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वंदे भारत स्लीपर और बुलेट ट्रेन का इंतजार खत्म, गुवाहाटी-कोलकाता होगा पहला रूट, अश्विनी वैष्णव ने किया एलान

नई दिल्ली   भारतीय रेलवे के इतिहास में जल्द ही एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को यह जानकारी दी। रेल मंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि 15 अगस्त 2027 को देश को पहली बुलेट ट्रेन मिल जाएगी। अश्विनी वैष्णव ने मजाकिया लहजे में कहा कि आप अभी से बुलेट ट्रेन की टिकट खरीद लीजिए, अगले साल बुलेट ट्रेन भी आ जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है। रेल मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की पूरी टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन पूरा हो गया है। इसका पहला रूट गुवाहाटी-कोलकाता प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आने वाले दिनों में इस रूट पर पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। यह रेलवे के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। वैष्णव ने आगे कहा कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन यात्रियों को लंबी दूरी की रात की यात्राओं पर वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं, सुरक्षा और एक आधुनिक यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी। पिछले साल नवंबर में ही प्रधानमंत्री मोदी ने अपने गुजरात दौरे के दौरान मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की प्रगति का भी जायजा लिया था। इसके लिए पीएम मोदी सूरत बुलेट ट्रेन स्टेशन पर पहुंचे थे, जहां उन्होंने काम में लगे इंजीनियरों और कर्मचारियों से बातचीत भी की थी। रात के सफर में मिलेगी वर्ल्ड-क्लास सुविधा रेल मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन लंबी दूरी की रात की यात्राओं के लिए डिजाइन की गई है। यह ट्रेन यात्रियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं, बेहतर सुरक्षा और एक आधुनिक यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी। इसे भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है, जो प्रीमियम यात्रा को और सुगम बनाएगी। 15 अगस्त 2027 को चलेगी पहली बुलेट ट्रेन वंदे भारत के साथ-साथ रेल मंत्री ने देश की पहली बुलेट ट्रेन को लेकर भी बड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 2027 को भारत को अपनी पहली बुलेट ट्रेन मिल जाएगी। वैष्णव ने मजाकिया अंदाज में कहा, "आप अभी से बुलेट ट्रेन की टिकट खरीद लीजिए, अगले साल बुलेट ट्रेन भी आ जाएगी।" उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार इस प्रोजेक्ट को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए पूरी गंभीरता से जुटी हुई है। पीएम मोदी ने लिया तैयारियों का जायजा प्रोजेक्ट की प्रगति को लेकर रेल मंत्री ने बताया कि पिछले साल नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद गुजरात दौरे के दौरान मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का निरीक्षण किया था। पीएम मोदी सूरत बुलेट ट्रेन स्टेशन पहुंचे थे, जहां उन्होंने काम की बारीकी से जांच की और वहां मौजूद इंजीनियरों व कर्मचारियों का उत्साहवर्धन किया। प्रधानमंत्री ने इस दौरान कर्मचारियों से बातचीत करते हुए कहा था कि यह प्रोजेक्ट न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश के गर्व का विषय है। यह हाई-स्पीड ट्रेन परियोजना भारत के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को आधुनिक बनाने में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी, जिससे यात्रियों को तेज और सुविधाजनक सफर का लाभ मिलेगा।  इससे जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें पीएम मोदी सूरत स्टेशन पर काम की बारीकी से जांच करते हुए नजर आए। इस दौरान उन्होंने इंजीनियरों और कर्मचारियों से बातचीत की। उन्होंने पूछा कि काम में किसी तरह की परेशानी तो नहीं आ रही है और प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए किस तरह से काम किए जा रहे हैं? इस दौरान कर्मचारियों ने बताया कि हर स्तर पर पूरी मेहनत और बारीकी के साथ काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी कर्मचारियों की मेहनत की सराहना की और कहा कि यह प्रोजेक्ट न सिर्फ गुजरात बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। हाई-स्पीड ट्रेन परियोजना देश के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को आधुनिक बनाने में एक अहम कदम है और इससे यात्रियों को तेज और सुविधाजनक सफर मिलेगा।

किसानों की मेहनत से भारत ने बनाई नई ऊंचाई, चीन भी रह गया पीछे, जानें क्यों है यह बड़ी खबर

