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INS अरिदमन और INS तारागिरी के साथ समंदर में ताकतवर हुई इंडिया, दुश्मन को मिलेगा डर

विशाखापट्टनम  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट लिखकर INS अरिदमन नामक भारत के तीसरे स्वदेशी न्यूक्लियर पनडुब्बी के लॉन्च का संकेत दे दिया. उन्होंने लिखा कि यह कोई शब्द नहीं, यह ताकत है, ‘अरिदमन’. यह पनडुब्बी भारत की समुद्री न्यूक्लियर सुरक्षा को और मजबूत करेगी. इसके अलावा वो  विशाखापट्टनम में एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी को भी नौसेना को सौपेंगे।  INS अरिदमन में लंबी दूरी की मिसाइलें लगाई गई हैं जो दुश्मन को ज्यादा दूर से निशाना बना सकेंगी. अब यह पनडुब्बी अंतिम समुद्री परीक्षण पूरा कर चुकी है. जल्द ही स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड में शामिल हो जाएगी. इससे पहले INS अरिहंत 2016 में और INS अरिघात अगस्त 2024 में सेवा में शामिल हो चुकी हैं।  राजनाथ सिंह का पोस्ट और विशाखापट्टनम दौरा राजनाथ सिंह इन दिनों विशाखापट्टनम में हैं जहां भारत की सभी न्यूक्लियर पनडुब्बियों को बनाया जाता है. आज वे यहां स्वदेशी बनी एडवांस्ड स्टेल्थ फ्रिगेट तारागिरी को कमीशन करेंगे. इसी दौरान उन्होंने अरिदमन के बारे में पोस्ट किया. नेवी चीफ एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने दिसंबर 2025 में ही कहा था कि अप्रैल-मई के बीच यह पनडुब्बी सेवा में आ जाएगी. अब अंतिम परीक्षण पूरे हो चुके हैं।  पिछली पनडुब्बियों से क्या फर्क है INS अरिहंत और INS अरिघात की तुलना में अरिदमन ज्यादा बेहतर है. इसमें आठ वर्टिकल लॉन्च ट्यूब लगाए गए हैं जबकि अरिहंत में सिर्फ चार थे. मतलब यह एक साथ ज्यादा मिसाइलें ले जा सकेगी. इसमें आठ K-4 मिसाइलें लगाई जा सकती हैं जिनकी रेंज 3500 किलोमीटर है या फिर 24 K-15 मिसाइलें जिनकी रेंज 750 किलोमीटर है. इससे भारत की समुद्री न्यूक्लियर ताकत बहुत बढ़ जाएगी. पनडुब्बी का हल्का डिजाइन इसे और चुपके से चलने में मदद करेगा।  समुद्री सुरक्षा में नई ताकत अरिदमन के शामिल होने से भारत कंटीन्यूअस एट-सी डिटेरेंस बना सकेगा. यानी हमेशा कम से कम एक न्यूक्लियर पनडुब्बी समुद्र में गश्त पर रहेगी. इससे दुश्मन कभी भी हमला करने का सोचेगा तो सोच-समझकर सोचेगा. यह पनडुब्बी भारत की नो फर्स्ट यूज न्यूक्लियर नीति को मजबूत करती है. स्वदेशी रूप से बनी होने से विदेशी पार्ट्स पर निर्भरता कम हुई है. देश की डिफेंस इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिला है।  INS अरिदमन क्या है? INS अरिदमन एक एडवांस न्यूक्लियर-पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है, जो अरिहंत-क्लास का हिस्सा है. इसे 'S4' कोडनेम के साथ विकसित किया गया है. इसकी लंबाई करीब 125 मीटर और वजन 7,000 टन है, जो इसे पहले मॉडलों से 1000 टन ज्यादा भारी बनाता है. यह पनडुब्बी भारतीय नौसेना के एडवांस्ड तकनीक वाहन (ATV) प्रोजेक्ट के तहत विशाखापत्तनम में बनाई गई है।  यह क्यों खास है? बढ़ी हुई ताकत: INS अरिदमन में 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं, जो इसे 24 छोटी रेंज की K-15 मिसाइलें (750 किमी रेंज) या 8 लंबी रेंज की K-4 मिसाइलें (3500 किमी रेंज) ले जाने की क्षमता देते हैं. यह पहले की पनडुब्बियों की तुलना में ज्यादा शक्तिशाली है।  