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Pixel यूजर्स की मौज! भारत में शुरू हुआ Google Pixel Upgrade Program, जानें कैसे मिलेगा नया फोन

नई दिल्ली गूगल भारतीयों के लिए तोहफा लेकर आया है। कंपनी ने भारत में पिक्सल अपग्रेड प्रोग्राम लॉन्च कर दिया है। इस प्रोग्राम के तहत आप हर साल नए पिक्सल स्मार्टफोन को सिर्फ हर महीने 3,333 रुपये की EMI पर खरीद सकते हैं। यह प्रोग्राम आज से शुरू हो गया है और उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद है, जो हर साल अपना फोन अपग्रेड करना चाहते हैं। गूगल यह प्रोग्राम कैशिफाई, बजाज फाइनेंस लिमिटेड और एचडीएफसी बैंक के साथ मिलकर लाया है। इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों तक आसानी से प्रीमियम स्मार्टफोन पहुंचाना है। सीमित समय के लिए यह प्राग्रोम लॉन्च हुआ है। सीमित समय के लिए है प्रोग्राम Google Pixel Upgrade प्रोग्राम नाम से ही पता चल रहा है कि यह स्मार्टफोन के अपग्रेड से जुड़ा है। गूगल का खास प्रोग्राम 30 जून, 2026 तक भारत के चुनिंदा रिटेल स्टोर्स पर चलेगा। यह उन लोगों के लिए एक शानदार मौका है, जो लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना चाहते हैं और हर साल नया फोन लेना पसंद करते हैं। क्या है गूगल का पिक्सल अपग्रेड प्रोग्राम? प्रोग्राम के तहत कुछ खास पिक्सल स्मार्टफोन 24 महीने की नो-कॉस्ट ईएमआई पर खरीदा जा सकता है। खास बात यह है कि सिर्फ नौ महीने की किश्तें भरने के बाद ही आप अपने फोन को नए पिक्सल मॉडल में बदल सकते हैं। इस प्रोग्राम में आपको अपने पुराने फोन के बदले अच्छी कीमत मिलने की गारंटी भी दी जा रही है। चाहे उसकी हालत कैसी भी हो, बस फोन चालू होना चाहिए और बेसिक चेक पास कर लेना चाहिए। कैसे उठा पाएंगे इस अपग्रेड प्रोग्राम का लाभ? इस प्रोग्राम में यूजर्स नौ महीने बाद अपने फोन को अपग्रेड कर सकते हैं। अगर आप कम से कम नौ ईएमआई भर चुके हों, तो आप अपने मौजूदा पिक्सल फोन को नए मॉडल के लिए एक्सचेंज कर सकते हैं। हालांकि, ध्यान रखें कि अगर 15 मीहने ईएमआई भर दी तो आपके लिए यह ऑफर नहीं है। कंपनी भरेगी आपके पुराने लोन का पैसा आपके पुराने फोन के लोन की बची हुई रकम कैशिफाई आपके बैंक अकाउंट में डाल देगा। इससे आप बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के अपना पुराना लोन खत्म कर पाएंगे और नए में अपग्रेड कर पाएंगे। इसके बाद, आप अपने नए फोन के लिए 24 महीने की एक नई नो-कॉस्ट ईएमआई प्लान में शामिल हो जाएंगे। गूगल की इन सर्विस का फ्री में मिलेगा ट्रायल नए पिक्सल फोन खरीदने पर आपको गूगल की कुछ सेवाओं के फ्री ट्रायल भी मिलेंगे। पिक्सल 10 प्रो मॉडल के साथ आपको एक साल के लिए गूगल एआई प्रो, छह महीने के लिए फिटबिट प्रीमियम और तीन महीने के लिए यूट्यूब प्रीमियम का सब्सक्रिप्शन मिलेगा। वहीं, पिक्सल 10 के साथ आपको छह महीने के लिए गूगल वन प्रीमियम (2TB) के साथ फिटबिट और यूट्यूब प्रीमियम के ट्रायल भी मिलेंगे। इन पिक्सल फोन्स के लिए आया प्रोग्राम इस अपग्रेड प्रोग्राम में पिक्सल 10, पिक्सल 10 प्रो, पिक्सल 10 प्रो एक्सएल और पिक्सल 10 प्रो फोल्ड जैसे मॉडल शामिल हैं। जब आप अपना पुराना फोन एक्सचेंज करते हैं, तो आपको कैशिफाई से 7,000 रुपये तक का एक्सचेंज बोनस भी मिलेगा।