नई दिल्ली  नए साल की शुरुआत इससे बेहतर नहीं हो सकती. जब हम और आप जश्न में डूबे हैं, तभी भारत के खेतों से एक ऐसी खबर आई है, जिसने हर हिंदुस्तान का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है. यह खबर सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वाभिमान, संघर्ष और जीत की एक महागाथा है. भारत अब चावल उत्पादन में चीन को पछाड़कर दुनिया का नंबर 1 देश बन गया है. जी हां, वही चीन जो अब तक कृषि और मैन्‍यूफैक्‍चर‍िंग में दुनिया का सिरमौर माना जाता था, उसे हमारे अन्नदाताओं ने अपनी मेहनत के दम पर पीछे छोड़ दिया है. खुद कृष‍ि मंत्री श‍िवराज सिंह चौहान ने यह खुशखबरी शेयर की है. यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक और भावुक करने वाली है क्योंकि एक वक्त था जब भारत अपनी आबादी का पेट भरने के लिए अमेरिका के जहाजों का इंतजार करता था, और आज वही भारत दुनिया के कुल चावल उत्पादन का 28 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अपने खेतों में उगा रहा है. आज की युवा पीढ़ी शायद उस दर्द को महसूस न कर पाए, लेकिन हमारे बुजुर्गों की आंखों में वो मंजर आज भी तैरता है. 1960 के दशक की बात है. भारत आजाद तो हो गया था, लेकिन हमारे पास अपने लोगों को खिलाने के लिए पर्याप्त अनाज नहीं था. अकाल और सूखे ने देश की कमर तोड़ दी थी. हालत यह थी कि भारत को अमेरिका के साथ PL-480 समझौते के तहत अनाज मांगना पड़ता था. अमेरिका से जो गेहूं आता था, वह लाल रंग का होता था और अक्सर उसकी गुणवत्ता इतनी खराब होती थी कि उसे वहां जानवरों को खिलाया जाता था. लेकिन भूख से जूझ रहे भारत के पास कोई विकल्प नहीं था. इसे ‘शिप टू माउथ’की स्थिति कहा जाता था यानी जब जहाज बंदरगाह पर आएगा, तभी देश के लोगों के मुंह तक निवाला पहुंचेगा. तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देश की नाजुक हालत को देखते हुए देशवासियों से सप्ताह में एक दिन उपवास रखने की अपील की थी. वह भारत की बेबसी का दौर था. दुनिया के कई देशों को लगता था कि भारत कभी अपनी भूख नहीं मिटा पाएगा और बिखर जाएगा. 2026 का भारत… अब हम दुनिया को खिलाते हैं अब उस ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर को हटाकर आज के रंगीन और समृद्ध भारत को देखिए. आज वही भारत, किसी के आगे हाथ नहीं फैलाता, बल्कि दुनिया का पेट भरता है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्‍स पर ल‍िखा, अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का विषय है कि भारत ने चावल उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है. चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत चावल उत्पादन में विश्व का सबसे अग्रणी देश बना है. सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि आज दुनिया में चावल की जितनी खेती होती है, उसका 28 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले भारत का है. यानी दुनिया की हर चौथी चावल की थाली में भारतीय चावल की महक है. चीन को पछाड़ना क्यों है बड़ी बात? चीन, दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने के साथ-साथ कृषि तकनीकों में भी काफी आगे रहा है. दशकों से चावल उत्पादन में चीन का दबदबा था. चीन के पास हाइब्रिड चावल की उन्नत तकनीक और प्रति हेक्टेयर ज्यादा उपज की क्षमता थी. ऐसे में, भारत का चीन से आगे निकलना यह साबित करता है कि अब हम तकनीक और उत्पादन क्षमता में महाशक्तियों को टक्कर दे रहे हैं. यह भारत की फूड स‍िक्‍योरिटी के साथ-साथ खाद्य आत्‍मनिर्भरता की जीत है. अब हमें अपनी शर्तों पर दुनिया से व्यापार करने की ताकत मिल गई है. यह चमत्कार हुआ कैसे?     ‘शिप टू माउथ’ से ‘वर्ल्ड लीडर’ बनने तक का यह सफर आसान नहीं था. इसके पीछे कई दशकों का संघर्ष और मौजूदा सरकार की रणनीतियां शामिल हैं. कृषि मंत्री ने इस सफलता का श्रेय तीन प्रमुख स्तंभों को दिया है. सबसे बड़ा श्रेय हमारे किसान भाइयों और बहनों को जाता है. चाहे पंजाब-हरियाणा के खेत हों, या दक्षिण भारत के धान के कटोरे, या फिर पूर्वी भारत के उपजाऊ मैदान, किसानों ने सर्दी, गर्मी और बरसात की परवाह किए बिना खेतों में सोना उगाया है. मंत्री ने इसे अन्नदाताओं के अथक परिश्रम का परिणाम बताया.     अब खेती केवल परंपरा नहीं, साइंस बन गई है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिकों ने चावल की ऐसी किस्में विकसित कीं जो कम पानी में ज्यादा उपज देती हैं, और जो बीमारियों से लड़ सकती हैं. उन्नत वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों ने उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई.     सरकार की नीतियों ने उत्प्रेरक का काम किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘बीज से बाजार तक’ की रणनीति अपनाई गई. स्‍वॉयल हेल्‍थ कार्ड, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, और एमएसपी (MSP) में लगातार वृद्धि ने किसानों को सुरक्षा और प्रोत्साहन दिया. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पीएम मोदी के सतत प्रयासों के आज “ठोस और सकारात्मक परिणाम” दिख रहे हैं. विश्व पटल पर भारत की धमक भारत पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है. वैश्विक चावल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 40% से अधिक है. अब उत्पादन में नंबर 1 बनने के बाद, दुनिया के कई देश अपनी खाद्य सुरक्षा के लिए भारत पर निर्भर होंगे. भारत का बासमती चावल खाड़ी देशों से लेकर अमेरिका और यूरोप तक अमीरों की पहली पसंद है. यह भारत की सॉफ्ट पावर है. जब दुनिया में कोरोना का संकट आया या युद्ध के कारण सप्लाई चेन टूटी, तब भारत ने कई गरीब देशों को अनाज भेजा. अब नंबर 1 बनकर भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज और सहारा बनकर उभरेगा.

