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टिकाऊ और सुरक्षित करेंसी की ओर बढ़ रहा भारत, कागजी नोटों की जगह पॉलीमर नोट संभव

नई दिल्ली  भारतीय रिजर्व बैंक देश में फटे-पुराने नोटों की समस्या को समाप्त करने और बार-बार नोट छापने पर आने वाली भारी लागत को कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। केंद्रीय बैंक अब पारंपरिक कागजी मुद्रा के स्थान पर प्लास्टिक से बने नोट जारी करने की योजना पर विचार कर रहा है। वित्तीय बाजार और आम जनता के लिए इस बदलाव के फायदे और चुनौतियां दोनों ही काफी महत्वपूर्ण हैं। क्या हैं प्लास्टिक नोट? प्लास्टिक नोट विशेष प्रकार के सिंथेटिक पदार्थ से तैयार किए जाते हैं। पारंपरिक सूती धागे से बने कागजी नोटों की तुलना में ये बेहद लचीले, हल्के और लंबे समय तक चलने वाले होते हैं। मौजूदा समय में चलने वाले कागजी नोट बहुत जल्दी फट जाते हैं, गंदे हो जाते हैं और पानी या पसीने के संपर्क में आते ही खराब हो जाते हैं। इस वजह से केंद्रीय बैंक को हर साल पुराने नोटों को बदलने और नए नोटों की छपाई पर करोड़ों रुपये बर्बाद करने पड़ते हैं। प्लास्टिक नोट आने से इस बार-बार होने वाले खर्च में बहुत बड़ी बचत होगी। प्लास्टिक करेंसी के मुख्य लाभ इन नोटों का सबसे बड़ा गुण इनका टिकाऊपन है। पॉलीमर से बने ये नोट सामान्य कागजी नोटों के मुकाबले 3 से 4 गुना अधिक समय तक चलते हैं। ये पूरी तरह से वॉटरप्रूफ होते हैं, जिसके कारण ये पानी, गंदगी या पसीने से सुरक्षित रहते हैं और मुड़ने या फटने से बचे रहते हैं। इसके अलावा, इनकी सतह गैर-छिद्रपूर्ण होती है, जिसके कारण इन पर धूल, मिट्टी या बैक्टीरिया आसानी से नहीं चिपकते। इस वजह से ये नोट इस्तेमाल करने में कहीं अधिक स्वच्छ और हाइजीनिक रहते हैं। जाली नोटों के धंधे पर लगेगी लगाम प्लास्टिक नोटों को बाजार में उतारने का एक बड़ा फायदा नकली मुद्रा पर रोक लगाना भी है। इन नोटों में सुरक्षा के ऐसे आधुनिक उपाय शामिल किए जा सकते हैं, जिनकी हूबहू नकल करना जालसाजों के लिए लगभग असंभव होगा। इनमें ट्रांसपेरेंट विंडो, विशेष होलोग्राम और कई अन्य एडवांस्ड सिक्योरिटी फीचर्स शामिल होते हैं, जिससे जाली नोटों के कारोबार को पूरी तरह ठप किया जा सकता है। नई तकनीक के रास्ते में मौजूद चुनौतियां फायदों के बावजूद इस नई व्यवस्था को लागू करने में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें भी हैं। शुरुआत में प्लास्टिक नोटों को छापने का खर्च सामान्य कागजी नोटों की तुलना में काफी ज्यादा होता है। इसके अतिरिक्त, ये नोट थोड़े चिकने होते हैं, जिससे हाथ से गिनते समय इनके फिसलने की समस्या हो सकती है। अत्यधिक तापमान या तेज गर्मी में इनके सिकुड़ने की आशंका भी बनी रहती है। सबसे बड़ी चुनौती देश भर के एटीएम नेटवर्क को लेकर है, क्योंकि इन नोटों के हिसाब से सभी मशीनों को अपग्रेड करना पड़ेगा। दुनिया भर में प्लास्टिक नोटों का चलन वैश्विक स्तर पर देखें तो प्लास्टिक करेंसी का प्रयोग कोई नया प्रयोग नहीं है। वर्तमान में दुनिया के 60 से भी अधिक देशों में आंशिक या पूर्ण रूप से प्लास्टिक नोटों का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक को सबसे पहले साल 1988 में ऑस्ट्रेलिया ने अपनाया था। इसके बाद ब्रिटेन, कनाडा, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और रोमानिया जैसे कई बड़े देशों ने भी अपनी अर्थव्यवस्था में इसे शामिल किया है।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की बड़ी कार्रवाई, भट्टी मॉड्यूल से जुड़े 8 संदिग्ध गिरफ्तार

