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मेसी विवाद में गई कुर्सी, बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने दिया इस्तीफा

कोलकाता  पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप विश्वास ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। यह कदम 13 दिसंबर को युवा भारती क्रीड़ांगन में लियोनेल मेसी के कार्यक्रम के दौरान हुए हंगामे के बाद उठाया गया है। इस घटना ने देश और दुनिया में कोलकाता की बदनामी कराई। अरूप विश्वास ने हाथ से लिखा पत्र लिखकर पद से मुक्त करने का अनुरोध किया है। यह पत्र सोशल मीडिया पर सामने आया है। हालांकि अरूप विश्वास या तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। दरअसल पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने खेल मंत्री से कहा था कि वह मैसी के कार्यक्रम में हुए हंगामे की जिम्मेदारी लें या इस्तीफा दें। इसके बाद खेल मंत्री ने यह कदम उठाया है। अरूप विश्वास ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा यह घटना 13 दिसंबर को विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन (जिसे सॉल्ट लेक स्टेडियम के नाम से भी जाना जाता है) में हुई थी। लियोनेल मेसी के कार्यक्रम में काफी अव्यवस्था फैल गई थी। इस हंगामे के कारण कोलकाता की काफी किरकिरी हुई। इसी घटना से आहत होकर खेल मंत्री अरूप विश्वास ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने की इच्छा जताई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ लेटर अरूप विश्वास का यह हाथ से लिखा हुआ पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने मंगलवार को यह जानकारी दी। घोष ने एक फेसबुक पोस्ट में बिस्वास की ओर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लिखे गए इस्तीफे की प्रति शेयर की। इसमें उन्होंने राज्य के खेल मंत्री के रूप में अपने दायित्वों से मुक्त करने का अनुरोध किया है। घोष की पोस्ट में क्या? कुणाल घोष ने अपनी पोस्ट में कहा कि खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर खेल विभाग की जिम्मेदारी से मुक्त करने का अनुरोध किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस कदम का कारण मेस्सी के कार्यक्रम में उत्पन्न हुई आराजकता से उपजे विवाद को बताया गया है। हालांकि, तृणमूल नेता द्वारा साझा किया गया पत्र बिस्वास के आधिकारिक लेटरहेड पर नहीं था। इससे राजनीतिक हलकों में इसकी औपचारिक स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि ममता बनर्जी सरकार 13 दिसंबर को मशहूर फुटबॉलर मेसी के कार्यक्रम दौरान हुई अव्यवस्था, भीड़ के कुप्रबंधन और सुरक्षा में चूक की घटनाओं से हुई आलोचनाओं को कितनी गंभीरता से ले रही है. सरकार के सूत्रों ने पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिस्वास का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और प्रवक्ता कुणाल घोष ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से इस बात की पुष्टि की. बिस्वास के हाथ से लिखे इस्तीफे के पत्र में, जिसकी तारीख 15 दिसंबर है और जिसमें मुख्यमंत्री को "आदरणीय दीदी" कहकर संबोधित किया गया है, कहा गया है कि वह "निष्पक्ष जांच" के हित में पद छोड़ना चाहते हैं. उन्होंने लिखा कि वह नहीं चाहते कि उनके पद पर बने रहने से जांच पर कोई असर पड़े. 13 दिसंबर को सॉल्ट लेक स्टेडियम में अव्यवस्था के बाद से ही खेल विभाग पर दबाव बढ़ रहा था, जनता और पूरे राजनीतिक गलियारों से आलोचना हो रही थी, क्योंकि इस घटना को दुनिया के सबसे मशहूर खिलाड़ियों में से एक के इवेंट के लिए प्लानिंग और कोऑर्डिनेशन की नाकामी के तौर पर देखा जा रहा था. उधर, खेल मंत्री के इस्तीफे से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है. मुख्य सचिव के दफ्तर से जारी एक प्रेस रिलीज में, राज्य सरकार ने कहा कि DGP राजीव कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिसमें 24 घंटे के अंदर यह बताने को कहा गया है कि इतने बड़े पैमाने पर कुप्रबंधन कैसे होने दिया गया और निजी आयोजकों और दूसरे हितधारकों के साथ प्रभावी तालमेल की कमी क्यों थी. बिधाननगर पुलिस कमिश्नर मुकेश कुमार से भी उनके कमिश्नरेट की भूमिका के बारे में इसी तरह का स्पष्टीकरण देने को कहा गया है. राज्य के प्रशासनिक इतिहास में इस तरह से पुलिस के आला अधिकारियों को सीधे तौर पर जवाबदेह ठहराना बहुत कम होता है. सॉल्ट लेक स्टेडियम के यूथ सर्विसेज एंड स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट के सीईओ देब कुमार नंदन को इवेंट मैनेजमेंट में लापरवाही के लिए तुरंत उनके पद से हटा दिया गया है. डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) अनीश सरकार, जो इवेंट के दिन मौके पर इंचार्ज थे, उन्हें कथित लापरवाही के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है, और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. खेल विभाग के प्रधान सचिव राजेश कुमार सिन्हा को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए, राज्य सरकार ने रिटायर्ड जस्टिस असीम कुमार रे की सलाह पर चार सदस्यों वाली SIT बनाई है, जिन्होंने एक स्वतंत्र जांच की जरूरत पर जोर दिया था. SIT में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पीयूष पांडे, जावेद शमीम, सुप्रतिम सरकार और मुरलीधर शामिल हैं. बिस्वास का नहीं आया सार्वजनिक बयान नहीं बिस्वास ने बार-बार इस मामले पर संपर्क करने की कोशिश की और फोन कॉल एवं संदेश भेजे गए लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। मुख्यमंत्री कार्यालय से भी इस बात की तत्काल कोई पुष्टि नहीं हुई कि इस्तीफे का अनुरोध स्वीकार किया गया है या नहीं। तृणमूल के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी बिस्वास ने इस मामले पर अभी तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। बीजेपी का मैसी के मुंबई टूर का वीडियो पोस्ट कर तंज उधर, कोलकाता में फुलबॉलर के कार्यक्रम में हंगामे पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। बाद में बीजेपी ने मैसी के मुंबई टूर का वीडियो पोस्ट कर तंज कसा था। दरअसल मुंबई वाले कार्यक्रम में मैसी के प्रशंसक काफी खुश थे। सोशल मीडिया पर कहा गया कि बंगाल पुलिस को मुंबई पुलिस से सीखना चाहिए।  

