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ट्रंप–भारत रिश्तों में नई गर्माहट, अमेरिकी दूत बोले—दो साल में फिर दिखेंगे ट्रंप

नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर भारत दौरे पर आ सकते हैं। भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार को नई दिल्ली में अपना कार्यभार संभालते हुए इस बात के संकेत दिए। उन्होंने न केवल ट्रंप और पीएम मोदी की 'सच्ची दोस्ती' का जिक्र किया, बल्कि वाइट हाउस के अंदर की कुछ दिलचस्प बातें भी शेयर कीं। सर्जियो गोर ने अपने पहले संबोधन में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अक्सर अपनी पिछली भारत यात्रा को याद करते हैं और अगले एक-दो सालों में दोबारा भारत आने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा- रष्ट्रपति ट्रंप को यहां की अपनी पिछली यात्रा याद है। मैं पिछले हफ्ते राष्ट्रपति के साथ था और जब हमने नए साल के ठीक बाद डिनर किया, तो उन्होंने यहां आने के अपने शानदार अनुभव और भारत के महान प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी गहरी दोस्ती के बारे में बताया। मुझे यह भी उम्मीद है कि राष्ट्रपति जल्द ही हमसे मिलने आएंगे, उम्मीद है अगले एक-दो साल में भारत आएंगे। 'दोस्त हैं, इसलिए मतभेद सुलझा लेंगे' राजदूत गोर ने दोनों देशों के बीच चल रहे व्यापार और टैरिफ विवादों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा, "मैं राष्ट्रपति ट्रंप के साथ पूरी दुनिया घूमा हूं और मैं यह दावे के साथ कह सकता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी दोस्ती 'असली' है। सच्चे दोस्तों में असहमति हो सकती है, लेकिन वे अंत में अपने मतभेद सुलझा ही लेते हैं।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते और टैरिफ को लेकर थोड़ी खींचतान चल रही है। गोर ने भरोसा दिलाया कि दोनों देश इन मुद्दों को सुलझाने के लिए सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं। वाइट हाउस की 'इनसाइड स्टोरी', रात 2 बजे के फोन कॉल राजदूत ने ट्रंप और मोदी के रिश्तों की गहराई बताने के लिए एक दिलचस्प किस्सा शेयर किया। उन्होंने बताया- राष्ट्रपति ट्रंप की आदत है कि वे रात के 2 बजे फोन करते हैं। और नई दिल्ली के टाइम डिफरेंस को देखते हुए, यह आदत भारत के साथ रिश्तों में काफी फिट बैठती है। भारत 'पैक्स सिलिका' का हिस्सा बनेगा अपने संबोधन में सर्जियो गोर ने एक बड़ी घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को 'पैक्स सिलिका' एलायंस में शामिल होने के लिए आमंत्रित करेगा। यह अमेरिका के नेतृत्व वाला एक रणनीतिक समूह है, जिसमें जापान, दक्षिण कोरिया, इजरायल और ताइवान जैसे देश शामिल हैं। इसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को सुरक्षित करना और एआई (AI) तकनीक में सहयोग बढ़ाना है। सर्जियो गोर, जो ट्रंप के बेहद करीबी माने जाते हैं, उन्होंने साफ किया कि उनका लक्ष्य भारत-अमेरिका संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाना है। उन्होंने कहा- भारत से ज्यादा जरूरी कोई साझीदार नहीं है। आने वाले महीनों और सालों में, मेरा लक्ष्य एक बेहद महत्वाकांक्षी एजेंडे को आगे बढ़ाना होगा। गौरतलब है कि सर्जियो गोर ने ऐसे समय में कार्यभार संभाला है जब अमेरिका में 'रूस प्रतिबंध अधिनियम' जैसे कानूनों पर चर्चा हो रही है, जिसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, गोर के बयानों से साफ है कि ट्रंप प्रशासन भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रख रहा है।

SC में ED का गंभीर आरोप, ममता बनर्जी पर ₹2,742 करोड़ के घोटाले और 20 करोड़ हवाला के लिंक का आरोप

