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बंगाल चुनाव में 18% वोटिंग, ममता का गड़बड़ी का आरोप, नादिया में BJP वर्कर पर हमला

कलकत्ता पश्चिम विधानसभा चुनाव के लिए आज दूसरे चरण की वोटिंग जारी है। मतदान सुबह 7 बजे से शुरू हो चुका है लेकिन मतदान केंद्रों पर सुबह 6 बजे से ही मतदाताओं की कतार लगनी शुरू हो गई थी।पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 की मुख्य बातें: पहले चरण का मतदान पूरा हुआ; अनुमानित मतदान प्रतिशत 92% से अधिक रहा।  दूसरे चरण में पश्चिम बंगाल की 142 सीटों पर आज वोटिंग हो रही है, पिछले विधानसभा चुनाव में इन 142 में में 123 सीटों पर सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। इस चरण के चुनाव में सबकी निगाहें भवानीपुर सीट पर टिकी हुई हैं, क्यूंकि यहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी आमने-सामने है। बता दें कि भवानीपुर ममता बनर्जी की परंपरागत सीट है, इस लिहाज से यहां पर कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। इससे पहले सुवेंदु अधिकारी 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को नंदीग्राम से हरा चुके हैं। गौरतलब हो कि पहले चरण की 152 सीटों पर 23 अप्रैल को रिकॉर्ड 93% मतदान हुआ था। 4 मई को चुनाव के रिजल्ट आएंगे।  बारानगर में एक बूथ पर 5 बार बदली गई EVM, रुका मतदान बंगाल में हंगामे के बीच मतदान जारी है. इसी बीच बारानगर के बूथ नंबर 72 में ईवीएम में खराबी के कारण मतदान रोक दिया गया है. नाराज मतदाताओं का आरोप है कि मशीन को पांच बार बदला जा चुका है, फिर भी मतदान शुरू नहीं हुआ है. एक मतदाता, मिथु गरई ने कहा, 'हम सुबह 7 बजे से लाइन में खड़े हैं. वो कह रहे हैं कि ईवीएम खराब है. अब हम वापस जा रहे हैं।     'TMC बना रही है चौथी बार सरकार', अभिषेक बनर्जी का दावा ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने बंगाल चुनाव में बीजेपी पर केंद्रीय बलों के अत्याधिक तैनात का आरोप लगाया है. अब अभिषेक बनर्जी ने कहा कि आईएनएस के युद्धपोत और राफेल, जिन्हें तैनात करना है बाकी आप वो भी कर दो जो भी चीज आपको बांग्लादेश और पाकिस्तान के खिलाफ करना है. वो आप बंगाल के लोगों के खिलाफ कर रहे हो।  टीएमसी नेता ने दावा किया कि बंगाल में 30 लाख मतदाताओं को वोट डालने से रोका गया है. उन्होंने अपनी एक साल पुरानी भविष्यवाणी को दोहराते हुए कहा कि टीएमसी 2021 से भी ज्यादा बहुमत हासिल करेगी. टीएमसी चौथी बार सरकार बना रही है. मैं आपसे 4 मई को मिलूंगा।  भबानीपुर: ममता बनर्जी के मतदान केंद्र के बाहर पहुंचे शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी ने सुबह से ही अपने विधानसभा क्षेत्र भबानीपुर में डेरा डाला हुआ है. उन्होंने बीजेपी पर चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है. इसी बीच बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी भी भबानीपुर पहुंच गए हैं. बताया जा रहा है कि बीजेपी नेता उसी मतदान केंद्र के बाहर मौजूद हैं, जहां ममता बनर्जी ने डेरा डाला हुआ है।  मतदाताओं को डराया-धकाया जा रहा है, ममता का केंद्रीय बलों पर आरोप बंगाल में मतदान के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यालय में बैठक के बाद केंद्रीय बलों पर मतदाताओं को डराने-धमकाने का आरोप लगाया है. उन्होंने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के घरों में जबरन घुसने का भी आरोप लगाया है।  नदिया में भाजपा पोलिंग एजेंट पर हमला, अस्पताल में भर्ती बंगाल विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के लिए मतदान जारी है. मतदान से पहले सुबह करीब 5:30 बजे चापड़ा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत हात्रा पंचायत में बूथ नंबर 52 पर भाजपा पोलिंग एजेंट मोशर्रफ पर कथित रूप से बदमाशों के एक गिरोह ने लोहे की रॉड से हमला कर दिया. पुलिस ने बाद में उन्हें बचाया और चापड़ा रूरल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज चल रहा है. डॉक्टरों ने बताया कि उनके सिर में चोट लगी है. उनके सिर में छह टांके लगाए हैं।  मतदान केंद्र के बाहर हंगामा, CRPF ने कई लोगों को हटाया मतदान के दौरान तनाव के बीच एक मतदान केंद्र के बाहर हंगामा मच गया. CRPF जवानों ने कई व्यक्तियों को वहां से हटा दिया. मतदाताओं के अनुसार, EVM मशीन में बार-बार खराबी आने के कारण तीन असफल प्रयासों के बाद सुबह करीब 8:30 बजे मतदान शुरू हो सका. मतदाताओं ने आरोप लगाया कि कुछ लोग मतदान प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें सुरक्षा बलों ने वहां से हटा दिया. एक मतदाता मयूर जैन ने बताया कि वो सुबह 7 बजे से इंतजार कर रहे थे।  उन्होंने कहा, 'मशीन खराब होने के कारण हमें तीन बार वोट डालने से रोका गया. नई मशीन लाई गई, लेकिन उसमें भी समस्या आई. अंदर चीख-पुकार मच गई और गेट बंद कर दिए गए. बाद में कुछ लोगों ने हंगामा करने की कोशिश की, उन्हें पीटा गया और ले जाया गया. आखिरकार सुबह 8:30 बजे मतदान शुरू हुआ.' मयूर जैन ने ये भी कहा कि CRPF के जवान मौजूद थे और प्रशासन पूरी तरह सतर्क था।  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के लिए बुधवार सुबह सात बजे से मतदान शुरू हो गया है. दूसरे चरण में सात जिलों की 142 विधानसभा सीटों पर कुल 3,21,73,837 मतदाता वोट डालेंगे. इनमें 1,64,35,627 पुरुष, 1,57,37,418 महिलाएं और 792 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं. मतदान के लिए 41,001 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां हर बूथ की वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 2,321 कंपनियां केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनात किया गया है. कोलकाता में सबसे अधिक 273 कंपनियां लगाई गई हैं।  इसके अलावा 142 सामान्य पर्यवेक्षक, 95 पुलिस पर्यवेक्षक और 100 व्यय पर्यवेक्षक भी तैनात किए गए हैं. ड्रोन कैमरों से भी मतदान प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी. इस चरण में कुल 1,448 उम्मीदवार मैदान में हैं. भांगर सीट पर सबसे अधिक 19 उम्मीदवार हैं, जबकि हुगली जिले की गोगहाट सीट पर सबसे कम 5 उम्मीदवार हैं।  इस चरण में कई दिग्गज नेता अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (भबानीपुर), विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी (भबानीपुर), राज्य मंत्री सुजीत बोस (बिधाननगर), फिरहाद हकीम (कोलकाता पोर्ट), ज्योतिप्रिया मल्लिक (हावड़ा), ब्रात्य बसु (दम दम), सोवंदेब चट्टोपाध्याय (बालीगंज) और बीजेपी के अर्जुन सिंह (नोआपाड़ा), स्वपन दासगुप्ता (राशबिहारी), रूद्रनील घोष (शिबपुर) शामिल हैं. सीपीआई(एम) की मीनाक्षी मुखर्जी (उत्तरपाड़ा), दीप्सिता धर (दम दम … Read more

