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‘जिहाद पसंद लोगों’ पर सख्त उत्तराखंड: 550 अवैध मजारें हटाने का वीडियो खुद सीएम ने जारी किया

हल्द्वानी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि में सुनियोजित तरीके से डेमोग्राफी बदलने की कोशिश हो रही है। उन्होंने बताया कि हरी, नीली और पीली चादर ओढ़कर कब्जे की नीयत से बनाई गई करीब 550 अवैध मजारों को सरकार ने हटाया है। धामी ने कहा कि जेहाद पसंद लोग पहाड़ों पर घुसपैठ की कोशिश कर रहे हैं। जहां भी खाली या सरकारी जमीनें दिखीं, वहां अवैध बसावट करने की साजिश रची गई, लेकिन सरकार इसे किसी भी सूरत में सफल नहीं होने देगी। सीआरपीएफ समूह काठगोदाम में पूर्व अर्द्धसैनिक सम्मेलन में सीएम ने कहा कि बाहरी राज्यों के कई लोगों को अवैध रूप से उत्तराखंड के स्थायी समेत अन्य प्रमाण पत्र जारी किए गए थे, जिन पर सरकार ने तुरंत कार्रवाई की। पूरे प्रदेश में प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश दिए गए हैं। 10 हेक्टेयर भूमि मुक्त कराई उन्होंने कहा कि अवैध रूप से देवभूमि में बसे घुसपैठियों से दस हजार हेक्टेयर भूमि मुक्त कराई गई है। हल्द्वानी के वनभूलपुरा प्रकरण पर सीएम ने कहा कि अतिक्रमण मामले में जो भी फैसला आएगा, उसके लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। पूर्व में हल्द्वानी में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दंगाइयों से पाई-पाई की वसूली की गई है। जेहाद प्रेमियों को पनपने नहीं देंगे प्रदेश के सामाजिक एवं सुरक्षा मुद्दों पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में अवैध बसावट, लैंड जिहाद और अन्य गलत गतिविधियों के खिलाफ सरकार कड़े कदम उठा रही है। 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि कब्जामुक्त कराई गई है तथा 550 से अधिक अवैध संरचनाओं को ध्वस्त किया गया है। राज्य में समान नागरिक संहिता, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा-रोधी कानून और भू-कानून लागू कर सामाजिक समरसता एवं आंतरिक सुरक्षा को मजबूत किया गया है। घुसपैठिये होंगे चिह्नित मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे प्रदेश में प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश दिए गए हैं। अवैध रूप से देवभूमि में बसे घुसपैठियों से 10 हजार हेक्टेयर भूमि मुक्त कराई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी के वनभूलपुरा में अतिक्रमण को लेकर जो भी फैसला आएगा, उसके लिए सरकार की पूरी तैयारी है। सीआरपीएफ ने नक्सलवाद, धामी ने भ्रष्टाचार खत्म किया कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि सीआरपीएफ ने देश से जिस तरह नक्सलवाद को खत्म किया, उसी तरह उत्तराखंड में मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने का काम कर रहे हैं। जोशी ने कहा कि सीआरपीएफ समेत अर्धसैनिक बलों के जवानों ने नक्सलवाद को आज लगभग पूरी तरह समाप्त कर दिया है। उन्होंने उत्तराखंड की बात करते हुए कहा कि यहां पर सरकार ने भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसा है। सीएम धामी खुद सैनिक परिवार से हैं और उन्हें सैनिक के जीवन का मोल पता है। उनकी रगों में सैनिक का खून है। वह सैनिक परिवारों के लिए हमेशा ही कल्याणकारी योजनाएं शुरू करते आए हैं। हम सैनिकों के सिपाही जोशी ने कहा कि सीमा पर देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले जांबाज शहीदों के परिवार में से किसी एक को सरकारी नौकरी देने का काम धामी सरकार कर रही है। अब तक 28 लोगों को प्रदेश में नौकरी दी गई है। उन्होंने कहा कि ‘मैं और मुख्यमंत्री सैनिकों के सिपाही हैं। हम हर कदम पर उनके साथ खड़े हैं’।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया कड़ा संदेश: हुनर गोल्ड के पीड़ितों के लिए पहले 200 करोड़ जमा करना अनिवार्य

