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सोमाली जेट और अल नीनो का असर, देश में 40% कम बारिश से हालात बिगड़े

नई दिल्ली  देश के सुदूर दक्षिणी छोर केरल में एक तो लेट से मानसून टकराया था। 1 जून को आने वाला यह मानसून इस बार 4 जून को आया। शुरुआत में इसकी रफ्तार मध्य भारत तक ठीक-ठाक रही, मगर जब तक यह ठीक से भिगोता हुआ आगे बढ़ता कि इसकी रफ्तार पर ब्रेक ही लग गया। इसके बाद तो इसके करीब-करीब गायब होने की बातें भी आईं। बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों को कवर करने के बाद यह मानसून अचानक लापता हो गया। अब पूरा उत्तर भारत मानसून का बेसब्री से बाट जोह रहा है। खासकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान से लेकर महाराष्ट्र, गुजरात तक में लोग मानसून के स्वागत में खड़े हैं। 12 दिनों से तेलंगाना-महाराष्ट्र में अटका था मानसून ऐसी रिपोर्ट हैं कि महाराष्ट्र और तेलंगाना में यह मानसून बीते 12 दिनों से अटका हुआ था। मगर, अब इसके आगे बढ़ने की संभावना है। मानसून के लापता होने में सोमाली जेट भी एक बड़ा कारण है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सोमाली जेट के कमजोर विकास ने मानसून की रफ्तार को थाम दिया है। सोमाली जेट क्या होता है, जिसने बिगाड़ा मानसून का मूड     सोमाली जेट एक भूमध्यरेखीय वायु प्रणाली है, जो हिंद महासागर में अफ्रीका के पूर्वी तट के पास बनती है। भारतीय मानसून के लिए अहम सोमाली जेट को फाइंडलेटर जेट भी कहते हैं।     सोमाली जेट पूर्वी अफ्रीका में अपेक्षाकृत कम वर्षा का कारण बनता है। दरअसल सोमाली जेट एक निम्न-स्तरीय वायु प्रवाह है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून को भारत की ओर लाने में मदद करता है।     सोमाली जेट के कमजोर पड़ने से भारत में मानसून कमजोर पड़ जाता है।     बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव प्रणालियों का भी अभाव रहा है, जो आमतौर पर मानसून को अंदरूनी इलाकों तक खींचने में मददगार होती हैं।     इस बार अल नीनो की वजह से भी मानसून के कमजोर पड़ने की आशंका भी मौसम वैज्ञानिक बार-बार जता रहे हैं। 1 से 18 जून तक 40 फीसदी कम बारिश     मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जून से 18 जून के बीच देश में बारिश औसत से 40% कम रिकॉर्ड की गई है।     आमतौर पर 01 जून से 17 जून के बीच देश में औसतन 80.6 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस साल अब तक सिर्फ 48.5 मिलीमीटर बारिश हुई है।     मध्य भारत क्षेत्र में दर्ज की गई है, जहां 01 जून से 18 जून के बीच औसत से 63% कम बारिश दर्ज की गई है। 23 जून तक छत्तीसगढ़ पहुंचेगा भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 23 जून तक इसके छत्तीसगढ़ पहुंचने की संभावना है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में मानसून के लिए जरूरी सिस्टम सक्रिय हो गया है। मध्य भारत में बन रहा चक्रवातीय घेरा     इससे मध्य भारत में चक्रवातीय घेरा बना हुआ है, जिससे मानसून के बादल उत्तर भारत की तरफ आ सकते हैं। मानसून 15 दिन में 19 राज्यों तक पहुंच चुका है, लेकिन 8 जून से तेलंगाना में अटका हुआ है।     इससे पहले बिहार में शुक्रवार को बिजली गिरने से 6 लोगों की और झारखंड में 8 लोगों की जान गई। राजस्थान के 12 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूरे महाराष्ट्र में हाहाकार मचा, खुले में रात बिता रहे लोग मानसून की इस बेरुखी की वजह से महाराष्ट्र में पानी को लेकर हाहाकार मचा है। पुणे में पानी की सप्लाई के लिए ऑड-इवन फॉर्मूला लागू किया गया है मुंबई में मारे गर्मी के लोग समुद्री तट के किनारे खुले में रात बिता रहे हैं। यहां 11 जून को ही मानसून मुंबई पहुंचने वाला था, मगर अभी तक इसका अता-पता नहीं है। इन राज्यों तक पहुंच चुका है मानसून मौसम विभाग के अनुसार, मानसून केरल, कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मणिपुर, त्रिपुरा, असम, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा तक पहुंच चुका है। 20 जून से 5 जुलाई के बीच इन राज्यों में मानसूनी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, मानसून अब छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में 20 जून से 5 जुलाई तक पहुंचेगा। मध्य और दक्षिण भारत में आंधी-तूफान, बंगाल में भारी बारिश मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी मध्य प्रदेश में 21 से 23 जून के बीच आंधी-तूफान और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। वहीं, महाराष्ट्र के विदर्भ में 19 से 23 जून तक ऐसा ही मौसम रहने की उम्मीद है। छत्तीसगढ़ में भी 19 से 23 जून के बीच आंधी-तूफान के साथ बिजली गिरने की आशंका है। मौसम का यह बदलाव सिर्फ मध्य भारत तक सीमित नहीं। तमिलनाडु और पुडुचेरी में 19 से 21 जून के बीच कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है, जबकि केरल में भी 19 से 23 जून के बीच भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, बंगाल के कोलकाता, सिलिगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों में शनिवार को भी भारी बारिश हुई। दार्जिलिंग में बालासन नदी उफान पर आ गई। इससे नदी पर ह्यूम पाइप से बना पुल टूट कर बह गया। मानसून की कमी के बीच पारा 40 डिग्री के पार     मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना के कई शहरों में बुधवार को पारा 40°C से ज्यादा रहा। देश में सबसे ज्यादा पारा उत्तर प्रदेश के बांदा में 44.2°C दर्ज किया गया।     वहीं यूपी के प्रयागराज में 43.6°C, एमपी के खजुराहो 42.4°C, महाराष्ट्र के ब्रह्मपुरी में 42.1°C, छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में 42°C, बिहार के छपरा में 41.8°C और झारखंड के डाल्टनगंज में 40°C रहा। 21 और 22 जून को क्या होगी बारिश     21 जून को बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बारिश की संभावना है। बिहार में कुछ जगहों पर 50-70kmph की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।     असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है।     राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। कई इलाकों में 40-60kmph की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। … Read more