2026 में राज्यसभा में NDA की बढ़ी हुई ताकत, इन नेताओं को हो सकती है मुश्किल

नई दिल्ली साल 2026 में राज्यसभा की रिक्त हो रही 72 सीटों के लिए होने वाले चुनाव प्रमुख नेताओं के भविष्य के साथ केंद्रीय राजनीति में सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस की रणनीति को भी प्रभावित करेंगे। विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं की दलीय स्थिति को देखते हुए भाजपा और NDA और मजबूत होगा, वहीं कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की दिक्कतें बढ़ेंगी। हालांकि राज्यसभा के अंकगणित में बहुत ज्यादा बदलाव तो नहीं आएगा, लेकिन NDA अपने बहुमत को और मजबूत करेगा और भाजपा की संख्या भी बढ़ जाएगी। इससे संसद के दोनों सादनों में विधायी कामकाज के लिए सरकर की सहूलियत और बढ़ जाएगी। वहीं विपक्ष की सरकर को घेरने के रणनीति कमजोर पड़ेगी। राज्यसभा की अधिकृत जानकारी के अनुसार, सदन में अभी भाजपा के 103 सांसद हैं और NDA के 126 सांसद हैं। 2026 में भाजपा के 30 सांसदों का कार्यकाल पूरा होगा और उसके 32 सांसदों का आना पक्का है। जोड़-तोड़ के साथ पार्टी तीन सीटें और जीत सकती है। पार्टी के सहयोगी दलों के चार सांसद बढ़ेंगे, जिनमें तेलुगु देशम,जनसेना,शिवसेना व एनसीपी का एक-एक सांसद बढ़ जाएगा। हालांकि दो सांसद कम भी होंगे। तब भी कुल मिलाकर NDA लाभ की स्थिति में रहेगा। मनोनीत सांसद पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई भी मार्च में रिटायर हो रहे हैं। उनकी जगह जो भी आएगा उसके भी सरकार का समर्थन करने की संभावना है। कई दिग्गजों का कार्यकाल पूरा होगा इन राज्यसभा चुनावों का महत्व इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि इसमें कई दिक्कत नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इनमें केंद्र सरकार में मंत्री एवं विभिन्न दलों के प्रमुख नेता शामिल है। अगर मंत्री फिर से चुनकर नहीं आते हैं तो उनका सरकार में रहना मुश्किल हो जाएगा और अन्य प्रमुख नेताओं के लिए भी दिक्कतें बढ़ेगी। जिन प्रमुख नेताओं कार्यकाल पूरा हो रहा है उनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा, दिग्विजय सिंह, शरद पवार, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बी एल बर्मा, जॉर्ज कुरियन आदि शामिल है। इनके अलावा प्रेमचंद गुप्ता, राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा, प्रियंका चतुर्वेदी, रामदास अठावले, रामगोपाल यादव, नीरज शेखर, राम जी, शक्ति सिंह गोहिल, अभिषेक मनु सिंघवी, थंबी दुरई, तिरुचि शिवा और मनोनीत सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई शामिल है। सबसे ज्यादा दस सीटें उत्तर प्रदेश में रिक्त होंगी 2026 में जिन 72 सीटों के लिए चुनाव होंगे उनमें अप्रैल में 37 सीटों के लिए, जून में 23 सीटों के लिए, जुलाई में एक सीट के लिए और नवंबर में 11 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। अप्रैल माह में जिन 37 सीटों के लिए चुनाव होंगे, उनमें असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल शामिल है, जबकि नवंबर में होने वाले 11 सीटों के चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश की 10 सीटें होगी। इसके अलावा जून में होने वाले 23 सीटों के चुनाव में आंध्र प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य हैं। बिहार की 5 सीटें रिक्त हो रही है, जिनमें जेडीयू की दो, राजद की दो और आरएलएम की एक सीट शामिल है। चुनाव के बाद जेडीयू और भाजपा दो-दो सीटें और उनका सहयोगी एक सीट जीत सकता है। झारखंड में दो रिक्त हो रही सीटों में झामुमो की एक पहले से ही खाली है और भाजपा की एक सीट और होगी। नए समीकरण में दोनों को एक-एक सीट मिल सकती है। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 10 सीटें खाली हो रही है। इनमें भाजपा की आठ, सपा की एक और बसपा की एक है। चुनाव के बाद भाजपा सात और सपा को दो सीटें मिलना तय हैं। भाजपा सहयोगी दलों से मिलकर एक सीट और जीत सकती है, लेकिन बसपा का राज्यसभा से सफाया होना लगभग तय है। उत्तराखंड में एक सीट खाली होगी और एक सीट भाजपा के पास ही रहेगी। अन्य राज्यों में आंध्र प्रदेश की चार सीटें रिक्त होंगी, जिनमें तेलुगू देशम की एक और वायएसआरसीपी की तीन सीटें शामिल है। चुनाव के बाद तेलुगू देशम को दो, भाजपा को एक और जनसेना को एक सीट मिलने की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में भाजपा की एक सीट रिक्त हो रही है और भाजपा का ही एक सांसद फिर से चुनकर आएगा। असम में तीन सीटें रिक्त होने जा रही हैं, जिनमें भाजपा की दो और निर्दलीय एक सांसद शामिल है। चुनाव के बाद भाजपा के दो और कांग्रेस के एक सांसद का चुनाव जाना तय है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के ही दोनों सांसद रिटायर हो रहे हैं। चुनाव के बाद भाजपा व कांग्रेस को एक -एक सीट मिलने की संभावना है। गुजरात में चार सीटें रिक्त हो रही है, जिनमें तीन भाजपा की और एक कांग्रेस की है। चुनाव के बाद चारों सीटें भाजपा के पास आएंगी। हरियाणा में दोनों सीटें भाजपा की रिक्त हो रही है, लेकिन चुनाव के बाद भाजपा की एक ही सीट आएगी एक सीट कांग्रेस के पास जाएगी। हिमाचल में भाजपा की एक सीट खाली हो रही है और यह सीट कांग्रेस के पास जाएगी। कर्नाटक की चार खाली हो रही सीटों में भाजपा की दो, कांग्रेस की एक और जद एस की एक सीट है। विधानसभा की दलीय स्थिति में कांग्रेस तीन सीटें और भाजपा को एक सीट मिलने की संभावना है। मध्य प्रदेश की तीन रिक्त होने वाली सीटों भाजपा की दो व कांग्रेस की एक सीट हैा। यहां पर फिर से भाजपा दो कांग्रेस को एक सीट मिलेगी। महाराष्ट्र में सात सीटें खाली हो रही है, जिनमें भाजपा की दो, शिवसेना उद्धव ठाकरे एक, राकांपा शरद पवार दो, कांग्रेस एक, रिपब्लिक रिपब्लिकन पार्टी एक शामिल है। चुनाव के बाद भाजपा के तीन, राकांपा एक, शिवसेना के एक, आरपीआई की एक और कांग्रेस को एक सीट मिलने की स्थिति बन सकती है। पश्चिम बंगाल की पांच खाली होने वाली सीटों में तृणमूल कांग्रेस की चार व एक माकपा की है। इस बार तृणमूल कांग्रेस को चार व एक भाजपा को मिलेगी। मणिपुर में भाजपा की एक सीट खाली होगी और वह भाजपा को ही मिलेगी। यही स्थिति मेघालय में होगी जहां एनपीपी की एक सीट खाली होगी और फिर से उसका ही सांसद चुना जाएगा। मिजोरम में एमएनएफ … Read more

Trump Tariff ने अमेरिका को दिया फायदा, ट्रंप के $2000 के वादे की सच्चाई क्या है?

