samacharsecretary.com

बंगाल में हड़कंप: कल्याण बनर्जी घायल, चंडीतला थाने के सामने बवाल

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल के हुगली स्थित चंडीतला पुलिस स्टेशन के सामने तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी पर हमले की जानकारी सामने आई है. टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया और उनके सिर पर पत्थर या गेंद जैसी चीज (वस्तु) मारकर चोट पहुंचाई है. जबकि बीजेपी का कहना है कि वह घायल नहीं  हुए हैं, सिर्फ ड्रामा कर रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, कल्याण बनर्जी अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के संबंध और गिरफ्तार टीएमसी नेता, कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग को लेकर चंडीतला थाना ज्ञापन देने पहुंचे थे. इसी दौरान ज्ञापन सौंपने से पहले ही तृणमूल और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नारेबाजी शुरू हो गई. बीजेपी-टीएमसी के बीच नारेबाजी बताया जा रहा है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने तृणमूल समर्थकों के खिलाफ "चोर-चोर" के नारे लगाए, जिसके बाद माहौल और गर्म हो गया. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात किए गए. बताया जा रहा है कि इसी दौरान किसी ने उन पर गेंद या पत्थर जैसी चीज से हमला कर दिया, जिससे उनके सिर में चोट लग गई. कल्याण बनर्जी सिर पर भीगा हुआ रूमाल रखे कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि चंडीतला थाने में डिपुटेशन (ज्ञापन) देने जाते वक्त उन पर हमला किया गया. उन्होंने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने जा रहे लोगों पर हमला किया गया. ध्यान भटकाना चाहते हैं कल्याण: बीजेपी वहीं, बीजेपी ने कल्याण के खुद के चोट लगने के दावों को झूठा करार दिया है. बीजेपी का कहना है कि वह (कल्याण बनर्जी) ड्रामा कर रहे हैं. उन्हें चोट

हीटवेव के बीच पीएम मोदी ने दिया स्वास्थ्य मंत्र, बोले- पानी पीते रहें और आम पन्ना-लस्सी का लें आनंद

नई दिल्ली  भारत के विभिन्न हिस्सों में तापमान में भारी बढ़ोतरी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आग्रह किया है कि वे यथासंभव अधिक से अधिक सावधानियां बरतें। प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को ' मन की बात ' कार्यक्रम के 134वें एपिसोड में कहा, 'इस समय देश के ज्यादातर हिस्सों में बहुत गर्मी पड़ रही है। तेज धूप और गर्म हवाएं, ऐसे मौसम में अपना ध्यान रखना बहुत जरूरी है। पानी पीते रहिए। धूप में अगर निकलना ही पड़े तो थोड़ा संभल कर निकलें। इस दिशा में सरकार के अलग-अलग विभागों ने जो गाइडलाइन जारी की हैं, वो भी भूलिएगा नहीं।' अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि हमारे यहां गर्मी से लड़ने का तरीका कई बार रसोई में भी मिलता है। आपने भी देखा होगा कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे घर की रसोई का स्वाद बदल जाता है, रसोई का प्रकार बदल जाता है। कहीं मटके का पानी निकल आता है, कहीं दही जमने लगता है, तो कहीं कच्चे आम उबलने लगते हैं और फिर देसी पेय का दौर शुरू होता है। उन्होंने कहा, 'भारत के पारंपरिक ग्रीष्मकालीन पेय देश के विभिन्न क्षेत्रों की रीति-रिवाजों और संस्कृतियों में गहराई से रचे-बसे हैं। हर पेय एक अनूठी कहानी कहता है, जो मिलकर भारत की जीवंत विविधता को प्रदर्शित करते हैं और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को सुदृढ़ करते हैं।' प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ राज्यों के उदाहरण देते हुए कहा, 'देसी पेय से आप भी परिचित हैं। अगर आप उत्तर भारत में जाएंगे तो काफी जगह आपको मिलेगा आम पन्ना, कच्चे आम का स्वाद और गर्मी से राहत भी। पंजाब-हरियाणा जाइए तो बड़े गिलास वाली लस्सी मिल जाएगी। राजस्थान और गुजरात में छाछ, जैसे हर खाने की साथी बन जाती है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सत्तू के शरबत की बात है, जिससे पेट भी भरता है और ताकत भी मिलती है।' इस दौरान पीएम मोदी ने कोंकण और गोवा के कोकम शरबत, दक्षिण भारत के पानकम, सम्बारम और ओडिशा के बेल पना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ पेय नहीं, बल्कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की परंपरा का हिस्सा है। देशवासियों के नाम अपने संदेश में पीएम मोदी ने कहा कि आप भी गर्मी के दौरान देसी पेजयलों का खूब आनंद लीजिए।

75,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से आया उल्कापिंड, न्यू इंग्लैंड में गूंजी जोरदार सोनिक बूम

