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काबुल में घर बना मौत का जाल, भीषण धमाके में कम से कम 8 की जान गई

काबुल अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक आवासीय घर के अंदर गैस सिलेंडर विस्फोट में कम से कम आठ लोग मारे गए। काबुल के गवर्नर कार्यालय ने शनिवार शाम जारी बयान में बताया कि घटना पुलिस डिस्ट्रिक्ट 21 में हुई, जहां एक परिवार अपने घर को ठंड से बचाने के लिए गैस हीटर का उपयोग कर रहा था। गैस रिसाव के कारण सिलेंडर फट गया और इससे घर में मौजूद लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। अफगानिस्तान में व्यापक आधुनिक हीटिंग प्रणाली न होने के कारण अधिकांश घर सर्दियों में अपने घर गर्म रखने के लिए गैस सिलेंडर या पारंपरिक चूल्हे पर निर्भर रहते हैं। ऐसे हादसे अक्सर गैस रिसाव और विस्फोट के कारण होते हैं और गरीब देश में यह एक आम खतरा बन गया है।इससे पहले 5 फरवरी को पूर्वी अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत में एक घर के अंदर गैस सिलेंडर फटने से तीन महिलाएं मारी गई थीं और एक अन्य घायल हुई थी। उस घटना में भी परिवार गैस हीटर का उपयोग कर रहा था और गैस रिसाव के कारण विस्फोट हुआ था। घायल पुरुष सदस्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ सप्ताह पहले, पूर्वी नंगरहार प्रांत के स्पिन घर जिले में गैस सिलेंडर विस्फोट में दो महिलाएं मारी गईं और दो बच्चे घायल हुए थे।इसके अलावा 14 जनवरी को नंगरहार के बटिकोट जिले में एक होटल के अंदर गैस सिलेंडर फटने से 14 कर्मचारी घायल हो गए थे, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई गई थी। पुलिस ने घटना को होटल कर्मचारियों की लापरवाही का परिणाम बताया था और घायल लोगों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया था।  

