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मीर यार बलूच ने जयशंकर को चेतावनी दी, ‘बलूचिस्तान में चीन की सेना की घुसपैठ हो सकती है’

नई दिल्ली बलूचिस्तान के एक नेता ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को एक खुला पत्र लिखा है. इस चिट्ठी में बलूच नेता ने चेतावनी देते हुए कहा कि चीन आने वाले महीनों में बलूचिस्तान में सैन्य बल तैनात कर सकता है, जिससे न केवल इस क्षेत्र में बल्कि भारत के लिए भी एक गंभीर खतरा पैदा होगा.  मीर यार बलूच ने जयशंकर को संबोधित करते हुए एक जनवरी 2026 को लिखे इस पत्र में खुद को बलूचिस्तान का प्रतिनिधि बताते हुए आगाह किया कि अगर बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता सेनाओं को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा, तो चीन वहां अपने सैनिक तैनात कर सकता है. उन्होंने ऐसे किसी भी कदम को भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए खतरा बताया. पत्र में कहा गया कि अगर बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता सेनाओं की क्षमताओं को और मजबूत नहीं किया गया और उन्हें पुराने तौर-तरीकों के अनुसार अनदेखा किया जाता रहा, तो यह पूरी तरह संभव है कि चीन आने वाले कुछ महीनों में बलूचिस्तान में अपनी सैन्य टुकड़ियां तैनात कर दे. उन्होंने कहा कि छह करोड़ बलूच लोगों की इच्छा के बिना बलूचिस्तान की धरती पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान—दोनों के भविष्य के लिए एक अकल्पनीय खतरा और चुनौती होगी. उन्होंने  चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि पाकिस्तान और चीन के बीच रणनीतिक गठजोड़ अब CPEC के उस चरण में पहुंच चुका है, जिसे उन्होंने इसका अंतिम चरण बताया. उनके अनुसार, इससे हालात और अधिक खतरनाक हो गए हैं. उन्होंने भारत और बलूचिस्तान के बीच ठोस और पारस्परिक सहयोग की मांग करते हुए कहा कि दोनों को जिन खतरों का सामना करना पड़ रहा है, वे वास्तविक और तत्काल हैं. मीर यार बलूच ने भारत और बलूचिस्तान के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का भी जिक्र किया. उन्होंने हिंगलाज माता मंदिर जैसे पवित्र स्थलों का हवाला देते हुए इन्हें साझा विरासत का प्रतीक बताया. इस चिट्ठी में उन्होंने मोदी सरकार द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के तहत की गई कार्रवाइयों की सराहना भी की. उन्होंने कहा कि इस अभियान में किस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के ठिकानों को निशाना बनाया गया और यह पहलगाम आतंकी हमले के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा और न्याय के प्रति असाधारण साहस और दृढ़ प्रतिबद्धता का उदाहरण है. आखिरी में मीर यार बलूच ने हमारे दो महान राष्ट्रों के बीच और अधिक मजबूत सहयोग की उम्मीद जताई.

बल्लारी में हिंसा को लेकर सनसनीखेज दावा, विपक्ष के नेता ने कहा– भाजपा विधायक को मारने की थी योजना