घोड़ों की उत्पत्ति पर बदली वैज्ञानिक समझ, चीन से मिला बड़ा सबूत

बीजिंग  घोड़ों के विकास के इतिहास को एक नई फॉसिल DNA स्टडी ने बदल दिया है। इस स्टडी से पता चला है कि उत्तर-पूर्वी चीन का विलुप्त हो चुका 'डालियन घोड़ा' (Dalian horse) उत्तरी अमेरिका और यूरेशिया के बीच जेनेटिक कड़ी का काम करता था। सबसे पहले कहां पाए गए घोड़े? सालों से एक बात मानी जा रही है कि घोड़े यूरोप से अमेरिका लाए गए थे। उन्हें स्पेनिश विजेताओं ने अमेरिका पहुंचाया और वहां के मूल निवासियों को एक ऐसे जीव से चौंका दिया था जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। लेकिन हाल की जीनोमिक रिसर्च ने इस कहानी को पूरी तरह से बदल दिया है। घोड़ों की उत्पत्ति लाखों साल पहले उत्तरी अमेरिका में हुई थी और वे चीन में मौजूद एक आश्चर्यजनक जेनेटिक कड़ी की वजह से ही यूरोप तक पहुंच पाए। डालियन घोड़ा (Dalian Horse) 'स्टेट की लेबोरेटरी ऑफ जियोमाइक्रोबायोलॉजी एंड एनवायर्नमेंटल चेंजेज' के शोधकर्ताओं के मुताबिक, डालियन घोड़ा – जिसे कभी उत्तर-पूर्वी चीन तक सीमित एक स्थानीय अनोखा जीव माना जाता था, उसमें अमेरिका से जुड़ी खास जेनेटिक खूबियां पाई गई थीं। उसने ये खूबियां साइबेरिया में घोड़ों की प्राचीन आबादी तक पहुंचाईं। इस जीन प्रवाह (gene flow) का मतलब है कि जिन वंश-परंपराओं से बाद में आधुनिक यूरोपीय घोड़े बने, उन्हें अपनी अमेरिकी जड़ें इसी चीनी घोड़े से मिलीं। घोड़ों ने तय किया 50,000 साल का सफर इक्वीड्स (घोड़े के परिवार के जीव) की उत्पत्ति शुरुआती इओसीन काल में उत्तरी अमेरिका में हुई थी। 'इक्वस' (Equus) जीनस, जो सबसे पहले करीब 4 से 5 मिलियन साल पहले सामने आया था, एकमात्र जीवित वंश है जिसमें सभी आधुनिक घोड़े, गधे और जेबरा शामिल हैं। फॉसिल रिकॉर्ड्स के मुताबिक, 'इक्वस' करीब 2.6 मिलियन साल पहले बेरिंग लैंड ब्रिज के जरिए उत्तरी अमेरिका से यूरेशिया में फैला और फिर उसमें बड़े पैमाने पर विकासवादी विविधता आई। विलुप्त हो गया डालियन घोड़ा स्टेबल आइसोटोप एनालिसिस से पता चला कि डालियान घोड़ा खास तरह की घास खाने वाला जानवर था। जब लगभग 40,000 साल पहले माहौल बदला और नमी बढ़ गई, जिससे सूखे घास के मैदानों की जगह पीट-लैंड और वेट-लैंड (दलदली और गीली जमीन) ने ले ली, तो सीमित खान-पान की वजह से यह खुद को ढाल नहीं पाया। डालियान घोड़े के बड़े शरीर और सीमित इकोलॉजिकल प्लास्टिसिटी (पर्यावरण के हिसाब से खुद को बदलने की सीमित क्षमता) की वजह से वग अच्छी क्वालिटी का चारा खत्म होने पर जिंदा नहीं रह सका। विलुप्त होने का यह पैटर्न उस दौर के दूसरे बड़े शाकाहारी जानवरों, जैसे उत्तरी अमेरिकी घोड़े और विशाल ऊंट, जैसा ही है।