चुपके की तकनीक: इसमें बेहतर सोनार-एब्जॉर्बिंग कोटिंग और शोर-कम करने वाली तकनीक है, जिससे यह दुश्मन के लिए पता करना मुश्किल हो जाता है।  लंबी दूरी: K-4 मिसाइलों के साथ यह दुश्मन के गहरे इलाकों को निशाना बना सकती है, जो भारत की सुरक्षा के लिए जरूरी है।  स्वदेशी तकनीक: इस पनडुब्बी में करीब 70% स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, जो भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।  भारत को क्या फायदा होगा? न्यूक्लियर ट्रायड मजबूत: INS अरिदमन के साथ भारत की जमीन, हवा और समुद्र से न्यूक्लियर हमले की क्षमता (न्यूक्लियर ट्रायड) और मजबूत होगी. यह भारत की 'नो फर्स्ट यूज' नीति को सपोर्ट करता है, यानी दुश्मन पहले हमला करे तो जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहना।  चीन और पाकिस्तान के खिलाफ सुरक्षा: चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी और पाकिस्तान के साथ तनाव को देखते हुए यह पनडुब्बी एक मजबूत जवाबी ताकत होगी।  समुद्री सुरक्षा: अरब सागर और हिंद महासागर में भारत की मौजूदगी बढ़ेगी, जो क्षेत्रीय शांति के लिए जरूरी है।  रणनीतिक संतुलन: यह पनडुब्बी भारत को अपने दुश्मनों के खिलाफ दूसरा हमला (सेकंड स्ट्राइक) करने की क्षमता देती है, जो शांति बनाए रखने में मदद करेगी।  INS तारागिरी के फीचर्स  यह स्वदेशी रूप से बनी प्रोजेक्ट 17A की स्टील्थ फ्रिगेट है. इसका मतलब है कि यह दुश्मन के रडार में आसानी से नहीं पकड़ी जाती. यह मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) मुंबई में बनाई गई है. इसमें 75 प्रतिशत से ज्यादा सामान भारत में ही बना है।  यह फ्रिगेट करीब 6670 टन वजन की है. इसकी लंबाई 149 मीटर है. यह 52 km/hr की स्पीड से चल सकती है. लंबी यात्रा के लिए इसका रेंज 10186 किलोमीटर तक है. इसमें दो डीजल इंजन और दो गैस टर्बाइन लगे हैं जो इसे तेज और लंबे समय तक चलने की ताकत देते हैं।  इसका डिजाइन बहुत चिकना और स्टील्थ टेक्नोलॉजी वाला है. रडार, इंफ्रारेड और आवाज को कम करने वाली खास सामग्री इस्तेमाल की गई है ताकि दुश्मन इसे आसानी से न देख सके. इसमें 225 नाविकों की टीम काम करती है।  इसमें क्या हथियार लगे हैं INS तारागिरी में दुनिया के बेहतरीन हथियार लगाए गए हैं. इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक सतह से सतह मारने वाली मिसाइलें हैं जो दुश्मन के जहाजों को दूर से नष्ट कर सकती हैं. मीडियम रेंज की सतह से हवा में मारने वाली मिसाइलें भी हैं. दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूंढने और मारने के लिए खास एंटी-सबमरीन सिस्टम है।  इसके अलावा 127 मिलीमीटर का बड़ा मुख्य तोप भी लगा है. सब कुछ आधुनिक कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ा है ताकि पल भर में फैसला लिया जा सके. यह फ्रिगेट समुद्र, हवा और पानी के नीचे तीनों तरह की लड़ाई लड़ सकती है।  यह क्यों महत्वपूर्ण है तारागिरी प्रोजेक्ट 17A की सात फ्रिगेट्स में से चौथी है. इससे पहले वाली शिवालिक क्लास से यह ज्यादा बड़ी, बेहतर और स्टील्थ वाली है. इसका मकसद भारतीय नौसेना को और ताकतवर बनाना है खासकर हिंद महासागर में. यह न सिर्फ लड़ाई के लिए है बल्कि मानवीय मदद, आपदा राहत और डिप्लोमेसी के कामों में भी इस्तेमाल होगी। 