मोदी सरकार ने 6 साल में 9 देशों के साथ की ‘खास डील’, ट्रंप के टैरिफ का किया मुकाबला

नई दिल्ली रूस-युक्रेन की बीच युद्ध हो, इजरायल-फिलिस्तीन का संघर्ष हो, अमेरिका-ईरान की जंग हो या फिर दुनिया को डराने वाला ट्रंप टैरिफ, बीते कुछ सालों में तमाम ग्लोबल चुनौतियां सामने आई हैं, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की रफ्तार तेज बनी हुई है. दुनिया ने भारत का लोहा माना है और ऐसा हो भी क्यों न आखिर जब दुनिया ट्रेड से लेकर महंगाई तक के जोखिम से जूझती रही, तो मोदी सरकार ने एक के बाद एक कमाल किया. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बीते छह सालों में भारत ने 9 देशों के साथ फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA साइन किए हैं, जो अमेरिकी टैरिफ की काट साबित हुए हैं. सबसे ताजा डीन न्यूजीलैंड के साथ की गई है।  दनादन सरकार द्वारा तमाम देशों के साथ किए जा रहे एफटीए से जहां भारतीय सामानों के निर्यात के लिए नए और बड़े बाजार मिल रहे हैं, तो वहीं आयात पर सीमित निर्भरता भी कम हो रही है. इसके अलावा भारत में निवेश आने के रास्ते खुले हैं और रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी ये कारगर साबित हो रहे हैं।  UK से लेकर EU तक से एफटीए इससे पहले भारत ने कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किए हैं. इनमें मॉरिसस, ब्रिटेन से लेकर यूरोपीय यूनियन (EU) तक के साथ किए गए एफटीए शामिल हैं।   नंबर-1: नंबर में मोदी सरकार ने मॉरिसस के साथ समझौता (India-Mauritius FTA) किया था और ये पहली बार था जबकि भारत ने किसी अफ्रीकन देश के साथ FTA किया था।  नंबर-2: 2022 में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया गया था. इस FTA के चलते जो टारगेट सेट किया गया था, उसके अनुरूप दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को FY 2025 तक 100 अरब डॉलर पहुंचा।  नंबर-3: 2022 में ही भारत ने एक और डील डन की. इस बार भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति बनी और इस पर साइन किए गए. ये भारत द्वारा किया गया ऐसा पहला एफटीए थी, जिसमें 100 फीसदी निर्यात पर टैरिफ जीरो किया गया।  नंबर-4: 2024 के मार्च महीने की 10 तारीख को भारत और ईएफटीए (EFTA – स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन) देशों के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) पर साइन किए गए. ये समझौता 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी हुआ. इसका लक्ष्य 15 साल में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश लाना रहा।  नंबर-5: 2025 में भारत और ब्रिटेन के बीच समझौता हुआ. जुलाई महीने में दोनों देशों ने  ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर साइन किए. इस एफटीए के तहत भारत के 99% निर्यात किए जाने वाले सामानों को ब्रिटेन में ड्यूटूी फ्री एक्सेस मिलने की राह पक्की हुई. इसके अलावा इस डील का उद्देश्य India-UK के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 120 अरब डॉलर तक ले जाना है।  नंबर-6: 2025 के अंत में यानी दिसंबर महीने में फिर मोदी सरकार ने एक डील को अंजाम तक पहुंचा दिया. Trump Tariff को लेकर दुनिया में फैले खौफ के बीच भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (India-Oman CEPA) पर साइन किए गए. इसके तहत ओमान भारत को अपनी 98.08% टैरिफ लाइनों तक टैरिफ फ्री (Tariff Free) पहुंच प्रदान करेगा. इसमें भारत द्वारा ओमान को निर्यात की जाने वाली 99.38% वस्तुएं शामिल है. वहीं दूसरी ओर भारत ने अपनी कुल टैरिफ लाइन में से 77.79% पर शुल्क में राहत की पेशकश की है, जो ओमान से आयात होने वाले 94.81% सामान को कवर करती है।  नंबर-7: 2026 की शुरुआत यानी जनवरी महीने में भारत ने यूरोपीय संघ के साथ एक ऐतिहासिक डील की. India-EU FTA को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' (Mother Of All Deals) कहा गया. डील के तहत भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय संघ के देशों में जीरो टैरिफ एक्सपोर्ट (Zero Tariff Export) का एक्सेस मिला. ये डील सबसे ज्यादा कपड़ा-परिधान सेक्टर के लिए फायदे का सौदा है, क्योंकि अमेरिका के बाद इस सेक्टर में भारतीय निर्यात के लिए ईयू सबसे बड़ा मार्केट है, जिसका आकार 22 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है. इसके अलावा देशों ने इस डील के तहत अपने मार्केट एक-दूसरे के लिए खोलने पर सहमति जताई और दोनों के 90 फीसदी तक प्रोडक्‍ट्स पर टैरिफ कम या समाप्‍त करने का ऐलान हुआ।  नंबर-8: 2026 में फरवरी महीने में टैरिफ से दुनिया को डराने वाले अमेरिका और भारत के बीच अंतरिम व्‍यापार समझौते के फ्रेमवर्क पर सहमति बनी. दोनों देशों ने कई चीजों को लेकर अपनी सहमति जाहिर की है. अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल खरीद के कारण लगे एक्‍स्‍ट्रा 25 प्रतिशत टैरिफ को हटा दिया और रेसिप्रोकल टैरिफ को भी 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया है, जो 7 फरवरी से प्रभावी है।  नंबर-9: भारत द्वारा सबसे ताजा एफटीए यानी Free Trade Agreement न्यूजीलैंड के साथ हुआ है और इस पर 27 अप्रैल को साइन किए गए हैं. India-New Zealand FTA पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के ट्रेड मिनिस्टर टॉड मैक्ले ने साइन किए. सबसे खास बात ये है कि ये समझौता महज 9 महीनों में हो गया. ये फ्री ट्रेड एग्रीमेंट इस साल के अंत तक लागू हो सकता है।  FTA के तहत न्यूजीलैंड भारत को अपने बाजार में जीरो टैरिफ (Zero Tariff) एंट्री देगा और भारत से जाने वाले करीब 95% टैरिफ फ्री या कम टैरिफ से साथ पहुंचेंगे. इस डील का टारगेट दोनों देशों के बीच के द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 5 अरब डॉलर तक ले जाना है. इसके अलावा न्यूजीलैंड अगले 15 साल में भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा। 

