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एनएमडीसी ने 16% की वृद्धि के साथ वित्त वर्ष 27 की मजबूत शुरुआत की

हैदराबाद खनन पावरहाउस एनएमडीसी ने अप्रैल 2026 में लौह अयस्क का 46.4 लाख टन उत्पादन और 36.8 लाख टन बिक्री की है ।  देश की सबसे बड़ी लौह अयस्क खनन कंपनी ने पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में वित्त वर्ष 27 के पहले महीने में उत्पादन में 16% की वृद्धि दर्ज की है । बैलाडीला लौह अयस्क परियोजनाओं में अपने अब तक के सर्वोत्तम खनन प्रदर्शन के आधार पर एनएमडीसी ने अप्रैल 2026 में अप्रैल माह का अबतक का सर्वोच्च उत्पादन किया है ।  हाल के चार वर्षों के लौह अयस्क उत्पादन को ट्रैक करने पर भारत के लिए 3.9% की नियमित सीएजीआर का पता चलता है । इस पृष्ठभूमि में, एनएमडीसी ने इस उद्योग की वृद्धि से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 6.8% सीएजीआर प्राप्त किया और इस प्रकार उत्पादन के क्रमिक-वृद्धि से अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है । इस उपलब्धि पर  अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एनएमडीसी ने कहा कि, “एनएमडीसी की क्षमताओं और योग्यताओं में विस्तार पूरे जोरों पर है । हमने अपनी रणनीतिक प्रगति को सक्षम बनाने के लिए लॉजिस्टिक्स, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और आपूर्ति-श्रृंखला एकीकरण में आवश्यक आधारभूत कार्य किए हैं । अप्रैल में 4.6 मिलियन टन से शुरू होकर एनएमडीसी का इस वित्तीय वर्ष के लिए 60 मिलियन टन से अधिक का लक्ष्य है । टीम तैयार है, संरेखित है और विकास के अगले स्तर तक पहुंचने के लिए आश्वस्त है ।” वित्त वर्ष 26 में 53+ मिलियन टन और एनएमडीसी से सकारात्मक प्रारंभिक अपडेट ने भारत के लौह और इस्पात क्षेत्र को और अधिक आशान्वित किया है ।

अप्रैल में यूपीआई लेनदेन में 25% की बढ़त, 22 अरब के पार हुई संख्या, वैल्यू 29 लाख करोड़ रुपए से अधिक

नई दिल्ली   यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन की संख्या अप्रैल में सालाना आधार पर 25 प्रतिशत बढ़कर 22.35 अरब हो गई है। वहीं, इनकी वैल्यू सालाना आधार पर 21 प्रतिशत बढ़कर 29.03 लाख करोड़ रुपए हो गई है। यह जानकारी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से शुक्रवार को दी गई। दैनिक आधार पर अप्रैल में यूपीआई के औसत लेनदेन की संख्या बढ़कर 74.5 करोड़ हो गई है, जो कि मार्च में 73 करोड़ थी। औसत दैनिक यूपीआई लेनदेन की वैल्यू बढ़कर 96,766 करोड़ रुपए हो गई है, जो कि मार्च में 95,243 करोड़ रुपए थी। आईएमपीएस पर मासिक लेनदेन की संख्या अप्रैल में 36.2 करोड़ रही है, जिसमें 7.01 लाख करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में तुलना में 13 प्रतिशत की वृद्धि को दिखाता है। दैनिक औसत लेन-देन की संख्या 1.2 करोड़ रही, जो मजबूत वृद्धि दर्शाता है। मार्च में, यूपीआई ने 2016 में लॉन्च होने के बाद से अब तक का सबसे अधिक मासिक लेनदेन 22.64 अरब दर्ज किया है। यूपीआई अब संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर सहित आठ से अधिक देशों में उपलब्ध है, जिससे भारत डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बन गया है। यूपीआई की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहुंच से प्रेषण में वृद्धि हो रही है, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिल रहा है और वैश्विक फिनटेक परिदृश्य में भारत की स्थिति मजबूत हो रही है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, भारत के प्रमुख डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म ने पिछले एक दशक में लेनदेन की मात्रा में लगभग 12,000 गुना की असाधारण वृद्धि दर्ज की है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की नियामक निगरानी में एनपीसीआई द्वारा 11 अप्रैल, 2016 को लॉन्च किया गया यूपीआई, भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की रीढ़ बन गया है। मंत्रालय ने बताया कि वित्त वर्ष 2016-17 में मात्र 2 करोड़ लेनदेन के मामूली आधार से शुरू होकर, इस प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ से अधिक लेनदेन प्रोसेस किए। वैल्यू में भी यूपीआई की वृद्धि उतनी ही मजबूत रही है। लेनदेन का मूल्य परिचालन के पहले वर्ष में 0.07 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 314 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो 4,000 गुना से अधिक की वृद्धि दर्शाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘काउंटिंग में केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति नियमों के खिलाफ नहीं’

