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पाकिस्तान को दो टूक: आतंकवाद और जल साझा करना संभव नहीं— एस. जयशंकर

चेन्नई भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर तमिलनाडु के आईआईटी मद्रास में आयोजित फायरसाइड चैट कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने के लिए चेन्नई पहुंचे। कार्यक्रम में संबोधन के दौरान उन्होंने बांग्लादेश में उनके हालिया दौरे का जिक्र किया। एस जयशंकर खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत की ओर से शामिल होने के लिए ढाका गए थे। इसे लेकर उन्होंने कहा कि अगर आपका कोई पड़ोसी आपके साथ अच्छा है और कोई नुकसान नहीं पहुंचा रहा है, तो आप उसके साथ संबंध आगे बढ़ाते हैं। वहीं उन्होंने पाकिस्तान को लेकर भी बड़ा बयान दिया। भारत की पड़ोस नीति के बारे में एस. जयशंकर ने कहा, "मैं दो दिन पहले बांग्लादेश में था। हमें कई तरह से बहुत सारे पड़ोसी मिले हैं। अगर आपका कोई पड़ोसी अच्छा है या नुकसान नहीं पहुंचा रहा है, तो आप स्वाभाविक रूप से उसके साथ संबंध बनाते हैं। भारत ऐसे पड़ोसी की मदद करता है, स्वाभाविक रूप से। हमारे ज्यादातर पड़ोसियों को वैक्सीन की पहली खेप भारत से मिली।" बांग्लादेश में इस साल फरवरी में चुनाव होने वाला है। इसे लेकर विदेश मंत्री ने कहा कि हम बांग्लादेश को उनके चुनाव में शुभकामनाएं देते हैं, और हम उम्मीद करते हैं कि एक बार चीजें ठीक हो जाने पर, अच्छे पड़ोसी का रिश्ता जारी रहेगा। वहीं, उन्होंने यूक्रेन विवाद को लेकर कहा, "इस वजह से कई दिक्कतें थीं। हमने पड़ोसियों को खाने और दूसरी चीजों से मदद की। श्रीलंका में बहुत बड़ा आर्थिक संकट था, हमने चार बिलियन डॉलर की मदद की, अच्छे पड़ोसी यही करते हैं। श्रीलंका में एक तूफान आया, हम उसी दिन वहां पहुंचे और सभी बचाव कार्य किए।" पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए एस जयशंकर ने कहा, "हमें अपने लोगों को आतंकवादियों से बचाने का हक है। हम अपनी रक्षा के लिए जो कुछ भी कर सकते हैं, करते हैं। लेकिन अगर आपके यहां दशकों से आतंकवाद है, तो आपके पास अच्छा पड़ोसी नहीं हो सकता। आप ऐसे किसी व्यक्ति के साथ अच्छे पड़ोसी वाले संबंध नहीं रख सकते और पानी साझा नहीं कर सकते जो आतंकवाद जारी रखे हुए है।"

पाक ड्रोन नेटवर्क पर बड़ा प्रहार: श्रीगंगानगर बॉर्डर से 20 करोड़ की हेरोइन बरामद

श्रीगंगानगर जिले की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की नापाक गतिविधियां लगातार जारी हैं। गुरुवार देर रात सीमा पर बीएसएफ और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य की हेरोइन जब्त की है। मामला पाकिस्तान की ओर से भेजे गए एक ड्रोन से जुड़ा है, जो भारतीय सीमा में घुसकर हेरोइन की खेप गिराने के बाद वापस लौटने का प्रयास कर रहा था, लेकिन सफल नहीं हो सका। ड्रोन श्रीगंगानगर जिले के रावला थाना क्षेत्र के गांव 15 केएनडी के पास सीमा से सटे खेत में गिर गया। सूचना मिलते ही पुलिस और बीएसएफ ने संयुक्त ऑपरेशन चलाकर ड्रोन को कब्जे में ले लिया। कार्रवाई के दौरान तीन संदिग्ध व्यक्तियों को भी हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है। अनूपगढ़ के सीओ प्रशांत कौशिक ने बताया कि ड्रोन से गिराए गए चार पैकेट बरामद किए गए हैं, जिनमें कुल चार किलोग्राम से अधिक हेरोइन पाई गई है। प्रारंभिक जांच में इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 20 करोड़ रुपये आंकी गई है। फिलहाल सभी पैकेट जब्त कर लिए गए हैं और पूरे इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। आशंका है कि पंजाब से जुड़े ड्रग माफिया के गुर्गे इस खेप की डिलीवरी लेने के लिए इलाके में सक्रिय हो सकते हैं। वहीं पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने बताया कि ड्रोन उसी स्थान पर गिरा, जहां हेरोइन की खेप गिराई गई थी और उसे जब्त कर लिया गया है। बीएसएफ की मदद से आसपास के खेतों और संभावित इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। ड्रोन की उड़ान दिशा, रूट और तकनीकी पहलुओं की भी गहन जांच की जा रही है।

