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बॉम्बे हाई कोर्ट का अहम आदेश: कहीं भी नमाज पढ़ने का नहीं है अधिकार, समझें क्या है मामला

मुंबई बॉम्बे हाई कोर्ट ने छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास टैक्सी और ऑटो रिक्शा चालकों को रमजान के दौरान नमाज पढ़ने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि रमजान इस्लाम का महत्वपूर्ण धार्मिक महीना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति किसी भी स्थान पर नमाज पढ़ने का अधिकार मांग सकता है। खासकर एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सुरक्षा को धर्म से ऊपर बताया     जस्टिस बी.पी. कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की पीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत सुरक्षा संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकती।     कोर्ट ने कहा कि एयरपोर्ट परिसर और उसके आसपास का क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील होता है, जहां किसी भी तरह की भीड़ या अस्थायी व्यवस्था सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्म चाहे जो भी हो, सुरक्षा सबसे पहले है और इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता। अस्थायी शेड हटाए जाने के बाद दाखिल हुई थी याचिका     यह मामला टैक्सी-रिक्शा ओला-उबर मेंस यूनियन द्वारा दाखिल याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास बने एक अस्थायी शेड के नीचे नमाज अदा करते थे। हालांकि, पिछले वर्ष अधिकारियों ने उस शेड को हटा दिया था।     यूनियन ने अदालत से मांग की थी कि उन्हें उसी स्थान पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाए या फिर आसपास किसी अन्य स्थान को इसके लिए निर्धारित किया जाए। एयरपोर्ट की सुरक्षा का दिया हवाला अदालत ने बार-बार एयरपोर्ट सुरक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सावधानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पिछली सुनवाई में अदालत ने पुलिस और एयरपोर्ट प्राधिकरण को निर्देश दिया था कि वे यह देखें कि याचिकाकर्ताओं को कहीं और स्थान दिया जा सकता है या नहीं। प्राधिकरणों ने अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश की। सात अन्य स्थानों का सर्वे किया गया, लेकिन भीड़भाड़, सुरक्षा चिंताओं और एयरपोर्ट विकास योजना के कारण कोई भी जगह उपयुक्त नहीं पाई गई। मदरसे में जाकर अदा करें नमाज   रिपोर्ट देखने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि मामला सीधे एयरपोर्ट की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए याचिकाकर्ताओं को राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित स्थान से एक किलोमीटर के भीतर एक मदरसा है, जहां नमाज अदा की जा सकती है। पीठ ने कहा कि एयरपोर्ट के आसपास प्रार्थना स्थल बनाने का सवाल ही नहीं उठता। अदालत ने टिप्पणी की कि सुरक्षा सबसे पहले आती है और इस एयरपोर्ट से हर धर्म के लोग यात्रा करते हैं। जरूरी नहीं कि किसी जगह पर नमाज पढ़ी जाए हाईकोर्ट ने कहा कि दुनिया में कहीं भी एयरपोर्ट के इतने करीब इस तरह की व्यवस्था नहीं देखी गई है। याचिकाकर्ता यह तय नहीं कर सकते कि वे किस जगह नमाज पढ़ेंगे। अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई कल यह कहे कि वह ओवल मैदान के बीच में खड़े होकर नमाज पढ़ना चाहता है, तो यह संभव नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति दिन में पांच बार नमाज अदा कर सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह किसी भी जगह पर ही की जाए। वैकल्पिक स्थानों का सर्वे, लेकिन नहीं मिली उपयुक्त जगह     इससे पहले अदालत ने पुलिस और एयरपोर्ट प्राधिकरण को निर्देश दिया था कि वे आसपास के क्षेत्रों का सर्वे कर यह देखें कि क्या नमाज के लिए कोई अन्य स्थान उपलब्ध कराया जा सकता है।     गुरुवार को अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि सात अलग-अलग स्थानों का सर्वे किया गया, लेकिन भीड़, सुरक्षा चिंताओं और एयरपोर्ट के विकास कार्यों के कारण कोई भी जगह उपयुक्त नहीं पाई गई। कोर्ट ने मदरसे में नमाज पढ़ने की दी सलाह     रिपोर्ट देखने के बाद अदालत ने कहा कि वह इस मामले में कोई राहत नहीं दे सकती। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे आसपास मौजूद धार्मिक स्थलों का उपयोग करें।     कोर्ट ने बताया कि प्रस्तावित स्थान से करीब एक किलोमीटर के भीतर एक मदरसा मौजूद है, जहां नमाज अदा की जा सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में टर्मिनल-1 के पुनर्विकास के दौरान यदि संभव हुआ तो याचिकाकर्ता अपनी मांग एयरपोर्ट प्राधिकरण के सामने रख सकते हैं। सर्वे में नमाज के लिए कोई जगह नहीं मिली कोर्ट ने पुलिस और एयरपोर्ट अधिकारियों से यह जांच करने को कहा था कि क्या याचिकाकर्ताओं को कोई वैकल्पिक जगह दी जा सकती है। गुरुवार को पेश की गई रिपोर्ट में अधिकारियों ने बताया कि सात जगहों का सर्वे किया गया, लेकिन भीड़, सुरक्षा चिंताओं और एयरपोर्ट डेवलपमेंट प्लान के कारण कोई भी जगह उपयुक्त नहीं पाई गई। रिपोर्ट देखने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि एयरपोर्ट के आसपास नमाज पढ़ने के लिए कोई जगह तय करना संभव नहीं है। कोर्ट ने कहा- धर्म हो या कुछ और सुरक्षा सबसे पहले आती है। इस एयरपोर्ट से हर धर्म के लोग यात्रा करते हैं, इसलिए सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट बोला- आप नमाज की जगह तय नहीं कर सकते कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता खुद यह तय नहीं कर सकते कि वे किस जगह नमाज पढ़ेंगे। बेंच ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई किसी सार्वजनिक स्थान के बीच में नमाज पढ़ने की मांग करे तो इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे किसी दूसरी जगह की तलाश करें। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि संबंधित इलाके से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर एक मदरसा मौजूद है, जहां नमाज पढ़ी जा सकती है।  

चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण आज से शुरू, यहां जानें पूरा प्रक्रिया

नई दिल्ली चारधाम यात्रा 2026 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन आज सुबह 7 बजे से शुरू हो गया है, जबकि 17 अप्रैल से ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू होगा. उत्तराखंड सरकार ने यात्रा से पहले रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उत्तराखंड सरकार की वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in और मोबाइल ऐप टूरिस्ट केयर उत्तराखंड से कर सकते हैं. 19 अप्रैल को खुलेंगे कपाट उत्तराखंड सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलेंगे. 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे. श्रीहेमकुण्ड साहिब की आधिकारिक घोषणा बाद में की जाएगी. आधार कार्ड के माध्यम से पंजीकरण उत्तराखंड सरकार की ओर से बताया गया है कि चारधाम यात्रा 2026 में आने के लिए भारतीय श्रद्धालु अपना पंजीकरण आधार कार्ड के माध्यम से कर सकेंगे, जबकि विदेशी श्रद्धालुओं के लिए ई-मेल आईडी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. आधार कार्ड नहीं है तो ऐसे होगा रजिस्ट्रेशन जिन श्रद्धालुओं के पास आधार कार्ड उपलब्ध नहीं है, उनके लिए पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी पंजीकरण काउंटरों की व्यवस्था की गई है. इन काउंटरों पर रजिस्ट्रेशन कपाट खुलने से दो दिन पूर्व, 17 अप्रैल 2026 से प्रारम्भ की जाएगी. पंजीकरण केन्द्र एवं ट्रांजिट कैंप ऋषिकेश, पंजीकरण केन्द्र ऋषिकुल ग्राउंड हरिद्वार और पंजीकरण केंद्र विकास नगर देहरादून में खुलेंगे. टोल फ्री नंबर पर मिलेगी जानकारी श्रद्धालु किसी भी प्रकार की जानकारी या असुविधा होने पर टोल फ्री नंबर 0135-1364 पर कॉल कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा में आने वाले सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि यात्रा को सुगम एवं व्यवस्थित बनाने के लिए यात्रा से पूर्व अपना पंजीकरण अनिवार्य रूप से करवा लें. चार धाम यात्रा का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यमुनोत्री से यात्रा शुरू करने पर चारधाम यात्रा में किसी भी प्रकार की रुकावट भक्तों को नहीं आती है.     यमुनोत्री, यमुना नदी का उद्गम स्थल है. यमुना जी यमराज की बहन हैं और उन्हें वरदान प्राप्त है कि वह अपने जल के माध्यम से सभी का दुख दूर करेंगी.     मान्यता है कि जो श्रद्धालु यमुनोत्री में स्नान करता है, उसे मृत्यु के भय से मुक्ति मिल जाती है. हर साल की तरह इस बार भी बाबा केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है.  

