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जंग के लिए ‘पोर्न टैक्स’! यूक्रेन में एडल्ट इंडस्ट्री को कानूनी बनाने का प्रस्ताव, जुटेंगे करोड़ों डॉलर

कीव  रूस के खिलाफ जंग लड़ रहे यूक्रेन में पोर्नोग्राफी को कानूनी रूप से वैध बनाने का प्रस्ताव सामने आया है. यूक्रेनी सांसद यारोस्लाव जेलेजनियाक के समर्थन वाला एक बिल एडल्ट एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को कानूनी अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहा है. जेलेजनियाक यूक्रेनी संसद की वित्त समिति के अध्यक्ष हैं।  वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, जेलेजनियाक का अनुमान है कि पोर्नोग्राफी को कानूनी बनाने से सरकार को टैक्स के रूप में करीब 25 मिलियन डॉलर यानी 2.5 करोड़ डॉलर की आमदनी हो सकती है. उनका कहना है कि यह रकम युद्ध के लिए करीब 30 हजार ड्रोन खरीदने के लिए पर्याप्त हो सकती है।  अभी पोर्नोग्राफी है गैरकानूनी यूक्रेन में फिलहाल पोर्नोग्राफी बनाना, रखना या उसका वितरण करना गैरकानूनी है. इसके लिए सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है. हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बावजूद एडल्ट कंटेंट इंडस्ट्री लगातार बढ़ी है और भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों की मदद से इसका कारोबार चलता रहा है।  अब टैक्स अधिकारियों ने एडल्ट कंटेंट क्रिएटर्स से टैक्स वसूलने की कोशिश शुरू की है. लेकिन यहां एक अजीब स्थिति पैदा हो गई है. जो क्रिएटर्स अपनी कमाई घोषित करते हैं, वे खुद ऐसी गतिविधियों की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं, जो कानून के तहत अपराध हैं। जेलेजनियाक ने इसे 'ट्रेजिकॉमिक' स्थिति बताया. उनके मुताबिक, महिलाओं के सामने या तो टैक्स न देने पर आपराधिक कार्रवाई का खतरा है या टैक्स देने पर पोर्नोग्राफी कानून के तहत कार्रवाई का।  OnlyFans से करोड़ों की कमाई रिपोर्ट में प्लेटफॉर्म की पैरेंट कंपनी फेनिक्स इंटरनेशनल के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि 2023 में 7,900 यूक्रेनियों ने OnlyFans के जरिए 131 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाए।  टैक्स अधिकारियों की कार्रवाई के बाद कुछ क्रिएटर्स को टैक्स चोरी और अवैध एडल्ट कंटेंट बनाने के आरोपों में नोटिस भी मिले. OnlyFans क्रिएटर स्वितलाना ड्वोर्निकोवा ने दावा किया कि पुलिस ने उनके घर पर छापा मारा और 20 हजार डॉलर नकद के साथ लैपटॉप और हार्ड ड्राइव जब्त किए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने केस खत्म करने के बदले रिश्वत की पेशकश की, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया।  राष्ट्रपति जेलेंस्की की वेबसाइट पर पहुंचा मामला टैक्स वकील लेसिया मिखालेंको ने कहा कि युद्ध के दौरान क्रिएटर्स पर मुकदमा चलाना सरकारी संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं है. वहीं ड्वोर्निकोवा ने राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की वेबसाइट पर याचिका दायर कर खुद को 'ईमानदार टैक्सपेयर' बताया. उनका दावा था कि उन्होंने करीब 9 लाख डॉलर टैक्स दिया है।  रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका को एक हफ्ते में 25 हजार से ज्यादा हस्ताक्षर मिले. इसके बाद जेलेंस्की ने कहा कि संसद जेलेजनियाक के पोर्नोग्राफी को कानूनी बनाने के प्रस्ताव पर विचार करेगी. बिल जुलाई में संसद की पहली रीडिंग पास कर चुका है और अब दूसरी रीडिंग का इंतजार है।   

दिवाली-छठ की ट्रेन टिकट बुकिंग शुरू, स्पेशल ट्रेनों का भी ऐलान; कंफर्म सीट के लिए करें जल्दी

