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वोट कटने का आरोप: ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को घेरा, कहा– लोकतंत्र से हो रहा खिलवाड़

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को भारत के चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के जरिए जानबूझकर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री का दावा है कि अल्पसंख्यक बहुल मालदा में करीब 90,000 वोटरों के नाम अंतिम वोटर लिस्ट से हटाने की तैयारी की जा रही है। उत्तर बंगाल रवाना होने से पहले कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मीडिया से बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, “अल्पसंख्यक समुदाय की शिकायतें बिल्कुल सही हैं। उनके वोटरों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। मुझे जानकारी मिली है कि केवल मालदा में ही 90,000 नाम हटाए जा सकते हैं। सिर्फ अल्पसंख्यक ही नहीं, बल्कि मतुआ, राजवंशी और आदिवासी समुदाय जैसे पिछड़े वर्गों के वोटरों को भी निशाना बनाया जा रहा है। यहां तक कि अमर्त्य सेन और कवि जॉय गोस्वामी जैसे प्रसिद्ध लोगों के नाम भी नहीं छोड़े जा रहे हैं।” शुक्रवार सुबह से मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा इलाके में तनाव बना हुआ है। यह तनाव तब शुरू हुआ, जब पड़ोसी राज्य झारखंड में कथित तौर पर मारे गए एक स्थानीय प्रवासी मजदूर का शव वापस लाया गया। इस घटना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदर्शन कर रहे लोगों से संयम और शांति बनाए रखने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा, “हम सभी जानते हैं कि बेलडांगा में लोगों को भड़काने के पीछे कौन लोग हैं। फिर भी मैं सभी से अपील करती हूं कि शांति बनाए रखें और किसी भी उकसावे में न आएं। पश्चिम बंगाल में जानबूझकर हिंसा फैलाने की कोशिश की जा रही है। इसके पीछे बीजेपी का हाथ है और इस मामले में केंद्रीय एजेंसियों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूरों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है और उनकी हत्याएं हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं ऐसे सभी मामलों पर नजर रख रही हूं। मेरी सरकार और तृणमूल कांग्रेस ऐसे प्रवासी मजदूरों के परिवारों के साथ खड़ी है।” हालांकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्रवाई पर कोई टिप्पणी नहीं की। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर पर रोक लगा दी थी। यह एफआईआर राजनीतिक सलाहकार कंपनी आई-पैक के दफ्तर और उसके को-फाउंडर प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित घर पर हाल ही में हुई तलाशी से जुड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में केंद्रीय जांच में राज्य एजेंसियों की कथित दखलअंदाजी जैसे गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और विपुल पंचोली की बेंच ने इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया। ये नोटिस ईडी की उन याचिकाओं पर जारी किए गए हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि पिछले हफ्ते हुई तलाशी के दौरान जांच में रुकावट डाली गई थी।

रेल यात्रियों के लिए बड़ी सौगात: वंदे भारत स्लीपर में मिलेंगी हाईटेक सुविधाएं, पहली यात्रा में ही बन जाएंगे फैन