 नई दिल्ली पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म 'इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी' (I-PAC) के कोलकाता दफ्तर और कंपनी के डायरेक्टर प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी के मामले में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. ईडी ने पश्चिम बंगाल सरकार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा के खिलाफ अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर की है. केंद्रीय एजेंसी ने आरोप लगाया है कि 8 जनवरी 2026 को उसके वैधानिक सर्च ऑपरेशन में जानबूझकर बाधा डाली गई, जांच को पटरी से उतारने की कोशिश की गई और सबूतों से छेड़छाड़ व उन्हें नष्ट किया गया. ईडी ने अपनी याचिका में कहा है कि यह सर्च ऑपरेशन धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत “रीजन टू बिलीव” दर्ज करने के बाद किया गया था. छापेमारी दो स्थानों पर हुई- कोलकाता के पार्क स्ट्रीट स्थित प्रतीक जैन के आवास और बिधाननगर के सेक्टर-वी में स्थित इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (IPAC) के दफ्तर में. यह मामला ₹2,742.32 करोड़ के कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले से जुड़ा है. ईडी का दावा है कि इस घोटाले से जुड़े 20 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हवाला चैनलों के जरिए IPAC तक पहुंचाई गई. ईडी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी करीब 100 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचीं और सर्च के दौरान ईडी अधिकारियों को रोका गया. आरोप है कि जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल फोन और दस्तावेज जबरन लेकर पुलिस कस्टडी में लगभग दो घंटे तक रखे गए. ईडी का कहना है कि अधिकारियों को धमकाया गया, पंचनामा की कार्यवाही प्रभावित हुई और जांच पूरी नहीं करने दी गई. इसके बाद दुर्भावनापूर्ण और प्रतिशोधात्मक कार्रवाई के तहत कोलकाता के अलग-अलग थानों में ED अधिकारियों के खिलाफ चार FIR दर्ज की गईं. ईडी ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि कलकत्ता हाई कोर्ट की कार्यवाही के दौरान सत्तारूढ़ दल के समर्थकों द्वारा कथित तौर पर हंगामा किया गया, जिसके चलते न्यायालय ने माहौल को सुनवाई के लिए प्रतिकूल बताया. ED का तर्क है कि ऐसे हालात में हाई कोर्ट में वैकल्पिक उपाय प्रभावहीन हो गया है. ED ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री, डीजीपी, पुलिस कमिश्नर और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की CBI जांच की मांग की है. एजेंसी का कहना है कि इन घटनाओं में BNS, 2023 के तहत चोरी, डकैती, आपराधिक अतिक्रमण, सरकारी कर्मियों के कार्य में बाधा, सबूत नष्ट करने और आपराधिक धमकी जैसे संज्ञेय अपराध बनते हैं. ईडी ने अंतरिम राहत के तौर पर अपने अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक, किसी भी तरह की बदले की कार्रवाई  से सुरक्षा, और जब्त डिजिटल साक्ष्यों को सील कर सुरक्षित रखने व फॉरेंसिक संरक्षण की मांग की है. वहीं, IPAC ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर किसी भी राजनीतिक या चुनावी डेटा की जब्ती से इनकार किया है और जांच एजेंसी के साथ पूर्ण सहयोग का दावा किया है.

भारत के 16 सैटेलाइट्स का हुआ अंतरिक्ष में गायब होना, जानें कैसे होते हैं खराब सैटेलाइट्स का निस्तारण