बेंगलुरु कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने शुक्रवार को बीजेपी विधायक जी जनार्दन रेड्डी के घर के बाहर हिंसा को साजिश बताया है। उन्होंने दावा किया कि यह रेड्डी की हत्या करने का प्लान था। अशोक ने कहा कि पुलिस पर दबाव डालकर गोलीबारी को मिसफायर बताने को मजबूर किया गया, जबकि एक व्यक्ति की मौत हो गई। यह बैनर विवाद से उपजी झड़प थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक नारा भरत रेड्डी के समर्थकों ने जनार्दन के घर के अंदर बैनर लगाए, जो 3 जनवरी को वाल्मीकि प्रतिमा स्थापना समारोह के लिए थे। विवाद बहस से शुरू होकर हाथापाई, पथराव और गोलीबारी तक पहुंच गया, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज करके भीड़ को तितर-बितर किया।   आर अशोक ने कहा, 'वे खुद गोली चला रहे थे, खुद हत्या कर रहे थे और अब जनार्दन रेड्डी को दोष देना असहनीय है। यह उनकी पहले से बनाई गई साजिश थी।' उन्होंने दावा किया कि अगर गोली रेड्डी की ओर से चली होती तो इसे मिसफायर न कहा जाता। हिंसा के दौरान बीजेपी नेता बी श्रीरामुलू पर हमला भी हुआ। अशोक ने मामले की न्यायिक जांच की मांग की और चेतावनी दी कि यह अन्य जिलों में न फैले। उन्होंने सिद्धारमैया सरकार पर आंध्र प्रदेश जैसी राजनीतिक हिंसा फैलाने का आरोप लगाया। पुलिस ने जनार्दन रेड्डी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। राज्य की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र येडियुरप्पा ने भी घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तलवारें, कुल्हाड़ियां और लाठियां लहराते हुए गुंडागर्दी की। यह बल्लारी में गुंडा राज का स्पष्ट प्रमाण है, जहां थाने कांग्रेस कार्यालय के विस्तार बन गए हैं। कर्नाटक में कांग्रेस शासन के तहत कानून-व्यवस्था चरमरा गई है। वहीं, पुलिस के सीनियर अधिकारी ने कहा कि स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया है और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सभी एहतियाती उपाय किए गए हैं।  

मंदिर में सम्मान मांगना मौलिक अधिकार नहीं, भगवान सर्वोपरि — किस केस में हाईकोर्ट का अहम फैसला

मद्रास मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि किसी भी मंदिर में किसी व्यक्ति को विशेष सम्मान मिलना कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा है कि कोई व्यक्ति या संस्था इसे अपना कानूनी अधिकार नहीं मान सकती। इस दौरान हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए यह भी कहा कि मंदिर में पहला स्थान हमेशा भगवान का ही होता है और भगवान से ऊपर किसी को नहीं रखा जा सकता।   सुनवाई के दौरान जस्टिस एस एम सुब्रमण्यम और जस्टिस सी कुमारप्पन की बेंच ने श्रीरंगम श्रीमठ अंडवन आश्रमम की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए कहा कि भले ही मठों के प्रमुखों को सम्मान देने की परंपरा रही हो, लेकिन इसे कभी भी कानूनी अधिकार नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मंदिर में विशेष सम्मान नहीं मांगा जा सकता। क्या है मामला? यह मामला तमिलनाडु हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त (HR&CE) कानून, 1959 से जुड़ा है। इस मामले में दायर पहली याचिका में यह मांग की गई थी कि मंदिर की परंपराओं में सरकारी दखल ना दिया जाए। याचिका पर एकल पीठ ने फैसला सुनाते हुए था कि परंपरा के मुताबिक सिर्फ पांच मान्यता प्राप्त मठों, कांची कामकोटि पीठम, श्री अहोबिल मठ, श्री वनमामलाई मठ, श्री परकाल जीयर मठ और श्री व्यासराय मठ को ही मंदिर में विशेष सम्मान दिया जाता रहा है। इससे आगे किसी को सम्मान देना विवाद का कारण बन सकता है। इसके बाद श्रीरंगम श्रीमठ अंडवन आश्रमम ने अपील दायर कर कहा कि 1991 के बाद कई बार उसके मठ प्रमुख को भी सम्मान दिया गया, लेकिन बाद में बिना सुनवाई के यह परंपरा बंद कर दी गई। आश्रम की ओर से दलील दी गई कि उन्हें पहले मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया, जिससे वे अपनी बात नहीं रख सके। वहीं HR&CE डिपार्टमेंट ने कोर्ट को बताया कि तय परंपरा के अनुसार सिर्फ उन्हीं पांच मठों को सम्मान दिया जाता है और किसी भी बदलाव के लिए कानून के तहत औपचारिक फैसला जरूरी है। कोर्ट ने खारिज की अर्जी दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि 1991 के बाद कुछ मौकों पर अपीलकर्ता मठ को सम्मान मिला था, लेकिन सिर्फ इससे कोई कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। बेंच ने कहा कि मंदिर में सम्मान देने का मामला HR&CE एक्ट की धारा 63(e) के तहत सक्षम अधिकारी तय करेंगे। कोर्ट ने आश्रम को थोड़ी राहत देते हुए कहा कि वह चाहें तो HR&CE कानून के तहत संबंधित प्राधिकारी के पास अपनी शिकायत रख सकते हैं।  

