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नेपाल में शांतिपूर्ण चुनाव पर Narendra Modi की बधाई, लोकतंत्र की सराहना

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल को सफलतापूर्वक चुनाव कराने के लिए बधाई दी है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत करीबी दोस्त और पड़ोसी नेपाल के साथ काम करने को तैयार है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने नेपाल की जनता और सरकार को बधाई दी। उन्होंने लिखा, "मैं नेपाल के लोगों और सरकार को चुनावों के सफल और शांतिपूर्ण तरीके से होने पर दिल से बधाई देना चाहता हूं। अपने नेपाली भाइयों और बहनों को अपने डेमोक्रेटिक अधिकारों का इतने जोश के साथ इस्तेमाल करते देखना बहुत अच्छा लग रहा है।” उन्होंने 'इस ऐतिहासिक कामयाबी को नेपाल की डेमोक्रेटिक यात्रा में गर्व का पल बताया।' पीएम मोदी ने आगे लिखा, "करीबी दोस्त और पड़ोसी होने के नाते, भारत नेपाल के लोगों और उनकी नई सरकार के साथ मिलकर शांति, तरक्की और खुशहाली की नई ऊंचाइयों को हासिल करने लिए काम करने को तैयार है।" नेपाल में आम चुनाव की काउंटिंग जारी है। 165 सीटों पर रैपर और काठमांडू के मेयर रहे बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। आरएसपी ने शाम छह बजे तक 60 सीटें जीत ली हैं। यह एक ऐसी पार्टी है जो सिर्फ 4 साल पहले एक पत्रकार रहे रबि लामिछाने ने बनाई थी। देश के बड़े नेता और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली झापा सीट पर 43 हजार मतों से पीछे चल रहे थे। उनका हारना और यहीं से बालेन शाह का जीतना लगभग तय माना जा रहा है। ओली ने झापा-5 सीट से दो बार विजय हासिल की है। एक 2017 में और दूसरी 2022 में बड़ी जीत हासिल की थी। नेपाल में बाकी 110 सीटें पार्टियों को मिले कुल वोट प्रतिशत के आधार पर तय होती हैं। इसमें वोटर किसी प्रत्याशी को नहीं बल्कि पार्टी को वोट देते हैं। पूरे देश में दल को जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसी हिसाब से उन्हें संसद में सीट मिलती है।

भूल भारी पड़ गई! पूजा सामग्री के साथ नहर में बह गए 2 लाख कैश, बाद में आया ध्यान

गुजरात  सूरत के पूना रोड इलाके के एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक परिवार ने पूजा के प्रसाद के साथ 2 लाख रुपए की रकम गलती से नहर में बहा दी। गामीमत रही कि जैसे ही घटना का पता चला तो तुरंत डुंभाल फायर स्टेशन को सूचित किया गया। फायर स्टेशन की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कड़ी मशक्कत के बाद नहर में गोता लगाकर 2 लाख रुपए की रकम को बरामद किया और परिवार को सुरक्षित वापस लौटा दिया। इस तलाशी अभियान के दौरान दो फायर ब्रिगेड कर्मी घायल हो गए। पूजा समग्री के साथ नहर में बहाए 2 लाख रुपए पूनागाम रोड पर निजानंद सोसाइटी में रहने वाले लिम्बा परिवार ने कुछ पहले अपने घर पर धार्मिक अनुष्ठान किया था। पूजा के बाद अनुष्ठान का सामान और फूल तिजोरी के पास एक अलमारी में रखे थे। परिवार के सदस्यों ने पूजा के बाद का सामान एक थैली में रखा और उसे पूना रोड पर नहर में विसर्जित कर दिया। घर पर तिजोरी की जांच करने पर पता चला यह पता चलने पर परिवार परेशान हो गया और तुरंत फायर कंट्रोल रूम को सूचना दी। अलर्ट मिलने के बाद डुंभाल फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड के दो जवान हुए घायल फायर अधिकारी, सुनील चौधरी ने बताया कि फायर ब्रिगेड के मार्शलों ने नहर में पानी में उतरकर तलाशी शुरू कर दी थी। पानी के बहाव के बीच भी टीम ने धैर्य के साथ सर्च ऑपरेशन जारी रखा। थोड़ी कोशिश के बाद उन्हें 500 रुपये के नोटों के चार बंडल मिले, जिनकी कुल कीमत 2 लाख रुपये थी। फायर ब्रिगेड की टीम ने बरामद यह कैश लिम्बा परिवार को सुरक्षित लौटा दिया। हालांकि, इस तलाशी के दौरान कांच लगने से फायर ब्रिगेड के दो जवान घायल हो गए। परिवार के सदस्यों ने इस मुश्किल समय में मदद के लिए डुंभाल फायर ब्रिगेड स्टाफ का आभार जताया और उनके काम की तारीफ की।  

