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धामी सरकार का डबल फायदा: प्राकृतिक गैस पर VAT घटा, कलाकारों की पेंशन में 100% बढ़ोतरी

उत्तराखंड उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने प्राकृतिक गैस पर वैट की दर घटाकर पांच प्रतिशत करने, लेखकों और कलाकारों की वृद्धावस्था मासिक पेंशन दोगुनी करने और चिकित्सा शिक्षा में प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति की आयु सीमा बढ़ाकर 62 वर्ष करने समेत कई अहम फैसले लिए।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षीसुंदरम ने संवाददाताओं को बताया कि प्रदेश में हरित और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पीएनजी और सीएनजी पर वर्तमान में लागू 20 प्रतिशत वैट को घटाकर पांच प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल ने उत्तरकाशी जिले के आपदा प्रभावित धराली और आसपास के क्षेत्रों के ‘रॉयल डिलीशियस' सेब को 51 रुपये प्रति किलोग्राम तथा ‘रेड डिलीशियस' व अन्य किस्म के सेबों को 45 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा खरीदे जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।  एक अन्य निर्णय में प्रदेश के कलाकारों और लेखकों को वृद्धावस्था में जीवनयापन के लिए दी जा रही 3,000 रुपये की मासिक पेंशन को बढ़ाकर 6,000 रुपये करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। प्रमुख सचिव ने बताया कि व्यापार सुगमता के तहत कम जोखिम वाले भवनों जैसे एकल आवासीय या छोटे व्यावसायिक भवनों, के मानचित्रों को सूचीबद्ध वास्तुकार द्वारा स्व-प्रमाणित किए जाने की व्यवस्था को भी मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है।  राज्य मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा (संशोधन) नियमावली 2025 को भी स्वीकृति प्रदान की जिसके तहत प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति की अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई है। इसके अलावा श्रीनगर स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में संविदा, दैनिक वेतन, नियत वेतन और प्रबंधन समिति के माध्यम से कार्यरत कुल 277 कार्मिकों को समान कार्य–समान वेतन दिए जाने के मामले को मंत्रिमंडल की उपसमिति को भेजने का निर्णय लिया गया है।  मंत्रिमंडल ने पीएमएचएस संवर्ग, यानी राज्य सरकार के अधीन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत विशेषज्ञ चिकित्सकों को पर्वतीय, दुर्गम और अति-दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देने और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए 50 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता (वेतन स्तर में न्यूनतम वेतनमान का 50 प्रतिशत) दिए जाने का भी फैसला किया।   

नववर्ष पर माता वैष्णो देवी यात्रा: श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने कसी कमर

कटड़ा  नए साल के अवसर पर श्री माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए कटड़ा पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात, ठहराव और स्वास्थ्य सेवाओं सहित सभी आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। जिला प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की है। वहीं, भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम भी किए गए हैं। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, शौचालय, साफ-सफाई और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। एसडीएम कटड़ा पीयूष दोत्रा ने बताया कि नए साल के अवसर पर श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा होता है, जिसे देखते हुए प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। 

गाजा प्लान पर पाकिस्तान की बड़ी चाल, आर्मी चीफ मुनीर ने US से साधा संपर्क; जानिए पूरा रणनीतिक खाका