ईरान ने कहा, दूसरा अमेरिकी F-35 जेट किया गया गिरा

तेहरान  अमेरिका-ईरान जंग का आज 35वां दिन है. जंग भीषण होती जा रही है. इस बीच ईरान ने आज एक बड़ा दावा किया है. ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने बमबारी करने आए एक और अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को मार गिराया है. हालांकि, इसकी अभी स्वंतत्र एजेंसियों से पुष्टि नहीं हो सकी है. ईरान का दावा है कि अमेरिकी फाइटर जेट को उसने सेंट्रल ईरान में मार गिराया. ये दूसरा F-35 जेट है जिसे मार गिराने का ईरान ने दावा किया है. साथ ही ईरानी सेना ने कहा कि हिट हुए इस विमान के पायलट के बचने के चांस कम ही हैं।  F-35 अमेरिका का सबसे मजबूत स्टील्थ फाइटर जेट माना जाता है. ईरान ने इससे पहले एक और F-35 फाइटर जेट को हिट किया था और जिसमें काफी नुकसान पहुंचा था।  ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने इस हाई-टेक विमान को सेंट्रल ईरान के ऊपर सटीक निशाना बनाया. ईरान का दावा है कि यह फाइटर जेट ब्रिटेन के 'आरएएफ लाकेनहीथ' (RAF Lakenheath) बेस की एक खास स्क्वाड्रन से जुड़ा हुआ था. हालांकि, अभी तक अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन ईरान अपनी बात पर पूरी तरह अड़ा हुआ है।  ईरानी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, जैसे ही मिसाइल विमान से टकराई, उसमें जोरदार धमाका हुआ और वह मलबे में तब्दील हो गया. सेना का मानना है कि इतनी भीषण टक्कर और विस्फोट के बाद पायलट का बच पाना लगभग नामुमकिन है. गौर करने वाली बात यह है कि यह दूसरा मौका है जब ईरान ने अमेरिका के सबसे एडवांस फाइटर जेट F-35 को गिराने का दावा किया है. इससे पहले भी एक जेट को बुरी तरह नुकसान पहुंचाने की बात सामने आई थी।  इससे पहले 19 मार्च 2026 को भी ईरान ने दुनिया को तब हैरान कर दिया था, जब उसने पहली बार इस 'अदृश्य' माने जाने वाले स्टील्थ जेट को मार गिराया था. युद्ध के इतिहास में यह पहली बार था जब कोई F-35 किसी हमले का शिकार हुआ हो. दिलचस्प बात यह थी कि उस वक्त राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान के पास अब कोई डिफेंस सिस्टम नहीं बचा, लेकिन कुछ ही घंटों बाद ईरान ने उसी F-35 को ट्रैक किया, लॉक किया और सीधे ढेर कर दिया. अब एक बार फिर ईरान ने वैसा ही दावा किया है।  F-35 को दुनिया का सबसे स्मार्ट और 'अदृश्य' विमान माना जाता है. इसे इस तरह बनाया गया है कि यह दुश्मन के राडार की पकड़ में न आए और चुपके से हमला कर सके. अगर ईरान का यह दावा सच निकलता है, तो यह अमेरिकी वायुसेना के लिए बहुत बड़ा तकनीकी और सामरिक झटका साबित होगा।  

मालदा हिंसा के प्रमुख आरोपी को बागडोगरा एयरपोर्ट से गिरफ्तार, भागने की थी योजना

कोलकाता पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक में हुई हालिया हिंसा और तनाव के मामले में पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है. बंगाल पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम के मास्टरमाइंड माने जा रहे अधिवक्ता और एआईएमआईएम (AIMIM) नेता मोफक्करुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तारी उस समय हुई जब इस्लाम बागडोगरा एयरपोर्ट से राज्य छोड़कर भागने की कोशिश कर रहा था।  पुलिस सूत्रों के अनुसार, मोफक्करुल इस्लाम के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने के बाद से ही उसकी तलाश जारी थी. खुफिया जानकारी मिली थी कि वह गिरफ्तारी से बचने के लिए सिलीगुड़ी के पास बागडोगरा हवाई अड्डे से उड़ान भरने वाला है. पुलिस की एक विशेष टीम ने जाल बिछाकर उसे टर्मिनल के पास से धर दबोचा।  इस्लाम पेशे से वकील है, जिसे कानून की अच्छी समझ है, फिर भी वह पुलिस की नजरों से बच नहीं सका. मोफक्करुल इस्लाम का राजनीतिक प्रोफाइल काफी सक्रिय रहा है।  वह असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का एक प्रमुख चेहरा है. उसने साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उत्तर दिनाजपुर जिले की इटाहार (Itahar) सीट से AIMIM के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था. जांच में सामने आया है कि पिछले दिनों सुजापुर और कालियाचक के आसपास हुए विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व भी इस्लाम ही कर रहा था।  पुलिस-प्रशासन को दी थी चुनौती हाल ही में सामने आए एक वीडियो में इस्लाम बेहद आक्रामक तेवर में जिले के आला अधिकारियों को ललकारता नजर आ रहा है. वीडियो में उसे कैमरे के सामने चिल्लाते हुए सुना जा सकता है, 'ओए डीएम , एसपी .. सीआईडी कहां हो? आईबी कहां है? तुम सब कहां हो? यहां आओ…" प्रशासन के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी और भीड़ को उकसाने के बाद से ही वह पुलिस के राडार पर था।  पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस्लाम की भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है. आरोप है कि सुजापुर में हुए विरोध प्रदर्शनों को सुनियोजित तरीके से उसी ने लीड किया था. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस हिंसा के पीछे कोई गहरी साजिश थी या यह अचानक भड़का हुआ आक्रोश था. फिलहाल वह पुलिस की हिरासत में है और उससे पूछताछ जारी है। 

उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम: 250 मदरसों को स्कूल में बदला जाएगा

देहरादून  उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड भंग किए जाने पर विवाद बढ़ गया है। आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि मदरसों पर बेवजह आरोप लगाना गलत है। उन्होंने कहा कि मदरसा बोर्ड को खत्म करना एक ऐतिहासिक गलती है।  मौलाना ने दावा किया कि मदरसों से जुड़े करीब 55 हजार उलमा और छात्र अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हुए। 1857 से लेकर 1947 तक और उसके बाद भी मदरसों के उलमा देश की एकता के लिए खड़े रहे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी बिना इतिहास पढ़े ‘जिहाद की शिक्षा’ की बात कर रहे हैं, जो असंवैधानिक और अनैतिक है। उनके मुताबिक संवैधानिक पद पर बैठे लोगों को शिक्षण संस्थाओं में सुधार की बात करनी चाहिए, न कि उन्हें बदनाम करना चाहिए। मौलाना ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड सरकार ने 250 मदरसों पर ताले लगा दिए और 125 सूफी मजारों पर बुलडोजर चलाया। उन्होंने कहा कि ऐसा कदम उत्तर प्रदेश में भी नहीं उठाया गया और राज्य सरकार इस्लामी धार्मिक शिक्षा खत्म करने पर उतारू है। वहीं मुख्यमंत्री ने कहा था कि राज्य में विभाजनकारी सोच को रोकने के लिए मदरसा बोर्ड समाप्त किया गया है। उनका कहना था कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को भी वही पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा, जो शिक्षा बोर्ड तय करता है, ताकि वे देश और समाज की प्रगति में योगदान दे सकें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 1 जुलाई 2026 से इन संस्थानों में समान पाठ्यक्रम लागू होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर ‘जिहादी’ सोच पनप रही थी, इसलिए कार्रवाई जरूरी थी। सरकार ने 250 से ज्यादा अवैध मदरसों पर भी कार्रवाई की, क्योंकि उनके रिकॉर्ड और पढ़ाई का विवरण स्पष्ट नहीं था।  

