samacharsecretary.com

ज्यूडिशियरी में करप्शन पढ़ाने पर बवाल, NCERT कंटेंट में नेताओं के आपराधिक बैकग्राउंड का जिक्र

नई दिल्ली एनसीईआरटी की आठवीं क्लास की किताब में ज्यूडिशियरी में भ्रष्टाचार वाले चैप्टर पर विवाद छिड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में काफी नाराजगी दिखाई, जिसके बाद सरकारी सूत्रों ने कहा है कि यह किताब से यह पोर्शन हटा दिया जाएगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकील भी काफी नाराज हैं। सीनियर एडवोकेट और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने नेताओं पर हमला बोल दिया है। उन्होंने दावा किया कि 40 फीसदी नेता क्रिमिनल बैकग्राउंड के हैं, तो ऐसे में इस बारे में सिखाना चाहिए। न्यूज एजेंसी से बात करते हुए, सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा, "ठीक है, जहां तक आर्टिकल की बात है, मुझे लगता है कि यह चौंकाने वाला है कि एनसीईआरटी ने टेक्स्टबुक में ऐसा कुछ शामिल किया है। टेक्स्टबुक बच्चों को हमारे समाज के बारे में सिखाने के लिए होती हैं। अगर वे सच में सिखाना चाहते हैं, तो उन्हें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि लगभग 40 फीसदी नेताओं का क्रिमिनल बैकग्राउंड है। यह कुछ ऐसा है जिसकी हमने आजादी मिलने पर बिल्कुल उम्मीद नहीं की थी, कि जो लोग इस देश पर राज करेंगे, वे कानून तोड़ने वाले हो सकते हैं, जो आखिर में कानून बनाने वाले बनेंगे। लेकिन ज्यूडिशियरी में करप्शन के बारे में बात करना, मुझे लगता है, सच में इंस्टीट्यूशन को कमजोर करता है।'' 'जिम्मेदार पर कंटेम्प्ट नोटिस जारी करना चाहिए' उन्होंने आगे कहा कि करप्शन हर जगह है, लेकिन मैं आपको यकीन दिला सकता हूं कि ज्यूडिशियरी में करप्शन एग्जीक्यूटिव या पॉलिटिक्स से कहीं, कहीं कम है। इसलिए मुझे यह बिल्कुल साफ नहीं है कि इस चैप्टर को शामिल करने का मकसद क्या था। लेकिन मुझे यकीन है कि जस्टिस सूर्यकांत को एनसीईआरटी के उन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, जिन्होंने इसे शामिल करने का फैसला किया, और उन्हें कंटेम्प्ट नोटिस जारी करना चाहिए, जिसमें पूछा जाए कि उन्हें क्रिमिनल कंटेम्प्ट के लिए जिम्मेदार क्यों न ठहराया जाए।" 'बच्चों को ज्यूडिशियरी में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा' सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की आठवीं कक्षा की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार विषय से संबंधित सामग्री का स्वतः संज्ञान लिया और इसे गंभीर चिंता का विषय बताया। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने यह दलील दी कि कक्षा आठ के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जाता है। यह एक गंभीर चिंता का विषय है। 'संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा' सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ''मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा।'' उन्होंने कहा, ''संस्था के प्रमुख के रूप में मैंने अपना कर्तव्य निभाया है और संज्ञान लिया है… यह एक सोचा-समझा कदम प्रतीत होता है। मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा।'' न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि यह पुस्तक संविधान की मूल संरचना के विरुद्ध प्रतीत होती है। सीजेआई ने कहा, ''कृपया कुछ दिनों तक प्रतीक्षा करें। अधिवक्ता और न्यायाधीश सभी परेशान हैं। सभी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश परेशान हैं। मैं इस मामले को स्वतः संज्ञान के तहत लूंगा। मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा।'' बाद में न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि शीर्ष अदालत ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है।  

डोनाल्ड ट्रंप के दावों की खुली पोल: भाषण में बोले 5 झूठ, मीडिया ने किया फैक्ट चेक

