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15 अगस्त 2027 से भारत में शुरू होगी पहली बुलेट ट्रेन, सूरत–वापी से होगी शुरुआत

 सूरत देश की बहुप्रतिक्षित बुलेट ट्रेन को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को इसके बारे में संकेत दिया था. उन्होंने कहा था कि, 15 अगस्त, 2027 को पहली बुलेट ट्रेन मिलने की संभावना है.  भारत में बुलेट ट्रेन का सपना अब साकार होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। नए साल के मौके पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देशवासियों को बड़ी सौगात देते हुए बताया कि 15 अगस्त 2027 से देश में पहली बुलेट ट्रेन दौड़ने लगेगी। रेल मंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि अगले स्वतंत्रता दिवस के लिए लोग अभी से बुलेट ट्रेन की यात्रा का मन बना सकते हैं। पहले चरण में यह हाई-स्पीड ट्रेन सूरत से वापी के बीच लगभग 100 किलोमीटर के हिस्से में चलाई जाएगी। अहमदाबाद से मुंबई के बीच प्रस्तावित देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना अहमदाबाद से मुंबई के बीच प्रस्तावित है। इसके पूरा होने के बाद दोनों महानगरों के बीच 508 किलोमीटर की दूरी मात्र 2 घंटे 17 मिनट में तय की जा सकेगी। फिलहाल इस महत्वाकांक्षी परियोजना का करीब 55 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूरत में परियोजना की प्रगति की समीक्षा भी की थी। पूरे रूट में से 352 किलोमीटर गुजरात और दादरा-नगर हवेली में जबकि 156 किलोमीटर महाराष्ट्र में आता है। यह परियोजना नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) द्वारा जापान के सहयोग से तैयार की जा रही है। जापान के तकनीक पर आधारित होगी यह ट्रेन जापान की प्रसिद्ध शिंकानसेन तकनीक पर आधारित होगी, जिसकी अधिकतम गति 320 किमी प्रति घंटा होगी। पूरे मार्ग पर कुल 12 स्टेशन होंगे, जिनमें अहमदाबाद, वडोदरा, भरूच, सूरत, वापी, ठाणे और मुंबई शामिल हैं। परियोजना का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा एलिवेटेड ट्रैक पर है, जिसमें से 326 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है। दुनिया में हाई-स्पीड ट्रेनों की बात करें तो चीन के पास सबसे बड़ा नेटवर्क है, जबकि जापान ने 1964 में सबसे पहले बुलेट ट्रेन शुरू की थी। फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली, दक्षिण कोरिया और ताइवान भी इस क्षेत्र में आगे हैं। अमेरिका, इंडोनेशिया और मोरक्को में भी हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि, बुलेट ट्रेनें 2027 तक पटरी पर आ जाएंगी. इसका पहला सेक्शन सूरत से बिलिमोरा तक चालू किया जाएगा. दूसरा सेक्शन वापी से सूरत, फिर वापी से अहमदाबाद, फिर ठाणे से अहमदाबाद और आखिर में मुंबई से अहमदाबाद में शुरू होगा. बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के बारे में बताते हुए वैष्णव ने आगे कहा कि, पोल लगाने के लिए एक नई तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें पोल ​​को ज़मीन से उठाकर वायडक्ट तक ले जाया जाता है. यह टेक्नोलॉजी भारत में डेवलप की गई है. अब जापान भी अपने प्रोजेक्ट्स में इसका इस्तेमाल करेगा. केंद्रीय मंत्री ने ट्रैक सिस्टम की नई टेक्नोलॉजी के बारे में आगे बताया कि, उन्हें J-Slab के लिए एक बहुत अच्छा इनोवेशन मिला है. यह वह स्ट्रक्चर है जिस पर ट्रैक बिछाया जाता है. वैष्णव ने कहा कि, यह स्लैब फैक्ट्री में तैयार किया जाता है, साइट पर लाया जाता है, और फिर मशीनों का इस्तेमाल करके एक-एक करके बिछाया जाता है. बुलेट ट्रेन के 12 स्टेशन हैं, महाराष्ट्र में मुंबई, थाने, विरार और बोइसर. गुजरात में वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती. हालांकि, साबरमती और मुंबई टर्मिनल स्टेशन हैं. मुंबई स्टेशन BKC (बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स) में है, और तीन डिपो बनाए गए हैं. महाराष्ट्र में दूसरी टनल का निर्माण पालघर जिले की सबसे लंबी सुरंगों में से एक, 1.5 किलोमीटर की पहाड़ी सुरंग, विरार और बोइसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच है. ठाणे और BKC के बीच पहली 5 किलोमीटर की अंडरग्राउंड सुरंग पिछले साल सितंबर में पूरी हुई थी. प्रोजेक्ट की कुल लंबाई प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 508 किलोमीटर और टनल की लंबाई 27.4 किलोमीटर है. इसमें से 21 किलोमीटर अंडरग्राउंड टनल और 6.4 किलोमीटर सरफेस टनल है. कुल 8 माउंटेन टनल हैं. जिसमें से 7 महाराष्ट्र में 6.05 किलोमटर और एक गुजरात में 350 मीटर टनल है. ट्रांसपोर्टेशन लैंडस्केप घनी आबादी वाले शहरों, ऊबड़-खाबड़ इलाकों और सुरक्षित वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी से अपना रास्ता बनाते हुए, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट देश में अब तक की सबसे मुश्किल इंजीनियरिंग चुनौतियों का सामना कर रहा है. फिर भी, हर माइलस्टोन हासिल करने के साथ, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर असलियत के करीब आता जा रहा है, एक बार पूरा होने के बाद, यह प्रोजेक्ट भारत के ट्रांसपोर्टेशन लैंडस्केप में एक बड़ा बदलाव लाने वाला अध्याय होगा. पूरे कॉरिडोर में कंस्ट्रक्शन का काम तेजी पकड़ रहा है. जियोटेक्निकल जांच पूरी होने वाली है, रणनीतिक तौर पर ज़रूरी पहाड़ी सुरंगों पर काम शुरू हो गया है, और लगभग 11 किलोमीटर तक पियर बनाने के लिए ओपन फाउंडेशन का काम पूरा हो चुका है. नॉइज बैरियर जैसे-जैसे कॉरिडोर बन रहा है, इसके रास्ते में रहने वाले समुदायों पर भी ध्यान दिया जा रहा है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आगे कहा कि, ट्रेन के चलने से होने वाले शोर को कम करने के लिए, हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन ने वायडक्ट के दोनों तरफ नॉइज बैरियर लगाना शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा कि, शिंकानसेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके, इन नॉइज बैरियर में खास तौर पर इंजीनियर्ड कंक्रीट पैनल होते हैं जो आवाज को सोखने और मोड़ने के लिए डिजाइन किए गए हैं. हर पैनल रेल लेवल से दो मीटर ऊपर उठता है और एक मीटर चौड़ा होता है, जो एलिवेटेड कॉरिडोर के साथ एक लगातार अकूस्टिक शील्ड बनाता है. एक बार लग जाने पर, इन बैरियर से ट्रेनों और सपोर्टिंग सिविल स्ट्रक्चर दोनों से होने वाले ऑपरेशनल शोर में काफी कमी आने की उम्मीद है, जिससे आस-पास के निवासियों के लिए शांत माहौल पक्का करने में मदद मिलेगी. गुवाहाटी–कोलकाता के बीच चलेगी स्लीपर वंदे भारत रेल मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि देश की पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन का ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह ट्रेन 18–19 जनवरी से गुवाहाटी और कोलकाता (हावड़ा) के बीच शुरू की जा सकती है। ट्रायल के दौरान 16 कोच वाली इस ट्रेन ने 182 किमी प्रति घंटे की रफ्तार हासिल की। जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र … Read more

अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को गिरफ्तार किया, ट्रंप के बयान के बाद वेनेजुएला उपराष्ट्रपति का जवाब

काराकस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए घोषणा की है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को हिरासत में ले लिया है. यह घटनाक्रम वेनेजुएला की राजधानी काराकस में हुए उन संदिग्ध हवाई हमलों और धमाकों के बाद आया है, जिसकी खबरें पिछले कुछ घंटों से अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में बनी हुई थीं. लैटिन अमेरिका के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा सैन्य और राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल रहा है.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए दावा किया अमेरिकी सुरक्षा बलों ने एक विशेष अभियान के तहत वेनेजुएला के विवादित राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया है. इससे पहले शनिवार को काराकस में कई बड़े धमाके सुने गए थे और सरकारी इमारतों के ऊपर काला धुआं उठता देखा गया था. माना जा रहा है कि अमेरिकी हवाई हमलों ने मादुरो के सुरक्षा घेरे को ध्वस्त कर दिया, जिसके बाद विशेष बलों ने उन्हें हिरासत में ले लिया. हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि मादुरो को वेनेजुएला में ही किसी सुरक्षित स्थान पर रखा गया है या उन्हें अमेरिका ले जाया जा रहा है. वेनेजुएला के रक्षामंत्री बोले- सरेंडर नहीं करेंगे वेनेजुएला पर हमला: वेनेजुएला के रक्षा मंत्री के जीवित होने और बयान जारी करने की पुष्टि हुई है. इससे पहले खबरें आई थीं कि बमबारी में उनके आवास को निशाना बनाया गया है. रक्षा मंत्री ने अपने बयान में कहा, ‘हम न बातचीत करेंगे, न आत्मसमर्पण करेंगे और अंत में जीत हमारी होगी.’ वहीं, इस बीच CBS News ने दावा किया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सेना की एलीट स्पेशल ऑपरेशंस यूनिट डेल्टा फोर्स ने हिरासत में लिया है. हालांकि वेनेजुएला सरकार की ओर से मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है. ट्रंप बोले- यह शानदार ऑपरेशन था वेनेजुएला पर हमला: न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला में की गई कार्रवाई बेहद सोच समझकर की गई थी और इसमें बेहतरीन योजना तथा शानदार सैनिकों की भूमिका रही. ट्रंप ने इसे “वास्तव में एक शानदार ऑपरेशन” बताया. इसी बीच अमेरिका की ओर से वेनेजुएला में निशाना बनाए गए ठिकानों की पुष्टि भी की गई है. इन लक्ष्यों में कराकस स्थित मुख्य सैन्य अड्डा फुएर्ते तिउना, राजधानी का प्रमुख एयरबेस ला कार्लोटा, संचार और सिग्नल से जुड़ा अहम केंद्र एल वोल्कान, देश का सबसे बड़ा बंदरगाह ला ग्वायरा पोर्ट और मिरांडा प्रांत में स्थित हिगुएरोटे एयरपोर्ट शामिल हैं. इन ठिकानों पर हमले के बाद वेनेजुएला में सैन्य और प्रशासनिक ढांचे को बड़ा झटका लगने की बात कही जा रही है. हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. ट्रंप का बड़ा दावा- मादुरो को गिरफ्तार करके देश से बाहर ले जाया गया वेनेजुएला पर हमला: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सनसनीखेज बयान जारी करते हुए कहा है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमला सफलतापूर्वक किया है और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी के साथ हिरासत में लेकर देश से बाहर भेज दिया गया है. ट्रंप के मुताबिक यह ऑपरेशन अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर किया गया. उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई से जुड़े और विवरण जल्द साझा किए जाएंगे. ट्रंप ने यह भी बताया कि इस मामले पर आज सुबह 11 बजे मार ए लागो में प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी. फिलहाल वेनेजुएला सरकार की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं.  कराकस के ऊपर ड्यूल-रोटर हेलिकॉप्टर, वेनेजुएलाई सेना के पास ऐसे विमान नहीं वेनेजुएला पर हमला: कराकस में जारी सैन्य कार्रवाई के बीच सामने आए वीडियो फुटेज ने हालात को और गंभीर बना दिया है. CNN ने बताया कि राजधानी कराकस के ऊपर धुएं के गुबार उठते दिख रहे हैं और उसी इलाके में कई ड्यूल-रोटर हेलिकॉप्टर उड़ते नजर आ रहे हैं. अहम बात यह है कि एविएशन जर्नल फ्लाइटग्लोबल के मुताबिक वेनेजुएला की सेना के पास किसी भी तरह के ड्यूल-रोटर हेलिकॉप्टर नहीं हैं. इससे यह संकेत और मजबूत हो गए हैं कि कराकस के ऊपर दिखाई दे रहे ये हेलिकॉप्टर विदेशी सैन्य ताकत से जुड़े हो सकते हैं.  ईरान का बयान- अमेरिका का हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन वेनेजुएला पर हमला: ईरान के विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला पर अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा की है. जारी बयान में कहा गया है कि अमेरिका की ओर से किया गया हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर के बुनियादी सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है. ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताते हुए कहा कि किसी संप्रभु देश पर इस तरह की सैन्य कार्रवाई वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा है. ईरान के इस बयान से साफ है कि वेनेजुएला पर हमले को लेकर अब पश्चिम एशिया से लेकर लैटिन अमेरिका तक विरोध की आवाजें तेज होती जा रही हैं.

