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नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरुंग का इस्तीफा, तीन हफ्ते में करप्शन के आरोप, राजनीति में आए थे क्रांति से

 काठमांडू नेपाल में प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार से जनता के असंतोष के बीच बड़ी खबर है. नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने पद से इस्तीफा दे दिया है। गुरुंग पर आय से अधिक संपत्ति से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग तक कई तरह के आरोप लगे हैं. उन पर विवादित कारोबारी से जुड़ी कंपनियों के शेयर खरीदने के भी आरोप हैं. गुरुंग ने अपना इस्तीफा पीएम बालेन शाह को सौंप दिया है. उन्होंने इस्तीफे की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए दी।  बता दें कि नेपाल के पीएम बालेन शाह ने नियुक्त होते ही उसी दिन मंत्रिपरिषद का गठन किया था और गुरुंग को गृहमंत्री नियुक्त किया था. पद संभालते ही कई उच्च कर्मचारियों की गिरफ्तारी कर चर्चा में आए गुरुंग हाल के दिनों में लगातार आलोचनाओं के केंद्र में रहे हैं।  विपक्ष ने उठाए सवाल एनसी के प्रवक्ता देवराज चालिसे ने कहा कि मंत्रियों की संपत्ति से जुड़े सवालों का जवाब विश्वसनीय और सबूतों पर आधारित जांच के जरिए दिया जाना चाहिए। पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र के मूल स्तंभ हैं। इसलिए ऐसे मामलों में मंत्री इस्तीफा दें और एक विश्वसनीय, निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित जांच की जाए। एनसी ने कहा कि इस मुद्दे ने एक गंभीर चिंता पैदा कर दी है और राजनीतिक नैतिकता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। सरकार इसमें तुरंत एक स्वतंत्र, उच्च-स्तरीय जांच शुरू करे। गुरुंग का पद पर बने रहना जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह पैदा कर सकता है और संभावित रूप से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव डालने का मौका दे सकता है। सुदन से इस्तीफे की मांग राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP) के अध्यक्ष राजेंद्र लिंगडेन ने सरकार से गुरुंग के भट्ट के साथ कथित संबंधों पर स्पष्टीकरण की मांग की है। लिंगडेन ने कहा कि सरकार और सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) दोनों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। गृह मंत्री को अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए और पार्टी नेतृत्व को भी अपना रुख बताना चाहिए। गुरुंग के पास भट्ट से जुड़ी स्टार माइक्रो इंश्योरेंस में शेयर रखने के मामले पर GenZ रेड फोर्स नेपाल ने नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि गुरुंग का पद पर बने रहना जनता के विश्वास को कमजोर करता है और जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। रविवार को सार्वजनिक हुए दस्तावेजों से पता चला कि गुरुंग के पास अपने नाम से स्टार माइक्रो इंश्योरेंस और लिबर्टी माइक्रो इंश्योरेंस में शेयर हैं। मेरे ऊपर लगे आरोप और इससे जुड़ी मीडिया रिपोर्ट प्रायोजित अफवाहें हैं। कुछ भ्रष्ट लोग अपने खिलाफ चल रही कार्रवाई से घबराए हुए हैं। ऐसे में वे जान-बूझकर इस तरह की भ्रामक जानकारियां फैला रहे हैं। ऐसा है गुरुंग का स्पष्टीकरण मेरे नाम से जुड़े विषय पर स्पष्टीकरण- पिछले कुछ दिनों में मेरे नाम को जोड़कर विभिन्न चर्चाएं हो रही हैं। विषय को थोड़ा जटिल ढंग से प्रस्तुत किया गया है, इसलिए मैं इसे सरल भाषा में स्पष्ट करना चाहता हूँ। स्पष्ट बात यह है कि अफवाहें बहुत हैं, लेकिन तथ्य क्या है, यह समझना जरूरी है। “25 लाख के शेयर छिपाने” की बात कही गई है। वास्तविकता यह है कि सभी शेयर एक ही प्रकृति के नहीं होते। मैंने शेयर बाजार में कारोबार करने वाले शेयरों के रूप में 2 करोड़ से अधिक का निवेश संपत्ति विवरण में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है, जिसे कोई भी मंत्रिमंडल की वेबसाइट पर देख सकता है। स्टार माइक्रो इंश्योरेंस और लिबर्टी माइक्रो में किया गया निवेश भी इसी समूह के अंतर्गत आता है। यह छिपाने का नहीं, बल्कि वर्गीकरण का विषय है। सीधी बात है, छिपाने वाला व्यक्ति खुले तौर पर 2 करोड़ से अधिक की संपत्ति नहीं दिखाता। मंत्री बनने से पहले शेयर खरीदने की बात कही गई है। इस देश में शेयर में निवेश करना कब से अपराध हो गया? पूरा लेनदेन बैंकिंग चैनल के माध्यम से हुआ है। बैंक से गए पैसे का पूरा हिसाब होता है। कब गया, कहाँ गया, किसे गया, सब दिखता है। ऐसे हिसाब वाले पैसे को कैसे छिपाएं? कहाँ छिपाएं? अब स्रोत की बात, मैंने निवेश की गई राशि ऋण (कर्ज) के माध्यम से जुटाई है, और उसका लिखित दस्तावेज दिनांक 2080/05/29 का है, जो रिकॉर्ड में ही है। उक्त दस्तावेज के अनुसार ऋण ली गई राशि बैंकिंग चैनल के माध्यम से आई है और उसी राशि का निवेश में उपयोग किया गया है। यानी, पैसा कहाँ से आया, यह अनुमान का नहीं, बल्कि कागज और बैंक रिकॉर्ड से प्रमाणित होने वाला विषय है। “विवादित व्यक्ति के साथ साझेदारी” की बात कही गई है। एक ही कंपनी में सैकड़ों-हजारों शेयर होल्डर होते हैं। शेयर खरीदना सभी के साथ साझेदारी करना नहीं है। यदि उसी को आधार माना जाए, तो उसी कंपनी में निवेश करने वाले सभी को एक ही रूप में दोषी ठहराना होगा, जो न्यायोचित नहीं है। उसी कंपनी में मीडिया हाउस से लेकर बैंक तक के निवेश हैं। क्या वे सभी साझेदार या दोषी हैं? प्रश्न सरल है, शेयर होल्डर होना अपराध है, या चुन-चुनकर आरोप लगाना? “Conflict of interest” (हितों का टकराव) का आरोप भी उठाया गया है। लेकिन इस विषय की जांच करने वाली संस्था गृह मंत्रालय नहीं, बल्कि वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला संपत्ति शुद्धिकरण विभाग है, और वही संस्था प्रक्रिया के अनुसार विषय को देख रही है। यदि मैंने कोई हस्तक्षेप किया होता, तो ऐसी जांच प्रक्रिया ही आगे नहीं बढ़ती। इसका अर्थ स्पष्ट है, प्रक्रिया चल रही है, प्रभाव नहीं। “पृष्ठभूमि की जांच किए बिना निवेश” की बात भी उठाई गई है। व्यावसायिक निवेश में भविष्य की सभी स्थितियों का पहले से पता नहीं होता। हर निवेश में जोखिम होता है। बाद में हुई घटना को पहले किए गए निर्णय का दोष बनाना, यह तथ्य नहीं, बल्कि सुविधा के अनुसार की गई व्याख्या है। “प्रतिक्रिया न देने” को भी प्रश्न बनाया गया है। कानूनी रूप से संवेदनशील विषय पर जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देना उचित नहीं होता। अफवाहें जल्दी फैलती हैं, लेकिन सत्य प्रमाण के साथ ही आता है। “पार्टी का नारा और व्यवहार अलग हो गया” जैसी टिप्पणी भी की गई है। व्यक्तिगत निवेश को बिचौलियों के साथ मिलीभगत के रूप में व्याख्या करना उचित नहीं है। निवेश करना और बिचौलियापन करना अलग बातें … Read more

