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सरकारी रिकॉर्ड में पुरानी गलती, आज बनी बड़ी परेशानी: बहुओं के SIR में क्यों अड़ रही 2003 की सूची?

देवास मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य अंतिम चरण में है। देवास से लेकर प्रदेश के अन्य जिलों में उन बहुओं के एसआइआर की प्रक्रिया राह आसान नहीं रही जिनके नाम शादी से पहले मायके में 2003 की सूची में दर्ज नहीं थे। ससुराल में इनको 2003 की मतदाता सूची के हिसाब से माता-पिता या अन्य की जानकारी दर्ज करने के लिए मशक्कत करना पड़ रही क्योंकि कई बहुओं के माता-पिता के नाम गांव की मतदाता सूची में न होकर तीन से सात किमी दूर तक के दूसरे गांवों में शामिल हैं।   कई मायके वालों को भी इसका पता नहीं हैं, ऐसे में संबंधित बीएलओ से मदद मांगना पड़ रही है। हाल यह हैं कि कुछ जगह नए बीएलओ बने हैं तो उनको भी स्पष्ट रूप से इसका पता नहीं रहता, दो से चार दिन बार जवाब दिया जा रहा है। प्रकरण-एक     पुलिस लाइन क्षेत्र देवास निवासी आशीष सिंह का विवाह उप्र के रायबरेली जिले में सरेनी विधानसभा क्षेेत्र के गांव पूरे शिवबक्ससिंह में हुआ है।     देवास में हो रही एसआईआर में पत्नी की माता बीना देवी या पिता रामप्रकाश की 2003 की सूची के हिसाब से विधानसभा क्रमांक, भाग संख्या, मतदाता क्रमांक की जानकारी दर्ज करना है।     निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर उपलब्ध गांव की मतदाता सूची में यह नाम नहीं मिल रहे थे। मायके वालों को भी इसके बारे में पता नहीं था क्योंकि हर चुनाव के दौरान उनके वोट गांव में ही डाले जाते थे। बाद में क्षेत्र के बीएलओ का नंबर प्राप्त करके संपर्क किया गया तो पता चला कि नाम पूरे शिवबक्शसिंह नहीं बल्कि मथुरपुर की मतदाता सूची में शामिल हैं। इसके बाद वहां की सूची आनलाइन खोलकर एक हजार से अधिक मतदाताओं में से नाम खोजा गया।   प्रकरण-दो     मधुबन कॉलोनी निवासी संदीप सिंह का विवाह उप्र के फतेहपुर खागा विधानसभा के ऐलई गांव में हुआ है।     उनकी पत्नी के माता-पिता के नाम जब इस गांव की 2003 की मतदाता सूची में ऑनलाइन सर्च किए गए तो नहीं मिल पाए।     आसपास के कई गांवों की मतदाता सूची भी देखी गई लेकिन इनमें भी नाम नहीं था।     इसके बाद रिश्तेदारों से संपर्क किया गया, उन्होंने भी अपने स्तर से नाम तलाश किए लेकिन नहीं मिले।     पहले बीएलओ भी स्प्ष्ट जानकारी नहीं दे पाए, बाद में हरदो गांव का नाम बताया जो ऐलई से लगभग तीन किमी दूर है। हरदो की सूची चेक करने पर वहां नाम मिला।   देवास जिले में एसआईआर कार्य की स्थिति विधानसभा कार्य पूर्ण शेष मतदाता     देवास 95.92 11800     सोनकच्छ 99.50 1200     हाटपीपल्या 99.71 600     खातेगांव 99.27 1800     बागली 97.38 6800 (आंकड़े निर्वाचन शाखा देवास से प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार दोपहर की स्थिति में।)   एक नजर में एसआईआर प्रक्रिया     05 विधानसभा क्षेत्र हैं जिले में।     1426 है कुल मतदान केंद्रों की संख्या।     1100 मतदान केंद्रों में पूरी हुई एसआईआर प्रक्रिया।     98 प्रतिशत से अधिक कार्य हो चुका है जिले में पूर्ण।

इंजीनियरिंग का कमाल! भारत की इकलौती डायमंड क्रॉसिंग जहाँ हर पल सुरक्षित गुजरती रेलगाड़ियाँ