बांग्लादेश में खोकन दास की अस्पताल में मौत, तालाब में कूदकर भी नहीं बची जान, क्रूरता का शिकार हुआ युवक

ढाका  बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे बर्बर हमलों ने एक और जान ले ली है. ढाका से लगभग 150 किलोमीटर दूर अपने गांव में दवा और मोबाइल बैंकिंग का व्यवसाय चलाने वाले खोकन चंद्र दास पर बुधवार रात इस्लामिक कट्टरपंथियों ने जानलेवा हमला किया था. हमलावरों ने न केवल उन पर धारदार हथियारों से वार किया, बल्कि उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश भी की थी. खोकन चंद्र दास के परिवार ने बताया कि वह बुधवार रात दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तभी उन पर हमला किया गया. हमले में गंभीर रूप से झुलसे खोकोन दास किसी तरह पास के तालाब में कूद गए, जिससे आग बुझ सकी, लेकिन उनका चेहरा और सिर बुरी तरह झुलस गया था. स्थानीय लोगों ने उन्हें पहले नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, बाद में हालत बिगड़ने पर ढाका रेफर किया गया, जहां शुक्रवार तड़के उनकी मौत हो गई. खोकन दास अपने गांव में दवा और मोबाइल बैंकिंग का छोटा कारोबार चलाते थे. यह गांव ढाका से करीब 150 किलोमीटर दूर स्थित है. घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए. इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी ने इसे धार्मिक आधार पर हो रही हिंसा बताते हुए कहा कि यह सिलसिला बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल दोनों जगह चिंताजनक रूप से जारी है. पार्टी ने पिछले साल मुर्शिदाबाद में हुई हत्याओं का हवाला देते हुए कहा कि बंगाली हिंदुओं पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे. लगातार हो रहे हैं हमले खोकन दास का नाम अब उन हिंदुओं की बढ़ती सूची में जुड़ गया है, जिन पर मुस्लिम-बहुल बांग्लादेश में कथित तौर पर धार्मिक कारणों से जानलेवा हमले हुए हैं. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौर में अल्पसंख्यकों पर हिंसा के मामलों में इजाफे को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है. बांग्लादेश में हिंसा की यह कड़ी नई नहीं है. इससे पहले 18 दिसंबर 2025 को दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी. आरोप है कि पहले उन्हें मार डाला गया और फिर शव को पेड़ से बांधकर जला दिया गया. उन पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था. इसके बाद 25 दिसंबर को अमृत मंडल की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. हालांकि अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बीच बांग्लादेश सरकार ने दावा किया कि अमृत मंडल एक आपराधिक गतिविधियों में लिप्त व्यक्ति था और उगाही के विवाद में भीड़ ने उसे निशाना बनाया. वहीं 29 दिसंबर को मेहराबारी इलाके में सुरक्षा ड्यूटी के दौरान बजेंद्र बिस्वास (42) की गोली लगने से मौत हो गई. पुलिस ने आरोपी नोमान मिया (29) को गिरफ्तार किया, जिसने पूछताछ में दावा किया कि गोली “मजाक में” चली थी. भारत ने भी कई बार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ “लगातार शत्रुता” पर गंभीर चिंता जताते हुए हालात पर करीबी नजर रखने की बात कही है. वहीं बांग्लादेश सरकार का कहना है कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, हालांकि जमीनी हालात कुछ और कहानी बयां करते हैं.

अमेरिका का वेनेजुएला पर हमला: काराकस समेत 4 शहरों में बमबारी, मादुरो ने नेशनल इमरजेंसी की घोषणा