जयशंकर का पाकिस्तान को चेतावनी, “आतंकवाद फैलाने पर भारत चुप नहीं रहेगा

 चेन्नई विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान को आतंकवाद बढ़ावा देने वाला खराब पड़ोसी बताया है और कहा है कि भारत को अपनी सुरक्षा के लिए पूरा अधिकार है. आईआईटी मद्रास में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा और आतंकवाद से निपटने के तरीके पर किसी बाहरी दबाव या सलाह को स्वीकार नहीं करेगा. विदेश मंत्री ने कहा कि जब कोई पड़ोसी देश लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो भारत को अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा हक है. हम जो जरूरी होगा, वही करेंगे. आप हमसे ये उम्मीद नहीं कर सकते कि हम आपके साथ पानी साझा करें और आप हमारे देश में आतंकवाद फैलाते रहें. विदेश मंत्री ने साफ कहा कि आतंकवाद पर भारत की प्रतिक्रिया क्या होगी, ये फैसला सिर्फ भारत करेगा. उन्होने आगे कहा कि हम अपने अधिकार का इस्तेमाल कैसे करेंगे, ये हमारा फैसला है. कोई हमें ये नहीं बता सकता कि हमें क्या करना चाहिए या क्या नहीं. अपनी सुरक्षा के लिए जो जरूरी होगा, हम करेंगे. पाकिस्तान का नाम लिए बिना एस. जयशंकर ने कहा कि कई देशों को मुश्किल पड़ोसियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन भारत की स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि आतंकवाद को वहां राज्य की नीति की तरह इस्तेमाल किया गया है. अगर कोई देश जानबूझकर और लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो हमारे पास अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है और हम उस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे. उन्होंने सीमा पार आतंकवाद को पानी के बंटवारे जैसे समझौतों से भी जोड़ा. जयशंकर ने कहा कि भारत ने दशकों पहले पानी साझा करने का समझौता किया था लेकिन ऐसे समझौते अच्छे पड़ोसी संबंधों पर टिके होते हैं. उन्होंने कहा कि अगर दशकों तक आतंकवाद चलता रहा, तो अच्छे पड़ोसी वाले रिश्ते नहीं रह सकते. और अगर अच्छे रिश्ते नहीं होंगे, तो उनके फायदे भी नहीं मिल सकते. आप ये नहीं कह सकते कि ‘हमसे पानी भी साझा करो और हम आतंकवाद भी करते रहेंगे.’ ये दोनों बातें साथ नहीं चल सकतीं. गौरतलब है कि भारत-पाकिस्तान के रिश्ते अप्रैल 2025 में उस वक्त और बिगड़ गए, जब पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में कई पर्यटकों की हत्या कर दी थी.