 नई दिल्ली  शनिवार दोपहर पूर्वोत्तर अमेरिका के आसमान में एक विशाल उल्कापिंड के फटने से जोरदार धमाका हुआ। नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस विस्फोट से पैदा हुई सोनिक बूम की ताकत करीब 300 टन टीएनटी के बराबर थी। इस जोरदार आवाज और कंपन ने कई राज्यों के निवासियों को चौंका दिया। यह घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर 2:06 बजे हुई। चमकीला उल्कापिंड उत्तर-पूर्वी मैसाचुसेट्स और दक्षिण-पूर्वी न्यू हैम्पशायर के ऊपर आसमान में ही टूटकर बिखर गया। इसके फटने से इतनी तेज आवाज हुई कि पूरे न्यू इंग्लैंड क्षेत्र में गूंज सुनाई दी और कई इलाकों में इमारतें तक हिल गईं। नासा की डिप्टी न्यूज चीफ जेनिफर डोरेन ने कहा कि यह उल्कापिंड फिलहाल सक्रिय किसी भी उल्का बौछार का हिस्सा नहीं था। यह एक प्राकृतिक खगोलीय पिंड था, न कि अंतरिक्ष का कचरा या किसी सैटेलाइट के वापस धरती पर गिरने का मामला। इसके टूटने से करीब 300 टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा निकली, जिससे यह भयंकर आवाज पैदा हुई। 75,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार नासा के आंकड़ों के मुताबिक, जब इस उल्कापिंड ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया, तब इसकी रफ्तार करीब 1,20,700 किलोमीटर प्रति घंटा थी। जमीन से लगभग 64 किलोमीटर ऊपर आते ही यह भीषण दबाव के कारण टुकड़ों में बंट गया। अमेरिकन मीटियोर सोसाइटी ने बताया कि यह खगोलीय चट्टान लगभग तीन फीट चौड़ी थी। इसने बोस्टन के उत्तर में, मैसाचुसेट्स और न्यू हैम्पशायर की सीमा के पास वायुमंडल में प्रवेश किया। इस घटना की गवाही देने वाले लोगों की रिपोर्ट दक्षिण में डेलावेयर से लेकर उत्तर में मॉन्ट्रियल तक से मिली हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने दिन के उजाले में एक बेहद चमकदार आग का गोला देखने, तेज विस्फोट की आवाज सुनने और जमीन हिलने का दावा किया। आम उल्कापिंडों से काफी बड़ा था आकार अमेरिकन मीटियोर सोसाइटी के प्रोग्राम मॉनिटर रॉबर्ट लंसफोर्ड ने कहा कि यह घटना आम तौर पर दिखने वाले उल्कापिंडों से बहुत बड़ी थी। उन्होंने कहा कि यह निश्चित रूप से एक सामान्य फायरबॉल से बड़ा था। लंसफोर्ड के अनुसार, इस बात की संभावना बहुत कम है कि इसका कोई भी हिस्सा जमीन तक पहुंचा हो। उन्होंने कहा कि यह जानने के लिए कि क्या इसका कोई टुकड़ा जमीन पर गिरा, हमें इसके रास्ते और गति की और अधिक जानकारी चाहिए होगी। लेकिन अगर यह पूरी तरह हवा में नहीं जला होगा, तो इसका मलबा समुद्र में गिरा होगा। वैसे, अधिकांश उल्कापिंड जमीन पर पहुंचने से पहले ही जलकर राख हो जाते हैं। सोनिक बूम था वजह विस्फोट की भयानक आवाज के बाद घबराए स्थानीय लोगों ने इमारतों के हिलने की शिकायत पुलिस और यूएस जियोलॉजिकल सर्वे से की। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए कई वीडियो में लगातार दो तेज धमाकों की आवाजें सुनी जा सकती हैं, हालांकि जमीन पर नुकसान या आग लगने का कोई निशान नहीं मिला। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने पुष्टि की कि उन्हें क्षेत्र भर के निवासियों से कई शिकायतें मिली हैं, क्या आपने इसे महसूस किया? हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि कोई भूकंपीय गतिविधि का पता नहीं चला, जिससे भूकंप को इस कंपन का कारण होने की संभावना से इनकार किया जा सकता है। नासा ने भी अंत में दोहराया कि यह महज एक प्राकृतिक अंतरिक्षीय घटना थी।