काराकस  अमेरिकी सेना ने आखिरकार वेनेजुएला पर हमला बोल दिया है। राजधानी काराकस में शनिवार सुबह तड़के तेज धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। काराकस में मौजूद CNN के पत्रकारों ने धमाकों की पुष्टि की है। पहला धमाका स्थानीय समयानुसार लगभग 1:50 बजे हुआ। शहर के कई इलाकों में बिजली गायब हो गई है। धमाकों के बाद वेनेजुएला की राजधानी में कम ऊंचाई पर उड़ते हुए विमानों की आवाजें सुनाई दी हैं। वहीं, वेनेजुएला के सूत्रों ने स्काई न्यूज अरबिया को बताया कि हवाई हमलों में देश के रक्षा मंत्री के घर और राजधानी काराकस में एक बंदरगाह को निशाना बनाया गया। वेनेजुएला में इन 5 प्रमुख ठिकानों को अमेरिका ने बनाया निशाना कोलंबिया के राष्ट्रपति ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस में अमेरिकी वायु सेना द्वारा किए गए हमलों से प्रभावित ठिकानों की सूची प्रकाशित की है. इस सूची में सैन्य और सरकारी सुविधाओं के साथ-साथ देश के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज का मेमोरियल भी शामिल है. अमेरिका ने जिन ठिकानों को एयर स्ट्राइक के जरिए निशाना बनाया उनमें… फोर्ट ट्यूना – काराकस का मेन मिलिट्री बेस ला कार्लोटा – काराकस का मेन एयरबेस एल वोल्कान – मेन रडार स्टेशन ला गुएरा पोर्ट – वेनेजुएला का प्रमुख बंदरगा​ह  इगुएरोटे एयरपोर्ट – मिरांडा राज्य का हवाई अड्डा शामिल हैं.  अमेरिका ने अपने नागरिकों को तुरंत वेनेजुएला छोड़ने को कहा अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए वेनेजुएला की यात्रा नहीं करने की एडवाइजरी जारी की है. इसमें अमेरिकी नागरिकों से कहा गया है, 'वेनेजुएला की यात्रा न करें और न ही वहां ठहरें, क्योंकि वहां आपको गलत तरीके से हिरासत में लेकर प्रताड़ित किया जा सकता है. आपका अपहरण हो सकता है या स्थानीय कानूनों का आपके खिलाफ गलत इस्तेमाल किया जा सकता है. इस समय वेनेजुएला में अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ अपराध, नागरिक अशांति और खराब स्वास्थ्य व्यवस्था का खतरा बहुत अधिक है. वेनेजुएला में रहने वाले सभी अमेरिकी नागरिकों और वैध स्थायी निवासियों को तुरंत वहां से निकलने की सलाह दी जाती है.'  अमेरिका ने कमर्शियल विमानों के वेनेजुएलन एयरस्पेस में जाने पर लगाया बैन एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने वेनेजुएला के हवाई क्षेत्र में चल रही सैन्य गतिविधियों के मद्देनजर अपने कमर्शियल विमानों के ऑपरेशन पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह प्रतिबंध वेनेजुएला की राजधानी काराकस में सिलसिलेवार धमाकों की खबरों से कुछ ही समय पहले लगाया गया.  अमेरिकी हमले के बाद वेनेजुएला में नेशनल इमरजेंसी लागू वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने कहा कि इन हमलों का उद्देश्य हमारे देश के रणनीतिक संसाधनों, खासकर तेल और खनिजों पर कब्जा करना और राजनीतिक स्वतंत्रता को बलपूर्वक तोड़ना है. उन्होंने देश में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की है. मादुरो ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी नेशनल डिफेंस प्लान को उचित समय और उपयुक्त परिस्थितियों में लागू किया जाए. साथ ही, उन्होंने देश की सभी सामाजिक और राजनीतिक शक्तियों से इस साम्राज्यवादी हमले के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की अपील की है. मादुरो के खिलाफ क्यों हैं ट्रंप? ऐसे में आइए समझते हैं कि अमेरिका के वेनेजुएला पर सीधा हमला करने के पीछे की वजह क्या है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले कुछ समय से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर दबाव बनाए हुए हैं। अमेरिकी युद्धपोतों को इस दक्षिण अमेरिकी देश के पास तैनात किया गया है, जिसे ट्रंप ने वेनेजुएला के खिलाफ सबसे बड़ी सैन्य तैनाती कहा है। इसके पहले 29 दिसम्बर को ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की ड्रग्स वाली नावों के लिए एक डॉकिंग एरिया पर हमला किया था, लेकिन उन्होंने हमले की जगह नहीं बताई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार चेतावनी देते रहे हैं कि अमेरिका वेनेजुएला में कथित ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है और जमीन पर जल्द ही हमले शुरू होंगे। अक्टूबर में ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने CIA को वेनेजुएला के अंदर काम करने की इजाजत दी है, ताकि इस दक्षिण अमेरिकी देश से आने वाले अवैध प्रवासियों और ड्रग्स की बाढ़ पर रोक लगाई जा सके। क्या है वेनेजुएला और अमेरिका के बीच विवाद? वेनेजुएला अब तक की सबसे बड़ी नौसैनिक घेराबंदी का सामना कर रहा है. अमेरिका पिछले कई महीनों से कैरिबियन क्षेत्र में अपनी सेना को जमा कर रहा है. USS गेराल्ड आर. फोर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर भी इस अभियान में शामिल है. दोनों देशों के बीच विवाद की मुख्य जड़ तेल और गैस से जुड़ी है. हालांकि अमेरिका का ये भी आरोप है कि वेनेजुएला की सरकार अवैध ड्रग्स के कारोबार में लिप्त है जिसका बुरा प्रभाव अमेरिकी लोगों पर पड़ रहा है. अमेरिका ने 2025 में ऑपरेशन सदर्न स्पीयर चलाकर कैरिबियन सागर में वेनेजुएला से जुड़े कथित ड्रग तस्करी वाले जहाजों पर हवाई हमले भी किए. अमेरिकी नौसेना के विमान अब तक कम से कम 25 टैंकरों पर हमले कर चुके हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का सीधा आरोप है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो खुद नशीली दवाओं की तस्करी के अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं. अमेरिका का दावा है कि मादुरो “नार्को-टेररिस्ट” संगठन चला रहे हैं और अमेरिका में ड्रग्स की तस्करी कर रहे हैं. वेनेजुएला से आने वाली नावों को रोकने के लिए अमेरिका ने नौसैनिक नाकाबंदी लगाई है. अमेरिका ने वेनेजुएला के कई तेल टैंकरों को जब्त किया है और कुछ पर हमला भी किया है. निकोलस मादुरो साल 2023 से ही वेनेजुएला के राष्ट्रपति पद पर काबिज हैं. मादुरो अमेरिका और ट्रंप के विरोधी माने जाते हैं. अमेरिका का ये भी कहना है कि अमेरिका का ये भी कहना है कि वेनेजुएला का तेल असल में अमेरिका का है और वहां तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण चोरी था. अमेरिका का कहना है कि उनकी तकनीक और पूंजी से वेनेजुएला में तेल उद्योग खड़ा हुआ लेकिन सत्ता में आने के बाद निकोलस मादुरो ने इसे जबरन अपने कब्जे में ले लिया. डोनाल्ट ड्रंप खुद ये कह चुके हैं कि वेनेजुएला को वह सारा तेल, जमीन और अन्य संपत्ति वापस करनी होगी जो पहले हमसे चुराई गई थी. वेनेजुएला का क्या कहना है? वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो ने आरोप लगाया है कि अमेरिका उसके तेल, सोना और अन्य संसाधनों पर कब्जा करने की … Read more

दिल्ली-यूपी में गलन भरी ठंड, पहाड़ों पर बर्फबारी और उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड का असर

