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आडवाणी और जोशी को नहीं मिलेगा वोट करने का अधिकार, BJP अध्यक्ष चुनाव में पहली बार नहीं डाल पाएंगे वोट

 नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इतिहास में 20 जनवरी 2026 का दिन एक बड़े बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। 45 साल के नितिन नवीन का पार्टी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है। हालांकि, इस चुनाव में एक चौंकाने वाली बात यह है कि पार्टी के संस्थापक सदस्य लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी पहली बार मतदान नहीं कर पाएंगे। दिसंबर 2025 से पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे नितिन नवीन अब पूर्णकालिक अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। बिहार के बांकीपुर से विधायक और पूर्व मंत्री नितिन नवीन भाजपा के दिग्गज नेता दिवंगत नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के पुत्र हैं। आरएसएस (RSS) की पृष्ठभूमि वाले नवीन को संगठन में गहरी पैठ और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में पार्टी की चुनावी जीत में बड़ी भूमिका के लिए जाना जाता है। 19 जनवरी को उनका नामांकन होगा और 20 जनवरी को उनकी जीत की औपचारिक घोषणा की जाएगी। उनके नामांकन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह प्रस्तावक बनेंगे। आडवाणी और जोशी मतदाता सूची से बाहर क्यों? 1980 में भाजपा की स्थापना के बाद यह पहला मौका है जब इन दोनों दिग्गजों का नाम अध्यक्ष चुनाव की मतदाता सूची में नहीं है। इसके पीछे कोई राजनीतिक नाराजगी नहीं, बल्कि तकनीकी कारण हैं। पार्टी के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय परिषद का सदस्य बनने के लिए संबंधित राज्य में संगठनात्मक चुनाव पूरा होना अनिवार्य है। आडवाणी और जोशी फिलहाल दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य हैं, लेकिन दिल्ली प्रदेश भाजपा में चुनाव अभी लंबित हैं। जब तक दिल्ली में मंडल, जिला और प्रदेश स्तर के चुनाव नहीं हो जाते वहां से राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों का चयन नहीं हो सकता। इसी कारण दोनों नेताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके। आपको बता दें कि इससे पहले आडवाणी गुजरात (गांधीनगर) और जोशी उत्तर प्रदेश (कानपुर) से परिषद सदस्य हुआ करते थे। सक्रिय राजनीति से हटने के बाद वे दिल्ली से सदस्य बने थे। भाजपा के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी के. लक्ष्मण ने चुनावी कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। 19 जनवरी को दोपहर 2 से 4 बजे तक नामांकन होगा। 19 जनवरी को ही शाम तक नामांकन पत्रों की जांच और वापसी का समय है। 20 जनवरी को यदि आवश्यक हुआ तो मतदान होगा, अन्यथा निर्विरोध चुनाव की घोषणा। जेपी नड्डा का स्थान लेने वाले नितिन नवीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए संगठन को तैयार करना और आगामी विधानसभा चुनावों (पश्चिम बंगाल, असम, केरल आदि) में पार्टी के प्रदर्शन को सुधारना होगी। युवा नेतृत्व के माध्यम से भाजपा अब अपनी अगली पीढ़ी की टीम तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