   नई दिल्ली   ISRO का आज का लॉन्च मिशन फेल हो चुका है. उसी के साथ सवाल ये उठता है कि PSLV रॉकेट से जो 16 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे गए. वो कहां हैं. कब धरती पर गिरेंगे. या अंतरिक्ष में ही घूमते रहेंगे. अंतरिक्ष में हजारों सैटेलाइट्स काम कर रहे हैं, लेकिन जब ये खराब हो जाते हैं, पुराने हो जाते हैं या ईंधन खत्म हो जाता है, तो इन्हें अंतरिक्ष में छोड़ना खतरनाक है.  ये स्पेस डेब्री (कचरा) बन जाते हैं, जो अन्य सैटेलाइट्स से टकरा सकते हैं. इसलिए, दुनिया भर के स्पेस एजेंसियां इन सैटेलाइट्स को डिस्पोज करने के नियम फॉलो करती हैं. लेकिन क्या ये खुद-ब-खुद गिरते हैं? या कोई फिक्स जगह है?  पुराने सैटेलाइट्स क्या करते हैं? दो मुख्य तरीके प्राकृतिक गिरावट  पृथ्वी के बहुत करीब (लो अर्थ ऑर्बिट – LEO, 200-2000 किमी ऊंचाई) वाले सैटेलाइट्स पर हवा का हल्का घर्षण (atmospheric drag) लगता है. यह घर्षण धीरे-धीरे सैटेलाइट की स्पीड कम करता है, और ये नीचे की ओर गिरते जाते हैं.       400-600 किमी ऊंचाई पर: 5-10 साल में खुद गिर जाते हैं.       700-1000 किमी पर: 100-200 साल या ज्यादा लग सकते हैं.     छोटे सैटेलाइट्स (जैसे CubeSats) ज्यादातर इसी तरह जलकर खत्म हो जाते हैं. लेकिन बड़े सैटेलाइट्स के टुकड़े जमीन पर गिर सकते हैं, इसलिए अब नियम सख्त हैं. कंट्रोल्ड डीऑर्बिट  एजेंसियां बचे हुए ईंधन से थ्रस्टर्स फायर करके सैटेलाइट को धीमा करती हैं, ताकि ये तय जगह पर गिरे. ज्यादातर बड़े सैटेलाइट्स और स्पेस स्टेशन इसी तरीके से गिराए जाते हैं. अंतरराष्ट्रीय नियम क्या हैं? स्पेस डेब्री को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN COPUOS) ने Space Debris Mitigation Guidelines बनाए हैं (2007 में अपनाए गए, 2025 तक अपडेटेड). ये नियम स्वैच्छिक हैं, लेकिन ज्यादातर देश फॉलो करते हैं. मुख्य नियम… 25-वर्ष नियम (25-Year Rule): मिशन खत्म होने के बाद सैटेलाइट को 25 साल के अंदर डीऑर्बिट करना चाहिए, ताकि वो LEO में ज्यादा समय न रहे.  अमेरिका (FCC), यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) अब 5 साल का नियम लागू कर रहे हैं.     सैटेलाइट्स को डिजाइन ऐसा करें कि वे सामान्य ऑपरेशन में डेब्री न छोड़ें.       विस्फोट न हो (passivation: बचे ईंधन को खत्म करना).       टकराव से बचाव (collision avoidance).       अगर सैटेलाइट पूरी तरह न जल सके, तो कंट्रोल्ड तरीके से गिराएं. अगर सैटेलाइट 2000 किमी से ऊपर (जैसे GEO ऑर्बिट – 36,000 किमी) है, तो उसे ग्रेवयार्ड ऑर्बिट में भेजा जाता है, जहां वो सदियों तक रह सकता है बिना टकराव के. फिक्स जगह: स्पेसक्राफ्ट सेमेटरी या पॉइंट नेमो बड़े सैटेलाइट्स, स्पेस स्टेशन और कार्गो व्हीकल्स को पॉइंट नेमो (Point Nemo) नाम की जगह पर गिराया जाता है. यह दक्षिणी प्रशांत महासागर में सबसे दूरस्थ जगह है…     सबसे नजदीकी जमीन से 2,688 किमी दूर (न्यूजीलैंड, ईस्टर आइलैंड, अंटार्कटिका से).     नाम: नेमो (Latin में कोई नहीं) – जूल्स वर्न की किताब से लिया गया है. Oceanic Pole of Inaccessibility या South Pacific Ocean Uninhabited Area. यहां क्यों? क्योंकि… कोई इंसान, जहाज या द्वीप नहीं है. अगर टुकड़े बच भी जाएं, तो कोई खतरा नहीं. 1971 से अब तक 264+ स्पेसक्राफ्ट यहां गिराए गए (रूस सबसे ज्यादा, Mir स्पेस स्टेशन सहित). ISS (इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन) 2030-2031 में यहीं गिराया जाएगा. क्या कोई खतरा है? ज्यादातर सैटेलाइट्स वायुमंडल में जल जाते हैं. बड़े टुकड़े (जैसे Mir के) समंदर में डूब जाते हैं. अब तक कोई मौत नहीं हुई स्पेस डेब्री से (एक बार 1997 में महिला पर छोटा टुकड़ा गिरा था). लेकिन डेब्री बढ़ रहा है, इसलिए नियम सख्त हो रहे हैं. खराब सैटेलाइट्स खुद-ब-खुद गिर सकते हैं (प्राकृतिक तरीके से), लेकिन अब नियम कहते हैं कि उन्हें 5-25 साल में कंट्रोल्ड तरीके से गिराना चाहिए. छोटे सैटेलाइट्स वायुमंडल में जल जाते हैं, बड़े को पॉइंट नेमो के स्पेसग्रेवयार्ड में भेजा जाता है. यह जगह सबसे सुरक्षित है, क्योंकि वहां कोई नहीं है. 

ईरान में प्रदर्शनों में मृतकों की संख्या 544 तक पहुंची, पेजेशकियन की नागरिकों से शांति की अपील