जाति नहीं, हिंदू पहचान ही होगी प्राथमिकता: मुंबई में मोहन भागवत का अहम संदेश

मुंबई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आरएसएस प्रमुख कौन बन सकता है, इस बात को लेकर बड़ा बयान दिया। भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ का सरसंघचालक किसी जाति का नहीं होगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ब्राह्मण, क्षत्रिय या अन्य जाति का होना जरूरी नहीं है, केवल एक शर्त है, जो बने वह हिंदू होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जाति के आधार पर पद का चयन नहीं किया जाता, केवल हिन्दू होने की शर्त जरूरी है। बता दें कि मोहन भागतव ने मुंबई में आयोजित आरएसएस के शताब्दी वर्ष के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान कही। इस मौके पर कार्यक्रम में कई जानी-मानी हस्तियों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि जाति से नहीं बल्कि हिंदू होने से ही इस पद के लिए पात्रता तय होती है। अपने पद को लेकर भी बोले भागवत इस दौरान मोहन भागवत ने उनकी उम्र 75 साल हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद संघ ने उनसे काम जारी रखने को कहा है। उन्होंने साफ किया कि संघ में पद छोड़ने का फैसला संगठन करता है, न कि कोई व्यक्ति खुद। उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख का कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्र और प्रांत के प्रमुख मिलकर सरसंघचालक का चयन करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 साल के बाद बिना पद के काम करना चाहिए। मैंने अपनी उम्र के बारे में संघ को बताया, लेकिन संगठन ने मुझसे काम जारी रखने को कहा है। उन्होंने आगे कहा कि जब भी आरएसएस कहेगा, मैं पद छोड़ दूंगा, लेकिन काम से रिटायर होना कभी नहीं होगा। 'परिस्थितियों पर ज्यादा नहीं, समाधान पर ध्यान देने की जरूरत' मोहन भागवत ने कहा कि जीवन में परिस्थितियां अनुकूल भी हो सकती हैं और कठिन भी, लेकिन उन पर जरूरत से ज्यादा सोचने की बजाय समाधान खोजने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आती, भ्रम बना रहता है। इसके साथ ही हल्के-फुल्के अंदाज में भागवत ने कहा कि आरएसएस अपने स्वयंसेवकों से खून की आखिरी बूंद तक काम लेता है। उन्होंने यह भी कहा कि संघ के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी को जबरन रिटायर किया गया हो। प्रचार नहीं, संस्कार देना संघ का काम आरएसएस प्रमुख ने साफ किया कि संघ का काम चुनावी प्रचार या आत्म-प्रचार करना नहीं है। उन्होंने कहा कि हम अपने काम का ज्यादा प्रचार नहीं करते। जरूरत से ज्यादा प्रचार से अहंकार आता है। प्रचार बारिश की तरह होना चाहिए, समय पर और उतना ही जितना जरूरी हो। 'आरएसएस में अंग्रेजी नहीं, लेकिन विरोध भी नहीं' इसके साथ ही भागवत ने भाषा को लेकर भी अहम टिप्पणी की। उन्होने कहा कि आरएसएस के कामकाज में अंग्रेजी माध्यम नहीं होगी, क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि जहां जरूरत होगी, वहां अंग्रेजी का इस्तेमाल किया जाएगा। हमें इससे कोई परहेज नहीं है। उन्होंने कहा कि लोगों को अंग्रेजी इस तरह बोलनी चाहिए कि अंग्रेजी बोलने वाले भी सुनना चाहें, लेकिन मातृभाषा को भूलना नहीं चाहिए। इस दौरान उन्होंने अपने दक्षिण भारत और विदेश का कुछ अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा कि जब वे बंगलूरू में एक कार्यक्रम के दौरान दक्षिण भारत के कई लोग हिंदी नहीं समझ पाए, तो उन्होंने अंग्रेजी में जवाब दिए। वहीं विदेशों में रहने वाले भारतीयों से बातचीत के दौरान वह हिंदी या उनकी मातृभाषा में संवाद करते हैं।

PM मोदी की तारीफों के पुल: मलेशियाई प्रधानमंत्री इब्राहिम ने कहा—आप जैसे दोस्त मिलना सौभाग्य

मलेशिया मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की  तारीफों के पुल बांधते हुए उनको “सच्चा दोस्त” बताया और कहा कि उनके बीच भरोसेमंद और समझदारी भरा आदान-प्रदान हुआ।  इब्राहिम ने कहा- मैं खुशकिस्मत हूं कि मैं  मोदी जी का बहुत अच्छा पर्सनल दोस्त हूं। और आप सही मायने में सच्चे, भरोसेमंद और समझदार दोस्त हैं।अनवर इब्राहिम ने कहा,  "मैं पर्सनली बहुत एक्साइटेड, बहुत शुक्रगुजार और बहुत खुश हूं कि भारत से मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त मलेशिया में हमारे साथ जुड़ रहा है।"  कुआलालंपुर में दोनों नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अनवर ने इस बैठक को “बहुत महत्वपूर्ण, रणनीतिक और निर्णायक” बताया और कहा कि यह भारत-मलेशिया संबंधों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। अनवर ने कहा कि भारत और मलेशिया के संबंध 1957 से हैं और 2024 में इसे “व्यापक रणनीतिक साझेदारी” में अपग्रेड किया गया। उन्होंने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंध, मजबूत जन-स्तरीय जुड़ाव और तेजी से बढ़ती आर्थिक साझेदारी पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने 11 दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें MoUs और पत्रों का आदान-प्रदान शामिल है, और यह सामान्य द्विपक्षीय समझौतों से आगे है। इनमें से कुछ समझौतों में सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य और सुरक्षा सहयोग जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं। अनवर ने कहा कि दोनों देश व्यापार और निवेश, सेमीकंडक्टर, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्थानीय मुद्रा (रुपया और रिंगगिट) में व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, कृषि, खाद्य सुरक्षा, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों को और गहरा करेंगे।   उन्होंने 2025 में 8.59 अरब डॉलर के व्यापार आंकड़े से आगे बढ़कर 18.59 अरब डॉलर के लक्ष्य से आगे बढ़ने की उम्मीद जताई। अनवर ने शैक्षिक संबंधों को “केंद्रिय” बताया और कहा कि कई मलेशियाई छात्रों की शिक्षा भारत में हुई है, जबकि भारत से भी छात्र मलेशिया में पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारतीय शिक्षा संस्थानों को वैश्विक मान्यता मिली है और भविष्य में छात्रों की संख्या बढ़ाने पर काम किया जाएगा। उन्होंने पर्यटन और कनेक्टिविटी पर भी जोर दिया। साथ ही उन्होंने भारत के शांति प्रयासों यूक्रेन-रूस और मध्य पूर्व (गाजा) के संदर्भ में को समर्थन देने के लिए मोदी की सराहना की।   अंत में, अनवर ने भारत की सरकार के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि कोटा किनाबालु (साबाह) में भारत का वाणिज्य दूतावास खोलने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है। इससे पहले दोनों नेताओं ने प्रतिनिधि-स्तरीय वार्ता की, जिसमें रक्षा और सुरक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी को पुत्राजया में औपचारिक स्वागत भी किया गया। यह दौरा भारत-मलेशिया के लंबे समय से चल रहे मित्रता संबंध को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।    