नॉरोवायरस का खतरा बढ़ा: 12 से 48 घंटे में दिखते हैं लक्षण, जानिए पूरी जानकारी

अगर बिना किसी चेतावनी के उल्टी और दस्त शुरू हो जाएं, तो इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। यह लक्षण नॉरोवायरस संक्रमण के हो सकते हैं—एक ऐसा वायरस जो पेट और आंतों पर हमला करता है और बहुत तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है। अक्सर लोग इसे Stomach flu  समझ लेते हैं, लेकिन इसका फ्लू या इन्फ्लुएंजा वायरस से कोई संबंध नहीं है। क्या है नॉरोवायरस? नॉरोवायरस दुनिया में पेट से जुड़ी बीमारियों और फूड पॉइजनिंग का एक बड़ा कारण माना जाता है। इसका पहला बड़ा मामला साल 1968 में अमेरिका के ओहायो राज्य के नॉरवॉक शहर में सामने आया था, इसी वजह से इसे पहले नॉरवॉक वायरस कहा जाता था। कितना आम है यह संक्रमण? नॉरोवायरस बेहद आम है और हर साल दुनियाभर में इसके करीब 68.5 करोड़ मामले सामने आते हैं। इनमें 20 करोड़ से ज्यादा बच्चे शामिल होते हैं। यह वायरस खासतौर पर ठंड के मौसम में ज्यादा फैलता है और नवंबर से अप्रैल के बीच इसके मामले तेजी से बढ़ते हैं। नॉरोवायरस के लक्षण क्या होते हैं? इस संक्रमण के लक्षण अचानक शुरू होते हैं और तेजी से बिगड़ सकते हैं। मुख्य लक्षण हैं:-     मतली और बार-बार उल्टी     पानी जैसे दस्त     पेट में दर्द और ऐंठन इसके अलावा कुछ लोगों में बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और अत्यधिक कमजोरी भी देखी जाती है। वायरस के संपर्क में आने के 12 से 48 घंटे के भीतर लक्षण दिखने लगते हैं और आमतौर पर 1 से 3 दिन तक रहते हैं। नॉरोवायरस कैसे फैलता है? यह वायरस बहुत ज्यादा संक्रामक होता है और कई तरीकों से फैल सकता है:     संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से     दूषित सतह छूने के बाद मुंह या नाक छूने से     गंदा या अधपका खाना खाने से     दूषित पानी पीने से अक्सर यह तब फैलता है जब संक्रमित व्यक्ति खाना बनाता या परोसता है। कुछ समुद्री भोजन, जैसे ऑयस्टर, प्राकृतिक रूप से भी इससे संक्रमित हो सकते हैं। क्यों हो सकता है यह खतरनाक? हालांकि ज्यादातर मामलों में बीमारी कुछ दिनों में ठीक हो जाती है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी परेशानी है डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी। डिहाइड्रेशन के संकेत हो सकते हैं:     पेशाब कम होना     मुंह सूखना     चक्कर आना     अत्यधिक कमजोरी     बच्चों में सुस्ती, ज्यादा नींद या बिना आंसू के रोना इलाज क्या है? नॉरोवायरस के लिए कोई खास दवा या वैक्सीन नहीं है। इलाज का मतलब है लक्षणों को संभालना:     ज्यादा से ज्यादा पानी और ORS लेना     पूरा आराम करना     हल्का, सादा और सुपाच्य भोजन करना बचाव कैसे करें? इस वायरस से बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है:     साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोएं     खाना अच्छी तरह पकाकर खाएं     गंदी सतहों को साफ रखें     बीमार व्यक्ति से दूरी बनाए रखें ध्यान रखें, हैंड सैनिटाइजर नॉरोवायरस पर ज्यादा असरदार नहीं होता, इसलिए हाथ धोना सबसे जरूरी है। क्या नॉरोवायरस दोबारा हो सकता है? हां। नॉरोवायरस के कई प्रकार होते हैं, इसलिए एक बार संक्रमण हो जाने के बाद भी व्यक्ति दोबारा इसकी चपेट में आ सकता है।

iPhone Fold: कॉम्पैक्ट डिजाइन और डुअल कैमरा के साथ ऐपल का नया फोल्डेबल फोन, कीमत और लॉन्च की जानकारी