नई दिल्ली  शहजाद भट्टी हाल के महीनों में ये नाम भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की जांच में बार-बार सामने आया है। इसका कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध है। कभी पाकिस्तान के एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के तौर पर पहचाने जाने वाले भट्टी को अब एजेंसियां एक ऐसे डिजिटल नेटवर्क के पीछे का मुख्य चेहरा बता रही हैं, जिसका कथित तौर पर गैंगस्टर मॉड्यूल, युवाओं के कट्टरपंथीकरण, हथियारों की तस्करी और भारत में अशांति फैलाने की साजिश से जुड़ाव है। आरोपियों के पास से हथियार और चोरी की बाइक बरामद शनिवार को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने भट्टी के मॉड्यूल से जुड़े आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर पूरे देश में बड़े हमलों की योजना बना रहे थे। स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस (स्पेशल सेल) अनिल शुक्ला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आरोपियों के पास से पाकिस्तान में बने चार हैंड ग्रेनेड, दो ग्लॉक पिस्तौल, 24 जिंदा कारतूस, एक चोरी की मोटरसाइकिल और एक चोरी का स्कूटर बरामद किया गया है। आरोपियों में उत्तर प्रदेश से विजय उर्फ शूटर (23), झारखंड से नीतीश पासवान (23), महाराष्ट्र से तौकीर रिजवान अहमद शेख (27) और साजिद मेहबूब शेख उर्फ अरबाज खान (27), पंजाब से हरविंदर सिंह (28), गगनदीप सिंह (28) और मंजीत सिंह (23) और नेपाली नागरिक अनग कामी लामा (66) शामिल हैं। यूपी एटीएस और एसटीएफ ने भी चार गुर्गों को किया गिरफ्तार इस महीने की शुरुआत में उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने भी एक संयुक्त अभियान चलाया और भट्टी-आबिद जट्ट मॉड्यूल से जुड़े चार गुर्गों को गिरफ्तार किया। भट्टी इस समय दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), उत्तर प्रदेश एटीएस, उत्तराखंड एसटीएफ और अन्य केंद्रीय एजेंसियों सहित कई एजेंसियों के लिए टॉप टारगेटों में से एक है। इन्फ्लुएंसर से कैसे बना क्रिमिनल नेटवर्क का सरगना? शाहजाद भट्टी मूल रूप से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का रहने वाला है। जहां एक ओर वह सोशल मीडिया पर खुद को एक व्यवसायी, समाज-सेवक और धार्मिक मुद्दों पर टिप्पणीकार के तौर पर पेश करता है, वहीं दूसरी ओर एजेंसियों का कहना है कि उसका आपराधिक रिकॉर्ड कुछ और ही कहानी बयां करता है। पाकिस्तानी पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 2013 में उसके खिलाफ चोरी और डकैती सहित कई मामले दर्ज किए गए थे, जिसके बाद बलात्कार जैसे गंभीर आरोप भी लगे। लगभग 2015 में वह पाकिस्तान से भागकर दुबई चला गया, जहां उसने डेयरी के कारोबार शुरू किए। उस दौरान बताया जाता है कि वह बलूचिस्तान के फारूक खोखर गिरोह के संपर्क में आया और उसका एक प्रमुख सदस्य बन गया। भट्टी ने "333" नाम से अपनी ऑनलाइन पहचान बनाना भी शुरू कर दिया था, जिसके तहत वह भारत-पाकिस्तान संबंधों, धार्मिक मुद्दों और इन्फ्लुएंसर्स के बीच के विवादों पर वीडियो बनाता था। उसे बड़ी संख्या में फॉलोअर्स मिले, लेकिन एजेंसियों का मानना है कि यह लोकप्रियता असल में एक बड़े नेटवर्क को खड़ा करने के लिए एक आड़ का काम कर रही थी। आईएसआई से लिंक का आरोप भारतीय एजेंसियों का दावा है कि भट्टी अकेले काम नहीं कर रहा है, बल्कि उसका संबंध पाकिस्तान की आईएसआई से है और उसे आबिद जट्ट, अजमल गुर्जर और यावर खान जैसे हैंडलर्स का समर्थन मिला हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए काम करता है। आरोप है कि यह भारत में कमजोर युवाओं की पहचान करता है, प्राइवेट मैसेजिंग के जरिए उनसे बातचीत शुरू करता है और फिर वीडियो कॉल के जरिए उन्हें भट्टी से जोड़ता है। खबरों के अनुसार, इन लोगों को पैसों और सोशल मीडिया पर शोहरत दिलाने के वादों के जरिए, साथ ही हथियारों वाले वीडियो और विदेश में बसने के मौकों का लालच देकर फंसाया जाता है। शुरुआत में उन्हें छोटे-मोटे काम सौंपे जाते हैं जैसे कि किसी जगह की तस्वीरें या वीडियो शेयर करना और धीरे-धीरे उन्हें इस नेटवर्क के जाल में और भी गहराई तक खींच लिया जाता है। पूरे भारत में बड़ी कार्रवाई जारी नेटवर्क के सामने आने के बाद एजेंसियों ने मई के पहले हफ्ते में देशव्यापी स्तर पर एक बड़ा अभियान शुरू किया। 48 घंटे तक चले इस अभियान में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों को शामिल किया गया। सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि एजेंसियां 500 से ज्यादा मोबाइल नंबरों और सोशल मीडिया अकाउंट्स को ट्रैक कर रही हैं। पंजाब के सीमावर्ती जिलों से 40 से ज्यादा संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। हरियाणा एसटीएफ ने करीब 90 युवकों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की। दिल्ली में 20 से ज्यादा लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया, जहां उनमें से कुछ को समझाया-बुझाया गया और अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स डिलीट करने को कहा गया। कुल मिलाकर, इस अभियान के तहत 481 संदिग्धों और अपराधियों को हिरासत में लिया गया। तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान के लिंक्स जांच में भट्टी के 'तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान' (TTH) नामक एक समूह से कथित संबंधों का भी खुलासा हुआ है। गिरफ्तार किए गए लोगों ने दिल्ली पुलिस को बताया कि उन्हें दिल्ली और फरीदाबाद की दीवारों पर 'TTH' लिखने का निर्देश दिया गया था। उन्हें इसके नीचे "S" अक्षर लिखने का भी निर्देश दिया गया था, कथित तौर पर भट्टी की संलिप्तता का संकेत देने के लिए। एजेंसियों का कहना है कि इस गतिविधि को पाकिस्तान से मिली फंडिंग का समर्थन प्राप्त था। पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने की साजिश    

कालाबन के तीखे मोड़ पर मौत का तांडव, डलहौजी घूमने आए दो परिवारों की यात्रा खत्म

हिमाचल चंबा जिले के जनजातीय क्षेत्र चुराह में साच पास मार्ग पर एक दर्दनाक सड़क हादसे में चालक और अन्य सात पर्यटकों की जान चली गई. हादसा साच पास से बैरागढ़ की ओर आते समय कालाबन के तीखा मोड़ के पास हुआ. जानकारी अनुसार बेंगलुरु से आए एक परिवार ने पर्यटन नगरी डलहौजी में एक टैक्सी वाहन बुक करवाई. दो परिवार साथ गए उन्होंने डलहौजी में दूसरे पर्यटक परिवार से टैक्सी शेयर कर पहाड़ों और बर्फ की सैर कर आनंद लेने की बात कही. जिस पर दूसरे परिवार ने भी हामी भरते हुए टैक्सी में सवार होकर शुक्रवार को बैरागढ़-किलाड़ मार्ग वाया साच जोत पर रवाना हो गए. इन पर्यटकों द्वारा बुक करवाई गई टैक्सी के वापस डलहौजी न लौटने पर टैक्सी मालिक को चिंता होने लगी. तीखा मोड़, खाई में गिरी गाड़ी उन्होंने जीपीएस के माध्यम से देखा कि कालावन के पास उनकी गाड़ी एक स्थान पर है और उसमें कोई हलचल नहीं हो रही थी. गाड़ी नंबर HP01C-2133 शुक्रवार, 29 मई को साच पास से बैरागढ़ की ओर आ रही थी. इसी दौरान कालाबन के तीखा मोड़ के समीप वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर गहरी खाई में जा गिरा. हादसे की सूचना शनिवार को ओसीपी बैरागढ़ द्वारा दूरभाष के माध्यम से पुलिस थाना तीसा को दी गई. सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तथा राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया. लेकिन हादसा इतना भीषण था कि वाहन में सवार सभी आठ लोगों की मौत हो गई. मृतकों में कौन लोग शामिल? मृतकों की पहचान चालक विश्वास सल्होता पुत्र थोमस, निवासी मोहल्ला ज्वाला, मावा बनीखेत तथा कर्नाटक और छत्तीसगढ़ के पर्यटकों अरविंद चंद्राकर, प्राची, दर्श, अकशद, पी.जी. कार्तिघायन, मनीमाला और नंदन के रूप में हुई है. सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज चंबा भेजा गया. पुलिस ने इस संबंध में मुकदमा दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है. साच पास मार्ग पर आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सड़क सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की मांग की है.