जी राम जी योजना पर सियासी घमासान, विपक्ष के विरोध पर शिवराज चौहान ने पूछा– राम से दिक्कत क्या है?

नई दिल्ली  मनरेगा का नाम बदलने वाले बिल को लेकर विपक्ष की आपत्ति के बाद कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राम का नाम जुड़ते ही इन लोगों को पता नहीं क्या परेशानी हो जाती है। मंगलवार को लोकसभा में विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन -ग्रामीण (VB- G RAM G) विधेयक 2025 पेश किया गया। इस मौके पर चौहान ने कहा, ‘महात्मा गांधी खुद राम राज की बात करते थे और उनके अंतिम शब्द भी हे राम करते थे। हर गरीब को बेरोजगार मिले और उसकी गरिमा का सम्मान हो। गरीब, जनजाति और पिछड़ा को रोजगार मिले और उसके लिए यह बिल आया है। 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। इससे कृषि और मजदूरी के बीच संतुलन स्थापित होगा। यह पूरा बिल महात्मा गांधी के अनुरूप है और राम राज्य की स्थापना के लिए लाया जा रहा है। मुझे समझ नहीं आता कि राम नाम जुड़ते ही इन लोगों को बिल से क्या आपत्ति हो गई है, जबकि भगवान राम तो खुद ही राम राज्य की बात करते थे।’   ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच यह विधेयक पेश करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दी। विपक्षी सदस्यों ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना उनका अपमान है। उन्होंने यह भी कहा कि विधेयक को वापस लिया जाए या फिर संसदीय समिति के पास भेजा जाए। चौहान ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं।’’ उनका कहना था कि मोदी सरकार महात्मा गांधी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर आधारित कई योजनाएं चला रही है। कांग्रेस ने भी बदला था जवाहर रोजगार योजना का नाम शिवराज चौहान ने सवाल किया, ‘‘कांग्रेस की सरकार ने भी जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला था तो क्या यह पंडित जवाहरलाल नेहरू का अपमान था?’’ चौहान ने कहा कि सरकार ने मनरेगा पर 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने बताया, ‘‘हम इस विधेयक में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दे रहे हैं। यह कोई कोरी गारंटी नहीं है, बल्कि 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि का प्रावधान किया गया है।’’ उन्होंने कहा कि इस विधेयक से गांवों का संपूर्ण विकास होगा। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा ने विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इससे रोजगार का कानूनी अधिकार कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘विधेयक में केंद्र के अनुदान को 90 से 60 प्रतिशत किया गया है और राज्यों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘विधेयक वापस लिया जाना चाहिए या कम से कम स्थायी समिति के पास भेजा जाए।’’ प्रियंका गांधी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि किसी की ‘‘निजी महत्वाकांक्षा, सनक और पूर्वाग्रह’’ के आधार पर कोई विधेयक पेश नहीं होना चाहिए। कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल और शशि थरूर, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की नेता सुप्रिया सुले और कई अन्य सदस्यों ने भी विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इसे संसदीय समिति के पास भेजा जाए।  

चुनाव आयोग ने जारी की पश्चिम बंगाल की SIR ड्राफ्ट लिस्ट, जानें कितने वोटरों के नाम हुए कट