ट्रंप की करारी शिकस्त, अमेरिका को ₹16 लाख करोड़ का फटका, भारत को मिल रही राहत

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को एक और झटका लगा है। न्यूयॉर्क के एक फेडरल जज ने फैसला सुनाया है कि जो कंपनियां सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए टैरिफ का पेमेंट कर चुकी हैं, उन्हें रिफंड मिलना चाहिए। एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, U.S. कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड के जज रिचर्ड ईटन ने फैसले में लिखा है कि रिकॉर्ड में दर्ज सभी इंपोर्टर्स सुप्रीम कोर्ट के फैसले से फायदा पाने के हकदार हैं। ट्रंप की तरफ से पिछले साल भारत समेत करीब 60 देशों के खिलाफ जारी किए गए टैरिफ ऑर्डर्स को इस साल फरवरी महीने में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द घोषित कर दिया। कोर्ट ने फैसले में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने बड़े लेवी लगाकर अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल किया। कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA), 1977 को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने गैर-कानूनी घोषित किया है। इसी के तहत ट्रंप ने पिछले साल टैरिफ लगाए थे। ट्रंप को 16 लाख करोड़ रुपये का झटका   कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिकी सरकार को 175 अरब डॉलर का रिफंड चुकाना पड़ सकता है. न्यूयॉर्क के फेडरल जज रिचर्ड ईटन ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अमेरिकी सरकार ने जिन भी कंपनियों से अवैध टैरिफ वसूला है, उन्हें अब रिफंड करना होगा. ये कंपनियां अपना पैसा वापस पाने की हकदार हैं. जज ईटन ने कहा कि रिफंड का दायरा सिर्फ अदालत का दरवाजा खटखटाने वाली कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा,उन आयातकों पर भी लागू होगा, जिन्होंने टैक्स चुकाया है.  कोर्ट के इस फैसले से अमेरिकी खजाने पर करीब 16 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा.बता दें कि अमेरिका ने दिसंबर दिसंबर 2025 तक टैरिफ से 130 अरब डॉलर की कमाई की। अमेरिका के लिए डबल झटका क्यों ?  टैरिफ पर अमेरिकी कोर्ट से मिली हार अमेरिका और ट्रंप के लिए डबल झटका है. ट्रंप प्रशासन को भारी भरकम शुल्क चुकाना होगा. पहले से ही अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ा हुआ है. ऐसे  में 16 लाख करोड़ का रिफंड आसान नहीं है. वहीं युद्ध की वजह से खर्च पहले से बढ़ा है. कोर्ट के फैसले ने ट्रंप को दोहरा झटका दे दिया है.  हालांकि ट्रंप बार-बार धमकी दे रहे हैं कि वो टैरिफ को 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर देंगे. ट्रंप दावा कर रहे हैं 150 दिनों के बाद वो टैरिफ को वहीं पहुंचा देंगे, जहां वो पहले था.  कुल मिलाकर टैरिफ पर ट्रंप हार मानने को तैयार नहीं हैं.   क्या भारत को इस फैसले से फायदा मिलेगा ?  टैरिफ हटने के बाद अमेरिका की ओर से कुल इंपोर्ट टैक्स 10 फीसदी का है. जिसका फायदा भारतीय निर्यातकों को मिला. अगर रिफंड की बात करें तो भारत को सीधे तौर पर इसका फायदा नहीं मिलेगा, क्योंकि भारतीय निर्यातकों ने टैरिफ का भुगतान नहीं किया, बल्कि अमेरिकी आयातकों ने भारत पर लगाए गए टैरिफ का भुगतान अमेरिकी सरकार को किया था. इस शुल्क का बोझ आयातकों ने ग्राहकों पर डाला. अमेरिकी बाजार में भारतीय प्रोडक्ट्स के लिए प्रतिस्पर्धा कड़ी हो गई. भारतीय सामान महंगे हो गए . इस टैरिफ के हटने और रिफंड का फायदा भी उन आयातकों को मिलेगा, जिन्होंने शुल्क चुकाया था.  हालांकि अप्रत्यक्ष लाभ भारत को मिलेगा, क्योंकि टैरिफ कम होने से भारत से सामान खरीदना सस्ता और आसान हो जाएगा, अमेरिकी बाजार में भारत के सामान सस्ते हो जाएंगे.  भारतीय कंपनियों को इस फैसले से लाभ मिलेगा, उनका निर्यात बढ़ेगा ईटन खास तौर पर एटमस फिल्ट्रेशन के एक केस पर फैसला सुना रहे थे। यह नैशविले, टेनेसी की एक कंपनी है, जो फिल्टर और दूसरे फिल्ट्रेशन प्रोडक्ट बनाती है। कंपनी टैरिफ रिफंड के अधिकार का दावा कर रही है।इस सप्ताह की शुरुआत में एक और फेडरल कोर्ट ने रिफंड प्रोसेस को धीमा करने की ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन की कोशिश को खारिज कर दिया। U.S. कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट ने रिफंड प्रोसेस का अगला फेज शुरू किया और इसे न्यूयॉर्क ट्रेड कोर्ट में भेजकर इसे सुलझाने के लिए कहा। अब U.S. कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन एजेंसी को रिफंड प्रोसेस करने का कोई तरीका निकालना होगा। अमेरिका के लिए डबल झटका क्यों ?  टैरिफ पर अमेरिकी कोर्ट से मिली हार अमेरिका और ट्रंप के लिए डबल झटका है. ट्रंप प्रशासन को भारी भरकम शुल्क चुकाना होगा. पहले से ही अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ा हुआ है. ऐसे  में 16 लाख करोड़ का रिफंड आसान नहीं है. वहीं युद्ध की वजह से खर्च पहले से बढ़ा है. कोर्ट के फैसले ने ट्रंप को दोहरा झटका दे दिया है.  हालांकि ट्रंप बार-बार धमकी दे रहे हैं कि वो टैरिफ को 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर देंगे. ट्रंप दावा कर रहे हैं 150 दिनों के बाद वो टैरिफ को वहीं पहुंचा देंगे, जहां वो पहले था.  कुल मिलाकर टैरिफ पर ट्रंप हार मानने को तैयार नहीं हैं.  

ईरान ने अमेरिका के प्रमुख वार्निंग सिस्टम को तबाह किया, युद्ध के बीच ‘आंख’ फोड़ने से हुआ बड़ा नुकसान