इस्लामाबाद  पाकिस्तान गाजा में प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टैबलाइजेशन फोर्स (ISF) में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। इस्लामाबाद ने संकेत दिया है कि यदि यह फोर्स तैनात होती है तो पाकिस्तान चाहता है कि उसका सैन्य नेतृत्व इसकी कमान संभाले और एक वरिष्ठ पाकिस्तानी जनरल इस फोर्स का नेतृत्व करे। हालांकि, पाकिस्तान की भागीदारी राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक शर्तों से जुड़ी होगी।   मीडिया के हवाले से लिखा है कि पाकिस्तान की यह भूमिका व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन पर निर्भर करेगी, जिसमें इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे पर स्पष्ट राजनीतिक आश्वासन और पाकिस्तान के लिए दीर्घकालिक आर्थिक व सुरक्षा गारंटी शामिल हैं। इस प्रस्तावित फोर्स को गाजा में युद्धोपरांत स्थिरता बहाल करने के उद्देश्य से तैनात करने पर विचार हो रहा है। अमेरिका-पाकिस्तान रक्षा संवाद तेज अमेरिका और पाकिस्तान के वरिष्ठ रक्षा अधिकारी आईएसएफ के गठन, उसके जनादेश और संचालन प्रक्रियाओं को लेकर नियमित संपर्क में हैं। आने वाले समय में इस फोर्स की संरचना, योजना ढांचे और टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर उच्चस्तरीय बातचीत होने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर के बीच मुलाकात की संभावना है। इसके अलावा, पाकिस्तान की अलग-अलग कूटनीतिक बैठकों में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से भी संपर्क की बात सामने आ रही है। अमेरिकी नेतृत्व की भी दिलचस्पी खुफिया जानकारियों के अनुसार, अमेरिका का एक वरिष्ठ राजनयिक और रक्षा प्रतिनिधिमंडल जल्द ही पाकिस्तान का दौरा कर सकता है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हालात अनुकूल होने पर गाजा में अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण तंत्र को तेजी से तैनात करने में रुचि दिखाई है। मध्य पूर्व दौरों का रणनीतिक महत्व आसिम मुनीर के हालिया सऊदी अरब, जॉर्डन, मिस्र और लीबिया दौरों को पाकिस्तान की संभावित भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है। ये दौरे आईएसएफ में पाकिस्तान की भागीदारी और उसकी भूमिका तय करने को लेकर प्रारंभिक परामर्श का हिस्सा बताए जा रहे हैं। यह घटनाक्रम सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान के रणनीतिक रक्षा सहयोग समझौते के बाद सामने आया है और इसे मध्य पूर्व में पाकिस्तान की सैन्य मौजूदगी को फिर से मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। पाकिस्तान की प्रमुख शर्तें प्रस्तावित ढांचे के तहत, पाकिस्तान ने कई अहम शर्तें रखी हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के समाधान के लिए दो राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) पर स्पष्ट और सार्वजनिक प्रतिबद्धता, जिसमें एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश की स्थापना शामिल हो। पाकिस्तान चाहता है कि उसकी भूमिका शुरुआत में शांति स्थापना और स्थिरीकरण तक सीमित रहे और गाजा में किसी भी प्रकार की व्यापक निरस्त्रीकरण प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल न होना पड़े। इसके अलावा, इस्लामाबाद ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, मिस्र और अमेरिका से अपने नेतृत्व प्रस्ताव को लेकर एकजुट समर्थन की मांग की है। आर्थिक मोर्चे पर, पाकिस्तान दीर्घकालिक निवेश, सहायता पैकेज और सुरक्षा सहयोग चाहता है ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को स्थिर किया जा सके। अमेरिका से पुराने सैन्य संबंधों की बहाली की मांग पाकिस्तान ने अमेरिका से अपना मेजर नॉन-नाटो एलाय (MNNA) दर्जा बहाल करने की भी मांग की है, जो उसे 2004 में दिया गया था। इसके साथ ही, सैन्य प्रशिक्षण और उपकरण आपूर्ति से जुड़े कार्यक्रमों को पूरी तरह फिर से शुरू करने की बात भी रखी गई है, जिन्हें पिछली अमेरिकी सरकारों के दौरान सीमित कर दिया गया था। अफगानिस्तान से उत्पन्न आतंकवाद के खिलाफ रणनीतिक सहयोग को भी पाकिस्तान अपनी प्रमुख मांगों में शामिल कर रहा है। इजरायल से सुरक्षा आश्वासन की मांग पाकिस्तान ने इजरायल से स्पष्ट सुरक्षा आश्वासन की मांग की है, खासकर भारत के साथ इजरायल के करीबी रणनीतिक रिश्तों को ध्यान में रखते हुए। पाकिस्तान चाहता है कि आईएसएफ के लिए एक संयुक्त समन्वय और संचार मुख्यालय बनाया जाए, जिसमें अमेरिका, इजरायल और अन्य प्रमुख भागीदार देश शामिल हों। हालांकि ये सभी चर्चाएं अभी प्रारंभिक चरण में हैं, लेकिन अमेरिका-पाकिस्तान के बीच बढ़ता संवाद इस बात का संकेत है कि इस्लामाबाद बदलते क्षेत्रीय और वैश्विक हालात के बीच खुद को मध्य पूर्व में एक अहम सुरक्षा भागीदार के रूप में फिर से स्थापित करना चाहता है।