 नई दिल्ली Apple अपना पहला फोल्डेबल फोन अगले साल लॉन्च कर सकता है. कंपनी iPhone Fold को iPhone 18 सीरीज के साथ लॉन्च कर सकती है. यानी ये फोन अलगे साल सितंबर के आसपास लॉन्च हो सकता है. वैसे iPhone Fold के लॉन्च को लेकर तमाम जानकारियां पहले भी सामने आ चुकी हैं, लेकिन इस बार फोन का डिजाइन लीक हुआ है.  फोन के लीक रेंडर से साफ है कि ऐपल का पहला फोल्डेबल फोन iPad Mini जैसे डिजाइन के साथ आएगा. ये फोन सैमसंग के बुक स्टाइल वाले फोल्ड से अलग है. ये अंतर फोन के डायमेंशन में होगा, ना कि फोन के फोल्डिंग स्टाइल में. आइए जानते हैं iPhone Fold की खास बातें.  लीक हुआ डिजाइन  iPhone-ticker.de ने इसका लीक डिजाइन शेयर किया है. इसमें छोटा एक्सटर्नल डिस्प्ले मिलेगा. ये डिस्प्ले Samsung के फोल्डिंग फोन के मुकाबले छोटा होगा. वहीं फोन अनफोल्ड होने पर iPad Mini जैसा हो जाएगा. फोल्डेड फॉर्म में ये डिवाइस 83.8mm चौड़ा, 9.6mm मोटा और 120.6mm ऊंचा होगा.  फोन के फोल्ड होने पर 1.8mm का हिंज दिखेगा. इसमें डुअल रियर कैमरा सेटअप मिलेगा. वहीं मेन स्क्रीन पर पंच होल सेल्फी कैमरा मिलेगा. स्मार्टफोन का एक्सटर्नल डिस्प्ले 5.4-inch का होगा. पहले जो जानकारी आई थी, उसमें दावा किया गया था कि ये 5.5-inch के डिस्प्ले के साथ लॉन्च होगा.  लीक रेंडर के मुताबिक, फोन अनफोल्ड होने पर iPad Mini जैसा हो जाएगा. इसमें 7.76-inch की स्क्रीन मिलेगी. कुल मिलाकर ये स्मार्टफोन फोल्ड होने पर कॉम्पैक्ट साइज का रहेगा. अनफोल्ड होने पर ये डिवाइस iPad Mini जैसा हो जाएगा. अनफोल्ड होने पर इसकी मोटाई सिर्फ 4.8mm रह जाएगी. सैमसंग के Galaxy Z Fold 7 की मोटाई 4.2mm अनफोल्ड होने पर रहती है.  कब होगा लॉन्च?  कयास लगाए जा रहे हैं कि ऐपल इस फोन को सितंबर 2026 में लॉन्च कर सकता है. हालांकि, कंपनी ने आधिकारिक रूप से अभी कोई जानकारी नहीं दी है. ये फोन 1999 डॉलर (लगभग 1,74,000 रुपये) की कीमत पर लॉन्च हो सकता है. ये किसी भी ऐपल फोन की सबसे ज्यादा शुरुआती कीमत होगी.

सिर्फ एक साधारण ब्लड टेस्ट से पता चलेगा आप कितने दिन जिएंगे

नई दिल्ली ब्लड टेस्ट भले सुनने में साधारण लग सकता है लेकिन यह बहुत ही असरदार होता है. एक ब्लड टेस्ट सिर्फ आपके हेल्थ की अपडेट्स नहीं देता बल्कि यह भी बताता है कि आप कितना और जीने वाले हैं. हाल ही में इस संबंध में ब्रिटेन स्थित सरे यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने एक स्टडी की है. अब तक डॉक्टर किसी की उम्र, वजन, ब्लड प्रेशर, स्मोकिंग की आदत और कुछ सामान्य ब्लड टेस्ट के आधार पर ही खतरे का अनुमान लगाते रहे हैं. ये तरीके अक्सर बहुत ही सामान्य होते हैं और सही जानकारी नहीं दे पाते.  नई स्टडी में क्या खास है? इस समस्या को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों ने यह जानने की कोशिश की कि क्या हमारे खून में पहले से ऐसे संकेत मौजूद हैं जो भविष्य की सेहत के बारे में बता सकें. इस स्टडी में खून में मौजूद प्रोटीन पर फोकस किया गया क्योंकि यह शरीर के अंदर चल रहे प्रोसेस की जानकारी देता है. अध्ययन में उम्र, BMI और स्मोकिंग जैसी आदतों को ध्यान में रखा जिससे सटीक नतीजे निकले. प्रोटीन पैनल और मौत का जोखिम इसके बाद वैज्ञानिकों ने सैकड़ों ऐसे प्रोटीन की पहचान की जिनका संबंध कैंसर, दिल की बीमारी और किसी भी वजह से होने वाली मौत के जोखिम से जुड़ा पाया गया. एक पैनल में 10 ऐसे प्रोटीन थे जो अगले 10 साल में मौत के कुल जोखिम से जुड़े थे. वहीं, दूसरे पैनल में 6 प्रोटीन रखे गए थे जो पांच साल के जोखिम का संकेत देते थे. यह मॉडल सिर्फ उम्र और लाइफस्टाइल पर आधारित पुराने तरीकों से बेहतर निकले.  कौन देता है शरीर में बदलाव की जानकारी? खून में मौजूद प्रोटीन शरीर के अंदर हो रहे बदलावों की रियल-टाइम जानकारी देते हैं. ये सूजन, अंगों पर दबाव या ऊतकों (Tissue) के खराब होने जैसे बदलावों को दिखा सकते हैं जो लक्षण के तौर पर सामने नहीं आते. लेकिन, वैज्ञानिकों ने यह भी साफ किया कि इस स्टडी का ये मतलब नहीं है कि कोई ब्लड टेस्ट मौत की तारीख बता देगा. यह भविष्यवाणी नहीं बल्कि एक चेतावनी की तरह है. इस टेस्ट में 39 से 70 साल के करीब 38 हजार लोगों को शामिल किया गया था.  