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में सबसे लंबा भाषण देकर इतिहास रच दिया। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से 8 जंगें रुकवाने का दावा किया तो वहीं अर्थव्यवस्था, टैरिफ वॉर समेत कई मसलों पर बढ़-चढ़कर दावे किए। डोनाल्ड ट्रंप दावे करने में आगे रहे हैं, लेकिन अकसर गलत तथ्य दे देते हैं। ऐसा ही मंगलवार की रात को भी हुआ, जब उन्होंने जनता के सामने कई गलत तथ्य रख दिए। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के बोले गए झूठ ज्यादातर देर तक टिक नहीं सके। न्यूयॉर्क टाइम्स समेत अमेरिका के ही कई अखबारों ने उनका फैक्ट चेक कर दिया है। आइए जानते हैं, डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में बोले कौन-कौन से झूठ… अर्थव्यवस्था, नौकरी और निवेश पर क्या गलत दावा डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हमारी इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी दुनिया में हॉटेस्ट है। उनका दावा था कि हमारे पास काफी नौकरियां हैं। पहले के मुकाबले अमेरिका में सबसे ज्यादा लोगों के पास जॉब्स हैं। यह इतिहास में सबसे अधिक है। लेकिन डेटा कुछ और कहता है। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार 2025 में अमेरिका में नौकरी पाने वालों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। यह आंकड़ा कोरोना काल के किसी भी साल के मुकाबले कम रहा है। अमेरिकी लेबर ब्यूरो के अनुसार 2025 में अमेरिका में सिर्फ 1 लाख 81 हजार ही नई नौकरियां जुड़ीं। एरिना के कत्ल में प्रवासी शख्स के शामिल होने का दावा, क्या सच अमेरिकी लीडर ने यह दावा भी किया कि एरिना जारुस्का का कत्ल एक प्रवासी ने किया था। उनका कहना कि एक खूंखार अपराधी ने इस कांड को अंजाम दिया, जो खुली सीमाओं से आ गया था। वह यहां मुक्त होकर घूम रहा था। लेकिन उनका यह फैक्ट भी गलत निकला। एरिना के कत्ल में गिरफ्तार डिकार्लोस ब्राउन जूनियर कोई प्रवासी नहीं है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि अमेरिका में बाहर से आने वाले लोग ही ज्यादातर हिंसा के जिम्मेदार रहे हैं। बिजली की कीमत कम होने की बात निकली गलत अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका में की कीमतें घट रही हैं। इतनी कमी आई है कि यकीन नहीं होता। लेकिन सच्चाई कुछ और है। अमेरिका में प्रति परिवार ऊर्जा का बिल बीते एक साल में 6.7 पर्सेंट तक बढ़ गया है। वह लगातार कहते रहे हैं कि देश में बिजली की कीमत कम हो जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। सच्चाई यह है कि डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद से कई यूटिलिटी कंपनियों ने मांग की है कि रेट बढ़ाए जाएं। यह इजाफा हुआ भी है। कहा जा रहा है कि 2035 तक 18 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी। गैस वाला बयान भी ट्रंप का झूठा ही साबित हुआ ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका में गैस की कीमत अब 1.99 डॉलर प्रति गैलन तक हो गई है। लेकिन बीते कुछ दिन पहले पर्यावरण को लेकर लगी पाबंदियों के चलते इसमें इजाफा होने की चर्चा है। इससे स्पष्ट है कि आने वाला समय रेट बढ़ने का रहेगा। यही नहीं कुछ राज्यों में अब भी कीमत 4.60 डॉलर प्रति गैलन है। इस तरह ट्रंप का दावा यहां भी गलत निकला है। 8 जंगें रुकने का दावा भी झूठा, गाजा में अब भी हो रहीं मौतें अब बात करते हैं, डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध वाले दावों की। उन्होंने एक बार फिर से कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के शुरुआती 10 महीनों में 8 जंगें रुकवा दीं। अब इस मामले में भी सच्चाई यह है कि अमेरिका का दखल 6 जंगों में ही रहा है। अन्य दो युद्ध ऐसे रहे हैं, जिसमें उसका कोई रोल नहीं रहा। इसके अलावा कई लोगों ने तो इन 6 में भी उसे कोई क्रेडिट नहीं दिया है। ट्रंप ने गाजा में सीजफायर का दावा किया है, लेकिन वहां अब भी इजरायल के हमले जारी हैं और हर दिन ही कुछ मारे जा रहे हैं।  

‘अब नहीं होंगे हिडन चार्जेज…’ RBI ने बैकों को दिए आदेश, ऐप से हटाएं धोखाधड़ी वाली ट्रिक्स