सरकार की नई योजना: डीजल में अल्कोहल और कमर्शियल LPG में DME मिलाने की तैयारी

नई दिल्ली पश्चिम एशिया तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने ब्लेंडेड डीजल और कमर्शियल LPG की शुरुआत की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) इन ईंधनों के लिए गुणवत्ता मानकों को अंतिम रूप देने में जुटा है। डीजल में 10% मिलेगा आइसोब्यूटाइल अल्कोहल BIS उन मानकों को अंतिम रूप दे रहा है, जिनके तहत डीजल में 10% आइसोब्यूटाइल अल्कोहल (IBA) मिलाया जाएगा। IBA एक ज्वलनशील लिक्विड है, जो आमतौर पर अनाजों से बनता है। रिफाइनरियों और ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्रीज से मिले सुझावों के आधार पर ये मानक तैयार किए जा रहे हैं। 15 जून 2026 तक यह मानक जारी होने की उम्मीद है। BIS की टीम स्अेक होल्डर्स के साथ लगातार बैठकें कर रही है। आयातित क्रूड पर निर्भरता घटेगी और किसानों व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया बाजार मिल सकता है। कमर्शियल LPG में मिलाया जाएगा DME सरकार ने कमर्शियल उपयोग के लिए DME (डाइमिथाइल ईथर) मिले LPG के मानकों को भी अंतिम रूप दे दिया है। DME प्राकृतिक गैस, कोयला और बायोमास से बनाया जा सकता है। इसके नोटिफिकेशन की संभावित तिथि 15 मई 2026 है। इस दिन संशोधित मानक जारी करने की संभावना है। घरेलू LPG सिलेंडरों में अभी मिश्रण नहीं किया जाएगा। यह केवल होटल, रेस्टोरेंट, उद्योगों जैसे कमर्शियल यूजर के लिए होगा। अधिकारियों के अनुसार, DME मिश्रण घरेलू खाना पकाने के लिए फिलहाल उपयुक्त नहीं है। ब्लेंडेड डीजल के लिए जल्द आएगा ड्राफ्ट ब्लेंडेड डीजल के मसौदा मानक (Draft Standard) को भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) के डॉ. भारत नेवलकर की अगुवाई वाले वर्किंग ग्रुप ने तैयार किया है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने फ्यूल कैरेक्टराइजेशन स्टडी किए, जिसके बाद और सैंपल टेस्ट किए गए। अंतिम अधिसूचना से पहले मानकों का ड्राफ्ट सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया जाएगा। बता दें ऑटोमोटिव को छोड़कर घरेलू, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए भारत के पास पहले से LPG मिश्रण के लिए एक मानक मौजूद है, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया था। अब सरकार ने इसे केवल कमर्शियल इस्तेमाल के लिए प्राथमिकता देते हुए संशोधन का फैसला किया है। पश्चिम एशिया संकट का एशियाई देशों पर असर 28 अप्रैल 2026 तक होर्मुज स्ट्रेट पर कोई बड़ी बातचीत नहीं हुई है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से एशियाई देशों का तेल-गैस आयात ठप है। भारत, चीन, जापान रूस-वेनेजुएला-अफ्रीका से नए सौदे कर रहे हैं। एशियाई देश अपने भंडार पर तीन-चार महीने चल सकते हैं, उसके बाद स्थिति गंभीर हो जाएगी। ऐसे में सरकारें ऊर्जा संकट से निपटने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रहीं हैं। भारत की यह तैयारी भी इसी संकट से निपटने के लिए हो रही है।