आधार कार्ड अपडेट करना हुआ आसान! UIDAI नंबर से घर बैठे करें सुधार

नई दिल्ली आधार कार्ड आज हर जरूरी काम के लिए अहम दस्तावेज बन चुका है, ऐसे में उसमें छोटी-सी गलती भी बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है। नाम, पता या मोबाइल नंबर की गलती के कारण लोगों को बार-बार दफ्तरों और साइबर कैफे के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अगर आपके आधार कार्ड में नाम, पता या मोबाइल नंबर गलत है, तो अब उसे ठीक कराने के लिए न आधार सेंटर जाना पड़ेगा और न ही साइबर कैफे। कई लोग फर्जी एजेंट्स की वजह से अपना समय और पैसा बर्बाद कर देते हैं, जबकि आधार से जुड़ी ज़्यादातर समस्याएं सिर्फ एक फोन कॉल से हल हो सकती हैं। UIDAI ने इसके लिए टोल-फ्री नंबर 1947 जारी किया है। इस नंबर पर कॉल करके आप आधार में सुधार, अपडेट और जरूरी जानकारी पा सकते हैं। यह सेवा हिंदी, अंग्रेजी समेत 12 भाषाओं में उपलब्ध है। इस नंबर से आपको सही और भरोसेमंद जानकारी मिलती है, खर्च बचता है और गलत जानकारी से होने वाली परेशानी नहीं होती। यह नंबर पूरे भारत में मुफ्त है और याद रखना भी आसान है। कॉल करने का समय सोमवार से शनिवार सुबह 7 बजे से रात 11 बजे तक, और रविवार को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक कॉल कर सकते हैं।