‘लोकतंत्र को खतरे में डालने का आरोप’, SC ने ममता बनर्जी को मतदान से पहले दी फटकार

नई दिल्ली  पश्चिम बंगाल में चुनावी शोर के बीच सुप्रीम कोर्ट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बड़ी और झकझोर देने वाली खबर आई है. अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री के आचरण पर बेहद सख्त और तीखी टिप्पणी की है. जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने ममता बनर्जी को फटकार लगाते हुए कहा कि जांच के बीच में हस्तक्षेप करना गंभीर मामला है. यह पूरा विवाद कोलकाता में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की सर्च कार्रवाई से जुड़ा है. कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि किसी राज्य का मुख्यमंत्री जांच की प्रक्रिया में बाधा नहीं डाल सकता. इस मामले ने अब कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणियां ममता सरकार के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकती हैं।  ‘मुख्यमंत्री ने जांच के बीच दखल देकर सिस्टम को खतरे में डाला’ सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बेहद हैरान करने वाली बात कही है. बेंच ने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि देश में ऐसा दिन भी आएगा जब कोई मुख्यमंत्री खुद जांच के बीच में दखल देगा. कोर्ट के मुताबिक यह राज्य बनाम केंद्र का विवाद बिल्कुल नहीं है. यह एक ऐसा मामला है जहां एक व्यक्ति, जो मुख्यमंत्री के पद पर है, वह जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है।  अदालत ने इसे सीधे तौर पर लोकतंत्र के लिए खतरा करार दिया है. जस्टिस मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस कृत्य ने पूरे सिस्टम को जोखिम में डाल दिया है।  सुनवाई के दौरान टीएमसी की ओर से दलील दी गई कि यह मामला संघीय विवाद से जुड़ा है. हालांकि कोर्ट इस तर्क से बिल्कुल सहमत नजर नहीं आया. कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी मुख्यमंत्री जांच के बीच नहीं जा सकता. आप इसे केंद्र-राज्य का विवाद बताकर अपना बचाव नहीं कर सकते हैं।  बेंच ने संविधान विशेषज्ञों का जिक्र करते हुए कहा कि सीरवाई और आंबेडकर जैसे दिग्गजों ने भी ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं की होगी. किसी ने नहीं सोचा था कि एक मौजूदा मुख्यमंत्री खुद जांच के दौरान दफ्तर में पहुंच जाएगा।  क्या इस मामले की सुनवाई अब पांच जजों की बड़ी बेंच करेगी? टीएमसी की वकील मेनका गुरुस्वामी ने इस याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए और मामले को 5 जजों की बेंच के पास भेजने की मांग की. सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को भी सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने पूछा कि आखिर इसमें ऐसा कौन सा बड़ा संवैधानिक सवाल है जिसे बड़ी बेंच को भेजा जाए? अदालत ने साफ किया कि हर अनुच्छेद 32 की याचिका को बड़ी बेंच को नहीं सौंपा जा सकता. यह सुनवाई ईडी अधिकारियों द्वारा दायर उन याचिकाओं पर हो रही है जिनमें सीबीआई जांच की मांग की गई है। 

EVM के बटन पर गोंद या परफ्यूम लगाना पड़ा महंगा, बंगाल चुनाव से पहले EC ने कसी नकेल