नई दिल्ली आपके साथ भी ऐसा होता होगा कि आप अपने बैंक का ऐप खोलते हैं और उसमें अतिरिक्त सेवाओं को खरीदने के लिए बार-बार मैसेज या नोटिफिकेशन आने लगते हैं. इनमें से कई मिडलीडिंग भी होते हैं. या फिर चेकआउट के समय आपको हिडन शुल्क दिखाई दिए हों, तो आप अकेले ऐसे यूजर नहीं हैं. अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ऐसे मामलों में सख्त नजर आ रहा है और डिजिटल बैंकिंग को अधिक पारदर्शी बनाने के क्रम में बैंकों को कड़ा आदेश दिया है.  आरबीआई ने कहा- 'हटा लें ये सब…' केंद्रीय बैंक ने अब 'Responsible Business Conduct Amendment Directions, 2026', के ड्राफ्ट में बैंकों को सख्त निर्देश दिया है. आरबीआई ने कहा है कि बैंक जुलाई 2026 तक अपनी वेबसाइटों और मोबाइल ऐप से सभी डार्क पैटर्न (Dark Patterns) हटा दें, जो कि ग्राहकों को गुमराह करने या उन पर दबाव डालने के लिए डिजाइन की गई ट्रिक्स हैं. इसमें बैंकों द्वारा वित्तीय उत्पादों और किसी भी सेवा की पेशकश से पहले ग्राहक की स्पष्ट सहमति अनिवार्य रूप से लें. RBI के इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों को उचित जानकारी के बिना उत्पाद खरीदने या शुल्क चुकाने के लिए गुमराह कतई न किया जाए. बैंकों को ग्राहक की स्पष्ट अनुमति के बिना वित्तीय उत्पादों को एक साथ बेचने पर भी रोक लगा दी जाएगी. RBI क्यों डार्क पैटर्न पर सख्त?  डार्क पैटर्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल की जाने वाली ऐसी डिजाइन तकनीकें हैं, जिनका उद्देश्य यूजर के व्यवहार को प्रभावित करना होता है, जिसे वे आसानी से पूरी तरह समझ न सकें. इनमें हिडन चार्ज, भ्रमित करने या प्रलोभन देने वाले विकल्प या फिर ग्राहकों को अतिरिक्त सेवाएं स्वीकार करने के लिए बार-बार प्रेरित करने वाले संकेत शामिल हो सकते हैं. बैंकों को इन ट्रिक्स पर रोक के संबंध में आरबीआई द्वारा दिए गए निर्देश, ये सुनिश्चित करने के लिए हैं, कि ग्राहकों को ठीक से पता हो कि वे किस चीज के लिए साइन-अप कर रहे हैं. यानी वे गुमराह न हों.  सर्वे में हुआ ये बड़ा खुलासा  इंडिया टुडे पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, लोकलसर्कल्स द्वारा किए गए एक सर्वे से पता चलता है कि इस तरह की ट्रिक्स का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है. RBI का यह कदम इस सर्वे के परिणामों के बाद आया है. इसमें 388 जिलों के 1,61,000 से अधिक लोगों से प्रतिक्रियाओं को शामिल किया गया. निष्कर्षों से पता चला है कि इस तरह की गुमराह करने वालीं डार्क पैटर्न ट्रिक्स कई ऑनलाइन बैंकिंग प्लेटफार्मों पर आम बात हैं. सर्वे में शामिल यूजर्स ने बताया कि हिडन चार्ज के बारे में खुलासा शुरुआत में स्पष्ट रूप से नहीं किया जाता है और किसी भी प्रक्रिया के अंत में इन छिपे हुए शुल्कों का सामना ग्राहक को करना पड़ता है. इसके अलावा ग्राहकों को अतिरिक्त सेवाओं को एक्टिव करने के लिए बार-बार नोटिफिकेशन परेशान करने वाले होते हैं.  जुलाई तक हटाने होंगे डार्क पैटर्न बैंकों को जुलाई 2026 तक डार्क पैटर्न को पूरी तरह से हटाने और नए नियमों का पालन करने का समय दिया गया है. RBI द्वारा मोबाइल बैंकिंग (Mobile Banking) पर लोगों की बढ़ती निर्भरता को देखते हुए ये कदम उठाया गया है, जो डिजिटल वित्तीय सेवाओं को आसान, निष्पक्ष और अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए है. 

मौसम अपडेट: दो नए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से बदलेगा मौसम, इन इलाकों में बारिश का अलर्ट जारी

नई दिल्ली उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में दो नए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की दस्तक हो रही है। इन कमजोर वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से पहाड़ी राज्यों में 26-28 फरवरी और दो व तीन मार्च को बारिश व बर्फबारी की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा, इस हफ्ते उत्तर पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से तीन से पांच डिग्री अधिक रहने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, 25 व 26 फरवरी को अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में छिटपुट से लेकर काफी व्यापक बारिश, बिजली और 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभवाना है। इसके अलावा, 25 फरवरी को अरुणाचल प्रदेश, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, केरल, माहे, लक्षद्वीप में छिटपुट से मध्यम बारिश होने का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, 25 व 26 फरवरी को उत्तर आंतरिक कर्नाटक में और 26 फरवरी को तेलंगाना में भी यही संभावना है। 26 और 27 फरवरी को जम्मू कश्मीर में, 27 व 28 फरवरी को हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में छिटपुट बारिश होगी। पंजाब और हिमाचल प्रदेश में 26 फरवरी तक कुछ इलाकों में सुबह से शाम तक घना कोहरा रहने की संभावना है। अगले सात दिनों के दौरान उत्तर पश्चिम अज्ञैर मध्य भारत के मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री की बढ़ोतरी होगी। अगले 24 घंटे में महाराष्ट्र में अधिकतम तापमान में कोई अहम बदलाव होने की संभावना नहीं है और उसके बाद छह दिनों में इसमें दो से तीन डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होगी। अगले दो दिनों के दौरान पूर्वी भारत में अधिकतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन होने वाला नहीं है।  