अमित शाह का बड़ा बयान: केदारनाथ से कन्याकुमारी तक घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर करेंगे

हरिद्वार. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठियों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम से लेकर कन्याकुमारी तक, एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर भारत से बाहर किया जाएगा। गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को उत्तराखंड सरकार के 4 साल पूरे होने पर हरिद्वार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, "उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने लगभग 10 हजार से अधिक अतिक्रमण उखाड़कर फेंक दिए हैं। यह सिर्फ अतिक्रमण की बात नहीं है। मैं प्रदेशवासियों से कहना चाहता हूं कि पूरे देश में जहां-जहां घुसपैठिए हैं, केदारनाथ धाम से लेकर कन्याकुमारी तक, एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर हम भारत के बाहर निकालने का काम करेंगे।" इस दौरान शाह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "जो भारत का नागरिक नहीं है, उसका नाम मतदाता सूची से कटना चाहिए। भाजपा चुनाव आयोग की प्रक्रिया का पूरा समर्थन कर रही है, क्योंकि जिस देश में लोकतंत्र को संभालने वाली इकाई, यानी मतदाता सूची शुद्ध न हो, उस देश का लोकतंत्र कभी सलामत नहीं रह सकता है। राहुल गांधी को जितना विरोध करना है, उतना कर लें। वे एसआईआर का भी विरोध करते हैं। उन्हें हर चीज में नकारात्मकता दिखाई देती है।" धामी सरकार के 4 साल पूरे होने पर उन्होंने कहा, "आज पुष्कर सिंह धामी सरकार के 4 साल पूरे होने का अवसर है, लेकिन इसके साथ ही आज भाजपा सरकार के 9 साल पूरे होने का भी मौका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड आए थे। यहां राज्य के 25 साल पूरे होने का महोत्सव शुरू करके गए। मैं कार्यक्रम के माध्यम से उत्तराखंड की जनता को बताना चाहता हूं कि एक जमाना था जब उत्तराखंड की भूमि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही थी। उत्तराखंड की संस्कृति बचाने के लिए यहां के युवा मैदान में उतरे थे। उस समय कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने सहन न करने वाला दमन हमारे युवाओं पर किया था।" अमित शाह ने कहा, "अनेक युवाओं को गोली लगी। उन्होंने बलिदान दिया। रामपुर तिराहा की घटना आज भी उत्तराखंड वासी भूले नहीं हैं। उस वक्त भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने उत्तराखंड की रचना की थी। कांग्रेस के शो कॉल्ड विद्वान कर रहे थे कि छोटे राज्य कैसे टिकेंगे और अर्थव्यवस्थाएं कैसे चलेंगी। अटल जी ने 3 छोटे राज्य बनाए थे जिनमें उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और झारखंड शामिल हैं। ये तीनों राज्यों विकास के रास्ते पर आगे बढ़ गए हैं। जब हमारी सरकार के 9 साल पूरे हो रहे हैं।" कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, "जब त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया गया था, तब पहले कार्यक्रम में मैंने हिस्सा लिया था। तब मैंने कहा था कि 'अटल जी ने बनाया है, पीएम नरेंद्र मोदी संवारने का काम करेंगे। ये 9 साल उत्तराखंड के विकास के थे। पिछले 4 साल के अंदर पुष्कर सिंह धामी ने एक-एक समस्या को चुन-चुनकर समाप्त करने का संकल्प लिया है। इसके कारण उत्तराखंड विकास के रास्ते पर तेज गति से आगे बढ़ रहा है।" उन्होंने यह भी कहा कि आज 1132 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन हो रहा है। यहां पर नई न्याय संहिताओं की प्रदर्शनी का भी उद्घाटन हो रहा है। राज्य के वकील मित्रों को आग्रह है कि वे ये प्रदर्शनी जरूर देखें। पीएम मोदी के नेतृत्व में अंग्रेजों की ओर से बनाए गए 150 साल पुराने कानून समाप्त करके नागरिकों की सुरक्षा के लिए न्याय संहिताएं बनाई गई हैं। अमित शाह ने कहा कि नए कानूनों को 2028 में पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा। उसके बाद कोई भी नागरिक पुलिस थाने में जाकर एफआईआर कराएगा तो तीन साल में सुप्रीम कोर्ट तक पूरी न्याय प्रणाली समाप्त हो जाएगी। अब समय पर न्याय मिलेगा। ये दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय संहिताएं हैं। इसी बीच, केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 2026 में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में एनडीए की सरकार बनने जा रही है। 2027 का उद्घाटन उत्तराखंड की जनता को करना है। यहां फिर से पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार बनानी है।