न्यायिक मोड़ का वर्ष 2026: सुप्रीम कोर्ट में तलाक-ए-हसन सहित कई संवेदनशील मुद्दों पर फैसला संभव

नई दिल्ली नए साल 2026 में कई ऐसे अहम और संवेदनशील मामले हैं, जिन पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगी। इन मामलों पर कोर्ट का क्या फैसला होगा, इसका भी हर कोई इंतजार कर रहा है। ये मामले समाज, पर्यावरण और आम नागरिकों के लिए काफी अहम हैं। दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण हो या एसिड अटैक जैसे जघन्य अपराध, चुनावी प्रक्रिया की वैधता से जुड़ा एसआईआर मामला हो या तलाक-ए-हसन जैसी सामाजिक प्रथा, इन सभी मुद्दों पर इस साल सुप्रीम कोर्ट सुनवाई होगी। कुल मिलाकर, 2026 में सुप्रीम कोर्ट में कई ऐसे मामले हैं, जिनके फैसले न केवल न्यायिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व के लिहाज से भी बेहद अहम माने जा रहे हैं। दिल्ली प्रदूषण पर सुनवाई: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की गंभीर स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। तमाम सरकारी उपायों और प्रतिबंधों के बावजूद हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो पा रहा है। इस पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अब वह इस मामले में हर महीने सुनवाई करेगा ताकि हालात की समीक्षा की जा सके और जरूरी कदम उठाए जा सकें। वर्ष 2026 में दिल्ली प्रदूषण से जुड़े मामले में नियमित और निरंतर सुनवाई प्रस्तावित है। एसआईआर मामला: कई राज्यों में चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) से जुड़े निर्णय की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। अदालत ने तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल में एसआईआर के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तारीखें तय कर रखी हैं। इस मामले में विस्तृत बहस और सुनवाई होने की संभावना है, जिससे चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों से जुड़े अहम सवालों पर फैसला आ सकता है। एसिड अटैक मामला: एसिड अटैक जैसे अमानवीय अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख सख्त बना हुआ है। 11 दिसंबर को हुई पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि एसिड अटैक में शामिल व्यक्ति समाज, आम नागरिकों और कानून के शासन के लिए गंभीर खतरा हैं। कोर्ट ने संकेत दिए थे कि ऐसे अपराधियों पर कठोर शर्तें लागू की जानी चाहिए। इस मामले में 2026 में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई आगे बढ़ेगी। तलाक-ए-हसन: यह वह प्रथा है जिसमें एक मुस्लिम पुरुष तीन महीनों तक हर महीने एक बार 'तलाक' कहकर विवाह समाप्त कर सकता है। पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रथा पर कड़ा सवाल उठाते हुए कहा था कि एक सभ्य समाज में ऐसी व्यवस्था कैसे स्वीकार्य हो सकती है। इस मुद्दे पर भी शीर्ष अदालत में अहम सुनवाई होने वाली है। उन्नाव रेप केस: इस केस में दोषी ठहराए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को लेकर कानूनी लड़ाई अभी जारी है। सीबीआई ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है जिसमें 23 दिसंबर को सेंगर को जमानत दी गई थी। इसके बाद सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सेंगर की जमानत पर रोक लगा दी है। 2026 में इस मामले में भी शीर्ष अदालत में सुनवाई होगी।