सिंदूर से बिछिया तक जानिए स्त्रियों के श्रृंगार का राज

शादी के बाद सुहागन स्त्रियां मांग में सिंदूर सजाती हैं क्योंकि यह सुहाग का चिन्ह माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे पति की उम्र लंबी होती है। जबकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण यह है कि सिंदूर माथे पर उस स्थान पर लगाया जाता है जहां भावनाओं को नियंत्रित करने वाली ग्रंथी मौजूद होती है। इससे मन और भावनाओं पर नियंत्रण बढ़ता है। साथ ही सिंदूर में मौजूद तत्व रक्त संचार के साथ ही यौन क्षमताओं को भी बढ़ाने का भी काम करते हैं जो वैवाहिक जीवन के लिए जरुरी माना जाता है। महिलाएं अपने पैरों का श्रृंगार करने के लिए पाजेब और पायल पहनती हैं। इसका कारण यह है कि पायल न सिर्फ उनके पैरों की खूबसूरती को बढ़ाने का काम करता है बल्कि यह पैरों में एक रिंग का काम भी करता है। इस रिंग की वजह से शरीर से निकले वाली विद्धुत उर्जा वापस शरीर में लौट जाती है और पैरों में होने वाली कई परेशानियों से भी बचाती है। यह भी माना जाता है कि पायल पेट और शरीर के पिछले भाग में चर्बी को बढ़ने से रोकता है जिससे उनका शरीरिक गठन आकर्षक बना रहता है। कानों में बाली और झुमके इसलिए नहीं पहनती हैं लड़कियां कि उनकी सुंदरता की तारीफ हो। असल में इसका वैज्ञानिक कारण है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार कान में ईयर रिंग धारण करने से चेहरे की त्वचा में कसापन आता है जिससे त्वचा पर ग्लो आता है। कर्ण छेदन करवाने से बौद्धिक क्षमता और सोचने समझने की क्षमता बढ़ जाती है। आपने देखा होगा कि सुहागन स्त्रियां हाथों में अंगूठी पहने या नहीं पहने पैरों में अंगूठी जैसे दिखने वाला गहना जिसे बिछुआ कहा जाता है जरुर पहनती हैं। इसका धार्मिक कारण सुहाग की लंबी उम्र से है जबकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण यह कहता है कि पैरों में अंगूठे के बाद जो दूसरी उंगली होती है उसकी ग्रंथी गर्भाशय और हृदय से होकर गुजरती है। बिछुआ पहनने से गर्भाशय को बल मिलता है और यौन क्षमता बढ़ती है साथ ही मासिक धर्म के समय होने वाली परेशानियों में कमी आती है। शादी हो या तीज त्योहार महिलाएं अपने हाथों और पैरों में मेंहदी जरुर लगाती हैं। इसका कारण सिर्फ सौंदर्य बढ़ाना नहीं है बल्कि इसका संबंध स्वास्थ्य से है। मेंहदी का इस्तेमाल आयुर्वेद में कई रोगों की औषधी के रुप में किया जाता है। यह तनाव को दूर करने में कारगर होता है। यौन इच्छाओं को भी नियंत्रित करता है जो इन अवसरों पर आवश्यक माना जाता है। महिलाएं अपनी कलाई को सजाने के लिए चूड़िया पहनती हैं। लेकिन महिलाओं के अन्य श्रृंगार साधन की तरह चूड़ियां धारण करने का भी वैज्ञानिक कारण है। विज्ञान के अनुसार चूड़ियों के कारण कलाई में एक घर्षण उत्पन्न होता है जिससे कलाइयों में सुचारु रुप से रक्त संचार होता है। जिससे कलाईयों में होने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से बचाव होता है। साथ ही चूड़ियां शरीर से निकलने वाली उर्जा को वापस शरीर के अंदर पहुंचाने का भी काम करती है।  