कोलकाता भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मतदान केंद्रों पर तैनात पीठासीन अधिकारियों को कई कड़े निर्देश जारी किए हैं। ये निर्देश मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बटनों के साथ होने वाली छेड़छाड़ को रोकने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए दिए गए हैं। ये हैं EVM बटनों से छेड़छाड़ रोकने के लिए सख्त नियम- सभी उम्मीदवार बटन स्पष्ट रूप से दिखने चाहिए बैलट यूनिट पर लगे हर उम्मीदवार के बटन पूरी तरह से खुलकर और साफ-साफ दिखाई देने चाहिए। किसी भी बटन को टेप, गोंद, चिपकने वाले पदार्थ या किसी अन्य सामग्री से ढकना या छिपाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। आयोग का कहना है कि मतदाता को अपना वोट डालने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए और यह सुनिश्चित होना चाहिए कि कोई भी बटन जानबूझकर छिपाकर मतदान को प्रभावित न किया जाए। बटन पर कोई रंग, स्याही, परफ्यूम या केमिकल नहीं लगाया जाएगा बैलट यूनिट के उम्मीदवार बटन पर किसी भी प्रकार का रंग, स्याही, परफ्यूम (इत्र), केमिकल या अन्य कोई पदार्थ लगाना निषिद्ध है। ऐसा करने का उद्देश्य वोट की गोपनीयता भंग करना हो सकता है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाएगा। कभी-कभी कुछ लोग बटन पर ऐसे पदार्थ लगाकर बाद में पता लगाने की कोशिश करते हैं कि किस बटन को दबाया गया था, जिससे मतदान की गोपनीयता खतरे में पड़ जाती है। आयोग इसे वोट की पवित्रता पर हमला मानता है। कोई भी अनियमितता मिलने पर तुरंत सूचना दें यदि प्रिसाइडिंग अधिकारी को मतदान केंद्र पर ऊपर बताई गई कोई भी बात नजर आए, जैसे बटन ढका हुआ हो या उस पर कोई पदार्थ लगा हो तो उन्हें तुरंत सेक्टर अधिकारी या रिटर्निंग अधिकारी को सूचित करना होगा। यह चुनावी अपराध है आयोग ने साफ कहा है कि ऐसे सभी मामले को EVM से छेड़छाड़ माना जाएगा जो चुनावी अपराध है। आयोग ने चेतावनी दी है कि वह ऐसे दोषियों के खिलाफ सख्त फौजदारी कार्रवाई करने में बिल्कुल नहीं हिचकेगा। तुरंत रिपोर्टिंग और पुनर्मतदान की चेतावनी पीठासीन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि यदि उन्हें मतदान केंद्र पर ऐसी किसी भी संदिग्ध घटना का पता चलता है, तो वे बिना देरी किए संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर को इसकी सूचना दें। चुनाव आयोग ने चेतावनी दी है कि वह ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। यदि किसी बूथ पर ऐसी घटना की पुष्टि होती है, तो आयोग वहां पुनर्मतदान का आदेश भी दे सकता है। आगामी विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम चुनाव आयोग के ये निर्देश पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में होने वाले मतदान से ठीक पहले लागू किए गए हैं। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में गुरुवार 23 अप्रैल को मतदान होगा। बंगाल में दो चरणों में चुनाव हो रहा है। दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को निर्धारित है। केरल, पुडुचेरी और असम में इस महीने की शुरुआत में ही मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इन सभी राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया है कि चुनाव संपन्न कराने में लगे किसी भी अधिकारी की ओर से यदि कोई लापरवाही, कदाचार, पक्षपात या विफलता पाई जाती है तो इसे बेहद गंभीरता से लिया जाएगा। चूक की गंभीरता के आधार पर कानून के तहत कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

केदारनाथ धाम के कपाट खुलते ही महादेव का जयकारा, दर्शनार्थियों पर हुई पुष्प वर्षा

रुद्रप्रयाग केदारनाथ धाम के कपाट खुलते ही पूरा धाम हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। इसी के साथ केदारनाथ यात्रा का शुभारंभ हो गया। कपाटोद्घाटन के सैकड़ों श्रद्धालु साक्षी बने। बाबा केदार के धाम को को करीब 51 कुंतल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है, जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहले ही धाम पहुंच चुके थे और कपाट खुलने के इस अद्भुत क्षण साक्षी बने। बाबा के कपाट खुलने से हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई।विश्व प्रसिद्ध श्री केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार प्रातः शुभ मुहूर्त में ठीक 8 बजे वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। इसी के साथ केदारनाथ यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया। कपाट खुलने के इस पावन अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे। इस दौरान हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने और पूरा धाम भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान हो उठा। प्रातः लगभग 4 बजे से ही धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हो गए थे। पंचमुखी डोली की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद भगवान की डोली को मंदिर प्रांगण में लाया गया, जहां निर्धारित प्रक्रिया के तहत कपाट खोलने की तैयारियां पूरी की गईं।ठीक 8 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही सर्वप्रथम भगवान की पंचमुखी डोली को गर्भगृह में प्रवेश कराया गया और सभी धार्मिक औपचारिकताओं के पश्चात भगवान केदारनाथ विधिवत विराजमान हुए। कपाट खुलने के दौरान हेलीकॉप्टर से मंदिर पर भव्य पुष्प वर्षा की गई, जिसने श्रद्धालुओं के उत्साह और आस्था को और भी बढ़ा दिया।इस भव्य आयोजन के साथ ही बाबा केदार के दर्शन के लिए देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं का सिलसिला शुरू हो गया है।श्रद्धा, आस्था और भक्ति के इस अद्भुत संगम ने पूरे केदारनाथ धाम को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।  