 नई दिल्ली देश के विभिन्न राज्यों में सोना और ज्वेलरी की कथित हेराफेरी के मामलों में घिरे हुनर गोल्ड कंपनी के संचालक ललित सोनी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सोनी ने देशभर में दर्ज सभी आपराधिक मामलों को एक ही राज्य में स्थानांतरित करने के लिए शीर्ष अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका सुनने से ही साफ इनकार कर दिया. CJI की कड़ी टिप्पणी: पूरे देश को ठगा और अब राहत चाहते हैं? मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सुनवाई के दौरान बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा, 'आपने इतने लोगों को ठगा है… पूरे देश को ठगा है… और अब यहां आकर मामलों के एकीकरण की मांग कर रहे हैं? क्या आप चाहते हैं कि जिसे आपने सिलिगुड़ी में धोखा दिया, वो ट्रायल के लिए मुंबई आए?'  कोर्ट ने आगे कहा कि यदि सोनी को अपनी याचिका पर सुनवाई चाहिए तो पहले वे 200 करोड़ रुपये सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करें. CJI ने स्पष्ट किया कि जब तक यह राशि जमा नहीं होती, तब तक याचिका पर कोई विचार नहीं किया जाएगा. देशभर में कई FIR, सोने की बड़ी हेराफेरी का आरोप ललित सोनी पर आरोप है कि उन्होंने अपनी कंपनी हुनर गोल्ड के ज़रिए कई राज्यों में लोगों और कॉरपोरेट संस्थाओं से सोना, ज्वेलरी और निवेश लेकर भारी पैमाने पर धोखाधड़ी की. विभिन्न राज्यों के पुलिस थानों में उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. सोनी की तरफ से दलील दी गई कि दर्जनों FIR और मुकदमों के चलते ट्रायल में व्यावहारिक दिक्कतें पैदा हो रही हैं, इसलिए सभी केस एक ही राज्य में स्थानांतरित कर दिए जाएं. लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट का रुख साफ कोर्ट ने दो टूक कहा कि पीड़ितों को ट्रायल के लिए एक ही जगह बुलाना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा. साथ ही ये भी संकेत दिया कि गंभीर आर्थिक अपराधों में आरोपी व्यक्ति 'सुविधा' के नाम पर राहत नहीं पा सकता.

महिला आतंकी नेटवर्क पर पर्दा फाश: जैश की योजना, 5000 महिलाओं की फिदायीन ट्रेनिंग और मकसद का खुलासा

नई दिल्ली  आतंकी मसूद अजहर पाकिस्तान में बैठकर लगातार जिहादी साजिशों में लगा है. वह जिहाद के नाम पर महिला आतंकियों की फौज खड़ी कर रहा है. लगातार महिला आतंकियों की संख्या में इजाफा कर रहा है. इस बीच जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग ‘जमात-उल-मुमीनात’ पर अब बड़ा खुलासा है. आतंकी मसूद अजहर ने खुद एक पोस्ट कर अपना नापाक प्लान लीक किया है. जी हां, सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जैश-ए-मोहम्मद ने अपना नापाक प्लान बता दिया है. जैश की वुमन विंग यानी जमात-उल-मुमीनात में अब तक पांच हजार जिहादी महिलाओं की भर्ती की गई है. इन महिला आतंकियों का ब्रेन वॉश कर इन्हें फिदायीन ट्रेनिंग दी जा रही है. आतंकी मसूद अजहर ने पोस्ट में लिखा कि जैसे-जैसे जैश की इस महिला विंग में महिला सदस्यों की संख्या बढ़ रही है, अब जरूरत है जिलावार जमात-उल-मुमीनात तंजीम तैयार की जाए. यानी पीओके (POK) के हर जिले में जमात-उल-मुमीनात का ऑफिस होगा, जहां भर्ती से लेकर आतंकी ट्रेनिंग पूरी होगी. आतंकी मसूद ने पोस्ट में ये भी लिखा है कि जमात उल मुमीनात में शामिल कुछ महिलाओं ने चिट्ठी लिखकर बताया कि जमात में शामिल होते ही उन्हें अपनी ज़िंदगी का मकसद मिल गया है. सोशल मीडिया पोस्ट में क्या?     आतंकी मसूद अजहर ने अपनी पोस्ट में अमेरिका की नेब्रास्का यूनिवर्सिटी का जिक्र करते हुए लिखा है कि अमेरिका की नेब्रास्का यूनिवर्सिटी ने पाकिस्तान में जिहादी माहौल पैदा किया. हालांकि यह ऐसा झूठ है जो शायद शैतान को भी न सूझे, लेकिन हमारे कई कॉलमिस्ट, कुछ मंत्री और कुछ बुद्धिजीवी इसे सच मान बैठे हैं. अजीब बात है कि एक यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम ने लाखों मुजाहिद खड़े कर दिए…और एक सुपर पावर को हरा दिया? आतंकी मसूद अजहर का क्या मकसद उसने अपनी पोस्ट में आगे लिखा है, ‘अल्लाह तआला हर मुसलमान को अपनी ज़िंदगी का मकसद समझने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए. आज कुछ बातें संक्षेप में पेश कर रहा हूं… अगर मौका मिला तो आने वाले दिनों में इनकी तफसील भी लिखूंगा, इंशाअल्लाह.’ दरअसल, अपने पोस्ट के जरिए आतंकी मसूद अजहर महिला आतंकियों की फौज का गुनगान कर रहा है. वह क्लास में महिला आतंकियों को सुसाइड बॉम्बर बनने की ट्रेनिंग दे रहा है. क्या है जैश का महिला विंग अब सवाल है कि आखिर जैश की यह महिला विंग क्या है. दरअसल, आतंकी संगठन जैश की महिला विंग का नाम है जमात-उल-मोमीनात. इस विंग में आंतकवादी पतियों की विधवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर महिला को बहला-फुसला कर शामिल किया जा रहा है. उन्हें जिहाद के लिए बरगलाया जा रहा है. उन्हें बहला-फुसला कर जिंदगी का वह मकसद बताया जा रहा है, जो कहीं से उनकी जिंदगी के लिए सही नहीं है. बीते कुछ दिनों से पाकिस्तान बेस्ड इस आतंकी संगठन में महिलाओं को भारत विरोधी गतिविधियों के लिए ट्रेन किया जा रहा था. उन्हें डिजिटल क्लासेस में हिंदू महिलाओं के खिलाफ हेट स्पीच दी जा रही थी और यही नहीं पुरुष आंतकवादियों की तरह महिलाओं को भी फिदायीन बनने के लिए फिजिकल ट्रेनिंग भी दी जा रही थी. किसके हाथ में कमान खबरों की मानें तो आतंकी मसूद अजहर ने अपनी बहन सादिया अजहर को जैश की महिला विंग का प्रमुख बनाया है. दूसरी बहन समायरा अजहर (उर्फ उम्मे मसूद) और पुलवामा हमलावर उमर फारूक की पत्नी अफीरा फारूक ऑनलाइन भर्ती और प्रचार का काम संभाल रही हैं. यह नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए महिलाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जा रहा है. उसके इस वीडियो के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं. महिलाओं को शामिल कर जैश खुफिया जानकारी जुटाने, फंडिंग और हमलों में नई रणनीति अपना रहा है.

