samacharsecretary.com

कर्नाटक में सरकारी कार्रवाई से बढ़ा विवाद, बेंगलुरु में 400+ घरों को किया गया ध्वस्त

बेंगलुरु बेंगलुरु में 400 से ज़्यादा घरों को गिराने के बाद कर्नाटक सरकार विवादों में घिर गई है. जिससे सैकड़ों लोग, जिनमें ज़्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग हैं, बेघर हो गए हैं. इस हफ़्ते की शुरुआत में हुई इस बड़े पैमाने पर बेदखली की कार्रवाई ने सत्ताधारी कांग्रेस और केरल लेफ्ट फ्रंट यूनिट के बीच ज़बरदस्त जुबानी जंग छेड़ दी है.  जानकारी के अनुसार 22 दिसंबर को सुबह 4 बजे कोगिलु गांव में फकीर कॉलोनी और वसीम लेआउट में तोड़फोड़ की गई. जिससे करीब 400 परिवार बेघर हो गए. यह कार्रवाई ऐसे वक्त में की गई, जब शहर में साल की सबसे ज़्यादा ठंड पड़ रही है. बेंगलुरु सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड (BSWML) द्वारा चलाए गए इस अभियान में 4 JCB और 150 से ज़्यादा पुलिसकर्मी शामिल थे.  कार्रवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में उतरे लोग  मामले में कर्नाटक सरकार ने कहा कि ये घर उर्दू गवर्नमेंट स्कूल के पास एक झील के किनारे सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से बनाए गए थे. हालांकि, निवासियों ने दावा किया कि उन्हें पहले से कोई नोटिस नहीं मिला था. पुलिस ने उन्हें जबरदस्ती बेदखल कर दिया. इससे सैकड़ों लोगों को कड़ाके की ठंड में सड़कों पर और अस्थायी शेल्टरों के नीचे रातें बितानी पड़ रही हैं. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में कुछ निवासियों के हवाले से बताया गया है कि  वे 25 सालों से इस इलाके में रह रहे हैं और उनके पास वैलिड आधार कार्ड व वोटर आईडी हैं. निकाले गए ज़्यादातर लोग प्रवासी हैं और मज़दूर के तौर पर काम करते हैं. यह मुद्दा अब कांग्रेस सरकार के लिए एक बड़ा विवाद बन गया है. इस एक्शन के खिलाफ लोग विरोध में उतर आए हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं.  एक गुट ने राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के घर के पास भी विरोध प्रदर्शन किया. साथ ही कार्रवाई के विरोध में दलित संघर्ष समिति जैसे कई संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया है. कार्रवाई की केरल के मुख्यमंत्री ने की निंदा इस कार्रवाई को लेकर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कांग्रेस की की निंदा की है. उन्होंने इसे कांग्रेस की "अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति" बताया है. एक्स पर किए गए एक पोस्ट में विजयन ने कहा कि दुख की बात है कि संघ परिवार की अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति अब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के तहत चलाई जा रही है. जब कोई सरकार डर और ज़बरदस्ती से शासन करती है, तो संवैधानिक मूल्य और मानवीय गरिमा सबसे पहले शिकार होते हैं. वहीं मामले में केरल के मंत्री वी शिवनकुट्टी ने कहा कि कांग्रेस सरकार की "अमानवीय कार्रवाई" इमरजेंसी के दौर की याद दिलाती है. जो लोग धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के नाम पर सत्ता में आए हैं, वे गरीब लोगों के घरों को तोड़कर एक बार फिर अपना पाखंड दिखा रहे हैं.  उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पिनाराई को दिया जवाब सीपीआई और केरल सीएम की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि यह इलाका कब्ज़ा की गई कचरा फेंकने की जगह थी. लेकिन लैंड माफिया इसे झुग्गी बस्ती में बदलने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने कहा कि हमने लोगों को नई जगहों पर शिफ्ट होने का समय दिया था. हम बुलडोज़र चलाने में विश्वास नहीं करते. पिनाराई विजयन पर तंज कसते हुए शिवकुमार ने ज़ोर देकर कहा कि नेताओं को ज़मीनी हकीकत जाने बिना टिप्पणी नहीं करनी चाहिए. कांग्रेस के सीनियर नेता ने यह भी कहा कि पिनारयी विजयन जैसे सीनियर नेताओं को बेंगलुरु की समस्याओं के बारे में पता होना चाहिए. हम अपने शहर को अच्छी तरह जानते हैं और हम ऐसी झुग्गियों को बढ़ावा नहीं देना चाहते जो लैंड माफिया की एक्टिविटीज़ को बढ़ावा देती हैं.   

