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चुनाव आयोग ने बंगाल के 8 हजार पोलिंग बूथों को किया सुपर सेंसेटिव घोषित, 135 दबंग गिरफ्तार

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होना है। 23 अप्रैल को पहले राउंड की वोटिंग होने जा रही है और 29 को दूसरे चरण में मतदान होगा। उससे पहले कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग पूरी तरह सख्त है। इस बीच बंगाल के कुल 8000 पोलिंग बूथ को आयोग ने सुपर सेंसेटिव घोषित किया है। ये उन इलाकों के ही बूथ हैं, जहां पहले चरण में ही मतदान होना है। इसका अर्थ है कि यहां हिंसा, बूथ कैप्चरिंग जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जा सकता है। चुनाव आयोग ने इस बीच 135 ऐसे लोगों को पकड़ा है, जो दबंग प्रवृत्ति के माने जाते हैं और उनका अराजकता फैलाने का इतिहास रहा है। चुनाव संपन्न होने तक इन लोगों को हिरासत में रखा जाएगा। पुलिस ने जिन 135 लोगों को उठाया है, उनमें से ज्यादातर मुर्शिदाबाद, मालदा, बलूरघाट, उत्तर और दक्षिण 24 परगना के रहने वाले हैं। दरअसल पहले के चुनावों में भी ऐसे करीब 200 स्थान हैं, जहां पहले हिंसा होती रही है। ऐसे में चुनाव ने इन इलाकों से जुड़े पोलिंग बूथ को सुपर सेंसेटिव की कैटिगरी में डाला है। फिलहाल चुनाव आयोग के निर्देश पर इन सभी इलाकों में डीएम और एसपी भी दौरे कर रहे हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना की आशंका को टाला जा सके। इसके अलावा जनता के बीच साफ-सुथरे चुनाव होने और डर से परे रहने का भरोसा जगाया जा सके। प्रशासन का कहना है कि कई दबंगों ने तो एक नोटिस मिलते ही खुद सरेंडर कर दिया। कुछ लोगों को पकड़ना पड़ा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एक बार फिर से कहा है कि हम बंगाल में भयमुक्त और अपराध मुक्त चुनाव कराएंगे। उनका कहना है कि इसके लिए हरसंभव तैयारी हमने की है। इस चुनाव में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी चुनाव आयोग खूब सहारा ले रहा है। चुनाव में सुरक्षा के लिए AI का इस्तेमाल, गड़बड़ी पर करेगा अलर्ट बूथ के अंदर या फिर बाहर किसी तरह की गड़बड़ी होने पर यह सिस्टम तुरंत अलर्ट करेगा। इसके अलावा एक एआई से लैस कंट्रोल कमांड सेंटर भी बनाया जा रहा है। इसके अलावा जिला निर्वाचन अधिकारी और राज्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तरों में भी कंट्रोल सेंटर होंगे। यहां से संबंधित जिलों की निगरानी की जाएगी। कुल मिलाकर निगरानी के लिए थ्री-टियर सिस्टम स्थापित किया जाएगा। बता दें कि चुनाव आयोग ने प्रदेश की कुल 55 विधानसभाओं को भी खर्च के लिहाज से संवेदनशील माना है। इन सीटों में ममता बनर्जी की भबानीपुर विधानसभा भी शामिल है। यहां से उन्हें भाजपा के सीनियर नेता शुभेंदु अधिकारी चुनौती दे रहे हैं।