कलकत्ता  पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव है. उससे पहले एसआईआर को लेकर हलतल तेज है. इस बीच चुनाव आयोग ने वह लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें वोटरों के नाम काटे गए हैं. जी हां, चुनाव आयोग यानी निर्वाचन आयोग ने आज मंगलवार को एसआईआर 2026 के तहत पश्चिम बंगाल की मसौदा मतदाता सूची (ड्राफ्ट वोटर लिस्ट) से हटाए गए मतदाताओं की सूची प्रकाशित की है. इस लिस्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में कुल 58 लाख वोटरों के नाम कट गए हैं. दरअसल, चुनाव आयोग की इस लिस्ट में उन वोटरों के नाम , जो 2025 में राज्य की वोटर लिस्ट में शामिल थे, लेकिन 2026 की ड्राफ्ट लिस्ट से हटा दिए गए हैं. पश्चिम बंगाल से जुड़ी एसआईआर वाली यह लिस्ट अभी चुनाव आयोग के पोर्टल लिंक ceowestbengal.wb.gov.in/asd_sir पर उपलब्ध है. हालांकि, चुनाव आयोग ने ऐसे वोटरों को आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया है, जिनके नाम कट गए हैं. 58 लाख वोटरों के नाम कटे? चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, ‘इकट्ठा न किए जा सकने वाले SIR एन्यूमरेशन फॉर्म की संख्या 58 लाख से ज़्यादा है, और उन्हें उनके रजिस्टर्ड पते पर मौजूद न होने, स्थायी रूप से शिफ्ट होने, मृत होने या एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में ‘डुप्लीकेट’ वोटर के रूप में मार्क किए जाने के आधार पर हटा दिया गया है. कब तक आपत्ति दर्ज करने का मौका? चुनाव आयोग की वेबसाइट पर बताया गया है, ‘पीड़ित व्यक्ति ड्राफ्ट लिस्ट पब्लिश होने के बाद दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए तय समय यानी 16/12/2025 से 15/01/2026 तक फॉर्म 6 के साथ डिक्लेरेशन फॉर्म और सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स जमा कर सकते हैं.’ इसका मतलब है कि जिन लोगों के नाम कट गए हैं, उनके पास 15 जनवरी तक आपत्ति दर्ज करने का वक्त है. बता दें कि 294 सदस्यों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने हैं. पश्चिम बंगाल से एसआईआर के तहत कितने वोटर के नाम हटे?     चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, कुल 58,20,898 नाम मसौदा सूची से हटाए गए हैं.     इनमें सबसे ज्यादा 24,16,852 लोग मृत पाए गए.     19,88,076 लोग स्थानांतरित हो चुके थे.     12,20,038 लोग लापता मिले.     1,38,328 नाम डुप्लीकेट थे.     57,604 अन्य श्रेणी में पाए गए. आखिर एसआईआर की जरूरत क्यों? अब सवाल है कि आखिर पश्चिम बंगाल में एसआईआर की जरूरत क्यों? इसे लेकर पश्चिम बंगाल में खूब बवाल है. हालांकि, चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है. बंगाल से पहले एसआईआर की प्रक्रिया बिहार में भी अपनाई जा चुकी है.

हाईकोर्ट में गरमाया माहौल: ‘आप वकील कहलाने के योग्य नहीं’ सुनते ही भड़कीं जज साहिबा

नई दिल्ली  बार चुनावों को लेकर गंभीर आरोप लगाने वाले वकील को दिल्ली हाईकोर्ट ने फटकार लगाई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने वकील की फेसबुक पोस्ट पर आपत्ति जताई है। साथ ही कहा है कि वह वकील बनने तक के लायक नहीं हैं। हालांकि, कोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही करने से इनकार कर दिया है, लेकिन वकील को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है।   मामला दिल्ली डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बार एसोसिएशन चुनावों से जुड़ा हुआ है। यहां एक एडवोकेट ने फेसबुक पर चुनाव में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए थे और भड़काऊ पोस्ट की थी। जस्टिस मिनी पुष्करणा ने इस पर कड़ी आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने वकील की आलोचना की और मामला बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पास भेजने की बात कही है। बार एंड बेंच के अनुसार, उन्होंने कहा, 'अगर आप इस तरह की पोस्ट डालते हैं, तो आप वकील बनने के लायक ही नहीं हैं। चुनाव कभी भी दोस्ताना नहीं होते और खासतौर से बार के। इससे आपको ये सब पोस्ट करने का अधिकार नहीं मिलता है। मैं इस मामले को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पास भेजूंगी। ये सब क्या बकवास है। बार में ऐसे नेता नहीं होने चाहिए। कोर्ट आपके इस काम और सफाई से खुश नहीं है। कोर्ट ऐसे बार नेताओं के होने की उम्मीद नहीं करता है।' कोर्ट में पोस्ट करने वाले वकील की तरफ से एडवोकेट महमूद पर्चा पेश हुए थे। उन्होंने मुवक्किल की ओर से बगैर शर्त माफी मांगी है। हालांकि, कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि वकील की तरफ से सोशल मीडिया पर की गईं पोस्ट्स को हटाया जाए। जज ने कहा, 'कोर्ट की गरिमा को बनाए रखना है। आप इस बात के व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे कि पोस्ट डिलीट की जाएं। कोर्ट ये उम्मीद नहीं करता कि बार के नेता ऐसा हों।' कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि एडवोकेट के फेसबुक पोस्ट को गंभीरता से लिया गया है। हालांकि, बगैर शर्त माफी मांगने और केस को देखते हुए कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही नहीं की जा रही है। कोर्ट ने वकील को भविष्य में ऐसी कोई भी पोस्ट नहीं करने की चेतावनी देकर छोड़ा है। अदालत ने कहा है कि ऐसी कोई भी पोस्ट न की जाएं, जिसके कोर्ट की गरिमा को धक्का लगे।