एंड्रायड को ऐसे रखें सेफ

  स्मार्टफोन और अन्य मोबाइल डिवाइस आज हर किसी के लिए लाइफलाइन जैसे हो गए हैं। मोबाइल फोन का इस्तेमाल लोग न सिर्फ एक-दूसरे से कनेक्ट रहने के लिए करते हैं, बल्कि ये अब दैनिक जीवन की तमाम जरूरी एक्टिविटीज, जैसे-फिटनेस, न्यूज, इंटरनेट, पेशेगत कामकाज से भी जुड़ गए हैं। आपके मोबाइल फोन में फोटो, करियर इंफॉर्मेशन, हॉबीज, कॉन्टैक्ट, एंटरटेनमेंट और शॉपिंग प्रिफरेंस आदि के रूप में बेशकीमती अंडर-प्रोटेक्टेड डिजिटल एसेट रखे होते हैं। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि आप अपने इस संसाधन को चोरी और मालवेयर से बचाकर रखें। आइए जानते हैं कि आप अपने एंड्रॉयड स्मार्टफोन को कैसे सुरक्षित बना सकते हैं… स्मार्टफोन को सीक्रेट पिन से रखें लॉक:- सुरक्षा के लिए यह जरूरी है कि आपके फोन तक आपके अलावा किसी और की पहुंच न हो। इसलिए आपको अपने फोन को पिन या किसी पैटर्न कोड से लॉक रखना चाहिए। इसके लिए अपने डिवाइस की सेटिंग में जाएं और लॉक स्क्रीन का विकल्प देखें। स्क्रीन लॉक ऑप्शन में आपसे यह पूछा जाएगा कि आप पिन चाहते हैं, पैटर्न या कोई पासवर्ड। खोए फोन को तलाशने की सुविधा:- यदि आपका मोबाइल डिवाइस कहीं गायब हो जाता है, तो आप गूगल मैप की मदद से अपने फोन की लोकेशन का पता लगा सकते हैं। यही नहीं, आसपास के ऐसे लोकेशन पर पहुंच कर आप एंड्रॉयड डिवाइस मैनेजर की मदद से अपने डिवाइस को फुल वॉल्यूम में पांच मिनट तक रिंग भी करा सकते हैं। इस सुविधा से आप मैप पर यह देख सकते हैं कि आपका फोन कहां है। इससे आप अपने एंड्रॉयड डिवाइस को दूर से ही लॉक कर सकते हैं, रिंग कर सकते हैं या चाहें तो सारे डेटा इरेज कर सकते हैं। इस सुविधा का फायदा उठाने के लिए गूगल सेटिंग-लोकेशन में जाएं और इसके बाद एक्सेस लोकेशन ऑप्शन चुनें। इसके लिए आपको रिमोट डिलीशन और लॉकिंग को ऑन करना होगा। आप किसी पर्सनल कंप्यूटर की मदद से भी अपने स्मार्ट फोन के डेटा डिलीट कर सकते हैं। शेयर्ड यूजर्स के लिए एक्सेस को रखें लिमिटेड:- एंड्रॉयड 4.3 या उससे ऊंचे वर्जन के टैबलेट के लिए आप रेस्ट्रिक्टेड प्रोफाइल तैयार कर सकते हैं ताकि दूसरे लोग आपके सभी गेम या ऐप तक न पहुंच सकें। इसके लिए सेटिंग में जाएं और अपने फोन के लिए यूजर्स को सलेक्ट करें। संदिग्धएप से सुरक्षित रखें फोन:- आपके फोन में गूगल प्ले से आने वाले किसी भी ऐप को गूगल स्कैन करता है और हानिकारक ऐप को ब्लॉक कर देता है। कोई ऐप यदि किसी अज्ञात लोकेशन से आता है, तो एक पॉप-अप दिखेगा, जो आपसे यह कहेगा कि फाइल को स्कैन करें और यह सुनिश्चित करें कि वह आपके डिवाइस के लिए सुरक्षित हो। गूगल प्ले से परचेज को करें कंट्रोल:- एपल और अमेजन की तरह ही गूगल को भी एक्सिडेंटल परचेज की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। इससे बचने के लिए आप गूगल प्लेज में एक पासवर्ड का विकल्प चुन सकते हैं, जो हर आधे घंटे पर या जब भी कुछ खरीद होती हो, तो पासवर्ड मांगे। शेयर्ड एप को फिल्टर करें:- आप एप्स को फिल्टर करने के लिए पिन का इस्तेमाल कर सकते हैं और चार एप रेटिंग लेवल डिस्प्ले करने का विकल्पि चुन सकते हैं। इससे सिर्फ वही ऐप डाउनलोड होंगे, जो आपके लिए उपयुक्त हैं। सेफ सर्च ऑप्शन को इनेबल करें:- अगर आपका डिवाइस आपके बच्चे इस्तेमाल करते हैं, तो उसे सेफ सर्च इनेबल कर ज्यादा किड्स फ्रेंडली बनाएं। गूगल के होमपेज में सर्च सेटिंग में जाकर आप ऐसा कर सकते हैं।  

डायबिटीज के मरीजों के लएि फायदेमंद है यह आसन

  डायबिटीज के दौरान शरीर में ग्लूकोज और इन्सुलिन के संतुलन को बनाए रखना बड़ी चुनौती है। ऐसे में पैंक्रियाज का फिट रहना डायबिटिक लोगों के लिए और भी जरूरी है। गोमुख आसन के नियमित अभ्यास से पैंक्रियाज सही तरह से काम करता है जिससे डायबिटीज पर नियंत्रण करने में मदद मिलती है। इसके अलावा, इस आसने के अभ्यास से कमर, कंधे, गर्दन और रीढ़ की हड्डी की जकड़न को खत्म करता है और मांसपेशियां मजबूत होते हैं। यह ज्वाइट्स के बीच रक्त संचार बढ़ाता है जिससे जोड़ों में होने वाली परेशानियों में आराम होता है। ऐसे करें गोमुख आसन:- -इसे करने के लिए सबसे पहले घुटनों के बल जमीन पर बैठ जाएं। अगर आप गठिया के मरीज हैं तो पद्मासन में बैठें। -अब अपने बाएं हाथ को ऊपर उठाएं और कोहनी मोड़कर पीठ के पीछे ले जाएं। वहीं दाएं हाथ को कोहनी से मोड़ें और बाएं हाथ की उंगलियां पकड़ने की कोशिश करें। -इस प्रक्रिया के दौरान रीढ़ की हड्डी सीधे रखें और श्वास सामान्य रखें। -कुछ सेकंड बाद सामान्य अवस्था में आ जाएं और इस प्रक्रिया को दूसरे हाथ से दोहराएं।  

गिनीज रिकॉर्ड वाला AI सुपरकंप्यूटर: कैसे छोटी-सी डिवाइस में समाई डेटा सेंटर जितनी ताकत?

