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लगातार दूसरे महीने बढ़ी थोक महंगाई, फ्यूल-पावर से लेकर फूड इंडेक्स तक दिखा कीमतों का दबाव

नई दिल्ली भारत में थोक महंगाई (WPI) अगस्त में बढ़कर 9.92 फीसदी पर पहुंच गई है. जुलाई में यह आंकड़ा 9.78 फीसदी था. यानी एक महीने में थोक महंगाई में 0.14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. सरकार की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, खाने-पीने की चीजों, तैयार सामान और ईंधन-बिजली से जुड़ी कीमतों में तेजी ने महंगाई को ऊपर धकेला है. खास बात यह है कि ईंधन और बिजली की महंगाई बाकी प्रमुख श्रेणियों के मुकाबले काफी ज्यादा रही।  खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी अगस्त के दौरान दबाव बढ़ा. फूड इंडेक्स में थोक महंगाई अगस्त में 7.05 फीसदी रही, जबकि जुलाई में यह 6.65 फीसदी थी. यानी एक महीने में खाद्य महंगाई में 0.40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. महंगाई बढ़ने में मिनरल ऑयल, खाद्य वस्तुएं और खाद्य उत्पादों का निर्माण जैसी श्रेणियों की अहम भूमिका रही. पश्चिम एशिया में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रमों के बीच वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और उर्वरक की लागत बढ़ने का असर भी कीमतों पर पड़ा है।  मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स में तेजी अगस्त में मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स की थोक महंगाई 8.37 फीसदी रही. जुलाई में यह 8.29 फीसदी थी. यानी इस श्रेणी में भी महंगाई बढ़ी है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, बेसिक मेटल्स का निर्माण, नॉन-फूड आर्टिकल्स और केमिकल व केमिकल प्रोडक्ट्स का निर्माण अगस्त में थोक कीमतों पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल रहे।  फ्यूल-पावर में ज्यादा महंगाई थोक महंगाई के आंकड़े में सबसे ज्यादा दबाव फ्यूल और पावर से आया. इस श्रेणी में अगस्त की महंगाई दर 22.93 फीसदी रही. यह दर फूड और मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स की तुलना में काफी ज्यादा है. मिनरल ऑयल की कीमतों में बदलाव का भी इस श्रेणी पर असर पड़ा है. ईंधन की लागत बढ़ने का असर आगे ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत पर भी पड़ सकता है, जिसका प्रभाव दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है।  महंगाई बढ़ने की बड़ी वजहें ये रहीं वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, अगस्त में थोक कीमतों पर दबाव बढ़ाने वाली प्रमुख चीजों में मिनरल ऑयल, फूड आर्टिकल्स, फूड प्रोडक्ट्स का निर्माण, बेसिक मेटल्स का निर्माण, नॉन-फूड आर्टिकल्स और केमिकल व केमिकल प्रोडक्ट्स का निर्माण शामिल रहे. यानी महंगाई का दबाव सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा. खाने-पीने की चीजों से लेकर ईंधन और औद्योगिक सामान तक कई हिस्सों में कीमतें बढ़ीं।  RBI के लिए भी अहम है आंकड़ा थोक महंगाई का यह आंकड़ा ऐसे समय आया है जब रिजर्व बैंक महंगाई और ब्याज दरों के रुख पर नजर रख रहा है. पिछले महीने मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बेंचमार्क पॉलिसी रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा था. RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5 फीसदी रखा है. केंद्रीय बैंक ने कमजोर और असमान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून और अल नीनो की स्थिति को महंगाई के लिए जोखिमों में शामिल किया था।  आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा? थोक महंगाई सीधे तौर पर आपकी खरीदारी की कीमत तय नहीं करती, लेकिन इसमें लगातार बढ़ोतरी का असर आगे चलकर कारोबार की लागत और कुछ वस्तुओं की खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है. फिलहाल अगस्त के आंकड़ों में फूड, फ्यूल और पावर तथा मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स तीनों में दबाव दिखाई दे रहा है. इसलिए आने वाले महीनों में इन तीनों क्षेत्रों की कीमतों का रुख अहम रहेगा. अगर ईंधन और कच्चे माल की लागत ऊंची बनी रहती है, तो महंगाई पर दबाव भी आगे बना रह सकता है। 

लैंडिंग से पहले विमान में आई तकनीकी खराबी, मिसराता एयरपोर्ट पर हादसे से मची हलचल

 मिसराता लीबिया के मिसराता एयरपोर्ट पर सोमवार को एक विमान हादसे का शिकार हो गया. विमान में एक VVIP के सवार होने की बात सामने आई है. हादसे के बाद इलाके का एयर स्पेस बंद कर दिया गया है. हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि विमान में सवार वह प्रमुख व्यक्ति कौन था और हादसा किस वजह से हुआ. VVIP पैसेंजर था सवार अल अरबिया न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को एक विमान लीबिया के मिसराता एयरपोर्ट पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. विमान में एक प्रमुख शख्सियत सवार था. हादसे की खबर सामने आते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया गया. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि विमान में सवार वह प्रमुख व्यक्ति कौन था. रिपोर्ट में अभी उसकी पहचान का खुलासा नहीं किया गया है. लीबिया की मीडिया के मुताबिक सेसना 650 प्लेन में तीन क्रू मेंबर सवार थे. इसमें पायलट जर्मन था और को पायलट और एक फ्लाइट अटेंडेंट तुर्की के थे. शुरुआती जांच के मुताबिक जब प्लेन हवाई अड्डे पर लैंड करने वाला था, तभी उसमें तकनीकी खराबी आ गई. इसी कारण पायलट को रनवे से बाहर जाने के लिए इमरजैंसी लैंडिंग करनी पड़ी. शुरुआती जानकारी से पुष्टि हुई कि इस घटना में किसी के मौत की खबर नहीं है. विमान के मलबे के कारण रनवे पर उड़ानों को बंद कर दिया गया. प्लेन क्रैश में जा चुकी है लीबिया के आर्मी चीफ की जान लीबिया को पिछले साल भी प्लेन क्रैश के कारण झटका लग चुका है. दिसंबर 2025 में प्लेन करैश में लीबिया के आर्मी चीफ समेत कुल 8 लोगों की मौत हुई थी. हालांकि ये हादसा लीबिया की जमीन पर नहीं हुआ था, बल्कि तुर्की में हुआ था. 23 दिसंबर को तुर्की के एसेनबोगा एयरपोर्ट से त्रिपोली जा रहा प्राइवेट विमान फैल्कन-50 जेट उड़ान के कुछ ही समय बाद क्रैश हुआ था. विमान में तकनीकी खराबी बताई गई थी. लीबिया के मिसराता एयरपोर्ट पर एक सेसना 650 (Cessna 650) विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है, जिसमें एक वीवीआईपी (VVIP) यानी महत्वपूर्ण हस्ती सवार थीं। हालांकि, विमान में सवार इस प्रमुख व्यक्ति की पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। इस विमान में चालक दल के तीन सदस्य भी शामिल थे, जिनमें पायलट जर्मन और को-पायलट व फ्लाइट अटेंडेंट तुर्की के नागरिक थे।  