दादी खालिदा जिया की विरासत आगे बढ़ाएंगी जायमा रहमान? पिता के साथ वापसी ने बदली सियासी तस्वीर

ढाका  बांग्लादेश की राजनीति में जिया परिवार की चौथी पीढ़ी के प्रवेश की चर्चा तेज हो गई है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान की इकलौती बेटी बैरिस्टर जायमा रहमान अब सक्रिय राजनीति में कदम रखने की तैयारी कर रही हैं। 17 साल लंदन में निर्वासन की जिंदगी बिताने के बाद 25 दिसंबर को पिता के साथ देश लौटीं जायमा ने फेसबुक पोस्ट और पार्टी मीटिंग्स में अपनी इच्छा जाहिर की है कि वे बांग्लादेश के पुनर्निर्माण में योगदान देना चाहती हैं और लोगों से सीधा जुड़कर देश को समझना चाहती हैं।   जायमा रहमान का जन्म 26 अक्टूबर 1995 को हुआ था। वे पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालेदा जिया की पोती हैं। बचपन ढाका में बीता, लेकिन 2008 में जब तारिक रहमान चिकित्सा और राजनीतिक कारणों से लंदन चले गए, तब 13 साल की जायमा भी मां डॉ. जुबाइदा रहमान के साथ वहां चली गईं। लंदन में क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली और लिंकन्स इन से बैरिस्टर बनीं। कानूनी प्रैक्टिस के दौरान उन्होंने लोगों के साथ काम करके सहानुभूति, ईमानदारी और न्याय की समझ विकसित की। 'मैं कभी अपनी जड़ों की देखभाल करना नहीं भूली', ये लाइन जायमा ने हाल ही में अपने एक फेसबुक पोस्ट में लिखीं। जायमा ने अपनी पोस्ट में अपनी दादी और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा को प्यार से 'डाडू' कहते हुए याद किया। बता दें कि जायमा ने अब तक न तो कोई औपचारिक पार्टी पद संभाला है और न ही कभी चुनाव लड़ा है। बीते 17 वर्षों में उनका जीवन मुख्यतः लंदन में उनके कानूनी पेशे के इर्द-गिर्द रहा। ढाका में भव्य स्वागत, जायमा की ‘शांत’ एंट्री तारिक रहमान की वापसी पर हजारों समर्थक ढाका की सड़कों पर उमड़ पड़े। यह एक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन भी था। हालांकि, जायमा रहमान की एंट्री अपेक्षाकृत शांत रही। वह अपनी मां जुबैदा रहमान के साथ गुरुवार को गुलशन एवेन्यू के 196 नंबर आवास पर पहुंचीं। राजनीतिक मंच पर रोशनी भले तारिक रहमान पर रही, लेकिन लंदन से ढाका तक के सफर की तस्वीरें वायरल होने के साथ जायमा रहमान भी देश की राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गईं। पेशे से बैरिस्टर, राजनीति में नई उम्मीद? यूनाइटेड किंगडम में प्रशिक्षित बैरिस्टर जायमा को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के लिए ‘नवीनीकरण’ का चेहरा माना जा रहा है। बीएनपी लंबे समय से भ्रष्टाचार, घोटालों और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों से घिरी रही है। तारिक रहमान का ‘हावा भवन’ एक समय BNP-जमात गठबंधन सरकार के दौरान सत्ता का वैकल्पिक केंद्र माना जाता था। वह भी इन्हीं विवादों से जुड़ा रहा। ऐसे में, फरवरी 2026 में संभावित राष्ट्रीय चुनावों से पहले तारिक रहमान की नई छवि गढ़ने की कोशिशों में जायमा एक अहम भूमिका निभा सकती हैं, खासकर युवाओं को जोड़ने के लिहाज से। पार्टी पहले से ही युवा मतदाताओं को लुभाने की रणनीति पर काम कर रही है। यादें और राजनीति जायमा पहली बार 2001 के आम चुनावों में मीडिया की नजर में आई थीं, जब वह महज छह साल की उम्र में अपनी दादी खालिदा जिया के साथ मतदान केंद्र गई थीं। उस चुनाव में BNP को भारी जीत मिली थी और खालिदा दिया प्रधानमंत्री बनी थीं। हाल के फेसबुक पोस्ट में जायमा ने अपने बचपन की एक याद साझा की, जो पहले ढाका ट्रिब्यून में रिपोर्ट हुई थी। उन्होंने बताया कि कैसे 11 साल की उम्र में फुटबॉल टूर्नामेंट जीतने के बाद वह अपना मेडल सीधे डाडू को दिखाने उनके ऑफिस गई थीं। जायमा ने लिखा- जिस गर्व और ध्यान से वह मेरी बात सुन रही थीं, वही याद आज भी मेरे साथ है। 2021 का विवाद और राजनीतिक मुखरता 2021 में जायमा उस वक्त सुर्खियों में आईं जब आवामी लीग के मंत्री मुराद हसन ने उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। इसके बाद हसन को इस्तीफा देना पड़ा और उनके खिलाफ मानहानि का मामला भी दर्ज हुआ। हालांकि, जायमा की वास्तविक राजनीतिक सक्रियता जुलाई छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद शुरू हुई, जब वह अपने पिता के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई देने लगीं और कई मंचों पर उनका प्रतिनिधित्व भी किया। उन्होंने वाशिंगटन डीसी में नेशनल प्रेयर ब्रेकफास्ट में BNP प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के तौर पर हिस्सा लिया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता मिर्ज़ा फखरुल और आमिर खस्रू भी शामिल थे। 23 नवंबर 2025 को उन्होंने BNP की अपनी पहली औपचारिक बैठक में भाग लिया, जहां यूरोपीय प्रतिनिधियों का एक दल भी मौजूद था। तारिक रहमान की घरवापसी और जायमा की भूमिका तारिक रहमान 17 साल बाद पत्नी जुबैदा और बेटी जायमा के साथ ढाका लौटे। हवाई अड्डे पर हजारों समर्थकों ने भव्य स्वागत किया। तारिक ने नंगे पांव जमीन को छुआ और कहा- 6314 दिन बाद बांग्लादेश के आकाश में वापस।' जायमा ने भी विमान से फोटो शेयर कर लिखा- मातृभूमि की ओर वापस। फरवरी 2026 में होने वाले संसदीय चुनाव से पहले बीएनपी मजबूत स्थिति में है। तारिक रहमान को अगला प्रधानमंत्री उम्मीदवार माना जा रहा है। ऐसे में जायमा का प्

