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इटली का ट्रंप को झटका: ईरान जंग के बीच अमेरिकी वॉरप्लेन को अपने बेस पर नहीं उतारने दिया

रोम  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ना उनके यूरोपीय सहयोगियों को बिल्कुल रास नहीं आ रहा. हाल ही में स्पेन ने कहा कि ईरान पर हमला करने के लिए जा रहे किसी भी अमेरिकी युद्धक विमान को स्पेन के ऊपर से गुजरने की इजाजत नहीं है. अब अमेरिका के करीबी नाटो सहयोगी इटली ने ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका दिया है. इटली ने अमेरिकी सैन्य विमानों को सिसिली स्थित सिगोनेला एयरबेस पर उतरने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है।  सिगोनेला एयर बेस पर रुकने के बाद अमेरिकी सैन्य विमान युद्धग्रस्त क्षेत्र मिडिल ईस्ट की तरफ जाने वाले थे. मामले से जुड़े एक सूत्र ने मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि इटली की जॉर्जिया मेलोनी सरकार ने अमेरिकी विमानों को अपने बेस पर उतरने की इजाजत नहीं दी।  इटली के अखबार 'Corriere della ​Sera' ने रिपोर्ट किया कि कुछ अमेरिकी बॉम्बर्स सिसिली के पूर्वी हिस्से में स्थित इस बेस पर उतरने वाले थे, इसके बाद उन्हें मध्य पूर्व जाना था. हालांकि, यह नहीं बताया गया कि अमेरिकी बॉम्बर्स कब उतरने वाले थे।  सूत्र ने यह भी साफ नहीं किया कि अमेरिकी ग्रुप में कितने विमान शामिल थे और इटली ने कब उन्हें उतरने से मना कर दिया।  इटली के अखबार ने यह भी कहा कि अनुमति इसलिए नहीं दी गई क्योंकि अमेरिका ने इसके लिए औपचारिक अनुरोध नहीं किया था. इटली ने कहा कि अमेरिका ने उसके सैन्य नेतृत्व से परामर्श नहीं किया, जबकि देश में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल को लेकर संधियों के तहत यह जरूरी है।  वामपंथी विपक्षी दलों ने सरकार से अपील की है कि वो इटली में स्थित अमेरिकी ठिकानों को इस्तेमाल न करने दे ताकि देश ईरान संघर्ष में शामिल होने से बच सके।  प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की दक्षिणपंथी सरकार ने कहा है कि अगर अमेरिका की तरफ से इस तरह का कोई अनुरोध किया जाता है, तो वो संसद से मंजूरी लेगी।  स्पेन ने किया मना, स्विट्जरलैंड ने भी अमेरिका की जंग से कर लिया है किनारा इसी हफ्ते सोमवार को स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गरीटा रोबल्स ने कहा कि स्पेन ने उन अमेरिकी विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है जो ईरान पर हमलों में शामिल हैं. उन्होंने कहा, 'हम न तो सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की इजाजत देंगे और न ही ईरान में युद्ध से संबंधित कामों के लिए हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की।  कुछ दिनों पहले यूरोपीय देश स्विट्जरलैंड ने भी ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर अमेरिका से किनारा कर लिया था. स्विट्जरलैंड ने कहा था कि वो ईरान पर जारी हमलों को देखते हुए अमेरिका को हथियार बेचने के लिए अपनी कंपनियों को लाइसेंस नहीं देगा।  यूरोपीय देश ने कहा कि वो किसी भी तरह से युद्ध को बढ़ावा नहीं दे रहा बल्कि वो तटस्थ है और अमेरिका को हथियारों का निर्यात जारी नहीं रख सकता।  सरकार ने एक बयान में कहा था, 'ईरान के साथ चल रहे अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्ष में शामिल देशों को युद्ध सामग्री के निर्यात की इजाजत संघर्ष के चलते नहीं दी जा सकती. हम अमेरिका को फिलहाल हथियारों के निर्यात की इजाजत नहीं देंगे। 

ट्रंप का बयान: अमेरिका ने दिया संकेत, युद्ध रुक सकता है, बाजार में सकारात्मक माहौल

