samacharsecretary.com

भारत को मिला एलपीजी संकट से निपटने का तरीका, किस्मत ने पलभर में बदल दी तस्वीर

नई दिल्‍ली  अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध ने भारत ही नहीं, दुनिया के तमाम देशों को गैस के संकट में धकेल दिया है. लेकिन, किस्‍मत भारत पर मेहरबान हुई और अचानक ग्‍लोबल मार्केट में प्राकृतिक गैस की कीमतें नीचे आ गईं. इसका फायदा उठाते हुए भारत ने ग्‍लोबल स्‍पॉट मार्केट से गैस की खरीदारी तेज कर दी है. इससे पश्चिम एशिया संकट के बाद बढ़ी गैस आयात की दिक्‍कतों से निपटने में मदद मिलेगी।  गैस मार्केट से जुड़े ट्रेडर्स का कहना है कि देश की सरकारी कंपनियां भारत पेट्रोलियम कॉर्प, गेल इंडिया लिमिटेड और गुजरात स्‍टेट पेट्रोलियम कॉर्प ने अप्रैल से जून की डिलीवरी के लिए 16 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट यानी बीटीयू पर खरीदा है. ये सप्‍लाई 15 अप्रैल को बंद हुए ट्रेड में खरीदी गई है. ट्रेडर्स का कहना है कि यह एक बड़ा बदलाव है, क्‍योंकि इससे पहले कीमतें ज्‍यादा होने की वजह से भारतीय खरीदारों ने स्‍पॉट मार्केट से खरीदारी कम कर दी थी और कई ट्रेंडर रद्द कर दिए थे।  क्‍यों आई है ऐसी नौबत ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्‍य लगभग बंद हो गया है और कतर में हमले से दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी प्‍लांट भी बंद हो गया. इस कारण भारत सहित दुनिया को सप्‍लाई होने वाले 20 फीसदी गैस के हिस्‍से पर दिक्‍कतें आ गईं. यही वजह रही कि भारत को भी पिछले साल की समान अवधि की तुलना में एलएनजी डिलीवरी करीब 14 फीसदी कम रही और सप्‍लाई के मुकाबले आयात का औसत गड़बड़ हो गया।  कीमत गिरी तो बढ़ गई खरीदारी भारत ने गैस खरीद ऐसे समय में बढ़ाई है, जब ग्‍लोबल स्‍पॉट मार्केट में प्राकृतिक गैस की कीमतें गिरकर एक महीने से भी ज्‍यादा के निचले स्‍तर पर चली गई हैं. युद्ध शुरू होने के बाद एक समय ऐसा भी आया था जब नेचुरल गैस के दाम ग्‍लोबल मार्केट में दोगुने से भी ज्‍यादा हो गए थे. तब इसकी कीमत 25 डॉलर प्रति बीटीयू के आसपास थी. यही वजह रही कि भारतीय खरीदारों ने अपने ट्रेडिंग बंद कर दी थी. अब कीमतें 50 फीसदी तक नीचे आ गई हैं, जिससे खरीदारी एक बार फिर बढ़ने लगी है।  गैस के लिए आयात पर निर्भर भारत सरकार ने कुछ साल पहले एक अभियान शुरू किया था कि देश को गैस आधारित अर्थव्‍यवस्‍था बनाना है, ताकि प्रदूषण पर लगाम कसी जा सके. फिलहाल अपनी जरूरत का करीब 60 फीसदी गैस चाहे वह प्राकृतिक गैस या हो फिर एलपीजी आज आयात करनी पड़ती है. साल 2024 में भारत का प्राकृतिक गैस का आयात करीब 35 हजार क्‍यूबिक मीटर के आसपास पहुंच गया था. पिछले साल का आंकड़ा तो और भी अधिक था, लेकिन इस साल की शुरुआत से ही ईरान संकट की वजह से आयात में कमी दिख रही है. भारत सबसे ज्‍यादा गैस का आयात कतर, यूएई और अमेरिका जेसे देशों से करता है। 

क्यूबा में अमेरिकी ड्रोन की गतिविधि: 6 घंटे तक समुद्री तट पर चक्कर लगाता रहा सबसे महंगा ड्रोन, क्या होगा ‘ऑपरेशन मादुरो’?