जमीनी परिवहन में नया रिकॉर्ड, चीन के हाइपरलूप ने छुई 700 km/h की स्पीड

 नई दिल्ली चीन ने मैग्नेटिक लेविटेशन (मैग्लेव) तकनीक में नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है. नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी (NUDT) के वैज्ञानिकों ने एक 1 टन वजनी टेस्ट वाहन को सिर्फ 2 सेकेंड में 700 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड तक पहुंचा दिया. यह टेस्ट 400 मीटर लंबे ट्रैक पर हुआ. वाहन को सुरक्षित रोक भी लिया गया. टेस्ट की पूरी जानकारी सरकारी चैनल CCTV ने वीडियो दिखाया, जिसमें वाहन सिर्फ एक चेसिस जैसा लगता है. वह ट्रैक पर धुंध की तरह तेजी से गुजरता है. पीछे धुआं छोड़ता है. यह सुपरकंडक्टिंग इलेक्ट्रिक मैग्लेव सिस्टम है, जो दुनिया में सबसे तेज एक्सेलरेशन और स्पीड का रिकॉर्ड है. टेस्ट में बहुत तेज ब्रेकिंग भी सफल रही. तकनीकी सफलताएं इस उपलब्धि से कई बड़ी समस्याएं हल हो गईं…     अल्ट्रा-हाई-स्पीड इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रोपल्शन.      इलेक्ट्रिक सस्पेंशन और गाइडेंस.     हाई-पावर एनर्जी स्टोरेज.     हाई-फील्ड सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट्स. प्रोफेसर ली जी ने कहा कि यह सफलता चीन में अल्ट्रा-हाई-स्पीड मैग्लेव ट्रांसपोर्ट के विकास को तेज करेगी. मैग्लेव ट्रेन क्या है? मैग्लेव ट्रेन (Maglev Train) का पूरा नाम मैग्नेटिक लेविटेशन ट्रेन है. यह एक विशेष तरह की तेज रफ्तार ट्रेन है जो सामान्य पटरियों पर पहियों से नहीं चलती, बल्कि चुंबकीय शक्ति (मैग्नेटिक फोर्स) से पटरी से कुछ सेंटीमीटर ऊपर हवा में तैरती हुई चलती है. कैसे काम करती है? ट्रेन और पटरी में शक्तिशाली इलेक्ट्रोमैग्नेट लगे होते हैं. एक जैसे चुंबक एक-दूसरे को धक्का देते हैं (रिपल्शन), जिससे ट्रेन पटरी से ऊपर उठ जाती है (लगभग 1-10 सेमी). आगे बढ़ाने के लिए चुंबकीय क्षेत्र को बदल-बदल कर पुल और पुश किया जाता है. इससे घर्षण (फ्रिक्शन) बिल्कुल नहीं होता, इसलिए ट्रेन बहुत तेज चल सकती है. फायदे बहुत तेज स्पीड: 400-600 km/h या इससे ज्यादा (सामान्य ट्रेन से दोगुनी). कम शोर, कम कंपन, आरामदायक सफर. कम रखरखाव क्योंकि पहिए और पटरी नहीं घिसते. पर्यावरण के लिए अच्छी क्योंकि बिजली से चलती है, प्रदूषण कम. भविष्य में क्या फायदे? यह तकनीक सिर्फ ट्रेनों तक सीमित नहीं…     वैक्यूम ट्यूब में हाइपरलूप जैसी ट्रांसपोर्ट (1000 km/h तक संभव).     रॉकेट और हवाई जहाजों के लॉन्च में शुरुआती बूस्ट और ईंधन बचत होगी.     एयरोस्पेस टेस्टिंग के लिए जमीनी सिमुलेशन आसान हो जाएगी. चीन का मैग्लेव इतिहास     30 साल पहले इसी यूनिवर्सिटी ने चीन का पहला मानवयुक्त मैग्लेव बनाया.     10 साल की रिसर्च के बाद जनवरी 2025 में 648 km/h रिकॉर्ड.     शंघाई मैग्लेव दुनिया की एकमात्र कॉमर्शियल सर्विस (430 km/h).     दातोंग में 2 km वैक्यूम ट्यूब लाइन, लक्ष्य 1000 km/h. यह ब्रेकथ्रू दुनिया की ट्रांसपोर्ट और स्पेस तकनीक बदल सकता है. चीन अब इस क्षेत्र में दुनिया के टॉप देशों में शामिल हो गया है. आने वाले सालों में और बड़े टेस्ट होने की उम्मीद है.