वाशिंगटन शेयर बाजार में बड़ी तेजी का संकेत दिखाई दे रहा है. मंगलवार को वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स में 1 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई, जो अमेरिकी बाजारों के लिए एक मजबूत शुरुआत का संकेत है. अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के ईरान में युद्ध समाप्‍त करने के लिए तैयार होने की रिपोर्ट के बाद तेल की कीमतों में करीब 1 फीसदी की गिरावट आई।  सुबह करीब 10.45 बजे NASDAQ-100 से जुडे फ्यूचर प्राइस 0.55 प्रतिशत ऊपर थे. S&P 500 के फ्यूचर प्राइस में 0.7 फीसदी की उछाल हुई, जबकि डाउ जोन्‍स इंडस्ट्रियल एवरेज के फ्यूचर प्राइस में 0.8 फीसदी की तेजी आई. मंगलवार को तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी जा रही है।  वॉर बंद होने के संकेत इधर, भारत में भी गिफ्ट निफ्टी तेजी का संकेत दे रहा है. हालांकि, आज भारतीय बाजार महावीर जयंती की वजह से बंद है. शेयर बाजार में यह तेजी का संकेत सिर्फ एक रिपोर्ट के कारण है. रॉयटर्स के अनुसार, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि  ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोले बिना ईरान के खिलाफ सैन्‍य कार्रवाई योजना समाप्‍त करने को तैयार हैं।  तेल की कीमतों में भी गिरावट ब्रेंट क्रूड ऑयल प्राइस में  1.22 डॉलर या 1.08 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह 111.56 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जबकि शुरुआती कारोबार में इसमें 2 फीसदी की तेजी थी. इसके साथ ही नेचुरल गैस कीमत और डॉलर इंडेक्‍स में भी गिरावट देखी जा रही है।  एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि कच्‍चे तेल की कीमतों में गिरावट शॉर्ट टर्म में युद्ध समाप्‍त‍ि की संभावना को दिखाता है. उन्‍होंने कहा कि कोई भी महत्वपूर्ण परिवर्तन होर्मुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह से खुलने पर निर्भर करेगा. वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सोमवार को अमेरिकी सरकार के अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए तैयार हैं, भले ही होमुर्ज काफी हद तक बंद रहे और बाद में इसे फिर से खोलने पर विचार किया जाए।   एशियाई मार्केट में भी गिरावट  अमेरिकी बाजार इस समय भले ही तेजी का संकेत दे रहा है, लेकिन एशियाई बाजार में गिरावट आई है. जापान का निक्‍केई 1.58 फीसदी गिर गया है. चीन का शंघाई 0.80% गिरा हुआ है और साउथ कोरिया का कोस्‍पी 4.26 फीसदी टूट चुका है और इस महीने इसमें 17 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आने की संभावना है, जो 2008 के बाद सबसे बड़ी गिरावट होगी।  घरेलू बाजार की बात करें तो, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण कमजोर निवेशक भावना के बीच सोमवार को 2025-26 वित्तीय वर्ष के अंतिम कारोबारी सत्र में इक्विटी बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई थी।  सेंसेक्स 1,635.67 अंक या 2.22 प्रतिशत गिरकर 71,947.55 पर बंद हुआ. दिन के दौरान इसमें 1,809.09 अंक या 2.45 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 71,774.13 पर पहुंच गया. निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 प्रतिशत गिरकर 22,331.40 पर बंद हुआ। 

विदेश से वतन वापसी: पश्चिम एशिया से 5 लाख 72 हजार भारतीय भारत पहुंचे

नई दिल्ली  सरकार ने बताया कि पश्चिम एशिया क्षेत्र से लगभग 5,72,000 यात्री भारत लौट आए हैं, और कतर का हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुलने के साथ ही, मंगलवार को देश के लिए लगभग 8-10 गैर-निर्धारित वाणिज्यिक उड़ानें संचालित होने की उम्मीद है। यूएई में, एक दिन में लगभग 85 उड़ानें संचालित होने की उम्मीद है। ऑपरेशनल और सुरक्षा संबंधी बातों को ध्यान में रखते हुए, सीमित संख्या में गैर-निर्धारित उड़ानें जारी हैं। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, ओमान और सऊदी अरब से भारत के लिए उड़ानें जारी हैं। कुवैत और बहरीन का हवाई क्षेत्र बंद है। सऊदी अरब के दम्मम हवाई अड्डे से भारत के विभिन्न गंतव्यों के लिए विशेष गैर-निर्धारित कमर्शियल उड़ानें संचालित हो रही हैं। मंत्रालय ने कहा, "ईरान में हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण, भारतीय नागरिकों को यात्रा की सुविधा आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते दी जा रही है। इजरायल में हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों को देखते हुए, भारतीय नागरिक मिस्र और जॉर्डन के रास्ते स्वदेश लौट रहे हैं।" मंत्रालय ने आगे कहा कि इराक में हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण, भारतीय नागरिकों की यात्रा की सुविधा जॉर्डन और सऊदी अरब के रास्ते दी जा रही है। इस क्षेत्र में रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ नियमित संपर्क बनाए रखा जा रहा है; उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है और उनकी सुरक्षा तथा कल्याण के लिए परामर्श जारी किए जा रहे हैं। बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, इस क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, और पिछले 24 घंटों में भारतीय ध्वज वाले किसी भी जहाज से जुड़ी कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है। सरकार के अनुसार, पश्चिमी फारसी खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले 18 जहाज मौजूद हैं, जिन पर 485 भारतीय नाविक सवार हैं; डीजी शिपिंग, जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय मिशनों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए, स्थिति पर सक्रिय रूप से नजर रख रहा है। डीजी शिपिंग ने अब तक 959 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित वतन वापसी में सहायता की है, जिसमें पिछले 24 घंटों में वापस लौटे 9 नाविक भी शामिल हैं। पूरे भारत में बंदरगाहों का संचालन सामान्य रूप से जारी है; गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, केरल, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के राज्य समुद्री बोर्डों ने बंदरगाहों के सुचारू रूप से काम करने की पुष्टि की है।

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी पर सवाल: क्या 2026 में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच युद्ध हो सकता है?

