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Bank Holiday: 7-13 सितंबर के बीच कब और कहां बंद रहेंगे बैंक? यहां देखें राज्यवार सूची

नई दिल्ली आज  से नया हफ्ता शुरू हो रहा है. ऐसे में बहुत से लोग बैंक जाकर अपना काम निपटाने की तैयारी कर रहे होंगे.ज्यादातर लोग  ये सोच रहे होंगे कि इस हफ्ते किस दिन बैंक जाकर अपना काम निपटाया जाए. लेकिन बैंक जाने से पहले यह पता होना जरूरी है कि उस दिन आपके शहर में बैंक खुला है या बंद है.कहीं ऐसा न हो कि आप काम लेकर बैंक पहुंचें और वहां ताला लगा मिले.इससे आपका समय तो बर्बाद होगा ही इसके साथ आपको बेवजह बैंक के चक्कर भी काटने पड़ सकते हैं।  इसलिए  यहां हम आपको बता रहे हैं कि 7 से 13 सितंबर के बीच किस दिन, किस शहर में और किस वजह से बैंक बंद रहेंगे।  क्या 7 से 10 सितंबर के बीच बैंक खुले रहेंगे? भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के हॉलिडे लिस्ट के मुताबिक, 7 सितंबर से 10 सितंबर तक यानी  सोमवार से गुरुवार  तक ज्यादातर राज्यों में बैंक  खुले रहने वाले हैं.. हालांकि, बैंक की छुट्टियां राज्य और शहर के हिसाब से अलग हो सकती हैं. इसलिए अगर आपका काम जरूरी है, तो बैंक जाने से पहले अपने नजदीकी ब्रांच से जरूर कंफर्म करलें।  11 सितंबर को कहां-कहां बैंक बंद? 11 सितंबर, शुक्रवार को जयपुर में  निगम चुनाव की वजह से बैंक बंद रहेंगे. इस दिन जयपुर में बैंक शाखाओं में सामान्य कामकाज प्रभावित रहेगा. ऐसे में अगर आप जयपुर में रहते हैं और बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो पहले ही जाकर काम निपटा लेना चाहिए। 11 सितंबर को दिल्ली में सरकारी छुट्टी की घोषणा की गई है.यह फैसला 18वें ब्रिक्स लीडर्स समिट से पहले लिया गया है.ऐसे में दिल्ली में सरकारी ऑफिस  में कामकाज प्रभावित हो सकता है. इसका असर कुछ बैंक शाखाओं पर भी पड़ सकता है. हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि बैंक उस दिन बंद ही रहेगा. इसलिए दिल्ली में बैंक जाने से पहले बैंक की छुट्टियोंके बारे में पता कर लेना बेहतर रहेगा।  12 सितंबर को देशभर में बैंक बंद 12 सितंबर, शनिवार को देशभर में बैंक बंद रहेंगे.इस दिन असम के गुवाहाटी में श्रीमंत शंकरदेव की तिरोभाव तिथि के कारण भी बैंक बंद रहेंगे. आरबीआई के नियमों के मुताबिक, हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक शाखाओं में छुट्टी रहती है. इसके अलावा, सभी रविवार को भी देशभर में बैंक बंद रहते हैं।  13 सितंबर को बैंक में छुट्टी 13 सितंबर, रविवार को देशभर में बैंक बंद रहेंगे. रविवार को बैंक  में  साप्ताहिक छुट्टी होती है.इसलिए अगर आपको बैंक जाकर कोई काम कराना है, तो 12 और 13 सितंबर के दिन जाने का प्लानिंग न करें।  सितंबर में आगे कब-कब बंद रहेंगे बैंक? सितंबर में आने वाले दिनों में भी कई शहरों में गणेश चतुर्थी सहित  क्षेत्रीय छुट्टियों  और वीकेंड के कारण बैंक बंद रह सकते हैं.. यहां जानिए आने वाले दिनों में कब-कब बैंक की छुट्टी रहेगी…     14 सितंबर को गणेश चतुर्थी और अन्य क्षेत्रीय त्योहारों के कारण बेलापुर, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई, नागपुर, पणजी और विजयवाड़ा में बैंक बंद रहेंगे.     15 सितंबर को संवत्सरी, नुआखाई और गणेश चतुर्थी के कारण अहमदाबाद, भुवनेश्वर और पणजी में बैंक की छुट्टी रहेगी.     21 सितंबर को श्रीमंत शंकरदेव जन्मोत्सव और श्री नारायण गुरु समाधि के कारण भुवनेश्वर और तिरुवनंतपुरम में बैंक बंद रहेंगे.     22 सितंबर को करमा पूजा के कारण रांची में बैंक की छुट्टी रहेगी.     23 सितंबर को महाराजा हरि सिंह जी की जयंती के कारण जम्मू और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे.     25 सितंबर को इंद्रजात्रा के कारण गंगटोक में बैंक की छुट्टी रहेगी.     26 सितंबर को महीने का चौथा शनिवार है. इसलिए देशभर में बैंक बंद रहेंगे. बैंक बंद होने पर भी बिना दिक्कत के हो जाएंगे ये सारे काम ज्यादातर लोग ये सोच कर परेशान हो जाते हैं कि बैंक बंद है तो पैसे के लेनदेन जैसे जरूरी काम कैसे होगा. आपको बता दें कि इसके लिए आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि बैंक बंद होने का मतलब यह नहीं है कि उस दिन बैंकिंग से जुड़े काम सारे के सारे अटक जाएंगे. बैंक छुट्टी के दिन भी आप इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, एनईएफटी, आरटीजीएस और एटीएम जैसी सर्विस का इस्तेमाल कर सकते हैं।  यानी दोस्तों और परिवार को लोगों को जब चाहे पैसे भेज सकते हैं, जरूरत पड़ने पर UPI से पहले मंगा सकते हैं…और कैश की जरूरत पड़े तो बैंक जाकर फटाफट पैसे निकाल सकते हैं.  हालांकि, जो काम बैक ब्रांच में जाकर होने वाला है, जैसे  चेक से जुड़े काम या डॉक्यूमेंट जमा करना ये सबछुट्टी के दिन नहीं हो पाएंगे. ये तभी होगा जब बैंक खुलेंगे।   