नई दिल्ली भारतीय रेलवे पिछले 11 साल से यात्रियों की सुविधा को सुगम, सुरक्षित और तेज बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। भारतीय रेलवे ने इस दौरान अपनी यात्रा में कई नए अध्याय जोड़े हैं। पिछले कुछ सालों में रेलवे ने रेलगाड़ियों की गति, उसके इंफ्रास्ट्रक्चर और साथ ही रेल डिब्बों और इंजन के विकास के साथ कैसे रेलवे की यात्रा यात्रियों के लिए सुखद, सुविधाजनक और समय बचाने वाली हो, इसको लेकर प्रयास किए हैं।  रेलवे ने इस विकास यात्रा में कई हाई स्पीड और सेमी हाई स्पीड ट्रेनों को पटरी पर उतारा है, जिनमें हमसफर, वंदे भारत और साथ ही अमृत भारत जैसी ट्रेनें हैं, जो समय के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से या तो शुरू की जा चुकी हैं या इनकी शुरुआत की जा रही है। अब रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए कई रूटों पर नई स्लीपर वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों के परिचालन का फैसला लिया है। अभी तक वंदे भारत ट्रेनें केवल बैठकर यात्रा करने के लिए डिजाइन की गई थीं। लेकिन, अब लंबी दूरी के यात्रियों को ध्यान में रखते हुए और उनकी यात्रा को सुखद और सुविधाजनक बनाने के लिए स्लीपर वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों के परिचालन का फैसला रेलवे ने लिया है। इस स्लीपर वंदे भारत ट्रेन के परिचालन और इसकी स्पीड की वजह से लंबी दूरी की यात्राओं में यात्रियों का 3 घंटे से ज्यादा का समय बचेगा और साथ ही यात्रियों की यात्रा पहले के मुकाबले ज्यादा आरामदायक और लग्जरी होगी। देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को पीएम नरेंद्र मोदी 17 जनवरी को हरी झंडी दिखाएंगे और 18 जनवरी को हावड़ा से कामख्या के लिए इस ट्रेन की नियमित सेवा शुरू हो जाएगी। इसमें स्लीपर के साथ एसी1, एसी2 और एसी3 कोच भी शामिल होंगे। इस ट्रेन के इंटीरियर को जहां भारतीय संस्कृति से प्रेरित होकर डिजाइन किया गया है, वहीं यात्रियों की सुरक्षा के लिए इसमें 'कवच' ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी टॉक-बैक यूनिट और बेहतर सैनिटेशन के लिए कीटाणुनाशक तकनीक (डिसइंफेक्टेंट टेक्नोलॉजी) का इस्तेमाल किया गया है। यानी यात्रियों की सुरक्षित यात्रा के लिए इस ट्रेन में ड्राइवर के केबिन में भी एडवांस कंट्रोल और सुरक्षा सिस्टम लगे होंगे। ट्रेन का बाहरी लुक भी एरोडायनामिक होगा, यानी यह हवा को चीरता हुआ आगे बढ़ेगा। इसके बाहरी दरवाजे भी ऑटोमेटिक तरीके से खुलेंगे और बंद होंगे। बेहतर सैनिटेशन के लिए कीटाणुनाशक तकनीक (डिसइंफेक्टेंट टेक्नोलॉजी) के इस्तेमाल की वजह से वंदे भारत स्‍लीपर में साथ बैठे यात्री को सर्दी-जुकाम है तो साथी यात्री को कोई टेंशन लेने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि अब नई तकनीक से वायरस की छुट्टी होगी। रेल मंत्रालय से अब जो जानकारी निकलकर सामने आई है, उसकी मानें तो इसके कोच में यूवीसी तकनीक का इस्‍तेमाल किया गया है, जिससे हवा में वायरस डिसइंफेक्टेंट हो जाएंगे। यानी यह उपकरण हवा को खींचेगा और फिर उसे फ्रेश करके दोबारा कोच में छोड़ देगा। वैसे इस लग्जरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की गति की बात करें तो इसकी अधिकतम गति सीमा 180 किमी/घंटा होगी, जबकि नियमित सेवा में यह 130 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेगी। इस स्लीपर ट्रेन में यात्रियों को कई प्रीमियम सुविधाएं मिलेंगी। यात्रियों को इसमें हाई क्वालिटी वाले कंबल कवर और एडवांस्ड बेडरोल यात्रा के दौरान दिए जाएंगे। इसके साथ ही इस ट्रेन में यात्रियों को कैटरिंग की सर्विस भी दी जाएगी। इसके साथ ही यह भी जानकारी है कि इस ट्रेन में यात्रा कर रहे यात्रियों को आईआरसीटीसी की तरफ से 1 लीटर रेल नीर बोतल के साथ एक अखबार भी मिलेगा, जिसके लिए अलग से कोई चार्ज नहीं किया जाएगा। इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें यात्री अपनी आरामदायक यात्रा का इसलिए भी आनंद ले सकेंगे क्योंकि इसमें कोई आरएससी (आरएसी) या वेटिंग लिस्ट का झंझट नहीं होगा, इसके साथ ही पार्ट कन्फर्म टिकट की भी इसमें व्यवस्था नहीं होगी। यानी इसमें केवल पूर्णतः कंफर्म टिकट ही प्राप्त होगा और इसी के साथ यात्री इस ट्रेन में सफर कर सकेंगे। मतलब अब टिकट कंफर्म है तो चार्ट बनने के इंतजार वाले सिस्टम से यात्रियों को मुक्ति मिलेगी। इस ट्रेन में यात्रियों की आरामदायक यात्रा के लिए बेहतर कुशनिंग के साथ आरामदायक बर्थ और शोर कम करने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यानी इसमें एर्गोनोमिक बर्थ की सुविधा मिलेगी। साथ ही इस यात्रा में यात्रियों के लिए सभी ऑनबोर्ड स्टाफ निर्धारित यूनिफॉर्म में ट्रेन पर तैनात रहेंगे। इस ट्रेन के बारे में जो विशेष जानकारी मिल पाई है, उसके अनुसार इसकी यात्रा सेवा के दौरान नो वीआईपी कोटा ऑप्शन बना रहेगा। यानी इस ट्रेन में वीआईपी या इमरजेंसी कोटा की अनुमति नहीं होगी। यहां तक कि वरिष्ठ रेल अधिकारी भी पास का इस्तेमाल करके इसमें यात्रा नहीं कर पाएंगे। यानी इसमें केवल चार कोटा होंगे, महिला कोटा, दिव्यांग कोटा, वरिष्ठ नागरिक कोटा, और ड्यूटी पास कोटा। इसके अलावा इसमें कोई कोटा मान्य नहीं होगा। इस ट्रेन में यात्रियों का सफर अब सिर्फ तेज और आरामदायक नहीं, बल्कि स्वाद से भरपूर भी होने वाला है। भारतीय रेलवे की तरफ से अब वंदे भारत ट्रेनों में वही खाना परोसा जाएगा, जो उस इलाके की पहचान है, जहां से ट्रेन की शुरुआत होगी। बात करें तो वंदे भारत स्लीपर का किराया राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों से थोड़ा ज्यादा होगा। जानकारी के मुताबिक इसका न्यूनतम किराया 400 किमी की दूरी के आधार पर तय किया गया है।