 नईदिल्ली  ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच हाल के युद्ध ने पूरी दुनिया की निगाहें अपनी ओर खींच रखी हैं. हर कोई सोच रहा है कि आगे क्या होगा. लोग डर और चिंता में हैं क्योंकि किसी भी समय हालात बिगड़ सकते हैं. ऐसे में कुछ लोग इसे नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों से जोड़ रहे हैं, जिन्होंने आने वाले समय में बड़े युद्ध और दुनिया में उथल-पुथल होने की बात कही थी. यही वजह है कि 2026 में नास्त्रेदमस जैसी पुरानी भविष्यवाणियां फिर सुर्खियों में आ गई हैं. लोग यह भी सोच रहे हैं कि इस बड़े तनाव का असर सोने और चांदी की कीमतों पर क्या होगा. क्या यह शेयर बाजार में कोई बड़ी गिरावट का संकेत है।  क्या कहती है नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी? नास्त्रेदमस ने अपनी भविष्यवाणी में सीधे सीधे कभी सोना, चांदी या 2026 में मंहगाई का जिक्र नहीं किया था. लेकिन, उनकी लिखी बातें अक्सर युद्ध, आर्थिक उथल-पुथल और दुनिया में अस्थिरता की चेतावनी के रूप में देखी जाती हैं. आज लोग इन्हें हाल के युद्ध और संकट से जोड़कर देख हैं. युद्ध के समय लोग सोना और चांदी जैसी संपत्ति की तरफ जाते हैं. इसका मतलब है कि मांग बढ़ने पर कीमतें ऊपर जा सकती हैं. लेकिन, बाजार में हमेशा ऐसा नहीं होता है क्योंकि कीमतों में हमेशा उतार चढ़ाव बना रहता है।  सोना‑चांदी के रेट ऊपर जाएंगे या नीचे? हाल ही के मार्केट ट्रेंड्स बताते हैं कि स्थिति थोड़ी उलझी हुई है. युद्ध और तनाव होने के बावजूद सोना और चांदी की कीमतें कभी-कभी नीचे जा रही हैं. इसका मुख्य कारण है अमेरिका में डॉलर का मजबूत होना और ब्याज दरों का बढ़ना. असल में इसका मतलब यह है कि सिर्फ दुनिया में युद्ध का होना ही कीमतें बढ़ाने के लिए काफी नहीं. बाजार में और भी कई चीजें असर डालती हैं जैसे कि पैसे की कीमत (डॉलर) और बैंक की नीतियां. यानी, नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी चाहे जैसी भी हो, असली मार्केट की चाल तो इन असली आर्थिक कारणों से तय होती है।  क्या हो सकता है तीसरे विश्व? आजकल लोग ये बात खूब कर रहे हैं कि क्या मौजूदा हालात आगे चलकर तीसरे विश्व युद्ध में बदल सकते हैं. इसकी वजह ये है कि नास्त्रेदमस ने अपनी लिखी बातों में बड़े युद्ध का जिक्र किया था, जिसे लोग आज के हालात से जोड़ रहे हैं. लेकिन सच यह है कि उनकी बातों में कहीं भी साफ-साफ आज के किसी तीसरे विश्व युद्ध का जिक्र नहीं मिलता है।  एक्सपर्ट क्या कहते हैं और नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी क्या कहती है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोना, चांदी और शेयर बाजार का हाल महंगाई, ब्याज दर और दुनिया भर की सप्लाई जैसी चीजों पर निर्भर करता है. यानी बाजार असली आर्थिक हालात से चलता है, न कि किसी भविष्यवाणी से. वहीं, नास्त्रेदमस की लिखी बातें सीधी नहीं होतीं हैं, बल्कि इशारों में होती हैं. लोग उन्हें अपने हिसाब से समझ लेते हैं, इसलिए एक ही बात के अलग-अलग मतलब निकाले जाते हैं।  नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां लोगों के बीच चर्चा और डर को जरूर बढ़ा देती हैं, लेकिन असली मार्केट ऊपर-नीचे होने के पीछे वजह अर्थव्यवस्था और दुनिया के हालात होते हैं. इसलिए, निवेश करते समय अंदाजों या भविष्यवाणी पर नहीं, बल्कि सही डेटा और एक्सपर्ट की सलाह पर भरोसा करना ज्यादा समझदारी है।   