तेहरान  ईरान में पिछले दो हफ्तों से सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शन जारी है. इस दौरान कम से कम 544 प्रदर्शनकारी मारे गए जिनमें आठ बच्चे भी शामिल हैं. सीएनएन ने ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स के हवाले से ये रिपोर्ट दी है. विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को बढ़ती महंगाई और आर्थिक मुश्किलों के खिलाफ शुरू हुए थे, लेकिन जल्द ही ये पूरे देश में तनावपूर्ण अशांति में बदल गए, जिसमें प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुई. विरोध प्रदर्शन कई शहरों में फैल गए. अधिकारी गिरफ्तारियों, कार्रवाई और बल प्रयोग करके जवाब दे रहे हैं. मानवाधिकार समूहों ने बार-बार हताहतों की संख्या और प्रदर्शनकारियों के साथ किए जा रहे बर्ताव पर चिंता जताई. ईरानी अधिकारियों ने अशांति के लिए दंगाइयों और विदेशी दखलअंदाजी को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि यह भी कहा है कि जायज आर्थिक शिकायतों को दूर किया जाएगा. अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने इस स्थिति पर खुलकर बात की है. पोप लियो ने अपनी एंजेलस प्रार्थना के बाद वेटिकन में भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि वह ईरान में शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं. उन्होंने कहा, 'मेरे विचार इन दिनों मध्य पूर्व में खासकर ईरान और सीरिया में जो हो रहा है, उस पर हैं, जहाँ लगातार तनाव के कारण कई लोगों की मौत हो रही है. मुझे उम्मीद है और मैं प्रार्थना करता हूँ कि पूरे समाज की भलाई के लिए बातचीत और शांति को धैर्यपूर्वक बढ़ावा दिया जाएगा.' फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भी ईरानी अधिकारियों से हिंसा से बचने की अपील की और एक्स पर पोस्ट किया, 'आक्रामकता बंद होनी चाहिए. हम गलत तरीके से हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा करने की मांग करते हैं.' आयरलैंड की विदेश मंत्री हेलेन मैकएन्टी ने कहा कि वह ईरान से आ रही रिपोर्टों से 'बहुत चिंतित' हैं. साथ ही इस बात पर जोर दिया कि अभिव्यक्ति की आजादी, शांतिपूर्ण सभा और जानकारी तक पहुंच का पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने ईरानी अधिकारियों से आगे हिंसा न करने और प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की भी अपील की.   इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि इजराइल ईरानी लोगों का समर्थन करता है और एक्स पर कहा. 'हम आजादी के लिए ईरानी लोगों के संघर्ष का समर्थन करते हैं और उन्हें सफलता की शुभकामनाएं देते हैं.' इजराइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने रविवार को कहा कि वह ईरान में हो रहे घटनाक्रम पर करीब से नज़र रख रही है, क्योंकि विरोध प्रदर्शन तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर गए हैं. आईडीएफ के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, 'ये विरोध प्रदर्शन ईरान का अंदरूनी मामला है. फिर भी आईडीएफ रक्षात्मक रूप से तैयार है और लगातार अपनी क्षमताओं और ऑपरेशनल तैयारी में सुधार कर रही है.'  सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भी रविवार को बाद में एक सीमित सुरक्षा परामर्श करने की उम्मीद है, जिसमें ईरान और लेबनान के घटनाक्रम एजेंडे में होंगे. जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ईरान की स्थिति पर एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि जापान शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ किसी भी तरह की ताकत के इस्तेमाल के खिलाफ हैं. अशांति के बीच अमेरिकी अधिकारियों ने सीएनएन को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद ईरान में मिलिट्री विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, और उन्होंने तेहरान को प्रदर्शनकारियों पर जानलेवा बल का इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी है. ईरानी अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सख्त होगी. तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, उन्होंने कहा कि कार्रवाई बिना किसी नरमी, दया या रियायत के की जाएगी. उन्होंने कहा, 'सभी दंगाईयों पर आरोप एक जैसे हैं.' इस बीच, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने नागरिकों से अपील की कि वे उस चीज में शामिल न हों जिसे उन्होंने हिंसक अशांति बताया. टेलीविजन पर दिए गए भाषण में उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध और हिंसा के बीच साफ अंतर है. उन्होंने कहा, 'अगर लोगों को कोई चिंता है, तो यह हमारा कर्तव्य है कि हम उनकी चिंताओं को दूर करें, लेकिन सबसे बड़ा कर्तव्य यह है कि हम दंगाइयों के एक समूह को आकर पूरे समाज को बाधित करने की अनुमति न दें.' पेजेशकियन ने आगे कहा, 'यह किस तरह का विरोध है? यह किस तरह का संदेश है, जो लोगों के दिलों में नफरत पैदा कर रहा है?' उन्होंने आगे कहा, 'अमेरिका और इजराइल वहाँ बैठे हैं और उन्हें जाने के लिए कह रहे हैं और (कह रहे हैं) 'हम तुम्हारे साथ हैं'. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कहा कि वे ईरान के अंदरूनी मामलों पर टिप्पणी करने के बजाय "अपने देश को संभालें'. सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किए गए एक संदेश में खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर ईरान में अशांति को बढ़ावा देने और अपने देश की गंभीर समस्याओं को हल करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया. खामेनेई ने लिखा, 'अमेरिका के राष्ट्रपति ने घोषणा की कि अगर ईरानी सरकार ऐसा या वैसा करती है, तो वह दंगाइयों का साथ देंगे. दंगाइयों ने उन पर उम्मीदें लगा रखी हैं. अगर वह इतने काबिल हैं, तो उन्हें अपने देश को संभालना चाहिए.'

जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट: LoC के पास पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए, सेना ने की सख्त जवाबी कार्रवाई