ट्रेड डील का असर: रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारत की बड़ी कटौती के संकेत

वाशिंगटन अमेरिका के साथ टैरिफ में कटौती के बदले हुए समझौते के तहत भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद धीरे-धीरे कम करने की संभावना है। सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि हालांकि, नायरा एनर्जी जैसी तेल शोधनशालाओं (रिफाइनरी) के पास सीमित विकल्प होने के कारण ये आयात फिलहाल पूरी तरह बंद नहीं होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को भारत से होने वाले सभी आयातों पर 25 प्रतिशत के दंडात्मक शुल्क को रद्द करने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि यह कदम नयी दिल्ली की उस प्रतिबद्धता के बाद उठाया गया है, जिसमें रूस से तेल आयात रोकने की बात कही गई है। रूस से खरीद कम करने की सलाह मामले की जानकारी रखने वाले तीन सूत्रों ने बताया कि हालांकि तेल शोधनशालाओं को रूस से खरीद रोकने का कोई औपचारिक निर्देश नहीं मिला है, लेकिन उन्हें अनौपचारिक रूप से मॉस्को से खरीद कम करने की सलाह दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, अधिकांश तेल शोधनशालाएं इस घोषणा से पहले की गई खरीद प्रतिबद्धताओं (आमतौर पर 6-8 सप्ताह पहले दिए गए ऑर्डर) का सम्मान करेंगी, लेकिन उसके बाद नए ऑर्डर नहीं दिए जाएंगे। इन कंपनियों ने बंद किया रूस से तेल आयात हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (एचएमईएल) ने पिछले साल अमेरिका द्वारा रूस के प्रमुख निर्यातकों पर प्रतिबंध लगाए जाने के तुरंत बाद वहां से तेल खरीदना बंद कर दिया था। अब इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) भी अपनी खरीद धीरे-धीरे बंद करेंगे। भारत की सबसे बड़ी खरीदार कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड भी अगले कुछ हफ्तों में 1,50,000 बैरल की खेप प्राप्त होने के बाद रूसी तेल की खरीद बंद कर सकती है जिसने पिछले साल के अंत में रोसनेफ्ट और लुकॉइल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद खरीदारी रोक दी थी। इस नियम का एकमात्र अपवाद 'नायरा एनर्जी' हो सकती है। रूसी संबंधों (नायरा में रोसनेफ्ट की 49.13 प्रतिशत हिस्सेदारी) के कारण नायरा पर पहले यूरोपीय संघ और फिर ब्रिटेन ने प्रतिबंध लगाए थे। इन प्रतिबंधों के कारण कोई अन्य बड़ा आपूर्तिकर्ता कंपनी के साथ व्यावसायिक लेनदेन नहीं करना चाहता, जिससे वह प्रतिबंधित नहीं की गई संस्थाओं से रूसी तेल खरीदने को मजबूर है। हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, वहीं वाणिज्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने भी रूसी तेल खरीद के संबंध में भारत द्वारा की गई प्रतिबद्धताओं पर सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। सूत्रों ने कहा कि रोसनेफ्ट और लुकॉइल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के बाद से ही रूस से भारत का तेल आयात लगातार घट रहा है। दिसंबर में अमेरिकी अधिकारियों के साथ हुई वार्ता के दौरान नायरा की इस विशिष्ट स्थिति के बारे में बताया गया था। सूत्रों का कहना है कि नायरा को 'रूसी तेल न खरीदने' की नीति से छूट दी जा सकती है। सूत्रों ने कहा कि नायरा एनर्जी द्वारा निकट भविष्य में उन संस्थाओं से रूसी तेल की खरीद जारी रखने की संभावना है, जो प्रतिबंधों के दायरे में नहीं हैं। दिसंबर 2025 में रूस से आयात औसतन 12 लाख बैरल प्रति दिन रहा, जो मई 2023 के 21 लाख बैरल प्रति दिन के उच्चतम स्तर से काफी कम है। जनवरी में यह घटकर 11 लाख बैरल रह गया और इस महीने या अगले महीने इसके 10 लाख बैरल से नीचे जाने की उम्मीद है। अमेरिका के साथ नयी समझौते के बाद यह आयात जल्द ही आधा हो सकता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों द्वारा मॉस्को पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण रूस से मिलने वाले रियायती तेल ने भारत के आयात बिल को कम करने में मदद की है। केपलर के प्रमुख शोध विश्लेषक सुमित रितोलिया के अनुसार, रूस से आने वाला तेल अगले 8-10 सप्ताह के लिए पहले से ही तय है और यह भारत की तेल शोधन प्रणाली के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है। हालांकि, निवेश सूचना और क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (इक्रा) के प्रशांत वशिष्ठ का कहना है कि भारत के पास अमेरिका और वेनेजुएला जैसे पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं।  