नई दिल्ली भारत में रेलवे आने-जाने का सबसे सस्ता और सुगम साधन है। भारतीय रेलवे रोजाना लाखों लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सकुशल और सुगमता से पहुंचाती है, इसीलिए भारतीय रेलवे को देश की लाइफलाइन भी कहा जाता है। आपने रेल से यात्रा करते हुए कई बार ट्रेन को क्रॉसिंग से गुजरते हुए देखा होगा। लेकिन क्या आपने कभी ऐसी रेलवे क्रॉसिंग को देखा है जिस पर से चारों तरफ से ट्रेन गुजरती है और फिर भी कभी एक दूसरे से नहीं टकराती है। है न कमाल की बात। भारत में एक रेलवे क्रॉसिंग ऐसी भी है, जिस पर पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, चारों तरफ से ट्रेन गुजरती है। दरअसल, ये रेलवे क्रॉसिंग महाराष्ट्र के नागपुर रेलवे स्टेशन पर देखने को मिलता है। इसे डायमंड क्रॉसिंग कहा जाता है। जहां पटिरियां एक-दूसरे को चारों ओर से क्रॉस करती हैं।   नागपुर में डॉयमंड क्रॉसिंग महाराष्ट्र के नागपुर में स्थित यह रेलवे स्टेशन भारत के सबसे बिजी जंक्शनों में से एक है। यहां से देश के चार प्रमुख रेल मार्ग ऐसे एक-दूसरे को क्रॉस करते हैं कि इसे ऊपर से देखने पर ट्रैक हीरे के आकार का नजर आता है। यही कारण है कि इसे डॉयमंड क्रॉसिंग कहा जाता है। इस रूट पर रोजाना हजारों की संख्या में ट्रेनों लाखों यात्रियों को लेकर गुजरती हैं। क्यों नहीं टकराती ट्रेनें? अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर ये ट्रेन आपस में टकराती क्यों नहीं है? तो आपको बता दें कि इंजीनियरिंग का कमाल है। इसकी सफलता का राज इंटरलॉकिंग सिस्टम और ऑटोमैटिक सिग्नल टेक्नोलॉजी में छिपा है। यह सिस्टम इस तरह काम करता है कि एक समय में केवल एक ही ट्रेन को क्रॉसिंग से गुजरने की इजाजत देता है। इस तकनीक के कारण बिना की हादसे की ट्रेनों का संचालन क्रॉसिंग से होता रहता है।  

तालिबान का पाकिस्तान पर वार: कहा– हमारे देश में गुप्त योजनाएँ लागू कर रहा इस्लामाबाद

काबुल अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने गुरुवार को स्थानीय मीडिया के साथ बातचीत के दौरान पाकिस्तान पर बड़ा आरोप लगाया है। अफगानी विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान काबुल पर रहस्यमय परियोजनाएं थोपने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान आर्थिक दबाव, सीमा बंदी और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करके तालिबान सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहा है।  अफगानी मिडीया के अनुसार, काबुल में एक सभा को संबोधित करते हुए मुत्ताकी ने कहा कि पाकिस्तान को उम्मीद है कि तालिबान के व्यापार रूट बंद करने के बाद अफगानिस्तान के लोग नाराज होंगे और तालिबानी शासक पर दबाव डालेंगे। उसके ऐसा करने से अफगानिस्तान में कोई कमी या अशांति नहीं हुई। दूसरे क्षेत्रों के साझेदारों ने काबुल को जरूरी सामान सप्लाई किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने लगभग सभी पड़ोसियों के साथ लंबे समय से विवादों में फंसा हुआ है। तालिबान ने पिछले चार सालों में पाकिस्तानी सरकार की चिंताओं को दूर करने के लिए पहले ही कदम उठाए हैं, जिसमें वजीरिस्तानी ट्राइबल परिवारों को बॉर्डर से हटाना और अतिरिक्त बॉर्डर फोर्स तैनात करना शामिल है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को उम्मीद है कि तालिबान सब कुछ देगा, जबकि इस्लामाबाद खुद अपनी आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहा है। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने भारत के साथ अफगानिस्तान के बढ़ते रिश्तों का बचाव किया और पाकिस्तान को जमकर फटकार लगाई। पाकिस्तान को भारत और अफगानिस्तान की दोस्ती देखकर मिर्ची लग रही है। पाकिस्तान दोनों देशों के बीच के संबंध से तिलमिलाया हुआ है, यही कारण है कि वह लगातार यह कह रहा है कि अफगानिस्तान की सरकार भारत के इशारे पर चल रही है। हालांकि, अफगानिस्तानी विदेश मंत्री ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ा है। मुत्ताकी ने कहा, "पाकिस्तान का भारत में दूतावास है, तो अफगानिस्तान को इस हक से क्यों दूर रखा जाना चाहिए? हम भारत के साथ अपने रिश्ते मजबूत करेंगे और इसे रोकने का हक किसी को नहीं है।" उन्होंने कहा, "हमें किसी भी देश के साथ रिश्ते बनाने का पूरा हक है।" मुत्तकी ने इसके बाद पाकिस्तान का नाम लेते हुए उसे आईना दिखाया और कहा कि पाकिस्तान खुद भारत में राजनयिक मौजूदगी रखता है।