अमित शाह का बड़ा बयान—बंगाल में सत्ता मिली तो घुसपैठियों की होगी छुट्टी

आसनसोल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का प्रचार करने पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री ने कुल्टी विधानसभा क्षेत्र से जनसभा को संबोधित करते हुए जनता से अपनी पार्टी के वादों को दोहराया। इसके साथ ही टीएमसी सरकार पर जुबानी हमला बोला। अमित शाह ने कहा, "कुल्टी की जमीन का इस्तेमाल कभी ब्लास्ट फर्नेस के लिए किया जाता था। यहां से लोहा पूरे भारत में भेजा जाता था और दुनिया के कई देशों में निर्यात भी किया जाता था। ममता बनर्जी के कुशासन के कारण कुल्टी के वे फर्नेस बंद हो गए हैं। हम 'आयरन सिटी' का दर्जा एक बार फिर बहाल करने के लिए काम करेंगे। अवैध खनन को रोका जाएगा।" उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल का चुनाव बंगाल को घुसपैठिया मुक्त बनाने का चुनाव है। भाजपा सरकार बना दीजिए, बंगाल से एक-एक घुसपैठियों को निकालने का काम करेंगे। ममता के गुंडे कान खोलकर सुन लें, 23 अप्रैल को मतदान में जरा भी खलल डाला, तो 4 मई के बाद उल्टा लटकाकर सीधा करने का काम करेंगे। ममता के गुंडों की बंगाल की जनता के सामने कोई मजाल नहीं है। ममता को बंगाल के युवाओं की चिंता नहीं है, वो अपनी जगह भतीजे को बैठाना चाहती हैं, लेकिन उनका सपना पूरा नहीं होगा। यह झूठ फैलाती हैं कि बंगाल में बाहर का मुख्यमंत्री आएगा। बंगाल का मुख्यमंत्री बंगाल में जन्मा, बंगाली बोलने वाला ही होगा। अमित शाह ने कहा, एसआईआर प्रक्रिया में ममता दीदी और उनके प्रशासन ने कुछ गोरखाओं के नाम भी काट दिए हैं। कोई बात नहीं। सीटें तो वैसे भी हमारे पास ही आ रही हैं। जैसे ही चुनाव खत्म होंगे, भारतीय जनता पार्टी धीरे-धीरे हर एक गोरखा को वापस मतदाता सूची में शामिल कर लेगी।" उन्होंने कहा, "चाय बागानों में स्कूल खोलना, चाय बागान श्रमिकों को उनकी ज़मीन का मालिकाना हक देना, आवास पट्टे उपलब्ध कराना और दो वर्षों के भीतर चाय बागान श्रमिकों की मज़दूरी में 500 रुपये से अधिक की वृद्धि भारतीय जनता पार्टी द्वारा की जाएगी। उत्तरी बंगाल में हम चार नए औद्योगिक शहर स्थापित करेंगे। भारतीय जनता पार्टी यह भी सुनिश्चित करेगी कि सभी सरकारी कर्मचारियों को 45 दिनों के भीतर 7वें वेतन आयोग के लाभ मिलेंगे। अगर आप भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाते हैं, तो हम यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लाएंगे।" उन्होंने कहा, " भाजपा सरकार महिलाओं और बेरोजगारों को प्रतिमाह 3000 रुपये, गर्भवती माताओं को 21 हजार रुपये और महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 33 फीसद आरक्षण देगी। इसके साथ ही महिलाओं को मुफ्त बस सफर कराएगी। किसानों की धान की फसल की एमएसपी 3100 रुपये प्रति क्विंटल करेगी। साथ ही किसान सम्मान निधि को 6000 रुपये की जगह 9000 रुपये सालाना करेगी।" उन्होंने कहा, "दार्जिलिंग और उत्तरी बंगाल में हो रहे अन्याय को भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से खत्म करेगी। यह चुनाव सिर्फ़ हमारे दो उम्मीदवारों को विधायक बनाने के लिए नहीं है। यह चुनाव दार्जिलिंग की पहाड़ियों से लेकर गंगा सागर तक, और गंगा सागर से लेकर बंगाल की राजधानी कोलकाता तक, हमारी माताओं और बहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। यह चुनाव उत्तरी बंगाल पर सालों-साल से हो रहे अन्याय और उपेक्षा का जवाब है। ममता दीदी को शर्म आनी चाहिए कि एक महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद, साल-दर-साल संदेशखाली में घुसपैठियों ने हमारी माताओं और बहनों पर अत्याचार किए हैं। ममता दीदी के शासन में नौकरियां बेची गई हैं। हम हर साल एक लाख युवक-युवतियों को एक पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से, बिना किसी पैसे या सिफारिश के नौकरियां देंगे।"

भारत की अर्थव्यवस्था 2026 तक 6.4% बढ़ेगी, अमेरिकी टैरिफ और टैक्स के बावजूद UN रिपोर्ट में आ रहा है सकारात्मक आकलन

नई दिल्ली  संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट 'इकोनॉमिक एंड सोशल सर्वे ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक 2026' के अनुसार, भारत वैश्विक चुनौतियों के बावजूद दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा. रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था साल 2026 में 6.4 प्रतिशत और साल 2027 में 6.6 प्रतिशत की दर से विकास करेगी।  विकास के मुख्य कारक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत की विकास दर 7.4 प्रतिशत रही थी. इस वृद्धि के पीछे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार, मजबूत घरेलू खपत और वस्तु एवं सेवा कर की दरों में कटौती जैसे प्रमुख कारण रहे. साथ ही, अमेरिकी टैरिफ लागू होने से पहले निर्यात में आई तेजी ने भी इसे समर्थन दिया. रिपोर्ट में सेवा क्षेत्र को भारतीय विकास का मुख्य इंजन बताया गया है।  वैश्विक व्यापार तनाव और चुनौतियां भविष्य के लिए सकारात्मक अनुमानों के बीच रिपोर्ट ने कुछ गंभीर चिंताओं की ओर भी इशारा किया है. अगस्त 2025 में अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के बाद, 2025 की दूसरी छमाही में अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में 25 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई।  एक और बड़ी चिंता प्रेषण को लेकर है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्रेषण प्राप्तकर्ता देश है, जिसे 2024 में 137 अरब डॉलर मिले थे. हालांकि, जनवरी 2026 से अमेरिका द्वारा सभी प्रेषणों पर लगाए गए 1 प्रतिशत टैक्स के कारण भारत को बड़ा आर्थिक नुकसान होने की आशंका है. भारत में प्रेषण का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा चिकित्सा और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए उपयोग किया जाता है, जिससे मध्यम वर्ग और ग्रामीण परिवारों पर सीधा असर पड़ सकता है।  निवेश और हरित अर्थव्यवस्था विदेशी निवेश (FDI) के मामले में भारत का प्रदर्शन सराहनीय रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की पहली तीन तिमाहियों में भारत ने 50 अरब डॉलर का ग्रीनफील्ड एफडीआई आकर्षित किया, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक है।  रिपोर्ट में भारत की 'उत्पादन आधारित प्रोत्साहन' (PLI) योजना की भी प्रशंसा की गई है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सोलर मॉड्यूल, बैटरी और ग्रीन हाइड्रोजन के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली यह योजना आयात पर निर्भरता कम करने और हरित औद्योगिक विकास के लिए एक बेहतरीन मॉडल है. वर्तमान में वैश्विक स्तर पर 1.66 करोड़ हरित नौकरियों में से भारत की हिस्सेदारी 13 लाख है, जिसे और बढ़ाने की संभावनाएं मौजूद हैं।  कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि भारत की आर्थिक नींव मजबूत है. हालांकि, मुद्रास्फीति के 2026 में 4.4% और 2027 में 4.3% रहने का अनुमान है. यदि भारत बाहरी व्यापारिक बाधाओं और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करता है, तो वह अपनी विकास यात्रा को स्थिर रख सकता है। 