जेल में संदिग्ध हालात में मौत! शेख हसीना की पार्टी के नेता रमेश चंद्र सेन को लेकर कई सवाल

ढाका बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले हिंसा की घटनाएं आम हो गई हैं। वहीं इस बार अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग को बैन कर दिया गया है। इसी बीच शेख हसीना की पार्टी के एक वरिष्ठ हिंदू नेता रमेश चंद्र सेन की जेल में ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उन्हें दीनाजपुर जिला जेल में रखा गया था। बता दें कि 12 फरवरी को बांग्लादेश में चुनाव होना है। रमेश चंद्र सेन की मौत, उनके इलाज को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है।   83 साल की उम्र में जेल में बंद थे सेन सेन 83 साल के थे और उन्हें इलाज के लिए दीनाजपुर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था। जेल अधीक्षक फरहद सरकार ने बताया कि सेन का शव उनके परिवार को सौंप दिया जाएगा। 16 अगस्त 2024 को ही उन्हें हिरासत में लिया गया था। इससे पहले कुछ समय वह ठाकुरगांव जिला जिले में बंद थे। कौन थे रमेश चंद्र सेन सेन पर हत्या, राजनीतिक हिंसा और अन्य केस दर्ज किए गए थे। उनका जन्म 30 अप्रैल 1940 को हुआ था। वह ठाकुरगांव से कई बार सांसद चुने जा चुके थे। 2024 के आम चुनाव में भी इस सीट पर उन्होंने जीत हासिल की थी। वहीं इस बार उनकी पार्टी को चुनाव लड़ने से बैन कर दिया गया है। बताया गया कि उम्र की वजह से जेल में वह बीमार रहते थे लेकिन उनका ठीक से इलाज नहीं करवाया जाता था। बांग्लादेश में भड़क रही हिंसा की आग बांग्लादेश में दक्षिणपंथी इंकलाब मंच के नेता शरीफ उस्मान हादी की पिछले साल हुई हत्या के मामले में तत्काल न्याय की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस से हुई झड़प में संगठन के कम से कम 50 कार्यकर्ता घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों द्वारा अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के आधिकारिक जमुना आवास के पास सुरक्षा अवरोधक को तोड़ने की कोशिश करने और वहां रैलियों के दौरान पहले से घोषित प्रतिबंधों का उल्लंघन किए जाने के बाद ढाका पुलिस ने लाठियां भांजी तथा पानी की बौछार की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने 'साउंड ग्रेनेड' भी दागे। बांग्लादेश में 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन में हादी अग्रणी कार्यकर्ताओं में शामिल थे। वह 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनाव के लिए प्रमुख उम्मीदवारों में भी शामिल थे। चुनाव प्रचार के दौरान 12 दिसंबर को राजधानी में हादी को गोली मार दी गई थी और बाद में उनकी मौत हो गई। बांग्लादेश में 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन को जुलाई विद्रोह कहा जाता है और इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की आवामी लीग की सरकार गिर गई थी।