वैरागी द्वीप में गूँजा वसुधा वंदन, हरिद्वार ने किया शताब्दी वर्ष का भव्य आगाज़

हरिद्वार अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी समारोह का शुभारंभ राजा दक्ष की नगरी कनखल स्थित बैरागी कैंप में वसुधा वंदन समारोह के साथ हुआ। समारोह का शुभारंभ उत्तराखंड के राज्यपाल एवं गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि डॉ चिन्मय पण्ड्या ने हजारों स्वयंसेवक, संत, प्रबुद्धजन की उपस्थिति में 51 तीर्थों से संग्रहीत पवित्र रज-जल का पूजन कर किया। समारोह में अध्यात्म, संस्कृति और सेवा का व्यापक संगम देखने को मिला। यह समारोह परम वंदनीया माताजी के जन्म के 100 वर्ष, अखंड दीप प्रज्वलन के 100 वर्ष और परम पूज्य गुरुदेव की तप-साधना के 100 वर्ष के अविस्मरणीय अवसर को समर्पित रहा। इस दौरान अतिथियों ने विश्व मैत्री, पर्यावरण शुद्धि और सांस्कृतिक एकता का संकल्प लिया। समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल ले. जनरल श्री गुरमीत सिंह (से.नि.) ने कहा कि अखंड ज्योति केवल एक दीप नहीं है। यह अखंड भारत की भावना, धर्म-जागरण की चेतना और भारत के आध्यात्मिक तत्त्व का जीवंत प्रतीक है। इसकी ज्योति हमें सत्य, नैतिकता और एकता का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि हम बदलेंगे, युग बदलेगा यह केवल नारा नहीं, समाज को भीतर से परिवर्तित करने वाला प्रेरक मंत्र है। गायत्री परिवार की सेवा-केन्द्रित कार्यशैली हरिद्वार और उत्तराखंड के लिए एक आदर्श मॉडल है। राज्यपाल ने कहा कि गायत्री परिवार ने समाज में नैतिक उन्नयन, सेवा और स्वच्छता की जो संस्कृति विकसित की है, वह राष्ट्र-निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है। राज्यपाल ने सभी स्वयंसेवकों की निष्ठा, अनुशासन और कार्य-भावना की विशेष सराहना की। समारोह के अध्यक्ष जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम जी महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ें गुरु-शिष्य परंपरा में हैं। गुरु कुम्हार है और शिष्य कुंभ। गुरु बाहर से थपकी और भीतर से सहारा देकर जीवन को आकार देता है। माता-पिता, गुरु और ईश्वर—ये सनातन संस्कृति की एक ही धारा हैं। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार ने इन मूल्यों को दैनिक जीवन में उतारने का कार्य किया है, जो सामाजिक और आध्यात्मिक चेतना को सशक्त बनाता है। पूज्य गुरुदेव के इस महान कार्य में माताजी की जो भूमिका है उसका अनुभव मैंने स्वयं किया है। शताब्दी समारोह दलनायक डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि विश्व समुदाय के लिए शताब्दी वर्ष सौभाग्य की त्रिवेणी का अद्भुत संगम लेकर आया है। उन्होंने कहा कि वंदनीया माताजी समाज में नारी-जागरण और नारी-स्वाभिमान की प्रेरक शक्ति रहीं। माताजी ने नारी को परिवार और समाज की आधारशिला के रूप में देखा। उन्होंने संस्कार, सेवा और शिक्षा के माध्यम से नारी को सामथ्र्य प्रदान किया। उन्होंने कहा की यह आयोजन भारत की भूमि, पूज्य गुरुदेव और वंदनीया माताजी के प्रति हमारे ऋण की अभिव्यक्ति का समय है। उन्होंने कहा कि एक माह से हजारों सेवक स्थल-व्यवस्था, मार्ग-सज्जा, स्वच्छता और संरचना संबंधी तैयारी में जुटे थे। प्रतिकुलपति ने शताब्दी समारोह के विषय पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं समापन से पूर्व अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि डॉ चिन्मय पंड्या ने उपस्थित सभी अतिथियों को गायत्री मंत्र चादर, रुद्राक्ष की माला तथा पूज्य गुरुदेव का सत्साहित्य देकर सम्मानित किया। इस दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम, राज्यपाल, डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कार्यकर्ता पाथेय पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर विधायक मदन कौशिक, उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री श्री शिवप्रकाश जी आदि ने अपने अपने विचार व्यक्त किया। इस दौरान व्यवस्थापक योगेंद्र गिरि, भाजपा उत्तराखंड प्रदेश महामंत्री आदित्य कोठारी, शिक्षाविद, सहित जिला प्रशासन के अनेक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकारगण उपस्थित रहे।