N1 हाईवे पर दर्दनाक हादसा, दो मिनीबसों की भिड़ंत के बाद 21 की गई जान

केप टाउन दक्षिण अफ्रीका के वेस्टर्न केप प्रांत में एक भीषण सड़क हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। N1 हाईवे पर दो मिनीबस टैक्सियों की आमने-सामने टक्कर के बाद एक तीसरा वाहन भी दुर्घटनाग्रस्त वाहनों के मलबे से जा टकराया। हादसे में कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। दुर्घटना रविवार रात करीब 11:30 बजे वेस्टर्न केप प्रांत में Prince Albert और Leeu-Gamka के बीच N1 हाईवे पर हुई। यह स्थान केप टाउन से करीब 380 किलोमीटर दूर है। दक्षिण अफ्रीका की सड़क यातायात प्रबंधन निगम और स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक हादसे में दो मिनीबस टैक्सियां आमने-सामने टकरा गईं। इसके बाद एक तीसरा वाहन, जिसे अधिकारियों ने एसयूवी बताया, दुर्घटनाग्रस्त वाहनों से जा भिड़ा। टक्कर इतनी भीषण थी कि मौके पर बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए। बचाव दल ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस के अनुसार, तीन लोगों को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। हादसे में कई अन्य लोगों को गंभीर चोटें आई हैं।  हादसे के बाद N1 हाईवे के दुर्घटनास्थल वाले हिस्से को बंद कर दिया गया।   बचाव, मलबा हटाने और दुर्घटना की जांच का काम जारी रहा। स्थानीय अधिकारियों ने वाहन चालकों को प्रभावित मार्ग से बचने और यातायात अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी। अधिकारियों ने अभी दुर्घटना की अंतिम वजह स्पष्ट नहीं की है। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि दोनों मिनीबस की आमने-सामने टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और तीसरा वाहन दुर्घटनास्थल तक कैसे पहुंचा।

तरुण तेजपाल ने 2013 रेप केस में किया सरेंडर, बोले- बॉम्बे HC के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ेंगे

पणजी रेप केस में दोषी ठहराए गए तरुण तेजपाल ने सोमवार को गोवा पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया. इसके बाद उन्हें कोलवाले जेल भेज दिया गया. सरेंडर के बाद तेजपाल ने कहा कि वह बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।  दरअसल, बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने नवंबर 2013 के मामले में 62 वर्षीय तरुण तेजपाल को जूनियर सहकर्मी के साथ रेप का दोषी माना था. इसके बाद अदालत ने उन्हें 10 साल कैद की सजा सुनाई. इससे पहले साल 2021 में गोवा की निचली अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उस पुराने फैसले को पलट दिया।  इस फैसले के खिलाफ तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. हालांकि, शीर्ष अदालत ने 25 अगस्त को साफ कर दिया कि उनकी अपील पर सुनवाई तभी होगी, जब वह पहले सरेंडर करके जेल का सर्टिफिकेट दाखिल करेंगे. इसी आदेश के तहत उन्होंने यह कदम उठाया है. हाईकोर्ट ने शुरुआत में तेजपाल को सरेंडर करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया था. इस दौरान उन्हें सुप्रीम कोर्ट में कानूनी राहत मांगने का मौका मिला. तेजपाल ने इसके बाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।   पिछले महीने, सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के दोषी ठहराने वाले फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की सुनवाई से पहले सरेंडर करने से छूट मांगी थी। कोर्ट ने उन्हें तीन हफ़्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया था। जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने तेजपाल को कोर्ट में सरेंडर सर्टिफिकेट जमा करने का भी निर्देश दिया। सिंगल-जज बेंच उनकी क्रिमिनल अपील को 22 सितंबर को लिस्ट करने पर भी सहमत हो गई, बशर्ते वे तब तक सरेंडर सर्टिफिकेट जमा कर दें। तेजपाल ने इस आधार पर सरेंडर करने से छूट मांगी थी कि पहले सुप्रीम कोर्ट में उनकी अपील लिस्ट होनी चाहिए और उस पर सुनवाई होनी चाहिए। तेजपाल की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि कोर्ट के पास उचित मामले में सरेंडर की ज़रूरत को हटाने और आरोपी के सरेंडर न करने पर भी क्रिमिनल अपील को लिस्ट करने की शक्ति है। गोवा राज्य की ओर से पेश भारत के सॉलिसिटर जनरल (SGI) तुषार मेहता ने याचिका का विरोध किया और कहा कि छूट की अर्जी पर मामले की मेरिट के आधार पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के निष्कर्षों का हवाला दिया और कहा कि इस मामले में रेप का गंभीर अपराध शामिल है, जिसके लिए… तेजपाल को 10 साल की कड़ी सज़ा सुनाई गई थी। जस्टिस अराधे ने कहा कि कोर्ट छूट की अर्ज़ी पर इसलिए विचार कर रहा है क्योंकि उसके पास ऐसा करने का अधिकार है। सिब्बल ने कहा कि तेजपाल के मामले में हाई कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के फ़ैसले को पलटने को चुनौती दी गई है और अपील के गुण-दोष पर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने साफ़ किया कि उसने हाई कोर्ट के फ़ैसले को देख लिया है और दोनों पक्षों – तेजपाल और गोवा सरकार – से कहा कि वे अपनी बात सिर्फ़ छूट के सवाल तक ही सीमित रखें। कोर्ट ने पूछा कि तेजपाल को सरेंडर करने में कितना समय लगेगा। तीन हफ़्ते का समय लगने की बात कहे जाने पर, कोर्ट ने छूट की अर्ज़ी खारिज कर दी और तेजपाल को तीन हफ़्ते के अंदर सरेंडर करने और सरेंडर का सबूत पेश करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि अगर सरेंडर सर्टिफ़िकेट पेश किया जाता है, तो बॉम्बे हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ तेजपाल की अपील को 22 सितंबर को लिस्ट किया जाए। 

