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शंकराचार्य मामले में बढ़ा सियासी असर, योगी के पक्ष में खड़े Dy कमिश्नर प्रशांत सिंह ने छोड़ी सरकारी नौकरी

नई दिल्ली शंकराचार्य के मुद्दे पर अब अयोध्या से एक इस्तीफा, जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने राज्यपाल को भेजा इस्तीफा, दो पन्ने का भेजा इस्तीफा, जीएसटी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का बयान, पीएम मोदी व सीएम योगी के समर्थन में दे रहा हूं इस्तीफा, शंकराचार्य ने सीएम योगी पर की थी अभद्र टिप्पणी, कहा जिस प्रदेश का नमक खाता हूं जिस प्रदेश से मुझे सैलरी मिलती है मैं उसका पक्षधर हूं,सीएम योगी लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए मुख्यमंत्री है, उनका अपमान मै बर्दाश्त नहीं कर सकता, पिछले तीन दिन से मैं आहत था, मेरा इस्तीफा जब मंजूर हो जाएगा तो मैं अपने संसाधनों से सामाजिक कार्य में लग जाऊंगा।

अमेरिका में बर्फीला प्रलय! आइसक्वेक के बाद ट्रैवल सिस्टम ठप, हजारों उड़ानें कैंसिल, 30 लोगों ने गंवाई जान

न्यूयॉर्क अमेरिका में इन दिनों आइसक्वेक यानी हिम भूकंप आने से भारी तबाही मच गई है। अमेरिका के पूर्वोत्तर भाग में सोमवार को बर्फीले तूफान के कारण कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई है। तूफान के आखिरी चरण के असर से और बर्फबारी हुई और दक्षिण के कुछ हिस्सों में जमा देने वाली बारिश से परेशानी बनी हुई है और लाखों लोग सोमवार को बिजली के बिना ठंड में ठिठुरते रहे। अर्कांसस से न्यू इंग्लैंड तक 2,100 किलोमीटर के क्षेत्र में एक फुट से अधिक ऊंचाई तक बर्फ जम जाने के कारण सोमवार को सड़क यातायात बाधित हुआ, उड़ानें रद्द करनी पड़ीं और स्कूल बंद हैं। राष्ट्रीय मौसम सेवा ने बताया कि पिट्सबर्ग के उत्तरी इलाकों में 20 इंच तक बर्फ पड़ी और तापमान शून्य से 31 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा। अधिकारियों ने बताया कि इस तूफान के कारण कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई। पावरआउटेज डॉट कॉम के मुताबिक देश में सोमवार दोपहर तक 7,50,000 से अधिक जगहों पर बिजली गुल रही। इस बीच मिसिसिपी के कुछ हिस्से 1994 के बाद राज्य के सबसे भीषण बर्फीले तूफान से जूझ रहे हैं। मिसिसिपी विश्वविद्यालय ने इसके ऑक्सफोर्ड परिसर के बर्फ से ढक जाने के कारण कक्षाएं पूरे सप्ताह के लिए रद्द कर दी हैं। उड़ानों पर नजर रखने वाली वेबसाइट ‘फ्लाइटअवेयर डॉट कॉम’ के मुताबिक अमेरिका में सोमवार को 8,000 से अधिक उड़ानों में देरी हुई और उन्हें रद्द किया गया। विमानन विश्लेषण कंपनी सिरीअम के अनुसार, रविवार को अमेरिका की 45 प्रतिशत उड़ानें रद्द कर दी गईं। कोरोना वायरस महामारी के बाद से उड़ानें इतनी बड़ी संख्या में पहली बार रद्द की गई हैं।