देश में 3 नई एयरलाइंस, सरकार का बड़ा फैसला, इंडिगो का घमंड टूट सकता है

नई दिल्ली  भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए यह सप्ताह बेहद अहम साबित हुआ है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने देश के आसमान में उड़ान भरने की तैयारी कर रही तीन नई एयरलाइंस को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्रदान किया है. शंख एयर, अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस को मिली इस मंजूरी को एविएशन सेक्टर के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. इससे न सिर्फ यात्रियों के लिए विकल्प बढ़ेंगे, बल्कि हवाई सेवाओं में प्रतिस्पर्धा भी तेज होगी. तीन नई एयरलाइंस को मिला ऑपरेशन का रास्ता पिछले एक सप्ताह के दौरान नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने इन तीनों नई एयरलाइंस की टीमों से मुलाकात की. शंख एयर को पहले ही मंत्रालय से NOC मिल चुका था, जबकि अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस को इसी सप्ताह यह महत्वपूर्ण अनुमति दी गई. NOC मिलने के बाद अब ये एयरलाइंस आगे के लाइसेंस और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी कर व्यावसायिक उड़ानों की तैयारी कर सकेंगी. मंत्रालय का मानना है कि नई एयरलाइंस के आने से सेक्टर में संतुलित विकास होगा. क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर विशेष जोर मंत्रालय के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी (Regional Connectivity) को और अधिक मजबूत करना है। सरकार की योजना छोटे शहरों को बड़े महानगरों से जोड़ने की है, ताकि आम नागरिकों के लिए हवाई सफर और अधिक सुलभ और किफायती हो सके। इन नई एयरलाइंस के आने से टियर-2 और टियर-3 शहरों के बीच आवाजाही आसान होगी, जिससे पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। शंख एयर को मिला एनओसी इन तीनों एयरलाइंस में से शंख एयर अपनी तैयारियों में सबसे आगे चल रही है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, शंख एयर को पहले ही नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिल चुका था, जो परिचालन शुरू करने की दिशा में एक अनिवार्य कदम है। यह एयरलाइन उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अपने मुख्य केंद्र (हब) बनाने की योजना पर काम कर रही है, जिससे उत्तर भारत में हवाई सेवाओं का विस्तार होगा। यात्रियों को मिलेगा नया विकल्प नई एयरलाइंस के बाजार में उतरने से विमानन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिसका सीधा फायदा यात्रियों को टिकट दरों में कमी के रूप में मिल सकता है। मंत्रालय अब इन कंपनियों के सुरक्षा मानकों और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं की जांच कर रहा है, ताकि जल्द से जल्द इनके उड़ान भरने की तारीखें तय की जा सकें। विमानन क्षेत्र में इस विस्तार से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है। बाजार में बढ़ेगा कंपीटिशन, घटेगा यात्रियों का बोझ विमानन मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, Shankh Air (शंख एयर), AI Hind Air (एआई हिंद एयर) और FlyExpress (फ्लाईएक्सप्रेस) को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर दिया गया है. सरकार की कोशिश है कि बाजार में केवल चुनिंदा कंपनियों पर निर्भरता कम की जाए. जब आसमान में ज्यादा विमान होंगे और अधिक कंपनियां अपनी सेवाएं देंगी, तो न केवल किराये में कमी आने की उम्मीद है, बल्कि यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा. उत्तर प्रदेश से लेकर केरल तक फैलेगा नेटवर्क ये तीनों एयरलाइंस देश के अलग-अलग कोनों से अपना ऑपरेशन शुरू करेंगी, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी (Regional Connectivity) को काफी मजबूती मिलेगी:     शंख एयर’ यूपी के हवाई नक्शे को बदलने की तैयारी में है. इसका मुख्य हब लखनऊ और जेवर (नोएडा) के नए एयरपोर्ट को बनाया गया है.     ‘एआई हिंद एयर’ केरल के कोच्चि से अपनी उड़ानें शुरू करेगी, जबकि ‘फ्लाईएक्सप्रेस’ हैदराबाद से अपना संचालन संभालेगी. इन दोनों के आने से दक्षिण भारतीय राज्यों के यात्रियों को काफी राहत मिलने वाली है. क्यों पड़ी नई एयरलाइंस की जरूरत? पिछले कुछ समय से एविएशन मार्केट में केवल दो बड़े खिलाड़ियों का दबदबा होने के कारण किरायों में मनमानी और सेवाओं में कमी की शिकायतें आ रही थीं. हाल ही में प्रमुख एयरलाइंस के साथ हुए तकनीकी विवादों ने सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया कि विकल्प बढ़ाना अब जरूरी हो गया है. इन तीन नई कंपनियों के आने से मार्केट में बैलेंस बनेगा और आम आदमी के लिए हवाई सफर पहले से कहीं ज्यादा सुगम और किफायती हो जाएगा. दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में भारत नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कहना है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में बनाई गई नीतियों के चलते भारत आज दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल हो चुका है. हवाई यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इसी को देखते हुए सरकार नए खिलाड़ियों को प्रोत्साहित कर रही है. राम मोहन नायडू ने कहा कि मंत्रालय का लगातार प्रयास रहा है कि अधिक से अधिक एयरलाइंस भारतीय आसमान में उतरें, ताकि यात्रियों को बेहतर सेवाएं और किफायती किराए मिल सकें. UDAN योजना से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती सरकार की उड़ान (UDAN) योजना ने पहले ही स्टार एयर, इंडिया वन एयर और फ्लाई91 जैसी छोटी एयरलाइंस को क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने का मौका दिया है. इन एयरलाइंस ने छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों को हवाई नक्शे पर लाने में मदद की है. मंत्रालय का मानना है कि शंख एयर, अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस के आने से यह दायरा और बढ़ेगा. आने वाले समय में भारतीय विमानन क्षेत्र में रोजगार, निवेश और बुनियादी ढांचे के स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

बीएमसी चुनाव से पहले बड़ा सियासी दांव: उद्धव–राज साथ आए, बोले— मुंबई की सत्ता मराठी हाथों में रहेगी