दिशा सालियान केस में CBI की FIR से मचा हड़कंप, आदित्य, उद्धव ठाकरे समेत कई चर्चित नाम शामिल

मुंबई  दिवंगत बॉलीवुड एक्‍टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत मामले में CBI ने FIR दर्ज कर ली है। बड़ी खबर ये है कि इस संदिग्ध मौत के मामले में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने सीधे तौर पर शिवसेना (ठाकरे गुट) के नेता आदित्य ठाकरे का नाम भी शामिल किया है। यही नहीं, दिशा के पिता सतीश सालियन की शिकायत के आधार पर CBI ने FIR में बॉलीवुड एक्‍टर डिनो मोरिया, रिया चक्रवर्ती, सूरज पंचोली के साथ-साथ मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह, जेल में बंद पुलिस अधिकारी सचिन वाझे और कुछ अन्य पुलिसकर्मियों के नाम लिए हैं। केंद्रीय जांच ब्‍यूरो ने दिशा के पिता सतीश सालियान के बयान के आधार पर यह FIR दर्ज की है। पिता का आरोप है कि सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल करके उनकी बेटी की मौत से जुड़े सबूत मिटा दिए गए थे। CBI ने यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद की है। दिशा की मौत जून 2020 में मुंबई में हुई थी और उनकी मौत के कुछ ही दिनों बाद सुशांत सिंह राजपूत की भी मौत हो गई थी। द‍िशा साल‍ियान के प‍िता के बयान में क‍िन-क‍िन का नाम CBI के समक्ष सतीश सालियान के बयान के मुताबिक, मामले में कई लोगों की भूमिका की गहराई से जांच किए जाने की जरूरत है। उन्होंने आपराधिक साजिश, दिशा की मौत को आत्महत्या बताने वाली गलत कहानी तैयार करने और उसे फैलाने के साथ-साथ सबूतों को दबाने, नष्ट करने या उनमें कथित छेड़छाड़ किए जाने जैसे आरोपों की जांच की मांग की है। सतीश सालियान ने बयान में जिन लोगों के नाम का जिक्र किया गया है, उनमें आदित्य ठाकरे, रोहन रॉय, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड्स, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, सचिन वाजे, परमबीर सिंह, डीसीपी विशाल ठाकुर, उद्धव ठाकरे और अनिल देशमुख समेत कई पुलिस अधिकारियों के नाम शामिल हैं। द‍िशा साल‍ियान के प‍िता के वकील बोले- हमने गैंग-रेप और हत्या के आरोप लगाए हैं CBI की ओर से FIR दर्ज होने से दो दिन पहले 11 सितंबर को दिशा के पिता सतीश सालियान ने अपना बयान दर्ज कराया था। तब उनके वकील निलेश ओझा भी CBI दफ्तर पहुंचे थे। यहां वकील निलेश ओझा ने कहा, 'हम आदित्य ठाकरे और अन्य लोगों के ख‍िलाफ गैंग-रेप और हत्या के मामले में FIR दर्ज कराने आए हैं। दूसरी बात, हमारे पास मौजूद सबूतों के अलावा, हमारे पास सचिन वाजे का न्यायालय के बाहर किया गया कबूलनामा भी है… नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के पास सबूत होने के बावजूद, NCB अधिकारी संजय सिंह 6 साल तक आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया और अन्य आरोपियों के ख‍िलाफ चार्जशीट दाखिल करने में नाकाम रहे। क्‍योंकि जांच के दौरान इसमें भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, इसलिए हम एक अलग जांच की मांग कर रहे हैं।'   सीबीआई ने इन्हें बनाया आरोपी     आदित्य ठाकरे     रोहन रॉय     डिनो मोरिया     सूरज पंचोली     आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड     रिया चक्रवर्ती     शोविक चक्रवर्ती     सचिन वाजे     परमबीर सिंह     DCP विशाल ठाकुर     उद्धव ठाकरे     अनिल देशमुख     API अशोक देवाड़े     PI जगदेव कलापड़     PI शैलेंद्र नगरकर     PI चिमाजी आधव     PI अर्जुन राजाने     मालवणी पुलिस स्टेशन के संबंधित अधिकारी     देरी से पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टर और स्टाफ, डॉ. संजय जाधव     कालिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के संबंधित अधिकारी, N.P. भाले, Assistant Chemical Analyser     तत्कालीन संबंधित PI और अन्य पुलिस अधिकारी द‍िशा के प‍िता की श‍िकायत में पुलिस अध‍िकारी, डॉक्‍टर और स्‍टाफ का भी ज‍िक्र दिशा के पिता ने इस मामले में मालवणी पुलिस स्टेशन से जुड़े अधिकारियों, दिशा के पोस्टमार्टम में कथित देरी से जुड़े डॉक्टरों और स्टाफ, कलिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के कर्मचारियों, रीजेंट गैलेक्सी बिल्डिंग के सिक्योरिटी गार्ड्स और कई अन्य लोगों का भी बयान में जिक्र किया गया है। हाईकोर्ट ने CBI को नए स‍िरे से जांच के आदेश द‍िए CBI ने इससे पहले दिशा सालियान की मौत से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए मालवणी पुलिस को पत्र लिखा था। एजेंसी ने ये रिकॉर्ड अपनी जांच को आगे बढ़ाने के लिए मांगे थे। अब बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले में नए सिरे से जांच के लिए सीबीआई को निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा था कि जांच की निगरानी के लिए सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त किया जाए।     हथिनी माधुरी की कोल्हापुर वापसी शुरू: वनतारा जारी रखेगा मेडिकल केयर     हथिनी माधुरी की कोल्हापुर वापसी का रास्ता साफ हो गया है। हाई-पावर्ड कमिटी (HPC) ने इसकी मंजूरी दे दी है। जुलाई 2025 में जामनगर लाए जाने के बाद अनंत अंबानी के ‘वनतारा’ ने उसकी देखभाल की। इलाज से माधुरी की हालत स्थिर है, लेकिन उसे लगातार मेडिकल सपोर्ट की जरूरत है। वनतारा, नंदानी में इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर करने में मदद कर रहा है और उसके डॉक्टर हर 15 दिन में वहां जाकर माधुरी की जांच और रिपोर्टिंग करेंगे। क्या लिखा है FIR में आदित्य ठाकरे के पिता और तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे तथा अन्य लोगों ने भी साजिश और उसके बाद मामले को दबाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. संबंधित सरकारी कर्मचारियों और पुलिस अधिकारियों की भी इस बात के लिए जांच की जानी चाहिए कि क्या उन्होंने मामले से जुड़े कागजात, फाइलों और अन्य सरकारी रिकॉर्ड को नष्ट या दबाया, सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर/फर्जीवाड़ा किया और आरोपियों को बचाने के लिए सरकारी धन, कर्मचारियों और पुलिस मशीनरी का गैरकानूनी उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया।  FIR में कई बड़े नाम शामिल मुख्य अपराध, आपराधिक साजिश, उसके बाद झूठी आत्महत्या की कहानी तैयार करने और उसे फैलाने, तथा सबूतों को दबाने, नष्ट करने और/या उनमें हेरफेर करने के संबंध में जिन लोगों की भूमिका की जांच की जरूरत है, उनमें आदित्य ठाकरे, रोहन रॉय, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, सचिन वाजे, परमबीर सिंह, DCP विशाल ठाकुर, उद्धव ठाकरे, अनिल देशमुख, API अशोक देवाड़े, PI जगदेव कलापड़, … Read more