ईरान युद्ध का असर: बांग्लादेश में मोबाइल नेटवर्क पर पड़ी मार, इंटरनेट ठप होने का खतरा

ढाका  ईरान युद्ध की वजह से कई देशों में ईंधन संकट पैदा हो गया है। दुनिया के सबसे प्रमुख जलमार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका और ईरान के बीच अब भी संघर्ष चल रहा है और हाल फिलहाल में कोई राहत भी मिलती नहीं दिख रही है। ऐसे में कई देशों में हालात बाद से बदतर होते जा रहे हैं। भारत के पड़ोस में बांग्लादेश में तो अब इंटरनेट ठप पड़ने के हालात बन पड़े हैं। ईंधन की भारी कमी के चलते बांग्लादेश में मोबाइल नेटवर्क पर बड़े स्तर पर बंद होने के खतरा मंडरा रहा है। गौरतलब है कि करीब 17 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश के लिए हालात इसीलिए बिगड़ गए हैं क्योंकि वह अपनी तेल और गैस जरूरतों का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा करता है। इसमें से ज्यादातर तेल मिडिल ईस्ट से ही आता है। अब होर्मुज में शिपिंग रूट बाधित होने से बांग्लादेश में हाहाकार मच गया है। गारमेंट उद्योग पहले ही प्रभावित ढाका समेत कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर 12-12 घंटे लंबी कतारें लग रही हैं। हालात को संभालने के लिए सरकार ने हाल ही में डीजल की कीमतों में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी की है। बिजली संकट के कारण गारमेंट उद्योग पहले ही प्रभावित हो चुका है, जहां उत्पादन में करीब 30 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। अब इसकी आंच इंटरनेट तक पहुंच गई है। डेटा सेंटर के लिए चाहिए डीजल रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते सोमवार को बांग्लादेश के मोबाइल टेलीकॉम ऑपरेटर्स के संगठन (AMTOB) ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने तुरंत दखल नहीं दिया, तो मौजूदा हालात में सेवाओं को जारी रखना संभव नहीं रह जाएगा। बता दें कि टेलीकॉम कंपनियां बिजली कटौती के दौरान अपने डेटा सेंटर और नेटवर्क टावर (BTS) चलाने के लिए डीजल जनरेटर पर निर्भर रहती हैं। लेकिन अब रोजाना 5 से 8 घंटे की बिजली कटौती हो रही है, जिससे स्थिति बिगड़ गई है। SMS-बैंकिंग सेवाएं भी ठप हो जाएंगी AMTOB के अनुसार, केवल डेटा सेंटर ही हर घंटे करीब 500 से 600 लीटर डीजल खपत करते हैं। संगठन के महासचिव मोहम्मद जुल्फिकार ने कहा, “डेटा सेंटर ऑपरेटर का दिमाग होता है। अगर यह बंद हो गया, तो पूरा नेटवर्क ठप हो जाएगा।” अगर नेटवर्क बंद हुआ, तो सिर्फ कॉल और इंटरनेट ही नहीं, बल्कि SMS और बैंकिंग सेवाएं भी ठप हो सकती हैं। इसका असर आम लोगों से लेकर देश की अर्थव्यवस्था तक पड़ेगा। बांग्लादेश में मोबाइल फाइनेंशियल सर्विसेज (MFS) रोजमर्रा के लेन-देन का अहम हिस्सा हैं, और रेडीमेड गारमेंट (RMG) सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

नेपाल में नई सरकार ने सैलरी सिस्टम में किया बड़ा बदलाव, कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ

काठमांडू  नेपाल सरकार ने एक बड़ा और अलग फैसला लिया है, जिसके तहत अब सरकारी कर्मचारियों को हर महीने की बजाय हर 15 दिन में सैलरी दी जाएगी। Nepal में यह पहली बार होगा जब सैलरी का भुगतान महीने में दो बार (फोर्टनाइटली) किया जाएगा। यह फैसला 17 अप्रैल को वित्त मंत्रालय स्तर पर लिया गया और इसे लागू करने के लिए संबंधित सरकारी विभागों को निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह व्यवस्था पूरी तरह से कब से लागू होगी। सरकार का मानना है कि इससे अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार, अगर कर्मचारियों को बार-बार पैसे मिलेंगे तो वे नियमित रूप से खर्च करेंगे, जिससे बाजार में पैसा तेजी से घूमेगा और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। दुनिया के ज्यादातर देशों में, खासकर दक्षिण एशिया में, सरकारी कर्मचारियों को मासिक सैलरी ही दी जाती है। India, Pakistan, Bangladesh, Bhutan, Sri Lanka और Maldives में अभी भी महीने में एक बार सैलरी देने की परंपरा है। हालांकि, इस नए फैसले को लागू करने में कुछ कानूनी अड़चनें आ सकती हैं। नेपाल के मौजूदा कानून के अनुसार सरकारी कर्मचारियों को हर महीने के अंत में सैलरी देने का प्रावधान है। इसलिए इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए कानून में बदलाव करना पड़ सकता है।  फाइनेंशियल कंट्रोलर जनरल ऑफिस के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी रूप से सैलरी हर 15 दिन में देना संभव है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा। सरकार इस पर विचार कर रही है कि अध्यादेश (Ordinance) लाकर इसे जल्दी लागू किया जाए। कुल मिलाकर, नेपाल का यह फैसला आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।

‘कैसा हराया’ मुंब्रा की पार्षद सहर युनूस शेख ने फेक OBC सर्टिफिकेट के आरोपों पर दी स्पष्टीकरण