  नई दिल्ली अमेरिकी नौसेना का एक एडवांस्ड सर्विलांस ड्रोन MQ-4C ट्राइटन छह घंटे तक क्यूबा के पूरे दक्षिणी तट पर चक्कर लगाता रहा. यह ड्रोन जैक्सनविले से उड़ा था. इसने क्यूबा के दक्षिणी तट की पूरी लंबाई को स्कैन किया, सैंटियागो डी क्यूबा के पास 2 घंटे तक घूमता रहा. फिर हवाना के आसपास 2 घंटे चक्कर लगाने के बाद वापस लौट गया।  फ्लाइट ट्रैकर्स का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इस ड्रोन को क्यूबा के इतने करीब नहीं देखा था. आमतौर पर यह ड्रोन युद्ध वाले इलाकों जैसे ब्लैक सी, पर्सियन गल्फ और भूमध्य सागर में दिखता है. इस उड़ान का समय और रूट दोनों ही बहुत अहम हैं।  MQ-4C ट्राइटन अमेरिकी नौसेना का सबसे एडवांस्ड अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) है. एक ड्रोन की कीमत करीब 2000 करोड़ रुपये है. यह बहुत ऊंचाई पर उड़ सकता है. लंबे समय तक हवा में रह सकता है. बड़े क्षेत्र की निगरानी कर सकता है. यह ड्रोन रडार, कैमरा और इलेक्ट्रॉनिक सेंसर्स से लैस है जो जमीन और समुद्र पर हर गतिविधि को ट्रैक कर सकता है. इस बार यह ड्रोन क्यूबा के पूरे दक्षिणी तट को करीब से स्कैन करते हुए हवाना तक पहुंचा. इतनी करीबी निगरानी पहले कभी नहीं देखी गई।  ट्रंप का बयान और पेंटागन की तैयारियां इस ड्रोन के उड़ान का समय बहुत संदिग्ध है. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्हें क्यूबा को किसी न किसी रूप में लेने का सम्मान मिलेगा. पेंटागन चुपचाप क्यूबा में संभावित ऑपरेशन की प्लानिंग तेज कर रहा है. इसी बीच अमेरिका ने क्यूबा की तेल आपूर्ति को भी रोक दिया है, जिससे क्यूबा की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है. दस साल बाद पहली बार एक अमेरिकी डेलिगेशन हवाना पहुंचा है. ये सब घटनाएं एक साथ हो रही हैं, जिससे क्यूबा में चिंता बढ़ गई है।  सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह वही MQ-4C ट्राइटन ड्रोन है जो पिछले बार जैक्सनविले से उड़ान भरकर वेनेजुएला के पास 10 घंटे की रेकी मिशन पर गया था. उस उड़ान के ठीक तीन महीने बाद अमेरिका ने काराकास पर छापा मारा और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया।  अब ठीक उसी तरह का ड्रोन क्यूबा के आसपास 6 घंटे तक निगरानी कर रहा है. कई विशेषज्ञ इसे वेनेजुएला पैटर्न कह रहे हैं. क्यूबा को इस बात पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।  क्यूबा पर अमेरिका क्यों नजर गड़ा रहा है? क्यूबा लंबे समय से अमेरिका के लिए एक पुराना मुद्दा रहा है. ट्रंप प्रशासन क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार को कमजोर करना चाहता है. तेल आपूर्ति रोकना, ड्रोन से निगरानी बढ़ाना और डेलिगेशन भेजना – ये सभी कदम क्यूबा पर दबाव बनाने के लिए लग रहे हैं।  अमेरिका क्यूबा को लोकतंत्र की ओर लाना चाहता है, लेकिन क्यूबा इसे अपना आंतरिक मामला मानता है. अगर अमेरिका कोई सैन्य कार्रवाई करता है तो यह पूरे लैटिन अमेरिका में बड़ा तनाव पैदा कर सकता है. फिलहाल स्थिति बहुत संवेदनशील है. अमेरिकी ड्रोन की उड़ान साफ संकेत दे रही है कि पेंटागन क्यूबा पर नजर रखे हुए है।  ट्रंप का बयान और वेनेजुएला वाली पुरानी घटना को देखते हुए क्यूबा सरकार को सतर्क रहना होगा. क्यूबा के नेता अभी चुप हैं, लेकिन अंदरूनी स्तर पर तैयारी जरूर चल रही होगी. दुनिया इस बात पर नजर रखे हुए है कि क्या ट्रंप प्रशासन क्यूबा के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठाता है या फिर बातचीत के जरिए मामला सुलझता है.