अमेरिकी सीनेटरों ने डोनाल्ड ट्रंप को लिखी चिट्ठी, दाल पर 30% टैरिफ हटाने की अपील

 नई दिल्‍ली कुछ दिन पहले ही अपडेट आया था कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के फर्स्‍ट स्‍टेज की बातचीत लगभग पूरी ही हो चुकी है, जल्‍द ही इसका ऐलान किया जा सकता है. इस बीच अमेरिकी सीनेटर्स ने राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को चिट्ठी लिखी है और भारत को अमेरिकी मटर दाल पर से टैक्‍स हटाने की मांग की है.  ट्रंप को लिखी चिट्ठी में अमेरिकी सीनेटरों ने भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट में 'दलहन फसलों के लिए अनुकूल प्रावधान' की मांग की है.  राष्ट्रपति ट्रंप से यह सुनिश्चित करने के लिए कह रहे हैं कि भारत पीली मटर (दलहन) पर 30% टैक्स हटा दे, जिसे अमेरिकी किसान बेचना चाहते हैं.  भारत दालों का सबसे बड़ा यूजर  नॉर्थ डकोटा और मोंटाना मटर समेत दलहन फसलों के टॉप दो उत्पादक हैं और भारत इन फसलों का दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जो दुनिया की कुल खपत का लगभग 27% हिस्सा यूज करता है. जैसे-जैसे यूनाइटेड स्टेट्स व्यापार में असमानताओं को ठीक करने की कोशिश कर रहा है, अमेरिकी किसान इस कमी को पूरा करने में मदद करने के लिए तैयार हैं.  उन्‍होंने ट्रंप से कहा कि जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ रही है, हम आपसे रिक्वेस्ट करते हैं कि यूनाइटेड स्टेट्स और रिपब्लिक ऑफ इंडिया के बीच होने वाले किसी भी एग्रीमेंट में दालों की फसलों के लिए जोर दें. भारत में सबसे ज्‍यादा खाई जाने वाली दालें मसूर, चना, सूखी बीन्स और मटर हैं, फिर भी उन्होंने अमेरिकी दालों पर काफी टैरिफ लगाया है. अमेरिका को हो रहा नुकसान ट्रंप को लिखे लेटर में कहा गया है कि भारत ने 30 अक्टूबर, 2025 को पीली मटर पर 30% टैरिफ लगा दिया. यह ड्यूटी 1 नवंबर, 2025 से लागू है, जिस कारण अमेरिकी दालों के प्रोड्यूसर्स को भारत में अपने हाई-क्वालिटी प्रोडक्ट को एक्सपोर्ट करते समय कॉम्पिटिशन में काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. पहले भी कर चुके हैं मांग  सीनेटरों ने ट्रंप से कहा कि आपके पहले कार्यकाल में हमने आपको इस मुद्दे पर लिखा था, और आपने 2020 में भारत के साथ ट्रेड बातचीत के दौरान हमारा लेटर प्रधानमंत्री मोदी को खुद दिया था, जिससे हमारे प्रोड्यूसर्स को बातचीत की टेबल पर लाने में मदद मिली.  अमेरिकी खेती के सामान के लिए मार्केट के मौके बढ़ाने का आपका काम बहुत जरूरी रहा है. जैसे-जैसे यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड में असमानताओं को ठीक करने की कोशिश कर रहा है, अमेरिकी किसान इस कमी को पूरा करने में मदद करने के लिए तैयार हैं. अगर ट्रेड के मौके मिलते हैं, तो उनमें दुनिया को खाना खिलाने और एनर्जी देने की जबरदस्त क्षमता है. हमारे देशों के बीच इकोनॉमिक सहयोग को बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के साथ दालों पर टैरिफ के मुद्दे पर बात करना अमेरिकी प्रोड्यूसर्स और भारतीय कस्टमर्स दोनों के लिए फायदेमंद होगा. 

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में मिलेगा लग्जरी अनुभव, ऑटोमैटिक दरवाजे और नई सुविधाओं का आनंद

नई दिल्ली 17 जनवरी 2026 का दिन भारतीय रेलवे के इतिहास में एक सुनहरा अध्याय जोड़ने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन रेलवे स्टेशन से देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे.वंदे भारत स्लीपर ट्रेन पूरी तरह एयर-कंडीशंड है और लंबी दूरी की रात की यात्रा को बहुत आरामदायक और सुरक्षित बनाएगी. यह ट्रेन हावड़ा (कोलकाता) से कामाख्या (गुवाहाटी) के बीच चलेगी.   वंदे भारत स्लीपर एक सेमी हाई-स्पीड ट्रेन है, जिसमें कुल 16 कोच हैं. इसमें 11 थर्ड एसी, 4 सेकंड एसी और 1 फर्स्ट एसी कोच शामिल हैं. थर्ड एसी में 611, सेकंड एसी में 188 और फर्स्ट एसी में 24 बर्थ हैं. ट्रेन में कुल 823 यात्री सफर कर सकेंगे. वंदे भारत स्लीपर की अधिकतम स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा है. यह पश्चिम बंगाल के हावड़ा से गुवाहाटी (कामाख्या) के बीच 958 किलोमीटर की दूरी सिर्फ 14 घंटे में तय करेगी. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में सिर्फ कन्फर्म टिकट ही मिलेंगे. कोई RAC या वेटिंग लिस्ट नहीं होगी, जिससे यात्रा बिना किसी तनाव के होगी. आइए जानते हैं वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की आधुनिक सुविधाएं जो यात्रियों को एयरलाइन जैसा अनुभव देंगी.     – आरामदायक और बेहतर कुशनिंग वाले बर्थ (स्लीपर बेड)     – आसानी से ऊपरी बर्थ पर चढ़ने के लिए नई डिजाइन वाली सीढ़ी     – ऑटोमैटिक स्लाइडिंग दरवाजे जो स्टेशन पर ही खुलते-बंद होते हैं     – KAVACH एंटी-कोलिजन सिस्टम (ट्रेन की सुरक्षा के लिए)     – हर कोच में CCTV कैमरे, इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम और फायर डिटेक्शन     – आधुनिक बायो-वैक्यूम टॉयलेट और टच-फ्री फिटिंग्स     – क्षेत्रीय खाने की कैटरिंग (जैसे बंगाली और असमिया व्यंजन)     – डिसइन्फेक्टेंट तकनीक से कोच हमेशा साफ और कीटाणुमुक्त रहेंगे वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का किराया  (हावड़ा से गुवाहाटी)     AC थ्री-टियर: लगभग ₹2,000 से ₹2,300 (5% GST के साथ)     AC टू-टियर: ₹2,500 से ₹3,000 के आसपास     फर्स्ट AC: ₹3,000 से ₹3,600 तक किराया  राजधानी एक्सप्रेस से थोड़ा महंगा है लेकिन सफर ज्यादा आरामदायक और तेज होगा.  180 की स्पीड से दौड़ेगी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, रूट-किराया सबकुछ तय, जानें खासियत ट्रेन हावड़ा से कामाख्या के बीच इन स्टेशनों पर रुकेगी.     बंदेल     नवद्वीप धाम     कटवा     अजीमगंज     न्यू फरक्का     मालदा टाउन     अलुआबारी रोड     न्यू जलपाईगुड़ी (एनजेपी)     जलपाईगुड़ी रोड     न्यू कूच बिहार     न्यू अलीपुरद्वार     न्यू बोंगाईगांव     रंगिया ट्रेन का टाइम शेड्यूल शुरुआती अनुमान है कि हावड़ा से शाम 6:20 बजे निकलेगी और अगले दिन सुबह 8:20 बजे कामाख्या पहुंचेगी. वहीं, वापसी में कामाख्या से शाम 6:15 बजे चलेगी और सुबह 8:15 बजे हावड़ा पहुंचेगी. बता दें कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि साल 2026 में कई और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें शुरू होंगी, जिससे लंबी दूरी की यात्रा अब और आसान हो जाएगी.