भारत के कब्जे में पाक के 90,000 सैनिक, अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेबस दिखा पाकिस्तान

नई दिल्ली  बांग्लादेश का आज स्वतंत्रता दिवस है। इसी दिन भारत के प्रयासों के चलते बांग्लादेश अस्तित्व में आया था, जो 1947 के बाद से ही पाकिस्तान की ओर से भाषा और संस्कृति पर वार करने से प्रताड़ित महसूस कर रहा था। अंत में बांग्ला भाषा और संस्कृति के प्रति पाकिस्तान का द्वेष इतना बढ़ गया कि उसकी सेना ने भीषण अत्याचार किए। इनमें लाखों बंगाली मारे गए और अंत में भारत के दखल से दक्षिण एशिया में एक नया देश अस्तित्व में आया। यह पाकिस्तान के लिए वैसा ही झटका था, जैसा उसके निर्माण से 1947 में भारत को आघात लगा था।   पाकिस्तान के लिए यह उससे भी बड़ा आघात था क्योंकि जिस इस्लाम के नाम पर उसने विभाजन कराया था, उसके नाम पर एकता 24 साल ही टिक पाई और बांग्ला भाषा एवं संस्कृति की दलील पर एक नया मुल्क अस्तित्व में आ गया। यही नहीं पाकिस्तान को इस जंग में ऐसी मात खानी पड़ी कि उसके 90 हजार सैनिक भारत की कैद में आ गए। इन सैनिकों को करीब 9 महीने तक भारत ने अपने यहां रखा और अंत में शिमला समझौते के तहत ही इन्हें रिलीज किया गया। हालांकि कहा जाता है कि सभी सैनिकों की रिहाई होने में करीब 15 महीने का वक्त लग गया था। इस दौरान पाकिस्तान ने भारत की हिरासत में रहे सैनिकों को लेकर खूब एजेंडा चला। इस्लामिक देश के लिए यह बड़ा झटका था कि उसकी पूरी ईस्टर्न कमांड ही भारत के आगे सरेंडर कर चुकी थी। पाकिस्तान को इस बात का डर सता रहा था कि कहीं बांग्ला मूल के लोगों के उत्पीड़न की जानकारी भारत न निकलवा ले। ऐसी स्थिति दुनिया के सामने उसकी पोल खोल देती। यूं भी दुनिया भर में और संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं ने पाकिस्तान के रुख की आलोचना की थी। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान ने उलटा प्रोपेगेंडा चला और वह दुनिया के आगे गिड़गिड़ाता रहा कि हमारे सैनिक भारत की हिरासत में उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। पाकिस्तान ने युद्ध बंदियों को लेकर पोस्ट कार्ड जारी किए मार्मिक प्रतीकात्मक तस्वीरें उन पर छापीं। इसके अलावा सवा रुपये का एक डाक टिकट भी जारी किया गया था। यह डाक टिकट जुलाई 1973 में जारी हुआ था। इसे पाकिस्तान के स्टांप डिजाइनर मुख्तार अहमद ने तैयार किया था। इसमें काले बैकग्राउंड में एक तस्वीर छापी गई थी। इन लोगों को कंटीले तारों के पीछे खड़ा दिखाया गया और एक बच्चा दिखाया गया, जो अपने पिता का इंतजार कर रहा था। इसका कैप्शन लिखा गया था, ‘युद्ध बंदी भारत में हैं और यह दुनिया की अंतरात्मा के लिए एक चुनौती है।’ पाकिस्तान ने प्रोपेगेंडा के लिए पोस्टकार्ड भी किए थे जारी इसके अलावा यह भी लिखा गया कि करीब 15 महीनों से भारत की हिरासत में हमारे सैनिक हैं। इसके अलावा कई ऐसे पोस्टकार्ड भी पाकिस्तान की ओर से जारी किए गए थे, जिनमें मानवाधिकार आयोगों से अपील की गई थी। दिलचस्प बात यह है कि मानवाधिकार के नाम पर यह एजेंडा उस पाकिस्तान का था, जिसने बांग्ला भाषियों पर खुद भीषण अत्याचार किए थे और यूएन की एजेंसियों ने उसकी निंदा की थी।