गडकरी ने पेश किया नया विजन: 100% इथेनॉल पेट्रोल से चलेगी कारें, कंपनियों को होंगे बड़े चैलेंज

नई दिल्ली देश के अंदर अब E20 यानी 20% इथेनॉल मिक्स पेट्रोल मिलने लगा है। सरकार पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा को धीरे-धीरे करके बढ़ाएगी। हालांकि, अब सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भारत से पेट्रोल में "100% इथेनॉल ब्लेंडिंग" की तरफ बढ़ने का एक अपील की है। उन्होंने इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी के ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉन्क्लेव में बोलते हुए कहा कि ऊर्जा के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर होना अब सिर्फ एक पर्यावरणीय लक्ष्य नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बेहद जरूरी है। गडकरी का ये बयान ऐसे समय में आया हैं जब ग्लोबल एनर्जी मार्केट पश्चिम एशिया में चल रहे लंबे संघर्ष से जूझ रहे हैं, जिसने पारंपरिक तेल सप्लाई चेन को काफी हद तक बाधित कर दिया है। साथ ही, आयात बिलों को बढ़ा दिया है। उनके इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य का मुख्य कारण जीवाश्म ईंधन के आयात पर भारत की भारी निर्भरता है। वर्तमान में देश अपनी तेल जरूरतों का लगभग 87% आयात के जरिए पूरा करता है, जिससे सरकारी खजाने से सालाना लगभग 22 लाख करोड़ रुपए खर्च हो जाते हैं। अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाना गडकरी ने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे "संकट" ने इस व्यवस्था की कमजोरी को उजागर कर दिया है, जिससे भारत के लिए अपने ट्रांसपोर्ट सेक्टर को इंटरनेशनल कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से अलग करना जरूरी हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि 100% इथेनॉल (E100) मॉडल की तरफ बढ़कर (जैसा ब्राजील में सफलतापूर्वक लागू किया गया है) भारत अपने विशाल कृषि अधिशेष का लाभ उठा सकता है। यह बदलाव न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि किसानों को "अन्नदाता" से "ऊर्जादाता" में बदलकर उन्हें सीधा आर्थिक बढ़ावा भी देगा। ICE इंजन में बदलाव की जरूरत भारत ने पिछले तीन सालों में अपने बायोफ्यूल प्रोग्राम में तेजी से प्रगति की है। 1 अप्रैल, 2026 को पूरे देश में E20 (20% इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल) को लागू करने के बाद, सरकार अब अगले लक्ष्य की ओर देख रही है। जहां E20 का उपयोग मौजूदा इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) में मामूली बदलावों के साथ किया जा सकता है। वहीं E100 या E85 की ओर बढ़ने के लिए फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFVs) की तरफ एक मजबूत बदलाव की आवश्यकता है। गडकरी ने बताया कि आने वाले CAFE III (कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता) स्टैंडर्ड, जो 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले हैं, ये इलेक्ट्रिक और फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी को अपनाने के लिए प्रोत्साहन देंगे। बताया जा रहा है कि E85 फ्यूल के लिए एक मसौदा अधिसूचना पहले से ही अंतिम चरण में है, जो इस बात का संकेत है कि हाी ब्लेंडिंग स्तरों के लिए बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दी जा रही है। अल्टरनेटिव फ्यूल को बढ़ावा गडकरी ने साफ किया कि जहां एक तरफ सरकार अल्टरनेटिव फ्यूल को बढ़ावा दे रही है। वहीं, ग्राहकों को इस बदलाव के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसके बजाय, ध्यान टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट की क्वालिटी को बेहतर बनाने पर होगा, ताकि ग्रीन गाड़ियां ज्यादा आकर्षक लगें। मैन्युफैक्चरर्स के लिए चुनौती ऐसे इंजन बनाने में है जो ज्यादा इथेनॉल कंसंट्रेशन को संभाल सकें, क्योंकि यह आम पेट्रोल के मुकाबले ज्यादा कोरोसिव होता है। ग्रीन हाइड्रोजन में भी संभावनाएं इथेनॉल के अलावा, गडकरी ने ग्रीन हाइड्रोजन की संभावनाओं को भी "फ्यूचर फ्यूल" के तौर पर खास तौर पर बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर प्रोडक्शन लागत को घटाकर लगभग $1 प्रति किलोग्राम तक लाया जा सके, तो यह भारी ट्रांसपोर्ट सेक्टर में क्रांति ला सकता है। हालांकि, अभी के लिए, इथेनॉल ही "जहरीले" फॉसिल फ्यूल का सबसे ज्यादा मुमकिन और तुरंत मिलने वाला ऑप्शन बना हुआ है। यह एक ऐसा सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल पेश करता है जो खेती के कचरे को भारत के भविष्य की तरक्की के लिए ईंधन में बदल देता है।

मोजतबा खामेनेई का अंत! ईरान में जो डर था, वही हुआ, IRGC ने किया बड़ा कांड, क्या ट्रंप का सपना सच हुआ?