सिद्धारमैया युग का अंत, अब डीके शिवकुमार संभालेंगे कर्नाटक की कमान

 नई दिल्ली  सालों की राजनीतिक जोड़-तोड़ और सिद्दरमैया के साथ जबरदस्त सत्ता की खींचतान के बाद डीके शिवकुमार आखिरकार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने का अपना बरसों पुराना सपना पूरा करने जा रहे हैं। वह 3 जून को दोपहर 3.30 बजे लोक भवन के ग्लास हाउस में राज्य के 25वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे। पार्टी सदस्यों ने बताया कि यह तारीख शिवकुमार के निजी ज्योतिषी बेलूर द्वारकानाथ से सलाह-मशविरा करने के बाद तय की गई। शाम 4 बजे का निकला शुभ मुहूर्त ज्योतिष में गहरा विश्वास रखने वाले शिवकुमार को सलाह दी गई थी कि वह उस दिन शाम करीब 4.05 बजे शुरू होने वाले शुभ मुहूर्त में शपथ लें। इस समय को इसलिए भी चुना गया है ताकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और एआईसीसी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी इस मौके पर मौजूद रह सकें। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जब नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हुई तो बातचीत के आखिरी दौर में प्रियंका ने अहम भूमिका निभाई। इस मौके की राजनीतिक अहमियत के बावजूद कांग्रेस ने कोई भव्य समारोह न करने का फैसला किया है। सादा समारोह रखने का क्यों लिया गया फैसला? राज्य कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीसी चंद्रशेखर ने कहा, “हमने शुरू में इस कार्यक्रम को विधान सौध की भव्य सीढ़ियों पर आयोजित करने की योजना बनाई थी, जिसमें राज्य के अलग-अलग हिस्सों से 15,000 से 20,000 लोग शामिल होते लेकिन महंगाई और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण लोगों को हो रही परेशानियों को देखते हुए हमने ऐसा न करने का फैसला किया।” उन्होंने आगे कहा, “शिवकुमार ने भी इस बात पर जोर दिया कि यह एक सादा कार्यक्रम होना चाहिए, जो जनसेवा के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता को दर्शाता हो। चूंकि ये काम-काज वाला दिन है, इसलिए हम जनता को होने वाली किसी भी असुविधा से भी बचना चाहते थे।” डीके शिवकुमार को चुना गया विधायक दल का नेता शनिवार को विधान सौध में हुई एक बैठक में शिवकुमार को सर्वसम्मति से कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया। अब सबका ध्यान कैबिनेट गठन पर है। सीएलपी नेता के तौर पर शिवकुमार का चुनाव 17 सालों में नेतृत्व में आया पहला बदलाव है। इस पूरी अवधि में यह पद सिद्दरमैया के पास था। सीएलपी की बैठक में सिद्दरमैया ने खुद शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि पूर्व गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद विधायकों ने सर्वसम्मति से इसे मंजूरी दे दी। बाद में कांग्रेस के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने इसकी औपचारिक घोषणा की। बैठक के तुरंत बाद शिवकुमार ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात की और औपचारिक रूप से सरकार बनाने का दावा पेश किया। कैबिनेट गठन पर सभी का ध्यान अब सभी का ध्यान कैबिनेट गठन पर है। अगर मंगलवार से पहले बातचीत पूरी हो जाती है तो शिवकुमार के साथ कई मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना है। चंद्रशेखर ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे कार्यक्रम स्थल पर न जाएं और उन्हें भरोसा दिलाया कि शिवकुमार कांग्रेस कार्यकर्ताओं और जनता से मिलने के लिए जिलों का दौरा करेंगे। सिद्दरमैया के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद कांग्रेस पार्टी के अलग-अलग गुटों को साथ लेते हुए जाति, समुदाय और क्षेत्रीय हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि 'अहिंदा' सामाजिक गठबंधन फॉर्मूले के तहत कई उपमुख्यमंत्री बनाने की योजना पर फिर से विचार किया जा रहा है, क्योंकि इस पद के लिए दावेदारों की संख्या बहुत ज्यादा है। नई कैबिनेट में अहम मंत्रालयों को लेकर भी चर्चा चल रही है, जिसमें सिद्दरमैया के बेटे यतींद्र को कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि निवर्तमान मुख्यमंत्री अपने बेटे को कैबिनेट में शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं।

‘भारत एक शक्तिशाली देश है’ अमेरिकी रक्षा मंत्री ने की भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की सराहना

नई दिल्ली  अमेरिका ने भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति का लोहा मानते हुए उसे शक्तिशाली देश बताया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा, भारत अपने भारी रक्षा उद्योग और सैन्य तंत्र का तेजी से विकास कर अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। सेना का आधुनिकीकरण कर उसे लंबी और सफल सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार कर रहा है। हेगसेथ ने यह बात रक्षा और कूटनीतिक मामलों के महत्वपूर्ण वार्षिक कार्यक्रम शांग्रीला डायलाग में कही है। इस वर्ष कार्यक्रम में विश्व के 44 प्रमुख देशों के नेता, सैन्य विशेषज्ञ, कूटनीतिज्ञ और अन्य प्रमुख हस्तियां शिरकत कर रही हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा, भारत शक्तिशाली देश है और वह अपनी सेना का आधुनिकीकरण कर रहा है। ऐसा कर वह हिंद महासागर क्षेत्र में शक्ति संतुलन कायम कर रहा है। भारत रक्षा उत्पादन में अपनी क्षमता बढ़ा रहा है, हम भी उसके साथ मिलकर रक्षा उत्पादन करने के लिए संकल्पित हैं। हेगसेथ ने क्या कहा? हेगसेथ ने बताया कि अमेरिका अपने रक्षा उत्पादन का फलक बढ़ा रहा है और उसे विश्व के कई देशों तक फैला रहा है। वहां पर वह उन देशों के साथ मिलकर रक्षा उत्पादन करेगा। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा- उनके जापान, दक्षिण कोरिया, आस्ट्रेलिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों से मजबूत रक्षा संबंध हैं। कार्यक्रम में हेगसेथ ने कहा, एशिया-प्रशांत क्षेत्र विश्व का सबसे ज्यादा महत्व और उथल-पुथल वाला इलाका है। इसलिए अमेरिका का क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान है। लेकिन क्षेत्रीय देश अपने रक्षा खर्च को लेकर गंभीर नहीं हैं। ऐसे देशों को अपना रक्षा खर्च बढ़ाकर समानुपातिक होना चाहिए। कहा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में चीन के साथ अमेरिका के संबंध बेहतर हुए हैं। लेकिन अपनी और अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के साथ हम कोई समझौता नहीं करेंगे। हेगसेथ ने स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया और यूरोप में चल रहे युद्ध और तनाव से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी गतिविधियां कम हुई हैं। लेकिन यह स्थिति अस्थायी है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र अमेरिका की दीर्घ अवधि की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है।