राजौरी: जम्मू-कश्मीर के नौशेरा-राजौरी सेक्टर में लाइन ऑफ कंट्रोल के पास कुछ ड्रोन देखे गए. इनके पाकिस्तान के होने का शक है. इस घटना के बाद भारतीय सेना ने काउंटर-अनमैंड एरियल सिस्टम के उपाय किए. इसके बाद ये ड्रोन वापस चले गए. रिपोर्ट के अनुसार रविवार शाम को जम्मू-कश्मीर के सांबा, राजौरी और पुंछ जिलों में इंटरनेशनल बॉर्डर (IB) और लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पास कई फॉरवर्ड इलाकों में संदिग्ध ड्रोन की हलचल देखी गई, जिनके पाकिस्तान के होने का शक है. सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से बताया कि ये उड़ने वाली चीजें बॉर्डर के पाकिस्तान की तरफ से आई और कुछ मिनट तक भारतीय इलाके के ऊपर मंडराने के बाद वापस चली गई. संदिग्ध ड्रोन गतिविधि देखे जाने के बाद जमीन पर तलाशी अभियान भी शुरू किया गया. सेना के जवानों ने शाम करीब 6:35 बजे गनिया-कलसियां ​​गांव के ऊपर ड्रोन की हलचल देखने पर मीडियम और लाइट मशीन गन से फायरिंग की. उसी समय, राजौरी के टेरियथ में खब्बर गांव में एक और ड्रोन देखा गया. अधिकारियों ने बताया कि यह उड़ने वाली चीज, जिसमें टिमटिमाती रोशनी थी, कलाकोट के धर्मसाल गांव की दिशा से आई थी, और फिर भरख की ओर आगे बढ़ी. एक और ऐसी ही चीज, जिसमें टिमटिमाती रोशनी थी, शाम करीब 7:15 बजे चक बबरल के ऊपर कई मिनट तक मंडराती हुई देखी गई. एक और ऐसी ही चीज पुंछ में एलओसी के पास मनकोट सेक्टर में टैन से टोपा की ओर जाती हुई देखी गई. इस घटना के बाद भारतीय सेना के जवानों ने काउंटर-अनमैंड एरियल सिस्टम के उपाय भी किए, जिससे उन्हें वापस लौटना पड़ा. बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शनिवार को सांबा जिले के पालूरा गांव में सीमा के पास से हथियार और गोला-बारूद का एक जखीरा बरामद होने के बाद एक जॉइंट सर्च ऑपरेशन शुरू किया. इस जखीरे में चीन में बनी एक 9 एमएम पिस्टल जिसके साथ दो मैगजीन, एक ग्लॉक 9एमएम पिस्टल जिसके साथ एक मैगजीन थी और एक चीनी हैंड ग्रेनेड जिस पर एपीएल एचजीआर 84 लिखा था, शामिल था. पुलिस के मुताबिक पैकेट से कुल सोलह 9एमएम कारतूस भी बरामद किए गए.

इसरो का मिशन असफल, ‘अन्वेषा’ ऑर्बिट से पहले ही अंतरिक्ष में खो गया

बेंगलुरु  इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO), 2026 के पहले ऑर्बिटल मिशन की लॉन्चिंग सफलतापूर्वक हो गई लेकिन सैटेलाइट तैनात नहीं हो सका. PSLV-C62 रॉकेट श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया था. यह मिशन सतीश धवन स्पेस सेंटर के फर्स्ट लॉन्च पैड से उड़ान भरा था. इस मिशन का मुख्य हिस्सा EOS-N1 अन्वेषा था, जो डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन द्वारा विकसित एक हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट है. अन्वेषा सैटेलाइट एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन एप्लीकेशन के लिए डिज़ाइन किया गया था.  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के PSLV-C62 मिशन को झटका लगा है। रॉकेट पीएसएलवी-सी62 सोमवार को अपने सफल प्रक्षेपण के बाद उपग्रहों को उनकी निर्धारित कक्षाओं में स्थापित करने में विफल रहा। ISRO की ओर से एक्स पर पोस्ट करके कहा गया, 'वाहन ने तीसरे चरण के दौरान अपनी ओरिएंटेशन (दिशा-स्थिति) पर नियंत्रण खो दिया है। यह लगातार दूसरा PSLV मिशन है, जिसमें ISRO को PSLV के तीसरे चरण में समस्या का सामना करना पड़ा है। अधिक जानकारी का इंतजार है, लेकिन फिलहाल स्थिति अच्छी नहीं लग रही है।' इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी नारायणन ने मिशन कंट्रोल सेंटर से वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए इस विफलता की पुष्टि की। उन्होंने कहा, 'पीएसएलवी -सी 62 मिशन के पहले तीन चरणों का प्रदर्शन पूरी तरह सामान्य था। इसके बाद एक विसंगति पाई गई और उड़ान अपने तय रास्ते से भटक गई, जिसके कारण मिशन सफल नहीं हो सका।' इसरो प्रमुख ने आगे बताया कि वैज्ञानिक डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं और जल्द ही विफलता के सटीक कारणों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। मिशन फेल होने के बाद क्या बोले इसरो चीफ?   अन्वेषा सैटेलाइट की लॉन्चिंग फेल हो गई, जिसके बाद इसरो चीफ ने बयान जारी किया है. इसरो चीफ ने बताया, "तीसरे स्टेज में दिक्कत आई और दिशा में परिवर्तन हो गया. डेटा एनालिसिस किया जा रहा है, जो भी अपडेट आएगा बताया जाएगा." इसरो ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया, "PSLV-C62 मिशन में PS3 स्टेज के आखिर में एक गड़बड़ी हुई. इसकी विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है."  ISRO की लॉन्चिंग सफल, सैटेलाइट सेपरेशन फेल   इसरो की PSLV-C62 मिशन फेल हो चुका है. रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ. लेकिन तीसरे स्टेज के बाद आंकड़ा देरी से मिलने लगा. चौथा स्टेज शुरू तो हुआ लेकिन उसके बाद कोई अपडेट नहीं मिला. मिशन कंट्रोल सेंटर में सन्नाटा पसर गया. पता नहीं चल रहा है कि सैटेलाइट सेपरेट हुआ या नहीं. अन्वेषा के साथ थे 15 और छोटे उपग्रह PSLV-C62 रॉकेट अपने साथ रणनीतिक उद्देश्यों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया DRDO का अन्वेषा (ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट) और 15 अन्य अंतरराष्ट्रीय उपग्रह लेकर गया था। आज के लॉन्च में कुल 15-18 अन्य छोटे उपग्रह भी शामिल थे, जिनमें से कई भारतीय स्टार्टअप्स और विश्वविद्यालयों के थे। हैदराबाद की कंपनी ध्रुवा स्पेस ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई और कुल 7 उपग्रहों में योगदान दिया। कंपनी ने 4 उपग्रह खुद बनाए, जिनमें कम डेटा रेट संचार वाले सैटेलाइट शामिल हैं। यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड की ओर से संचालित 9वां व्यावसायिक अर्थ ऑब्जर्वेशन मिशन था। पीएसएलवी को दुनिया के सबसे भरोसेमंद रॉकेट्स में से एक माना जाता है, जिसने पहले चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-एल1 जैसी बड़ी मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। हालांकि, 12 जनवरी को PSLV-C62 के सफल लॉन्च के बाद उसे ऑर्बिट में लैंड कराने में समस्या आ गई।