मुंबई   महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक घटनाक्रम देखने को मिला है। पंचायत चुनाव में असफलता देख शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों के लिए गठबंधन का ऐलान कर दिया है। लंबे समय से अलग-अलग राह पर चल रहे ठाकरे बंधुओं (उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे) का साथ आना महाराष्ट्र की सियासत के लिए एक बड़ी घटना है। उद्धव ठाकरे ने मनसे प्रमुख राज ठाकरे के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि हम साथ रहने के लिए एक साथ आए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग भाजपा के भीतर जारी घटनाओं को सहन नहीं कर सकते, वे शिवसेना (UBT)-मनसे गठबंधन के साथ भी आ सकते हैं। राज ठाकरे ने कहा, "महाराष्ट्र किसी भी झगड़े से बड़ा है। हम घोषणा करते हैं कि हमारा गठबंधन बन गया है, मुंबई का मेयर मराठी होगा और हमारा होगा।" कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने साफ शब्दों में कहा कि महाराष्ट्र की सियासत में नेतृत्व का अधिकार ठाकरे परिवार के पास ही रहा है और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र का नेतृत्व ठाकरे परिवार का है। महाराष्ट्र को सिर्फ ठाकरे ही नेतृत्व दे सकते हैं।” उद्धव ठाकरे की इस बात पर सभा में मौजूद समर्थकों ने जोरदार तालियों और नारों के साथ समर्थन जताया। इस गठबंधन की घोषणा के बाद शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने इसे एक ऐतिहासिक दिन करार दिया। उन्होंने कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़ और लोगों के उत्साह का हवाला देते हुए कहा कि जनता इस एकजुटता का खुले दिल से स्वागत कर रही है। संजय राउत ने कहा, “यहां मौजूद लोगों की संख्या और उत्साह को देखते हुए कहा जा सकता है कि आज का दिन ऐतिहासिक है। यह सिर्फ मंच साझा करने का नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का प्रतीक है।”

पलूशन पर नितिन गडकरी की चिंता: दिल्ली आते ही 3 दिन में एलर्जी की समस्या

नई दिल्ली  केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली-एनसीआर में हर साल गंभीर होती जा रही प्रदूषण समस्या पर चिंता जताते हुए कहा है कि राजधानी में कुछ दिन रहने पर ही उन्हें एलर्जी की समस्या होने लगती है। उन्होंने यह बात दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही। भाजपा नेता नितिन गडकरी वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त उदय माहुरकर की पुस्तक के विमोचन समारोह में बोल रहे थे।   इस दौरान उन्होंने दिल्ली की बिगड़ती हवा को लेकर अपनी व्यक्तिगत परेशानी भी साझा की। उन्होंने कहा, “मैं यहां तीन दिन रहता हूं और मुझे प्रदूषण की वजह से एलर्जी हो जाती है।” अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया कि दिल्ली-एनसीआर में करीब 40 फीसदी प्रदूषण परिवहन क्षेत्र से आता है। उन्होंने कहा, “मैं खुद परिवहन मंत्री हूं और यह सच है कि 40 प्रतिशत प्रदूषण परिवहन के कारण होता है।” गडकरी ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदूषण से निपटने के लिए परिवहन क्षेत्र में बड़े और त्वरित बदलाव की जरूरत है। केंद्रीय मंत्री ने जीवाश्म ईंधन (फॉसिल फ्यूल) पर निर्भरता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों पर आधारित ईंधन न सिर्फ प्रदूषण बढ़ा रहे हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी भारी बोझ डाल रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह कैसा राष्ट्रवाद है? जीवाश्म ईंधन सीमित हैं और प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। क्या हम इनका इस्तेमाल कम नहीं कर सकते? इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा क्यों नहीं दे सकते, जिससे शून्य प्रदूषण संभव हो?” गडकरी ने बताया कि भारत हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये जीवाश्म ईंधनों के आयात पर खर्च करता है। अपने अनुभव साझा करते हुए नितिन गडकरी ने अपनी एथेनॉल से चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल कार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह वाहन पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है, प्रदूषण कम करता है, आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाता है और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करता है। गडकरी का यह बयान ऐसे समय आया है जब दिल्ली की वायु गुणवत्ता एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गई है। मंगलवार को राजधानी का 24 घंटे का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 412 दर्ज किया गया, जिससे दिल्ली देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बन गया। वहीं, नोएडा 426 AQI के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकती है।  

एपस्टीन फाइल्स में राष्ट्रपति ट्रंप पर गंभीर आरोप, अमेरिकी DOJ ने दावों को बताया निराधार