‘सरकार ही कर सकती है हमारा भला’, डिलीवरी बॉयज की 10 मिनट की बाध्यता खत्म होने पर खुशी, सरकार से एक और अनुरोध

आगरा  उत्तर प्रदेश के आगरा में डिलीवरी बॉयज में खुशी की लहर है. सरकार ने उन्हें 10 मिनट की बाध्यता से मुक्त कर दिया है. अब डिलीवरी का सामान आराम से पहुंचाया जा सकता है. पहले जल्दी के चक्कर में कई बार एक्सीडेंट हो जाया करता था. डिलीवरी बॉयज ने सरकार से अपील की है कि उनका पेआउट भी थोड़ा बढ़ाया जाए. उन्होंने कहा है कि कंपनी 3 से 4 रुपए एक ऑर्डर पर दे रही है. डिलीवरी बॉयज ने कहा कि महंगाई के दौर पर उनका आर्थिक जीवन मुश्किल में पड़ गया है. जिस तरह सरकार ने उनके 10 मिनट की बाध्यता खत्म की है, इसी तरह थोड़ा उन्हें आर्थिक लाभ भी दिलाए. उन्होंने कहा कि सरकार से अनुरोध है कि वह कम्पनी से आग्रह कर उन्हें पेट्रोल खर्चा उनके हिसाब से दें, क्योंकि पेट्रोल काफी महंगा है. पेट्रोल खर्चा थोड़ा बढ़ाया जाए आगरा में डिलीवरी बॉयज ने कहा है कि सरकार उनके आर्थिक लाभ के बारे में विचार करे. आगरा के डिलीवरी बॉय मनोज ने कहा कि कंपनी उन्हें 3 से 4 रुपए डिलीवरी का देती है. इसमें सामान को डिलीवर कर वापस भी आना होता है. ऐसे में पेट्रोल इतना महंगा है कि उनको नुकसान हो जाता है. उन्होंने कहा कि कम्पनी को पेट्रोल का खर्चा थोड़ा और बढ़ाना चाहिए. डिलीवरी बॉय मनोज ने कहा कि दिन में 12 घंटे की जॉब करते हैं और फिर भी 300 से 400 रुपए ही कमा पाते हैं. सरकार से अनुरोध है कि थोड़ा उनकी आर्थिक मदद में सहयोग करें. बाइक टूटने का खर्चा भी कंपनी नहीं देती आगरा के डिलीवरी बॉय मनोज ने कहा कि कई बार डिलीवरी करते समय बाइक फिसल जाती है, जिसमें राइडर को भी चोट आती है और बाइक भी डैमेज हो जाती है. इस स्थिति में भी कम्पनी उनका साथ नहीं देती है. ऐसी परिस्थिति में डिलीवरी बॉय को ही अपने पैसों से इलाज और बाइक ठीक करानी होती है. उन्होंने कहा कि कंपनी बिल्कुल सहयोग नहीं करती है. मनोज बताते हैं कि पहले से परिवार पर आर्थिक संकट होता है, ऐसे में अगर एक्सीडेंट हो जाए तो सारे पैसे इलाज में ही खर्च हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि जैसे सरकार ने 10 मिनट का रूल खत्म किया है, वैसे ही थोड़ा उनके आर्थिक सहयोग के बारे में भी सोचे.