अमेरिका-ईरान डील पर सियासी घमासान तेज, रिपब्लिकन पार्टी में भी मतभेद गहराए

 वाशिंगटन  ईरान के साथ हुए समझौते को आलोचकों द्वारा कमजोर और आत्मसमर्पण करार दिए जाने के बाद चौतरफा घिरे राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने इस बात से साफ इनकार किया कि वह तेहरान के सामने झुक गए हैं या उसे भारी वित्तीय राहत सौंपने जा रहे हैं। ट्रंप ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा, "हम किसी बेबसी में नहीं मिले थे, बल्कि ईरान हताश था। वे पूरी तरह खत्म हो चुके हैं! हम 60 दिनों की इस अवधि को देखेंगे। उन्हें कोई पैसा नहीं मिल रहा, 10 सेंट भी नहीं!" जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद वर्साय में ट्रंप द्वारा दूरस्थ रूप से हस्ताक्षरित इस प्रारंभिक समझौते का उद्देश्य एक व्यापक शांति की दिशा में 60 दिनों की तेज गति से काम शुरू करना था। इसके विपरीत, इस कदम ने देश के भीतर एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। रिपब्लिकन खेमे में दरार रिपब्लिकन सीनेटर बिल कैसिडी उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने अपनी पार्टी के रुख से अलग हटकर इस समझौते की तीखी आलोचना की है। उन्होंने इसे दशकों की सबसे खराब विदेश नीति की भूल करार दिया है। दूसरी ओर, लेट-नाइट कॉमेडियन्स और सोशल मीडिया ट्रोल्स के लिए यह एक बड़ा मुद्दा बन गया है, जो इस समझौते की तुलना युद्ध जीतने और उसकी रसीद खो देने से कर रहे हैं। हालांकि इस उपहास का बड़ा हिस्सा राजनीतिक है, लेकिन व्हाइट हाउस के लिए सबसे गंभीर समस्या यह है कि अब आलोचना सिर्फ डेमोक्रेट्स तक ही सीमित नहीं रह गई है। ट्रंप ने खुद भी ऐसे बयान देकर अपनी मुश्किलें बढ़ा दी हैं जिसने अमेरिका के इजरायल-समर्थक गुटों को हैरान कर दिया है। उन्होंने ईरान के कुछ बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता रखने के अधिकार का समर्थन किया और ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार के महत्व को कम करके आंका। अमेरिकी राष्ट्रपति अब अप्रत्यक्ष रूप से ईरान के नागरिक परमाणु कार्यक्रम के अधिकार को भी स्वीकार कर रहे हैं, जो उनके पुराने वादे से बिल्कुल उलट है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका यूरेनियम के किसी भी संवर्धन की अनुमति नहीं देगा। हालांकि, वह अब भी इस बात पर अड़े हैं कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ओबामा बनाम ट्रंप नीति पर विशेषज्ञों ने घेरा हालांकि, ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह समझौता एक मास्टरस्ट्रोक है और बराक ओबामा के 2015 के जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन(JCPOA) से कहीं बेहतर है, लेकिन नीति विशेषज्ञ इस दावे को चुनौती दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जहां ओबामा का समझौता कई सौ पन्नों का एक बेहद विस्तृत और तकनीकी दस्तावेज था, वहीं ट्रंप का यह महज डेढ़ पन्ने का अधूरा मसौदा केवल एक हाथ मिलाने के बदले तेहरान को सब कुछ सौंप देता है। इस स्थिति के कारण अब कैपिटल हिल के सांसद खुलकर बगावत पर उतर आए हैं, जिनमें कई ऐसे रिपब्लिकन वफादार भी शामिल हैं जो आमतौर पर ट्रंप की बातों को पत्थर की लकीर मानते हैं। पाकिस्तान को पछाड़ कतर बना नया बिचौलिया इस बीच, वेंस की स्विट्जरलैंड यात्रा स्थगित होने से मध्यस्थता करने वाले देशों का क्षेत्रीय समीकरण पूरी तरह बदल गया है। पाकिस्तान, जिसने खुद को मुख्य राजनयिक मध्यस्थ के रूप में स्थापित किया था और अप्रैल में आमने-सामने की वार्ताओं की गर्व से मेजबानी की थी, अचानक खुद को इस रेस से बाहर पा रहा है। इस्लामाबाद के अधिकारी इस उम्मीद में थे कि वे अमेरिका और ईरान के बीच इस ऐतिहासिक समझौते को अमली जामा पहनाकर एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक जीत हासिल करेंगे। लेकिन कतर के अचानक एक अमीर और पसंदीदा मध्यस्थ के रूप में उभरने से पाकिस्तान की स्थिति बेहद असहज हो गई है। वह अब उस शादी के मेहमान जैसा दिख रहा है जिसे ऐन वक्त पर पता चला कि शादी का वेन्यू ही बदल गया है। मागा गठबंधन में फूट इस समझौते का असली नुकसान मागा गठबंधन की आंतरिक शांति को हुआ है। एक तीखे प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वेंस ने कूटनीतिक शालीनता को छोड़ सीधे यरुशलम पर हमला बोला। उन्होंने इजरायली अधिकारियों को दोटूक शब्दों में कहा कि वे जागें और जमीनी हकीकत को समझें। इसके साथ ही उन्होंने इजरायली कैबिनेट को याद दिलाया कि उनके दो-तिहाई रक्षा हथियारों का खर्च अमेरिकी टैक्सपेयर्स उठाते हैं। वेंस ने गुस्से में कहा कि अगर मैं इजरायल सरकार की कैबिनेट में होता, तो मैं पूरी दुनिया में बचे अपने इकलौते शक्तिशाली सहयोगी पर इस तरह हमला नहीं कर रहा होता। यह सार्वजनिक टकराव मागा व्हाइट हाउस और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच संबंधों में आई अचानक गिरावट को उजागर करता है। देश में आगामी चुनावों का सामना कर रहे इजरायली पीएम ने दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना को हटाने से साफ इनकार कर दिया है, जो एक तरह से ट्रंप के युद्धविराम के प्रस्ताव को खारिज करना है। इस अभूतपूर्व दरार ने अमेरिका-इजरायल संबंधों को एक बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण मोड़ पर खड़ा कर दिया है।  

ट्रंप बोले इजरायल के साथ मजबूत साझेदारी, लेकिन नेतन्याहू को रखना होगा “संतुलित”

 वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शनिवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तारीफ करते हुए उन्हें योद्धा पीएम कहा है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब लेबनान में इजरायली सैन्य अभियानों को लेकर दोनों नेताओं के बीच गंभीर मतभेद और तनाव की खबरें सामने आ रही हैं। वाशिंगटन के पास कतर द्वारा उपहार में दिए गए एक नए एयर फोर्स वन विमान का अनावरण करने के बाद बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ बहुत अच्छी तरह से लड़ाई लड़ी। वह 28 फरवरी को शुरू हुए उस युद्ध का जिक्र कर रहे थे जिसे दोनों देशों ने मिलकर शुरू किया था। ट्रंप ने कहा कि जाहिर है कि हमने इजरायल के साथ मिलकर बहुत अच्छी लड़ाई लड़ी और इजरायल के साथ हमारे बहुत अच्छे संबंध रहे हैं। हम बहुत मजबूत थे। और बीबी नेतन्याहू एक योद्धा प्रधानमंत्री हैं, और उन्हें इसी रूप में पहचाना जाना चाहिए। उन्हें इसका पूरा श्रेय दिया जाना चाहिए। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब इजरायली प्रधानमंत्री पर लेबनान में युद्ध जारी रखने के लिए भारी राजनीतिक दबाव बना हुआ है। थोड़ा संतुलित रखने की कोशिश एक्सिओस न्यूज आउटलेट के अनुसार, एक अलग साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि नेतन्याहू के साथ उनके मजबूत लेकिन बेहद नियंत्रित संबंध हैं। उन्होंने को बताया कि यह अच्छा है, लेकिन हमें उन्हें थोड़ा संतुलित रखना पड़ता है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इस क्षेत्र में इजरायली सैन्य कार्रवाइयों, विशेष रूप से लेबनान पर संभावित हमलों को प्रभावित कर सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि वह ऐसे निर्णयों पर नियंत्रण रखने में पूरी तरह सक्षम होंगे। ट्रंप ने कहा कि हां, मैं ऐसा कर सकूंगा। मेरा मतलब है, वे मेरा बहुत सम्मान करते हैं, और वे वही करते हैं जो मैं कहता हूं। ट्रंप ने नेतन्याहू पर निकाला था गुस्सा इससे पहले ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते के बावजूद, लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल के अभियान पर गहरी निराशा व्यक्त की थी। इस महीने की शुरुआत में एक फोन कॉल के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू पर जमकर भड़ास भी निकाली थी। एक्सिओस की रिपोर्ट के अनुसार, 1 जून को जब इजरायल के लेबनान पर हमलों के कारण ईरान ने कथित तौर पर शांति वार्ता रोक दी थी, तब ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू पर चिल्लाते हुए कहा था कि तुम बिल्कुल पागल हो गए हो। अगर मैं नहीं होता तो तुम जेल में होते। मैं तुम्हें बचा रहा हूं। अब हर कोई तुमसे नफरत करता है। इस वजह से हर कोई इजरायल से नफरत कर रहा है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की चेतावनी द वाशिंगटन पोस्ट ने मौजूदा और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ट्रंप प्रशासन को चेतावनी दी है कि बेंजामिन नेतन्याहू ऐसे कदम उठा सकते हैं जिससे ईरान के साथ हुआ शांति समझौता कमजोर हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, खुफिया रिपोर्टों से पता चलता है कि इजरायल हिजबुल्लाह के खिलाफ अपना सैन्य अभियान जारी रखने का इरादा रखता है। नई खुफिया जानकारी से परिचित एक अमेरिकी अधिकारी का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल के अंत में इजरायल में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों के कारण नेतन्याहू की राजनीतिक नैया इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपनी घरेलू जनता को यह दिखाएं कि वह लेबनान से सेना वापस नहीं बुलाएंगे और हिजबुल्लाह के साथ लड़ाई तेज करने का इरादा रखते हैं। रिपोर्ट में ट्रंप के शांति ज्ञापन की शर्तों पर इजरायल की हताशा का भी वर्णन किया गया है। इजरायल और हिजबुल्लाह युद्धविराम पर सहमत लेबनान में दोनों पक्षों के बीच हुए घातक हमलों के बाद शुक्रवार को इजरायल और हिजबुल्लाह युद्धविराम पर सहमत हो गए। इन हमलों ने ईरान युद्ध को समाप्त करने वाले डोनाल्ड ट्रंप के शांति समझौते को उस पर हस्ताक्षर होने के दो दिन से भी कम समय में मुश्किल में डाल दिया था। एक अमेरिकी अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच यह संघर्ष विराम अमेरिका और कतर के मध्यस्थों द्वारा इजरायल और ईरान के साथ की गई वार्ता के बाद सुनिश्चित कराया गया है। अमेरिका में इजरायल के राजदूत येहिएल लेटर ने कहा कि इजरायल लेबनान में तत्काल युद्धविराम के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन केवल तभी जब हिजबुल्लाह समझौते का सम्मान करेगा और अपनी शत्रुता को समाप्त करेगा। दोनों पक्ष पहले अप्रैल में भी एक युद्धविराम पर सहमत हुए थे लेकिन उन्होंने एक-दूसरे पर हमले बंद नहीं किए थे। इस बीच, अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची कथित तौर पर आगे की वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड की ओर जा रहे हैं।  

एनएमडीसी की CSR पहल: दंतेवाड़ा के 10 गांवों में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर से सैकड़ों ग्रामीण लाभान्वित