जहरीली हवा और संकरी सुरंगों में फंसे खनिकों की तलाश, दुनिया भर के गोताखोर जुटे

नई दिल्ली  घुप अंधेरा, जहरीली हवा, कीचड़ से भरी सुरंगें और ऐसा पानी जिसमें हाथ तक दिखाई न दे। लाओस के शायसोम्बौन प्रांत की एक खतरनाक गुफा में फंसे खनिकों को बचाने के लिए पिछले 11 दिनों से दुनिया के कई देशों के एक्सपर्ट गोताखोर मौत से मुकाबला कर रहे हैं। यह ऑपरेशन अब 2018 के मशहूर थाईलैंड ‘थाम लुआंग’ गुफा बचाव अभियान से भी ज्यादा जोखिम भरा माना जा रहा है। 21 मई को सोना और अन्य कीमती खनिज तलाशने गए सात ग्रामीण खनिक अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण गुफा में फंस गए। लगातार बारिश से गुफा का प्रवेश द्वार बंद हो गया और बाहर निकलने के रास्ते पूरी तरह खत्म हो गए। सबसे अहम बात यह रही कि एक खनिक किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहा और उसने प्रशासन को सूचना दी। यही घटना बाकी लोगों की जिंदगी बचाने की उम्मीद बनी। 'कॉफी' जैसा गंदा पानी और दम घोंटने वाली हवा राहत अभियान में शामिल गोताखोरों के मुताबिक गुफा के भीतर का पानी इतना गंदा था कि दृश्यता लगभग शून्य थी। बचावकर्मियों ने इसे 'कॉफी-कलर्ड वॉटर' यानी कॉफी जैसा गाढ़ा और भूरा पानी बताया। गुफा की कई सुरंगें केवल 60 सेंटीमीटर चौड़ी थीं। तुलना करें तो एक बड़ी पिज्जा का व्यास करीब 50 सेंटीमीटर होता है। ऐसे में गोताखोरों को ऑक्सीजन सिलेंडर उतारकर शरीर सिकोड़ते हुए अंदर बढ़ना पड़ा। इसके अलावा गुफा के भीतर चमगादड़ों की बीट से पैदा हुई हाइड्रोजन सल्फाइड गैस मौजूद थी, जिससे बेहोशी या दम घुटने का खतरा बना हुआ था। दुनिया भर के एक्सपर्ट जुटे शुरुआत में लाओस और थाईलैंड की टीमें मौके पर पहुंचीं। बाद में जापान, मलेशिया, इंडोनेशिया, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के विशेषज्ञ भी अभियान में शामिल हुए। टीम में फिनलैंड के मशहूर गुफा गोताखोर मिक्को पासी भी शामिल थे, जिन्होंने 2018 के थाई गुफा बचाव अभियान में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि पासी ने साफ कहा कि यह मिशन थाईलैंड ऑपरेशन से कहीं ज्यादा खतरनाक है। उनके मुताबिक, यह प्राकृतिक गुफा नहीं बल्कि सालों से हाथों से खोदी गई अस्थिर खदान है। कई हिस्सों में मिट्टी कभी भी ढह सकती थी। संकरी सुरंगों में एक समय पर केवल एक गोताखोर ही निकल सकता था। पांचवें दिन तक सिर्फ सवाल ही सवाल शुरुआती दिनों में सबसे बड़ा सवाल था कि खनिक जीवित भी हैं या नहीं। अगर वे जिंदा हैं तो क्या उन्हें बाहर निकाला जा सकेगा? बचावकर्मियों को यह भी डर था कि जिन लोगों ने कभी डाइविंग उपकरण नहीं देखे, उन्हें ऑक्सीजन रेगुलेटर और सिलेंडर के सहारे बाढ़ भरी सुरंगों से कैसे निकाला जाएगा? गुफा के बाहर परिवारों का जमावड़ा लगा रहा। महिलाएं और बच्चे लगातार प्रार्थना करते रहे। छठे दिन मिली पहली बड़ी सफलता 27 मई को अभियान में बड़ी सफलता मिली। पांच खनिक गुफा के भीतर प्रवेश द्वार से करीब 300 मीटर दूर एक चट्टान पर बैठे मिले। वे भूखे, कमजोर और डिहाइड्रेटेड थे लेकिन होश में थे। एक खनिक ने कहा कि मां-पिता चिंता मत करो। मैं अभी मजबूत हूं। मैं घर वापस आऊंगा। थाई गोताखोर नोरासेद पलासिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया कि अब मदद पहुंच चुकी है। इसके बाद उन्हें इलेक्ट्रोलाइट्स, खाना, पानी और थर्मल कंबल दिए गए। हर सेकंड मौत का खतरा खनिकों को बाहर निकालना सबसे मुश्किल हिस्सा था। गोताखोरों को पूरी तरह अंधे पानी में केवल स्पर्श के सहारे रास्ता तय करना पड़ा। कई जगह ऑक्सीजन टैंक निकालकर शरीर को धक्का देकर सुरंग पार करनी पड़ी। घबराहट और ऑक्सीजन की कमी से जूझना पड़ा। इस बीच मौसम विभाग ने भारी बारिश और तूफान की चेतावनी भी जारी कर दी थी। डर था कि दोबारा बारिश हुई तो गुफा पूरी तरह डूब सकती है। आखिरकार बाहर निकले चार खनिक पानी लगातार पंप करके बाहर निकाला गया। जलस्तर घटने के बाद चार खनिक खुद बाहर निकलने में सफल रहे। वे कीचड़ से लथपथ थे और बाहर आते ही जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद उन्हें ऑक्सीजन दी गई और थर्मल फॉइल कंबलों से ढका गया। ऑस्ट्रेलियाई गोताखोर जोश रिचर्ड्स ने कहा कि मैं अंदर जाने के लिए वेटसूट पहन ही रहा था कि तभी वे खुद बाहर निकल आए। अभी भी दो खनिक लापता अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। बचाव दल के मुताबिक दो खनिक अब भी लापता हैं। जीवित बचे लोगों ने बताया कि वे शायद गुफा में 500 मीटर और अंदर चले गए थे। थाई रेस्क्यू ग्रुप ‘मेट्टा थाम रेस्क्यू कलासिन’ के प्रमुख केंगकाज बोंगकावोंग ने कहा कि टीम अब और गहराई वाले हिस्से में खोज करेगी, लेकिन वह इलाका बेहद ज्यादा पानी से भरा और बेहद खतरनाक है। थाईलैंड और लाओस मिशन में बड़ा अंतर     लाओस मिशन                          थाईलैंड मिशन (2018)     7 खनिक फंसे                         13 बच्चे और कोच फंसे     5 मिले, 2 अब भी लापता             सभी सुरक्षित निकाले गए     अस्थिर सोने की खदान                प्राकृतिक गुफा     60 सेंटीमीटर तक संकरी सुरंगें       अपेक्षाकृत चौड़े रास्ते     जहरीली गैस का खतरा                गैस का बड़ा खतरा नहीं     आंशिक रूप से खुद बाहर निकले    पूरी तरह गोताखोरों पर निर्भर बचाव     प्रवेश द्वार से 300 मीटर दूर मिले    कई किलोमीटर अंदर फंसे थे दुनिया की नजर इस मिशन पर यह अभियान अब दुनिया के सबसे कठिन और खतरनाक गुफा बचाव अभियानों में गिना जा रहा है। हर गुजरते दिन के साथ उम्मीद और खतरा दोनों बढ़ रहे हैं। अब पूरी दुनिया की नजर उन दो लापता खनिकों पर टिकी है, जिन तक पहुंचना शायद अब तक का सबसे मुश्किल चरण साबित हो सकता है।  