कहां जाएं शिकायत लेकर सवर्ण? UGC रूल्स को चुनौती, SC में पहुंचा मामला

नई दिल्ली यूजीसी रूल्स के खिलाफ बढ़ रहे विरोध के बीच यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है। शीर्ष अदालत में इसके खिलाफ याचिका दाखिल की गई है, जिसमें कहा गया है कि ऐसे नियम गलत हैं। इसके तहत सवर्ण छात्रों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। अर्जी में सवाल उठाया गया है कि आखिर जनरल कैटेगरी के छात्रों को पीड़ित की परिभाषा में जगह क्यों नहीं दी गई है। यदि उनके साथ किसी तरह का भेदभाव या फिर दुर्व्यवहार होता है तो वहां शिकायत करेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 13 जनवरी को प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूशंस रेगुलेशंस 2026 को लागू किया था। यह सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू होना है।   याचिका में कहा गया कि नए नियम उन समुदायों के छात्रों को अपने खिलाफ होने वाले शोषण के खिलाफ शिकायत करने के अधिकार से वंचित किया गया है, जो एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग से ताल्लुक नहीं रखते हैं। अर्जी में कहा गया कि आखिर सवर्ण छात्रों के साथ किसी तरह का भेदभाव होता है तो वह कहां जाएंगे। इसके अलावा अहम सवाल यह भी है कि यदि ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के किसी छात्र की शिकायत को गलत पाया गया तो उनके खिलाफ कोई ऐक्शन क्यों नहीं होगा। दरअसल नए नियमों शिकायत के झूठे मामलों में कार्रवाई का प्रावधान ही हटा दिया गया है। लखनऊ से दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन, UGC दफ्तर के बाहर हल्लाबोल अदालत से मांग की गई है कि इन नियमों को वापस लिया जाए। मौजूदा प्रारूप के तहत इन्हें लागू नहीं किया जा सकता। अर्जी में कहा गया कि ये नियम तो सवर्णों के साथ ही एक तरह से भेदभाव वाले हैं और यह भेदभाव एक तरह से सरकार ने ही किया है। बता दें कि यह मामला देश भर में लगातार तूल पकड़ रहा है। दिल्ली में यूजीसी दफ्तर के बाहर इस बिल के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके अलावा लखनऊ यूनिवर्सिटी में भी प्रदर्शन हो रहे हैं। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में इस मसले पर विरोध प्रदर्शन और बढ़ सकते हैं। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से अब तक इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।  

यूसीसी केवल कानून नहीं, समाज में समरसता लाने का सशक्त माध्यम: सीएम पुष्कर सिंह धामी

देहरादून,  उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून को एक साल पूरा होने पर इसे ‘समान नागरिक संहिता दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से शुरू हुई यह ऐतिहासिक पहल सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि समानता, पारदर्शिता और सामाजिक समरसता की एक सशक्त नींव है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य महिलाओं को उनके वैधानिक अधिकारों में पूर्ण समानता दिलाना है। यह व्यवस्था विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों में महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करते हुए उन्हें समान और न्यायसंगत अधिकार सुनिश्चित करती है।” उन्होंने लिखा, “पिछले एक साल में यूसीसी के अंतर्गत विवाह पंजीकरण और नागरिक सेवाओं में उल्लेखनीय तेजी आई है। राज्य सरकार की ओर से 23 भाषाओं में सहायता और एआई-आधारित सपोर्ट की सुविधा के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि हर नागरिक इस सकारात्मक परिवर्तन का लाभ उठा सके।” इससे पहले, सोमवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून में एक अहम संशोधन किया गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश-2026 को मंजूरी दी। इसमें, आपराधिक प्रक्रिया संहिता-1973 के स्थान पर अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और दंडात्मक प्रावधानों के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 को लागू किया गया है। धारा 12 के अंतर्गत सचिव के स्थान पर अपर सचिव को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है। संसोधन के जरिए विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत जानकारी को विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाया गया है। विवाह और लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी व विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं। लिव-इन संबंध की समाप्ति पर पंजीयक की ओर से समाप्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाने का प्रावधान किया गया है। अनुसूची-2 में ‘विधवा’ शब्द के स्थान पर ‘जीवनसाथी’ शब्द का प्रतिस्थापन किया गया है। विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध और उत्तराधिकार से संबंधित पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति पंजीयक जनरल को प्रदान की गई है।  

सरकारी बैंकों का राष्ट्रव्यापी आंदोलन: पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग तेज