  मुंबई 'कैसे हराया… उन लोगों के घमंड की धज्जियां उड़ा दीं…'जीत के बाद इसी तेवर वाले भाषण और 'मुंबई को हरे रंग में रंग देने' की बात कहकर चर्चा में आईं AIMIM की युवा नेता सहर शेख अब एक नए विवाद में हैं. ठाणे महानगर पालिका के वार्ड नंबर 30 से पार्षद चुनी गईं सहर शेख पर चुनाव के दौरान फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप लगा है. लगातार बढ़ते विवाद के बीच सहर शेख ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने साफ कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं और उन्हें राजनीतिक रूप से बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।  सहर शेख ने कहा कि पिछले 5-6 दिनों में जिस तरह से खबरें चल रही हैं, उसने उन्हें व्यक्तिगत तौर पर झकझोर दिया. उन्होंने कहा कि मुझे फरार बताया गया, नॉट रीचेबल कहा गया, जबकि मैं लगातार ग्राउंड पर काम कर रही थी. जब आप लोगों के बीच रहकर काम कर रहे हों और उसी समय आपके बारे में झूठ फैलाया जाए, तो यह हैरान करने वाला होता है. उनका कहना है कि शुरुआत में उन्होंने जानबूझकर मीडिया से दूरी बनाई ताकि वे पहले कानूनी प्रक्रिया को समझ सकें और उसी के तहत जवाब दें।  हम संविधान और कानून पर भरोसा रखते हैं सहर शेख ने कहा कि वे इस पूरे मामले को कानूनी तरीके से लड़ेंगी. उन्होंने कहा कि हम संविधान में विश्वास रखने वाले लोग हैं. हमें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है, इसलिए हमने पहले कानूनी प्रक्रिया को समय दिया. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब वे हर आरोप का जवाब कोर्ट में देंगी और जिन लोगों ने उन पर आरोप लगाए हैं, उन्हें कानूनी रूप से चुनौती दी जाएगी. उनका कहना है कि उनके खिलाफ जानबूझकर गलत तस्वीरें और बैनर चलाए गए, जो एक राजनीतिक अभियान का हिस्सा थे. उन्होंने कहा कि जिन्होंने मेरी छवि खराब करने की कोशिश की है, उन्हें कानूनी नोटिस भेजा गया है. जो भी जिम्मेदार हैं, उन्हें कोर्ट में जवाब देना होगा।  तहसीलदार ने लगाई रिपोर्ट  ठाणे तहसीलदार कार्यालय ने सहर शेख के पिता यूनुस इकबाल शेख के खिलाफ कथित रूप से फर्जी जाति प्रमाणपत्र का उपयोग करने और उसी के आधार पर अपनी बेटी के लिए जाति प्रमाणपत्र प्राप्त करने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की थी. यह सिफारिश तहसीलदार उमेश पाटिल द्वारा की गई जांच के बाद आई है, जो एनसीपी के प्रत्याशी सिद्दीकी फरहा शबाब अहमद द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर की गई थी, जिसमें सहर के जाति प्रमाणपत्र की वैधता को चुनौती दी गई थी. 25 मार्च को एसडीओ को सौंपी गई रिपोर्ट में बताया गया कि यूनुस शेख ने राज्य चुनाव आयोग सहित चार सरकारी एजेंसियों को गुमराह किया।  रिपोर्ट में कहा गया है कि उनका वर्ष 2011 का ओबीसी प्रमाणपत्र आधिकारिक प्रारूप के अनुरूप नहीं था, उस पर एसडीओ के अनिवार्य हस्ताक्षर नहीं थे और उसके शीर्षक में स्टेट ऑफ महाराष्ट्र भी नहीं लिखा था. जांच में यह भी पाया गया कि शेख के पिता और चाचा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के निवासी थे. महाराष्ट्र जाति प्रमाणपत्र अधिनियम, 2000 के तहत, प्रवासियों को फॉर्म-10 के तहत प्रमाणपत्र प्राप्त करना होता है. आरोप है कि शेख ने दस्तावेजों में हेरफेर कर फॉर्म-8 के तहत प्रमाणपत्र हासिल किया, जो मूल निवासियों के लिए निर्धारित है।  रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अपने प्रथम दृष्टया फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर वर्ष 2018 में सहर शेख के लिए भी जाति प्रमाणपत्र प्राप्त किया. हालांकि परिवार ठाणे में रहता था, लेकिन सहर का प्रमाणपत्र मुंबई सिटी कलेक्टर कार्यालय से जारी कराया गया. तहसीलदार ने ऐसे सभी प्रमाणपत्रों को तत्काल रद्द करने और यूनुस शेख के खिलाफ धोखाधड़ी एवं जालसाजी के आरोप में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है।  हरे रंग वाले बयान पर भी दी थी सफाई इस विवाद से पहले चर्चा उनके उस बयान की भी हुई थी, जिसमें उन्होंने मुंब्रा को “हरे रंग में रंगने” की बात कही थी. इस बयान को लेकर उन्हें घेरने की कोशिश की थी. इस पर सहर शेख ने कहा था कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया. मैंने ‘हरा रंग’ इसलिए कहा क्योंकि वह मेरी पार्टी का रंग है. अगर पार्टी का झंडा किसी और रंग का होता, तो मैं वही कहती. इसे धार्मिक रंग देना गलत है. उन्होंने यह भी कहा था कि संविधान किसी रंग को किसी धर्म से नहीं जोड़ता और सभी रंग सबके हैं।  हार बर्दाश्त नहीं कर पा रहे विरोधी सहर शेख ने अपने विरोधियों पर आरोप लगाया था कि वे चुनाव में मिली हार को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे. उस समय उन्होंने कहा था कि यह पूरा मामला राजनीतिक प्रोपेगेंडा है. कुछ लोग हार को पचा नहीं पा रहे हैं, इसलिए इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। 