पुतिन की सुपर-सिक्योर Aurus Senat भारत आ रही—जानें कैसे बनी यह कार दुनिया की सबसे अभेद्य सवारी

नई दिल्ली  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को ऐतिहासिक दौरे पर भारत पहुंच रहे हैं। उनका यह दौरा कई मायनों में खास है और इस यात्रा पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। पुतिन के दौरे से पहले एक बार फिर उनका ‘अभेद्य रथ’ चर्चा में आ गया है। दरअसल रूसी राष्ट्रपति के साथ उनकी गाड़ियों का काफिला भी भारत आ रहा है, जिसमें दुनिया की सबसे सुरक्षित और सीक्रेट कार Aurus Senat भी शामिल रहेगी। बता दें कि पुतिन की यह खास बुलेटप्रूफ लिमोजिन उनके हर विदेश दौरे पर रूसी राष्ट्रपति के साथ ही यात्रा करती है। पुतिन का यह खास सुरक्षा कवच, हाल ही में चीन में हुए शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) समिट के दौरान सुर्खियों में रहा। इसकी वजह रही पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन एक साथ Aurus Senat में सफर करना। उस वक्त पुतिन ने करीब दस मिनट पीएम मोदी का गाड़ी में इंतजार किया था और दोनों नेताओं ने लगभग एक घंटे तक कार में बैठकर बातचीत की थी। इसके अलावा रूस ने 2024 में उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन को यह कार तोहफे के रूप में भी दिया था। हाई-टेक सिक्योरिटी सिस्टम से लैस Aurus Senat रूस की स्वदेशी लग्जरी लिमोजिन है, जिसे खास तौर पर राष्ट्रपति और सरकारी इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है। इसे अक्सर रसियन रॉल्स रॉयस भी कहा जाता है। यह गाड़ी प्रीमियम और पूरी तरह से हाई-टेक सिक्योरिटी सिस्टम से लैस है। इस कार से पहले पुतिन मर्सिडीज बेंज S600 गार्ड पुल्मैन का इस्तेमाल करते थे, लेकिन बाद में रूस ने विदेशी कारों की जगह अपनी खास प्रोजेक्ट के तहत बनी इस कार को अपनाया। कितनी है कीमत? पुतिन सबसे पहले इस कार में 2018 में देखे गए थे। 2021 से इसका मास प्रोडक्शन शुरू हुआ। इसका एक लिमिटेड सिविलियन वर्ज़न भी है, जिसकी हर साल सिर्फ 120 यूनिट बनाई जाती हैं। इस कार की बेस कीमत करीब 18 मिलियन रूबल यानी लगभग 2.5 करोड़ रुपये है। हालांकि पुतिन की खास आर्मर्ड वर्ज़न में कई सीक्रेट सिक्योरिटी फीचर शामिल हैं, जिसकी कीमत लगभग दोगुनी से भी ज्यादा है। क्यों कहा जाता है अभेद्य रथ? Aurus Senat को किसी भी हमले में राष्ट्रपति की जान बचाने के लिए तैयार किया गया है। यह कार पूरी तरह बुलेटप्रूफ है और हाई-कैलिबर और आर्मर-पियर्सिंग गोलियों को रोकने में सक्षम है। इसमें ड्रोन और मिसाइल अटैक प्रूफ प्रोटेक्शन भी दिया गया है। अगर कार पानी में गिर जाए तो यह तैरते हुए आगे बढ़ने की क्षमता रखती है। इसके सभी टायर बर्बाद होने के बाद भी यह हाई स्पीड में दौड़ सकती है। केबिन को केमिकल अटैक से सुरक्षित रखने के लिए इंडिपेंडेंट एयर-फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाया गया है। वहीं 4.4 लीटर का ट्विन-टर्बो V8 हाइब्रिड इंजन की मदद से यह महज 6 से 9 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की गति तक पहुंच सकता है। कार के अंदर लेदर इंटीरियर, क्लाइमेट कंट्रोल और सिक्योर कम्युनिकेशन सिस्टम की सुविधा दी गई है, जो इसे एक अल्ट्रा लग्जरी और हाई-टेक वाहन बनाते हैं।