वाशिंगटन ईरान पर अमेरिका और इजरायली हमलों के बाद युद्ध ने भयावह मोड़ के लिया है। जहां एक तरफ ईरान ने खाड़ी देशों पर लगातार हमले जारी रखे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने हिंद महासागर में एक ईरानी पोत को डुबो दिया है, जिसमें 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। इस बीच अब यह खबर सामने आई है कि ईरान ने अमेरिका को एक गहरा जख्म दे दिया है। जानकारी के मुताबिक ईरान के हमले में कतर में मौजूद अमेरिका की एक अहम मिसाइल चेतावनी प्रणाली को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। इसे इस क्षेत्र में अमेरिका का आंख भी कहा जाता था। जानकारी के मुताबिक करीब 1.1 अरब डॉलर की लागत वाला यह रडार सिस्टम अमेरिकी सेना के मिसाइल रक्षा नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा था। हमले से क्षेत्र में तैनात मिसाइल रक्षा तंत्र को बड़ा झटका लगा है और इससे संभावित मिसाइल हमलों का समय रहते पता लगाने की क्षमता कमजोर हो सकती है। सैटेलाइट तस्वीरों में खुलासा अमेरिकी सैन्य ढांचे को हुए नुकसान की पुष्टि सैटेलाइट तस्वीरों से भी हुई है। प्लैनेट लैब्स द्वारा जारी सैटेलाइट इमेज में अमेरिकी स्पेस फोर्स के AN/FPS-132 (ब्लॉक 5) बैलिस्टिक मिसाइल अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम के आसपास क्षति और आग बुझाने की गतिविधियां दिखाई दी हैं। यह रडार सिस्टम मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना द्वारा संचालित सबसे बड़ा मिसाइल चेतावनी रडार माना जाता है। ईरान ने कैसे फोड़ी आंख? ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इसे सटीक मिसाइल हमला बताया है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला संभवत: कम लागत वाले हमलावर ड्रोन से किया गया होगा, जो शायद शाहेद प्रकार का था। रिपोर्ट्स के अनुसार मिसाइलों और ड्रोन के एक साथ बड़े हमले के दौरान यह ड्रोन रक्षा तंत्र को भेदने में सफल रहा। क्यों है बड़ा नुकसान? इस रडार सिस्टम को अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन ने अपग्रेडेड अर्ली वार्निंग रडार (UEWR) कार्यक्रम के तहत बनाया था। यह प्रणाली 5000 किलोमीटर तक की दूरी पर बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को ट्रैक करने में सक्षम है और पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में मिसाइल लॉन्च का शुरुआती अलर्ट देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कतर में इसकी लोकेशन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां से यह रडार ईरान, इराक, सीरिया, तुर्किये, मध्य एशिया के कुछ हिस्सों और हिंद महासागर तक की निगरानी कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस हमले का असर सिर्फ एक सैन्य ठिकाने को नुकसान तक सीमित नहीं है। अमेरिका के पूर्व सैन्य अधिकारी और पेंटागन के पूर्व सलाहकार कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि इस हमले में अमेरिका की “आंखें” निशाना बनी हैं। उनके अनुसार यह सिस्टम अमेरिकी मिसाइल रक्षा तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। भू-राजनीति विशेषज्ञ ब्रायन एलन ने कहा कि इस हमले के रणनीतिक असर भी हो सकते हैं। बदलने में लग जाएगा समय सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका के पास सैटेलाइट और अन्य रडार सहित वैश्विक सेंसर नेटवर्क मौजूद है, लेकिन AN/FPS-132 जैसे बड़े और स्थायी रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचने से क्षेत्रीय निगरानी में अंतर आ सकता है। ऐसे बड़े रडार सिस्टम को जल्दी बदलना या दोबारा स्थापित करना आसान नहीं होता, इसलिए इससे कुछ समय के लिए मिसाइल निगरानी और ट्रैकिंग क्षमता कमजोर हो सकती है। यह स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि इस क्षेत्र में अमेरिका के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े प्रमुख समुद्री मार्ग मौजूद हैं।

अमेरिका की छूट: भारत अब 30 दिन तक खरीद सकेगा रूस का कच्चा तेल

 नई दिल्ली ईरान जंग की वजह से पैदा हुए तेल संकट के बीच अमेरिका ने अहम फैसला लिया है. उसने रूस को 30 दिन तक भारत को तेल बेचने की अस्थायी छूट दी है. इससे महीनों से समंदर में भटक रहे रूसी तेल जहाजों के साथ-साथ भारत को भी राहत मिलेगी। बताया गया कि अमेरिका ने ईरान जंग के बीच ग्लोबल ऑयल मार्केट पर दबाव कम करने के लिए समुद्र में फंसे रूसी तेल को भारत को बेचने की इजाजत दी है. ये 30 दिन की टेम्पररी छूट है। ईरान से जंग शुरू होने के बाद आशंका थी कि भारत में भी तेल संकट हो सकता है. तब सरकार ने बताया था कि भारत के पास अभी करीब 50 दिन का तेल रिजर्व है। रॉयटर्स के मुताबिक, दो सीनियर अमेरिकी अधिकारियों ने गुरुवार को रॉयटर्स को बताया कि वाशिंगटन ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों से जुड़ी मौजूदा पाबंदियों के बावजूद शिपमेंट को आगे बढ़ने की अनुमति देने के लिए 30 दिनों की छूट को मंजूरी दे दी है। बता दें कि, अमेरिका ने यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद विभिन्न देशों को रूसी तेल नहीं खरीदने की धमकी दी थी. पश्चिमी देशों ने भी मॉस्को पर प्रतिबंध लगाए थे. लेकिन भारत रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक के रूप में उभरा था. ट्रंप की धमकियों के बावजूद भारत ने रूसी तेल खरीदना जारी रखा था. साथ ही साफ संदेश दिया था कि तेल कहां से खरीदना है, इसका फैसला भारत खुद करेगा। रूस के तेल टैंकर समुद्र में क्यों खड़े थे दरअसल, रूस के तेल टैंकर समुद्र में इसलिए खड़े थे क्योंकि नए अमेरिकी प्रतिबंधों और भुगतान/बीमा की अनिश्चितता की वजह से उनका तेल तुरंत उतारा नहीं जा रहा था. यूएस ने रूसी तेल से जुड़ी कुछ शिपिंग कंपनियों और टैंकरों पर सख्त प्रतिबंध लगाए थे. इससे कई जहाजों के बीमा, भुगतान और पोर्ट एंट्री पर सवाल खड़े हो गए। भारत के रिफाइनर्स भी इंतजार करने लगे कि कहीं तेल खरीदना नियमों के खिलाफ तो नहीं होगा. इसलिए जहाजों को कुछ समय समुद्र में ही रोक दिया गया। ताजा जानकारी के मुताबिक, सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियां- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड – जल्द डिलीवरी के लिए रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए व्यापारियों के साथ पहले से ही बातचीत कर रही हैं। बताया गया कि भारतीय सरकारी तेल रिफाइनरी कंपनियों ने व्यापारियों से पहले ही लगभग 20 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीद लिया है। कुछ रिफाइनरियों के लिए, यह कदम रूसी आपूर्ति की वापसी का संकेत है. रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, एचपीसीएल और एमआरपीएल को आखिरी बार नवंबर में रूसी कच्चे तेल की खेप मिली थी।