नई दिल्ली, देशभर में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के चलते मंगलवार को सरकारी बैंकों का कामकाज प्रभावित हो सकता है। बैंक कर्मचारी फाइव डे वर्किंग की मांग कर रहे हैं। हालांकि, निजी बैंक इस हड़ताल से प्रभावित नहीं होंगे। कई सरकारी बैंकों ने पहले ही स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी दे दी है कि हड़ताल की वजह से बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ सकता है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) ने इस देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। यह संगठन नौ बैंक यूनियनों का संयुक्त मंच है, जो सरकारी बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है। यह फैसला 23 जनवरी को मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई बैठक में कोई समाधान न निकलने के बाद लिया गया था। इसमें भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बड़े सरकारी बैंक शामिल हैं। हड़ताल के कारण कैश जमा और निकासी, चेक क्लियरेंस और बैंक के रोजमर्रा के काम प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक जैसे निजी बैंक सामान्य रूप से काम करेंगे, क्योंकि उनके कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल नहीं हैं। डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जैसे यूपीआई पेमेंट और इंटरनेट बैंकिंग, सामान्य रूप से चलने की उम्मीद है। फिर भी, कुछ इलाकों में एटीएम में नकदी की उपलब्धता थोड़ी प्रभावित हो सकती है। एसबीआई ने एक आधिकारिक जानकारी में कहा है कि सामान्य कामकाज बनाए रखने के लिए व्यवस्था की गई है, लेकिन कर्मचारियों की भागीदारी के कारण काम पर असर पड़ सकता है। एसबीआई के बयान में कहा गया है कि हड़ताल के दिन शाखाओं और कार्यालयों में कामकाज सुचारू रखने की कोशिश की गई है, फिर भी कुछ सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। बैंक यूनियनों की मुख्य मांग है कि हर शनिवार को छुट्टी घोषित की जाए। यह प्रस्ताव मार्च 2024 में 12वें द्विपक्षीय समझौते में शामिल किया गया था, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है।  

एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा: उड़ान भरते ही क्रैश हुआ प्राइवेट जेट, चीख-पुकार से दहला इलाका

बैंगोर – अमेरिका अमेरिका में भीषण बर्फीले तूफान और खराब मौसम के बीच एक बड़ा विमान हादसा सामने आया है। रविवार शाम करीब 7:45 बजे बैंगोर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक प्राइवेट जेट बॉम्बार्डियर चैलेंजर 600  उड़ान भरते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) के मुताबिक हादसे के वक्त विमान में 8 लोग सवार थे। फिलहाल सवार लोगों की स्थिति के बारे में आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। खराब मौसम और बर्फबारी बनी चुनौती यह दुर्घटना उस समय हुई जब अमेरिका का एक बड़ा हिस्सा कुदरत के कहर से जूझ रहा है। बैंगोर सहित अमेरिका के कई राज्यों में भारी बर्फबारी और जमा देने वाली बारिश हो रही है। लगातार गिरती बर्फ के कारण रनवे पर परिचालन मुश्किल हो रहा है। बैंगोर एयरपोर्ट बोस्टन से लगभग 200 मील उत्तर में स्थित है और यहाँ से फ्लोरिडा और वॉशिंगटन जैसे शहरों के लिए सीधी उड़ानें चलती हैं।   जांच के घेरे में चैलेंजर 600 बॉम्बार्डियर चैलेंजर 600 एक लोकप्रिय बिजनेस जेट है जिसे 9 से 11 यात्रियों के सफर के लिए डिजाइन किया गया है। इसे 1980 में लॉन्च किया गया था। यह अपनी चौड़ी बॉडी और आरामदायक केबिन के लिए जाना जाता है।नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) और FAA ने संयुक्त रूप से हादसे की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि दुर्घटना तकनीकी खराबी की वजह से हुई या खराब मौसम इसका मुख्य कारण था।   अमेरिका में जनजीवन अस्त-व्यस्त बर्फीले तूफान ने पूरे अमेरिका में कोहराम मचा रखा है। बर्फबारी की वजह से हवाई और सड़क यातायात लगभग रुक गया है। दक्षिण-पूर्वी अमेरिका में लाखों घरों और व्यावसायिक केंद्रों की बिजली गुल हो गई है जिससे लोग अंधेरे और कड़ाके की ठंड में रहने को मजबूर हैं। बैंगोर सहित कई बड़े हवाई अड्डों पर सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।  