 नईदिल्ली  नए साल के आगाज के साथ देश में तापमान तेजी से नीचे गिरने लगा है। कई राज्यों में सर्दियों का सितम देखने को मिल रहा है। राजस्थान में पारा 0 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, तो वहीं पहाड़ों पर बर्फबारी के कारण मैदानी इलाकों में गलन और ठिठुरन बढ़ने लगी है। भारतीय मौसम विभाग ने कई राज्यों में शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। IMD ने जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, बिहार, ओडिशा, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में शीतलहर के साथ घना कोहरा छाए रहने की चेतावनी जारी की है। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी जम्मू कश्मीर में पहाड़ों ने बर्फ की मोटी चादर ओढ़ ली है। मौसम विभाग ने केदारनाथ, बंद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब समेत कई जिलों में बर्फबारी का अलर्ट जारी किया है। इसका असर निचले इलाकों में देखने को मिल सकता है, जहां ठंड अचानक से बढ़ने की संभावना है। यूपी में शीतलहर की चेतावनी उत्तर प्रदेश में 3 जनवरी को कई क्षेत्रों में सुबह और रात के समय कोहरा छाए रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार 6 से 9 जनवरी तक यूपी में शीतलहर देखने को मिल सकती है। प्रदेश में शनिवार को ठंड बढ़ने की संभावना है। यूपी से सटे बिहार में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है और रात व सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने की चेतावनी जारी की गई है। 4 और 5 जनवरी को बिहार में कोल्ड डे को लेकर विशेष चेतावनी दी गई है। हिमाचल में माइनस में पहुंचा तापमान हिमाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में हल्की बारिश और बर्फबारी हुई, जिसके चलते कई स्थानों पर तापमान माइनस में पहुंच गया। ताबो में न्यूनतम तापमान -6.8°C दर्ज किया गया। कुल्लू-मनाली में मौसम साफ होने के बाद ऊपरी इलाकों में सड़कों पर ब्लैक आइस जमना शुरू हो गया है। प्रशासन ने रोहतांग दर्रा वाहनों के लिए बंद कर दिया है और फिसलन के कारण रोहतांग की ओर जाने वाले वाहनों को गुलाबा में रोक दिया गया। हिमाचल प्रदेश के अधिकांश इलाकों में 8 जनवरी तक मौसम साफ बना रहेगा। हालांकि 6 जनवरी को राज्य के ऊंचे पहाड़ों पर एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश या बर्फबारी होने की संभावना है। दिल्ली में शीतलहर का अलर्ट राजधानी दिल्ली में भी कड़ाके की ठंड ने दस्तक दे दी है। दिल्ली में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज किया गया है। मौसम विभाग ने राजधानी समेत आसपास के जिलों में शीतलहर की चेतावनी जारी की है। इस दौरान 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने के आसार हैं। राजस्थान में लुढ़का तापमान राजस्थान के बाड़मेर, बीकानेर, सीकर, हनुमानगढ़ समेत 10 जिलों में कोहरे का अलर्ट जारी हुआ है। वहीं, मध्य प्रदेश में अगले 3 दिन तक घना कोहरा छाए रहने की उम्मीद है। इसके अलावा भोपाल और इंदौर में हल्की बौछार भी देखने को मिल सकती है। यूपी-बिहार में बढ़ेगी ठंड मौसम विभाग ने यूपी और बिहार में भी 9 जनवरी तक के लिए शीतलहर और कोहरे की चेतावनी जारी की है। इस बीच धूप न निकलने और आसमान में घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। पहाड़ों से आने वाली ठंडी हवाओं क कारण दोनों राज्यों में गलन और ठिठुरन बढ़ सकती है।  

भारत ने चिनाब पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट शुरू किया, पाकिस्तान बेबस, नहीं मिली कोई जानकारी

 इस्लामाबाद केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर स्थित 260 मेगावाट की दुलहस्ती चरण-दो जलविद्युत परियोजना को भारत की मंजूरी ने पाकिस्तान को मिर्ची लगा दी है। पाकिस्तान इसे सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) का उल्लंघन बता रहा है। लेकिन मजे की बात ये है कि भारत ने इस दशकों पुरानी संधि को पिछले साल ही निलंबित कर दिया था। इसके बाद से ही भारत अपनी मर्जी के मुताबिक पाक की ओर जाने वाली नदियों पर परियोजनाओं को मंजूरी दे रहा है। ताजा बयान में पाकिस्तान की बेबसी साफ झलक रही है। पाकिस्तान पहले भी कुछ मौकों पर भारत के सामने नदियों के पानी को लेकर गिड़गिड़ा चुका है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने गुरुवार को कहा कि इस परियोजना के बारे में भारत ने कोई पूर्व सूचना या अधिसूचना नहीं दी, जो 1960 की सिंधु जल संधि का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और द्विपक्षीय समझौतों की अवहेलना करार दिया। पाकिस्तान का दावा है कि संधि के तहत भारत को पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) पर सीमित उपयोग की अनुमति है और किसी भी नई परियोजना की जानकारी पाकिस्तान के साथ शेयर करना अनिवार्य है। प्रवक्ता ने कहा- हमने मीडिया रिपोर्ट्स देखी हैं कि भारत चिनाब नदी पर दुलहस्ती स्टेज-द्वितीय परियोजना बनाने की योजना बना रहा है। इस संबंध में कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई, जो गंभीर चिंता का विषय है। पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले के एक दिन बाद, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक उपाय लागू किए थे, जिनमें 1960 की सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को स्थगित करना भी शामिल था। विश्व बैंक की मध्यस्थता से गठित आईडब्ल्यूटी 1960 से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती आ रही है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा- सिंधु जल के लिए पाकिस्तानी आयुक्त ने भारत में अपने समकक्ष से बताई गई परियोजनाओं की प्रकृति, दायरे और तकनीकी विवरणों के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है, और वे यह भी जानना चाहते हैं कि क्या यह एक नई परियोजना है, या किसी मौजूदा संयंत्र में कोई परिवर्तन या अतिरिक्त कार्य है। प्रवक्ता ने कहा कि आईडब्ल्यूटी के तहत, भारत पश्चिमी नदियों पर एकतरफा रूप से किसी भी जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए अपने सीमित हिस्से का दुरुपयोग नहीं कर सकता है। भारत की ओर से पर्यावरण मंत्रालय की एक समिति ने दिसंबर 2025 में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में इस रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना को पर्यावरण मंजूरी दी। यह मौजूदा 390 मेगावाट दुलहस्ती स्टेज-I परियोजना का विस्तार है। समिति ने नोट किया कि परियोजना के पैरामीटर संधि के अनुरूप हैं, लेकिन अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है। हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिसकी जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ली थी जो पाकिस्तान स्थित आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक प्रॉक्सी संगठन है। संधि निलंबन के बाद भारत सिंधु बेसिन में कई परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जैसे सावलकोट (1,856 मेगावाट), रतले, बुरसर, पाकल दुल आदि। भारतीय सूत्रों के अनुसार, ये कदम जल सुरक्षा और जलविद्युत क्षमता बढ़ाने के लिए हैं।