वाशिंगटन साल 2025 खत्म हो गया है और इस साल कई मुद्दे सुर्खियों में रहे हैं. फिर बात ग्लोबल टेंशन की हो या फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दुनियाभर के देशों पर लगाए गए टैरिफ से बने ट्रेड वॉर के हालातों की हो. ट्रंप टैरिफ साल से सबसे चर्चित टॉपिक में सबसे ऊपर रहा है. अमेरिकी टैरिफ पॉलिसी की कड़ी आलोचना भी हुई, लेकिन ट्रंप ने इसे देश के हित में बताते हुए दावा किया कि यह अमेरिकियों के लिए खरबों डॉलर ला रहा है. यही नहीं उन्होंने तो टैरिफ रेवेन्यू से लगभग हर अमेरिकी को डिविडेंड के रूप में 2000 डॉलर देने का वादा भी किया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि Trump Tariff के अमेरिका को कितनी कमाई हुई है? क्या नए साल में ट्रंप अपने 2000 डॉलर वाले वादे को पूरा करेंगे? आइए समझते हैं…  ट्रंप का Tariff ऐलान और दुनिया में हड़कंप  डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल 2025 से भारत, चीन, ब्राजील समेत कई देशों पर भारत पर रेसिप्रोकल टैरिफ यानी पारस्परिक टैरिफ लगाने का ऐलान किया था. अमेरिकी राष्ट्रपति की इस टैरिफ पॉलिसी का उद्देश्य दरअसल अमेरिकी उत्पादों पर अन्य देशों द्वारा लगाए गए हाई टैरिफ के जवाब में बराबर का टैक्स लगाना था और इसे उन्होंने 'लिबरेशन-डे' करार दिया था. इसके बाद कुछ देशों पर लागू टैरिफ कम भी किए गए, तो कुछ पर बढ़ा दिए गए. भारत पर तो इसे दोगुना करते हुए 50% करके ब्राजील की कैटेगरी में खड़ा कर दिया गया. इस बीच चीन के साथ टैरिफ का ऐसा गेम चला कि दुनिया की टेंशन बढ़ गई और Trade War की स्थिति पैदा हो गई थी. हालांकि, बीते दिनों ट्रंप-जिनपिंग की मुलाकात के बाद से शांति नजर आई है.  'जो टैरिफ के खिलाफ वो मूर्ख' न सिर्फ तमाम देशों, बल्कि विश्लेषकों ने भी ट्रंप के इस रेसिप्रोकल टैरिफ की जमकर आलोचना की, लेकिन दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इसे अमेरिका को और अमीर बनाने का जरिया बताया. ट्रंप ने टैरिफ के फायदे गिनाते हुए कहा था कि US Tariff की आलोचना करने वाले 'मूर्ख' हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि अमेरिकी किसानों को तो अमीर बना ही रहा है, बल्कि ट्रंप ने एक पोस्ट के जरिए ये भी कहा था कि टैरिफ से आ रहे रेवेन्यू से अमेरिका को खरबों डॉलर की इनकम हो रही है.  ट्रंप ने किया था ये बड़ा वादा Donald Trump ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी एक पोस्ट में ये भी कहा था कि टैरिफ से आ रहे रेवेन्यू का उपयोग अमेरिका पर मौजूद राष्ट्रीय ऋण का भुगतान शुरू करने के लिए भी किया जा सकता है, जो अब करीब 38 ट्रिलियन डॉलर हो गया है. इसके साथ ही ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान करते हुए ये वादा तक कर दिया था कि US Tariff Revenue से लगभग सभी अमेरिकियों (हाई इनकम वाले लोगों को छोड़कर) को टैरिफ डिविडेंड के हिस्से के रूप में 2,000 डॉलर का पेमेंट किया जाएगा. हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया था कि पेमेंट कैसे और कब होगा?  टैरिफ से US की कितनी कमाई? अब बात करें, डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में तमाम देशों पर लगाए गए US Tariff से अमेरिका को होने वाली अब तक की कमाई के बारे में, तो इसका आधिकारिक आंकड़ा तो अभी तक जारी नहीं किया गया है. लेकिन यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, 2025 में टैरिफ से 15 दिसंबर तक अमेरिका को 200 अरब डॉलर से ज्यादा का रेवेन्यू प्राप्त हो चुका है. अन्य मीडिया रिपोर्ट में भी इसी आंकड़े के आस-पास अनुमानित टैरिफ कमाई बताई जा रही है.  इंडिपेंडेंट टैक्स पॉलिसी थिंक टैंक 'The Tax Foundation' के अनुमान के मुताबिक टैरिफ से अक्टूबर 2025 तक ही अमेरिका ने 205 अरब डॉलर जुटा लिए थे. वहीं अमेरिका को ट्रंप टैरिफ से 2026 में 207.5 अरब डॉलर का रेवेन्यू प्राप्त होने की उम्मीद है.  क्या पूरा होगा $2000 वाला वादा?  भले ही ट्रंप टैरिफ के जरिए जोरदार रेवेन्यू आ रहा है, लेकिन Donald Trump के हर अमेरिकी को 2000 डॉलर दिए जाने के वादे में कई बाधाएं भी मौजूद हैं. ओहियो के सीनेटर बर्नी मोरेनो समेत कई रिपब्लिकन सांसदों ने इस प्रस्ताव और इसके कांग्रेस से पारित होने की संभावना पर संदेह जताया है. उनका भी कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति टैरिफ से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल देश के भारी-भरकम कर्ज को कम करने में करना पसंद करेंगे.  व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने बीते 21 दिसंबर को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि नए साल 2026 में राष्ट्रपति इसे लागू करने के लिए कांग्रेस के समक्ष एक प्रस्ताव लाएंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, संघीय खर्च पर कांग्रेस का नियंत्रण है और प्रोत्साहन राशि के लिए पर्याप्त रकम आवंटित करने के लिए एक विधेयक तैयार करके पारित कराना होगा.  

स्विट्जरलैंड में नए साल के जश्न के दौरान ब्लास्ट, 40 की मौत, मचा हड़कंप

वालिस कैंटन नए साल के जश्न के बीच गुरुवार को स्विट्जरलैंड में बड़ा हादसा हो गया है। यहां एक स्की रिजॉर्ट में धमाके के बाद कई लोगों के मौत की आशंका जताई गई है। स्विस पुलिस ने गुरुवार सुबह बताया कि यह धमाका लक्जरी अल्पाइन स्की रिजॉर्ट सिटी क्रैंस मोंटाना में एक बार में हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक धमाके में 40 लोगों की जलकर मौत हो गई है। पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि धमाके के समय बार में 100 से ज्यादा लोग मौजूद थे। दक्षिण-पश्चिमी स्विट्जरलैंड के वालिस कैंटन में एक पुलिस प्रवक्ता गैटन लैथियन ने एएफपी को बताया, "अज्ञात कारण से धमाका हुआ है। कई लोग घायल हुए हैं और कई लोगों की मौत हुई है।" उन्होंने बताया कि धमाका सुबह करीब 1:30 बजे ले कॉन्स्टेलेशन नाम के एक बार में हुआ, जो पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। उस वक्त लोग यहां नए साल का जश्न मना रहे थे। धमाके के तुरंत बाद पुलिस और आपातकालीन सेवाओं की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया. घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और सुरक्षा के मद्देनजर पूरे इलाके को घेराबंदी में लेकर जांच जारी है. पुलिस के मुताबिक धमाका उस वक्त हुआ, जब रिजॉर्ट में नए साल की पार्टियां चल रही थीं. धमाका देर रात करीब डेढ़ बजे हुए था, जब लोग जश्न में डूबे हुए थे. स्थानीय मीडिया के मुताबिक जिस बिल्डिंग में बार है, वो आग की लपटों में घरी हुई थी और चीख-पुकार सुनी जा सकती थी. पूरा इलाका पुलिस ने कर दिया सील इस घटना के बाद इस पूरे इलाके को पुलिस ने सील कर दिया है और वो इस जांच में जुटी हुई है कि आखिर रिसॉर्ट में आग लगी कैसे? चूंकि यहां के बार में आग लगती हुई देखी गई है, ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि वहीं कुछ हुआ होगा. वो बात अलग है कि अब तक घटना की वजह के बारे में कुछ पता नहीं चल सका है. फायरफाइटर्स लोगों को वहां से निकालने में लगे हुए हैं. क्या है क्रांस मोंटाना और क्यों है मशहूर? जहां ये घटना हुई है, वो क्रांस मोंटाना इलाका स्विट्जरलैंड का एक मशहूर और बेहद लग्जरी हिल स्टेशन है. यह देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में वालेस कैंटन में स्थित है और खास तौर पर अपने स्की रिसॉर्ट्स, खूबसूरत नजारों और हाई-एंड लाइफस्टाइल के लिए जाना जाता है. क्रांस मोंटाना समुद्र तल से लगभग 1,500 मीटर की ऊंचाई पर बसा है और यहां से ऐल्प्स माउंटेन रेंज के शानदार दृश्य दिखाई देते हैं. सर्दियों में यह जगह स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग और विंटर स्पोर्ट्स के लिए दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करती है, जबकि गर्मियों में हाइकिंग, गोल्फ और हेल्थ रिसॉर्ट्स के लिए मशहूर रहती है. यह शहर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने गोल्फ टूर्नामेंट्स, लग्जरी होटल्स, स्पा और फाइन डाइनिंग के लिए भी जाना जाता है. यहां हर साल बड़ी संख्या में अमीर पर्यटक, सेलिब्रिटी और बिजनेस लीडर्स छुट्टियां मनाने आते हैं. स्विस मीडिया के हवाले से सामने आई तस्वीरों में एक इमारत में आग लगी हुई देखी जा सकती है। वहीं पास ही कई इमरजेंसी गाड़ियां दिखाई दे रही थीं। पुलिस ने बताया है कि बचाव अभियान जारी है। इस बीच स्काई न्यूज ने पुलिस के हवाले से बताया कि इस घटना में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कुछ स्थानीय मीडिया का कहना है कि यह आंकड़ा बहुत ज्यादा हो सकता है। पुलिस के एक प्रवक्ता ने मरने वालों की संख्या की पुष्टि करने से इनकार कर दिया है। कहा जा रहा है कि कई लोगों के जलने के बाद उनका इलाज जारी है। पुलिस ने एक बयान में कहा है कि इलाके को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है और क्रैन्स-मोंटाना के ऊपर नो-फ्लाई जोन घोषित कर दिया गया है।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का ऐलान, रूट, किराया और हरी झंडी मिलने की तारीख जानें