चौंकाने वाला खुलासा: बंगाल की वोटर लिस्ट में 50 लाख फर्जी या गायब नाम

कोलकाता  पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के तहत मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया चल रही है। गणना प्रपत्र के डिजिटलीकरण के दौरान 50 लाख लोग ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जो पश्चिम बंगाल में नहीं रहते हैं। मंगलवार शाम तक हुई डिजिटलीकरण की जानकारी के अनुसार, यह आंकड़ा 46 लाख से थोड़ा ज्यादा था और बुधवार रात तक यह लगभग 50 लाख तक पहुंच गया। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा भी माना जा रहा है। इसके साथ ही आने वाले समय में यह इससे भी ज्यादा हो सकता है। खास बात तो यह है कि पश्चिम बंगाल में 24 घंटे के अंदर मतदाता सूची से बाहर किए जाने वाली लिस्ट में लगभग चार लाख नाम शामिल किए गए हैं। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के सूत्रों ने बताया है कि बुधवार रात तक बाहर किए जाने के लिए योग्य पाए गए 50 लाख नामों में से 23 लाख से ज्यादा नाम “मृत वोटर” श्रेणी में आते हैं, इसके बाद “स्थानांतरित” मतदाता श्रेणी में 18 लाख से ज्यादा नाम हैं। जबकि “गायब” मतदाताओं की संख्या सात लाख से ज्यादा हो गई है, बाकी बचे “डुप्लीकेट” मतदाता हैं और वे हैं जिन्हें दूसरे कारणों से हटाने के लिए चिह्नित किया गया है। मतदाता सूची से हटाने के लिए चिह्नित किए गए नामों की फाइनल सूची 16 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पब्लिश होने के बाद ही साफ हो पाएगी। इसके बाद नोटिस फेज शुरू हो जाएगा, जिसमें चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) की ओर से एक साथ गणना प्रपत्र पर नोटिस जारी करना, सुनवाई, प्रमाणित और फैसला लेना और दावों और आपत्तियों का निपटारा करना शामिल है, जो 16 दिसंबर से 7 फरवरी, 2026 के बीच होगा। निर्वाचक नामावली के अलग-अलग पैरामीटर की जांच और फाइनल पब्लिकेशन के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की अनुमति 10 फरवरी, 2026 को होगी। निर्वाचक नामावली का फाइनल पब्लिकेशन 14 फरवरी को होगा, जो पहले 7 फरवरी तय किया गया था। 27 अक्टूबर तक के निर्वाचक नामावली के अनुसार, पश्चिम बंगाल में कुल वोटरों की संख्या 7,66,37,529 है।