रोबोट ने 21 KM हाफ मैराथन 50 मिनट 26 सेकेंड में पूरी करके इंसान का रिकॉर्ड तोड़ा

बीजिंग बीजिंग में एक हैरान करने वाली घटना हुई. चीन की स्मार्टफोन कंपनी Honor के रोबोट लाइटनिंग ने 21 किलोमीटर की हाफ मैराथन दौड़ पूरी की मात्र 50 मिनट और 26 सेकंड में. यह समय किसी भी इंसान के वर्तमान विश्व रिकॉर्ड से भी ज्यादा तेज है।   युगांडा के धावक जैकब किप्लिमो का मानव विश्व रिकॉर्ड 57 मिनट 20 सेकंड का है. लाइटनिंग ने इसे 6 मिनट 54 सेकंड से बेहतर समय में पूरा कर दिया. यह उपलब्धि चीन की रोबोटिक्स टेक्नोलॉजी में बड़ी छलांग साबित हुई है।  लाइटनिंग एक ब्राइट रेड कलर का ह्यूमनॉइड रोबोट है. इसकी ऊंचाई 169 सेंटीमीटर है. दौड़ते समय यह अपने छोटे-छोटे हाथों को बैलेंस बनाए रखने के लिए हिलाता रहा. पूरा रेस खत्म होने तक इसकी रफ्तार नहीं घटी।  यह बिना थके, बिना रुके लगातार दौड़ता रहा और फिनिश लाइन पार कर गया. आयोजकों ने बताया कि इसकी स्वायत्त नेविगेशन सिस्टम और ताकतवर बर्स्ट पावर ने इसे जीत दिलाई।  पिछले साल से कितना सुधार हुआ? सिर्फ एक साल पहले लाइटनिंग और दूसरे रोबोट इंसानों से काफी पीछे चल रहे थे. लेकिन इस साल लाइटनिंग ने पूरे मैदान को पीछे छोड़ दिया. पिछले साल का चैंपियन रोबोट भी इस बार लाइटनिंग से लगभग दो घंटे पीछे रहा. हाफ मैराथन में 100 से ज्यादा टीमों ने हिस्सा लिया, जो पिछले साल से पांच गुना ज्यादा है।  चीन रोबोटिक्स में क्यों आगे बढ़ रहा है? चीन सरकार 2015 से ही रोबोटिक्स को बहुत महत्व दे रही है. सरकार ने रोबोटिक्स को 10 प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया था ताकि चीन सस्ते मजदूर का देश होने की इमेज से बाहर निकल सके. 2025 तक बड़े पैमाने पर उत्पादन और मुख्य पार्ट्स की सप्लाई चेन मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है. इसी वजह से चीन में रोबोट स्पोर्ट्स इवेंट्स तेजी से बढ़ रहे हैं।  पिछले साल बीजिंग में दुनिया का पहला ह्यूमनॉइड रोबोट गेम्स आयोजित किया गया था, जिसमें रोबोट्स ने फुटबॉल, बॉक्सिंग और मार्शल आर्ट्स जैसी स्पर्धाओं में हिस्सा लिया. कुछ महीने पहले चीन के न्यू ईयर गाला में कुंग-फू कपड़े पहने रोबोट्स ने अपनी मार्शल आर्ट परफॉर्मेंस से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था. अब हाफ मैराथन जैसी घटनाएं इस क्षेत्र में चीन की तेज प्रगति को दिखा रही हैं।  अमेरिका से टेक्नोलॉजी की होड़ यह उपलब्धि चीन और अमेरिका के बीच टेक्नोलॉजी प्रतिस्पर्धा में चीन की बढ़ती ताकत को दर्शाती है. अमेरिका के पास अभी भी ज्यादा एडवांस्ड ह्यूमनॉइड रोबोट मॉडल हैं, लेकिन चीन तेजी से आगे बढ़ रहा है. लाइटनिंग की यह जीत चीन के लिए बड़ी बात है. लाइटनिंग रोबोट द्वारा बनाया गया 50 मिनट 26 सेकंड का रिकॉर्ड अभी के लिए किसी भी इंसान से बेहतर है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है। 