चेतावनी के साथ अल्टीमेटम: उस्मान हादी के भाई ने यूनुस को घेरा, कहा– न्याय नहीं तो घर पर होगा प्रदर्शन

ढाका  बांग्लादेश में हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। छात्र नेता उस्मान हादी की हत्याके बाद उनके भाई शरीफ ओमर बिन हादी मैदान में हैं। ओमर ने कहा कि सरकार जिस तरीके से जांच और काम कर रही है, इससे साफ है कि उन्हें न्याय दिलाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। सीधे यूनुस को निशाना पर लेते हुए ओमर ने कहा कि अगर सरकार नहीं मानी और जरूरत पड़ी तो वह कैंटोनमेंट और जमुना (यूनुस का आवास) का घेराव करेंगे।   उस्मान हादी की हत्या के खिलाफ जारी प्रदर्शन को संबोधित करते हुए ओमर ने कहा, "उस्मान हादी के लिए न्याय की मांग अब बांग्लादेश के 18 करोड़ लोगों की मांग बन चुकी है। सरकार की हालत देखकर साफ है कि वह न्याय दिलाने में दिलचस्पी नहीं रखती। हम सड़कों पर उतर चुके हैं और जब तक न्याय नहीं होता, हम वापस घर नहीं जाएंगे। हमें और भी कड़े कार्यक्रमों की घोषणा करनी पड़ सकती है। देश की स्थिति और भी ज्यादा बिगड़े इससे पहले ही हम साफ कर देना चाहते हैं कि हमें जमुना का घेराव करने के लिए मजबूर न करें।" इससे पहले भी ओमर ने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि सरकार ने आगामी बांग्लादेश चुनाव को रद्द करवाने के लिए हादी की हत्या करवाई है। ओमर ने राजनीतिक नेताओं और यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि परिवार को न्याय न मिलना एक बड़ी विफलता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सत्ता में बैठे लोग न्याय नहीं दे सकते तो उन्हें सत्ता छोड़कर भाग जाना चाहिए। ओमर ने अपनी भाई की हत्या के लिए सत्ता में बैठे लोगों को ही जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा,"आपने उस्मान हादी को मारा और अब उसे दिखाकर चुनाव रद्द कराना चाहते हैं। अगर हादी को न्याय नहीं मिला, तो आपको भी इस देश से भागना होगा। आपको बता दें, 32 वर्षीय छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी ने शेख हसीना को सत्ता छोड़ने के लिए मजबूर करने वाले आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस्मान अपने भारत विरोधी रवैये के लिए भी जाना जाता था। आगामी चुनाव में वह मैदान में था। प्रचार अभियान के दौरान ही उसे 12 दिसंबर को गोली मारी गई थी। इलाज के दौरान उसने 18 दिसंबर को सिंगापुर में ही दम तोड़ दिया। इसके बाद बांग्लादेश में एक बार फिर से हिंसा का एक नया दौर शुरू हो गया।

पाकिस्तान से ब्रेन ड्रेन या ब्रेन गेन? 5000 डॉक्टर और 11,000 इंजीनियरों के पलायन पर मुनीर का बयान बना जोक

इस्लामाबाद  पाकिस्तान इन दिनों अपने इतिहास के सबसे गंभीर प्रतिभा पलायन के दौर से गुजरता दिख रहा है। गहराते आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और संस्थागत विफलताओं के बीच बीते दो वर्षों में हजारों डॉक्टर, इंजीनियर और अकाउंटेंट देश छोड़ चुके हैं। हालिया सरकारी रिपोर्ट ने इस संकट की भयावह तस्वीर उजागर कर दी है। पाकिस्तान के ब्यूरो ऑफ एमिग्रेशन एंड ओवरसीज एम्प्लॉयमेंट के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 महीनों में देश ने 5,000 डॉक्टर, 11,000 इंजीनियर और 13,000 अकाउंटेंट खो दिए हैं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सरकार की नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के उस बयान की भी तीखी आलोचना हो रही है जिसमें उन्होंने बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन को ‘ब्रेन ड्रेन’ नहीं बल्कि “ब्रेन गेन” बताया था। पूर्व पाकिस्तानी सीनेटर मुस्तफा नवाज खोखर ने इन आंकड़ों को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “राजनीति सुधारिए, तभी अर्थव्यवस्था सुधरेगी। पाकिस्तान दुनिया का चौथा सबसे बड़ा फ्रीलांसिंग हब है, लेकिन इंटरनेट शटडाउन से 1.62 अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है और 23.7 लाख नौकरियां खतरे में हैं।” सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2024 में 7,27,381 पाकिस्तानियों ने विदेश में काम के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। 2025 में, नवंबर तक ही 6,87,246 लोग विदेश रोजगार के लिए रजिस्टर हो चुके हैं। चिंताजनक बात यह है कि यह पलायन अब केवल खाड़ी देशों में मजदूरी करने वालों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पढ़े-लिखे और कुशल पेशेवर भी बड़ी संख्या में देश छोड़ रहे हैं। पाकिस्तान का स्वास्थ्य क्षेत्र इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। 2011 से 2024 के बीच नर्सों के पलायन में 2,144 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह सिलसिला 2025 में भी जारी है, जैसा कि पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में कहा गया है। प्रतिभा पलायन और अवैध गतिविधियों की बढ़ती आशंकाओं के बीच शहबाज शरीफ सरकार ने हवाई अड्डों पर कड़ी निगरानी शुरू की है। 2025 में 66,154 यात्रियों को पाकिस्तानी हवाई अड्डों पर ही रोक दिया गया, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुना है। इसके अलावा, खाड़ी देशों समेत कई देशों से हजारों पाकिस्तानियों को भीख मांगने और अवैध प्रवास के आरोप में वापस भेजा गया है। इन हालात के बीच सेना प्रमुख आसिम मुनीर का अगस्त में दिया गया बयान अब सोशल मीडिया पर मजाक और आलोचना का विषय बन गया है। उन्होंने पलायन को “ब्रेन गेन” कहा था। एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा, “जेहनी मरीज के मुताबिक यह ब्रेन गेन है।” वहीं एक अन्य यूजर ने कहा, “इन लोगों की अज्ञानता देश को बड़ी आपदा की ओर ले जा सकती है, लेकिन इनके चेहरे पर अब भी गर्व है।” इमरान खान की पीटीआई पार्टी से जुड़े साजिद सिकंदर अली ने लिखा, “कोई उद्योग नहीं, रिसर्च फंडिंग नहीं, नौकरियां नहीं। पीएचडी धारक खाली लैब्स में लौटते हैं। प्रतिभा को अपमान से नहीं, अवसर देकर रोका जा सकता है।”  