स्टार्टअप इंडिया की बड़ी सफलता: 2 लाख पंजीकृत स्टार्टअप, 21 लाख से अधिक नौकरियां सृजित

नई दिल्ली देश में शुक्रवार को 'स्टार्टअप इंडिया' पहल को 10 साल पूरे हो चुके हैं। इस अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें देश के प्रमुख स्टार्टअप उद्यमियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि आज भारत में करीब 2 लाख स्टार्टअप रजिस्टर्ड हैं। इन स्टार्टअप्स के जरिए अब तक 21 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल चुका है। भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार मजबूत हो रहा है और देश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभा रहा है। पीयूष गोयल ने आगे कहा कि भारतीय स्टार्टअप आज 50 से ज्यादा अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इनमें टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, एग्रीटेक, फिनटेक, ड्रोन टेक्नोलॉजी और डीप टेक जैसे क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पिछले बजट में सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपए का 'फंड ऑफ फंड्स' घोषित किया था, जिसके जरिए हाई-टेक और डीप टेक स्टार्टअप्स को प्राथमिकता दी जा रही है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि देश के कुल स्टार्टअप्स में से करीब 50 प्रतिशत स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं, जो इस बात का सबूत है कि उद्यमिता अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कहा कि कर्नाटक और तमिलनाडु अब ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग के बड़े केंद्र बनकर उभर रहे हैं। पीयूष गोयल के मुताबिक, दुनिया के 100 से ज्यादा देश भारत के साथ स्टार्टअप सेक्टर में साझेदारी करना चाहते हैं। सरकार इस दिशा में योजना बना रही है कि इन देशों के साथ सहयोग को कैसे आगे बढ़ाया जाए, ताकि भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर और ज्यादा अवसर मिल सकें। इससे पहले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि 'स्टार्टअप इंडिया' क्रांति को एक दशक पूरा हो गया है। यह एक साहसिक कदम था, जिसने भारत को बड़ा सोचने और उससे भी बड़ा करने की ताकत दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस दूरदर्शी पहल की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण देश में डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स और उनके द्वारा पैदा किए गए 21 लाख से ज्यादा रोजगार हैं। पीयूष गोयल ने कहा कि इस सफलता को यह तथ्य और खास बनाता है कि इससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में उद्यमिता की भावना को नई ऊर्जा मिली है और युवाओं व महिलाओं को सशक्त बनाया गया है। राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों की यह यात्रा निरंतरता, समावेशिता और विकास को दर्शाती है, साथ ही भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के उज्ज्वल भविष्य का भरोसा भी देती है।