चीन-नीति पर फिर घिरे पंडित नेहरू: BJP ने उठाए पुराने समझौते, लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बुधवार (25 फरवरी) को कांग्रेस पर आरोप लगाया कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने पूरे कार्यकाल में बार-बार 'क्षेत्रीय समझौते' किए और भारत की सीमाओं का हमेशा के लिए 'पुन: निर्धारण' कर दिया। भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सरकार पर कांग्रेस के हमले की पृष्ठभूमि में भाजपा ने विपक्षी दल पर पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ता अनिल बलूनी ने 'कम्प्रोमाइज्ड कांग्रेस' हैशटैग के साथ सोशल मीडिया 'एक्स' पर लिखा, ''प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में नेहरू का पहला कर्तव्य: भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना था लेकिन उन्होंने इसके बजाय अपने पूरे शासनकाल में क्षेत्रीय समझौते किए।" बलूनी ने आगे लिखा, "तिब्बत को टुकड़े-टुकड़े में गंवा दिया गया। अक्साई चिन को लेकर समझौता कर लिया गया। बेरुबारी को लेकर समझौता कर लिया गया। पंजाब के गांवों को लेकर समझौता कर लिया गया। रण के कच्छ को लेकर समझौता किया गया। और कश्मीर को लेकर भी करीब-करीब टुकड़ों में समझौता कर लिया गया।'' भाजपा सांसद ने दावा किया, ''बार-बार समझौते। यह नेहरू का नेतृत्व था। एक व्यक्ति के समझौते करने की वजह से भारत का नक्शा हमेशा के लिए बदल गया।'' ''डाक, टेलीग्राफ और फोन सेवाएं चीन को सुपुर्द कर दी गईं बलूनी ने आरोप लगाया कि नेहरू ने तिब्बत में भारत के अधिकारों को छोड़ दिया। उन्होंने दावा किया, ''डाक, टेलीग्राफ और फोन सेवाएं चीन के सुपुर्द कर दी गईं। तिब्बत को चीन के क्षेत्र के रूप में पहचाना गया। माओ को पूरा बफर जोन मुफ्त में सौंप दिया गया।'' भाजपा नेता ने कहा, ''अक्साई चिन: चीन ने 1951 से सैन्य सड़क बनाना शुरू किया। तत्कालीन आईबी प्रमुख बीएन मलिक ने 1952 में नेहरू को आगाह किया था लेकिन उन्होंने पूरी तरह अनदेखी की। सड़क 1957 में बनकर तैयार हो गई। 1959 में नेहरू ने संसद में कहा: 'इन अफवाहों पर ध्यान मत दो'। आठ साल का झूठ, जबकि भारत की जमीन को हथिया लिया गया।'' पश्चिम बंगाल का आधा क्षेत्र पाकिस्तान को दे दिया बेरुबारी पर नेहरू-नून के समझौते का जिक्र करते हुए बलूनी ने आरोप लगाया कि प्रथम प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल का आधा क्षेत्र बिना कैबिनेट मंजूरी के पाकिस्तान को दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया, ''कोई कैबिनेट मंजूरी नहीं। पश्चिम बंगाल सरकार से कोई परामर्श नहीं। उच्चतम न्यायालय ने नाखुशी जताते हुए कहा था: प्रधानमंत्री भारतीय जमीन को उपहार में नहीं दे सकते। नेहरू ने अपने समर्पण को कानूनी रूप देने के लिए नौवां संविधान संशोधन कराया।'' जनमत संग्रह का ऐलान पाक को कूटनीतिक हथियार भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि नेहरू ने मंत्रिमंडल की मंजूरी के बिना कश्मीर में 'सार्वजनिक रूप से' जनमत संग्रह का ऐलान कर दिया और पाकिस्तान को ''एक स्थायी कूटनीतिक हथियार'' दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू ने 1960 में सारजा माजरा, रख हरदित सिंह, पठानके और फिरोजपुर के हिस्सों को पाकिस्तान को सौंप दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका समझौते के खिलाफ मंगलवार को आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री ने 'एपस्टीन फाइल्स' जारी होने की धमकियों के बाहरी दबाव में समझौते को मंजूरी दी।  

हिंदू लड़की-मुस्लिम युवक की शादी पर सवाल क्यों? सुप्रीम कोर्ट ने कहा—समाज को रखना होगा ‘मोटी चमड़ी’