क्या FATF को दिखावा कर रहा पाकिस्तान? मसूद अजहर पर 70 लाख का इनाम घोषित, बैठक से पहले नया दांव

इस्लामाबाद पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित वैश्विक आतंकवादी मसूद अजहर के खिलाफ एक बार फिर कार्रवाई का दिखावा किया है. पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) की मोस्ट वांटेड लिस्ट में मसूद अजहर के नाम के साथ अब 70 लाख रुपये के इनाम का ऐलान किया गया है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अक्टूबर में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की अहम बैठक होने वाली है।  रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने इससे पहले भी मसूद अजहर को लेकर कार्रवाई का दावा किया था. साल 2021 में FIA की रेड बुक में उसके सिर पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था. वहीं, अब करीब पांच साल बाद इस राशि में 20 लाख रुपये की बढ़ोतरी की गई है।  कहां है मसूद अजहर? पाकिस्तान का दावा है कि मसूद अजहर पाकिस्तान से गायब है और अफगानिस्तान में है. हालांकि, भारतीय खुफिया एजेंसियों की तकनीकी निगरानी से जुड़े इनपुट में उसके पाकिस्तान में ही छिपे होने की बात सामने आई है।  रिपोर्ट में भारतीय खुफिया सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पिछले करीब छह महीनों के तकनीकी जांच में मसूद अजहर के पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह में छिपे होने की जानकारी सामने आई है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर वह पाकिस्तान में ही मौजूद है तो उसके खिलाफ केवल इनाम घोषित करने की कार्रवाई कितनी प्रभावी है।  पाकिस्तान की लिस्ट में और भी कई नाम शामिल FIA की नई मोस्ट वांटेड लिस्ट में केवल मसूद अजहर ही नहीं, बल्कि मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले से जुड़े कई संदिग्धों के नाम भी शामिल किए गए हैं. लिस्ट में 19 आतंकियों के नाम बताए गए हैं, जिनमें से कई पर हमले के लिए आर्थिक मदद करने, आतंकियों को समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचाने और लॉजिस्टिक सहायता देने के आरोप हैं. FIA ने कुछ नामों के साथ पहले मौजूद तस्वीर और आतंकी संगठन से जुड़े विवरण को भी हटा दिया है।  भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने लगाए ये आरोप भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का आरोप है कि पाकिस्तान की ऐसी कार्रवाई वास्तविक कदम से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय दबाव को कम करने की कोशिश हो सकती है. गौर करने वाली बात यह भी है कि पाकिस्तान की मोस्ट वांटेड लिस्ट में आतंकियों की संख्या पिछले कुछ सालों में बढ़ी है. 2021 में FIA की रेड बुक में करीब 1,330 मोस्ट वांटेड आतंकी थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 1,804 हो गई है।  FIA की नई लिस्ट में 26/11 से जुड़े 19 आतंकी पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने मोस्ट वांटेड आतंकियों की अपनी अपडेटेड लिस्ट जारी की है. इसमें मुंबई के 26/11 आतंकी हमले से जुड़े 19 आतंकियों के नाम शामिल हैं. इनमें कुछ पर हमलावरों को आर्थिक मदद देने, जबकि कुछ पर आतंकियों को समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचाने में सहयोग करने का आरोप है. लिस्ट में शामिल 17 आतंकियों की तस्वीर के साथ 26/11 हमले में उनकी भूमिका का भी उल्लेख किया गया है।  हालांकि, लिस्ट में दो आतंकियों के मामले में अहम जानकारियां हटा दी गई हैं. उनके नाम तो मौजूद हैं, लेकिन तस्वीर, लश्कर-ए-तैयबा से संबंध और मुंबई हमले में उनकी भूमिका से जुड़ी जानकारी अब लिस्ट में नहीं है. साल 2021 में जारी FIA की लिस्ट में इन दोनों आतंकियों के बारे में पूरी जानकारी दी गई थी।  2021 में भी किया था इनाम का ऐलान पाकिस्तान ने साल 2021 में भी मसूद अजहर पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। अब करीब पांच साल बाद इस रकम में 20 लाख रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 70 लाख रुपये कर दिया गया है। पाकिस्तान लंबे समय से दावा करता रहा है कि मसूद अजहर उसके देश में नहीं है और वह अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। हालांकि, भारतीय खुफिया एजेंसियों की तकनीकी निगरानी के मुताबिक मसूद अजहर पाकिस्तान में ही छिपा हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले करीब छह महीनों से उसके सिंध प्रांत के नवाबशाह में होने के इनपुट सामने आ रहे हैं। 26/11 के 19 आतंकियों के नाम भी सूची में FIA की नई अपडेटेड मोस्ट वांटेड सूची में मुंबई के 26/11 आतंकी हमले से जुड़े 19 आतंकियों के नाम भी शामिल हैं। इनमें से 17 आतंकियों की तस्वीर और 26/11 हमले में उनकी भूमिका का विवरण दिया गया है। हालांकि, दो आतंकियों के मामले में तस्वीर, लश्कर-ए-तैयबा से संबंध और हमले में उनकी भूमिका का विवरण हटा दिया गया है। सिर्फ उनके नाम सूची में रखे गए हैं। तुर्बत के मोहम्मद खान का नाम भी सूची में है। आरोप है कि उसने आतंकियों को मुंबई पहुंचाने के लिए ‘अल-हुसैनी’ नाव उपलब्ध कराई थी। 2021 की सूची में उसकी तस्वीर और भूमिका का भी उल्लेख था, लेकिन नई सूची से ये विवरण हटा दिए गए हैं। इसी तरह बहावलनगर के अब्दुल रहमान की तस्वीर और लश्कर-ए-तैयबा से उसके संबंध का विवरण भी नई सूची में नहीं है। दो संदिग्धों की तस्वीर और जानकारी हटाई तुर्बत निवासी मोहम्मद खान का नाम नई लिस्ट में शामिल किया गया है. आरोप है कि उसने आतंकियों को मुंबई तक पहुंचाने के लिए ‘अल-हुसैनी’ नाव उपलब्ध कराई थी. लेकिन इस बार FIA ने उसकी तस्वीर के साथ-साथ लश्कर-ए-तैयबा से उसके संबंध और हमले में उसकी भूमिका का विवरण हटा दिया है।  इसी तरह बहावलनगर निवासी लश्कर-ए-तैयबा आतंकी अब्दुल रहमान का नाम भी लिस्ट में है, लेकिन उसकी फोटो और आतंकी संगठन से जुड़े होने की जानकारी हटा दी गई है. 2021 की लिस्ट में दोनों के नाम के साथ उनकी तस्वीर और 26/11 हमले में उनकी भूमिका की जानकारी दी गई थी।  दो नावों से आतंकियों को समुद्र के रास्ते पहुंचाया FIA की मौजूदा लिस्ट में उन 11 आतंकियों के नाम भी हैं, जिन पर 26/11 के हमलावरों को समुद्र के रास्ते आगे बढ़ाने में मदद करने का आरोप है. बताया गया है कि आतंकियों को ‘अल-हुसैनी’ और ‘अल-फौज’ नाम की दो नावों के जरिए समुद्र पार कराया गया था।  इन 11 लोगों में मुल्तान के मोहम्मद अमजद खान, बहावलपुर के शाहिद गफूर, साहीवाल के मोहम्मद उस्मान, लाहौर के अतीक उर रहमान, हाफिजाबाद के रियाज अहमद, गुजरांवाला के मोहम्मद मुश्ताक, डेरा गाजी खान के … Read more

सहारा निवेशकों के लिए बड़ी खबर! Refund Portal बहाल, करीब 20 लाख पेंडिंग क्लेम की होगी जांच; जानें आवेदन का तरीका