अभय सिंह चौटाला का विवादित बयान: भारत में नेपाल-बांग्लादेश जैसे आंदोलन की बात, BJP का तीखा पलटवार

नई दिल्ली   नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में आंदोलन के जरिए हुए सत्ता परिवर्तन पर भारत में भी कई नेताओं ने दिलचस्पी दिखाई थी। अब इस लिस्ट में भारतीय राष्ट्रीय लोक दल (INLD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला का भी नाम जुड़ गया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि पड़ोसी देशों की तरह भारत में भी एक ऐसा ही आंदोलन होना चाहिए, जिससे वर्तमान में मौजूद केंद्र सरकार को सत्ता से हटाया जा सके। चौटाला के इस बयान के सामने आए के बाद भाजपा हमलावर हो गई है। भाजपा की तरफ से इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया गया।   भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने चौटाला के वीडियो के ऊपर तंज कसते हुए इसे संवैधानिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी 'आंबेडकर के संविधान के खिलाफ जाने की इच्छा' को दर्शाती है। यह दिखाता है कि उनका लोकतंत्र की प्रक्रिया में विश्वास कितना कम है। पूनावाला ने कहा, "वह सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए लोकतंत्र के खिलाफ जाने के लिए तैयार हैं, उनका यह बयान दर्शाता है कि विपक्षी दल राष्ट्रीय हित के ऊपर अपना हित रख रहे हैं।" क्या कहा था चौटाला ने? सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में अभय सिंह चौटाला एक सभा को संबोधित करते हुए नजर आ रहे हैं। इसमें चौटाला ने कहा कि पड़ोसी देशों में युवाओं के नेतृ्त्व में हुए इन प्रदर्शनों को आदर्श बनाकर भारत की वर्तमान सत्ता को हटाना चाहिए। उन्होंने कहा, "श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश में जिस तरह से युवाओं ने सरकार को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया है, भारत में भी हमें उसी तरह से रणनीति बनानी होगी। ऐसी रणनीति जिससे मौजूदा सरकार को सत्ता से हटाया जा सके।" चौटाला के इस बयान के बाद हरियाणा की राजनीति में भी माहौल गर्म हो गया। राज्य के कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने चौटाला के इन बयानों की आलोचना की। अभय सिंह का जिक्र करते हुए बेदी ने उनके परिवार के राजनीतिक इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका यह बयान भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने पूर्व उप प्रधानमंत्री ताऊ देवी लाल की विरासत का हवाला देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संघर्ष का सम्मान किया जाना चाहिए, न कि उसे कमजोर किया जाना चाहिए।  

चीन-पाक की नई साजिश? पाक के इस हिस्से में चीनी फौज, भारत के लिए बजा खतरे का अलार्म

क्वेटा पाकिस्तान के बलूचिस्तान में चीन जल्द ही अपनी सेना तैनात कर सकता है। बलूचिस्तान के बड़े नेता ने इस मामले पर चिंता जताते हुए भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक खत लिखा है। इस चिट्ठी में बलोच नेता मीर यार बलूच ने चेतावनी देते हुए कहा है कि चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। उन्होंने दावा किया है कि चीन अगले कुछ महीनों में ही बलूचिस्तान इलाके में अपनी मिलिट्री फोर्स तैनात कर सकता है।   मीर यार ने बीते गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में एस जयशंकर के नाम एक लिखे एक खुला खत साझा किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बरसों से बलूचिस्तान का शोषण कर रहा है। मीर यार ने लिखा, "बलूचिस्तान के लोग पिछले 79 सालों से पाकिस्तान के सरकारी कब्जे, प्रायोजित आतंकवाद और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन को झेल रहे हैं। अब समय आ गया है कि इस बढ़ती हुई बीमारी को जड़ से खत्म किया जाए, ताकि हमारे देश में शांति आए और संप्रभुता पक्की हो।" पाक-चीन को लेकर जताई चिंता खत में मीर यार बलूच ने कहा कि चीन और पाकिस्तान तेजी से चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के आखिरी स्टेज की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “बलूचिस्तान पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते गठबंधन को बहुत खतरनाक मानता है। चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को उसके आखिरी स्टेज तक पहुंचा दिया है।” बड़े खतरे की आशंका उन्होंने आगे कहा कि इस इलाके में जल्द ही चीन की सीधी मिलिट्री मौजूदगी देखी जा सकती है। मीर यार ने कहा, "अगर बलूचिस्तान की डिफेंस और फ्रीडम फोर्स की क्षमताओं को और मजबूत नहीं किया गया और अगर ऐसे ही नजरअंदाज किया जाता रहा, तो चीन कुछ महीनों के अंदर बलूचिस्तान में अपनी मिलिट्री फोर्स तैनात कर सकता है।" उन्होंने आगे लिखा, “60 मिलियन बलूच लोगों की इच्छा के बिना बलूचिस्तान की धरती पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा और चुनौती होगी।”