नई दिल्ली 'Yadav Ji ki love story' फिल्म के खिलाफ दाखिल याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। याचिका के जरिए विश्व यादव समाज ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। कोर्ट का कहना है कि फिल्म के नाम में ऐसा कोई भी शब्द नहीं है, जो यादव समुदाय की खराब छवि पेश कर रहा हो। इस दौरान अदालत ने हाल ही में घूसखोर पंडत के मामले में दिए फैसले का भी जिक्र किया। याचिका में फिल्म बैन की मांग याचिका में कहा गया था कि फिल्म का नाम यादव समाज की एक आपत्तिजनक तस्वीर बना रहा है। साथ ही दावा किया गया कि फिल्म में दिखाया गया है कि यादव समाज से आने वाली एक हिंदू लड़की मुस्लिम पुरुष के प्रेम में पड़ जाती है। याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वकील का कहना था कि फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है। सुप्रीम कोर्ट नहीं हुआ सहमत याचिका पर जस्टिस बीवी नागरत्न और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच सुनवाई कर रही थी। बेंच ने सवाल किया, 'हिंदू लड़की का मुस्लिम लड़के से शादी करना देश के ताने बाने को खराब कर रहा है।' बेंच ने कहा, 'हमने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री देखी है। मुख्य शिकायत यह है कि आने वाली फिल्म का नाम समाज में यादव समुदाय की छवि खराब करता है। इसलिए तर्क दिया जा रहा है कि फिल्म का नाम बदला जाना चाहिए। हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि किसी फिल्म का शीर्षक किसी समुदाय को गलत तरीके से कैसे पेश कर सकता है। फिल्म के शीर्षक में कहीं भी ऐसा कोई शब्द नहीं है जो यादव समुदाय को खराब रोशनी में दिखाता हो। ये आशंकाएं पूरी तरह से निराधार हैं।' दूसरी फिल्म का किया जिक्र अदालत ने कहा कि घूसखोर का अंग्रेजी में मतलब भ्रष्ट होता है। ऐसे में एक समुदाय से गलत बात जोड़ी जा रही थी। कोर्ट ने कहा, 'इस केस में ऐसी कोई भी गलत बात यादव समाज से नहीं जोड़ी गई है।' उन्होंने कहा कि यह नाम किसी भी तरह से यादव समुदाय को गलत तरह से नहीं दिखा रहा है। इस दौरान बेंच ने बेंडिट क्वीन फिल्म का भी जिक्र किया। बेंच ने कहा, 'बेंडिट क्वीन फिल्म में वो कह रहे थे कि गुज्ज समुदाय को गलत तरीके से दिखाया गया है। तब इस कोर्ट ने कहा था कि नहीं ऐसा नहीं है।' कोर्ट ने कहा, 'मोटी चमड़ी रखें। यह काल्पनिक है। एक सप्ताह में सब खत्म हो जाएगा। कोई भी आजकल थियेटर नहीं जा रहा है। सभी फोन पर देख रहे हैं।'  

UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, CJI सूर्यकांत बोले—‘सीमा पार कर रही हैं ऐसी याचिकाएं’

नई दिल्ली UGC यानी विश्विद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में फिर याचिका दाखिल हुई है। बुधवार को इस याचिका पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि याचिका मीडिया में पब्लिसिटी हासिल करने के मकसद से की गई है। उन्होंने पूछा कि इस याचिका में अन्य याचिकाओं से अलग क्या है। एडवोकेट ने कहा, 'मेरा आधार यह है कि नियमों को अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बनाया गया है।' हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब इक्विटी रेगुलेशंस के खिलाफ किसी ने शीर्ष न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इसपर सीजेआई ने कहा कि इसके जरिए मीडिया में चर्चा में आने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, 'यह जनहित याचिका (PIL) क्यों? अब यह हद से ज्यादा हो रहा है। यह सब केवल बाहर मीडिया को संबोधित करने के लालच में किया जा रहा है। वरना आप यूट्यूब पर कैसे आएंगे! इस याचिका में ऐसा क्या अलग है जो दूसरी याचिकाओं में नहीं था?' जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने लगा दी थी रोक सुप्रीम कोर्ट ने नियमों पर जनवरी में रोक लगा दी थी। न्यायालय ने कहा कि यह प्रारूप 'प्रथम दृष्टया अस्पष्ट' है, इसके 'बहुत व्यापक परिणाम' हो सकते हैं और इसका प्रभाव 'खतरनाक रूप से' समाज को विभाजित करने वाला भी हो सकता है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा था कि विनियमों में 'कुछ अस्पष्टताएं' हैं और 'इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।' दरअसल, नियमों को लेकर दलीलें दी गईं थीं कि यूजीसी ने जाति-आधारित भेदभाव की 'गैर-समावेशी' परिभाषा अपनाई है और कुछ श्रेणियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा है। इन नियमों के खिलाफ देश में कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए जिसमें छात्र समूहों और संगठनों ने इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग की। इन याचिकाओं में इस विनियम को इस आधार पर चुनौती दी गई कि जाति-आधारित भेदभाव को सिर्फ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों के खिलाफ भेदभाव के रूप में ही परिभाषित किया गया है। क्या हैं नियम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 में यह अनिवार्य किया गया है कि इन समितियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय से तथा दिव्यांग एवं महिला सदस्य शामिल होने चाहिए।  