हैदराबाद देश की अग्रणी खनन कंपनी एनएमडीसी अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कार्यक्रमों के माध्यम से आसपास के ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों के क्रम में कंपनी द्वारा दंतेवाड़ा क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में समुदाय स्वास्थ्य जागरूकता एवं स्वास्थ्य सेवा पहुंच कार्यक्रम के तहत निःशुल्क चिकित्सा शिविरों का सफल आयोजन किया जा रहा है। इस पहल के अंतर्गत 19 मई से ग्राम पंचायत भांसी, बड़े बचेली, धुरली, पाड़ापुर, नेरली, दुगेली, गंजेनार, मसेनार, मोलसनार एवं कमलूर में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए, जिनमें सैकड़ों ग्रामीणों ने स्वास्थ्य परीक्षण एवं परामर्श सेवाओं का लाभ उठाया। लाभार्थियों में अधिकांश संख्या अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से संबंधित ग्रामीणों की रही। एनएमडीसी की यह स्वास्थ्य सेवा पहल निरंतर जारी है और आने वाले समय में भी अधिक से अधिक गांवों तक पहुंचकर ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराती रहेगी। सबसे हालिया चिकित्सा शिविर 19 जून को ग्राम पंचायत कमलूर में आयोजित किया गया, जहां 96 ग्रामीणों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं। बैलाडीला क्षेत्र मुख्यतः आदिवासी आबादी वाला दूरस्थ इलाका है, जहां गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं तक नियमित पहुंच एक चुनौती बनी रहती है। ऐसे में एनएमडीसी द्वारा कलेपाल, टिकनपाल, कोडेनार, बेनपाल, कदमपाल, मदाड़ी, हिरोली, गुमियापाल, समलवार, चोलनार, मड़कामिरास एवं पालनार जैसे दूरस्थ गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की यह पहल स्थानीय समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है। चिकित्सा शिविरों के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा सामान्य स्वास्थ्य जांच, रक्तचाप (बीपी) परीक्षण, रैंडम ब्लड शुगर (आरबीएस) जांच, शरीर के महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों का परीक्षण तथा स्वास्थ्य परामर्श प्रदान किया जा रहा है। साथ ही पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, व्यक्तिगत स्वच्छता तथा स्वस्थ जीवनशैली को लेकर जागरूकता सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं। आवश्यकता अनुसार मरीजों को उच्च स्तरीय उपचार हेतु निकटवर्ती स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया तथा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार निःशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया जा रहा है। इन शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों में न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ रही हैं, बल्कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह जैसी गैर-संचारी बीमारियों की प्रारंभिक पहचान भी संभव हो सकी। दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोगों को अपने ही क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होने से समय और संसाधनों की बचत हुई तथा नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की आवश्यकता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हो रहा है। ग्रामीणों ने एनएमडीसी के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शिविर विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं, जिन्हें अक्सर चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। गांव के निकट ही विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श और दवाइयां उपलब्ध होने से उन्हें बड़ी राहत मिली है। एनएमडीसी का मानना है कि किसी भी क्षेत्र का वास्तविक और सतत विकास तभी संभव है जब स्थानीय समुदाय स्वस्थ, जागरूक और सशक्त हो। इसी सोच के साथ कंपनी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, जन-जागरूकता को मजबूत करने और ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उल्लेखनीय है कि ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एनएमडीसी ने हाल ही में जगदलपुर स्थित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के संचालन हेतु भी वित्तीय सहयोग प्रदान किया है। यह पहल बस्तर क्षेत्र के हजारों लोगों को आधुनिक एवं विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एनएमडीसी की ये पहलें केवल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने और स्थानीय समुदायों के साथ विश्वास एवं सहभागिता का मजबूत रिश्ता बनाने की उसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती हैं।

परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर फोकस, अमेरिका-ईरान MoU के भविष्य पर टिकी नजरें

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए अंतरिम समझौते का भविष्य अब स्विट्जरलैंड में होने वाली अहम बैठक पर निर्भर करता दिख रहा है. अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची स्विट्जरलैंड पहुंच रहे हैं, जहां दोनों पक्ष स्थायी समझौते को लेकर तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू कर सकते हैं. यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब लेबनान में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष विराम लागू हुआ है. इस सीजफायर ने उन कोशिशों को नई उम्मीद दी है, जिनका मकसद ईरान युद्ध को खत्म कर क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करना है. इस सप्ताह अमेरिका और ईरान ने 14 सूत्रीय मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर सहमति बनाई थी. इसके तहत 60 दिनों के भीतर परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े विवादित मुद्दों का समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी. अमेरिका-ईरान के बीच कई मुद्दों अनसुलझे कई अहम सवालों के जवाब अब भी स्पष्ट नहीं है. सबसे बड़ा मुद्दा ईरान के परमाणु कार्यक्रम का है. दोनों देशों के बीच इस बात पर अंतिम सहमति नहीं बनी है कि संवर्धित यूरेनियम का क्या होगा और भविष्य में परमाणु गतिविधियों की निगरानी किस तरह की जाएगी. वार्ता से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपना स्विट्जरलैंड दौरा रद्द कर दिया है. व्हाइट हाउस ने इसके पीछे लेबनान में बढ़ते तनाव को वजह बताया था. लेकिन अब संघर्ष विराम लागू होने के बाद वार्ता दोबारा पटरी पर आती दिख रही है. स्टीव विटकॉफ ईरानी विदेशी मंत्री के साथ बैठक करेंगे. लेबनान का मुद्दा भी इस समझौते के लिए बेहद अहम है. अंतरिम समझौते में सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई समाप्त करने की बात कही गई है, जिसमें लेबनान भी शामिल है. लेकिन इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह इस समझौते का हिस्सा नहीं है और दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखेगा. ईरान का कहना है कि समझौते के किसी भी उल्लंघन की जिम्मेदारी अमेरिका की होगी. वहीं अमेरिका और कतर के मध्यस्थों ने लेबनान संघर्ष विराम कराने में अहम भूमिका निभाई है. MoU में ईरान को क्या-क्या मिल रहा है? आर्थिक मोर्चे पर भी यह समझौता काफी अहम माना जा रहा है. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईरान को प्रतिबंधों में राहत, फ्रीज अरबों डॉलर के फंड तक पहुंच और तेल निर्यात की इजाजत मिल सकती है. इसके अलावा ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के फंड की भी चर्चा है. इस बीच होर्मुज स्ट्रेट में हालात सुधरने लगे हैं. युद्ध के दौरान ईरान द्वारा लगाई गई रुकावटों की वजह से वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हुआ था. अब तेल आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और ईरान ने अंतरिम वार्ताओं दौरान प्रस्तावित शुल्क भी माफ करने का संकेत दिया है. ईरान डील को लेकर ट्रंप का विरोध! अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार इस समझौते का बचाव कर रहे हैं. आलोचकों का आरोप है कि युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका ने ईरान को जरूरत से ज्यादा रियायतें दी हैं. हालांकि ट्रंप का दावा है कि ईरान कमजोर स्थिति में है और अमेरिका ने कोई बड़ी रियायत नहीं दी. ऐसे में स्विट्जरलैंड की बैठक सिर्फ एक औपचारिक वार्ता नहीं, बल्कि यह तय करेगी कि 60 दिन का यह अंतरिम समझौता स्थायी शांति में बदल पाएगा या फिर अमेरिका और ईरान एक बार फिर टकराव की राह पर लौट जाएंगे.