नई दिल्ली दिवाली और छठ पर घर जाने की तैयारी कर रहे यात्रियों के लिए अहम खबर है. भारतीय रेलवे में दिवाली की यात्रा के लिए टिकट बुकिंग शुरू हो गई है. देशभर में इस साल दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी. रेलवे के एडवांस रिजर्वेशन सिस्टम के तहत यात्री अपनी यात्रा की तारीख के आधार पर 60 दिन पहले तक टिकट बुक कर सकते हैं. यदि आपको कन्फर्म सीट चाहिए, तो रिजर्वेशन जल्द करना होगा।  रेलवे की एडवांस रिजर्वेशन विंडो सुबह 8 बजे खुलती है. हालांकि, टिकट बुकिंग यात्रा की तारीख पर निर्भर करती है. यात्रियों को यात्रा की तारीख को छोड़कर 60 दिन पहले तक रिजर्वेशन की सुविधा मिलती है. दिवाली के आसपास दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों से बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और दूसरे राज्यों के लिए जाने वाली ट्रेनों में भारी मांग रहती है. इसलिए लोकप्रिय ट्रेनों में सीटें तेजी से भर सकती हैं।  इन रूट्स पर होता है ट्रैफिक प्रेशर त्योहारी सीजन में दिल्ली-पटना, पटना-अहमदाबाद, पटना-उधना, मुंबई-पटना, हावड़ा-पटना, बेंगलुरु-पटना, फिरोजपुर-पटना, वाराणसी-दिल्ली, कानपुर-दिल्ली, लुधियाना-सुपौल, लुधियाना-पटना, चेन्नई-पटना, हैदराबाद-पटना और दिल्ली-गोरखपुर जैसे रूट पर यात्रियों का दबाव ज्यादा रहता है. इन रूट्स पर यात्रा की योजना बना रहे यात्रियों को रिजर्वेशन विंडो खुलने के साथ ही सीट की उपलब्धता चेक कर लेनी चाहिए।  रेलवे ने चलाईं फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली यात्रियों की भीड़ को देखते हुए नॉर्दर्न रेलवे ने कई फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है. ये ट्रेनें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, चंडीगढ़, महाराष्ट्र और अन्य प्रमुख शहरों के बीच अतिरिक्त कनेक्टिविटी देंगी. इनमें वाराणसी-दिल्ली, अयोध्या कैंट-आनंद विहार, चंडीगढ़-पटना, फिरोजपुर कैंट-पटना और आनंद विहार-पाटलिपुत्र जैसे प्रमुख रूट शामिल हैं।  क्र. ट्रेन नंबर ट्रेन रूट ट्रिप/फेरे 1 09189/09190 मुंबई सेंट्रल-कटिहार-मुंबई सेंट्रल 77 अतिरिक्त ट्रिप 2 04127/04128 कानपुर सेंट्रल-गुवाहाटी-कानपुर सेंट्रल 14 अतिरिक्त ट्रिप 3 05736/05735 कटिहार-अमृतसर-कटिहार 12 अतिरिक्त ट्रिप 4 05932/05931 डिब्रूगढ़-कोलकाता-डिब्रूगढ़ 13 अतिरिक्त ट्रिप 5 04209/04210 वाराणसी-नई दिल्ली-वाराणसी 50 ट्रिप 6 04213/04214 अयोध्या कैंट-आनंद विहार टर्मिनल-अयोध्या कैंट 36 ट्रिप 7 04512/04511 चंडीगढ़-पटना जंक्शन-चंडीगढ़ 18 ट्रिप 8 04616/04615 फिरोजपुर कैंट-पटना जंक्शन-फिरोजपुर कैंट 16 ट्रिप 9 04008/04007 आनंद विहार टर्मिनल-जोगबनी-आनंद विहार टर्मिनल 10 ट्रिप 10 04028/04027 आनंद विहार टर्मिनल-मुजफ्फरपुर-आनंद विहार टर्मिनल 26 ट्रिप 11 04010/04009 दिल्ली जंक्शन-सीतामढ़ी-दिल्ली जंक्शन 12 ट्रिप 12 02456/02455 नई दिल्ली-कानपुर सेंट्रल-नई दिल्ली 98 ट्रिप 13 02563/02564 बरौनी-नई दिल्ली-बरौनी स्पेशल — 14 02569/02570 दरभंगा-नई दिल्ली-दरभंगा स्पेशल — 15 04014/04013 आनंद विहार टर्मिनल-लौकाहा बाजार-आनंद विहार टर्मिनल 150 ट्रिप 16 04002/04001 हजरत निजामुद्दीन-दादर-हजरत निजामुद्दीन 14 ट्रिप 17 04227/04228 वाराणसी-चंडीगढ़-वाराणसी 36 ट्रिप 18 02458/02457 आनंद विहार टर्मिनल-कानपुर सेंट्रल-आनंद विहार टर्मिनल 72 ट्रिप 19 04314/04313 योग नगरी ऋषिकेश-मुजफ्फरपुर-योग नगरी ऋषिकेश 18 ट्रिप 20 04096/04095 आनंद विहार टर्मिनल-पाटलिपुत्र-आनंद विहार टर्मिनल 120 ट्रिप   टिकट बुक करते समय इन बातों का रखें ध्यान दिवाली के दौरान लोकप्रिय ट्रेनों में टिकट तेजी से भर सकते हैं. इसलिए यात्रियों को अपनी यात्रा की तारीख पहले से तय करके रिजर्वेशन विंडो खुलते ही उपलब्धता चेक करनी चाहिए।  टिकट बुक करते समय ट्रेन नंबर, यात्रा की तारीख, बोर्डिंग स्टेशन और ​गंतव्य स्टेशन की जानकारी ध्यान से जांचना जरूरी है. यात्रा से पहले ट्रेन का शेड्यूल और सीट की उपलब्धता भी चेक कर लें।  रेलवे से जुड़ी सेवाओं, शिकायतों और यात्रा संबंधी जानकारी के लिए यात्री रेलमदद हेल्पलाइन 139 पर संपर्क कर सकते हैं या NTES ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं।  दिवाली के दौरान नियमित ट्रेनों में सीट नहीं मिलने पर नॉर्दर्न रेलवे की ओर से घोषित ये फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें यात्रियों के लिए अतिरिक्त विकल्प साबित हो सकती हैं।  कंफर्म टिकट के लिए अपनाएं ये आसान ट्रिक्स कंफर्म टिकट के लिए मास्टर लिस्ट बनाएं. टिकट बुकिंग शुरू होने से पहले ही IRCTC के टिकट बुकिंग App में यात्रियों के नाम, उम्र और बर्थ की जानकारी (Master List) सेव कर लें. समय से पहले लॉगिन करें. सुबह 8 बजे बुकिंग शुरू होने से 5 मिनट पहले लॉगिन कर लें. तेजी से पेमेंट के लिए IRCTC Wallet का प्रयोग करें। 