वाशिंगटन अमेरिका के न्याय विभाग द्वारा जारी जेफरी एपस्टीन जांच से जुड़े नए दस्तावेजों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक गंभीर लेकिन अप्रमाणित आरोप सामने आया है. इन दस्तावेजों में दावा किया गया है कि दशकों पहले ट्रंप पर एक महिला ने बलात्कार का आरोप लगाया था. हालांकि न्याय विभाग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें "असत्य और सनसनीखेज" करार दिया है.  सार्वजनिक किए गए ये रिकॉर्ड एप्सटीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट के तहत जारी किए गए हैं, जिसके तहत एपस्टीन से जुड़े संघीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करना अनिवार्य है. न्याय विभाग ने साफ किया कि इन फाइल्स में दर्ज आरोपों की कोई पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें तथ्यात्मक सत्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. न्याय विभाग ने असामान्य रूप से सार्वजनिक बयान जारी करते हुए कहा कि इनमें से कुछ आरोप 2020 के राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले एफबीआई को भेजे गए थे और उनमें कोई विश्वसनीय आधार नहीं था. विभाग ने कहा, "स्पष्ट कर देना जरूरी है कि ये दावे झूठे और निराधार हैं. अगर इनमें जरा भी सच्चाई होती, तो इन्हें पहले ही राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ इस्तेमाल किया जा चुका होता." ड्राइवर ने सुनी थी लड़की के "शोषण" की बात जारी दस्तावेजों में जांच एजेंसियों को भेजी गई कच्ची जानकारियां शामिल हैं. इनमें एक कथित पीड़िता का आरोप, जिसमें उसने ट्रंप और एपस्टीन दोनों पर बलात्कार का दावा किया, और एक लिमोजिन ड्राइवर का बयान भी शामिल है, जिसने कथित तौर पर ट्रंप को एपस्टीन द्वारा एक लड़की के "शोषण" की बात करते सुना था. हालांकि दस्तावेजों से यह स्पष्ट नहीं होता कि एफबीआई ने इन जानकारियों पर आगे कोई कार्रवाई की या नहीं. बताया गया है कि आरोप लगाने वाली महिला की बाद में सिर में गोली लगने से मौत हो गई थी. न्याय विभाग ने जोर देकर कहा कि फाइल्स में कहीं भी यह संकेत नहीं है कि ट्रंप को किसी आपराधिक मामले में संदिग्ध माना गया हो या उनके खिलाफ औपचारिक जांच की गई हो. यह जरूर माना गया कि ट्रंप और एपस्टीन के बीच 2000 के दशक के मध्य तक सामाजिक संपर्क रहे थे, लेकिन किसी अपराध से उनका सीधा संबंध नहीं बताया गया. अब तक 30 हजार दस्तावेज जारी किए गए इन दस्तावेज़ों में शामिल एक 2020 के ईमेल में यह जिक्र है कि ट्रंप ने एपस्टीन के निजी विमान में पहले बताई गई संख्या से अधिक बार यात्रा की थी. हालांकि न्याय विभाग ने दोहराया कि केवल आरोप का दस्तावेजों में होना, उसके सच होने का प्रमाण नहीं है. करीब 30,000 दस्तावेज इस चरण में जारी किए गए हैं, जिनमें भारी कटौती की गई है ताकि पीड़ितों की पहचान सुरक्षित रखी जा सके. आने वाले हफ्तों में और दस्तावेज जारी होने की संभावना है. न्याय विभाग का कहना है कि पारदर्शिता का मतलब यह नहीं कि हर आरोप को सत्य मान लिया जाए.

वैश्विक मंच पर भारत की आवाज़ बुलंद, ऑक्सफोर्ड बहस में पाक प्रतिनिधि की दलीलें ध्वस्त