ट्रंप का धमकी भरा कदम: फार्मा सेक्टर पर 100% टैरिफ, भारत पर भी पड़ सकता है असर

नई दिल्ली ईरान-अमेरिका जंग के बीच ट्रंप सरकार कुछ दवा कंपनियों पर टैरिफ लगाने के बारे में सोच रही है. अगर ये कंपन‍िया ट्रंप सरकार की शर्त नहीं मानती हैं, तो उन्‍हें 100 फीसदी तक टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है. खासकर उन कंपनियों पर, जो अमेरिका में अपनी दवाएं इम्‍पोर्ट करती हैं. इसका मतलब है कि भारत से भी अमेरिका भेजे जाने वाले दवाओं पर इसका असर पड़ सकता है।  ब्‍लूमबर्ग के मुताबिक, अगर दवा निर्माता कंपनियां अमेरिका में कम कीमतों की गारंटी देने वाले समझौतों पर नहीं पहुंच पाती हैं, तो ट्रंप प्रशासन गुरुवार को ही उन पर टैरिफ लगाने का ऐलान कर सकता है. ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि आयातित ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर ये शुल्क 100 प्रतिशत तक लागू हो सकता है. यह पहल व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 के तहत की गई जांच के बाद की गई है।  अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के एक बयान ने भारतीय शेयर बाजार के फार्मा सेक्टर में हलचल मचा दी. ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका में आने वाली ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है. इस खबर के सामने आते ही निवेशकों में घबराहट दिखी और कई दवा कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई. सबसे ज्यादा असर Sun Pharmaceutical Industries पर देखा गया, जिसके शेयर करीब 4-5% तक टूटकर 52 हफ्तों के निचले स्तर के करीब पहुंच गए. वहीं, Divi’s Laboratories, Biocon, Lupin, Dr. Reddy’s Laboratories, Cipla और Zydus Lifesciences जैसे बड़े नामों में भी 2 से 4% तक की गिरावट देखने को मिली. निफ्टी फार्मा इंडेक्स भी करीब 2.5% नीचे फिसल गया।  Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप का कहना है कि अगर विदेशी दवा कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग नहीं करतीं, तो उनकी दवाओं पर भारी टैक्स लगाया जाएगा. उनका फोकस “मेड इन अमेरिका” को बढ़ावा देना और घरेलू रोजगार बढ़ाना है. यही वजह है कि इस तरह के टैरिफ को ट्रंप लगाने की तैयारी कर रहे है. हालांकि, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि फिलहाल बाजार में जो गिरावट दिखी है, वह ज्यादा सेंटिमेंट आधारित है. भारत से अमेरिका को जो दवाएं भेजी जाती हैं, उनमें ज्यादातर हिस्सा जेनरिक दवाओं का होती है. ये सस्ती दवाएं होती हैं और अभी तक टैरिफ का फोकस ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर ही है. इसलिए सीधे तौर पर सभी कंपनियों पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है।  किन फार्मा कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर? फिर भी कुछ कंपनियां ज्यादा प्रभावित दिखीं. जैसे सन फार्मा अमेरिका में कुछ स्पेशलिटी और ब्रांडेड दवाएं भी बेचती है. इसी वजह से उसके शेयरों पर दबाव ज्यादा रहा. वहीं Divi’s Laboratories और Laurus Labs जैसी कंपनियां API (एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स) बनाती हैं, जिनका निर्यात अमेरिका और यूरोप में होता है, इसलिए उनमें भी हल्की कमजोरी दिखी।  जेनरिक दवाओं का हिस्सा 90% से ज्यादा हालांकि, एक पॉजिटिव पहलू यह भी है कि कई भारतीय कंपनियां पहले से ही अमेरिका में निवेश कर रही हैं. Biocon ने हाल ही में न्यू जर्सी में अपनी यूनिट शुरू की है. ऐसे में जिन कंपनियों का लोकल प्रेजेंस है, उन पर टैरिफ का असर सीमित रह सकता है. भारत हर साल अमेरिका को करीब 10.5 अरब डॉलर की दवाएं निर्यात करता है, जिसमें 90% से ज्यादा हिस्सा जेनरिक दवाओं का होता है. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अभी निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है. यह गिरावट कम समय के लिए भी हो सकती है. अगर कंपनियां अमेरिका में अपनी मौजूदगी बढ़ाती हैं और स्ट्रैटजी में बदलाव करती हैं, तो भविष्य में इसका फायदा भी मिल सकता है।  ट्रंप का यह बयान बाजार के लिए एक झटका जरूर है, लेकिन भारतीय फार्मा सेक्टर की बुनियादी मजबूती अभी भी बरकरार है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि टैरिफ नीति किस हद तक लागू होती है और कंपनियां इसके अनुसार खुद को कैसे ढालती हैं। 

नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू करने को सरकार तैयार, बजट सत्र के विस्तार में होगा संविधान संशोधन

नई दिल्ली संसद की 16 अप्रैल से 18 अप्रैल तक फिर से तीन बैठकें होंगी. संसद की इन तीन सीटिंग सरकार महिला आरक्षण बिल लागू करने के लिए जरूरी संशोधन लेकर आएगी और पारित कराएगी. संसद के बजट सत्र का एक्सटेंशन होगा, यह अब औपचारिक रूप से तय हो गया है. राज्यसभा में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि संसद की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित नहीं किया जाएगा. हम निश्चित उद्देश्य के लिए दो या तीन हफ्ते बाद फिर से बैठक बुलाएंगे. अब संसद की अगली बैठक की तारीख भी सामने आ गई है. संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित नहीं होगी. संसद के दोनों सदनों की बैठक 16 अप्रैल से फिर शुरू होगी. दोनों सदनों में 17 और अप्रैल को भी कार्यवाही चलेगी. संसद की इन तीन बैठकों के दौरान सरकार महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन बिल पारित कराएगी. यह एक तरह से बजट सत्र का ही एक्सटेंशन है. गौरतलब है कि सरकार ने 2029 के आम चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षण की मंशा जताते हुए इसके संकेत दे दिए थे. विपक्षी दलों ने पांच राज्यों में चल रहे चुनाव के बाद इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने और इसके बाद संसद की बैठक बुलाकर इसे लागू करने की मांग सरकार से की थी. सुबह राज्यसभा में इसे लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तल्ख और गर्मा-गर्म तकरार भी देखने को मिली थी. कांग्रेस के चीफ व्हिप जयराम रमेश ने चुनाव के बीच ऐसा करने को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताया था. उन्होंने चुनाव बाद यह बिल लाने की अपील करते हुए कहा था कि जब यह बिल संसद से पारित हुआ था, विपक्ष ने तभी इसे तत्काल लागू करने की मांग की थी. तब सरकार ने जनगणना से परिसीमन तक बाध्यताएं गिना इसे तुरंत लागू करने से इनकार कर दिया था. अब तमिलनाडु और बंगाल में चुनाव हैं, तब इनको इस बिल की याद आई है.  