सूरत हादसा: आग की लपटों में घिरी बिल्डिंग, एक परिवार के 5 सदस्यों की जान गई

सूरत  इस हादसे मेंगुजरात के सूरत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहां लिंबायत क्षेत्र की मीठी खाड़ी के पास स्थित एक रिहायशी इमारत में अचानक भीषण आग लग गई। एक ही परिवार के पांच सदस्य, जिनमें एक बच्चा और महिलाएं शामिल हैं, बुरी तरह झुलस गए। अस्पताल ले जाने के बाद इलाज के दौरान सभी पांचों लोगों ने दम तोड़ दिया। साड़ियों के ढेर ने घर को बनाया 'मौत का जाल' शुरुआती जाँच और अधिकारियों के बयानों के अनुसार, यह परिवार साड़ी बनाने और संग्रहण का काम करता था। घर के भीतर लगभग 10 टन साड़ियां रखी हुई थीं। पूर्व मेयर दक्षेशभाई मावानी ने बताया कि घर इतना छोटा था कि साड़ियों के ढेर के बीच चलने-फिरने तक की जगह नहीं थी। बड़ी मात्रा में कपड़ों की मौजूदगी के कारण आग तेजी से फैली और घना धुआं भर गया। धुएं से घुटा दम: मृतकों में 4 साल का बच्चा भी शामिल दमकल विभाग के अधिकारियों का संदेह है कि इन मौतों का मुख्य कारण आग से झुलसना नहीं, बल्कि धुएं के कारण दम घुटना है। मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है…     शाहनाज़ बेगम अब्दुल कलाम अंसारी (65 वर्ष)     शबीना रमज़ान अली अंसारी (28 वर्ष)     परवीन अब्दुल कलाम अंसारी (19 वर्ष)     हुसा बेगम अब्दुल कलाम अंसारी (18 वर्ष)     शुभान रमज़ान अली अंसारी (4 वर्ष) अधिकारियों ने की सतर्क रहने की अपील घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। मौके पर पूर्व मेयर, डीसीपी और मुख्य अग्निशमन अधिकारी भी पहुंचे। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षा मानकों का ध्यान रखें और रिहायशी घरों में इतनी भारी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री (जैसे साड़ियाँ) जमा न करें, जिससे आपात स्थिति में बचाव कार्य बाधित हो। फिलहाल पुलिस और फायर विभाग आग लगने के सटीक कारणों की जांच कर रहे हैं। यह भी पढ़ें- Rajasthan Board Result: निकिता ने 12वीं में पाए 93.88% अंक, पर रिजल्ट से 10 दिन पहले हो गया निधन  

मुंबई में होटल में मिला BCCI के ब्रॉडकास्ट इंजीनियर का शव, IPL कवरेज के दौरान था व्यस्त

मुंबई आईपीएल 2026 का रोमांच जारी है. लेकिन इसी बीच एक बुरी खबर सामने आई है. आईपीएल मैचों के लिए बीसीसीआई के साथ ब्रॉडकास्ट इंजीनियर के रूप में काम कर रहे एक ब्रिटिश नागरिक मुंबई के ट्राइडेंट होटल के कमरे में मृत पाए गए. मृतक की पहचान इयान विलियम्स लैंगफोर्ड के रूप में हुई है।  जानकारी के मुताबिक, इयान 24 मार्च से मुंबई के ट्राइडेंट होटल में ठहरे हुए थे और आईपीएल मैच कवरेज से जुड़े काम में लगे थे. 29 मार्च को मैच खत्म होने के बाद वह अपने रूम में लौटे थे. अगले दिन 30 मार्च को होटल रिसेप्शन की ओर से उन्हें कॉल किया गया, लेकिन कमरे से कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद होटल स्टाफ उनके कमरे तक पहुंचा. अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर मास्टर की की मदद से कमरा खोला गया।  कमरे के अंदर इयान फर्श पर पड़े मिले. तुरंत होटल के इन-हाउस डॉक्टर को बुलाया गया, जिन्होंने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया. घटना की सूचना मिलने के बाद मरीन ड्राइव पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और मौत के कारणों की जांच की जा रही है. फिलहाल पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसके बाद ही मौत की असली वजह साफ हो सकेगी।  बता दें कि 29 मार्च को मुंबई के वानखेड़े मैदान पर मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच मुकाबला खेला गया था. इस मैच में मुंबई इंडियंस ने शानदार जीत हासिल की थी. ये इस मैदान पर इस सीजन का पहला आईपीएल मैच था. जहां भारी संख्या में दर्शक पहुंचे थे। 