PM Kisan की 24वीं किस्त से पहले किसान कर लें ये काम, लैंड सीडिंग नहीं हुई तो नहीं मिलेगा पैसा

नई दिल्ली  देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बार फिर खुशखबरी है. पीएम किसान सम्मान निधि के तहत मिलने वाली 2,000 रुपये की राशि की 24वीं किस्त अगले महीने अक्टूबर में आ सकती है. इस योजना के तहत सालभर में कुल 6,000 रुपये मिलते हैं, जो 2-2 हजार की तीन किस्तों में जारी किए जाते हैं. योजना की 23वीं किस्त जून महीने में जारी की गई थी. इस लिहाज से अक्टूबर में फिर 4 महीने पूरे होने पर 24वीं किस्त जारी होने की पूरी संभावना है. इस बार योजना की समीक्षा को और पुख्ता बनाया जा रहा है, जिसके लिए पात्र किसानों को लैंड सीडिंग करवाना जरूरी होगा, तभी किस्त का पैसा मिलेगा।  योजना से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि अक्टूबर में त्योहारी सीजन भी शुरू हो रहा है. नवरात्र की शुरुआत के साथ ही हिंदू त्योहारों का भी श्रीगणेश हो जाएगा. यही वजह है कि अगले महीने 24वीं किस्त के आने की प्रबल संभावना जताई जा रही है. सरकार ने इस योजना की लगातार समीक्षा भी की है, ताकि पात्र किसानों को इसका फायदा दिलाया जा सके. इसी प्रक्रिया में किसानों की ई-केवाईसी कराने के साथ ही लैंड सीडिंग कराने का भी निर्देश जारी किया गया है।  कुछ किसानों को मिलेंगे 4 हजार रुपये इस बार कुछ किसानों को 2 की जगह 4 हजार मिलने की संभावना है. दरअसल, 23वीं किस्त में कई किसानों को उनकी ई-केवाईसी और जमीन का सत्यापन पूरा नहीं होने की वजह से पैसा नहीं मिला था. ऐसे में जिन किसानों ने अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूरा कर लिया और जमीनों का सत्यापन भी हो चुका है, उन्हें पिछला बकाया भी मिल जाएगा. इसका मतलब है कि 24वीं किस्त के साथ ही 23वीं किस्त का पैसा भी दिया जाएगा. इस तरह, तमाम किसानों के खाते में इस बार 2 की जगह 4 हजार की राशि आएगी. अगर आपकी भी 23वीं किस्त का पैसा नहीं मिला है तो सभी सत्यापन और ई-केवाईसी पूरी कर लें ताकि पिछले किस्त का पैसा भी मिल सके।  बिना लैंड सीडिंग के नहीं मिलेगा पैसा इस बार बिना लैंड सीडिंग के किसानों को 24वीं किस्त का पैसा नहीं मिलेगा. लैंड सीडिंग का मतलब है कि किसानों की जमीन की जानकारी को पीएम किसान के रिकॉर्ड से जोड़ना और उसका सत्यापन करना. दरअसल, पीएम किसान योजना में उन्हीं लैंड होल्डिंग किसानों को इसका फायदा दिया जाएगा, जिनकी पात्रता राज्य सरकारों के भूमि रिकॉर्ड में दर्ज होती है. लिहाजा अगर आपको भी योजना के तहत 24वीं किस्त का पैसा उठाना है तो इसकी जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होना जरूरी होगा।  कैसे सुधारें अपनी लैंड सीडिंग     किसी किसान को अगर अपनी जमीन के स्टेटस से जुड़ी कोई समस्या दिखती है तो सबसे पहले राज्य सरकार के भूमि रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराना और जमीन की जानकारी देनी चाहिए।      किसान अपने जिले के राजस्व विभाग या सरकार की निर्धारित व्यवस्था के जरिये अपने रिकॉर्ड में सुधार करा सकते हैं।      किसान चाहें तो पीएम किसान की वेबसाइट पर जाकर नो योर स्टेटस के जरिये अपने भुगतान और ई-केवाईसी से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं।      इसके लिए pmkisan.gov.in पर जाएं और रजिस्ट्रेशन नंबर व कैप्चा डालकर ओटीपी के जरिये लॉग इन करें।   