ट्रंप ने किया मैक्रों का मजाक, कहा- उनकी पत्नी बहुत बुरा बर्ताव करती हैं

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का मजाक उड़ाया है। एक लंच के दौरान ट्रंप ने कहा, "मैंने फ्रांस के मैक्रों को फोन किया, जिनकी पत्नी उनके साथ बेहद बुरा बर्ताव करती हैं। अब भी उस मुक्के से उबर रहे हैं, जो उन्होंने मुंह पर मारा था।" ट्रंप का यह कमेंट एक वीडियो में रिकॉर्ड हो गया और यह व्हाइट हाउस के यूट्यूब चैनल पर भी अपलोड कर दिया गया। हालांकि, बाद में विवाद बढ़ने पर वीडियो को ब्लॉक कर दिया गया। ट्रंप ने यह कमेंट पिछले साल मई के उस वीडियो को लेकर की थी, जिसमें मैक्रों की पत्नी ब्रिगिट वियतनाम यात्रा के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति को धक्का देते हुए कैमरे में कैद हो गई थीं। हालांकि, बाद में मैक्रों ने दुष्प्रचार बताते हुए खारिज कर दिया था। बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच उन्होंने खुद फ्रांस से सैन्य मदद मांगी थी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "हमें उनकी जरूरत नहीं थी, लेकिन फिर भी मैंने उनसे मदद मांगी।" ट्रंप ने कहा, "और मैंने कहा, इमैनुएल, हम खाड़ी में थोड़ी मदद पाकर खुश होंगे, भले ही हम बुरे लोगों और बैलिस्टिक मिसाइलों को खत्म करने के मामले में नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। हमें थोड़ी मदद मिल जाए तो अच्छा रहेगा। अगर आप ऐसा कर सकें, तो क्या आप कृपया तुरंत कुछ जहाज भेज सकते हैं?'' इसके बाद ट्रंप ने मैक्रों के फ्रेंच लहजे में नकल करते हुए कहा, ''नहीं नहीं, हम ऐसा नहीं कर सकते डोनाल्ड, हम यह युद्ध जीतने के बाद कर सकते हैं।'' ट्रंप ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि नहीं हमें युद्ध जीतने के बाद कोई मदद की जरूरत नहीं है। पत्नी संग वायरल हुआ था मैक्रों का वीडियो पिछले साल मैक्रों और उनकी पत्नी का वीडियो सामने आया था, जो चर्चा का विषय बन गया। इसमें दिखाया गया कि दक्षिण-पूर्व एशिया की अपनी आधिकारिक यात्रा शुरू करने के लिए वियतनाम पहुंचने पर, राष्ट्रपति की पत्नी ने अचानक एक झटके के साथ उनका चेहरा एक तरफ हटा दिया। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही प्लेन का दरवाजा खुलता है, तुरंत सामने मैक्रों दिखाई देते हैं। उसी दौरान उनकी पत्नी का हाथ सामने आता है और मैक्रों के चेहरे को दूसरी ओर धक्का देती हैं। यह घटना वहां मौजूद क्रू भी देखती है और सामने लगे कैमरे में भी कैद होती है। जब मैक्रों को पता चलता है कि वीडियो बनाया जा चुका है, तो वह झेंपते हुए एक हल्की सी स्माइल पास करते हैं और कैमरे के सामने हाथ हिलाते हैं। बता दें कि मैक्रों ने ब्रिगिट मैक्रों से शादी की थी, जोकि उनकी हाईस्कूल में टीचर थीं। दोनों का रिश्ता तब शुरू हुआ था, जब मैक्रों की उम्र महज 15 साल थी। उस समय ब्रिगिट एमियंस के ला प्रोविडेंस स्कूल में 39 साल की टीचर थीं। दोनों के बीच लगभग 25 साल का गैप होने के बाद भी, साल 2007 में शादी कर ली थी।