सुक्खू सरकार का बड़ा यू-टर्न, हिमाचल में सीएम और विधायकों का वेतन रहेगा पहले जैसा

शिमला हिमाचल सरकार की ओर से मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा स्पीकर और विधायकों के वेतन में कटौती करने का फैसला लागू हो गया है. सुक्खू सरकार ने वेतन कटौती के फैसले को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है. बजट भाषण में आर्थिक संकट को देखते हुए सीएम ने वेतन कटौती का फैसला लिया था. सीएम के मासिक वेतन में 50 प्रतिशत, मंत्रियों के 30 और विधायकों के वेतन में 20 फीसदी की कटौती का ऐलान किया गया था।  किसका कितना कटने वाला प्रदेश की गंभीर आर्थिक स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री के वेतन का 50 प्रतिशत, मंत्रियों के वेतन का 30 प्रतिशत और विधायकों के वेतन का 30 प्रतिशत अस्थाई रूप से रोकने का फैसला किया गया था. आगामी 6 महीनों के लिए पूरा वेतन देने पर रोक लगाई गई है. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा था कि पिछली सरकारों के समय वेतन और पेंशन से जुड़ी देनदारियां बढ़कर करीब 13,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गई थीं।  ग्रेड-1 और ग्रेड-2 के अधिकारियों के वेतन कटौती का फैसला लिया था वापस अभी कुछ दिन पहले ही सुक्खू सरकार ने ग्रेड-1 और ग्रेड-2 के अधिकारियों के वेतन कटौती के फैसले पर आंशिक तौर पर यू-टर्न लिया था. किन्नौर के रिकॉन्गपिओ में हिमाचल दिवस पर सीएम सुक्खू ने बड़ा ऐलान किया था और घोषणा की थी कि प्रदेश में क्लास-1 और क्लास 2 अफसरों की सैलरी में अब कटौती नहीं की जाएगी. गौर रहे कि बजट के दौरान सरकार ने छह महीने के लिए सैलरी में कटौती का ऐलान किया था।  छह महीने बाद वापस दरअसल, हिमाचल प्रदेश के बजट सत्र के दौरान 21 मार्च को बजट पेश किया गया था और सीएम सुक्खू ने ऐलान किया था कि प्रदेश में क्लास-व और क्लास-2 समेत अन्य श्रेणी के कर्मचारियों की सैलरी में छह महीने के लिए 20 से 50 फीसदी तक की कटौती की जाएगी. हालांकि, छह महीने के बाद सरकार काटा गया वेतन कर्मचारियों  को लौटा देगी। 

जापान के वैज्ञानिकों का चमत्कार: मामूली लोहा से अरबों रुपये बचाने का तरीका, पेट्रोल-डीजल की समस्या का हल