भारत ने 10 उपग्रहों की ताकत से तोड़ा दुनिया का घमंड, वाशिंगटन से बीजिंग तक उड़ा तहलका

बेंगलुरु  करीब दो दशक पहले भारतीय वैज्ञानिकों ने एक सपना देखा था. यह सपना बस स्‍टॉप से निकली उस एक बस की तरह था, जो निश्चित स्‍टॉप पर अपनी सवारियों को छोड़ती हुई आगे बढ़ रही थी. इसरो के वैज्ञानिक भी कुछ ऐसा ही करना चाहते थे, लेकिन उसके सपने में बस की जगह एक रॉकेट ने ले रखी थी. तब तक पाकिस्‍तान जैसों की औकात ही क्‍या, अमेरिका जैसे विकसित देश के लिए भी यह कर दिखाना किसी बड़े ख्‍वाब से कम नहीं था. आखिरकार वह तारीख आ ही गई, जब भारत ने कुछ ऐसा किया, जिसने वाशिंगटन से लेकर बीजिंग तक तमाम विकसित देशों के होश उड़ा दिए।  जी हां, 28 अप्रैल 2008 की उस शाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के PSLV-C9 ने अंतरिक्ष की तरफ शुरू दौड़ के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से टेकऑफ हुए PSLV-C9 रॉकेट से एक साथ दस उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा गया था. इस रॉकेट को अंतरिक्ष की दस अलग अलग लोकेशन पर इन उपग्रहों को ड्रॉप करना था. एक छोटी सी चूक और लोकेशन में रत्‍ती भर का अंतर पूरे मिशन पर पानी फेर सकती थी. पूरी दुनिया की निगाहें भारत के पहले ‘मल्टी-पेलोड लॉन्च’ पर टिकी हुई थीं. आखिरकार, इसरो के वैज्ञानिकों की मेहनत रंग लाई और PSLV-C9 ने अपना मिशन सफलता पूर्वक पूरा कर लिया।  दुनिया के लिए बेहद खास थी यह घटना     PSLV-C9 की सबसे सफलता यह थी कि उसने एक साथ 10 उपग्रह लॉन्च किए. उस समय के लिए यह एक अवश्विसनीय उपलब्धि थीऋ तब तक स्‍पेस में सेटेलाइट लॉन्च का काम ज्‍यादातर अमेरिका, रूस, यूरोप और चीन जैसे देश ही करते थे. ऐसे में भारत की इस सफलता ने पूरी दुनिया को चौंका दिया था।      तकनीकी रूप से भी यह मिशन बहुत खास था. PSLV रॉकेट को चार स्‍टेज में मिशन को पूरा करना था और इसमें अलग-अलग तरह के ईंधन का इस्तेमाल होना है. इस मिशन की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इस एक ही मिशन में कई सेटेलाइट्स को अलग-अलग समय और अलग-अलग ऊंचाई पर छोड़ना था।      PSLV-C9 ने यह साबित कर दिया कि भारत कम खर्च में भी बेहतरीन और भरोसेमंद स्‍पेश मिशन को पूरा कर सकता है. इस मिशन के बाद दुनिया के कई देशों ने भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देखना शुरू किया. जिन देशों के पास अपने रॉकेट नहीं थे, उन्हें भारत एक सस्ता और भरोसेमंद विकल्प नजर आया।  भारत के लिए यह उपलब्धि क्यों बड़ी थी?     भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में बहुत छोटे स्तर से शुरुआत की थी. धीरे-धीरे वैज्ञानिकों की मेहनत से देश ने अपने रॉकेट और सेटेलाइट बनाना सीखा. PSLV-C9 की सफलता उसी मेहनत का नतीजा थी. यह सिर्फ एक तकनीकी सफलता नहीं थी, बल्कि यह साबित करता था कि भारत अब अपने दम पर बड़े काम कर सकता है।      इस मिशन के बाद इसरो ने छोटे उपग्रहों के लॉन्च पर और ध्यान दिया. आगे चलकर इसी अनुभव की वजह से 2017 में भारत ने एक साथ 104 उपग्रह लॉन्च करने का रिकॉर्ड भी बनाया. यानी PSLV-C9 ने ही भविष्‍य की बड़ी सफलताओं की राह तैयार की थी।      PSLV-C9 की सफलता इसलिए भी खास थी, क्योंकि यह सीमित संसाधनों में हासिल की गई थी. इसरो का बजट दुनिया की बड़ी स्‍पेस एजेंसियों से काफी कम थी. इसका शानदार प्रदर्शन PSLV-C9 के जरिए पूरी दुनिया देख चुकी थी. वहीं, इस सफलता ने भारत को आत्मनिर्भरता की तरफ देखने की नई दिशा भी दी थी।      PSLV-C9 की सफलता का फायदा भारत को आर्थिक तौर पर भी हुआ. इसरो ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बनाई और दूसरे देशों के उपग्रह लॉन्च करने का काम भी मिलने लगा. इससे भारत को कमाई के नए मौके मिले और देश की छवि और ताकत बेहद मजबूत हुई।  PSLV-C9 ने एक साथ इतने सारे सेटेलाइट्स को कैसे लॉन्च किया? पीएसएलवी-सी9 ने एक साथ 10 उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया. इस मिशन की असली सफलता मल्टीपल पेलोड्स को एक साथ ले जाने की टेक्‍नोलॉजी थी. रॉकेट में मेन सेटेलाइट कार्टोसैट-2ए को सबसे पहले अलग किया था. फिर लगभग 45 सेकंड बाद पर अन्य सभी छोटे सेटेलाइट्स को एक-एक उनकी सही जगह पर स्‍थापित किया गया।  स्‍पेस में स्‍थापित किए गए 10 उपग्रह कौन से थे और इनका वजन कितना था? सभी 10 सेटेलाइट्स का कुल वजन करीब 824 किलो था, इसमें सबसे भारी 690 किलो का कार्टोसैट-2ए सैटेलाइट था. इसके अलावा, इस मिशन में 83 किलो का आईएमएस-1 और 50 किग्रा किलो के आठ नैनो सेटेलाइट्स शामिल थे. कार्टोसैट-2ए एक भारतीय सेटेलाइट था, जो हाई-रिजॉल्‍यूशन तस्वीरें लेने की क्षमता रखता था. इसके अलावा, आईएमएस-1 भी एक भारतीय मिनी सेटेलाइट था, जिसे नई टेक्‍नोलॉजी का परीक्षण करने के लिए बनाया गया था. आठ नैनो सेटेलाइट कनाडा, जर्मनी, जापान, डेनमार्क, नीदरलैंड यूनिवर्सिटी ने तैयार किए थे. क्‍या कार्टोसैट-2ए सेटेलाइट को लेकर क्‍या विवाद हुआ था? कार्टोसैट-2ए सेटेलाइट को लेकर सवाल खड़ा हुआ कि यह एक डिफेंस सेटेलाइट था. इस सवाल ने लॉन्च के समय काफी बड़ी बहस छेड़ दी थी. आधिकारिक तौर पर, कार्टोसैट-2ए को शहरी और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट बताया गया था. लेकिन, इसकी हाई रिजॉल्‍यूशन क्षमता को देखते हुए यह कहा गया कि भारत ने पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसियों की निगरानी के लिए मिलिट्री सेटेलाइट स्‍पेस में भेजा है. क्या यह सचमुच कोई विश्व रिकॉर्ड था? हां, उस समय यह एक बड़ी उपलब्धि थी. पीएसएलवी-सी9 की सफलता के साथ, भारत एक ही मिशन में सबसे अधिक सेटेलाइट लॉन्च करने वाला देश बन गया था . हालांकि रूस ने 2007 में एक रॉकेट से 16 उपग्रह लॉन्च किए थे, लेकिन उनका कुल वजन केवल 300 किलोग्राम के आसपास था, जबकि भारत ने 824 किलोग्राम वजन ले जाकर सबसे भारी पेलोड ले जाने का रिकॉर्ड बनाया था. बाद में इसरो ने 2017 में पीएसएलवी-सी37 मिशन से 104 सेटेलाइट लॉन्च करके इस रिकॉर्ड को तोड़ दिया था.