वैश्विक मंच पर भारत का दबदबा, अमेरिकी रक्षा मंत्री ने समुद्री शक्ति की जमकर तारीफ की

नई दिल्ली अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सिंगापुर में कहा कि भारत एक ताकतवर देश है और अपनी सेना को आधुनिक बना रहा है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति कराने में अहम भूमिका निभाई. हालांकि भारत इस दावे को पहले से नकारता आया है।  सिंगापुर में हर साल एक बड़ी सुरक्षा बैठक होती है जिसे शांगरी-ला संवाद कहते हैं. इसमें दुनियाभर के रक्षा मंत्री और सेना के बड़े अधिकारी आते हैं. इस साल 44 देश इसमें शामिल हुए. शनिवार को अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने यहां भाषण दिया और कई बड़ी बातें कहीं।  डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाक के बीच शांति कराई, हेगसेथ का दावा हेगसेथ ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति कराने में मदद की. बात यह है कि पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकी हमला हुआ था जिसमें 26 लोग मारे गए थे. इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक सैन्य टकराव हुआ. फिर दोनों देशों के बीच सीजफायर यानी युद्ध विराम हुआ।  ट्रंप और अमेरिका बार-बार यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने यह शांति कराई. लेकिन भारत शुरू से यह कहता आया है कि यह समझौता सीधे भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ. किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं थी. भारत ने किसी भी बाहरी मध्यस्थता को साफ नकारा है।  हेगसेथ ने यह भी कहा कि दोनों देश एक दूसरे को खतरे की नजर से देखते रहेंगे और दोनों अपनी सुरक्षा के लिए मिसाइल जैसी ताकत बढ़ाना चाहेंगे. लेकिन अमेरिका इनमें से किसी को अपना दुश्मन नहीं मानता।  पाकिस्तान की भी तारीफ, ईरान से शांति वार्ता में निभा रहा भूमिका हेगसेथ ने पाकिस्तान की भी खूब तारीफ की. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शांति वार्ता में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. यह एक अनोखा और अच्छा विकास है।  दरअसल पाकिस्तान इस वक्त अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ी शांति वार्ता में बीच का रास्ता बना रहा है. इस्लामाबाद दोनों देशों का भरोसेमंद दोस्त माना जाता है. पिछले महीने इस्लामाबाद में दोनों पक्षों की बैठक हुई लेकिन कोई डील नहीं हो पाई. पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने कहा है कि अगली बैठक जल्द ही इस्लामाबाद में होगी।  भारत की तारीफ, अमेरिका के साथ मिलकर हथियार बनाने की बात हेगसेथ ने भारत को लेकर कई अच्छी बातें कहीं. उन्होंने कहा कि भारत एक ताकतवर देश है और अपनी सेना को लगातार आधुनिक बना रहा है. भारत खासतौर पर हिंद महासागर में ताकत का संतुलन बनाए रखने में मदद कर रहा है।  उन्होंने यह भी बताया कि भारत बड़ी और भारी सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी फैक्ट्री और सप्लाई की व्यवस्था तैयार कर रहा है. अमेरिका ने भारत के साथ मिलकर हथियार और सैन्य उपकरण बनाने का वादा किया है. इसे को-प्रोडक्शन कहते हैं यानी दोनों देश साथ मिलकर बनाएंगे।  अमेरिका की बड़ी इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी क्या है? हेगसेथ ने यह भी बताया कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र यानी इंडो-पैसिफिक दुनिया का सबसे अहम इलाका है. अमेरिका इस इलाके में शांति और संतुलन बनाए रखना चाहता है. वह नहीं चाहता कि कोई एक देश पूरे इलाके पर अपना दबदबा बना ले. उन्होंने सीधे चीन का नाम लेते हुए कहा कि कोई भी देश, चीन सहित, इस इलाके में अपना वर्चस्व नहीं थोप सकता।  हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका चीन से कोई टकराव नहीं चाहता और ट्रंप के समय से अमेरिका-चीन के रिश्ते पहले से बेहतर हुए हैं।  अमीर देश अपनी सुरक्षा का खर्च खुद उठाएं हेगसेथ ने एक और बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि जो देश पैसे वाले हैं वे अपनी सुरक्षा का खर्च खुद उठाएं. अमेरिका अब उनके लिए पैसे नहीं लगाएगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका को सहयोगी चाहिए, न कि ऐसे देश जो सिर्फ उस पर निर्भर हों. जापान, साउथ कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, फिलीपींस और भारत जैसे देशों की उन्होंने तारीफ की कि वे अपनी रक्षा में खुद निवेश कर रहे हैं। 