अंतरिम व्यापार समझौते की ओर बढ़े भारत-अमेरिका संबंध, टैरिफ और बाजार पहुंच पर फोकस

नई दिल्ली  भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है, अब केवल इस डील पर ऑफिशियल मुहर लगनी बाकी है। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी 1 जून से नई दिल्ली में चार दिनों तक बैठक करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Pact) को अंतिम रूप देने और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement-BTA) को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी। भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर खास बातचीत भारत की तरफ से इस डील में नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन करेंगे। वहीं अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिका के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच करने वाले हैं। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, बैठक में कई अहम विषयों पर बातचीत होगी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं-     बाजार पहुंच (Market Access)     गैर-शुल्क बाधाएं (Non-Tariff Measures)     सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा     निवेश प्रोत्साहन     आर्थिक सुरक्षा सहयोग     सप्लाई चेन से जुड़ी रणनीतिक साझेदारी दोनों देश पहले चरण के अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने के साथ-साथ दीर्घकालिक व्यापक व्यापार समझौते के लिए कानूनी और नीतिगत ढांचे पर भी चर्चा करेंगे। फरवरी में बनी थी ट्रेड डील की रूपरेखा भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी 2026 को एक संयुक्त बयान जारी कर अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा तय की थी। इसके तहत दोनों देशों ने चरणबद्ध तरीके से व्यापारिक बाधाएं कम करने और टैरिफ में राहत देने पर सहमति जताई थी। समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए शुल्कों में कटौती करने का आश्वासन दिया था। अमेरिका ने पहले भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 50% तक शुल्क लगाया था, जिसे घटाकर 18% करने की बात कही गई थी। इसके अलावा रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 25% अतिरिक्त शुल्क को भी हटाने और शेष शुल्क को 18% तक सीमित करने का प्रस्ताव था। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदला समीकरण अमेरिका की घरेलू राजनीति और टैरिफ नीति में बदलाव के कारण वार्ताओं की दिशा प्रभावित हुई। 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को चुनौती देने वाले मामले में फैसला सुनाया। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी से सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10% समान शुल्क लागू करने की घोषणा कर दी। इस फैसले के बाद फरवरी में प्रस्तावित भारत-अमेरिका वार्ता टल गई थी। ट्रेड डील पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अप्रैल 2026 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने वॉशिंगटन की यात्रा की और बात को आगे बढ़ाया। भारत की ओर से बड़े प्रस्ताव भारत ने व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई कृषि वस्तुओं पर शुल्क घटाने या समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है।     डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स (DDGs)     रेड सोरघम (पशु आहार)     ट्री नट्स     ताजे और प्रोसेस्ड फल     सोयाबीन तेल     वाइन और स्पिरिट्स इसके बदले भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद खरीदने की इच्छा जताई है।     ऊर्जा उत्पाद     विमान और विमान कलपुर्जे     बहुमूल्य धातुएं     प्रौद्योगिकी उत्पाद     कोकिंग कोल विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रस्ताव दोनों देशों के बीच रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई दे सकता है। भारत-अमेरिका व्यापार का मौजूदा परिदृश्य अमेरिका वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर सामने आया। भारत का अमेरिका को निर्यात बढ़कर 87.3 अरब डॉलर पहुंच गया। अमेरिका से आयात 15.95% बढ़कर 52.9 अरब डॉलर रहा। भारत का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 40.89 अरब डॉलर था। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के सभी देशों पर समान 10% शुल्क लागू किए जाने के बाद वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धा का नया माहौल बन गया है। ऐसे में भारत और अमेरिका दोनों अपने-अपने हितों के हिसाब से समझौते की शर्तों में बदलाव कर सकते हैं।  

चैंपियंस लीग जश्न बना बवाल: पेरिस की सड़कों पर हिंसा, थाने पर धावा और दुकानों में तोड़फोड़