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची टीएमसी को अदालत से झटका लगा है. चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ पहुंची ममता बनर्जी की पार्टी से शीर्ष अदालत ने कहा कि हम चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ नहीं जाएंगे और इसपर कोई आदेश जारी नहीं करेंगे. कोर्ट ने साफ कहा कि ईसी को अपना अधिकारी चुनने का पूरा अधिकार है. शीर्ष अदालत ने कहा कि हम उनके काम में कोई दखल नहीं देंगे. बता दें कि टीएसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पैरवी कर रहे थे. कोर्ट ने आगे कहा कि केंद्र सरकार के कर्मचारी के साथ एक राज्य सरकार के कर्मचारी की भी तैनाती की जाएगी।  पश्चिम बंगाल में 4 मई को होने वाली मतगणना से ठीक पहले सियासी माहौल और गरमा गया है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट से तृणमूल कांग्रेस (TMC) को राहत नहीं मिली। अदालत ने उस याचिका पर कोई दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें Election Commission of India के फैसले को चुनौती दी गई थी। मामला मतगणना केंद्रों पर केंद्रीय सरकार और पीएसयू कर्मचारियों की तैनाती को लेकर था। टीएमसी चाहती थी कि इस व्यवस्था पर रोक लगे, लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। कोर्ट का साफ संदेश, नियमों के खिलाफ नहीं सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति नियमों के दायरे में आती है। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी नए आदेश की जरूरत नहीं है। यानी चुनाव आयोग का फैसला फिलहाल बरकरार रहेगा। कोर्ट ने आयोग के उस भरोसे को भी रिकॉर्ड में लिया, जिसमें कहा गया था कि जारी सर्कुलर को पूरी तरह लागू किया जाएगा। सिब्बल ने उठाए सवाल इससे पहले टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने निर्वाचन आयोग की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमें उनसे न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।  जब कपिल सिब्बल ने हर टेबल पर एक केंद्रीय कर्मचारी की अनिवार्यता पर सवाल उठाए, तो बेंच ने नियमों का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट की. अदालत ने कहा, “आइए, हम इस प्रावधान को दोबारा पढ़ते हैं. यदि हम यह मान लें कि काउंटिंग सुपरवाइज़र और सहायक केंद्र सरकार के कर्मचारी होंगे, तो इसे गलत नहीं कहा जा सकता, क्योंकि प्रावधान में स्पष्ट है कि इनकी नियुक्ति राज्य या केंद्र, किसी भी पूल से की जा सकती है।  कोर्ट ने सिब्बल की दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “ऐसा नहीं है जैसा आप बता रहे हैं.” सिब्बल ने अदालत के सामने चार मुख्य मुद्दे उठाए: सूचना का अभाव: सिब्बल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बैठकें कर रहा है लेकिन उनके बारे में जानकारी साझा नहीं की जा रही है।  अतिरिक्त पर्यवेक्षक पर सवाल: उन्होंने कहा कि पहले से ही केंद्र सरकार का नामांकित माइक्रो ऑब्जर्वर मौजूद है, तो अब हर टेबल पर एक और केंद्रीय कर्मचारी की क्या आवश्यकता है? नियमों की अनदेखी: सिब्बल ने दलील दी कि सर्कुलर के अनुसार राज्य सरकार का नामांकित व्यक्ति होना चाहिए, लेकिन चुनाव आयोग अपनी मर्जी से नियुक्तियां कर रहा है।  क्या है पूरा विवाद? चुनाव आयोग ने 30 अप्रैल को एक निर्देश जारी किया था जिसके अनुसार मतगणना की हर टेबल पर सुपरवाइजर या असिस्टेंट में से कम से कम एक कर्मचारी केंद्र सरकार या पब्लिक सेक्टर (PSU) का होना अनिवार्य है. टीएमसी का आरोप है कि केंद्र सरकार के कर्मचारी बीजेपी के प्रभाव में काम कर सकते हैं, जबकि कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस आशंका को खारिज करते हुए आयोग के फैसले को वैध बताया था।  सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? केंद्रीय कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने के फैसले के खिलाफ पहुंची टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी आदेश की जरूरत नहीं है. सर्कुलर का पूरी तरह से पालन होगा. इलेक्शन कमीशन को अधिकारी चुनने का हक है. चुनाव आयोग अपने कर्मचारी पर खुद नियंत्रण कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ इस मामले पर दखल देने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों की तैनाती नियमों के खिलाफ नहीं है. चुनाव आयोग का सर्कुलर ही लागू होगा।  जस्टिस जे. बागची ने सुनवाई के दौरान कहा कि केवल एक ही पूल से चयन करना गलत नहीं कहा जा सकता. कपिल सिब्बल ने जवाब देते हुए कहा कि चयन राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कर्मचारियों में से यादृच्छिक (रैंडम) तरीके से होना चाहिए. तब जस्टिस बागची ने कहा कि काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट में से कम से कम एक केंद्र सरकार का कर्मचारी होना चाहिए. कपिल सिब्बल ने तब कहा कि तो फिर दूसरा राज्य सरकार का होना चाहिए, लेकिन यहां तो राज्य सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं है. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि यहां एक और गलतफहमी यह है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कर्मचारी अलग‑अलग माने जा रहे हैं, जबकि वे सभी सरकारी कर्मचारी ही हैं।  वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर के पास ओवरऑल अधिकार होते हैं और वह राज्य सरकार कैडर से होता है.प्रत्येक उम्मीदवार के पास अपना अलग काउंटिंग एजेंट भी होगा इसलिए इसको लेकर जताई जा रही आशंका पूरी तरह गलत और निराधार है. अदालत ने कहा कि किसी अतिरिक्त आदेश की आवश्यकता नहीं है, सिवाय इसके कि नायडू के बयान को दोहराते हुए 13 अप्रैल 2026 का सर्कुलर पूरी तरह लागू किया जाएगा।  'चुनाव आयोग को कहां से आशंका हो गई?' चुनाव आयोग के PSU कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने के फैसले के खिलाफ टीएमसी की ओर से कपिल सिब्बल ने ममता सरकार का पक्ष रखा. तृणमूल कांग्रेस के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ऐसी चीजें पहले नहीं हुईं. चुनाव आयोग को कहां से आशंका हो गई? कपिल सिब्बल ने कहा कि सर्कुलर में खुद ही कहा गया है कि राज्य सरकार के नोमिनी होने चाहिए,लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. सिब्बल ने कहा कि इस बात की आशंका है कि आयोग के इस कदम से चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होगी. 'डर है कि हर एक बूथ में दिक्कत होगी….' कपिल सिब्बल ने कहा कि यह सर्कुलर DEO को जारी किया गया है और हमें … Read more