नई दिल्‍ली  सहारा समूह मे अपनी कमाई फंसा चुके लाखों निवेशकों के लिए राहत की खबर है. केंद्र सरकार ने सहारा रिफंड पोर्टल को एक बार फिर एक्टिव कर दिया है. पोर्टल के दोबारा चालू होने से करीब 20 लाख लंबित दावों की जांच शुरू हो गई है. साथ ही अब अन्‍य लोग भी अपना पैसा वापस पाने के लिए ऑनलाइन क्‍लेम कर सकते हैं. यदि आपका भी पैसा सहारा में अटका हुआ है जान लें कि घर बैठे क्लेम कैसे करें और किन-किन दस्‍तावेजों की जरूरत होगी।  सहकारिता मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू किए गए इस पोर्टल के जरिए अब तक करीब 42 लाख जमाकर्ताओं को 9,267 करोड़ रुपये की राशि लौटाई जा चुकी है. यह पोर्टल मुख्य रूप से सहारा समूह की चार प्रमुख सोसायटियों, सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी, सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी, हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी और स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी के पात्र निवेशकों को रिफंड दिलाने के लिए बनाया गया है।  सहारा रिफंड पोर्टल पर कैसे दर्ज करें क्‍लेम? सहारा रिफंड पोर्टल पर आवेदन करने की प्रक्रिया बेहद आसान-     सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल (https://mocrefund.crcs.gov.in/depositor/#/home) पर जाएं और लॉगिन करें.     रजिस्ट्रेशन के लिए आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर दर्ज करें और ओटीपी के जरिए सत्यापन पूरा करें.     इसके बाद स्क्रीन पर दिख रहे ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में अपनी सदस्यता संख्या, जमा खाता संख्या और सोसायटी का नाम भरें.     यदि आपने चारों सोसायटियों में पैसा लगाया है, तो सभी दावों को अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही आवेदन फॉर्म में जोड़ें.     अंत में जमा राशि के प्रमाण संबंधी कागजात अपलोड कर फॉर्म सबमिट करें. सबमिट होते ही एक रसीद संख्या मिल जाएगी. आवेदन की 30 दिन में होगी स्‍क्रूटनी ऑनलाइन क्लेम दर्ज होने के बाद सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होगी. सहारा ग्रुप ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज 30 दिनों के भीतर निवेशक के दावों और दस्तावेजों की स्क्रूटनी करेगी. इसके बाद अगले 15 दिनों में सरकारी तंत्र द्वारा अंतिम मंजूरी दी जाएगी. इस तरह आवेदन की तारीख से कुल 45 दिनों के अंदर आपके दावे के बारे में आपको बता दिया जाएगा. दावा सही पाए जाने पर स्वीकृत रकम सीधे निवेशक के आधार से जुड़े बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।  ये कागज रखें तैयार रिफंड फॉर्म भरते समय किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचने के लिए जरूरी दस्तावेजों को पहले से स्कैन करके रख लें. क्‍लेम के लिए निवेशक का आधार कार्ड, आधार से लिंक एक्टिव मोबाइल नंबर और आधार से जुड़ा बैंक खाते की जानकारी देनी होगी. सहारा सोसाइटी में पैसा जमा करते समय मिली मूल रसीद, पासबुक या निवेश प्रमाणपत्र (बॉन्ड) आदि भी मांगे जा सकते हैं।  दस्तावेजों में दर्ज सदस्यता संख्या (Membership Number), अकाउंट नंबर और नाम का सही मिलना चाहिए. यदि मूल जमाकर्ता की मृत्यु हो चुकी है, तो कानूनी उत्तराधिकारी या नॉमिनी को संबंधित कानूनी दस्तावेज और मृत्यु प्रमाण पत्र अपलोड करना होगा. नाम या बैंक विवरण में कोई गलती होने पर रिफंड अटक सकता है, इसलिए पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने से पहले अपने सभी कागजात अच्छी तरह जांच लें।      सहारा रिफंड आवेदनों की दोबारा जांच, लाखों को मिले पैसे।     सीआरसीएस पोर्टल पर आधार-मोबाइल से जमाकर्ता पंजीकरण करें।     फॉर्म भरें, स्कैन कर अपलोड करें, 45 दिन में राशि। किन सोसाइटियों में जमा पैसे वापस मिलेंगे? सहारा की चार कोऑपरेटिव सोसाइटियों के पात्र जमाकर्ताओं को रिफंड दिया जा रहा है. इनमें शामिल है…     स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड     सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी लिमिटेड     हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड     सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड क्लेम के समय ठगों से सावधान रिफंड के नाम पर किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक से जुड़ी जानकारी न दें. अगर आपको क्लेम के लिए आवेदन करना है तो इसके लिए केवल आधिकारिक पोर्टल का ही इस्तेमाल करें, दूसरी फर्जी वेबसाइट से बचकर रहें, वरना आप ठगी के शिकार हो सकते हैं.  सबसे पहले करना होगा रजिस्ट्रेशन     ऑनलाइन क्लेम दर्ज करने के लिए सबसे पहले CRCS रिफंड पोर्टल पर जाएं.     इसके बाद Depositor Registration का विकल्प आएगा, उसपर क्लिक करें.     फिर आधार के आखिर 4 अंक दर्ज करें.     इसके साथ ही आधार से लिंक मोबाइल नंबर भी दर्ज करें.     फिर आपके मोबाइल पर एक OTP आएगा उससे वेरिफिकेशन पूरा करें.     इसके बाद आप पोर्टल पर क्लेम का प्रोसेस आगे पूरा कर सकते हैं. ऑनलाइन क्लेम कैसे दर्ज करें?     रजिस्ट्रेशन करने के बाद सबसे पहले Depositor CRCS Refund Portal पर लॉगिन करें.     इसके बाद अपनी सहारा सोसाइटी का नाम चुनें.     फिर अकाउंट नंबर, सदस्यता नंबर, रसीद नंबर और जमा राशि की जानकारी भरें.     इसके बाद आप जमा रसीद या फिर पासबुक की स्कैन कॉपी अपलोड करें.     जब आप सारी जानकारी दर्ज कर देंगे तो पोर्टल पर Cliam Request Form तैयार होगा.     इसको डाउनलोड करके प्रिंट करें.     अपनी पासपोर्ट साइज फोटो लगाएं और साइन करें.     50 हजार से ज्यादा क्लेम करने के लिए पैन नंबर दर्ज करें.     इसके बाद आप साइड किए गए Claim Request Form को स्कैन करें और पोर्टल पर अपलोड कर दें.     इसके बाद आवेदन सबमिट कर दें और Claim Request नंबर को अपने पास नोट करके सुरक्षित रखें.      अगर आपके आवेदन में किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं होती है तो पैसे 45 दिन में आ जाता है, जिसकी जानकारी आपको SMS के जरिए मिल जाती है. इन चीजों को रखें तैयार सहारा की सोसाइटियों में रिफंड क्लेम करने के लिए पहले कुछ चीजों को तैयार रखें इनमें शामिल है…     सदस्यता नंबर     अकाउंट नंबर     पासबुक या रसीद     जमा प्रमाणपत्र     आधार से लिंक मोबाइल नंबर (OTP के लिए)     आधार से लिंक और DBT एक्टिव बैंक अकाउंट     50 हजार या उससे ज्यादा के क्लेप के लिए PAN कार्ड    

PM मोदी की कूटनीतिक पारी तेज, BRICS में 15 नेताओं से मुलाकात कर साधे रणनीतिक समीकरण