पेरिस पेरिस सेंट-जर्मेन (पीएसजी) के शनिवार को दूसरी बार चैंपियंस लीग खिताब जीतने के बाद देर रात जश्न के दौरान हिंसा भड़क गई। लोगों के एक समूह ने फ्रांस की राजधानी में एक थाने पर धावा बोलने की कोशिश की। पेरिस पुलिस ने हिंसा के इस मामले में कई लोगों को हिरासत में लिया है। पेरिस सेंट-जर्मेन (पीएसजी) ने शनिवार को पुस्कास एरिना में खेले गए चैंपियंस लीग के रोमांचक फाइनल मुकाबले में आर्सेनल को पेनाल्टी शूटआउट में मात देकर लगातार दूसरी बार इस स्पर्धा का खिताब अपने नाम कर लिया। इस मामले में रविवार तड़के 416 लोगों को गिरफ्तार किया गया प्रशंसक मना रहे थे जश्न हंगरी के बुडापेस्ट में पीएसजी की जीत के बाद पेरिस में प्रशंसकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। प्रशंसक आर्क डी ट्रायम्फ के पास की सड़कों पर मार्च करते हुए निकले, कुछ लोगों ने पटाखे जलाए और गाड़ियों के हॉर्न बजाए। चैंप्स-एलिसी पर लगभग 20,000 लोग जमा हो गए और पुलिस भीड़ को नियंत्रित करने में जुटी रही। पेरिस पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि छोटे-छोटे समूहों ने विभिन्न स्थानों पर अशांति फैलाई। कुछ समूहों ने दुकानों में तोड़फोड़ और आगजनी की। कारों में भी आग लगा दी गई। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस घटना में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया। लगातार दूसरे साल फुटबॉल के चलते हिंसा पुलिस ने बताया कि पॉश 8वें अरॉन्डिसमेंट इलाके में एक थाने पर धावा बोलने की कोशिश करने वालों को तितर-बितर कर दिया गया। पुलिस के अनुसार रात 10 बजे तक 45 लोगों को हिरासत में लिया गया। पेरिस के मुख्य रिंग रोड को कुछ देर के लिए भीड़ ने अवरुद्ध कर दिया जिसे बाद में पुलिस ने हटा दिया। पुलिस ने बताया कि एक बेकरी और एक रेस्तरां को नुकसान पहुंचा है। पुलिस ने 16वें अरॉन्डिसमेंट में पीएसजी स्टेडियम के पास जमा हुए लगभग 1,000 लोगों को भी काबू में किया और साइकिलों से बने अवरोधों को हटाया। गौरतलब है कि यह लगातार दूसरा साल है जब फुटबॉल की वजह से हिंसा भड़की। इससे पहले 2025 में फ़्रांसीसी टीम की जीत के बाद हुए जश्न ने हिंसक रूप ले लिया था। सोशल मीडिया पर वायरल फोटो सोशल मीडिया में वायरल तस्वीरों में पेरिस में सड़कों पर इलेक्ट्रिक बाइक जलती हुई और जश्न मनाने वालों को दुकानों के शीशे तोड़ते हुए देखा जा सकता है। पुलिस ने बताया कि इस अशांति के दौरान छह वाहन, दो दुकानें और एक बस स्टॉप क्षतिग्रस्त हो गए। फ़्रांस के गृह मंत्रालय ने बताया कि रविवार तड़के 416 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें पेरिस के 280 लोग शामिल हैं। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने कहाकि सात अधिकारी घायल हुए हैं और उन्होंने इस अशांति को बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं बताया। दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने सोशल मीडिया एक पर लिखा कि सिर्फ़ फ़्रांस में ही किसी फ़ुटबॉल क्लब की जीत दंगे भड़का देती है। उन्होंने कहाकि सिर्फ फ़्रांस में ही जीत की शाम को हर किसी को हिंसा का शिकार होने से बचने के लिए अपने घरों में बंद रहने पर मजबूर होना पड़ता है।

ईरान-अमेरिका तनाव फिर बढ़ा: ट्रंप ने सिचुएशन रूम में की अहम बैठक, नई शर्तें भेजीं

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच डील में अभी भी डोनाल्ड ट्रंप हैं। ट्रंप ने शुक्रवार को सिचुएशन रूम में नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ मीटिंग की थी। सूत्रों के मुताबिक यह मीटिंग करीब दो घंटे तक चली थी, लेकिन इसमें क्या हुआ, इस बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं मिल पाई। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ईरान के साथ डील में कई शर्तों में बदलाव करना चाहते हैं। इसमें, होर्मुज और न्यूक्लियर मटीरियल से जुड़ी शर्तें शामिल हैं। बताया जाता है कि नई शर्तों को वापस ईरान के पास भेज दिया गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ एक बहुत अच्छे समझौते के करीब पहुंच रहा है। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई पर लौट आएगा। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में कहाकि अगर आप जल्दबाजी करेंगे, तो आप कोई अच्छा समझौता नहीं कर पाएंगे। मुझे लगता है कि धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से हम वह पा रहे हैं जो हम चाहते हैं। अगर हमें वह नहीं मिला जो हम चाहते हैं, तो हम इसे एक अलग तरीके से खत्म करेंगे। ईरान का क्या कहना इस बीच, तस्नीम समाचार एजेंसी ने बताया कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उसने रविवार सुबह देश के क्षेत्रीय जल क्षेत्र के ऊपर एक अमेरिकी एमक्यू-1 प्रीडेटर मल्टी-रोल ड्रोन का पता लगाया और उसे मार गिराया। एजेंसी ने आईआरजीसी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि आज सुबह-सवेरे एक अमेरिकी सेना का एमक्यू1 ड्रोन ईरानी क्षेत्रीय जल क्षेत्र में घुस आया था, लेकिन तुरंत उसका पता चल गया और आईआरजीसी के हवाई रक्षा प्रणाली से दागी गयीं मिसाइलों से उसे मार गिराया गया। क्यों आया था अमेरिकी ड्रोन एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अमेरिकी ड्रोन ईरानी क्षेत्रीय जल क्षेत्र में शत्रुतापूर्ण हरकतें करने के इरादे से घुसा था। उल्लेखनीय है कि अमेरिका और इजरा ल ने 28 फरवरी को ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए थे, जिसमें 3,000 से अधिक लोग मारे गये थे। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल और पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले किये । फिर अमेरिका और ईरान ने आठ अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की। शांति स्थापित करने को लेकर दोनों देशों ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बातचीत की, जो बेनतीजा रही और फिर से दुश्मनी शुरू होने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली। हालांकि, अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी।

भीषण गर्मी पर पीएम मोदी की अपील: पानी पिएं, धूप से बचें और देसी शीतल पेयों को अपनाएं