NIA केसों की सुनवाई में देरी पर SC नाराज, राज्यों से जल्द विशेष अदालतें गठित करने को कहा

 नई दिल्ली विशेष एनआईए अदालतों की स्थापना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्यों से जल्द विशेष अदालतें शुरू करने को कहा, ताकि NIA के मामलों में सुनवाई में देरी न हो।  एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ को बताया कि कई राज्यों ने इस संबंध में अब तक रिपोर्ट दाखिल नहीं की है. मतलब इन राज्यों ने अब तक बताया ही नहीं है कि उनके यहां विशेष NIA अदालतें स्थापित की गई हैं या नहीं।   सुनवाई के दौरान कर्नाटक के वकील ने बताया कि बेंगलुरु में तीन विशेष अदालतें हैं. और चिकमंगलूर में भी जल्द अदालत शुरू होने वाली है. केरल सरकार के वकील ने बताया कि उन्होंने विशेष अदालतों के लिए जगहों की पहचान कर ली है. राज्य में दो अदालतें स्थापित होनी है. उन्होंने अदालत से दो-तीन महीने का समय मांगा लेकिन CJI ने एक महीने में ही अदालतें शुरू करने को कहा. तमिलनाडु सरकार के वकील ने बताया कि राज्य में 2 विशेष अदालतें स्थापित की जा रही हैं. उन्होंने बताया कि एक तो कार्यरत भी हैं।  तेलंगाना सरकार के वकील ने बताया कि राज्य में सिर्फ एक विशेष NIA अदालत की जरूरत है. तेलंगाना में NIA के 13 मामले हैं. CJI ने तेलंगाना सरकार को तीन हफ्ते में अदालतें शुरू करने का निर्देश दिया. असम में NIA के 26 मामले हैं. राज्य में एक विशेष अदालत काम कर रही है और दो और अदालतें स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है।  CJI ने असम से इस संबंध में चार हफ्ते में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए. जम्मू कश्मीर में NIA के 46 मामले हैं और यहां सिर्फ एक विशेष अदालत है. सुरक्षा कारणों से अदालतें जम्मू में बनाने की बात कही गई. सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर में तीन और अदालतों की जरूरत बताई गई।  मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने साफ कहा कि विशेष NIA अदालतों में दूसरे मामलों की सुनवाई नहीं होनी चाहिए. ताकि NIA के मामलों का जल्द से जल्द निपटारा हो सके। 

‘शिक्षित इलाकों में 70-75%, क्रिमिनल एरिया में 92% वोट’, नितिन गडकरी के बयान से मची हलचल

नागपुर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं. अब उन्होंने फिर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है. नितिन गडकरी ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि उन्हें शिक्षित क्षेत्रों की तुलना में क्रिमिनल, अंडरवर्ल्ड और रेड लाइट एरिया से ज्यादा वोट मिले. गडकरी का यह बयान अब वायरल हो रहा है।  नागपुर में बोले गडकरी- पढ़े-लिखे से ज्यादा अपराधी इलाकों से मिले वोट  दरअसल नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि उनके चुनाव में पढ़े-लिखे लोगों से ज्यादा अंडरवर्ल्ड और रेड लाइट एरिया से उन्हें वोट मिले थे. उन्होंने बताया कि शहर के बड़े और शिक्षित इलाकों में उन्हें कुल मतदान प्रतिशत का लगभग 70-75% वोट मिला, जबकि अपराधी, अंडरवर्ल्ड और रेड इलाकों में उन्हें 92% वोट मिले।  मैं उनके काम का समर्थन नहीं करताः गडकरी गडकरी ने हंसते हुए कहा कि नागपुर में अंडरवर्ल्ड और असामाजिक कार्य से जुड़े लगभग 99% लोग उनके समर्थक हैं. हालांकि, उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि वे उनके काम या गतिविधियों का समर्थन करते हैं. नितिन गडकरी का कहना है कि उनके सभी लोगों से संबंध हैं लेकिन इसे गलत अर्थ में नहीं लिया जाना चाहिए।  गडकरी ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि उनके उन लोगों से संबंध हैं या वे उनके कामों का समर्थन करते हैं. उन्होंने कहा कि उन इलाकों में सड़कें बनवाने और सामाजिक कार्य करने के कारण वहां के लोगों ने उन्हें वोट दिया. इससे पहले भी नितिन गडकरी के कई बयान चर्चित हुए हैं. वो बिना लाग-लपेट अपनी बात रखने वाले नेता माने जाते हैं.बीते दिनों उन्होंने खुद से कहा था कि बहुत काम कर लिया, अब नई पीढ़ी को मौका मिले। 

एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र बोले- स्वदेशी हथियारों के दम पर हुआ ‘ऑपरेशन सिंदूर’, आत्मनिर्भरता को बताया संप्रभुता