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स समिट से इतर तीन दिनों में देश और सरकार के प्रमुखों के साथ 15 द्विपक्षीय बैठकें कीं, इसके अलावा दुनिया के नेताओं और इंटरनेशनल संस्थाओं के नेताओं के साथ कई अलग-अलग बातचीत भी की। मीडिआ रिपोर्ट के मुताबिक, बिजी डिप्लोमैटिक शेड्यूल में पीएम मोदी रूस, चीन, ईरान, अफ्रीका, साउथ-ईस्ट एशिया, गल्फ और दूसरे इलाकों के नेताओं के साथ सीधे जुड़े। चर्चाओं में बाइलेटरल रिश्ते, ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, कनेक्टिविटी, जरूरी मिनरल्स और बड़े रीजनल और ग्लोबल डेवलेपमेंट शामिल थे। यह मीटिंग तब हुई जब भारत 2026 में अपनी अध्यक्षता में ब्रिक्स समिट होस्ट कर रहा था, जिसमें अलग-अलग जियोपॉलिटीकल पोजीशन वाले देशों को एक साथ लाया गया। बाइलेटरल मीटिंग्स ने नई दिल्ली को समिट के बड़े एजेंडा के साथ-साथ अपनी स्ट्रेटेजिक और इकोनॉमिक प्रायोरिटीज को आगे बढ़ाने का मौका दिया। पहला दिन: पुतिन, पेजेशकियन और UN चीफ 11 सितंबर को, PM मोदी ने रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन और ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियन के साथ अलग-अलग मीटिंग कीं। मोदी-पुतिन मीटिंग में इंडिया-रूस स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप पर फोकस था, जिसमें दोनों नेताओं ने डिफेंस, एनर्जी, ट्रेड, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, जरूरी मिनरल्स और सिविल न्यूक्लियर एनर्जी में कोऑपरेशन का रिव्यू किया। उन्होंने रूस-यूक्रेन झगड़े, वेस्ट एशिया के हालात और समुद्री ट्रेड और इंडियन सीफेयरर्स की सेफ्टी पर उनके असर पर भी चर्चा की। पीएम मोदी ने ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियन से भी मुलाकात की, जिसमें इंडिया-ईरान रिलेशन, ब्रिक्स कोऑपरेशन और वेस्ट एशिया में डेवलपमेंट पर चर्चा हुई। PM मोदी ने बातचीत और डिप्लोमेसी के लिए इंडिया का सपोर्ट दोहराया और इस इलाके में लंबे समय तक चलने वाली शांति और स्टेबिलिटी की इंपॉर्टेंस पर जोर दिया। उसी दिन, PM मोदी ने UN सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की, जिससे उनके डिप्लोमैटिक एंगेजमेंट में एक मल्टीलेटरल डायमेंशन जुड़ गया। दूसरा दिन: शी के साथ मीटिंग 12 सितंबर को, PM मोदी ने इथियोपिया के प्राइम मिनिस्टर अबी अहमद अली, मलेशिया के प्राइम मिनिस्टर अनवर इब्राहिम, UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, वियतनामी लीडरशिप और चीनी प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के साथ बाइलेटरल मीटिंग की। शी के साथ मीटिंग समिट की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली मीटिंग्स में से एक थी। दोनों लीडर्स ने इंडिया-चाइना रिलेशनशिप, बाउंड्री क्वेश्चन, बॉर्डर पर शांति, इकोनॉमिक और ट्रेड रिलेशन, सप्लाई चेन और पीपल-टू-पीपल एक्सचेंज पर चर्चा की। PM मोदी ने जोर दिया कि मतभेद विवाद नहीं बनने चाहिए और बाइलेटरल रिलेशन को गाइड करने में आपसी सम्मान, सेंसिटिविटी और इंटरेस्ट के महत्व को अंडरलाइन किया। मलेशिया के प्राइम मिनिस्टर अनवर इब्राहिम के साथ मीटिंग में ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, डिफेंस, सेमीकंडक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इकोनॉमी, एनर्जी और फिनटेक जैसे एरिया शामिल थे। इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ PM मोदी की मीटिंग में बाइलेटरल कोऑपरेशन को मज़बूत करने और अफ्रीका के साथ भारत के जुड़ाव पर फोकस रहा। उन्होंने UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ भी बातचीत की, जिसमें भारत-UAE स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप और डिफेंस, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, जरूरी मिनरल्स और कनेक्टिविटी जैसे एरिया में सहयोग पर चर्चा हुई। तीसरा दिन: अफ्रीका, सेंट्रल एशिया और साउथ-ईस्ट एशिया 13 सितंबर को, PM मोदी ने साउथ अफ्रीका के प्रेसिडेंट सिरिल रामफोसा, कजाख प्रेसिडेंट कसीम-जोमार्ट टोकायेव, फिलीपींस के प्रेसिडेंट फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर, मिस्र के प्रेसिडेंट अब्देल फत्ताह अल-सिसी और बुरुंडी के प्रेसिडेंट एवरिस्टे नदायिशिमिये के साथ बाइलेटरल मीटिंग कीं। बाइलेटरल मीटिंग के शेड्यूल के मुताबिक, उन्होंने युगांडा और नाइजीरिया की लीडरशिप के साथ भी मीटिंग की। इन मीटिंग्स ने अफ्रीका, सेंट्रल एशिया और साउथ-ईस्ट एशिया में भारत की डिप्लोमैटिक पहुंच को बढ़ाया, जिसमें बाइलेटरल पार्टनरशिप को मज़बूत करने और आपसी फायदे वाले एरिया में सहयोग बढ़ाने पर फोकस रहा। साउथ अफ्रीका के प्रेसिडेंट सिरिल रामफोसा के साथ बातचीत ब्रिक्स ग्रुप के लिए खास तौर पर जरूरी थी, क्योंकि साउथ अफ्रीका इस बड़े ब्लॉक के फाउंडिंग मेंबर्स में से एक है और ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने में भारत का एक जरूरी पार्टनर है। मिस्र और बुरुंडी के साथ मीटिंग्स ने अफ्रीकी पार्टनर्स के साथ भारत के जुड़ाव को और मजबूत किया, जबकि कजाकिस्तान के साथ बातचीत ने सेंट्रल एशिया में भारत की पहुंच को बढ़ाया। मलेशिया के साथ उनकी पिछली मीटिंग के साथ-साथ फिलीपींस की बातचीत ने PM मोदी के डिप्लोमैटिक शेड्यूल में एक और जरूरी साउथईस्ट एशियाई पहलू जोड़ा। फॉर्मल समिट एजेंडा से आगे बाइलेटरल मीटिंग्स 15 फॉर्मल मीटिंग्स के साथ-साथ दूसरे विजिटिंग लीडर्स और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन्स के रिप्रेजेंटेटिव्स के साथ कई छोटी बातचीत भी हुईं। इस कूटनीतिक गतिविधि से पता चलता है कि भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान द्विपक्षीय बातचीत को कितना महत्व दिया। जहां इस समिट ने बढ़े हुए ग्रुप के बीच सामूहिक चर्चा के लिए एक मंच दिया, वहीं अलग से हुई मुलाकातों ने पीएम मोदी को अलग-अलग नेताओं के साथ संबंधित देशों की खास प्राथमिकताओं पर सीधे बातचीत करने का मौका भी दिया। ये बैठकें ऐसे समय में हुईं जब भू-राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल था। पश्चिम एशिया और यूक्रेन में चल रहे संघर्षों का असर ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ रहा था। इसलिए, 15 द्विपक्षीय बैठकों और उनके अलावा हुई अनौपचारिक मुलाकातों ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान पीएम मोदी की कूटनीतिक कोशिशों में एक अहम भूमिका निभाई।