जिस छात्र शक्ति ने उखाड़ी हसीना की सत्ता, वही पार्टी आज टूट के कगार पर, जमात से गठजोड़ और भारत विरोध का खुलासा

ढाका बांग्लादेश में अगले साल 12 फरवरी को प्रस्तावित आम चुनावों से पहले छात्र आंदोलन से बनी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) गंभीर राजनीतिक संकट से जूझ रही है। 2024 में शेख हसीना विरोधी प्रदर्शनों के बाद उभरी इस पार्टी को कभी बांग्लादेश की पारंपरिक राजनीति से बाहर एक तीसरी ताकत के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन अब हालात ऐसे बन गए हैं कि पार्टी या तो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) या फिर बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के साथ समझौता करने को मजबूर दिख रही है। NCP वही राजनीतिक दल है, जिसे उन छात्र नेताओं ने मिलकर खड़ा किया था जिन्होंने 2024 में हुए आंदोलन के बाद मुहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनने का रास्ता साफ किया था। पार्टी पर लंबे समय से यूनुस के संरक्षण में होने के आरोप लगते रहे हैं। दूसरी ओर, अवामी लीग फिलहाल प्रतिबंधित होने के कारण चुनावी दौड़ से बाहर है। जमीन पर कमजोर, सोशल मीडिया पर मौजूदगी स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, NCP को सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भले ही पहचान मिली हो, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका सांगठनिक विस्तार बेहद सीमित रहा है। 350 सीटों वाली संसद (जतिया संसद) में सभी सीटों पर लड़ने की तो बात दूर, पार्टी अब महज 30 से 50 सीटों तक की सौदेबाजी तक सिमटती दिख रही है। रिपोर्ट के अनुसार, NCP और जमात-ए-इस्लामी के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत चल रही है। हालांकि, जमात ने NCP की 50 सीटों की मांग को अव्यावहारिक बताया है, जिसके बाद चर्चा 30 सीटों पर आकर रुक गई है। पार्टी में फूट और इस्तीफे इन संभावित गठबंधनों ने NCP के भीतर गहरी फूट पैदा कर दी है। पार्टी के एक धड़े का मानना है कि जमात के साथ जाना चुनावी अस्तित्व के लिए जरूरी है, जबकि दूसरा धड़ा BNP के साथ समझौते का पक्षधर है- खासकर BNP के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान की बांग्लादेश वापसी के बाद। इसी खींचतान के बीच NCP के संयुक्त सदस्य सचिव और चटग्राम इकाई के प्रमुख मीर अरशादुल हक ने इस्तीफा दे दिया। वह पार्टी के भीतर जमात विरोधी गुट के प्रमुख चेहरे माने जाते थे। द डेली स्टार के मुताबिक, उनका जाना पार्टी के अंदरूनी संकट की गंभीरता को दिखाता है। ‘यूथ पॉलिटिक्स की कब्र खोदी जा रही है’ जमात-NCP बातचीत को लेकर आरोप भी सामने आए हैं कि जमात प्रत्येक सीट के बदले NCP को 1.5 करोड़ टका दे सकती है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए छात्र आंदोलन से जुड़े नेता अब्दुल कादर ने कहा- युवा राजनीति की कब्र खोदी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि समझौते की सूरत में NCP बाकी 270 सीटों पर उम्मीदवार नहीं उतारेगी और जमात का समर्थन करेगी। ‘किंग्स पार्टी’ का ठप्पा NCP पर लंबे समय से किंग्स पार्टी का तमगा लगा है। आलोचकों का कहना है कि अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने पार्टी को असामान्य राजनीतिक संरक्षण दिया- कैबिनेट में सलाहकार पद, सुधार आयोगों में नियुक्तियां और चुनावी प्रक्रिया को टालने जैसे कदम इसी धारणा को मजबूत करते हैं। हालांकि, पार्टी ने कई बार यूनुस पर भी BNP के पक्ष में झुकाव रखने के आरोप लगाए हैं, जिससे दोनों के रिश्तों की असहज और लेन-देन वाली प्रकृति उजागर होती है। लोकतांत्रिक सुधार गठबंधन पर भी असर NCP की अंदरूनी कलह का असर उसके नेतृत्व वाले डेमोक्रेटिक रिफॉर्म अलायंस पर भी पड़ा है, जिसमें अमार बांग्लादेश पार्टी और राज्य सुधार आंदोलन शामिल हैं। गठबंधन की शर्त थी कि वे BNP और जमात- दोनों से दूरी बनाए रखेंगे, लेकिन अब उस समझौते के टूटने के संकेत मिल रहे हैं। बांग्लादेश की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। लंबे समय से लंदन में निर्वासित जीवन बिता रहे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान 25 दिसंबर को 17 साल बाद स्वदेश लौट आए। उनकी वापसी पर लाखों समर्थकों ने ढाका में भव्य स्वागत किया, जिसने पूरे देश की सुर्खियां बटोर लीं। इसी बीच, छात्रों द्वारा गठित नेशनल सिटिजन पार्टी की हालिया भारत-विरोधी प्रदर्शनों की कोशिशें फीकी पड़ती दिख रही हैं। तारिक रहमान, पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और बीएनपी के प्रमुख चेहरे हैं। उनका विमान ढाका के हजरत शाहजहां अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतरा। एयरपोर्ट से उनके निवास तक का रोड शो लाखों कार्यकर्ताओं से भरा हुआ था। अनुमान है कि करीब 50 लाख लोग सड़कों पर उतरे। तारिक ने अपने पहली सार्वजनिक संबोधन में मार्टिन लूथर किंग जूनियर की मशहूर लाइन आई हैव ए ड्रीम का जिक्र करते हुए कहा- मेरे देश के लिए एक प्लान है।