दिल्ली में कड़ाके की ठंड, पारा 2.9°C तक गिरा, IMD ने जारी किया मौसम अलर्ट

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली इन दिनों भीषण ठंड की चपेट में है. तापमान में तेज गिरावट के कारण शीत लहर जैसी स्थिति बनी हुई है. मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दिल्ली के आयानगर में रविवार रात न्यूनतम तापमान 2.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस साल अब तक का सबसे कम तापमान है. शहर के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया. मौसम विभाग के मुताबिक जब न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री नीचे गिर जाता है, तो इसे शीत लहर कहा जाता है. मौजूदा आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि दिल्ली के बड़े हिस्से में यही स्थिति है. पालम वेदर स्टेशन में न्यूनतम तापमान 3.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो बीते 13 वर्षों में सबसे कम है. मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि अगले कुछ दिनों तक दिल्ली में इसी तरह की ठंड बनी रह सकती है. सफदरजंग ऑब्जर्वेटरी में रविवार रात न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसके सोमवार रात तक करीब 3 डिग्री सेल्सियस तक और गिरने की संभावना है. रिज क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 3.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अधिकतम तापमान 18.8 डिग्री सेल्सियस रहा.  कड़ाके की ठंड और प्रदूषण की दोहरी मार ठंड के साथ-साथ दिल्ली में वायु प्रदूषण भी लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, सोमवार सुबह 7 बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 293 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है. यह शनिवार के AQI 291 की तुलना में मामूली बढ़ोतरी दर्शाता है. AQI मानकों के अनुसार 0–50 ‘अच्छा’, 51–100 ‘संतोषजनक’, 101–200 ‘मध्यम’, 201–300 ‘खराब’, 301–400 ‘बहुत खराब’ और 401–500 ‘गंभीर’ श्रेणी में आते हैं.  कुछ इलाकों में कोहरे और स्मॉग की चादर धौला कुआं और सराय काले खां जैसे इलाकों में सोमवार को सुबह के समय हल्का कोहरा छाया रहा. दिल्ली में तेज हवाओं के साथ ठिठुरन भरी ठंड महसूस की गई, जब औसत तापमान 6 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा. स्मॉग की पतली परत के कारण कई इलाकों में दृश्यता भी कम हो गई. इससे पहले शनिवार को न्यूनतम तापमान 5.4 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था और शहर के कुछ हिस्सों में बारिश भी हुई थी. इससे पहले शुक्रवार को भी न्यूनतम तापमान करीब 5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. कड़ाके की ठंड के बीच कर्तव्य पथ पर 77वें गणतंत्र दिवस परेड की रिहर्सल जारी है, जहां सुरक्षा बल सर्द मौसम में अभ्यास कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश भी प्रचंड शीत लहर की चपेट में इससे पहले रविवार को दिन में तेज धूप निकलने से अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 15 डिग्री का फर्क आ गया. पश्चिमी विक्षोभ के असर से पछुआ की रफ्तार बेहद कम रही और धूप में गुनगुनाहट ज्यादा रही. मौसम विभाग के अनुसार यह राहत ज्यादा देर की नहीं है. गलन का सिलसिला फिर से शुरू होने का पूर्वानुमान है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रात का न्यूतम तापमान 6 से 7 के बीच रिकॉर्ड किया गया. वहीं मेरठ 4 डिग्री और बहराइच 4.5 डिग्री सेल्सियस के साथ राज्य के सबसे ठंडे जिले रहे. सुबह खिली चटख धूप ने लोगों को ठंड से राहत दी. इस दौरान अधिकतम तापमान सामान्य से 3.1 डिग्री ज्यादा 23.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.  राजस्थान के कई हिस्सों में 0 से नीचे तापमान राजस्थान में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है. राज्य के कई हिस्सों में शीत लहर से लेकर भीषण शीत लहर की स्थिति दर्ज की गई है. प्रतापगढ़ में न्यूनतम तापमान 0 से 2 डिग्री नीचे पहुंच गया, जबकि बाड़मेर में यह 0 से 1 डिग्री नीचे दर्ज किया गया. पिलानी में 1.2 डिग्री, सीकर में 1.7 डिग्री, लूणकरनसर में 1.9 डिग्री और चूरू व झुंझुनू में करीब 2 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिन और राज्य में कड़ाके की ठंड पड़ने का अनुमान जताया है. पंजाब और हरियाणा में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं. कश्मीर घाटी में ‘चिल्ला-ए-कलां’ का दौर जारी पंजाब के बठिंडा में न्यूनतम तापमान 1.6 डिग्री सेल्सियस और हरियाणा के हिसार में 2.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. लुधियाना, पटियाला, अमृतसर और गुरदासपुर में भी तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है. जम्मू-कश्मीर में ठंड और भीषण रूप ले चुकी है. यहां तापमान जमाव बिंदु से कई डिग्री नीचे चला गया है. श्रीनगर में न्यूनतम तापमान 0 से 5.2 डिग्री नीचे दर्ज किया गया, जबकि दक्षिण कश्मीर के शोपियां में यह 0 से 8.6 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा. पहलगाम में भी तापमान 0 से 7.6 डिग्री नीचे दर्ज किया गया. कश्मीर घाटी में इस समय ‘चिल्ला-ए-कलां’ का दौर जारी है, जब 40 दिनों तक कड़ाके की ठंड और बर्फबारी की आशंका बनी रहती है.