हरिद्वार में गैर हिंदू श्रद्धालुओं की एंट्री पर पाबंदी, हरकी पौड़ी में पोस्टर लगाए गए

हरिद्वार तीर्थ नगरी हरिद्वार के कुंभ क्षेत्र में गैर हिंदुओं की एंट्री बैन किए जाने की मांग के बीच हरकी पौड़ी पर चेतावनी के बोर्ड लगाए गए हैं, जिसमें हर की पैड़ी पर ‘अहिंदू प्रवेश निषेध क्षेत्र’ यानी गैर हिंदू की एंट्री पर रोक की चेतावनी लिखी गई है. शुक्रवार सुबह हर की पौड़ी की व्यवस्था संभालने वाली संस्था गंगा सभा की ओर से ब्रह्म कुंड और उसके आसपास ये बोर्ड लगाए गए हैं. बोर्ड गंगा के नाम से नहीं, बल्कि म्युनिसिपालिटी बायोलॉज के हवाले से लगाए गए हैं. दरअसल बीते मंगलवार को दो युवक अरबी शेख की पोशाक में हर की पौड़ी पर घूमते हुए नजर आए थे, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं. गंगा सभा से जुड़े तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि पहले से मौजूद नियमों के तहत चेतावनी के बोर्ड लगाए गए हैं, ताकि लोग हर की पैड़ी क्षेत्र में प्रवेश के नियमों को लेकर जागरूक हो सकें. पोस्टर लगाने का क्या है उद्देश्य हरिद्वार के तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित ने कहा कि बोर्ड लगाने का उद्देश्य यही है कि सभी को यहां के नियमों और मर्यादाओं की जानकारी रहे. पहले भी ऐसे पोस्टर लगे थे, लेकिन कुछ क्षतिग्रस्त हो गए थे. हमारा उद्देश्य यही है कि सनातन धर्म के इस पवित्र स्थल पर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह पता होना चाहिए और किस धर्म ने जुड़े हुए लोगों को यहां प्रवेश करना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि यह बोर्ड हर की पौड़ी या उसके आसपास आने वाले हर क्षेत्र में लग चुके हैं. अब इसका सज्ञान सभी लोग लेंगे और प्रशासन इन नियमों को कड़ाई से पालन कराने में हमारा सहयोग करेगा. संस्था गंगा सभा की ओर से लगाए गए इस पोस्टर के बाद इसकी चर्चा तेज हो गई है और कई संगठन इसका विरोध कर रहे हैं. चार तीर्थों में प्रमुख स्थान बता दें कि हरिद्वार हिंदू धर्म में चार तीर्थों में प्रमुख स्थान रखता है, जहां दूर-दूर से भक्त गंगा स्नान करने और दान कर पुण्य प्राप्त करने आते हैं. वहीं श्री गंगा सभा संस्था हर की पौड़ी क्षेत्र की व्यवस्थाएं देखने का कार्य करती है. इस संस्था की नींव महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने रखी गई थी. श्री गंगा सभा के वर्तमान अध्यक्ष नितिन गौतम ने हर की पौड़ी क्षेत्र में गैर हिन्दुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है और उनकी इस मांग का साधु-संतों और हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोग भी समर्थन कर रहे हैं.

न पुतिन न ट्रंप, इस बार कौन होगा रिपब्लिक डे का चीफ गेस्ट? PM मोदी ने किसे दिया न्योता और क्यों

नई दिल्ली एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर यही दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. इस बार न रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आ रहे हैं, न अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. इसके बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा न्योता दिया है, जो भारत के कूटनीतिक इतिहास में पहली बार हो रहा है. पहली बार किसी एक देश के नेता को नहीं बल्कि यूरोपीय संघ (EU) के दो शीर्ष नेताओं को एक साथ रिपब्लिक डे का चीफ गेस्ट बनाया गया है. यह फैसला सिर्फ परंपरा तोड़ने वाला नहीं बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत की रणनीतिक सोच को भी दिखाता है. रिपोर्ट के अनुसार यह न्योता ऐसे समय दिया गया है जब दुनिया की राजनीति तेजी से बदल रही है. अमेरिका और ट्रांसअटलांटिक रिश्तों में खटास बढ़ी है. अमेरिका और यूरोप के बीच भरोसे की दरार खुलकर सामने आ रही है. इसी बीच भारत और यूरोपीय संघ एक-दूसरे के और करीब आ रहे हैं. भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत निर्णायक मोड़ पर है. रक्षा, सुरक्षा, क्लीन एनर्जी और सप्लाई चेन जैसे मुद्दों पर साझेदारी गहरी हो रही है. ऐसे में EU के दोनों शीर्ष नेताओं को एक साथ न्योता देना भारत का बड़ा कूटनीतिक दांव माना जा रहा है. कौन हैं एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन? एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष हैं, जबकि उर्सुला वॉन डेर लेयेन यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष हैं. ये दोनों पद EU की सबसे ताकतवर संस्थाओं का नेतृत्व करते हैं. 27 देशों के इस समूह में नीतिगत फैसलों से लेकर वैश्विक रणनीति तक, इन दोनों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है. क्यों खास है यह न्योता? पहली बार हुआ ऐसा भारत के इतिहास में अब तक रिपब्लिक डे पर किसी एक देश के नेता को ही मुख्य अतिथि बनाया गया है. इस बार तस्वीर बदली है. EU को एक इकाई के रूप में मान्यता देना, अपने आप में बड़ा संकेत है. यह दिखाता है कि भारत अब द्विपक्षीय रिश्तों से आगे बढ़कर ब्लॉक-लेवल डिप्लोमेसी को भी उतनी ही अहमियत दे रहा है. ट्रंप फैक्टर और बदलते वैश्विक समीकरण डोनाल्ड ट्रंप जबसे दोबारा सत्ता में आए तबसे अमेरिका-यूरोप रिश्ते फिर तनाव में हैं. NATO, व्यापार और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मतभेद बढ़े हैं. EU ऐसे समय में भारत को एक भरोसेमंद, स्थिर और उभरते वैश्विक साझेदार के तौर पर देख रहा है. भारत भी पश्चिमी देशों के साथ संतुलन बनाते हुए अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखना चाहता है. इस दौरे का पूरा शेड्यूल क्या है?     25 जनवरी को दोनों नेता भारत पहुंचेंगे.     राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे.     26 जनवरी को रिपब्लिक डे परेड में चीफ गेस्ट होंगे.     27 जनवरी को 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे.     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत होगी.     भारत-EU बिजनेस फोरम भी आयोजित होगा. भारत-EU FTA क्यों बना सबसे बड़ा एजेंडा? भारत और EU के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत 2007 से चल रही है. दिसंबर 2025 में इसे नई रफ्तार मिली. अब इसे अंतिम चरण में माना जा रहा है. EU भारत को चीन पर निर्भरता कम करने के विकल्प के तौर पर देखता है, जबकि भारत को यूरोपीय बाजार, टेक्नोलॉजी और निवेश की ज़रूरत है. इस दौरे से क्या-क्या निकल सकता है?     भारत-EU FTA पर बड़ा ब्रेकथ्रू.     डिफेंस और सिक्योरिटी पार्टनरशिप का औपचारिक ऐलान.     ग्रीन एनर्जी, हाइड्रोजन और क्लीन टेक्नोलॉजी में सहयोग.     सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन में भारत की भूमिका मजबूत.     वैश्विक नियम-आधारित व्यवस्था की संयुक्त पैरवी. क्यों कहा जा रहा है इसे बड़ा कूटनीतिक दांव? EU ने हाल ही में भारत के लिए नई स्ट्रैटेजिक एजेंडा तैयार की है. वहीं भारत भी EU को सिर्फ देशों के समूह के तौर पर नहीं, बल्कि एक रणनीतिक शक्ति के रूप में देखने लगा है. इस दौर में यह न्योता बताता है कि भारत वैश्विक राजनीति में सिर्फ संतुलन नहीं, बल्कि दिशा तय करने की भूमिका में आ चुका है.