तेहरान  ईरान में जिसका डर था, लगता है वह खेल हो गया. अमेरिका ने ईरान पर अटैक कर सियासी तौर पर दो फाड़ करवा दिया है. अमेरिका ईरान में रिजीम चेंज करना चाहता था. ईरानी सरकार और सेना में तकरार से ऐसा लग रहा कि डोनाल्ड ट्रंप का मकसद पूरा होने वाला है. जी हां, ईरान में खामेनेई की सत्ता पर अब किसी और का कंट्रोल हो गया है. खुद ईरान की सेना यानी आईरजीसी ने ही ईरान की सत्ता पर कंट्रोल कर लिया है. ईरान में अब मोजतबा खामेनेई की नहीं चल पा रही है. उन्हें साइडलाइन कर दिया गया है. पेजेशकियान भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं. आईआरजीसी ने खामेनेई को सरकार से अलग-थलग कर दिया है और सरकारी कामकाज पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है. कई रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. ईरान में यह सबकुछ तब हो रहा, जब अमेरिका बातचीत का दूसरा दौर शुरू करने को बेताब है. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आज यानी बुधवार को अमेरिका-ईरान की वार्ता होने वाली है।  दरअसल, जब से अमेरिका-इजरायल ने मिलकर ईरान पर अटैक किया है, तब से तेहरान में सियासी अनिश्चितता छाई हुई है. ईरान पर अभी किसका कंट्रोल है, किसी को कुछ नहीं समझ आ रहा. आपसी सियासी तकरार अब उभरने लगी हैं. 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका के हमलों में पुराने सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इसके बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बना दिया गया. लेकिन उनकी हालत और जगह के बारे में साफ जानकारी नहीं मिल रही है. वे पिछले कई हफ्तों से सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं. कुछ अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वे गंभीर रूप से घायल या असमर्थ हो सकते हैं।  ईरान की सत्ता पर किसका कंट्रोल? टाइम्स ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट्स के हवाले से दावा किया कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कथित तौर पर देश के प्रमुख कामकाज पर नियंत्रण कर लिया है. ऐसा करके ईरानी सेना ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान को किनारे कर दिया है. उन्हें पूरी तरह से राजनीतिक गतिरोध में धकेल दिया है, क्योंकि सेना देश के सत्ता के मुख्य केंद्रों पर अपनी पकड़ मजबूत कर रही है. इतना ही नहीं, मोजतबा खामेनेई के दखल को भी रोक दिया है. ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, आईआरजीसी (IRGC) ने राष्ट्रपति की नियुक्तियों और फैसले को रोक दिया है. साथ ही सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बना दिया है, जिससे खामेनेई सरकार प्रभावी रूप से कार्यकारी नियंत्रण से बाहर हो गई है।  IRGC ने खुफिया मंत्री की नियुक्ति रोक दी फॉक्स न्यूज और ईरान इंटरनेशनल ने बताया कि ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान पिछले गुरुवार को एक नए खुफिया मंत्री को नियुक्त करना चाहते थे. मगर आईआरजीसी के मुख्य कमांडर अहमद वाहिदी ने इसमें हस्तक्षेप किया और उनके प्रयास को विफल कर दिया. हुसैन देहगान सहित सभी प्रस्तावित उम्मीदवारों को खारिज कर दिया गया।  फॉक्स न्यूज के अनुसार, आईआरजीसी के मुख्य कमांडर अहमद वाहिदी ने जोर देकर कहा कि युद्ध जैसी स्थितियों को देखते हुए सभी महत्वपूर्ण और संवेदनशील नेतृत्व पदों का चयन और उन पर निगरानी सीधे आईआरजीसी द्वारा की जानी चाहिए, जब तक कि कोई और आदेश न आ जाए. ईरान की राजनीतिक व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति आमतौर पर खुफिया मंत्रियों को तभी नामित करते हैं जब उन्हें सुप्रीम लीडर की मंजूरी मिल जाती है, क्योंकि इस पद के पास प्रमुख सुरक्षा विभागों पर अंतिम अधिकार होता है।  ईरानी सुप्रीम लीडर कहां हैं?  हाल के समय में सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का कोई अता-पता नहीं है. न तो उनके लोकेशन की जानकारी है और न ही उनके स्वास्थ्य की. कई बार मीडिया रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि वह तेहरान में ही हैं और घायल हैं. मोजतबा खामेनेई के बारे में स्पष्ट जानकारी न होने के कारण ईरानी सेना प्रभावी रूप से राष्ट्रपति को उनके पसंदीदा उम्मीदवार को आगे बढ़ाने से रोक रहा है, जिससे ईरान की सुरक्षा व्यवस्था पर उसकी पकड़ और मजबूत हो गई है।  गौरतलब है की अमेरिकी अटैक के बाद से मोजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से दुनिया के सामने नहीं आए हैं. वह जिंदा हैं या नहीं हैं, कहां हैं और कहां नहीं, इसे लेकर भी अनिश्चितता है. फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार, कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे शायद काम करने में असमर्थ हो गए हैं. रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरानी सेना आईआरजीसी के वरिष्ठ कमांडरों के नेतृत्व वाली एक ‘सैन्य परिषद’ ने उन तक पहुंच को सीमित कर दिया है, जिससे वे प्रभावी रूप से सरकारी अधिकारियों से अलग-थलग पड़ गए हैं और सूचनाओं का आदान-प्रदान भी सीमित हो गया है।  खामेनेई की मृत्यु के बाद सत्ता का खालीपन फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद स्थिति और भी गंभीर हो गई है. इससे ईरानी व्यवस्था के शीर्ष पर नेतृत्व का एक खालीपन पैदा हो गया है. हालांकि यह माना जा रहा है कि उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने एक प्रमुख भूमिका संभाल ली है, लेकिन उनकी ओर से सार्वजनिक रूप से बहुत कम उपस्थिति या कोई आधिकारिक संचार देखने को मिला है. विश्वसनीय सूत्रों ने ईरान इंटरनेशनल को बताया कि ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान ने हाल के दिनों में मोजतबा खामेनेई के साथ एक आपात बैठक करने की बार-बार कोशिश की है, लेकिन उनके सभी अनुरोधों का कोई जवाब नहीं मिला है और उनसे कोई संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है।  मोजतबा खामेनेई के चारों ओर एक घेरा फॉक्स न्यूज और ईरान इंटरनेशनल ने बताया कि आईआरजीसी के सीनियर अधिकारियों से बनी एक सैन्य परिषद अब मुख्य निर्णय लेने वाली संरचना पर पूर्ण नियंत्रण रखती है. यह परिषद मोजतबा खामेनेई के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बनाए हुए है और देश की स्थिति पर सरकारी रिपोर्टों को उन तक पहुंचने से रोक रही है. इसी बीच बताया जा रहा है कि मोजतबा खामेनेई के करीबी लोगों के घेरे में एक अभूतपूर्व आंतरिक संकट उभर रहा है. ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ करीबी सहयोगी अली असगर हेजाजी को हटाने के लिए जोर डाल रहे हैं. हेजाजी … Read more