डिप्लोमेसी का अनोखा अंदाज़: पीएम मोदी के लिए खुद स्टीयरिंग पर बैठे जॉर्डन के युवराज अल हुसैन, वीडियो चर्चा में

जॉर्डन  भारत और जॉर्डन के संबंधों में गर्मजोशी को दर्शाते हुए अरब देश के युवराज अल हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को स्वयं वाहन चलाकर जॉर्डन संग्रहालय लेकर गए। युवराज पैगंबर मोहम्मद के 42वीं पीढ़ी के सीधे वंशज हैं। प्रधानमंत्री मोदी जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय के निमंत्रण पर दो दिवसीय यात्रा पर सोमवार को जॉर्डन की राजधानी अम्मान पहुंचे थे। जॉर्डन प्रधानमंत्री की चार दिवसीय यात्रा का पहला पड़ाव है। इस यात्रा के दौरान वह इथियोपिया और ओमान भी जाएंगे। अम्मान के रस अल-ऐन इलाके में स्थित जॉर्डन संग्रहालय देश का सबसे बड़ा संग्रहालय है। इसमें जॉर्डन की कुछ सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक और ऐतिहासिक धरोहरों का प्रदर्शन किया गया है। वर्ष 2014 में निर्मित यह संग्रहालय प्रागैतिहासिक काल से लेकर वर्तमान समय तक क्षेत्र की सभ्यतागत यात्रा को दर्शाता है। संग्रहालय में 15 लाख वर्ष पुरानी जानवरों की हड्डियां और चूना प्लास्टर से बनीं 9,000 वर्ष पुरानी ऐन गजल मूर्तियां हैं जिन्हें दुनिया की सबसे प्राचीन निर्मित मूर्तियों में शामिल किया जाता है।  

सोनिया-राहुल गांधी को बड़ी राहत, नेशनल हेराल्ड केस में कोर्ट ने ED की चार्जशीट को खारिज किया

नई दिल्ली  दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य को राहत दी है। अदालत ने मामले में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ईडी द्वारा दायर आरोप पत्र आधारहीन है, क्योंकि यह किसी प्राथमिकी के बाजए एक निजी शिकायत पर आधारित है। गांधी परिवार के खिलाफ ईडी की शिकायत को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि बिना प्राथमिकी के मामले में कार्यवाही आधारहीन है। कोर्ट ने कहा कि क्योंकि मामले में अभी दिल्ली आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज किया, ऐसे में इस पर अभी ईडी द्वारा दिए गए बयान पर निर्णय देना जल्दबाजी होगी। अदालत ने कहा कि ईडी मामले में आगे की जांच जारी रख सकती है।  सोनिया और राहुल को FIR की कॉपी पाने का अधिकार नहीं- कोर्ट साथ ही राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस नेताओं को झटका देते हुए फैसला सुनाया है कि नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अन्य आरोपियों को एफआईआर की कॉपी पाने का अधिकार नहीं है, यह फैसला दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) द्वारा मामले में दर्ज की गई नई एफआईआर से जुड़ी कार्यवाही के दौरान दिया। कोर्ट के फैसले में क्या-क्या नेशनल हेराल्ड केस की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जांच एजेंसी सीबीआई ने अब तक कोई प्रीडिकेट अपराध दर्ज नहीं किया है, इसके बावजूद ईडी ने जांच आगे बढ़ाई. एफआईआर के अभाव में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच और उसके आधार पर दायर अभियोजन शिकायत (प्रोसिक्यूशन कम्प्लेंट) कायम नहीं रह सकती.     कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसी शिकायत पर मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही भी बनाए रखने योग्य नहीं है. निजी व्यक्ति द्वारा दायर शिकायत पर संज्ञान लेना कानूनन अनुमेय नहीं है. इस मामले के गुण-दोष (मेरिट्स) आदि से जुड़े अन्य तर्कों पर विचार/निर्णय की आवश्यकता नहीं है. अब कौन सी एफआईआर अहम? कोर्ट के इस फैसले के बाद अब दिल्ली पुलिस की EOW द्वारा दर्ज FIR महत्वपूर्ण होगी. पिछले कुछ समय पहले ही नेशनल हेराल्ड केस में EOW ने मामला दर्ज किया था. दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की ओर से दर्ज एफआईआर की कॉपी आरोपियों को उपलब्ध कराने के मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली दिल्ली पुलिस की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई. इससे पहले सोमवार को भी सुनवाई हुई थी. राऊज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई आज यानी मंगलवार के लिए टल गई थी. कब दर्ज हुई एफआईआर दरअसल, दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने 3 अक्टूबर को नेशनल हेराल्ड केस से संबंधित एक नई एफआईआर दर्ज की थी. इस एफआईआर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी, वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड और अन्य को आरोपी बनाया गया है.एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपियों की ओर से इसकी कॉपी उपलब्ध कराने की मांग की गई थी. मगर अब कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आरोपियों को एफआईआर की कॉपी नहीं मिलेगी. क्या है नेशनल हेराल्ड केस दरअसल, नेशनल हेराल्ड केस पहले से ही राजनीतिक हलचल का केंद्र बना हुआ है. नेशनल हेराल्ड अखबार की स्थापना 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी. इसका प्रकाशन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की ओर से किया जाता था. आर्थिक संकट के कारण 2008 में अखबार बंद कर दिया गया, जिसके बाद विवाद की शुरुआत हुई. साल 2010 में ‘यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ नामक कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 38-38 प्रतिशत हिस्सेदारी है. ईडी की जांच में क्या खुलासा नेशनल हेराल्ड केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में खुलासा हुआ कि यंग इंडियन ने 50 लाख रुपए में एजेएल की करीब 2,000 करोड़ रुपए की संपत्तियां हासिल कीं, जबकि उनकी बाजार कीमत कहीं अधिक थी. नवंबर 2023 में ईडी ने कार्रवाई करते हुए लगभग 661 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियां और 90.2 करोड़ रुपए के एजेएल शेयर जब्त किए थे, जिन्हें अपराध की आय माना गया है. .सुनवाई के दौरान क्या हुआ? मामले की सुनवाई के दौरान जज ने आदेश पढ़ना शुरू किया. सबसे पहले अदालत ने EOW (Economic Offences Wing) की शिकायत से जुड़े रिवीजन पिटीशन पर आदेश सुनाया. अदालत ने जांच की बुनियाद पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब तक CBI की ओर से कोई प्रेडिकेट (Scheduled) अपराध दर्ज नहीं किया गया है, इसके बावजूद ED ने PMLA के तहत जांच आगे बढ़ाई. नेशनल हेराल्ड केस में गांधी परिवार को बड़ी राहत, कोर्ट ने ED की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से किया इनकार दिल्ली कोर्ट ने ED की जांच पर बड़ा सवाल उठाते हुए कहा, 'CBI ने अब तक कोई प्रेडिकेट ऑफेंस दर्ज नहीं किया है, इसके बावजूद ED ने जांच जारी रखी.' कोर्ट ने यह भी कहा कि जब मूल अपराध (Predicate Offence) ही दर्ज नहीं है, तो मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कैसे आगे बढ़ाई जा सकती है. कांग्रेस ने कहा- सत्य की जीत हुई कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस ने कहा कि सत्य की जीत हुई है. मोदी सरकार की दुर्भावना और गैरकानूनी गतिविधियों का पर्दाफाश हो चुका है. वहीं कांग्रेस ने सभी आरोपों को नकारते हुए इसे राजनीति से प्रेरित मामला बताया है और कहा है कि इसमें किसी तरह का निजी आर्थिक लाभ नहीं लिया गया. यह मामला राउज़ एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के लिए आया था, जहां अदालत ने ED की ओर से दाखिल विस्तृत रिकॉर्ड की जांच के बाद फैसला सुरक्षित रखा था. अब कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने से इनकार किए जाने के बाद, ED के अगले कानूनी कदमों पर सभी की नजरें टिकी हैं. 'यह मामला ही निराधार था' इस मामले पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'यह निराधार मामला था.'  