नई दिल्ली नए साल के मौके पर मोदी सरकार ने देशवासियों को बड़ा तोहफा दिया है. रेल मंत्रालय ने देश की पहली वंदेभारत स्लीपर ट्रेन के रूट की घोषणा कर दी है. देश की पहली वंदेभारत स्लीपर ट्रेन गुवाहाटी से कोलकाता तक चलेगी. खुद पीएम मोदी इसका जल्द ऐलान करने वाले हैं. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी दी. हाल ही में स्वदेशी तकनीक से बनी वंदेभारत स्लीपर ट्रेन का भारतीय रेलवे ने अंतिम हाई-स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया था. यह ट्रायल कोटा–नागदा सेक्शन पर किया गया, जहां ट्रेन ने 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार हासिल की. यह ट्रायल रेलवे सुरक्षा आयुक्त की निगरानी में हुआ था. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी है कि अगले 6 महीने में 8 वंदेभारत स्लीपर ट्रेनें पटरियों पर दौड़ती दिखेंगी. साल के आखिरी तक 12 ट्रेनें चलने लगेंगी. उन्होंने आगे बताया कि असम से निकलने वाली ट्रेन में असमी भोजन मिलेगा, जबकि कोलकाता से निकलने वाली ट्रेन में बंगाली भोजन मिलेगा. चलिए जानते हैं देश की पहली वंदेभारत स्लीपर ट्रेन का रूट और किराया क्या होगा, क्या-क्या फैसिलिटी होंगी. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का किराया कितना होगा?  आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, गुवाहाटी से कोलकाता का थर्ड एसी का किराया 2300 रुपये जबकि सेकंड AC का किराया 3000 रुपये होगा. वहीं, फर्स्ट AC का किराया 3600 रुपये होगा. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कितने कोच हैं और कितने यात्री सफर कर सकेंगे? वंदे भारत स्लीपर एक सेमी हाई-स्पीड ट्रेन है, जो कुल 16 कोच की होगी. इसमें 11 थर्ड एसी, 4 सेकंड एसी और 1 फर्स्ट एसी कोच शामिल हैं. जिसमें थर्ड एसी में 611, सेकंड एसी में 188 और फर्स्ट एसी में 24 बर्थ हैं. ट्रेन में कुल 823 यात्री सफर कर सकेंगे. इसकी स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा तक है. स्लीपर ट्रेन, PM मोदी करेंगे उद्घाटन वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की क्या खासियत है? > आरामदायक बर्थ: विशेष डिजाइन वाली बर्थें, जिनमें बेहतर कुशन और मुलायम गद्दे लगे हैं. लंबा सफर करने में थकान नहीं होगी. > ऑटोमैटिक दरवाजे: कोचों के बीच आने-जाने के लिए ऑटोमैटिक दरवाजे और वेस्टीब्यूल (जुड़े हुए गलियारे) की सुविधा है. जिससे चलते समय भी आसानी से घूमा जा सकता है. > बेहतर सस्पेंशन और कम शोर: ट्रेन में उन्नत सस्पेंशन सिस्टम लगा है, जिससे सफर शांत और आरामदायक रहेगा. शोर भी बहुत कम होगा. > सुरक्षा सुविधाएं: कवच एंटी-कोलिजन सिस्टम और इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम है, जिससे आपातकाल में यात्रियों की आसानी से मदद होगी. > साफ-सफाई: डिसइन्फेक्टेंट तकनीक से कोच हमेशा साफ और कीटाणुमुक्त रहेंगे. > ड्राइवर केबिन: लोको पायलट के लिए आधुनिक कंट्रोल पैनल और सुरक्षा सिस्टम वाला एडवांस केबिन. > बाहरी डिजाइन: एरोडायनामिक लुक, जो ट्रेन को तेज रफ्तार में भी स्थिर रखता है. साथ ही ऑटोमैटिक बाहरी यात्री दरवाजे भी हैं. वंदेभारत ट्रेन स्लीपर ट्रेन के बारे में जानिए     रूट: कोलकाता से गुवाहाटी. यह ट्रेन पूरे बंगाल और असम को कवर करेगी.     कितने कोच होंगे– यह ट्रेन कुल 16 कोच की होगी.     इसमें 11 थर्ड एसी, 4 सेकंड एसी और 1 फर्स्ट एसी कोच शामिल हैं.     ट्रेन में कुल 823 यात्री सफर कर सकेंगे. वंदेभारत स्लीपर ट्रेन के फीचर जानिए     यह एक सेमी हाई-स्पीड ट्रेन है, जिसकी डिजाइन स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा तक है.     इसमें यात्रियों के लिए आरामदायक और मुलायम बर्थ लगाए गए हैं, जिससे लंबा सफर आसान होगा.     कोचों के बीच आने-जाने के लिए ऑटोमैटिक दरवाजे और वेस्टीब्यूल की सुविधा है.     बेहतर सस्पेंशन और कम शोर के कारण ट्रेन का सफर ज्यादा शांत और आरामदायक होगा.     ट्रेन में कवच सुरक्षा प्रणाली और इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम मौजूद है, जिससे सुरक्षा और बढ़ जाती है.     साफ-सफाई के लिए डिसइन्फेक्टेंट तकनीक का इस्तेमाल किया गया है.     लोको पायलट के लिए आधुनिक कंट्रोल और सेफ्टी सिस्टम वाला एडवांस ड्राइवर केबिन दिया गया है.     ट्रेन का बाहरी डिजाइन आकर्षक और एरोडायनामिक है और इसमें ऑटोमैटिक बाहरी दरवाजे भी. कब से चलेगी यह वंदे भारत स्लीपर ट्रेन?     जनवरी में ही वंदेभारत स्लीपर का उद्घाटन     15 से 20 दिन में उद्घाटन होगा.     17 या 18 जनवरी को हो सकता है उद्घाटन     पीएम मोदी दिखाएंगे हरी झंडी. वंदेभारत स्लीपर का किराया कितना होगा?     थर्ड एसी का किराया 2300 रुपए गुवाहाटी से कोलकाता का.     सेकंड AC का किराया 3000     फर्स्ट एसी का किराया 3600 रुपए होगा.  