उस्मान हादी की हत्या में जमात-ए-इस्लामी का हाथ, साजिश ढाका ऑफिस में हुई तैयार

ढाका  बांग्लादेश की राजनीति को हिला देने वाली शरीफ उस्मान हादी की हत्या को लेकर बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. सूत्रों के हवाले से पता चला है कि हादी की हत्या के पीछे जमात-ए-इस्लामी के एक गुट की भूमिका हो सकती है. सूत्रों का दावा है कि यह कोई बाहरी साजिश नहीं, बल्कि जमात के अंदर चल रही सत्ता और वर्चस्व की लड़ाई का नतीजा है. सूत्रों के मुताबिक, शरीफ उस्मान हादी का राजनीतिक कद लगातार बढ़ रहा था. खासकर युवा वोटरों और छात्रों के बीच उनकी लोकप्रियता जमात के लिए चिंता का कारण बन गई थी. आगामी 12 फरवरी को होने वाले चुनावों से पहले हादी एक बड़ा चुनावी फैक्टर बन चुके थे. उनका असर जमात की पारंपरिक राजनीति और नेतृत्व के लिए खतरे के रूप में देखा जाने लगा था. सूत्रों का दावा है कि हादी को खत्म करने की साजिश ढाका स्थित जमात कार्यालय में रची गई थी. संगठन के भीतर एक धड़ा हादी को पूरी तरह रास्ते से हटाना चाहता था. इसी दौरान कथित तौर पर हत्या की सुपारी को लेकर भी अंदरूनी मतभेद सामने आए. शुरुआती तौर पर एक करोड़ टका में हत्या कराने की बात हुई, लेकिन बाद में रकम को लेकर जमात के भीतर ही खींचतान शुरू हो गई. सूत्रों का कहना है कि एक गुट का मानना था कि इतनी बड़ी राजनीतिक बाधा को हटाने के लिए रकम कम है, जबकि दूसरे गुट ने खर्च कम रखने की बात कही. इसी टकराव के दौरान यह पूरा मामला जमात के भीतर से ही लीक हुआ. दावा यह भी किया जा रहा है कि शूटर को अलग से बड़ी रकम देने पर सहमति बनी थी. हादी की हत्या को भारत से जोड़ा गया इस पूरे घटनाक्रम का एक अहम पहलू यह भी है कि कुछ दिन पहले हादी की हत्या को भारत से जोड़ने की कोशिश की गई थी. यह कहा गया कि आरोपी भारत भाग गए हैं और मेघालय में छिपे हुए हैं. लेकिन बांग्लादेश, इस थ्योरी का कोई ठोस आधार नहीं दे सका. आरोपियों के दुबई भागने की कहानी गढ़ने की कोशिश हुई, लेकिन तब भी कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया गया.  बताया था कि अगर आरोपी विदेश गए भी, तो उसमें यूनुस प्रशासन की मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

तेल और गैस की खोज से बदलेगी पाकिस्तान की तक़दीर? पिछड़े क्षेत्र में बड़ी सफलता का दावा