फिलीपींस में योजना बनाते बाप-बेटा, ऑस्ट्रेलिया हमले का हुआ खुलासा, IS से ली थी प्रेरणा

सिडनी ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में बॉन्डी बीच पर रविवार शाम को हुए सामूहिक गोलीबारी हमले में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गए। यह हमला यहूदी समुदाय के हानुका उत्सव 'चानुका बाय द सी' के दौरान हुआ, जिसमें करीब एक हजार लोग शामिल थे। पुलिस ने इसे आतंकी घटना घोषित कर दिया है और प्रारंभिक जांच से संकेत मिल रहे हैं कि हमलावर इस्लामिक स्टेट (आईएस) की विचारधारा से प्रेरित थे। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने मंगलवार को कहा कि हमला इस्लामिक स्टेट की विचारधारा से प्रेरित लगता है। उन्होंने इसे नफरत की विचारधारा करार दिया, जो पिछले एक दशक से कुछ लोगों को उग्रवादी बनाने का काम कर रही है। पुलिस ने पुष्टि की है कि हमलावरों की कार में दो घरेलू स्तर पर बने इस्लामिक स्टेट के झंडे और इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) मिले हैं। हमलावरों की पहचान हमलावर पिता-पुत्र थे। 50 वर्षीय साजिद अकरम और उसके 24 वर्षीय बेटे नवीद अकरम ने इस हमले को अंजाम दिया। साजिद अकरम की पुलिस की गोलीबारी में मौके पर ही मौत हो गई, जबकि नवीद गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में पुलिस हिरासत में है। साजिद के पास छह हथियारों का वैध लाइसेंस था, जिनका इस्तेमाल हमले में किया गया लगता है। पुलिस कमिश्नर माल लैन्यन ने बताया कि दोनों हमलावर पिछले महीने फिलीपींस की यात्रा पर गए थे और इस यात्रा के उद्देश्य की जांच चल रही है। कुछ रिपोर्ट्स में संकेत है कि वे वहां मिलिट्री ट्रेनिंग लेने गए थे। नवीद अकरम की 2019 में ऑस्ट्रेलियाई खुफिया एजेंसी एएसआईओ ने जांच की थी, क्योंकि उसके आईएस से जुड़े एक सेल से संबंध थे, लेकिन तब उसे तत्काल खतरा नहीं माना गया। कैसे हुआ हमला? हमला शाम करीब 6:47 बजे शुरू हुआ, जब दोनों हमलावर एक फुटब्रिज से लंबी दूरी की राइफलों से भीड़ पर गोलियां बरसाने लगे। कुल 103 गोलियां चलाई गईं। हमले में एक 10 वर्षीय बच्ची सहित 15 लोग मारे गए। घायलों में बच्चे और पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। एक निहत्थे राहगीर अहमद अल अहमद ने बहादुरी दिखाते हुए एक हमलावर को निरस्त्र कर दिया, जिससे कई जानें बच गईं। प्रधानमंत्री अल्बनीज ने उन्हें मानवता की ताकत का उदाहरण बताया। न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स ने इसे यहूदी समुदाय पर "बर्बर हमला" बताया। ऑस्ट्रेलियाई मुस्लिम संगठनों ने हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि यह इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है। दुनिया भर में शोक सभाएं हुईं और सिडनी ओपेरा हाउस को हनुक्का मेनोरा से रोशन किया गया। प्रधानमंत्री अल्बनीज ने बंदूक कानूनों को और सख्त करने का वादा किया है। जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि अभी तक किसी अन्य की संलिप्तता के सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन जांच सभी पहलुओं पर चल रही है।