कम उम्र, बड़ा साहस: 10 वर्षीय सरवन सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में निभाई अहम भूमिका, मिला बाल पुरस्कार

नई दिल्ली  ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जवानों को सेवा देने वाले 10 साल के नन्हें सिपाही सरवन सिंह को शुक्रवार का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बाल पुरस्कार से सम्मानित किया है। पाकिस्तान के साथ तनाव और भयंकर गोलीबारी के बीच अपनी जान की परवाह किए बिना यह बच्चा अपने गांव के पास तैनात जवानों के लिए दूध, पानी और लस्सी पहुंचाता रहा। सरवन सिंह की इस हिम्मत और देशभक्ति को आज पूरा देश सलाम कर रहा है। सरवन सिंह ने खुद कहा कि यह उनका अपना ही फैसला था कि किसी भी कीमत पर जवानों के लिए दूध और लस्सी का इंतजाम करना है और उनतक पहुंचाना है।   सरवन सिंह ने कहा, जब मिशन ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ था और हमारे फौजी हमारी रक्षा के लिए आए थे। तब मैं दूध, लस्सी, चाय और बर्फ लेकर रोज जाता था। उन्होंने कहा कि मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह अवॉर्ड मुझे दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि 10 साल के बच्चे को उसके परिवारवालों ने भी नहीं कहा था कि वह इतने खतरनाक हालात में बाहर जाए। कैन हैं सरवन सिंह? कक्षा 4 में पढ़ने वाला बच्चा सरवन सिंह आज देशभर के बच्चों के लिए प्रेरणा बन गया है। वह फिरोजपुर जिले के ममडोट इलाके के तारा वली गांव के रहने वाले है। उनका गांव पाकिस्तान की सीमा से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर है। मई में 7वीं इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल कमांडिंग ऑफिसर मेजर जनरल रंजीत सिंह मनराल ने सरवन के बारे में पहली बार बताया था। उन्होंने बताया था कि एक 10 साल का बच्चा भी ऑपरेशन सिंदूर में जवानों का साथ दे रहा था। सरवन सिंह ने कहा, मैं भी बड़ा होकर फौजी बनना चाहता हूं और देश की सेवा करना चाहता हूं। सरवन सिंह के पिता भी उसकी इस निष्ठा से बेहद खुश हैं। पंजाब में बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सरवन सिंह को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिखाये गये अद्वितीय साहस के लिए राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किये जाने पर बधाई दी और कहा कि यह पंजाब के लिए गौरव का क्षण है। जाखड़ ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिखाये गये अद्वितीय साहस के लिए पंजाब के 10 वर्षीय सरवन सिंह को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान किया गया।" यह पंजाब के लिए अत्यंत गर्व की बात है। उन्होंने कहा," मैं बच्चे को शुभकामनाएं देता हूं, और उसके देशभक्ति के जज़्बे को सलाम करता हूं। "  

अमेरिका में भारतीयों की सुरक्षा पर सवाल: पत्रकार के बयान में मंदिरों और समुदाय को निशाना बनाने की बात