पाकिस्तान को रक्षा मंत्री का दो टूक संदेश, किसी भी उकसावे पर करारा जवाब

तिरुवनंतपुरम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर किसी भी दुस्साहस के खिलाफ सख्त चेतावनी दी है और कहा है कि अगर वह भारत के खिलाफ कार्रवाई करने की कोई योजना बनाता है, तो अबकी बार भारत का जवाब न सिर्फ अभूतपूर्व होगा बल्कि निर्णायक होगा। रक्षा मंत्री ने कहा, "मौजूदा हालात में हमारा पड़ोसी कोई भी दुस्साहस कर सकता है। अगर वह ऐसा करता है, तो भारत की कार्रवाई अभूतपूर्व और निर्णायक होगी।" तिरुवनंतपुरम में 'वीर सैनिक सम्मान' समारोह को संबोधित करते हुए भाजपा नेता और रक्षा मंत्री ने बताया कि पहलगाम में हुई आतंकवादी घटना के बाद, भारतीय सैनिकों ने "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान सिर्फ 22 मिनट में ही पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था। उन्होंने घोषणा की कि भारतीय सैन्य इतिहास में आतंकवाद के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' अब तक का सबसे महत्वपूर्ण ऑपरेशन था। सिंह ने कहा, "पहलगाम में हुई आतंकवादी घटना के बाद, भारतीय सैनिकों ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान सिर्फ 22 मिनट में ही पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था। भारतीय सैन्य इतिहास में आतंकवाद के खिलाफ यह अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन था।" ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ उन्होंने घोषणा की कि 'ऑपरेशन सिंदूर' अभी समाप्त नहीं हुआ है। सिंह ने कहा, "यह ऑपरेशन अभी बंद नहीं हुआ है। अगर सीमा पार से कोई भी शरारत की जाती है, तो न केवल उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा, बल्कि अभूतपूर्व कार्रवाई भी की जाएगी।" रक्षा मंत्री ने आगे कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार पर भारत को निशाना बनाने वाली आतंकवादी घटनाओं के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उस सरकार की प्रतिक्रिया केवल दोषियों को "मोटी-मोटी फाइलें" भेजने तक ही सीमित थी, न कि उन्हें कोई ठोस जवाब देने तक। तब सिर्फ मोटी-मोटी फाइलें सौंपी गई थीं सिंह ने कहा, "अगर मैं यहां सिर्फ आतंकवाद की बात करूं, तो आपको याद होगा कि जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार सत्ता में थी, तब हालात कैसे थे? आए दिन देश के किसी न किसी हिस्से में कोई न कोई आतंकवादी घटना होती रहती थी, या फिर शहरों में बम धमाकों की खबरें आती रहती थीं। उस समय सरकार की प्रतिक्रिया क्या होती थी?" सिंह ने कहा, "तब सिर्फ मोटी-मोटी फाइलें सौंपी गई थीं, जिन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।" आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' उरी हमले के बाद 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और हाल ही में हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' का ज़िक्र करते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने आतंकवाद को करारा झटका दिया है। उन्होंने कहा, "चाहे वह 'उरी हमले' के बाद की सर्जिकल स्ट्राइक हो, 'पुलवामा' के बाद की एयर स्ट्राइक हो, या हाल ही में 'पहलगाम' की घटना के बाद किया गया 'ऑपरेशन सिंदूर' हो, हमने आतंकवाद के खिलाफ एक ज़ोरदार प्रहार किया है।" उन्होंने कहा कि केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार के आने के बाद से आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई गई है। पेट्रोल या डीज़ल की बिल्कुल भी कमी नहीं उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत हुई है और सरकार के रवैये तथा कार्रवाई के तरीके में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि यह बात अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाए गए 'ऑपरेशन' सिंदूर से स्पष्ट होती है। पश्चिम एशिया संकट पर बात करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार मध्य पूर्व में चल रही स्थिति को संभालने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि देश में पेट्रोल या डीज़ल की बिल्कुल भी कमी नहीं है और पुष्टि की कि भारतीय नौसेना इस क्षेत्र की निगरानी करने और वहां मौजूद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्रिय रूप से लगी हुई है।

हाईकोर्ट की फटकार: ‘इतना अश्लील गाना’ पर हनी सिंह और बादशाह को आदेश, विवादित गाने को हटाने का निर्देश