गर्लफ्रेंड ने वीडियो बनाई, बॉयफ्रेंड जलता रहा; वेस्टर्न स्टाइल रोमांस के चक्कर में हुई यह घटना

बेंगलुरु किरण और 27 साल की प्रेरणा पिछले एक साल से रिलेशनशिप में थे। दोनों ही एक ही टेलीकॉम कंपनी में साथ काम करते थे।  जब प्रेरणा का भाई और मां घर पर नहीं थे, तब उसने किरण को अपने घर बुलाया। पुलिस जांच के अनुसार, प्रेरणा ने किरण को एक विदेशी स्टाइल में प्रपोजल देने के लिए कहा। उसने किरण को एक कुर्सी पर बैठाया और उसके हाथ-पैर बांधने शुरू कर दिए। जब किरण ने हाथ-पैर कसकर बांधने पर सवाल उठाया, तो प्रेरणा ने उसे यह कहकर शांत कर दिया कि यह एक रोमांटिक सरप्राइज का हिस्सा है। किरण ने अपनी प्रेमिका पर भरोसा किया और विरोध नहीं किया। जैसे ही किरण पूरी तरह असहाय हुआ कि प्रेरणा ने उसके ऊपर पेट्रोल छिड़क दिया और आग लगा दी। कुर्सी से बंधे होने के कारण किरण के पास बचने का कोई रास्ता नहीं था और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पुलिस ने खुलासा किया है कि यह केवल एक हत्या नहीं थी, बल्कि एक विकृत मानसिकता का प्रदर्शन था। सबसे विचलित करने वाली बात यह है कि जब किरण आग की लपटों में घिरा हुआ था तो आरोपी प्रेरणा अपने मोबाइल फोन से पूरी घटना का वीडियो बना रही थी। पुलिस को संदेह है कि पेट्रोल पहले से ही घर में लाकर रखा गया था। यह साबित करता है कि यह क्षण भर के गुस्से में की गई वारदात नहीं बल्कि एक सोची-समझी हत्या थी। हत्या के पीछे का मकसद प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि प्रेरणा इस बात से बेहद नाराज थी कि किरण उसे नजरअंदाज कर रहा था और उसने शादी करने से इनकार कर दिया था। इसी गुस्से और बदले की भावना ने उसे इस क्रूर कदम को उठाने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में प्रेरणा ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। उसने दावा किया कि वह वॉशरूम में थी और बाहर निकलने पर उसने किरण को जलते हुए पाया। हालांकि, सीसीटीवी फुटेज और फोरेंसिक सबूतों ने उसके झूठ की पोल खोल दी, क्योंकि किरण अपने साथ कोई ज्वलनशील पदार्थ लेकर नहीं आया था। पुलिस ने प्रेरणा को हिरासत में ले लिया है। हत्या का मोबाइल वीडियो पुलिस के लिए सबसे बड़ा सबूत बन गया है।