हिमाचल में गरमाई सियासत: धर्मशाला रैली में BJP का शक्ति प्रदर्शन, सुक्खू सरकार पर निशाना साधा

धर्मशाला हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के तीन साल पूरे होने पर भाजपा ने गुरुवार को धर्मशाला के जोरावर स्टेडियम में बड़ा प्रदर्शन किया। प्रदेशभर से भारी संख्या में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ जोरदार नारे लगाए। भाजपा विधायक दल भी विधानसभा से निकलकर रैली स्थल पहुंचा। ‘राहुल को खुश करने के लिए सुक्खू सरकार अपमान कर रही सनातन को’ – श्रीकांत शर्मा प्रदर्शन में भाजपा के प्रदेश प्रभारी श्रीकांत शर्मा ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सुक्खू सरकार बच्चों को ‘राधे-राधे’ बोलने से रोक रही है और राहुल गांधी को खुश करने के लिए सनातन संस्कृति का अपमान किया जा रहा है। उन्होंने कहा— “कांग्रेसियों कान खोलकर सुन लो, हिमाचल BJP का था, है और 2027 में फिर भाजपा का होगा। इस बार मोदी के नेतृत्व में हर बूथ पर कमल खिलेगा।” उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने जनता को धोखा देकर सत्ता हासिल की, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदेश को दो बार आपदा राहत के लिए बड़ा पैकेज दिया—पहले 5500 करोड़ और हाल ही में 1500 करोड़ का। भीड़ ने भरी हुंकार, कांग्रेस को ‘झूठी और भ्रष्ट’ बताया जोरावर स्टेडियम भाजपा समर्थकों से खचाखच भरा रहा। भाजपा नेताओं ने इसे हिमाचल में कांग्रेस की “नकम्मी और भ्रष्ट” सरकार के खिलाफ जनाक्रोश बताया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि कांग्रेस सरकार लोगों को रैली में आने से रोकने के लिए जगह-जगह नाके लगवा रही है।उन्होंने कहा—“5 लाख सरकारी नौकरियों का वादा किया था, अब पशु मित्र और रोगी मित्र भर्ती कर रहे हैं। यह व्यवस्था परिवर्तन नहीं, सत्ता का पतन है।” ‘हिमाचल में देश की सबसे भ्रष्ट सरकार’ – संजय टंडन भाजपा सह प्रभारी संजय टंडन ने कहा कि सुक्खू सरकार किसी एक भी वादे पर खरी नहीं उतरी।उन्होंने आरोप लगाया कि— “स्कूल, कॉलेज, दफ्तर और ट्रेजरी बंद किए जा रहे हैं। लोग बेरोजगार हो रहे हैं। यह देश की सबसे निकम्मी सरकार है।” कांगड़ा से सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने भी कहा कि सरकार बुनियादी संस्थान बंद कर रही है, इसलिए इसे हटाना जरूरी है। 28 लाख महिलाओं के 1500-1500 रुपए बकाया: BJP डॉ. बिंदल ने दावा किया कि सरकार ने 28 लाख महिलाओं के 36 महीनों के 1500-1500 रुपए अब तक नहीं दिए हैं।उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और पेंशनरों पर भी सरकार का 10 हजार करोड़ का बकाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में सरकार ने हस्तक्षेप किया, तो उसकी जिम्मेदारी भी सरकार की ही होगी। ABVP पर हुए लाठीचार्ज की निंदा डॉ. बिंदल ने ABVP कार्यकर्ताओं पर हुए हालिया पुलिस लाठीचार्ज को “लोकतंत्र की हत्या” बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार युवाओं की आवाज दबा रही है और भाजपा इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। सुक्खू सरकार हर क्षेत्र में फेल: संजीव कटवाल भाजपा महामंत्री संजीव कटवाल ने कहा कि कांग्रेस सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है— प्रदेश कर्ज में डूबा, लीकर पॉलिसी असफल, हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट ठप, आपदा प्रभावित सहायता की राह देखते रहे। जोरावर स्टेडियम बना पुलिस छावनी भाजपा के बड़े प्रदर्शन को देखते हुए जोरावर स्टेडियम और विधानसभा परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। जगह-जगह बैरिकेडिंग, कड़ी सुरक्षा प्रदर्शनकारियों को विधानसभा की ओर जाने से रोका गया। रैली में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, सांसद अनुराग ठाकुर सहित छह सांसद, श्रीकांत शर्मा और सभी भाजपा विधायक मौजूद रहे।