PWD–NHAI ने हटाए अवैध निर्माण, NH-89 पर फिर से खुला रास्ता

अजमेर नेशनल हाईवे-89 पर अतिक्रमण के खिलाफ बुधवार को प्रशासन ने बड़ी और सख्त कार्रवाई की। देवनगर नागौर गांव से गुजर रहे NH-89 पर PWD और नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) ने संयुक्त रूप से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। इस दौरान करीब 22 किलोमीटर लंबे हिस्से में अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। कार्रवाई के दौरान जेसीबी मशीनों का व्यापक उपयोग किया गया और हाईवे की जद में आ रहे मकान, दुकानें व अन्य निर्माण हटाए गए। ढाई माह पहले दिए गए थे नोटिस नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि हाईवे किनारे अतिक्रमण करने वालों को करीब ढाई माह पहले नोटिस जारी किए गए थे। नियमों के तहत जिन मकानों और दुकानों को हटाया जाना था, उनके मालिकों को मुआवजा भी दिया जा चुका था। इसके बावजूद कई लोगों ने अतिक्रमण नहीं हटाया, जिसके बाद मजबूरन प्रशासन को यह सख्त कदम उठाना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि NH-89 पर लगातार बढ़ते यातायात और दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए हाईवे की चौड़ाई और सुरक्षा मानकों को बनाए रखना जरूरी था। अतिक्रमण के कारण न केवल ट्रैफिक बाधित हो रहा था, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बना हुआ था।   भारी पुलिस जाप्ते में हुई कार्रवाई अतिक्रमण हटाने की इस बड़ी कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। स्थानीय थाना प्रभारी विक्रम सिंह राठौड़ के नेतृत्व में पुलिस जाप्ता मौके पर मौजूद रहा। पुलिस ने पूरे अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखी और कार्रवाई को शांतिपूर्वक संपन्न कराया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, कुछ स्थानों पर लोगों ने विरोध का प्रयास किया, लेकिन पुलिस और प्रशासन की समझाइश के बाद स्थिति नियंत्रित रही। हाईवे सुरक्षा और विकास पर जोर PWD और NHAI अधिकारियों ने दो टूक कहा कि नेशनल हाईवे पर अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाईवे की सुरक्षा, सुचारु यातायात और भविष्य के विकास कार्यों के लिए यह कार्रवाई आवश्यक थी। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में भी अन्य हिस्सों में अतिक्रमण के खिलाफ इसी तरह सख्त अभियान चलाया जाएगा। स्थानीय लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। जहां कुछ लोगों ने इसे विकास और सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम बताया, वहीं प्रभावित लोगों ने प्रशासन से पुनर्वास और सहयोग की मांग की। फिलहाल NH-89 पर अतिक्रमण हटने से यातायात पहले की तुलना में अधिक सुचारु हो गया है। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान हाईवे को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।  

ग्रीनलैंड में तनाव बढ़ा, अमेरिका सैनिक भेजे, यूरोप ने ट्रंप की नीति पर जताई नाराजगी

वाशिंगटन ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच गंभीर मतभेद सामने आ गए हैं। इसी तनाव के बीच यूरोप के कई देशों के सैनिक डेनमार्क के समर्थन में ग्रीनलैंड पहुंचने लगे हैं। इसका मकसद यूरोपीय एकजुटता दिखाना और अमेरिका को यह संदेश देना है कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा नाटो मिलकर कर सकता है। हाल ही में व्हाइट हाउस ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों के साथ होने वाली बातचीत को “ग्रीनलैंड के अधिग्रहण से जुड़ी तकनीकी वार्ता” बताया। यह बयान डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन के रुख से अलग था। रासमुसेन ने कहा कि बातचीत का उद्देश्य केवल मतभेदों को सुलझाने के रास्ते तलाशना है, न कि किसी अधिग्रहण पर सहमति बनाना। वार्ता शुरू होने से पहले ही डेनमार्क ने घोषणा की थी कि वह ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाएगा। इसके बाद फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नॉर्वे, स्वीडन और नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देशों ने प्रतीकात्मक संख्या में सैनिक भेजने शुरू कर दिए हैं या जल्द भेजने का वादा किया है। डेनमार्क के रक्षा मंत्री ट्रोएल्स लुंड पाउल्सेन ने बताया कि कई नाटो देशों के सैनिक बारी-बारी से ग्रीनलैंड में तैनात रहेंगे। इसका उद्देश्य आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करना है, जहां रूस और चीन की बढ़ती दिलचस्पी चिंता का कारण बनी हुई है।   हालांकि, अमेरिका अपने रुख पर कायम है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने साफ कहा कि यूरोपीय सैनिकों की तैनाती से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोच पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनके मुताबिक, ट्रंप मानते हैं कि ग्रीनलैंड को हासिल करना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने दोहराया है कि ग्रीनलैंड उनके लिए केवल रणनीतिक संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी संप्रभुता और पहचान का सवाल है। इसी वजह से आने वाले हफ्तों में बनने वाला उच्च स्तरीय कार्य समूह इस विवाद में अहम भूमिका निभा सकता है।  