BJP का असम घोषणापत्र: जमीन जिहाद पर कड़ी कार्रवाई, 5 लाख करोड़ का निवेश होगा

गुवाहाटी असम विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है. मंगलवार को निर्मला सीतारमण ने बीजेपी का चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया. इसमें पार्टी ने फिर से सत्ता में आने पर प्रदेश में पांच लाख करोड़ के निवेश के साथ ही जमीन जिहाद पर रोक का वादा किया है।  गुवाहाटी स्थित असम बीजेपी के कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में जारी घोषणापत्र को पार्टी ने संकल्प पत्र नाम दिया है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और असम बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप सैकिया के साथ केंद्र की मोदी सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह घोषणापत्र जारी किया. बीजेपी ने असम में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने, दो लाख नौकरियां देने का भी वादा किया है।  मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस मौके पर यह भी स्पष्ट किया कि छठी अनुसूची में शामिल क्षेत्रों के साथ ही अनुसूचित जनजाति के क्षेत्रों को इससे बाहर रखा जाएगा. लव जिहाद के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे और असम को बाढ़मुक्त प्रदेश बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे. सरकार गठन के बाद शुरुआती दो वर्ष में बाढ़मुक्त असम के निर्माण के लिए 18 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।  सीएम ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज, वन यूनिवर्सिटी, वन इंजीनियरिंग कॉलेज’ को अपना लक्ष्य बताया और कहा कि अगले पांच साल में हम दो लाख रोजगार देंगे. वहीं, असम बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कहा कि 'सुरक्षित असम, विकसित असम' का निर्माण बीजेपी का लक्ष्य है. उन्होंने यह भी कहा कि पूरे प्रदेश से मिले कुल दो लाख 45 हजार सुझावों को समेटकर पार्टी ने यह संकल्प पत्र तैयार किया है।  लोग अपने राज्य में लौटने लगेः सीतारमण केंद्रीय मंत्री सीतारमण ने कहा, “पूर्वोत्तर क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास पर कांग्रेस की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया. असम में शांति बहाली और विकास तभी संभव होगा जब यहां पर स्थिरता आएगी. राज्य में बीजेपी के शासन के दौरान अवसरों में खासी वृद्धि हुई और इस वजह से असम के युवा अब वापस राज्य में लौटने लगे हैं।  कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “कांग्रेस की नीतियों की वजह से असम को 32 सालों तक AFSPA के साए में रहना पड़ा, लेकिन BJP सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि इस कानून को ज्यादातर राज्यों से हटा दिया जाए।  ‘संकल्प पत्र’ को लेकर केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने कहा, “‘संकल्प पत्र’ तैयार करने के पीछे की पृष्ठभूमि यह है कि हम असम से जुड़े सभी हिस्सों में लोगों के पास गए. हम घर-घर गए और अगले कार्यकाल में क्या करना है, इस बारे में लोगों के सुझाव मांगे और उसे एकत्र किए. इस दस्तावेज के आधार पर, यानी असम के लोगों के सुझावों के आधार पर, हम तीसरे कार्यकाल में काम करेंगे.” उन्होंने बताया कि करीब 3 लाख से अधिक लोगों ने अपने सुझाव दिए हैं।  मंत्री सीतारमण ने कहा, '2015-16 में असम का जीएसडीपी 2.24 लाख करोड़ रुपये था और आज 2025-26 में यह 7.41 लाख करोड़ रुपये है. 2020-21 में प्रति व्यक्ति आय 1.03 लाख रुपये थी, जबकि 2024-25 में यह 1.59 लाख रुपये है. यानी सिर्फ 4 सालों में 54फीसदी की बढ़ोतरी।  इस मौके पर मौजूद लोगों में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और पवित्र मार्गेरिटा, राज्य बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा, राज्य मंत्रिमंडल के मंत्री और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे. राज्य की 126 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव 9 अप्रैल को होंगे, और वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी।  असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में 9 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को होगी। 

लिव-इन कपल्स को मिलेगा मैरिड का दर्जा, जनगणना के नए नियम में चौंकाने वाली घोषणा