‘मंदिर प्रबंधन में दखल नहीं’—महाकाल मंदिर वीआईपी दर्शन मामले में याचिका निरस्त

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी दर्शन के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि धार्मिक मामलों का नियमन न्याय क्षेत्र का हिस्सा नहीं है और मंदिर प्रबंधन के लोग ही ऐसे मुद्दों पर फैसला करें। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस आर महादेवन और जॉयमाल्य बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी को इस संबंध में मंदिर रअथॉरिटी के सामने अपनी बात रखने को कहा। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिए गए अहम तर्क     अदालत के याचिका खारिज करने के बाद याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने याचिका वापस लेने क अनुमति मांगी और अपनी बात संबंधित अधिकारियों के सामने रखने की बात कही।     इस याचिका में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें पवित्र शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए वीआईपी दर्शन के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया था। विष्णु शंकर जैन ने याचिका में कहा कि मंदिर के गर्भगृह में एंट्री के मामले में हर नागरिक के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए।     मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मंदिर प्रबंधन में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएं हैं और यह उन लोगों पर निर्भर है, जो शीर्ष पर हैं, कि वे खुद ऐसे मुद्दों पर फैसला करें। उन्होंने कहा, 'VIP एंट्री की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं, यह कोर्ट को तय नहीं करना है।' मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि गर्भगृह के अंदर मौलिक अधिकारों को सख्ती से लागू करने से अनजाने परिणाम हो सकते हैं।     मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'अगर हम यह मानते हैं कि अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) गर्भगृह के अंदर लागू होता है, तो लोग अन्य अधिकारों जैसे अनुच्छेद 19 (भाषण की स्वतंत्रता) का भी दावा करेंगे। पहले, आप कहेंगे कि मुझे प्रवेश करने का अधिकार है क्योंकि कोई और प्रवेश कर रहा है; फिर आप कहेंगे कि मुझे यहां मंत्रों का जाप करने का अधिकार है क्योंकि मुझे भाषण का अधिकार है। तब सभी मौलिक अधिकारों का दावा गर्भगृह के अंदर किया जाएगा।'     इस पर विष्णु शंकर जैन ने कहा कि नागरिकों के साथ वीआईपी दर्जे के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है। जैन ने कहा, 'अगर कोई व्यक्ति गर्भगृह में प्रवेश कर रहा है, तो यह अक्सर कलेक्टर की सिफारिश के कारण होता है। एक नियमित भक्त को देवता को जल चढ़ाने का वही अधिकार होना चाहिए।' उन्होंने तर्क दिया कि या तो सभी के लिए एंट्री पर पूरी तरह रोक होनी चाहिए या सभी को बराबर मंजूरी मिलनी चाहिए।     इससे पहले उच्च न्यायालय ने कहा था कि वीआईपी किसी भी एक्ट या नियम में परिभाषित नहीं है और इसके बजाय यह मंदिर प्रबंधन समिति और कलेक्टर द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले प्रशासनिक विवेक का मामला है।

Snow Storm का कहर: अमेरिका में 25 जानें गईं, हजारों फ्लाइट्स रद्द, जनजीवन अस्त-व्यस्त