नई दिल्ली  ऑक्सफोर्ड यूनियन में भारत-पाकिस्तान से जुड़े एक प्रस्ताव को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि ऑक्सफोर्ड यूनियन के पाकिस्तानी मूल के अध्यक्ष मूसा हर्राज ने एक ऐसी बहस में पाकिस्तान की जीत का दावा कर दिया, जो कभी विधिवत आयोजित ही नहीं हुई। यह घटनाक्रम सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक हलकों तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विवादित प्रस्ताव का कहना था, “यह सदन मानता है कि पाकिस्तान के प्रति भारत की नीति, सुरक्षा नीति के नाम पर बेची जा रही एक लोकलुभावन रणनीति है।” हालांकि, इसी प्रस्ताव पर नवंबर में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच एक अलग और वास्तविक बहस हुई थी, जिसमें भारतीय पक्ष ने पाकिस्तानी दलीलों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इस बहस का नेतृत्व मुंबई में जन्मे और ऑक्सफोर्ड में कानून की पढ़ाई कर रहे वीरांश भानुशाली ने किया। वीरांश भानुशाली ने अपना भाषण 26/11 मुंबई आतंकी हमलों की अपनी स्मृतियों से शुरू किया। उन्होंने बताया कि कैसे उनका परिवार और पूरा मुंबई उन तीन रातों में दहशत के साए में जी रहा था। उन्होंने कहा, “सीएसएमटी उन जगहों में से एक था, जहां मेरे घर की एक सदस्य रोज गुजरती थीं। किस्मत से वह उस रात बच गईं, लेकिन 166 लोग नहीं बच सके।” उन्होंने बताया कि 1993 के मुंबई बम धमाके उनके घर से महज 200 मीटर दूर हुए थे। भानुशाली े कहा, “मैं आतंक की छाया में बड़ा हुआ हूं।” भारतीय छात्र ने पाकिस्तान द्वारा भारत की सुरक्षा नीति को चुनावी राजनीति बताने पर करारा जवाब देते हुए कहा, “इस बहस को जीतने के लिए मुझे बयानबाजी नहीं, सिर्फ़ एक कैलेंडर चाहिए।” उन्होंने 1993, 2008 (26/11), पठानकोट, उरी और पुलवामा जैसे आतंकी हमलों की तारीखें गिनाते हुए पूछा, “क्या हर आतंकी हमले के पीछे चुनाव था? नहीं। आतंक वोट के लिए नहीं आया, वह इसलिए आया क्योंकि पाकिस्तान की धरती से उसे संरक्षण मिला।” भानुशाली ने कहा कि अगर भारत लोकलुभावन नीति अपनाता, तो 26/11 के बाद ही युद्ध छेड़ देता। उन्होंने कहा, “लेकिन उस समय की सरकार ने संयम दिखाया, कूटनीति अपनाई, दुनिया को सबूत सौंपे। नतीजा क्या हुआ? पठानकोट, उरी और पुलवामा।” उन्होंने मौजूदा हालात का जिक्र करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को चुनावी स्टंट बताना तथ्यों से परे है, क्योंकि उस समय चुनाव समाप्त हो चुके थे। पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए भानुशाली ने कहा, “भारत जब कार्रवाई करता है, तो पायलटों की डी-ब्रीफिंग होती है। पाकिस्तान में गीतों की ऑटो-ट्यूनिंग होती है। जब आप अपने लोगों को रोटी नहीं दे सकते, तो उन्हें युद्ध का सर्कस दिखाते हैं।” उन्होंने साफ कहा कि भारत युद्ध नहीं चाहता, लेकिन जब तक आतंक को विदेश नीति के हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता रहेगा, तब तक भारत अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। पाकिस्तानी पक्ष का नेतृत्व करने वाले मूसा हर्राज पाकिस्तान के रक्षा उत्पादन मंत्री मुहम्मद रजा हयात हर्राज के बेटे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर विशेषज्ञों वाली बहस को विफल कराकर पाकिस्तान की जीत का नैरेटिव गढ़ा। इस विवाद को लेकर भारत की ओर से आमंत्रित वक्ता जे साई दीपक और प्रियंका चतुर्वेदी ने भी खुलासा किया कि भारतीय पक्ष को आखिरी वक्त पर सूचना देकर जानबूझकर आने से रोका गया। हालांकि छात्रों की बहस का वीडियो अब सामने आया है और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वीरांश भानुशाली की दलीलों को व्यापक समर्थन मिल रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह बहस एक बार फिर साबित करती है कि आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान का नैरेटिव तथ्यों के सामने टिक नहीं पाता, चाहे मंच कितना ही प्रतिष्ठित क्यों न हो।  

सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालय की 100 मीटर अरावली परिभाषा ठुकराई, बताया कि इससे अरावली की पहचान खतरे में