S-400 की कामयाबी से बढ़ा भरोसा, भारत ने रूस से 5 और सिस्टम खरीदने की तैयारी की

नई दिल्ली रूस ने भारत को 5 और एस-400 ट्रायंफ एयर डिफेंस सिस्टम देने की दिशा में अहम कदम उठाया है। मॉस्को ने नई दिल्ली को बिल ऑफ क्वांटिटीज (BOQ) प्रस्ताव भेज दिया है, जिसमें निर्माण और अन्य सामग्री की लागत का ब्योरा दिया गया है। साथ ही दोनों देशों के बीच कीमत को लेकर बातचीत शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। नरेंद्र मोदी सरकार ने 2018 में रूस के साथ 5.43 अरब डॉलर में 5 एस-400 सिस्टम का सौदा किया था। इस करार के तहत 5वीं और आखिरी प्रणाली नवंबर 2026 में भारत पहुंचने की उम्मीद है। नई खरीद को लेकर अंतिम फैसला कीमत तय होने और वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति करेगी। इस बीच रूस से 2 स्क्वाड्रन एसयू-57 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान खरीदने को लेकर भी चर्चा तेज है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर भारत ने अभी तक एसयू-57 खरीदने का कोई फैसला नहीं किया है। भारतीय वायुसेना ने रूस के प्रस्ताव में जरूर दिलचस्पी दिखाई है। इसकी एक बड़ी वजह चीन की पांचवीं पीढ़ी के जे-20 लड़ाकू विमानों की तिब्बत में तैनाती मानी जा रही है। चीनी सेना ने पश्चिमी थिएटर कमांड के तहत होतान, ल्हासा और न्यिंगची जैसे हवाई ठिकानों पर जे-20 की मौजूदगी बढ़ाई है। ऐसे में भारत अपनी वायु रक्षा और लड़ाकू विमान क्षमता को मजबूत करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। विमान को सीमा से 314 किमी दूर से बनाया निशाना S-400 सिस्टम ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, एस-400 की लंबी दूरी की मिसाइल ने पाकिस्तान के एक हवाई चेतावनी विमान को भारतीय सीमा से करीब 314 किलोमीटर दूर निशाना बनाया था। पाकिस्तान ने आदमपुर और भुज जैसे हवाई ठिकानों पर तैनात एस-400 प्रणालियों को निशाना बनाने के लिए कामिकेज ड्रोन का इस्तेमाल किया, लेकिन भारतीय वायु रक्षा व्यवस्था के कारण पाकिस्तानी लड़ाकू विमान भारतीय सीमा के करीब आने से बचते रहे। भारतीय S-400 और आकाश-टीयर सिस्टम की भूमिका को इस दौरान अहम बताया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 10 मई 2025 को पाकिस्तान वायुसेना ने अपने कई हवाई संसाधनों को अफगानिस्तान से लगी डूरंड रेखा के नजदीक स्थित ठिकानों की ओर शिफ्ट कर दिया था। इससे पहले भारत की ब्रह्मोस मिसाइलों ने पाकिस्तान के कई हवाई ठिकानों को निशाना बनाया था। इसी दौरान भारतीय एस-400 और आकाश-टीयर वायु रक्षा प्रणालियों की ओर से पाकिस्तानी विमानों को नुकसान पहुंचाया गया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 11 से 13 सितंबर के बीच दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आने की संभावना है। इस बीच, भारत-रूस रक्षा सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों को मिल सकते हैं 14 लाख रुपये तक, जानिए कैसे बनेगा पूरा हिसाब

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग की टीम अब अगली बैठक चेन्‍नई में करने वाली है. इसके बाद कुछ और शहारों में इसकी बैठक होगी, फिर फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी. इसके बाद कर्मचारी कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार करेंगे, तब जाकर 8वां वेतन आयोग देश में लागू कर दिया जाएगा।  1 करोड़ से ज्‍यादा के कर्मचारी और पेंशनर्स भले ही 8वां वेतन आयोग कभी भी लागू किया जाए, लेकिन यह जनवरी 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि 1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जनवरी 2026 से जोड़कर एक साथ एरियर भेजा जाएगा. आइए जानते हैं यह एरियर कितना हो सकता है।  14 लाख रुपये से ज्‍यादा का एरियर एक कैलकुलेशन के मुताबिक, अगर 8वां वेतन आयोग लागू होने में 20 महीने की देरी होती है, तो लेवल 7 के कर्मचारियों को 20 महीने के एरियर के तौर पर ₹14 लाख से ज्‍यादा का अमाउंट एकमुश्‍त मिल सकता है. अब आइए जानते हैं लेवल 4 से 7 तक के बीच कर्मचारियों को कितना एरियर दिया जाएगा।     वेतन आयोग के लागू होने में जितनी देरी होगी, बकाया यानी एरियर की रकम उतनी ही बड़ी होती जाएगी. सूत्रों और एक्‍सपर्ट्स का अनुमान है कि 8वें वेतन आयोग की स‍िफारिशों को पूरी तरह से लागू होने में करीब 20 महीने या उससे ज्‍यादा का समय लग सकता है।         कितना फिटमेंट फैक्‍टर?  अगर 2.57 के फिटमेंट फैक्‍टर के आधार पर बेसिक सैलरी का कैलकुलेशन किया जाता है, तो मंथली पे ज्‍यादा होगा और उतना ही कर्मचरियों को एरियर दिया जाएगा. यह एरियर कर्मचारियों और पेंशनर्स को एकसाथ भेजा जा सकता है।         लेवल 7 के कर्मचारियों की कुल सैलरी एरियर अनुमानित बेसिक पे 7वें वेतन आयोग के तहत 44,900 रुपये माने, तो 2.57 फिटमेंट फैक्‍टर पर 8वें वेतन आयोग के तहत अनुमानित बेसिक पे ₹1,15,393 होगा. ऐसे में मंथली एरियर ₹70,493 बनेगा और अब 20 महीने का कुल एरियर देखें तो ₹70,493 ✕ 20 = ₹14,09,860 यानी 14.10 लाख रुपये होगा।         लेवल 6 से 4 लेवल तक के कर्मचारियों का कितना एरियर बनेगा  इसी आधार पर कैलकुलेशन करें तो लेवल 6 के कर्मचारियों का 20 महीने बाद एरियर ₹11.11 लाख, लेवल-5 के कर्मचारियों का एरियर ₹9.13 लाख और लेवल-4 के कर्मचारियों को एरियर ₹8 लाख रुपये होगा। 