दो दशक का सफर: इजरायल के साथ पीएम मोदी की हर यात्रा ने रचा इतिहास

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय इजरायल की यात्रा पर हैं। उनकी यह यात्रा ऐतिहासिक होगी। वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे, जो इजरायली संसद 'नेसेट' को संबोधित करेंगे। इसी बीच, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर 'मोदी आर्काइव' नामक अकाउंट ने उनकी ऐतिहासिक इजरायली यात्राओं और उससे जुड़ी तस्वीरों को शेयर किया है। 'मोदी आर्काइव' के अनुसार, नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर 2006 में पहला इजरायल दौरा किया था। वे इजरायल की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय कृषि प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी 'एग्रीटेक-2006' में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ गए थे, जिसमें भारत के कृषि क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। बतौर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-इजरायल बिजनेस फोरम में 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' (एक बूंद अधिक फसल) स्लोगन के साथ गुजरात का एग्रीकल्चरल विजन पेश किया। शायद यह पहली बार था, जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस बात को कहा, जो आगे चलकर 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' का आधिकारिक आदर्श वाक्य बन गया। गुजरात डेलीगेशन की इंटरनल रिपोर्ट में बताया गया कि उनके प्रेजेंटेशन को 'सबसे ज्यादा तालियां और तारीफ' मिली। 11 साल बाद 2017 में प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने इजरायल का दौरा किया। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी। मोदी आर्काइव में बताया गया है, "2006 में जो एग्रीकल्चर थीम चली थी, वह इस बार भी जारी रही।" इसमें कहा गया है कि इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू ने तेल अवीव स्थित डेंजीगर फ्लावर फार्म (पुष्प उद्यान) का दौरा किया। यहां इजरायल की लीडिंग फ्लावर जेनेटिक्स कंपनी ने एक नया सफेद गुलदाउदी बनाया था और उसका नाम 'मोदी' रखा। फूलों की खेती इजरायल के सबसे एडवांस्ड एग्रीकल्चरल एक्सपोर्ट सेक्टर में से एक है। फ्लावर फार्म का दौरा इस बात का संकेत था कि इजरायली एग्रीकल्चरल इनोवेशन कहां तक पहुंच गया है। इसमें आगे कहा गया है कि यात्रा के दौरान कृषि क्षेत्र में साइन किया गया 3-साल का वर्क प्रोग्राम उस पहल का औपचारिक संस्थानीकरण था, जिसकी शुरुआत बतौर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से एग्रीटेक-2006 में की थी। 'मोदी आर्काइव' में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने जिस रिलेशनशिप पर काम किया था, वह प्रधानमंत्री के तौर पर 'सरकार-से-सरकार' की रूपरेखा बन गई। बाद में तेल अवीव में भारतीय प्रवासियों को अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में इजरायल का सहयोग भारत को दूसरी ग्रीन रेवोल्यूशन में मदद कर सकता है। 'मोदी आर्काइव' में कहा गया कि 2006 और 2017 की यात्राओं को जोड़ने वाली कड़ी कृषि और जल संसाधन प्रबंधन है। दोनों देश अलग-अलग दृष्टिकोणों से समान समस्याओं पर काम कर रहे थे। भारत के पास व्यापक पैमाना, कृषि भूमि और आवश्यकता थी। वहीं, इजरायल ने सीमाओं को तकनीक में बदलते हुए ड्रिप सिंचाई, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग और डीसैलिनेशन जैसे सिस्टम विकसित किए। मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने 2006 में ही पहचान लिया था कि ये वही तकनीकें हैं जिनकी गुजरात और भारत को जरूरत है और वे प्रधानमंत्री के रूप में इसे राष्ट्रीय प्रतिबद्धता बनाने के लिए वापस आए। इसमें कहा गया कि जब वे 2017 में पहुंचे तो कृषि सहयोग का एजेंडा राज्य यात्रा की तैयारी कर रहे अधिकारियों की ओर से अचानक तैयार नहीं किया गया था। इसकी रूपरेखा मई 2006 की एक दोपहर से ही बननी शुरू हो गई थी, जब मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने 'एग्रीटेक-2006' में एक हजार से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने प्रेजेंटेशन दी थी और इस विश्वास के साथ लौटे थे कि भारत और इजरायल मिलकर क्या बना सकते हैं। 9 साल के बाद फिर 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल दौरे पर गए हैं। इस बार भी भारत-इजरायल का एजेंडा कृषि, जल प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।