ईरानी जहाज विवाद पर विदेश मंत्री जयशंकर की दो टूक, कहा— भारत का फैसला सही था

नई दिल्ली.  भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रायसीना संवाद 2026 में मिडिल ईस्ट के तनाव के बीच ईरानी नौसैनिक पोत को कोच्चि में डॉक करने की अनुमति देने के फैसले का बचाव किया है। जयशंकर ने ईरानी जहाजों से जुड़ी घटनाओं को लेकर कहा कि भारत ने यह कदम कानूनी जटिलताओं से ऊपर उठकर विशुद्ध रूप से मानवीय आधार पर उठाया है। दरअसल, भारत की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब 4 मार्च को श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दागे गए टॉरपीडो ने एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जिससे हिंद महासागर में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से मिला संदेश विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "हमें ईरान की तरफ से संदेश मिला कि एक जहाज, जो संभवतः उस समय हमारी सीमा के सबसे करीब था, हमारे बंदरगाह में आना चाहता था। उन्होंने बताया कि उन्हें कुछ समस्याएं आ रही हैं। 1 मार्च को हमने उन्हें अंदर आने की अनुमति दे दी, लेकिन उन्हें आने में कुछ दिन लग गए और फिर वे कोच्चि में रुके। उनमें कई युवा कैडेट थे। जब जहाज रवाना हुए थे और जब वे यहां पहुंचे, तब स्थिति बिल्कुल अलग थी। वे अपने बेड़े की समीक्षा के लिए आ रहे थे, और फिर वे किसी तरह से घटनाओं के गलत पक्ष में फंस गए।" ईरानी जहाजों को लेकर टिप्पणी बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर की ये टिप्पणियां तीन ईरानी नौसैनिक जहाजों के संदर्भ में आई हैं, जिनमें मार्च के पहले सप्ताह में ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के केंद्र में आ गए थे। ये जहाज- आईरिस डेना, आईरिस लवन और आईरिस बुशहर- हिंद महासागर में परिचालन कर रहे थे और फरवरी में विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा और मिलान 2026 अभ्यासों में भाग ले चुके थे। मैनें जो किया वो सही… विदेश मंत्री जयशंकर इस बात पर जोर दिया कि भारत का दृष्टिकोण मानवीय विचारों से प्रेरित है। जयशंकर ने कहा, "श्रीलंका में भी ऐसी ही स्थिति थी, उन्होंने वही फैसला लिया जो उन्होंने लिया और दुर्भाग्य से उनमें से एक की जान नहीं बच पाई… हमने कानूनी मुद्दों से परे मानवता के नजरिए से इस स्थिति का सामना किया और मुझे लगता है कि हमने सही काम किया।" बताते चले के कि बीते 4 मार्च को, श्रीलंका के दक्षिणी तट से लगभग 40 समुद्री मील दूर गाले के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका की पनडुब्बी से दागे गए एक टॉरपीडो से ईरानी फ्रिगेट आईआरआईआईएस डेना को निशाना बनाया गया था। इस हमले के कारण जहाज डूब गया। श्रीलंकाई अधिकारियों ने 87 शव बरामद किए, जबकि 32 नाविकों को जीवित बचा लिया गया और उन्हें चिकित्सा उपचार के लिए गाले ले जाया गया।