अमेरिका इस समय कुदरत के भीषण कहर का सामना कर रहा है। आर्कन्सा से लेकर न्यू इंग्लैंड तक फैले 1,300 मील के दायरे में आए बर्फीले तूफान ने पूरे देश की रफ्तार रोक दी है। इस आपदा में अब तक कम से कम 25 लोगों की जान जा चुकी है। कड़ाके की ठंड और जमा देने वाली बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। वहीं 8,000 से ज्यादा फ्लाइट्स या तो रद्द हुईं या देरी से चलीं। रिकॉर्ड तोड़ ठंड और बर्फबारी नेशनल वेदर सर्विस के मुताबिक अमेरिका के कई हिस्सों में बर्फबारी ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं:     पिट्सबर्ग: यहां करीब 20 इंच तक बर्फ जमी है।     तापमान: कड़ाके की हवाओं के कारण महसूस होने वाला तापमान माइनस 25 डिग्री फारेनहाइट तक गिर गया है।     न्यूयॉर्क: सेंट्रल पार्क में 11 इंच बर्फ दर्ज की गई। अकेले न्यूयॉर्क शहर में ठंड की वजह से 8 लोगों की मौत हो गई।   अंधेरे में डूबे दक्षिणी राज्य तूफान का सबसे बुरा असर बिजली व्यवस्था पर पड़ा है। टेनेसी, मिसिसिपी और टेक्सास जैसे राज्यों में 7 लाख से ज्यादा घरों की बिजली गुल है।     1994 के बाद सबसे बुरा हाल: मिसिसिपी में इसे पिछले तीन दशकों का सबसे विनाशकारी तूफान बताया जा रहा है। सड़कों पर गिरे पेड़ों और बिजली के खंभों ने रास्तों को ब्लॉक कर दिया है।     यूनिवर्सिटी बंद: बिजली संकट के चलते यूनिवर्सिटी ऑफ मिसिसिपी की पूरे हफ्ते की क्लासेज रद्द कर दी गई हैं।   हवाई सफर पर ब्रेक बर्फीले तूफान ने आसमान में भी कोहराम मचाया है। सोमवार को 8,000 से ज्यादा फ्लाइट्स या तो रद्द हुईं या देरी से चलीं। रविवार को हालात इतने खराब थे कि अमेरिका की 45 प्रतिशत उड़ानें उड़ान ही नहीं भर सकीं। मौत के अलग-अलग कारण रिपोर्ट्स के मुताबिक मौतें केवल ठंड से ही नहीं बल्कि हादसों से भी हुई हैं। मैसाचुसेट्स में बर्फ हटाते समय दुर्घटनाएं हुईं वहीं आर्कन्सा और टेक्सास में स्लेजिंग (Sledging) के दौरान हुए हादसों में लोगों ने जान गंवाई।  

ट्रंप के ‘जंगल कानून’ के खिलाफ 57 मुस्लिम देशों के साथ आया चीन

बीजिंग. मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका–ईरान के बीच तीखी बयानबाज़ी के बीच चीन ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। चीन के उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री वांग यी ने सोमवार (26 जनवरी) को 57 देशों वाले इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के महासचिव के साथ बीजिंग में अहम बातचीत की है। चीनी विदेश मंत्रालय और सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, यह वार्ता ऐसे समय हुई है जब मिडिल-ईस्ट में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और सैन्य टकराव की आशंकाएं बढ़ रही हैं। यह बैठक उस पृष्ठभूमि में हुई है जब एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने चेतावनी दी कि “ईरान पर किसी भी हमले को पूर्ण युद्ध के रूप में देखा जाएगा।” दरअसल, एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ने ईरान की ओर एक “आर्माडा” यानी बड़ा नौसैनिक बेड़ा भेजा है, जो “एहतियात के तौर पर” तैनात किया जा रहा है। ट्रंप ने ईरान को प्रदर्शनकारियों की हत्या या परमाणु कार्यक्रम दोबारा शुरू करने के खिलाफ चेतावनी भी दी थी। ईरान में विरोध प्रदर्शन और मौतों का दावा इसी बीच, क्षेत्र में मौजूद एक ईरानी अधिकारी ने रविवार को दावा किया कि आर्थिक कठिनाइयों के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान अब तक कम से कम 5,000 लोगों की मौत हो चुकी है। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इससे हालात की गंभीरता और बढ़ गई है। चीन का संदेश: सुरक्षा साझेदारी और राजनीतिक समाधान इस तनातनी के बीच, सोमवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने इस्लामिक सहयोग संगठन के महासचिव से बातचीत में मध्य पूर्व के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा साझेदारी के निर्माण, और संवेदनशील मुद्दों के राजनीतिक समाधान पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, चीन का मानना है कि टकराव और सैन्य कार्रवाई के बजाय संवाद और सहयोग से ही क्षेत्र में स्थिरता लाई जा सकती है। दुनिया एक 'जंगल के कानून' की ओर बढ़ रही रिपोर्ट के मुताबिक, वांग ने कहा, 'चीन इस्लामी देशों के साथ मिलकर विकासशील देशों के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, "चीन दुनिया को जंगल के कानून की ओर लौटने से रोकने के लिए तैयार है।" चीनी विदेश मंत्री ने ये भी कहा है कि क्षेत्र के हॉटस्पॉट मुद्दों का राजनीतिक समाधान किया जाना चाहिए न कि सैन्य अभियान से। चीनी विदेश मंत्री के मुताबिक, ट्रंप की नीतियों की वजह से दुनिया एक 'जंगल के कानून' की ओर बढ़ रही है जिसमें ट्रंप जब चाहे, जिसपर चाहे टैरिफ लगा देते हैं। अमेरिकी सैन्य तैनाती जारी उधर, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि आने वाले दिनों में एक एयरक्राफ्ट कैरियर, और कई गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर युद्धपोत मध्य पूर्व क्षेत्र में पहुंचने वाले हैं। विश्लेषकों के मुताबिक, इस सैन्य तैनाती और कूटनीतिक गतिविधियों के बीच चीन की OIC से बातचीत यह संकेत देती है कि बीजिंग खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति और संभावित मध्यस्थ के रूप में स्थापित करना चाहता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में चीन की यह पहल आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