 अमेरिका की एक नई कंपनी टाइनी AI ने एक ऐसा छोटा डिवाइस बनाया है जो दुनिया का सबसे छोटा पर्सनल AI सुपरकंप्यूटर है। इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने भी मान्यता दी है। इस डिवाइस का नाम टाइनी AI पॉकेट लैब है। यह पावर बैंक जैसा दिखता है और जेब में आसानी से रखा जा सकता है। सबसे खास बात यह है कि यह 120 अरब पैरामीटर वाले बड़े AI मॉडल को बिना क्लाउड, सर्वर या महंगे GPU के खुद पर चला सकता है। कंपनी ने इसे 10 दिसंबर को लॉन्च किया। इसकी मदद से आम लोग भी डेटा सेंटर जैसी ताकत अपने हाथ में पा सकते हैं। डेटा सेंटर जैसी पावर कैसे देगा? इंटरेस्टिंग इंजीनियरिंग की रिपोर्ट (Ref.) बताती है कि टाइनी AI के GTM डायरेक्टर समर भोज ने कहा कि क्लाउड AI ने बहुत फायदा दिया, लेकिन अब पर्यावरण की चिंता बढ़ गई है। उनके मुताबिक, इंटेलिजेंस डेटा सेंटर में नहीं बल्कि लोगों के पास होनी चाहिए। पॉकेट लैब इसी सोच से बनाया गया है। यह डिवाइस इंटरनेट के बिना काम करता है, डेटा को डिवाइस पर ही रखता है और बैंक जैसी मजबूत सुरक्षा देता है। इससे निजता पूरी तरह सुरक्षित रहती है और बिजली की खपत भी बहुत कम होती है। किस काम आएगा यह सुपरकंप्यूटर? यह छोटा सुपरकंप्यूटर डेवलपर्स, रिसर्चर, क्रिएटर्स, प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स के लिए बनाया गया है। यह वर्कफ्लो, कंटेंट बनाने और संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित तरीके से प्रोसेस करने में मदद करता है। सब कुछ ऑफलाइन होता है, इसलिए इंटरनेट की जरूरत नहीं पड़ती। डिवाइस में यूजर का डेटा, चॉइस और डॉक्यूमेंट्स लोकल स्टोर होते हैं। यह 10 अरब से 100 अरब पैरामीटर वाले मॉडल अच्छे से चलाता है, जो ज्यादातर रोज के कामों के लिए काफी हैं। यह 120 अरब पैरामीटर तक के मॉडल भी चला सकता है, जो GPT-4 जैसी इंटेलिजेंस देता है। कम बिजली खाएगा यह AI सुपरकंप्यूटर पॉकेट लैब में ARMv9.2 का 12 कोर CPU है और यह 65 वाट बिजली में काम करता है। आम GPU वाले सिस्टम से बहुत कम बिजली खाता है। इसमें दो खास तकनीकें हैं – टर्बोस्पार्स और पावरइन्फर। टर्बोस्पार्स सिर्फ जरूरी न्यूरॉन्स को सक्रिय करता है, जिससे स्पीड बढ़ती है। पावरइन्फर CPU और NPU पर काम बांटता है, जिससे कम बिजली में अच्छा परफॉर्मेंस मिलता है। यह छोटा डिवाइस GPU जैसी ताकत देता है। ये मॉडल झट से हो जाएंगे इंस्टॉल कंपनी ओपन सोर्स सिस्टम देती है। इसमें लामा, क्वेन, डीपसीक, मिस्ट्रल, फाई जैसे मॉडल एक क्लिक में इंस्टॉल हो जाते हैं। AI एजेंट्स जैसे ओपनमैनस, कॉम्फीUI भी आसानी से सेट होते हैं। नियमित अपडेट मिलते रहेंगे। जनवरी 2026 में CES में इसे दिखाया जाएगा। यह डिवाइस AI को हर किसी के लिए प्राइवेट और पर्सनल बनाता है।

बड़ा डेटा ब्रीच: 63 करोड़ पासवर्ड हुए लीक, एक क्लिक में जानें आपका अकाउंट सेफ है या नहीं