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष का समर्थन करेगी TMC

नई दिल्ली. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर अब ममता बनर्जी की टीएमसी भी सहमत हो गई है। सूत्रों की मानें तो टीएमसी इस अविश्वास प्रस्ताव में विपक्ष का साथ देने को तैयार है। इससे पहले पार्टी ने अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष का साथ देने से इनकार कर दिया था। सोमवार के लिए सूचीबद्ध किया गया लोकसभा ने ओम बिरला को अध्यक्ष पद से हटाने से संबंधित प्रस्ताव पेश करने के लिए विपक्षी सदस्यों के एक नोटिस को सोमवार के लिए सूचीबद्ध किया है। पीठासीन सभापति द्वारा बुलाए जाने पर सदन के 50 सदस्यों को खड़ा होना होगा और फिर नोटिस स्वीकृत माना जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होगा। यदि 50 सदस्य नोटिस के समर्थन में खड़े नहीं होते हैं, तो प्रस्ताव पेश नहीं किया जा सकता है। प्रस्ताव होगा पराजित? आगामी सोमवार के लिए तय एजेंडा पेपर के अनुसार, यह प्रस्ताव ही दिन के कामकाज के रूप में सूचीबद्ध एकमात्र विषय है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने लोकसभा सदस्यों को इस मुद्दे पर विचार के समय सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। सदन में संख्या बल सरकार के पक्ष में काफी अधिक है, जिससे यह लगभग तय माना जा रहा है कि प्रस्ताव पराजित हो जाएगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने हाल ही में "पीटीआई-भाषा" को बताया था कि यह प्रस्ताव 9 मार्च को सदन के समक्ष आएगा । नोटिस तीन कांग्रेस सदस्यों मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि द्वारा पेश किया जाएगा। प्रस्तावित प्रस्ताव में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने की अनुमति नहीं देने और "विपक्ष की महिला सांसदों के खिलाफ अनुचित आरोप लगाने" के लिए अध्यक्ष के आचरण पर सवाल उठाया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि लोक महत्व के मुद्दे उठाने पर आठ विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया, जबकि सत्तापक्ष के सदस्यों द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ की गई "अत्यंत आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियों" पर उन्हें नहीं टोका गया। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि विपक्ष को लगता है कि बिरला अब सदन के सभी पक्षों का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक निष्पक्षता नहीं बरत रहे हैं। उनके पक्षपातपूर्ण रवैये से सदस्यों के अधिकारों की अनदेखी हो रही है और ऐसी व्यवस्थाएं दी जा रही हैं जो इन अधिकारों को कमजोर करते हैं। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि बिरला "सभी विवादास्पद मामलों में खुले तौर पर सत्तारूढ़ दल का पक्ष लेते हैं" और यह सब सदन के सुचारु संचालन तथा जनता की चिंताओं और शिकायतों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए गंभीर खतरा है। इसलिए उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। संविधान के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष नोटिस पर विचार किए जाने के दौरान सदन में उपस्थित रह सकते हैं। वह प्रस्ताव पर अपना पक्ष रख सकते हैं और मतदान भी कर सकते हैं, लेकिन जब इस विषय पर चर्चा होगी तब वे कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। इस दौरान सदन में उनके बैठने को लेकर हालांकि नियम स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन वे संभवतः सत्तापक्ष की प्रमुख पंक्तियों में बैठ सकते हैं।