देश में नहीं थम रहा बाल विवाह, पश्चिम बंगाल टॉप पर; केरल और दिल्ली की सराहना

नई दिल्ली "पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब…" यह कहावत हम सब बचपन से सुनते आ रहे हैं, लेकिन आज भी हमारे देश की लाखों बेटियों के हाथों से किताबें छीनकर, उनके नाजुक कंधों पर घर-गृहस्थी का भारी बोझ लाद दिया जाता है। सपनों को पंख लगाने की उम्र में उन्हें शादी के मंडप में धकेल दिया जाता है। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) की ताजा सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) स्टैटिस्टिकल रिपोर्ट 2024 के विधिक और सांख्यिकीय आंकड़े बताते हैं कि तमाम कड़े कानूनों और जागरूकता अभियानों के बावजूद समाज से बाल विवाह (Child Marriage) का यह कूट डंक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हर चौथी लड़की की शादी 21 से पहले देश में महिलाओं के विवाह की मौजूदा स्थिति को लेकर जारी हुए आंकड़े समाज की सोच पर कूट सवाल खड़े करते हैं। साल 2024 में भारत में जितनी भी महिलाओं की शादियां हुईं, उनका सांख्यिकीय गणित कुछ इस प्रकार है:     18 साल से कम (नाबालिग): 2.1% लड़कियां ऐसी थीं जिनकी विधिक उम्र पूरी होने से पहले ही शादी कर दी गई।     18 से 20 साल के बीच: 24.5% लड़कियों का विवाह इस उम्र में हुआ।     21 वर्ष या उससे अधिक: राहत की बात है कि 73.5% महिलाओं की शादी 21 साल के बाद हुई।     चौंकाने वाला सच: देश में आज भी हर चार में से एक महिला (करीब 26.6%) की शादी विधिक रूप से परिपक्व होने यानी 21 साल की उम्र पूरी करने से पहले ही कर दी जा रही है। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि अब भारत में महिलाओं की शादी की औसत उम्र बढ़कर 23.1 वर्ष हो गई है। बाल विवाह में पश्चिम बंगाल टॉप पर अगर राज्यों के स्तर पर इस सामाजिक बुराई का कूट विश्लेषण करें, तो पूर्वी और मध्य भारत के हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं: बाल विवाह में पश्चिम बंगाल टॉप पर अगर राज्यों के स्तर पर इस सामाजिक बुराई का कूट विश्लेषण करें, तो पूर्वी और मध्य भारत के हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं: राज्य (States) बाल विवाह का प्रतिशत (18 साल से कम)** विधिक एवं कूट स्थिति (Current Status)** पश्चिम बंगाल 6.3% पूरे देश में शीर्ष (Top) स्थान पर, स्थिति सबसे गंभीर। झारखंड 4.9% देश में दूसरे स्थान पर, ग्रामीण इलाकों में दर अधिक। असम 2.8% पूर्वोत्तर राज्यों में सामाजिक सुधारों की गति धीमी। बिहार / ओडिशा 2.6% दोनों राज्यों में स्थिति समान रूप से चिंताजनक बनी हुई है। राजस्थान 2.4% ऐतिहासिक रूप से बदनाम यह राज्य अब राष्ट्रीय औसत के करीब आ रहा है। राष्ट्रीय औसत (2.1%) के बराबर और नीचे वाले राज्य गुजरात और मध्य प्रदेश: इन दोनों राज्यों में बाल विवाह का ग्राफ ठीक राष्ट्रीय औसत यानी 2.1% पर टिका है। दक्षिण और बड़े राज्य: तेलंगाना (1.8%), आंध्र प्रदेश (1.7%) और उत्तर प्रदेश (1.6%) की स्थिति राष्ट्रीय औसत से थोड़ी बेहतर है। पहाड़ी और औद्योगिक राज्य: उत्तराखंड में यह आंकड़ा 1.5%, जम्मू और कश्मीर में 1.2% और महाराष्ट्र में 1.0% दर्ज किया गया है।  दिल्ली और केरल ने पेश की मिसाल   इस स्याह तस्वीर के बीच देश के कुछ राज्यों ने कूट बदलाव की एक बेहद खूबसूरत और उम्मीद जगाने वाली मिसाल पेश की है: केरल: साक्षरता में अव्वल रहने वाले इस राज्य में बाल विवाह लगभग ना के बराबर यानी महज 0.04% रह गया है। दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली ने इस मोर्चे पर इतिहास रच दिया है। पूरे सर्वे के दौरान दिल्ली से बाल विवाह का एक भी मामला (0%) रिपोर्ट नहीं हुआ है। बेहतर प्रदर्शन: हिमाचल प्रदेश (0.4%), हरियाणा (0.7%), कर्नाटक व तमिलनाडु (0.8%) और पंजाब (0.9%) ने भी इस कुप्रथा को 1% से नीचे समेटने में विधिक सफलता पाई है।     ग्रामीण बनाम शहरी भारत   आमतौर पर माना जाता है कि शहरों में शिक्षा और जागरूकता के कारण बाल विवाह नहीं होते। राष्ट्रीय औसत भी यही कहता है कि ग्रामीण भारत में बाल विवाह 2.4% है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह महज 1.1% है। लेकिन पश्चिम बंगाल से आए आंकड़े समाजशास्त्रियों को चौंका रहे हैं। बंगाल के ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह की दर 5.9% है, जबकि वहां के शहरी इलाकों में यह ग्राफ बढ़कर 7.6% तक पहुंच गया है, जो कि देश के शहरी औसत से सात गुना ज्यादा है। इसके विपरीत, झारखंड के ग्रामीण इलाकों में यह दर 5.8% है।  स्वास्थ्य और आर्थिक स्वतंत्रता पर असर स्वास्थ्य और विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि बेटियों के जीवन के साथ एक गंभीर खिलवाड़ है। शिक्षा पर ब्रेक: कम उम्र में शादी होने की वजह से लड़कियों को बीच में ही स्कूल-कॉलेज छोड़ना पड़ता है। स्वास्थ्य को खतरा: विधिक रूप से शारीरिक परिपक्वता आने से पहले ही वे गर्भवती हो जाती हैं, जिससे मातृ मृत्यु दर (MMR) और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य संबंधी कूट खतरे बढ़ जाते हैं। आर्थिक बेड़ियां: शिक्षा अधूरी रहने के कारण ये लड़कियां कभी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं बन पातीं और जीवनभर घरेलू निर्भरता के चक्रव्यूह में फंसी रह जाती हैं।  