नई दिल्ली आज के बदलते समाज में रिश्तों की परिभाषाएं तेजी से बदल रही हैं. जो रिश्ते कभी सामाजिक स्वीकृति के लिए तरसते थे, अब वे सरकारी दस्तावेजों में भी अपनी जगह बनाने लगे हैं. जनगणना 2027 से जुड़ा एक नया FAQ इसी बदलाव की झलक देता है. अगर कोई लिव-इन कपल खुद को ‘स्थिर संबंध’ में मानता है, तो उसे ‘मैरिड’ यानी विवाहित के रूप में गिना जाएगा. यह फैसला सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि समाज की बदलती सोच का संकेत भी है. हालांकि इस पर बहस भी तेज हो गई है कि क्या बिना शादी के ऐसे रिश्तों को शादी के बराबर मान लेना सही है या इससे पारंपरिक मूल्यों पर असर पड़ेगा।  रिपोर्ट के अनुसार दूसरी तरफ यह कदम उन लोगों के लिए राहत की तरह देखा जा रहा है जो लंबे समय से लिव-इन में रह रहे हैं लेकिन सामाजिक या कानूनी मान्यता के अभाव में कई सुविधाओं से वंचित रहते थे. सरकार का यह रुख दर्शाता है कि वह अब लोगों की निजी पसंद और जीवनशैली को ज्यादा सम्मान देने की दिशा में बढ़ रही है. लेकिन सवाल यह भी उठता है कि ‘स्थिर रिश्ता’ की परिभाषा क्या होगी और इसका दुरुपयोग कैसे रोका जाएगा. यही वजह है कि यह फैसला चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।  जनगणना 2027 को लेकर केंद्र सरकार की ओर से बड़ा स्पष्टीकरण सामने आया है. अधिकारियों के मुताबिक पहले भी अगर साथ रह रहे अविवाहित कपल्स खुद को मैरिड बताते थे, तो उनकी जानकारी उसी आधार पर दर्ज की जाती थी. जनगणना के हाउस लिस्टिंग फेज में घर में रहने वाले शादीशुदा कपल की संख्या से जुड़ा सवाल भी शामिल है. यह स्टेज कुल 45 दिनों तक चलेगा. इसमें पहले 15 दिन सेल्फ एन्यूमरेशन और उसके बाद 30 दिन एन्यूमरेटर के जरिए जानकारी जुटाई जाएगी. सेल्फ एन्यूमरेशन की शुरुआत 1 अप्रैल से दिल्ली के NDMC इलाके से होगी, जहां कोई भी जिम्मेदार वयस्क OTP के जरिए लॉग इन कर अपने घर के सभी सदस्यों की जानकारी भर सकता है।  क्या है नया नियम, क्यों मचा है विवाद, कैसे होगा असर?     जनगणना 2027 के लिए तैयार किए गए सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल पर स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई कपल खुद को एक स्थिर संबंध में मानता है, तो उसे विवाहित के रूप में गिना जाएगा. खास बात यह है कि इसके लिए किसी तरह का कानूनी दस्तावेज या प्रमाण देना जरूरी नहीं होगा. जो भी जानकारी दी जाएगी, उसे व्यक्ति के ‘ज्ञान और विश्वास’ के आधार पर दर्ज किया जाएगा. यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी और लोग खुद ही अपने परिवार का डेटा पोर्टल पर भर सकेंगे।      इस नई व्यवस्था में 45 दिनों का हाउसलिस्टिंग फेज रखा गया है. इसमें पहले 15 दिन सेल्फ-एन्यूमरेशन के होंगे और बाकी 30 दिन एन्यूमरेटर द्वारा सत्यापन के लिए होंगे. यह सुविधा 15 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगी और इसमें घर की लोकेशन को जियो-टैग करना भी जरूरी होगा. इससे डेटा अधिक सटीक और व्यवस्थित तरीके से एकत्र किया जा सकेगा।  क्या लिव-इन कपल को अब पूरी तरह शादीशुदा माना जाएगा? नहीं, यह मान्यता केवल जनगणना के डेटा संग्रह के लिए है. इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें कानूनी तौर पर पति-पत्नी का दर्जा मिल जाएगा. यह सिर्फ आंकड़ों को सही तरीके से दर्ज करने की एक प्रक्रिया है ताकि वास्तविक सामाजिक संरचना को बेहतर तरीके से समझा जा सके।  ’स्थिर संबंध’ की पहचान कैसे होगी? इसका कोई सख्त कानूनी पैमाना तय नहीं किया गया है. अगर कपल खुद को स्थिर और लंबे समय के रिश्ते में मानता है, तो उसे उसी आधार पर दर्ज किया जाएगा. यह पूरी तरह व्यक्ति की घोषणा पर आधारित है, जिससे कुछ लोग इसे लचीला तो कुछ लोग इसे अस्पष्ट मान रहे हैं।  क्या इस फैसले का सामाजिक असर पड़ेगा? संभावना है कि इसका असर पड़ेगा. इससे लिव-इन रिश्तों को सामाजिक स्वीकृति मिल सकती है और ऐसे रिश्तों में रहने वाले लोग ज्यादा खुलकर सामने आ सकते हैं. वहीं, पारंपरिक सोच रखने वाले लोग इसे परिवार व्यवस्था के लिए चुनौती के रूप में भी देख सकते हैं।  जनगणना में डिजिटल बदलाव और नई प्रक्रिया इस बार जनगणना पूरी तरह तकनीक पर आधारित होगी. लोग घर बैठे पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी भर सकेंगे. OTP वेरिफिकेशन, जियो-टैगिंग और डिजिटल फॉर्म जैसी सुविधाएं इसे आसान बनाएंगी. हालांकि, गलत जानकारी या लोकेशन डालने पर डेटा में गड़बड़ी हो सकती है, इसलिए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। 