वेनेजुएला के ‘एक्टिंग प्रेसिडेंट’ के रूप में खुद को पेश किया, बड़ा राजनीतिक कदम

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट शेयर कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है. इस पोस्ट में ट्रंप की आधिकारिक तस्वीर के साथ लिखा है कि वे वर्तमान से वेनेजुएला का ‘एक्टिंग प्रेसिडेंट’ हैं. साथ ही, उन्होंने खुद को अमेरिका के 45वें और 47वें राष्ट्रपति के रूप में भी पेश किया, जिन्होंने 20 जनवरी 2025 को कार्यभार संभाला था.  यह पोस्ट उस समय आई है जब अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ हाल में ही एक “बड़े पैमाने” की सैन्य कार्रवाई की थी. इस कार्रवाई के दौरान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को अमेरिका उठाकर लेकर आया गया और अब उनको हिरासत में लेकर न्यूयॉर्क में नार्को-टेररिज्म के आरोपों के तहत न्यायिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई.  ट्रंप ने कहा कि अमेरिका वेनेजुएला की सत्ता को तब तक नियंत्रित करेगा जब तक कि वहां एक सुरक्षित, उचित और समझदारी से सत्ता परिवर्तन नहीं हो जाता. उनका यह दावा है कि वेनेजुएला की जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका यह जिम्मेदारी निभा रहा है. इस बीच, वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री डेल्सी रोड्रिग्ज को देश की अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई गई है, लेकिन ट्रंप के दावे ने इस अंतरिम सरकार की वैधता पर भी सवाल उठा दिए हैं.  ट्रंप ने यह भी कहा कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल “हाई क्वालिटी वाला प्रतिबंधित तेल” उपलब्ध कराएगी, जो बाजार मूल्य पर बेचा जाएगा और आय अमेरिका और वेनेजुएला दोनों की भलाई के लिए इस्तेमाल होगी. उन्होंने अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट को इस योजना को तुरंत लागू करने के निर्देश भी दिए हैं.

बाबा वेंगा की चेतावनी: 2026 में मचेगी तबाही? वैश्विक हालात से मिल रहे चौंकाने वाले इशारे