बंगाल में 15 केंद्रों पर री-पोलिंग जारी, सुबह 9 बजे तक 16.23% मतदान

 कोलकाता पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की डायमंड हार्बर और मगराहाट पश्चिम विधानसभा सीटों के 15 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान हो रहा है. इन केंद्रों पर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक वोट डाले जाएंगे. इनमें से 11 बूथ मगराहाट पश्चिम और 4 बूथ डायमंड हार्बर में हैं. निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक री पोलिंग के दौरान सुबह 9 बजे तक 16.23% मतदान दर्ज किया गया है. मगराहाट पश्चिम सीट के चार बूथों पर सुबह 9 बजे तक 16.88% और डायमंड हार्बर सीट के 11 बूथों पर सुबह 9 बजे तक 15.83% मतदान हुआ है।  बीजेपी ने इन मतदान केंद्रों पर ईवीएम के साथ छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे, जिसका संज्ञान लेते हुए निर्वाचन आयोग ने इन सभी जगहों पर पुनर्मतदान कराने का फैसला किया है. बीजेपी ने आरोप लगाया था कि फलता इलाके में एक मतदान केंद्र पर ईवीएम में कमल के फूल निशान वाले बटन पर टेप लगाकर उसे छिपाने की कोशिश की गई. इसका फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. इस संबंध में मतदाताओं और राजनीतिक दलों की ओर से शिकायतें भी दर्ज कराई गई थीं, जिनमें ईवीएम से छेड़छाड़, बूथ कैप्चरिंग और धांधली के आरोप लगाए गए।  सूत्रों के मुताबिक, फलता विधानसभा क्षेत्र के 30 और बूथों पर भी पुनर्मतदान हो सकता है, जिस पर चुनाव आयोग का फैसला आना बाकी है. इन बूथों पर मतदान 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में हुआ था, लेकिन चुनाव आयोग ने अब जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 58(2) के तहत इसे रद्द कर दिया है. यह प्रावधान चुनाव आयोग को अधिकार देता है कि अगर किसी मतदान केंद्र पर गंभीर गड़बड़ी- जैसे ईवीएम में खराबी, बूथ कैप्चरिंग, हिंसा या प्रक्रिया में उल्लंघन होता है, तो वह मतदान को निरस्त कर दोबारा मतदान करा सकता है।  बाहिरापुरा कुरकुरिया एफपी स्कूल स्थित मतदान केंद्र के बाहर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं. मतदाताओं का कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि इन तीन बूथों पर दोबारा मतदान क्यों कराया जा रहा है. कुछ लोगों का दावा है कि दूसरे चरण के मतदान के दौरान किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी या बाधा नहीं हुई थी. वहीं, कई मतदाता सरकार से नाराज नजर आए. उनका कहना है कि इलाके की सड़कें बेहद खराब हालत में हैं, जिससे लोगों में गुस्सा है. गांवों और आसपास के क्षेत्रों में पानी और नलों की कमी से लोग परेशान हैं. स्थानीय लोगों ने इस समस्या को लेकर चिंता भी जताई।  मतगणना कर्मियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच मतगणना से जुड़े कर्मचारियों को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। टीएमसी ने चुनाव आयोग के उस निर्देश को चुनौती दी है, जिसमें मतगणना के लिए केवल केंद्र सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों को तैनात करने की बात कही गई है। इस मामले को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमाया हुआ है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है, जो मतगणना की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। यह पूरा मामला वोटों की गिनती करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है। चुनाव आयोग ने निर्देश दिया था कि बंगाल में वोटों की गिनती के लिए केंद्रीय कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) बनाया जाएगा। टीएमसी इस फैसले का विरोध कर रही है। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया में राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी बराबर शामिल किया जाना चाहिए। इसी आदेश को चुनौती देने के लिए टीएमसी ने अर्जी दी है, जिस पर जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के जजों ने नियमों को लेकर क्या स्पष्ट किया?       मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने नियमों को लेकर स्थिति साफ की।     उन्होंने कहा कि नियमों में यह विकल्प पूरी तरह से खुला है कि काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट केंद्र सरकार के भी हो सकते हैं और राज्य सरकार के भी।     कोर्ट ने कहा कि जब यह विकल्प खुला हुआ है, तो हम यह बिल्कुल नहीं कह सकते कि चुनाव आयोग का यह नोटिफिकेशन नियमों के खिलाफ है।     जस्टिस बागची ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के पास यह अधिकार है कि वह कह सकता है कि दोनों अधिकारी केंद्र सरकार के ही होंगे।  कपिल सिब्बल ने कोर्ट में क्या दलील दी?      टीएमसी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग के सर्कुलर (परिपत्र) पर सवाल उठाए।     सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी कि चुनाव आयोग के सर्कुलर में खुद ऐसा स्पष्ट तौर पर नहीं कहा गया है कि केवल केंद्रीय कर्मचारी ही होंगे।     टीएमसी का तर्क है कि चुनाव आयोग का यह कदम जानबूझकर राज्य सरकार के कर्मचारियों को गिनती से दूर रखने के लिए उठाया गया है।       सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की दलीलों पर क्या जवाब दिया? वकील सिब्बल की दलीलों पर जस्टिस बागची ने तुरंत अपना पक्ष रखा। उन्होंने ने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने ऐसा कहा भी होता, तब भी हम उन्हें इस बात के लिए गलत नहीं ठहरा सकते थे। इसका मुख्य कारण यह है कि नियम साफ तौर पर कहते हैं कि मतगणना के लिए केंद्र सरकार या राज्य सरकार के अधिकारियों को नियुक्त किया जा सकता है।    फलता में EVM के साथ छेड़छाड़ के आरोप पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को हुए दूसरे चरण के मतदान के दौरान काफी हंगामा और राजनीतिक विवाद देखने को मिला. बीजेपी ने आरोप लगाया कि ईवीएम में उनके उम्मीदवारों से जुड़े बटन को जानबूझकर टेप से ढक दिया गया था ताकि मतदाता उनके नाम न देख सकें. बता दें कि फलता से अभिषेक बनर्जी के करीबी जहांगिर खान चुनाव मैदान में हैं. बीजेपी नेताओं ने ऐसे वीडियो भी साझा किए, जिनमें ईवीएम पैनल पर बीजेपी और सीपीएम उम्मीदवारों के नाम के पास टेप लगे दिखाए गए।  इस पूरे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कहा कि … Read more