पहलगाम नरसंहार रोक सकते थे ये दो लोग, 3000 रुपये के लालच में इन्होंने की गद्दारी

पहलगाम  22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए खौफनाक आतंकी हमले में 26 नागरिकों को उनके परिवारों के सामने ही बेरहमी से भून दिया गया था। अब इस मामले की जांच में एक बेहद चौंकाने वाला और दुखद पहलू सामने आया है। जांच से पता चला है कि अगर जेल में बंद दो स्थानीय कश्मीरी निवासियों ने समय रहते पुलिस को सूचना दी होती, तो इस भीषण नरसंहार को आसानी से रोका जा सकता था। चंद रुपयों के लिए आतंकियों को दी पनाह इस मामले में गिरफ्तार किए गए दो स्थानीय लोगों की पहचान परवेज अहमद और बशीर अहमद जोथड के रूप में हुई है। जांच में यह बात सामने आई है कि इन दोनों ने महज 3000 रुपये के लालच में तीन पाकिस्तानी आतंकियों को अपने घर में पनाह दी थी और उनकी मदद की थी। 21 अप्रैल की रात यानी हमले से ठीक एक रात पहले तीनों आतंकी इन दोनों के घर आए थे। उन्होंने वहां करीब 5 घंटे बिताए और खाना भी खाया। बातचीत के दौरान आतंकी पाकिस्तानी लहजे वाली उर्दू-पंजाबी मिश्रित भाषा बोल रहे थे। उनके पास अत्याधुनिक हथियार थे और वे 'अली भाई' नाम के शख्स का जिक्र कर रहे थे। अली भाई असल में लश्कर-ए-तैयबा के द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का शीर्ष कमांडर और मुख्य आरोपी साजिद जट्ट है, जो पाकिस्तान के कसूर इलाके का रहने वाला है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रात करीब 10:30 बजे आतंकी वहां से निकले। जाते समय उन्होंने अपने साथ कुछ खाना पैक किया और खाना पकाने का बर्तन, कंबल व तिरपाल भी साथ ले गए। इन सब संदिग्ध हरकतों के बावजूद परवेज और बशीर ने चुप्पी साधे रखी। हमले वाले दिन आतंकियों को देखा, फिर भी रहे खामोश हमले वाले दिन (22 अप्रैल, 2025) दोपहर करीब 12:30 बजे- यानी कत्लेआम शुरू होने से कुछ घंटे पहले परवेज और बशीर ने तीनों आतंकियों को बैसरन में एक बाड़ के पीछे छिपते हुए देखा था। इन आतंकियों की पहचान बाद में फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी के रूप में हुई। यह पूरी तरह से स्पष्ट था कि इलाके में एक बड़ा आतंकी हमला होने वाला है। वे चाहते तो तुरंत पुलिस या स्थानीय टूरिस्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन को इसकी सूचना दे सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। वे अपने घोड़ों (टट्टुओं) के साथ वहां से दूर चले गए और अपने पर्यटक ग्राहकों के लौटने का इंतजार करने लगे। दोपहर 1:00 बजे से 1:30 बजे के बीच, उन्होंने पर्यटकों को घोड़ों पर बिठाकर वापस पहलगाम सुरक्षित पहुंचा दिया। हमले के बाद फरार और एनआईए की कार्रवाई जब इन दोनों को बैसरन में हुए दिल दहला देने वाले कत्लेआम की खबर मिली, तो वे समझ गए कि यह काम उन्हीं आतंकियों ने किया है जिन्हें उन्होंने पनाह दी थी। खुद को बचाने के लिए वे तुरंत अपनी 'ढोक' (पहाड़ों पर बनी अस्थायी झोपड़ी) छोड़कर वहां से भाग गए और छिप गए। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने आखिरकार उन्हें ढूंढ निकाला और 22 जून, 2025 को दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पाकिस्तान का सीधा कनेक्शन और चार्जशीट दिसंबर 2025 में एनआईए ने इस मामले में चार्जशीट (आरोप पत्र) दायर की। इस चार्जशीट में परवेज अहमद और बशीर अहमद के साथ-साथ मुख्य साजिशकर्ता साजिद जट्ट, तीनों पाकिस्तानी हमलावरों (जो अब मारे जा चुके हैं) और लश्कर/TRF को एक आतंकी संगठन के तौर पर नामजद किया गया है। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने बताया कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान का सीधा हाथ होने की पुष्टि फेसबुक द्वारा दी गई जानकारी से भी हुई है। भारत में एक भ्रामक पोस्ट फैलाई गई थी जिसमें दावा किया गया था कि 'जिब्रान हमारा आदमी था'। फेसबुक की जांच में यह पोस्ट पाकिस्तान के रावलपिंडी और बहावलपुर के फोन नंबरों से जुड़ी पाई गई, जो इस हमले में पाकिस्तानी साजिश का एक और पुख्ता सबूत है।

पाकिस्तानी मिसाइल दिल्ली की ओर बढ़ी, लेकिन कैसे रास्ते में हुई ढेर? ऑपरेशन सिंदूर ने खोला राज

 नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के वक्त दिल्ली की तरफ बढ़ती उस पाकिस्तानी मिसाइल को शायद यह अंदाज़ा नहीं था कि वह हिंदुस्तान की सरहद नहीं, बल्कि जज़्बे की दीवार से टकराने जा रही है. हरियाणा के आसमान में ही उसे मिट्टी में मिलाकर इंडियन एयरफोर्स ने साबित कर दिया था कि भारत पर आंख उठाने वालों का अंजाम क्या होता है. ऑपरेशन सिंदूर की यह कहानी सिर्फ एक सैन्य सफलता नहीं, बल्कि दुश्मन के लिए सख्त पैगाम है कि अगर कोई हमारे घर की तरफ बढ़ेगा, तो उसका नाम और निशान दोनों नहीं बचेगा।  इंडियन एयरफोर्स ने मई 2025 में पाकिस्तान की तरफ से दागी गई फतेह या शाहीन सीरीज की बैलिस्टिक मिसाइल को दिल्ली पहुंचने से पहले ही हरियाणा के ऊपर सफलतापूर्वक खत्म कर दिया था. यह कार्रवाई पश्चिमी सीमा के पास रणनीतिक रूप से जरूरी सिरसा एयर बेस पर तैनात वायुसेना की यूनिट ने अंजाम दी थी।  एयर कोमोडोर रोहित कपिल के नेतृत्व में एयर डिफेंस ग्रिड ने तत्काल जवाब देते हुए बराक-8 (Barak-8) सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम का उपयोग किया. सिरसा से बरामद मलबे ने उस वक्त इस बड़े खतरे का इशारा किया था. यह सफल ऑपरेशन भारत की सैन्य तत्परता और आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है, जिसने युद्ध के दौरान एक बड़े खतरे को टाल दिया था।  एयर कोमोडोर रोहित कपिल का नेतृत्व इस निर्णायक ऑपरेशन का नेतृत्व 45 विंग के एयर ऑफिसर कमांडिंग, एयर कोमोडोर रोहित कपिल ने किया था. उनके सटीक फैसलों और त्वरित जवाबी कार्रवाई की वजह से ही दिल्ली पर होने वाला हमला नाकाम हो सका. उनकी इस बहादुरी और रक्षात्मक व आक्रामक योजना के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें साल 2025 में 'युद्ध सेवा मेडल' से सम्मानित किया था।  सिरसा की यह घटना भारत के विकसित होते एयर डिफेंस आर्किटेक्चर का एक उदाहरण बन गई है. मौजूदा वक्त में 'सुदर्शन प्रोग्राम' के तहत देश भर में एक मल्टी-लेवल सुरक्षा घेरा तैयार किया जा रहा है. इसमें एस-400, बराक-8 और स्वदेशी इंटरसेप्टर सिस्टम को इंटीग्रेटेड किया जा रहा है. सिरसा इंटरसेप्ट आधुनिक युद्ध में सतर्कता और आपसी कोऑर्डिनेशन की अहमियत की याद दिलाता है। 