Hugging Face ब्रीच के बाद OpenAI एजेंट्स पर बड़ा खुलासा, AI ने बनाई अपनी ‘सीक्रेट दुनिया’

नई दिल्ली AI ने अभी इंसानों के ज्यादातर काम को आसान बना दिया है. लेकिन, कई बार AI बेकाबू हो जाते हैं और इसे संभालना मुश्किल हो जाता है. जिसकी वजह से आने वाले भविष्य में AI कितना खतरनाक साबित हो सकता है, उसकी एक झलक देखने को मिल जाती है. अब एक बार फिर ताजा मामला ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI के तरफ से आया है. जहां उसके AI एजेंट्स ने जर्मन वेबसाइट को हाइजैक कर लिया।  रॉयटर्स के अनुसार, एक नई रिसर्च और मामले से जुड़े दो सूत्रों के अनुसार, इस साल मई के दौरान OpenAI के अनकंट्रोल्ड AI एजेंट्स के एक ग्रुप ने एक जर्मन वेबसाइट को हाइजैक कर लिया. उसके बाद और उसे दूसरे AI एजेंट्स के लिए एक मैसेज बोर्ड में बदल दिया. बताया जा रहा है कि OpenAI के अधिकारियों को इस घटना की जानकारी कई हफ्ते पहले हो गई थी. हालांकि, उन्होंने इसे सीक्रेट रखा क्योंकि कंपनी के अधिकारी जुलाई में ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म Hugging Face के डेटा ब्रीच के बाद के असर से निपटने में जुटे हुए थे।  क्या है पूरा मामला? जर्मनी में AI एजेंट्स के इस कदम की डिटेल को लेकर बताया जा रहा है कि रिसर्चर्स ने अगस्त के अंत में अनऑथोराइज्ड AI-एजेंट एक्टिविटी के सुराग खोजते समय इसे पकड़ा था. रिसर्चर्स ने बताया कि उन्हें प्रोग्रामर्स के लिए बनी एक जर्मन विकी वेबसाइट DseWiki पर AI एजेंट्स द्वारा किए गए 15,000 से अधिक एडिट्स मिले।  आपको बता दें कि ये वेबसाइट विकिपीडिया की तरह ही आम लोगों के एडिट्स स्वीकार करती है. इन एडिट्स से पता चला कि OpenAI के एजेंट्स ने इस साइट को एक मैसेज बोर्ड बना दिया था. जहां वे कुछ टास्क में चीटिंग करने, OpenAI की पाबंदियों को बायपास करने और अपने बर्ताव को छिपाने की तरकीबें शेयर कर रहे थे. रिसर्चर वॉन आर्क्स ने कहा, "इस बात की बिल्कुल संभावना नहीं है कि OpenAI चाहता था कि वे ऐसा करें. मुझे नहीं लगता कि उन्हें आपस में इस तरह तालमेल बिठाना चाहिए या खुले इंटरनेट पर लिखना चाहिए।  रिसर्चर्स ने कहा कि उन्होंने साइट पर होने वाली एक्टिविटी को AI एजेंट्स द्वारा ऑटोमेट माना. ये इंसानों से कई गुना तेज स्पीड में काम करते हैं. उन्होंने उन टेक्निकल सवालों को हल करने पर भी गहरा फोकस दिखाया जो आमतौर पर AI कंपनियां अपने मॉडल्स की टेस्टिंग के लिए इस्तेमाल करती हैं. मैसेज ऐसे यूजर्स द्वारा साइन किए गए थे जो खुद को और एक-दूसरे को 'एजेंट' कहते थे. साथ ही लगभग आधे यूजर्स ने ऐसे नाम रखे थे जो OpenAI से जुड़े होने का संकेत देते थे, जैसे “OpenAIResearcher” या “OAIResearchMar26” . पकड़े जाने के बाद की भी प्लानिंग थी तैयार रिसर्चर्स के मुताबिक, पब्लिक सर्वर लॉग्स से पता चला कि ज्यादातर एक्टिविटी Microsoft Azure इंफ्रास्ट्रक्चर से शुरू हुई थी. जिसका इस्तेमाल OpenAI भी करता है. उन्होंने घटना के बाद OpenAI कर्मचारियों द्वारा बार-बार उस साइट पर जाने का पैटर्न भी देखा. जिससे एजेंट्स और कंपनी के जुड़े होने के मजबूत संकेत मिलते हैं. रिसर्चर्स द्वारा देखे गए मैसेजेस में दिखाया गया कि एजेंट्स पकड़े जाने से बचने, Tor जैसे टूल्स का उपयोग करने और बंद किए जाने के बाद भी अपनी बातचीत को बनाए रखने के तरीके प्लान कर रहे थे।  जब जून में साइट के मॉडरेटर ने उन पेजों को डिलीट करना शुरू किया, तो एजेंट्स ने डिलीशन से बचने के लिए तुरंत बैकअप पेज बनाना शुरू कर दिया. 19 जून को एक एजेंट ने लिखा, "विकी क्लीनअप/डिलीशन अल्फाबेटिकल ऑर्डर में एक्टिव लग रहा है. अगर यह पेज हट जाता है, तो [[ZZZDataUSAConstructionWageLive]] ट्राई करें।  रिसर्चर्स को वेबसाइट के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिशें भी मिलीं. किंग्स कॉलेज लंदन के विजिटिंग सीनियर रिसर्च फेलो लुकास ओलेज्निक ने कहा कि ये हैकिंग की कोशिश के बराबर था. हालांकि, OpenAI ने इस मैटेरियल के एनालिसिस के आधार पर इस बात को खारिज किया. अतीत में AI एजेंट्स के ऐसे बर्ताव को अक्सर साइबर सुरक्षा टेस्टिंग का एक सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज किया जाता रहा है. जहां मॉडल्स की कैपिबिलिटी की जांच की जाती है. लेकिन ओलेज्निक ने कहा कि ये नए नतीजे बताते हैं कि ऐसा अनकंट्रोल्ड बिहेवियर सिर्फ टेस्टिंग तक सीमित नहीं रह सकता है।  कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ एग्जिस्टेंशियल रिस्क के मॉरिस चियोडो नेकहा कि ये मैसेज "किसी काम या मिशन को पूरा करने के लिए जी-जान से जुटे किसी अंडरग्राउंड नेटवर्क के काम करने के तरीके जैसे" लगते हैं. उन्होंने कहा कि इस घटना से ये चिंता होनी चाहिए कि एडवांस्ड AI से सबसे बड़ा खतरा किसी एक सुपर-इंटेलिजेंट सिस्टम से नहीं, बल्कि "आपस में सांठगांठ करने वाले सेमी-इंटेलिजेंट AI के बड़े झुंड" से हो सकता है।  कंपनी ने नहीं दी इस घटना की जानकारी मई से शुरू हुए इस मामले को पहले कभी रिपोर्ट ही नहीं किया गया था. कंपनियां तेजी से ऐसे ऑटोनॉमस एजेंट्स बनाने की होड़ में हैं, जो मुश्किल और बड़े काम संभाल सकें. हालांकि, इस बात के सबूत बढ़ रहे हैं कि ये सिस्टम नियम तोड़ना, सिस्टम की खामियों का फायदा उठाना और आपस में तालमेल बिठाना भी सीख सकते हैं. वे ऐसे तरीके इजाद कर रहे हैं जिनके बारे में डेवलपर्स ने न तो सोचा था और न ही चाहा था।  आपको बता दें कि Hugging Face ब्रीच के दौरान, OpenAI के एजेंट्स ने अपने दम पर एक ऐसा डिजिटल हमला प्लान किया जो लगभग एक हफ्ते तक पकड़ में नहीं आया. इससे ये चिंता बढ़ गई है कि OpenAI तकनीक की दौड़ में आगे निकलने के लिए सुरक्षा से समझौता कर रहा है. मई की घटना का खुलासा न करने से कंपनी की निगरानी व्यवस्था पर फिर से सवाल खड़े हो सकते हैं।  कंपनी ने पेश किया नया मॉडल Astra हालांकि, OpenAI ने अपने मॉडल्स की और बारीकी से निगरानी करने का वादा किया है. पिछले महीने, सुरक्षा उपाय बढ़ाने के लिए कंपनी ने कुछ मॉडल्स की ट्रेनिंग पर थोड़े समय के लिए रोक लगा दी थी. लेकिन इस हफ्ते, OpenAI ने अपना नया मॉडल "Astra" पेश किया, जिसने बेहतर परफॉर्मेंस का वादा किया है.हालांकि, ऐसे में सवाल उठ रहे हैं क्या ये इंसानी निगरानी से भी बच सकता … Read more