पुतिन दिल्ली में करेंगे बड़ी डील, पश्चिम से टकराव पर चर्चा, पांच लेयर सुरक्षा के बीच भारत पहुंचे राष्ट्रपति

नई दिल्ली रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा आज से शुरू हो रही है और दिल्ली इस हाई-प्रोफाइल विजिट के लिए पूरी तरह तैयार है. यूक्रेन युद्ध के बाद यह पुतिन की पहली भारत यात्रा है, इसलिए कूटनीतिक, सुरक्षा और लॉजिस्टिक स्तर पर बेहद सख्त व्यवस्थाएं की गई हैं. शहर के कई हिस्सों में उनके स्वागत के लिए फ्लेक्स बोर्ड और रूसी झंडे लगा दिए गए हैं, जबकि ट्रैफिक डायवर्जन और सुरक्षा कवच पहले से लागू कर दिए गए हैं. पुतिन की यात्रा के कारण ट्रैफिक डायवर्जन पुतिन आज शाम दिल्ली पहुंचेंगे और एयरपोर्ट से सीधे सरदार पटेल मार्ग स्थित होटल जाएंगे. इस दौरान एनएच–S, धौला कुआं और दिल्ली कैंट के आसपास ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है. शाम को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें प्राइवेट डिनर पर होस्ट करेंगे, जिसके कारण सरदार पटेल मार्ग, पंचशील मार्ग और शांति पथ के आसपास भी वाहनों की आवाजाही धीमी रहेगी. दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन दावा किया है कि ट्रैफिक को लंबी अवधि तक ब्लॉक नहीं रखा जाएगा. शुक्रवार को हालात और चुनौतीपूर्ण होंगे क्योंकि पुतिन का पूरा दिन लगातार कार्यक्रमों से भरा है. सुबह वह राजघाट जाएंगे, इसके बाद हैदराबाद हाउस में औपचारिक बैठकें होंगी. दोपहर में भारत मंडपम् में कार्यक्रम तय है, जबकि शाम को राष्ट्रपति भवन में स्टेट बैंक्वेट का आयोजन होगा. इन गतिविधियों के चलते राजघाट, आईटीओ, रिंग रोड, तिलक मार्ग, इंडिया गेट, भैरो रोड, मथुरा रोड, मंडी हाउस और दिल्ली गेट जैसे इलाकों में ट्रैफिक रुक-रुक कर चलता रह सकता है. जरूरत पड़ने पर कुछ मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट अस्थायी रूप से रोकी जा सकती है. पुतिन की सिक्योरिटी कैसी होगी? इधर सुरक्षा इंतजाम भी अपनी चरमसीमा पर हैं. पुतिन की हर विदेश यात्रा की तरह इस दौरे में भी उनकी सुरक्षा के लिए मल्टी-लेयर कवच तैयार किया गया है. पांच-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था में NSG कमांडो, स्नाइपर्स, जैमर, ड्रोन सर्विलांस और AI आधारित निगरानी तकनीक तैनात की गई है. महत्वपूर्ण जगहों पर हाई-टेक फेशियल रिकग्निशन कैमरे लगाए गए हैं. 40 से ज्यादा रूसी सुरक्षा अधिकारी दिल्ली पहुंचकर NSG और दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर काफिले की हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं. पीएम मोदी के साथ बैठक के दौरान एसपीजी का विशेष सुरक्षा घेरा भी सक्रिय रहेगा. इस यात्रा को भारत-रूस संबंधों के लिए अहम मोड़ माना जा रहा है. शुक्रवार को होने वाली 23वीं वार्षिक शिखर बैठक में रक्षा सहयोग, ऊर्जा, व्यापार और अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होनी है. राजधानी में तैयारियों की रफ्तार और सुरक्षा का स्तर बताता है कि यह यात्रा सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है. रूस को 10 लाख मजदूरों की जरूरत, पुतिन दिल्‍ली में करेंगे बड़ी डील इस दौरे पर पुतिन भारत के साथ मजदूरों को लेकर इजरायल की तरह से ही बड़ी डील कर सकते हैं। दोनों देश सामाजिक और मजदूरों से जुड़े मुद्दे पर सहयोग करेंगे। रूस की योजना है कि 10 लाख विदेशी मजदूरों की भर्ती की जाए। इसमें भारत भी शामिल है। रूस लेबर म‍िनिस्‍ट्री का मानना है कि साल 2030 तक देश में मजदूरों की यह कमी 31 लाख तक पहुंच सकती है। विश्‍लेषकों का कहना है कि रूसी के हजारों युवा यूक्रेन युद्ध में मारे जा चुके हैं और देश के फिर से निर्माण के लिए अब लाखों लोगों की जरूरत है। वह भी तब जब रूस में आबादी कम हो रही है और लोग बच्‍चे कम पैदा कर रहे हैं। रूसी राष्‍ट्रपति ने देश में बच्‍चे पैदा करने पर भारी आर्थिक सहायता मुहैया कराने का ऐलान किया है। रूस में अब तक मध्‍य एशिया के देशों से लाखों रूसी बोलने वाले लोग काम करने जाते रहे हैं लेकिन इससे मास्‍को को सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस होता रहा है। यही वजह है कि रूस अब 7 लाख से ज्‍यादा मध्‍य एशिया के विदेशी मजदूरों से मुक्ति पाना चाहता है। इस प्रक्रिया की शुरुआत तब तेज हुई जब मास्‍को में मार्च 2024 में आतंकी हमला हुआ। पश्चिम से टकराव गहरा होगा? PM Modi से इन मुद्दों पर होगी चर्चा अमेरिका का दबाव और रूस के साथ मजबूरी यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत पर अमेरिका लगातार दबाव बना रहा है कि वह रूस से तेल आयात घटाए और अमेरिकी उत्पादों व रक्षा उपकरणों के लिए अपने बाजार खोले. वहीं दूसरी तरफ रूस भारत के लिए सस्ता तेल, हथियारों की सप्लाई और रणनीतिक सुरक्षा का बड़ा स्रोत बना हुआ है. GTRI के मुताबिक, “पुतिन की यह यात्रा शीत युद्ध की याद में की जा रही कोई औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि यह जोखिम, सप्लाई चेन और आर्थिक सुरक्षा को लेकर सीधी बातचीत है. यह किसी एक पक्ष को चुनने की नहीं, बल्कि टूटती वैश्विक व्यवस्था में संतुलन बनाए रखने की रणनीति है.” भारत-रूस रिश्तों की ऐतिहासिक मजबूती भारत और रूस की दोस्ती की जड़ें शीत युद्ध के दौर तक फैली हैं. 1971 के भारत-पाक युद्ध के समय अमेरिका ने पाकिस्तान का साथ दिया और USS एंटरप्राइज भेजा. तब सोवियत संघ ने भारत को हथियार, कूटनीतिक सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र में समर्थन दिया. 1962 के चीन युद्ध के बाद भी रूस भारत के साथ खड़ा रहा. 1998 के परमाणु परीक्षण के बाद जब पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए, तब भी रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार बना रहा. आज भी भारत के 60 से 70% सैन्य प्लेटफॉर्म रूसी तकनीक पर आधारित हैं। तीन स्तंभों पर टिका भारत-रूस रिश्ता GTRI के अनुसार, आज भारत-रूस संबंध तीन मुख्य स्तंभों पर टिके हैं— 1- ऊर्जा (Energy)     रूस अब भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है.     2024 में रूस से भारत की कुल तेल खरीद का हिस्सा 37% से ज्यादा रहा.     2021 में जहां भारत ने रूस से सिर्फ 2.3 अरब डॉलर का तेल खरीदा था.     वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 52.7 अरब डॉलर पहुंच गया.     यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूसी तेल सस्ते दामों पर एशियाई बाजारों की ओर मुड़ गया, जिससे भारत को भारी फायदा हुआ.  2- रक्षा (Defence) … Read more