सावधान! नए LPG नियम लागू होते ही कैंसिल हो सकता है आपका सिलेंडर कनेक्शन

 नई दिल्‍ली एशिया संकट को देखते हुए कस्‍टमर्स को कोई दिक्‍कत नहीं आए, इसलिए कुछ खास बदलाव किए गए हैं. इसी में से एक बदलाव 1 जून से लागू होने जा रहा है, जिसके तहत आपका सिलेंडर कनेक्‍शन कैंसिल हो सकता है।  दरअसल, देश में PNG का कनेक्‍शन बढ़ रहा है और सरकार द्वारा निर्देश देने के बावजूद LPG सिलेंडर का उपयोग कम नहीं हो रहा है. पीएनजी कनेक्‍शन मार्च तक 6.5 लाख नए कनेक्शन लगे हैं, लेकिन वास्‍तवकि आपूर्ति 18 फीसदी कम थी।  इससे पता चलता है कि कई परिवारों ने वास्‍तव में स्विच किए बिना ही कनेक्‍शन ले लिया है, जबकि सरकार ने कहा है कि अगर पीएनजी और एलपीजी दोनों कनेक्‍शन हैं, तो एलपीजी को सरेंडर करना होगा. हालांकि, इसके बावजूद ही लोग पीएनजी का कनेक्‍शन ले रहे हैं, लेकिन एलपीजी को सरेंडर नहीं कर रहे हैं।  पिछले एक दशक में एलपीजी यूजर्स की संख्या लगभग दोगुनी होकर 33.5 करोड़ हो गई है, जबकि पीएनजी यूजर्स की संख्या केवल 1.64 करोड़ ही बनी हुई है. इस स्थिति में सरकार जल्‍द से जल्‍द बदलाव चाहती है और जून शुरू होने से पहले ही कड़े नियम लागू होने जा रहे हैं।  एक फैमिली, एक कनेक्‍शन नियम संशोधित नियम के तहत जिन परिवारों के पास पहले से ही PNG कनेक्‍शन हैं, उन्‍हें अपने एलपीजी कनेक्‍शन सरेंडर करने पड़ सकते हैं. तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियों (OMCs) ने घरेलू सिलेंडरों के दुरुप्रयोग, जमाखोरी और कलाबाजारी को रोकने के लिए पीएनजी और एलपीजी दोनों का एक साथ उपयोग करने वाले घरों की पहचान करना शुरू कर दिया है।  एक ही एड्रेस पर दोनों कनेक्‍शन रखना संशोधित एलपीजी नियमों के तहत प्रतिबंधित माना जा रहा है, जिन लोगों के इलाके में पीएनजी का इंफ्रा है, उन्‍हें तय समय के भीतर पीएनजी पर स्विच न करने पर एलपीजी आपूर्ति बंद या खुद रद्द होने का सामना करना पड़ सकता है।    LPG कनेक्‍शन ट्रांसफर पीएनजी कनेक्‍शन प्राप्‍त करने के 30 दिनों के भीतर अपना एलपीजी कनेक्‍शन बंद करने के लिए कहा है, जिस कारण सरकार ने इन कस्‍टमर्स को अपना एलपीजी कनेक्‍शन बहाल करने की अनुमति दी है. इससे यूजर्स को बाद में उन सेक्‍टर्स में जाने पर भी एलपीजी कनेक्‍शन फिर एक्टिव करने की सुविधा मिलती है, जहां पीएनजी कनेक्‍शन उपलब्‍ध नहीं है।  जून से ही नहीं भरा जाएगा एलपीजी सिलेंडर इस महीने से, पीएनजी पाइपलाइनों वाले क्षेत्रों में स्थित घरों को घरेलू एलपीजी सिलेंडर बुक करने या रिफिल करने से रोका जा रहा है. सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों और ओएमसी ने अब अपने डिजिटल डेटाबेस को पूरी तरह से यूनिफाइड कर दिया है. वहीं पीएनजी कनेक्‍शन विस्‍तार के लिए 30 जून तक समय बढ़ा दिया गया है।  गैस सिलेंडर बुकिंग के लिए डेडलाइन  आपूर्ति की कमी और दुरुपयोग को कंट्रोल करने के लिए शहरी यूजर्स के लिए एलपीजी रिफिल की लॉक-इन पीरियड 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन और ग्रामीण यूजर्स के लिए 45 दिनों तक कर दी गई है।  कनेक्शन, सब्सिडी नियम परिवारों को हर साल केवल 12 रियायती घरेलू सिलेंडर ही मिलते रहेंगे. अतिरिक्त सिलेंडरों का शुल्क मार्केट वैल्‍यू के अनुसार लिया जाएगा. नया एलपीजी कनेक्शन लेने पर अब संशोधित जमा राशि और सेटअप शुल्क लागू होंगे, जिनमें रेगुलेटर, पाइप और इंस्टॉलेशन शुल्क शामिल हैं। 