BJP की नई टीम पर फोकस, 33% महिला भागीदारी के साथ ड्रीम पूरा करने की तैयारी

  नई दिल्ली पश्चिम बंगाल और असम सहित पांच राज्यों के चुनाव नतीजे के बाद बीजेपी में कई अहम फैसले होंगे. बीजेपी अध्यक्ष की कमान संभाल रहे नितिन नवीन को अपनी टीम का गठन करना हो तो उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक कैबिनेट विस्तार पेंडिग है. बीजेपी संगठन और सरकार के हिसाब से मई का महीना कई बड़े बदलाव लेकर आएगा।  माना जा रहा है कि 4 मई को बाद बीजेपी नवीन टीम के साथ यूपी से बिहार तक कैबिनेट गठन को अमलीजामा पहनाने का काम करेगी. लंबे समय से लटके पड़े कई फ़ैसले मई में लागू होने की संभावना है. इनमें सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में योगी सरकार में फेरबदल शामिल है।  उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसे पहले बीजेपी कैबिनेट विस्तार करके सियासी समीकरण को साधने की कवायद करना चाहती है. बिहार में सीएम और डिप्टीसीएम बनाए जाने के बाद अब कैबिनेट विस्तार होना है, जिसे अब बीजेपी अमलीजामा पहनाना चाहती है? बीजेपी शीर्ष नेतृत्व ने सारी तैयारी कर ली है, जिसे चार मई के बाद किसी भी दिन अमल में लाया जा सकता है?    नवीन टीम में युवा और महिलाओं को तवज्जे?  जेपी नड्डा की जगह नितिन नवीन बीजेपी के अध्यक्ष 2025 के आखिर में बन गए हैं, लेकिन पांच महीने के बाद भी अपनी टीम का गठन नहीं कर सके हैं. बीजेपी शीर्ष नेतृत्व ने चार मई के बाद नवीन टीम के गठन का प्लान बनाया है. इस तरह संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव करने का है.  बीजेपीके राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में जल्द ही एक नई टीम बनने की संभावना है।  माना जा रहा है कि नितिन नवीन की टीम में अनुभवी और युवा नेताओं का मिश्रण होगा ताकि एक संतुलन टीम बन सके. युवाओं के साथ महिलाओं को भी शामिल करने की रणनीति है. बीजेपी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 33 फीसदी महिलाओं को शामिल करने की योजना है।  यूपी में योगी कैबिनेट का विस्तार का प्लान उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने भूपेंद्र चौधरी की जगह पर पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष तो बना दिया है, लेकिन अभी तक उनकी टीम नहीं बन सकी है. सूत्रों के अनुसार यूपी में ख़ाली पड़ें पदों को भरने के अलावा कुछ फेरबदल भी हो सकता है. इसमें कुछ मौजूदा मंत्रियों की ज़िम्मेदारी में बदलाव की भी संभावना है.पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी की सरकार में वापसी तय मानी जा रही है।  2027 के चुनावों को ध्यान में रख कर क्षेत्रीय जातीय समीकरणों को भी साधा जाएगा. बीजेपी नेताओं के अनुसार योगी कैबिनेट में फेरबदल के साथ ही प्रदेश बीजेपी में भी नई टीम का गठन होने की संभावना है. प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम और योगी कैबिनेट दोनों का निर्णय करते समय आगामी 2027 विधानसभा चुनाव का ध्यान रखा जाएगा।  बिहार में सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का गठन यूपी कैबिनेट विस्तार के साथ बिहार में सम्राट चौधरी के अगुवाई में बनी एनडीए सरकार के मंत्रिमंडल का गठन होना है. बीजेपी जेडीयू के फार्मूले के अनुसार दोनों के पास सोलह-सोलह मंत्री पद रहने की संभावना है, वर्तमान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास जो विभाग हैं, वो सभी बीजेपी कोटे से बनने वाले मंत्रियों को दिए जा सकते हैं. ऐसे ही जेडीयू के दोनों उपमुख्यमंत्रियों के पास के विभाग जेडीयू कोटे से बनने मंत्रियों को दिए जाएंगे।  उम्मीद है कि मई का महीना बीजेपी में संगठन और सरकार, दोनों ही स्तरों पर बड़े बदलाव लेकर आएगा. इन बदलावों की मुख्य वजह आगामी चुनाव और राजनीतिक संतुलन बनाए रखना होगा। 

2032 तक डिजिटल जर्नलिस्ट की मांग में 13% का इजाफा, इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग में सबसे बड़ी वृद्धि: पत्रकारों के लिए अच्छी खबर