ब्रह्मोस से भी तेज, चीनी मिसाइल DF-12 का बड़ा भाई K-4, पाकिस्तान के लिए बन सकता है काल

नई दिल्ली भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी तकनीक से बनी ‘प्रलय’ टैक्टिकल क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. यह परीक्षण 31 दिसंबर 2025 को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से किया गया. खास बात यह रही कि एक ही लॉन्चर से दो मिसाइलें एक के बाद एक (साल्वो लॉन्च) दागी गईं और दोनों ने तय लक्ष्य को पूरी सटीकता से भेदा. इस ट्रायल में मिसाइल सिस्टम की सटीकता, भरोसेमंदी और युद्धक्षेत्र में उपयोग की क्षमता साबित हुई. परीक्षण के दौरान आधुनिक ट्रैकिंग सेंसरों ने मिसाइलों की उड़ान पर नजर रखी और यह पुष्टि की कि दोनों मिसाइलें तय रास्ते पर ही आगे बढ़ीं. बंगाल की खाड़ी में तैनात विशेष जहाजों से मिले टेलीमेट्री डेटा ने भी लक्ष्य पर सटीक प्रहार की पुष्टि की. ‘प्रलय’ पूरी तरह स्वदेशी सतह से सतह पर मार करने वाली, ठोस ईंधन से चलने वाली मिसाइल है. इसकी मारक क्षमता 150 से 500 किलोमीटर तक है. यह एक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है, यानी यह पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल की तरह ऊंची और तय दिशा में नहीं उड़ती, बल्कि कम ऊंचाई पर रास्ते में दिशा बदल सकती है. इसी वजह से दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणालियों के लिए इसे रोकना मुश्किल हो जाता है. प्रलय मिसाइल रूस की इस्‍कंदर-एम और चीन की DF-12 से कई मायनों में उन्‍नत और ज्‍यादा ताकतवर है. प्रलय मिसाइल अपनी उड़ान के दौरान रास्ते में तेज मोड़ लेने और दिशा बदलने में सक्षम है. इससे यह दुश्मन के रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकती है. इसमें आधुनिक रिंग लेजर जाइरो आधारित नेविगेशन सिस्टम और अंतिम चरण में लक्ष्य भेदने के लिए उन्नत तकनीक लगी है. डीआरडीओ पहले भी 2021 और 2022 में प्रलय मिसाइल के सफल परीक्षण कर चुका है, लेकिन इस बार का साल्वो लॉन्च ट्रायल बहुत अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह साबित हो गया कि एक ही प्लेटफॉर्म से तेजी से कई मिसाइलें दागी जा सकती हैं. यह आधुनिक युद्ध में बेहद जरूरी क्षमता है. इस सफल यूजर ट्रायल के बाद प्रलय मिसाइल के भारतीय सेना में शामिल होने का रास्ता लगभग साफ हो गया है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करती है. ‘इंडियन डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रलय मिसाइल के विकास में किसी विदेशी तकनीक पर निर्भरता नहीं है. इससे भारत की सीमाओं पर, खासकर मौजूदा क्षेत्रीय हालात में, सैन्य ताकत और रोकने की क्षमता (डिटरेंस) मजबूत होगी. इस परियोजना में DRDO के साथ निजी कंपनियों की भी अहम भूमिका रही है. मिसाइल का कैनिस्टराइज्ड लॉन्चर लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने बनाया है. इससे बड़े पैमाने पर उत्पादन और सेना की कई यूनिटों को तेजी से यह सिस्टम देने में मदद मिलेगी. प्रलय मिसाइल इस्‍कंदर-M मिसाइल (रूस) DF-12 मिसाइल (चीन) रेंज: 150 से 500 किलोमीटर रेंज: 500 किलोमीटर रेंज: 420 किलोमीटर रफ्तार: मैक 6.1 (7500 KMPH से ज्‍यादा) रफ्तार: मैक 6 से 7 (8000 KMPH) रफ्तार: हाइपरसोनिक (अनुमानित) वॉरहेड: अधिकतम 1000 किलोग्राम वॉरहेड: अधिकतम 800 किलोग्राम वॉरहेड: 480 किलोग्राम प्रोपल्‍शन: सॉलिड फ्यूल, टू-स्‍टेज प्रोपल्‍शन: सॉलिड फ्यूल, सिंगल स्‍टेज प्रोपल्‍शन: सॉलिड फ्यूल, सिंगल स्‍टेज प्रलय मिसाइल की मारक क्षमता क्या है? प्रलय मिसाइल 150 से 500 किलोमीटर तक की दूरी तक मार कर सकती है. यह एक ठोस ईंधन से चलने वाली अर्ध-बैलिस्टिक (क्वासी-बैलिस्टिक) मिसाइल है. इसमें अलग-अलग प्रकार के पारंपरिक (Conventionl) वारहेड लगाए जा सकते हैं, जिन्हें विभिन्न तरह के लक्ष्यों पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. प्रलय मिसाइल का परीक्षण कैसे किया गया? रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 31 दिसंबर 2025 को सुबह करीब 10:30 बजे एक ही लॉन्चर से प्रलय मिसाइलों का परीक्षण किया. यह उड़ान परीक्षण उपयोगकर्ता मूल्यांकन ट्रायल के तहत किया गया था. रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों मिसाइलें तय किए गए रास्ते पर चलीं और ट्रैकिंग सेंसरों ने पुष्टि की कि सभी उड़ान लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरे हुए. प्रलय मिसाइल किसने विकसित की है? प्रलय मिसाइल को रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने विकसित किया है. इसके विकास में डीआरडीओ की कई अन्य प्रयोगशालाओं ने भी सहयोग किया है. इनमें शामिल हैं – डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैबोरेटरी, एडवांस्ड सिस्टम्स लैबोरेटरी, आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, हाई एनर्जी मटेरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी और टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैबोरेटरी. इन सभी संस्थानों के संयुक्त प्रयास से प्रलय मिसाइल का विकास किया गया है. कम लागत, ज्यादा ताकत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर DRDO की टीम को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की सैन्य तैयारियों को और मजबूत करेगी. आमतौर पर ऐसे सफल परीक्षणों के बाद ही बड़े स्तर पर खरीद और उत्पादन के फैसले लिए जाते हैं. प्रलय मिसाइल प्रोग्राम को किफायती भी माना जा रहा है. स्वदेशी होने के कारण इसकी लागत विदेशी मिसाइल प्रणालियों की तुलना में कम है. इससे रक्षा बजट का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और भविष्य की तकनीकों पर निवेश बढ़ेगा. नए साल की शुरुआत से ठीक पहले हुआ यह सफल परीक्षण भारत की रक्षा तैयारियों के लिए एक मजबूत संदेश है. प्रलय मिसाइल ने साबित कर दिया है कि भारत न सिर्फ अपनी जरूरतें खुद पूरी कर सकता है, बल्कि आधुनिक और प्रभावी हथियार प्रणालियों के मामले में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. क्या है प्रलय मिसाइल की खासियत? प्रलय एक ठोस ईंधन से चलने वाली, अत्याधुनिक सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल है. इसका वजन करीब 5 टन है और यह 1 टन तक का पारंपरिक वारहेड ले जाने में सक्षम है. पूरी क्षमता के साथ यह मिसाइल 350 किलोमीटर तक मार कर सकती है, जबकि आधा पेलोड होने पर इसकी रेंज 500 किलोमीटर तक पहुंच जाती है. इस मिसाइल में आधुनिक गाइडेंस और नेविगेशन सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे यह बेहद सटीक निशाना साध सकती है. परीक्षण के दौरान मिसाइल ने तय किए गए रास्ते का पूरी तरह पालन किया और अधिकतम तथा न्यूनतम दोनों रेंज पर अपने सभी लक्ष्य हासिल किए. प्रलय मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत इसकी तेज रफ्तार और सटीकता है. इसकी अंतिम गति मैक 6 (7500 KMPH से ज्‍यादा) से अधिक है. इस तरह प्रलय मिसाइल ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के मौजूदा वर्जन से … Read more