पाकिस्तान में तेल संकट, पेट्रोलियम मंत्री ने कहा- 5-7 दिन का कच्चा तेल बचा, लॉकडाउन की तैयारी

 इस्लामाबाद वैश्विक मंचों पर खुद को 'मध्यस्थ' के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के सामने अब एक गंभीर घरेलू संकट खड़ा हो गया है। पाकिस्तान के ऊर्जा और वित्त मंत्रालय की ओर से एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने पूरे देश में खलबली मचा दी है। सरकार ने यह स्वीकार किया है कि देश के पास कच्चे तेल का रिजर्व केवल 5-7 दिनों का ही बचा है, जबकि डीजल और एलपीजी जैसे अन्य ईंधनों का स्टॉक भी कुछ ही हफ्तों में खत्म हो सकता है। संकट की जड़: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना पाकिस्तान के इस अचानक उपजे ऊर्जा संकट का सीधा तार मध्य पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों से जुड़ा है। ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण ईरान ने होर्मुज को व्यापारिक जहाजों के लिए लगभग बंद कर दिया है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मुख्य रूप से खाड़ी देशों (सऊदी अरब, कुवैत आदि) से होने वाले आयात पर निर्भर है। रास्ता बंद होने और जहाजों की कमी से सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। पेट्रोलियम मंत्री का कुबूलनामा और वर्तमान हालात पाकिस्तान के केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने ईरान-अमेरिका संघर्ष से जुड़ी मौजूदा भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच देश के ईंधन भंडार को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। समा टीवी के कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यह युद्ध जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारी अनिश्चितता पैदा हो रही है। मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा किया कि पाकिस्तान का ऊर्जा तंत्र इस समय बाहरी झटकों के प्रति बेहद संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि देश के पास वर्तमान में केवल 5 से 7 दिनों का कच्चा तेल मौजूद है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि पाकिस्तान के पास एक दिन का भी पेट्रोल रिजर्व (भंडार) नहीं है। वहीं डीजल का स्टॉक 26-28 दिन और LPG का स्टॉक केवल 15 दिनों के लिए पर्याप्त है। पाकिस्तान दुनिया का पहला देश बन गया है जिसने आधिकारिक तौर पर एयरलाइंस के लिए ईंधन की कमी की चेतावनी (NOTAM) जारी कर दी है। अली परवेज मलिक ने वैश्विक बाजारों में अत्यधिक अस्थिरता की ओर इशारा करते हुए बताया कि इतिहास में दुबई क्रूड की कीमतें कभी भी 170 डॉलर के उच्च स्तर तक नहीं पहुंची थीं। इस अस्थिरता को देखते हुए देश की ऊर्जा भंडारण क्षमता को मजबूत करना अब एक तत्काल आवश्यकता बन गई है। 'कोविड काल' जैसी पाबंदियों की वापसी की तैयारी ईंधन बचाने के लिए शाहबाज शरीफ सरकार बेहद सख्त कदम उठाने पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए देश में लॉकडाउन जैसे नियम लागू किए जा सकते हैं। कॉरपोरेट और सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों को घर से काम करने का निर्देश दिया जा सकता है, ताकि सड़कों पर गाड़ियां कम चलें। स्कूलों और कॉलेजों को बंद करके शिक्षा को फिर से ऑनलाइन मोड में शिफ्ट करने की योजना है। लोगों से निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने और कार शेयर करने की अपील की जा रही है। आसमान छूती महंगाई और चरमराती अर्थव्यवस्था पाकिस्तान पहले से ही भयंकर आर्थिक संकट और महंगाई से जूझ रहा है। इस ऊर्जा संकट के कारण सरकार अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों की समीक्षा 15 दिनों की जगह हर हफ्ते कर सकती है। युद्ध क्षेत्र से तेल लाने वाले जहाजों का बीमा 30,000 डॉलर से बढ़कर 4,00,000 डॉलर तक पहुंच गया है। इसका सीधा बोझ आम जनता की जेब पर पड़ेगा। परिवहन महंगा होने से फल, सब्जियां, राशन और जीवन रक्षक दवाओं की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। 'मध्यस्थ' पाकिस्तान के लिए कितनी बड़ी विडंबना? अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान अक्सर खुद को इस्लामी देशों और पश्चिमी ताकतों के बीच एक 'मध्यस्थ' के रूप में स्थापित करने की कोशिश करता है। लेकिन वर्तमान हालात बताते हैं कि जो देश दूसरों के विवाद सुलझाने का दावा करता है, वह अपनी बुनियादी जरूरतों (ऊर्जा सुरक्षा) को सुरक्षित रखने में बुरी तरह विफल साबित हो रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और आईएमएफ (IMF) के कड़े नियमों के बीच यह तेल संकट पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए 'ताबूत में आखिरी कील' साबित हो सकता है।  