लश्कर की 26/11 जैसी हमले की तैयारी, बलूचिस्तान में विशेष ट्रेनिंग शिविर

नई दिल्ली पाहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी से ठीक पहले एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लश्कर-ए-तैयबा अब अपने पारंपरिक ठिकानों से आगे बढ़कर बलूचिस्तान में तेजी से अपना नेटवर्क विस्तार कर रहा है. यह वही इलाका है जो पहले से ही बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष का केंद्र बना हुआ है. ऐसे में लश्कर की सक्रियता ने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को और जटिल बना दिया है।  सूत्रों के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर के बाद लश्कर ने कराची-बलूचिस्तान बॉर्डर के पास समुद्र तट से महज 10-15 किलोमीटर दूरी पर नए लॉन्च पैड तैयार करने शुरू कर दिए हैं. यही नहीं संगठन अब अपने आतंकवादियों को तैराकी और स्कूबा डाइविंग की विशेष ट्रेनिंग दे रहा है. इन गतिविधियों को देखते हुए एजेंसियों को आशंका है कि लश्कर 26/11 मुंबई हमलों जैसे समुद्री हमले की साजिश रच रहा है. इस बीच, अप्रैल के दूसरे हफ्ते में लश्कर के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी का बलूचिस्तान के क्वेटा दौरा भी कई सवाल खड़े करता है. उसकी यह यात्रा उस समय हुई जब ठीक दो दिन बाद बीएलए ने पाकिस्तान कोस्ट गार्ड पर हमला कर तीन जवानों को मार गिराया।  कौन है सैफुल्लाह कसूरी लश्कर-ए-तैयबा का डिप्टी चीफ और अमेरिका द्वारा घोषित आतंकवादी. वह अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले का एक प्रमुख साजिशकर्ता है. पहलगाम में 26 नागरिकों की हत्या कर दी गई थी. कसूरी ने सार्वजनिक भाषणों में खुलकर लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तान सेना के बीच करीबी संबंधों को स्वीकार किया है और भारत के खिलाफ 2008 के मुंबई हमलों जैसी बड़े समुद्री हमलों की धमकियां दी हैं. वह अपने आतंकवादी घोषित होने के बावजूद पाकिस्तान में सार्वजनिक कार्यक्रमों में बार-बार दिखाई देता रहा है, जिनमें लश्कर से जुड़े राजनीतिक संगठनों द्वारा आयोजित रैलियां भी शामिल हैं।  खुफिया इनपुट्स यह भी संकेत देते हैं कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई लश्कर को बलूचिस्तान में मजबूत करने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक सिंध में सक्रिय लश्कर कमांडर फैजल नदीम को बलूचिस्तान में पाकिस्तान मरकाजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) के नेता अकील अहमद लगहारी से समन्वय करने के निर्देश दिए गए थे. पीएमएमएल को लश्कर का राजनीतिक मुखौटा माना जाता है, जो जमीनी स्तर पर नेटवर्क विस्तार और भर्ती में मदद करता है।  समुद्री रास्तों के जरिए भारत को निशाना बनाने की योजना विशेषज्ञों का मानना है कि लश्कर का यह विस्तार कई रणनीतिक उद्देश्यों का हिस्सा हो सकता है. एक तरफ यह संगठन अपने ढांचे को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर समुद्री रास्तों के जरिए भारत को निशाना बनाने की नई रणनीति पर काम कर रहा है. इसके अलावा, यह भी संभावना जताई जा रही है कि पाकिस्तान सेना बलूच विद्रोहियों से निपटने के लिए लश्कर जैसे संगठनों का इस्तेमाल एक प्रॉक्सी के तौर पर कर सकती है।  पाहलगाम हमले की बरसी पर सामने आई ये जानकारी इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में आतंकी खतरा केवल बना ही नहीं हुआ है, बल्कि नए रूप में और अधिक खतरनाक हो रहा है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या यह गतिविधियां सिर्फ नेटवर्क विस्तार तक सीमित रहती हैं या फिर किसी बड़े हमले की साजिश का हिस्सा बनती हैं। 

MMS लीक का खुलासा, दफ्तर से बेडरूम तक राज हो रहे उजागर; कौन हैं इसके जिम्मेदार?