इस्लामाबाद पाकिस्तान ने खैबर पख्तूनख्वा में कच्चा तेल और गैस खोज लेने का दावा किया है। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने इसे लेकर देश को बधाई दी है और कहा कि इससे हमारा विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा और हमें आयात पर कम खर्च करना होगा। पाकिस्तानी एजेंसियों का दावा है कि उन्होंने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहट जिले के नश्पा ब्लॉक में तेल और गैस का भंडार खोज लिया है। यहां से प्रति दिन 4100 बैरल कच्चा तेल निकाला जा सकेगा। इसके अलावा 10.5 मिलियन क्यूबिक फीट गैस भी प्रति दिन निकाली जा सकेगी। पाक सरकार का कहना है कि यह सफलता उनके मुल्क के लिए काफी बड़ी है क्योंकि इससे आयात पर निर्भरता कम हो सकेगी।   पीएम शहबाज शरीफ ने पेट्रोलियम और गैस सेक्टर की एक उच्च स्तरीय मीटिंग में कहा कि स्थानीय स्तर पर इनकी खोज से हमें आयात कम करने में मदद मिलेगी। शहबाज शरीफ ने कहा कि इससे हमारा विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा और हमें तेल और गैस की खरीद पर खर्च कम करने में मदद मिलेगी। पाकिस्तान की ऑयल ऐंड गैस डिवेलपमेंट कंपनी लिमिटेड ने नश्पा ब्लॉक में गैस और तेल की खोज करने की बात कही है। कंपनी का कहना है कि पीएम शहबाज शरीफ ने हमें और अन्य एजेंसियों को इस खोज के लिए बधाई दी है। मीटिंग के दौरान कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि इस साल ग्राहकों को पर्याप्त गैस मिली है। अब हमारा टारगेट है कि जून 2026 तक 3.5 लाख नए गैस कनेक्शन बांट दिए जाएं। पाकिस्तान इसे बड़ी सफलता के तौर पर देख रहा है। बता दें कि इससे पहले भी बलूचिस्तान में पाकिस्तान कई बार गैस और तेल के भंडार तलाशता रहा है। हालांकि खैबर पख्तूनख्वा से लेकर बलूचिस्तान तक के लोगों का इस बात को लेकर विरोध रहा है कि पाकिस्तान हमारे संसाधनों का तो इस्तेमाल करता है, लेकिन उससे मिलने वाली रकम को स्थानीय विकास पर खर्च नहीं किया जाता। प्राकृतिक भंडार के बाद भी क्यों इतने पिछड़े हैं बलूचिस्तान और खैबर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान दोनों ही पंजाब के मुकाबले काफी पिछड़े हैं। यही कारण है कि इन राज्यों में पंजाबी विरोध प्रबल है। यहां के लोगों का कहना है कि सेना, सियासत और प्रशासन में पंजाबियों का ही प्रभुत्व है, जबकि उनके संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता रहा है।  

अफ्रीकी देशों ने डोनाल्ड ट्रंप को दिया करारा जवाब, अमेरिकी नागरिकों की एंट्री पर प्रतिबंध