इस्लामिक नाटो बनाकर ईरान पर हमला करने अचानक सऊदी पहुंचे मुनीर

तेहरान. मध्य पूर्व में लगातार बदल रहे हालात के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान से मुलाकात की है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में सऊदी अरब की अरामको तेल रिफाइनरी पर हमला हुआ है। इसके अलावा, अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के मारे जाने के बाद तेहरान ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में कड़ी जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका पैदा हो गई है। सऊदी रक्षा मंत्री ने 'एक्स' पर असीम मुनीर के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए इस बैठक की जानकारी दी। उन्होंने लिखा- पाकिस्तान के सेना प्रमुख और रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। हमने किंगडम पर ईरानी हमलों और हमारे 'संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते' के ढांचे के भीतर उन्हें रोकने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा की। हमने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करती हैं और उम्मीद जताई कि ईरानी पक्ष समझदारी दिखाएगा और किसी भी गलत कदम से बचेगा। रणनीतिक महत्व और 'इस्लामिक नाटो' की सुगबुगाहट इस बैठक को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ महीने पहले तुर्की ने परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ मिलकर त्रिकोणीय 'इस्लामिक नाटो' जैसा रक्षा गठबंधन बनाने की कोशिश की थी। इसका उद्देश्य अशांत मध्य पूर्व और उसके बाहर सुरक्षा समीकरणों को फिर से आकार देना है। पाकिस्तान का समर्थन हाल ही में जब सऊदी अरब की अरामको रिफाइनरी पर ईरानी हमले हुए, तो पाकिस्तान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए रियाद और अन्य खाड़ी देशों के साथ पूरी एकजुटता व्यक्त की थी। ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया केवल 'मौखिक निंदा' तक सीमित रहेगी? यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि सितंबर में पाकिस्तान और सऊदी अरब ने '2025 रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर किए हैं। जिसके तहत 'एक देश पर हमला मतलब दोनों देशों पर हमला' माना जाएगा। नाटो के 'अनुच्छेद 5' जैसा क्लॉज इस समझौते में नाटो के 'आर्टिकल 5' के समान एक प्रावधान है, जिसमें कहा गया है कि किसी एक सदस्य के खिलाफ आक्रामकता को सभी पर हमला माना जाएगा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के हवाले से सूत्रों ने बताया है कि इस रक्षा व्यवस्था में तुर्की को शामिल करने पर बातचीत अंतिम चरण में है। यह संभावित विस्तार दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका में तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बढ़ते साझा रणनीतिक हितों को दर्शाता है। सैन्य हस्तक्षेप या कूटनीति: क्या करेगा पाकिस्तान? भले ही इस समझौते में एक पर हमला, सब पर हमला जैसी बात कही गई हो, लेकिन इसके मुख्य प्रावधान पारंपरिक सैन्य सहयोग जैसे- संयुक्त सैन्य अभ्यास, खुफिया जानकारी साझा करना और ड्रोन तकनीक पर ही केंद्रित हैं; इसमें कोई परमाणु प्रतिबद्धता शामिल नहीं है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ फोन पर बातचीत में पूर्ण एकजुटता तो दिखाई है, लेकिन सैन्य तैनाती के बजाय शांति प्रयासों का समर्थन किया है।जानकारों का मानना है कि अपनी सेना भेजने से पाकिस्तान एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में फंस सकता है, जिससे उसकी पहले से ही खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और आतंरिक सुरक्षा स्थिति और बिगड़ जाएगी। विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस्लामाबाद अपनी सेना भेजने के बजाय सऊदी अरब का समर्थन केवल कूटनीति, रसद और अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति देने तक ही सीमित रखेगा।

बिहार और बंगाल को काटकर बनेगा नया केंद्र शासित प्रदेश?

नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में बिहार के सीमांचल का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने बिहार के बड़े अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठक की। इसके बाद इस बात की अटकलें लगने लगी कि बिहार के कुछ जिलों और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों के मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तैयारी चल रही है। इन अटकलों को बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने और हवा दे दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) बंगाल को बांटने की कोशिश कर रही है। इन अटकलों पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। पीआईबी फैक्ट चेक ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। इसे महज एक अफवाह करार दिया। आपको बता दें कि अटकलों में दावा किया जा रहा है कि बिहार के सीमांचल क्षेत्र (पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया) और पश्चिम बंगाल के उत्तरी जिलों (मालदा, उत्तर दिनाजपुर और सिलीगुड़ी कॉरिडोर) को जोड़कर एक नया प्रशासनिक केंद्र बनाया जाएगा। पीआईबी का कहना है कि भारत सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। यह पूरी तरह से एक अफवाह है। गृह मंत्रालय (MHA) या किसी भी आधिकारिक संस्था ने इस तरह की किसी योजना की पुष्टि नहीं की है। सरकार ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे ऐसी अपुष्ट और संवेदनशील खबरों को साझा न करें जो क्षेत्रीय भावनाओं या राजनीतिक तनाव को भड़का सकती हैं। अफवाह क्यों फैली? यह अफवाह तब और तेज हो गई जब हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के सीमांचल और उत्तर बंगाल का दौरा किया। गृह मंत्री ने सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ सुरक्षा व्यवस्था, घुसपैठ और ड्रग तस्करी रोकने के लिए बैठकें की थीं। वहीं, भारतीय सेना ने हाल ही में सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए किशनगंज (बिहार) और पश्चिम बंगाल में नई चौकियां स्थापित की हैं। विपक्षी दलों और कुछ स्थानीय मीडिया आउटलेट्स ने इन सुरक्षा कदमों को नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तैयारी के रूप में प्रचारित किया, जिसका सरकार ने अब खंडन कर दिया है। आपको बता दें कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल में स्थित भूमि की एक संकीर्ण पट्टी (20-22 किमी चौड़ी) है जो मुख्य भूमि भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ती है। यह रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है। सरकार यहां एक अंडरग्राउंड रेलवे प्रोजेक्ट (40 किमी) बनाने की योजना जरूर बना रही है ताकि युद्ध या आपदा के समय पूर्वोत्तर से संपर्क न टूटे, लेकिन इसके लिए किसी भौगोलिक या प्रशासनिक बदलाव का कोई इरादा नहीं है।