आयुष्मान कार्ड को लेकर सरकार का नया आदेश, इन श्रेणियों के लोगों को नहीं मिलेगा मुफ्त इलाज

नई दिल्ली सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब नए आयुष्मान कार्ड आधार आधारित ई-केवाईसी के बाद ही जारी किए जाएंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने इसके लिए बेनिफिशयरी आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (BIS-2.0) को लागू कर दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत सभी लाभार्थियों की पहचान आधार ई-केवाईसी के माध्यम से अनिवार्य रूप से सत्यापित की जाएगी। नए सदस्य जोड़ने का विकल्प भी समाप्त इसके साथ ही आयुष्मान कार्ड में नए सदस्य जोड़ने (एड मेंबर) का विकल्प भी समाप्त कर दिया गया है। अब केवल एसईसीसी-2011 के तहत शेष पात्र परिवारों में ही, निर्धारित नियमों के अनुसार नए सदस्यों को जोड़ा जा सकेगा। ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर से कार्डों की निगरानी स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अर्चना वर्मा ने बताया कि संदिग्ध आयुष्मान कार्डों की पहचान स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट पोर्टल (SAFU BIS) के माध्यम से की जा रही है। एनएचए द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीक और ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर की मदद से ऐसे कार्डों की नियमित निगरानी की जाती है। कार्ड स्वतः चिन्हित हो जाते हैं इस तकनीक के जरिए संदिग्ध कार्ड स्वतः चिन्हित हो जाते हैं और तत्काल उन पर इलाज की सुविधा रोक दी जाती है। इसके बाद इन कार्डों की जांच ऑडिटर द्वारा कराई जाती है। जांच में सही पाए जाने वाले कार्डों को संदिग्ध श्रेणी से बाहर कर दिया जाता है। 61,932 कार्ड संदिग्ध पाए गए हैं अर्चना वर्मा ने बताया कि वर्ष 2018 से अब तक जारी किए गए आयुष्मान कार्डों में से 61,932 कार्ड संदिग्ध पाए गए हैं। इनकी जांच जिला स्तर पर फील्ड इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (FIO) द्वारा की जा रही है। अब तक 48,435 कार्डों का भौतिक सत्यापन कराया जा चुका है। सूची भेजकर जांच के निर्देश दिए गए उन्होंने बताया कि सभी जिलाधिकारियों (डीएम), मुख्य विकास अधिकारियों (सीडीओ) और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को संदिग्ध कार्डों की सूची भेजकर जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान एक कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर एसटीएफ की रिपोर्ट के आधार पर उसे हटा दिया गया है।  

भारत टैक्सी ने ओला-उबर को दी चुनौती, दिल्ली में रोजाना 5,500 राइड्स, जानें आपके शहर में कब आएगी