PoK में दोबारा भड़का विरोध प्रदर्शन, पाकिस्तान सरकार से नाराज़ जनता

नई दिल्ली पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में फिर से शहबाज सरकार के खिलाफ विरोध की भावनाएं धधक रही हैं। पीओके की जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी और सरकार के बीच बातचीत रद्द हो गई है। ऐसे में क्षेत्र में अक्टूबर 2025 के समय में लंबे विरोध और हिंसा के बाद जो शांति आई थी, वह फिर से जा सकती है। सितंबर 2025 में, पीओके में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे, जिस दौरान कई संगठनों ने विकास से जुड़ी कई मांगें रखी थीं। पाकिस्तान सरकार ने दखल दिया और उनकी सभी मांगें पूरी करने पर सहमति जताई थी। हालांकि, अब कमेटी ने सरकार पर दिखावा करने का आरोप लगाया और कहा कि एक भी मांग पूरी नहीं की गई है। कमेटी ने पाकिस्तानी सरकार के साथ किसी भी तरह की बातचीत करने से इनकार कर दिया। ऐसे में एक बार फिर विरोध प्रदर्शन शुरू होने के आसार नजर आ रहे हैं। एक मूल्यांकन में अनुमान लगाया गया है कि विरोध प्रदर्शन पिछली बार से भी बड़ा होने की संभावना है। यह पहली बार नहीं है, जब पाकिस्तान सरकार अपनी बात से पलटी है। इससे इलाके के लोग बहुत निराश हैं। पीओके के प्रति सरकार का रवैया वही है जो बलूचिस्तान में देखने को मिलता है। लंबे समय से पीओके और बलूचिस्तान इलाकों के लोग सरकार और सेना के बड़े अधिकारियों पर भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाते आ रहे हैं। उनका कहना है कि उनके संसाधनों का इस्तेमाल करके पाकिस्तान के बड़े शहरों में सभी विकास के काम किए जाते हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोगों का आरोप है कि पाकिस्तानी सरकार यहां के विकास को बहुत नजरअंदाज करती है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी ने अक्टूबर में सरकार के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते पर हस्ताक्षर करने के दौरान यह तय हुआ था कि कमेटी और सरकार विकास की समीक्षा करने के लिए हर 15 दिन में मीटिंग करेंगे, लेकिन पिछले तीन महीनों में इस सिलसिले में सिर्फ तीन बार बैठकें हुई हैं। इसकी वजह से कमेटी ने सरकार पर दिखावा करने का आरोप लगाया। इसके अलावा, पाक सरकार ने कई कमेटी सदस्यों के नाम एग्जिट कंट्रोल लिस्ट (ईसीएल) से हटाने का भी वादा किया था और भरोसा दिलाया गया था कि उनके खिलाफ एफआईआर वापस ले ली जाएंगी और रिफ्यूजी सीटों से जुड़े मसलों को सुलझाया जाएगा। हालांकि, एक भी मांग पूरी नहीं हुई और अब इससे कमेटी के सदस्य नाराज हैं। कमेटी का कहना है कि 3 अक्टूबर 2025 के समझौते के बाद से सरकार ने जो कुछ भी किया है, वह सब बेकार है। रिफ्यूजी सीटों के मसलों को सुलझाने के लिए सरकार ने एक कमेटी बनाई थी। हालांकि, कमेटी सिर्फ खास मसलों को ही देखेगी, लेकिन पीओके कमेटी चाहती है कि सभी मसलों को एक साथ सुलझाया जाए। कमेटी ने आगे कहा कि सिर्फ कुछ कदम उठाने से काम नहीं चलेगा और इस बार वह सरकार के भरोसे पर यकीन नहीं कर रही है। वहीं, भारतीय अधिकारियों का कहना है कि ये हालात हैरान करने वाले नहीं हैं और पीओके के मामले में पाकिस्तान का हमेशा यही रुख रहा है। अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर मसलों को तत्काल नहीं सुलझाया गया, तो विरोध प्रदर्शन तेज हो सकते हैं और भारत में भी इसके फैलने से इनकार नहीं किया जा सकता। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ही सब कुछ तय करती है। उसने इलाके में बिचौलियों से निपटने के लिए कई सेवानिवृत्त सेना अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है। उन्हें पीओके में मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल करने का काम सौंपा गया है। लोगों ने इन अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि वे सारा फंड पाकिस्तान के मुख्य हिस्सों में भेज रहे हैं, जबकि इलाके में कोई सुधार नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा, इन संसाधनों से मिलने वाला बहुत सारा फंड सेना के अधिकारी हड़प लेते हैं। इन अधिकारियों पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। इन मुद्दों ने सेना के अंदर भी हलचल मचा दी है। हाल ही में, गार्डियंस ऑफ ऑनर के एक लेटर में असीम मुनीर पर नाकाबिलियत, जुल्म और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था। एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान सरकार लंबे समय से झूठे भरोसे देकर पाकिस्तान के लोगों से झूठ बोलती आ रही है। यह बस कुछ ही समय की बात है, जब पीओके के हालात पाकिस्तान में बैठे लोगों के कंट्रोल से बाहर हो जाएंगे।