अमृतसर में पुलिस कॉन्स्टेबल की पीट-पीटकर हत्या

अमृतसर. अमृतसर के राजासांसी क्षेत्र के गांव जगदेव कलां में पंजाब पुलिस कॉन्स्टेबल की पीट पीट कर हत्या कर दी गई। रिश्तेदारों ने घर पर हमला कर लोहे की रॉड और डंडों से कांस्टेबल से मारपीट की। गंभीर रूप से घायल कॉन्स्टेबल को परिजन इलाज के लिए अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है। मृतक की पहचान गांव जगदेव कलां निवासी जगजीत सिंह के रूप में हुई है। वह गुरदासपुर में एक डीएसपी के सुरक्षा गार्ड के तौर पर तैनात थे। मृतक की भतीजी जतिंदर कौर ने बताया कि गांव निवासी बलराज सिंह उनका रिश्तेदार है और उसके साथ कुछ समय से विवाद चल रहा है। बलराज सिंह, उसका भाई, बेटा चन्नप्रीत सिंह, पत्नी कोमल, सुखराज सिंह, मनजीत सिंह, गज्जन सिंह और गुरलाल सिंह सहित 8-10 लोग दो गाड़ियों में सवार होकर उनके घर आ पहुंचे। आरोप है कि सभी ने मिलकर जगजीत सिंह और परिवार के अन्य सदस्यों पर हमला कर दिया। मारपीट के दौरान जगजीत सिंह के सिर पर लोहे की रॉड लगने से वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। परिजन घायल जगजीत सिंह को अमृतसर ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। घटना से इलाके में सनसनी इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। वारदात के बाद से आरोपी फरार हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिवार के बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस के मुताबिक यह मामला पारिवारिक रंजिश का है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें बना दी हैं और उनकी धरपकड़ के लिए रेड की जा रही है।

ट्रंप की हत्या की पाकिस्तान में ट्रेनिंग और ईरान से पैसा लेने वाला आतंकी आसिफ दोषी करार