नई दिल्ली  दुनियाभर में क्लीन एनर्जी की तलाश तेज हो रही है. हाइड्रोजन को भविष्य का सबसे साफ ईंधन माना जाता है. अभी तक हाइड्रोजन बनाने की प्रक्रिया काफी महंगी और जटिल रही है. लेकिन जापान के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा तरीका खोज निकाला है जो यकीन करने में भी मुश्किल लगता है. उन्होंने सिर्फ लोहे के आयन और अल्ट्रावायलेट (UV) रोशनी की मदद से हाइड्रोजन तैयार कर ली है. रिपोर्ट के अनुसार, क्यूशू यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर ताकाहिरो मात्सुमोतो और उनकी टीम एक रिसर्च कर रही थी. उनका मकसद सस्ते तत्वों से कैटलिस्ट यानी उत्प्रेरक तैयार करना था. इसी दौरान एक कंट्रोल एक्सपेरिमेंट में उन्होंने मेथेनॉल, आयरन आयन और सोडियम हाइड्रोक्साइड को मिलाया. जब इस घोल पर अल्ट्रावायलेट लाइट डाली गई, तो जो हुआ उसने सबको हैरान कर दिया. इस मिश्रण से बड़ी मात्रा में हाइड्रोजन गैस निकलने लगी।  मात्सुमोतो कहते हैं, ‘शुरुआत में तो इस पर यकीन करना ही मुश्किल था.‘ उन्होंने इसे एक सुखद इत्तेफाक बताया जिसने विज्ञान की नई राह खोल दी।  हाइड्रोजन उत्पादन की यह नई तकनीक इतनी खास क्यों है? आजकल ज्यादातर हाइड्रोजन फॉसिल फ्यूल यानी जीवाश्म ईंधन से बनाई जाती है. इससे पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता है. हाइड्रोजन को मेथेनॉल जैसे अल्कोहल से भी निकाला जा सकता है, लेकिन इसके लिए बहुत महंगे और दुर्लभ मेटल्स वाले कैटलिस्ट की जरूरत पड़ती है. लोहा पृथ्वी पर सबसे ज्यादा पाया जाने वाला और सस्ता मेटल है. इस नई रिसर्च में लोहे का इस्तेमाल करके उसी रफ्तार से हाइड्रोजन बनाई गई, जितनी महंगे कैटलिस्ट से बनती है. वैज्ञानिकों ने पाया कि इसकी हाइड्रोजन उत्पादन दर 921 मिलीमोल प्रति घंटा प्रति ग्राम कैटलिस्ट रही, जो अब तक के सबसे बेहतरीन सिस्टम के बराबर है।  क्या सिर्फ मेथेनॉल से ही हाइड्रोजन बनाई जा सकती है? इस रिसर्च की सबसे बड़ी खूबी इसकी वर्सेटिलिटी है. वैज्ञानिकों ने टेस्ट किया और पाया कि यह तरीका सिर्फ मेथेनॉल तक सीमित नहीं है. इससे एथेनॉल और प्रोपेनॉल जैसे दूसरे अल्कोहल से भी हाइड्रोजन निकाली जा सकती है. इसके अलावा, बायोमास से जुड़ी चीजों जैसे ग्लूकोज, स्टार्च और सेल्युलोज से भी हाइड्रोजन बनाने में सफलता मिली है. हालांकि, अभी ग्लूकोज जैसी चीजों के साथ इसकी परफॉर्मेंस थोड़ी कम है, लेकिन भविष्य में इसे बेहतर बनाने की पूरी गुंजाइश है. यह तकनीक कचरे से ऊर्जा बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित हो सकती है।  क्या इस पूरी प्रक्रिया में कोई बड़ी चुनौती भी है? हर बड़ी खोज के साथ कुछ सवाल भी जुड़े होते हैं. मात्सुमोतो की टीम का कहना है कि वे अभी तक इस पूरी रिएक्शन के सटीक मैकेनिज्म को नहीं समझ पाए हैं. यानी यह प्रक्रिया अंदरूनी तौर पर कैसे काम करती है, इसकी बारीकियां पता लगाना बाकी है. इसके अलावा अन्य पदार्थों के साथ इसकी एफिशिएंसी को बढ़ाना भी एक चुनौती है. फिर भी, यह तकनीक इतनी सरल है कि इसे कोई भी दोहरा सकता है. प्रोफेसर मात्सुमोतो कहते हैं कि वह चाहते हैं कि बच्चे भी इसे ट्राई करें ताकि वे साइंस की तरफ आकर्षित हों।  भविष्य की क्लीन एनर्जी के लिए यह कितना बड़ा बदलाव है? हाइड्रोजन का इस्तेमाल जब ईंधन के तौर पर होता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलती. यह सिर्फ पानी की भाप छोड़ता है. अगर इस नई और सस्ती विधि को बड़े पैमाने पर लागू किया गया, तो हाइड्रोजन कार और पावर प्लांट्स को चलाना बहुत सस्ता हो जाएगा. लोहे जैसे सस्ते मेटल और रोशनी का इस्तेमाल सस्टेनेबिलिटी की दिशा में मील का पत्थर है. आने वाले समय में ऑप्टिमाइजेशन के जरिए इस तकनीक को और बेहतर बनाया जाएगा. यह खोज हमें फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करने और ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने में बड़ी मदद दे सकती है। 