Su-30 MKI फाइटर जेट क्रैश, वायुसेना के दो पायलटों की मृत्यु

गुवाहाटी भारतीय वायुसेना का एक सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट गुरुवार शाम को असम में लापता हो गया. देर रात इसके क्रैश होने की पुष्टि हुई. फाइटर जेट ने असम के जोरहाट से उड़ान भरी थी और शाम 7.42 बजे के बाद रडार से उसका संपर्क टूट गया. विमान का पता लगाने के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) ने सर्च और रेस्क्यू मिशन शुरू किया है। वायुसेना ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि IAF स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरगकर के निधन पर दुख जताता है, जिन्हें Su-30 क्रैश में जानलेवा चोटें आईं। IAF के सभी कर्मचारी गहरी संवेदना जताते हैं, और इस दुख की घड़ी में दुखी परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं। भारतीय वायुसेना ने अपने X हैंडल पर खोए हुए फाइटर जेट का अपडेट शेयर करते हुए लिखा, 'हमारे एक Su-30 MKI के लापता होने की खबर है. एयरक्राफ्ट ने असम के जोरहाट से उड़ान भरी थी और आखिरी बार शाम 7.42 बजे रडार के संपर्क में आया था. आगे की जानकारी का पता लगाया जा रहा है. एक सर्च और रेस्क्यू मिशन शुरू किया गया है।'  इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी सुपरमैन्यूवरबिलिटी, लंबी मारक क्षमता और दो इंजन वाला शक्तिशाली डिजाइन है. सुखोई-30 एमकेआई ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ले जाने में भी सक्षम है, जिससे इसकी स्ट्राइक कैपेसिटी कई गुना बढ़ जाती है. इसमें आधुनिक एवियोनिक्स, मल्टी-फंक्शन रडार, थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल और लंबी दूरी तक उड़ान की क्षमता है. यह लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जाता है और देश की वायु सुरक्षा व सामरिक ताकत में इसकी भूमिका बेहद अहम है। सुखोई-30 एमकेआई भारतीय वायुसेना का सबसे ताकतवर और भरोसेमंद मल्टी रोल फाइटर जेट है. इसे 2000 के दशक की शुरुआत में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था. यह रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो द्वारा विकसित किया गया है. भारतीय वायुसेना इस फाइटर जेट का विशेष रूप से कस्टमाइज संस्करण इस्तेमाल करती है, जिसमें MKI का अर्थ है मॉडर्नाइज्ड, कमर्शियल और इंडियन. यह विमान हवा से हवा, हवा से जमीन और समुद्री लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है। रूस में इस एयरक्राफ्ट का प्रोडक्शन 2000 में शुरू हुआ था, जब नई दिल्ली ने मॉस्को से 140 Su-30 फाइटर एयरक्राफ्ट बनाने के लिए कहा था. पहला एयरक्राफ्ट 2002 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था, और तब से, समय के साथ इसकी संख्या बढ़ती ही गई है।. आज, Su-30 भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े में सबसे बड़ा हिस्सा रखता है

आतंकवाद की नई चाल: पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा ने महिलाओं को बनाया हिस्सा

नई दिल्ली पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा महिलाओं के लिए दो नए ट्रेनिंग सेंटर बनाने की तैयारी कर रहा है. इन सेंटर को ‘मरकज’ के रूप में डेवलप किया जाएगा, जहां महिलाओं को संगठन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के लिए ट्रेनिंग दिया जाएगा. यह कदम इस संगठन की रणनीति में संभावित बदलाव को दर्शाता है, क्योंकि अब तक लश्कर-ए-तैयबा अपने महिला विंग का उपयोग मुख्य रूप से राजनीतिक लामबंदी और प्रचार से जुड़े कामों के लिए करता रहा है. महिला विंग की प्रमुख इफ्फत सईद की हालिया टिप्पणियां इस बदलाव की तरफ इशारा करती हैं. माना जा रहा है कि आने वाले समय में महिलाओं को ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) जैसी भूमिकाओं में शामिल किया जा सकता है.  OGW नेटवर्क वे लोग होते हैं जो सीधे हथियारबंद गतिविधियों में शामिल नहीं होते, लेकिन संगठन के लिए जमीन पर सहयोग, सूचना को इकट्ठा और अन्य सहायता प्रदान करते हैं. महिलाओं को इस नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश लश्कर के रणनीतिक विस्तार के रूप में देखी जा रही है. इस क्रम में संगठन के वरिष्ठ आतंकी अब्दुर रऊफ ने इस्लामाबाद स्थित मरकज कुबा अल इस्लाम का दौरा किया है. जानकारी के अनुसार, इस केंद्र का विस्तार किया जा रहा है और इसमें महिलाओं के लिए ख़ास ट्रेनिंग सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं. सुरक्षा एजेंसियां इस पर कड़ी नजर रखे हुए हैं और सतर्कता बरत रही हैं. महिलाओं के लिए इन नए कैम्पों के जरिए लश्कर-ए-तैयबा अपने नेटवर्क को नए और व्यापक तरीकों से मजबूत करने की कोशिश कर सकता है. यह विकसित होती स्थिति क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. भारत में सुरक्षाबल लश्कर-ए-तैयबा की हर नए कदम पर खास नजर बनाई हुई है.   