टोल प्लाजा पर नकद भुगतान बंद, 1 अप्रैल से FASTag और UPI से ही होगी एंट्री

 नई दिल्ली FASTag Toll Payment: देश के हाइवे पर यात्रा का तरीका बदलने जा रहा है. हाईवे जर्नी को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है. 1 अप्रैल से देश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. अब टोल टैक्स सिर्फ FASTag या UPI के जरिए ही चुकाया जा सकेगा. सरकार का मानना है कि इस फैसले से न सिर्फ यात्रा आसान होगी, बल्कि समय, फ्यूल और पैसे की भी बचत होगी. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने कहा कि, भारत तेजी से डिजिटल इकॉनमी की ओर बढ़ रहा है. पहले UPI से टोल भुगतान की सुविधा शुरू की गई थी, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया. अब सरकार ने टोल प्लाजा पर कैश भुगतान (Cash Payment) पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला किया है. 1 अप्रैल के बाद टोल पर सिर्फ FASTag या UPI ही मान्य होंगे. टोल प्लाजा से खत्म होगा कैश लेन इस फैसले के बाद देशभर के टोल प्लाजा पर कैश लेन पूरी तरह बंद हो जाएंगे. इससे मैन्युअल वसूली के कारण लगने वाली लंबी कतारों से राहत मिलेगी. सरकार का कहना है कि कैशलेस टोलिंग से सिस्टम ज्यादा फास्ट, ट्रांसपैरेंट और भरोसेमंद बनेगा. अब भी कई लोग FASTag होने के बावजूद कैश लेन का इस्तेमाल करते थे, जिससे खासकर त्योहारों और पीक आवर्स में जाम की स्थिति बनती थी. फ्यूल और टाइम की बचत टोल प्लाजा पर बार-बार रुकने से गाड़ियों का फ्यूल ज्यादा खर्च होता है और ड्राइवरों को भी थकान होती है. वी. उमाशंकर के मुताबिक हर बार रुकने और फिर गाड़ी चलाने में समय और डीजल दोनों की बर्बादी होती है. लंबी दूरी की यात्रा में यह नुकसान और बढ़ जाता है. कैशलेस सिस्टम से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी. बैरियर-फ्री टोलिंग की तैयारी कैशलेस टोल का यह फैसला भविष्य की एक बड़ी योजना की तैयारी भी माना जा रहा है. सरकार जल्द ही मल्टी लेन फ्री फ्लो यानी MLFF टोलिंग सिस्टम लागू करने जा रही है. इस सिस्टम में टोल प्लाजा पर कोई बैरियर नहीं होगा और वाहन बिना रुके हाईवे पर फर्राटा भरते हुए निकल सकेंगे. टोल शुल्क अपने आप FASTag और व्हीकल आइडेंटिफिकेशन सिस्टम के जरिए कट जाएगा. 25 टोल प्लाजाओं पर पायलट प्रोजेक्ट सरकार ने MLFF सिस्टम के पायलट प्रोजेक्ट के लिए देशभर में 25 टोल प्लाजाओं को चिन्हित किया है. यहां इस नई तकनीक को लागू करने से पहले नियमों  और यात्रियों के अनुभवों की जांच की जाएगी. इसके बाद इस सिस्टम को पूरे देश में लागू करने की योजना है. इससे जाम खत्म होगा, ट्रैवेल टाइम घटेगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी. सरकार ने यात्रियों से अपील की है कि वे 1 अप्रैल से पहले अपना FASTag एक्टिव रखें और उसमें पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करें, या UPI भुगतान के लिए तैयार रहें. कैशलेस टोलिंग और बैरियर-फ्री हाईवे का यह कदम भारत की सड़क यात्रा को पूरी तरह बदलने वाला है. आने वाले समय में टोल प्लाजाओं पर किसी तरह का कोई जाम नहीं लगेगा और सफर ज्यादा बेहतर और आसान होगा.