अब एथेनॉल से चलेगा चूल्हा, LPG सिलेंडर के महंगे दामों से मिलेगी आज़ादी

नई दिल्‍ली भारत में रसोई गैस (LPG) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई में आने वाली बाधाएं अक्सर होटल, रेस्टोरेंट और बड़े संस्थानों के लिए सिरदर्द बनी रहती हैं. लेकिन अब इस संकट का एक स्वदेशी और टिकाऊ समाधान निकालने की दिशा में प्रयास तेज हो गए हैं. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अब कमर्शियल कुकिंग के लिए एथेनॉल (Ethanol) का इस्तेमाल करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।  यदि यह योजना जमीन पर उतरती है तो आने वाले समय में कमर्शियल किचन से एलपीजी सिलेंडरों की निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है. लगभग 1,000 करोड़ लीटर अतिरिक्त एथेनॉल क्षमता को कुकिंग के लिए यूज में लाने की योजना है. आने वाले हफ्तों में इस पर एक विस्तृत व्हाइट पेपर अंतर-मंत्रालयी पैनल के सामने पेश किया जा सकता है।  एलपीजी से सस्‍ता है एथेनॉल एथेनॉल, खासकर हाइड्रस एथेनॉल कमर्शियल एलपीजी के मुकाबले सस्ता पड़ सकता है. इसमें लगभग 95% एथेनॉल और थोड़ा पानी होता है. इस वजह से इसे अतिरिक्त डीहाइड्रेशन प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता और इसकी लागत कम रहती है. कमर्शियल एलपीजी की कीमत लगभग ₹103 प्रति किलोग्राम है, जबकि हाइड्रस एथेनॉल करीब ₹70 प्रति किलोग्राम पड़ता है. हालांकि, एथेनॉल की कैलोरिफिक वैल्यू यानी ऊर्जा क्षमता एलपीजी से कम होती है. इसका मतलब है कि एथेनॉल की ज्यादा मात्रा की जरूरत पड़ती है।  किससे बनता है एथेनॉल? भारत में एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और टूटे हुए चावल से बनता है. इसका इस्‍तेमाल एक बायोफ्यूल के रूप में किया जाता है. भारत में अब एथेनॉल युक्‍त पेट्रोल की बिक्री होती है. कुकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला एथेनॉल मिश्रण ईंधन वाले एथेनॉल से अलग होता है और सस्ता भी है।  क्‍या है सरकार की योजना? एक सूत्र ने बताया कि सरकार की योजना शुरुआत में व्‍यावसायिक संस्‍थानों जैसे होटल, एयरपोर्ट और रेस्टोरेंट में एथेनॉल का इस्‍तेमाल खाना बनाने में करने की है. अमेरिका ईरान-युद्ध की वजह से एलपीजी आयात बाधित हुआ है और इस वजह से घरेलू बाजार में एलपीजी की उपलब्धता कम हुई है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियां घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे होटल और रेस्टोरेंट जैसे कमर्शियल संस्थानों को कम एलपीजी की आपूर्ति हो रही है।  कमर्शियल कुकिंग के लिए एथेनॉल (Ethanol) के इस्तेमाल के प्रस्ताव को एक अंतर-मंत्रालयी पैनल के सामने रखा जाएगा. इस पैनल में पेट्रोलियम, सड़क परिवहन, भारी उद्योग और खाद्य मंत्रालय के अधिकारी शा‍मिल हैं. यही पैनल एथेनॉल से जुड़े नीतिगत फैसले लेता है. सूत्रों के अनुसार, उद्योग के प्रतिनिधियों ने ट्रायल शुरू करने और सरकार के साथ मिलकर सुरक्षा व तकनीकी मानक विकसित करने की इच्‍छा जताई है. इसके लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। 

चार धाम यात्रा की शुरुआत, गंगोत्री मंदिर-यमुनोत्री मंदिर-बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तारीख जानें