रेलवे नियम बदलाव: अनियमित यात्रा और उल्लंघनों पर 500 रुपये तक न्यूनतम जुर्माना

नई दिल्ली अगर आप ट्रेन में बिना टिकट यात्रा करते हैं तो सावधान हो जाएं। पकड़े जाने पर अब पहले से दोगुना जुर्माना भरना पड़ेगा। रेलवे में नए नियमों के तहत अब बिना टिकट यात्रा करने या यात्रा का प्रयास करने पर देय न्यूनतम अतिरिक्त जुर्माना राशि को दोगुना करते हुए 250 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है। इसी प्रकार, अनियमित यात्रा से संबंधित मामलों में भी अब 250 रुपये के स्थान पर 500 रुपये का न्यूनतम अतिरिक्त प्रभार वसूला जाएगा। जुर्माना राशि में कड़ा संशोधन रेलवे में अनुशासन बनाए रखने, यात्रियों की सुविधा और रेल सेवाओं के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रेल अधिनियम में संशोधित दंड एवं जुर्माना प्रावधान लागू कर दिए गए हैं। रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल टिकट ही नहीं, बल्कि रेलवे परिसर में अनधिकृत प्रवेश, अनधिकृत फेरी, महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बों में पुरुषों का जबरन प्रवेश और रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों की अवहेलना करने जैसे अन्य विभिन्न उल्लंघनों से संबंधित दंड प्रावधानों तथा जुर्माना राशि में भी कड़ा संशोधन किया गया है। 19 जून से प्रभावी रेल मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत रेल अधिनियम, 1989 की विभिन्न धाराओं में किए गए ये महत्वपूर्ण बदलाव 19 जून से प्रभावी हो चुके हैं। लंबे समय से अपरिवर्तित चली आ रही दंड राशियों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप और व्यावहारिक बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने शनिवार को बताया कि इन संशोधित प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य यात्रियों में नियमों के प्रति जागरुकता बढ़ाना और बिना टिकट व अनियमित यात्रा पर पूरी तरह प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। इसके साथ ही रेलवे परिसरों में पहले से बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी। टिकटधारी यात्रियों को मिलेगा फायदा रेलवे प्रशासन का मानना है कि बढ़े हुए दंड प्रावधानों के डर से बिना टिकट और अनियमित यात्रा की घटनाओं में भारी कमी आएगी। इसका सीधा फायदा उन वैध टिकटधारी यात्रियों को मिलेगा जो पूरा किराया देकर सफर करते हैं। इससे रेलवे परिसरों में अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।  