ट्रेड ज्वार: अमेरिका ने ताइवान से बड़े सौदे के साथ शुल्क घटाया, चीन पर दबाव बढ़ा

वाशिंगटन अमेरिका और ताइवान ने बृहस्पतिवार को एक बड़े व्यापार समझौते पर सहमति जताई, जिसके तहत ताइवान की वस्तुओं पर शुल्क में कटौती की जाएगी और बदले में ताइवान अमेरिका में 250 अरब अमेरिकी डॉलर के नए निवेश करेगा। यह समझौता उन हालिया व्यापार सौदों में शामिल है जो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किए हैं। इससे पहले उन्होंने यूरोपीय संघ और जापान के साथ भी ऐसे समझौते किए थे। ये सभी समझौते ट्रंप द्वारा पिछले साल अप्रैल में व्यापार असंतुलन दूर करने के लिए पेश की गई व्यापक शुल्क योजना के बाद किए गए हैं। ट्रंप ने दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन के साथ रिश्तों को स्थिर करने के उद्देश्य से एक साल के व्यापारिक संघर्ष-विराम (ट्रेड ट्रूस) पर भी सहमति जताई। शुरुआत में ट्रंप ने ताइवान से आने वाले सामान पर 32 प्रतिशत शुल्क तय किया था, जिसे बाद में घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया। नए समझौते के तहत अब शुल्क दर को और कम करके 15 प्रतिशत कर दिया गया है जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के अन्य व्यापारिक साझेदारों जैसे जापान और दक्षिण कोरिया पर लगाए गए शुल्क के बराबर है। अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ताइवान के साथ यह समझौता एक “आर्थिक साझेदारी” स्थापित करेगा, जिसके तहत घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका में कई “विश्व स्तरीय” औद्योगिक पार्क बनाए जाएंगे। वाणिज्य मंत्रालय ने इसे एक ‘‘ऐतिहासिक व्यापार समझौता'' करार दिया और कहा कि इससे अमेरिका के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को गति मिलेगी। ताइवान की सरकार ने एक बयान में इस समझौते के प्रमुख बिंदुओं की पुष्टि करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच ‘रणनीतिक सहयोग' और गहरा होगा।  

ईरान ने ट्रंप को दी जान से मारने की चेतावनी, कहा– इस बार निशाना पक्का होगा

ईरान ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और उसमें अमेरिका के कथित हस्तक्षेप के बाद ईरान और अमेरिका के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के जवाब में अब ईरान ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। ईरान की सरकारी टेलीविजन पर एक ऐसा फुटेज प्रसारित किया गया, जिसमें ट्रंप को सरेआम जान से मारने की धमकी दी गई है। इस फुटेज में ट्रंप की वह तस्वीर दिखाई गई है, जो 2024 में अमेरिका के पेंसिल्वेनिया राज्य के बटलर शहर में एक चुनावी रैली के दौरान उन पर हुए जानलेवा हमले से जुड़ी है। तस्वीर के साथ फारसी भाषा में लिखा गया है  “इस बार निशाना नहीं चूकेगा और गोली सिर के आर-पार होगी ।”   यह पोस्टर एक ऐसे युवक के हाथ ोमें दिखाया गया, जो तेहरान में हालिया प्रदर्शनों के दौरान मारे गए ईरानी सुरक्षाकर्मियों के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल था। यह कार्यक्रम इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान न्यूज नेटवर्क (IRINN) पर प्रसारित किया गया। समारोह के दौरान कई लोग ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ लिखे बैनर पकड़े हुए थे और कुछ लोग ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीरें लहराते नजर आए। गौरतलब है कि पेंसिल्वेनिया की जिस घटना का जिक्र पोस्टर में किया गया, उसमें थॉमस क्रूक्स नामक बंदूकधारी ने ट्रंप पर गोली चलाई थी। हालांकि गोली ट्रंप के कान को छूते हुए निकल गई थी और वह बाल-बाल बच गए थे। इसी घटना को लेकर ईरान के सरकारी प्रसारण में यह संकेत दिया गया कि अगली बार हमला जानलेवा होगा।   ईरान का नाम इससे पहले भी विदेशों में हत्या की साजिशों से जुड़ चुका है। जनवरी 2020 में ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी हमले में मौत के बाद से ईरान लगातार ट्रंप से बदला लेने की कसम खाता रहा है। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, 2024 में फरहाद शेकेरी नामक व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप की हत्या की एक ईरान-समर्थित साजिश को नाकाम किया गया था। अदालती दस्तावेजों में दावा किया गया कि इस साजिश के पीछे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) का हाथ था।  