F-35 और Su-57 के बिना भी सुपर पावर बनेगा IAF, ₹325000 करोड़ की डील से चीन-पाक को आया पसीना

बेंगलुरु   तमाम रिपोर्ट्स में फ्रांस की डसॉल्ट डिफेंस एविएशन कंपनी के साथ तीन लाख करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा की राफेल फाइटर जेट डील पर आगे बढ़ने की बात कही जा रही है. अभी तक के सबसे बड़े लड़ाकू विमान खरीद करार के तहत 114 राफेल जेट खरीदने की बात कही जा रही है. इसके तहत 12 से 18 एयरक्राफ्ट फ्लाई-अवे यानी पूरी तरह से डेवलप कंडीशन में मिलेंगे, जबकि अन्‍य जेट का को-प्रोडक्‍शन भारत में होगा. रिपोर्टस की मानें तो यह डील ₹325000 करोड़ की है. तकरीबन डेढ़ दशक पहले भी सौ से ज्‍यादा राफेल जेट खरीदने को लेकर फ्रांस के साथ समझौता हुआ था, जिसे साल 2015 में रद्द कर दिया गया था. बाद में गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट डील के तहत 36 राफेल जेट खरीदे गए थे. इसकी डिलीवरी पूरी हो चुकी है. राफेल फाइटर जेट भारत के संवेदनशील एयरबेस पर तैनात हैं. इस जेट ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी क्षमताओं और उपयोगिता का प्रदर्शन किया था. इसके बाद भारत अब 114 अतिरिक्‍त राफेल फाइटर जेट खरीदने की प्रक्रिया पर आगे बढ़ रहा है. बता दें कि इंडियन नेवी के लिए 26 राफेल-M फाइटर जेट अलग से खरीदने का करार हुआ है, जो एडवांस स्‍टेज में है. अब सवाल उठता है कि 114 राफेल जेट को खरीदने का फैसला क्‍यों किया गया और यह डील पहले के खरीद समझौते से कैसे अलग होने वाला है. मौजूदा डील में दो सीक्रेट प्रोविजन किए गए हैं. इससे इंडियन एयरफोर्स साउथ एशिया रीजन में काफी शक्तिशाली हो जाएगी. एयर पावर कैलकुलस भी बदल जाएगा. चीन-पाकिस्‍तान जैसे देश भारत की तरफ आंख उठाकर देखने से पहले हजार बार सोचेंगे. इंडियन एयरफोर्स के लिए फिलहाल 42 स्‍क्‍वाड्रन तय किया गया है, पर यह संख्‍या चिंताजनक तरीके से 30 से नीचे आ चुका है. इस गैप न केवल भरने कोशिश की जा रही है, बल्कि सैंक्‍शन्‍ड स्‍क्‍वाड्रन को 42 से बढ़ाकर 50 तक करने की प्‍लानिंग है, ताकि पश्चिमी और उत्‍तरी सीमा को अभेद्य बनाया जा सके. इन सबके बीच फ्रांस के रक्षा विमानन पोर्टल avionslegendaires.net की एक रिपोर्ट सामने आई है. इसमें दावा किया गया है कि भारत और फ्रांस के बीच प्रस्तावित राफेल लड़ाकू विमान सौदा केवल 114 नए राफेल F4 फाइटर जेट की खरीद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे कहीं बड़ा और व्यापक हो सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, इस पैकेज में भारतीय वायुसेना (IAF) के बेड़े में पहले से शामिल 36 राफेल F3R (3FR) स्‍टैंडर्ड के जेट्स को भी अत्याधुनिक F4 स्टैंडर्ड में अपग्रेड किया जा सकता है. इससे भारतीय वायुसेना के अधिकांश राफेल विमान एक ही उन्नत तकनीकी स्तर पर आ जाएंगे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित 114 नए राफेल विमानों में से कम से कम 24 विमान भविष्य के राफेल F5 स्टैंडर्ड के हो सकते हैं, जिनका उत्पादन 2030 के बाद शुरू होने की उम्मीद है. हालांकि, इन 24 राफेल F5 विमानों का निर्माण पूरी तरह फ्रांस में ही किया जा सकता है, न कि भारत में प्रस्तावित लोकर प्रोडक्‍शन लाइन के तहत. राफेल F4 vs राफेल F5 राफेल F4 राफेल F5 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): मिशन