₹38 करोड़ की ठगी हर 24 घंटे, सरकार ने उठाया बड़ा कदम—AI की मदद से ठगी रोकने की तैयारी

नई दिल्ली Cyber Fraud Prevention India: भारत में साइबर फ्रॉड की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं और इसके आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं. हर 24 घंटे में करीब 38 करोड़ रुपये साइबर अपराधी लोगों के बैंक खातों से उड़ा ले जाते हैं. यह पैसा आम लोगों की मेहनत की कमाई होती है, जो ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट या अन्य डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करते समय ठगी का शिकार हो जाते हैं. हैरानी की बात यह है कि इस बड़ी रकम में से सिर्फ लगभग 8 करोड़ रुपये ही बचाए जा पाते हैं. बाकी पैसा साइबर अपराधियों के खातों में पहुंच जाता है. यह आंकड़ा बताता है कि साइबर अपराधियों का नेटवर्क कितना मजबूत हो चुका है और वे लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। हर दिन हजारों शिकायतें  साइबर ठगी के मामलों को लेकर हर दिन हजारों लोग शिकायत दर्ज करा रहे हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय से जुड़े साइबर सिस्टम के मुताबिक, हर 24 घंटे में 7000 से ज्यादा शिकायतें दर्ज होती हैं. इनमें से करीब 6000 शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जाती है. जांच में सामने आया है कि इन मामलों में रोजाना करीब 38 करोड़ रुपये की ठगी हो रही है. हालांकि एजेंसियां लगातार पैसा बचाने की कोशिश करती हैं, लेकिन औसतन सिर्फ 8 करोड़ रुपये ही रिकवर हो पाते हैं. इसका मतलब यह है कि ठगों का नेटवर्क बेहद तेज और संगठित तरीके से काम कर रहा है। साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर साइबर ठगी से निपटने के लिए गृह मंत्रालय ने एक विशेष साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (Cyber Fraud Mitigation Centre) बनाया है. यह सेंटर 24 घंटे काम करता है और यहां अलग-अलग एजेंसियों के प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं. इस सेंटर का उद्देश्य जैसे ही किसी साइबर फ्रॉड की जानकारी मिले, तुरंत कार्रवाई करना है. यहां पुलिस, बैंक और टेलीकॉम कंपनियों के प्रतिनिधि मिलकर काम करते हैं. जब किसी फ्रॉड का अलर्ट मिलता है, तो पूरा सिस्टम एक साथ सक्रिय हो जाता है. इस समन्वय के जरिए ठगी की रकम को ट्रांसफर होने से रोकने की कोशिश की जाती है। 24×7 कंट्रोल रूम साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर में एक हाईटेक कंट्रोल रूम बनाया गया है. यहां 24×7 निगरानी रखी जाती है. जैसे ही किसी खाते से संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जानकारी मिलती है, तुरंत सायरन बजता है और संबंधित एजेंसियां अलर्ट हो जाती हैं. इसके बाद बैंक और पुलिस मिलकर उस ट्रांजैक्शन को रोकने की कोशिश करते हैं. कई मामलों में खाते को तुरंत फ्रीज कर दिया जाता है. हालांकि ठगों की तेजी के कारण कई बार पैसा दूसरे खातों में ट्रांसफर हो जाता है, जिससे रिकवरी मुश्किल हो जाती है. पांच साल में 55 हजार करोड़ की ठगी गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में साइबर ठगों ने लोगों के खातों से 55 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की है. यह आंकड़ा 2021 से 2025 के बीच का है. इन पांच वर्षों में कुल 6 करोड़ 58 लाख से ज्यादा शिकायतें साइबर फ्रॉड को लेकर दर्ज की गईं. यह संख्या बताती है कि देश में डिजिटल सेवाओं के बढ़ने के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़े हैं. हालांकि सरकार और एजेंसियां लगातार इन्हें रोकने की कोशिश कर रही हैं. 2025 में सबसे ज्यादा शिकायतें रिपोर्ट के मुताबिक अकेले 2025 में ही साइबर फ्रॉड के 24 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए. यह पिछले सभी वर्षों के मुकाबले सबसे ज्यादा है. हालांकि इस साल ठगी की रकम थोड़ी कम रही, लेकिन मामलों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई. इससे यह साफ होता है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं. डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के कारण ठगों के लिए नए अवसर भी बन रहे हैं. 2021 से 2025 तक शिकायतों का ग्राफ अगर पिछले पांच साल के आंकड़ों को देखें तो साइबर फ्रॉड की शिकायतों में लगातार वृद्धि हुई है- 2021 में 2,62,846 शिकायतें दर्ज हुई थीं. 2022 में यह संख्या बढ़कर 6,94,446 हो गई. 2023 में 13,10,357 शिकायतें दर्ज हुईं. 2024 में यह संख्या 19,18,835 पहुंच गई. 2025 में शिकायतों का आंकड़ा बढ़कर 24,02,579 हो गया. यह आंकड़े बताते हैं कि साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है और लोगों को लगातार सतर्क रहने की जरूरत है. ठगी की रकम में भी बड़ा उछाल साइबर ठगी की रकम भी हर साल तेजी से बढ़ी है- 2021 में लगभग 551 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी. 2022 में यह रकम बढ़कर 2290 करोड़ रुपये हो गई.  2023 में 7465 करोड़ रुपये की ठगी दर्ज की गई. 2024 में यह आंकड़ा 22,848 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.  हालांकि 2025 में यह थोड़ा घटकर 22,495 करोड़ रुपये रहा.  इसके बावजूद यह बेहद बड़ी रकम है, जो साइबर अपराधियों की ताकत को दिखाती है. 2025 में बचाए गए हजारों करोड़ हालांकि एजेंसियों की कोशिशों से कुछ सफलता भी मिली है. I4C सिस्टम के जरिए 2025 में करीब 8189 करोड़ रुपये की ठगी होने से बचाई गई. यह रकम तब बचाई गई जब लोगों ने तुरंत शिकायत दर्ज कराई और बैंक तथा पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की. इससे यह साबित होता है कि समय पर शिकायत करने से कई बार पैसा वापस मिल सकता है. डिजिटल इंडिया के साथ बढ़ा खतरा भारत में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है. आज देश के अधिकांश घरों में इंटरनेट पहुंच चुका है. लोग ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई और डिजिटल भुगतान का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे लोगों को सुविधा जरूर मिली है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराध का खतरा भी बढ़ गया है. साइबर ठग इसी डिजिटल सिस्टम का फायदा उठाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं. म्यूल अकाउंट बना बड़ा हथियार साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक बड़ा तरीका म्यूल अकाउंट है. इसमें ठग दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं. इन खातों में ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती है और फिर उसे कई अन्य खातों में बांट दिया जाता है. इससे पैसे का ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है. एजेंसियां अब इन म्यूल खातों की पहचान करने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं. AI के जरिए ठगी … Read more