गर्मी ने बढ़ाया ‘मेगा अल नीनो’ का डर, 149 साल पहले 4% आबादी का सफाया हुआ था

 नई दिल्ली 1877 के बाद अब तक का सबसे ताकतवर अल-नीनो बन रहा है. उस वक्त इसने पूरी दुनिया में गर्मी की लहरें, सूखा और महामारी फैलाकर पृथ्वी की 4 प्रतिशत आबादी को मार डाला था. अब वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि 2026-27 में यह दोहरा सकता है।  अल-नीनो एक प्राकृतिक मौसमी घटना है जिसमें प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय यानी ट्रॉपिकल हिस्से का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. सामान्य अल-नीनो हर 2-7 साल में आता है, लेकिन इस बार यह सुपर या मेगा स्तर का बन रहा है. कारण – समुद्री गर्मी की लहर, पॉजिटिव पैसिफिक मेरिडियनल मोड और गर्म दक्षिणी हवाएं।  बेन नॉल जैसे मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह लहर अल-नीनो को और मजबूत बना रही है. गर्मी और नमी बढ़ने से पश्चिमी देशों में गर्मी की लहरें और तेज हो सकती हैं. वैज्ञानिक कह रहे हैं कि यह पैटर्न 140 साल में सबसे ताकतवर हो सकता है।  अभी प्रशांत महासागर में 8046 KM लंबी गर्मी की लहर फैली हुई है. यह माइक्रोनेशिया से शुरू होकर कैलिफोर्निया तक पहुंच चुकी है. कैलिफोर्निया के पास इसे 'द ब्लॉब' कहा जा रहा है. यहां समुद्री सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर है. NOAA की रिपोर्ट के मुताबिक यह जिस लेवल का है वो बेहद विशालकाय है।   यह लहर अल-नीनो को तेजी से मजबूत कर रही है. इससे समुद्री जीव-जंतुओं पर असर पड़ रहा है. मौसम के पैटर्न पूरी तरह बदल रहे हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह गर्मी की लहर अल-नीनो को और बढ़ावा देगी, जिससे पूरे साल मौसम अनियमित रहेगा।  1877 के बाद सबसे बड़ा अल-नीनो? 1877-78 का अल-नीनो इतिहास का सबसे विनाशकारी था. उसने गर्मी की लहरें, सूखा और फसल नष्ट करके लाखों लोगों की जान ली. अब वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2026 का अल-नीनो उससे भी ताकतवर हो सकता है. अप्रैल 2026 के मौसम मॉडल्स में वैज्ञानिक हार्ट पल्पिटेशंस महसूस कर रहे हैं. अगर यह सुपर अल-नीनो बना तो 2027 में वैश्विक तापमान नए रिकॉर्ड तोड़ सकता है. जलवायु परिवर्तन के साथ यह और खतरनाक बन रहा है।  दुनिया भर में कहां-कहां क्या असर होगा? अल-नीनो का असर पूरे विश्व पर पड़ेगा. ऑस्ट्रेलिया, दक्षिणी और मध्य अफ्रीका, भारत और अमेजन के जंगलों में सूखा और भयंकर गर्मी बढ़ेगी. आग लगने का खतरा ज्यादा होगा. अमेरिका के दक्षिणी हिस्से में भारी बारिश और बाढ़ आ सकती है. उत्तरी अमेरिका में गर्मी बढ़ेगी।  दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में सूखा पड़ेगा. एशिया और अफ्रीका के कई देशों में फसलें प्रभावित होंगी. समुद्री गर्मी की लहर से तूफान और भारी बारिश की संभावना बढ़ेगी. कुल मिलाकर मौसम के पैटर्न पूरी तरह उलट जाएंगे।  भारत पर क्या होगा असर? गर्मी में तापमान बढ़ेगा? भारत इस मेगा अल-नीनो से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में शामिल है. वैज्ञानिकों के अनुसार 2026 की गर्मी में तापमान सामान्य से काफी ज्यादा रहेगा. दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान और उत्तर भारत में पहले ही अप्रैल में 40 डिग्री सेल्सियस पार हो चुका है. अल-नीनो की वजह से प्री-मानसून गर्मी और तेज होगी।  जून-सितंबर का मानसून कमजोर हो सकता है, जिससे सूखा पड़ने का खतरा बढ़ेगा. उत्तर-पश्चिम भारत में सूखे की स्थिति बन सकती है. कृषि प्रभावित होगी, फसलें कम हो सकती हैं. गर्मी की लंबी और तेज होगी. नमी ज्यादा होने से गर्मी और ह्यूमिड महसूस होगी. कुल मिलाकर इस गर्मी में तापमान जरूर बढ़ेगा और लोगों को भारी गर्मी का सामना करना पड़ेगा।  सरकार और लोग दोनों को तैयार रहना होगा. पानी की बचत, सूखा प्रबंधन और फसल बीमा पर जोर देना जरूरी है. किसानों को सूखा सहन करने वाली फसलें लगाने की सलाह दी जा रही है. स्वास्थ्य विभाग को हीट वेव अलर्ट जारी करने चाहिए. शहरों में कूलिंग सेंटर्स बनाए जाएं. वैज्ञानिक लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं. अगर अल-नीनो सुपर लेवल का बना तो 2027 तक असर रहेगा।