यूक्रेन ने रूस की तेल रिफायनरी पर हमला किया, आग की लपटें, पुतिन के खिलाफ ड्रोन से बड़ा वार

मॉस्को   दुनिया भर में नए साल का आगाज खुशियां मनाकर किया जा रहा है लेकिन रूस-यूक्रेन में साल 2026 की शुरुआत ड्रोन हमलों से हो रही है. यूक्रेन की सेना ने दावा किया है कि 31 दिसंबर की रात किए गए ड्रोन हमलों में रूस के कई तेल और हथियार ठिकानों को गंभीर नुकसान पहुंचा है. यूक्रेनी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ के मुताबिक, इन हमलों में रूस की प्रमुख तेल रिफाइनरियां, ऑयल टर्मिनल, सैन्य ठिकाने और गोला-बारूद डिपो निशाना बने. रूस के क्रास्नोडार क्षेत्र में स्थित इल्स्की ऑयल रिफाइनरी पर यूक्रेन के ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई. यह 2026 में आग की चपेट में आने वाली रूस की पहली ऑयल रिफाइनरी बताई जा रही है. हमले के बाद रिफाइनरी परिसर से आग और धुएं के बड़े गुबार उठते देखे गए. स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं ने आग पर काबू पाने के लिए राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है. यह घटना रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने की रणनीति की ओर इशारा करती है, जिससे रूस की तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है. रूसी ऑयल रिफाइनरी पर यूक्रेन का हमला क्रास्नोडार क्षेत्र में स्थित रूस की कमजोर नस यानि तेल रिफायनरीज को नुकसान पहुंचाया गया है. तुआप्से ऑयल रिफाइनरी पर ड्रोन हमले के बाद आग लग गई. यूक्रेनी सेना का दावा है कि रिफाइनरी की मुख्य प्रोसेसिंग यूनिट को नुकसान पहुंचा. यह रूस की 10 सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है और रूसी सेना के लिए ईंधन सप्लाई में अहम भूमिका निभाती है. यह रिफाइनरी पहले भी यूक्रेनी हमलों का निशाना बन चुकी है. यूक्रेन ने तमन प्रायद्वीप में स्थित तमननेफ्तेगाज ऑयल टर्मिनल पर भी हमला किया. यह टर्मिनल कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण व निर्यात के लिए अहम है. यूक्रेन की स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स ने कई ड्रोन के जरिए इस कार्रवाई को अंजाम दिया. हमले में टर्मिनल के दो बर्थ और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने का दावा किया गया है. रूसी ऑयल डिपो में आग यूक्रेनी ड्रोन ने मॉस्को से करीब 260 किलोमीटर दूर रयबिन्स्क शहर में स्थित रोसरेज़रव के टेम्प ऑयल डिपो को भी निशाना बनाया. यह डिपो रूस के रणनीतिक तेल भंडार का हिस्सा है. हमले के बाद यहां भी बड़ी आग लगने की खबर है, यूक्रेन ने रूस के कब्जे वाले क्रीमिया और डोनेत्स्क क्षेत्रों में भी हमले किए. क्रीमिया में रूसी नदी नौकाओं के एक अस्थायी सैन्य अड्डे को नुकसान पहुंचाया गया, जबकि डोनेत्स्क में गोला-बारूद और लॉजिस्टिक्स डिपो नष्ट करने का दावा किया गया है. साल 2025 के दौरान यूक्रेन ने रूस के भीतर तेल और ऊर्जा ढांचे पर ड्रोन हमले तेज किए हैं. इन हमलों को युद्ध को रूस के घर तक पहुंचाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. शांति वार्ताओं के बावजूद, दोनों देशों के बीच संघर्ष थमता नजर नहीं आ रहा है.

आज से लागू होंगे 5 बड़े बदलाव, जो हर घर और जेब पर करेंगे असर!