ईरान के साथ संघर्ष: अमेरिका पूरी ताकत लगा रहा, हर हमला रोक पाना संभव नहीं—बड़ा बयान

वाशिंगटन ईरान के साथ जारी युद्ध के पांचवें दिन अमेरिका ने साफ किया है कि उसने मध्य पूर्व में तैनात अपने सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी है। अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने पेंटागन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए हर संसाधन और हर क्षमता का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि हर ड्रोन या मिसाइल हमले को पूरी तरह रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमला शुरू करने से पहले अधिकतम सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, लेकिन 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती। इसी बीच पेंटागन ने जानकारी दी कि अब तक इस संघर्ष में छह अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान में मरने वालों की संख्या 1,000 के पार पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने पहले ही संकेत दिया था कि यह जंग लंबी चल सकती है और आगे भी अमेरिकी सैनिक हताहत हो सकते हैं। अमेरिका बोला- ईरान उसे थका नहीं सकता है हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका इस सैन्य अभियान में निर्णायक बढ़त बनाए हुए है और ईरान के हवाई क्षेत्र पर तेजी से नियंत्रण स्थापित कर रहा है। उनका कहना था कि अमेरिका जितना समय जरूरी होगा, उतना समय लेगा और ईरान उसे थका नहीं सकता। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका “निर्णायक, तबाही मचाने वाले और बिना किसी रियायत के” आगे बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने बताया कि और लड़ाकू विमान और बमवर्षक जल्द ही इस क्षेत्र में पहुंचेंगे। जंग के पांचवें दिन एक अहम सैन्य कार्रवाई भी हुई। मंगलवार रात एक अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो दागकर ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को डुबो दिया। हेगसेथ ने कहा कि यह जहाज अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में खुद को सुरक्षित समझ रहा था, लेकिन उसे निशाना बना लिया गया। यह जहाज ईरान के नए युद्धपोतों में से एक था। श्रीलंका ने बताया कि उसके दक्षिणी तट के पास जहाज से संकट संदेश मिलने के बाद उसकी नौसेना और वायुसेना ने 180 में से 32 लोगों को बचा लिया। हेगसेथ के मुताबिक, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब किसी दुश्मन के जहाज को इस तरह अमेरिकी पनडुब्बी ने डुबोया है। उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा कि जंग की शुरुआत के मुकाबले अब ईरान कम मिसाइलें दाग रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका के लगातार हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो गई है। जंग कितने समय तक चलेगी, इस पर हेगसेथ ने कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी। उन्होंने कहा कि यह चार हफ्ते भी चल सकती है, छह या आठ हफ्ते भी, और हालात के मुताबिक इससे कम या ज्यादा समय भी लग सकता है। उनके मुताबिक, युद्ध की रफ्तार और दिशा अमेरिका तय कर रहा है और दुश्मन असंतुलित स्थिति में है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में अमेरिका ने उन्नत हथियारों का इस्तेमाल किया और अब ईरानी आसमान पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद ग्रैविटी बम का इस्तेमाल करने की योजना है। साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास पर्याप्त गोला-बारूद और संसाधन मौजूद हैं। एक इजरायली सैन्य अधिकारी के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के शीर्ष अधिकारियों ने करीब तीन हफ्ते पहले हमलों की योजना बनानी शुरू कर दी थी। इस संघर्ष में अब तक ईरान में 1,000 से ज्यादा और लेबनान में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है और हजारों यात्री अलग-अलग देशों में फंसे हुए हैं। सितंबर तक चल सकता है युद्ध 'पॉलिटिको' की रिपोर्ट में आंतरिक दस्तावेजों के हवाले से लिखा है कि यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अमेरिकी रक्षा विभाग से फ्लोरिडा स्थित अपने मुख्यालय में और अधिक सैन्य खुफिया कर्मचारियों को भेजने का आग्रह किया है। इसका उद्देश्य आने वाले महीनों में ईरान के खिलाफ अभियानों को सुचारू रूप से चलाना है। इस अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग से पता चलता है कि अमेरिका एक लंबे अभियान की योजना बना रहा है, जो सितंबर तक खिंच सकता है। यह स्थिति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन पिछली टिप्पणियों के बिल्कुल उलट है, जिनमें उन्होंने युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद कहा था कि यह अभियान लगभग चार सप्ताह या उससे भी कम समय में पूरा हो सकता है। एक अमेरिकी अधिकारी ने पॉलिटिको को बताया कि रक्षा अधिकारी इस क्षेत्र में अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियां तैनात करने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें विशेष रूप से छोटी और कम खर्चीली 'एंटी-ड्रोन तकनीक' शामिल हैं, जिन्हें पेंटागन ने हाल के वर्षों में विकसित किया है। 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' अमेरिका और इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया यह युद्ध 28 फरवरी को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के नाम से शुरू हुआ था। इस अभियान के पहले ही दिन ईरान की राजधानी तेहरान में एक बड़े हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई उनके आवास पर मारे गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने इस युद्ध के व्यापक परिणामों का पूरी तरह से अनुमान नहीं लगाया था। नतीजतन, अमेरिकी विदेश विभाग ने पूरे मध्य पूर्व से अपने राजनयिक कर्मचारियों को सुरक्षित निकालने के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाने शुरू कर दिए हैं। निकासी प्रक्रिया का सीधा नियंत्रण अब विदेश विभाग के वरिष्ठ नेतृत्व के हाथों में है। इस अभियान के दौरान अब तक छह अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में और भी अमेरिकी सैनिक हताहत हो सकते हैं। पड़ोसी देशों पर खतरा इस संघर्ष का असर अब फारस की खाड़ी के अन्य देशों पर भी पड़ने लगा है। ईरानी ड्रोन और मिसाइलें संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, कुवैत और अन्य पड़ोसी देशों के हवाई क्षेत्र की ओर उड़ती देखी गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया भर में तेल निर्यात के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, वहां से जहाजों की आवाजाही काफी हद तक रुक गई है। ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे के कारण व्यापारिक … Read more