पाकिस्तान के आर्थिक संकट में एयरलाइंस की बिक्री, मुनीर के ‘फौजी’ बने संभावित खरीदार

इस्लामाबाद  पाकिस्तान की राष्ट्रीय एयरलाइन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) की बिक्री जल्द ही होने वाली है. यह कदम अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा पाकिस्तान को दिए गए 7 अरब डॉलर के आर्थिक पैकेज की शर्तों के तहत उठाया जा रहा है. पाकिस्तान फाइनेंशियल क्राइसिस में फंसा हुआ है और कई बार कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज ले लिया है. इस कारण से पाकिस्तान को अपने राष्ट्रीय एयरलाइन को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. फौजी कंपनी 'फर्टिलाइजर' भी है शामिल PIA की बिक्री के लिए चार कंपनियों को सबसे ऊपर रखा गया है. इनमें फौजी फर्टिलाइजर कंपनी लिमिटेड भी शामिल है, जो पाकिस्तान की सैन्य कंट्रोल फौजी फाउंडेशन का हिस्सा है. बाकी तीन कंपनियों में लकी सीमेंट कंसोर्टियम, आरिफ हबीब कॉर्पोरेशन कंसोर्टियम और एयर ब्लू लिमिटेड का नाम सामने आ रहा है. बिक्री की बोली 23 दिसंबर, 2025 को होगी और इसे सभी मीडिया पर लाइव दिखाया जाएगा. 2 दशकों में सबसे बड़ी निजीकरण योजना PIA की बात करें तो ये पिछले 2 दशकों में पाकिस्तान की सबसे बड़ी निजीकरण योजना है. सरकार ने बताया कि इस साल कुल 86 अरब रुपये की बिक्री का प्लान है. PIA की पिछली बोली में केवल 15% राशि सरकार के पास गई थी, जबकि बाकी का पैसा एयरलाइन में ही निवेश कर दिया गया था. नकली लाइसेंस के साथ पायलट भर रहे हैं उड़ान PIA पिछले कई सालों से गंभीर संकट में है. 2020 में यह सामने आया कि एयरलाइन के 30% पायलट नकली या संदिग्ध लाइसेंस के साथ उड़ान भर रहे थे. इस कारण 262 पायलटों को निलंबित किया गया और ऑपरेशन में बड़ी बाधाएं आईं थी. यूरोपीय संघ, अमेरिका और ब्रिटेन ने सुरक्षा कारणों से PIA की उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया था. इन प्रतिबंधों के कारण एयरलाइन को करोड़ों डॉलर का नुकसान हो रहा था. 200 अरब से अधिक है कर्ज इतना ही नहीं पाकिस्तान सरकार में अंदरूनी समस्याएं भी गंभीर हैं, जैसे अधिक कर्मचारियों, राजनीतिक नियुक्तियों और nepotism ने एयरलाइन के खर्च और अच्छे काम करने वाले लोगों को प्रभावित करने का काम किया है. साथ ही 2020 में PIA Flight 8303 के क्रैश ने पाकिस्तान ने सुरक्षा जांच और फ्लीट मेंटेनेंस की जरूरत बढ़ा दी है. इन सभी कारणों से एयरलाइन पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है और नुकसान पाकिस्तानी रुपयों में 200 अरब से अधिक हो गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि PIA की परेशानियां केवल एक घटना के कारण नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियां भी इसका परिणाम हो सकती हैं. अब सरकार और IMF की शर्तों के तहत एयरलाइन को बेचकर उसकी फाइनेंशियल स्थिति को सुधारने का काम करेगी. 