न्यूयॉर्क अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की सरकार आने के बाद इमिग्रेशन को लेकर काफी सख्ती बरती जा रही है। कथित तौर पर अवैध रूप से अमेरिका में रहने वाले लोगों को डिपोर्ट किया जा रहा है तो वहीं कई देशों के नागरिकों की एंट्री तक पर बैन लगा दिया गया है। हालांकि इस मामले में अमेरिका ही आगे नहीं हैं बल्कि अफ्रीका का कई देश हैं जिन्होंने अमेरिका नागरिकों के इमिग्रेशन को बैन कर दिया है। माली और बुर्किना फासो ने अमेरिकी नागरिकों के लिए पूरी तरह से वीजा बैन लगा दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने पहले इन देशों पर वीजा बैन लगाया था। अमेरिका पर वीजा बैन लागने वाले इन दोनों ही देशों में सैन्य शासन है। पश्चिम अफ्रीका के इन दोनों देशों ने हाल ही में अमेरिका पर वीजा बैन लगाया है। इससे पहले अमेरिका ने कम से कम 39 देशों पर वीजा बैन लगाया था। इसमें अफ्रीका, एशिया, मध्य एशिया और लैटिन अमेरिका के देश शामिल थे। अमेरिका का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। माली के विदेश मंत्रालय ने कहा, अमेरिका पर जवाबी कदम उठाते हुए विदेश मंत्रालय ने तत्काल प्रभाव से अमेरिका के नागरिकों की एंट्री पर बैन लगा दी है। अमेरिका ने जिस तरह का कदम उठाया है ठीक वैसा ही कदम हमारी सरकार भी उठा रही है। बुर्किना फासो के विदेश णंत्री कारामोको जीन मारी ट्राओरे ने भी इसी तरह का बयान जारी कर अमेरिका पर वीजा बैन का ऐलान किया है। अब तक किन देशों ने अमेरिका पर लगाया है वीजा बैन 16 दिसंबर को अमेरिका ने माली, बुर्कीना फासो, लाओस, नाइजर, सिएरा लियोन, दक्षिण सूडान और सीरिया पर पूरी तरह से वीजा बैन लगा दिया था। इसके अलावा फिलिस्तीनी प्रशासन द्वारा जारी कागजात के साथ अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। अमेरिका का कहना है कि इन देशों के नागरिकों की वजह से देश की सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है। वहीं ये देश अपने नागरिकों को वापस लेने को भी तैयार नहीं हो रहे हैं। ऐसे में इनपर कड़े प्रतिबंध लगाना आवश्यक है। बता दें की माली, बुर्किना फासो और नाइजर में अल कायदा और आईएसआईएस का आतंक जारी है। ऐसे में इन देशों में हिंसा चरम पर है। ऐसे में बहुत सारे नागरिक देश से भागने की फिराक में रहते हैं। शुक्रवार को नाइजर ने अमेरिका नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा चाड ने भी चाड ने 6 जून से ही अमेरिकी नागरिकों को वीजा जारी करना बंद कर दिया था।

साल 2026 में भारत का गगनयान मिशन, ISRO की मानव अंतरिक्ष उड़ान से अंतरिक्ष में होगी धाक