नई दिल्ली देश में बीते डेढ़ साल के दौरान एमएमएस लीक की ऐसी बाढ़ आई कि दफ्तर से लेकर बेडरूम तक होने वाली हरकतें एक झटके में सबके सामने आ गईं. लीक हुए एमएमएस सिर्फ दफ्तर और बेडरूम तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि इनकी जद कॉलेज और मेट्रो ट्रेन तक फैली हुई थी. ये हरकतें जायज थीं या नाजायज, फिलहाल यह सवाल नहीं है. सवाल यह है कि इन एमएमएस वीडियोज को लोगों के मोबाइल तक किसने और कैसे पहुंचा. इस सवाल का पूरा जवाब मिलता, इससे पहले सोशल मीडिया में सोशल मीडिया में वायरल हुए ’19 मिनट के वीडियो’ ने सिक्‍योरिटी एजेंसीज और साइबर एक्‍सपर्ट्स का भी सबका दिमाग हिला दिया . इस वीडियो को देखने के बाद किसी आम आदमी के लिए यह अंदाजा लगाना नामुमकिन था कि वह वीडियो असली था या फिर उसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से तैयार किया गया था. इस वीडियो की गुत्‍थी सुलझती, इससे पहले ‘सीजन 5′ और ’50 मिनट के फुल वर्जन’ ने साइबर एक्‍सपर्ट्स को नया चैलेंज दे दिया. दरअसल, एआई के जरिए तैयार किए गए इन वीडियोज के जरिए स्कैमर्स ने लोगों की उत्सुकता का फायदा उठाया. इन वीडियोज के जरिए मैलवेयर लिंक लोगों के मोबाइल तक पहुंचाए गए. इसके बाद, हजारों लोगों के फोन हैक कर बैंक अकाउंट खाली कर दिए. इसके बाद सामने आए नमो भारत ट्रेन के सीसीटीवी फुटेज लीक ने सरकारी निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए . इन कांडों में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से ज्‍यादातर लीक या तो एआई से बनाए गए थे, या फिर करीबी दोस्तों ने लीक किए थे. कई लीक्‍स में सिक्‍योरिटी स्‍टाफ भी शामिल मिला. वीडियो को लोगों के बीच पॉपुलर करने के लिए जानी मानी महिला यूट्यूबर के चेहरे का इस्‍तेमाल कर डीपफेक वीडियो वायरल किए गए. वहीं एक मामला ऐसा था कि एक पीडि़ता का वीडियो उसके ही दोस्त ने लीक कर दिया. नमो भारत ट्रेन का सीसीटीवी वीडियो एक स्‍टाफ ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड कर फैला दिया. साइबर फ्रॉड्स ने ‘ललिता’ और ‘सारा बलोच’ के नाम पर फर्जी लिंक बनाकर लोगों को खूब ठगा. कुल मिलाकर अब एमएमएस लीक अब साइबर फ्रॉड्स के लिए एक नया हथियार बन चुका है . लोगों के दिमाग को हिला गए ये पांच बड़े कांड     कांड 1: ’19 मिनट का वीडियो’ और ‘सीजन 5’ का झांसा     नवंबर 2025 में एक 19 मिनट का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कथित तौर पर एक बंगाली यूट्यूबर और उनकी गर्लफ्रेंड थी. देखते ही देखते दावे किए जाने लगे कि इसका ‘सीजन 5′ और ’50 मिनट का फुल वर्जन’ लीक हो गया है. साइबर जांच में खुलासा हुआ कि असलियत में कोई ‘सीजन 5’ मौजूद ही नहीं था. जो वीडियो वायरल हो रहे थे, वे एआई डीपफेक टेक्‍नोलॉजी से बनाए गए थे. फोरेंसिक रिपोर्ट में बताया गया कि वीडियो में चेहरे के हाव-भाव नेचुरल नहीं थे, होंठ ऑडियो से मेल नहीं खा रहे थे और लाइटिंग मिसमैच थी. जांच में यह भी सामने आया कि असली मंशा साइबर ठगी की थी. स्कैमर्स ने ‘सीजन 5’ के नाम पर फेक लिंक बनाए, जिन पर क्लिक करते ही यूजर के फोन में मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता था. इससे बैंकिंग डिटेल्स, यूपीआई पिन और ओटीपी चोरी हो रहे थे .     कांड 2: नमो भारत ट्रेन का सीसीटीवी लीक     दिसंबर 2025 में गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर की नमो भारत ट्रेन का 4 मिनट 44 सेकंड का एक सीसीटीवी फुटेज वायरल हुआ. इसमें एक युवक और युवती ट्रेन के कोच में अंतरंग पलों में डूबे दिखे. इस घटना ने पूरे देश में सनसनी फैला दी. जांच में कई चौंकाने वाला खुलासा हुए. यह वीडियो एनसीआरटीसी के ही एक स्‍टाफ ऋषभ ने अपने मोबाइल फोन से सीसीटीवी फुटेज रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर लीक किया था. जिन लोगों पर यात्रियों की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी थी, उन्होंने ही प्राइवेसी का उल्लंघन किया. एनसीआरटीसी ने आरोपी को बर्खास्त कर दिया और मुरादनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई. इस वीडियो का अंजाम और भी दर्दनाक रहा. दोनों स्टूडेंट्स कॉलेज जाना छोड़ चुके थे, डिप्रेशन में आत्महत्या का प्रयास किया. अंततः परिवारों ने दबाव में आकर दोनों की शादी करा दी गई .     कांड 3: सारा बलोच और ललिता के नाम पर डिजिटल हनी ट्रैप     फरवरी 2026 में पाकिस्तानी क्रिएटर सारा बलोच का नाम ‘असम इंसीडेंट’ से जोड़कर एक लिंक वायरल किया गया. दावा किया गया कि उनका ‘लीक एमएमएस’ वायरल हो रहा है. हकीकत में सारा बलोच का उस वीडियो से कोई लेना-देना नहीं था. यह पूरी तरह से साइबर स्कैम था, जिसमें उनके नाम का इस्तेमाल कर लोगों के एकाउंट साफ किए जा रहे थे. वहीं, तेलंगाना के करीमनगर में पुलिस ने ललिता और उसके पति को गिरफ्तार किया. यह दंपति सोशल मीडिया पर दोस्ती कर पुरुषों को किराए के फ्लैट पर बुलाता, जहां पति हिडन कैमरे से वीडियो रिकॉर्ड करता. फिर ब्लैकमेल कर पैसे वसूले जाते. पुलिस ने साफ किया कि ‘ललिता वायरल वीडियो’ इंटरनेट पर नहीं है, बल्कि पुलिस के मालखाने में बंद है. फिर भी स्कैमर्स ने उसी नाम से फेक लिंक बनाकर लोगों के फोन हैक करने शुरू कर दिए .     कांड 4: बंगाली यूट्यूबर के बॉयफ्रेंड ने कर दिया कांड     बंगाली महिला यूट्यूबर का 16 मिनट का एक प्राइवेट वीडियो अचानक वायरल हो गया. इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर हड़कंप मचा हुआ था. तब यूट्यूबर ने खुद एक वीडियो जारी कर चौंकाने वाला खुलासा किया. उन्होंने दावा किया कि यह वीडियो उनके एक्‍स-बॉयफ्रेंड ने बदला लेने के लिए लीक किया है. यह एक ऐसा मामला था, जिसमें ब्रेकअप के बाद बदला लेने के लिए अपने ही पार्टनर के निजी पलों को पब्लिक कर दिया था. इसके बाद, यूट्यूबर का एक और वीडियो आया, जिसे स्टेज्ड और एडिटेड बताया गया, लेकिन तब तक बहुत बड़ा नुकसान हो चुका था. यूट्यूबर के लिए घर से बाहर निकलना तो छोडिए, घर के अंदर रहना भी मुश्किल हो गया था .     कांड 5: भोजपुरी स्‍टार का एमएमएस हुआ वायरल     नवंबर 2025 में महज 15 साल की एक भोजपुरी एक्टर का एक एमएमएस … Read more

भारत-रूस समझौता: 3000 सैनिक एक-दूसरे की ज़मीन पर तैनात, जेट और युद्धपोत भी होंगे शामिल