सत्य निकेतन में 4 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, 3 लोगों की मौत; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली में रविवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। साउथ कैंपस थाना क्षेत्र के सत्य निकेतन इलाके में दोपहर करीब 1:30 बजे एक पांच मंजिला इमारत (ब्वायज पीजी हॉस्टल) अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। इमारत गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें तुरंत मौके पर पहुँचीं और बचाव अभियान शुरू किया। एनडीआरएफ की टीमों ने लाइफ डिटेक्टर, प्रशिक्षित स्निफर डॉग्स, काम्बी कटर और हाइड्रोलिक उपकरणों की मदद से मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकाला। अधिकारियों के अनुसार, मलबे की स्थिति को देखते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मलबे के नीचे कोई और व्यक्ति न दबा हो। राजधानी के दक्षिण-पश्चिम जिले स्थित सत्य निकेतन क्षेत्र में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे आधी सदी पुरानी एक पांच मंजिला इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई। लड़कों के इस पीजी हॉस्टल के जमींदोज होने से मलबे में कई छात्र और श्रमिक फंस गए। हादसे के तुरंत बाद राहत कार्य के लिए पहुंची राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम के आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित कर्मी इन लोगों के लिए जीवनरक्षक सिद्ध हुए। लाइफ डिटेक्टर और स्निफर डॉग्स से तलाश मलबे के नीचे दबे लोगों की सटीक स्थिति का पता लगाने के लिए एनडीआरएफ ने लाइफ डिटेक्टर, प्रशिक्षित खोजी कुत्तों और हाइड्रोलिक तकनीकों का सहारा लिया। प्रत्यक्षदर्शियों व अन्य छात्रों से मिली जानकारियों के आधार पर रेस्क्यू टीम ने लक्षित स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया। मलबे में रास्ता बनाने के लिए अत्याधुनिक मशीनों का प्रयोग राहत कार्य में NDRF के करीब 70 जवानों और दो टीमों ने मोर्चा संभाला, जबकि दो अतिरिक्त टीमों को रिजर्व में रखा गया। मलबे को काटने और सुरक्षित रास्ता बनाने के लिए डायमंड चेन सॉ, काम्बी कटर, प्लाज्मा कटर और हाइड्रोलिक जैक का उपयोग किया गया। इसके अलावा, ढहे हुए ढांचे को स्थिर रखने और जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हाई-स्ट्रेंथ इन्फ्लेटेबल बैग्स लगाए गए। 15 से 30 मिनट में सुरक्षित निकाले गए लोग सटीक लोकेशन मिलने के बाद एनडीआरएफ कर्मियों ने अत्यंत सावधानी से कार्रवाई करते हुए एक बेहोश व्यक्ति को महज 15 मिनट में बाहर निकाला। वहीं, होश में मौजूद दो अन्य लोगों को 30 मिनट के भीतर सकुशल रेस्क्यू कर लिया गया। NDRF की 16वीं बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर सुनील सिंह और डीआईजी ऑपरेशंस सतविंदर सिंह सूडान ने खुद मौके पर मौजूद रहकर पूरे ऑपरेशन की कमान संभाली। अधिकारियों के अनुसार, मलबे के पूरी तरह से साफ होने और अंतिम व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित होने तक सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा।  