देश की आर्थिक मजबूती का संकेत: विदेशी मुद्रा भंडार 687 बिलियन डॉलर के पार

नई दिल्ली भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 9 जनवरी को समाप्त हुए हफ्ते में 392 मिलियन डॉलर बढ़कर 687 बिलियन डॉलर हो गया है। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से शुक्रवार को दी गई। आरबीआई ने कहा कि 9 जनवरी को समाप्त हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार के अहम घटक गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 1.56 बिलियन डॉलर बढ़कर 112.83 बिलियन डॉलर हो गई है। गोल्ड रिजर्व में बढ़ोतरी की एक वजह सोने की कीमतों का तेजी के बढ़ना है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने का दाम बीते एक हफ्ते में करीब 2.5 प्रतिशत और पिछले एक महीने में करीब 5.5 प्रतिशत बढ़ चुका है। विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) की वैल्यू 1.12 बिलियन डॉलर कम होकर 550.86 बिलियन डॉलर रह गई है। एफसीए में डॉलर के साथ दुनिया की अन्य बड़ी करेंसी जैसे येन, यूरो और पाउंड शामिल होती हैं, जिनकी वैल्यू को डॉलर में व्यक्त किया जाता है। आरबीआई के मुताबिक, 9 जनवरी को समाप्त हुए हफ्ते में एसडीआर की वैल्यू 39 मिलियन डॉलर कम होकर 18.73 बिलियन डॉलर हो गई है। आईएमएफ में रिसर्व पॉजिशन की वैल्यू 13 मिलियन डॉलर कम होकर 4.758 बिलियन डॉलर हो गई है। किसी भी देश की लिए उसका विदेशी मुद्रा भंडार काफी महत्वपूर्ण होता है और इससे उस देश की आर्थिक स्थिति का पता लगता है। इससे अलावा यह मुद्रा की विनिमय दर को स्थिर रखने में बड़ी भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए अगर किसी स्थिति में डॉलर के मुकाबले रुपए पर अधिक दबाव देखने को मिलता है और उसकी वैल्यू कम होती है तो केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर डॉलर के मुकाबले रुपए को गिरने से रोक सकता है और विनिमय दर को स्थिर रखता है। बढ़ता हुआ विदेशी मुद्रा भंडार यह भी दिखाता है कि देश में डॉलर की आवक बड़ी मात्रा में बनी हुई है और यह देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है। साथ ही इसके बढ़ने से देश के लिए विदेशों में व्यापार करना भी आसान हो जाता है।

फेक खबर ने मचाई तबाही: ओडिशा में भीड़ ने की तोड़फोड़ और आगजनी

ओडिशा ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में गोमांस बेचने की अफवाह से हिंसक झड़प हो गई। रीजेंट मार्केट में मांस की दुकान और एक व्यक्ति के घर पर बीफ होने की बात फैली। इसके बाद बजरंग दल के सदस्यों सहित भीड़ ने दुकान में तोड़फोड़ की, पिकअप वैन को आग लगा दी और कुछ वाहनों को क्षति पहुंचाई। विवाद तेजी से बढ़ा और दो समुदायों के बीच पथराव व हथियारों का इस्तेमाल होने लगा। रिपोर्ट के मुताबिक, झड़प में 12 से 20 लोग घायल हुए, जिनमें पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।   पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और दोनों पक्षों को तितर-बितर किया, जिससे कोई बड़ी दुर्घटना टल गई। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शहर में धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी और भारी पुलिस बल तैनात किया है। घटना के बाद जिला प्रशासन ने अफवाहों और भ्रामक संदेशों के प्रसार को रोकने के लिए 24 घंटे के लिए पूरे सुंदरगढ़ में इंटरनेट और सोशल मीडिया सेवाएं निलंबित कर दीं। कलेक्टर सुभंकर मोहपात्रा ने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर सभी स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान शुक्रवार को बंद हैं। दुकानों को भी बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। इलाके में अभी तक तनाव पश्चिमी रेंज के डीआईजी बीरजेश राय ने कहा कि पुलिस ने संवेदनशीलता से स्थिति को नियंत्रित किया और बड़े नुकसान से बचा लिया गया। अभी तक कोई गंभीर चोट या मौत की सूचना नहीं है, लेकिन तनावपूर्ण माहौल बरकरार है। फिलहाल, सुंदरगढ़ शहर में कड़े प्रतिबंध जारी हैं और पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने शांति समिति गठित करने और आगे की कार्रवाई पर चर्चा करने की योजना बनाई है। लोगों से शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की गई है। अफवाहों पर विश्वास न करने और सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री से दूर रहने की सलाह दी गई है। स्थिति अब नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन सतर्कता बरती जा रही है।  