खैबर पख्तूनख्वा में रिमोट-कंट्रोल ब्लास्ट, वाहनों को निशाना बनाकर किया गया हमला

नई दिल्ली पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (KP) प्रांत के बन्नू जिले में दो लगातार धमाकों से हड़कंप मच गया है। इन धमाकों में 7 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पुलिस ने इन रिमोट-कंट्रोल धमाकों को 'कायराना आतंकी हमला' करार दिया है। क्या है पूरी घटना? बन्नू के वजीर सब-डिवीजन के अंतर्गत आने वाले अर्ध-जनजातीय और पहाड़ी इलाके 'मरका बेरा' में यह दिल दहला देने वाली घटना घटी है। बन्नू के डिस्ट्रिक्ट पुलिस ऑफिसर (DPO) यासिर अफरीदी ने इस बात की पुष्टि की है कि इन दो धमाकों में सात लोगों की जान गई है और तीन लोग घायल हुए हैं। रिमोट-कंट्रोल से वाहनों को बनाया गया निशाना डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि फांग मूसा खेल इलाके में रिमोट-कंट्रोल ब्लास्ट के जरिए दो वाहनों को टारगेट किया गया। पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, डैटसन का एक प्राइवेट वाहन यात्रियों को लेकर डोमेल की तरफ जा रहा था। इसी दौरान इसे निशाना बनाया गया। इस जोरदार धमाके में वाहन पूरी तरह नष्ट हो गया और 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। दूसरा धमाका कहां हुआ? मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि जब पहले धमाके के घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी घटनास्थल से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर दूसरा ब्लास्ट हुआ। इसमें दूसरे वाहन के भी परखच्चे उड़ गए और 2 अन्य लोगों ने जान गंवा दी। बचाव कार्य और सर्च ऑपरेशन जारी घटना के तुरंत बाद 'रेस्क्यू 1122' की टीमों ने मोर्चा संभाला और शवों व घायलों को डोमेल रूरल हेल्थ सेंटर और खलीफा गुल नवाज टीचिंग अस्पताल पहुंचाया। सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। अधिकारियों को आशंका है कि इलाके में और भी विस्फोटक उपकरण (IED) छिपे हो सकते हैं, जिसके चलते चप्पे-चप्पे की तलाशी ली जा रही है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इस आईईडी हमले की कड़ी निंदा की है और निर्दोष नागरिकों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। बन्नू में लगातार बढ़ रहे हैं आतंकी हमले यह ताजा हमला बन्नू के पहाड़ी इलाकों में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को साफ तौर पर दर्शाता है, जिससे वहां के निवासियों में भी खौफ का माहौल है। हाल के महीनों में बन्नू जिले में आतंकी हिंसा में तेजी से इजाफा हुआ है। एक सप्ताह पहले ही आतंकवादियों ने मिर्यान रोड पर स्थित 'तेरी राम ब्रिज' को विस्फोटकों से उड़ाने की कोशिश की थी, जिससे पुल को आंशिक नुकसान पहुंचा था। 12 जून को बन्नू में ही टारगेट किलिंग की दो अलग-अलग घटनाओं में दो पुलिसकर्मी मारे गए थे। पिछले महीने सुरक्षा बलों, शांति समिति और आतंकवादियों के बीच हुई एक भीषण मुठभेड़ में 25 आतंकी मारे गए थे। इस दौरान दो पुलिसकर्मी और दो नागरिकों की भी जान गई थी।

पीएम मोदी का ओडिशा दौरा: जनजातीय क्षेत्रों में विकास और बुनियादी ढांचे पर बड़ा फोकस

भुवनेश्वर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने एक दिवसीय दौरे पर ओडिशा को बड़ा उपहार दिया है। 47 हजार करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करने के साथ ही ओडिशा सरकार के दो वर्ष पूर्ति के उपलक्ष्य में आयोजित जनसभा को प्रधानमंत्री ने संबोधित किया। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, राज्यपाल डा. हरिबाबू कम्भमपति ने राष्ट्रपति को जन्म दिन की शुभकामना दी। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भी इस दौरे में प्रधानमंत्री के साथ रहीं। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, आज पूर्वाह्न लगभग 11:15 बजे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मयूरभंज जिले के पहाड़पुर गांव पहुंचे।यहां वे संथाली जाहेरा और हो जाहेरा के पवित्र उपवनों में पूजा-अर्चना किए। इसके अलावा वे स्किल सेंटर और पहाड़पुर स्कूल का भी किए।यह यात्रा जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, कौशल विकास तथा सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करेगी। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के साथ उनके गांव का भी भ्रमण किया है, राष्ट्रपति के स्कूल का भी प्रधानमंत्री ने परिदर्शन किया, ऐसे में उक्त क्षेत्र में सुबह से ही उत्सव एवं उत्साह का माहौल देखने को मिला।लोग सुबह से ही सड़क किनारे पारंपरिक नृत्य गीत करते हुए प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति का स्वागत किए। राष्ट्रपति का जन्म दिन होने से आज लोगों ने अपनी शुभकामना दी।विभिन्न प्लाकार्ड लेकर लोग जगह जगह खड़े रहे।पहाड़पुर जाते समय राष्ट्रपति ने अपने काफिले को रोककर बच्चों से मुलाकात की और उन्हें चाकलेट दिया।ये बच्चे राष्ट्रपति की एक झलक पाने को सड़क किनारे घंटे से खड़े थे। राष्ट्रपति महुलीपड़ा घर से निकलकर पहाड़पुर पहुंची जहां पर मुख्यममंत्री ने उनका स्वागत किया। दोपहर करीब 1 बजे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में राज्य सरकार के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लिए।कार्यक्रम का विषय “विकास की धारा, ओडिशा सारा” रखा गया है। इस अवसर पर 47,600 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास प्रधानमंत्री ने किया और इस दौरान जनसभा को संबोधित किए प्रमुख परियोजनाएं प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने ऊर्जा, औद्योगिक अवसंरचना, सड़क संपर्क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किए।इन परियोजनाओं से राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूती, बेहतर संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा और रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं का हुआ शिलान्यास     600 मेगावाट की अपर इंद्रावती पंप्ड स्टोरेज परियोजना।     आईबी थर्मल पावर स्टेशन के स्टेज-2 विस्तार परियोजना की दो नई 660-660 मेगावाट इकाइयां।     झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर में भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (बीसीजीसीएल) परियोजना।     भुवनेश्वर में 300 टीपीडी क्षमता का स्रोत-आधारित पृथक्कृत ठोस कचरे से संचालित संपीड़ित बायोगैस संयंत्र।     कटक और भुवनेश्वर को सीधे जोड़ने के लिए काठजोड़ी नदी पर नया पुल।     बौद्ध जिले में ढालपुर-हरभंगा सड़क का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण।     नुआपड़ा से घाटीपाड़ा तक एनएच-353 के एक हिस्से का फोरलेन निर्माण।     कुसुमढी मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना।     रायरंगपुर में इग्नू क्षेत्रीय केंद्र और इंडोर बैडमिंटन कॉम्प्लेक्स। इन परियोजनाओं का उद्घाटन     बौद्ध में 300 बिस्तरों वाला जिला मुख्यालय अस्पताल भवन।     ओडिशा के विभिन्न जिलों में 24 अटल बस स्टैंड।     नौ स्वचालित वाहन परीक्षण केंद्र (ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन)।     एनएच-57 पर नयागढ़ टाउन बाईपास।     कुसुमी स्मार्ट सिंचाई परियोजना का भूमिगत पाइपलाइन घटक।     जखपुरा-जाजपुर-केंदुझर रोड-बैतरणी रोड मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना।     हिंदोल रोड-मेरामंडली मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना। रायरंगपुर में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और ट्राइबल रिसर्च सेंटर का प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति ने उद्घाटन किया है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से ओडिशा में स्वास्थ्य, परिवहन, सिंचाई, ऊर्जा और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। इस पूरे कार्यक्रम में राज्यपाल डा. हरिबाबू कम्भमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के सरकार राज्य सरकार के कई मंत्री एवं विधायक उपस्थित रहे।  