खुल सकता है होर्मुज का रास्ता, तेल बाजार में खुशी की लहर; डेढ़ महीने के निचले स्तर पर पहुंचा क्रूड

नई दिल्‍ली  खुशखबरी! ईंधन का संकट जल्‍द ही खत्‍म होने वाला है. ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की संभावना तेजी से बढ़ रही है और माना जा रहा है कि जल्‍द ही दोनों किसी नतीजे पर पहुंचने वाले हैं. समझौते की यह खुशी कच्‍चे तेल की कीमतों पर भी दिख रही है, जो शनिवार सुबह फिसलकर 6 सप्‍ताह यानी डेढ़ महीने के निचले स्‍तर पर पहुंच गया है. माना जा रहा है कि अब होर्मुज का रास्‍ता दोबारा खोला जा सकता है और ईंधन से लदे भारतीय जहाज सरपट भागने लगेंगे. इससे देश में पैदा हुआ क्रूड व गैस का संकट भी जल्‍द ही खत्‍म हो जाएगा।  ग्‍लोबल मार्केट में कच्‍चे तेल की कीमतों में आज 2 फीसदी से भी ज्‍यादा की गिरावट दिख रही है. डब्‍ल्‍यूटीआई का भाव फिसलहर 87.36 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें भी 91.12 डॉलर प्रति बैरल के भाव चल रही हैं. यह 6 सप्‍ताह का सबसे निचला स्‍तर है. अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ शांति समझौते पर अंतिम बातचीत चल रही है. हालांकि, ईरान के विदेशी मंत्री का अब भी कहना है कि कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और दोनों देशों के बीच बातचीत लगातार जारी है. हालांकि, अमेरिका के तेवर देखकर लगता है कि वह ईरान के साथ न्‍यूक्लियर मुद्दे पर दोबारा नए सिरे से बातचीत शुरू कर सकता है।  फिर सस्‍ता हो जाएगा क्रूड ग्‍लोबल एनर्जी एजेंसियों का कहना है कि होर्मुज के रास्‍ते में सैकड़ों जहाज खड़े-खड़े इंतजार कर रहे हैं. इस पर ईरान और अमेरिका दोनों ही अपना दावा ठोक रहे हैं और किसी भी जहाज को गुजरने नहीं दे रहे. अगर दोनों में समझौता होता है और होर्मुज से दोबारा कारोबार शुरू होता है तो जल्‍द ही कच्‍चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे जा सकती हैं. फिलहाल इस गतिरोध की वजह से ग्‍लोबल मार्केट में क्रूड का भंडार करीब 2 करोड़ बैरल नीचे आ चुका है. विश्‍व बैंक, आईएमएफ सहित तमाम ग्‍लोबल एजेंसियों ने भी चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज संकट लंबा खिंचा तो गर्मी के महीने में ईंधन का संकट गहरा सकता है।  भारत को सबसे बड़ी राहत होर्मुज जलडमरूमध्‍य का रास्‍ता खुलता है तो सबसे ज्‍यादा लाभ भारत को होगा. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्‍सा ईंधन इसी रास्‍ते से मंगाता है. जहाजरानी मंत्रालय में निदेशक ओपेश कुमार शर्मा का कहना है कि भारत के लिए होर्मुज कितना महत्‍वपूर्ण इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हम अपनी कुल जरूरत का करीब 30 फीसदी क्रूड ऑयल इसी रास्‍ते से मंगाते हैं. इतना ही नहीं, कुल एलपीजी आयात का 70 फीसदी भी इसी रास्‍ते से आता है. लिहाजा अगर शांति वार्ता कामयाब होती है और होर्मुज खुलता है तो भारतीय जहाजों के लिए यह सबसे बड़ी राहत होगी।  होर्मुज में अभी हमारे कितने जहाज ओपेश शर्मा का कहना है कि होर्मुज से अभी भारतीय झंडे वाले 13 जहाजों को ऑपरेट किया जा रहा है. इसमें एक एलपीजी टैंकर से लदा जहाज है, जबकि 5 जहाजों पर कच्‍चे तेल के टैंकर लदे हुए हैं. एक शिप रसायनों से भरा है, जिसका इस्‍तेमाल यूरिया व अन्‍य उर्वरक बनाने में किया जाता है, जबकि 3 कंटेनर लादने वाले शिप हैं और 2 जहाज बल्‍क कैरियर जबकि एक ड्रेगर के रूप में इस रास्‍ते पर खड़ा अपनी बारी का इंतजार कर रहा है. उन्‍होंने बताया कि 2.70 लाख मीट्रिक टन कच्‍चा तेल लादे एक टैंकर निसोस केरोस ने 25-26 मई को सफलतापूर्वक होर्मुज का रास्‍ता पार कर लिया है और इसके 3 जून तक विशाखापत्‍तन बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है। 