उत्तराखंड उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषिकेश में चारधाम यात्रा- 2026 के लिए बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य शिविरों का निरीक्षण किया और यात्रा को सुगम, सुरक्षित और दिव्य बनाने का संकल्प दोहराया। सरकार इस साल ग्रीन चारधाम, और प्लास्टिक मुक्त केदारनाथ पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके तहत स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर और रोपवे जैसी सुविधाओं से यात्रा अब और भी तेज होगी। यात्रा मार्ग पर बेहतर चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। बसें रवाना सीएम पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को ऋषिकेश में चारधाम यात्रा-2026 के लिए बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने तीर्थयात्रियों के लिए लगाए गए मुफ्त स्वास्थ्य शिविर का जायजा भी लिया। मुख्यमंत्री ने देश के अलग-अलग हिस्सों से आए यात्रियों का स्वागत किया। सीएम ने कहा कि चारधाम यात्रा आस्था और साधना का रास्ता है। इस यात्रा से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा मिलती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। स्वच्छता और पर्यावरण पर जोर सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार सुरक्षित चारधाम यात्रा के लिए पूरी तरह तैयार है। सीएम ने कहा कि उत्तराखंड के कण-कण में भगवान रहते हैं। इस पवित्रता को बचाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। सरकार ने इस साल पर्यावरण के अनुकूल यात्रा और प्लास्टिक मुक्त केदारनाथ का लक्ष्य रखा है। रास्तों पर सफाई के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। सभी गाड़ियों में कूड़ेदान रखना जरूरी कर दिया गया है। सभी से अपील है कि जैसे हम अपने घर के मंदिर को साफ रखते हैं, वैसे ही देवभूमि को भी स्वच्छ और पवित्र रखना है। कब-कब किन धाम के खुलेंगे कपाट? बता दें कि चारधाम यात्रा के पहले दिन रविवार 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे। वहीं 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के खोले जाएंगे। इसके बाद अगले महीने 23 मई को श्री हेमकुंड साहिब के कपाट खुलेंगे। इस बार चारधाम यात्रा में कई बदलाव किए गए हैं। इस बार दर्शन के दौरान भीड़ से बचने के लिए टोकन सिस्टम लागू होगा। गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक निगरानी के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया गया है ताकि यात्रियों को कोई परेशानी ना हो। स्वास्थ्य पर भी फोकस मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में पुनर्निर्माण के काम तेजी से हो रहे हैं। गंगोत्री, यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब में भी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। गौरीकुंड से केदारनाथ धाम और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक के लिए रोपवे परियोजनाओं का काम भी आगे बढ़ रहा है। केदारनाथ में मेडिकल अस्पताल तैयार हो गया है। बद्रीनाथ में 50 बेड का अस्पताल जून तक तैयार हो जाएगा। यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई है।

धरती कांपी जापान में: भूकंप के झटकों से हड़कंप, सनाए ताकाइची ने जारी किया अलर्ट संदेश

टोक्यो जापान के नागानो प्रांत में शनिवार को 5.0 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र 10 किलोमीटर गहराई में था। ओमाची शहर में सबसे तेज झटके महसूस हुए। जापान के उत्तरी नागानो प्रांत में शनिवार को भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के मुताबिक, स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 1:20 बजे यह भूकंप आया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.0 मापी गई। प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने इस प्राकृतिक आपदा पर तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि भूकंप का केंद्र उत्तरी नागानो में था। ओमाची शहर में सबसे ज्यादा असर देखा गया। प्रधानमंत्री ने स्थिति को संभालने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय के संकट प्रबंधन केंद्र में एक विशेष संपर्क कक्ष स्थापित किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नुकसान का जल्द से जल्द पता लगाएं और जनता तक सटीक जानकारी पहुंचाएं। प्रधानमंत्री ने प्रभावित इलाकों के लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में भी इसी तरह की तीव्रता वाले झटके महसूस हो सकते हैं। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस भूकंप से सुनामी आने का कोई खतरा नहीं है। भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।   कई शहरों में भूकंप का असर अलग-अलग रहा। ओमाची शहर में तीव्रता पांच (ऊपरी स्तर) और नागानो शहर में तीव्रता पांच (निचली स्तर) दर्ज हुई। ओगावा गांव में तीव्रता चार और मात्सुमोतो शहर में तीव्रता तीन रही। पहले झटके के लगभग दो घंटे बाद, दोपहर 3:30 बजे ओमाची में एक और भूकंप आया, जिसकी तीव्रता ती थी। सुरक्षा के लिहाज से परमाणु संयंत्रों की भी जांच की गई। टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी ने बताया कि पड़ोसी निगाटा प्रांत में स्थित काशीवाजाकी-कारीवा न्यूक्लियर पावर प्लांट पूरी तरह सुरक्षित है। वहां किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं मिली है। स्थानीय प्रशासन ने इलाके में ऐसे ही भूकंप आने की चेतावनी दी है और लोगों से सावधान रहने को कहा है।

अमेरिका का बड़ा यूटर्न: भारत को मिलेगा रूस से सस्ता तेल, ट्रंप प्रशासन का नया निर्णय