 नई दिल्ली पत्रकार‍िता में जिस तरह एआई ने दख‍ल दिया है, हर तरफ से नकारात्मक खबरें ही सुनने को मिलती हैं. इस बीच जर्नलिज्म के छात्रों के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर आई है. ग्लोबल रिपोर्ट्स और एम्प्लॉयमेंट प्रोजेक्शन के आंकड़ों ने साफ किया है कि साल 2032 तक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स और मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट्स की मांग में 13% की जबरदस्त तेजी आने वाली है. बता दें कि ये विकास दर अन्य सभी व्यवसायों की औसत वृद्धि दर से कहीं अधिक है।  बढ़ी'AI लिटरेट' पत्रकारों की तलाश मार्केट एनालिसिस से ये भी साफ हुआ है कि अब मीड‍िया कंपनियों को सिर्फ पारंपरिक रिपोर्टर नहीं, बल्कि ऐसे पत्रकार चाहिए जो AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और डेटा के साथ काम करने में सक्षम हों. डेटा जर्नलिज्म और सोशल मीडिया स्पेशलिस्ट की मांग जिस तेजी से बढ़ रही है, उसके पीछे मुख्य कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ऑडियंस का बढ़ता जुड़ाव और रियल-टाइम एंगेजमेंट की जरूरत है।  इन क्षेत्रों में मिल रहे हैं सबसे ज्यादा मौके: डिजिटल कंटेंट स्पेशलिस्ट: कंपनियां ब्रांड लॉयल्टी और सोशल मीडिया ऑप्टिमाइजेशन के लिए स्टोरीटेलिंग के माहिर लोगों को ढूंढ रही हैं।  मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट: पॉडकास्ट, वीडियो और मोबाइल-फर्स्ट न्यूज के दौर में उन पत्रकारों की मांग बढ़ी है जो मल्टीपल चैनल्स पर कहानी कह सकें।  मीडिया एनालिस्ट: बिग डेटा और AI टूल्स के जरिए ऑडियंस के व्यवहार को समझने वाले प्रोफेशनल्स अब संपादकीय फैसलों में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।  टेक्निकल राइटर्स: हेल्थकेयर और फाइनेंस जैसे जटिल क्षेत्रों में सरल भाषा में जानकारी देने वाले पत्रकारों की भारी जरूरत है।  सैलरी में भी उछाल का रुझान हायरिंग ट्रेंड्स बताते हैं कि खोजी पत्रकारिता (इनवेस्ट‍िगेट‍िव रिपोर्ट‍िंग) और ब्रांडेड कंटेंट जैसे खास क्षेत्रों में सालाना सैलरी में 8% से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी जा रही है. यह साफ संकेत है कि जो जर्नलिस्ट अपनी स्किल्स को अपग्रेड करेंगे, उनके लिए करियर और कमाई, दोनों के रास्ते खुले हैं। 

बंगाल में BJP की सत्ता से होगा भूचाल, बांग्लादेशी MP ने दी शरणार्थियों को लेकर चेतावनी