अमेरिका की जांच एजेंसी FBI ने एक बड़े साइबर अपराधी के कई डिवाइसेस से 63 करोड़ से ज्यादा चोरी हुए पासवर्ड बरामद किए हैं। ये पासवर्ड अलग-अलग जगहों से चुराए गए थे, जैसे डार्क वेब की मार्केटप्लेस, टेलीग्राम चैनल और खतरनाक मैलवेयर हमलों से। इतनी बड़ी संख्या में पासवर्ड एक ही हैकर के पास मिलना हैरान करने वाला है। FBI पिछले चार साल से ऐसे चोरी हुए पासवर्ड सुरक्षा विशेषज्ञ ट्रॉय हंट को दे रही है, जो 'हैव आई बीन प्वन्ड' नाम की वेबसाइट चलाते हैं। इस बार की सूची सबसे बड़ी है और ये सभी पासवर्ड अब उस वेबसाइट पर जांच के लिए उपलब्ध हैं। इससे लोगों को पता चल सकेगा कि उनका पासवर्ड सुरक्षित है या नहीं। ये पासवर्ड कहां से आए? फोर्ब्स की रिपोर्ट (Ref.) बताती है कि 63 करोड़ पासवर्ड पुरानी डेटा चोरी की घटनाओं से आए हैं, लेकिन इनमें से करीब 7.4 प्रतिशत यानी 4.6 करोड़ पासवर्ड पहले कभी उनकी वेबसाइट पर नहीं देखे गए थे। बाकी पासवर्ड पहले से मौजूद थे, लेकिन अब उनकी गिनती बढ़ गई है। इससे साफ है कि साइबर अपराधी एक-दूसरे से डेटा खरीदते-बेचते हैं। ये पासवर्ड इन्फोस्टीलर नाम के मैलवेयर से भी चुराए गए थे, जो कंप्यूटर में घुसकर पासवर्ड चुपके से ले लेता है। कहीं आपका पासवर्ड तो लीक नहीं हुआ? आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि आपका पासवर्ड इन चोरी हुए पासवर्ड में है या नहीं। ट्रॉय हंट की 'Pwned Passwords' से सर्विस पर जाएं और अपना पासवर्ड डालें। ये पूरी तरह सुरक्षित है क्योंकि आपका पासवर्ड किसी ईमेल या नाम से नहीं जुड़ा होता। पासवर्ड को एक विशेष कोड में बदलकर जांचती है, जिसे SHA-1 हैश कहते हैं। अगर आपका पासवर्ड मिलता है, तो तुरंत उसे बदल दें। ऐसा न करने पर हैकर क्रेडेंशियल स्टफिंग हमले से आपके अकाउंट हैक कर सकते हैं। इसके अलावा, जहां संभव हो वहां पासकी का इस्तेमाल करें और सभी अकाउंट पर टू फेक्टर वाली सुरक्षा चालू करें। ये कदम उठाकर आप खुद को काफी हद तक सुरक्षित रख सकते हैं। पासवर्ड मैनेजर का इस्तेमाल क्यों जरूरी है? पासवर्ड मैनेजर एक ऐसा ऐप है जो आपके सभी पासवर्ड को सुरक्षित रखता है और मजबूत पासवर्ड खुद बनाता है। लोग अक्सर कमजोर या एक ही पासवर्ड कई जगह इस्तेमाल करते हैं, जो हैकर के लिए आसान बनाता है। पासवर्ड मैनेजर से आपको सिर्फ एक पासवर्ड याद रखना होता है, बाकी सब वो संभाल लेता है। अगर एक अकाउंट हैक होता है, तो बाकी सुरक्षित रहते हैं। कई बार पासवर्ड मैनेजर कंपनियों में भी चोरी हुई है, लेकिन फिर भी ये सबसे अच्छा तरीका है क्योंकि कमजोर पासवर्ड से खतरा ज्यादा होता है। गूगल पासवर्ड मैनेजर का इस्तेमाल कर सकते हैं अगर आप गूगल का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं, तो गूगल पासवर्ड मैनेजर अच्छा है। ये आपके सेव किए पासवर्ड को चेक करता है और बताता है कि कोई पासवर्ड चोरी हुआ है, कमजोर है या कई जगह इस्तेमाल हो रहा है। आईफोन यूजर्स के लिए ऐपल की पासवर्ड ऐप है, जो बिना आपके पासवर्ड ऐपल को बताए चेक करती है कि कोई लीक हुआ है या नहीं। कोई भी भरोसेमंद पासवर्ड मैनेजर चुनें, लेकिन इस्तेमाल जरूर करें। ब्राउजर वाले से अलग ऐप बेहतर होता है।