सुप्रीम कोर्ट ने तय की सीमा: बिना पूछे महिला की तस्वीर लेना कब होगा गैरकानूनी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला का वीडियो रिकॉर्ड करने के मामले में आरोपी को राहत दी है। कोर्ट का कहना है कि अगर किसी महिला का फोटो या वीडियो ऐसे समय में लिया जाता है, जहां वह निजी गतिविधि में नहीं है तो उसे IPC की धारा 354सी के तहत वॉयरिज्म का दोषी नहीं माना जा सकता। साथ ही अदालत ने कहा है कि चार्जशीट दाखिल करते समय पुलिस और आरोप तय करते समय ट्रायल कोर्ट को सावधान रहना चाहिए था। वॉयरिज्म का मतलब है किसी महिला को तब चुपके से देखना या ताक झांक करना, जब वह निजी गतिविधियों में शामिल हो। यह अपराध है। मामले पर सुनवाई कर रहे जस्टिस एनके सिंह और जस्टिस मनमोहन ने आरोपी के खिलाफ केस बंद कर दिया। उसके खिलाफ वॉयरिज्म के आरोप लगे थे। आरोप थे कि उसने महिला का वीडियो तब रिकॉर्ड किया था, जब वह विवादित संपत्ति में प्रवेश कर रही थी। कोर्ट ने जांच की थी कि एफआईआर और चार्जशीट में वॉयरिज्म का कोई अपराध बताया गया है या नहीं। कोर्ट ने समझाया कि वॉयरिज्म तब लागू होता है, जब निजी गतिविधि में महिला को चुपके से देखा जा रहा हो या रिकॉर्ड किया जा रहा हो। कोर्ट ने पाया कि इस मामले में ऐसा कोई प्राइवेक्ट एक्ट नहीं है। कोर्ट ने पाया कि हाईकोर्ट ने भी माना है कि एफआईआर से वॉयरिज्म का पता नहीं चला है। हालांकि, उच्च न्यायालय ने फिर भी आरोपी अपीलकर्ता को डिस्चार्ज करने से इनकार कर दिया था, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति ली। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान गलत तरीके से रोके जाने के आरोपों की भी जांच की गई। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को किराएदार नहीं दिखाया गया था। साथ ही कोर्ट ने कहा कि पेश जानकारी से पता चलता है कि वह होने वाले किराएदार के तौर पर प्रॉपर्टी देखने आई थी। कोर्ट ने पाया कि एफाईआर पूरी तरह से संपत्ति को लेकर परिवार के विवाद से जुड़ी है। अदालत ने कहा कि अगर मुद्दों को क्रिमिनल केस के बजाए सिविल उपायों से सुलझाया जाना चाहिए था। बेंच ने उन मामलों में चार्जशीट दाखिल करने पर नाराजगी जाहिर की, जिनमें पक्का शक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इसके कारण पूरे आपराधिक न्याय व्यवस्था पर दबाव पड़ता है। क्या था मामला यह मामला कोलकाता के सॉल्ट लेक की एक रिहायशी संपत्ति का है, जिसे लेकर दो भाइयों में लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस मामले में आरोपी तुहिन कुमार बिस्वास सह मालिक का बेटा और संपत्ति को लेकर हुए झगड़े के चलते ही यह एफआईआर दाखिल की गई थी। साल 2018 में आरोपी के पिता ने अपने भाई के खिलाफ सिविल सूट दाखिल किया था। 29 नवंबर 2018 को सिविल कोर्ट ने दोनों पक्षों को साझा अधिकार रखने और कोई थर्ड पार्टी राइट्स नहीं बनाने के निर्देश दिए थे। यह आदेश उस समय भी लागू था, जब शिकायतकर्ता ममता अग्रवाल मार्च 2020 में संपत्ति पर पहुंची थीं। इसके बाद अग्रवाल ने आरोपी के रिश्तेदार के कहने पर एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाए थे कि आरोपी ने उन्हें जबरन रोका, धमकाया और बगैर उनकी सहमति के फोटो वीडियो बनाए। 16 अगस्त 2020 को पुलिस ने 354सी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया। ट्रायल कोर्ट और कलकत्ता हाईकोर्ट की तरफ से डिस्चार्ज करने से इनकार किए जाने के बाद आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