ढाका  पश्चिम बंगाल में आगामी 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने वाले हैं। इससे पहले बंगाल से लेकर बांग्लादेश तक खलबली मची हुई है। हाल ही में एक बांग्लादेशी सांसद ने नतीजों को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि अगर 4 मई को भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आती है तो यह बांग्लादेश के लिए बुरी स्थिति होगी क्योंकि बीजेपी सैकड़ों लोगों को सीमा पार धकेल देगी। MP ने कहा कि इससे बांग्लादेश में शरणार्थी संकट खड़ा हो सकता है। नेशनल सिटीजन पार्टी के संसद सचिव अख्तर हुसैन ने देश की संसद में यह बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में बीजेपी की जीत के बाद से ही अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश की तरफ भेज दिया जाएगा, जो देश के लिए चिंता की बात है। हुसैन ने कहा, “पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल में BJP को जीतते हुए दिखाया जाता है और अगर BJP वहां सरकार बनाती है, तो वे सभी बांग्लादेशियों को इस तरफ धकेल देंगे। इससे हमारे लिए एक बड़ा शरणार्थी संकट खड़ा हो जाएगा। हम इस बात को लेकर चिंतित हैं।” मुसलमानों को लेकर जताई चिंता सांसद ने आगे कहा, "BJP प्रवासियों के एक सैलाब को बांग्लादेश पहुंचा देगी। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि मुसलमानों को हमारे पड़ोसी देश से वापस नहीं भेजा जाएगा। हमें एकजुट रहना होगा।" बता दें कि बंगाल चुनाव में अवैध प्रवासियों का मुद्दा अहम रहा था और भाजपा ने वादा किया है कि वह घुसपैठियों को चुन-चुन कर देश से बाहर कर देगी। निशिकांत दुबे ने शेयर किया वीडियो बांग्लादेशी सांसद के वीडियो को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने शेयर किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट पर उन्होंने यह वीडियो शेयर पर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा। निशिकांत दुबे ने लिखा, "बांग्लादेश के सांसद अख़्तर हुसैन ने आज बांग्लादेश के संसद में कहा कि भाजपा की पश्चिम बंगाल की जीत घुसपैठ को रोकेगी और बांग्लादेशी मुसलमानों को भगाएगी, यह खतरनाक है। तृणमूल कांग्रेस के मददगार धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।” एग्जिट पोल में भाजपा की दिख रही जीत इस बीच बंगाल चुनाव के नतीजों से पहले एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आए हैं जिनमें भाजपा को जीत मिलती दिख रही है। 'पोल डायरी' के आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में भाजपा 142 से 171 सीटों के साथ पहली बार सत्ता में आ सकती है। इस सर्वे के आंकड़ों की मानें तो, टीएमसी को 99 से 127 से ही संतोष करना पड़ सकता है। वहीं 'मैट्रिज' एग्जिट पोल में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा 146 से 161 सीटों के साथ सरकार बना सकती है और टीएमसी को 125 से 140 सीटें मिल सकती है और वह सत्ता से बाहर हो सकती है। हालांकि कुछ पोल में ममता बनर्जी की टीएमसी की जीत का भी अनुमान है। 'पी-मार्क' के सर्वेक्षण में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा को 150 से 175 सीटें मिल सकती हैं तो टीएमसी को 118-138 सीटें मिलने का अनुमान है। 'पीपुल्स प्लस' के सर्वे के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस 177 से 187 सीटें हासिल करके अपनी सत्ता बरकार रख सकती है। वहीं भाजपा को 95 से 110 सीटें मिलने का अनुमान है। कांग्रेस को एक से तीन सीट मिलने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा 'जनमत पोल्स' के एग्जिट पोल के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस को 195 से 205 सीटें मिल सकती हैं तो वहीं भाजपा को 80 से 90 सीटों से ही संतोष करना पड़ सकता है। पश्चिम बंगाल में आगामी 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने वाले हैं। इससे पहले बंगाल से लेकर बांग्लादेश तक खलबली मची हुई है। हाल ही में एक बांग्लादेशी सांसद ने नतीजों को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि अगर 4 मई को भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आती है तो यह बांग्लादेश के लिए बुरी स्थिति होगी क्योंकि बीजेपी सैकड़ों लोगों को सीमा पार धकेल देगी। MP ने कहा कि इससे बांग्लादेश में शरणार्थी संकट खड़ा हो सकता है। नेशनल सिटीजन पार्टी के संसद सचिव अख्तर हुसैन ने देश की संसद में यह बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में बीजेपी की जीत के बाद से ही अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश की तरफ भेज दिया जाएगा, जो देश के लिए चिंता की बात है। हुसैन ने कहा, “पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल में BJP को जीतते हुए दिखाया जाता है और अगर BJP वहां सरकार बनाती है, तो वे सभी बांग्लादेशियों को इस तरफ धकेल देंगे। इससे हमारे लिए एक बड़ा शरणार्थी संकट खड़ा हो जाएगा। हम इस बात को लेकर चिंतित हैं।” मुसलमानों को लेकर जताई चिंता सांसद ने आगे कहा, "BJP प्रवासियों के एक सैलाब को बांग्लादेश पहुंचा देगी। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि मुसलमानों को हमारे पड़ोसी देश से वापस नहीं भेजा जाएगा। हमें एकजुट रहना होगा।" बता दें कि बंगाल चुनाव में अवैध प्रवासियों का मुद्दा अहम रहा था और भाजपा ने वादा किया है कि वह घुसपैठियों को चुन-चुन कर देश से बाहर कर देगी। निशिकांत दुबे ने शेयर किया वीडियो बांग्लादेशी सांसद के वीडियो को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने शेयर किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट पर उन्होंने यह वीडियो शेयर पर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा। निशिकांत दुबे ने लिखा, "बांग्लादेश के सांसद अख़्तर हुसैन ने आज बांग्लादेश के संसद में कहा कि भाजपा की पश्चिम बंगाल की जीत घुसपैठ को रोकेगी और बांग्लादेशी मुसलमानों को भगाएगी, यह खतरनाक है। तृणमूल कांग्रेस के मददगार धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।” एग्जिट पोल में भाजपा की दिख रही जीत इस बीच बंगाल चुनाव के नतीजों से पहले एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आए हैं जिनमें भाजपा को जीत मिलती दिख रही है। 'पोल डायरी' के आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में भाजपा 142 से 171 सीटों के साथ पहली बार सत्ता में आ सकती है। इस सर्वे के आंकड़ों की मानें तो, टीएमसी को 99 से 127 से ही संतोष करना पड़ सकता है। वहीं 'मैट्रिज' एग्जिट पोल में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा 146 से 161 सीटों के साथ सरकार बना सकती है और टीएमसी को 125 से 140 सीटें मिल सकती है और वह सत्ता से … Read more

अमेरिका ने इजरायल को भेजे 6500 टन हथियार, ईरान पर संभावित हमले की अटकलें तेज

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरपर्सन ने ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई की योजनाओं पर लगभग 45 मिनट तक ब्रीफिंग दी. एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक में ईरान पर छोटा लेकिन शक्तिशाली हमलों की योजना बताई गई. इसमें बुनियादी ढांचे के लक्ष्यों को निशाना बनाने की बात है, ताकि मौजूदा संघर्ष विराम में अटकी बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके।  अन्य दो महत्वपूर्ण योजनाएं भी ट्रंप को बताई गईं. हॉर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों पर कब्जा करके उसे व्यावसायिक जहाजों के लिए दोबारा खोलना. ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के स्टॉक को सुरक्षित करने के लिए स्पेशल फोर्सेस का ऑपरेशन.यह ब्रीफिंग उस समय हुई जब ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर कमजोर स्थिति में है और बातचीत आगे नहीं बढ़ रही है।  इजराइल को अमेरिका से भारी सैन्य सहायता     इसी बीच अमेरिका ने इजराइल को मात्र 24 घंटे में 6,500 टन हथियार और सैन्य उपकरण भेज दिए. इसमें हवाई और जमीनी गोला-बारूद, सैन्य ट्रक, जॉइंट लाइट टैक्टिकल व्हीकल्स (JLTV) और अन्य उपकरण शामिल हैं.दो बड़े कार्गो जहाज और कई विमानों के जरिए यह सामान इजराइल पहुंचाया गया।      जहाज अश्दोद और हाइफा बंदरगाहों पर लंगर डाले. इजराइली रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सामान सैकड़ों ट्रकों से देश भर के सैन्य ठिकानों पर पहुंचाया गया. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक ऑपरेशन रोरिंग लायन शुरू होने के बाद से इजराइल को अब तक 1,15,600 टन से ज्यादा सैन्य उपकरण मिल चुके हैं।      इस जखीरे में 403 एयरलिफ्ट और 10 सीलिफ्ट शामिल हैं. इजराइली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़ ने कहा कि देश अपने दुश्मनों के खिलाफ हर पल कार्रवाई करने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि हथियारों की सप्लाई जारी रहेगी और आने वाले हफ्तों में और बढ़ेगी।  अमेरिका का क्या है रुख? ट्रंप ने पहले कहा था कि ईरान पर नाकेबंदी बमबारी से ज्यादा प्रभावी है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की चिंताओं का समाधान नहीं करता तो दबाव और बढ़ाया जाएगा. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको से बातचीत में कहा कि अमेरिका पर भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है. उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर दो बार हमला किया है और आगे भी ऐसा हो सकता है. पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान हमेशा बातचीत और कूटनीति के जरिए मतभेद सुलझाने के पक्ष में रहा है, लेकिन अमेरिका की कार्रवाइयों ने विश्वास तोड़ दिया है. दोनों तरफ से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और होर्मुज संकट सुलझने की दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा।     