सोने के आभूषण मिलने के बाद कर्नाटक में मंदिर परिसर से खजाना खोजने की तैयारी

बेंगलुरु कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने गडग जिले में खजाना के लिए एक अभियान शुरू किया है। अधिकारियों के मुताबिक जिले के लक्कुंडी गांव में एक मकान के निर्माण के दौरान सोने के आभूषण मिलने के बाद राज्य सरकार ने ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत के लिए प्रसिद्ध लक्कुंडी स्थित कोटे वीरभद्रेश्वर मंदिर परिसर में व्यापक स्तर पर खुदाई शुरू करने का निर्णय लिया है।   पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर परिसर में खजाने की तलाश में जुटे प्रशासन ने खुदाई के लिए जेसीबी, ट्रक और ट्रैक्टर लगाए हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, 10 वर्ग मीटर क्षेत्र को खुदाई के लिए चिह्नित किया गया है और इसे आधिकारिक रूप से खुदाई क्षेत्र घोषित किया गया है। इस काम से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, “इस कार्य के लिए 15 महिलाओं और पांच पुरुषों को लगाया गया है।” आपको बता दें, यह पूरा मामला उस वक्त सामने आया जब एक लड़के को मकान निर्माण के समय तांबे का एक बर्तन मिला। खोलने पर उसमें सोने के आभूषण मिले। बताया जाता है कि ये आभूषण 300 से 400 वर्ष पुराने हैं। लड़के ने यह आभूषण जिला प्रशासन को सौंप दिये, जिसके लिए उसे सम्मानित किया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह क्षेत्र सोने, चांदी, हीरे, मोती, माणिक, मूंगे और लहसुनिया सहित दबे हुए बहुमूल्य खनिजों से समृद्ध माना जाता है। खुदाई से जुड़े सूत्रों ने कहा, “लक्कुंडी ऐतिहासिक रूप से एक समृद्ध केंद्र रहा है और उपलब्ध साक्ष्य संकेत देते हैं कि यहां अब भी भूमिगत अपार भौतिक संपदा छिपी हो सकती है।” नवंबर 2024 में की गई एक खोज के दौरान लक्कुंडी में हजारों प्राचीन कलाकृतियां मिली थीं। हाल ही में आभूषणों की खोज से इस स्थल के प्रति रुचि और बढ़ गई है। अधिकारियों के अनुसार, अब भी इलाके के विभिन्न हिस्सों में नीलम, मोती, रत्न, हीरे और लहसुनिया जैसे कीमती पत्थर मिलने की सूचना है। गौरलतब है कि लक्कुंडी पर कभी चालुक्य, राष्ट्रकूट, होयसल, कलचुरी और विजयनगर शासकों का शासन रहा है और इसका संबंध प्रसिद्ध दानवीर दानचिंतामणि अत्तिमब्बे से भी रहा है। पुरातत्व विभाग के सूत्रों के अनुसार, प्राचीन काल में यह स्थान सोने के सिक्के ढालने का प्रमुख केंद्र भी था। पुरातत्वविदों ने कहा कि यह नई खुदाई ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इससे कर्नाटक के मध्यकालीन इतिहास से जुड़े अभिलेख, स्मारक, मूर्तियां और आभूषण मिलने की उम्मीद है, जिससे लक्कुंडी की समृद्ध विरासत को समझने में उल्लेखनीय मदद मिलेगी।