पुतिन के आगमन के साथ भारत को मिली खुशखबरी, रूस में बढ़ेगा भारतीय कारोबार का दबदबा

नई दिल्ली  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंच चुके हैं। दिल्ली के पालम हवाई अड्डे पर उन्हें रिसीव करने स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे थे। इस बीच रूस के आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव ने कहा कि रूस अपने बाजार में भारतीय वस्तुओं की आपूर्ति बढ़ाना चाहता है। उन्होंने कहा कि व्यापारिक संबंधों के संदर्भ में रूस व्यापार आदान-प्रदान बढ़ाने में रुचि रखता है। हम रूसी बाजार में भारतीय उत्पादों की आपूर्ति बढ़ाने और व्यापार संतुलन बनाने में रुचि रखते हैं, क्योंकि वर्तमान में रूसी सामान भारतीय बाजार में बहुत अधिक मात्रा में हैं, जबकि भारतीय सामान रूसी बाजार में उस अनुपात में नहीं हैं। रेशेतनिकोव ने आगे कहा कि हम भारत से उत्पाद खरीदने में बहुत रुचि रखते हैं। हम इस आयोजन में सक्रिय भागीदारी के लिए आभारी हैं, जिसमें दोनों देशों के कई मंत्री शामिल हैं। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन है, जिससे हमारे नेताओं की वार्ता सफल होगी और 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य की प्राप्ति की उम्मीद जगेगी। 100 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य इससे पहले रूस के वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव ने विश्वास जताया कि रूस और भारत 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। हाल के वर्षों में तेज़ व्यापार वृद्धि और कई क्षेत्रों में सहयोग विस्तार का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वीटीबी बैंक के नई दिल्ली में नए प्रमुख कार्यालय का उद्घाटन बढ़ते व्यापार को सहारा देने के लिए वित्तीय बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने की दिशा में ठोस कदम है। उन्होंने भारत से आयात बढ़ाने के राष्ट्रपति के निर्देश को लागू करने के लिए चल रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला और कहा, “हम वर्तमान में भारत से आयात बढ़ाने के राष्ट्रपति के कार्य को लागू करने में जुटे हैं। ऐसे महत्वपूर्ण आयोजनों से इन मुद्दों का समाधान आसान होगा। जितने समझौते सरल होंगे, उतना ही हमारे देशों के बीच व्यापार, निवेश और पर्यटन बढ़ेगा। क्या बोले रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री तथा भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग) के रूसी सह-अध्यक्ष डेनिस मंटुरोव ने 100 अरब डॉलर के लक्ष्य को 'वास्तव में महत्वाकांक्षी' बताया और कहा कि इसे हासिल करने के लिए दोनों देशों की सरकारों, व्यवसायों और वित्तीय संस्थानों के संयुक्त एवं समन्वित प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि हम रूस-भारत सहयोग के विस्तार के लिए अनुकूल माहौल और जरूरी परिस्थितियां बनाकर व्यापारिक समुदाय का समर्थन कर रहे हैं। अंतर-सरकारी आयोग की नियमित बैठकों को निवेश परियोजनाओं पर चर्चा का प्रमुख मंच बताते हुए मंटुरोव ने कहा कि 100 अरब डॉलर का लक्ष्य सचमुच महत्वाकांक्षी है। इसके लिए द्विपक्षीय व्यापार की गुणवत्ता और संरचना पर काम करना होगा। इसके लिए सरकारों के साथ-साथ व्यवसायों और वित्तीय संस्थानों के ठोस प्रयास अपेक्षित हैं।