नागरिकता नियमों में परिवर्तन, नाबालिगों के लिए पासपोर्ट नियम सख्त, OCI पंजीकरण ऑनलाइन हुआ

 नई दिल्ली गृह मंत्रालय ने नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है, जिसमें 2009 के नियमों को अपडेट किया गया है. जिसके तहत प्रवासी भारतीय नागरिक (ओसीआई) कार्डधारकों और नागरिकता आवेदनों से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं में डिजिटल माध्यम का उपयोग शुरू किया गया है. इस बदलाव का उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और तेज बनाना है।  नई व्यवस्था के तहत अब OCI कार्ड के लिए आवेदन और छोड़ने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के जरिए होगी. पहले जहां कागजी आवेदन की जरूरत होती थी, अब उसे खत्म कर डिजिटल आवेदन प्रणाली लागू की गई है. इसके साथ ही सरकार ने e-OCI की सुविधा भी शुरू की है, जिसमें आवेदकों को फिजिकल कार्ड के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रेशन भी दिया जा सकेगा।  गुरुवार को प्रकाशित राजपत्र अधिसूचना में एक अहम बदलाव नाबालिग बच्चों से जुड़ा है. नई अधिसूचना के मुताबिक, कोई भी नाबालिग बच्चा एक साथ भारतीय पासपोर्ट और किसी अन्य देश का पासपोर्ट नहीं रख सकता. पहले यह शर्त केवल घोषणा के रूप में दी जाती थी, लेकिन अब इसे स्पष्ट रूप से नियम में शामिल कर दिया गया है।  ओसीआई छोड़ने की घोषणा करने पर व्यक्ति को अपना मूल कार्ड निकटतम भारतीय मिशन, पोस्ट या विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (FRO) के पास जमा करना होगा. सरकार द्वारा OCI दर्जा रद्द किए जाने की स्थिति में भी कार्ड लौटाना अनिवार्य होगा।  डिजिटल पंजीकरण  की सुविधा सरकार अब e-OCI धारकों के मामलों में सीधे अपने डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए पंजीकरण रद्द कर सकेगी, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज हो जाएगी. नए नियमों के तहत अब दस्तावेजों की ‘डुप्लिकेट’ कॉपी जमा करने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है और e-OCI सिस्टम लागू किया गया है.  इसके जरिए आवेदकों को या तो फिजिकल ओसीआई कार्ड मिलेगा या फिर डिजिटल पंजीकरण के रूप में सुविधा दी जाएगी।  सरकार ने आवेदन खारिज होने की स्थिति में अपील की प्रक्रिया को भी मजबूत किया है. अब किसी आवेदन को खारिज करने वाले अधिकारी से एक स्तर ऊपर का अधिकारी उसकी समीक्षा करेगा. साथ ही आवेदक को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर भी दिया जाएगा, जिससे प्रक्रिया अधिक न्यायसंगत बनेगी।  यह योजना भारतीय मूल के व्यक्तियों को भारत के प्रवासी नागरिक के रूप में पंजीकृत करने का प्रावधान करती है, बस  शर्त ये है कि वे 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद भारत के नागरिक रहे हों, या उस तिथि को नागरिकता प्राप्त करने के पात्र रहे हों. हालांकि, वे लोग जो पाकिस्तान या बांग्लादेश के नागरिक हैं या रहे हैं, या जिनके माता-पिता, दादा-दादी या परदादा-परदादी पाकिस्तान या बांग्लादेश के नागरिक थे, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।  सरकार ने दस्तावेजों की डुप्लीकेट कॉपी जमा करने की पुरानी शर्त भी खत्म कर दी है. एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब OCI आवेदकों को फास्ट ट्रैक इमिग्रेशन प्रोग्राम के लिए सहमति देनी होगी. इसके तहत उनके बायोमेट्रिक डेटा को एकत्र किया जाएगा, ताकि भविष्य में तेजी से इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी की जा सके।   