अमेरिकी सांसद का विवादित बयान: डलास में मस्जिदें देख बोले– ‘ये अमेरिका है या पाकिस्तान?’ भारत कनेक्शन भी जोड़ा

वाशिंगटन अमेरिकी कांग्रेस सदस्य ब्रैंडन गिल ने टेक्सास के डलास क्षेत्र में बढ़ रहे इस्लामीकरण को लेकर विवादित टिप्पणी की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी से ताल्लुक रखने वाले गिल ने इंटरव्यू में कहा कि वहां के स्थानीय मॉल में जाने पर ऐसा महसूस होता है जैसे आप पाकिस्तान में हों, डलास में नहीं। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कई यूजर्स ने उनकी टिप्पणियों को उनकी भारतीय मूल की पत्नी डेनियल डीसूजा गिल से जोड़कर देखा है।   ब्रैंडन गिल ने 'रियल अमेरिकाज वॉयस' को दिए इंटरव्यू में डलास की सांस्कृतिक पहचान बदलने पर चिंता जताई। गिल ने दावा किया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोग डलास के मॉल में पाकिस्तानी माहौल महसूस कर रहे हैं, जो उनके अनुसार एक समस्या है। उन्हें पाकिस्तान से इसकी तुलना की। उन्होंने आरोप लगाया कि उन जमीनों के पास मस्जिदें बनाई जा रही हैं जो दशकों से स्थानीय परिवारों के पास रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि बड़े पैमाने पर इस्लामी प्रवासन उस अमेरिका को खत्म कर रहा है जिसे वे जानते और प्यार करते हैं। ब्रैंडन गिल की पत्नी डेनियल डीसूजा गिल मशहूर भारतीय-अमेरिकी लेखक और ट्रंप के सहयोगी दिनेश डीसूजा की बेटी हैं। गिल के पाकिस्तान वाले बयान पर सोशल मीडिया यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कई यूजर्स ने लिखा कि गिल केवल अपनी भारतीय मूल की पत्नी को खुश करने के लिए पाकिस्तान का नाम ले रहे हैं। एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा, "गिल साहब नई दिल्ली में रहने के इतने आदी हो गए हैं कि अब पाकिस्तान से नफरत करना उनके स्वभाव में आ गया है।" यह पहली बार नहीं है जब यह दंपत्ति चर्चा में है। कुछ समय पहले न्यूयॉर्क के नवनिर्वाचित मेयर जोहरान ममदानी के साथ उनका विवाद हुआ था। ब्रैंडन गिल ने ममदानी का हाथ से चावल खाते हुए एक वीडियो साझा कर उन्हें असभ्य कहा था और उन्हें 'तीसरी दुनिया' में वापस जाने की सलाह दी थी। डेनियल डीसूजा गिल ने अपने पति का बचाव करते हुए कहा था कि वह अमेरिका में पली-बढ़ी हैं और हमेशा फोर्क का इस्तेमाल करती हैं। जब लोगों ने उन्हें उनकी भारतीय जड़ों की याद दिलाई, तो उन्होंने खुद को "क्रिश्चियन मागा देशभक्त" बताते हुए कहा कि उनके ईसाई रिश्तेदार भी हाथ से खाना नहीं खाते। कौन हैं ब्रैंडन गिल? ब्रैंडन गिल टेक्सास के 26वें कांग्रेस जिले का प्रतिनिधित्व करते हैं। 2024 में निर्वाचित होने के बाद से वे अपने सख्त आव्रजन विरोधी रुख और शरिया मुक्त अमेरिका जैसे अभियानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने हाल ही में सोमालिया से आने वाले प्रवासियों पर 25 साल के प्रतिबंध का बिल भी पेश किया था।