 नई दिल्ली    सुरक्षा सभा में 'आसमान के रखवाले' सेशन के दौरान एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्र ने खुलकर बात की. वेस्टर्न एयर कमांड के पूर्व एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रहे एयर मार्शल मिश्र ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आसमान में हुई घटनाओं का विस्तार से जिक्र किया।  उन्होंने साफ कहा कि भविष्य का युद्ध आज ही चल रहा है. जो लोग सोच रहे थे कि कुछ नहीं हो रहा, वास्तव में लंबी तैयारी, मेहनत और दूरदर्शिता का नतीजा ऑपरेशन सिंदूर में दिख रहा था. भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी हथियारों और प्रणालियों के दम पर दुश्मन को करारा जवाब दिया. यह सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं था बल्कि वर्षों की मेहनत, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और वायुसेना के संयुक्त प्रयास का प्रमाण था।  एयर मार्शल मिश्र ने सामान्य जीवन के उदाहरण से समझाया कि तकनीक कितनी गहराई तक पहुंच चुकी है. जब आप पेट्रोल पंप पर एटीएम कार्ड स्वाइप करते हैं तो वह सैटेलाइट के जरिए भारत के बैंक खाते से जुड़ता है, पैसे काटता है और तुरंत जानकारी वापस भेजता है. इसी तरह भविष्य के युद्ध भी रोजमर्रा की जिंदगी की तरह तकनीक पर आधारित होंगे, लेकिन हम उन्हें देख नहीं पाते क्योंकि वे धीरे-धीरे विकसित हो रहे हैं।  ब्रह्मोस एयर लॉन्च क्रूज मिसाइल को सुखोई-30 से दागने का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि 250- 300 किलोमीटर दूर लक्ष्य को दो मीटर की सटीकता से भेदना भारतीय तकनीक का चमत्कार है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने के बाद तकनीक की रफ्तार और तेज हो गई है. अगर हम इसके साथ कदम नहीं मिलाएंगे तो चार-पांच साल में ही हैरान रह जाएंगे।  वायुसेना अधिकारी की निरंतर पढ़ाई और सिस्टम का विकास एयर मार्शल मिश्र ने नई पीढ़ी को संबोधित करते हुए कहा कि वायुसेना अधिकारी को परिचालन ड्यूटी निभाते हुए भी सामान्य छात्रों से कहीं ज्यादा पढ़ाई करनी पड़ती है. तकनीक के साथ तालमेल बनाए रखना अनिवार्य है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिन उपकरणों ने हमारे एयर स्पेस की रक्षा की और दुश्मन को नष्ट किया, वे वर्षों की मेहनत का फल थे. वायुसेना को अक्सर सबसे महंगी सेना कहा जाता है क्योंकि इसमें बजट का बड़ा हिस्सा लगता है, लेकिन यह दुनिया की उत्कृष्ट वायुसेनाओं में गिनी जाती है।  परिपक्व सिस्टम बनाने में पीढ़ियां लगती हैं. पंद्रह-बीस साल पहले भारतीय वायुसेना के पास ज्यादातर विदेशी रडार थे- रूस, अमेरिका, फ्रांस के. विदेशी विक्रेता से एयर डिफेंस सिस्टम बनवाने पर डेटा साझा करना पड़ता जो सार्वजनिक हो जाता. इसलिए भारतीय वैज्ञानिक, इंजीनियर और वायुसेना के अधिकारियों ने मिलकर पूरी तरह स्वदेशी इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम यानी आईएसीसीएस बनाया. इसमें करीब पंद्रह साल लगे।  आज देश के हर रडार- सैन्य, नागरिक, सेना और धीरे-धीरे नौसेना के, इस सिस्टम से जुड़े हैं. सात-आठ भूमिगत संचालन केंद्रों से पूरे देश की वायु स्थिति पर नजर रखी जा सकती है और जरूरत पड़ने पर सीमा पर हथियार दागे जा सकते हैं. पहले हर रडार के पास एक व्यक्ति बैठकर स्कोप देखता था।  अब डेटा नेटवर्क से सब जुड़ गया है. अलग-अलग देशों के रडारों के डेटा फॉर्मेट को तोड़कर एक सामान्य प्रारूप में लाया गया. दिल्ली, मुंबई, चेन्नई जैसे नागरिक टर्मिनलों के शक्तिशाली रडार भी इसमें शामिल हैं. इंटरनेट प्रोटोकॉल पर कमांड लेकर किसी भी जगह से मिसाइल दागने का आदेश दिया जा सकता है. यह सब एक दिन में नहीं हुआ. वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और पायलटों की पीढ़ियों ने असफलताओं से सीखा और फिर से कोशिश की।  बालाकोट से सिंदूर तक: रणनीतिक विस्तार और सटीकता का प्रमाण एयर मार्शल मिश्र ने बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर की तुलना रणनीतिक दृष्टि से की. बालाकोट के समय भी वायुसेना के पास वही क्षमता थी जो सिंदूर में इस्तेमाल हुई. अंतर संसाधनों की कमी का नहीं बल्कि रणनीति का था. सरकार के निर्णयों पर निर्भर करते हुए प्रतिक्रिया का विस्तार होता गया।  उड़ी हमले के बाद बालाकोट, फिर सिंदूर- यह चेतावनी का क्रम था. अगर दुश्मन नहीं मानता तो और बड़ा जवाब दिया जाता है. सिंदूर भी अंतिम नहीं है. तीस अप्रैल 2026 को रिटायर हो चुके एयर मार्शल ने कहा कि जो लोग अभी योजना बना रहे हैं उनके पास हर स्थिति के लिए तैयार योजनाएँ हैं।  सटीकता का प्रमाण देते हुए उन्होंने सैटेलाइट इमेजरी का जिक्र किया. बालाकोट में दो धब्बे दिखे थे. सिंदूर में बहावलपुर और मुरीद के नौ भवनों पर हमले की इमेज में भी वही दो स्पॉट दिखे. लेकिन जमीनी तस्वीरों से साफ हो गया कि कितना विनाशकारी और सटीक हमला हुआ था।  बालाकोट में मौसम या अन्य कारणों से जमीनी तस्वीर नहीं आ सकीं इसलिए सबूत कमजोर समझा गया. अब दोनों की तुलना से साबित होता है कि भारतीय वायुसेना का हमला कितना प्रभावी था. सैनिकों को जब 'कोई सबूत नहीं' या 'कौए मार दिए' जैसी बातें सुननी पड़ती हैं तो दर्द होता है, लेकिन वे परिणाम जानते हैं क्योंकि उन्होंने खुद देखा और किया है।  लंबी दूरी की क्षमता और वायु शक्ति की खूबियां एस-400 सिस्टम से 314 किलोमीटर दूर उड़ते विमान को मार गिराना लगभग विश्व रिकॉर्ड के करीब है. ब्रह्मोस एयर लॉन्च क्रूज मिसाइल दुनिया की एकमात्र परिचालन सुपरसोनिक एयर लॉन्च क्रूज मिसाइल है जो पूरी तरह स्वदेशी (रूस-भारत सहयोग से) है।  सरगोधा, रहीम यार खान जैसे ठिकानों पर कम से कम दो सौ किलोमीटर दूर से हमला संभव हुआ. वायु शक्ति जमीनी और नौसैनिक शक्ति से अलग है. यह तेज, लंबी दूरी तक पहुंचने वाली, सटीक और गतिशील है. हवा में उड़ान भरने के बाद भी वापस बुलाया जा सकता है जबकि जमीन से दागी मिसाइल एक बार निकलने के बाद नहीं लौटती. ईरान-इजरायल संघर्ष में भी यही देखा गया कि उड़ते विमानों की लचीलापन ज्यादा होती है।  स्वदेशीकरण का मतलब संप्रभुता एयर मार्शल मिश्र ने स्वदेशीकरण को मेक इन इंडिया या सर्वश्रेष्ठ होने से अलग बताया. उनके अनुसार स्वदेशीकरण संप्रभुता के बराबर है. अगर आप किसी दूसरे देश पर निर्भर हैं तो सीमाओं की रक्षा स्वतंत्र रूप से नहीं कर सकते. पाकिस्तान के कई अमेरिकी मूल के रडार नष्ट होने के बाद मरम्मत के लिए अमेरिकी तकनीशियनों का इंतजार करना पड़ा. इससे सुरक्षा में बड़ा अंतराल पैदा हो गया।  अगर रडार स्वदेशी होते तो भारतीय कंपनियां, स्टार्टअप और पीएसयू तुरंत ठीक कर देते. संप्रभुता सिर्फ जमीन, कानून और लोगों … Read more