दक्षिण की रणनीति: 2026 की संभावनाएँ, केरल पर फोकस और तमिलनाडु से कनेक्ट की कवायद

नई दिल्ली वर्तमान में देश के 21 राज्यों में सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हौसले भविष्य के लिए बुलंद हैं। साल 2025 में हवा का रुख बदला तो दशकों बाद दिल्ली भाजपा की हो गई। कुछ महीनों में भाजपा ने बिहार को भी मजबूत कर लिया और फिर साल बीतते-बीतते केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम भाजपा के रंग में रंग गई। यह जीत सिर्फ एक राज्य या शहर तक सीमित नहीं, बल्कि 2026 में दक्षिण भारत की राजनीति में बड़े बदलाव की आहट मानी जा रही है। पश्चिम बंगाल के अलावा दक्षिण भारत के राज्यों केरल और तमिलनाडु में साल 2026 में चुनाव हैं। उत्तर भारत में भाजपा का परचम पहले से ही लहरा रहा है, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और झारखंड को छोड़ दें तो पार्टी की पकड़ मजबूत बनी हुई है। अब पार्टी की नजरें दक्षिण भारत पर टिकी हैं, वह क्षेत्र जहां कर्नाटक को छोड़कर अब तक सत्ता का स्वाद नहीं मिला। बिहार जीतते ही प्रधानमंत्री मोदी ऐलान कर चुके हैं कि अगला मिशन पश्चिम बंगाल है, लेकिन तमिलनाडु और खासकर केरल में भाजपा की जमीनी तैयारियां काफी कुछ बयां करती हैं। तिरुवनंतपुरम की जीत इसका ताजा उदाहरण है। पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु तीनों विधानसभाओं का कार्यकाल मई में पूरा होगा। 7 मई वर्तमान पश्चिम बंगाल विधानसभा के कार्यकाल का आखिरी दिन होगा, जबकि तमिलनाडु विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 10 मई और केरल विधानसभा का 23 मई है। लिहाजा, इससे पहले नई विधानसभा चुनी जानी है। चुनावों के मद्देनजर पश्चिम बंगाल में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के दौरे शुरू हो चुके हैं, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हालिया यात्रा भी शामिल है। 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने 'तमिल भाषा' का जिक्र करके तमिलनाडु को कनेक्ट किया। उन्होंने 28 दिसंबर को 'मन की बात' कार्यक्रम में काशी के स्कूलों में तमिल भाषा सिखाने के लिए चलाए जा रहे अभियान की बात की। वहीं, तिरुवनंतपुरम की जीत को भाजपा की 'दक्षिणी दस्तक' के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले चुनावी समीकरणों को नई दिशा दे सकती है।