बजट में भरपूर पैसा, जमीन पर सुस्ती! किसानों की इस योजना में सबसे कम खर्च

नई दिल्ली सरकार ने इस वित्त वर्ष में अपनी सबसे बड़ी योजनाओं पर 40 फीसदी बजट ही खर्च किया है। ये वे योजनाएं हैं जिनके लिए लगभग 500 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। इन योजनाओं में केंद्र और राज्यों को मिलकर खर्च करना है। इन योजनाओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याणके तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेशन योजना और अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए प्री मैट्रिक वजीफा योजना शामिल है। इसके अलावा मनरेगा, अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना पर भी 40 फीसदी ही खर्च हो पाया है।   कुल 53 योजनाओं में से 6 योजनाओं पर 40 फीसदी से कम खर्च किया गया है। चार पर 40 से 50 फीसदी, 15 योनजाओं पर 51 से 75 फीसदी, 10 पर 90 से 100 पर्सेंट और 6 योजनाों पर 100 प्रतिशत खर्च हुआ है। बाकी 47 योजनाओं पर रिवाइज्ड एस्टिमेट बजट एस्टिमेट से कम है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में 850 करोड़ के बजट काआवंटन किया गया था जिसमें से केवल 150 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। अगर कुल 53 योजनाओं पर कुल खर्च की बात करें तो यह 3.8 करोड़ रुपये है। इन योजनाओं पर 5 लाख करोड़ के बजट का ऐलान हुआ था। 31 दिसंबर तक दो लाख करोड़ का बजट रिलीज किया गया था। यह कुल बजट का 41.2 फीसदी था। प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना, वॉटर मैनेजमेंट, पीएम ईबस सेवा, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, जल जीवन मिशन, कंप्यूटराइजेशन ऑफ प्राइमरी ऐग्रीकस्च्र क्रेडिट सोसाइटी और अन्य कई योजाओं पर बजट का 40 फीसदी ही खर्च हुआ है। इनमें से 6 योजनाएं ऐसी भी हैं जिनके लिए केवल 10 फीसदी ही बजट रिलीज हुआ है। इस बजट सत्र के दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटील ने शनिवार को यहां बताया कि देश में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत अब तक 16 करोड़ घरों में नल से जल पहुंचाया जा चुका है।पाटिल ने यहां केन्द्रीय बजट को लेकर प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमृत सरोवर योजना और जेजेएम ऐतिहासिक साबित हो रहे हैं और अमृत सरोवर योजना के तहहत देशभर में 69 हजार से अधिक सरोवरों का निर्माण किया गया है, जिससे भूजल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि जेजेएम के लिए 67 हजार 300 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं और अब तक 16 करोड़ घरों में नल से जल पहुंचाया जा चुका है और चार-पांच करोड़ घरों को और पानी देना है तथा इस योजना को वर्ष 2028 तक विस्तारित किया गया है। इससे देश की लगभग नौ करोड़ माताओं-बहनों का करीब 4.5 करोड़ घंटे का समय बचा है। साथ ही जल गुणवत्ता जांच के लिए 24 लाख 80 हजार महिलाओं को प्रशिक्षित भी किया गया है और आठ लाख महिलाओं ने परीक्षण पोर्टल पर अपनी रिपोर्ट को रखा है।  

ट्रंप के दावे के बाद सवालों में भारत-रूस दोस्ती, क्या जारी रहेगी रूसी तेल की खरीद?