मदरसों पर सर्वे के बाद बड़ा एक्शन, 252 बंद और 100 को नोटिस से मचा हड़कंप

कोलकाता पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार का राज्य के मदरसों पर कहर टूटा है। 252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया गया है और करीब 100 दूसरे मदरसों को कारण बताओ नोटिस भेजा है। यह आदेश राज्य भर में हुए सर्वे के बाद दिया गया है, जिसमें पाया गया कि ऐसे कई संस्थानों के पास जरूरी मंजूरी और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के मंत्री क्षुदीराम टुडू ने कहा कि जिन मदरसों के पास जरूरी मंजूरी है, वे चलते रहेंगे। जून की शुरुआत से पश्चिम बंगाल के सभी जिलों में सरकारी और प्राइवेट मदरसों के इंफ्रास्ट्रक्चर, मंज़ूरी की स्थिति और मैनेजमेंट सिस्टम का आकलन करने के लिए विभाग ने फील्ड-लेवल सर्वे किया था। अधिकारियों ने कहा कि मदरसों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। उन्होंने कहा कि उनके जवाबों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। टुडू ने कहा कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देशों के बाद यह काम शुरू किया गया था ताकि अलग-अलग जिलों में अधिकृत और अनधिकृत मदरसों की संख्या का पता लगाया जा सके। मंत्री ने आगे कहा, "252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया गया है, जबकि 100 अन्य को जरूरी मंजूरी और बुनियादी ढांचे की कमी के लिए कारण बताओ नोटिस भेजा गया है।" बार-बार मिल रही थी शिकायतें राज्य के पंचायती राज मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि मदरसों को लेकर कई विवाद हुए हैं और दावा किया कि कई मामलों में चरमपंथी गतिविधियों में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किए गए लोग ऐसे कुछ संस्थानों में शिक्षक के तौर पर काम करते पाए गए। उन्होंने कहा, "मदरसों के खिलाफ बार-बार शिकायतें मिल रही थीं। मदरसों से देश विरोधी गतिविधियां करने वाले लोगों के मामले सामने आए हैं।" उन्होंने आगे कहा कि कानून के हिसाब से और सरकारी इजाजत से चलने वाले मदरसे चलते रहेंगे। लेकिन सरकार मदरसों को बिना सोचे-समझे खोलने और परेशानी खड़ी करने की इजाजत नहीं देगी।" विपक्षी तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने कहा कि सभी मदरसों को एक जैसा नहीं देखना चाहिए।

BRICS देश घटाएंगे डॉलर पर निर्भरता, स्थानीय मुद्रा में कारोबार बढ़ाने की तैयारी

नई दिल्ली  दिल्ली में चल रहे ब्रिक्स सम्मेलन में अमेरिकी डॉलर के खिलाफ मुहिम शुरू हो गई है। वहीं साझा BRICS करेंसी को लेकर स्थिति साफ हो गई है। भारत सरकार ने कहा है कि फिलहाल समूह में ऐसी किसी करेंसी का प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटाने और पेमेंट सिस्टम को जोड़ने पर चर्चा जारी है। यानी ब्रिक्स देश अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता करना चाहते हैं। विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंध सचिव सुधाकर दलेला ने बताया कि फिलहाल ब्रिक्स में साझा करेंसी शुरू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटाने को लेकर बातचीत काफी समय से चल रही है। दलेला के मुताबिक, स्थानीय मुद्रा में भुगतान को द्विपक्षीय व्यापार की लागत घटाने के एक व्यावहारिक तरीके के तौर पर देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य वैश्विक पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम के विकल्प के बजाय उसे पूरक बनाना है। Navbharat TimesBRICS डिनर में परोसी गई हिमालय की गुच्छी, कीमत ₹40000 किलो तक, जानें इस महंगी मशरूम से कैसे शुरू करें बिजनेस डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने की चर्चा ऐसे समय हो रही है, जब डॉलर पर निर्भरता कम करने यानी डी-डॉलराइजेशन को लेकर दुनिया भर में चर्चा तेज है। ब्रिक्स सम्मेलन में शनिवार को जारी New Delhi Declaration में भी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश के सेटलमेंट को बढ़ावा देने पर चल रही चर्चाओं का उल्लेख किया गया है। पीयूष गोयल ने की थी अपील भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी 11 सितंबर को BRICS बिजनेस फोरम में सदस्य देशों से अपने पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की अपील की थी। गोयल ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और UPI का उदाहरण देते हुए कहा था कि UPI अब 11 देशों में स्वीकार किया जाता है। उन्होंने BRICS देशों से पेमेंट सिस्टम को जोड़ने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने का आग्रह किया। अमेरिका क्यों है चिंतित? BRICS में डॉलर से दूरी बनाने की किसी भी कोशिश को अमेरिका के लिए चुनौती के तौर पर देखा जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही BRICS देशों को साझा करेंसी बनाने या डॉलर के विकल्प का समर्थन करने के खिलाफ चेतावनी दे चुके हैं। नवंबर 2024 में ट्रंप ने कहा था कि अगर ब्रिक्स देश नई करेंसी बनाते हैं या डॉलर की जगह किसी दूसरी करेंसी को समर्थन देते हैं, तो उन पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है।