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को मन की बात रेडियो कार्यक्रम में देश के सामने अपनी बातों को रखा। पीएम मोदी ने शुरुआत 134वें एपिसोड की शुरुआत हाल ही में हुए नेशनल एथलेटिक्स फेडरेशन कॉम्पटीशन से किया। उन्होंने इस दौरान एथलीट गुरिंदरवीर सिंह, अनिमेष कुजूर से बात की। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले ही झारखंड के रांची में हुए सीनियर एथलेटिक्स कॉम्पटीशन में करीब 800 एथलीट्स ने हिस्सा लिया। इसमें कुल मिलाकर चार राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूटे। पीएम ने कहा कि वह इन सभी एथलीट्स को इसके लिए बधाई देना चाहते हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री ने दोनों एथलीट्स से बात की और उनकी जर्नी के बारे में जाना। पीएम ने गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर का जिक्र करते हुए कहा कि हमने संगीत में जुगलबंदी देखी है कि एक चुनौती दे और दूसरी उठा ले। फिर तीसरी बार कर ले। लेकिन अनिमेष कजूर और गुरिंदरवीर सिंह ने एथलेटिक्स के क्षेत्र में ऐसा करके देश का नाम रोशन किया है। गर्मी को लेकर पीएम की देशवासियों से अपील प्रधानमंत्री मोदी ने देश में पड़ रही भीषण गर्मी को लेकर भी देश वासियों के सामने अपनी पुरानी अपील को दोहराया। उन्होंने कहा, "मेरे प्यारे देशवासियों, इस समय देश के ज्यादातर हिस्सों में भीषण गर्मी पड़ रही है। तेज धूप, गर्म हवाएं चल रही हैं। ऐसे में मौसम में सभी को अपना ध्यान रखने की जरूरत है। पानी पीते रहिए। धूप में अगर निकलना ही पड़े तो थोड़ा संभल कर निकलिए। सरकार ने देश भर के लिए जो गाइडलाइंस दी हैं। उनको भूलिएगा नहीं। पीएम मोदी ने कहा, साथियों हमारे यहां गर्मी से लड़ने का तरीका कई बार हमारी रसोइयों में भी मिल जाता है। आपने देखा होगा जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है। वैसे-वैसे घर की रसोई का स्वाद बदल जाता है। रसोई का प्रकार भी बदल जाता है। कहीं मटके का पानी निकल आता है, कहीं दही जमने लगता है, तो कहीं आम उबलने लगता है और फिर शुरू होता है देशी पेय का दौर… देशी पेय से आप सभी भी परिचित होंगे। उत्तर भारत में आप जाएंगे तो आपको आम पन्न मिलेगा। कच्चे आम का स्वाद और गर्मी से राहत। पंजाब और हरियाणा में लस्सी मिल जाएगी। बड़े गिलास वाली लस्सी। राजस्थान और गुजरात में छाछ। बिहार झारखंड में सत्तू का शरबत, उसकी तो बात कही क्या है। पेट भी भरे और ताकत भी दे। इसके बाद पीएम मोदी ने देश के अन्य हिस्सों के प्रमुख शीतल पेय पदार्थों का जिक्र करते हुए उन्हें भारत की एकता का परिचायक बताया। आमों की तमाम किस्मों की दी जानकारी प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में देश में पैदा होने वाली तमाम आम की किस्मों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "साथियों, गर्मी आते ही एक और चर्चा घर में शुरू हो जाती है और वह है आम की। आम, चर्चा का विषय होता ह। भारत में शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जहां गर्मियों में आम की बात न होती हो। हर इलाके में अपना आम और उसका अपना स्वाद होता है। अपनी खुशबू होती है। महाराष्ट्र के कोंकण में हापुस, अलफांसो, गुजरात का केसर, यह तो आमरस की जान है। उत्तर प्रदेश का दशहरी और मेरी काशी का लंगड़ा। वैसे, लंगडा आम की खास बात यह होती है कि वह पकने के बाद भी हरे रंग का ही रहता है। बिहार का जर्दालू जिसकी खुशबू दूर से पहचान में जा जाती है। चौसा और मालदा हर नाम के साथ लोगों की यादें जुड़ी हुई हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण भारत के बंगनपल्ली, तोतापरी, नीलम, मलगोवा, बंगाल का हिमसागर, ओडिशा और आंध्र प्रदेश का सुवर्णरेखा का भी जिक्र किया। नीदरलैंड्स से ताई तांबे की ऐतिहासिक प्लेट्स की बात प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यक्रम हालिया नार्डिक देशों की यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "प्यारे देशवासियों बीते दिनों मुझे यूरोप के नीदरलैंड्स जाने का अवसर मिला। वहाँ मैं कई बैठकों में शामिल हुआ। इसी दौरान ऐसा समय भी आया, जिसने हर भारतीय को गर्व से भर दिया। नीदरलैंड्स में आयोजित एक विशेष समारोह में चोल काल की प्राचीन ताम्र प्लेट्स भारत को वापस सौंपी गईं। उस कार्यक्रम में नीदरैंड्स के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे। इन प्लेट्स को लेकर मुझे देश विदेश से लगातार संदेश मिल रहे हैं। सभी इनको लेकर खुशी जता रहे हैं, गर्व व्यक्त कर रहे हैं। दुनियाभर के तमिल समुदाय के लोग इससे उत्साहित हैं। खगोल विज्ञान में युवाओं की बढ़ रही रुचि प्रधानमंत्री मोदी ने इसके बाद युवाओं की खगोलशास्त्र में बढ़ती रुचि का भी जिक्र किया। उन्होंने जोर दिया कि प्राचीन काल से भी भारत में खगोल शास्त्र को लेकर विशेष दिलचस्पी रही है। अब इस दौर में भी युवा इसी तरफ मुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आपने देखा होगा कि पिछले कुछ समय से देश में एस्ट्रोनॉमी क्ल्ब्स तेजी के साथ लोकप्रिय हो रहे हैं। खगोल मण्डल नाम की एक टीम ने 30 घंटेका एक बहुत इनेवेटिव कोर्स लॉन्च किया है।

वोटर लिस्ट में बड़ा फेरबदल: SIR से लाखों नाम होंगे वेरिफाई, 3 महीने में आएगी फाइनल लिस्ट