हवा में मंडराया खतरा! 36 हजार फीट पर बंद करना पड़ा इंजन, अबू धाबी जा रही फ्लाइट की कोच्चि में सुरक्षित लैंडिंग

कोच्चि कोच्चि से अबू धाबी जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX 415 (बोइंग 737) को बीच रास्ते में ही वापस लौटना पड़ा। क्रू को पता चला कि इंजन 1 में ऑयल का लेवल तेज़ी से गिर रहा है और जब ऑयल प्रेशर डेंजर ज़ोन में पहुंच गया, तो उन्होंने इंजन बंद कर दिया। प्लेन कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरा। प्लेन में सवार यात्रियों को पता नहीं था कि स्थिति कितनी गंभीर हो गई थी।  सूत्रों के मुताबिक, टेक-ऑफ के करीब 50 मिनट बाद और 36,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते समय पायलट और को-पायलट ने देखा कि इंजन 1 में ऑयल का लेवल तेज़ी से गिर रहा है। क्रू ने FORDEC असेसमेंट किया। ऑयल का लेवल लगातार गिरते देख, उन्होंने अबू धाबी जाने का प्लान छोड़कर कोच्चि वापस लौटने का फैसला किया। इसके बाद कमांडर ने हाई फ्रीक्वेंसी पर मुंबई रेडियो से संपर्क किया और ATC को बताया कि फ्लाइट कोच्चि वापस लौट रही है। प्लेन का रास्ता बदलने के दौरान स्टैंडर्ड सेफ्टी प्रोसीजर का पालन किया गया। रास्ता बदलने के पूरे समय, दोनों पायलट इंजन के पैरामीटर्स पर नज़र रखे हुए थे और किसी भी स्थिति के लिए तैयार थे।  वापस मुड़ने के करीब 45 मिनट बाद, इंजन 1 का ऑयल प्रेशर ऊपर-नीचे होने लगा और कॉकपिट गेज पर रेड ज़ोन में पहुंच गया, जो डेंजर रेंज में गिरावट का संकेत था। इसके बाद क्रू ने नॉन-नॉर्मल चेकलिस्ट (NNC) का पालन किया और इंजन 1 बंद कर दिया। ज़्यादा वज़न वाले बोइंग 737 को एक इंजन पर लैंड कराना बहुत ज़्यादा काम और जोखिम वाला काम होता है। क्रू ने इसे आसानी से पूरा किया। यात्रियों को कॉकपिट में हुई घटना की गंभीरता का अंदाज़ा नहीं हुआ।  भारतीय एयरलाइंस में टेक्निकल डायवर्जन लगभग हर हफ़्ते होने वाली घटना बन गई है। यह ताज़ा घटना एयर इंडिया पर एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की शुरुआती रिपोर्ट आने के कुछ दिनों बाद हुई है। फुकेत-दिल्ली फ़्लाइट। उस रिपोर्ट में बताया गया है कि एयरबस के टेक्निकल एक्सपर्ट्स ने जांच टीम की मौजूदगी में उस विमान की तीन दिनों तक जांच की। इसके बाद आगे की जांच के लिए हाइड्रोलिक पार्ट्स और हाइड्रोलिक सैंपल इकट्ठा किए गए। फुकेत-दिल्ली घटना के बाद, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि DGCA फ़्लाइट क्रू के लिए साइकोएक्टिव पदार्थों (नशीले पदार्थों) के टेस्ट का सालाना प्रतिशत बढ़ाएगा।  एयर इंडिया एक्सप्रेस के इंजन-ऑयल वाली घटना से अब एक और सवाल उठता है: क्या नागरिक उड्डयन मंत्रालय DGCA के सेफ्टी ऑडिट के नियमों को भी और सख्त करेगा? US फ़ेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) आमतौर पर हर पांच साल में एक बार इंटरनेशनल एविएशन सेफ्टी असेसमेंट (IASA) प्रोग्राम के तहत किसी देश की सेफ्टी निगरानी की समीक्षा करता है। भारत का पिछला बड़ा IASA ऑडिट अक्टूबर 2021 में हुआ था; अगला ऑडिट इस साल नवंबर में होने की उम्मीद है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नई दिल्ली DGCA सेफ्टी ऑडिट से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए इस मौके का इस्तेमाल करती है या नहीं। एयर इंडिया एक्सप्रेस और DGCA की आधिकारिक टिप्पणी का इंतज़ार है।   