नई दिल्ली  दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक और कड़ा रुख अपनाते हुए मशहूर रैपर हनी सिंह और बादशाह के पुराने विवादित गाने ‘माफिया मुंडीर’ (वॉल्यूम 1) को लेकर बड़ा आदेश दिया है. अदालत ने साफ कहा है कि इस गाने को यूट्यूब और स्पॉटिफाई जैसे तमाम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से तुरंत हटा दिया जाए. 2000 के दशक का यह गाना लंबे समय से अपने लीरिक्स और कॉन्टेंट को लेकर विवादों में रहा है, लेकिन अब कोर्ट ने इस पर कानूनी हथौड़ा चला दिया है।  हाईकोर्ट के जज ने मामले की सुनवाई के दौरान इस गाने की कॉन्टेंट पर गहरी नाराजगी और चिंता जताई. जज ने हनी सिंह और बादशाह को फटकार लगाते हुए कहा कि इस गाने के बोल बेहद अश्लील, अभद्र और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले हैं. जज ने कड़े शब्दों में कहा कि इस गाने ने अदालत की अंतरात्मा को झकझोर दिया है. कोर्ट का कहना है कि कोई भी सभ्य समाज ऐसे कंटेंट को इंटरनेट पर मौजूद रहने की अनुमति नहीं दे सकता जो महिलाओं के प्रति इतना अपमानजनक और भद्दा हो।  नए कलाकारों के लिए सीख यह फैसला डिजिटल स्पेस में मौजूद कॉन्टेंट की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. सालों पहले रिलीज हुए इस गाने पर कोर्ट का यह कमेंट उन कलाकारों के लिए भी एक मैसेज है जो अपने काम में अभद्रता परोसते हैं. अब देखना यह है कि सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स इस आदेश का कितनी जल्दी पालन करते हैं और क्या आने वाले समय में ऐसे अन्य गानों पर भी इसी तरह की कार्रवाई होगी. अपने आदेश में कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि गायक हनी सिंह और बादशाह दोनों ने इस गाने को गाने से इनकार किया है, लेकिन एक कॉन्सर्ट के दौरान इस गाने के बोल प्रस्तुत किए गए थे. मामले को लेकर अदालत ने गंभीर चिंता जताई है और इस तरह के कंटेंट पर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘माफिया मुंडीर’ हनी सिंह, रफ्तार और बादशाह जैसे कलाकारों का एक ग्रुप था, जो रैप की दुनिया में बेहद पॉपुलर हुआ, लेकिन आपसी मतभेदों की वजह से टूट गया. हनी सिंह ने अब जनवरी 2026 में ‘माफिया मुंडीर 2.0’ (इंटरनेशनल सीजन 1) के साथ कमबैक का ऐलान किया था। 

वैश्विक तनाव के बीच होर्मुज पर मंथन, UK ने बुलाई 35 देशों की अहम बैठक

नई दिल्ली  पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के बीच भारत सरकार ने ईरान से अपने नागरिकों की बड़े पैमाने पर सुरक्षित निकालना शुरू कर दी है। वही, यूनाइटेड किंगडम ने भारत को होर्मुज पर 35 देशों की बातचीत में शामिल का निमंत्रण भेजा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने राष्ट्रीय राजधानी में अंतर-मंत्रालयीय ब्रिफिंग के दौरान बताया कि अब तक 1,200 से अधिक भारतीय नागरिकों को ईरान से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इनमें से 845 छात्र हैं। जायसवाल ने कहा कि कुल 1,200 भारतीयों में से 996 को आर्मेनिया और 204 को अजरबैजान भेजा गया है। दोनों देशों में भारतीय मिशनों और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर MEA इन नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कर रहा है। ट्रांजिट में इनकी सहायता के लिए पूर्ण व्यवस्था की गई है। भारत को होर्मुज पर बातचीत के लिए मिला निमंत्रण इस बीच, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि यूनाइटेड किंगडम ने भारत को होर्मुज पर 35 देशों की बातचीत में शामिल का निमंत्रण भेजा है। भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी इस बैठक में वर्चुअली शामिल होंगे। छात्रों की संख्या सबसे अधिक निकाले गए भारतीयों में छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा है। सरकार ने आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते इनकी निकासी का प्लान बनाया था क्योंकि सीधे ईरान से भारत आने वाले हवाई मार्ग प्रभावित थे। विदेश मंत्रालय ने दोनों पड़ोसी देशों में भारतीय दूतावासों को सक्रिय कर दिया था ताकि निकाले गए नागरिकों को तुरंत मदद मिल सके और उन्हें भारत लाया जा सके। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नेताओं से लगातार बातचीत की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि 28 मार्च को पीएम मोदी ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से टेलीफोन पर चर्चा की। इस बातचीत में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर गहन चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे पर हुए हमलों की निंदा की और दोनों नेताओं ने फ्री नेविगेशन तथा शिपिंग लेन को खुला और सुरक्षित रखने पर जोर दिया। 6 लाख से अधिक यात्री लौटे संघर्ष अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। सुरक्षा स्थिति को देखते हुए पश्चिम एशिया से भारत वापस आने वाले यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक 6 लाख से अधिक भारतीय यात्री इस क्षेत्र से स्वदेश लौट चुके हैं। सरकार ने सभी संबंधित मंत्रालयों के साथ समन्वय बनाकर स्थिति पर सतर्क नजर रखी हुई है।