अमेरिका ने ईरान पर छोड़ी 29,750 करोड़ की टॉमहॉक मिसाइल, ये क्यों है खास?

न्यूयॉर्क अमेरिकी नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के पहले चार हफ्तों में 850 से ज्यादा टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दाग दी हैं. यह किसी एक अभियान में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है. यह जानकारी अमेरिका की प्रसिद्ध थिंक टैंक सीएसआईएस (Center for Strategic and International Studies) की नई रिपोर्ट में दी गई है।  हर टॉमहॉक मिसाइल की कीमत करीब 3.6 मिलियन डॉलर (लगभग 35 करोड़ रुपये) है. इस हिसाब से इन 850 मिसाइलों की कुल कीमत लगभग 30,000 करोड़ की आंकी जा सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मिसाइलें मुख्य रूप से दो गाइडेड मिसाइल पनडुब्बियों और डिस्ट्रॉयर जहाजों से छोड़ी गईं. इन जहाजों में वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम (VLS) लगे हैं. इस अभियान में क्षेत्र में उपलब्ध लॉन्चरों का लगभग आधा हिस्सा इस्तेमाल किया जा चुका है. महत्वपूर्ण बात यह है कि समुद्र में इन लॉन्चरों को फिर से लोड नहीं किया जा सकता. जहाजों को मिसाइलें खत्म होने पर बंदरगाह वापस जाना पड़ता है. रिपोर्ट के मुताबिक, स्टॉक फिर से भरने में समय लगेगा।  रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने एपिक फ्यूरी 2026 में सिर्फ पहले 4 हफ्तों में 850 टॉमहॉक दागी हैं. यह इतिहास का रिकॉर्ड है. इस से पहले किसी भी एक अभियान में इतनी मिसाइलें नहीं दागी गई हैं. 2003 के पूरे इराक युद्ध (Iraqi Freedom) में अमेरिका ने 802 मिसाइलें दागी थीं. बाकी पुराने अभियान की बात करें तो 1991 के डेजर्ट स्टॉर्म में 288 मिसाइल दागी गईं थीं।  ऐसा क्या खास है इस मिसाइल में? टॉमहॉक अमेरिका की एक मध्यम दूरी की सबसोनिक क्रूज मिसाइल है. यह जमीन, जहाज और पनडुब्बी से छोड़ी जाती है और दुश्मन के अंदर गहराई तक हमला करने की ताकत रखती है. 1972 में अमेरिकी नौसेना ने इसका विकास शुरू किया था. यह कम ऊंचाई पर उड़ती है, जिससे रडार इसे आसानी से नहीं पकड़ पाता. शुरू में इसमें न्यूक्लियर और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार लगाए जा सकते थे, लेकिन अब न्यूक्लियर विकल्प खत्म कर दिया गया है. इसे TLAM, TASM, BGM-109G Gryphon जैसे कई नामों से भी जाना जाता है. यह 1983 से सेवा में है।  टॉमहॉक के वेरिएंट ब्लॉक 1: TLAM-N (न्यूक्लियर), TASM (एंटी-शिप) और ग्राउंड लॉन्च Gryphon ब्लॉक 2: TLAM-C (सख्त टारगेट) और TLAM-D (नरम टारगेट) थे ब्लॉक 3: GPS और बेहतर इंजन जोड़े गए, जिससे ईंधन कम लगता है और ज्यादा ताकत मिलती है ब्लॉक 4: सबसे आधुनिक है – इसमें उड़ते समय नया लक्ष्य बदला जा सकता है टॉमहॉक की खूबियां रेंज 1,250 से 2,500 किलोमीटर तक (ब्लॉक IV में 1,600 किमी). स्पीड सबसोनिक (लगभग 800 किमी/घंटा). ऊंचाई समुद्र की सतह से चिपककर या 450 मीटर तक. वजन 1,315 किलोग्राम (लॉन्च वजन), लंबाई 5.55 से 6.25 मीटर. इसमें 454 किलोग्राम का पारंपरिक या पहले न्यूक्लियर वारहेड लगता है. गाइडेंस सिस्टम में इनर्शियल, TERCOM, GPS और टू-वे डेटालिंक है. सटीकता 10 मीटर से भी कम।  यह मिसाइल 140 से ज्यादा अमेरिकी नौसेना के जहाजों (टिकॉन्डेरोगा क्रूजर, आर्ले बर्क डिस्ट्रॉयर) और पनडुब्बियों (Ohio क्लास SSGN और SSN) से छोड़ी जा सकती है. ब्रिटेन की Royal Navy की Astute, Swiftsure और Trafalgar पनडुब्बियों पर भी लगी है. पहले ग्राउंड लॉन्च वर्जन Gryphon भी था, लेकिन 1991 में INF संधि के तहत नष्ट कर दिया गया. मुख्य ऑपरेटर अमेरिका और ब्रिटेन हैं. यह Mark 41 वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम से लॉन्च होती है।  मिसाइल का इतिहास टॉमहॉक का पहला इस्तेमाल 1991 के गल्फ वॉर में हुआ, जहां 300 से ज्यादा दागी गईं. 2003 के इराक युद्ध में 800 से ज्यादा. 2018 में सीरिया में 59 मिसाइलें दागी गईं. अफगानिस्तान, सोमालिया, लिबिया और सीरिया में भी इस्तेमाल हुई. 2016 में 245 मिसाइलों को एंटी-शिप बनाने के लिए 434 मिलियन डॉलर का बजट दिया गया. अमेरिका की आर्मी अब इसे ग्राउंड लॉन्चर पर भी लगा रही है. यह मिसाइल बहुत महंगी लेकिन बेहद सटीक और सुरक्षित हमला करने वाली है, जो आधुनिक युद्ध में अमेरिका की सबसे अहम हथियारों में से एक है। 

PAN कार्ड नियम में बदलाव 1 अप्रैल से: नाम mismatch पर हो सकता है PAN कार्ड बंद, जानें क्या करें