पहलगाम आतंकी हमले में साजिद जट्ट की भूमिका: पाकिस्तान के तार और लश्कर-ए-तैयबा का कनेक्शन

 नई दिल्ली एनआईए यानी नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने सोमवार (15 दिसंबर) को जम्मू की एक कोर्ट में पहलगाम आतंकी हमला मामले में सात लोगों पर आरोप लगाए हैं. इसमें पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) आतंकी संगठनों के पाकिस्तानी हैंडलर और आतंकवादी साजिद जट्ट भी शामिल है.  NIA की चार्जशीट में तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों- सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ ​​जिब्रान और हमजा अफगानी का भी नाम है, जिन्हें जुलाई में श्रीनगर के पास सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मार गिराया गया था. चार्जशीट में पाकिस्तान की साज़िश, आरोपियों की भूमिका और मामले में सहायक सबूतों का जिक्र किया गया है. इसके साथ ही, LeT/TRF पर पहलगाम हमले की योजना बनाने, सुविधा देने और उसे अंजाम देने में उनकी भूमिका के लिए आरोप लगाए गए हैं.  साजिद जट्ट कौन है? साजिद जट्ट, LeT का एक टॉप कमांडर है, जो पहलगाम हमले का मुख्य हैंडलर है. एनआईए ने 1,597 पन्नों की चार्जशीट में उसका नाम शामिल किया है. साजिद जट्ट को कई दूसरे नामों से भी जाना जाता है, जैसे- सैफुल्लाह, नुमी, नुमान, लंगड़ा, अली साजिद, उस्मान हबीब और शनि. अक्टूबर 2022 में उसे UA(PA) कानूनों के तहत 'व्यक्तिगत आतंकवादी' घोषित किया गया था. जांच एजेंसियों को शक है कि साजिद जट्ट पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में LeT के हेडक्वार्टर से काम करता है. वह न सिर्फ TRF का ऑपरेशनल चीफ है, बल्कि कश्मीर घाटी में भर्ती, फंडिंग और घुसपैठ के लिए भी ज़िम्मेदार है. साजिद जट्ट से जुड़े कुछ बड़े हमले हैं- 2023 का ढांगरी नरसंहार (वह इसका मुख्य साज़िशकर्ता था), मई 2024 में पुंछ में एयर फ़ोर्स के काफिले पर हमला और जून 2024 में रियासी बस हमला. साजिद जट्ट पर हाइब्रिड आतंकवादियों को लॉजिस्टिकल और ऑपरेशनल मदद देने का भी आरोप है. उसे कश्मीर में आतंकवादी नेटवर्क का सबसे खतरनाक चेहरा माना जाता है. कौन सी धारा लगाई गई? अपनी चार्जशीट में, NIA ने आरोपियों के खिलाफ भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए दंडात्मक धारा भी लगाई है. इसके अलावा, दो और संदिग्ध – परवेज़ अहमद और बशीर अहमद के खिलाफ भी चार्जशीट दायर की गई है. इनकों NIA ने 22 जून को तीन आतंकवादियों को पनाह देने के आरोप में गिरफ्तार किया था. पूछताछ के दौरान, दोनों ने पहलगाम हमले में शामिल तीनों आतंकवादियों की पहचान बताई थी और यह भी कन्फर्म किया था कि वे पाकिस्तानी नागरिक थे और LeT से जुड़े थे.