UPI का खास फीचर हुआ बंद! अब मोबाइल नंबर या UPI ID से पेमेंट नहीं होगी – क्या है नया नियम?

नई दिल्ली अब आप UPI ID या मोबाइल नंबर डालकर UPI पेमेंट्स नहीं कर पाएंगे। डिजिटल पेमेंट्स को ज्यादा सुरक्षित और तेज बनाने के लिए NPCI ने एक बड़ा बदलाव किया है। अभी तक ऑनलाइन भुगतान करते समय UPI ID या मोबाइल नंबर मैन्युअल तरीके से टाइप करना पड़ता था, जिसे कि ‘UPI Collect’ कहा जाता था। अब इस तरीके को ज्यादातर जगहों के लिए बंद किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार अब आपको इस ऑप्शन की जगह सीधे पेमेंट ऐप्स के आइकन पर क्लिक करने का ऑप्शन या फिर QR Code स्कैन करने की सुविधा मिलेगी। इससे न सिर्फ पेमेंट करना ज्यादा आसान हो जाएगा बल्कि ऑनलाइन पेमेंट्स ज्यादा सुरक्षित भी हो जाएंगी। यह बदलाव 28 फरवरी 2026 से लागू होना था। क्या होता है UPI Collect? यह ऑनलाइन भुगतान करने का एक तरीका था, जिसमें खरीददार अपनी UPI ID या मोबाइल नंबर (अगर वही UPI ID के तौर पर इस्तेमाल हो रहा हो) खुद टाइप करता था। इसके बाद वह ऐप या वेबसाइट पेमेंट ऐप को पैसे काटने की रिक्वेस्ट भेजती थी। इसके बाद यूजर पेमेंट ऐप में अपना पिन डालकर भुगतान करता था। इसी वजह से इस तरीके को UPI कलेक्ट कहा जाता था क्योंकि इसमें पेमेंट लेने वाली ऐप या वेबसाइट, पेमेंट पाने के लिए पेमेंट ऐप को मैसेज भेजती थी। अब कैसे कर पाएंगे पेमेंट अब इस तरीके को बहुत आसान बनाया जा रहा है। 28 फरवरी 2026 के बाद से ज्यादातर जगहों पर आपको पेमेंट करने के लिए UPI ऐप का आइकन या QR कोड मिलेगा। अगर आप पेमेंट करने के लिए ऐप के आइकन पर क्लिक करेंगे, तो सीधा फोन पर ऐप खुल जाएगी और वहीं अगर आप QR Code को चुनेंगे तो आपके सामन एक QR Code आजाएगा और आप उसे स्कैन कर पेमेंट कर पाएंगे। इन जगहों पर चलेगा पुराना तरीका गौर करने वाली बात है कि 28 फरवरी 2026 के बाद से UPI कलेक्ट को पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा। कुछ खास परिस्थितियों और कामों के लिए इसका इस्तेमाल जारी रहेगा। जैसे कि:     शेयर बाजार और IPO के लिए: अगर आप स्टॉक मार्केट में निवेश करते हैं या किसी कंपनी के IPO के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो वहां आपको UPI ID या मोबाइल नंबर टाइप करके ही पेेमेंट करनी होगी।     Apple और iPhone यूजर्स: अगर आप आईफोन या किसी iOS डिवाइस पर मोबाइल ऐप या ब्राउजर के जरिए खरीदारी करेंगे, तो वहां भी यही पुराना सिस्टम आपको काम करता दिखेगा।     पुराने पेमेंट को मैनेज करने के लिए: अगर आपने पहले से कोई ऑटो-पेमेंट सेट किया है, तो उसे बदलने या रोकने के लिए पुराने हाथ से UPI ID या मोबाइल नंबर टाइप करना होगा।     विदेशी पेमेंट्स के लिए: यदि आप किसी अंतरराष्ट्रीय वेबसाइट या अपने देश से बाहर किसी बिजनेस को पेमेंट करेंगे, तो भी UPI कलेक्ट वाला पुराना तरीका ही काम करेगा।