FASTag Alert: 1 फरवरी से लागू होगा नया Toll Tax नियम, जानिए क्या बदलेगा आपके लिए

नई दिल्ली भारत में National Highways Authority of India (NHAI) ने कार मालिकों के लिए FASTag प्रक्रियाओं में बड़ा सुधार किया है। सरकार ने घोषणा की है कि 1 फरवरी, 2026 से कार, जीप और वैन के लिए जारी किए जाने वाले नए FASTag पर Know Your Vehicle (KYV) वेरिफिकेशन प्रक्रिया को पूरी तरह से हटाया जाएगा, ताकि वाहन चालकों को टैग जारी करने और उपयोग के बाद होने वाली देरी, अनावश्यक फ़ॉलो-अप और शिकायतों से राहत मिले। KYV पहले FASTag जारी हो जाने के बाद वाहन की पुष्टि के लिए आवश्यक था, लेकिन अक्सर इससे समस्याएं उत्पन्न होती थीं valid दस्तावेज होने के बावजूद कई चालकों को बार-बार दस्तावेज अपलोड करने, फोटो भेजने और टैग हर बार सत्यापित करवाने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। अब NHAI ने सारी जांच और सत्यापन टैग सक्रिय होने से पहले बैंकों की जिम्मेदारी बना दी है, जिससे टैग जारी करने की प्रक्रिया तेज़, सरल और बिना रुकावट वाली हो जाएगी। KYV क्या था और क्यों लागू हुआ? Know Your Vehicle (KYV) FASTag प्रक्रिया का एक verification step था, जिसमें टैग जारी होने के बाद वाहन के विवरण की पुष्टि की जाती थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि FASTag सही वाहन नंबर से जुड़ा हुआ है और गलत या duplicate टैग इस्तेमाल नहीं हो रहा। अब क्या बदल गया? KYV हट गया है: 1 फरवरी, 2026 के बाद नए कार FASTag पर KYV अनिवार्य नहीं होगा। सभी वेरिफिकेशन अब टैग एक्टिवेशन से पहले किया जाएगा, जिससे post-activation validation की जरूरत खत्म हो जाएगी। सारे vehicle validation बैंक करेंगे पहले अब टैग जारी करने से पहले VAHAN database के जरिये वाहन विवरण की जांच करना बैंक की जिम्मेदारी होगी। अगर VAHAN में डिटेल उपलब्ध नहीं है, तो बैंक RC (Registration Certificate) का उपयोग करेगा। पुराने FASTag धारकों को KYV नहीं चाहिए पहले से जारी FASTag पर अब KYV नियमित प्रक्रिया नहीं होगी। केवल उन मामलों में KYV की आवश्यकता होगी जब कोई specific complaint आए जैसे TAG loose होना, गलत issuance हो जाना, misuse या गलत vehicle से लिंक होना। नए नियमों का असर तेज FASTag प्रक्रिया टैग खरीदते ही पहचान और डिटेल का verification पहले पूरा हो जाएगा, जिससे आप सीधे ही टैग का उपयोग कर सकेंगे। कोई बार-बार डॉक्यूमेंट जमा नहीं करना चाहिए KYV हटने के कारण आपको बार-बार दस्तावेज अपलोड या सम्पर्क करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। Complaint आधारित KYV ही बचेगा अगर किसी वाहन पर कोई गंभीर समस्या आती है, तो ही नयी जांच होगी, जैसे अवैध टैग, loose TAG या misuse।  

नामांकन वापसी पर बगावत: नागपुर में BJP उम्मीदवार को समर्थकों ने ही घर में बंद किया

महाराष्ट्र महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों के लिए नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख पर गहमागहमी देखने को मिली। इस बीच, नागपुर शहर में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी के एक उम्मीदवार के समर्थकों ने उन्हें घर में बंद कर दिया, ताकि वह अपना नॉमिनेशन वापस न ले सकें। भाजपा ने अपने एबी फॉर्म (नामांकन दाखिल करने के लिए आवश्यक दस्तावेज) में वार्ड 13 (D) से विजय होले और किशन गावंडे को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में पार्टी ने गावंडे से चुनावी मैदान से हटने को कहा।   इस फैसले से भाजपा कार्यकर्ताओं का एक वर्ग नाराज हो गया जो वार्ड 13 (D) के अंतर्गत आने वाले हजारीपहाड़ इलाके से प्रतिनिधित्व चाहता था। गावंडे के समर्थकों ने उन्हें घर में बंद कर दिया, ताकि वह निर्वाचन अधिकारी से मिलकर अपना नामांकन वापस न ले सकें। इस दौरान खूब नारेबाजी भी की गई। भाजपा के विधान परिषद सदस्य परिणय फुके और स्थानीय नेता मौके पर पहुंचे और कार्यकर्ताओं को समझाया, जिसके बाद गावंडे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। भाजपा कार्यकर्ता किस बात पर नाराज किशन गावंडे ने कहा, 'इलाके के भाजपा कार्यकर्ता चाहते थे कि मैं चुनाव लड़ूं, इसलिए वे नाराज हो गए। हम पार्टी नेतृत्व के फैसले को समझते हैं और इसी वजह से मैंने नामांकन वापस ले लिया।' नागपुर महानगरपालिका समेत राज्य के 29 नगर निकायों के चुनाव 15 जनवरी को होंगे और मतगणना अगले दिन की जाएगी। नागपुर नगर निगम में 151 सीट हैं। भाजपा 143 सीट पर चुनाव लड़ रही है जबकि शिवसेना 8 सीट पर चुनाव लड़ रही है। अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी 90 से अधिक सीट पर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस बिना किसी गठबंधन के सभी 151 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (शरदचंद्र पवार) 79 सीट पर चुनाव लड़ रही है।  