आतंकी नेटवर्क पर NIA की कड़ी मार, दो राज्यों में चला एक साथ सर्च ऑपरेशन

 नई दिल्ली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई शुरू करते हुए बिहार और हरियाणा में एक बड़ा तलाशी अभियान चलाया है. यह मामला आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया) और अन्य प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से जुड़ी चल रही आतंकी साजिश की जांच से संबंधित है. इस मामले को एनआईए की पटना शाखा ने दर्ज किया था. यह जांच भारत में आतंकवादी कृत्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कट्टरता, भर्ती और फंडिंग गतिविधियों पर केंद्रित है.  केस 2025 की शुरुआत में शुरू किया गया था, जिसमें एफआईआर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की प्रासंगिक धाराओं के तहत दर्ज की गई थी. एनआईए ने हरियाणा और बिहार को मिलाकर कुल 22 स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया. तलाशी का मकसद मामले से जुड़े सबूत और संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाना था. एफआईआर आतंकवाद को बढ़ावा देने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गई थी. अहम सामग्री मिलने की संभावना… तलाशी के दौरान एनआईए को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और अन्य सामग्री मिलने की संभावना है. ये वस्तुएं आईएसआईएस से जुड़े इस आतंकी साजिश की जांच में महत्वपूर्ण सबूत प्रदान कर सकती हैं, जिससे कट्टरता, भर्ती और फंडिंग नेटवर्क को समझने में मदद मिलेगी.

अब घर बैठे बदलें आधार में मोबाइल नंबर, ये है पूरा ऑनलाइन प्रोसेस

नई दिल्ली आधार कार्ड आज हर भारतवासी के लिए उनकी पहचान बताने का सबसे जरूरी दस्तावेज है। आपको चाहे बैंक से जुड़ा कोई काम करवाना हो या कोई सरकारी काम करवाना हो, हर जगह आधार कार्ड की जरूरत पड़ती है। अगर आपके आधार कार्ड में मोबाइल नंबर गलत प्रिंट हो गया तो आप ये सब काम घर बैठे आसानी से कर सकते हैं। दरअसल, UIDAI ने आधार से संबंधित कई सेवाओं को और आसान बना दिया है। अब आप घर बैठे आधार कार्ड पर मोबाइल नंबर बदल सकेंगे। सरकार ने नए आधार ऐप में इस सुविधा को शुरू कर दिया है। UIDAI ने इसकी घोषणा की है। इन बदलावों के लिए आधार कार्डधारक को किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी। बस आधार ऐप पर OTP वेरिफिकेशन और फेस ऑथेंटिकेशन से मोबाइल नंबर चेंज हो जाएगा। यूजर अपना चेहरा स्कैन करते ही ऐप के भीतर से आधार से लिंक मोबाइल नंबर को खुद अपडेट कर पाएंगे। ऐसे बदले मोबाइल नंबर     सबसे पहले यूजर्स AADHAAR ऐप डाउनलोड करें।     फिर अपना 12-डिजिट आधार नंबर और नया मोबाइल नंबर डालना होगा।     रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP जाएगा, वेरिफिकेशन करना होगा।     फिर फेस स्मार्टफोन कैमरे से फेस ऑथेंटिकेशन पूरा करना होगा।     अब आपको 75 रुपये की पेमेंट करनी होगी और प्रोसेस पूरी हो जाएगी। बदलाव का उद्देश्य UIDAI के अनुसार, इन नए नियमों का मकसद आधार सेवाओं को डिजिटल, तेज और अधिक सुलभ बनाना है ताकि हर नागरिक अपने दस्तावेज़ों को बिना किसी परेशानी के अपडेट कर सके। वहीं, पता, नाम और ईमेल आईडी भी अपडेट करने की सुविधा जल्द शुरू होगी।

एंटी-ड्रोन गन्स से लेकर फेस रिकग्निशन तक—भारत में पुतिन की सुरक्षा होगी फ़ुल हाई-टेक