देश की सुरक्षा पर बड़ा हमला नाकाम: गुजरात ATS ने पकड़ा पाकिस्तान लिंक्ड जासूसी नेटवर्क

गांधीनगर  गुजरात एंटी-टेररिज़्म स्क्वॉड (एटीएस) ने बड़े जासूसी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर पाकिस्तान को गोपनीय सैन्य जानकारी पहुंचाने का गंभीर आरोप है। गिरफ्तार आरोपी एके सिंह, भारतीय सेना में सूबेदार पद पर कार्यरत था और गोवा में रह रहा था। दूसरी आरोपी रश्मणी पाल दमन की रहने वाली है। एटीएस के मुताबिक दोनों पाकिस्तानी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थे और उन्हें संवेदनशील रक्षा जानकारियां भेज रहे थे। इससे पहले 21 नवंबर को उत्तर प्रदेश, गुजरात और तेलंगाना एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में पकड़े गए आईएसकेपी (इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत) मॉड्यूल के तीनों आतंकियों के कबूलनामे से कई चौंकाने वाले खुलासे हुए थे। इनके तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े होने की बात सामने आई थी। उत्तर प्रदेश के शामली जिले में रहने वाले आतंकी मोहम्मद सुहैल के घर पर यूपी एटीएस की रेड में आईएसआईएस का काला झंडा बरामद हुआ था। वहीं हैदराबाद के डॉक्टर मोहम्मद इस्हाक उर्फ डॉ. अहमद के घर से डिजिटल सबूत मिले थे। जांच में पता चला कि दो महीने पहले सुहैल और तीसरा आतंकी आजाद मिलकर डॉ. अहमद के पास एक पार्सल लेकर पहुंचे थे। उस पार्सल में डेढ़ लाख रुपए नकद थे। यह रकम एक पाकिस्तानी एजेंट के कहने पर भेजी गई थी। दूसरा पार्सल भी इन्हीं दोनों ने दिया था, जिसमें हथियार थे। गुजरात एटीएस ने इसी पार्सल के आधार पर डॉ. अहमद को पकड़ा और फिर सुहैल व आजाद तक पहुंची थी। तीसरे आतंकी आजाद (उत्तर प्रदेश का रहने वाला) ने पूछताछ में कबूला कि वह किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने के इरादे से कश्मीर के बारामूला गया था। वहां कुछ न मिलने पर निराश होकर लौटा। वापसी में ट्रेन में एक शख्स से मिला और उसके साथ हरिद्वार पहुंच गया। वहां उसने कई मंदिरों की रेकी की थी। तीनों राज्यों की एटीएस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े हर शख्स की तलाश में जुटी हुई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान से फंडिंग और हथियारों की सप्लाई का यह सिलसिला अभी और गहरा हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी नाराज़गी: बीएलओ सुरक्षा पर राज्यों से मांगी जवाबदेही