पीएम मोदी के इजरायल आगमन पर गूंजा राष्ट्रगान, नेतन्याहू ने किया शानदार वेलकम

येरूशलेम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर इजरायल की धरती पर कदम रख दिया है. वो आज अपने पुराने दोस्त पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से मिलने पहुंचेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दो दिवसीय इजरायल दौरा बेहद व्यस्त और ऐतिहासिक कार्यक्रमों से भरा हुआ है. बुधवार दोपहर को तेल अवीव पहुंचने के बाद, पीएम मोदी सबसे पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एयरपोर्ट पर ही एक संक्षिप्त मुलाकात करेंगे और फिर वहां से सीधे येरूशलम के लिए रवाना होंगे. आज के दिन का सबसे बड़ा और यादगार कार्यक्रम इजरायली संसद ‘नेसेट’ (Knesset) में उनका ऐतिहासिक संबोधन है, जिसके बाद वह नेतन्याहू द्वारा दिए गए एक प्राइवेट डिनर में शामिल होंगे. इजरायल में पीएम मोदी के स्वागत की तैयारी इजरायल में पीएम मोदी के ग्रैंड स्वागत की तैयारी हो चुकी हैं. ये तैयारी इजरायल के मशहूर अखबार ‘द जेरूसलम पोस्ट’ के फ्रंट पेज पर दिखाई दी, जिसमें पीएम मोदी के स्वागत में पूरा का पूरा स्पेशल एडिशन ही निकाल दिया है, जिसके फ्रंट पेज पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘नमस्ते’ लिखा है. यह सिर्फ एक दौरा नहीं है, बल्कि दो पुरानी सभ्यताओं के बीच दोस्ती का एक नया और सुनहरा अध्याय है, जो रक्षा, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने जा रहा है. विदेशी अखबार के पहले पन्ने पर हिंदी का शब्द ‘नमस्ते’ चमकता हुआ दिखाई दिया. अखबार के एडिटर-इन-चीफ ज्वीका क्लेन ने सोशल मीडिया पर इस फ्रंट पेज को शेयर किया, जिसमें पीएम मोदी की हाथ हिलाते हुए एक बड़ी फोटो लगी है. यहूदी अखबार का फ्रंट पेज वायरल अखबार की हेडलाइंस चिल्ला-चिल्ला कर कह रही हैं- ‘वेलकम, मोदी’. पूरे पहले पन्ने पर सिर्फ भारत और इजरायल की गहरी होती पार्टनरशिप की कहानियां हैं. हिब्रू भाषा के साथ ‘नमस्ते’ का लिखा होना यह साफ दिखाता है कि इजरायल के दिल में भारत के लिए कितना प्यार और सम्मान है. यह दौरा इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि पीएम मोदी इजरायली संसद (Knesset) को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. संसद में मोदी का भाषण दोनों देशों के रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा. इजरायल में भारत के राजदूत जेपी सिंह का कहना है कि इस दौरे का मकसद सिर्फ कुछ पुराने समझौतों तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि व्यापार और टेक्नोलॉजी के हर क्षेत्र में साथ मिलकर काम करना है. मोदी के इजरायल दौरे से पाकिस्तान को 'घबराहट' पाकिस्तान के प्रमुख अखबार 'Dawn' ने अपनी वेबसाइट पर एक आर्टिकल में लिखा, भारत और इजरायल के बीच पूर्ण कूटनीतिक संबंध साल 1992 में बने थे. हालांकि 2014 में मोदी के सत्ता संभालने के बाद इस रिश्ते में और गर्मजोशी आई है. मोदी ने 2017 में प्रधानमंत्री के तौर पर इजरायल का पहला दौरा किया था जिसके अगले साल नेतन्याहू ने भी भारत का दौरा किया. दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को दोस्त कहा था. डॉन ने लिखा है, 'मई 2025 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति बनी तो इजरायल की मिलिट्री ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग पाकिस्तान के खिलाफ डिफेंस स्ट्रैटजी के रूप में किया गया था. पाकिस्तानी वेबसाइट ने लिखा, यह व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में भारत-इजरायल की साझेदारी को दर्शाता है. लेकिन इजरायल के साथ ही भारत खाड़ी देशों और ईरान के साथ भी मजबूत रिश्ते बनाए हुए है. उदाहरण के लिए भारत ने ईरान का चाबहार पोर्ट डेवलप किया है जो अफगानिस्तान के लिए एक ट्रेड गेटवे है. अफगानिस्तान के तालिबानी अधिकारियों के साथ भी भारत ने रिश्ते कायम किए हैं.' डॉन ने कांग्रेस पार्टी की सीनियर नेता प्रियंका गांधी के बयान का भी जिक्र किया है. प्रियंका गांधी ने PM मोदी के दौरे को लेकर बुधवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था कि उन्हें उम्मीद है कि मोदी इजरायल की संसद को संबोधित करते समय गाजा में हजारों बेगुनाह पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की हत्या का जिक्र करेंगे.  पाकिस्तानी टीवी चैनल जियो न्यूज के 'कैपिटल टॉक' शो में पीएम मोदी के इजरायल दौरे को लेकर हेडलाइन दी गई है- पीएम मोदी का इजरायल दौरा पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी. वहां के मीडिया में सबसे ज्यादा चिंता जताई जा रही है इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उस बयान को लेकर जिसमें उन्होंने कट्टर शिया और सुन्नी एक्सिस को खतरा बताते हुए भारत, ग्रीस, साइप्रस और कुछ अरब, एशियाई और अफ्रीकी देशों के साथ एक गठजोड़ बनाने की बात कही. पाकिस्तानी संसद में भी इस बयान का विरोध करते हुए मंगलवार शाम को एक प्रस्ताव पारित किया गया है. पाकिस्तानी एंकर हामिद मीर ने कहा कि ये मामला बहुत नाजुक है क्योंकि चंद दिनों पहले अमेरिका के राजदूत ने एक इंटरव्यू में 'ग्रेटर इजरायल' की बात कही थी. इसकी सऊदी अरब, मिस्र और जॉर्डन समेत कई अरब देशों ने कड़ी आलोचना की थी. एक तरफ नेतन्याहू पीएम मोदी का स्वागत कर रहे हैं, दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर हमले का मंसूबा बनाए हुए हैं. बहुत सारे मामलों पर ये सारे इकट्ठे हो गए हैं. पाकिस्तान के लिए बहुत चिंता वाली स्थिति बन गई है. अफगानिस्तान से पाकिस्तान पर हमले हो रहे हैं और अगर ईरान और अमेरिका की जंग शुरू हो गई तो पाकिस्तान के लिए तो बड़े मुश्किल भरे हालात हो जाएंगे. PM Modi-Netanyahu की दोस्ती का नया ‘पावर पैक’ प्लान प्रधानमंत्री मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू, जिन्हें अक्सर ‘जिगरी दोस्त’ कहा जाता है, इस मुलाकात में कई बड़े मुद्दों पर मुहर लगाने वाले हैं. यह दोस्ती अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जमीन पर भी बड़े बदलाव लाने वाली है. आगे जानें पीएम मोदी और नेतन्याहू के बीच किन मुद्दों पर बात होने वाली है.     रक्षा और सुरक्षा- नए हथियारों और डिफेंस टेक्नोलॉजी पर बड़ी चर्चा.     बैंकिंग सिस्टम- क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट और बैंकिंग सिस्टम को और आसान बनाना.     खेती और पानी- इजरायल की मॉडर्न टेक्नोलॉजी से भारतीय किसानों की मदद.     साइंस और इनोवेशन- दोनों देशों के वैज्ञानिक मिलकर नई खोजें करेंगे. पीएम मोदी का इजरायल दौरा कंफर्म करे हुए इजरायली पीएम नेतन्याहू ने मोदी को अपना ‘प्रिय मित्र’ बताते हुए इस दौरे को पहले ही ‘ऐतिहासिक’ करार दिया था. कैबिनेट मीटिंग की शुरुआत में भी उन्होंने इसी दौरे का जिक्र किया गया. मोदी … Read more