गलती से दूसरे नंबर पर कर दिया रिचार्ज? घबराएं नहीं, ऐसे वापस मिल सकते हैं पैसे

नई दिल्ली कई बार मोबाइल रिचार्ज करते समय जल्दबाजी में गलत नंबर डाल देते हैं. रिचार्ज होने के बाद जब पता चलता है कि नंबर ही गलत था, तो सबसे पहले यही चिंता होती है कि अब पैसे वापस कैसे मिलेंगे? अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. कुछ मामलों में गलत नंबर पर किए गए रिचार्ज के पैसे वापस मिल सकते हैं. हालांकि, इसके लिए आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा।  जानिए कैसे मिलेगा पैसे का रिफंड अगर रिचार्ज करते समय मोबाइल नंबर गलत डाल दिया है, तो सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि आपने रिचार्ज किस ऐप से किया है. अगर आपने अपने सिम कार्ड की ऑफिशियल ऐप से रिचार्ज किया है, तो रिफंड मिलने का ऑप्शन मिल सकता है।  वहीं, अगर आपने किसी थर्ड पार्टी ऐप जैसे किसी दूसरे रिचार्ज ऐप से पेमेंट किया है, तो रिफंड मिलना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. इसलिए रिचार्ज करने से पहले नंबर को एक बार जरूर चेक कर लें।  टाइम लिमिट के अंदर करनी होगी शिकायत अगर आप Jio यूजर हैं और गलत नंबर पर रिचार्ज हो गया है, तो आपको ज्यादा देर नहीं करनी चाहिए. रिचार्ज को तय समय के अंदर कैंसिल किया जा सकता है।  रिफंड लेते समय आपको अवेलेबल रिफंड मेथड में से एक विकल्प चुनना पड़ सकता है. इसमें इंस्टेंट क्रेडिट या Jio Store Credit Wallet जैसे ऑप्शन मिल सकते हैं. रिफंड की रकम आपके चुने गए तरीके के हिसाब से वापस आ सकती है।  इसलिए अगली बार अगर गलती से गलत नंबर पर रिचार्ज हो जाए, तो घबराने के बजाय तुरंत ऐप में जाकर रिफंड या कैंसिल रिचार्ज का ऑप्शन जरूर चेक करें. जितनी जल्दी शिकायत करेंगे, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही बेहतर रहेगी। 

दिवाली-छठ के लिए रेलवे का बड़ा तोहफा, 15 स्पेशल ट्रेनें शुरू; फटाफट बुक करें टिकट