भारत ने यूरोप के डीजल बाजार में मारी बड़ी बाजी, अगस्त में 60% सप्लाई भारतीय रिफाइनरियों से

नई दिल्ली  रूस से डीजल की आपूर्ति में भारी गिरावट और अमेरिका से यूरोप जाने वाली ईंधन की खेप में कमी के बीच यूरोप के लिए भारत डीजल के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभरा है। ऊर्जा और माल ढुलाई क्षेत्र के तत्काल आधार पर आंकड़े उपलब्ध कराने वाली कंपनी वॉर्टेक्सा के अनुसार, अगस्त में बाब-अल-मंदेब से यूरोप की ओर जाने वाले डीजल में करीब 60 प्रतिशत हिस्सेदारी भारत की रही। आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में करीब दो लाख बैरल प्रतिदिन डीजल बाब-अल-मंदेब से होकर यूरोप भेजा गया। यह मात्रा एक साल पहले के स्तर के करीब है, जबकि मार्च और अप्रैल में इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से डीजल की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती भारत की रिफाइनरी इकाइयां अब यूरोप की डीजल आपूर्ति में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल शोधन (रिफाइनिंग) करने वाला देश है। उसकी स्थापित शोधन क्षमता 25.81 करोड़ टन सालाना है, जो घरेलू ईंधन मांग से अधिक है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 6.15 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया था और वह दुनिया के प्रमुख शोधित पेट्रोलियम उत्पाद के निर्यातकों में शामिल है। भारतीय ईंधन की मांग अब यूरोप के साथ-साथ रूस में भी बढ़ रही है। हालांकि, भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती कच्चे तेल की उपलब्धता हो सकती है। प्रभावित हो सकती है डीजल की मात्रा वॉर्टेक्सा के अनुसार, अगस्त में भारत में कच्चे तेल और कन्डनसेट की आवक लगातार दूसरे महीने घटकर करीब 38 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई, जबकि एक साल पहले यह करीब 48 लाख बैरल प्रतिदिन थी। ऐसे में यदि कच्चे तेल की आपूर्ति पर दबाव बना रहता है तो भारतीय रिफाइनरी इकाइयों के पास निर्यात के लिए उपलब्ध अतिरिक्त डीजल की मात्रा भी प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, रूस से डीजल की आपूर्ति में भारी गिरावट बनी हुई है। रूस का समुद्री डीजल घटा अगस्त के पहले 25 दिन में रूस का समुद्री डीजल और गैसऑयल निर्यात औसतन केवल करीब 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। यह एक साल पहले की तुलना में करीब 6.1 लाख बैरल प्रतिदिन कम और पांच साल के औसत से 81 प्रतिशत नीचे है। एक सितंबर से रूस के डीजल निर्यात प्रतिबंध में आंशिक ढील की उम्मीद थी, लेकिन इससे आपूर्ति में तत्काल सुधार की संभावना कम है। यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस की रिफाइनरी इकाइयों और निर्यात ढांचे को लगातार प्रभावित किया है। 32 हमले दर्ज किए गए जुलाई और अगस्त में रूस की रिफाइनरी पर 32 हमले दर्ज किए गए। करीब 2.6 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली पर्म रिफाइनरी पर हुए हमले के बाद उसकी परिचालन क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है। रूस के डीजल निर्यात में ‘ब्लैक सी’ क्षेत्र की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पिछले साल रूस के कुल डीजल और गैसऑयल निर्यात का करीब 44 प्रतिशत यानी 3.8 लाख बैरल प्रतिदिन, इसी क्षेत्र से हुआ था। लेकिन बंदरगाहों और रिफाइनरी में व्यवधान के कारण यहां से उपलब्ध आपूर्ति घट गई है। मई में हुए हमले के बाद से तुआप्से बंदरगाह से किसी डीजल खेप का निर्यात नहीं हुआ। यूरोप को रूस की कमी की भरपाई में अमेरिका से भी मदद मिली है, लेकिन अब वहां से आने वाली आपूर्ति भी कमजोर पड़ने लगी है। अगस्त में यूरोप के क्षेत्र के बाहर से आने वाले समुद्री डीजल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब आधी रही। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भी साफ पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में फिलहाल ज्यादा राहत नहीं मिल रही है। अगस्त के पहले 27 दिन में एमआर2 या उससे बड़े टैंकर से साफ पेट्रोलियम उत्पादों की केवल 37 आवाजाही दर्ज की गई, जबकि जुलाई में यह संख्या 55 और जून में 69 थी। ओमान के तट के पास जहाज से जहाज में तेल स्थानांतरण जारी है, लेकिन इनमें ज्यादातर कच्चा तेल शामिल है। साफ पेट्रोलियम उत्पादों का यह कारोबार भी जून की तुलना में काफी घट गया है। ऐसे में यूरोप की डीजल आपूर्ति श्रृंखला पहले के मुकाबले अधिक सीमित स्रोतों पर निर्भर रह गई है। रूस की आपूर्ति कमजोर बनी हुई है, अमेरिका से आने वाली खेप घट रही है और होर्मुज मार्ग से अतिरिक्त आपूर्ति सीमित है। इस स्थिति में यूरोप के लिए भारत डीजल की आपूर्ति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