नई दिल्ली  रूसी तेल पर भारत को सुबह-सुबह खुशखबरी मिली है. पश्चिम एशिया संघर्ष और ईंधन संकट के बीच अमेरिका ने बड़ा यूटर्न लिया है. अमेरिका ने रूसी तेल पर वह ऐलान किया है, जिसका भारत को बंपर फायदा मिलेगा. अमेरिका ने अब उस तेल वाले छूट को रिन्यू करने का फैसला किया है, जिससे भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति मिलती है. जी हां, अमेरिका ने घोषणा की है कि वह उन देशों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने वाली प्रतिबंधों में छूट को आगे बढ़ाएगा, जिसका मकसद ईरान युद्ध के कारण आपूर्ति में आई कमी को दूर करना था. बता दें कि बीते दिनों ही अमेरिका के वित्त मंत्री ने कहा था कि अमेरिका अब रूसी तेल वाली छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा।  रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की अनुमति देने वाली प्रतिबंधों से छूट को बढ़ा दिया है. यह छूट एक महीने के लिए बढ़ाई गई है. यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण बने दबाव को कम किया जा सके. पहले अमेरिका ने रूसी तेल पर मिली छूट को बढ़ाने से इनकार कर दिया था. अमेरिका का यह फैसला केवल उन रूसी तेल को लेकर है, जो समंदर में जहाज पर मौजूद हैं।  अमेरिकी वित्त विभाग का नया फैसला अमेरिकी वित्त विभाग ने शुक्रवार देर रात एक नया लाइसेंस वाला आदेश जारी किया. इसमें देशों को 17 अप्रैल से 16 मई के बीच जहाजों पर लदे रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दी गई है. यह कदम पहले जारी 30 दिन की छूट की जगह लेता है, जो 11 अप्रैल को समाप्त हो गई थी. अमेरिका के इस फैसले से भारत को अब फायदा ही फायदा है।  अमेरिका के लिए यह यूटर्न क्यों अमेरिका का फैसला उस फैसले से उलट है, जो इसी हफ्ते की शुरुआत में वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने लिया था. अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट ने बीते दिनों कहा था कि अमेरिका रूसी तेल वाली इस राहत को आगे बढ़ाएगा. ट्रंप प्रशासन का रूसी तेल वाला यह छूट अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण प्रभावित ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के प्रयासों का हिस्सा है. हालांकि, अमेरिका का यह फैसला केवल रूसी तेल को लेकर है. ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया के तेल इस लाइसेंस वाले आदेश से बाहर हैं।  रूसी तेल पर अभी और छूट मिलेगी? ब्रेट एरिक्सन ने कहा, ‘ईरान-अमेरिका संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थायी नुकसान पहुंचाया है और उन्हें स्थिर करने के लिए उपलब्ध उपाय लगभग खत्म हो चुके हैं.’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि आगे और छूट दी जा सकती है. वहीं, बेसेंट ने बताया कि इससे पहले मार्च में जारी एक अलग छूट के तहत लगभग 14 करोड़ बैरल ईरानी तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचा था, जिससे संघर्ष के दौरान आपूर्ति पर बने दबाव को कम करने में मदद मिली थी।  भारत को कितना फायदा? यहां ध्यान देने वाली बात है कि भारत भी प्रतिबंधों में छूट का एक बड़ा लाभार्थी है. यूं कहिए तो बड़ा लाभार्थी. अमेरिकी छूट मिलने के बाद भारत ने बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदे थे. ट्रंप प्रशासन के इस छूट वाले फैसले की अमेरिकी नेताओं ने आलोचना की थी कि इससे मास्को और तेहरान पर वित्तीय दबाव कम हो रहा है. सरकारी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने रूसी तेल पर अमेरिकी छूट लागू होने के बाद रूस से करीब 3 करोड़ बैरल तेल का ऑर्डर दिया था. अब नए फैसले का मतलब है कि भारत अभी आगे भी रूस से सस्ता तेल खरीदता रहेगा। 

होर्मुज प्रतिबंध को लेकर तनाव बढ़ा, डोनाल्ड ट्रंप बोले—ईरान की ब्लैकमेलिंग नहीं चलेगी