को आसान बनाने के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल, जिससे पायलट पर काम का बोझ कम होगा और आसपास की स्थिति बेहतर समझ में आएगी. नया फाइटर जेट अब बिना पायलट वाले ड्रोन (UCAV) के साथ मिलकर काम करेगा. यह ड्रोन ‘लॉयल विंगमैन’ की तरह जेट के साथ उड़ान भरकर दुश्‍मन पर हमला करेगा. एडवांस एवियोनिक्स: कॉकपिट में बड़े डिस्प्ले, आधुनिक होलोग्राफिक HUD और बेहतर कम्युनिकेशन सिस्टम, जिससे जानकारी तेजी से साझा होगी. इसमें हाइपरसोनिक मिसाइल ASN4G लगाने की तैयारी है, जो बहुत तेज रफ्तार से गहराई तक हमला (डीप अटैक) करने में सक्षम होगी. नई और ताकतवर हथियार क्षमता: MICA NG मिसाइल (नई पीढ़ी) हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है. इसके अलावा AASM हैमर बम भी होगा. इस जेट में 1,000 किलो तक का बम ले जाने की क्षमता के साथ दूर से सटीक हमला करना संभव होगा. जेट में अब और ताकतवर रडार (RBE2XG) और खास इन्फ्रारेड सेंसर लगाए जाएंगे, जिससे दुश्‍मन के छिपे हुए विमान या स्‍टील्‍थ फाइटर जेट भी पकड़े जा सकेंगे. TALIOS पॉड: AI से लैस उन्नत टारगेटिंग सिस्टम, जिससे निशाना ज्यादा सटीक होगा. TALIOS पॉड को बेहतर बनाया गया है, जिससे निगरानी, जानकारी जुटाने और टारगेट को पहचानने की क्षमता बढ़ेगी. इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम: SPECTRA सिस्टम को और मजबूत किया गया है, जो दुश्मन के खतरों और मिसाइलों को जल्दी पहचानकर बचाव करेगा. नए डाटा लिंक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से पायलट को युद्ध के दौरान फैसले लेने में आसानी होगी. कनेक्टेड कॉम्बैट: रियल टाइम में सेना की अन्य इकाइयों के साथ डेटा शेयर करने की सुविधा. SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्‍टम को और मजबूत किया गया है, ताकि दुश्‍मन के रडार और मिसाइल से बेहतर बचाव हो सके. साइबर सुरक्षा: डेटा को सुरक्षित रखने के लिए बेहतर साइबर प्रोटेक्शन. इसमें नई मिसाइलें और हथियार जोड़े जाएंगे, जो दुश्‍मन के एयर डिफेंस को नष्‍ट करने में मदद करेंगे. ट्रेनिंग सुविधा: विमान में ही एडवांस ट्रेनिंग के लिए सिमुलेशन सिस्टम. जेट में अब ज्‍यादा ताकतवर इंजन लगाए जाने की उम्‍मीद है, जिससे इसकी रफ्तार और ताकत बढ़ेगी. अपग्रेड में आसानी: पुराने राफेल F3 वर्जन को आसानी से F4 में बदला जा सकता है. यह विमान पूरी तरह पांचवीं पीढ़ी का स्‍टील्‍थ जेट नहीं है, लेकिन पुराने मॉडल की तुलना में इसे इंटरसेप्‍ट करना आसान नहीं होगा, जिससे दुश्‍मन के लिए इसे पकड़ना मुश्किल होगा.  राफेल F4 अपग्रेड: मौजूदा फ्लीट में बड़ा बदलाव मीडिया रिपोर्ट में किया गया यह दावा यदि सही साबित होता है तो भारतीय वायुसेना के पास तब राफेल के तीन अलग-अलग वर्जन (F3R, F4 और भविष्य में F5) एक साथ सेवा में होंगे, जो इसकी लड़ाकू क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय वायुसेना के 36 राफेल F3R विमानों को F4 स्टैंडर्ड में अपग्रेड किया जाना एक साधारण सुधार नहीं, बल्कि एक गहरा और व्यापक आधुनिकीकरण होगा. इस अपग्रेड में एवियोनिक्स, सेंसर, हथियारों का इंटीग्रेशन, कम्‍यूनिकेशन सिस्‍टम और रखरखाव ढांचे में बड़े बदलाव शामिल होंगे. F4 अपग्रेड का सबसे अहम हिस्सा उन्नत एवियोनिक्स सिस्टम है. इसमें पहले से लगे RBE2 AESA रडार … Read more