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली में नई सरकारी कैब सर्विस Bharat Taxi की शुरुआत हो चुकी है. कोऑपरेटिव मॉडल पर बेस्ड भारत टैक्सी ने अपने सॉफ्ट लॉन्च में ही लोगों और ड्राइवरों का भरोसा जीत लिया है. अब इस सरकारी टैक्सी सर्विस को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने की तैयारी हो रही है. ताकि देश के अन्य राज्यों में भी लोगों को किफायती राइड की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके. सहकारिता मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, भारत टैक्सी को जनवरी के अंत तक दिल्ली और अन्य शहरों में आधिकारिक रूप से लॉन्च कर दिया जाएगा. दिसंबर की शुरुआत में हुए पायलट प्रोजेक्ट के दौरान इस सेवा को काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. इसी उत्साह को देखते हुए सरकार ने अब इसके फुल लॉन्च का फैसला लिया है. इसके बाद इसे अन्य शहरों में भी शुरू करने की योजना है. हर रोज 5,500 राइड भारत टैक्सी को 2 दिसंबर 2024 को दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था. सहकारिता मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी पंकज कुमार बंसल ने पीटीआई को दिए अपने बयान में बताया कि, "सॉफ्ट लॉन्च के दौरान इस सेवा को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है. हर दिन औसतन करीब 5,500 राइड्स दर्ज की जा रही हैं, जिनमें से लगभग 4,000 राइड्स एयरपोर्ट से और 1,500 राइड्स शहर के अन्य इलाकों से होती हैं. इसमें कैब, ऑटो और बाइक तीनों सेवाएं शामिल हैं." 1.4 लाख से ज्यादा ड्राइवर रजिस्टर्ड भारत टैक्सी ऐप पर अब तक 1.4 लाख से ज्यादा ड्राइवर रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं. यह आंकड़ा बताता है कि ड्राइवर इस सहकारी मॉडल को पसंद कर रहे हैं. खास बात यह है कि इस प्लेटफॉर्म पर ड्राइवरों को किसी तरह का कमीशन नहीं देना होता है. सरकार ने पहले ही कहा था कि, इस कोऑपरेटिव टैक्सी सर्विस में ड्राइवरों को उनके हक का पूरा पैसा मिलेगा. 8 सरकारी संस्थाओं का साथ सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड को देश की 8 बड़ी सहकारी संस्थाओं के सहयोग से ऑपरेट किया जा रहा है. इनमें अमूल, इफको, कृभको, नाफेड, एनडीडीबी, एनसीईएल, एनसीडीसी और नाबार्ड शामिल हैं. कंपनी के बोर्ड में ड्राइवरों के दो निर्वाचित प्रतिनिधि भी शामिल हैं, जिससे ड्राइवरों के जरूरत की बातें या उनकी डिमांड सीधे सरकार तक पहुंचती है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मार्च 2024 में संसद में इस सहकारी टैक्सी सेवा की घोषणा की थी. इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि कमर्शियल वाहन ड्राइवरों की निजी कंपनियों पर निर्भरता कम हो और उन्हें उनकी मेहनत की पूरी कमाई मिले. उस वक्त अमित शाह ने कहा था कि, "इस सहकारी टैक्सी प्लेटफॉर्म से होने वाला मुनाफा किसी धन्नासेठ के पास नहीं जाएगा. ये मुनाफा टैक्सी ड्राइवर के पास जाएगा." भारत टैक्सी ऐप में मोबाइल से राइड बुकिंग, ट्रांसपैरेंट फेयर, रियल टाइम व्हीकल ट्रैकिंग, मल्टी लैंग्वेज सपोर्ट और 24 घंटे कस्टमर केयर जैसी सुविधाएं दी गई हैं. जीरो कमीशन मॉडल के तहत ड्राइवर अपनी पूरी कमाई अपने पास रख सकते हैं और सहकारी मुनाफा सीधे ड्राइवरों में बांटा जाता है. यह प्लेटफॉर्म मेट्रो रेल जैसी ट्रांजिट सेवाओं से भी जुड़ा हुआ है, जिससे यूजर एक ही ऐप पर कई तरह के सफर बुक कर सकते हैं. यात्रियों और ड्राइवरों की सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस के साथ भी साझेदारी की गई है. कैसे डाउनलोड करें Bharat Taxi ऐप भारत टैक्सी मोबाइल ऐप एंड्रॉयड और आईओएस दोनों यूजर्स के लिए उपलब्ध है. इसके आधिकारिक मोबाइल ऐप को यूजर गूगल प्ले स्टोर और आईफोन ऐप स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं. यहां यह ध्यान देना जरूरी है कि, भारत टैक्सी का वही ऐप डाउनलोड करें जो सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा जारी किया गया है. Bharat Taxi के नाम से ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर पर कुछ और कैब सर्विस एप्लीकेशन मौजूद हैं. सही ऐप चुनने के लिए आप उपर दिखाए गए तस्वीर से मोबाइल ऐप के लोगो को मैच करवा सकते हैं. कैसे होगी बुकिंग कैब बुकिंग की प्रक्रिया भी अन्य राइड-हेलिंग सर्विस प्रोवाइर्ड की ही तरह आसान है. यूजर को ऐप डाउनलोड करने के बाद अपना मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा. इसके बाद बताए गए निर्देशों का पालन करते हुए आगे बढ़िए, इसके बाद एक ओटीपी आएगा जिसे दर्ज करने के बाद आप भारत टैक्सी ऐप सेवा का लाभ उठा सकेंगे. इसमें मेट्रो, रेंटल और इंटरसिटी राइड की भी सुविधा दी जा रही है. इसके अलावा यूजर को नॉन-एसी कैब, एसी कैब, बाइक टैक्सी, एस्ट्रा लार्ज (XL) कैब, भारत ट्रांजिट या इनमें से किसी भी सेवा को चुनने की आजादी है. हालांकि सरकार का दावा है कि, ये सबसे किफायती राइड्स उपलब्ध कराएगी, लेकिन पायलट प्रोजेक्ट को शुरू किए जाने के बाद कुछ यूजर्स ने शिकायत की थी कि, ओला-उबर के मुकाबले भारत टैक्सी में राइड्स थोड़ी महंगी हैं.   

ओडिशा के मयूरभंज में भीषण दुर्घटना, बस-मोटरसाइकिल भिड़ंत में 3 की जान गई

भुवनेश्वर मयूरभंज जिले के रायरंगपुर टाउन थाना क्षेत्र में शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा रानी बांध के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-220 पर हुआ, जहां एक बस और मोटरसाइकिल की आमने-सामने टक्कर हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ‘श्री दुर्गा’ नामक बस रायरंगपुर से जशीपुर की ओर जा रही थी। इसी दौरान विपरीत दिशा से तेज रफ्तार में आ रही मोटरसाइकिल पर सवार तीन युवक एक ट्रक को ओवरटेक करने का प्रयास कर रहे थे। ओवरटेक के दौरान बाइक सवार ने नियंत्रण खो दिया और मोटरसाइकिल सीधे सामने से आ रही बस से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों युवक उछलकर सड़क पर गिर पड़े। मोटरसाइकिल समेत तीनों बस के नीचे फंस गए और कुचल दिए गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने पर रायरंगपुर टाउन पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। समाचार लिखे जाने तक मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।