नई दिल्ली यह नया साल 2026 अंतरिक्ष में मानव की उड़ान के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित होने जा रहा है. इस वर्ष भारत और अमेरिका दो अलग-अलग लेकिन समान रूप से ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी में हैं. भारत का गगनयान कार्यक्रम जहां देश को स्वतंत्र मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता की श्रेणी में ले जाएगा, वहीं अमेरिका का आर्टेमिस-II मिशन मानव जाति को पांच दशक बाद एक बार फिर गहरे अंतरिक्ष यानी चंद्रमा से आगे की यात्रा पर ले जाने वाला है. इन दोनों मिशनों का संयुक्त प्रभाव यह संकेत देता है कि अब मानव अंतरिक्ष उड़ान केवल कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह एक बहुध्रुवीय (Multipolar) अंतरिक्ष युग की ओर बढ़ रही है. साल 2026 केवल 2 स्पेस मिशनों का ही साल नहीं होगा, बल्कि यह मानव जाति के अंतरिक्ष भविष्य की दिशा बदलने वाला साल साबित हो सकता है. भारत का गगनयान: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने महत्वाकांक्षी गगनयान कार्यक्रम के तहत पहला बिना मानव वाला ऑर्बिटल टेस्ट मिशन G1 वर्ष 2026 के मार्च महीने के आसपास करने का लक्ष्य तय किया है. यह मिशन मानव-रेटेड LVM3 (Gaganyaan-Mk3) रॉकेट से प्रक्षेपित किया जाएगा. 2026 में पहला बड़ा ऑर्बिटल टेस्ट साबित होगा. इसमें व्योममित्रा नामक एक मानवरूपी (Humanoid) रोबोट को भेजा जाएगा, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह अंतरिक्ष यात्रियों जैसी गतिविधियों और प्रतिक्रियाओं का अनुकरण कर सके. G1 मिशन के दौरान गगनयान को लगभग 300 से 400 किलोमीटर की निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit) में संचालित किया जाएगा. इसका मुख्य उद्देश्य मानव मिशन से पहले सभी महत्वपूर्ण प्रणालियों की कठोर परीक्षा करना है. गगनयान क्यों है भारत के लिए ऐतिहासिक? गगनयान भारत के लिए केवल एक अंतरिक्ष मिशन नहीं, बल्कि पूर्णतः स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता का प्रमाण है. इस मिशन के तहत कई अहम प्रणालियों का परीक्षण किया जाएगा, इसमें जीवन-रक्षा प्रणाली के साथ ही क्रू मॉड्यूल का सुरक्षित वायुमंडलीय पुनः प्रवेश, पैराशूट आधारित समुद्री रिकवरी, मिशन नियंत्रण और संचार व्यवस्था शामिल है. अंतरिक्ष की उड़ान में अहम पड़ाव   यदि G1 और इसके बाद के परीक्षण सफल रहते हैं, तो भारत उन गिने-चुने देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जो स्वतंत्र रूप से अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने और सुरक्षित वापस लाने की क्षमता रखते हैं. इससे भविष्य में भारतीय स्पेस स्टेशन, निजी मानव अंतरिक्ष सेवाओं और व्यावसायिक मिशनों के रास्ते खुलेंगे, साथ ही विदेशी साझेदारों पर निर्भरता भी कम होगी. अमेरिका का आर्टेमिस-II: इंसानों की 50 साल बाद गहरे अंतरिक्ष में वापसी होगी. दूसरी ओर, अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा अपने बहुप्रतीक्षित आर्टेमिस-II मिशन की तैयारी में है, जिसे अब 5 फरवरी 2026 से पहले नहीं लॉन्च किए जाने की योजना है. यह मिशन चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर लगभग 10 दिनों की यात्रा पर जाएगा, जिसमें वे चंद्रमा की परिक्रमा करेंगे. यह 1972 में अपोलो-17 के बाद पहली बार होगा जब इंसान निम्न पृथ्वी कक्षा से बाहर जाएगा. आर्टेमिस-II का महत्व क्या है? आर्टेमिस-II, नासा के स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान के लिए एक निर्णायक परीक्षण उड़ान है. इस मिशन में कुछ अहम पहलुओं की जांच की जाएगी, जिसमें गहरे अंतरिक्ष में नेविगेशन और संचार, अंतरिक्ष रेडिएशन से सुरक्षा, दीर्घकालिक जीवन-रक्षा प्रणालियां और पृथ्वी से बहुत दूर मिशन संचालन शामिल होगा. यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा से कम से कम 5,000 नॉटिकल मील आगे तक जाएंगे, जो मानव इतिहास की अब तक की सबसे दूर की मानव उड़ान होगी. यह मिशन भविष्य में चंद्र सतह पर लैंडिंग, स्थायी चंद्र अड्डों और अंततः मंगल मिशन की नींव रखेगा. मानव अंतरिक्ष उड़ान का बहुध्रुवीय भविष्य गगनयान और आर्टेमिस-II मिलकर यह स्पष्ट करते हैं कि 2030 के दशक में मानव अंतरिक्ष उड़ान एक नए चरण में प्रवेश करने जा रही है, जहां भारत निम्न पृथ्वी कक्षा तक पहुंच को मजबूत कर रहा है. वहीं अमेरिका अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ गहरे अंतरिक्ष में वापसी कर रहा है. इन मिशनों से विकसित होने वाली तकनीकें- चालक दल की सुरक्षा, अंतरिक्ष यान प्रणालियां, मिशन प्रबंधन और दीर्घकालिक जीवन समर्थन- आने वाले वर्षों में व्यावसायिक स्पेसफ्लाइट, राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन और डीप-स्पेस अन्वेषण की दिशा और गति तय करेंगी.