नई दिल्ली दिवाली और छठ पर्व पर घर जाने की योजना बना रहे रेल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है. भारतीय रेलवे ने त्योहारों के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए 15 स्पेशल ट्रेन चलाने का ऐलान किया है. इन ट्रेनों के लिए टिकट बुकिंग की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।  रेलवे के 60 दिन के एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (ARP) नियमों के तहत IRCTC ऐप, वेबसाइट और काउंटर पर सुबह 8 बजे से टिकटों की बुकिंग शुरू हो गई है. इस साल 8 नवंबर 2026 को दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा, जिसके चलते उत्तर और पूर्व भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों में सीटें तेजी से भरने की संभावना है. ऐसे में रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे आखिरी समय की आपाधापी और लंबी वेटिंग लिस्ट से बचने के लिए जल्द से जल्द अपने टिकट बुक कर लें।  यहां देखें रेलवे की ओर से शुरू की गई 15 स्पेशल ट्रेनों की लिस्ट     मुंबई सेंट्रल – कटिहार – मुंबई सेंट्रल (09189/09190): 5 सितंबर से 17 नवंबर के बीच 77 अतिरिक्त फेरे.     कानपुर सेंट्रल – गुवाहाटी – कानपुर सेंट्रल (04127/04128): 10 सितंबर से 11 दिसंबर के बीच 14 अतिरिक्त फेरे.     कटिहार – अमृतसर – कटिहार (05736/05735): 9 सितंबर से 27 नवंबर के बीच 12 अतिरिक्त फेरे.      डिब्रूगढ़ – कोलकाता – डिब्रूगढ़ (05932/05931): 5 सितंबर से 30 नवंबर के बीच 13 अतिरिक्त फेरे.     वाराणसी – दिल्ली – वाराणसी (04209/04210)     अयोध्या कैंट – आनंद विहार टर्मिनल (04213/04214  द्विसाप्ताहिक)      चंडीगढ़ – पटना जंक्शन (04512/04511  साप्ताहिक)     फिरोजपुर कैंट – पटना जंक्शन (04616/04615  साप्ताहिक)      आनंद विहार टर्मिनल – जोगबनी (04008/04007  साप्ताहिक)      आनंद विहार टर्मिनल – मुजफ्फरपुर (04028/04027  द्विसाप्ताहिक)      दिल्ली – सीतामढ़ी – दिल्ली (04010/04009  साप्ताहिक)     नई दिल्ली – कानपुर सेंट्रल सुपरफास्ट (02456/02455)      बरौनी – नई दिल्ली – बरौनी स्पेशल (02563/02564)     दरभंगा – नई दिल्ली – दरभंगा स्पेशल (02569/02570)  इन रूटों पर रहेगी सबसे ज्यादा मारामारी बिहार और उत्तर प्रदेश से जुड़े प्रमुख रूटों जैसे दिल्ली-पटना, मुंबई–पटना, बेंगलुरु-पटना, अहमदाबाद-पटना, दिल्ली-गोरखपुर, वाराणसी-दिल्ली और कानपुर-दिल्ली पर यात्रियों की सबसे ज्यादा टिकटों के लिए मामारी रहने की आशंका है।     ऐसे पाएं कंफर्म टिकट      मास्टर लिस्ट बनाएं: टिकट बुकिंग शुरू होने से पहले ही IRCTC प्रोफाइल में यात्रियों के नाम, उम्र और बर्थ की जानकारी (Master List) सेव कर लें.      समय से पहले लॉगिन करें: सुबह 8 बजे बुकिंग शुरू होने से 5 मिनट पहले लॉगिन कर लें.      तेज पेमेंट मोड चुनें: भुगतान में लगने वाले समय को बचाने के लिए UPI या IRCTC Wallet का प्रयोग करें.

सरकारी कर्मचारियों को बड़ी सौगात, बकाया DA की 2 किश्तें और 15% बढ़ेगी पेंशन; लीव एनकैशमेंट भी

हैदराबाद  त्योहारी सीजन से ठीक पहले सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले हो गई है.आंध्र प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है.मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कर्मचारियों की लंबे समय से अटकी मांगों को पूरा करते हुए  उन्हें बड़ा तोहफा दिया है.12वें पे रिवीजन कमीशन (PRC) के गठन से लेकर 1 अक्टूबर की सैलरी में 2 किश्तों का बकाया महंगाई भत्ता ( DA), सरेंडर लीव कैश और बुजुर्ग पेंशनर्स के लिए 15% तक पेंशन बढ़ोतरी का ऐलान किया गया है।  सरकार के इन फैसलों से कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.जानिए सैलरी और पेंशन को लेकर लिए गए इस फैसले का फायदा आपको कब से मिलने जा रहा है… 12वें पे रिवीजन कमीशन को मंजूरी मुख्यमंत्री ने 12वें वेतन आयोग (PRC) के गठन को मंजूरी दे दी है. यह कमीशन सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और दूसरे भत्तों की समीक्षा करेगा.कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, यह कमीशन 1 जुलाई 2023 से बनना था. अब इसके गठन का ऐलान होने से कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है.हालांकि, अभी नई सैलरी कितनी बढ़ेगी, इसका ऐलान नहीं हुआ है. इसके लिए कमीशन की सिफारिशों का इंतजार करना होगा।  1 अक्टूबर की सैलरी में मिलेगा 2 किश्तों का DA सरकार ने दो लंबित महंगाई भत्ते की किश्तें जारी करने का फैसला किया है. इनका भुगतान 1 अक्टूबर 2026 की सैलरी के साथ किया जाएगा.ये दोनों किश्तें 1 जुलाई 2024 और 1 जनवरी 2025 से बकाया हैं. यानी कर्मचारियों को एक साथ इन दोनों किश्तों का  DA मिलेगा।  पेंशनर्स को भी इन दोनों किश्तों का लाभ मिलेगा. इससे उनकी पेंशन में भी बढ़ोतरी होगी. हालांकि, हर कर्मचारी या पेंशनर को मिलने वाली रकम उसकी मौजूदा सैलरी या पेंशन के अनुसार अलग-अलग होगी।  2022 की सरेंडर लीव का पैसा कब मिलेगा? कर्मचारियों के लिए एक और बड़ा फैसला लिया गया है. सरकार ने 2022 की बची हुई सरेंडर लीव का पैसा संक्रांति तक देने का ऐलान किया है.सरेंडर लीव का मतलब है कि कर्मचारी अपनी छुट्टी नहीं लेते. इसके बदले उन्हें छुट्टी के पैसे मिलते हैं. इसे लीव एनकैशमेंट भी कहा जाता है.सिविल कर्मचारियों को हर साल एक सरेंडर लीव मिलेगी. वहीं, पुलिसकर्मियों को उनकी ड्यूटी को देखते हुए दो सरेंडर लीव मिलेंगी.इतना ही नहीं, पुलिसकर्मियों को एक अतिरिक्त सरेंडर लीव का पैसा आने वाले दशहरा के आसपास दिया जाएगा।  बुजुर्ग पेंशनर्स को 15% तक ज्यादा पेंशन पेंशनर्स के लिए भी बड़ा ऐलान हुआ है. सरकार ने एक्स्ट्रा पेंशन की सुविधा जनवरी 2027 से फिर शुरू करने का फैसला किया है.इसके तहत 70 साल से अधिक उम्र वाले पेंशनर्स को 10% अतिरिक्त पेंशन मिलेगी. वहीं, 75 साल से अधिक उम्र वालों को 15% अतिरिक्त पेंशन मिलेगी.यह बढ़ोतरी मौजूदा पेंशन के आधार पर होगी. यानी पात्र पेंशनर्स को अपनी वर्तमान पेंशन के ऊपर अतिरिक्त रकम मिलेगी।  कर्मचारी स्वास्थ्य योजना में भी सुधार सरकार ने कर्मचारी स्वास्थ्य योजना यानी EHS को बेहतर बनाने का भी फैसला लिया है.इसके तहत सरकार हर महीने NTR वैद्य सेवा ट्रस्ट को नियमित भुगतान करेगी. इससे कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए स्वास्थ्य योजना को सुचारु रूप से चलाने में मदद मिलेगी।  सरकार पर ₹2,880 करोड़ का अतिरिक्त बोझ इन सभी फैसलों से राज्य सरकार पर हर साल करीब ₹2,880 करोड़ का अतिरिक्त खर्च आएगा.सरकार का कहना है कि कर्मचारियों और पेंशनर्स की लंबित मांगों को पूरा करने के लिए ये फैसले लिए गए हैं. वहीं, कर्मचारी संगठनों ने भी इन घोषणाओं का स्वागत किया है। 