PM मोदी की मंत्रियों संग कल अहम बैठक, कैबिनेट फेरबदल को लेकर बढ़ी हलचल

 नई दिल्ली केंद्र सरकार में मंत्रियों के कामकाज को लेकर सोमवार शाम अहम बैठक होने वाली है. पीएम मोदी इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे. इसमें कुछ मंत्रालयों के कामकाज, मंत्रियों के प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों पर बात होगी. बैठक को आने वाले समय में संभावित कैबिनेट फेरबदल से भी जोड़कर देखा जा रहा है।  बैठक में सामाजिक न्याय और जनकल्याण से जुड़े कामों पर खास ध्यान रहेगा. इसके लिए सिर्फ उन राज्यमंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्रियों को बुलाया गया है, जिनका विभाग समाज कल्याण से जुड़ा है. सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में बाकी मंत्रालयों के मंत्रियों के साथ भी सिलसिलेवार ऐसी बैठकें होंगी।  इन मंत्रालयों के काम का होगा हिसाब सोमवार की चर्चा में मुख्य रूप से शिक्षा मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और कृषि मंत्रालय शामिल रहेंगे. इसमें देखा जाएगा कि तय योजनाएं जमीन पर कितनी तेजी से उतरी हैं और मंत्रियों ने अपनी जिम्मेदारियां किस तरह निभाई हैं।  बैठक का एक अहम हिस्सा जवाबदेही भी होगा. यानी जिन मंत्रियों को जो जिम्मेदारी दी गई है, उस पर उनका काम कैसा रहा, इस पर चर्चा की जाएगी. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि बैठक के बाद किसी मंत्री को लेकर तत्काल कोई फैसला होगा।  राज्यमंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठकें सरकार आने वाले दिनों में राज्यमंत्रियों के दूसरे समूह के साथ भी ऐसी बैठकें कर सकती है. इसका मकसद अलग-अलग मंत्रालयों के कामकाज को समझना है।  इन बैठकों में मंत्रियों के प्रदर्शन पर चर्चा होने की वजह से इन्हें कैबिनेट में होने वाले संभावित बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, अभी फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।  क्यों अहम मानी जा रही है बैठक? मंत्रियों के कामकाज की यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब सरकार के स्तर पर अलग-अलग मंत्रालयों के प्रदर्शन पर नजर रखी जा रही है. ऐसे में सोमवार की बैठक में होने वाली चर्चा आगे के फैसलों के लिए अहम हो सकती है।  फिलहाल सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि बैठक में किन मंत्रियों के कामकाज पर बात होती है और आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों का क्या रुख रहता है. इन्हीं चर्चाओं से आगे कैबिनेट में किसी बदलाव की तस्वीर साफ हो सकती है। 

सिर्फ 30 सेकंड में मचा हड़कंप, 50 हजार फीट ऊंची राख; इंडोनेशिया में कई फ्लाइट्स रद्द