गडकरी का बड़ा बयान: पेट्रोल-डीजल गाड़ियों का दौर खत्म होने की ओर

नई दिल्ली केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को बड़ा बयान देते हुए कहा है कि लंबे समय में, पेट्रोल और डीजल जैसे जीवाश्म ईंधनों पर चलने वाले वाहनों का कोई भविष्य नहीं है। केंद्रीय मंत्री का यह बयान वैकल्पित ईंधन विकल्पों के समर्थन में आया, क्योंकि उन्होंने ऑटोमोबाइल उद्योग से स्वच्छ ईंधनों की ओर बदलाव पर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी बताया कि यह बदलाव सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने में योगदान देगा। स्वच्छ ईंधन विकल्पों की ओर बदलाव परिवहन मंत्री ने वाहन निर्माताओं से बायोफ्यूल, CNG और LNG जैसे वैकल्पिक और स्वच्छ ईंधन विकल्पों के इस्तेमाल की ओर बदलाव की गति तेज करने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पेट्रोल और डीजल, आयात और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव के लिहाज से गंभीर समस्याएं पैदा करते हैं। हाइड्रोजन ही भविष्य का ईंधन है- गडकरी गडकरी ने बताया कि सरकार ने हाइड्रोजन मोबिलिटी और कंपनियों के लिए पायलट प्रोजेक्ट पहले ही शुरू कर दिए हैं। टाटा मोटर्स, वोल्वो, अशोक लेलैंड और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियां पहले से ही हाइड्रोजन ईंधन के ट्रायल में शामिल हैं। हम अभी 10 ऐसे रूट पर हैं, जहां हम हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रक और बसें चला रहे हैं। हाइड्रोजन ही भविष्य का ईंधन है। E20 फ्यूल पर चलती रहेंगी गाड़ियां- गडकरी फ्लेक्स फ्यूल पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक ईंधन के तौर पर इथेनॉल के महत्व पर जोर दिया और बताया कि भारत में अलग-अलग तरह के कच्चे माल से इथेनॉल बनाने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री पहले से ही फ्लेक्स फ्यूल इंजन बनाने पर काम कर रही हैं, जबकि गाड़ियां E20 फ्यूल पर चलती रहेंगी।  

रक्षा सहयोग पर भारत की सक्रियता, राजनाथ सिंह ने किर्गिस्तान-बेलारूस संग की द्विपक्षीय वार्ता

नई दिल्ली शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कई अहम द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। इस दौरान उन्होंने किर्गिस्तान के रक्षा मंत्री मेजर जनरल मुकाम्बेतोव रुसलान मुस्तफायेविच के साथ विस्तृत बातचीत की। राजनाथ सिंह ने बेलारूस के रक्षा मंत्री लेफ्टिनेंट जनरल विक्टर ख्रेनिन के साथ भी महत्वपूर्ण बैठक की। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन की यह बैठक आयोजित की गई है। यहां विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात में बातचीत का फोकस क्षेत्रीय सुरक्षा, सैन्य सहयोग और आपसी संबंधों को और मजबूत करना रहा। उन्होंने किर्गिस्तान के रक्षा मंत्री से मुलाकात के बाद कहा कि यह बैठक बेहद उपयोगी और सार्थक रही। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और किर्गिस्तान गणराज्य के बीच रणनीतिक साझेदारी है, जो लोकतंत्र, विकास, संस्कृति और समृद्ध विरासत जैसे साझा मूल्यों पर आधारित है। राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि भारत, किर्गिस्तान के साथ अपने संबंधों को बेहद महत्व देता है और इस साझेदारी को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। दरअसल, दोनों देशों के बीच सहयोग कई क्षेत्रों में फैला हुआ है।  इसमें रक्षा सहयोग एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभर कर सामने आया है। इस दौरान सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा, राजनाथ सिंह ने बेलारूस के रक्षा मंत्री लेफ्टिनेंट जनरल विक्टर ख्रेनिन के साथ भी महत्वपूर्ण बैठक की। इस मुलाकात को लेकर उन्होंने कहा कि बेलारूस के रक्षा मंत्री से मिलकर उन्हें खुशी हुई और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने पर सार्थक बातचीत हुई। इस बैठक में भारत और बेलारूस के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा की गई। विशेष रूप से सैन्य उपकरण, तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण व रक्षा क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। इन सभी बैठकों से यह साफ संकेत मिलता है कि भारत शंघाई सहयोग संगठन के मंच का उपयोग करते हुए अपने मित्र देशों के साथ रक्षा और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। इससे पहले भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यहां रूस व चीन के रक्षा मंत्रियों से भी मुलाकात व बातचीत की। रूसी रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव के साथ मुलाकात के बाद राजनाथ सिंह ने इस बातचीत को बेहतरीन और सार्थक बताया। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। खास तौर पर रक्षा सहयोग, सैन्य तकनीक और संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में मंगलवार को ही रक्षामंत्री राजनाथ सिंह व चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन के बीच भी एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। दोनों देशों के रक्षामंत्रियों ने यहां क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी सहयोग पर चर्चा की। 