 नई दिल्ली नए साल (New Year 2026) की शुरुआत हो चुकी है और साल का पहला दिन देश में कई बड़े बदलाव लेकर आया है. जी हां, 1 जनवरी 2026 से कई ऐसे चेंज (Rule Change From 1st January) लागू हो रहे हैं, जो घर की रसोई से लेकर कार के शौकीनों तक की जेब का बोझ बढ़ाने वाला साबित होगा. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने जहां दिल्ली, मुंबई और कोलकाता समेत सभी शहरों में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में तगड़ा इजाफा (LPG Cylinder Price Hike) किया है, तो वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिग्गज कंपनियों ने अपनी कारों के दाम में बढ़ोतरी कर झटका दिया है. आइए ऐसे ही पांच बड़े बदलावों के बारे में जानते हैं… पहला बदलाव: LPG Cylinder हो गया महंगा 1 जनवरी 2026 की शुरुआत महंगाई के झटके के साथ हुई है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने देशभर में LPG Cylinder की कीमतों में इजाफा कर दिया है. ये बढ़ोतरी 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर की गई है और साल के पहले दिन से ये 111 रुपये तक महंगा हो गया है. ताजा बदलाव के बाद दिल्ली में 1580.50 रुपये का मिलने वाला 19Kg LPG Cylinder अब 1691.50 रुपये, कोलकाता में 1684 रुपये की जगह 1795 रुपये, मुंबई में 1531.50 रुपये की जगह 1642.50 रुपये और चेन्नई में ये 1739.5 रुपये की जगह महंगा होकर 1849.50 रुपये का हो गया है. बता दें कि 14 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें नहीं बदली हैं और ये 8 अप्रैल 2025 के रेट पर ही मिल रहा है.   वहीं दूसरी ओर इसके अलावा नए साल की शुरुआत से ऐन पहले ही Delhi-NCR के लोगों को गैस कंपनी ने PNG Price Cut करके बड़ा तोहफा दिया. IGL ने अपने कस्टमर्स के लिए डोमेस्टिक PNG की कीमतों में ₹0.70 प्रति SCM की बड़ी कटौती की घोषणा की है. इसके बाद दिल्ली में पीएनजी प्राइस ₹47.89 प्रति SCM, गुरुग्राम में ₹46.70 प्रति SCM और नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में ₹47.76 प्रति SCM हो गया.  दूसरा बदलाव: हवाई सफर होगा सस्ता जहां एक ओर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने LPG Price Hike कर झटका दिया है, तो वहीं 1 जनवरी 2026 की तारीख हवाई यात्रियों के लिए राहत भरी खबर लेकर आई है. दरअसल, कंपनियों ने हवाई ईंधन या जेट फ्यूल के दाम घटा (ATF Price Cut) दिए हैं. दिल्ली में इसकी कीमत 99,676.77 रुपये से कम करके अब 92,323.02 रुपये प्रति किलोलीटर की गई है. कोलकाता में अब एयर टर्बाइन फ्यूल का दाम घटकर 95,378.02 रुपये प्रति किलोलीटर रह गया है, जो अब तक 1,02,371.02 रुपये प्रति किलोलीटर था. इसके अलावा मुंबई में एटीएफ 93,281.04 रुपये से कम होकर 86,352.19 रुपये, जबकि चेन्नई में 1,03,301.80 रुपये से घटकर 95,770 रुपये कर दिया गया है. ATF Price में कटौती के परिचालन लागत में कमी आती है और एयरलाइंस हवाई टिकट के दाम घटा सकती हैं, जिससे हवाई यात्रियों का सफर सस्ता हो सकता है.   तीसरा बदलाव: Car खरीदना हुआ महंगा साल 2026 का पहला दिन कार खरीदारों के लिए झटका लेकर आया है. दरअसल, कई दिग्गज कार कंपनियों ने अपनी कारों के दाम में इजाफा करने का फैसला किया है. बढ़ती इनपुट लागत और ऑपरेशनल खर्च का हवाला देते हुए इन कंपनियों ने अपनी कारों के दाम में बढ़ोतरी (Car Price Hike From 1st January) का ऐलान किया है.  जर्मन कार कंपनी मर्सिडीज बेंज के सभी मॉडल की कीमतों में 1 जनवरी से 2% का इजाफा हो रहा है. BMW ने भी पहली तारीख से भारत में बिकने वाली अपनी कारों की कीमतें 3% बढ़ाई हैं. चीनी कार कंपनी BYD ने Sealion-7 का दाम बढ़ाने का ऐलान किया है, तो वहीं MG Motors  पेट्रोल-डीजल और ईवी सभी वैरिएंट की कीमतों में 2% की बढ़ोतरी कर रही है. जापानी कार निर्माता निसान ने अपनी कारों के दाम 3%, तो रेनो ने सभी मॉडलों पर 2% दाम बढ़ाए हैं. Honda Cars भी इसी महीने कीमतों में इजाफा कर सकती है.   चौथा बदलाव: ऑस्ट्रेलिया को Zero Tariff  निर्यात जैसा कि केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बीते सोमवार को ऐलान किया था कि भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते के 3 साल पूरे होने पर जीरो टैरिफ निर्यात का फैसला किया गया है. इसके मुताबिक, 1 जनवरी 2026 से ऑस्ट्रेलिया भारतीय निर्यात के लिए अपनी सभी टैरिफ लाइनों को जीरो (Zero Tariff) कर रहा है. इसका मतलब है कि पहली तारीख से भारत से ऑस्ट्रेलिया जाने वालीं 100% वस्तुओं पर कोई भी टैरिफ नहीं लगेगा. पांचवां बदलाव: पहले महीने बंपर Bank Holiday जनवरी का महीना जहां तमाम बड़े बदलाव लेकर आया है, तो इस महीने बैंकों में भी बंपर हॉलिडे (Bank Holiday In January 2026) रहने वाले हैं. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की वेबसाइट पर अपलोड लिस्ट को देखें, तो जनवरी में 16 दिन बैंक बंद रहेंगे. मकर संक्रांति से लेकर गणतंत्र दिवस समेत विभिन्न मौकों पर बैंकों में कामकाज नहीं होगा. हालांकि, ये Bank Holidays अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हो सकते हैं. आप छुट्टी के बावजूद ऑनलाइन बैंकिंग (Online Banking) के जरिए अपने बैंकिंग काम निपटा सकते हैं, जो 24X7 ओपन रहती हैं.

PM Surya Ghar Yojana: 25 लाख घरों को मिला तोहफा, 300 यूनिट फ्री और ₹78,000 सब्सिडी के साथ मुफ्त बिजली का लाभ