तेहरान. ईरानी जासूसों द्वारा भर्ती किए गए 48 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट को शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश रचने के आरोप में दोषी ठहराया गया है। ब्रुकलिन की एक जूरी ने दो घंटे से भी कम समय तक विचार-विमर्श करने के बाद उसे 'मर्डर-फॉर-हायर' (पैसे देकर हत्या करवाना) और आतंकवाद के आरोपों में दोषी पाया। जूरी ने मर्चेंट के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि ईरान द्वारा उसके परिवार को 'धमकी' दिए जाने के कारण उसे मजबूरी में इस साजिश का हिस्सा बनना पड़ा था। बेतुकी योजना: जून 2024 में एफबीआई के खुफिया कैमरों ने क्वींस के फ्लोरल पार्क मोटर लॉज में मर्चेंट को अपने एक साथी (जो वास्तव में एफबीआई का मुखबिर था) के साथ रिपब्लिकन रैली में ट्रंप को मारने की योजना बनाते हुए कैद किया था। कागज और वेप से समझाया प्लान: मर्चेंट ने एक नोटबुक के पन्ने पर आयताकार बॉक्स बनाकर भीड़ और स्टेज को दर्शाया। फिर उसने एक तीर के निशान के ऊपर क्रीमसिकल रंग का वेप रखते हुए कहा- यह टारगेट है। यह कैसे मरेगा? एडवांस पेमेंट और गिरफ्तारी: पूर्व बैंकर रह चुके मर्चेंट ने भाड़े के हत्यारे (हिटमैन) बने दो अंडरकवर एफबीआई एजेंटों को 5000-5000 डॉलर का एडवांस भी दिया था। उसे अगस्त 2024 में अमेरिका से भागने की कोशिश करते समय गिरफ्तार कर लिया गया था। आसिफ मर्चेंट को पाकिस्तान में ट्रेनिंग मिली थी अदालत के दस्तावेजों और ट्रायल के दौरान दी गई गवाही के अनुसार, आसिफ मर्चेंट ने 2022 के अंत या 2023 की शुरुआत में पाकिस्तान में रहकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लिए काम करना शुरू किया था। इसी अवधि में उसे 'ट्रेडक्राफ्ट' (जासूसी और खुफिया काम करने के तरीके) का विशेष प्रशिक्षण दिया गया था, जिसमें काउंटर-सर्विलांस (निगरानी या खुफिया एजेंसियों से बचने की तकनीक) की ट्रेनिंग मुख्य रूप से शामिल थी। मर्चेंट ने अदालत में यह भी स्वीकार किया कि उसे इस बात की पूरी जानकारी थी कि IRGC एक घोषित आतंकी संगठन है। इस ट्रेनिंग को पूरा करने के बाद, 2023 में उसे ऐसे संभावित IRGC रंगरूटों की तलाश करने के लिए अमेरिका भेजा गया था, जो वहां रहकर संगठन के लिए काम कर सकें। इसके अलावा, इस पूरी अवधि के दौरान मर्चेंट अपने IRGC हैंडलर से मिलने और निर्देश प्राप्त करने के लिए बार-बार ईरान की यात्रा भी करता रहा था। मकसद और अदालत में दलीलें मर्चेंट ने अदालत में गवाही दी कि अप्रैल 2024 में उसके ईरानी हैंडलर ने उसे अमेरिका भेजा था। उसके हैंडलर ने स्पष्ट रूप से किसी एक का नाम नहीं लिया था, बल्कि तीन संभावित लक्ष्य बताए थे- डोनाल्ड ट्रंप, जो बाइडेन और निक्की हेली। इस काम के लिए उसे दस लाख डॉलर तक मिलने की उम्मीद थी। बचाव पक्ष का दावा: मर्चेंट के वकील एवी मोस्कोविट्ज ने इस साजिश को हास्यास्पद बताया और कहा कि मर्चेंट को लगा कि ईरान में उसका परिवार खतरे में है, इसलिए उसने केवल इस योजना का हिस्सा होने का नाटक किया। अदालत में 'नदीम अली' के नाम से गवाही देने वाले मुखबिर की टिप पर एफबीआई ने यह पूरा जाल बिछाया था। सरकारी वकीलों का पलटवार: एफबीआई एजेंट ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के बाद मर्चेंट ने किसी धमकी का जिक्र नहीं किया था। इसके बजाय, उसने पैसे और 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए शीर्ष ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए ट्रंप की हत्या की बात स्वीकार की थी। यह मुकदमा एक ऐसे समय में संपन्न हुआ है जब मध्य पूर्व में भारी तनाव है। अमेरिका और इजरायली सेनाओं के एक अभूतपूर्व सैन्य अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और दर्जनों अन्य शीर्ष ईरानी अधिकारी मारे गए हैं, जिससे युद्ध की स्थिति और गंभीर हो गई है। इस मामले में दोषी पाए जाने के बाद, अब सजा सुनाए जाने पर आसिफ मर्चेंट को अधिकतम उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।

केशव प्रसाद मौर्य के हेलिकॉप्टर चॉपर में धुआं भरने पर इमरजेंसी लैंडिंग

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के हेलिकॉप्टर की शनिवार को लखनऊ एयरपोर्ट में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। वह हेलिकॉप्टर से ला मार्टस् से कौशांबी जा रहे थे, तभी तकनीकी खराबी के कारण हेलिकॉप्टर के केबिन में धुआं भरने लगा। स्थिति को देखते हुए पायलट ने तुरंत लखनऊ एयरपोर्ट पर आपात लैंडिंग कराई। लैंडिंग के बाद सभी लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य शनिवार को एक बड़े हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गए।जानकारी के अनुसार, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत लखनऊ से कौशांबी के लिए रवाना हुए थे। हेलिकॉप्टर ने जैसे ही ला मार्टिनियर ग्राउंड से उड़ान भरी, तभी पायलट को तकनीकी खराबी का अहसास हुआ। उपमुख्यमंत्री के कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, उड़ान के दौरान हेलीकॉप्टर के भीतर अचानक धुआं भरने लगा, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। लखनऊ एयरपोर्ट पर कराई गई हेलिकॉप्टर की लैंडिंग पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क किया और हेलिकॉप्टर को लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर मोड़ दिया। एयरपोर्ट पर पुख्ता इंतजामों के बीच हेलीकॉप्टर की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। वही, चॉपर में सवार सभी यात्री सही सलामत हैं। इस घटना के बाद तकनीकी विशेषज्ञों की टीम हेलीकॉप्टर की जांच में जुट गई है।