 नई दिल्ली रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के चार साल बाद भारत दौरे को लेकर दिल्ली पूरी तरह सतर्क हो गई है. 4-5 दिसंबर को होने वाले इस दो दिवसीय दौरे के लिए राजधानी को किले में बदल दिया गया है. लगभग 130 सदस्यीय रूसी प्रतिनिधिमंडल के साथ पुतिन के आने से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. दिल्ली पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां, पैरामिलिट्री फोर्सेस और रूसी स्पेशल फोर्सेस मिलकर मल्टी-लेयर सिक्योरिटी रिंग तैयार कर चुकी हैं. हाल ही में दिल्ली में हुए ब्लास्ट की घटना के बाद सुरक्षा पहले से ही हाई अलर्ट पर थी, अब पुतिन के दौरे के लिए अतिरिक्त सावधानियां बरती जा रही हैं.   पुतिन का दौरा: क्या है प्लान? पुतिन का यह दौरा भारत-रूस के 23वें वार्षिक समिट के लिए है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्योते पर वे 4 दिसंबर को दिल्ली पहुंचेंगे. पहले दिन शाम को पीएम मोदी के साथ प्राइवेट डिनर होगा, उसके बाद द्विपक्षीय बातचीत. 5 दिसंबर को बिजनेस मीटिंग्स और स्टेट बैनक्वेट (राजकीय भोज) का कार्यक्रम है. एजेंडा में रक्षा, ऊर्जा, स्पेस और ट्रेड पर फोकस होगा. रूस S-400 मिसाइल सिस्टम की नई डील, Su-57 फाइटर जेट्स और तेल निर्यात बढ़ाने की बात करेगा. यह दौरा यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन का पहला भारत दौरा है, जो दोनों देशों की दोस्ती को मजबूत करेगा. सुरक्षा का मल्टी-लेयर जाल: कोई चूक नहीं होगी दिल्ली को हाई सिक्योरिटी जोन बना दिया गया है. रूसी एडवांस सिक्योरिटी टीम के 50 से ज्यादा सदस्य पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं. उन्होंने रूट्स, वेन्यूज और पूरी सिक्योरिटी प्लानिंग चेक की है. रूसी स्पेशल फोर्सेस आंतरिक सर्कल में रहेंगी, जबकि भारतीय फोर्सेस के साथ तालमेल बिठाएंगी.    भारतीय एजेंसियां: दिल्ली पुलिस, सेंट्रल सिक्योरिटी, पैरामिलिट्री और एनएसजी कमांडोज मुख्य भूमिका निभाएंगे. एसडब्ल्यूएटी टीम्स, एंटी-टेरर स्क्वॉड्स और क्विक रिएक्शन फोर्सेस को रणनीतिक जगहों पर तैनात किया गया है. ये तुरंत किसी भी खतरे का जवाब देंगी.  रूसी सिक्योरिटी: पुतिन की पर्सनल सिक्योरिटी में 50+ जवान हैं. उनका खाना रूस से ही आएगा. कई चेक के बाद ही परोसा जाएगा. उनके साथ पोर्टेबल सिक्योरिटी किट भी है, जो कार और होटल में रहेगी.     ट्रैफिक और एरिया कंट्रोल: दिल्ली पुलिस के टॉप ऑफिसर्स ट्रैफिक मैनेजमेंट और एरिया सैनिटाइजेशन देखेंगे. पुतिन के कन्वॉय के रास्ते पर ट्रैफिक डायवर्जन होगा लेकिन आम लोगों को कम परेशानी हो, इसके लिए एडवाइजरी जारी की जाएगी.  सभी जगहों को पहले से साफ-सुथरा और सुरक्षित बनाया जा रहा है. पुतिन के ठहरने की जगह की डिटेल्स सिक्योरिटी कारणों से गुप्त रखी गई हैं. टेक्नोलॉजी से निगरानी: ड्रोन, सीसीटीवी और एंटी-ड्रोन गन्स सुरक्षा सिर्फ इंसानों पर नहीं, टेक्नोलॉजी पर भी निर्भर है. मिनट-टू-मिनट रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं…     एंटी-ड्रोन गन्स: हवाई खतरे से बचाव के लिए ड्रोन को मार गिराने वाली गन्स तैनात.       मूविंग ड्रोन सर्विलांस: हवा में ड्रोन उड़ाकर लगातार नजर रखी जा रही है.       सीसीटीवी और सिग्नल मॉनिटरिंग: रूसी डेलिगेशन पर एरियल, सिग्नल और ग्राउंड लेवल की निगरानी. फेस रिकग्निशन कैमरे कन्वॉय को ट्रैक करेंगे. दिल्ली पुलिस कंट्रोल रूम में 24×7 मॉनिटरिंग डेस्क बनी है. सभी एजेंसियां रीयल-टाइम कोऑर्डिनेशन करेंगी, ताकि कोई गलती न हो. हाल के दिल्ली ब्लास्ट के बाद ये इंतजाम और सख्त हो गए हैं.  हाल के ब्लास्ट का असर: अतिरिक्त सावधानियां नवंबर 2025 में दिल्ली में हुए ब्लास्ट ने सुरक्षा एजेंसियों को और अलर्ट कर दिया. उसके बाद से ही हाई अलर्ट था, लेकिन पुतिन के दौरे के लिए दो दिनों के लिए अतिरिक्त प्रोटोकॉल लागू किए गए. खुफिया एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे पर नजर रख रही हैं. विशेषज्ञ कहते हैं, पुतिन की सिक्योरिटी दुनिया की सबसे सख्त है, इसलिए भारत-रूस का संयुक्त प्रयास फूलप्रूफ होगा.  मजबूत दोस्ती का संदेश यह दौरा भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देगा. रक्षा में Su-57 जेट्स, ऊर्जा में तेल डील और ट्रेड में नई संभावनाएं खुलेंगी. लेकिन सुरक्षा पहले, इसलिए दिल्ली किले जैसी हो गई है. पुतिन के आने पर सबकी नजरें टिकी हैं. क्या होगा बड़ा ऐलान? जल्द पता चलेगा.