उत्तराखंड में नए निकाहनामे की तैयारी, एक पत्नी के रहते दूसरी शादी पर रोक; रजिस्टर्ड मौलवी जरूरी

देहरादून  उत्तराखंड वक्फ बोर्ड नए निकाहनामे का मॉडल जारी करेगा, इस निकाहनामे के आने के बाद कोई मौलवी किसी व्यक्ति की एक पत्नी के रहते दूसरा निकाह नहीं करा सकेंगे और न ही किस अन्य धर्म की युवती की शादी करवा सकेगा, अगर कोई  गलत तरीके से निकाह करवाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी यानी अब तमाम मौलवियों को निकाहनामा के मुताबिक ही शादियां करवानी होगी. उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड, धर्मांतरण कानून के बाद अब निकाहनामे का मॉडल जारी किया जाएगा, इसको लेकर उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने अपनी बोर्ड बैठक में इस बात का प्रस्ताव बनाया है और इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए अब शासन को भेजा जाएगा , उत्तराखंड में अब तमाम मौलवियों को निकाहनामे में अपना नाम रजिस्टर करवाना होगा और वहीं मौलवी अब उत्तराखंड में मुस्लिम विवाह करवा सकेंगे।  रजिस्टर्ड मौलवी ही करवा पाएंगे निकाह नया निकाहनामा आने के बाद  केवल रजिस्टर्ड मौलवी ही निकाह करा सकेंगे. गलत तरीके से दूसरा निकाह करने वाले लोगों या गलत निकाहनामा जारी करने वालों के विरुद्ध उचित धाराओं में कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी. उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने एनडीटीवी को बताया कि यूसीसी के नियमों को ध्यान में रखते हुए अब ऐसा निकाहनामा मॉडल जारी किया जाएगा जिसमें केवल एक निकाह का ही प्रावधान होगा. उन्होंने बताया कि निकाहनामे में दूसरे, तीसरे या चौथे निकाह का कोई कॉलम नहीं होगा. उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने बताया है कि एक पत्नी के रहते दूसरा निकाह पूरी तरह अवैध होगा।  दूसरे धर्म की लड़की से विवाह इस निकाहनामे के तहत नहीं कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी. नए निकाहनामे के बाद निकाह को रजिस्टर्ड कराना भी अनिवार्य होगा. बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने जानकारी देते हुए बताया कि इस निकाहनामा के जारी होने के बाद दूसरे धर्म की लड़की का विवाह इस निकाहनामा मैं नहीं किया जा सकेगा अगर कोई दूसरे धर्म की लड़की या लड़के का विवाह होता है तो उसके लिए स्पेशल मैरिज एक्ट का प्रावधान है।  नया निकाहनामा समाज को जोड़ने वाला होगा- उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने बताया कि वक्फ बोर्ड की 4 महीने पहले हुई बोर्ड बैठक में प्रस्ताव लाया गया था और प्रस्ताव में सभी बिंदुओं पर ध्यान रखा गया बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि मुस्लिम धर्म का भी इसमें ध्यान रखा गया है नया निकाहनामा समाज को जोड़ने वाला होगा. निकाह पढ़ाने वाले मौलवियों के लिए स्पेशल एक आइडेंटिटी नंबर भी जारी किया जाएगा और वही मौलवी निकाह करवाएंगे. निकाहनामा में इस बात का रिकॉर्ड रखा जाएगा कि कितने लोगों की शादियां हुई हैं, कितने लोगों का तलाक हुआ है।