भारतीय सेना को मिलेंगे तीन और अपाचे AH-64E हेलीकॉप्टर, पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनाती से होगी ताकत में वृद्धि

नई दिल्ली भारतीय सेना की लड़ाकू क्षमता में बड़ा बढ़ोतरी होने वाली है. अमेरिका से खरीदे गए छह अपाचे AH-64E अटैक हेलीकॉप्टरों का अंतिम बैच (तीन हेलीकॉप्टर) इस महीने भारत पहुंचने वाला है. ये दुनिया के सबसे आधुनिक अटैक हेलीकॉप्टर हैं, जिन्हें 'हवा में उड़ता हुआ टैंक' कहा जाता है. ये जोधपुर में तैनात किए जाएंगे, जहां पाकिस्तान से लगी पश्चिमी सीमा पर सेना की स्ट्राइक पावर काफी मजबूत हो जाएगी. डिलीवरी की पूरी कहानी फरवरी 2020 में अमेरिका के साथ लगभग 5,691 करोड़ रुपये का सौदा हुआ था. इस करार के तहत सेना को छह अपाचे मिलने थे. लेकिन सप्लाई चेन की समस्याओं, तकनीकी मुद्दों और ग्लोबल कारणों से डिलीवरी में काफी देरी हुई. मूल योजना में 2024 में सभी हेलीकॉप्टर आने थे, लेकिन पहला बैच (तीन हेलीकॉप्टर) जुलाई 2025 में हिंडन एयरबेस पर पहुंचा. ये अमेरिकी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट से लाए गए थे. अब अंतिम तीन हेलीकॉप्टर दिसंबर 2025 में आने वाले हैं. ये भी असेंबल और इंस्पेक्शन के बाद जोधपुर भेजे जाएंगे. पूरा ऑर्डर पूरा होने के बाद सेना की पहली अपाचे स्क्वाड्रन पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाएगी. अपाचे की विशेषताएं क्यों खास हैं? अपाचे AH-64E दुनिया का सबसे उन्नत अटैक हेलीकॉप्टर है. इसकी मुख्य खूबियां…     हथियार: हेलफायर मिसाइलें (टैंक और बंकर मारने के लिए), स्टिंगर एयर-टू-एयर मिसाइलें, 30 एमएम चेन गन और रॉकेट.     टेक्नोलॉजी: एडवांस्ड रडार, नाइट विजन, सभी मौसम में उड़ान और दुश्मन के हमलों से बचाव.     क्षमता: दुश्मन के टैंक, एयर डिफेंस और सैनिकों पर सटीक हमला. रात में भी ऑपरेशन. जमीन की सेना को क्लोज एयर सपोर्ट. ये हेलीकॉप्टर जोधपुर की 451 एविएशन स्क्वाड्रन में तैनात होंगे, जो मार्च 2024 में बनाई गई थी. पायलट और ग्राउंड स्टाफ पहले ही अमेरिका में ट्रेनिंग ले चुके हैं. ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्यों जरूरी? मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसमें पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए. इस ऑपरेशन ने पश्चिमी सीमा पर मजबूत एरियल फायरपावर की जरूरत दिखाई. अपाचे ऐसे हाई-इंटेंसिटी कॉन्फ्लिक्ट में गेम चेंजर हैं. ये सेना को ग्राउंड फोर्सेस के साथ सीधा सपोर्ट देंगे, जबकि वायुसेना के 22 अपाचे अलग रोल निभाते हैं. सेना एविएशन कोर के अन्य एसेट्स भारतीय सेना एविएशन कोर के पास कई हेलीकॉप्टर और एसेट्स हैं…     ध्रुव (ALH Dhruv): स्वदेशी मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर, ट्रांसपोर्ट और रेकॉनिसेंस के लिए.     रुद्र: ध्रुव का हथियारबंद वर्जन, एंटी-टैंक मिशन.     लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH प्रचंड): हाई एल्टीट्यूड के लिए, ऑफेंसिव मिशन.     चीता और चेतक: लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर.     Mi-17: ट्रूप ट्रांसपोर्ट.     UAV: हेरॉन और सर्चर सर्विलांस के लिए.     डॉर्नियर 228: फिक्स्ड विंग एयरक्राफ्ट. अपाचे आने से सेना की अटैक कैपेबिलिटी सबसे मजबूत होगी. आगे की योजना पूर्ण इंडक्शन के बाद स्क्वाड्रन ट्रेनिंग और एक्सरसाइज करेगी. सेना भविष्य में और अपाचे खरीदने पर विचार कर रही है. ये भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग का बड़ा उदाहरण है. पश्चिमी सीमा पर तनाव को देखते हुए ये डिलीवरी सेना की तैयारियों को नई ताकत देगी. स्वदेशी प्रचंड हेलीकॉप्टर भी जल्द बड़े नंबर में आएंगे, जो आत्मनिर्भरता बढ़ाएंगे.