केंद्र सरकार के 12 साल पर भाजपा का बड़ा प्लान, देशभर में जनता तक पहुंचाएगी उपलब्धियां

नई दिल्ली  भारतीय जनता पार्टी केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर देशभर में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाएगी. इस अभियान का थीम 'विश्वास, विकास और जनकल्याण के 12 वर्ष' है, जो 5 जून से 21 जून 2026 तक चलेगा।  पार्टी इसे अपने सबसे महत्वाकांक्षी आउटरीच कार्यक्रमों में से एक बता रही है. भाजपा के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, अभियान के दौरान जनसंपर्क अभियान, जनकल्याण शिविर, योग दिवस समारोह और पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रमों पर विशेष जोर दिया जाएगा. इन कार्यक्रमों के जरिए सरकार की प्रमुख योजनाओं और उपलब्धियों को आम जनता तक पहुंचाने का पार्टी लक्ष्य रख रही है।  इस अभियान के तहत कार्यकर्ता घर-घर जाकर योजनाओं की जानकारी देंगे. इसके तहत पार्टी जनकल्याण शिविर स्वास्थ्य, बीमा, पेंशन और अन्य कल्याणकारी सेवाओं के लिए शिविर लगाएगी. इसके अलावा इसी दौरान योग दिवस यानी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर बड़े आयोजन भी किए जाएंगे।  इसके अलावा,पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण और स्वच्छता अभियान भी चलाया जाएगा. पार्टी ने सभी राज्यों में कार्यक्रमों के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया है. केंद्रीय मंत्री, सांसद और विधायक मैदान में उतरकर जनता से सीधा संवाद करेंगे।  भाजपा इस अभियान में मोदी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों को हाइलाइट करेगी, जिनमें मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, जिसके तहत राष्ट्रीय राजमार्गों में 60 फीसदी वृद्धि, 1.46 लाख किमी तक पहुंच शामिल है. साथ ही पार्टी का दावा है कि पिछले 12 साल में मोदी सरकार में अर्थव्यवस्था दोगुनी हो गई है जिसके तहत , अर्थव्यवस्था 2 ट्रिलियन डॉलर से 4 ट्रिलियन डॉलर के पार हो गई है,इसके अलावा डिजिटल इंडिया ,UPI की वैश्विक नेतृत्व, आधार का व्यापक उपयोग जैसे बातों को भी जन जन तक पहुंचाने की बात है।  इसके अलावा पार्टी कल्याणकारी योजनाओं जिनमें उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, पीएम किसान, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत आदि को भी जन जन तक पहुंचाएगी पार्टी का दावा है कि ये 12 साल देश के 'प्रगति' की ओर बढ़ने के रहे हैं. यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब हाल ही में राज्य चुनावों में पार्टी ने मजबूत प्रदर्शन किया है।  अप्रैल में पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में भाजपा की बड़ी जीत ने पार्टी के नेताओं का भी काफी मनोबल बढ़ाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में सरकार विकास एजेंडे पर जोर दे रही है. 9 जून को तीसरे कार्यकाल की पूर्णता पर भी विशेष कार्यक्रमों की तैयारी है।  विपक्षी दल इस अभियान को चुनावी रणनीति बता रहे हैं, जबकि भाजपा इसे शासन की उपलब्धियों का सच्चा आकलन करार दे रही है. भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय नेतृत्व ने सभी प्रदेश इकाइयों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं।  पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह अभियान 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम भी बनेगा. देशभर के करोड़ों लाभार्थी इस अभियान के माध्यम से अपनी यात्रा की कहानियां भी साझा करेंगे।