S-400 की चौथी खेप भारत को, रूस ने निभाई दोस्ती; ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान हुआ था पस्त

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की कमर तोड़ने वाला रूसी एयर डिफेंस सिस्टम S-400 की चौथी यूनिट अगले महीने से भारत को मिलने की उम्मीद है। इस नई खेप से भारत की रक्षा क्षमता और मजबूत होगी। अक्टूबर 2018 में भारत ने रूस के साथ मिसाइल सिस्टम की पांच यूनिट खरीदने के लिए 5 अरब डॉलर की डील की थी, जिनमें से तीन यूनिट पहले ही मिल चुकी हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार हथियार सिस्टम की सप्लाई के लिए तय की गई नई समय-सीमा के तहत मिसाइल की पांचवीं यूनिट नवंबर तक मिल जाएगी। S-400 मिसाइल सिस्टम  S-400 मिसाइल सिस्टम ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। पिछले महीने भारत ने रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम की पांच और यूनिट खरीदने की मंज़ूरी दी थी, जिससे इनकी कुल संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी। जानकारी के मुताबिक, मिसाइल सिस्टम की चौथी यूनिट को रूस से रवाना किया जा चुका है और अगले कुछ दिनों में इसके भारत पहुंचने की उम्मीद है। अमेरिकी प्रतिबंध के बावजूद खरीद  भारत ने सात साल से भी पहले S-400 मिसाइलें खरीदने का सौदा किया था। उस समय अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि इस सौदे को आगे बढ़ाने पर 'काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट' (CAATSA) के तहत अमेरिका भारत पर बैन लगा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत को अमेरिका के प्रतिबंधों से किसी तरह की रुकावट की आशंका नहीं है, क्योंकि यह नई खरीद पिछली खरीद का ही एक 'फॉलो-ऑन' ऑर्डर है। कितना घातक है S-400? पिछले साल 7 से 10 मई के बीच ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना (IAF) ने S-400 मिसाइल सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था। संघर्ष खत्म होने के कुछ हफ्तों बाद ही, S-400 मिसाइलों की एक और खेप खरीदने का प्रस्ताव पेश किया गया था। रूस ने इन मिसाइल सिस्टम को चलाने के लिए भारतीय सैनिकों के एक समूह को पहले ही ट्रेनिंग दे दी है। S-400 को रूस का सबसे आधुनिक और लंबी दूरी तक मार करने वाला सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल रक्षा सिस्टम माना जाता है।  

महिला सम्मेलन और विकास परियोजनाओं पर फोकस, वाराणसी दौरा बना राजनीतिक रूप से अहम

वाराणसी   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 28-29 अप्रैल को वाराणसी दौरा केवल सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे व्यापक राजनीतिक संकेत भी देखे जा रहे हैं। अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में इस यात्रा के दौरान विकास परियोजनाओं के शुभारंभ के साथ-साथ जनसंपर्क गतिविधियों को भी प्रमुखता दी गई है, जिससे यह दौरा रणनीतिक रूप से अहम बन गया है। महिला सम्मेलन बना दौरे का केंद्र बिंदु इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘जन आक्रोश महिला सम्मेलन’ को माना जा रहा है, जिसमें लगभग 50 हजार महिलाओं की भागीदारी का अनुमान है। इस आयोजन को महिला सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता जैसे मुद्दों पर केंद्रित मंच के रूप में प्रस्तुत किया गया है। खास बात यह है कि इस कार्यक्रम का संचालन पूरी तरह महिलाओं द्वारा किया जाएगा और सुरक्षा व्यवस्था भी महिला पुलिस कर्मियों के जिम्मे होगी, जिससे महिला सशक्तिकरण का स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की गई है। राजनीतिक संदर्भ में बढ़ी अहमियत विश्लेषकों के अनुसार, यह आयोजन (PM Modi) ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम बंगाल सहित अन्य क्षेत्रों में चुनावी माहौल बना हुआ है। साथ ही संसद और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रयासों को लेकर राजनीतिक बहस भी जारी है। ऐसे में महिला सम्मेलन के जरिए व्यापक स्तर पर संदेश देने की रणनीति साफ नजर आती है, जो राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 6300 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की सौगात दौरे के दौरान प्रधानमंत्री 6,300 करोड़ रुपये से अधिक की 163 विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखने जा रहे हैं। इन परियोजनाओं में सड़क निर्माण, रेलवे ओवरब्रिज, पेयजल योजनाएं, स्वास्थ्य सेवाएं और शहरी विकास से जुड़े काम शामिल हैं। वाराणसी-आजमगढ़ सड़क के चौड़ीकरण, कज्जाकपुरा में रेलवे ओवरब्रिज, जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण पेयजल योजनाएं और भगवानपुर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट जैसे प्रोजेक्ट्स क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे। विकास और सामाजिक संदेश का संतुलन यह दौरा एक ओर जहां बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं के जरिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का संकेत देता है, वहीं दूसरी ओर महिला सशक्तिकरण जैसे सामाजिक मुद्दों को भी प्रमुखता देता है। इस संतुलन के जरिए सरकार विकास और सामाजिक भागीदारी दोनों क्षेत्रों में अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर रही है, जिससे वाराणसी दौरा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है।