भारत का नया एयरक्राफ्ट कवच, अमेरिका को भी देगा पसीना, कीमत में 60% की भारी बचत

बेंगलुरु  रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में भारत ने बड़ी और ऐतिहासिक छलांग लगाई है. भारतीय वैज्ञानिकों ने एयरक्राफ्ट्स के लैंडिंग गियर के लिए एक ऐसा हल्का और अत्यधिक मजबूत नैनोकॉम्पोजिट तैयार किया है, जो अमेरिका जैसे दुनिया के ताकतवर देशों के माथे पर पसीना ला सकता है. यह नया मटेरियल न केवल एयरक्राफ्ट्स को लैंडिंग के समय अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करेगा. साथ ही, इसकी कॉस्‍ट मौजूदा विकल्‍पों के मुकाबले 60 प्रतिशत से भी कम है।  दरअसल, किसी भी एयरक्राफ्ट का लैंडिंग गियर बेहद पार्ट होता है. एयरक्राफ्ट को जब आसमान से जमीन पर उतरना होता है, तो लैंडिंग गियर को भारी दबाव और घिसाव का सामना करना पड़ता है. रनवे पर उतरते समय एयरक्राफ्ट का सारा वजन इन्हीं पहियों और गियर पर पड़ता है. मौजूदा समय में लैंडिंग गियर बनाने के लिए अल्ट्रा-हाई-स्ट्रेंथ स्टील, टाइटेनियम और एल्युमिनियम का इस्‍तेमाल किया जाता है।  हालांकि एल्युमिनियम वजन में हल्का होता है, लेकिन अधिक दबाव पड़ने पर इसका टिकना मुश्किल हो जाता है. वहीं, दूसरी ओर स्टील और टाइटेनियम भारी होने के साथ-साथ काफी महंगे भी होते हैं. इससे एयरक्राफ्ट का कुल वजन तो बढ़ता ही है, साथ ही फ्यूल की खपत भी ज्‍यादा होती है।  एनआईटी राउरकेला की पहल से चौंकी दुनिया     इस समस्या का हल निकालने के लिए एनआईटी राउरकेला के मेटलर्जिकल और मैटेरियल्स इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने एक खास तरह का नया मैटेरियल तैयार किया है।      इसे हाइब्रिड नैनोकॉम्पोजिट कहा जाता है. यह नैनोकॉम्पोजिट इंसान के बाल से करीब 1 लाख गुना ज्यादा पतला होता है. इसके बावजूद यह बहुत मजबूत है और आसानी से घिसता नहीं है।      इस खास सामग्री का वजन भी बहुत कम है, इसलिए इसे फाइटर प्लेन और ड्रोन (यूएवी) जैसे एयरक्राफ्ट्स के साथ-साथ सिविल एविएशन के एयरक्राफ्ट्स में इस्तेमाल करने के लिए बेहद अच्छा माना जा रहा है।      हल्का होने के कारण यह एयरक्राफ्ट की परफॉर्मेंस को नकेवल बेहतर करेगा, बल्कि फ्लूल की खपत भी कम होगी. इस नैनोकॉम्पोजिट को बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया।      इसमें कार्बन नैनोट्यूब्स का उपयोग किया गया, जिससे यह ज्यादा दबाव सहने और वजन को बराबर बांटने में सक्षम है. इसके साथ ही ग्रेफाइट नैनोप्लेटलेट्स मिलाए गए, जिससे इसकी मजबूती और बढ़ जाती है।  हाइब्रिड नैनोकॉम्पोजिट को ज्यादा टैंपरेचर में स्थिर रखने के लिए क्या किया गया? हाइब्रिड नैनोकॉम्पोजिट को ज्यादा टैंपरेचर में भी स्थिर बनाए रखने के लिए हेक्सागोनल बोरॉन नाइट्राइड का इस्तेमाल किया गया है. यह एक खास तरह का मैटेरियल है, जो गर्मी को सहने की क्षमता बढ़ाता है और मैटेरियल को खराब होने से बचाता है. इसके कारण यह नैनोकॉम्पोजिट हाई टैंपरेचर में भी मजबूत बना रहता है. यही वजह है कि इसे एयरोस्पेस जैसे सेक्‍टर में उपयोग के लिए सबसे बेहतर माना जा रहा है।  इस नैनोकॉम्पोजिट के सभी कंपोनेंट्स को एक समान कैसे मिलाया गया? इस नैनोकॉम्पोजिट के सभी कंपोनेंट्स को एल्युमिनियम के साथ अच्छी तरह मिलाने के लिए हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स यानी तेज ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया गया. इन वेव्‍स की मदद से सभी छोटे-छोटे कंपोनेंट पूरे मिक्‍सचर में बराबर फैल जाते हैं. इससे यह भी सुनिश्चित होता है कि मैटेरियल के हर हिस्से में एक जैसी मजबूती बनी रहें।  इस मैटेरियल को मजबूत बनाने के लिए आगे कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई? सभी कंपोनेंट्स को मिलाने के बाद इस मिक्‍सचर को बिना ऑक्सीजन वाले इंवायमेंट में रखा गया. फिर इसे ज्यादा टैंपरेचर और प्रेशर पर गर्म करके दबाया गया. इस प्रक्रिया से कंपोनेंट आपस में मजबूती से जुड़ गए और एक मजबूत मैटेरियल तैयार हुआ. ऑक्सीजन न होने से मैटेरियल में किसी तरह का ऑक्सीनाइजेशन नहीं हुआ, जिससे इसकी गुणवत्ता बनी रही।  इस शोध को किन वैज्ञानिकों ने पूरा किया और इसका नेतृत्व किसने किया? इस रसिर्च का नेतृत्व प्रोफेसर सैयद नसीमुल आलम ने किया. उनके साथ डॉ. अर्का घोष, डॉ. आशुतोष दास, डॉ. पंकज श्रीवास्तव, नित्यानंद साहू और पार्थ पटेल जैसे कई शोधकर्ता शामिल थे. इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका के एक वैज्ञानिक ने भी इस प्रोजेक्ट में अपना योगदान दिया. यह एक ऐसा टीम वर्क है, जिसमें अलग-अलग विशेषज्ञों ने मिलकर इस बेहतरीन तकनीक को तैयार किया है।  इस नए मैटेरियल की खासियतें क्या हैं और यह कैसे घिसाव को कम करता है? प्रोफेसर आलम के अनुसार, यह नया मैटेरियल घिसाव को काफी हद तक कम करता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी सतह पर एक पतली सुरक्षात्मक परत बन जाती है, जो इसे जल्दी खराब होने से बचाती है. इसके अलावा इसका अंदरूनी ढांचा बहुत मजबूत होता है, जिससे यह भार को सही तरीके से संभाल सकता है. यही गुण इसे लंबे समय तक टिकाऊ और भरोसेमंद बनाते हैं, खासकर उन जगहों पर जहां लगातार घर्षण होता है।