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने SIR के तीसरे फेज का काम शुरू कर दिया है। वोटर ल‍िस्‍ट को अपडेट करने के ल‍िए बूथ लेवल पर वोटरों के वेर‍िफ‍िकेशन की प्रक्र‍िया शुरू कर दी गई है। वोटरों की डिटेल्‍स, प्रूफ करने वाले कागज और वोटर कार्ड जांचने का काम महीनेभर चलेगा। उसके हफ्तेभर बाद वोटर ल‍िस्‍ट का ड्राफ्ट जारी क‍िया जाएगा। यह कच्‍चा ल‍िस्‍ट होगा, इसमें फेरबदल हो सकेगा। जो लोग वोटर वेर‍िफ‍िकेशन में गलती से छूट जाएंगे, उन्‍हें ड्राफ्ट ल‍िस्‍ट से पता चल जाएगा और फ‍िर इसमें अपना नाम जुड़वाने के ल‍िए अपील कर सकेंगे। या फ‍िर कागज सही होने के बावजूद ज‍िन्‍हें वेर‍िफाई नहीं क‍िया जाएगा, वे लोग कंपलेन कर सकेंगे, प्रूफ दे सकेंगे। वोटरों को इसके ल‍िए एक महीने का समय दिया गया है। ऐसे ज‍ितने भी अपील होंगे, क्‍लेम होंगे, सबको दुबारा वेरिफाई क‍िया जाएगा और इसे एक महीने में कर ल‍िया जाएगा। यानी क्‍लेम‍ करने के ल‍िए वोटरों को एक महीने का समय और फ‍िर एक महीना कर्मचार‍ियों को द‍िया जाएगा दुबारा व‍ेर‍िफाई करने के ल‍िए। इसके बाद वोटरों की फाइनल ल‍िस्‍ट जारी कर दी जाएगी। यानी हर राज्‍य में तीन महीना और एक हफ्ता लग जाएगा। क‍िस राज्‍य में कब SIR, कब आएगी नई वोटर ल‍िस्‍ट ? 19 राज्‍यों और केंद्र शास‍ित प्रदेशों में 37.74 करोड़ वोटरों की गहन जांच और सत्‍यापन का काम द‍िसंबर में जाकर खत्‍म होगा। इन सभी राज्‍यों में एकसाथ SIR नहीं होगा, ग्रुप में होगा। 30 मई से ओडिशा और उत्‍तर पूर्व के तीन राज्‍यों स‍िक्किम, मण‍िपुर, म‍िजोरम में SIR शुरू हो चुका है और वहां 6 सितंबर को फाइनल ल‍िस्‍ट आ जाएगी। उत्‍तराखंड में 8 जून को SIR शुरू होगा, 15 स‍ितंबर को फाइनल वोटर ल‍िस्‍ट आएगी। आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हर‍ियाणा और चंडीगढ़ में 15 जून से शुरू होगा, फाइनल ल‍िस्‍ट आएगी 22 स‍ितंबर को। 25 जून से पंजाब और तंलंगाना में होगा, ल‍िस्‍ट आएगी 1 अक्‍टूबर को। द‍िल्‍ली, महाराष्‍ट्र, कर्नाटक, झारखंड और मेघालय में 30 जून से SIR होगा, 7 अक्‍टूबर को फाइनल वोटर ल‍िस्‍ट आ जाएगी। नागालैंड में 16 अगस्‍त से, त्रिपुरा में 15 स‍ितंबर से SIR होगा। ल‍िस्‍ट आएगी 22 नवंबर और 23 द‍िसंबर को। SIR क्‍या होता है, क्‍यों जरूरी है? सभी लोगों का नाम वोटर ल‍िस्‍ट में होना चाह‍िए और कोई भी छूटना नहीं चाह‍िए। बशर्ते वह सही हो। बस यहीं शुरू हो जाती है स्‍क्रूटनी की ड्यूटी। पात्रता है क‍ि आप वोटर हों। क्‍या सभी लोग वोटर हैं? नहीं। भारत के नागर‍िक हों और कम से कम 18 साल के हों। 18 साल के होते ही आप खुद अप्‍लाई कर वोटर कार्ड बनवा सकते हैं। बस नागर‍िकता प्रूफ करने वाले मान्‍य कागज जमा करने होते हैं। फि‍र अलग से इतने बड़े स्‍तर पर अभियान क्‍यों? आप जहां के वोटर होते हैं उसी लोकेशन पर हमेशा नहीं रहते। आप जब दूसरी जगह श‍िफ्ट हो जाते हैं तो वहां के वोटर बन जाते हैं, वहां के वोटर ल‍िस्‍ट में आपका नाम जुड़ जाता है। पर कानून और न‍ियम होने के बावजूद अक्‍सर होता है क‍ि पुराने ल‍िस्‍ट में भी आपका नाम पड़ा रह जाए। बच्‍चे बड़े होते हैं, वोटर बनते हैं, और वोटर ल‍िस्‍ट में नए नाम जुड़ते चले जाते हैं। पर बुजुर्ग वोटर जब गुजर जाते हैं, या जो लोग असमय चले जाते हैं, उनका नाम भी वोटर ल‍िस्‍ट में पड़ा रह जाता है। ये तो हुए वाज‍िब और व्‍यावहार‍िक कारण। कई लोग जानबूझकर अलग-अलग जगहों के लिए वोटर कार्ड बनवा लेते हैं। क‍िसी पार्टी, नेता को वोट देकर ज‍िताने के चक्‍कर में या आइडेंटिटी कार्ड के ल‍िए। अलग-अलग आइडेंटिटी से सरकारी योजनाओं का ज्‍यादा फायदा लेने के लिए भी ऐसा क‍िया जाता है। एक और बड़ा मामला है, नागर‍िक नहीं हो और वोटर कार्ड बनवा ल‍िया हो। अभी सबसे बड़ा व‍िवाद का प्‍वाइंट यही है। एक से ज्‍यादा वोटर कार्ड और ब‍िना नागर‍िकता के वोटर कार्ड, दोनों कानूनन जुर्म हैं और ये डुप्लिकेट कार्ड की कैटेगरी मे आते हैं। ऐसा भी होता है क‍ि आपने वोटर कार्ड तो बनवा ल‍िया, पर क‍िसी कारण से उस क्षेत्र के वोटर ल‍िस्‍ट में आपका नाम नहीं जुड़ा हो। इस तरह चार कैटेगरी- ऐबसेंट, श‍िफ्टेड, डेड और डुप्लिकेट के डेटा को अपडेट करना जरूरी हो जाता है और इसी एक्‍सरसाइज को SIR कहते हैं, स्‍पेशल इंटेंसिव र‍िवीजन सुप्रीम कोर्ट ने क्‍यों कहा क‍ि SIR सही है? संव‍िधान और चुनाव से जुड़े कानून चुनाव आयोग को SIR कराने का अध‍िकार देते हैं। क‍िसी क्षेत्र में वोटरोंं का बदलना बहुत सामान्‍य है और यह चुनाव आयोग की ड्यूटी है क‍ि सही वोटरों की पहचान सुन‍िश्‍च‍ित करे। इसके ल‍िए SIR की जो प्रक्र‍िया आयोग ने अपनाई, उस पर भी सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगा दी है। चुनाव आयोग ने SIR को जरूरी बताते हुए कहा था क‍ि पिछले 20 वर्षों में तेजी से हुए शहरीकरण और पलायन के कारण वोटर ल‍िस्‍ट में बड़े पैमाने पर नाम जोड़े गए, हटाए गए। एक वोटर का नाम एक से ज्‍यादा ल‍िस्‍ट में आने, दो वोटर कार्ड होने जैसी गड़बड़‍ियां बढ़ गई थी। हालांक‍ि अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है क‍ि वोटर ल‍िस्‍ट से नाम कटने या नाम नहीं जुड़ने का यह मतलब नहीं क‍ि वह नागर‍िक नहीं है। चुनाव आयोग क‍िसी को नागर‍िक होने या न होने का सर्टिफ‍िकेट नहीं देता। SIR का इंपैक्‍ट स‍िर्फ वोटर ल‍िस्‍ट तक ही रहेगा। ज‍िनका नाम ल‍िस्‍ट से बाहर हुआ है, उसे आयोग अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दे और सही साबित होने पर उसे दोबारा शाम‍िल करना सुन‍िश्चित करे। बिहार में हुए SIR के ख‍िलाफ दायर केस में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। इससे मौजूदा SIR की प्रक्रि‍या और चुनाव आयोग को बल म‍िला है। जहां SIR, वहां कब हैं चुनाव? 2027 में 7 राज्‍यों में व‍िधानसभा चुनाव होंगे। पंजाब, उत्‍तराखंड, गोवा, मण‍िपुर में मार्च से पहले चुनाव होंगे, मई से पहले उत्‍तर प्रदेश में और द‍िसंबर से पहले गुजरात और ह‍िमाचल प्रदेश में। उत्‍तर प्रदेश में SIR हो चुका है, फाइनल वोटर ल‍िस्‍ट अप्रैल में आ चुकी है। पंजाब, उत्‍तराखंड, मण‍िपुर में इसी फेज में SIR है। ह‍िमाचल प्रदेश में SIR बाकी है और अभी वाले शेड्यूल में नहीं है। वहां फरवरी 2027 में जनगणना पूरी … Read more