 नई दिल्ली अरावली पर्वतमाला की परिभाषा को लेकर केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट और उसके द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति के बीच गंभीर मतभेद सामने आए हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित 100 मीटर ऊंचाई आधारित अरावली परिभाषा को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया, जबकि अदालत की अपनी ही संस्था सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC)ने इस परिभाषा का समर्थन नहीं किया था। 13 अक्टूबर को मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अरावली की नई परिभाषा पेश की थी। इसके ठीक अगले दिन, 14 अक्टूबर को सीईसी ने पीठ की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी के परमेश्वर को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि इस परिभाषा की न तो जांच की गई है और न ही इसे सीईसी की मंजूरी प्राप्त है। इसके बावजूद, 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालय की 100 मीटर परिभाषा को स्वीकार कर लिया। CEC को सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में पर्यावरण और वन संबंधी आदेशों के अनुपालन की निगरानी के लिए गठित किया था। इसने साफ तौर पर कहा कि फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) द्वारा तैयार की गई परिभाषा को ही अपनाया जाना चाहिए, ताकि अरावली की पारिस्थितिकी और भौगोलिक अखंडता की रक्षा हो सके। FSI ने वर्ष 2010 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अरावली का विस्तृत सर्वे किया था। इसमें राजस्थान के 15 जिलों में 40,481 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अरावली के रूप में चिह्नित किया गया था। इस परिभाषा में कम से कम 3 डिग्री ढलान और न्यूनतम ऊंचाई वाले क्षेत्रों को शामिल किया गया था, जिससे छोटी और निचली पहाड़ियां भी संरक्षित रहतीं। 100 मीटर परिभाषा पर गंभीर आपत्तियां एमिकस क्यूरी के परमेश्वर ने अदालत में प्रस्तुत एक पावरपॉइंट प्रेज़ेंटेशन में मंत्रालय की 100 मीटर परिभाषा को अस्पष्ट और खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि इस परिभाषा से अरावली की भौगोलिक पहचान टूट जाएगी। कई छोटी पहाड़ियां अरावली के दायरे से बाहर हो जाएंगी। इन क्षेत्रों को खनन के लिए खोला जा सकेगा। इसका सीधा असर पारिस्थितिकी पर पड़ेगा और थार मरुस्थल का विस्तार पूर्व की ओर हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 100 मीटर की सीमा लागू होने पर अरावली की निरंतरता समाप्त हो जाएगी और इसे संरक्षित भौगोलिक इकाई के रूप में नहीं बचाया जा सकेगा। CEC ने मंत्रालय के दावे को बताया भ्रामक CEC अध्यक्ष और पूर्व महानिदेशक (वन) सिद्धांत दास ने 14 अक्टूबर के पत्र में कहा कि मंत्रालय द्वारा दायर हलफनामे में जिन विचारों को CEC का बताया गया है वे वास्तव में CEC सदस्य डॉ. जे.आर. भट्ट के व्यक्तिगत विचार हैं, न कि समिति के। पत्र में यह भी कहा गया कि समिति की बैठक (3 अक्टूबर) के मसौदा कार्यवृत्त CEC को कभी सौंपे ही नहीं गए। मंत्रालय की रिपोर्ट पर CEC ने कोई औपचारिक समीक्षा नहीं की। मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट हस्ताक्षरित भी नहीं थी। CEC ने दोहराया कि उसकी स्पष्ट राय है कि FSI की परिभाषा को ही अपनाया जाना चाहिए। FSI का आंतरिक आकलन और विरोधाभास FSI ने एक ट्वीट में मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया कि 90% अरावली पहाड़ियां असुरक्षित हो जाएंगी, लेकिन एक आंतरिक आकलन के अनुसार, 20 मीटर या उससे ऊंची 12,081 अरावली पहाड़ियों में से 91.3% और कुल 1,18,575 पहाड़ियों में से 99% से अधिक 100 मीटर की परिभाषा में शामिल ही नहीं होंगी। 20 मीटर ऊंचाई की पहाड़ियां भी प्राकृतिक विंड बैरियर के रूप में अहम भूमिका निभाती हैं। मंत्री का दावा और सवाल पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि अरावली क्षेत्र के केवल 0.19% हिस्से (278 वर्ग किमी) में ही खनन की अनुमति है। लेकिन मंत्रालय के अपने आंकड़े बताते हैं कि यह क्षेत्र पहले से ही राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में खनन के अंतर्गत है। अब तक मंत्रालय यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि 100 मीटर परिभाषा लागू होने के बाद निचले अरावली क्षेत्रों में भविष्य में खनन और विकास को कैसे रोका जाएगा। इसके अलावा, जमीन पर सीमांकन अभी हुआ भी नहीं है, ऐसे में यह भी सवाल बना हुआ है कि मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को कैसे आश्वस्त किया कि 100 मीटर परिभाषा से अधिक क्षेत्र अरावली में आएगा, जबकि FSI की 3 डिग्री ढलान वाली परिभाषा पहले से ही व्यापक थी।

आसिम मुनीर के जाने के बाद लीबिया को बड़ा झटका, आर्मी चीफ की विमान दुर्घटना में मौत