 नई दिल्ली कड़ाके की सर्दी का मौसम हो, तो घरों में गीजर-हीटर का इस्तेमाल बढ़ जाता है. वहीं तेज झुलसाती हुई गर्मी में लोग एसी-फ्रिज के बिना रह नहीं पाते. इस बीच आमतौर पर उनके दिमाग में बढ़े हुए बिजली के बिल को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है. लेकिन एक सरकारी स्कीम (Govt Scheme) ने तगड़े बिजली बिल से लोगों को निजात दिलाने का काम किया है. हम बात कर रहे हैं पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (PM Surya Ghar Muft Bijli Yojna) की, जिसने बिजली बिल के झंझट से मुक्ति दिलाने का काम किया है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बीते साल फरवरी 2024 में शुरू हुई इस योजना से अब तक 25 लाख से ज्यादा परिवार बढ़े हुए बिजली बिल को Bye-Bye कह चुके हैं और उनकी बिल 'जीरो' हो गया है.  सरकार का टारगेट- 1 करोड़ घर   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने देश के लोगों, खासतौर पर ज्यादा बिजली बिल की चिंता करने वाले परिवारों को एक बड़ी सौगात देते हुए फरवरी 2024 में इस पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (PM Surya Ghar Muft Bijli Yojna) को लॉन्च किया था. केंद्र सरकार ने इस स्कीम के तहत साल 2027 तक 1 करोड़ घरों पर Solar Panel लगवाने का टारगेट सेट किया है और इसे शुरुआत से ही जोरदार रिस्पांस भी मिल रहा है. मोदी सरकार की सबसे खास सरकारी योजनाओं में शामिल इस स्कीम में मिलने वाले लाभ इसे खासा पॉपुलर बना रहे हैं. बता दें पीएम सूर्य घर योजना में जहां 300 यूनिट फ्री बिजली मिलती है, तो सरकार की ओर से अपने घर की छत पर Solar Panel लगवाने पर आने वाले खर्च में 78000 रुपये तक की भारी-भरकम सब्सिडी का लाभ भी दिया जाता है.  अब तक 25 लाख घर हुए रोशन सरकारी सूत्रों की मानें, तो इस PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana को अपनाकर देश के करीब 25 लाख से ज्यादा परिवारों ने ज्यादा बिजली बिलों को अलविदा कह दिया है. PM सूर्य घर के जरिए दी जाने वाली 78,000 रुपये तक की तगड़ी सब्सिडी के साथ सोलर पैनल पूरे भारत में इन लाखों घरों को रोशन कर रहे हैं, जिससे राहत, बचत और क्लीन एनर्जी एक साथ मिल रही है. इस योजना के जरिए Zero Electricity Bill प्राप्त करने वाले लाभार्थियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.  सबसे ज्यादा Solar Panel इन राज्यों में (PIB Data 9 दिसंबर 2025) राज्य      सोलर पैनल इंस्टॉलेशन डेटा गुजरात     4,93,161  महाराष्ट्र     3,63,811   उत्तर प्रदेश      3,02,140  केरल      1,69,227  राजस्थान     1,08,584 मध्य प्रदेश     78,062 आंध्र प्रदेश     76,617 असम     63,887 उत्तराखंड     55,229 हरियाणा     44,937 25 साल कर बिजली बिल से मुक्ति PM Surya Ghar Yojna के तहत आप सिर्फ एक बार निवेश करके दो दशक से ज्यादा समय के लिए 'जीरो बिजली बिल' के साथ खूब बिजली का इस्तेमाल किया जा सकता है. दरअसल, इस Govt Scheme के तहत घर की छतों पर जो सोलर पैनल इंस्टॉल किए जाते हैं, आमतौर पर इनकी लाइफ करीब 25 साल अनुमानित होती है. इन्हें आप स्कीम के तहत अपनी खपत के आधार पर लगवा सकते हैं.    सरकार दे रही फ्री बिजली और तगड़ी सब्सिडी PM Surya Ghar Scheme में सरकार की ओर जहां 300 यूनिट फ्री बिजली दी जाती है, तो वहीं इस स्कीम के तहत सोलर पैनल लगावाने पर सरकारी सब्सिडी (Govt Subsidy) भी मिलती है. सरकार 0-150 यूनिट खपत के लिए उपयुक्ति 1-2 किलोवाट के सोलर पैनल इंस्टॉलेशन पर 30-60 हजार रुपये, 150-300 यूनिट बिजली की खपत के लिए जरूरी 2-3 किलोवाट या तीन किलोवाट से ज्यादा के पैनल पर 60-78 हजार तक सब्सिडी दे रही है.  आवेदन करना है बेहद आसान     वेबसाइट https://pmsuryaghar.gov.in पर जाएं.     होमपेज पर 'अप्लाई फॉर रूफटॉप सोलर' के ऑप्शन को चुनें.     नए पेज पर अपना राज्य और बिजली वितरण कंपनी का चयन करें.      इसके बाद बिजली उपभोक्ता नंबर, मोबाइल नंबर और ईमेल डालें.     नए पेज पर कंज्यूमर नंबर और मोबाइल डालकर लॉगइन करें.     अब फॉर्म खुलेगा, जहां दिशा-निर्देशों के तहत RTS पैनल अप्लाई करें.     इस प्रोसेस के बाद आपको फीजिबिलिटी अप्रूवल मिलेगा.     इसके बाद आप अपने DISCOM के साथ रजिस्टर्ड वेंडर से प्लांट इंस्टॉल करा सकेंगे.     इंस्टालेशन के बाद आपको प्लांट डीटेल के साथ नेट मीटर के लिए आवेदन करना होगा.     मीटर इंस्टॉल होने और DISCOM से जांच के बाद कमीशनिंग सर्टिफिकेट जारी होगा.     इसके जारी होने पर आप पोर्टल से बैंक खाता डीटेल और कैंसिल चेक देंगे, जिसमें सब्सिडी आएगी.  

कार निकोबार वायुसेना बेस का रनवे अपग्रेड, सीडीएस जनरल अनिल चौहान 2 जनवरी को करेंगे उद्घाटन

 नई दिल्ली भारतीय वायुसेना के कार निकोबार एयर बेस को बड़ा अपग्रेड मिला है. अंडमान और निकोबार कमांड के तहत आने वाले इस महत्वपूर्ण बेस का रनवे नया बनाया गया है. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान 2 जनवरी 2026 को इस अपग्रेडेड रनवे का उद्घाटन करेंगे. यह बेस अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में स्थित है. रणनीतिक रूप से बहुत अहम है. यहां से मलक्का जलडमरूमध्य पर नजर रखी जा सकती है, जो दुनिया की सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. रनवे की खासियतें कार निकोबार एयर फोर्स स्टेशन का रनवे करीब 2717 मीटर लंबा और 43 मीटर चौड़ा है. यह कंक्रीट का बना हुआ है. तीनों सेनाओं (थलसेना, वायुसेना, नौसेना) के लिए महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशनल हब का काम करेगा. अपग्रेड में शामिल हैं…     बड़ा एप्रन एरिया – अब ज्यादा विमान एक साथ खड़े हो सकते हैं और ऑपरेशन तेजी से हो सकेंगे.     नया टैक्सी ट्रैक – जो जरूरत पड़ने पर दूसरा रनवे बन सकता है.     नई डिटैचमेंट के साथ 37 विंग बेस अब और मजबूत हो गया है. लड़ाकू विमानों की तैनाती यहां Su-30MKI लड़ाकू विमान मुख्य भूमिका निभाएंगे. इसके बाद मिराज विमान भी आएंगे. ये विमान लंबी दूरी की फायरिंग और स्ट्राइक अभ्यास करेंगे, जिससे पूर्वी क्षेत्र में लड़ाकू तैयारी बढ़ेगी. मिसाइल परीक्षण में मदद यह अपग्रेड अंडमान-निकोबार क्षेत्र में भारतीय सेनाओं की मिसाइल परीक्षण क्षमता को भी बढ़ाएगा. इससे भारत की रक्षा स्थिति और मजबूत होगी. यह अपग्रेड भारत की चल रही आधुनिकीकरण योजनाओं का हिस्सा है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति और मजबूत होगी.