता है। वह आईफोन से कनेक्‍ट होकर काम करेगा। कहा जाता है कि ऐपल ग्‍लासेज में सिरी, ऐपल इंटेलिजेंस और बिल्‍ट इन ओपन ईयर स्‍पीकर्स का सपोर्ट होगा। हालांकि चश्‍मों को पूरी तरह से कंट्रोल करने के लिए आईफोन चाहिए होगा। कहा जाता है कि कंपनी एक ऐसा गैजेट पेश करना चाहती है जिसे यूजर अपने रोजाना इस्‍तेमाल में पहन सके। कंपनी मेटा से मुकाबला करना चाहती है, जिसने अपने स्‍मार्ट ग्‍लासेज को एक के बाद एक लॉन्‍च करके पॉपुलर बनाने की कोशिश की है।