झपटमारी पर फास्ट ट्रैक एक्शन: रंगेहाथ पकड़ा आरोपी, 14 दिन में चार्जशीट और त्वरित सजा

नई दिल्ली  शाहबाद डेयरी में 1 मई की रात पीड़ित ने पर्स छीनते हुए झपटमार को रंगेहाथ पकड़ा। पुलिस ने तेजी से जांच कर 6 मई को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। कोर्ट ने तारीख पर तारीख वाले फिल्मी जुमले को दरकिनार करते हुए रोजाना सुनवाई की और 16 मई को फैसला सुना दिया। पुलिस कमिश्नर ने दिए निर्देश महज दो हफ्ते में आरोपी दोषी करार दिया गया, जो दिल्ली पुलिस के लिए एक नजीर बन गई। पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा ने सभी जिलों को ऐसे ही स्पीडी इन्वेस्टिगेशन, स्पीडी ट्रायल और स्पीडी जस्टिस पर काम करने के निर्देश दे दिए, जिस पर अमल होने लगा है। दो हफ्ते में चार्जशीट दाखिल करने को कहा गया पुलिस अफसरों के मुताबिक, रंगेहाथ पकड़े गए आरोपियों के अलावा जिन केसों में संभव हो सके उनमें एक से लेकर दो हफ्ते के भीतर चार्जशीट दाखिल करने को कहा गया है। इसके बाद प्रॉसिक्यूशन (सरकारी वकील) के साथ तालमेल कर फास्ट ट्रैक सुनवाई सुनिश्चित करने और जल्द से जल्द दोषी साबित करने पर जोर दिया गया है। ज्यादातर केसों में आरोपी को मिल जाती है जमानत दरअसल सात साल से कम सजा वाले अधिकतर केसों में आरोपी को जमानत मिल जाती है। ऐसे में जांच अधिकारी के सामने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने की समयसीमा का बंधन नहीं रहता है। अफसर कहते हैं कि इसके बाद कोर्ट में भी ऐसे केसों की सुनवाई कई साल तक चलती है। इससे शिकायतकर्ता या गवाह के मुकरने या बयानों में विरोधाभास होने से आरोपी को सजा नहीं हो पाती है। जल्द सजा करवाने पर दिया जा रहा जोर तेजी से जांच, तुरंत चार्जशीट दाखिल करने और सुनवाई होने से मुकरने या बयानों में विरोधाभास की गुंजाइश कम रहती है, जिससे सजा की दर में भी इजाफा होगा। इसलिए झपटमारी, चोरी या अन्य छोटे अपराधों में आरोपी के मौके या तुरंत बाद रंगेहाथ पकड़े जाने पर दो हफ्तों में चार्जशीट करने और जल्द सजा करवाने पर जोर है। सभी जिलों में शुरू हुआ एक्शन पुलिस अफसरों ने बताया कि सभी जिलों ने ऐसे मामलों में अमल करना शुरू कर दिया है। सिर्फ छोटे अपराध ही नहीं बल्कि गंभीर अपराधों में भी अगर संभव हो सकता है तो उनमें भी जल्द जांच कर आरोप पत्र दाखिल करने और सजा करवाने के निर्देश दिए गए हैं। क्या है 'ताबड़तोड़ न्याय' का मकसद अगर किसी केस में आरोपी को कोर्ट बरी कर देता है तो जिलों के डीसीपी से खुद फैसले की समीक्षा करने को कहा गया है, ताकि अगर कोई कमी रह गई हो तो उसे आगे के केसों में ना दोहराई जाए। 'ताबड़तोड़ न्याय' का मकसद आरोपी को कोर्ट से सजा दिलवाना भी है। इन केसों में हुआ ताबड़तोड़ इंसाफ 14 मई: टैक्सी ड्राइवर का पर्स छीनने वाले को सिपाही ने पीछा कर रंगेहाथ पकड़ा था। आईपी एस्टेट थाना पुलिस ने चार दिन में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। स्पीडी ट्रायल के तहत 26 मई को आरोपी को दोषी करार दिया। 16 मईः पालम गांव में 80 हजार कैश-जूलरी की चोरी हुई। पुलिस ने चार घंटे में आरोपी को अरेस्ट किया। 10 दिन की सुनवाई के बाद 26 मई को अदालत ने पेश साक्ष्यों और गवाह के बयान पर आरोपी को दोषी ठहरा दिया। 3 फरवरी: आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन पर 5200 रुपये निकालकर आरोपी फरार हो गया। लूट का केस दर्ज कर पहाड़गंज पुलिस ने आरोपी को पकड़ा। 23 मार्च को चार्जशीट पेश की और 23 मई को दोषी करार दिया गया।