TCS कांड का नया मोड़, निदा खान ने पीड़िता को ‘हानिया’ बना भेजने की थी योजना मलेशिया

 नासिक महाराष्ट्र के नासिक में TCS कंपनी में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और लोगों को धर्म बदलने के लिए उकसाने के मामले ने अब एक अलग मोड़ ले लिया है. 27 अप्रैल को मुख्य आरोपी निदा खान की अग्रिम जमानत अर्जी पर नासिक कोर्ट में दोनों पक्षों ने जोरदार बहस की. सरकारी वकीलों ने कोर्ट के सामने SIT द्वारा जांच के दौरान इकट्ठा किए गए चौंकाने वाले सबूत रखे कि कैसे निदा खान ने पीड़ित लड़की को दूसरे धर्म के तौर तरीके सिखाकर धर्म बदलने के लिए जाल बुना था. इस केस का दायरा अब सिर्फ नासिक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार मालेगांव और सीधे मलेशिया तक पहुंच गए हैं।  पीड़िता को सिखाई नमाज और नाम रखा 'हानिया'  सरकारी वकीलों ने कोर्ट को बताया कि निदा खान और दूसरे आरोपियों ने पीड़िता का धर्म छोड़कर दूसरे धर्म को अपनाने के लिए उसे बुर्का दिया था. इतना ही नहीं, उसे इस्लाम की एक किताब दी थी और उसके मोबाइल पर धार्मिक शिक्षा देने वाले एप्लीकेशन इंस्टॉल कर दिए थे।  निदा खान पीड़िता को अपने घर ले जाती थी और उसे नमाज़ पढ़ने, हिजाब और बुर्का पहनने की सही ट्रेनिंग देती थी. हैरानी की बात यह है कि धर्म बदलने के बाद पीड़िता का नाम हनिया रखने का भी फैसला किया गया था. जांच के दौरान पीड़िता के मोबाइल में कई इस्लामिक रील, यूट्यूब लिंक और इंस्टाग्राम पोस्ट के सबूत मिले थे।  मलेशिया कनेक्शन और मालेगांव टीम इस मामले के दूसरे आरोपी दानिश शेख ने पीड़िता के एजुकेशनल और जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपने कब्जे में ले लिए थे. ये डॉक्यूमेंट्स मालेगांव में एक टीम को दिए जाने थे और पीड़िता का नाम बदला जाना था. साथ ही, पीड़िता को मलेशिया में नौकरी के लिए इमरान नाम के एक आदमी के पास भेजने की तैयारी चल रही थी. सरकारी वकीलों ने कोर्ट को बताया कि अभी इस बात की जांच होनी बाकी है कि क्या इस पूरी साज़िश के लिए निदा खान को किसी ने पैसे की मदद दी थी और क्या इसके पीछे कोई देश विरोधी ताकतें हैं।   निदा को कभी भी अरेस्ट कर सकती है पुलिस स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अजय मिस्र ने कोर्ट में बताया कि निदा खान अभी फरार है और उसका मोबाइल फोन जब्त करके यह पता लगाना ज़रूरी है कि उसने और कितनी लड़कियों के साथ ऐसा किया है. अगर उसे बेल मिल जाती है तो वह गवाहों पर दबाव डाल सकती है. फिलहाल कोर्ट ने निदा खान को कोई प्रोटेक्शन नहीं दिया है, इसलिए पुलिस उसे कभी भी अरेस्ट कर सकती है. इन सभी दलीलों के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और आखिरी फैसला 2 मई को सुनाया जाएगा।  निदा खान के वकील ने आरोपों को नकारा निदा खान के वकील राहुल कासलीवाल ने इन सब बात को नकारा है. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम पहले दिन से कह रहे हैं कि महाराष्ट्र में धर्मपरिवर्तन का कानून नहीं है, उत्तर प्रदेश और बाकी स्टेट्स में लागू धर्म परिवर्तन कानून का हमने अभ्यास किया है. इस केस में जो भारतीय न्यायसंहिता अनुसार धाराएं लगाई गई है वह सिर्फ धार्मिक भावनाओं को आहत पहुंचना जैसी धाराएं लगाई गई हैं, धर्मपरिवर्तन हुआ ही नहीं है. इस मामले में अलग अलग FIR की गई हैं जबकि केस से जुड़ा स्थान और विक्टिम एक ही है. इसलिए एक ही FIR होनी चाहिए, ना कि अलग FIR , इस मामले में 9 FIR हैं।  कैसे खुला TCS कांड? बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई, जब एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने नासिक पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप था कि एक कंपनी में काम करने वाली हिंदू महिला रमजान के रोजे रख रही थी. इसी आधार पर पुलिस को शक हुआ और उन्होंने गुप्त जांच शुरू की, जो आगे चलकर बड़े खुलासे में बदली।  जांच के दौरान पुलिस ने महिला कांस्टेबलों को हाउसकीपिंग स्टाफ बनाकर कंपनी में तैनात किया, ताकि भीतर की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके. इन अधिकारियों ने अंदर हो रही हर गतिविधि पर करीब से निगरानी रखी और अहम सबूत इकट्ठा किए।  जांच में यह भी सामने आया कि कुछ टीम लीडर अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रहे थे और कर्मचारियों को चुनकर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान करते हुए धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बना रहे थे. मामले का खुलासा होने के बाद सात पुरुषों और एक महिला को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि निदा खान नाम की एक आरोपी अभी भी फरार बताई जा रही है।