वाशिंगटन अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ बढ़ती नफरत और धमकियों के बीच एक अमेरिकी पत्रकार के बयान ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े अमेरिकी पत्रकार मैट फॉर्नी ने दावा किया है कि आने वाले साल यानी 2026 में अमेरिका में भारतीयों को निशाना बनाया जाएगा और हिंदू मंदिरों पर हमले हो सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने नस्लवादी और जहरीली टिप्पणी करते हुए कहा कि सभी भारतीयों को अमेरिका से डिपोर्ट कर देना चाहिए। अमेरिकी पत्रकार ने कहा है कि भारतीय-अमेरिकियों की जान बचाने और देश में सौहार्द बनाए रखने के लिए सभी को भारत वापस भेज दिया जाना चाहिए। मैट फॉर्नी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि वर्ष 2026 में अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नफरत चरम पर पहुंच सकती है और भारतीय मूल के लोगों, उनके घरों, दुकानों और मंदिरों पर हमले हो सकते हैं। फॉर्नी ने लिखा, "हमें DEI करना चाहिए: हर भारतीय को डिपोर्ट करो।" हालांकि, भारी विरोध के बाद उन्होंने यह पोस्ट हटा ली है। फॉर्नी ने खुद को “अमेरिका में शांति चाहने वाला” बताते हुए यह दावा किया कि भारतीयों को देश से बाहर भेजना ही इस नफरत का समाधान है। उन्होंने अपने पोस्ट में “Deport Every Indian” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसे भारतीयों के खिलाफ नफरती बयान माना जा रहा है। पहले भी दे चुके हैं भारत विरोधी नफरत भरे बयान मैट फॉर्नी एक अमेरिकी कॉलमनिस्ट, लेखक और पत्रकार हैं, जिनका X जैसी सोशल मीडिया साइट्स पर भारत विरोधी नफरत भरे बयान फैलाने और उन्हें डिपोर्ट करने का आह्वान करने का इतिहास रहा है। उन्हें ऐसी ही हरकत की वजह से एक अमेरिकी मीडिया संस्थान से नौकरी से भी निकाला जा चुका है। हाल ही में उन्होंने एक भारतीय-अमेरिकी महिला अधिकारी की नियुक्ति पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। विशेषज्ञों और शोध संस्थानों के अनुसार, अमेरिका में खासकर भरतीय मूल के लोगों और H-1B वीजा कार्यक्रम को लेकर हाल के दिनों में नकारात्मक बयानबाजी बढ़ी है। भारतीयों के खिलाफ घृणास्पद पोस्ट बढ़े हैं एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में सोशल मीडिया पर भारतीयों के खिलाफ नस्लवादी और घृणास्पद पोस्ट्स की संख्या में तेजी आई है। नवंबर 2025 की CNN रिपोर्ट के अनुसार, सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट के रिसर्चर्स ने पिछले एक साल में X पर भारत विरोधी भावना में बढ़ोतरी दर्ज की है। रिपोर्ट के अनुसार, सेंटर ने अक्टूबर में भारतीयों और भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ नस्लवाद और ज़ेनोफ़ोबिया को बढ़ावा देने वाली लगभग 2,700 पोस्ट रिकॉर्ड कीं हैं। फॉर्नी की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया फॉर्नी की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई लोगों ने इसे हिंसा भड़काने वाला बयान बताया है और अमेरिकी जांच एजेंसियों से कार्रवाई की मांग की है। कुछ यूजर्स ने भारत के विदेश मंत्रालय को भी टैग कर इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। इस पूरे मामले ने अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा और बढ़ती नस्लीय नफरत को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

चुनाव से पहले बड़ा मौका: वोटर लिस्ट विवाद पर SIR की सुनवाई शुरू, 32 लाख मतदाता हो सकते हैं शामिल

कोलकाता  पश्चिम बंगाल में भी एसआईआर की प्रक्रिया जारी है और शनिवार से लोगों की शिकायतों और दावों पर सुनवाई होने जा रही है। इसके लिए राज्य में 3234 केंद्र स्थापित किए गए हैं। 2022 की वोटर लिस्ट से जिन लोगों का लिंक नहीं मिला है, उन 32 लाख लोगों को पहले चरण में बुलाया गया है। वोटर 12 में से कोई भी एक डॉक्युमेंट जमा करके अपना नाम लिस्ट में जुड़वा सकते हैं। इसमें आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र भी शामिल है। हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि केवल आधार से लिस्ट में नाम नहीं जुड़ेगा। उसके साथ कोई सपोर्टिंग डॉक्युमेंट भी देना होगा।   अधिकारियों ने कहा है कि बिहार में बनाई गई लिस्ट को भी वैध दस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया जाएगा। हालांकि किसी तरह के फर्जी दस्तावेज देने पर सजा भी हो सकती है। राज्य में निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा है कि सुनवाई की सारी तैयारियों हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि 4500 माइक्रो ऑब्जर्वर्स की देखरेख में यह पूरी प्रक्रिया संपन्न होगी। वहीं सेंटर पर सुनवाई के लिए केवल ईआरओ, बीएलओ और एआरओ को ही अनुमति दी गई है। सुनवाई केंद्रों पर जरूरी प्रक्रिया हो जाने के बाद कोई भी बदलाव नहीं किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना मुख्य उद्देश्य है। चुनाव आयोग ने हर ईआरओ के लिए 150 मामलों की सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य तय कर दिया है। सुनवाई की शुरुआत उन अनमैप्ड वोटर्स की सुनवाई की जाएगी जिनका नाम 2002 की वोटर लिस्ट से लिंक नहीं है। पश्चिम बंगाल में 2002 में भी एसआईआर किया गया था।एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान कई तरह के संदिग्ध मामले सामने आए हैं। दस्तावेजों के मुताबिक जो लोग 15 साल की उम्र से पहले ही पिता बन गए हैं. 40 साल की उम्र में दादा बन गए हैं, या फिर माता और पिता के नाम एक ही हैं, उनकी पहचान की गई है। 16 दिसंबर को वोटर लिस्ट पब्लिश की गई थी। वही फाइनल लिस्ट 14 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव का भी ऐलान कर सकता है।  