दुनिया इस वक्त पहले से ही अशांत दौर से गुजर रही है। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ता तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में लगातार बदलते हालात यह संकेत दे रहे हैं कि वैश्विक राजनीति किसी भी समय बड़ा मोड़ ले सकती है। ऐसे माहौल में फिर चर्चा में हैं बुल्गारिया की प्रसिद्ध भविष्यवक्ता बाबा वेंगा, जिनकी कई भविष्यवाणियां समय के साथ सही साबित होती रही हैं। 2026 को लेकर उनके कथित संकेत सामने आने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई है। दावा किया जा रहा है कि बाबा वेंगा ने साल 2026 को मानव इतिहास का सबसे खतरनाक साल बताया था। आइए जानते हैं उनकी 4 सबसे डरावनी भविष्यवाणियां: 1 . तीसरा विश्व युद्ध: पूर्व से उठ सकती है आग बाबा वेंगा की सबसे भयावह भविष्यवाणी तीसरे विश्व युद्ध से जुड़ी है। उनके अनुसार, यह युद्ध विश्व के पूर्वी देशों से शुरू होगा और धीरे-धीरे पश्चिमी देशों तक फैल जाएगा। दावा किया जा रहा है कि यह संघर्ष मार्च-अप्रैल 2026 में चीन और ताइवान के बीच बढ़ते तनाव से शुरू हो सकता है। आगे चलकर इसमें रूस और अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश आमने-सामने आ सकते हैं। इस युद्ध का सबसे बड़ा नुकसान यूरोप को होगा, जो तबाही के बाद बंजर भूमि में बदल सकता है, जबकि रूस एक बड़ी वैश्विक शक्ति के रूप में उभर सकता है। आज जब दुनिया पहले से ही कई युद्धों और राजनीतिक टकरावों से घिरी हुई है, लोग इन भविष्यवाणियों को मौजूदा हालात से जोड़कर देख रहे हैं। 2 . प्राकृतिक आपदा और आर्थिक तबाही बाबा वेंगा ने 2026 में प्रकृति और अर्थव्यवस्था के खतरे की भी चेतावनी दी थी। उनके अनुसार, इस साल दुनिया के कई हिस्सों में: – बड़े भूकंप आएंगे – ज्वालामुखी फटेंगे – अत्यधिक गर्मी, बाढ़ और तूफान जैसी घटनाएं होंगी – दावा किया गया है कि पृथ्वी के करीब 7–8 प्रतिशत हिस्से में भारी तबाही मच सकती है। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़े आर्थिक पतन की भविष्यवाणी भी की थी। इसके अनुसार: – डिजिटल करेंसी पर असर पड़ेगा – बैंकिंग सिस्टम कमजोर होगा – वैश्विक मंदी आएगी – लाखों लोग बेरोजगारी का सामना करेंगे – मौजूदा समय में जब दुनिया महंगाई और आर्थिक अस्थिरता से जूझ रही है, यह भविष्यवाणी और भय बढ़ा रही है। 3. AI का इंसानों पर हावी होना बाबा वेंगा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भी चेतावनी दी थी। उनका कहना था कि 2026 में AI इंसानों पर हावी होने लगेगा। दावे के मुताबिक: – रोबोट और AI सिस्टम कई अहम निर्णय लेने लगेंगे – इंसानों की नौकरियां तेजी से खत्म होंगी – निजी जीवन पर निगरानी बढ़ेगी – इंसान अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पूरी तरह AI पर निर्भर हो जाएगा 4. धरती पर एलियंस का आना बाबा वेंगा की सबसे खतरनाक भविष्यवाणी एलियंस से जुड़ी मानी जा रही है। उन्होंने कहा था कि: – एक विशाल अंतरिक्ष यान पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा – इंसानों का पहली बार किसी दूसरी सभ्यता से सीधा संपर्क होगा – कुछ लोग इस भविष्यवाणी को हाल ही में सामने आई उन खबरों से जोड़ रहे हैं, जिनमें दावा किया गया कि वैज्ञानिकों ने चिली के पास एक रहस्यमयी वस्तु देखी है, जो तेज रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ रही है। हालांकि वैज्ञानिक अभी तक इसे लेकर कोई स्पष्ट निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं।  

ट्रंप को नोबेल दिलाने की मचाडो की पेशकश पर बवाल, नोबेल इंस्टीट्यूट का सख्त जवाब

वाशिंगटन वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो द्वारा अपना नोबेल शांति पुरस्कार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देने या उनके साथ साझा करने की इच्छा पर नोबेल इंस्टिट्यूट ने सख्त शब्दों में रोक लगा दी है। नॉर्वे स्थित नोबेल इंस्टिट्यूट ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा के बाद उसे न रोका जा सकता है, न किसी और को सौंपा जा सकता है और न ही साझा किया जा सकता है। इंस्टिट्यूट ने दो टूक कहा-“फैसला अंतिम होता है और हमेशा के लिए बरकरार रहता है।”   दरअसल, मचाडो ने अमेरिकी टीवी चैनल फॉक्स न्यूज पर यह बयान दिया था कि वह अपना पुरस्कार ट्रंप को देना चाहती हैं या कम से कम उनके साथ साझा करना चाहेंगी। उनका तर्क था कि ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के अमेरिकी अभियान की निगरानी की है, इसलिए वे इस सम्मान के हकदार हैं।   हालांकि, नोबेल इंस्टिट्यूट ने इस बयान को नियमों के खिलाफ बताते हुए साफ कर दिया कि नोबेल पुरस्कार व्यक्तिगत इच्छा या राजनीतिक पसंद के आधार पर ट्रांसफर नहीं हो सकता। गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा जाहिर करते रहे हैं, लेकिन इस ताजा घटनाक्रम ने उनकी उम्मीदों को एक बार फिर झटका दे दिया है। इस पूरे विवाद ने साफ कर दिया है कि नोबेल मंच पर सियासी भावनाओं की कोई जगह नहीं है।