नई दिल्ली 7 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा तो तैयार हो गई। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने उस कार्यकारी आदेश को भी वापस ले लिया, जिसमें भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था। हालांकि, रूसी तेल को लेकर स्थिति अब भी कूटनीतिक रहस्यों में लिपटी हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हस्ताक्षर किए गए कार्यकारी आदेश में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारत ने रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है। भारत ने अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद खरीदने और अगले 10 वर्षों के लिए रक्षा सहयोग बढ़ाने का आश्वासन दिया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि अमेरिकी वाणिज्य सचिव को पता चलता है कि भारत ने दोबारा रूसी तेल खरीदना शुरू किया है तो 25% का दंडात्मक शुल्क दोबारा लगाया जा सकता है। भारत का क्या है रुख? ट्रंप के इस बड़े दावे पर भारत सरकार की ओर से शनिवार को कोई सीधा खंडन या पुष्टि नहीं आई है। जब अधिकारियों से ट्रंप के इस दावे पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के गुरुवार के बयान का हवाला दिया। भारत के द्वारा कहा गया है कि, "1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और बदलते बाजार को देखते हुए अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी रणनीति का मूल आधार है।" विशेषज्ञों का मानना है कि भारत रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए सीधे तौर पर किसी दबाव में झुकने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करना चाहता, भले ही हालिया हफ्तों में रूसी तेल के आयात में भारी गिरावट दर्ज की गई हो। तेल पर सस्पेंस के बावजूद, भारतीय निर्यातकों के लिए यह समझौता संजीवनी जैसा है। भारतीय सामानों पर प्रभावी शुल्क 50% से घटकर 18% पर आ जाएगा। कपड़ा, रत्न-आभूषण, फार्मा और विमानन पुर्जों पर से अतिरिक्त शुल्क हटा लिए गए हैं। बदले में भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों (बादाम, अखरोट, सोयाबीन तेल) और औद्योगिक सामानों पर टैरिफ कम करने के साथ ही अगले 5 वर्षों में 500 अरब डॉलर की खरीदारी के लिए सहमत हुआ है। क्या भारत रूस को छोड़ देगा? आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में भारत का रूसी तेल आयात 38 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, भारत ने वेनेजुएला से तेल खरीद और अमेरिका से LNG आयात बढ़ाने के विकल्प खुले रखे हैं। रूस के क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उन्हें भारत की ओर से तेल खरीद बंद करने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। वे भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को महत्व देते हैं।

मलेशिया से पीएम मोदी का दो टूक ऐलान—आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति कायम