नई दिल्ली  मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को गहरी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने साफ कहा कि बीएलओ पर बढ़ते काम के बोझ को कम करना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है और इसके लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती तुरंत की जानी चाहिए। तमिलनाडु की राजनीतिक पार्टी टीवीके द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी तब आई जब कोर्ट को बताया गया कि देशभर में अब तक 35-40 बीएलओ की मौत अत्यधिक काम के दबाव के कारण हो चुकी है। याचिकाकर्ता ने पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग भी रखी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया एक वैध प्रशासनिक कार्रवाई है जिसे समय पर पूरा किया जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, "अगर कहीं स्टाफ की कमी है, तो अतिरिक्त कर्मचारी नियुक्त करना राज्य का कर्तव्य है।" कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बीमार, असमर्थ या अत्यधिक दबाव में काम कर रहे अधिकारियों को लेकर राज्य सरकारें संवेदनशील रवैया अपनाएं और तुरंत वैकल्पिक स्टाफ तैनात करें। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया है कि अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति करें ताकि बीएलओ के कार्य घंटे कम किए जा सकें। जहां 10,000 कर्मचारी मौजूद हैं, वहां आवश्यकता पड़ने पर 20,000 से 30,000 कर्मियों की तैनाती भी की जा सकती है। यदि कोई बीएलओ या कर्मचारी व्यक्तिगत कारणों, बीमारी या गंभीर परिस्थिति में ड्यूटी से छूट चाहता है, तो सक्षम अधिकारी केस-टू-केस आधार पर राहत दे सकते हैं। छूट मिलने पर उसकी जगह तुरंत किसी अन्य कर्मचारी को नियुक्त किया जाए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि कई राज्यों से ऐसे मामले सामने आए हैं जहां बीएलओ ने काम के अत्यधिक दबाव, लंबी ड्यूटी और संसाधनों की कमी के कारण आत्महत्या कर ली। इस पर सीजेआई ने कहा, "यह बेहद गंभीर मामला है। जिस भी राज्य में ऐसा हो रहा है, वहां प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी होगी।" तमिलनाडु की राजनीतिक पार्टी टीवीके ने एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने या इसे संशोधित करने की मांग करते हुए कहा कि बीएलओ पर इतना अधिक बोझ डाला जा रहा है कि कई लोग तनाव में आकर जान गंवा रहे हैं। याचिका में कोर्ट से बीएलओ परिवारों को मुआवजा दिलवाने का अनुरोध भी किया गया है।

भारत–रूस रिश्तों की मिसाल: पुतिन के आगमन से पहले पीएम मोदी संग 25 साल पुरानी फोटो वायरल

नई दिल्ली  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार शाम दो दिवसीय भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंचने वाले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की इस मुलाकात पर दुनिया भर की नजर है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक पुरानी तस्वीर खूब चर्चा में है, जो पीएम मोदी के राजनीतिक सफर से जुड़ी एक अहम स्मृति को सामने लाती है। दरअसल, यह तस्वीर साल 2001 की है, जब पीएम मोदी पहली बार मॉस्को गए थे। उस समय मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और वह भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ रूस की राजधानी पहुंचे थे। यह यात्रा 6 नवंबर 2001 को हुई थी। उसी दौरान पीएम मोदी को पहली बार रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने का अवसर मिला। यह उनका पुतिन के साथ पहला परिचय था। आज, करीब 25 साल बाद, जब पुतिन भारत दौरे पर आ रहे हैं, तो यही तस्वीर फिर से चर्चा में है। सोशल मीडिया पर इसे शेयर करते हुए लोग लिख रहे हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी और प्रेसिडेंट पुतिन के बीच लगभग ढाई दशक पुराना रिश्ता है। तस्वीर में वाजपेयी और पीएम मोदी साथ दिखाई दे रहे हैं, जिसे देखकर कई यूजर्स इसे 'इंडिया-रूस दोस्ती की पहली झलक' बता रहे हैं। 4 सितंबर 2019 को प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर कुछ तस्वीरें और उससे जुड़ी यादें शेयर की थीं। उन्होंने लिखा था, "2001 और 2019 की यादें और पल! आज 20वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए, मेरा मन नवंबर 2001 के रूस-भारत शिखर सम्मेलन में भी चला गया, जब अटल जी पीएम थे। उस समय मुझे गुजरात सीएम के तौर पर उनके डेलीगेशन का हिस्सा बनकर गर्व हुआ था।" यह पोस्ट एक बार फिर वायरल हो रहा है क्योंकि मौजूदा भारत-रूस शिखर सम्मेलन से पहले इस ऐतिहासिक क्षण की याद दिलाई जा रही है। जैसे ही राष्ट्रपति पुतिन के भारत दौरे की खबर सामने आई, वैसे ही लोग 2001 की तस्वीरें साझा कर रहे हैं। कई यूजर्स लिख रहे हैं कि भारत और रूस की साझेदारी सिर्फ रणनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रिश्तों की मजबूती पर भी आधारित है। यही वजह है कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की दोस्ती अक्सर चर्चा में रहती है। आज जब राष्ट्रपति पुतिन फिर भारत आ रहे हैं, तो 25 साल पहले की यह तस्वीर भारत-रूस रिश्तों के लंबे और भरोसेमंद इतिहास की एक दिलचस्प झलक पेश कर रही है।