‘अमेरिका के बिना यूरोप की सुरक्षा एक सपना है’: नाटो प्रमुख

वाशिंगटन. अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों के बीच गहराते तनाव के बाद अब नाटो प्रमुख ने एक बड़ा बयान दिया है। नाटो के महासचिव मार्क रूट ने सोमवार को जारी अपने इस बयान में कहा है कि अमेरिका के बिना यूरोप कभी खुद को बचा नहीं सकता और यह महज सपने की तरह है। नाटो चीफ ने यह भी कहा कि अगर यूरोप को खुद की रक्षा खुद करनी है उसे मौजूदा सैन्य खर्च के लक्ष्यों को दोगुना से भी ज्यादा बढ़ाना होगा। रूट ने ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ के सांसदों से कहा, "अगर यहां कोई सोचता है कि यूरोपीय संघ या पूरा यूरोप अमेरिका के बिना खुद का बचाव कर सकता है, तो सपने देखते रहो। तुम नहीं कर सकते।" उन्होंने कहा कि यूरोप और अमेरिका को एक-दूसरे की जरूरत है। नाटो चीफ ने आगे कहा, "अगर आप सच में अकेले चलना चाहते हैं, तो भूल जाइए कि आप 5 फीसदी रक्षा बजट के साथ कभी वहां पहुंच सकते हैं। आपको यह 10 फीसदी करना होगा। आपको अपनी खुद की परमाणु क्षमता बनानी होगी। इसमें अरबों यूरो खर्च होंगे।" ट्रंप की धमकियों से बढ़ा तनाव बता दें कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों को लेकर नाटो के भीतर तनाव बढ़ रहा है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका की सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड को हासिल करना बहुत जरूरी है। वहीं नाटो सदस्यों द्वारा ट्रंप ने इस कदम का खुलकर विरोध किए जाने के बाद ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा भी कर दी थी। हालांकि बाद में ट्रंप ने अपना यह फैसला वापस ले लिया। बजट को लेकर क्या विवाद? इससे पहले ट्रंप यूरोपीय देशों के रक्षा बजट को लेकर भी हमलावर रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि ये देश रक्षा बजट को नहीं बढ़ा रहे हैं और अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर हैं। उन्होंने कई मौकों पर यह कहा है कि अमेरिका यूरोप के लिए बहुत पैसे खर्च करता है लेकिन बदले में अमेरिका को कुछ नहीं मिलता। बीते जुलाई में द हेग में नाटो शिखर सम्मेलन में, यूरोपीय देशों और कनाडा ने ट्रंप की इस मांग पर सहमति व्यक्त की कि वे एक दशक के भीतर अपनी जीडीपी का उतना ही प्रतिशत रक्षा पर निवेश करेंगे जितना अमेरिका करता है। उन्होंने 2035 तक सकल घरेलू उत्पाद का 3.5 फीसदी बजट रक्षा पर और अतिरिक्त 1.5% सुरक्षा-संबंधित बुनियादी ढांचे पर खर्च करने का वादा किया था।