हिमाचल की IPS अधिकारी अदिति सिंह की छुट्टियों को लेकर DGP ने लिया फैसला, ड्यूटी जूनियर को दी

शिमला हिमाचल प्रदेश में एक अभूतपूर्व प्रशासनिक कदम उठाते हुए राज्य के डीजीपी अशोक तिवारी ने 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी अदिति सिंह की जिम्मेदारियां उनकी बार-बार की छुट्टियों के दौरान एक अधीनस्थ अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया है. 25 दिन की छुट्टी से प्रभावित हुआ कामकाज आदेश में कहा गया है कि धर्मशाला स्थित स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (SV&ACB) के नॉर्दर्न रेंज में एसपी के पद पर तैनात अदिति सिंह 8 जनवरी से 22 फरवरी के बीच कुल 25 दिनों की छुट्टी पर रहीं. इससे उनके कार्यालय के कामकाज पर असर पड़ा. एडिशनल एसपी को सौंपी गई जिम्मेदारी निर्देश के अनुसार, एडिशनल एसपी ब्रह्म दास भाटिया को अगली सूचना तक उनकी जिम्मेदारियां संभालने को कहा गया है. साथ ही यह भी कहा गया है कि कार्य की निरंतरता बनाए रखने के लिए वह अदिति सिंह की मौजूदगी में भी उनसे जुड़े रहेंगे. पहले भी रहीं थीं मुख्यालय से अनुपस्थित डीजीपी के आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि अदिति सिंह दिसंबर में नैनीताल में आयोजित एक आधिकारिक मिड-करियर इंटरैक्शन प्रोग्राम के कारण भी मुख्यालय से अनुपस्थित रही थीं. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है. कब-कब ली छुट्टी डीजीपी अशोक तिवारी के आदेश में अदिति सिंह द्वारा ली गई छुट्टियों का भी विस्तृत ब्योरा दिया गया है. आदेश के अनुसार, अदिति सिंह 8 जनवरी से 11 जनवरी तक क्रमशः दो दिन के आकस्मिक अवकाश और बीमार अवकाश पर रहीं. इसके बाद उन्होंने 12 जनवरी को एक दिन का आकस्मिक अवकाश लिया. फिर 16 जनवरी से 19 जनवरी के बीच उन्होंने तीन दिन का आकस्मिक अवकाश और एक दिन का बीमार अवकाश लिया. बाद में 8 फरवरी से 22 फरवरी तक वह 13 दिन के अर्जित अवकाश और दो दिन के बीमार अवकाश पर रहीं. आदेश में कहा गया है, 'यह देखा गया है कि अदिति सिंह, आईपीएस, पुलिस अधीक्षक, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी), नॉर्दर्न रेंज, धर्मशाला, बार-बार अवकाश पर जा रही हैं, जिसके कारण एसपी, एसवी एंड एसीबी, नॉर्दर्न रेंज, धर्मशाला के कार्यालय के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.'