 नई दिल्ली भारत और रूस ने हाल ही में एक बहुत महत्वपूर्ण सैन्य समझौता किया है. इस समझौते का नाम है इंडो-रूसी रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट यानी RELOS. फरवरी 2025 में साइन हुए इस समझौते को जनवरी 2026 से लागू कर दिया गया है. अब दोनों देश एक-दूसरे के इलाके में ज्यादा से ज्यादा 3000 सैनिक, 10 एयरक्राफ्ट यानी हवाई जहाज और 5 वॉरशिप यानी युद्धपोत तैनात कर सकते हैं।  यह समझौता 5 साल के लिए है. अगर दोनों पक्ष चाहें तो इसे और 5 साल बढ़ाया भी जा सकता है. समझौते में साफ नियम बनाए गए हैं कि दोनों देश अपने सैनिकों, जहाजों और हवाई जहाजों को कैसे सपोर्ट करेंगे. इसका मुख्य मकसद संयुक्त सैन्य अभ्यास, मानवीय मदद और आपदा राहत जैसे कामों को आसान बनाना है।  समझौता क्या है और इसमें क्या-क्या शामिल है? यह RELOS समझौता दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक्स यानी सप्लाई और सपोर्ट का आदान-प्रदान करने वाला है. पहले भारत और अमेरिका के बीच भी ऐसा ही LEMOA समझौता हुआ था. अब रूस के साथ भी यही हुआ है. समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य अड्डों, बंदरगाहों और एयरबेस पर सैनिक, जहाज और एयरक्राफ्ट रख सकते हैं।  अधिकतम 3000 सैनिक एक साथ रह सकते हैं. 10 फाइटर प्लेन या ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और 5 युद्धपोत भी एक साथ तैनात किए जा सकते हैं. समझौते में लिखा है कि तैनात सैनिकों को ईंधन, मरम्मत, खाना, स्पेयर पार्ट्स और हर तरह का टेक्निकल सपोर्ट दिया जाएगा. यह सिर्फ युद्ध के लिए नहीं है बल्कि मुख्य रूप से संयुक्त ट्रेनिंग, अभ्यास और मदद के कामों के लिए है. रूस की संसद ने दिसंबर 2025 में इसे पास किया और अब यह पूरी तरह लागू हो चुका है।  भारत और रूस यह सैन्य आदान-प्रदान क्यों कर रहे हैं? भारत और रूस बहुत पुराने दोस्त हैं. दोनों देश 70 साल से ज्यादा समय से सैन्य साझेदारी कर रहे हैं. भारत रूस से ज्यादातर हथियार और सैन्य उपकरण खरीदता है. अब दुनिया की स्थिति बदल रही है. चीन के साथ भारत की सीमा पर तनाव है. रूस यूक्रेन युद्ध में लगा है और अमेरिका-चीन के बीच भी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।  ऐसे में दोनों देश चाहते हैं कि उनकी दोस्ती और मजबूत हो. यह समझौता इसलिए किया गया है ताकि संयुक्त अभ्यास आसानी से हो सके. पहले अभ्यास के लिए सैनिक और सामान लाना-ले जाना बहुत महंगा और मुश्किल होता था. अब दोनों देश एक-दूसरे के बेस इस्तेमाल करके जल्दी और सस्ते में काम कर सकेंगे।  भारत को रूस के आर्कटिक क्षेत्र और फार ईस्ट के बेस मिलेंगे जहां ठंडे इलाकों में ट्रेनिंग हो सकेगी. रूस को भारतीय महासागर के बंदरगाह मिलेंगे जहां उसके जहाज रुक सकेंगे. साथ ही मानवीय मिशन जैसे बाढ़, भूकंप या बचाव कार्य में मदद मिलेगी. यह दोनों देशों की सुरक्षा और रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए है।  इस समझौते से दोनों देशों को क्या फायदा होगा? इस RELOS समझौते से दोनों देशों को बहुत फायदा होगा. सबसे बड़ा फायदा लॉजिस्टिक्स सपोर्ट का है. मतलब अगर भारतीय सैनिक रूस में अभ्यास करें तो वहां उन्हें रूस का बेस, ईंधन और मरम्मत मिल जाएगी. उसी तरह रूसी सैनिक भारत आएं तो भारतीय बेस पर सब कुछ उपलब्ध होगा. इससे समय और पैसे की बचत होगी।  संयुक्त अभ्यास जैसे INDRA ज्यादा बेहतर और बार-बार हो सकेंगे. आपदा राहत में भी तेजी आएगी. उदाहरण के लिए अगर रूस में कोई प्राकृतिक आपदा हो तो भारतीय सैनिक और जहाज जल्दी मदद पहुंचा सकेंगे. भारत की नेवी को रूस के उत्तरी इलाकों तक पहुंच मिलेगी जो भविष्य में महत्वपूर्ण हो सकता है।  रूस को भारतीय समंदर में मजबूत पकड़ मिलेगी. कुल मिलाकर दोनों देश अपनी सेनाओं को और मजबूत और तैयार रख सकेंगे. यह समझौता सिर्फ सैन्य नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देगा।  यह समझौता क्यों महत्वपूर्ण है और आगे क्या होगा? यह समझौता भारत-रूस दोस्ती का नया अध्याय है. दोनों देश लंबे समय से साथ हैं. दुनिया में कई देश ऐसे समझौते कर रहे हैं ताकि अपनी सेनाएं मजबूत रहें. भारत के लिए यह इसलिए खास है क्योंकि वह रूस पर निर्भर है हथियारों के लिए और अब लॉजिस्टिक्स भी आसान हो जाएगी. रूस के लिए भी भारत जैसे मजबूत साथी का बेस मिलना महत्वपूर्ण है. समझौता 5 साल बाद बढ़ाया जा सकता है. फिलहाल दोनों देश इसे लागू करने की तैयारी कर रहे हैं।