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट पर दोबारा प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान अमेरिका और दुनिया को ब्लैकमैल नहीं कर सकता। बता दें, शुक्रवार को लेबनान में हुए सीजफायर का स्वागत करते हुए ईरान ने होर्मुज पर लगे प्रतिंबध को हटा दिया था। हालांकि, जब ट्रंप होर्मुज के पास लगे अमेरिकी ब्लाकेड को हटाने से इनकार कर दिया, तो शनिवार को ईरान ने फिर से होर्मुज के दरवाजे बंद कर दिए। होर्मुज पर बदलते हालात पर ट्रंप ने शनिवार को ओवेल ऑफिस में मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, "हम उनसे बात कर रहे हैं। वे स्ट्रेट को फिर से बंद करना चाहते हैं। जैसा कि वे वर्षों से करते आ रहे हैं और वे हमें ब्लैकमेल नहीं कर सकते।" इससे पहले ईरानी सेना की कमांड ने एक होर्मुज पर अमेरिकी कमांड को वादाखिलाफी बताया। ईरान की तरफ से कहा गया कि ईरानी बंदरगाहों के खिलाफ लगाए गए अमेरिकी ब्लाकेड को न हटाकर अमेरिका ने अपना वादा तोड़ा है। बयान में आगे कहा गया, "जब तक अमेरिका ईरान आने वाले सभी जहाजों के लिए आवाजाही की स्वतंत्रता बहाल नहीं करता, होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति सख्त नियंत्रण में रहेगी।"

नारी शक्ति पर नरेंद्र मोदी का भरोसा: ‘आरक्षण का संकल्प अटूट, हर रुकावट होगी पार’

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर विपक्ष की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें ‘नारी शक्ति का अपराधी’ करार दिया है। पीएम ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने इस ऐतिहासिक सुधार को रोकने के लिए शुरू से ही षड्यंत्र रचे हैं। उन्होंने अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन दलों ने महिलाओं के पक्ष में खड़े होने का एक बड़ा अवसर खो दिया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, विपक्ष को डर है कि यदि महिलाएं सशक्त हो गईं, तो उनकी परिवारवादी राजनीति खतरे में पड़ जाएगी। इसीलिए उन्होंने इस विधेयक का समर्थन न करके देश की 50% आबादी के सपनों को रौंदने का काम किया है। परिसीमन का झूठ, अंग्रेजों वाली राजनीति संसद में चर्चा के दौरान PM Modi ने परिसीमन के मुद्दे पर फैलाई जा रही भ्रांतियों का भी जवाब दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ वाली नीति अपनाते हुए परिसीमन के नाम पर देश में दरार पैदा करने का प्रयास किया है। पीएम ने स्पष्ट किया कि आरक्षण लागू होने से सभी राज्यों की पहुंच और शक्ति समान स्तर पर बढ़ेगी, लेकिन विपक्ष ने अपनी स्वार्थी राजनीति के चलते इसमें अड़ंगा डाला। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास सुधरने का एक मौका था, जिसे उन्होंने अपनी नकारात्मक सोच के कारण गँवा दिया है, जिसका परिणाम अब जनता के सामने है। विकास विरोधी चेहरा कांग्रेस का पुराना इतिहास कांग्रेस को ‘एंटी-रिफॉर्म’ पार्टी बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि इस दल ने हमेशा देश के विकास में रुकावटें डाली हैं। चाहे वह सीएए (CAA) कानून हो या सीमा विवादों का समाधान, कांग्रेस हमेशा विरोध की तख्ती लेकर विकास को लटकाती आई है। मोदी ने कहा कि कांग्रेस की इसी नकारात्मकता के कारण भारत आज उस ऊंचाई पर नहीं है जहां उसे होना चाहिए था। उन्होंने चेतावनी दी कि अब देश की बेटियां विपक्ष के इस अड़ियल रवैये का जवाब देंगी और उनकी हर साजिश को बेनकाब करेंगी। अचूक संकल्प: बिल पास करवाकर रहेगी सरकार: PM Modi भले ही वर्तमान में विधेयक को आवश्यक बहुमत न मिल पाया हो, लेकिन PM Modi ने अपना संकल्प दोहराते हुए कहा कि भाजपा और एनडीए का आत्मबल अजय है। उन्होंने कहा, “भले ही हमें संसद में 66% वोट न मिले हों, लेकिन देश की नारी शक्ति का 100% आशीर्वाद हमारे पास है।” प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि वे विज्ञापन छपवाकर उन्हें क्रेडिट देने को तैयार हैं, बस वे बिल का समर्थन करें। उन्होंने वादा किया कि हर रुकावट को खत्म करके यह बिल पास करवाया जाएगा और नारी शक्ति को उनका हक दिलाकर ही दम लिया जाएगा।