सुमात्रा इंडोनेशिया में रविवार सुबह अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी फट गया. विस्फोट के बाद राख के दो गुबार बने. इनमें से एक 20 हजार फीट तक पहुंचा, जबकि दूसरा लगभग 50 हजार फीट की ऊंचाई तक गया. राख फैलने के कारण जकार्ता के सोएकार्नो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कुछ घंटे उड़ान संचालन रोकना पड़ा।  यह ज्वालामुखी जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच सुंडा जलडमरूमध्य (सुंडा जलसंधि) में स्थित है. भूवैज्ञानिक एजेंसी के मुताबिक, यहां शुक्रवार से गतिविधि बढ़ी हुई थी. रविवार सुबह 3:53 बजे करीब 30 सेकंड तक विस्फोट हुआ. निगरानी कैमरे में ज्वालामुखी से निकलती लावा की चमक भी दिखाई दी. फिलहाल किसी की मौत की खबर नहीं है. लोगों को सक्रिय क्रेटर से कम से कम 3 किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी गई है।  आसमान में 50 हजार फीट तक पहुंची राख विस्फोट के बाद राख के दो अलग-अलग गुबार बने. पहला करीब 20 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंचा. यह उत्तर-पूर्व दिशा में बढ़ा, जिससे जकार्ता, बैंटन, पश्चिमी जावा के कुछ हिस्सों पर असर पड़ा।  दूसरा गुबार 50 हजार फीट तक पहुंचा. यह पश्चिम और उत्तर-पश्चिम की तरफ बढ़ा. इसकी वजह से बैंटन, लैंपुंग, बेंगकुलु, दक्षिणी सुंडा जलडमरूमध्य और सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर के कुछ हिस्से प्रभावित हुए।  जकार्ता एयरपोर्ट पर थमीं उड़ानें राख फैलने के खतरे को देखते हुए सोएकार्नो-हट्टा एयरपोर्ट ने सुबह 5:30 बजे से 9:30 बजे तक उड़ान संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया. यात्रियों ने टिकट का पैसा वापस लेने की कोशिश की. कुछ लोग अपना चेक-इन सामान भी वापस लिए।  इससे रविवार को 209 फ्लाइट मूवमेंट प्रभावित हुए. करीब 22,800 यात्री इसकी चपेट में आए. घरेलू उड़ानों में मकासर जाने वाला रूट भी प्रभावित रहा. अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सिंगापुर जाने वाली फ्लाइट्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ा. हांगकांग, सिडनी, एम्स्टर्डम, सियोल, दोहा और कुआलालंपुर की उड़ानों में भी रद्दीकरण, देरी या समय में बदलाव हुआ।  170 विमान एयरपोर्ट पर ही खड़े रहे रात में एयरपोर्ट पर खड़े किए गए 170 विमान वहीं मौजूद रहे. नागरिक उड्डयन विभाग एयरलाइंस, एयरपोर्ट संचालकों, एयर नेविगेशन सेवाओं और मौसम विभाग के साथ मिलकर हालात पर नजर रख रहा है।  यात्रियों को सलाह दी गई है कि एयरपोर्ट निकलने से पहले अपनी एयरलाइन से फ्लाइट की ताजा स्थिति जरूर जांच लें. अधिकारियों ने जरूरी न होने पर फिलहाल एयरपोर्ट जाने से बचने को भी कहा है. उड़ानों की बहाली के बाद भी विमान की आवाजाही, उपलब्ध विमानों तथा टर्मिनल पर यात्रियों की भीड़ पर असर पड़ सकता है।  3 किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी गनीमत रही कि विस्फोट में किसी की मौत की खबर नहीं है. प्रशासन ने लोगों को निकालने का आदेश भी नहीं दिया है. सबसे नजदीकी बस्ती 16 किलोमीटर से ज्यादा दूर है. फिर भी लोगों को सक्रिय क्रेटर से कम से कम 3 किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी गई है।  अनाक क्राकाटोआ चार स्तर वाली चेतावनी व्यवस्था में दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर है. 2018 में भी इस ज्वालामुखी के विस्फोट के बाद सुनामी आई थी. उस घटना में जावा और सुमात्रा में कम से कम 430 लोगों की मौत हुई थी. वैज्ञानिकों के मुताबिक, उस घटना के बाद ज्वालामुखी का द्वीप अपने पुराने आकार का करीब एक-चौथाई रह गया है। 

Old Monk की बिक्री पर FSSAI की सख्ती, ‘रम’ की जगह ‘रम फ्लेवर्ड स्पिरिट’ लिखना होगा

नई दिल्ली ओल्ड मॉन्क को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अहम बात कही है। इसके मुताबिक, ओल्ड मॉन्क को रम के तौर पर बेचना या उसका प्रचार करना सही नहीं है, क्योंकि इस प्रोडक्ट में मुख्य रूप से न्यूट्रल स्पिरिट का इस्तेमाल किया गया है। अदालत को बताया गय कि उत्पाद की वास्तविक प्रकृति उसके नाम या लेबल से ज्यादा अहम है। FSSAI की ओर से कहा गया कि इसे रम फ्लेवर्ड स्पिरिट की कैटेगरी में रखा जा सकता है। अदालत में सुनवाई के दौरान FSSAI के वकील ने साफ किया कि विवाद केवल बोतल पर लिखे लेबल का नहीं, बल्कि प्रोडक्ट की बनावट का है। ओल्ड मॉन्क में इस्तेमाल होने वाली न्यूट्रल स्पिरिट में रम फ्लेवर मिलाया गया है। कंपनी ने अपने लेबल में बदलाव कर नए वाले FSSAI के सामने पेश किए हैं। हालांकि, नियामक ने इन नए लेबल की समीक्षा के लिए अदालत से और समय मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी। ओल्ड मॉन्क की बिक्री पर हुई कार्रवाई यह विवाद महाराष्ट्र में ओल्ड मॉन्क की बिक्री पर हुई कार्रवाई के बाद सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र में जांच के दौरान न्यूट्रल स्पिरिट में फ्लेवरिंग पदार्थ पाए गए थे, जिसके बाद FSSAI ने प्रोडक्ट की बिक्री पर रोक लगाई थी। इसके बाद कंपनी ने पैकेजिंग में बदलाव करने पर सहमति जताई और बोतल पर एडेड फ्लेवर को प्रमुखता से दिखाने की बात कही। एफएसएसएआई की कार्रवाई केवल ओल्ड मॉन्क तक सीमित नहीं है। नियामक ने शराब बनाने वाली कई कंपनियों के उत्पादों में बाहरी फ्लेवर के इस्तेमाल, उम्र संबंधी दावों और भ्रामक लेबलिंग को लेकर कार्रवाई शुरू की है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, कई निर्माताओं की ओर से ऐसे बाहरी फ्लेवर मिलाए जा रहे थे, जिनसे उत्पादों में मानक रम या व्हिस्की जैसा स्वाद व सुगंध पैदा हो। मंत्रालय ने कहा कि ऐसे उत्पादों को उनकी वास्तविक प्रकृति के तहत रम फ्लेवर्ड स्पिरिट या व्हिस्की फ्लेवर्ड स्पिरिट के रूप में पहचाना जाना चाहिए। जांच में ओल्ड मॉन्क के XXX Rum पर 7 years old blended का दावा भी भ्रामक पाया गया। इसमें मुख्य मात्रा न्यूट्रल, बिना परिपक्व की गई स्पिरिट की थी, जबकि परिपक्व रम स्पिरिट की मात्रा 5 प्रतिशत से कम थी। नियमों के तहत मिश्रित स्पिरिट की उम्र का दावा उसमें शामिल सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट के आधार पर होना चाहिए।