अंकारा लीबिया के लिए पाकिस्तान पनौती बनकर निकला है. पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर के कदम पड़ते ही लीबिया को बड़ा झटका लगा है. पाकिस्तान के साथ डिफेंस डील करते ही लीबिया में दुखों का पहाड़ टूटा है. जी हां, लीबिया के आर्मी चीफ की प्लेन क्रैश में मौत हो गई है. एक प्राइवेट जेट में लीबिया के सेना प्रमुख और चार अन्य अधिकारी तुर्की से अपने देश लौट रहे थे. तभी उनका प्लेन क्रैश हो गया. इस प्लेन क्रैश में लीबिया के आर्मी चीफ और अन्य 7 लोगों की मौत हो गई. इनमें तीन क्रू मेंबर थे. दरअसल, लीबिया के मिलिट्री चीफ, चार अन्य अफसरों और तीन क्रू मेंबर्स को ले जा रहा एक प्राइवेट जेट मंगलवार को तुर्की की राजधानी अंकारा से उड़ान भरने के बाद क्रैश हो गया. इससे विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई. लीबिया के अधिकारियों ने बताया कि प्लेन क्रैश का कारण विमान में तकनीकी खराबी थी. तुर्की के अधिकारियों ने बताया कि लीबिया का प्रतिनिधिमंडल तुर्की और लीबिया के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाने के मकसद से उच्च स्तरीय रक्षा वार्ता के लिए अंकारा में था. लीबिया के पीएम ने किया कन्फर्म लीबिया के प्रधानमंत्री अब्दुल-हामिद दबीबा ने आर्मी चीफ जनरल मुहम्मद अली अहमद अल-हद्दाद और चार अधिकारियों की मौत की पुष्टि की और फेसबुक पर एक बयान में कहा कि यह दुखद दुर्घटना तब हुई जब प्रतिनिधिमंडल घर लौट रहा था. प्रधानमंत्री ने इसे लीबिया के लिए बहुत बड़ा नुकसान बताया. लीबिया के आर्मी चीफ अल-हद्दाद पश्चिमी लीबिया में टॉप सैन्य कमांडर थे और लीबिया की सेना को एकजुट करने के लिए चल रहे संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता वाले प्रयासों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जो लीबिया के संस्थानों की तरह ही विभाजित हो गई है. आर्मी चीफ के अलावा कौन अफसर मरे? तुर्की प्लेन क्रैश में मारे गए चार अन्य अधिकारी जनरल अल-फितौरी घ्रैबिल, लीबिया की जमीनी सेना के प्रमुख, ब्रिगेडियर जनरल महमूद अल-कतावी (जिन्होंने सैन्य निर्माण प्राधिकरण का नेतृत्व किया), मोहम्मद अल-असावी दियाब, चीफ ऑफ स्टाफ के सलाहकार, और मोहम्मद उमर अहमद महजूब, चीफ ऑफ स्टाफ के कार्यालय में एक सैन्य फोटोग्राफर थे. तीनों क्रू मेंबर्स की पहचान तुरंत पता नहीं चल पाई. कैसे हुआ लीबिया के आर्मी चीफ का प्लेन क्रैश तुर्की के अधिकारियों ने बताया कि फाल्कन 50-टाइप के बिजनेस जेट का मलबा अंकारा से लगभग 70 किलोमीटर (लगभग 43.5 मील) दक्षिण में हयमाना जिले के केसिक्कावाक गांव के पास मिला है. इससे पहले मंगलवार शाम को तुर्की के एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स ने कहा कि अंकारा के एसेनबोगा हवाई अड्डे से उड़ान भरने के बाद लीबिया लौट रहे विमान से उनका संपर्क टूट गया था.     तुर्की के आंतरिक मंत्री अली येरलिकाया ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि विमान ने मंगलवार रात 8:30 बजे उड़ान भरी थी और 40 मिनट बाद संपर्क टूट गया.     येरलिकाया ने कहा कि सभी संचार बंद होने से पहले विमान ने हयमाना के पास आपातकालीन लैंडिंग का संकेत दिया था.     तुर्की के राष्ट्रपति संचार कार्यालय के प्रमुख बुरहानेटिन दुरान ने कहा कि विमान ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल को बिजली की खराबी के बारे में सूचित किया और आपातकालीन लैंडिंग का अनुरोध किया.     विमान को वापस एसेनबोगा की ओर मोड़ दिया गया, जहां उसकी लैंडिंग की तैयारी शुरू हो गई थी.     हालांकि, दुरान ने बताया कि इमरजेंसी लैंडिंग के लिए नीचे उतरते समय प्लेन रडार से गायब हो गया. आसमान में धमाका और बिजली जैसी चमक स्थानीय टेलीविज़न स्टेशनों पर दिखाए गए सिक्योरिटी कैमरे के फुटेज में हेमाना के ऊपर रात का आसमान अचानक एक धमाके जैसी चीज़ से रोशन होता दिखा. अंकारा में रहते हुए लीबिया के आर्मी चीफ अल-हद्दाद ने तुर्की के रक्षा मंत्री यासर गुलेर और अन्य अधिकारियों से मुलाकात की थी. अंकारा में एयरपोर्ट को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था और कई फ्लाइट्स को दूसरी जगहों पर डायवर्ट कर दिया गया था. तुर्की के न्याय मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की घटनाओं में आम तौर पर जैसा होता है, वैसे ही इस क्रैश की जांच के लिए चार प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किए गए हैं. तुर्की जाएगी लीबिया की जांच टीम फेसबुक पर एक सरकारी बयान के अनुसार, लीबिया इस क्रैश की जांच में तुर्की अधिकारियों के साथ काम करने के लिए अंकारा में एक टीम भेजेगा. लीबियाई प्रतिनिधिमंडल का मंगलवार का दौरा तुर्की की संसद द्वारा लीबिया में सेवारत तुर्की सैनिकों के कार्यकाल को दो साल के लिए बढ़ाने की मंजूरी देने के एक दिन बाद हुआ. तुर्की ने 2019 में अंकारा और त्रिपोली स्थित सरकार के बीच हुए सुरक्षा और सैन्य सहयोग समझौते के बाद सैनिक तैनात किए थे. बता दें कि बीते दिनों ही आसिम मुनीर लीबिया में मौजूद थे. मुनीर बन गए पनौती लीबिया को यह झटका ऐसे वक्त में लगा है, जब आसिम मुनीर के एक दिन पहले ही लीबिया में कदम पड़े थे. एक तरह से कहें तो पाकिस्तान लीबिया के लिए पनौती साबित हुआ है. पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने बीते दिनों 2025 में लीबिया का आधिकारिक दौरा किया. इस दौरान उन्होंने लीबियन नेशनल आर्मी (एलएनए) के कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल खलीफा हफ्तार और उनके डिप्टी सद्दाम खलीफा हफ्तार से बेनगाजी में मुलाकात की. इस दौरे के बाद पाकिस्तान और लीबिया के बड़ी डिफेंस डील हुई. इसके तहत पाकिस्तान अपने फाइटर जेट्स लीबिया को देगा.