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर तनाव, हजारों लोगों ने निकाला मशाल जुलूस

ढाका मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर एक बार फिर चिंताएं गहरा गई हैं। राजधानी ढाका में शुक्रवार को हजारों हिंदुओं ने भगवान राम की तस्वीर के कथित अपमान और एक भव्य मूर्ति के निर्माण को रोके जाने के विरोध में विशाल मशाल जुलूस निकाला। इस दौरान भारी संख्या में जुटे लोगों ने 'जय श्री राम' के नारे भी लगाए। ढाका की सड़कों पर उतरे हजारों हिंदू कट्टरपंथियों द्वारा रंगपुर में भगवान राम की सबसे ऊंची मूर्ति के निर्माण का विरोध करने और कथित तौर पर उनकी तस्वीर का अपमान किए जाने के बाद ढाका में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। हजारों हिंदुओं ने दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर ढाका में मशाल जुलूस निकाला और 'जय श्री राम' के नारे लगाए। हिंदू महाजोट के आह्वान पर कई हिंदू संगठन और छात्र प्रमुख शाहबाग चौराहे पर इकट्ठा हुए और वहां से नेशनल प्रेस क्लब तक मार्च किया। प्रेस क्लब के सामने एक मानव श्रृंखला भी बनाई गई, जबकि एक अन्य समूह ने ढाका रिपोर्टर्स यूनिटी (DRU) के पास अपना विरोध दर्ज कराया। वहीं, रंगपुर में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोके जाने के बाद हल्की झड़प की भी खबर है। क्या है पूरा मामला? प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस महीने की शुरुआत में गाइबांधा में एक प्रदर्शन के दौरान कट्टरपंथी भीड़ ने भगवान राम की एक तस्वीर पर जूता रखकर उसका अपमान किया था। इस मामले में केस तो दर्ज कर लिया गया है, लेकिन अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। क्यों रोका गया राम मूर्ति का निर्माण? उत्तरी गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी में एक मंदिर परिसर के तहत भगवान राम की 81 फीट ऊंची मूर्ति बनाई जा रही थी। इसका लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा भी हो चुका है। श्री श्री राधा गोविंद मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिदास चंद्र दास ने बताया कि कट्टरपंथी समूहों द्वारा प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों को धमकियां मिलने के बाद काम रोक दिया गया है। एक कट्टरपंथी मौलवी ने तो बुलडोजर से मूर्ति गिराने तक की धमकी दे डाली थी। करीब 22 करोड़ बांग्लादेशी टका (लगभग 16 करोड़ रुपये) के इस प्रोजेक्ट में 50 फीट के भगवान कृष्ण और 30 फीट के भगवान शिव की मूर्तियां भी प्रस्तावित हैं। मंदिर समिति के सलाहकार श्यामलाल कुमार महंत के मुताबिक, "सामाजिक सद्भाव बनाए रखने" के लिए फिलहाल काम को रोक दिया गया है। डर के साये में जी रहे आयोजकों ने काम रोकने के साथ ही प्रधानमंत्री तारिक रहमान से हस्तक्षेप की अपील भी की है। सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी (BNP) सरकार पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए, प्रदर्शनकारियों ने दोषियों की गिरफ्तारी के लिए 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। हिंदू समुदाय ने चेतावनी दी है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो आगे और भी रैलियां की जाएंगी। शनिवार को धार्मिक मामलों के मंत्रालय को एक ज्ञापन भी सौंपा जाना है। हिंदू महाजोट ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर राम मूर्ति का निर्माण दोबारा शुरू नहीं करने दिया गया, तो वे बांग्लादेश के सभी 64 जिलों में एक-एक करके राम मंदिर का निर्माण करेंगे। इसके अलावा, राष्ट्रीय पूजा उत्सव समिति ने शनिवार को देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। अल्पसंख्यकों की स्थिति पर उठ रहे सवाल बांग्लादेश में हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समूह हैं, जो कुल आबादी का लगभग 8 प्रतिशत हैं। पिछली मुहम्मद यूनुस सरकार के दौरान हुए संकट के बाद से वहां हिंदुओं को निशाना बनाने की घटनाओं में तेजी देखी जा रही है। फरवरी में कार्यभार संभालने वाले प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने बार-बार यह दावा किया था कि देश "सभी का है", लेकिन आंकड़ों के मुताबिक इस साल 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच ही सांप्रदायिक हिंसा की 133 घटनाएं दर्ज की गई हैं।