क्राइम पर करारा प्रहार: दिल्ली में एक रात में 285 गिरफ्तारी, पुलिस का सख्त संदेश

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस ने नए साल के जश्न से पहले शुक्रवार को रातभर राजधानी में बड़ा ऑपरेशन चलाया। इस कार्रवाई में संगठित अपराध को रोकने के लिए सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार करने के साथ ही हथियार, ड्रग्स और बड़ी मात्रा में कैश जब्त किया गया है। साउथ ईस्ट दिल्ली पुलिस द्वारा ‘ऑपरेशन आघात 3.0’ के तहत की गई इस कार्रवाई में पूरी रात कई जगहों पर एक साथ छापेमारी की गई। डीसीपी साउथ ईस्ट हेमंत तिवारी ने बताया कि ऑपरेशन आघात 3.0 के तहत एक्साइज एक्ट, एनडीपीएस एक्ट और गैंबलिंग एक्ट के तहत 285 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। निवारक कार्रवाई के तहत 504 लोगों को पकड़ा गया। 116 बैड कैरेक्टर (BCs) को पकड़ा गया है। 10 प्रॉपर्टी चोरों और पांच ऑटो-लिफ्टरों को गिरफ्तार किया गया है। क्या-क्या हुआ बरामद 21 सीएमपी, 20 जिंदा कारतूस और 27 चाकू जब्त किए गए। 12,258 क्वार्टर अवैध शराब बरामद की गई। 6.01 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया। जुआ खेलने वालों से 2,30,990 रुपये जब्त किए गए। 310 मोबाइल फोन बरामद किए गए। 231 दोपहिया वाहन और 1 चार पहिया वाहन जब्त/बरामद किए गए। निवारक उपायों के तहत 1,306 लोगों को पकड़ा गया। दक्षिण पूर्व दिल्ली में रातभर चली छापेमारी पुलिस टीमों ने ‘ऑपरेशन आघात 3.0’ से संगठित गिरोहों से जुड़े संदिग्धों को निशाना बनाकर साउथ ईस्ट दिल्ली के संवेदनशील इलाकों और क्राइम हॉटस्पॉट वाली जगहों पर बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया। इस ऑपरेशन के दौरान संगठित अपराध, सड़क पर अपराध करने वालों और बार-बार कानून तोड़ने वालों को निशाना बनाकर 285 लोगों को गिरफ्तार किया है। कई कानूनों के तहत सैकड़ों लोग गिरफ्तार पुलिस ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान आर्म्स एक्ट, एक्साइज एक्ट, एनडीपीएस एक्ट और गैंबलिंग एक्ट के अलग-अलग प्रावधानों के तहत 285 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा नए साल की पार्टियों के दौरान संभावित अपराधों को रोकने के लिए एहतियाती कार्रवाई के तहत 504 लोगों को हिरासत में लिया गया। आदतन अपराधियों के खिलाफ खास कार्रवाई के तहत, 116 लिस्टेड बदमाशों को पकड़ा गया, जबकि पुलिस ने छापेमारी के दौरान 10 प्रॉपर्टी चोरों और पांच ऑटो-लिफ्टरों को भी गिरफ्तार किया। हथियार, कारतूस और चाकू बरामद इस ऑपरेशन में बड़ी मात्रा में सामान बरामद हुआ, जिसमें 21 देसी पिस्तौल, 20 जिंदा कारतूस और 27 चाकू शामिल हैं। पुलिस टीमों ने ड्रग्स और अवैध शराब की खेप भी जब्त की गई। चोरी किए गए सामान भी बड़े पैमाने पर बरामद कि गए। पुलिस ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान 310 मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिन्हें छीना या लूटा गया था या फिर जिनके गुम होने की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। गाड़ियां जब्त, संदिग्ध पकड़े गए पुलिस ने वाहन चोरी के नेटवर्क को बड़ा झटका देते हुए पूरे जिले में तलाशी और रोड चेकिंग के दौरान 231 दोपहिया वाहन और एक चार पहिया वाहन जब्त या बरामद किए। पुलिस ने कुल मिलाकर रातभर सर्च ऑपरेशन चलाया, चेकिंग, वेरिफिकेशन और स्थानीय खुफिया जानकारी के आधार पर टारगेटेड रेड कीं, जिसके तहत एहतियाती उपायों के तहत 1,306 लोगों को पकड़ा गया। संगठित अपराध और सार्वजनिक सुरक्षा पर ध्यान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि ‘ऑपरेशन आघात’ को त्योहारों के मौसम में सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक निवारक हमले के रूप में डिजाइन किया गया था, जब अपराध दर में पारंपरिक रूप से वृद्धि देखी जाती है। रातभर चले इस ऑपरेशन में पुलिस की कई टीमें एक साथ काम कर रही थीं, जिन्हें लोकल इंटेलिजेंस और सर्विलांस से इनपुट मिल रहे थे। पुलिस ने कहा कि इस ऑपरेशन का मकसद राजधानी में सक्रिय आपराधिक तत्वों को एक कड़ा संदेश देना था। यह ऑपरेशन इस सीजन में राजधानी में नए साल से पहले की सबसे बड़ी कोऑर्डिनेटेड कार्रवाई में से एक है।