भोपाल पैन कार्ड और आधार कार्ड आज के समय में बेहद जरूरी दस्तावेज बन चुके हैं। बैंकिंग से लेकर टैक्स फाइलिंग और सरकारी योजनाओं तक, हर जगह इनकी जरूरत पड़ती है। ऐसे में अगर इन दोनों दस्तावेजों की डिटेल्स में कोई गड़बड़ी या mismatch है, तो आपको भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार, 1 अप्रैल से उन लोगों पर कार्रवाई हो सकती है जिनके पैन कार्ड और आधार कार्ड में नाम एक जैसा नहीं है या स्पेलिंग में अंतर है। ऐसी स्थिति में संबंधित पैन कार्ड निष्क्रिय (inactive) हो सकता है, जिससे कई वित्तीय कार्य प्रभावित होंगे। क्या हो सकते हैं नुकसान? इनकम टैक्स रिफंड मिलने में दिक्कत, TDS अधिक कट सकता है,बैंकिंग और KYC प्रक्रियाएं प्रभावित, वित्तीय लेन-देन में परेशानी..इसलिए यदि आपके आधार और पैन में नाम अलग-अलग दर्ज है, तो इसे जल्द से जल्द ठीक कर लेना जरूरी है। कैसे करें आधार कार्ड में नाम अपडेट? सबसे पहले अपने मोबाइल में आधार से संबंधित ऐप या आधिकारिक पोर्टल का उपयोग करें, लॉगिन करने के लिए आधार नंबर और OTP दर्ज करें “Update Aadhaar Online” विकल्प पर क्लिक करें ,नाम अपडेट का विकल्प चुनें ,जरूरी दस्तावेज अपलोड करें ,निर्धारित शुल्क का भुगतान करके सबमिट करें.. इसके बाद आप स्टेटस चेक करके देख सकते हैं कि आपका अपडेट पूरा हुआ या नहीं। पैन कार्ड में नाम कैसे बदलें? NSDL या UTIITSL की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं “Changes/Correction in PAN” विकल्प चुनें पैन नंबर, नाम, जन्मतिथि और ईमेल जैसी जानकारी भरें सबमिट करने पर एक टोकन नंबर जनरेट होगा। आवश्यक बदलाव चुनकर जरूरी दस्तावेज अपलोड करें,शुल्क का भुगतान कर फॉर्म सबमिट करें.. अंत में acknowledgement स्लिप डाउनलोड कर लें। अगर आपके पैन और आधार कार्ड की जानकारी एक जैसी नहीं है, तो इसे तुरंत अपडेट करना जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी आपको भविष्य में होने वाली बड़ी परेशानियों से बचा सकती है। एलपीजी के रेट से लेकर इनकम टैक्स के नियमों तक आइए जानते हैं कि 1 अप्रैल से क्या कुछ बदल जाएगा? 1-न्यू इनकम टैक्स लॉ इनकम टैक्स एक्ट 2025 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगा। यह इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा। नए एक्ट में ‘एसेसमेंट ईयर’, ‘प्रीवियस ईयर’ जैसे कंफ्यूज करने वाले शब्दों को टैक्स ईयर ही कहा जाएगा। 2-टैक्स में मिलेगी अधिक छूट न्यू टैक्स रिजीम की वजह से 12 लाख रुपये तक की आय पर अब कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। सेक्शन 87 A में किए गए बढ़ाए गए छूट की सीमा की वजह से टैक्सपेयर्स को न्यू टैक्स रिजीम में यह फायदा होगा। 3- टीडीएस फॉर्म में बदलाव 1 अप्रैल 2026 से फॉर्म 16 और फॉर्म 16 A की जगह फॉर्म 130 और फॉर्म 131 ले लेगा। इस बदलाव के पीछे की वजह से टैक्सपेयर्स को अधिक सुविधा देना है। 4- पैन कार्ड का नियम हुआ कठिन 1 अप्रैल से पैन कार्ड बनवाना इतना आसान नहीं रह जाएगा। अभी तक पैन कार्ड के लिए सिर्फ आधार कार्ड ही जरूरी होता है। लेकिन 1 अप्रैल से बर्थ सर्टिफिकेट के लिए 10वीं की मार्कशीट और पासपोर्ट जैसे डॉक्यूमेंट भी जरूरी हो जाएंगे। 5- LPG की कीमतों पर फैसला 1 अप्रैल को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव देखने को मिल सकता है। ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से एलपीजी की सप्लाई बाधित हुई है। अब देखना है कि मार्च की तरह अप्रैल में भी कीमतों में कोई इजाफा होगा या नहीं। 6- CNG, PNG, ATF प्राइस अप्रैल के पहले दिन सीएनजी, पीएनजी और एटीएफ की कीमतों में भी बदलाव किया जा सकता है। अगर कोई चेंज होता है तो इसका सीधा असर आपकी-हमारी जेब पर पड़ेगा। 7- ATM से निकासी के नियम एचडीएफसी बैंक 1 अप्रैल से यूपीआई एटीएम से निकासी की लिमिट में बदलाव करने जा रहा है। अगर आप महीने में 5 ट्रांजैक्शन से अधिक करेंगे तब की स्थिति में हर एक ट्रांजैक्शन पर आपको 23 रुपये का भुगतान करना होगा। बंधन बैंक ने मेट्रो शहरों में फ्री एटीएम ट्रांजैक्शन की लिमिट को 5 से घटाकर 3 कर दिया है। अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर बैंक आपसे 23 रुपये लेगा। अगर कम बैलेंस की वजह से ट्रांजैक्शन पूरा नहीं होता है तब की स्थिति में आपसे बैंक 25 रुपये वसूलेगा। 8-विथड्रॉल लिमिट को बैंक ने घटाया पंजाब नेशनल बैंक ने कुछ सिलेक्टेड डेबिट कार्ड की विथड्रॉल लिमिट को 75000 रुपये से घटाकर 50,000 रुपये कर दिया है। यह नियम में 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगा। 9- टिकट कैसिंल रिफंड के नियमों में बदलाव अगर आप किसी ट्रेन के प्रस्थान से 8 घंटे के अंदर टिकट कैंसिल करते हैं तब की स्थिति में आपको कोई रिफंड नहीं मिलेगा। पहले यह टाइमलाइन 4 घंटे की थी। 10- क्या है रेलवे का नया रिफंड स्ट्रक्चर 1-ट्रेन के प्रस्थान होने से 8 से 24 घंटे पहले टिकट कैंसिल करने पर 50 प्रतिशत रिफंड दिया जाएगा। 2- अगर कोई टिकट 24 घंटे से 72 घंटे में टिकट कैंसिल होता है तब की स्थिति में 25 प्रतिशत कटौती होगी। 3- ट्रेन के प्रस्थान होने से 72 घंटे पहले टिकट कैंसिल करने पर अधिकतम पैसा रिफंड हो जाएगा। ध्यान रखें इस स्थिति में भी पूरा पैसा रिफंड नहीं होगा।