फ्लाइट से कम खर्च में लंबी दूरी का सफर! आ रही है पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन

नई दिल्ली रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि गुवाहाटी और कोलकाता के बीच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का टिकट किराया हवाई यात्रा के मुकाबले काफी कम होगा। देश की पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने के आखिर में करेंगे। वैष्णव ने गुरुवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "वंदे भारत स्लीपर में 3-AC का किराया लगभग ₹2,300, 2-AC का लगभग ₹3,000 और 1-AC का लगभग ₹3,600 होगा, जिसमें खाना भी शामिल होगा। किराया मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर तय किया गया है।" उन्होंने कहा कि ट्रेन अगले 15-20 दिनों में चलना शुरू हो जाएगी, शायद 18 जनवरी के आसपास, क्योंकि प्रधानमंत्री को इसके लिए अनुरोध भेजा गया है। वैष्णव ने कहा, "मैं अगले दो-तीन दिनों में सही तारीख की घोषणा करूंगा।'' उन्होंने इस डेवलपमेंट को देश के लिए एक बड़ा मील का पत्थर बताया। खबर के मुताबिक, वैष्णव ने कहा कि गुवाहाटी और कोलकाता के बीच 16 कोच वाली ट्रेन की क्षमता 823 यात्रियों की है और इसकी डिजाइन स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा है। हालांकि, यह दोनों शहरों के बीच 120-130 किमी प्रति घंटे की स्पीड से चलेगी, जिसमें असम और पश्चिम बंगाल के खास जिले शामिल होंगे। ट्रेन के बारे में बताते हुए वैष्णव ने कहा कि गुवाहाटी-कोलकाता हवाई यात्रा का किराया लगभग ₹6,000 से ₹8,000 है। हालांकि, रेल मंत्री ने कहा कि दोनों राज्यों के बीच नई वंदे भारत ट्रेन से लागत कम होगी क्योंकि प्रति किलोमीटर किराया 1 AC के लिए ₹3.8 प्रति किमी, 2AC के लिए ₹3.1 प्रति किमी और 3 AC के लिए ₹2.4 होगा। 16 कोच वाली ट्रेन में 11 3-AC कोच, चार 2-AC कोच और एक 1-AC कोच हैं। कुल 823 बर्थ में से 611 3-AC में, 188 2-AC में और 24 1-AC में हैं।  

ED की बड़ी कार्रवाई: गुजरात के IAS अधिकारी राजेंद्र कुमार पटेल गिरफ्तार, जानिए आरोप