थमी नहीं बांग्लादेश में हिंसा: अल्पसंख्यक हिंदुओं को बनाया जा रहा निशाना

ढाका बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में कट्टरपंथियों के मन से कानून का भय पूरी तरह से खत्म हो चुका है। ताजा मामले में सिलहट जिले के गोवाईघाट उपजिला में एक हिंदू शिक्षक बीरेंद्र कुमार डेके घर में आग लगा दी गई। इसकी वजह से पीड़ित के परिवार और आसपास के लोगों में डर और घबराहट फैल गई। हमले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि घर में तेजी से आग की लपटें दिख रही थीं और परिवार के सदस्य भागने की कोशिश कर रहे थे। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिलहट जिले के गोवाईघाट उपजिला के नंदिरगांव यूनियन के बहोर गांव में इस्लामी समूह ने कथित तौर पर एक स्कूल टीचर के घर में आग लगा दी। एक अन्य मामले में इस हफ्ते की शुरुआत में फेनी जिले के दगनभुइयां उपजिला में बदमाशों ने एक हिंदू शख्स की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। 27 साल के ऑटो रिक्शा ड्राइवर समीर दास की लाश सोमवार को बांग्लादेश के जगतपुर गांव के खेत से मिली। परिवार वालों और पुलिस के हवाले से बांग्लादेश के अखबार डेली मनोबकांठा ने बताया कि समीर रविवार शाम को अपने ऑटो रिक्शा से निकला था। जब वह देर रात तक घर वापस नहीं आया, तो उसके रिश्तेदारों ने उसे अलग-अलग जगहों पर ढूंढना शुरू कर दिया। बाद में, वहां के लोगों को उपजिला के सदर यूनियन के तहत जगतपुर गांव के एक खेत में समीर की बॉडी मिली। खबर मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बरामद किया। यह 24 दिनों में नौवीं घटना थी, जिसमें पूरे बांग्लादेश में हिंदू समुदायों को निशाना बनाकर हिंसा को अंजाम दिया गया। ऐसे हालात को लेकर लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जाहिर की जा रही है। इससे पहले 9 जनवरी को भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर बार-बार होने वाले हमलों के परेशान करने वाले पैटर्न पर गहरी चिंता जताई थी। भारत ने कहा था कि वह पड़ोसी देश में स्थिति पर नजर रख रहा है और उम्मीद करता है कि सांप्रदायिक हिंसा की ऐसी घटनाओं से सख्ती से निपटा जाएगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर IMF की मुहर, भाजपा बोली—राहुल गांधी की नकारात्मक राजनीति को जवाब

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की तरफ से भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रशंसा किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है। भाजपा प्रवक्ता सीआर केसवन ने कहा कि आईएमएफ का भारतीय अर्थव्यवस्था की तारीफ करना राहुल गांधी के झूठे नैरेटिव और घटिया राजनीतिक एजेंडे पर एक करारा जवाब है। सीआर केसवन ने राहुल गांधी को 'लीडर ऑफ पेसिमिज्म' (एलओपी) बताते हुए कहा, "उन्होंने जानबूझकर झूठ बोला और भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में बुरा-भला कहा। क्या वे अब देश और जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगेंगे?" भाजपा प्रवक्ता ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "आईएमएफ की ओर से भारतीय अर्थव्यवस्था की तारीफ राहुल गांधी के झूठे नैरेटिव और घटिया राजनीतिक एजेंडे पर एक करारा जवाब और झटका है। उन्होंने देश की शानदार प्रगति और विकास को कम आंकने की कोशिश की थी। राहुल गांधी को जनता बार-बार नकार रही है, क्योंकि अपने छोटे, नाकाम राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भारत को गाली देने और बदनाम करने में उन्हें कोई पछतावा या शर्म नहीं है।" ज्ञात हो कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने कुछ महीने पहले भारतीय अर्थव्यवस्था को 'डेड इकोनॉमी' करार दिया था। राहुल गांधी ने अपने एक बयान में कहा, "सब जानते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था एक मरी हुई अर्थव्यवस्था है। इस बारे में पूरी दुनिया जानती है।" हालांकि, आईएमएफ ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि हाल की तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर गति से बढ़ी है। आईएमएफ ने यह भी कहा कि वैश्विक विकास को आगे बढ़ाने में भारत की भूमिका बहुत अहम है। भारत की 2025 की आर्थिक वृद्धि को लेकर पूछे गए सवाल पर आईएमएफ की संचार विभाग की निदेशक जूली कोजेक ने कहा, "भारत ग्लोबल विस्तार को आगे बढ़ा रहा है, भले ही व्यापक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक माहौल में अनिश्चितता छाई हुई हो।" कोजेक ने आगे कहा, "हमने देखा है कि भारत दुनिया के लिए एक प्रमुख ग्रोथ इंजन है।" इससे पहले, भारत ने पहली और दूसरी तिमाही में क्रमशः 7.8 प्रतिशत और 8.2 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ रेट दर्ज की। इसकी तीसरी तिमाही में 7 प्रतिशत से काफी ऊपर ग्रोथ रहने का अनुमान है। एक प्रमुख एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए देश की कुल ग्रोथ रेट 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।