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मलेशिया के उनके समकक्ष अनवर इब्राहिम के बीच व्यापक बातचीत के बाद भारत और मलेशिया ने रविवार को रक्षा और सुरक्षा, सेमीकंडक्टर तथा व्यापार के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के लिए कई पहलों की शुरुआत की। बैठक के बाद मोदी ने कहा कि भारत और मलेशिया एक 'विशेष संबंध' साझा करते हैं और दोनों पक्ष विभिन्न क्षेत्रों में अपने संबंधों का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री ने आतंकवाद से निपटने के मुद्दे पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा, ''आतंकवाद पर हमारा संदेश स्पष्ट है; कोई दोहरा मापदंड नहीं, कोई समझौता नहीं।' पीएम मोदी कुआलालंपुर पहुंचे जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। हवाई अड्डे पर इब्राहिम ने उनका स्वागत किया जो द्विपक्षीय संबंधों में एक नई गति का संकेत है। वार्ता से पहले मोदी का आज सुबह पर्दाना पुत्र में औपचारिक स्वागत किया गया। मोदी ने कहा, ''भारत और मलेशिया के बीच एक विशेष संबंध है। हम समुद्री पड़ोसी हैं। सदियों से दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे और स्नेहपूर्ण संबंध रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'आज, भारतीय मूल के लोगों की आबादी के मामले में मलेशिया दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। हमारी सभ्यताएं, साझा सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्य हमें एक सूत्र में बांधते हैं।'' मोदी ने कहा कि दोनों पक्ष आतंकवाद विरोधी उपायों, खुफिया जानकारी साझा करने और समुद्री सुरक्षा में सहयोग को मजबूत करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हम रक्षा सहयोग को और अधिक व्यापक बनाएंगे। उन्होंने कहा, ''कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ हम सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाएंगे।'प्रधानमंत्री ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति भारत के दृष्टिकोण पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, ''हिंद-प्रशांत क्षेत्र विश्व के विकास के इंजन के रूप में उभर रहा है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आसियान (दक्षिणपूर्व एशियाई देशों का संघ) के साथ मिलकर पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विकास, शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है। मलेशिया के प्रधानमंत्री इब्राहिम ने कहा कि भारत और मलेशिया व्यापार, निवेश, संपर्क और रक्षा के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करना जारी रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार और आर्थिक मोर्चे पर भारत ने शानदार वृद्धि दर्ज की है।  

‘मैं नाथूराम’ नाटक पर बवाल: राजकोट में हॉल में तोड़फोड़, 45 कांग्रेसी हिरासत में

राजकोट राजकोट में बड़ा विवाद खड़ा हो गया। यहां गुजराती नाटक 'मैं नाथूराम' के मंचन से पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध किया और हॉल में तोड़फोड़ कर दी। इस घटना के बाद पुलिस ने करीब 45 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है। घटना शहर के हेमू गढ़वी हॉल में हुई, जहां रात 9:15 बजे नाटक का मंचन होना था।   कांग्रेस ने क्यों किया विरोध मिली जानकारी के अनुसार, कांग्रेस कार्यकर्ता नाटक के मंचन का विरोध कर रहे थे। उनका आरोप था कि यह नाटक महात्मा गांधी के सिद्धांतों को कमतर दिखाने की कोशिश करता है। कांग्रेस के राजकोट अध्यक्ष राजदीपसिंह जडेजा ने बताया कि उन्होंने पहले हॉल ट्रस्ट से नाटक रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि गांधीजी का राजकोट से गहरा जुड़ाव रहा है, क्योंकि उन्होंने यहां पढ़ाई की थी। जडेजा के मुताबिक, जब आयोजकों ने कार्यक्रम रद्द करने से इनकार कर दिया और पुलिस सुरक्षा में मंचन कराने की बात कही, तब कांग्रेस ने विरोध करने का फैसला किया। उन्होंने दावा किया कि विरोध के दौरान स्थिति अचानक बिगड़ गई और कुछ युवाओं ने मंच पर पड़े पाइप फेंक दिए। उनका कहना था कि यदि वे शांतिपूर्वक बैठते, तो नाटक जारी रहता। क्या बोले आयोजक इस मामले पर नाटक के निर्माता और प्रस्तुतकर्ता परितोष पेंटर ने कहा कि उनके पास सेंसर सर्टिफिकेट और पुलिस की अनुमति थी। उन्होंने बताया कि अचानक 200-300 लोगों का समूह वहां पहुंचा और नाटक को रोकने की कोशिश करने लगा। पेंटर ने कहा कि नाटक एक प्रकाशित किताब पर आधारित है और इसमें नाथूराम गोडसे के अदालत में दिए गए बयान को दिखाया गया है। उनका कहना है कि इसमें किसी को सही या गलत साबित करने की कोशिश नहीं की गई है। घटना के बाद पुलिस ने 45 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। देर शाम तक पुलिस इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की तैयारी कर रही थी। बताया जा रहा है कि नाटक के आगामी दिनों में अन्य शहरों में भी मंचन की योजना है और आयोजक इसे जारी रखने पर अड़े हैं।