गांधीनगर गुजरात के IAS अधिकारी राजेंद्र कुमार पटेल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार कर लिया है। ED की तरफ से हुई ये गिरफ्तारी रिश्वत से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई है। मामला 1500 करोड़ रुपये की जमीन घोटाले से जुड़ा बताया जा रहा है। शुक्रवार को ईडी की तीन टीमें गांधीनगर स्थित उनके आवास पर पहुंची और पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया।   इससे पहले भी हुई थी छापामारी इससे पहले भी टीम ने 20 और 21 दिसंबर को सुरेंद्रनगर जिले में छापामीरी की थी। तब कलेक्टर राजेंद्र पटेल के अलावा उनके पीए जयराजसिंह झाला, डिप्टी तहसीलदार चंद्रसिंह मोरी और क्लर्क मयूरसिंह गोहिल के घर छापा मारा था। मोरी के घर से 60 लाख से अधिक का कैश भी बरामद हुआ था, जो उसने अपने बेडरूम में छिपाकर रखा था। अधिकारी के पास मिली आय से अधिक संपत्ति राजेंद्र कुमार पटले गुजरात के अहमदाबाद जिले के रहने वाले हैं। वह 2015 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। सिविल सर्विस परीक्षा पास करने से पहले उन्होंने बीडीएस और पब्लिक पॉलिसी में एमए किया है। ईडी की जांच में पता चला है कि राजेंद्र पटेल के पास ज्ञात आय से कहीं ज्यादा की संपत्ति थी। उनके पास पांच करोड़ से अधिक की चल-अचल संपत्तियां पाई गई हैं। छीन ली गई थी कलेक्टर की कुर्सी पटेल पर पहले से जांच चल रही थी। भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में पटेल के खिलाफ पहले से ही जांच चल रही थी। ईडी की छापामारी के बाद पटेल से कलेक्टर की कुर्सी छीन ली गई थी। वो सुरेंद्रनगर कलेक्टर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। फिलहाल उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग में तैनात कर दिया गया था। बड़े पैमाने पर हो रहा था घोटाला अपनी जांच में, जांच एजेंसी ने पाया कि सुरेंद्रनगर कलेक्टर ऑफिस में सरकारी कर्मचारियों द्वारा सिस्टमैटिक एक्सटॉर्शन, मांग और गैर-कानूनी तरीके से पैसे इकट्ठा करके बड़े पैमाने पर करप्शन और क्राइम से पैसे बनाए जा रहे थे। मोरी पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया और एप्लीकेशन को जल्दी अप्रूवल देने के लिए एप्लीकेंट्स से रिश्वत ली। ED ने कहा था कि रिश्वत की रकम स्क्वायर मीटर के हिसाब से कैलकुलेट की गई थी।  

ईरान संकट पर ट्रंप कूदे तो खामेनेई का सख्त अल्टीमेटम—नतीजे विनाशकारी होंगे

तेहरान डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी पर ईरान की प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान ने स्पष्ट कहा है कि अगर ईरान के आंदोलन में डोनाल्ड ट्रंप कूदे तो तबाही हो जाएगी। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार ने शुक्रवार को बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हस्तक्षेप से पूरे क्षेत्र में अव्यवस्था फैल जाएगी। गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच ईरानी शासन को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों का दमन किया गया, तो अमेरिका मूकदर्शक बना नहीं रहेगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जारी एक संदेश में स्पष्ट किया कि अगर ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई या उनकी हत्या की, तो अमेरिका हस्तक्षेप करने के लिए पूरी तरह तैयार है। सड़क पर उतर चुकी है जनता गौरतलब है कि ईरान की खराब अर्थव्यवस्था से आक्रोशित जनता सड़कों पर उतर आई है। गुरुवार को ये प्रदर्शन प्रांतों में भी फैल गए, जहां सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कम से कम सात लोग मारे गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। प्रदर्शन में सात लोगों के मारे जाने से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि देश की सरकार प्रदर्शनकारियों से सख्ती से निपटने के मूड में है। लेकिन प्रदर्शनकारी भी अड़े हुए हैं।   2022 के बाद सबसे बड़ा प्रदर्शन राजधानी तेहरान में प्रदर्शन भले ही धीमे पड़ गए हों, लेकिन अन्य जगहों पर इनमें तेजी आई है। बुधवार को दो और बृहस्पतिवार को पांच लोगों की मौत चार शहरों में हुई। इन चारों शहरों में लूर जातीय समुदाय की बहुलता है। यह विरोध प्रदर्शन 2022 के बाद से ईरान के सबसे बड़े प्रदर्शन के रूप में उभरा है। वर्ष 2022 में पुलिस हिरासत में 22 वर्षीय महसा अमिनी की मौत के बाद देशभर में प्रदर्शन हुए थे। अर्थव्यवस्था को लेकर सबसे अधिक हिंसा ईरान के लोरेस्टान प्रांत के अजना शहर में देखी गई। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में वहां सड़कों पर जलती हुई वस्तुएं दिखाई दे रही हैं साथ ही गोलियों की आवाजें गूंजती हैं। अर्धसरकारी समाचार एजेंसी फ़ार्स ने तीन लोगों के मारे जाने की खबर दी। सुधार समर्थक मीडिया संस्थानों सहित अन्य मीडिया ने फार्स के हवाले से ही घटनाओं का जिक्र किया है।